प्रकृति से प्राप्त होने वाले संसाधन प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं । उदाहरण: कोयला, पेट्रोलियम आदि ।
सीएनजी (CNG) अथवा संपीडित प्राकृतिक गैस वाहनों के लिए सबसे कम प्रदूषक ईंधन है ।
प्राकृतिक गैस में 95% मेथेन और 5% प्रोपेन, एथिलीन और ऐथेन अन्य हाइड्रोकार्बन होते हैं ।
अक्षय प्राकृतिक संसाधन: ये प्राकृतिक संसाधन प्रकृति
विश्व का प्रथम तेल का कुआँ पेनसिलवेनिया अमेरिका में 1859 में प्रवेधित (ड्रिल) किया गया था |
बिटुमेन एक पेट्रोलियम उत्पाद है । आजकल पक्की सड़कों के निर्माण के लिए कोलतार के स्थान पर बिटुमेन का उपयोग किया जाता है ।
कोयला गैस कोक प्राप्त करने के प्रक्रम के दौरान प्राप्त होने वाला सह-उत्पाद है ।
कोलतार एक काला, गाढ़ा और अरुचिकर गंध वाला द्रव है । यह लगभग 200 पदार्थों का मिश्रण होता है ।
पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों
1) पेट्रोरसायनों का उपयोग अपमार्जकों के निर्माण में किया जाता है ।
3) इनका उपयोग पॉलिथीन के निर्माण में किया जाता है ।
(i) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से प्राप्त होने वाले लाभदायक रसायन पेट्रोरसायन कहलाते हैं ।
सूर्य का प्रकाश और वायु अक्षय प्राकृतिक संसाधनों के उदाहरण हैं । कोयला और पेट्रोलियम समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधनों के उदाहरण हैं ।
पेट्रोलियम गैस
त्रिपुरा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कृष्णा गोदावरी डेल्टा आदि जगहों पर प्राकृतिक गैसों के भण्डार पाये जाते हैं ।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भण्डार जल के ऊपर पाये जाते हैं क्योंकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जल से हल्के होते हैं और ये जल में मिश्रित नहीं होते हैं ।
(a) कोक का उपयोग स्टील के निर्माण और कई धातुओं के निष्कर्षण में किया जाता है ।
(b) कोलतार का उपयोग पक्की सड़कों के निर्माण में किया जाता है ।
(c) कोयला-गैस का उपयोग कोयला प्रक्रमण संयन्त्रों के पास स्थित विभिन्न उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है।
जीवश्म ईंधनों का निर्माण प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनका निर्माण एक धीमा प्रक्रम है । इसके लिए उच्च ताप और दाब की आवश्यकता होती है और इसमें लाखों वर्ष लगते हैं । जीवाश्म ईंधनों के निर्माण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्रयोगशाला में उत्पन्न नहीं की जा सकती हैं ।
इसके निम्न लाभ हैं:
1. ये कम प्रदूषणकारी होते हैं ।
2. ये स्वच्छ ईंधन हैं ।
3. एलपीजी (LPG) का एक बहुत बड़ा लाभ यह भी है कि इसका उपयोग घरों और उद्योगों में सीधे ही जलाने के लिए किया जा सकता है|
कोयले के उपयोग हैं:
1. तापीय शक्ति संयंत्रों में विद्युत के निर्माण हेतु ।
2. कोक, कोलतार और अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों के निर्माण में ।
3. घरों में खाना बनाने के लिए ईंधन के रूप में ।
पेट्रोलियम परिष्करणी का चित्र निम्न प्रकार है :

पेट्रोलियम को पृथ्वी की सतह में एक छेद करके और उस छेद में एक पाइप डालकर चट्टान की सतह के ऊपर लाया जाता है । सबसे पहले उच्च दाब के साथ प्राकृतिक गैस बाहर निकलती है । उसके पश्चात पेट्रोल को पम्प की सहायता से बाहर निकाल कर टंकी में एकत्रित कर लिया जाता है और इसके परिष्करण के लिए इसे आगे भेज दिया जाता है ।
पेट्रोलियम गैस, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीज़ल, स्नेहक तेल, पैराफिन मोम और बिटुमेन पेट्रोलियम के संघटक हैं ।
|
क्र.सं. |
पेट्रोलियम के संघटक |
उपयोग
|
|
1. |
द्रव रूप में पेट्रोलियम गैस (LPG) |
घरों और उद्योगों के लिए ईंधन के रूप में |
|
2. |
पेट्रोल |
मोटर ईंधन, वैमानिक ईंधन, शुष्क धुलाई के लिए विलायक |
|
3. |
मिट्टी का तेल |
स्टोव, लैम्प और जेट वायुयानों के लिए ईंधन |
|
4. |
डीज़ल |
भारी मोटर वाहनों, विद्युत जनित्रों के लिए ईंधन |
|
5. |
स्नेहक तेल |
स्नेहन में |
|
6. |
पैराफिन मोम |
मरहम, मोमबत्ती, वैसलीन आदि में । |
|
7. |
बिटुमेन |
पेन्ट एवं सड़क निर्माण में । |
प्राकृतिक गैस एक बहुत महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है । इसका मुख्य घटक मेथेन है । इसे उच्च दाब पर संग्रहित
यह एक स्वच्छ ईंधन है । सीएनजी (
मृत वनस्पति के , धीमी प्रक्रिया द्वारा कोयले में बदलने को कार्बनीकरण कहते हैं। कोयले के प्रक्रमण द्वारा प्राप्त तीन उत्पाद निम्न हैं :
1) कोक: यह कार्बन का शुद्धतम रूप है। यह कठोर, सरंध्र और काले रंग का होता है । इसका उपयोग स्टील के निर्माण और कई धातुओं के निष्कर्षण में किया जाता है ।
2) कोयला-गैस: इसका उपयोग कोयला प्रक्रमण संयन्त्रों के पास स्थित विभिन्न उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग सड़क पर प्रकाश की व्यवस्था के लिए भी किया जाता है ।
3) कोलतार: यह काले रंग का अरुचिकर गंध वाला गाढ़ा तरल है । कोलतार कई पदार्थों का मिश्रण है । इसका उपयोग रंजक, दवाई, इत्र, नैफ्थलीन की गोलियां आदि बनाने में किया जाता है ।
A.
बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है ।
B.
करंट लग सकता है ।
C.
आग को बढ़ा सकता है ।
D.
विद्युत आपूर्ति को बंद कर सकता है ।
पानी विद्युत का सुचालक होता है ।
A.
केवल एक अवस्था में
B.
दो अवस्थाओं में
C.
तीन अवस्थाओं में
D.
संक्रमण अवस्था में
ये ठोस, द्रव और गैसीय अवस्था में पाये जाते हैं ।
A.
ऐन्टीमनी
ट्राईसल्फाइड, पोटैशियम
क्लोरेट और सफेद
फॉस्फोरस
B. ऐन्टीमनी ट्राईसल्फाइड, पोटैशियम क्लोरेट और लाल फॉस्फोरस
C. ऐन्टीमनी पेन्टासल्फाइड, पोटैशियम क्लोरेट और सफेद फॉस्फोरस
D. ऐन्टीमनी पेन्टासल्फाइड, पोटैशियम क्लोरेट और लाल फॉस्फोरस
ऐन्टीमनी ट्राईसल्फाइड, पोटैशियम क्लोरेट और सफेद फॉस्फोरस के मिश्रण को थोड़े गोंद और स्टार्च के साथ एक उचित लकड़ी से बनी तीली के शीर्ष पर लगाते हैं । जब इस तीली को किसी खुरदरी सतह से रगड़ा जाता है तो घर्षण की ऊष्मा के कारण सफेद फॉस्फोरस जलने लगता है ।
A.
पतझड़ में
B. वसंत ऋतु में
C. अत्यधिक सर्दी में
D. अत्यधिक गर्मी में
गर्मियों के मौसम में भीषण गर्मी के दौरान कुछ स्थानों पर सूखी घास आग पकड़ लेती है । घास से यह पेड़ों तक फैल जाती है और बहुत ही जल्दी पूरा जंगल जलने लगता है । ऐसी आग को नियंत्रित कर पाना बहुत कठिन होता है ।
A.
कार्बन मोनोक्साइड
B.
सल्फर डाईऑक्साइड
C.
ऑक्सीजन
D.
कार्बन डाईऑक्साइड
वायुमण्डल में कार्बन डाईऑक्साइड की बढ़ी हुई मात्रा विश्व ऊष्णन का कारण है । विश्व ऊष्णन पृथ्वी के वायुमण्डल के तापमान में होने वाली वृद्धि है ।
A.
कार्बन के ऑक्साइड
B.
फॉस्फोरस के ऑक्साइड
C.
सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
D.
कैल्शियम के ऑक्साइड
अम्ल वर्षा, वर्षा जल होता है जिसमें सल्फर के ऑक्साइड (SO2 और SO3) तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NO2 और NO) घुले हुए होते हैं ।
A.
बाह्य क्षेत्र
B.
मध्य क्षेत्र
C.
आंतरिक क्षेत्र
D.
अदीप्त क्षेत्र
एक सुनार ज्वाला के सबसे बाहरी भाग का उपयोग करता है क्योंकि इस क्षेत्र में सोने या चांदी को पिघलाना आसान होता है ।
A.
किलोजूल/किलोग्राम (kJ/kg)
B.
किलोकैलोरी (Kcal)
C.
कैलोरी (Calories)
D.
जूलकिलोग्राम (JKg)
एक पदार्थ के ऊष्मीय मान की इकाई किलोजूल प्रति किलोग्राम (kJ/kg) होती है ।
A.
ऑक्सीजन
B.
प्रकाश
C.
वायु
D.
विद्युत धारा
एक ईंधन के दहन से ऊष्मा, प्रकाश और ऊर्जा उत्पन्न होती है ।
जिस पदार्थ का दहन होता है दाह्य कहलाता है ।
कार्बन मोनोक्साइड ।
वह न्यूनतम ताप जिस पर कोई पदार्थ जलने लगता है, उसका ज्वलन ताप कहलाता है ।
सबसे बाहरी भाग ।
पेट्रोल और LPG ।
ऑक्सीजन ।
हमें तुरंत उस व्यक्ति को एक कंबल से ढक देना चाहिए । यह कंबल में वायु के प्रवेश को रोक देता है । इसके परिणामस्वरूप आग बुझ (जलाने के लिए वायु आवश्यक है) जाती है ।
CO2 ऑक्सीजन से भारी होती है । अतः यह आग को कंबल की तरह लपेट लेती है । इसकारण ईंधन और ऑक्सीजन के मध्य संपर्क टूट जाता है और आग पर नियंत्रण पा लिया जाता है तथा CO2 विद्युत उपकरणों को नुकसान भी नहीं पहुँचाती है ।
दहन के लिए किसी पदार्थ को उसके ज्वलन ताप तक गर्म करना आवश्यक होता है । यदि वह ज्वलन ताप तक नहीं पहुँचता है तो दहन प्रारम्भ नहीं होता है । हरी पत्तियों में नमी होती है जो इनके ज्वलन ताप को बढ़ा देती है । अतः हरी पत्तियों के ढेर को जलाना कठिन होता है । सूखी पत्तियों का ज्वलन ताप कम होता है । अतः ये आसानी से आग पकड़ लेती है ।
हाँ, पानी को कागज के कप में लैंप पर उबालना संभव है । कागज के कप से ऊष्मा पानी को स्थानांतरित कर दी जाती है जिसके कारण कागज के कप का ज्वलन ताप बढ़ जाता है और कागज का कप आग नहीं पकड़ता है ।
(i) सोडा-अम्ल अग्निशामक का उपयोग ठोस पदार्थ जैसे लकड़ी, कागज आदि के जलने से लगी आग को बुझाने के लिए होता है ।
(ii) सोडा-अम्ल अग्निशामक का उपयोग ज्वलनशील द्रवों के कारण लगी आग को बुझाने के लिए उपयोग में नहीं लिया जा सकता क्योंकि पेट्रोल या तेल इससे भारी होते हैं । अतः यह पेट्रोल या तेल में डूब जाता है ।
कार्बन मोनोक्साइड गर्म लैड ऑक्साइड को लैड और ज़िंक ऑक्साइड को ज़िंक में अपचयित कर देती है ।
(i)

(ii)

आदर्श ईंधन के गुण हैं:
i. यह आसानी से उपलब्ध और सस्ता होना चाहिए ।
ii. यह जलने पर अधिक ऊष्मा (उच्च ऊष्मीय मान) प्रदान करे ।
iii. यह एक हवा मे उचित दर (उचित ज्वलन ताप पर) से जलना चाहिए ।
(i)
1. LPG का ऊष्मीय (55000 kJ/kg) मान लकड़ी के ऊष्मीय मान (17000-22000 kJ/kg) की तुलना में बहुत अधिक होता है ।
2. LPG जलने पर कोई धुआँ नहीं देती है और कोई हानिकारक गैस उत्पन्न नहीं करती है लेकिन लकड़ी जलने पर धुआँ और हानिकारक गैसें जैसे CO देती है ।
इसलिए LPG लकड़ी की तुलना में अच्छा घरेलू ईंधन है ।
(ii) विद्युत उपकरणों में लगी आग को बुझाने के लिए पानी का उपयोग नहीं किया जाता है क्योंकि पानी विद्युत का चालन कर सकता है और आग बुझाने वाले को हानि पहुँचा सकता है ।
ईंधन के दहन के तीन दुष्प्रभाव निम्न है:
1. लकड़ी
2. ईंधनों के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोक्साइड गैस मुक्त होती है । यह अत्यन्त विषैली गैस है ।
3. कोयले और डीजल के दहन से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है । यह अत्यन्त दमघोंटू और संक्षारक गैस है ।
| ईंधन | ऊष्मीय मान (kJ/kg) |
| लकड़ी | |
| कोयला | |
| पेट्रोल |
|
ईंधन |
ऊष्मीय मान ( |
|
लकड़ी |
17000-22000 |
|
कोयला |
25000-33000 |
|
पेट्रोल |
45000 |
(i) दहन के लिए तीन शर्तें आवश्यक होती है । ये है :
1. ईंधन ।
2. वायु या ऑक्सीजन ।
3. ऊष्मा (ईंधन को उसके ज्वलन ताप तक पहुंचाने के लिए) ।
(ii) (a) अग्निशामक या तो वायु की आपूर्ति बंद करता है या ईंधन का ताप कम कर देता है अथवा दोनों करता है ।
(b) सोडा-अम्ल अग्निशामक सिलेंडरों में सोडियम बाईकार्बोनेट विलयन और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल भरा होता है ।
बंद कमरे में ऑक्सीजन की सीमित आपूर्ति होती है । इस कारण आंशिक दहन होता है । कोयले का आंशिक दहन कार्बन मोनोक्साइड उत्पन्न करता है जो अत्यधिक विषैली गैस है । यदि कोई व्यक्ति कार्बन मोनोक्साइड गैस में श्वांस लेता है तो हीमोग्लोबीन के साथ जुड़कर कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन का निर्माण कर लेती है, जो हीमोग्लोबिन को ऑक्सीजन को अवशोषित नहीं करने देता है । इसलिए ऑक्सीजन शरीर के विभिन्न भागों तक नहीं पहुँच पाती है जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हो सकती है ।
हम दो कागज की शीटों को मोडकर दो कप बनाते हैं । एक कप मे थोड़ा पानी डालते हैं । अब दोनों कप को अलग-अलग मोमबत्ती के ऊपर गर्म करते हैं । हम देखते हैं कि बिना पानी वाला (खाली) कप जलने लगता है और वह कप जिसमे पानी है नहीं जलता है । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खाली कप जल्द ही अपने ज्वलन ताप पर पहुँच जाता है और जलने लगता है ।
परंतु पानी वाले कप को दी जाने वाली ऊष्मा संवहन द्वारा यह पानी को स्थानांतरित कर देता है । अतः जल की उपस्थिती के कारण कप अपने ज्वलन ताप तक नहीं पहुँच पाता है और यह नहीं जलता है । अतः किसी भी पदार्थ को जलने के लिए उसका अपने ज्वलन ताप तक पहुँचना आवश्यकता होता है

(i) सत्य
(ii) असत्य
सत्य कथन :- दहन एक रासायनिक प्रक्रम है ।
(iii) सत्य
(iv) सत्य
(v) असत्य
सत्य कथन :- दहन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है ।
(i) A, B, C, और D के नाम लिखिए ।
(ii) सबसे कम गर्म भाग कौनसा है ?
(iii) एक मोमबत्ती जलने पर लौ क्यों बनती है ?
(iv) सुनार सोने और चाँदी को पिघलाने के लिए ज्वाला के कौनसे भाग का उपयोग करता है ?
(v) मोमबती की लौ का एक क्षेत्र नीला क्यों होता है ?
(i)

(ii) D भाग सबसे कम गर्म भाग है ।
(iii) जब जलने वाला पदार्थ वाष्पित होता है केवल तभी लौ का निर्माण होता है । मोमबत्ती पैराफिन मोम की बनी होती है । पिघला हुआ गर्म मोम, बत्ती द्वारा ऊपर चढ़ता है और वाष्पीकृत हो जाता है । मोम की वाष्प ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड बनाती है और एक लौ के साथ जलती है ।
(iv) सुनार सोने और चाँदी को पिघलाने के लिए ज्वाला के सबसे बाहरी भाग का उपयोग करता है क्योंकि यह ज्वाला का सबसे गर्म भाग होता है ।
(v) नीले रंग का क्षेत्र कार्बन के कणों के आंशिक दहन के फलस्वरूप निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड के दहन के कारण होता है ।
A.
मृदा के कटाव में वृद्धि
B.
मृदा के कटाव में कमी
C.
नदी का निर्माण
D.
जंतुओं की वृद्धि
पादपों की जड़ें मिट्टी को कसकर पकड़ लेती हैं और मिट्टी के कटाव को रोकती हैं। इस प्रकार, पौधों की संख्या में कमी मिट्टी का कटाव में वृद्धि का कारण बनता है।
A.
चिड़ियाघर
B.
वन्यजीव अभ्यारण्य
C.
जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र/बायोस्फीयर रिजर्व
D.
नेशनल पार्क
वन्यजीव अभयारण्यों और बायोस्फीयर रिजर्व में, जानवरों को उनके प्राकृतिक परिवेश में रखा जाता है, जबकि चिड़ियाघर में उन्हें कैद करके रखा जाता है।
A.
समष्टि
B.
जीवमंडल
C.
जैवविविधता
D.
प्रवासी
पृथ्वी पर अलग-अलग तरह के जीव रहते हैं। इन जीवों ये विभिन्नताएँ जैव विविधता कहलाती है।
A.
आरक्षण अधिनियम
B.
वन अधिनियम
C.
संरक्षण अधिनियम
D.
परिस्थितिकी अधिनियम
वर्ष 1958 में भारत सरकार द्वारा वनों के आरक्षण और संरक्षण और उनके आसपास रहने वाले लोगों के लिए वन अधिनियम पारित किया गया।
A.
15.
B.
17.
C.
19.
D.
20.
एक अनुमान के अनुसार, 17 पूर्ण विकसित पेड़ 1 टन साधारण ग्रेड के अखबार के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। संख्या काम में ली गई विधि और पेपर के प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकती है।
A.
पत्तियों से
B.
लकड़ी से
C.
कपास से
D.
बीजों से
कागज पेड़ों से प्राप्त लकड़ी से बना होता है। लकड़ी से प्राप्त लुगदी संसाधित और पेपर की विभिन्न श्रेणियाँ और ग्रेड देने के लिए भिन्न रूप से उपचारित किया जाता है।
A.
प्रवासी पक्षी वर्ष के एक विशेष समय के दौरान की विस्थापित हो जाते हैं।
B.
प्रवासी पक्षी एक लंबी दूरी तय करते हैं।
C.
प्रवासी पक्षी अपने आपको अस्वास्थ्यकारी मौसम से बचाने के लिए प्रवास करते हैं।
D.
प्रवासी पक्षी निकटतम दूरी पर प्रवास करते हैं।
प्रवासी पक्षी अपने आपको अस्वास्थ्यकारी मौसम से बचाने के लिए वर्ष के एक विशेष समय के दौरान लंबी दूरी तय करते हैं।
A.
जिनकी संख्या घट रही है
B.
जिनकी संख्या बढ़ रही है
C.
लंबे समय के लिए नहीं रहती है
D.
केवल एक विशिष्ट क्षेत्र में ही पाये जाते हैं
जन्तु जो पृथ्वी पर लंबे समय से अस्तित्व में नहीं हैं। जैसे डाइनोसॉर
A.
संख्या में कमी
B.
संख्या में वृद्धि
C.
लोगों के लिए हानिकारक
D.
वनों के लिए हानिकारक
जन्तु जिनकी संख्या इस दर से घाट रही है की वे निकट भविष्य में लुप्त भी हो सकते हैं जैसे गंगा की डॉल्फिन।
A.
भारतीय पुलिस
B.
भारत सरकार
C.
भारतीय वन्य अधिकारी
D.
भारतीय जनजातियों
'प्रोजेक्ट टाइगर' भारत सरकार द्वारा बाघों की आबादी की सुरक्षा और बनाए रखने के लिए वर्ष 1973 में शुरू किया गया था।
A.
फ्लोरा
B.
फोना
C.
प्लांटी
D.
प्रजातियाँ
यह एक विशेष क्षेत्र में रहने वाले पादप जीवन है, जो सामान्यतया प्राकृतिक रूप से उत्पन्न या स्वदेशी जातियों को दर्शाता है।
A.
इमारतों का निर्माण
B.
पेपर का निर्माण
C.
कृषि
D.
मछलीपालन
खेती, भवन निर्माण, कागज बनाने और सड़कों के निर्माण आदि जैसे कुछ उद्देश्यों के लिए जंगलों का सफाया वनोन्मूलन कहलाता है।
A.
वनीकरण
B.
वनोन्मूलन
C.
वनीकरण
D.
पुनः वनीकरण
शहरीकरण, औद्योगीकरण, खनन, आदि जैसे कुछ प्रयोजनों के लिए वनों की कटाई को वनोन्मूलन कहा जाता है।
A.
रेड डाटा बुक
B.
ग्रीन डाटा बुक
C.
यलो डाटा बुक
D.
ब्लेक डाटा बुक
रेड डाटा बुक IUCN द्वारा प्रकाशित किया जाता है। जिसमें आठ श्रेणियों और तीन उप श्रेणियों रखी गई हैं।
A.
सुंदरबन
B.
पंचमढ़ी पार्क
C.
काजीरंगा नेशनल पार्क
D.
ग्रेट बायोस्फीयर रिजर्व
पश्चिम बंगाल के सुंदरबन को 1875-76 में सुंदरबन पहला वन आरक्षित घोषित किया।
A.
काष्ठ
B.
शहद
C.
गोंद
D.
चीनी
जंगलों से कई महत्वपूर्ण उत्पाद जैसे लकड़ी, शहद, गोंद, आदि प्राप्त होते हैं लेकिन वह चीनी ही है जो गन्ने से प्राप्त होती है जो खेतों में खेती कर प्राप्त किया जाता है।
A.
सूखा
B.
मृदा निर्माण
C.
वर्षण
D.
वायु प्रवाह
एक वन क्षेत्र किसी स्थान विशेष के मौसम और जलवायु में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है वनोन्मूलन उस क्षेत्र द्वारा प्राप्त की जाने वाली वर्षा की मारा में गिरावट ला देता है।
A.
पौधे
B.
जन्तु
C.
इमारत
D.
जलवायु
पारिस्थितिकी तंत्र सभी जीवित और निर्जीव घटकों से मिलकर बना होता है। निर्जीव घटकों में प्राकृतिक रूप से उपस्थित घटक शामिल हैं।
A.
एक
B.
दो
C.
तीन
D.
चार
एक राष्ट्रीय पार्क सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य और दो वन्यजीव अभ्यारण्य पचमढ़ी बायोस्फियर रिजर्व में पचमढ़ी और बोरी कहलाते हैं।
|
चिड़ियाघर |
वन्यजीव अभयारण्य |
|
यह एक ऐसा स्थान है जहां जंगली जानवरों को कैद या कृत्रिम स्थानों में रखा जाता है। |
यह एक ऐसा स्थान है जहां जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में रखा जाता है। |
स्थानीय प्रजातियां: यह एक विशेष क्षेत्र में पायी जाने वाली पौधों या जंतुओं की प्रजातियां हैं जो स्वाभाविक रूप से नहीं और नहीं पायी जाती हैं। उदाहरण : उड़न गिलहरी पचमढ़ी बायोस्फियर रिजर्व की एक स्थानिक प्रजाति है।
वन और वन्य जीवन अभयारण्य के संरक्षण के लिए आवश्यक है, क्योंकि वे:
• बायोस्फीयर और जैव विविधता को संतुलित करते हैं।
• मिट्टी के कटाव और भूस्खलन को नियंत्रित करते हैं।
• वर्षा के तेज जल प्रवाह को रोकते हैं और मिट्टी की घुलनशीलता बनाए रखते हैं।
वन आवश्यक है क्योंकि ये करते है: -
• विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र और बायोम बनाता है जो अनेक प्रकार के जंतुओं और पादपों को प्रभावित करता है ।
• वाष्पोत्सर्जन और वर्षा के विनियमन के द्वारा पर्यावरण को ठंडा रखता हैं।
•सौंदर्यात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।
वनों के संरक्षण के लिए उठाए जा सकने वाले तीन चरण हैं:
• पेपर का पुन: उपयोग और पुर्न चक्रण।
• वनों की कटाई रोकने के सख्त कानून।
• वनीकरण।
हम निम्नलिखित कारणों से पेपर बचाने की आवश्यकता है:
• पेड़ों से प्राप्त लकड़ी पेड़ों को बचाने के लिए पेपर बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
• पेपर बनाने में प्रयुक्त ऊर्जा बचाने के लिए।
• पेपर बनाने में प्रयुक्त हानिकारक रसायनों के उपयोग को कम करने के लिए।.
वनस्पतियों और जीव के संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्र हैं:
• वन्यजीव अभ्यारण्य
• राष्ट्रीय उद्यान
• बायोस्फीयर भंडार
निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं:
• खेती के लिए भूमि प्राप्त करने के लिए।
• घरों और कारखानों के निर्माण के लिए भूमि प्राप्त करने के लिए।
• ईंधन और फर्नीचर बनाने के लिए लकड़ी प्राप्त करने के लिए।
वनों की कटाई से पेड़ों की संख्या में कमी हो जाती है। पेड़ों की संख्या में कमी से मिट्टी ढीली हो जाती है और ऊपरी उपजाऊ मिट्टी आसानी से हट सकती है। इस प्रकार उपजाऊ भूमि रेगिस्तान में परिवर्तित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया मरुस्थलीकरण कहलाता है। इस प्रकार वनों की कटाई मरुस्थलीकरण का कारण बनती है।
वनों की कटाई पेड़ों की संख्या में कमी होती है। वृक्ष प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं। पेड़ों की संख्या में कमी कार्बन डाइऑक्साइड के कम उपयोग का कारण बनता है। यह वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को बढ़ाता है जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है। क्यों की पृथ्वी द्वारा परिलक्षित ऊष्मा की किरणों को यह जकड़ लेती है। ग्लोबल वार्मिंग जल चक्र को भी अवयस्थित करती है और इससे वर्षण कम होता है और सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।.
वनोन्मूलन एक हानिकारक गतिविधि है क्यों की इसका प्रभाव होता है:
• यह सूखा कर सकता है।
• यह रेगिस्तानी भूमि को उपजाऊ भूमि में बदल सकता है।
• यह बाढ़ ला सकता है।
• यह मिट्टी के तत्वों, बनावट, आदि गुणधर्मों में परिवर्तन लाती है।
• यह वनों के वन्य जीवों की आबादी को प्रभावित करता है।
A.
अमीबा
B.
शैवाल
C.
बैक्टीरिया
D.
केंचुआ
खाद्य पदार्थ अमीबा की खाद्य रिक्तिका में उपस्थित होते हैं जबकि अपशिष्ट जो बाहर निकाले जाने हैं वह संकुचनशील रिक्तिका में उपस्थित होते हैं।
A.
(i)-(C); (ii)-(A); (iii)-(D); (iv)-(B)
B.
(i)-(D); (ii)-(A); (iii)-(B); (iv)-(C)
C.
(i)- (B); (ii)-(C); (iii)-(D); (iv)-(A)
D.
(i)-(C); (ii)-(D); (iii)-(A); (iv)-(B)
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का ऊर्जा घर है। कोशिका भित्ति केवल पादपों में उपस्थित होती हैं जो कोशिका को निश्चित आकार और आकृति प्रदान करती हैं। हरितलवक एक हरे रंग का वर्णक है जो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में पादपों की सहायता करता है। कशाभ यूग्लीना की अतिवृद्धियाँ है जो गति में उसकी सहायता करता है।
A.
(i), (iii) & (iv).
B.
(i) only.
C.
(i) & (ii).
D.
(i), (ii) & (iii).
कोशिका जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। इसका अर्थ है कि ये जीव के सभी शरीर के कार्यों को करती है और इसे एक विशेष संरचना देती है।
A.
हरितलवक
B.
रिक्तिका
C.
लवक
D.
कोशिका भित्ति
टमाटर का लाल रंग, लवक में लाल रंग के वर्णक की उपस्थिति के कारण है।
A.
ये सभी पदार्थों को आने जाने के लिए एक पथ देती है।
B.
कुछ पदार्थों को आने जाने की अनुमति देती है और कुछ को रोकती है।
C.
किसी भी पदार्थ को प्रवेश नही करने देती है।
D.
किसी भी पदार्थ को बाहर जाने नहीं देती है।
एक कोशिका झिल्ली चयनात्मक रूप पारगम्य है। इसका अर्थ यह है की ये केवल कुछ चयनित पदार्थों को प्रवेश करनी की अनुमति देती है जबकि अन्य पदार्थों के प्रवेश को रोकती है।
A.
कोशिका
B.
अंग
C.
अंग तंत्र
D.
जीव
कोशिकाएँ मिलकर ऊतक का गठन करती हैं विभिन्न ऊतक मिलकर एक अंग का गठन करते हैं। अंग विशिष्ट कार्यों को करने के लिए विशेषीकृत होते हैं। ये अंग मिलकर अंग तंत्र का गठन करते हैं और विभिन्न अंग तंत्र मिलकर एक जीव बनाते हैं।
A.
अमीबा
B.
पादप
C.
पादप और जन्तु
D.
बैक्टीरिया
पादप कोशिका में जन्तु कोशिका की तुलना में बड़ी और कम रिक्तिका पाई जाती हैं।
A.
माइटोकॉन्ड्रिया
B.
केंद्रक
C.
रिक्तिका
D.
क्रोमेटिड्स
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा घर कहते हैं। केंद्रक कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। क्रोमेटिड वह पदार्थ है जो जनक से अगली पीढ़ी को आनुवांशिक सामग्री का स्थानांतरण करते हैं।
A.
माइटोकॉन्ड्रिया
B.
क्रोमेटिन
C.
केंद्रक
D.
लवक
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का ऊर्जा घर है। ये छड़ के आकार का या गोलाकार होते हैं। ये कोशिका की विभिन्न गतिविधियों के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
A.
पेट्रोल
B.
कोयला
C.
पवन
D.
प्राकृतिक गैस
पवन भी ऊर्जा का स्रोत है । पवन ऊर्जा पृथ्वी पर वायु के विचलन से प्राप्त ऊर्जा है। यह ऊर्जा सूर्य द्वारा हमारे महासागरों, पृथ्वी और वातावरण के ताप में वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है । यह ऊर्जा का एक अक्षय और गैर-प्रदूषणकारी स्रोत है।
A. कोक
B. पेट्रोल
C. कोलतार
D. कोल गैस
कोक एक कठोर, सरंध्र और काला पदार्थ है । यह कार्बन का लगभग शुद्धतम रूप है । कोक का उपयोग स्टील के निर्माण और बहुत सी धातुओं के निष्कर्षण में किया जाता है ।
A.
बिटुमेन
B.
एलपीजी
C.
पेट्रोल
D.
डीजल
एलपीजी द्रव रूप में पेट्रोलियम गैस है जो घरों में ईंधन के रूप में प्रयुक्त होती है ।
A.
ज्वलनशील और अज्वलनशील
B.
ठोस, द्रव और गैस
C.
दक्ष और अदक्ष
D.
कार्बनिक और अकार्बनिक
ईंधनों को उनकी भौतिक अवस्था के आधार पर ठोस, द्रव या गैस में वर्गीकृत किया जाता है ।
A.
कोयला
B.
कोक
C.
कोल गैस
D.
कोल तार
प्रारम्भ में रेल के इंजन को चलाने में उपयोग की जाने वाली भाप के निर्माण में कोयले का उपयोग किया जाता था । इसका उपयोग ताप ऊर्जा संयन्त्रों में भी विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है । इसके अतिरिक्त इसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है ।
A. मिट्टी का तेल
B. पेट्रोल
C. डीज़ल
D. पैराफिन