सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) वित्तपोषण, बुनियादी सुविधाओं के डिजाइन और विकास में सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बीच एक साझेदारी को दर्शाता है। इसमें सरकारी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की साझेदारी शामिल होती है।
एक पीपीपी का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र दोनों के धन, विशेषज्ञता और अनुभव को एक जगह करना है।
रेलवे, सड़क, हवाई अड्डों, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, पर्यटन और शहरी विकास के रूप में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं जैसे कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ सफल पीपीपी परियोजनाएँ शुरू की गयी हैं।
सरकारी क्षेत्र व्यवसाय का ऐसा क्षेत्र होता है जिसका सामाजिक विकास के लिए माल तथा सेवाऐं प्रदान करने के लिए आंशिक रूप से तथा पूर्णतया स्वामित्व तथा नियंत्रण सरकार के पास होता है।
निजी क्षेत्र अर्थव्यवस्था के उस क्षेत्र को संदर्भित करता है जहाँ स्वामित्वता तथा प्रबंधन किसी निजी व्यक्ति के हाथ में होता है तथा इसमें व्यक्तिगत लाभ के लिए लाभ कमाया जाता है।
एक निजी क्षेत्र के उद्यम या एक निजी उद्यम एक ऐसा उद्यम होता है जिसे किसी एक व्यक्ति द्वारा या व्यक्तियों के एक किसी समूह द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित किया जाता है।
संयुक्त उद्यम।
बहुराष्ट्रीय कंपनी।
बहुराष्ट्रीय निगम बाजार में नए उत्पादों और नई जीवन शैली को प्रस्तुत करते हैं। बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद और कम कीमतें देश का स्तर बढ़ाने में मदद करती हैं।
एक वैश्विक उद्यम का एक उद्देश्य मेजबान देशों में श्रम और परिवहन लागत की कम लागत का लाभ लेना होता है।
विकासशील देशों में तेजी से आद्यौगिकीकरण के लिए भारी पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है। वे पूँजी की कमी की वजह से बचत की कम दर से पीडित होते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास भारी पूँजी संसाधन होते हैं। वे पूंजी निर्माण को बढ़ावा देने और परियोजना के सुदृढ़ चयन को सुनिश्चित करते हैं।
सार्वजनिक उद्यम सरकार में तथा सरकार द्वारा नियंत्रित सभी औद्योगिक और वाणिज्यिक उपक्रमों को दर्शाता है।
ए.एच. हैन्सन के अनुसार, ‘‘सार्वजनिक उपक्रम से आशय सरकार के स्वामित्व एवं संचालन के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक, कृषि, वित्तीय एवं वाणिज्यक संस्थानों से है।’’
बीमा निम्नलिखित काय करता है:-
1. संरक्षण:
बीमा का मुख्य कार्य उस पाॅलिसी के तहत बीमित व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करना होता है जिसके लिए पाॅलिसी ली गई है। यह एक जोखिम को हाने से नहीं रोक सकती है परंतु उससे होने वाली हानि की प्रतिपूर्ति कर सकती है।
2. जोखिम का विभाजन:
बीमा कंपनी सभी बीमित सदस्यों से प्रीमियम लेती है। जोखिम होने के समय बीमा कम्पनी द्वारा संग्रहित कोष में से प्रभावित व्यक्ति की क्षतिपूर्ति की जाती है। इस प्रकार बीमा बहुत सारे व्यक्तियों के जोखिमों को विभाजित करता है।
3. पूँजी निर्माण:
बीमा कम्पनी पाॅलिसी धारकों से प्रीमियम के रूप में एक विशाल राशि प्राप्त करती है। इस राशि को आय कमाने के लिए विभिन्न योजनाओं में विनियोजित किया जाता है। इस प्रकार बीमा पूँजी निर्माण में एक देश की मदद करता है।
4. समाज कल्याण:
बीमा विकलांगता बीमा,
वार्षिकी बीमा,
स्वास्थ्य बीमा के रूप में विभिन्न प्रकार की पाॅलिसियों को जारी करके आम आदमी को सुरक्षा प्रदान करता है।अपनी सेवाओं के अलावा यह बड़े पैमाने पर समाज को रोजगार भी प्रदान करता है।
1. परम नेकनीयती का सिद्धांत:
बीमा कंपनी और बीमित को एक दूसरे के प्रति अच्छा विश्वास दिखाना चाहिए और उन दोनों को बीमा की विषय वस्तु और पॉलिसी की शर्तों के बारे में सही जानकारी दे देनी चाहिए,
इसका अभाव अनुबंध को शून्य कर सकता है। बीमा के सभी अनुबंधों में सही ढंग से और ईमानदारी से सभी तथ्यों का खुलासा करने के लिए दोनों पक्षों की आवश्यकता होती है।
2. क्षतिपूर्ति का सिद्धांत:
यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनी बीमाकृत संपत्ति के नुकसान के कारण बीमित को हुई हानि की क्षतिपूर्ति करने के लिए बीमा चलाती है। आग और समुद्री बीमा के सभी बीमा अनुबंध क्षतिपूर्ति के अनुबंध होते हैं। इस सिद्धांत जीवन बीमा पर लागू नहीं होता है।
आधुनिक बैंक के कार्य - आधुनिक, व्यापारिक या वाणिज्यिक बैंक द्वारा सम्पन्न किए जाने वाले विविध कार्यो को तीन वर्गो में विभक्त किया जा सकता है -
i)प्राथमिक या मुख्य कार्य ii) एजेन्सी सम्बन्धी कार्य।
i) मुख्य कार्य - आधुनिक बैंक दो प्रमुख कार्य करते हैं - 1. जमाराशियाँ स्वीकार करना तथा 2. ऋण प्रदान करना।
(1) जमाराशियाँ स्वीकार करना - यह आधुनिक बैंकों का एक महत्वपूर्ण कार्य है। सभी बैंक जनता से जमा के रूप में धनराशि स्वीकार करते
(2)ऋण प्रदान करना - बैंक जमाकर्ताओं की धनराशि को अपने पास नहीं रखते, वरन् उसे जरूरतमंद व्यक्तियों, किसानों व्यापारियों, उद्योगपतियों, व्यावसायिक संस्थाओं आदि को ऋण के रूप में दे देते हैं।
ii) एजेन्सी सम्बन्धी कार्य -बैंकों के एजेन्सी सम्बन्धी मुख्य कार्य निम्नांकित हैं-
(1) धनराशि का हस्तांतरण - बैंक अपने ग्राहकों की रकम को बैंक-ड्राफ्ट द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान को भेजने की व्यवस्था करता है। इस सेवा के लिए बैंक मामूली कमीशन वसूल करता है।
(2) चैक, बिल व हुण्डी का भुगतान वसूल करना - बैंक अपने ग्राहकों द्वारा जमा कराए गए चैक, बिल, हुण्डी आदि की राशि वसूल करके उसे ग्राहकों के खाते में जमा कर देते हैं। स्थानीय साख-पत्रों के लिए सेवाएँ प्रायः निःशुल्क प्रदान की जाती हैं जबकि बाहर के साख-पत्रों के लिए सामान्यतः शुल्क वसूल किया जाता है।
भण्डारण आयातकों की निम्न तरीकों से मदद करते हैं:-
1. किस्तों में कर के भुगतान की सुविधा
- भण्डारण आयात की समय पर कर का एकमुश्त भुगतान के स्थान पर किश्तों में भुगतान कर किश्तों में माल की डिलीवरी लेने के लिए आयातकों की मदद करता है।
2. पुननिर्यात की सुविधा
- यह पुनर्नियात पर शुल्क के भुगतान तथा इसकी वापसी के दोहरे काये से आयातक को बचाता है। इस प्रकार,
यह आयातित माल पर सीमा शुल्क के भुगतान के बिना आंशिक या पूरे माल को फिर से निर्यात करने के लिए आयातक को सक्षम बनाता है।
3. पुनर्विक्रय के लिए माल तैयार करने की सुविधा
- यह माल के पुनर्विक्रय के लिए माल तैयार करने के लिए कुछ सुविधाएं प्रदान करता है जैसे
- ग्रेडिंग,
ब्रांडिंग और पैकेजिंग।
4. थोक आयात की सुविधा
- यह आयातक को थोक में माल आयाज करने की सुविधा प्रदान करता है क्योंकि आयातित माल के भंडारण के समय में पूरी कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है,
परंतु माल को छोडने पर इसका भुगतान किया जाता है।
5. निरीक्षण की सुविधा
- यह संभावित खरीदार को स्वामी के निर्देशों के अनुसार जमा माल का निरीक्षण करने की सुविधा प्रदान करते हैं,
इस प्रकार यह आयातक की बिक्री में मदद करता है।
स्वास्थ्य बीमा निम्न लाभ प्रदान करता है:
1. छोटे प्रीमियम का भुगतान करके,
बीमित व्यक्ति गंभीर रोगों के लिए अस्पताल में शामिल भारी लागत की सुरक्षा प्राप्त करता है।
2. स्वास्थ्य बीमा के लिए चुकता प्रीमियम को आयकर अधिनियम के तहत कर योग्य आय में से कटौती के रूप में अनुमति दी गयी है।
3. अचानक अस्पताल में भर्ती के मामले में,
बीमित और उसका परिवार भारी व्यय से बच जाता है।
4. स्वास्थ्य बीमा देश के लोगों को स्वस्थ करके देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
5. स्वास्थ्य बीमा उद्योग सामाजिक विकास के लिए सुरक्षा प्रदान करते हैं।
जीवन बीमा निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:
1. जोखिम के खिलाफ संरक्षण:
जीवन बीमा बीमित की मृत्यु के बाद परिवार को सुरक्षा प्रदान करता है। समय से पहले मौत के मामले में,
बीमा राशि का भुगतान बीमित व्यक्ति के आश्रितों को किया जाता है।
2. बुढ़ापे के लिए आयोजन:
एक व्यक्ति एक जीवन बीमा पॉलिसी लेकर बुढ़ापे के लिए एक आयोजन बना सकते हैं। पॉलिसी धारक आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक आजादी का आनंद ले सकते हैं।
3. बचत:
प्रीमियम आम तौर पर किश्तों में देय होता है। इसलिए जीवन बीमा के पैसे बचाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करता है। बचत की आदत विकसित करता है।
4. कर बचत:
जीवन बीमा पॉलिसी में चुकता प्रीमियम को आय कर से कटौती के रूप में लिया जाता है। इसलिए,
एक व्यक्ति कर का बोझ कम कर सकता है।
5. पूँजी निर्माण:
जीवन बीमा कंपनियों द्वारा एकत्रित राशि को उद्योग और अन्य विकासात्मक गतिविधियों में निवेशित किया जाता है।
6. रोजगार सृजन:
जीवन बीमा कंपनियाँ लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। एजेंट के रूप में कार्य करने वाले कई लोगों को स्वरोजगार का अवसर मिलता है।
विभिन्न प्रकार की बीमा पाॅलिसियाँ हैं:
1. निर्धारित मूल्य पाॅलिसी
- वह बीमा पत्र जिसमें बीमे की सम्पत्ति का मूल्य समझौता बनाने समय निश्चित किया जाता है। इसमें बीमाकर्ता आग से हुई हानि की राशि चुकाने के लिए दायी होता है। यहाँ,
क्षतिपूर्ति का सिद्धांत लागू नहीं होता है। उन वस्तुओं के लिए उपयुक्त होती है जिनकी अग्नि से हानि की स्थिति में गणना करना कठिन होता है।
2. विशिष्ट बीमा
- वह पाॅलिसी जो कि एक निश्चित धनराशि के लिए निर्गमित किया जाता है। इसमें बीमा सुरक्षा का निर्धारण करने के लिए सम्पत्ति के वास्तविक मूल्य को नहीं लिया जाता है। इसमें हानि के मूल्य की अधिकतम राशि का भुगतान किया जाता है।
3. चल बीमा
- वह बीमा पत्र जो एक बीमा प्रीमियम चुकाने पर विभिन्न स्थान पर रखे हुए माल को सुरक्षा प्रदान करता है। बीमा पत्रधारक को अलग-अलग स्थान पर रखे गये माल को सुरक्षित करने में सक्षम बनाता है।
4. व्यापक बीमा पाॅलिसी
- इस पाॅलिसी में आग के जोखिम,
प्राकृतिक आपदाओं,
चोरी,
दंगा,
विस्फोट और हमले के सभी प्रकार के जोखिमों को सुरक्षित करती है। इसमें पाॅलिसीधारक उस समय भी आग की हानि को सुरक्षित करता है जब व्यवसाय बन्द होता है।
5. औसत बीमा पाॅलिसी
- वह बीमा पत्र जिसमें औसत वाक्य सम्मिलित होता है। बीमा के वास्तविक मूल्य के लिए बीमित व्यक्ति द्वारा वहन नुकसान का केवल कुछ निश्चित प्रतिशत के लिए बीमा कम्पनी को भुगतान करने की आवश्यकता है। इस प्रकार,
बीमित को कम मूल्य की पाॅलिसी लेने के लिए दंडित किया जाता है,
क्योंकि बीमा भुगतान वास्तविक दावे के अनुपात में कम हो जाता है।
एक समुद्री बीमा में खण्ड हैं:
1. मूल्यांकन खण्ड
- यह विषय वस्तु के उस मुल्य को स्पष्ट करता है जिस पर दोनों पक्ष सहमत होते हैं। क्षतिपूर्ति पाॅलिसी में दी गई राशि से अधिक नहीं हो सकती है।
2. पर तथा से खण्ड
- यह उस समय को प्रदर्शित करता है जब जोखिम चालू होता है। यह तब जोखिम को सुरक्षित करता है जब यह बंदरगाह पर प्रस्थान के लिए खड़ा होता है तथा बंदरगाह से प्रस्थान करने के समय से। यह जहाज तथा भाड़ा बीमा पर लागू होता है।
3. मुकदमा एवं श्रम खण्ड
- यह बीमित को हानि कम करने या विषय वस्तु को बचाने के लिए उपयुक्त कदम लेने के लिए अधिकृत करता है। बीमाकर्ता इससे बीमित को हुई हानि का भुगतान करने के लिए दायी होता है।
4. गोदाम से गोदाम खण्ड
- यह प्रेषक के गोदाम से गंतव्य के गोदाम तक माल के जोखिम को सुरक्षित करता है। यह बंदरगाह तथा गोदाम में जोखिम से प्रेषक की रक्षा करता है।
5. ठहराव खण्ड
- यह खण्ड स्पष्ट करता है कि जहाज केवल उन बंदरगाहों पर जाना तथा रूकना चाहिए जिनको पाॅलिसी में उल्लेखित किया गया है। उल्लेखित मार्ग से कोई प्रस्थान के विचलन के लिए राशि होगी।
बैंक ऋण निम्न रूपों में प्रदान करता है-
बैंक अधिविकर्ष-
· यह सुविधा चालू खाते वालों को ही प्राप्त होती है।
· इसके अंतर्गत ग्राहक अपने जमा धन से अधिक धन बैंक से निकाल सकता है।
· यह निकाली गयी राशि अधिविकर्ष कहलाती है।
· बैंक द्वारा इस राशि पर ब्याज लिया जाता है।
विनिमय बिल बट्टे पर भुनाना -
· बैंक अपने ग्राहक द्वारा स्वीकार किये गए बिल का भुगतान, ग्राहक की इच्छा पर समय से पहले दे देता है।
· बैंक इस पर कुछ बट्टा लेता है ।
· निश्चित अवधि पर इस बिल का भुगतान स्वयं बैंक को स्वीकारक द्वारा कर दिया जाता है।
· यदि स्वीकारक समय पर भुगतान नहीं करता तो इसकी जिम्मेदारी बैंक के ग्राहक की होती है।
नकद साख-
· यह ऋण उन व्यापारियों या अन्य बैंक के ग्राहकों को मिलता है, जिनकी साख बाज़ार में अच्छी होती है l l
· यह ऋण प्रतिभूति की जमानत पर दिया जाता है l l
साधारण ऋण व अग्रिम -
· इस ऋण की सुविधा संपत्ति या माल के आधार पर दी जाती हैl।
· ऋण लेने वाले के खाते में पूरी राशि एक साथ ही जमा कर दी जाती हैl।
· यह राशि ग्राहक अपनी सुविधानुसार निकाल सकता हैll।
· बैंक पूर्ण राशि पर ब्याज वसूल करता है l
बचत को प्रोत्साहन
बैंक जनता में बचत की आदत को प्रोत्साहित करता है
वह उनके द्वारा जमा धन को सुरक्षा प्रदान करता है ।
सरकार बैंक के जमा रुपयों को देश के विकास में इस्तमाल करती है।
धन उधार देना
बैंक उद्योगों को स्थापित करने के लिए ऋण उधार देता है।
इससे व्यक्ति को रोज़गार मिलता है।
देश का उत्पादन बढ़ता है।
देश का आर्थिक विकास होता है।
स्थापित व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए भी बैंक ऋण देता है।
बैंक व्यापारी को उसकी आवश्यकता अनुसार भी ऋण प्रदान करता है ।
प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय
बैंक अपने ग्राहकों की ओर से प्रतिभूतियाँ खरीदता व बेचता है।
कुछ कम्पनियां अपनी प्रतिभूतियाँ बैंक के माध्यम से बेचती हैं ।
इससे कंपनी की साख बढ़ती है ।
इस कार्य के लिए बैंक कमीशन प्राप्त करता है।
आर्थिक जीवन में स्थिरता प्रदान करना।
बैंक देश की आर्थिक स्थिति के अनुसार ही मुद्रा पर नियंत्रण और मुद्रा का विस्तार करता है।
ग्राहक की साख को बढ़ाना
बैंक अपने ग्राहक की साख सूचना अन्य विक्रेताओं को देकर उसकी साख में वृद्धि करता है ।
इसके आधार पर व्यापारी को बाज़ार से आसानी से उधार माल मिल जाता है ।
मोबाइल / सेल्यूलर फोन सेवा – मोबाइल /सेल्यूलर फोन एक तार रहित चलता फिरता संदेशवाहन उपकरण है जो व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में द्विमार्गीय संदेशवाहन की सुविधा प्रदान करता है। इसके द्वारा आप किसी भी व्यक्ति से, जिसके पास मोबाइल उपकरण हो, जो कहीं पर भी हो बात कर सकते है। आपका फोन किसी भी व्यक्ति तक, किसी भी जगह पर एवं किसी भी समय पर पहुँच सकता है।
मोबाइल उपकरण बैटरी से चलती है। यह एक अत्यंत छोटा उपकरण होता है जिसे जेब में रखा जा सकता है। इसमें एक स्क्रीन लगी होती है जिस पर यह छोटे संदेश भी दिखा सकता है। मोबाइल सेवा प्राप्त करने के लिए सेल्यूलर कंपनी को आवश्यक शुल्क जमा करके मोबाइल नम्बर प्राप्त करना पड़ता है। इसके द्वारा किसी भी व्यक्ति से जिसके पास सेल्यूयर फोन अथवा साधारण फोन कनेक्शन हो, बातचीत की जा सकती है। सेल्यूयर फोन सेवा अब काफी सस्ती एवं लोकप्रिय होती जा रही है। भारत में सेल्यूलर सेवा देने वाली कंपनियों में प्रमुख Bharti Telecom, Essar, Escotel, Airtel, MTNL, BPL, BSNL, Reliance, TATA आदि है। इसकी लोकप्रियता से प्रभावित और भी कई कंपनियाँ यथाशीघ्र इस क्षेत्र में पहुँचने वाली है। भारत में कौलेज / स्कूल में अध्ययन करने वाले बच्चों तथा श्रमिकों तक के पास भी इस उपकरण को देखा जा सकता है जो इसकी निरंतर बढ़ती हुई लोकप्रियता का अटूट प्रमाण है।
तार सेवाएँ - यह संदेश को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शीघ्रता से भेजने का उत्तम साधन है। संदेश भेजने वाला जो भी संदेश तार में लिखता है, वह ज्यों का त्यों संदेश प्राप्तकर्ता के पास शीघ्रता के साथ पहुँच जाता है। संदेश भेजने वाला अपने नजदीकी तारघर में संदेश दे देता है। बाद में यह संदेश तारघर उस तारघर को दे देता है जहां संदेश प्राप्तकर्ता निवास करता है। वहाँ से तारघर का कर्मचारी संदेशा को प्राप्तकर्ता के पते पर पहुंचा देता है और उसकी रसीद प्राप्त कर लेता है। तार का व्यय संदेश लिखे प्रति शब्द की दर से लगता है। अतएव सन्देश भेजने वाले को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कम से कम शब्दों में संदेश भेजा जाय। तार कई प्रकार के होते है। जैसे (I)साधारण तार- इस तार पर साधारण दर से शुल्क देना पड़ता है जोकि सबसे कम है। (ii) विशेष तार – इस तार पर साधारण तार की तुलना में दोगुना शुल्क लगता है किन्तु इसे साधारण तार की तुलना में प्राथमिकता दी जाती है जिसके कारण यह तार शीघ्रता से पहुँच जाता है। (iii) बधाई तार - जैसे – दीपावली, ईद, क्रिसमस, विवाह, नववर्ष, परीक्षा परिणाम, चुनाव आदि के अवसर पर भेजा जाने वाला तार बधाई तार कहलाता है। (iv) साइफर- यह गुप्त प्रकृति के संदेशों को संकेत भाषा में भेजा जाता है। (V) फ़ोनोग्राम – यह तार टेलीफोन अंशदाता द्वारा भेजा जाता है जिस पर लगे शुल्क का भुगतान वह बाद में तारघर को करता है।
बीमा के लाभ हैं:-
1. सुरक्षा प्रदान करना:-
बीमा अचानक होने वाली हानियों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह व्यक्तियों तथा व्यवसायियों दोनों के लिए हानि से पहले तथा पश्चात् के डर को कम करता है।
2. जोखिमों को फैलाना:-
बीमा व्यक्ति की हानि की राशि को कम करने के लिए बहुत सारे लोगों में जोखिम को बाँट देता है।
3. धन संग्रहण के लिए स्त्रोत:-
बीमित नियमित तौर पर बीमा कम्पनी को प्रीमियम चुकाता है। प्रीमियम के माध्यम से बहुत बड़ी धन राशि एकत्रित होती है तथा इसे उद्योगों के विकास में उपयोग किया जा सकता है।
4. बचतों को प्रोत्साहन:-
बीमा सुरक्षा के साथ विनियोग श्रंखला भी प्रदान करता है। यह प्रीमियम चुकाने के माध्यम से बचत की आदत को विकसित करता है।
5. बीमा अनुबंध:-
बीमा बीमित तथा बीमा कम्पनी के मध्य एक अनुबंध होता है। बीमा कम्पनी किसी विनिर्दिष्ट घटना के घटित होने पर होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति करती है।
बीमा के सिद्धांत हैं:-
1. परम नेकनीयती का सिद्धांत
- इस सिद्धांत के अनुसार बीमा विश्वास पर आधारित अनुबंध है। बीमित और बीमाकर्ता को एक दूसरे को सारी तात्त्विक जानकारी प्रदर्शित करनी चाहिए और दोनों पक्षों को एक दूसरे से बीमा पाॅलिसी से संबंधित कोई जानकारी छिपानी नहीं चाहिए।
2. प्रतिस्थापन का सिद्धांत
- इस सिद्धांत के अनुसार मुआवजे का भुगतान करने के बाद बीमाकर्ता बीमित के स्थान पर आ जाता है। यह सिद्धांत जीवन बीमा के लिए लागू नहीं होता है।
3. योगदान का सिद्धांत
- इस सिद्धांत के अनुसार एक वस्तु के एक से अधिक बीमों की स्थिति में सभी बीमाकर्ता हानि को आपस में विभाजित करते हैं। बीमित को बीमाकर्ता से पूरी राशि प्राप्त करने की स्थिति में,
किसी अन्य बीमा कर्ता से और मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार समाप्त हो जायेगा।
4. क्षतिपूर्ति का सिद्धांत
- यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनी बीमाकृत संपत्ति के नुकसान के कारण बीमित को हुई हानि की क्षतिपूर्ति करने के लिए बीमा चलाती है। आग और समुद्री बीमा के सभी बीमा अनुबंध क्षतिपूर्ति के अनुबंध होते हैं। इस सिद्धांत जीवन बीमा पर लागू नहीं होता है।
5. बीमा योग्य हित का बीमा
- इस सिद्धांत के अनुसार बीमित का बीमा पाॅलिसी की विषय वस्तु में हित अवश्य होना चाहिए। बिना हित के बीमा पाॅलिसी एक जुआ और झूठी क्रिया है और कानून इसे अनुमति नहीं देता है। जीवन बीमा का स्थिति में बीमा योग्य हित बीमित के बीमा पाॅलिसी लेने वाले व्यक्ति के साथ संबंधों से होता है।
6. निकटतम कारण का सिद्धांत
- इस सिद्धांत के अनुसार हानि का कारण बीमा अनुबंध की विषय वस्तु से संबंधित होना चाहिए। यदि हानि किसी अन्य कारण से होती है तब बीमाकर्ता मुआवजे का भुगतान करने से इन्कार कर सकता है।
ई-बैंकिंग के विभिन्न प्रारूप इस प्रकार हैं:-
1. इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर सिस्टम
(ईएफटीएस)
- यह एक खाते से दूसरे खाते में धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करता है जिससे यह देय तिथि पर भुगतान करने में ग्राहकों की मदद करता है। यह पारगमन में नुकसान और कोई खर्च बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई पत्राचार सेवाओं के लिए खर्च से बचाता है। यह नकदी को अच्छे से संभालता है और लेन-देनों को कम प्रयासों में पूर्ण करता है।
2. ऑटोमेटेड टेलर मशीन
- यह एक ऐसी स्वचालित मशीन है जिसमें एक ग्राहक पैसे निकलवा तथा जमा करा सकता है। यह
24 घंटे चलती है एवं कम खर्चीली है और बैंक जाकर लगने वाले समय से भी बचाती है। इस मशीन में ग्राहकों को अपने एटीएम कार्ड डालने और स्क्रीन पर उनकी व्यक्तिगत पहचान संख्या
(पिन)
टाइप करने की आवश्यकता होती है।
3. डेबिट कार्ड
- यह बैंक द्वारा खाता धारक को जारी किया जाता है तथा खरीदे गये माल या ली गई सेवाओं का तत्काल भुगतान करने और एटीएम से पैसे निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है।
4. क्रेडिट कार्ड
- यह कार्डधारक धारक के वादे पर आधारित वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान करने के लिए अनुमति देता है। कार्ड जारीकर्ता एक परिक्रामी खाता बनाता है और धारक एक निश्चित सीमा तक एक व्यापारी को भुगतान के लिए इससे पैसे उधार ले सकता है। यह अधिविकर्ष सुविधा का एक प्रकार है।
5. टेली बैंकिंग
- यह ई-बैंकिंग का एक ऐसा रूप है जिसमें एक ग्राहक का व्यक्तिगत कंप्यूटर बैंक के कंप्यूटर के टेलीफोन से जुड़ा होता है। यह फोन पर उसके खाते में शेष और नवीनतम लेन-देन के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है। यह सुविधा चैबीसों घंटे उपलब्ध होती है।
बैंक द्वारा प्रदत्त खातों के विभिन्न प्रकार हैं:-
1. चालू खाता
- यह खाता उन व्यापारियों के लिए होता है जो बैंक से नियमित लेनदेन,
जमा और निकासी दोनों करते हैं। इसमें राशि जमा कराने के साथ ही निकासी पर भी कोई प्रतिबंध नहीं होता है। इस तरह के खाते पर बैंक द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। इसमें अधिविकर्ष की सुविधा भी होती है। इसमें प्रेषण की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
2. बचत जमा खाता
- यह खाता सामान्य जनता के लिए होता है। इसमें जमा कितनी भी बार किया जा सकता है पंरतु निकासी बैंक द्वारा निर्धारित न्यूनतम राशि को छोड़कर की जाती है। इसमें अधिविकर्ष की सुविधा नहीं दी जाती है। इस खाते में ब्याज न्यूनतम मासिक शेष पर दिया जाता है।
3. स्थायी जमा खाता
- यह खाता धन की एक निश्चित राशि के साथ समय की एक निश्चित अवधि के लिए खोला जाता है,
और जो जमा की परिपक्वता के समय में प्रतिदेय होता है। ऐसे खाते पर बैंक द्वारा उच्च दर पर ब्याज दिया जाता है। इसमें चेक की सुविधा नहीं दी जाती है।
4. आवर्ति जमा खाता
- यह खाता उन लोगों के लिए होता है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य हेतु एक लम्बी अवधि के लिए नियमित रूप से राशि बचाना चाहते हैं। इस खाते में ब्याज थोड़ी उच्च दर पर दिया जाता है। यह छोटी-छोटी बचतों को प्रोत्साहित करता है। इसकी परिपक्वता पर राशि ब्याज के साथ देय होती है।
बैंक में जमा राशि के विभिन्न प्रकार हैं:-
वर्तमान जमा
- यह खाता उन व्यापारियों के लिए होता है जो बैंक से नियमित लेनदेन,
जमा और निकासी दोनों करते हैं। इसमें राशि जमा कराने के साथ ही निकासी पर भी कोई प्रतिबंध नहीं होता है। इस तरह के खाते पर बैंक द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। इसमें अधिविकर्ष की सुविधा भी होती है। इसमें प्रेषण की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
स्थायी जमा
- यह खाता धन की एक निश्चित राशि के साथ समय की एक निश्चित अवधि के लिए खोला जाता है,
और जो जमा की परिपक्वता के समय में प्रतिदेय होता है। ऐसे खाते पर बैंक द्वारा उच्च दर पर ब्याज दिया जाता है।
आवर्ति जमा
- यह खाता उन लोगों के लिए होता है जो किसी विशिष्ट उद्देश्य हेतु एक लम्बी अवधि के लिए नियमित रूप से राशि बचाना चाहते हैं। इस खाते में ब्याज थोड़ी उच्च दर पर दिया जाता है।
बचत जमा
- यह खाता उनके लिए होता है जो आय समूह के बीच बचत को प्रोत्साहित करते हैं। यह सुरक्षित पैसे रखने की सुविधा प्रदान करता है। इसमें ब्याज बैंक द्वारा प्रदान किया जाता है परंतु यह स्थायी जमा से कम होता है।
चालू खाता -
यह खाता वह व्यक्ति या संस्थाएं खोलती हैं, जिन्हें एक दिन में कई बार रुपया जमा करना व निकालना होता है ।
· बैंक इस खाते पर ब्याज नहीं देता ।
· बैंक इस खाते पर खर्चा वसूल करता है।
चालू खाता खोलने की विधि –
· बैंक से निशुल्क आवेदन पत्र प्राप्त करके भरना।
· खाता खोलने वाले का नाम व पता भरना।
· साक्षी के रूप में परिचयकर्ता के हस्ताक्षर व व्यवसाय।
· खाता खोलने वाले के हस्ताक्षर।
· उसके नमूने हस्ताक्षर।
· घोषणा पर हस्ताक्षर कि उसने बैंक के नियमों को पढ़ और समझ लिया है ।
· नमूने के हस्ताक्षर जिन्हें बैंक अपने पास भविष्य में मिलान करने के लिए सुरक्षित रखता है ।
· अंत में भरे हुए फॉर्म को धनराशि के साथ बैंक में जमा करना।

A.
डिजिटल रोकड़।
B.
क्रेडिट कार्ड।
C.
डेबिट कार्ड।
D.
चेक।
आकस्मिक दायित्व वे दायित्व हैं, जो अभी तक तो नहीं आए हैं, चेक के मामले में, एक ऑनलाइन लेनदेन में माल की सुपुर्दगी केवल राशि की प्राप्ति पर ही की जाती है।
A.
शामिल पक्षों की अक्षमता।
B.
शामिल पक्षों का पता लगाने की असक्षमता।
C.
लेनदेन के लिए छोटा समय चक्र।
D.
कागजी काम पर कम निर्भरता।
इंटरनेट के लेनदेन उन पक्षों में होते हैं जिनकी पहचान स्थापित करना मुश्किल होता है। किसी भी पक्ष के स्थान का पता नहीं हो सकता है। यह इंटरनेट के माध्यम से लेनदेन को जोखिमपूर्ण बनाता है।
A.
कंप्यूटर नेटवर्क।
B.
मानवशक्ति।
C.
भूमि और भवन।
D.
विपणन।
भारत अन्य देशों की तुलना में एक लागत लाभ उठाता है। कम जनशक्ति लागत कुल परिचालन लागत को कर देती है, जो बाह्यस्त्रोतन के लिए भारत को आकर्षक बनाता है।
A.
सुपुर्दगी पर भुगतान (सीओडी)।
B.
चेक।
C.
क्रेडिट और डेबिट कार्ड।
D.
डिजिटल रोकड़।
केवल साइबर स्पेस में मौजूद माल एवं सेवाओं की खरीद एवं बिक्री के प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा डिजिटल रोकड़ होती है। मुद्रा के इस प्रकार का कोई वास्तविक भौतिक गुण नहीं होता है।
A.
ग्राहकों को बाजार में जाने की जरूरत नहीं होती है।
B.
कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करने की जरूरत होती है।
C.
कर्मचारी घर से काम कर सकते हैं।
D.
कंपनियों को कर्मचारियों की जरूरत नहीं होती है।
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क अर्थात कर्मचारियों को कार्यालय आना नहीं पडे़गा। इसके बजाय, कार्यालय उन तक जायेगा तथा वे कँही से भी कार्य करने में सक्षम हो सकेंगे।
A.
बी 2 बी लेनदेन।
B.
बी 2 सी लेनदेन।
C.
अंतः बी लेनदेन।
D.
सी 2 सी लेनदेन।
ई-कॉमर्स में बी 2 बी, बी 2 सी और सी 2 सी शामिल होते हैं। इंट्रा-बी लेनदेन ई-व्यवसाय का एक हिस्सा होता है, जो कि एक व्यापक शब्द है। बी 2 सी लेनदेन व्यापारी को चैबीसों घंटे अपने ग्राहकों के साथ संपर्क में रहने के लिए सक्षम बनाता है।
A.
ग्राहकों द्वारा खरीद के लिए भुगतान।
B.
ग्राहकों द्वारा माल की वापसी।
C.
कंपनियों में ग्राहकों द्वारा टोल फ्री कॉल।
D.
कंपनियों द्वारा किए गए बाजार सर्वेक्षण के लिए ग्राहकों की प्रतिक्रिया।
ग्राहकों के लिए कंपनियों में ग्राहकों द्वारा टोल फ्री कॉल का एक फायदा है कि यह फ्री ग्राहक सेवा प्रदान करता है। यह सी 2 बी के माध्यम से व्यापार में एक क्रांति है।
A.
बी 2 बी के तहत।
B.
बी 2 सी के तहत।
C.
इंट्रा बी के तहत।
D.
बी 2 वी के तहत।
बी 2 सी लेनदेनों में एक तरफ व्यावसायिक फर्मों के लिए तथा दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के लिए लेनदेन का अंत होता है। बी 2 सी गतिविधियों की पहचान, पदोन्नति और कभी-कभी आॅनलाईन वितरण आदि जैसी विपणन गतिविधियों के एक व्यापक दृष्टिकोण पर जोर देता है।
A.
ग्राहकों की।
B.
उत्पादकों की।
C.
कर्मचारियों की।
D.
व्यापार की।
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) तकनीक का अर्थ होगा कि कर्मचारियों को कार्यालय में आने की जरूरत नहीं होती है। इसके बजाय, कार्यालय उन तक जाता है और वे कँही से भी कार्य कर सकते हैं।
A.
हैकिंग द्वारा
B.
धोखाधड़ी व्यापार द्वारा।
C.
कूट लेखन द्वारा।
D.
ब्रांड अपनाकर।
ई-कॉमर्स के लेनदेन के खतरे या जोखिम से कूट लेखन द्वारा बचा जा सकता है। यह एक कोड में परिवर्तित ऐसे संदेश को संदर्भित करता है जो किसी अनधिकृत व्यक्ति को समझ में नहीं आ सकता है।
A.
एक सहायक को।
B.
एक शाखा कार्यालय को।
C.
मूल कंपनी को।
D.
एक तृतीय पक्ष को।
बाह्यस्त्रोतन अर्थात एक तृतीय विशेषज्ञ पक्ष को एक लंबी अवधि के करार पर सामान्यतः गैर मुख्य गतिविधियों का बंटन।
A.
बी 2 बी व्यवसाय में।
B.
अंतः व्यवसाय वाणिज्य में।
C.
सी 2 सी व्यवसाय में।
D.
बी 2 सी व्यवसाय में।
इंट्रानेट को अंतः व्यवसाय वाणिज्य में प्रयोग किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में शामिल पक्षकार दी गई एक फर्म के भीतर होते हैं।
A.
क्रेडिट कार्ड।
B.
खुदरा कार्ड।
C.
डेबिट कार्ड।
D.
सिम कार्ड।
डेबिट कार्ड एक प्लास्टिक कार्ड है जो नकद निकासी के लिए एटीएम पर इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्राहक एटीएम डेबिट कार्ड का उपयोग कर के धन हस्तांतरण भी कर सकते हैं।
A.
इलेक्ट्रॉनिक रूप से।
B.
बाह्यस्त्रोतन के माध्यम से।
C.
विश्व स्तर पर।
D.
घरेलू स्तर पर।
ई व्यापार एक विस्तृत शब्द है, इसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप से विभिन्न व्यापार लेनदेन और कार्य शामिल हैं। इसमें व्यापार इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाता है, इसलिए इसे ई-व्यापार कहा जाता है।
A.
बाहरी उपयोगकर्ताओं के साथ।
B.
आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के साथ।
C.
एक दूसरे के साथ।
D.
प्रबंधन के शीर्ष स्तर के भीतर।
इंटरकॉम एक ऐसी संचार सुविधा है जो कार्यालय के अंदर टेलीफोन पर एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए एक फर्म के कर्मचारियों को सक्षम बनाती है।
A.
लेनदेन अधिक सुरक्षित बनाने के लिए।
B.
बिक्री और खरीद में वृद्धि करने के लिए।
C.
अपने उत्पादों के विज्ञापन के लिए।
D.
अतिरिक्त कमीशन लेने के लिए।
विभिन्न खरीददार और विक्रेताओं ईबे पर एक दूसरे के साथ लेनदेन करते हैं। इस गतिविधि को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए, ईबे सभी विक्रेताओं और खरीदारों, को एक-दूसरे को श्रेणी प्रदान करने के लिए अनुमति देता है।
A.
एक विपणन साइट।
B.
एक विज्ञापन एजेंसी।
C.
एक एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर उत्पादन फर्म।
D.
भुगतान मध्यस्थ।
पेपैल एक अमेरिका आधारित ग्लोबल ई-कॉमर्स साइट है जो इंटरनेट के माध्यम से भुगतान और धन हस्तांतरण करने के लिए अनुमति देती है।
A.
इसकी वैश्विक पहुँच।
B.
असुरक्षा की भावना।
C.
लागत में कमी।
D.
इसकी उच्च गति।
नई तकनीक और नये तरीके के लिए समायोजन की प्रक्रिया से तनाव और असुरक्षा की भावना के कारण लोग ई-व्यापार में प्रवेश के लिए एक संगठन की योजना का विरोध करते हैं।
A.
गोपनीयता।
B.
लागत में कमी।
C.
स्वीट खरीदारी।
D.
नैतिक मुद्दे।
लागत में कमी बाह्यस्त्रोतन द्वारा प्रदत्त एक बड़ा लाभ है। बाकी बाह्यस्त्रोतन के खिलाफ उठाए गए मुद्दे हैं।
A.
पैसे की निकासी को।
B.
क्रेडिट कार्ड के निर्गमन को।
C.
पैसे के उपयोग को।
D.
पैसे की जमाओं को।
एटीएम को पैसे की निकासी में तेजी लाने के लिए और एक रोकड़ीये के कार्यभार को कम करने के लिए बैंकों द्वारा स्थापित किया गया था। हालांकि, अब इन दिनों, बैंकों द्वारा इन एटीएम के माध्यम से कुछ अतिरिक्त सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं।
ऑन लाइन वितरण में माल की सुपुर्दगी इन्टरनेट पर होती है।
विश्व स्तर पर पहुँच।
'घर पर माल की सुपुर्दगी'ग्राहक सहायता सेवा का उदाहरण है।
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर तथा विमानों के टिकट की सुपुर्दगी इन्टरनेट पर हो सकती है।
C2C कॉमर्स
बाह्यकृत
सेवाओं
के प्रकार
हैं:
1. वित्तीय
सेवाऐं
- निर्माणी
व्यवसाय
वित्तीय
एवं लेखांकन,
पेरोल
लेखांकन,
व्यापारिक
बैंकिंग
सेवाओं
आदि जैसी सेवाओं
का बाह्यकरण
करते
हैं।
2. सूचना
प्रौद्योगिकी
सेवाऐं
- ये कम्पनियाँ
श्रम
साॅफ्टवेयर
प्रोग्राम,
साॅफ्टवेयर
परामर्श,
वेबसाईट
तथा विकास
एवं रखरखाव
आदि को बाह्यकृत
करती
हैं।

ई-व्यवसाय
में आवश्यक
दो स्त्रोत
निम्नलिखित
हैं:-
1. अच्छी
वेबसाइट:-
एक व्यापक
वेबसाइट
को प्रभावी
संचार
सक्रिय
करने
और कंपनी
के उत्पादों/सेवाओं
के बारे में विस्तृत
जानकारी
प्रदान
करने
के लिए विकसित
करने
की आवश्यकता
होती
है।
2. उचित
कम्प्यूटर
हार्डवेयर:-
एक व्यवसाय
को आवश्यक
गति और स्मृति
के साथ एम्बेडेड
कंप्यूटर
की खरीद और स्थापित
करने
की जरूरत
होती
है। फर्म को ऐसे कंप्यूटर
स्थापित
करने
आवश्यक
होती
है जो व्यवसाय
की वांछित
मात्रा
को संभालने
में सक्षम
हो तथा किसी भी कंप्यूटर
नेटवर्क
के महत्वपूर्ण
तत्वों
के अधिकारी
हो।
के.पी.ओ. की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
(i) यह बी.पी.ओ. का अगला कदम है|
(ii) यह प्रक्रिया विशेषज्ञता की अपेक्षा ज्ञान विशेषज्ञता पर ध्यान केंद्रित करता है|
(iii) ऐसा नहीं मन जा सकता कि ‘B’ की जगह ‘K’ ले रहा है| अतः दोनों ही क्षेत्र प्रचलन में रहेंगे|
(iv) यह बी.पी.ओ. क्षेत्र की सफलता का परिणाम है|
(v) यह क्षेत्र प्राथमिकता में द्वितीय स्तरीय लेकिन उच्च-स्तरीय ज्ञान की आवश्यकता वाली सभी क्रियाओं को पूरा करता है|
(vi) इसके अंतर्गत अंतिम निर्णय पर पहुंचने के लिए कोई पूर्व-निर्धारित मार्ग नहीं होता है|
(vii) यह क्षेत्र शिक्षित लोगों को एक वैकल्पिक कैरियर उपलब्ध करता है|
मेरे विचार से कंपनियों का यह रुझान आधुनिक व्यवसाय की जरुरण है क्योंकि इससे निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो रहे हैं :
(i) उच्च क्वालिटी की सेवायें प्राप्त होना (ii) सेवाओं में स्थायी विनियोग से बचाव|
(iii) व्यवसाय को सुविधापूर्वक ढंग से चलाना| (iv) उच्च-स्तरीय ज्ञान की आसानी से प्राप्ति|
श्रेया ये सभी काम ए.टी.एम के माध्यम से कर सकती है | यह बैंक का एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक आउटलेट होता है जो ग्राहकों को बिना बैंक कर्मचारी की मदद के ही आधारभूत बैंकिंग व्यवहारों को पूरा करने की अनुमति प्रदान करता है |
केपीओ
अर्थात
गुणवत्ता
एवं क्षमता
में सुधार
करने
के लिए और व्यापार
की लागत को कम करने के लिए एक बाहरी
संगठन
द्वारा
किये
जाने
वाले
कार्य
का ज्ञान
प्राप्त
करना।
एक केपीओ
की मुख्य
विशेषताएं
इस प्रकार
हैं:
1. केपीओ
में बीपीओ
द्वारा
न संभाले
गये, उच्च अंत कार्य
को शामिल
किया
जाता
है।
2. यह प्रक्रिया
विशेषज्ञता
के स्थान
पर ज्ञान
विशेषज्ञता
पर अपना ध्यान
केंद्रित
करता
है।
3. इसमें
सभी गैर-मुख्य
गतिविधियों
को शामिल
किया
जाता
है।
बाह्यकरण
की आवश्यकता
होती
है:-
1. अर्थव्यवस्था
को
बढ़ावा
देने
के
लिए
- अपतटीय
बाह्यकरण
मेजबान
देशों
में उद्यमशीलता,
रोजगार
और निर्यात
को प्रोत्साहन
प्रदान
करता
है।
2. उत्पादकता
और
सेवा
की
गुणवत्ता
में
सुधार
के
लिए
- समर्थन
सेवाओं
का बाह्यकरण
विशेषज्ञता
के एक उच्च स्तर तक पहुँच
प्रदान
करके
उत्पादकता
बढ़ाने
में मदद करता है।
3. विस्तार
और
विकास
के
लिए
- बाह्यकरण
निवेश
को कम करने में मदद करता है जिसे फर्म की मुख्य
गतिविधियों
के विस्तार
के लिए उपयोग
किया
जा सकता है।
के.पी.ओ. तथा बी.पी.ओ. के अंतर्गत मुख्यतः निम्नलिखित सेवाएं आती हैं:
के.पी.ओ. के अंतर्गत आने वाली सेवाएं:
(i) शोध एवं विकास
(ii) व्यावसायिक एवं तकनीकी विश्लेष्ण
(iii) सजीव चित्र एवं डिजाइन
(iv) व्यावसायिक एवं विपणन शोध
(v) औषिधि निर्माण
(vi) चिकित्सा सेवाएं
(vii) लेखन एवं विषय-वस्तु विकास
(viii) कानूनी सेवाएं
बी.पी.ओ. के अंतर्गत आने वाली सेवाएं:
(i) फैक्टरिंग सुविधा
(ii) सौदागर बैंकिंग सेवाएं
(iii) विज्ञापन सेवाएं
(iv) कुरियर सेवाएं
(v) ग्राहक सहायता सेवाएं
(vi) यातायात प्रोसेसिंग सेवाएं
(vii) बीमा पॉलिसी का विक्रय
(vi) तकनीकी सहायता
(i) यह कंपनी तृतीय श्रेणी के उधोग से सम्बंधित है|
(ii) माँग ऋण : ये ऋण बैंक अपने ग्राहकों को सावधि जमा, सरकारी प्रतिभूतियां, जीवन बीमा-पत्र आदि को जमानत के रूप में रखकर प्रदान करता है| इन ऋणों को माँग ऋण इसलिए कहा जाता है क्योंकि बैंक कभी भी इनकी माँग कर सकता है|
(iii) कंपनी द्वारा ली जा रही सेवा का नाम कुरिएर सेवा है| यह सेवाओं के बहय्करण के अंतर्गत आती है|
(iv) सार्वजानिक भविष्य निधि: इसका अभिप्राय डाक विभाग की उस योजना से है जिसके अंतर्गत निवेशक दीर्घकालीन विनियोग करके प्रयाप्त कर-मुक्त आय प्राप्त करता है|
नहीं, दोनों कंपनियों द्वारा प्रयोग कि जा रही सेवाएं एक श्रेणी कि नहीं हैं| दोनों में भिन्नता है|
(अ) ए.बी.सी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा व्यवसाय के बाहर से करवाई जा रही क्रियाओं को 'सेवाओं का बाह्यकरण' कहा जाता है| इसका अर्थ कुछ सामान्य प्रतिदिन कि जाने वाली सेवाओं को व्यवसाय के बाहर से करवाना है ताकि व्यवसाय को सफलतापूर्वक व न्यूनतम लागतों पर चलाया जा सके|
(ब) एक्स.वाई.जेड प्राइवटे लिमिटेड द्वारा व्यवसाय के बाहर से करवाई जा रही क्रियाओं को 'ज्ञान प्रक्रिया बाह्यकरण' कहा जाता है| इसका अर्थ व्यवसाय को सफलतापूर्वक एवं निम्नतम लागतों पर चलाने के लिए उच्च-स्तरीय ज्ञान की जरूरत वाले कार्य व्यवसाय के बाहर से करवाने से है|
भारती डेरी की समस्या को बाजार में उपलब्ध फैक्टरिंग सेवा का प्रयोग करके दूर किया जा सकता है| यह वित्त व्यवस्था का एक आधुनिक साधन है| इसके अन्तर्गत फैक्टरिंग एजेंसी विक्रेताओं को उनके उधार विक्रय पर अग्रिम धन उपलब्ध करवाती है और देनदारों से भुगतान एकत्रित करने का काम भी करती है| अपनी सेवाओं के बदले फैक्टरिंग एजेंसी कमीशन व ब्याज प्राप्त करती है| जिन व्यवसायों में यह सुविधा उपलब्ध हो उनमें उधार विक्रय में अधिक पूंजी नहीं लगानी पड़ती|
व्यवसाय के इस उभरते हुए साधन का नाम-सेवाओं का बाह्यकरण है। इसका अर्थ व्यवसाय को सफलतापूर्वक व न्यूनतम लागतों पर चलाने हेतु कुछ सेवाओं को संगठन के बाहर से प्राप्त करना है।
बाह्य सेवाओं के प्रकार : इनके मुख्या प्रकार निम्नलिखित हैं :
(i) वित्तीय सेवाएं
(ii) कुरियर सेवाएं
(iii) ग्राहक सहायता सेवा
सेवाओं के बाह्यकरण की प्रकृति के तथ्यों को स्पष्ट कीजिए|
सेवाओं के बाह्यकरण की प्रकृति निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट होती है:
(i) सेवाओं का संगठन के बाहर उपलब्ध होना: सेवाओं के बाह्यकरण के अनतेरगत व्यावसायिक संगठनों को सेवाएं बाहर से प्राप्त होती हैं| कुछ कंपनियां कुछ विशेष सेवाएं प्रदान करने के लिए स्थापित की जाती हैं, जैसे – उधार एकत्रित करने वाली एजेंसी विभिन्न कंपनियों के देनदारों से रूपया एकत्रित करने का काम करती हैं|
(ii) विशिष्टिकृत सेवाएं: क्योंकि एक कम्पनी प्राय: एक ही प्रकार की सेवा उपलब्ध करवाती है इसलिए उस विशेष सेवा में उसको विशेषज्ञता प्राप्त हो जाती है| इससे सेवा की क्वालिटी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है|
(iii) सेवाओं की सस्ती विधि: सेवाओं के बाह्यकरण की प्रकृति सस्ती सेवाएं उपलब्ध करवाने की है| एक ही प्रकार की सेवा को बड़े स्तर पर व्यवहार करने के कारण ये सेवाएं सस्ती दर पर उपलब्ध हो जाती है|
(iv) प्रयोग करने वाले की कुशलता में वृद्धि: अनेक सेवाएं संगठन के बाहर से प्राप्त हो जाने के कारण इन्हें प्रयोग करने वाला अपने मुख्य व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है| इससे प्रयोग करने वाले की कुशलता में वृद्धि होती है|
ई-बिजनिस के लिए जिन संसाधनों की आवश्यकता होती है वे इस प्रकार हैं :
(i) कंप्यूटर सिस्टम: जैसे की हमें मालुम है की ई-बिजनिस का आधार इंटरनेट है और व्यवहार करने का माध्यम कंप्यूटर| कंप्यूटर के बटनों को दबाकर ही कंप्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ा जाता है|
(ii) इन्टरनेट कनेक्शन: ई-बिजनिस का अस्तित्व इन्टरनेट की वजह से ही है| इसलिए इन्टरनेट कनेक्शन लेना जरुरी है| आज इन्टरनेट अथवा नेट कनेक्शन लेना कठिन काम नहीं है| निजी सेवादाता कंपनियां के इस क्षेत्र में आने के बाद यह सुविधा हो गई है की आप चाहें तो घर बैठे यह सुविधा ले सकते हैं|
(iii) वेब पेज बनाना: ई-बिजनिस के प्रयोग में वेब पेज का सर्वाधिक महत्व है| इसे होम पेज के नाम से भी जाना जाता है| जिस उत्पाद को इन्टरनेट पर प्रदर्शित करना होता है उसे वेब पेज पर दर्शाते हैं|
एक फर्म के लिए बाह्यकरण
के लाभ निम्नलिखित
हैं:
1. ध्यान
केंद्रित
करना
- जब गैर मुख्य
गतिविधियों
को अनुबंधित
कर दिया जाता है तो यह फर्म को व्यापार
की मुख्य
गतिविधियों
पर ध्यान
केंद्रित
करने
में सक्षम
बनाता
है। व्यापार
बेहतर
दक्षता
और प्रभावशीलता
के लिए चयनित
गतिविधियों
और संसाधनों
पर अपने ध्यान
को केंद्रित
कर सकते हैं।
2. उत्कृष्टता
के
लिए
खोज
- विशेषज्ञता
और बाह्यकरण
फर्म
का अनुभव
व्यापार
की उत्पादकता
में सुधार
करता
है। बाह्यकरण
पार्टी
की उन्नत
तकनीक
और विशेषज्ञता
एक व्यवसाय
के लिए लाभदायक
होती
है, क्योंकि
यह व्यवसाय
के पास उपलब्ध
नहीं
होती
है।
3. लागत
में
कमीं
- व्यापार
सस्ते
संसाधनों,
विशेष
रूप से कम लागत वाली कुशल जनशक्ति
वाले
देशों/संगठनों
को अपनी गतिविधियों
के बाह्यकरण
से लागत में कमी कर सकते हैं। इसके अलावा,
सेवा
प्रदाताओं
ने आम तौर पर विभिन्न
ग्राहकों
के लिए सेवा केन्द्रों
का साझा किया है जो अर्थव्यवस्थाओं
के पैमाने
में बढ़ोतरी
लाते
हैं।
4. जवाबदेही
में
सुधार
- सेवा
की गुणवत्ता
के लिए सेवा प्रदाता
पार्टी
के हाथों
में जिम्मेदारी
निहित
होती
है। जैसा की सेवा प्रदाता
एक शुल्क
पर सेवाएं
प्रदान
करता
है इसलिए
यह ग्राहक
के आंतरिक
कर्मचारियों
से सेवा की गुणवत्ता
के लिए अधिक जिम्मेदार
है।
5. नवीनतम
प्रौद्योगिकी
- व्यापार
सेवा
प्रदाता
द्वारा
विश्व
स्तर
की सूचना
प्रौद्योगिकी
बुनियादी
सुविधाओं
का लाभ प्राप्त
कर सकता हैं। प्रौद्योगिकी
के क्षेत्र
में हाल के घटनाक्रम
से लाभ भी प्राप्त
किया
जा सकता है।

यह सत्य है कि आज बाह्यस्त्रोतीकरण
को केवल मजबूरी
नंही
बल्कि
इसे विकल्प
के रूप में भी लिया जाता है।
संगठन
किसी
तीसरे
पक्ष
की विशेषज्ञता,
दक्षता
और अनुभव
का लाभ लेने के लिए इनके विशेषज्ञों
को साधारण
गतिविधियों
तथा कभी-कभी मुख्य
गतिविधिया
का भी अनुबंध
कर लेता है।
बाह्यस्त्रोतीकरण
निम्न
कारणों
से महत्वपूर्ण
हो गया है:
1. मुख्य
गतिविधियों
की बेहतर
दक्षता
हासिल
करने
के लिए - फर्मों
ने इस तथ्य को जाना है कि दक्षता
और प्रभाव
सिर्फ
ऐसे कुछ क्षेत्रों
पर ध्यान
केंद्रित
करके
ही हासिल
किया
जा सकता है जहाँ वे अलग क्षमता
या मुख्य
सक्षमता
है जहां कि इस तथ्य को साकार
कर रहे हैं।
2. लागत
कम करने के लिए - कारण गला काट प्रतिस्पर्धा
के कारण व्यवसाय
के अस्तित्व
और लाभ के लिए लागत में कमी ही एक मात्र
रास्ता
होता
है। इसे बाह्यस्त्रोतीकरण
द्वारा
प्राप्त
किया
जा सकता है क्योंकि
बाह्यस्त्रोतीकरण
साझेदारी
कई संगठनों
को एक ही सेवा प्रदान
करते
हैं तथा अधिक लाभ कमाते
हैं।
3. गुणवत्ता
में सुधार
के लिए - बाह्यस्त्रोतीकरण
श्रम
और विशेषज्ञता
के विभाजन
का लाभ पाने के लिए कंपनियों
को सक्षम
बनाता
है क्योंकि
मुख्य
गतिविधियाँ
उनके
द्वारा
की जाती है तथा अन्य गतिविधियों
को प्रदर्शन
में उत्कृष्टता
कंपनियों
को बाह्यकृत
कर दिया जाता है। अंत में, यह एक फर्म के उत्पाद
की गुणवत्ता
में सुधार
करता
है।
4. गठबंधन
के माध्यम
से विकास
करने
के लिए: कुछ गतिविधियों
को अन्य एजेंसियों
को बाह्यस्त्रोतीकृत
करने
से निवेश
की आवश्यकता
कम हो सकती है क्योंकि
वे उन गतिविधियों
में निवेश
करते
हैं जिन्हें
व्यापार
चलाता
है। यदि एक व्यापार
किसी
बाह्यस्त्रोतीकरण
एजेंसी
के कारोबार
में हिस्सेदारी
रखता
है तो उसे लागत कम करने का लाभ प्राप्त
होता
है तथा साथ ही उसे बाह्यस्त्रोतीकरण
कम्पनी
के लाभों
में भी हिस्सा
प्राप्त
होता
है।
5. आर्थिक
विकास
के लक्ष्य
को हासिल
करने
के लिए - बाह्यस्त्रोतीकरण
मेजबान
देशों
में उद्यमशीलता,
रोजगार
और निर्यात
को बढ़ावा
देता
है। यह उन देशों
में आर्थिक
विकास
को प्रोत्साहित
करता
है जो बाह्यस्त्रोतीकरण
व्यवसाय
करते
हैं।
आॅनलाईन
लेनदेनों
के लिए भुगतान
निम्नलिखित
तरीकों
से किया जा सकता है:-
1. क्रेडिट
या डेबिट
कार्ड
- यह सबसे व्यापक
रूप से इस्तेमाल
भुगतान
माध्यम
होता
है। क्रेडिट
कार्ड
क्रेता
को उधार खरीद की अनुमति
देता
है। डेबिट
कार्ड
क्रेता
को अपने बैंक खाते में पड़ी राशि की सीमा तक की खरीद करने की अनुमति
देता
है।
2. नेट-बैंकिंग
- बहुत
सारे
बैंक
अपने
उपभोक्ताओं
को नेट के माध्यम
से धन के इलेक्ट्राॅनिक
हस्तांतरण
की सुविधा
देते
हैं।
एक ग्राहक
आॅनलाईन
विक्रेता
के खाते में आवश्यक
धन हस्तांतरित
कर सकता है जिसके
पश्चात्
विक्रेता
माल सुपुर्द
करेगा।
3. डिजीटल
नकदी
- यह इलेक्ट्राॅनिक
मुद्रा
को एक प्रारूप
होता
है। ग्राहक
द्वारा
बैंक
में नकदी जमा कराने
के पश्चात्
बैंक
डिजीटल
नकदी
के सौदे करता है। इंटरनेट
पर खरीदारी
तथा भुगतान
करने
के लिए ग्राहक
डिजीटल
नकदी
का उपयोग
करता
है।
4. सुपुर्दगी
पर भुगतान
- माल की भौतिक
डिलीवरी
के समय, खरीदार
आॅनलाइन
आदेश
दिये
गये माल के लिए नकद भुगतान
करता
है। इसमें
भुगतान
नकद में किया जाता है।
5. चैक - कभी कभी, एक ऑनलाइन
विक्रेता
एक खरीदार
को चेक के माध्यम
से भुगतान
करने
के लिए कह सकता है। विक्रेता
ग्राहक
के पास से चेक के संग्रहण
की व्यवस्था
कर सकता है। राशि वसूल होने पर, माल की सुपुर्दगी
दी जा सकती है।
स्मार्ट कार्ड से प्राप्त होने वाले मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
(1) बहुउदेशीय उपकरण: यह एक छोटा-सा कार्ड होता है लेकिन अनेकों काम करता है; जैसे-क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पहचान पुष्टि, मेडिकल हिस्ट्री, टेलीफोन डायरेक्टरी, आदि| इन सभी कार्यों के लिए अलग-अलग कागज रखने व संभालने की जरुरत नहीं है|
(2) पूर्ण सुरक्षा: क्योंकि स्मार्ट कार्ड टेम्पर प्रूफ होता है इसलिए इसमें संगृहीत देता से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती इसके उपयोग के लिए पिन की जरुरत होती है| उपोगकर्ता के उँगलियों के निशान व उसकी फोटो इसे सुरक्षित रखने में मदद करते हैं| यदि कोई व्यक्ति स्मार्ट कार्ड का अवैधानिक प्रोयोग करने की कोशिश करे तो कार्ड रीडर उसे स्वीकार नहीं करता बल्कि कार्ड को ब्लॉक कर देता है|
(3) गतिशीलता: स्मार्ट कार्ड को कहीं भी आसानी से ले जाया सकता है| यह न तो स्थान घेरता है और न ही इसमें भार होता है|
(4) अधिक संग्रहण क्षमता: स्मार्ट कार्ड में बड़ी मात्र में देता स्टोर किया जा सकता है| इसकी संग्रहण क्षमता प्राय: 8k mes 128 K bits (1 k = 1000 bits) होती है|
(5) आसान प्रयोग: स्मार्ट कार्ड एक ऐसा उपकरण है जिसे कोई भी आसानी से उपयोग में ला सकता है| इसलिए इसे उपभोक्ता अनुकूल उपकरण कहा जाता है|
सेवाओं के बाह्यकरण की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
(i) अच्छी क्वालिटी की सेवाएं प्राप्त करना: एक ही कंपनी का अनेक क्रियाओं में विशिष्टिकरण नहीं हो सकता| यदि कोई कंपनी सभी क्रियाओं को स्वयं ही पूरा करने की कोशिश करती है तो प्रदान की जाने वाली सेवाओं की क्वालिटी पर विपरीत प्रभाव पड़ने की पूरी सम्भावना रहती है| इस कठिनाई से बचने की लिए सेवाओं का बाह्यकरण अथवा सेवाओं को बाहर से प्राप्त करने की आवश्यकता होती है|
(ii) सेवाओं में स्थाई विनियोग से बचना: यदि कोई कंपनी से सेवाएं संगठन के अंदर ही उपलब्ध करती हैं तो उसे इनके लिए अलग-अलग विभागों की स्थापना करनी होगी जिस पर भरी स्थाई विनियोग करना पड़ता है| बाजार में ये सेवाएं बहुत कर लागत पर बिना कुछ विनियोग किए उपलब्ध रहती है| अतः ऐसा न्यायसंगत लगता है की इन सेवाओं को कंपनी के बाहर से ही प्राप्त कर लिया जाए|
(iii) व्यवसाय को सुविधापूर्वक ढंग से चलाना: सेवाओं के बाह्यकरण की आवश्यकता व्यवसाय को सुविधापूर्वक तरीके से चलाने के लिए होती है| व्यवसायी का ध्यान अनेक छोटी-छोटी क्रियाओं से हटकर मुख्य क्रिया की ओर केंद्रित हो जाता है| इससे पूरा व्यवसाय बढ़िया तरीके से चलता है|
यह कथन बाह्यस्त्रोतीकरण
की समस्याओं
को सामने
लाता
है। ये समस्याऐं
हैं:
1. गोपनीयता
- बाह्यस्त्रोतीकरण
में बाह्यकरण
एजेंसी
में बहुत सूचनाओं
का आदान-प्रदान
शामिल
होता
है। यदि बाह्यकरण
एजेंसी
ऐसी सूचनाओं
को गोपनीय
नहीं
रखती
है तो ये प्रतिस्पर्धियों
के पास चली जाती है तथा इससे संगठन
के हित को नुकसान
हो सकता है। इसके अलावा,
यदि संगठन
अपनी
सम्पूर्ण
प्रक्रिया
का बाह्यकरण
करता
है तो बाह्यकरण
एजेंसी
एक प्रतिस्पर्धी
व्यवसाय
खोल सकता है।
2. परिश्रम
की खरीद - वह संगठन
जो अपनी गतिविधियों
को बाह्यकृत
करती
है वह मेजबान
देश के कम लागत वाले मजदुरों
का अधिकतम
विस्तार
करने
की कोशिश
करता
है। बाह्यकृत
किया
हुआ कार्य
साधारण
होता
है जिससे
यह बाह्यस्त्रोतीकरण
साझेदार
की प्रतिस्पर्धा
तथा क्षमता
को अधिक नहीं बढ़ाती
है।
3. नैतिक
मामले
- बाह्यस्त्रोतीकरण
में कई नैतिक
नियमों
को अनदेखा
करता
है। वास्तव
में, बाह्यस्त्रोतीकरण
मेजबान
देश में बाल मजदूरी,
कम मजदूरी
भुगतान
आदि जैसी अनैतिक
गतिविधियों
को बढ़ावा
देता
है।
4. स्वदेश
में अप्रसन्नता
- बाह्यस्त्रोतीकरण
में एक प्रक्रिया
को मेजबान
देश में हस्तांतरित
करने
को शामिल
किया
जाता
है। यदि अपना देश बेरोजगारी
की समस्या
से पीडि़त
होता
है तो यह अपने देश में अप्रसन्नता
का कारण बन सकता है।

ई-व्यवसाय
की मुख्य
सीमाएं
निम्नलिखित
हैं:
1. कम व्यक्तिगत
संबंध
- ई-व्यापार
में ग्राहकों
के साथ पारस्परिक
संपर्क
का अभाव होता है। इस कारण से, यह वस्त्र,
आभूषण
आदि जैसे उत्पादों
के लिए व्यापार
का कम उपयुक्त
प्रारूप
होता
है क्योंकि
इन्हें
ग्राहकों
से अधिक व्यक्तिगत
संपर्क
की आवश्यकता
होती
है।
2. भौतिक
वितरण
में समय लगना - इसमें
ऑनलाइन
आदेश
देने
और माल की भौतिक
सुपुर्दगी
प्राप्त
करने
में समय अंतराल
होता
है। जो ग्राहक
को हताश कर सकता है।
3. लेन-देन में जोखिम
- ये लेनदेन
इंटरनेट
पर किये जाते हैं। इसमें
पक्षकारों
के बिच कोई व्यक्तिगत
संबंध
नहीं
होता
है। इसमें
प्रतिरूपण,
गोपनीय
जानकारी
का खुलासा,
डाटा
हैकिंग
आदि खतरा होता है इसलिए,
ये लेनदेन
ज्यादा
जोखिम
भरे होते हैं।
4. प्रौद्योगिकी
की आवश्यकता
- इसमें
दोनों
पक्षकारों
को आधुनिक
प्रौद्योगिकी
की जानकारी
होना
आवश्यक
होता
है। जिस व्यक्ति
को इसके बारे में जानकारी
नहीं
होती
वह इस व्यवसाय
को नहीं कर सकता है।
5. प्रतिरोध
- कभी कभी संगठनों
को ई-व्यापार में प्रवेश
की योजना
के लिए कर्मचारियों
के प्रतिरोध
का सामना
करना
पड़ता
है। यदि कर्मचारी
आईटी
से अच्छी
तरह वाकिफ
नहीं
हो तो उन्हें
लगता
है कि ये उनके हितों
को नुकसान
पहुंचा
सकती
है।
6. नैतिक
चिंताएं
- उन्नत
तकनीक
द्वारा
कंप्यूटर
पर किसी कि फाइलों,
ई-मेल खाते, वेब साइटों
आदि पर एक गुप्त
और कड़ी नजर रखना संभव हो जाता है। यह कर्मचारियों
के दृष्टिकोण
से कुछ नैतिक
चिंताओं
को भड़काती
है।
ए.टी.एम की उपयोगिता को निम्नलिखित बिन्दुओं में स्पष्ट किया गया है:
1. नकदी निकलना: ए.टी.एम एक ऐसी मशीन है जिसमें से उपयोगकर्ता जब चाहे नकदी निकल सकता है ए.टी.एम से नकदी निकलने की लिए मशीन में बैंक द्वारा जारी किया गया कार्ड डाला जाता है तथा व्यक्तिगत पहचान संख्या टाइप की जाती है| ऐसा करते ही वांछित धन मशीन से बाहर आ जाता है|
2. नकदी जमा: ए.टी.एम से नकदी निकाली ही नहीं जा सकती बल्कि जमा भी कराई जा सकती है| जैसे ही उपयोगकर्ता नकदी मशीन में डालता है| मशीन नोटों की गिनती सुरु कर देती है| इसके साथ ही मशीन यह भी बताती है की कितने नोट असली हैं और कितने नकली| कुल जमा हो सकने वाली राशि ए.टी.एम स्क्रीन पर प्रदर्शित होने लगती है|
ए.टी.एम धन जमा करने की निम्न दो विधियाँ हैं :
(i) ए.टी.एम कार्ड द्वारा (ii) प्रत्यक्ष विधि
3. विशेष पूछताछ: जैसाकि स्पष्ट है की जैसे ही हम ए.टी.एम में कार्ड डालते हैं तो स्क्रीन पर कई विकल्पों की एक सूची प्रदर्शित होती है| उसी सूची में एक विकल्प '’शेष पूछताछ का होता है| इस बटन को दबाने से स्क्रीन पर हमारे बैंक खाते का शेष उपस्थित हो जाता है|
4. लघु विवरण: लघु विवरण विकल्प के प्रयोग से उपयोगकर्ता अपने खाते में हुए पिछले कई व्यवहारों की लिखित सूची प्राप्त कर सकता है|
5. बिलों का भुगतान: ए.टी.एम के द्वारा हम बिजली,पानी,टेलीफोन, आदि के बिल भी जमा करवा सकते हैं| लेकिन यह जृति नहीं है की सभी बैंकों के ए.टी.एम पर यह सुविधा उपलब्ध हो| एक बैंक का जिस कंपनी से समझोता होगा केवल उसी के बिल द्वारा जमा हो सकते हैं|
6. धन स्थानान्तरण: ए.टी.एम पर उपस्थित इस विकल्प के प्रयोग से उपयोगकर्ता धन अपने खाते से किसी अन्य के खाते में स्थानांतरित कर सकता है| ए.टी.एम कार्ड मशीन में डालकर व धन प्राप्तकर्ता का खाता संख्या टाइप करके यह किया जा सकता है|
7. मोबाइल रिचार्ज: ए.टी.एम द्वारा पूर्वदत्त मोबाइल उपभोगता अपना मोबाइल रिचार्ज कर सकते हैं| ए.टी.एम पर इस विकल्प का प्रोयग करते ही धन उपयोगकर्ता के खाते में डेबिट तथा रिचार्ज सेवा प्रदान करने वाली कंपनी के खाते में क्रेडिट हो जाता है| तुरंत ही मोबाइल फ़ोन पर रिचार्ज हो जाने का सन्देश आ जाता है|
A.
ब्रिटेन।
B.
जर्मनी।
C.
संयुक्त राज्य अमेरिका।
D.
कनाड़ा।
आकस्मिक दायित्व वे दायित्व हैं, जो अभी तक तो नहीं आए हैं, इसका घटन संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ जहाँ एकाधिकार के खिलफ सरकार ने एन्टी-ट्रस्ट अधिनियम लागू किया ताकि समाज की सुरक्षा तथा सुधार को बढ़ाया जा सके।
A.
अनियंत्रित अपशिष्ट।
B.
बाज़ार में मांग रहित समूहों के साथ व्यापार।
C.
पर्यावरणीय उत्पादों का उत्पादन।
D.
प्रदुषण नियंत्रण करने वाले यंत्रों का उत्पादन।
पर्यावरण को गंदा करने का सबसे बड़ा कारण अपशिष्ट है। इसलिए अपशिष्ट को नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौती है।
A.
वेश्विक केन्द्र।
B.
ग्लोबल वार्मिंग।
C.
हरित गृह गैस का निकलना।
D.
पर्यावरण अनुकूल परिवर्तन।
ओजान परत में छेद होने के कारण सुर्य की किरणे पृथवी तक पहूँचती है जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती है।
A.
वायु प्रदुषण।
B.
जल प्रदुषण।
C.
ध्वनि प्रदुषण।
D.
मृदा प्रदुषण।
ध्वनि प्रदुषण बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है इसलिए कम सुनाई देना ध्वनि प्रदुषण के कारण हो सकती है।
A.
उच्च प्रबंधनों की घोषणा।
B.
उचित मशीनरी की स्थापना।
C.
कार्यकर्ताओं की भागीदारी।
D.
व्यवसाय का सरकारी स्वामित्व ।
उच्च प्रबंधन की घोषणा से उचित मशीनरी की स्थापना से तथा कार्यकर्ताओं की भागीदारी से आधारभूत नीतियों को लागु किया जा सकता है।
A.
ऑटोमोबाइल से।
B.
फार्मा उद्योगों से।
C.
खनन उद्योगों से।
D.
निर्माण उद्योगों से।
वायु प्रदुषण का मुख्य कारण कार्बन मोनॉक्साइड है जो अधजले पदार्थों से बनता है। यह ऑटोमोबाइल क्षेत्रों से निकलता है।
A.
किसी भी तरीके से बड़ा लाभ कमाने से।
B.
ज्यादा से ज्यादा वस्तुओं के उत्पादन से।
C.
समाज की निरन्तर सेवा से।
D.
असामाजिक तरीके से विज्ञापन करने से।
व्यवसाय का विकास व समृद्धता सिर्फ समाज की निरन्तर सेवा से सम्भव है। इसी तथ्य को मानते हुए व्यवसाय के द्वारा अपनायी गई सामाजिक जिम्मेदारी ही इसके अस्तित्व व विकास को वर्णित करती है।
A.
आर्थिक जिम्मेदारी को।
B.
मानवीय अधिकारों को।
C.
नीतियों को।
D.
सामाजिक जिम्मेदारी को।
फर्म के हितों व सामाजिक हितों के कारण ही व्यवसाय को सामाजिक जिम्मेदारी की आवश्यकता है।
A.
ब्रिटेन।
B.
जर्मनी।
C.
संयुक्त राज्य अमेरीका।
D.
कनाड़ा।
इसका घटन ब्रिटेन में निर्देशकों के उत्तरदायित्व को सुधारने के उद्देश्य से किया जाता है।
A.
यह लाभ कमाने वाली संस्था है।
B.
यह बाज़ारीक गतिविधि है।
C.
यह विभिन्न पूँजीगत समूहों से सम्बंधित होती है।
D.
समाज की सेवा इसका प्राथमिक उद्देश्य है।
व्यवसाय विभिन्न पूँजीगत समूहों से जुड़ा रहता है जैसे ग्रुप अंशधारक, कार्यकर्ता, सरकार, समाज व उपभाक्ता।
A.
आर्थिक जिम्मेदारी।
B.
कानूनी जिम्मेदारी।
C.
सामाजिक जिम्मेदारी।
D.
पूँजीगत जिम्मेदारी।
पूँजीगत जिम्मेदारी व्यवसाय की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है और इसे सामाजिक जिम्मेदारी में भी शामिल नहीं किया जाता है।
(क) कविः आत्मनं निखिलसङ्गे योजयितुम् इच्छति।
(ख) ईश्वरस्य छन्दः शान्तम् अस्ति।
(ग) मानसस्य विकासार्थम् अत्र प्रार्थना क्रियते।
(घ) मम चित्तं चरणपद्मे संलग्नं स्यात्।
(ङ) कविः ईश्वरं मानसं निर्भयं कर्तुं कथयति ।
(च) अस्याः कवितायाः रचयिता श्री रविन्द्रनाथ ठाकुरः ।
| शब्द | अर्थ | पर्याय/समानार्थक |
| विकसितम् | खिला हुआ, विकसित | ................... |
| निर्मलम् | पवित्र, स्वच्छ | ................... |
| प्रबुद्धम् | जागरुक | ................... |
| अनलसम् | आलस्यविहीन | ................... |
| आन्तरम् | हृदय को | ................... |
| योजय | लगा दो | ................... |
| छन्दः | गीत | ................... |
| नन्दितम् | प्रसन्न | ................... |
|
शब्द |
अर्थ |
पर्याय/समानार्थक |
|
विकसितम् |
खिला हुआ, विकसित |
प्रफुल्लम् |
|
निर्मलम् |
पवित्र, स्वच्छ |
पवित्रम् |
|
प्रबुद्धम् |
जागरुक |
जागरितम् |
|
अनलसम् |
आलस्यविहीन |
आलस्यविहीनम् |
|
आन्तरम् |
हृदय को |
अन्तःकरणम् |
|
योजय |
लगा दो |
नियोज्य |
|
छन्दः |
गीत |
गानम् |
|
नन्दितम् |
प्रसन्न |
हृष्टम् |
हे मानसचर मम मानसम् विकसितम् कुरु।
हे अयि चिर सुन्दर (मम मानसं) उज्ज्वलम् निर्मलम् कुरु।
हे उद्यतम् अतिप्रबुद्धम् अपि निर्भयम् कुरु।
हे सुशिवम् अनलसम् अति निःसंशयम् कुरु।
हे आन्तरतर मम आन्तरम् विकसितम् कुरु।
माम् निखिलसङ्गे योजय, मम बन्धनम् मुञ्च।
सकलकर्मसु सञ्चारय, शान्तम् तव छन्दः।
हे मम चित्तम् चरणपद्मे निष्पन्दितम् कुरु।
हे नन्दितम्, अतिनन्दितम् अभिनन्दितम् कुरु।
हे आन्तरतर ! मम आन्तरम् विकसितम् कुरु।
| भूतकालिकक्रियापदानि | क्तवतु प्रत्ययान्तपदानि |
| (क) यथा अयापयत् | यापितवान् |
| (ख) .................. | कृतवान् |
| (ग) अभवत् | ..................... |
| (घ) .................. | तप्तवान् |
| (ङ) .................. | आनीतवान् |
| (च) अयच्छत् | .................. |
| (छ) ................. | गतवान् |
| (ज) अजानात् | ................. |
| (झ) प्राप्नोत् | ................. |
|
भूतकालिकक्रितरपदानि |
क्तवतु प्रत्ययानातपदानि |
|
(क) यथा अयापयत् |
यापितवान् |
|
(ख) अकरोत् |
कृतवान् |
|
(ग) अभवत् |
भूतवान् |
|
(घ) अतपत् |
तप्तवान् |
|
(ङ) आनयत् |
आनीतवान् |
|
(च) अयच्छत् |
दत्तवान् |
|
(छ) अगच्छत् |
गतवान् |
|
(ज) अजानात् |
ज्ञातवान् |
|
(झ) प्राप्नोत् |
प्राप्तवान् |
| विशेषणानि | विशेष्याणि |
| (क) महान्ति | (1) वयसि |
| (ख) तस्मिन् | (2) उपदेशाः |
| (ग) मुष्टिकामात्रम् | (3) रात्रिम् |
| (घ) अल्पे | (4) कष्टानि |
| (ङ) परमः | (5) काले |
| (च) प्रमुखाः | (6) धर्मः |
| (छ) पट्टमहिषी | (7) ओदनम् |
| (ज) कृष्णाम् |
(8) मृगावती |
|
विशेषणानि |
विशेष्याणि |
|
(क) महान्ति |
(1) कष्टानि |
|
(ख) तस्मिन् |
(2) काले |
|
(ग) मुष्टिकामात्रम् |
(3) ओदनम् |
|
(घ) अल्पे |
(4) वयसि |
|
(ङ) परमः |
(5) धर्मः |
|
(च) प्रमुखाः |
(6) उपदेशाः |
|
(छ) पट्टमहिषी |
(7) मृगावती |
|
(ज) कृष्णाम् |
(8) रात्रिम् |
| (क) सारयुक्ताम् | .................... |
| (ख) अनुजस्य | .................... |
| (ग) मानः | .................... |
| (घ) आदाय | .................... |
| (ङ) पृष्ठतः | ................... |
| (च) सुखदा | ................... |
| (छ) आदौ | ................... |
| (ज) प्रशंसनीयः | ................... |
(क) सारहीनताम्
(ख) अग्रजस्य
(ग) अपमानः
(घ) प्रदाय
(ङ) पुरतः
(च) दुःखदा
(छ) अन्ते
(ज) गर्हणीयः