रेशम उद्योग की विशेषताएं -
i. यह कृषि आधारित स्थाई एवं लाभप्रद कुटीर उद्योग है l
ii. इसमें कम लागत में शीघ्र उत्पादन प्रारम्भ किया जा सकता है l
iii. रोजगार सृजन की भरपूर संभावनाएं निहित हैं l
iv. महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में मुख्य रूप से सहायक l
i- c
ii- e
iii- b
iv- a
v- f
vi- d
1. कच्चा माल
2. कुटीर
3. लघु
4. मथुरा
5. चूना पत्थर
6. निजी
आईटी में सब कुछ शामिल है जो जानकारी को डिजिटल रूप में भेजने की प्रक्रिया और स्थानांतरण में आवश्यक है।
1. यह मूल रूप से विचार से प्रेरित है, इसलिए इन विचारों के साथ दूरदर्शिता की जरूरत है।
2. यह उन क्षेत्रों में सफल है जहाँ कई अच्छे विश्वविद्यालय हैं।
3. दूरसंचार सुविधाओं की उपलब्धता
पूर्ण प्रकार हैं:
1. BHEL - भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड।
2. HAL - हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड।
3. DRDO - रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन।
जापान में कपास का उत्पादन नगण्य होने के बावजूद भी ओसाका नगर में सूती वस्त्र उद्योग का अत्यधिक विकास हुआ है इसके लिए यह विश्व के अन्य भागों से कपास का आयात करता है l ओसाका में इस उद्योग के विकसित होने के निम्न कारण हैं -
i. यहाँ की जलवायु नम है, जो सूती वस्त्र उद्योग के लिए उपयुक्त है l
ii. समुद्र तट पर स्थित होने के कारण बड़े-बड़े जहाज़ों द्वारा कच्चे माल को बाहर से मंगाने और तैयार माल को बाहर भेजने की सुविधा है l
iii. यहाँ के पत्तनों पर बड़े- बड़े जहाज़ों पर सामान लादने और उतारने का कार्य मशीनों द्वारा किया जाता है l
iv. उच्च कोटि की तकनिक तथा कुशल श्रमिकों की सुविधा उपलब्ध है l
वस्तु निर्माण उद्योग को उनके स्तर के अनुसार निम्न वर्गों में विभक्त किया जाता है -
i. वृहद या भारी उद्योग - ये उद्योग बड़े पैमाने पर स्थापित किये जाते हैं, जिनके लिए आधिक पूँजी, कच्चा माल, श्रम शक्ति, शक्ति के साधनों, आदि की आवश्यकता होती है तथा बड़े पैमाने पर वस्तुओं का उत्पादन होता है l इस प्रकार के उद्योग निजी एवं सरकारी दोनों क्षेत्रों में हैं l लोहा-इस्पात, सीमेंट, दवाएं, चीनी, वायुयान मोटर गाडी, रेल इंजन एवं डिब्बे, तेल शोधन, आदि उद्योग इसके प्रमुख उदाहरण हैंl
ii. लघु या हल्के उद्योग - सामान्यतः निजी क्षेत्र में स्थापित उद्योग, जिनमें कम पूँजी, श्रम, एवं शक्ति के साधन, छोटी -छोटी मशीनों तथा हल्के कच्चे माल की आवश्यकता होती है, लघु उद्योग कहलाते हैं l इनके द्वारा हल्की वस्तुओं का निर्माण होता है l इलेक्ट्रौनिक, सिलाई मशीन, साइकिल, जूता, कपडा, प्लास्टिक उद्योग, आदि , इनके उदाहरण हैं l
iii. कुटीर उद्योग - ये उद्योग सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर स्थापित होते है तथा स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैंl ये स्थानीय कच्चा माल, श्रम तथा मशीनों का प्रयोग करते हैं l खादी, हतकरघा, रेशम उद्योग, कपड़ों पर कढाई करना, रस्सी बनाना, आदि इस उद्योग के उदाहरण है l
A.
जनसंख्या वितरण
B.
स्थानिक वितरण
C.
भूमि वितरण
D.
खनिज वितरण
भू-सतह पर जिस प्रकार लोग फैले हुए हैं, उसे जनसंख्या वितरण का प्रतिरूप कहा जाता है।
A.
1985
B.
1947
C.
1993
D.
2001
भारत में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का गठन 1985 में किया गया था। इससे यह प्रदर्शित होता है कि लोग देश के लिए कितने महत्त्वपूर्ण संसाधन हैं।
A.
सहारा रेगिस्तान
B.
उत्तरी अलास्का
C.
भारत में गंगा का मैदानी इलाका
D.
हिमालय पर्वत
आमतौर पर लोग बहुत गर्म या बहुत ठंडे स्थानों की चरम जलवायु में रहने से बचते हैं।
A.
उच्च जन्म दर और उच्च मृत्यु दर
B.
उच्च जन्म दर और निम्न मृत्यु दर
C.
निम्न जन्म दर और निम्न मृत्यु दर
D.
निम्न जन्म दर और उच्च मृत्यु दर
उच्च जन्म दर और निम्न मृत्यु दर के कारण जनसँख्या वृद्धि हो सकती है।
A.
40.
B.
50.
C.
60.
D.
70.
विश्व के 60 प्रतिशत लोग केवल दस देशों में ही रहते हैं। इन सभी देशों में से प्रत्येक में कम से कम 10 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं।
A.
पुरुषों और स्त्रियों के बीच लगभग बराबर
B.
स्त्रियों की तुलना में पुरुषों के बीच कम
C.
स्त्रियों की तुलना में पुरुषों के बीच अधिक
D.
ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में कम
ग्रामीण क्षेत्र में लड़कियों को स्कूल कम भेजा जाता है और लड़कों की शिक्षा को अधिक वरीयता दी जाती है।
सुखी हुई लकड़ियाँ जो प्रमुख रूप से खाना पकाने व अन्य घरेलु उपयोगों के लिए प्रयोग की जाती है, जलाऊ लकड़ी कहलाती है |
परंपरागत उर्जा स्त्रोत वह स्त्रोत हैं जिनका प्रयोग मानव लम्बे समय से करता आ रहा है |जलाऊ लकड़ी व जीवाश्म इंधन दो प्रमुख परंपरागत उर्जा के स्त्रोत हैं |
वह संसाधन जो उत्पादन के लिए उद्योगों को उर्जा,जीने के लिए घर एवं ले जाने के लिए परिवहन प्रदान करते हैं |
खनिज निष्कर्षण के तीन तरीके हैं:1. विवृत खनन
2. बोरिंग
3. कूपकी खनन
|
धात्विक खनिज |
अधात्विक खनिज |
|
1. खनिज जो धातु के रूप में होते है धात्विक खनिज कहा जाता है। 2. ये आम तौर पर आग्नेय चट्टानों और रूपांतरित चट्टानों से प्राप्त किये जाते हैं। 3. लोहा, सोना और चांदी धात्विक खनिज का अच्छा उदाहरण है। |
1. खनिज जो धातु के रूप में नही होते है धात्विक खनिज कहा जाता है। 2. ये आम तौर पर आग्नेय चट्टानों और रूपांतरित चट्टानों से प्राप्त किये जाते हैं। 3. लोहा, सोना और चांदी धात्विक खनिज के अच्छे उदाहरण है। |
|
एन्थ्रेसाइट कोयला |
बिटुमिनस कोयला |
|
1. इसमें 92% कार्बन तत्व शामिल हैं। 2. यह निर्धूम है। 3. इसका रंग काला है। 4 इसकी लपटें छोटी और नीली हैं। 5 इसे कोक में परिवर्तित नहीं किया जा सकता हैं। 6. इसका प्रयोग घरेलू उद्देश्य के लिए किया जाता है। |
1. इसमें 70% कार्बन तत्व शामिल हैं। 2. यह धुआं देता है। 6. इसे भाप एकत्रण और घरेलू उपयोग के लिए प्रयोग किया जाता है। |
| सूची क | सूची ख |
| खदान | (i) पृथ्वी से व्यावसायिक कारणों के लिए बहुमूल्य खनिजों को निकालना |
| खनन | (ii) नदी के ताल में खनिज युक्त अपक्षीण |
| मिश्रधातु | (iii) खुले गड्ढो में खाने |
| खनिज निक्षेप | (iv) दो या दो से अधिक का धातुओं का मिश्रण |
अ (iii), ब (i), स (iv), द (ii)
| सूची क | सूची ख |
| अ) कोयला | (i) दक्षिणी कैलिफोर्निया |
| ब) पेट्रोलियम | (ii) नॉर्वे |
| स) जल ऊर्जा | (iii) रूस |
| द) पवन ऊर्जा | (iv) अरब की खाड़ी |
अ (iii), ब (iv), स (ii), द (i)
खनिज उपयोग मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न तरीकों से किया जाता है इन्हे निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. इनका उपयोग कच्चे माल के रूप में उद्योगों में किया जाता है।
2. रत्नो का उपयोग विभिन्न गहने बनाने में किया जाता है।
3. विभिन्न अन्य खनिजों का उपयोग अन्य खनिजों की सफ़ाई में किया जाता है।
खनिज संरक्षण के विभिन्न तरीके हैं जो इस प्रकार है:
1. खनिजों का पुनर्चक्रण संरक्षण का सबसे अच्छा तरीका है यह पर्यावरण के अनुकूल भी है।
2. खनन के समय खनिज की बर्बादी को रोकने के लिए कुछ आवश्यक कदम उठाएं जाने आवश्यक है।
3. खनिज संसाधन के पुन: उपयोग किया जाए, जहाँ तक संभव हो, यह खनिज संरक्षण का एक और तरीका है।
धातुओं के आधार पर खनिजो को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता हैं;1.धात्विक खनिज 2. अधात्विक खनिज
1. धातु खनिज: धातु खनिज वे खनिज हैं जो अंदर उपस्थित धातुओं के कारण ऊष्मा और विद्युत के सुचालक होते हैं।
ये धात्विक खनिज लौह सामग्री के आधार पर आगे वर्गीकृत किये गए हैं;
क. लौह खनिज में लौह तत्व पाया जाता है जैसे- मैग्नीशियम।
ख. अलौह खनिज लौह तत्व शामिल नहीं होता है लेकिन ये निश्चित रूप से कुछ अन्य धातुऍ है जैसे - तांबा।
अधात्विक खनिज: इन खनिजो को किसी भी अन्य रूप में ढाला नहीं जा सकता हैं और ये विद्युत के कुचालक होते है। चूना पत्थर अधात्विक खनिज का एक अच्छा उदाहरण है।
आम तौर पर लोगों का मानना है कि खनन खनिज निष्कर्षण का रूप है लेकिन खनिज निष्कर्षण के विभिन्न अन्य तरीके भी हैं जैसे: 1. खनन: खनन खनिजों का गहरे साथ-साथ उथले क्षेत्रों से उत्खनन की प्रक्रिया है। खनन के दो तरीके हैं;
क. विवृत खनन एक खनन तकनीक है जिसमें खनिजों को सुरंग खोदने की तुलना में एक बड़े छेद खुदाई करके निकाला जाता है।
ख. कूपकी खनन का उपयोग भूमिगत खनन के लिए किया जाता है।
इसे अधिक गहन खुदाई के कारण कूपक भी कहा जाता हैं।
2. प्रवेदन, कूपक खनन का ही एक प्रकार है जिसका आम तौर पर तेल उत्खनन के लिए किया जाता है।
3. आखनन आम तौर पर चट्टानों या खनिज निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है।
बांधों में संग्रहीत नदी का पानी की पाइपलाइनों के माध्यम से टरबाइन के ब्लेड के ऊपर गिराया जाता है। इस गिरता हुआ पानी ब्लेड को बारी-बारी से घुमाने में मदद करता है जिससे टरबाइन से जुडा जनरेटर शुरू होता हैं। इस प्रक्रिया के साथ उत्पन्न ऊर्जा को पनबिजली ऊर्जा कहा जाता है।
परिभाषा: गर्मी के रूप में ऊर्जा जो पृथ्वी से प्राप्त होती है, भू-तापीय ऊर्जा के रूप में जाना जाता है।
प्रकार: भू-तापीय ऊर्जा का सबसे सामान्य रूप गर्म झरने है।
उपयोग: भूतापीय ऊर्जा का खाना पकाने के लिए, हीटिंग, स्नान और बिजली आदि का उत्पन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
एशिया और यूरोप में खनिजों का वितरण बहुत ही असमान है।
एशिया
एशिया दुनिया में लोहे का सबसे बड़ा निक्षेपकर्ता है जिसमें भारत और चीन एक बड़ी भूमिका निभाते है।
एशिया दुनिया में टिन का आधे से अधिक का उत्पादन करता है।

यूरोप
यूरोप दुनिया में लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक है।
तांबा, सीसा और मैंगनीज पूर्वी यूरोप और रूस में उत्पादित महत्वपूर्ण खनिजों में से हैं।
यूक्रेन, स्वीडन और फ्रांस यूरोप कुछ अन्य प्रमुख खनिज उत्पादक देश हैं।

भारत खनिज संपदा से समृद्ध है। दुनिया में भारत खनिजों का प्रमुख उत्पादक है और इसमें खनिज संपदा की विशाल क्षमता है।
लोहा
लोहा बड़े पैमाने पर भारत के विभिन्न राज्यों में पाया जाता है।
झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और कर्नाटक लौह अयस्क के महत्वपूर्ण उत्पादक है।
मैंगनीज
मैंगनीज उद्योगों में प्रयोग किया जाने वाला एक खनिज है।
इसके निक्षेप मध्य प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में स्थित हैं।
चूना पत्थर
चूना पत्थर एक महत्वपूर्ण जैविक तलछटी खनिज है।
भारत में प्रमुख रूप से चूना पत्थर उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश हैं।
सोना
सोना गहने बनाने में प्रयोग किया जाने वाला कीमती खनिज है।
कर्नाटक के कोलार भारत में सोने के भंडार हैं।
ऊर्जा के विभिन्न गैर-परंपरागत स्रोत हैं:
1. पवन ऊर्जा
2. सौर ऊर्जा
3. ज्वारीय ऊर्जा
4. परमाणु ऊर्जा
5. बायो गैस
6. भू तापीय ऊर्जा।
A.
कॉफ़ी
B.
जूट
C.
चाय
D.
कपास
जूट को सुनहरा रेशा के रूप में भी जाना जाता है।
A.
संयुक्त राज्य अमेरिका
B.
पाकिस्तान
C.
बांग्लादेश
D.
स्विट्जरलैंड
गेहूँ संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, अर्जेंटीना, रूस, यूक्रेन, आस्ट्रेलिया और भारत में विस्तृत रूप से उगाया जाता है।
A.
चावल
B.
गेहूँ
C.
मक्का
D.
जौ
ये सभी परिस्थितियाँ गेहूँ की अच्छी फ़सल के लिए उपयुक्त होती हैं।
भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :
• कृषि भारत की जनसंख्या के लगभग दो तिहाई लोगों को रोजगार प्रदान करता है |
• भारत में अधिकतर कृषि गहन निर्वाह प्रकार की है|
• भारत में कृषि के दो मुख्य मौसम है . खरीफ और रबी :
• असमान वर्षा के कारण सिंचाई आवश्यक है|
रैटजेल के अनुसार - “मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच सम्बन्धों का संश्लेषित अध्ययन है।“ मानव भूगोल वह विज्ञान है, जिसके अन्तर्गत मनुष्य और उनके भौतिक वातावरण के मध्य सम्बन्धों का अध्ययन किया जाता है ।
नव निश्चयवाद के अनुसार न तो प्रकृति का मानव पर पूर्ण नियंत्रण है और न ही मानव प्रकृति पर विजय प्राप्त कर सका है कुछ सीमाए भी निर्धारित करती है कि मानव को प्रकृति का सहयोग प्राप्त करने के लिए उसके द्वारा निर्धारित सीमाओं को नहीं तोड़ना चाहिए। इसी कारण मनुष्य को किसी प्रदेश के विकास की योजना प्रकृति के साथ सामंजस्य या समन्वय करते हुए बनानी चाहिए।
दो मुख्य पेय फसलों के नाम कॉफी और चाय हैं. कॉफी के लिए उष्ण और आद्र जलवायु और अच्छी तरह पानी के निकास वाली लाल और लेटराइट मिट्टी की आवश्यकता है, वहीं चाय को अपने कोमल पत्तियों के विकास के लिए वर्ष भर ठंडी जलवायु और अच्छी तरह से वितरित उच्च वर्षा की जरूरत है. यह पानी के अच्छी तरह से निकास वाली रेतीली दोमट मिट्टी और ढालू जमीन की जरूरत है.
कृषि का प्रतिरूप निर्धारित करने वाले भौतिक कारक -
1 . स्थलाकृति.
2 . मिट्टी .
3 .जलवायु .
4.पानी की उपलब्धता
आर्थिक गतिविधियों के तीन प्रकार हैं:
क ) प्राथमिक गतिविधियों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और उत्पादन शामिल है, यह प्रकृति के साथ नजदीकी से जुड़ी गतिविधियां हैं | उदाहरण - खेती , शिकार, मछली पकड़ने , खनन , आदि
(1) धान की खेती में बोते समय 210 सेल्सियस, बढ़ते समय 240 सेल्सियसतथा पकते समय 270 सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।
(2) धान की फसल के लिए 125 से 200 सेमी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होतीहै 100 सेमी से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की सहायता से धान की कृषि की जाती हैं।
(3) धान के लिए बहुत उपजाऊ मिट्टी चाहिए इसके लिए चीकायुक्त दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी में यह पौधा भलीभांति उगता है।
I)यह समशीतोष्ण जलवायु की प्रमुख उपज है इसको बोते समय तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 15 डिग्री सेल्सियस व पकते समय 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान होना चहिये |
(ii) गेंहू की वृद्धि के लिए 90 दिन तक तेज धूपयुक्त स्वच्छ मौसम आवश्यक है |
मृदा:
(i) इसके लिए हल्की चिकनी या भारी दोमट मिट्टी उपयुक्त है |
(ii) गेहूं की फसल के लिए कम नमी की आवश्यकता होती है |
(iii) इसकी खेती के लिए अमोनियम सल्फेट,पोटाश व सोडियम नाइट्रेट की आवश्यकता होती है |
प्रमुख खाद्य फसलों में गेहूं, चावल , मक्का और बाजरा हैं .
1) चावल को उच्च तापमान , उच्च आर्द्रता और बारिश की जरूरत है| यह जलोढ़ मिट्टी में सबसे अच्छी होती है क्योंकि नमी अवशोषित कर सकती है |
2 ) गेहूं की फसल पकते समय चमकदार धूप के साथ मध्यम तापमान और वर्षा की आवश्यकता है कटाई के समय मौसम अच्छी तरह से सूखा होना चाहिए | चिकनी बलुई मिट्टी में सबसे अच्छी तरह से पनपती है |
3 ) मक्का को मध्यम तापमान , वर्षा और धूप की बहुत आवश्यकता है|. यह अच्छी निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में पैदा होती है |
4 ) बाजरा, ज्वार, बाजरा और रागी में शामिल हैं | यह भी मोटे अनाज के रूप में जाना जाता है और कम उपजाऊ और रेतीली मिट्टी पर उगाया जा सकता है |विषम परिस्थिति के कम वर्षा और मध्यम से उच्च तापमान वाली जलवायु में उपजाई जाती है |निर्वाह खेती एक छोटे स्तर पर की जाती है और मुख्य उद्देश्य किसान परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए है . पारंपरिक तरीकों , प्रौद्योगिकी और घरेलू श्रम के द्वारा निम्न स्तर पर उत्पादन होता हैं. गहन निर्वाह कृषि और आदिम निर्वाह कृषि ऐसी खेती के दो प्रकार हैं . आदिम निर्वाह कृषि को आगे कृषि और खानाबदोश पशुपालन में विभाजित किया जा सकता है .
व्यावसायिक खेती के लिए फसलें बाज़ार की जरूरत के अनुसार उगाई जाती हैं | पशुओं को बाजार में बिक्री के लिए पाला जाता है. खेती योग्य क्षेत्र और इस्तेमाल पूंजी की राशि बड़ी है | अधिकांश काम मशीनों द्वारा किया जाता है . व्यावसायिक खेती में वाणिज्यिक अनाज की खेती , मिश्रित खेती और बागान कृषि शामिल हैं
A.
संयुक्त राज्य अमेरीका
B.
भारत
C.
चीन
D.
ग्रेट ब्रिटेन
अठारहवीं सदी में ग्रेट ब्रिटेन में पावरलूम की सर्वप्रथम स्थापना की गई थी।
A.
नायलॉन
B.
कपास
C.
लिनन
D.
रेशम
मानवनिर्मित रेशों में नाइलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रिलिक और रेयॉन शामिल हैं।
A.
ट्रांस-अटलांटिक जलमार्ग
B.
प्रशांत-हिन्द महासागर जलमार्ग
C.
पनामा नहर
D.
ग्रेट लेक्स जलमार्ग
ग्रेट लेक्स जलमार्ग लौह अयस्क के सस्ते शिपिंग के लिए सबसे अच्छा है।
A.
लौह अयस्क, मैंगनीज और कोयले के भंडार का निकट होना।
B.
दिल्ली के निकट, जो एक बड़े बाजार को प्रदान करता है।
C.
निकट की नदियों से अपर्याप्त पानी की आपूर्ति
D.
निकट की नदियों से पर्याप्त विद्युत ऊर्जा
टिस्को की स्थापना के लिए यह स्थान सबसे अनुकूल था क्योंकि यह कच्चे माल, बिजली, पानी, परिवहन की आपूर्ति के लिए सुविधाजनक है और साथ-साथ उत्पाद के लिए निकट में बाजार भी उपलब्ध है।
A.
मिश्र धातु बनाना
B.
रस्टिंग
C.
प्रगलन
D.
ब्लास्टिंग
प्रगलन ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धातुओं को उसके अयस्कों द्वारा गलनांक बिंदु से अधिक तपाकर निष्कर्षित किया जाता है। प्रगलन लौह एवं इस्पात उद्योग में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
A.
दलदली भूमि की उपलब्धता
B.
श्रम की उपलब्धता
C.
बहुमत में राजनीतिक दल
D.
राजनेताओं की उपलब्धता
भूमि, श्रम और पानी की उपलब्धता वे कारक हैं जो उद्योगों के स्थान को प्रभावित करते हैं।
A.
सहकारी क्षेत्र के उद्योग
B.
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग
C.
निजी क्षेत्र के उद्योग
D.
संयुक्त क्षेत्र के उद्योग
निजी क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व और संचालन एक व्यक्ति द्वारा या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है, जैसे - रिलायंस उद्योग, बजाज ऑटो, आदि।
A.
उच्च पूँजी निवेश
B.
अवर प्रौद्योगिकी
C.
उत्पादों की छोटी मात्रा
D.
कम पूँजी निवेश
उच्च पूंजी निवेश, बेहतर तकनीक, उत्पादों की विशाल मात्रा, आदि वे कारक हैं जो बृहत् उद्योग का निर्माण करते हैं।
| उद्योग के प्रकार (आकार के आधार पर) | उदाहरण |
| 1. कुटीर उद्योग | क-ऑटोमोबाइल उद्योग |
| 2. लघु उद्योग | ख-टोकरी बनाना |
| 3. बृहत् उद्योग | ग- कालीन बुनाई |
A.
1-ख, 2-ग, 3-क
B. 1-क, 2-ख, 3-ग
C. 1-ग, 2-क, 3-ख
D. 1-ख, 2-क, 3-ग
टोकरी बुनाई, मिट्टी के बर्तन और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएँ कुटीर उद्योगों के उदाहरण हैं। रेशम बुनाई और खाद्य प्रक्रमण उद्योग लघु पैमाने के उद्योग हैं। ऑटोमोबाइल और भारी मशीनों का उत्पादन बड़े पैमाने के उद्योग हैं।
A.
कृषि आधारित
B.
समुद्र आधारित
C.
वन आधारित
D.
खनिज आधारित
कृषि आधारित उद्योग कच्चे माल के रूप में वनस्पति और जंतु आधारित उत्पादों का उपयोग करते हैं। खाद्य संसाधन, वनस्पति तेल, सूती वस्त्र, डेयरी उत्पाद और चर्म उद्योग कृषि आधारित उद्योगों के उदाहरण हैं।
A.
अधिक मूल्य
B.
अधिक सस्ता
C.
कम महंगा
D.
कम मूल्य
कच्चे माल की तुलना में तैयार उत्पाद का अधिक मूल्य और उपयोगिता होती है।
A.
कृषि
B.
उद्योग
C.
विनिर्माण
D.
सूचना प्रौद्योगिकी
उद्योग उस आर्थिक गतिविधि को संदर्भित करता है, जो वस्तुओं के उत्पादन, खनिजों के निष्कर्षण अथवा सेवाओं की व्यवस्था से संबंधित है।
A.
कच्चा माल
B.
आकार
C.
स्वामित्व
D.
प्रौद्योगिकी
कच्चे माल के उपयोग के आधार पर कृषि आधारित, खनिज आधारित, समुद्र आधारित और वन आधारित उद्योगों को वर्गीकृत किया जा सकता है।
A.
कच्चे माल के उपयोग के आधार पर
B.
उनके आकार के आधार पर
C.
उनका स्वामित्व के आधार पर
D.
प्रौद्योगिकी के आधार पर
खनिज आधारित उद्योगों को कच्चे माल के उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
A.
दो भागों में
B.
तीन भागों में
C.
चार भागों में
D.
पांच भागों में
आकार के आधार पर उद्योगों को दो भागों में बाँटा जा सकता है। ये हैं लघु आकार के उद्योग और बृहत आकार के उद्योग|
A.
निजी क्षेत्र
B.
सार्वजनिक क्षेत्र
C.
संयुक्त क्षेत्र
D.
सहकारी क्षेत्र
सहकारी क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व और संचालन कच्चे माल के उत्पादकों या पूर्तिकारों, कामगारों अथवा दोनों के द्वारा होता है।
A.
बिहार
B.
झारखंड
C.
कर्नाटक
D.
जम्मू-कश्मीर
सुवर्णरेखा नदी भारतीय राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा से होकर गुजरती है। यह झारखंड के छोटा नागपुर के पठार से निकलती है। झारखंड के बॉक्साइट समृद्ध क्षेत्रों से गुजरते हुए यह पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है और अंत में ओड़िशा के बालासोर जिले में बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसकी कुल लंबाई 470 किलोमीटर है।
A.
सेटो
B.
कोरिया
C.
ओसाका
D.
योकोटे
ओसाका जापान का एक महत्त्वपूर्ण वस्त्र-निर्माण केंद्र है। यह ‘जापान का मानचेस्टर’ के नाम से भी जाना जाता है। ओसाका में सूती वस्त्र उद्योग का विकास कई भौगोलिक कारणों से हुआ है। ओसाका के चारों ओर का विस्तृत मैदान सूती वस्त्र मिलों के विकास के लिए आसानी से भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
A.
तारापुर इस्पात एंड स्टील कंपनी
B.
टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
C.
टाटा आयरन और स्मेल्टिंग कंपनी
D.
टाटा औद्योगिक सोर्सिंग कंपनी
टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी भारत की पहली लौह एवं इस्पात कंपनी है जिसे भारत में स्थापित किया गया था।
A.
प्राथमिक क्रियाकलाप
B.
द्वितीयक क्रियाकलाप
C.
तृतीयक क्रियाकलाप
D.
व्यापार
होटल उद्योग सेवाएँ प्रदान करने से संबंधित है। इसलिए यह तृतीयक क्रियाकलाप का एक उदाहरण है।
अहमदाबाद सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है इसके आस -पास कपास उत्पादक क्षेत्र होने के कारण सूती वस्त्र उद्योग का अत्यधिक विकास हुआ है l इसीलिए इसे भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है l
जिला उद्योग केन्द्रों की स्थापना, लोगों को विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी, परियोजना रिपोर्ट बनाने, मशीनों , कच्चे माल के विक्रेताओं के पते, ऋण स्त्रोतों की जानकारी, तकनीकी परामर्श, आदि में मदद करने के लिए की गई है l
प्रगलन की प्रक्रिया में धातुओं को हीटिंग बिंदु से परे पिघला कर अयस्कों से निकाला जाता हैं।
ओसाका में कपड़ा मिलों के लिए कपास मिस्र, भारत, चीन और अमेरिका से आयात किया जाता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से व्युत्पन्न रसायनों को पेट्रोरसायन कहा जाता है। इनका उपयोग प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, दवाओं के डिटर्जेंट, उर्वरक, कीटनाशकों और विस्फोटकों के निर्माण में किया जाता है। पेट्रो रसायन कारखाने आमतौर पर तेल रिफाइनरियों के पास स्थित हैं।
इस्पात आधुनिक उद्योग की रीढ़ की हड्डी है। यह कठोर होता है, आसानी से काटा जा सकता है, अन्य धातुओं के साथ मिश्रण कर अन्य कठोर और जंग प्रतिरोधी धातु का निर्माण किया जाता है।
लोहा और इस्पात के बुनियादी आदान है: लौह अयस्क 4 टन + कोयला 8 टन + चूना पत्थर 1 टन = स्टील 1 टन।
कई अन्य उद्योग हैं, जैसे- रसायन लोकोमोटिव, कृषि उपकरण, मशीनरी, टिनप्लेट, केबल और तार।
आजकल के युवावर्ग अपना खर्च एवं विलासिता के साधनों कों पूर्ण करने के लिये चेन स्नेचिंग, अपहरण तथा आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त दिखायी पढ़ रहे हैं। जिससे ये कानून व्यवस्था एवं समाज के लिये कठिनाई उत्पन्न कर रहें हैं।
सामान्य रूप से बेरोजगारी का आशय उत्पादन कार्य में न लगा होना है। वर्तमान समय में विश्व के विकसित तथा अल्पविकसित सभी देशों में बेरोजगारी की समस्या सामाजिक एवं आर्थिक विकास की प्रमुख समस्या के रूप में सामने आ रही है। बढती जनसंख्या की तुलना में रोजगार के अवसर की कम उपलब्धता ने बेरोजगारी की संख्या में काफी बढोत्तरी की है।
गरीबी का आशय उस सामाजिक अवस्था से है, जिसमे समाज के एक वर्ग के लोग अपने जीवन की कई बुनियादी आवश्यकताओं को भी नहीं पूरा कर पाते।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात साक्षरता की दर कों बढाने के लिये कई कार्यक्रम जैसे प्राथमिक शिक्षा का प्रचार, प्रौढ़ शिक्षा का प्रचार, सर्वशिक्षा कार्यक्रम आदि, देश के सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से चलाए जा रहे हैं।
किसी भी राष्ट्र के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए निरक्षरता कों एक अभिशाप के रूप में मानते हैं। साक्षरता का सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर विशेष प्रभाव पडता है। किसी देश की साक्षरता प्रतिशत से ही वहाँ की सामजिक एवं आर्थिक स्तर का पता चलता है।
जनसंख्या अधिक होने पर बेरोजगारी, भुखमरी, निरक्षरता, गरीबी, कुपोषण आदि समस्याएँ अस्तित्व फैला रही हैं। तीव्र जनसंख्या वृद्धि एवं प्राकृतिक संसाधनों की कमी से गरीबो की संख्या में वृद्धि हो रही है। आपराधिक प्रवृति चोरी– डकैती, अपहरण
लिंगानुपात एक हज़ार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या को प्रदर्शित करता है
i. सही
ii. सही
iii. गलत
iv. सही
कम संतानोत्पत्ति होने से बच्चों कों अपने माता पिता का स्नेह सदैव प्राप्त होता रहता है, जिससे वे स्वस्थ, सभ्य, शिक्षित और सामाजिक नागरिक बन पाते हैं। परिवार नियोजन कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य परिवार, समुदाय, समूह, समाज तथा देश के लिए योग्य नागरिक निर्माण करना है।
बड़ा परिवार दुखों को आमंत्रित करता है। यदि परिवार में कम बच्चे होंगे, तो माता पिता उनकी देख–रेख तथा पालन पोषण भी सही ढंग से कर सकते हैं। भारत सरकार द्वारा कराए गए सर्वेक्षण से यह तथ्य प्राप्त हुआ है कि गत कुछ वर्षों में जनसंख्या के आकार में
विश्व में जनसंख्या का वितरण बहुत ही असमान है। जिसके फलस्वरूप गम्भीर एवं भयानक स्थिति उत्पन्न हो गयी है। अधिक जनसंख्या वाले देशों में बेरोजगारी, अकाल, भुखमरी, कुपोषण, जीवन स्तर एवं गुणवत्ता में कमी जैसी समस्याएँ परिलक्षित होने लगी हैं। इसके विपरीत कम जनसंख्या वाले देशों में मानव शक्ति के अभाव के कारण पर्याप्त आर्थिक विकास नहीं हो पा रहा है।
पर्याप्त खाद्य पदार्थ जीवन की प्राथमिक आवश्यकता हैं। परन्तु जनसंख्या वृद्धि, कृषि योग्य भूमि की कमी एवं कृषि उत्पादकता में कमी के कारण खाद्यान्न के उत्पादन में कमी होती जा रही है। लगातार बढ़ रही जनसंख्या का भार
जनसंख्या की तीव्र
प्रभाव
भारत में गाँवों से नगरों की ओर जनसंख्या के स्थानान्तरण के निम्न कारण हैं:
i. नगरों में उद्योगों की स्थापना के कारण रोजगार के अवसरों की अधिक उपलब्धता |
ii. ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा नगरों में भौतिक सुविधाओं, बिजली, पानी, परिवहन के साधन एवं शिक्षा आदि की अच्छी सुविधा |
i- d
ii- a
iii- b
iv- c
v- f
vi- e
i. संसाधन
ii. 933
iii. 65
iv. छठा
v. दूसरा
vi. जन्म दर, मृत्यु दर
प्रत्येक व्यक्ति कों स्वस्थ्य रहने के लिये
निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए आवश्यक भोजन– सामग्री का प्रतिवर्ष आयात करने के लिए सरकार विवश है, जो हमारे देश के लिए लज्जास्पद है। इस कार्य में हमारी अर्थव्यवस्था तक गड़बड़ा उठती है। जनसंख्या नियंत्रण होने पर हम खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकते हैं। अपनी अर्थव्यव्स्था कों भी सुदृढ़ बना सकते हैं। यह कार्य परिवार नियोजन से ही सम्भव हो सकता है।
जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा
निम्नलिखित
मानव संसाधन के प्रमुख घटक
A.
40
B.
45
C.
55
D.
70
3.6 अरब लोगों की कुल जनसंख्या के साथ एशिया सबसे अधिक जनसँख्या वाला महाद्वीप है। यहाँ विश्व जनसंख्या का लगभग 55 प्रतिशत भाग निवास करता है।
A.
चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि
B.
साक्षरता दर में वृद्धि
C.
प्रवास में वृद्धि
D.
आय के स्तर में वृद्धि
जनसंख्या के आकार में परिवर्तन का एक कारण प्रवास है। लोग एक देश में अथवा देशों के बीच एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। प्रवास के दो प्रकार, आप्रवासन और उत्प्रवासन हैं।
A.
65 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
B.
145 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
C.
47 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
D.
324 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
जनसँख्या घनत्व एक इकाई क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या को संदर्भित करती है। जनसँख्या घनत्व = 7 अरब (जनसँख्या) / 150 वर्ग किलोमीटर (केवल स्थल क्षेत्र) सम्पूर्ण विश्व का औसत जनसँख्या घनत्व 47 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
A.
सांस्कृतिक कारक
B.
आर्थिक कारक
C.
भौगोलिक कारक
D.
सामाजिक कारक
औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर का सृजन होता है। लोगों की बड़ी संख्या इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होती है। जापान में ओसाका और भारत में मुंबई घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं।
A.
विश्व का मानचित्र
B.
जनसंख्या पिरामिड
C.
जनसंख्या वृद्धि
D.
जनसंख्या वितरण
जनसँख्या पिरामिड को आयु लिंग पिरामिड भी कहा जाता है। किसी देश के जनसंख्या संघटन का अध्ययन करने की रुचिकर विधि जनसंख्या पिरामिड है।
A.
अंटार्कटिका
B.
ऑस्ट्रेलिया
C.
अफ्रीका
D.
उत्तरी अमेरिका
अंटार्कटिका महाद्वीप में सबसे कम जनसँख्या निवास करती है। अंटार्कटिका की स्थायी मानव आबादी शून्य है। हालांकि, सर्दियों के दौरान वहाँ लगभग 1000 वैज्ञानिक रहते हैं और गर्मियों में यह संख्या बढ़कर 4000 तक हो जाती है।
A.
दक्षिण पश्चिम एशिया
B.
दक्षिण - पूर्व एशिया
C.
दक्षिण एशिया
D.
पूर्व एशिया
311 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर के औसत के साथ दक्षिण एशिया विश्व का सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है। बांग्लादेश में जनसंख्या घनत्व 1,101 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। 2012 की जनगणना के अनुसार श्रीलंका का जनसँख्या घनत्व 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसँख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।