भैया ने नाव बनाने से क्यों मना किया?
भैया ने नाव बनाने से मना कर दिया क्योंकि वह आलस कर रहे थे|
बच्चा अपने भाई को बाज़ार से क्या लाने के लिए कहता है?
बच्चा अपने भाई को बाज़ार से रंग-बिरंगा कागज़ लाने को कहता है|
कविता में नाव किस प्रकार तैरती है?
कविता में नाव कूड़े से लडती-भिड़ती तैरती है|
कविता में बच्चा क्या बनाने को कह रहा है?
कविता में बच्चा नाव बनाने को कह रहा है|
इस कविता में आलसी किसे कहा गया है?
इस कविता में आलसी बच्चे के भाई को कहा गया है|
इन पंक्तियों में एक बच्चा अपने भैया से कह रहा है कि लग रहा है आज खूब सारा पानी बरसेगा| इतना पानी बरसेगा की नदी-तालाब और घर की नालियाँ भर जाएँगी| इतने अच्छे मौसम में आप भी मेरे साथ आकर नाचो|
बच्चा अपने भाई को क्या दिखा रहा था?
बच्चा अपने भाई को बादल दिखा रहा था जो पानी से भरे हुए हैं| उन्हें देख कर ऐसा लता है कि वे अपने अंदर सात समुंदर भर लाए हैं|
गुल्लक क्या होता है? किसकी गुल्लक हलकी है?
गुल्लक पैसे रखने का एक पात्र होता है| जिसमे बच्चे पैसे इकट्ठा करते हैं| इस कविता में बच्चे की गुल्लक हलकी है| और उसके भाई की गुल्लक भारी है|
समुद्र - सागर
भरेगा- भर जाना
हर्षाओ - खुश करो
खोट - दोष
आलसी - सुस्त
रोलो - लुढ़काओ
पानी सचमुच खूब पड़ेगा,
लंबी-चौड़ी गली भरेगा,
लाकर घर में नदी धरेगा,
ऐसे तुम भी लहराओ|
भैया मेरे जल्दी आओ|
एक बार देश में क्या पड़ा?
अकाल
संन्यासी को भिक्षा में दी गई कुल रकम कितनी थी?
दस लाख अड़तालीस हज़ार पाँच सौ पिचहत्तर रुपए|
भंडारी ने|
कविता में किन चीज़ों के काटे जाने की बात कही गई है?
कविता में रस्सी, जिल्द आदि के काटने की बात कही गई है|
कविता में किन चीज़ों के कुतरने की बात कही गई है?
कविता में बटन, चप्पल, जूता तथा कागज़ के कुतरने की बात कही गई है|
कविता में एक प्राणी है जो कभी बटन तो कभी चप्पल-जूता तो कभी कागज़ कुतर जाता है | कभी स्याही बिखरा जाता है तो कभी अनाज को पूरे घर में बिखरा देता है| कभी दोने से मिठाई उठा ले जाता है तो कभी रस्सी काटकर फेंक देता है| कभी छानने उठा ले जाता है तो कभी सारी रात खुर-खुर करता रहता है जिसके कारण नींद नहीं आती है| ओर ये सब शरारत करने वाला जीव चूहा है|
पता नहीं कौन है जो रात भर घर में गड़बड़ करता रहता है| पूरी रात खुर-खुर करता है जिस कारण हम सो भी नहीं पाते हैं| कभी इधर कभी उधर जाने क्या ढूँढ़ता रहता है|
कविता में चूहा क्या-क्या नुकसान करता है?
चूहा बटन कुतरता है, स्याही और अनाज को बिखराता है| मिठाई उठा ले जाता है और तसवीर भी तोड़ देता है| जिल्द काट कर पन्ने बिखेरता है| कागज़ कुतर कर घर को रद्दी से भर देता है| इसके साथ ही वह रात भर इधर-उधर खुर-खुर करता है|
पोथी- किताब, पुस्तक
दुनिया- संसार, पृथ्वी
खलीता- जेब
तसवीर – चित्र
पोथी – किताब
धाता – दौड़ता
बिन्नी (बकरी) का |
दांडी|
धनी कहाँ रहता था?
धनी महात्मा गाँधी जी के साबरमती आश्रम में रहता था|
बिन्नी आश्रम की एक बकरी थी|
धनी बकरी की देखभाल करता था|
धनी गाँधी जी से सुबह सैर के समय ही क्यों मिला?
धनी गाँधी जी से सुबह सैर के समय इसलिए मिला क्योंकि उस वक्त गाँधी जी अकेले होते थे|
गाँधी जी उस समय किसका विरोध कर रहे थे?
गाँधी जी उस समय ब्रिटिश सरकार का विरोध कर रहे थे|
धनी को किस योजना की जानकारी प्राप्त हुई?
धनी को दांडी यात्रा की जानकारी प्राप्त हुई|
गाँधी जी क्या-क्या करते थे?
चरखे पर खादी का सूत कातते तथा भजन गाते थे|
गाँधी जी कहाँ रहते थे?
गाँधी जी साबरमती आश्रम में रहते थे|
धनी के पापा ने धनी को यात्रा पर न जाने का क्या कारण बताया?
धनी के पापा ने धनी से कहा तुम इतना लंबा नहीं चल पाओगे| दांडी यात्रा पर आश्रम के नौजवान ही जा रहे हैं| धनी के ज़िद करने पर पापा ने यह भी कहा कि सिर्फ वही लोग जाएँगे जिन्हें महात्मा जी ने खुद चुना है|
गाँधी जी ने धनी को यात्रा पर न जाने के लिए कैसे मनाया?
गाँधी जी ने धनी से कहा कि “अगर तुम मेरे साथ चले जाओगे तो बिन्नी को कौन देखेगा? इतना चलने के बाद, मैं तो कमज़ोर हो जाऊँगा| इसलिए जब मैं वापस आऊँगा तो मुझे खूब सारा दूध पीना पड़ेगा, जिससे कि मेरी ताकत लौट आए | तो तुम मेरे लिए यहाँ रहकर बिन्नी की देखभाल करो |” धनी ख़ुशी-ख़ुशी रुकने के लिए मान गया|
बिंदा चाचा ने धनी को दांडी यात्रा के बारे में क्या बताया?
गाँधी जी और उनके साथी गुजरात में पैदल चलते हुए, दांडी नाम की जगह पर समुद्र के किनारे जाएँगे| दांडी पहुँच कर वे नमक बनाएँगे| क्योंकि नमक पर कर देना पड़ता है| इस प्रकार नमक बनाने से नमक पर कर नहीं देना पड़ेगा|
अफ़सर के पूछने पर पापा ने कुत्ता बनने का क्या कारण बताया?
पापा ने अफ़सर को कारण बताते हुए कहा कि मैं बहुत दिनों से इंसान बना रहा हूँ इसलिए अब मैं कुत्ता बनना चाहता हूँ|
आइसक्रीम वाला बनने का विचार कब आया?
एक दिन एक आइसक्रीम वाला अपना चटकदार ठेला लेकर वहाँ आ गया| उसे देख कर पापा के मन में आइसक्रीम वाला बनने का विचार आ गया|
पापा अपने बचपन में क्या-क्या बनना चाहते थे?
बचपन में सबसे पहले पापा चौकीदार बनना चाहते थे| फिर वे आइसक्रीम वाला, शंटिंग करने वाला, वायुयान चालक, अभिनेता, जहाज़ी, चरवाहा, कुत्ता बनना चाहते थे| पर अंत मे वह एक अच्छा इंसान बनना चाहते थे|
रेलवे स्टेशन पर पापा ने क्या देखा?
रेलवे स्टेशन पर पापा ने एक अजीब आदमी को देखा| वह आदमी इंजनों के डिब्बों से खेल रहा था| लेकिन यह डिब्बे और इंजन खिलौने नहीं असली थे| कभी-कभी वह प्लेटफार्म पर उछल कर आ जात है तो कभी डिब्बों के नीचे चला जाता| वह कोई बहुत अजीब और मज़ेदार खेल लग रहा था|
शंटिंग किसे कहते हैं?
जब रेलगाड़ी अपनी यात्रा पूरी कर लेती है तो उसे अगली यात्रा के लिए तैयार करना होता है| रेलगाड़ी की साफ़-सफ़ाई की जाती है| इंजन को घुमाकर ईंधन-पानी भरा जाता है| इसे शंटिंग कहते हैं|
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
दूसरी बार नसीरूद्दीन जमाल साहब को किसके घर ले गए?
हुसैन साहब के घर|
भेंट
शांत और भोला स्वाभाव था|
भड़कीली अचकन|
अपने पुराने दोस्त से |
नसीरूद्दीन ने अंत में अचकन के बारे में क्या कहा?
नसीरूद्दीन ने अंत में अचकन के बारे में कहा कि “जो अचकन इन्होंने पहनी है उसके बारे में मैं चुप ही रहूँ तो अच्छा है|”
दूसरे पड़ोसी के घर से निकलने पर जमाल ने नसीरूद्दीन ने से क्या कहा?
दूसरे पड़ोसी के घर से निकलने पर जमाल ने नसीरूद्दीन ने से कहा, “ झूठ बोलने को किसने कहा था तुमसे?”
पहले पड़ोसी के घर से निकलने पर जमाल ने नसीरूद्दीन ने से क्या कहा?
जमाल साहब ने नसीरूद्दीन से कहा, “तुम्हारी कैसी अक्ल है! क्या यह बताना ज़रूरी था कि यह अचकन तुम्हारी है?”
गपशप करने के बाद नसीरूद्दीन ने जमाल साहब से क्या कहा था?
गपशप करने के बाद नसीरूद्दीन ने जमाल साहब से कहा, “चलो दोस्त, मोहल्ले में घूम आए|”
नसीरूद्दीन ने हुसैन साहब से अचकन के बारे में क्या कहा था?
नसीरूद्दीन ने हुसैन साहब से कहा कि जो अचकन जमाल साहब ने पहन रखी है वह मेरी है|
अपने पुराने दोस्त जमाल साहब से मिलने के बाद नसीरूद्दीन ने क्या-क्या किया?
अपने पुराने दोस्त जमाल साहब से मिलने के बाद नसीरूद्दीन ने उसके साथ कुछ देर गपशप की| फिर नसीरूद्दीन ने जमाल साहब को अपनी एक अचकन दी | अचकन पहनने के बाद वे दोनों मोहल्ले में घूमने गए|
अचकन देते समय नसीरूद्दीन ने जमाल साहब से क्या कहा?
अचकन देते समय नसीरूद्दीन ने जमाल साहब से कहा कि इसे पहन लो| इसमें तुम खूब अच्छे लगोगे| सब तुमको देखते ही रह जाएँगे|
जमाल साहब नसीरूद्दीन से नाराज़ क्यों हो गए थे?
नसीरूद्दीन ने अपने पड़ोसी से जमाल साहब के बारे में बताते हुए यह भी बता दिया कि जमाल साहब ने उनकी अचकन पहन रखी है| इसलिए जमाल साहब नसीरूद्दीन से नाराज़ हो गए|
बुद्धिमान|
किरमिच की गेंद|
कहानी पढ़ रहा था|
दिनेश के बगीचे में किसने गड्ढे बना रखे थे?
दिनेश के बगीचे में घूँस ने गड्ढे बना रखे थे|
अंत में उस गेंद का क्या हुआ?
अंत में वह गेंद सड़क पर जाते हुए एक स्कूटर की टोकरी में जा पड़ी और चली गई |
बच्चों ने गेंद पाकर क्या किया?
बच्चों ने गेंद पाकर झगड़ना शुरू कर दिया|
दिनेश के बगीचे में क्या-क्या लगा था?
दिनेश के बगीचे में भिंडी के पौधे तथा सीताफल की बेल लगी थी|
दिनेश की माँ उसे बाहर जाता देख क्यों परेशान हो उठी?
दिनेश की माँ उसे बाहर जाता देख इसलिए परेशान हो उठी क्योंकि बाहर बहुत तेज़ धूप थी और दिनेश ने चप्पल तक नहीं पहनी थी|
गेंद के स्कूटर में गिरने के बाद बच्चों ने क्या किया?
गेंद के स्कूटर में गिरने के बाद बच्चे पहले तो स्कूटर के पीछे भागे, परंतु जल्दी ही सब रुक गए| वे समझ गए थे कि स्कूटर के पीछे भागना बेकार है|
बच्चों ने क्लब क्यों बना रखा था और वे उसे कैसे चलाते थे?
बच्चों ने खेलने की सुविधा के लिए क्लब बना रखा था| उस क्लब में सभी बच्चों के लिए बल्ले थे और गेंद खरीदने के लिए वे आपस में क्लब का चंदा देकर पैसा इकट्ठा कर लेते थे|
गेंद मिलने के बाद दिनेश ने क्या किया?
गेंद मिलने के बाद दिनेश घर के भीतर ठंडे फर्श पर बिछी चटाई पर लेट गया और सोचने लगा कि भले ही यह गेंद मोहल्ले में किसी की हो न हो, परंतु इमानदारी इसी में है कि एक बार सबसे पूछ लिया जाए|


पापा कौन से दो काम एक साथ करना चाहते थे?
आइसक्रीम वाला और शंटिंग करने वाला|
अफ़सर के प्रश्न करने पर पापा का क्या जवाब था?
कुत्ता बनना सीख रहा हूँ|
वायुयान चालक किसे कहते हैं?
वायुयान चलाने वाले को वायुयान चालक कहते हैं|
इंसान बनने की बात पर|
चौकीदार|
पापा आइसक्रीम वाला क्यों बनना चाहते थे?
पापा आइसक्रीम वाला इसलिए बनना चाहते थे क्योंकि इस प्रकार वह जितना मन चाहे आइसक्रीम खा सकते थे |
पापा क्या नहीं गँवाना चाहते थे?
पापा आइसक्रीम बेचने का चटकदार ठेला नहीं गँवाना चाहते थे|
इस कहानी से आपको क्या सीख मिलती है?
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हम कुछ बन पाए या न बन पर एक अच्छा इंसान बनना चाहिए|
वास्तव में बेवकूफ कौन था?
पढ़क्कू
पढ़क्कू तर्कशास्त्र पढ़ते थे|
सुरेश दोस्ती के नाम पर अपना उल्लू सीधा करता है|
तेली रुके हुए बैल को चलाने के लिए उसकी पूँछ पर पैर रखता था|
पढ़क्कू बहुत तेज़ थे | वह तर्कशास्त्र पढ़ते थे| जहाँ पर कोई बात नहीं होती वहाँ भी नयी बात बना लेते थे |
पढ़क्कू को किस बात की फ़िक्र हुई?
पढ़क्कू को इस बात की फ़िक्र हुई कि अगर किसी दिन बैल तेली को बेफकूफ बनाए | केवल सिर घुमाकर घंटी ही बजाए और चले न तो तेली को बूँद भर भी तेल नहीं मिल पाएगा|
पढ़क्कू की सूझ कविता किस कवि ने लिखी है?
रामधारी सिंह दिनकर|
अंत में तेली ने पढ़क्कू से क्या कहा?
अंत में तेली ने पढ़क्कू से कहा कि तुमने ये ज्ञान जहाँ से सीखा है वहीँ पर इसका ज्ञान फैलाओ| यहाँ पर सब ठीक है| हमारा बैल अभी तक तर्कशास्त्र नहीं पढ़ पाया है जो तुम्हारी बात समझ पाए|
कविता में पढ़क्कू ने तेली को बेवकूफ क्यों कहा?
पढ़क्कू ने तेली को इसलिए बेवक़ूफ़ कहा क्योंकि तेली बिना देखे ही बैल से काम करवा रहा था| जो पढ़क्कू की नज़र में बेवकूफी है| उसका मानना है कि बिना देखे बैल काम नहीं करेगा और उसे बेवकूफ बनाएगा|
इस कविता में एक पढ़क्कू थे जो तर्कशास्त्र पढते थे| एक दिन उसके मन में कोल्हू के बैल को देखकर एक प्रश्न उठा उसने तेली से पूछा की बिना देखे तुमको यह बात कैसे पता चल जाती है कि बैल चल रहा है या खड़ा है| तेली बताता है कि बैल के गले में घंटी पड़ी हुई है जिससे मुझे उसके चलने का पता रहता है| और जब रुक जाता है तो घंटी बजना बंद हो जाती है तब मैं उसकी पूँछ पर पैर रख देता हूँ तो वह फिर चलने लगता है| पढ़क्कू को यह बात समझ नहीं आई वह बोला किसी दिन अगर बैल तुमको बुद्धू बनाए काम न करे सिर हिलाकर बस घंटी ही बजाए तो क्या शाम तक भी तुमको तेल नहीं मिल पाएगा? तेली कहता है कि “तुम अपने ज्ञान को अपने तक ही रखो मेरा बैल अभी तक तर्कशास्त्र नहीं पढ़ पाया है कि तुम्हारी बात समझ सके|”
मंतिख – तर्कशास्त्र
ढब - रहस्य
बेवकूफ - मूर्ख
मुश्किल – कठिन
अचानक – एकदम से
सुनीता बाज़ार कैसे गई?
सुनीता बाज़ार अपनी पहिया कुर्सी पर बैठ कर गयी|
अचार की बोतल|
चीनी|
बाज़ार|
सात बजे|
सुनीता बाज़ार कैसे गई?
सुनीता अपनी पहिया कुर्सी पर बैठ कर बाज़ार गई थी|
संन्यासी को |
सुकुमार राय|
लोगों ने राजसभा में क्या गुहार लगाई?
लोगों ने राजसभा में गुहार लगाई कि महाराज ज्यादा कुछ नहीं बस दस हज़ार रुपए दे दें तो हम आधा पेट खाकर भी ज़िंदा रह जाएँगे|
दान का हिसाब कहानी में राजा कैसा था?
दान का हिसाब कहानी में राजा बहुत ही कंजूस और मतलबी था|
राजदरबार में कौन-से लोग आते थे?
राजदरबार में एक से एक नामी लोग आते थे|
अकाल के प्रकोप से किस सीमा के लोग भूख-प्यास से मरने लगे थे?
अकाल के प्रकोप से पूर्वी सीमा के लोग भूख-प्यास से मरने लगे थे|
अकाल की खबर सुनकर राजा ने क्या कहा?