CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 161301 संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों में शामिल महिला सदस्य कौन-कौन थीं?
Right Answer is:

SOLUTION

संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों में शामिल महिला सदस्य के रूप में श्रीमती  सरोजिनी  नायडू, श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित, श्रीमती हंसा राय , रेणुका चौधरी थी।


Q. 161302 भारतीय संविधान के निर्माण हेतु संविधान सभा का गठन कब किया गया और इसके प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय संविधान के निर्माण हेतु संविधान सभा का गठन सन 1946 में किया गया था और इसके प्रथम अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे।


Q. 161303 भारतीय संविधान की संघ सूची के दो विषयों का उल्लेख किजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

1) रक्षा 2) वैदेशिक मामले


Q. 161304 क्या भारत में " गणतंत्रात्मक सरकार का ढांचा " है?
Right Answer is:

SOLUTION

गणतंत्रात्मक सरकार वह है जिसमें किसी व्यक्ति को सार्वजनिक कार्यालयों में वंशानुगत अधिकार नही है। गणतंत्र में कोई राजा या रानी नही है। भारत में सरकार का यही स्वरूप है, उसके प्रमुख लोगों द्वारा परोक्ष रूप से चुने जाते है।


Q. 161305 संविधान क्या है?
Right Answer is:

SOLUTION

संविधान एक जीवित दस्तावेज है। यह एक कानूनी साधन है जिसके माध्यम से सरकार काम करती है। गिलक्रिस्ट के अनुसार, "यह एक निकाय है जिसमें नियम या कानून है, लिखित या अलिखित है, जो सरकार के संगठन को निर्धारित करता है, सरकार के विभिन्न अंग को शक्तियों का वितरण करता है और जो सामान्य सिद्धांतों पर इन शक्तियों का प्रयोग करते हैं।


Q. 161306 संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
Right Answer is:

SOLUTION

२९ अगस्त १९४७ को प्रारूप समिति के गठन होने पर समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर बनाये गए. प्रारूप समिति में डॉ. अम्बेडकर के अलावा छ: सदस्य और थे।


Q. 161307 'मौलिक अधिकार' शब्द को परिभाषित करें।
Right Answer is:

SOLUTION

'मौलिक अधिकार' राज्य के किसी भी मनमाने ढंग से कार्रवाई से उन्हें रोकने के क्रम में अपने नागरिकों को देश के संविधान की गारंटी बुनियादी अधिकार हैं। वे प्रकृति में न्यायोचित हैं।


Q. 161308 लिखित संविधान के दो गुण लिखिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

1) संसदात्मक शासन व्यवस्था । 2) कठोरता व लचीलेपन का समन्वय ।


Q. 161309 भारत की आजादी के समय रियासतों की राजनीतिक स्थिति क्या थी?
Right Answer is:

SOLUTION

अधिकांश नवाब और रजवाड़े ब्रिटिश ताज की अधीनता स्वीकार कर चुके थे। अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो ये नवाब और राजा भारत में स्वतंत्र सत्ता का सपना देखने लगे थे।


Q. 161310 विधान सभा में वर्चस्व रखने वाले महत्त्वपूर्ण तीन सदस्य कौन थे? वे किस दल से संबन्धित थे?
Right Answer is:

SOLUTION

वे तीन नेता -जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल और डॉ॰राजेंद्र प्रसाद थे। वे कांग्रेस के सदस्य थे।


Q. 161311 पंडित जवाहर लाल नेहरू के अनुसार विधानसभा की शक्ति का स्रोत क्या था?
Right Answer is:

SOLUTION

नेहरू के अनुसार शक्ति का स्रोत भारत के लोग थे जिंहोने अपने और राष्ट्र के लिए संविधान का निर्माण करने के लिए अपने प्रतिनिधियों को निर्वाचित किया है।


Q. 161312 आप समवर्ती सूची से क्या समझते हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

समवर्ती सूची में शासन से सम्बंधित विषयों का समावेश होता है, जिन पर केन्द्र और राज्य दोनों के मध्य जिम्मेदारीयॉं का बँटवारा होता है, असहमति के मामले में केन्द्र की इच्छा को महत्वपूर्ण माना जाता है


Q. 161313 भारतीय संविधान के स्वरूप पर प्रकाश डालिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय संविधान का स्वरूप जटिल है। इसके स्वरूप के विषय में विशेषज्ञों की राय एक नहीं है- संविधान के प्रसिद्द आलोचक दुर्गादास बसु के अनुसार- "भारतीय संविधान संघात्मक एवं एकात्मकता का मिश्रण है। " वहीं प्रो. डी.एन.बनर्जी के अनुसार- "भारत के संविधान का स्वरूप संघात्मक है, परन्तु उसमें एकात्मकता की झलक मिलती है।"


Q. 161314 19वीं शताब्दी के दौरान, भूगोल की एक शाखा जो अस्तित्व में आई:


A.

राजनीतिक भूगोल

B.

क्षेत्रीय भूगोल

C.

सामान्य भूगोल

D.

भू-आकृति विज्ञान

Right Answer is: D

SOLUTION

भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) भू-आकृतियों और उनको आकार देने वाली प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है; तथा अधिक व्यापक रूप में, उन प्रक्रियाओं का अध्ययन है जो किसी भी ग्रह के उच्चावच और स्थलरूपों को नियंत्रित करती हैं।


Q. 161315 भूआकृति विज्ञान (Gemophology) क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भूआकृति विज्ञान (Gemophology), भौतिक भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें स्थलमंडल के भौतिक तत्वों का अध्ययन किया जाता है। इसके अन्तर्गत भूआकृतियों (स्थल रूपो) की उत्पत्ति एवं विकास (अनाच्छादन, अपक्षय, अपरदन तथा निक्षेपण के प्रक्रमों द्वारा निर्मित स्थल रूपों) का विश्लेषण किया जाता है।


Q. 161316 पृथ्वी कितनी परतों से मिलकर बनी है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भौतिक भूगोल (Physical geography) भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें पृथ्वी के भौतिक स्वरूप का अध्ययन किया जाता हैं, जिसमें स्थलाकृतियाँ, मृदाएँ, जलवायु, जल और विविध वनस्पति और जीव शामिल हैं|


Q. 161317 एलन सी सैम्पल के अनुसार मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी एवं क्रियाशील मानव के परस्पर परिवर्तनशील सम्बन्धों का अध्ययन है


Q. 161318 सामाजिक भूगोल के कोई दो उप-क्षेत्रों के नाम लिखिए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यवहारवादी भूगोल एवं सांस्कृतिक भूगोल


Q. 161319 भूगोल का भूविज्ञान से क्या सम्बन्ध है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भू विज्ञान के अंतर्गत भूगर्भ व धरातल पर स्थित भू दृश्यों का अध्ययन किया जाता है वहीँ भूगोल की शाखा भौतिक भूगोल में पृथ्वी के भू दृश्यों व उसकी आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है।


Q. 161320 भूगोल की विषय वस्तु का उल्लेख कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भौतिक भूगोल व मानव भूगोल (i) स्थलमण्डल (ii) वायुमण्डल (iii) जल मण्डल व जैव मण्डल


Q. 161321 भूगोल के अध्ययन के दो उपागमो के नाम बताइए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1) प्रादेशिक उपागम 2) क्रमबद्ध उपागम


Q. 161322 मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, अवकाश का भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, चिकित्सा भूगोल निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगौल संसाधन भूगोल,कृषि भूगोल,उद्योग भूगोल,विपणन भूगोल,पर्यटन भूगोल तथा अन्र्तराष्ट्रीय व्यापार का भूगोल,मानव भूगोल के महत्त्वपूर्ण उप क्षेत्र है।


Q. 161323 मानव भूगोल का जन्मदाता किसे कहा जाता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जर्मन के प्रख्यात भूगोलवेत्ता रेटजेल को मानव भूगोल का जन्म-दाता कहा जाता है।


Q. 161324 मानव भूगोल से क्या अभिप्राय है ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मानव भूगोल वह विज्ञान है। जिसमें पृथ्वी तल पर मानवीय तथ्यों के स्थानिक वितरणों का अर्थात् विभिन्न प्रदेशों के मानव वर्गो द्वारा किए गए वातावरण समायोजनों और स्थानिक संगठनों का अध्ययन किया जाता है।


Q. 161325 क्लाडियस टॉलमी का क्या योगदान हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

क्लाडियस टॉलमी एक प्रमुख भूगोलवेत्ता था। वह मिस्त्र का निवासी था। टॉलमी (100-168 ईसवी) ने ग्रीक और रोमन अध्ययनों को अपनी कृति ‘जियोग्राफिया’ में संकलित किया है| ग्रहीय सिद्धान्त और एनेलिमा उनकी अन्य रचनाएँ हैं| उसने सिकन्दरिया के निकट के एक नगर नोरस से कई खगोलिए बेध किए।


Q. 161326 भौतिक एवं मानव भूगोल में विभेद कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भौतिक भूगोल- इसके अंतर्गत पृथ्वी की उत्पत्ति, आभ्यांतरिक संरचना, शैल संरचना, ज्वालामुखी, भूकम्प, जल मण्डल, वायुमण्डल आदि का अध्ययन किया जाता है।मानव भूगोल-इसमें मानव उत्पत्ति, उसकी प्रजातियों, आर्थिक क्रियाओं व सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है।


Q. 161327 भूगोल और इतिहास के मध्य सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भूगोल और इतिहास एक दूसरे से अन्र्तसम्बन्धित है वर्तमान भौगोलिक घटनाएँ ही अतीत के गर्भ में इतिहास बनकर प्रकट होती है इतिहास मानव की भूतकालीन घटनाओं का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करता है । भूगोल की पृष्ठ भूमि में जो घटनाएँ जन्म लेती है वे ही आगे चलकर इतिहास को सुदृढ़ आधार प्रदान करती है । इस प्रकार प्राचीन इतिहास वर्तमान भूगोल है जबकि बीता हुआ भूगोल इतिहास है ।


Q. 161328 मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यवहारवादी भूगोल, सामाजिक कल्याण का भूगोल, अवकाश का भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, चिकित्सा भूगोल निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगौल संसाधन भूगोल,कृषि भूगोल,उद्योग भूगोल,विपणन भूगोल,पर्यटन भूगोल तथा अन्र्तराष्ट्रीय व्यापार का भूगोल,मानव भूगोल के महत्त्वपूर्ण उप क्षेत्र है ।


Q. 161329 आधुनिक भूगोल का जनक किसे माना जाता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कार्ल रिटर (7 अगस्त, 1779 ई॰ - 28 सितम्बर 1859 ई॰) विश्वविख्यात जर्मन भूगोलवेत्ता थे। ये आधुनिक भूगोल के संस्थापक तथा भूगोल के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र तुलनात्मक भूगोल के जनक माने जाते हैं। अन्य रचनाओं (अर्द्कुण्डे, यूरोप का एतिहासिक, भौगोलिक एवं सांख्यिकीय अध्ययन, काला सागर एवं कैस्पियन सागर के मध्य के प्रदेशों का मानव स्थानान्तरण)  में 'यूरोप, एक भौगोलिक, ऐतिहासिक तथा तथ्यात्मक अध्ययन' प्रमुख है।


Q. 161330 अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट का भूगोल में क्या योगदान हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट, जर्मनी (तत्कालीन प्रशा) के भूगोलवेत्ता, प्रकृति विज्ञानी, और खोजकर्ता थे। हम्बोल्ट ने सर्वप्रथम वनस्पति विज्ञान में परिमाणात्मक विधियों का प्रयोग किया जिनसे जैव भूगोल की मजबूत आधारशिला का निर्माण हुआ। हम्बोल्ट कि सबसे प्रमुख कृति कॉसमॉस है जिसमें उन्होंने संश्लेषणात्मक विचारों के साथ ज्ञान की विभिन्न शाखाओं में सामंजस्य और एकता लाने का प्रयास किया है।


Q. 161331 भौगोलिक अध्ययन के क्रमबद्ध उपागम की विवेचना कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भूगोल के इस उपागम में भूगोल के विभिन्न पक्षों या लवणों का क्रम से अध्ययन किया जाता है जैसे - भू आकृति, मिटटी ,जलवायु, पशु पक्षी, जनसँख्या व उनकी विशेषताएं व आर्थिक क्रिया कलाप आदि तथ्यों का अध्ययन समस्त भूतल के सन्दर्भ में अलग अलग किया जाता है। इस प्रकार क्रमबद्ध उपागम में प्रत्येक भौगोलिक तथ्य का विश्लेषण किया जाता है।


Q. 161332
सम्भववाद एवं पर्यावरणीय निश्चयवाद की तुलना कीजिए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पर्यावरणीय निश्चयवाद एवं संभववाद में अन्तर - पर्यावरणीय निश्चयवाद सम्भववाद 1) इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक क्रियाकलाप को पर्यावरण से नियंत्रित माना जाता है । 2) पर्यावरणीय निश्चयवादी सामान्यतः मानव को एक निष्क्रिय कारक समझते है जो पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है । 1) इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृति दल अनेक संभावनाओं का इच्छानुसार अपने लाभ के लिए उपयोग कर सकता है । 2) संभववाद प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान देता है और उसे सक्रिय शक्ति के रूप में देखता है ।


Q. 161333 भूगोल में द्वैतवाद क्या हैं? भूगोल में कौन कौन से द्वैतवाद आये हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भूगोल में द्वैतवाद: द्वैतवाद दो भागों की एक अवस्था को प्रदर्शित करता है|

भूगोल में निम्न द्वैतवाद आये हैं:

क.   प्रथम द्वैतवाद यह है कि क्या भूगोल को एक विषय के रूप में नियमों का संगठन या वर्णन होना चाहिए?

ख.    द्वितीय द्वैतवाद यह है कि क्या इसकी विषय-वस्तु संगठित होनी चाहिए अथवा अध्ययन के उपागम क्षेत्रीय या व्यस्थित होने चाहिए?

ग.     तृतीय द्वैतवाद यह है कि क्या भौगोलिक घटनाओं की व्याख्या सैंद्धांतिक रूप में की जानी चाहिए या फिर ऐतिहासिक-संस्थागत उपागमों से की जानी चाहिए?


Q. 161334
मुहम्मद अली जिन्ना के राजनैतिक विचारों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मुहम्मद अली जिन्ना ने 22 मार्च, 1940 ई. को पृथक राष्ट्र की मांग करते हुए द्विराष्ट्र की घोषणा की जिसके अनुसार कहा गया कि भारत में हिन्दू व मुस्लिम दो राष्ट्र हैं व किसी भी क्षेत्र में उनके हित एक जैसे नहीं हैं । जिन्ना के अनुसार पाकिस्तान का गठन ही भारत में सांप्रदायिक समस्या का स्थायी समाधान है । उनके अनुसार उत्तरी पश्चिमी व उत्तरी पूर्वी भारत के दो हिस्से स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण करेंगे जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं।


Q. 161335 भारत में विभाजन के तत्काल प्रभाव क्या थे?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

छाया सीमा (शेडो लाइंस) दोनों नए राज्यों के बीच की सरहद बँटवारे के दौरान चौतरफा हिंसा देखी गई।

अ)कई लाख लोग मारे गए, न जाने कितनी औरतों का बलात्कार और अपहरण हुआ।

ब)दोनों तरफ करोड़ों लोग उजड़ गए, रातों-रात अजनबी जमीन पर रिफ़्यूजी (शरणार्थी) बनकर रह गए।


Q. 161336 स्त्रियों पर अत्याचार के दो प्रमुख कारण बताइये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अशिक्षा से आज भी भारतीय महिलाएं पीडि़त हैं दहेज प्रथा ने तो उसकी स्थिति कोऔर भी अधिक शोचनीय बना दिया है। दहेज़ प्रथा ने तो उनकी स्थिति को और भी अधिक शोचनीय बना दिया है, दहेज प्रथा के कारण महिलाओं को प्रताडि़त करने, मारपीट करने तथा उनहें जलाकर मार देने सम्बन्धी अनेक घटनाएँ निरन्तर घटित हो जाती हैं। देहज प्रथा सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के लिए अभिशाप बन गई है। किन्तु इस स्थिति के साथ-साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रश्चात् भारतीय समाज में महिलाओं की दशा सुधारने के लिए अनेक क्रांतिकारी प्रयास भी किए गए हैं


Q. 161337 क्या भारत का विभाजन टाला जा सकता था?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

हालांकि यह अंग्रेजों की फूट डालो राज करों की ब्रह्मस्त्रीय नीति, मुस्लिम लीग की हठधर्मिता एवं ना-समझी तथा कांग्रेस की अदूरदर्शिता का तार्किक परिणाम था। तत्कालीन परिस्थितियों में यदि विभाजन नहीं होता तो संभवतः हमारा भारत कई टुकड़ों में बट जाता था हमकों एक भयंकर साम्प्रदायिक दंगे का शिकार होना पड़ता, जिसका परिणाम जाने क्या होता। फिर भी इन परिस्थितियों के जिम्मेदार भी तो हम ही थे, अतः विभाजन भी टाला जा सकता था, बशर्ते कि ब्रिटिश-नीतियाँ अनुकूल होती तथा जिन्ना की हटधर्मिता एवं द्विराष्ट्रवाद नहीं होते तथा कांग्रेस दूरदर्शिता से कार्य करती। स्वयं जिन्ना ने भी बाद में स्वीकारा कि विभाजन उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी।


Q. 161338 भारत-पाक संबंधों में कटुता के दो प्रमुख कारण बताइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(1) दोनों देशों में आज भी विभाजन की टीस है, विभाजन की स्मृतियाँ, घृणाएँ और छवियाँ आज की सरहद के दोनों तरफ के लोगों के इतिहास सम्बन्धों को तय करती है।

(2) कश्मीर प्रश्न को लेकर दोनों देशों के मध्य तीव्र मनमुटाव और कटुता की स्थिति बनी हुई है।


Q. 161339 मुहम्मद अली जिन्ना के राजनैतिक विचारों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मुहम्मद अली जिन्ना ने 22 मार्च, 1940 ई. को पृथक राष्ट्र की मांग करते हुए द्विराष्ट्र की घोषणा की जिसके अनुसार कहा गया कि भारत में हिन्दू व मुस्लिम दो राष्ट्र हैं व किसी भी क्षेत्र में उनके हित एक जैसे नहीं हैं । जिन्ना के अनुसार पाकिस्तान का गठन ही भारत में सांप्रदायिक समस्या का स्थायी समाधान है । उनके अनुसार उत्तरी पश्चिमी व उत्तरी पूर्वी भारत के दो हिस्से स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण करेंगे जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं।


Q. 161340 भारत में विभाजन के तत्काल प्रभाव क्या थे?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

छाया सीमा (शेडो लाइंस) दोनों नए राज्यों के बीच की सरहद बँटवारे के दौरान चौतरफा हिंसा देखी गई।

अ)कई लाख लोग मारे गए, न जाने कितनी औरतों का बलात्कार और अपहरण हुआ।

ब)दोनों तरफ करोड़ों लोग उजड़ गए, रातों-रात अजनबी जमीन पर रिफ़्यूजी (शरणार्थी) बनकर रह गए।


Q. 161341 स्त्रियों पर अत्याचार के दो प्रमुख कारण बताइये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अशिक्षा से आज भी भारतीय महिलाएं पीडि़त हैं दहेज प्रथा ने तो उसकी स्थिति कोऔर भी अधिक शोचनीय बना दिया है। दहेज़ प्रथा ने तो उनकी स्थिति को और भी अधिक शोचनीय बना दिया है, दहेज प्रथा के कारण महिलाओं को प्रताडि़त करने, मारपीट करने तथा उनहें जलाकर मार देने सम्बन्धी अनेक घटनाएँ निरन्तर घटित हो जाती हैं। देहज प्रथा सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था के लिए अभिशाप बन गई है। किन्तु इस स्थिति के साथ-साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के प्रश्चात् भारतीय समाज में महिलाओं की दशा सुधारने के लिए अनेक क्रांतिकारी प्रयास भी किए गए हैं


Q. 161342 स्वतंत्रता के बाद भारत को किन चुनौतीयों का सामना करना पड़ा था?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

जब भारत आजाद हुआ तो उसके सामने कई बड़ी चुनौतियाँ थी। स्वतंत्रता के समय भारत की एक विशाल संख्या गाँवों में रहती थी। आजीविका के लिए किसान और काश्तकार बारिश पर निर्भर रहते थे। शहरों में फैक्ट्री मजदूर भीड़ भरी झुग्गी बस्तियों में रहते थे जहाँ शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं की खास व्यवस्था नहीं थी। नए राष्ट्र के लिए इस विशाल आबादी को गरीबी के चंगुल से निकालने के लिए न केवल खेती की उपज बढ़ाना जरूरी था बल्कि नए उद्योगों का निर्माण भी करना था जहाँ लोगों को रोजगार मिल सके।


Q. 161343 आजादी के बाद भारत के सामने आने वाली दो समस्याओं का उल्लेख कीजिये।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

स्वतंत्रता के तत्काल बाद भारत के सामने आने वाली दो प्रमुख समस्याएं-एकता को बनाए रखने और राष्ट्र के विकास को सुनिश्चित करने की थी।


Q. 161344
भारत विभाजन के लिए उत्तरदायी कारणों का विवरण दीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1. अंग्रेजो की ‘फूट डालो राज करो’ नीति सन् 1909 में लागू मार्ले-मिण्टो सुधार के नाम पर मुस्लिम लीग का गठन व मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की मंजूरी देकर हिंदू मुस्लिमों को एक दूसरे के विरूद्ध भड़काया, साथ ही घृणा के बीजों को भी बोया।2. कांग्रेस की समझौतावादी नीति-कांग्रेस ने सदा लीग के साथ समझौते की नीति को अपनाया, जिससे लीग को यह आशा हो गई कि पाकिस्तान की माँग पर अड़े रहने पर कांग्रेस झुक जाएगी।3. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवसः- 16 अगस्त को लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस घोषित किया परिणामतः पूरे देश में सांप्रादायिक दंगे भड़क उठे। रक्तपात को रोकने के लिए कांग्रेस ने बँटवारा मंजूर कर लिया। 4. संयुक्त प्रांत में कांग्रेस द्वारा लीग के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार- अंतरिम सरकार के गठन में कांगे्रस ने मुस्लिम लीग को शामिल नहीं किया। कांग्रेस के इस निर्णय से लीग में इस भावना का जन्म हुआ कि स्वतंत्रता के बाद भी कांग्रेस उनके हितों को पूरा नहीं करेगी और वह राजनीतिक सत्ता में दोयम दर्जे की पार्टी बनकर रह जायेगी। 5. लीग की असहयोग की नीति- अनेक अवसरों पर लीग ने कांग्रेस के निर्णयों को नकारा जिसके कारण 1946 ई. में बनी अंतरिम सरकार असफल रही। जिसने दोनों पार्टियों में इस भावना का संचार किया कि हिन्दू व मुस्लिम एक होकर शासन नहीं चला सकते।6. लार्ड माँउटबेटन को विभाजन के उद्धेश्य से भारत भेजा गया था। इसके अलावा नेहरू व जिन्ना की राजनैतिक महत्वकांक्षाओं ने भी विभाजन का समर्थन किया परिणामतः 15 अगस्त 1947 को भारत विभाजित हो गया।


Q. 161345 मौखिक स्त्रोत के रूप में व्यक्तिगत स्मृतियों पर प्रकाश डालिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यक्तिगत स्मृतियों -जो एक तरह का मौखिक स्त्रोत है ,की एक ख़ूबी यह है कि उनमें हमें अनुभवों और स्मृतियों को और बारीकी से समझने का मौका मिलता है। इससे इतिहासकारों को बँटवारे जैसी घटनाओं के दौरान लोगों के साथ क्या-क्या हुआ, इस बारे में बहुरंगी और सजीव वृत्तांत लिखने की काबिलियत मिलती है। सरकारी दस्तावेजों से इस तरह की जानकारियाँ हासिल कर पाना नामुमकिन होता है।


Q. 161346 मौखिक स्त्रोत के रूप में व्यक्तिगत स्मृतियों पर प्रकाश डालिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

व्यक्तिगत स्मृतियों -जो एक तरह का मौखिक स्त्रोत है ,की एक ख़ूबी यह है कि उनमें हमें अनुभवों और स्मृतियों को और बारीकी से समझने का मौका मिलता है। इससे इतिहासकारों को बँटवारे जैसी घटनाओं के दौरान लोगों के साथ क्या-क्या हुआ, इस बारे में बहुरंगी और सजीव वृत्तांत लिखने की काबिलियत मिलती है। सरकारी दस्तावेजों से इस तरह की जानकारियाँ हासिल कर पाना नामुमकिन होता है।        


Q. 161347 आपके अनुसार भारत विभाजन के लिए कौन-सी परिस्थितियां उत्तरदायी थीं ? उल्लेख कीजिये ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत का विभाजन बीसवीं शताब्दी की सबसे बड़ी दुखद घटना है, इस काल में घटित घटनाओं तथा नेताओं के व्यवहार ने अंत में भारत को दो भागों -हिंदुस्तान एवं पकिस्तान में बाँट दिया, इस विभाजन के निम्नलिखित कारण थे-

1) अंग्रेजों की नीति -

अंग्रेजों की नीति भारत में प्रारम्भ से ही फूट डालो राज करो की रही थी, अंग्रेज निरंतर हिंदुओं के खिलाफ मुसलामानों के दिमाग में विष घोलते रहे, उन्हें भड़काते रहे कि हिन्दू और मुसलमान दो अलग-अलग कौमें हैं, अतः डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का यह कथन बिलकुल सत्य प्रतीत होता है कि, "पाकिस्तान के निर्माता कवी इकबाल तथा मी. जिन्ना नहीं, वरन लॉर्ड मिन्टों थे," ।

2) हिन्दू साम्प्रदायिकता -

कुछ विद्वानों का मानना है कि हिन्दू साम्प्रदायिकता भारत विभाजन के लिए दोषी है, किन्तु जब अंग्रेजों ने मुस्लिम लीग को भड़काकर भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगें कराये तो विवश होकर हिंदुओं को संगठित होना पड़ा, यह तथ्य असंगत प्रतीत होता है ।

3) लीग के प्रति कांग्रेस की नीति -

मुस्लिम लीग के प्रति कांग्रेस की नीति सदैव तुष्टिकरण की रही थी,जो अंत में देश के विभाजन का कारण बनी, 1916 में लखनऊ पैक्ट के रूप में साम्प्रदायिक निर्वाचन प्रणाली को स्वीकार करना, सिंध को मुम्बई से अलग करना, सी.आर. योजना को स्वीकार करना तथा कांग्रेस मंत्री मंडल में मुस्लिम लीग के मत्रियों को स्वीकार करने में कठोरता दिखाना, ये भयंकर भूलें थीं, जो कि कालान्तर में भारत वीभाजन का कारण बनी ।

4)जिन्ना की महत्वाकांक्षा-

मी.मुहम्मद अली जिन्ना एक मटवाकांक्षी व्यक्ति थे, महात्मा गांधी द्वारा दिए गए प्रधानमंत्री के अवसर को भी उन्होंने इसीलिये ठुकरा दीया था, क्योंकि वे एक राष्ट्र निर्माता बनना चाहते थे ।

5) जिन्ना की हठ-

1940 ई. में संवैधानिक गतिरोध दूर करने के लीये अनेक सुझाव कांग्रेस द्वारा दिए गए थे, किन्तु जिन्ना महोदय प्रारम्भ से ही अपनी पाकिस्तान की मांग को लेकर जिद पर अड़े रहे ।

6) अंतरिम सरकार की असफलता-

सन 1946 ई. में निर्वाचन के पश्चात केंद्र में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ, जिसमें कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग दोनों के नेता थे । प. जवाहर नेहरू प्रधानमंत्री बनाये गए , सरदार पटेल को गृह मंत्री एवं मुस्लिम लीग के लियाकत अली वित्त मंत्री बनाये गए, कांग्रेस ने जब भी विकास के लिए अपनी योजनाएं प्रस्तुत की, उन्हें लियाकत अली द्वारा धन की कमी का बहानका बनाकर अस्वीकृत कर दिया जाता , विवश होकर सरदार पटेल को कहना पड़ा कि "एक वर्ष के मेरे प्रशासनिक अनुभव अनुभव ने मुझे यह विशवास दिला दिया कि हैम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं" ।

7) पाकिस्तान की स्थिरता में संदेह-

कांगेस के अनेक नेताओं का मानना था कि पाकिस्तान यदि बन भी गया तो, वह उसकी भौगोलिक, आर्थिक , सैनिक , राजनितिक दृष्टि से स्थायी राष्ट्र नहीं बन सकेगा और एक दिन उसका भारत में विलय हो जाएगा।

8 लीग के साम्प्रदायिक कार्य-

जब मुस्लिम लीग को अपने संवैधानिक कार्यों में असफलता मिली तो उसने मुस्लिम जनता को भड़काकर जगह-जगह सांप्रदायिक दंगें करवा दिए, अकेले नोवाखाली में ही करीब सात हजार लोगों की जानें इन साम्प्रदायिक दंगों में गयी थी ।

9 सत्ता के प्रति कांग्रेसी नेताओं का आकर्षण -

एक अंग्रेजी विचारक माईकल बरचर ने यह विचार प्रस्तुत किये थे कि, कांगेसी नेताओं का सत्ता के प्रति आकर्षण था, और वे विजय की घड़ी में ये आकर्षण छोड़ना नहीं चाहते थे, किन्तु यह आरोप सत्य प्रतीत नहीं होता है, कांग्रेसी नेता शुरू से देशभक्त थे, वे भारत्त की अखंडता में विशवास रखते थे, किन्तु जब उन्हें ये विश्वास हो गया कि या तो भारत स्वतन्त्र होगा अथवा गृहयुद्ध की स्थिति उत्त्पन्न होगी तो उन्होंने एक खंडित भारत को स्वीकार करना तय किया था।

10 सत्ता हस्तांतरण के बारे में अंग्रेजों का दृष्टिकोण-

अंग्रेजों का विचार था कि भारत विभाजन से उत्त्पन्न दोनों राष्ट्र, हिंदुस्तान एवं पाकिस्तान सर्वदा आपस में लड़ते रहेंगें जो कि भारत को एक दुर्बल राष्ट्र बना देगा, यह विचार सत्य साबित हुआ ।

11 लीग के साथ स्थायी एकता न होने का विचार -

मुस्लिम लीग की सीधी कार्यवाही के बाद, कांग्रेस नेताओं को यह आभास होने लगा था कि, उसे साथ लेकर चलना असम्भव होगा, अंग्रेजों ने 30 जून 1947 तक भारत छोड़ने का निर्णय कर लिया था, ऎसी स्थिति में जबकि मुस्लिम लीग सम्पूर्ण भारत में दंगें करा रही थी, कांग्रेस नेताओं के सामने दो ही विकल्प थे-भारत का विभाजन स्वीकार करना या गृह युद्ध, अतः कांग्रेस ने प्रथम विकल्प को चुनना पसंद किया।

12 लॉर्ड माउंटबेटन का प्रभाव- भारत विभाजन को अपने चरम पर पहुंचाने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड माउण्ट बेटन को भारत भेजा, उन्होंने राजनीति, कूटनीति, व्यवहार कुशलता सभी का प्रयोग कर अपने इस कार्य में सफलता प्राप्त कर ली, पं. जवाहरलाल नेहरू तथा सरदार पटेल मुस्लिम लीग के कार्यों एवं कटु अनुभवों के कारण भारत- विभाजन के लिए सहमत हो गए।

उपरोक्त परिस्थितियां भारत-विभाजन के लिए उत्तरदायी रहीं, यद्यपि महात्मा गांधी भारत-विभाजन के विरुद्ध थे और उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि , भारत का विभाजन उनकी लाश पर ही होगा, किन्तु अंग्रेजों की कुटिलता एवं मुस्लिम लीग की हरकतों से भारत विभाजन होकर ही रहा!लॉर्ड माउंटबेटन का प्रभाव- भारत विभाजन को अपने चरम पर पहुंचाने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड माउण्ट बेटन को भारत भेजा, उन्होंने राजनीति, कूटनीति, व्यवहार कुशलता सभी का प्रयोग कर अपने इस कार्य में सफलता प्राप्त कर ली, पं. जवाहरलाल नेहरू तथा सरदार पटेल मुस्लिम लीग के कार्यों एवं कटु अनुभवों के कारण भारत- विभाजन के लिए सहमत हो गए।

उपरोक्त परिस्थितियां भारत-विभाजन के लिए उत्तरदायी रहीं, यद्यपि महात्मा गांधी भारत-विभाजन के विरुद्ध थे और उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि , भारत का विभाजन उनकी लाश पर ही होगा, किन्तु अंग्रेजों की कुटिलता, मुस्लिम लीग की हरकतों से भारत विभाजन होकर ही रहा ।


Q. 161348
“भारत - बँटवारा एक साम्प्रदायिक राजनीति का आखिरी बिंदु था।“ इस कथन की समालोचना कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत का बँटवारा उस साम्प्रदायिक राजनीति का अंतिम बिंदु था जो 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई थीं जिसने हिंदु-मुसलमानों में नफरत की भावना को जन्म दिया । धार्मिक समुदायों में परस्पर घृणा फैलाकर झगड़े पैदा किये, व हिंसा की राजनीति को फैलाया
1) भारत-विभाजन और सांप्रादायिक तनाव - कई इतिहासकारों के अनुसार भारत के बंटवारे के लिये सांप्रादायिक तनाव जि़म्मेदार था ।
अपने समर्थन में वे निम्न तर्क देते हैं -
i) हिन्दु-मुस्लिम झगड़ों की निरंतरता - इतिहास पर नज़र डाले तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सांप्रादायिक तनाव की जड़ें प्राचीनकाल से ही गहराई से जुड़ी रही हैं लेकिन तार्किक रूप से यह सत्य नहीं है क्योंकि-पद्ध इन दोनो समुदायों में झगड़ों के साथ-साथ मेल-जोल का इतिहास भी है ।
ii) दोनों समुदायों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता रहा है ।
iii) बदलती परिस्थितियाँ भी मानसिकता पर असर डालती है, इस सत्य को इतिहासकार नज़र अंदाज कर देते हैं ।
2) अगे्रंजों द्वारा 1909 का अधिनियम फूट का कारण - अंग्रेजों द्वारा मार्ले-मिण्टो सुधार के नाम पर पृथक निर्वाचन अधिनियम ने सांप्रादायिक राजनीति के बीच बो दिये व दोनों समुदायों में फूट डाली ।
3) पृथक चुनाव के परिणाम - पृथक चुनाव क्षेत्रों ने मुसलमानों को क्षेत्र विशेष से अपना पृथक प्रतिनिधि चुनने की स्वायत्तता प्रदान की । इस व्यवस्था में राजनीतिज्ञों को लालच रहता है कि वह समुदाय विशेष की भावनाओं का लाभ उठाकर समुदाय विशेष को फायदा पहुँचाए । इस कारण चुनावी राजनीति व धार्मिक राजनीति के घाल-मेल ने सांप्रादायिक माहौल को मजबूती प्रदान की । तथापि यह मानना पूर्णतः सही नहीं है कि बँटवारा पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की प्रत्यक्ष देन है। हाँ यह जरूर कहा जा सकता है कि इनकी अप्रत्यक्ष भूमिका अवश्य है।
1920-30 के दशक में कट्टरवाद का प्रसार - इस दशक में आर्य समाज व मुस्लिम लीग जैसी कट्टरपंथी ताकतों ने दोनों समुदायों के एक-दूसरे के प्रति भड़काया । मुसलमान आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन, गौ-रक्षा आंदोलन जैसे मुद्धों पर आक्रोशित हुए तो हिंदु 1923 के बाद प्रचार व संगठन के विस्तार से उत्तेजित हुऐ । इन कारणों से देश के विभिन्न भागों में दंगे फैलते गए व दोनों समुदायों के बीच भेदभाव गहराते गए । भारत विभाजन प्रत्यक्षतः साप्रदायिकता के जहर का परिणाम था । सांप्रदायिकता के इस विष ने दोनों समुदायों के मध्य इतना वैमनस्य पैदा कर दिया जिसकी चरम परिणिति भारत का बंटवारा थी इसीलिये भारत-विभाजन को सांप्रादायिक राजनीति का आखिरी बिंदु कहा गया ।


Q. 161349
मौखिक इतिहास के फायदों की पहचान कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1. इतिहास को बारीकी से समझााने में सहायक- सरकारी दस्तावेजों से हमें शासक वर्ग द्वारा प्रदŸा जानकारी ही प्राप्त होती है जबकि व्यक्तिगत स्मृतियाँ हमें समग्र जानकारी उपलब्ध कराती हैं। व्यक्तियों के अनुभव स्मृतियों को जानकर इतिहासकार घटना का सजीव वर्णन करने में सफल होते हैं।
2. साक्ष्यों की विश्वसनीयता की परख संभव- कई इतिहासकार मौखिक इतिहास को अविश्सनीय कहकर खारिज करते हैं। उनके अनुसार इस प्रकार की जानकारियाँ सटीक नहीं होती, ना ही घटनाक्रम ही सही होता हैं पर भारत विभाजन के संदर्भ में प्राप्त मौखिक इतिहास सत्य के ज्यादा नजदीक है जिसको पूर्णतः परख लिया गया है वह लोगों के अनगिनत तनावों व कठिनाईयों का सत्य वर्णन करता है।
3. उपेक्षित समूह के अनुभवों को महत्व- मौखिक इतिहास द्वारा समाज के उपेक्षित समूहों जैसे महिलाएँ, शरणार्थी, कमजोरों, विधवाओं, गरीबों आदि के अनुभवों को भी महत्व मिल जाता है, जो इतिहासकारों को विस्तृत साक्ष्य प्रदान करता हैं।
4. मौखिक इतिहासकार हमारे देश के इतिहास की टूटी कडि़यों को जोड़ने मे सहायक हैं जो पुराने लोग विवरण सुनाते है वे अपने संस्मरणों, विवरणों आदि द्वारा इतिहासकारों की अनेक कठिनाईयों और स्त्रोत संबंधी जानकारियों की समस्या हल करने में सहायक होते हैं।
निष्कर्षतः विभाजन का समग्र वृतांत जानने के लिए बहुत तरह के स्त्रोतों का सावधानी पूर्वक इस्तेमाल आवश्यक है ताकि घटना के साथ-साथ उसे एक प्रक्रिया के रूप में जान सकें।


Q. 161350 विभाजन के समय में महिलाओं की स्थिति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

हिंसक काल जो अपने साथ विभाजन लेकर आया के दौरान औरतों के साथ भयानक अनुभव हुए। उनके साथ बलात्कार हुए, उनको अगवा किया गया, बार-बार बेचा-ख़रीदा गया, अनजान हालात में अजनबियों के साथ एक नयी ज़िंदगी बसर करने के लिए मजबूर किया गया। औरतों ने जो कुछ भुगता था उसके गहरे सदमे के बावजूद बदले हुए हालात में कुछ औरतों ने अपने नए पारिवारिक बंधन विकसित किए। लेकिन भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने इनसानी संबंधों की जटिलता के बारे में कोई संवेदनशील रवैया नहीं अपनाया। इस तरह की बहुत सारी औरतों को जबरदस्ती घर बिठा ली गई मानते हुए उन्हें उनके नए परिवारों से छीनकर दोबारा पुराने परिवारों या स्थानों पर भेज दिया गया। जिन औरतों के बारे में फैसले लिए जा रहे थे उनसे इस बार भी सलाह नहीं ली गई। अपनी ज़िंदगी के बारे में फैसला लेने के उनके अधिकार को एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया।


Q. 161351 विभाजन के समय में महिलाओं की स्थिति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

 हिंसक काल जो अपने साथ विभाजन लेकर आया के दौरान औरतों के साथ भयानक अनुभव हुए। उनके साथ बलात्कार हुए, उनको अगवा किया गया, बार-बार बेचा-ख़रीदा गया, अनजान हालात में अजनबियों के साथ एक नयी ज़िंदगी बसर करने के लिए मजबूर किया गया। औरतों ने जो कुछ भुगता था उसके गहरे सदमे के बावजूद बदले हुए हालात में कुछ औरतों ने अपने नए पारिवारिक बंधन विकसित किए। लेकिन भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने इनसानी संबंधों की जटिलता के बारे में कोई संवेदनशील रवैया नहीं अपनाया। इस तरह की बहुत सारी औरतों को जबरदस्ती घर बिठा ली गई मानते हुए उन्हें उनके नए परिवारों से छीनकर दोबारा पुराने परिवारों या स्थानों पर भेज दिया गया। जिन औरतों के बारे में फैसले लिए जा रहे थे उनसे इस बार भी सलाह नहीं ली गई। अपनी ज़िंदगी के बारे में फैसला लेने के उनके अधिकार को एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया।


Q. 161352 उन विभिन्न तरीकों का वर्णन कीजिए जिसके द्वारा विभाजन ने भारत के विभिन्न भागों को प्रभावित किया। इसके अलावा विभाजन और इसके फलस्वरूप हुई हिंसा के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में गांधी जी की भूमिका का वर्णन कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अभी तक हम आम लोगों के जिन अनुभवों पर चर्चा कर रहे हैं वे उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी इलाके से संबंधित थे। कलकत्ता और नोआखली में 1946 में भी जनसंहार हो चुके थे लेकिन विभाजन का सबसे ख़ूनी और विनाशकारी रूप पंजाब में सामने आया। पश्चिमी पंजाब से तकरीबन सभी हिंदुओं और सिखों को भारत की तरफ और तकरीबन सभी पंजाबी भाषी मुसलमानों को पाकिस्तान की तरफ हाँक दिया गया। और यह सब कुछ 1946 से 1948 के बीच, महज़ दो साल में हो गया।

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और हैदराबाद (आंध्र प्रदेश) के बहुत सारे परिवार पचास के दशक और साठ के दशक के शुरुआती सालों में भी पाकिस्तान जाकर बसते रहे लेकिन बहुत सारों ने भारत में ही रहने का फैसला किया। पाकिस्तान गए ऐसे ज़्यादातर उर्दू भाषी लोग, जिन्हें मुहाजिर (अप्रवासी) कहा जाता है, सिंध के कराची-हैदराबाद इलाके में बस गए।

बंगाल में यह पलायन ज्यादा लंबे समय तक चलता रहा। लोग ढीली-ढाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा के आर-पार जाते रहे। इसका एक अर्थ यह था कि बंगाली विभाजन से जो पीड़ा उपजी वह उतनी तीखी नहीं थी लेकिन जिसकी टीस लगातार महसूस होती रही। पंजाब के विपरीत, बंगाल में धर्म के आधार पर आबादी का बँटवारा भी उतना साफ नहीं था। बहुत सारे बंगाली हिंदू पूर्वी पाकिस्तान में जबकि बहुत सारे बंगाली मुसलमान पश्चिम बंगाल में ही रुके रहे। आखि़रकार, बंगाली मुसलमानों (पूर्वी पाकिस्तानियों) ने अपनी राजनीतिक पहलकदमी के जरिए जिन्ना के द्विराष्ट्र सिद्धान्त को नकारते हुए पाकिस्तान से अलग होने का फैसला लिया और 1971-72 में बांग्लादेश की स्थापना हुई। जाहिर है, इस्लाम पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान को एक-दूसरे से जोड़कर नहीं रख पाया। इसके बावजूद पंजाब और बंगाल के अनुभवों में जबरदस्त समानताएँ भी दिखाई देती हैं। दोनों ही जगह औरतों व लड़कियों को यातना का मुख्य निशाना बनाया गया। हमलावर औरतों की देह को जीते जाने वाले इलाके की तरह देखते थे। एक समुदाय की औरतों के अपमान को उनके पूरे समुदाय के अपमान तथा बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जाता था।

इस सारी उथल-पुथल में सांप्रदायिक सद्भाव बहाल करने के लिए एक आदमी की बहादुराना कोशिशें आखि़रकार रंग लाने लगीं। 77 साल के बुजुर्ग गाँधीजी ने अहिंसा के अपने जीवनपर्यंत सिद्धान्त को एक बार फिर आजमाया और अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया। उनका फैसला इस यकीन पर आधारित था कि लोगों का हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। वे पूर्वी बंगाल के नोआखली (वर्तमान बांग्लादेश) से बिहार के गाँवों में और उसके बाद कलकत्ता व दिल्ली के दंगों में झुलसी झोंपड़-पट्टियों की यात्रा पर निकल पड़े। उनकी कोशिश थी कि हिन्दू मुसलमान एक दूसरे को ना मारें और हर जगह उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय को हिन्दू अथवा मुस्लिम, दिलासा दी। अक्तूबर 1946 में पूर्वी बंगाल के मुसलमान हिंदुओं पर निशाना कस रहे थे। गांधीजी वहाँ गए, पैदल, गाँव-गाँव पहुँचे और उन्होंने स्थानीय मुसलमानों को समझाया कि वे हिंदुओं की रक्षा करें। इसी तरह अन्य स्थानों पर, जैसे कि दिल्ली में, उन्होंने दोनों समुदायों में पारस्परिक भरोसा और विश्वास बनाने की कोशिश की।

गांधीजी अपनी हत्या तक दिल्ली में ही रहे और आखि़री दिनों में मुसलमानों को शहर से बाहर खदेड़ने की सोच से तंग आकर उन्होंने अनशन शुरू कर दिया था। आश्चर्यजनक बात है कि पाकिस्तान से आए हिंदू और सिख शरणार्थी भी अनशन में उनके साथ बैठते थे। मौलाना आजाद ने लिखा है कि इस अनशन का असर, ‘आसमान की बिजली’ जैसा रहा। लोगों को मुसलमानों के सफाए के अभियान की निरर्थकता दिखाई देने लगी। मगर हिंसा का यह नंगा नाच आखि़रकार गाँधीजी की शाहदत के साथ ही ख़त्म हुआ। दिल्ली के बहुत सारे मुसलमानों ने बाद में कहा, “दुनिया सच्चाई की राह पर आ गई थी”।


Q. 161353 मौखिक इतिहास से प्राप्त होने वाले ऐतिहासिक तथ्यों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मौखिक वृत्तांत,संस्मरण, डायरियाँ, पारिवारिक इतिहास और स्वलिखित ब्योरे- इन सबसे तक्सीम के दौरान आम लोगों की कठिनाइयों व मुसीबतों को समझने में मदद मिलती है। लाखों लोग बँटवारे को पीड़ा तथा एक स्याह दौर की चुनौती के रूप में देखते हैं। उनके लिए यह सिर्फ संवैधानिक विभाजन या मुस्लिम लीग, कांग्रेस अथवा औरों की दलगत सियासत का मामला ही नहीं था। उनके लिए यह जीवन में अनपेक्षित बदलावों का वक्त था। 1946-1950 के और उसके बाद भी जारी रहने वाले इन बदलावों से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक समायोजन की जरूरत थी। यूरोपीय महाध्वंस (होलोकॉस्ट) की तरह हमें विभाजन को सिर्फ एक राजनीतिक घटना के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इससे गुजरने वालों द्वारा उसे दिए गए अर्थों के जरिए भी समझना चाहिए। किसी घटना की हकीकत को स्मृतियों और अनुभवों से भी आकार मिलता है।

व्यक्तिगत स्मृतियों -जो एक तरह का मौखिक स्त्रोत है ,की एक ख़ूबी यह है कि उनमें हमें अनुभवों और स्मृतियों को और बारीकी से समझने का मौका मिलता है। इससे इतिहासकारों को बँटवारे जैसी घटनाओं के दौरान लोगों के साथ क्या-क्या हुआ, इस बारे में बहुरंगी और सजीव वृत्तांत लिखने की काबिलियत मिलती है। सरकारी दस्तावेजों से इस तरह की जानकारियाँ हासिल कर पाना नामुमकिन होता है। सरकारी दस्तावेज नीतिगत और दलगत मामलों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित होते हैं। विभाजन के मामले में सरकारी रिपार्टों व फाइलों और आला सरकारी अफसरों के निजी लेखन से अंग्रेजों तथा प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच भारत के भविष्य या शरणार्थियों के पुनर्वास के बारे में चलने वाली वार्ताओं पर तो काफी रोशनी पड़ती है लेकिन उनसे देश विभाजन के लिए सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से प्रभावित होने वालों के रोजमर्रा हालात और अनुभवों के बारे में ख़ास पता नहीं चलता।

मौखिक इतिहास से इतिहासकारों को गरीबों और कमजोरों के अनुभवों को उपेक्षा के अंधकार से निकाल कर अपने विषय के किनारों को और फैलाने का मौका मिलता है। इस प्रकार संपन्न और सुज्ञात लोगों की गतिविधियों से आगे जाते हुए विभाजन का मौखिक इतिहास ऐसे मर्दों-औरतों के अनुभवों की पड़ताल करने में कामयाब रहा है जिनके वजूद को अब तक नजरअंदाज कर दिया जाता था, सहज-स्वाभाविक मान लिया जाता था, या जिनका मुख्यधारा के इतिहास में बस चलते-चलते जिक्र कर दिया जाता था। यह उल्लेखनीय बात है क्योंकि जो इतिहास हम आमतौर पर पढ़ते हैं उसमें आम इनसानों के जीवन और कार्यों को अकसर पहुँच के बाहर या महत्वहीन मान लिया जाता है।

अभी भी बहुत सारे इतिहासकार मौखिक इतिहास के बारे में शंकालु हैं। वे यह कह कर इसको खारिज कर रहे हैं कि मौखिक जानकारियों में सटीकता नहीं होती और उनसे घटनाओं का जो क्रम उभरता है वह अकसर सही नहीं होता। इतिहासकारों की दलील है कि निजी तजुर्बों की विशिष्टता के सहारे समान्यकरण करना, यानी किसी सामान्य नतीजे पर पहुँचना मुश्किल होता है। उनका कहना है कि इस तरह के छोटे-छोटे अनुभवों से मुकम्मल तसवीर नहीं बनाई जा सकती और सिर्फ एक गवाह को गवाह नहीं माना जा सकता। उनको यह भी लगता है कि मौखिक विवरण सतही मुद्दों से ताल्लुक रखते हैं और यादों में चस्पां रह जाने वाले छोटे-छोटे अनुभव इतिहास की वृहत्तर प्रक्रियाओं का कारण ढूँढ़ने में अप्रासंगिक होते हैं।

भारत के विभाजन और जर्मनी के महाध्वंस जैसी घटनाओं के संदर्भ में ऐसी गवाहियों की कोई कमी नहीं होगी जिनसे पता चलता है कि उनके दरमियान अनगिनत लोगों ने कितनी तरह की और कितनी भीषण कठिनाइयों व तनावों का सामना किया। इस प्रकार इनमें रुझानों की शिनाख़्त करने और अपवादों को चिन्हित करने के लिए साक्ष्यों की भरमार है। मौखिक या लिखित बयानों की तुलना करके उनसे निकलने वाले नतीजों को दूसरे स्त्रोतों से मिलाकर देखने और आंतरिक अंतर्विरोधों के बारे में चौकस रहते हुए इतिहासकार किसी भी दिए गए साक्ष्य की विश्वसनीयता को तौल सकते हैं। इसके अलावा वैसे भी, अगर इतिहास में साधारण व कमजोरों के वजूद को जगह देनी है तो यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि बँटवारे का मौखिक इतिहास केवल सतही मुद्दों से संबंधित नहीं है। विभाजन के अनुभव पूरी कहानी का इस कदर केन्द्रीय हिस्सा हैं कि अन्य स्त्रोतों की जाँच करने के लिए मौखिक स्त्रोतों तथा मौखिक स्त्रोतों की जाँच करने के लिए अन्य स्त्रोतों का इस्तेमाल किया ही जाना चाहिए। अलग तरह के सवालों के जवाब ढूँढ़ने के लिए अलग तरह के स्त्रोतों को तो ढूँढ़ना ही होगा।


Q. 161354 भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत के रूप में ब्रिटेन और फ़्रांस के संविधान से किन-किन चीजों को शामिल किया गया है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय संविधान विश्व के अनेक देशों के संविधानों की विशेषताओं का मिश्रण है। ब्रिटेन के संविधान से संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता और स्पीकर के पद को शामिल किया गया है। जबकि फ़्रांस के संविधान से गणतंत्रात्मक शासन व्यवस्था को लिया गया है।


Q. 161355 संविधान के प्रमुख सदस्यों के नाम लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों में जवाहर लाल नेहरु, सरदार बल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ, अम्बेडकर,  सी. राजगोपालाचारी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, फिरोज गाँधी आदि  लोग थे।


Q. 161356 संविधान सभा का गठन कब हुआ और इसमें कितने लोग थे?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संविधान सभा का गठन का गठन ९ दिसम्बर १९४६ को  हुआ। संविधान सभा में कुल ३०८ लोग थे, जो देश के विभिन्न हिस्सों से निर्वाचित होकर आये थे।


Q. 161357 मूल संविधान में कितने अनुच्छेद एवं अनुसूचियाँ थीं।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

मूल संविधान में कुल ३९५ अनुच्छेद और ८ अनुसूचियाँ थीं. वर्तमान में अनुसूचियों की संख्या १२ है। इसी कारण भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान माना जाता है।


Q. 161358 संविधान की प्रस्तावना के प्रमुख बिंदु क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत एक संप्रभुत्व संपन्न (देश के आंतरिक एवं बाहरी मामलों में अपनी इच्छानुसार कार्य करने को स्वतंत्र), समाजवादी (आर्थिक स्थिति में समानता), धर्मनिरपेक्ष(सभी धर्मों का समान आदर), प्रजातान्त्रिक (सरकार जनता के लिए और जनता के द्वारा) और गणतंत्रात्मक राज्य है. यह अपने नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय देना चाहता है। 


Q. 161359 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वो' को परिभाषित करें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत सन्निहित है जो निर्देश देश में एक समाज की स्थापना के मार्गदर्शन करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को दिया जाते है। वे प्रकृति में गैर न्यायोचित हैं। ये एक सामाजिक व्यवस्था बनाने का इरादा रखते हैं जो हर तरह के न्यायिक रुप से मान्य होगा, उदाहरण के लिए: -राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि (क) नागरिकों के पास आजीविका के पर्याप्त साधन हो, (ख) आर्थिक प्रणाली धन की एकाग्रता का परिणाम नहीं होनी चाहिए।


Q. 161360 भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं को लिखें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं हैं:-

1.शक्तियों का पृथक्करण: - संविधान के अनुसार राज्य के तीन अंग हैं। ये विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका हैं, राज्य की एक शाखा द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के क्रम में संविधान का कहना है कि इन अंगों में से प्रत्येक को भिन्न शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए।

 

2. मौलिक अधिकार:- ये अधिकार हर नागरिक का पूर्ण शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास सुनिश्चित करते हैं। वे उन बुनियादी स्वतंत्रता और शर्तों में शामिल है जो जीवन जीने के लायक बना सकते हैं। ये सरकार पर एक जांच के रूप में सेवा करते हैं।

3. धर्मनिरपेक्षता: - एक धर्मनिरपेक्ष राज्य सभी को विश्वास और पूजा को बराबर स्वतंत्रता की अनुमति देता है। 42 वें संशोधन अधिनियम, 1976, संविधान की प्रस्तावना में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द डाला गया।


Q. 161361 समानता के अधिकार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

समानता का अधिकार भारतीय संविधान के भाग III में उल्लेख छह मौलिक अधिकारों में से एक है। इसके अनुसार सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं। किसी भी नागरिकके साथ केवल धर्म के आधार पर, जन्म, मूलवंश, जाति, लिंग, स्थान या इनमें से किसी से दुकान, सार्वजनिक रेस्तरां, होटल और सार्वजनिक मनोरंजन या कुओं, तालाबों, स्नान घाट के स्थानों के लिए उपयोग के संबंध में भेदभाव नहीं किया जाएगा और सड़कें पूरी तरह या आंशिक रूप से राज्य निधि से बनायी जाएगी और इन्हे आम जनता के उपयोग के लिए समर्पित किया जाएगा। राज्य रोजगार के मामलों में किसी के खिलाफ भेदभाव नहीं कर सकता। इस अनुच्छेद के तहत अस्पृश्यता की प्रथा को समाप्त कर दिया गया है।


Q. 161362 भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की सूची बनाएं।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त छह मौलिक अधिकार हैं:
(i) समानता का अधिकार
(ii)स्वतंत्रता का अधिकार
(iii) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(iv)धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
(v) सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
(vi) सांविधानिक उपचारों का अधिकार


Q. 161363 संविधान का उद्देश्य क्या है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संविधान कई उद्देश्यों में कार्य करता: -
क) यह कुछ निश्चित आदर्शों को निर्धारित करता है जो देश के आधार को बनाता है जिसमें नागरिक के रूप में हम रहते है।
ख ) यह देश की राजनीतिक व्यवस्था की प्रकृति को परिभाषित करता है।
ग) बहुमत शासन अल्पसंख्यक शासन पर हावी नहीं होना चाहिए। प्रमुख समूह कम शक्तिशाली लोगो या समूह के खिलाफ अपनी शक्ति का उपयोग न करें।


Q. 161364 भारतीय संविधान की किन्हीं चार विशेषताओं का उल्लेख करें। [1+1+1+1]
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(1) स्थायित्व - लिखित संविधान अलिखित संविधान की अपेक्षा स्थायी होता है। इसके साथ ही यदि वह कठोर भी हो तो उसका स्थायित्व और भी बढ़ जाता है और वह राजनीतिक दलों के हाथों का खिलौना नहीं हो सकता।

 

(2) अधिकारों की रक्षा - लिखित संविधान के द्वारा नागरिक अधिकारों की सुरक्षा अधिक अच्छे प्रकार से की जा सकती है। अतः अल्पसंख्यक वर्ग भी संविधान के प्रति पूर्ण विश्वास की भावना रखता है।

(3) स्पष्ट तथा निश्चित - लिखित संविधान स्पष्ट तथा निश्चित होता है, अतः उसका पालन सरलता से किया जा सकता है और उसकी व्याख्या में कोई कठिनाई नहीं होती है।

(4) संघात्मक शासन के लिए लिखित संविधान होना अनिवार्य - संघात्मक शासन के लिए लिखित संविधान का होना आवश्यक है, क्योंकि संघीय शासनमें शक्तियां केन्द्र तथा राज्यों में बंटी हुई होती है और ऐसा केवल लिखित संविधान के अन्तर्गत ही सम्भव हैं।


Q. 161365 शक्तियों के विभाजन की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

शक्तियों के विभाजन के पीछे मूल उद्देश्य है कि जब भी व्यक्ति या समूह शक्ति बहुतायत होती है तो वे नागरिकों के लिए खतरनाक हो सकती है। सत्ता का विभाजन किसी भी समूह के हाथों में सत्ता की एकाग्रता को दूर करने की एक विधि है। इसका दुरुपयोग इसे और अधिक जटिल बना रहा है। यह सरकार के तीन अंगों के बीच अलग-अलग विभाजित है अर्थात कार्यपालिका, विधायिका और न्यायिक। विशिष्ट शक्तियाँ जिनका वे उपयोग करते है वे भी अलग करती है। विधायी शाखा के पास कानून बनाने की क्षमता है। कार्यकारी शाखा के पास उन कानूनों को लागू करने अवलोकन करने की क्षमता है। न्यायिक शाखा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह संविधान का संरक्षक है। इस माध्यम से, प्रत्येक अंग अधिनियम राज्य के अन्य अंगों पर एक जाँच के रूप में और इस सब के बीच शक्ति संतुलन सुनिश्चित करता है।


Q. 161366 संविधान की किन विशेषताओं को विचारधारा में छोटे-मोटे अंतर के साथ पारित कर दिया गया था ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत का संविधान इस प्रकार तीव्र वाद-विवाद और चर्चा की एक प्रक्रिया के माध्यम से अस्तित्व में आया, इसके कई प्रावधान, दो विपरीत स्थितियों के मध्य, एक बीच का रास्ता बनाकर, आदान-प्रदान की एक प्रक्रिया के माध्यम से अस्तित्व में आए थेहालांकि, संविधान की एक केंद्रीय विशेषता, प्रत्येक वयस्क भारतीय को मत देने,पर पर्याप्त सहमति थीयह आस्था का एक अभूतपूर्व कार्य था क्योंकि अन्य लोकतांत्रिक देशों में मतदान धीरे धीरे, और चरणों में किया गया था संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में, केवल संपत्ति धारक पुरुषों को ही मतदान किया गया थाफिर, शिक्षा प्राप्त पुरुषों को भी लोकप्रिय मंडली में अनुमति प्रदान की गई थीएक लंबे और अप्रिय संघर्ष के बाद,मजदूर वर्ग अथवा किसान पृष्ठभूमि के लोगों को भी मतदान का अधिकार दिया गया था,महिलाओं को यह अधिकार दिलाने के लिए इससे भी अधिक लम्बा संघर्ष आवश्यक थासंविधान की एक दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता,धर्मनिरपेक्षता पर बल देना थाप्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता की कोई गुंजायमान घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन व्यावहारिक तौर पर,भारतीय संदर्भ में इसकी जो प्रमुख विशेषताएं समझी जाती थीं, उनकी अनुकरणीय रूप में व्याख्या की गई थीऐसा,मौलिक अधिकारों की सावधानीपूर्वक तैयार की गई श्रृंखला के माध्यम से किया गया था "धर्म की स्वतंत्रता" (अनुच्छेद 25-28), "सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार" (अनुच्छेद 29, 30), और "समानता का अधिकार" (अनुच्छेद 14, 16, 17 ), राज्य की ओर से सभी धर्मों के साथ समतुल्य व्यवहार कीया जाना सुनिश्चित किया गया और धर्मार्थ संस्थाओं को बनाए रखने का अधिकार दिया गया

राज्य ने,राज्य द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में अनिवार्य धार्मिक निर्देशों पर प्रतिबंध लगाकर,और रोजगार में धार्मिक भेदभाव को अवैध घोषित कर ,धार्मिक समुदायों से स्वयं को दूर करने का प्रयास कियाहालांकि, समुदायों में सामाजिक सुधार हेतु एक निश्चित कानूनी अन्तराल उत्त्पन्न कीया गया था,यह अन्तराल, अस्पृश्यता पर प्रतिबंध लगाने और व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों में परिवर्तन लागू करने के लिए इस्तेमाल किया गया थाराजनीतिक धर्मनिरपेक्षता की भारतीय असंगति में,फिर धर्म से राज्य का कोई निरपेक्ष पृथक्करण नहीं वरन दोनों के बीच एक प्रकार का न्यायसंगत अन्तराल किया गया हैसंविधान सभा के वाद विवाद,कईं परस्पर विरोधी विचारों, जिनका संविधान का निर्माण करने में मोल-भाव किया जाना चाहिए था, और कई मांगों को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया था,को समझने में हमारी सहायता करते हैंवे हमें आदर्शों जो लागू किये गए थे और सिद्धांतों,जिन्हें संविधान के निर्माताओं के द्वारा संचालित किया गया था,के बारे में बताते हैंलेकिन इन वाद-विवादों को पढ़ते समय हमें जागरूक रहने की आवश्यकता है कि जिन आदर्शों को लागू किया गया था,उन पर एक संदर्भ जिसके अंतर्गत वे उचित लग रहे थे,के अनुसार पुनः कार्य बहूत प्रायः ही किया गया थाकभी-कभी विधानसभा के सदस्य भी अपने विचारों को बदल देते थे, क्योंकि वाद -विवाद तीन वर्षों में प्रकाश में आया थादूसरों के तर्क को सुनकर, कुछ सदस्यों ने अपनी स्थिति पर पुनः विचार किया,विपरीत विचारों के प्रति खूली मानसिकता को अपनाया, जबकि दूसरों ने आसपास की घटनाओं की प्रतिक्रिया में अपने विचार बदल दिए


Q. 161367 निम्नलिखित पांच राज्यों को चिन्हित कीजिये जहाँ ये भाषाएँ बोली जाती हैं : (क) डोगरी (ख) बांग्ला (ग) तमिल (घ) मलयालम (ई) मराठी
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION


Q. 161368 राज्य और केंद्र सरकार के मध्य शाक्तियों का बँटवारा कैसे परिभाषित किया गया था, समझाइए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संविधान सभा की, केंद्र सरकार और राज्य सरकार से संबंधित अधिकरों पर एक लंबी बातचीत हुई, एक सशक्त केंद्र के लिए तर्क देने वाले उन लोगों में जवाहरलाल नेहरू थेप्रारूप संविधान ने, विषय की तीन सूचियां प्रदान की; संघ सूची, राज्य सूची, और समवर्ती सूचीपहली सूची के विषय केन्द्र सरकार के थे,जबकि दूसरी सूची के विषय, राज्यों को दिए गए थेजहाँ तक तीसरी सूची का सवाल है, यहां केंद्र और राज्य के मध्य जिम्मेदारी का साझा किया गया, हालांकि, अनेक और विषय, अन्य महासंघों की तुलना में संघ के नियंत्रण में रखे गए थे संविधान ने, राजकोषीय संघवाद की एक जटिल प्रणाली भी सौंपीप्रांतों के लिए अधिक से अधिक शक्तियों के लिए तर्क ने, विधानसभा में एक तीव्र प्रतिक्रिया को उत्तेजित किया

जबसे संविधान सभा ने इसका सत्र शुरू कीया था, उसके बाद से एक मजबूत केंद्र की आवश्यकता को कई अवसरों पर रेखांकित किया गया था

विभाजन से पूर्व,कांग्रेस प्रांतों को अधिक स्वायत्तता देने के लिए सहमत थी यह, मुस्लिम लीग को यह आश्वस्त करने कि जिन प्रांतों में मुस्लिम लीग सत्ता में आई हैं, के भीतर केंद्र का हस्तक्षेप नहीं होगा, हेतु प्रयासों का ही एक अंग था

विभाजन के पश्चात अधिकांश राष्ट्रवादियों ने उनकी स्थिति में बदलाव कर लिया, क्योंकि उन्होनें महसूस कीया था कि एक विकेन्द्रीकृत संरचना के लिए पूर्व में आरोपित राजनितिक दबाव अब अस्तीत्व में नहीं रह गया थाउसके स्थान पर औपनिवेशिक सरकार द्वारा आरोपित एकात्मक प्रणाली, वहां पहले से मौजूद थी

उस समय की हिंसा ने केंद्रीकरण को और बढ़ावा दिया, अब दोनों को, पहले से अराजकता की रोकथाम करना और देश के आर्थिक विकास हेतु योजना का निर्माण करना, आवश्यक लगा

संविधान ने इस प्रकार, घटक राज्यों पर, भारत के संघ के अधिकारों के प्रति एक अलग पूर्वाग्रह दर्शाया


Q. 161369 दिए गए गद्यांश को पढिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। 13 दिसंबर 1946 को अपने प्रसिद्ध भाषण में जवाहरलाल नेहरू ने यह कहा था: मेरे ज़हन में बार-बार वे सारी संविधान सभाएँ आ रही हैं जो पहले यह काम कर चुकी हैं। मुझे उस महान अमेरिकी राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया का खयाल आ रहा है जहाँ राष्ट्र-निर्माताओं ने एक ऐसा संविधान रच दिया जो इतने सारे सालों, डेढ़ सदी से भी ज्यादा समय तक काल की कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने एक महान राष्ट्र गढ़ा जो उसी संविधान पर आधारित है। क) कब और किसके द्वारा, ‘‘उद्देश्य प्रस्ताव’’ पारित किया गया था?
ख) ‘‘उद्देश्य प्रस्ताव’’ क्या था? ग) प्रस्ताव की तीन मुख्य विशेषताएं स्पष्ट कीजिए। (3 + 3 2)
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अ)13 दिसंबर 1946 को जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने ‘‘उद्देश्य प्रस्ताव’’ पेश किया। जिसे 1946 में भारत के संविधान का निर्माण करने के लिए निर्वाचित किया गया था।

ब)यह एक ऐतिहासिक प्रस्ताव था जिसमें स्वतंत्र भारत के संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी और वह फ्रेमवर्क सुझाया गया था जिसके तहत संविधान का कार्य आगे बढ़ना था।

स) प्रस्ताव की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार थीं-

1)इसमें भारत को एक स्वतंत्र सम्प्रभु गणराज्य घोषित किया गया था।

2)नागरिकों को न्याय, समानता व स्वतंत्रता का आश्वासन दिया गया था, और यह वचन दिया गया था कि अल्पसंख्यकों, पिछड़े व जनजातीय क्षेत्रों एवं दमित व अन्य पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त रक्षात्मक प्रावधान किए जाएँगे।

3)इसमें यह उल्लेखित किया गया कि भारतीय संविधान का उद्देश्य यह होगा कि लोकतंत्र के उदारवादी विचारों और आर्थिक न्याय के समाजवादी विचारों का एक-दूसरे में समावेश किया जाए और भारतीय संदर्भ में इन विचारों की रचनात्मक व्याख्या की जाए।


Q. 161370 सरकारें सरकारी कागजों से नहीं बनतीं। सरकार जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति होती है। हम यहाँ इसलिए जुटे हैं क्योंकि हमारे पास जनता की ताकत है और हम उतनी दूर तक ही जाएँगे जितनी दूर तक लोग हमें ले जाना चाहेंगे फिर चाहे वे किसी भी समूह या पार्टी से संबंधित क्यों न हों। ऊपर दिए गए गद्यांश को पढिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (4 + 4)
1. संविधान सभा के गठन पर एक टिप्पणी लिखिए।
2. संविधान सभा के महत्वपूर्ण सदस्यों पर एक टिप्पणी लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1)भारत की संविधान सभा भारतीय नेताओं और ब्रिटिश कैबिनेट मिशन के सदस्यों के बीच हुई वार्ता का परिणाम थी। बातचीत का एक परिणाम के रूप में स्थापित किया गया था। संविधान सभा का चुनाव प्रांतीय विधान सभा के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से हुआ था। इसकी प्रथम बैठक 9 दिसंबर, 1946 को दिल्ली में उस समय हुई थी जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। इसमें मूल रूप से वो प्रांत सम्मिलित थे जो अब पाकिस्तान और बांग्लादेश का गठन करते हैं। इसके अलावा भारत की रियासतों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रांत इसमें शामिल थे। अंतिम संविधान सभा में पंद्रह महिलाओं सहित दो सौ सात सदस्य थे। मुस्लिम लीग के केवल 28 सदस्य अंततः भारतीय विधानसभा में सम्मिलित हुए थे। बाद में, 93 सदस्यों को रियासतों से मनोनीत किया गया था। 15 अगस्त 1947 को भारत एक स्वतंत्र देश बन गया और संविधान सभा भारत की संसद बन गई।

2)संविधान सभा महत्त्वपूर्ण  में तीन सौ सदस्य में जवाहर लाल नेहरू थे।एक निर्णायक प्रस्ताव, उद्देश्य प्रस्ताव को नेहरू ने पेश किया था। उनके साथ पटेल मुख्य रूप से परदे के पीछे कई महत्त्वपूर्ण काम कर रहे थे। उन्होंने कई रिपोर्टों के प्रारूप लिखने में खास मदद की और कई परस्पर विरोधी विचारों के बीच सहमति पैदा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे। सभा में चर्चा रचनात्मक दिशा ले और सभी सदस्यों को अपनी बात कहने का मौका मिले-यह उनकी जिम्मेदारियाँ थीं।बी.आर. अम्बेडकर भी सभा के सबसे महत्त्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे।उन्होंने संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया। उनके साथ दो अन्य वकील भी काम कर रहे थे। एक गुजरात के के. एम. मुंशी थे और दूसरे मद्रास के अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर। दोनों ने ही संविधान के प्रारूप पर महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए। इन छह सदस्यों को दो प्रशासनिक अधिकारियों ने महत्त्वपूर्ण सहायता दी। इनमें से एक बी.एन. राव थे। वह भारत सरकार के संवैधानिक सलाहकार थे और उन्होंने अन्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन करके कई चर्चा पत्र तैयार किए थे। दूसरे अधिकारी एस.एन. मुखर्जी थे। इनकी भूमिका मुख्य योजनाकार की थी। मुखर्जी जटिल प्रस्तावों को स्पष्ट वैधिक भाषा में व्यक्त करने की क्षमता रखते थे।अम्बेडकर के पास सभा में संविधान के प्रारूप को पारित करवाने की जिम्मेदारी थी।


Q. 161371 नीचे दिए गए गद्यांश को पढिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा था: यह दोहराने का कोई मतलब नहीं है कि हम पृथक निर्वाचिका की माँग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारे लिए यही अच्छा है। यह बात हम बहुत समय से सुन रहे हैं। हम सालों से यह सुन रहे हैं और इसी आंदोलन के कारण अब हम एक विभाजित राष्ट्र हैं...। क्या आप मुझे एक भी स्वतंत्र देश दिखा सकते हैं जहाँ पृथक निर्वाचिका हो? अगर आप मुझे दिखा दें तो मैं आपकी बात मान लूँगा। लेकिन अगर इस अभागे देश में विभाजन के बाद भी पृथक निर्वाचिका की व्यवस्था बनाए रखी गई तो यहाँ जीने का कोई मतलब नहीं होगा। इसलिए मैं कहता हूँ कि यह सिर्फ मेरे भले की बात नहीं है बल्कि आपका भला भी इसी में है कि हम अतीत को भूल जाएँ। एक दिन हम एकजुट हो सकते हैं...। अंग्रेज तो चले गए, मगर जाते-जाते शरारत का बीज बो गए हैं। हम इस शरारत को और बढ़ाना नहीं चाहते । (1) भारत की स्वतन्त्रता के बाद पृथक निर्वाचक मंडल की मांग से राष्ट्रवादी क्रोधित क्यों हो गए थे?

(2) पृथक निर्वाचन के विचार को सम्पूर्ण मुस्लिम समुदाय द्वारा समर्थन क्यों नहीं दिया गया था?
(3) दलित जाति के सदस्यों को ऐसा क्यों लगता था कि अकेले संवैधानिक सुरक्षा के उपाय का विचार उनके समुदाय की समस्याओं को हल नहीं करने वाला है ? [3 + 3 + 2 = 8]
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1) पृथक निर्वाचिका की मांग से राष्ट्रवादी से ज्यादातर राष्ट्रवादी भड़क गए। पृथक निर्वाचन के विचार को ब्रिटिश राज के निर्माण के रूप में  देखते थे और देश की आजादी के बाद इस विचार को और आगे नहीं ढोना चाहते थे।ज्यादातर राष्ट्रवादियों को लग रहा था कि पृथक निर्वाचिका की व्यवस्था लोगों को बाँटने के लिए अंग्रेजों की चाल थी उन्हें देश के धार्मिक आधार पर विभाजित होने पर निरंतर गृहयुद्ध, दंगों और हिंसा की आशंका दिखाई दे रही थी। उनकी राय में यह एक ऐसी माँग थी जो देश के विभाजन के मुख्य कारणों में से एक थी।

2) मुस्लिम समुदाय के कुछ मुसलमान भी पृथक निर्वाचिका की माँग के समर्थन में नहीं थे। उन्हे लगता था कि पृथक निर्वाचिका आत्मघाती साबित होगी क्योंकि इससे अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों से कट जाएँगे। उन्हें लगा कि इसकी शुरुआत से ही समुदाय में हताशा की भावना का विकास होगा क्योंकि उन्हें स्वतंत्र भारत की सरकार के अंतर्गत किसी भी प्रभावी निर्णय द्वारा अलग कर दिया जाएगा।

3) दलित जाति के सदस्यों को ऐसा लगता था कि अकेले संवैधानिक सुरक्षा के उपाय का विचार उनके समुदाय की समस्याओं को हल नहीं करने वाला है । उन्हें लगता था कि उनके समुदाय से संबन्धित समस्याओं के पीछे जाति विभाजित समाज के सामाजिक कायदे-कानूनों और नैतिक मूल्य-मान्यताओं का हाथ है।उन्होनें सोचा कि संवैधानिक सुरक्षा उनके समुदाय के प्रति भारतीय जनता की धारणा को नहीं बदल सकेगी।


Q. 161372 निम्न गद्यांश को ध्यान से पढ़िए, एवं निम्न सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : मैसूर के सर ए रामास्वामी मुदलियार ने, 21 अगस्त 1947 को एक चर्चा के दौरान कहा: "हमें अपनी आत्मा में मिथ्यापूर्ण प्रशंसा वाली गर्मजोशी आरोपित नहीं करनी चाहिए कि यदि हम एक मजबूत केन्द्र प्रस्तावित करते हैं तो हम बेहतर देशभक्त हैं, और यह कि जो इन संसाधनों के जोरदार परिक्षण कई वकालत करते हैं, वे पर्याप्त राष्ट्रीय भावना अथवा देशभक्ति वाले लोग नहीं हैं ।" (1)प्रारूप संविधान के कौनसे पहलू ने केंद्र को राज्य से अधिक शक्तियां प्रदान की थी ? (2)लोगों ने एक मजबूत केंद्र के विरोध में एक मजबूत राज्य के विचार का समर्थन क्यों किया था?
(3)अम्बेडकर ने एक मजबूत केंद्र के विचार का समर्थन क्यों किया था? [3 +3 +2 = 8]
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

(i)प्रारूप संविधान की समवर्ती सूची में, केंद्र और राज्य शक्तियों का बँटवारा करने वाले थे हालांकि, समवर्ती और केंद्रीय सूचियों में कई मदों को केंद्र के नियंत्रण में रखा गया था संघ का खनिज और प्रमुख उद्योगों पर नियंत्रण था, अनुच्छेद 356 केंद्र को राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य प्रशासन कॉ अपने हाथ में लेने की शक्ति प्रदान की है सीमा शुल्क और कंपनी करों के मामले में सभी शक्तियाँ केन्द्र में निहित की गई

(ii)के. संथानम जैसे लोगों ने यह तर्क देकर कि केंद्र जिम्मेदारियों से अत्यधिक बोझिल हो जाएगा और प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पायेगा, यदि वह राज्य के साथ अपनी जिम्मेदारियों का बँटवारा नहीं करता है, उन्होंने यह भी महसूस किया कि संविधान में वित्तीय प्रावधानों से प्रांत साधनहीन हो जाएंगे, क्योंकि अधिकाँश करों को केंद्र के लिए आरक्षित का दिया गया था और राज्य अपने प्रांतों के विकास हेतु किन्हीं भी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शुरू नहीं कर सकता था

(iii) अम्बेडकर ने एक मजबूत केंद्र के विचार का समर्थन किया, क्योंकि उसने महसूस किया था कि भारत में दंगे और हिंसा राष्ट्र को खंडित कर देंगे उन्होंने महसूस किया कि एक मजबूत केंद्र प्रभावी ढंग से इन दंगों और हिंसा को नियंत्रित कर सकता है , क्योंकि उनके अधिकार में संसाधनों की महत्वपूर्ण राशि थी, उनके अनुसार केवल एक एक मजबूत केंद्र ही राष्ट्र के कल्याण हेतु प्रभावी ढंग से संसाधनो को जुटा सकता था


Q. 161373 संविधान निर्माण से पहले के साल काफी उथल-पुथल वाले थे। स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

संविधान निर्माण से पहले के साल काफी उथल-पुथल वाले थे। यह महान आशाओं का क्षण भी था और भीषण मोहभंग का भी। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद तो कर दिया गया किन्तु इसके साथ ही इसे विभाजित भी कर दिया गया। लोगों की स्मृति में 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन अभी भी जीवित था जो ब्रिटिश राज के खिलाफ संभवतः सबसे व्यापक जनांदोलन था। विदेशी सहायता से सशस्त्र संघर्ष के जरिए स्वतंत्रता पाने के लिए सुभाष चंद्र बोस द्वारा किए गए प्रयास भी लोगों को बखूबी याद थे। 1946 के वसंत में बम्बई तथा अन्य शहरों में रॉयल इंडियन नेवी (शाही भारतीय नौसेना) के सिपाहियों का विद्रोह भी लोगों को बार-बार आंदोलित कर रहा था। लोगों की सहानुभूति सिपाहियों के साथ थी। चालीस के दशक के आखिरी सालों में देश के विभिन्न भागों में मजदूरों और किसानों के आंदोलन भी हो रहे थे। व्यापक हिंदू-मुस्लिम एकता इन जनांदोलनों का एक अहम पहलू था। इसके विपरीत कांग्रेस और मुस्लिम लीग, दोनों प्रमुख राजनीतिक दल धार्मिक सौहार्द्र और सामाजिक सामंजस्य स्थापित करने के लिए सुलह-सफाई की कोशिशों में नाकामयाब होते जा रहे थे।

अगस्त 1946 में कलकत्ता में शुरू हुई हिंसा के साथ उत्तरी और पूर्वी भारत में लगभग साल भर तक चलने वाला दंगे-फसाद और हत्याओं का लंबा सिलसिला शुरू हो गया था। बर्बर हिंसा का यह वीभत्स नाच भीषण जनसंहारों के साथ हुआ। इसके साथ ही देश-विभाजन की घोषणा हुई और असंख्य लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने लगे।

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस पर आनंद और उम्मीद का जो माहौल था वह उस समय के लोगों को कभी नहीं भूलेगा। लेकिन भारत के बहुत सारे मुसलमानों और पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं व सिखों के लिए यह एक निर्मम चुनाव का क्षण था-उनके सामने यह तत्क्षण मृत्यु तथा पीढि़यों पुरानी जड़ों से उखड़ जाने के बीच चुनाव का क्षण था। करोड़ों शरणार्थी यहाँ से वहाँ जा रहे थे। मुसलमान पूर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान की तरफ तो हिंदू और सिख पश्चिमी बंगाल व पूर्वी पंजाब की तरफ बढ़े जा रहे थे। उनमें से बहुत सारे कभी मंजिल तक नहीं पहुँचे, बीच रास्ते में ही मर गए।

नवजात राष्ट्र के सामने इतनी ही गंभीर एक और समस्या देशी रियासतों को लेकर थी। ब्रिटिश राज के दौरान उपमहाद्वीप का लगभग एक-तिहाई भू-भाग ऐसे नवाबों और रजवाड़ों के नियंत्रण में था जो ब्रिटिश ताज की अधीनता स्वीकार कर चुके थे। उनके पास अपने राज्यों को जैसे चाहे चलाने की सीमित ही सही लेकिन काफी आजादी थी।

जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो इन नवाबों और राजाओं की संवैधानिक स्थिति बहुत अजीब हो गई। एक समकालीन प्रेक्षक ने कहा था कि कुछ महाराजा तो बहुत सारे टुकड़ों में बँटे भारत में स्वतंत्र सत्ता का सपना देख रहे थे।


Q. 161374 उदारवादियों की महत्वपूर्ण सफलता का उल्लेख कीजिए ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

उदारवादियों की सफलताओं और भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में उनके योगदान को निम्नवत व्यक्त किया जा  सकता है -

ब्रिटिश शासन के दोषों को स्पष्ट करना - कांग्रेस के द्वारा अपनी स्थापना के समय से ही ब्रिटिश शासन के विभिन्न दोषों की तरफ संकेत दिया गया । नौकरशाही की बुराइयों को सामने लाया गया । उन्होंने उग्रवादी आन्दोलनकारियों को विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए एक शक्तिशाली शास्त्र प्रदान किया

भारतीय राष्ट्रीयता के जनक  - उदारवादियों के कार्य तथा नीतियों तात्कालिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण होते हुए भी ऐसे थे जिनके भविष्य में महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए । उन्होंने देशवासियों को शिस्खा दी कि वे साम्प्रदायिक तथा प्रांतीय भावनाओं से ऊपर उठकर सामान्य राष्ट्रीयता की भावना से कार्य करें ।

जनतंत्र को शिक्षा देना - उदारवादियों ने भारतीय जनतंत्र को  राजनीतिक शिक्षा देना उनमे जनता में स्वतंत्रता  का विचारों के बीजरोहण किया । उन्होंने समाज, जाति, धर्म आदि से ऊपर उठकर  राष्ट्रीय मंच का निर्माण किया था । इससे समाज में जनमत की भावना जाग्रत होने लगी।

भारतीय परिषद् अधिनियम, 1892 ई० - उदारवादियों की सफलता को 1892  ई० के भारतीय परिषद् अधिनियम के सन्दर्भ में भी लिया जा सकता है लेकिन यह भारतीयों को संतुष्ट कर सका । फिर भी देश संवैधानिक विकास की दिशा में यह निश्चित प्रगतिशील कदम था


Q. 161375 वर्ष 1945 से वर्ष 1947 तक की प्रमुख घटनाएँ क्या थीं ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1)1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी। यह सरकार भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में थी। उसी समय वायसराय लॉर्ड वावेल ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों के बीच कई बैठकों का आयोजन किया।

2)1946 की शुरुआत में प्रांतीय विधान मंडलों के लिए नए सिरे से चुनाव कराए गए। सामान्य श्रेणी में कांग्रेस को भारी सफलता मिली। मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर मुस्लिम लीग को भारी बहुमत प्राप्त हुआ।

3)946 की गर्मियों में कैबिनेट मिशन भारत आया। इस मिशन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग को एक ऐसी संघीय व्यवस्था पर राज़ी करने का प्रयास किया कैबिनेट मिशन का यह प्रयास भी विफल रहा। वार्ता टूट जाने के बाद जिन्ना ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए लीग की माँग के समर्थन में एक प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया। इसके लिए 16 अगस्त, 1946 का दिन तय किया गया था। उसी दिन कलकत्ता में खूनी संघर्ष शुरू हो गया।

4) फरवरी 1947 में वावेल की जगह लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय नियुक्त किया गया। उन्होंने वार्ताओं के एक अंतिम दौर का आह्वान किया जिसका कोई नतीजा नहीं निकला। प्रयास के विफल होने पर 15 अगस्त का दिन विभाजन के साथ स्वतंत्रता के लिए नियत किया गया।


Q. 161376 15 अगस्त 1947 को गांधी ने जिन गतिविधियों में भाग लिया था, उसके बारे में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

15 अगस्त 1947 को राजधानी में हो रहे उत्सवों में भाग लेने से महात्मा गाँधी ने इंकार कर दिया था।उस समय वे कलकत्ता में थे जहां वे हिंदु-मुस्लिम दंगों की वजह से आहत हुए समाज की  मरहम पट्टी करने में लगे थे। उन्होंने वहाँ भी न तो किसी कार्यक्रम में हिस्सा लिया, न ही कहीं झंडा फहराया। उन्होंने इतने दिन तक जिस स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था वह एक अकल्पनीय कीमत पर उन्हें मिली थी। उनका राष्ट्र विभाजित हो गया था। गाँधी जी उस दिन 24 घंटे के उपवास पर थे। सांप्रदायिक शांति स्थापित करने के लिए और स्थानीय आबादी पर अनशन के प्रभाव को देखकर कई लोगों द्वारा इसे एक चमत्कार के रूप में माना गया था।गाँधी जी पीड़ितों को सांत्वना देते हुए अस्पतालों और शरणार्थी शिविरों के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने कलकत्ता में मुसलमानों की सहायतार्थ सिखों, हिंदुओं का आह्वान किया। उन्होंने आह्वान किया कि वे एक-दूसरे के प्रति भाईचारे का हाथ बढ़ाएँ ।


Q. 161377 गांधीजी के जीवन और भारतीय राजनीति के साथ उनके जुड़ाव की घटनाओं पर हमारे पास जानकारी के प्रमुख स्रोत क्या हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

महात्मा गाँधी और उनके सहयोगियों व प्रतिद्वंद्वियों, दोनों तरह के समकालीनों के लेखन और भाषण एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है भाषणों से हमें किसी व्यक्ति के सार्वजनिक विचारों को सुनने का मौका मिलता है जबकि उसके व्यक्तिगत पत्र हमें उसके निजी विचारों की झलक देते हैं। हात्मा गाँधी हरिजन नामक अपने अखबार में उन पत्रों को प्रकाशित करते थे जो उन्हें लोगों से मिलते थे। आत्मकथा, "माई एक्सपेरियंस विद ट्रुथ" गांधी के जीवन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं । नेहरू ने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उन्हें लिखे गए पत्रों का एक संकलन तैयार किया और उसे ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स (पुराने पत्रों का पुलिंदा) के नाम से प्रकाशित किया।


Q. 161378 भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में महात्मा गाँधी की क्या भूमिका रही ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में महात्मा  गाँधी जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नया रूप प्रदान किया

असहयोग आन्दोलन :- महात्मा गाँधी ने 20 अगस्त 1920 को अहिंसात्मक  असहयोग आन्दोलन शुरू कर दिया । राजनीति के क्षेत्र में अहिंसा का अभिनव प्रयोग था उन्होंने भारतीय से अपील की वे ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गयी । उपाधियों, सरकारी पदों को त्याग दे   उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा के लिए प्रयास किये

गाँधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम :- गाँधी जी ने  रचनात्मक कार्यक्रम बनाये

एक करोड़ रूपये का तिलक फंड स्थापित करना

एक करोड़ स्वयंसेवकों की भर्ती करना

20 लाख चरखों का वितरण करना

स्वदेशी माल खरीदने पर बल दिया

लोक अदालतों की स्थापना करना  

 

नेहरु रिपोर्ट :- गाँधी जी ने सर्वमान्य विधान निर्माण करने में लगी पहले दल के नेता सुभाष चन्द्र बोस और दूसरे दल के नेता जवाहर लाल नेहरु  के बीच गाँधी जी ने मेल  काराने  के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जिसको कांग्रेस ने स्वीकार कर लिया ।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन :- गाँधी जी ने अपने कुछ साथियों के साथ नमक कानून तोड़कर   सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ करने की सूचना 2 मार्च 1930  का एक पत्र लिखकर  लार्ड इरविन को दी 12 मार्च को महात्मा गाँधी डांडी में नमक कानून को तोड़ दिया 

 गाँधी-इरविन समझौता :- 31 मार्च 1931 को गाँधी जी और भारत के वाइसराय के बीच समझौता हुआ । इसके बाद गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित कर दिया गया और गाँधी जी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।  

पूना पैक्ट :- पूना पैक्ट का अनुसार 26 सितम्बर 1932 को अम्बेडकर और गाँधी के बीच पूना पैक्ट हो गया । इस पैक्ट में दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था समाप्त कर दी।  गयी केंद्रीय विधान मंडल में 18 प्रतिशत सीटे एवं प्रांतीय विधान मंडलों में 148 सीटे दलितों के लिए आरक्षित की गयी

भारत छोडो आन्दोलन :- 8 अगस्त 1942 को मुंबई में गाँधी जी के नेतृत्व में भारत छोडो प्रस्ताव शुरू किया ।


Q. 161379 वर्ष 1945 से वर्ष 1947 तक की प्रमुख घटनाएँ क्या थीं ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

1)1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी। यह सरकार भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में थी। उसी समय वायसराय लॉर्ड वावेल ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों के बीच कई बैठकों का आयोजन किया।

2)1946 की शुरुआत में प्रांतीय विधान मंडलों के लिए नए सिरे से चुनाव कराए गए। सामान्य श्रेणी में कांग्रेस को भारी सफलता मिली। मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर मुस्लिम लीग को भारी बहुमत प्राप्त हुआ।

3)946 की गर्मियों में कैबिनेट मिशन भारत आया। इस मिशन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग को एक ऐसी संघीय व्यवस्था पर राज़ी करने का प्रयास किया कैबिनेट मिशन का यह प्रयास भी विफल रहा। वार्ता टूट जाने के बाद जिन्ना ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए लीग की माँग के समर्थन में एक प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया। इसके लिए 16 अगस्त, 1946 का दिन तय किया गया था। उसी दिन कलकत्ता में खूनी संघर्ष शुरू हो गया।

4) फरवरी 1947 में वावेल की जगह लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय नियुक्त किया गया। उन्होंने वार्ताओं के एक अंतिम दौर का आह्वान किया जिसका कोई नतीजा नहीं निकला। प्रयास के विफल होने पर 15 अगस्त का दिन विभाजन के साथ स्वतंत्रता के लिए नियत किया गया।


Q. 161380 महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों एवं प्रगति पर एक निबंध लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों एवं प्रगतिगांधीजी को रोलेट ऐक्ट, जालियाँवाला बाग हत्याकाण्ड, हण्टर समिति की रिपोर्ट व खिलाफत के प्रश्न ने अंग्रेजों का विरोधी बना दिया । फलस्वरूप वे सहयोगी से असहयोगी बन गये । सितंबर 1920 ई. में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन कलकत्ता में हुआ । इस अधिवेशन में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव रखा । प्रस्ताव की स्वीकृति के साथ ही गांधी ने संपूर्ण देश का भ्रमण किया व आंदोलन का वातावरण तैयार कर लिया । दिसंबर 1920 ई. में कांग्रेस का नियमित अधिवेशन नागपुर में हुआ जहां इस प्रस्ताव की पुष्टि कर दी गई । असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम 1) सरकारी वैतनिक ,अवैतनिक पदों व उपाधियों का त्याग किया जाय । 2) सरकारी व अर्द्ध-सरकारी स्कूल व कालेजों का बहिष्कार किया जाए । 3) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाय ।4) मेसापोटमिया के क्षेत्र में सैनिक, क्लर्क व मजदूर अपनी सेवाऐं देने से इंकार कर दे। 5) सरकारी समारोहों का बहिष्कार किया जाय । 6) स्वदेशी का प्रचार व उपयोग । 7) राष्ट्रीय स्कूल व कॉलेजों की स्थापना । 8) अस्पृश्यता का निवारण किया जाय । 9) हिन्दू मुस्लिम एकता को मजबूत किया जाए । 10) हाथ की कताई व बुनाई को प्रोत्साहित किया जाय । 1922 ई. तक असहयोग आंदोलन अपने चरम पर पहुँच गया था समस्त बड़े नेता जेल में बंद थे। फरवरी 1922 को चैरी-चैरी नामक स्थान पर निहत्थे प्रदर्शन कारियों पर किए लाठीचार्ज ने प्रदर्शन कारियों को उद्वेलित कर दिया व उन्होंने स्थानीय पुलिस चैकी को आग लगा दी । इस घटना में 22 पुलिस वाले जिंदा जलकर मर गए। आंदोलन का हिंसक रूप देखकर गाँधी जी ने आंदोलन को स्थगित कर दिया। विश्लेषण - गाँधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन समाप्त करने की अप्रत्याशित घोषणा ने समस्त नेताओं ने इसे गलत निर्णय करार दिया। लेकिन नेतृत्वविहीन आंदोलन अक्सर अनियंत्रित भीड़ की तरह होता है जिसके क्षणिक प्रभाव तो बड़ी तीव्रता लिए होते हैं पर दूरगामी प्रभाव विपरीत इसी बात को ध्यान रखकर गांधीजी ने आंदोलन को समाप्त घोषित कर दिया। हाँलाकि इससे गाँधीजी द्वारा एक वर्ष में स्वराज दिलाने का भरोसा टूट गया फिर भी इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़े हिला दी। सभी देशवासी एक नेतृत्व एक झंड़े के नीचे संगठित हो गये। उनमें राष्ट्रीयता की भावना का संचार हुआ। स्वदेशी की भावना ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार द्वारा ब्रिटिश अर्थ व्यवस्था को धक्का पहुँचाया।


Q. 161381 महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों एवं प्रगति पर एक निबंध लिखिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गए असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों एवं प्रगतिगांधीजी को रोलेट ऐक्ट, जालियाँवाला बाग हत्याकाण्ड, हण्टर समिति की रिपोर्ट व खिलाफत के प्रश्न ने अंग्रेजों का विरोधी बना दिया । फलस्वरूप वे सहयोगी से असहयोगी बन गये । सितंबर 1920 ई. में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन कलकत्ता में हुआ । इस अधिवेशन में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव रखा । प्रस्ताव की स्वीकृति के साथ ही गांधी ने संपूर्ण देश का भ्रमण किया व आंदोलन का वातावरण तैयार कर लिया । दिसंबर 1920 ई. में कांग्रेस का नियमित अधिवेशन नागपुर में हुआ जहां इस प्रस्ताव की पुष्टि कर दी गई । असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम 1) सरकारी वैतनिक ,अवैतनिक पदों व उपाधियों का त्याग किया जाय । 2) सरकारी व अर्द्ध-सरकारी स्कूल व कालेजों का बहिष्कार किया जाए । 3) विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाय ।4) मेसापोटमिया के क्षेत्र में सैनिक, क्लर्क व मजदूर अपनी सेवाऐं देने से इंकार कर दे। 5) सरकारी समारोहों का बहिष्कार किया जाय । 6) स्वदेशी का प्रचार व उपयोग । 7) राष्ट्रीय स्कूल व कॉलेजों की स्थापना । 8) अस्पृश्यता का निवारण किया जाय । 9) हिन्दू मुस्लिम एकता को मजबूत किया जाए । 10) हाथ की कताई व बुनाई को प्रोत्साहित किया जाय । 1922 ई. तक असहयोग आंदोलन अपने चरम पर पहुँच गया था समस्त बड़े नेता जेल में बंद थे। फरवरी 1922 को चैरी-चैरी नामक स्थान पर निहत्थे प्रदर्शन कारियों पर किए लाठीचार्ज ने प्रदर्शन कारियों को उद्वेलित कर दिया व उन्होंने स्थानीय पुलिस चैकी को आग लगा दी । इस घटना में 22 पुलिस वाले जिंदा जलकर मर गए। आंदोलन का हिंसक रूप देखकर गाँधी जी ने आंदोलन को स्थगित कर दिया। विश्लेषण - गाँधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन समाप्त करने की अप्रत्याशित घोषणा ने समस्त नेताओं ने इसे गलत निर्णय करार दिया। लेकिन नेतृत्वविहीन आंदोलन अक्सर अनियंत्रित भीड़ की तरह होता है जिसके क्षणिक प्रभाव तो बड़ी तीव्रता लिए होते हैं पर दूरगामी प्रभाव विपरीत इसी बात को ध्यान रखकर गांधीजी ने आंदोलन को समाप्त घोषित कर दिया। हाँलाकि इससे गाँधीजी द्वारा एक वर्ष में स्वराज दिलाने का भरोसा टूट गया फिर भी इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़े हिला दी। सभी देशवासी एक नेतृत्व एक झंड़े के नीचे संगठित हो गये। उनमें राष्ट्रीयता की भावना का संचार हुआ। स्वदेशी की भावना ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार द्वारा ब्रिटिश अर्थ व्यवस्था को धक्का पहुँचाया।


Q. 161382 क्या नमक कानून को तोड़ना असहयोग आंदोलन के बाद गाँधी जी द्वारा फिर से जनता को जुटाने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक था। इसका समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। गांधीजी ने नमक कानून उल्लंघन के औचित्य को कैसे सिद्ध किया था?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

महात्मा गाँधी ने घोषणा की कि वे ब्रिटिश भारत के सर्वाधिक घृणित कानूनों में से एक, जिसने नमक के उत्पादन और विक्रय पर राज्य को एकाधिकार दे दिया है, को तोड़ने के लिए एक यात्रा का नेतृत्व करेंगे। नमक एकाधिकार के जिस मुद्दे का उन्होंने चयन किया था वह गाँधी जी की कुशल समझदारी का एक अन्य उदाहरण था। प्रत्येक भारतीय घर में नमक का प्रयोग अपरिहार्य था लेकिन इसके बावजूद उन्हें घरेलू प्रयोग के लिए भी नमक बनाने से रोका गया और इस तरह उन्हें दुकानों से  ऊँचे दाम पर नमक खरीदने के लिए बाध्य किया गया। नमक पर राज्य का एकाधिपत्य बहुत अलोकप्रिय था। इसी को निशाना बनाते हुए गाँधी जी अंग्रेजी शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष को संगठित करने की सोच रहे थे।

नमक कर के बारे में महात्मा गाँधी ने लिखा है:प्रतिदिन प्राप्त होने वाली सूचनाओं से पता चलता है कि कैसे अन्यायपूर्ण तरीके से नमक कर को तैयार किया गया है। बिना कर (जो कभी-कभी नमक के मूल्य का चौदह गुना तक होता था) अदा किए गए नमक के प्रयोग को रोकने के लिए सरकार उस नमक को, जिससे वह लाभ पर नहीं बेच पाती थी, नष्ट कर देती थी। अतः यह राष्ट्र की अत्यधिक महत्वपूर्ण आवश्यकता पर कर लगाती है, यह जनता को इसके उत्पादन से रोकती है और प्रकृति ने जिसे बिना किसी श्रम के उत्पादित किया है उसे नष्ट कर देती है। अतः किसी भी वजह से किसी चीज़ को स्वयं प्रयोग न कर पाने तथा अन्य को भी उसका प्रयोग न करने देने तथा ऐसे में उस चीज़ को नष्ट कर देने की इस अन्यायपूर्ण नीति को किसी भी विशेषण द्वारा नहीं बताया जा सकता है। विभिन्न स्त्रोतों से मैं भारत के सभी भागों में इस राष्ट्र संपति को बेलगाम ढंग से नष्ट किए जाने की कहानियाँ सुन रहा हूँ। बताया गया है टनों न सही पर कई मन नमक कोंकण तट पर नष्ट कर दिया गया । दाण्डी से भी इस तरह की बातें पता चली हैं। जहाँ कहीं भी ऐसे क्षेत्रों के आस-पास रहने वाले लोगों द्वारा अपने व्यक्तिगत प्रयोग हेतु प्राकृतिक नमक उठा ले जाने की संभावना दिखती है वहाँ तुरंत अधिकारी नियुक्त कर दिए जाते हैं जिनका एकमात्र कार्य विनाश करना होता है। इस प्रकार बहुमूल्य राष्ट्रीय संपदा को राष्ट्रीय खर्चे से ही नष्ट किया जाता है और लोगों के मुँह से नमक छीन लिया जाता है। नमक एकाधिकार एक तरह से चौतरफा अभिशाप है। यह लोगों को बहुमूल्य सुलभ ग्राम उद्योग से वंचित करता है, प्रकृति द्वारा बहुतायत में उत्पादित संपदा का यह अतिशय विनाश करता है। इस विनाश का मतलब ही है और अधिक राष्ट्रीय खर्च। चौथा और इस मूर्खता का चरमोत्कर्ष भूखे लोगों से हजार प्रतिशत से अधिक की उगाही है। सामान्य जन की उदासीनता की वजह से ही लम्बे समय से यह कर अस्तित्व में बना रहा है। आज जनता पर्याप्त रूप से जग चुकी है अतः इस कर को समाप्त करना होगा। कितनी जल्दी इसे खत्म कर दिया जाएगा यह लोगों की क्षमता पर निर्भर करता है।

असहयोग आन्दोलन की तरह अधिकृत रूप से स्वीकृत राष्ट्रीय अभियान के अलावा भी विरोध की असंख्य धाराएँ थीं। देश के विशाल भाग में किसानों ने दमनकारी औपनिवेशिक वन कानूनों का उल्लंघन किया जिसके कारण वे और उनके मवेशी उन्हीं जंगलों में नहीं जा सकते थे जहाँ एक जमाने में वे बेरोकटोक घूमते थे। कुछ कस्बों में फैक्ट्री कामगार हड़ताल पर चले गए, वकीलों ने ब्रिटिश अदालतों का बहिष्कार कर दिया और विद्यार्थियों ने सरकारी शिक्षा संस्थानों में पढ़ने से इनकार कर दिया। 1920-22 की तरह इस बार भी गाँधी जी के आह्वान ने तमाम भारतीय वर्गों को औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध अपना असंतोष व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। जवाब में सरकार असंतुष्टों को हिरासत में लेने लगी। नमक सत्याग्रह के सिलसिले में लगभग 60,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार होने वालों में गाँधी जी भी थे।


Q. 161383 नमक यात्रा कब एवं कहाँ से आरंभ हुई थी ? नमक यात्रा का मुख्य उद्देश्य और परिणाम क्या था? 3 + 7
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

6 जनवरी 1930 को लाहौर में  ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाए जाने के तुरंत बाद महात्मा गाँधी ने घोषणा की कि वे ब्रिटिश भारत के सर्वाधिक घृणित कानूनों में से एक, जिसने नमक के उत्पादन और विक्रय पर राज्य को एकाधिकार दे दिया है, को तोड़ने के लिए एक यात्रा का नेतृत्व करेंगे। नमक एकाधिकार के जिस मुद्दे का उन्होंने चयन किया था वह गाँधी जी की कुशल समझदारी का एक अन्य उदाहरण था। प्रत्येक भारतीय घर में नमक का प्रयोग अपरिहार्य था लेकिन इसके बावजूद उन्हें घरेलू प्रयोग के लिए भी नमक बनाने से रोका गया और इस तरह उन्हें दुकानों से  ऊँचे दाम पर नमक खरीदने के लिए बाध्य किया गया। नमक पर राज्य का एकाधिपत्य बहुत अलोकप्रिय था। इसी को निशाना बनाते हुए गाँधी जी अंग्रेजी शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष को संगठित करने की सोच रहे थे।

अधिकांश भारतीयों को गाँधी जी की इस चुनौती का महत्व समझ में आ गया था किन्तु अंग्रेजी राज को नहीं। हालाँकि गाँधी जी ने अपनी ‘नमक यात्रा’ की पूर्व सूचना वाइसराय लार्ड इरविन को दे दी थी किन्तु इरविन उनकी इस कार्रवाही के महत्व को न समझ सके। 12 मार्च 1930 को गाँधी जी ने साबरमती में अपने आश्रम से समुद्र की ओर चलना शुरू किया। तीन हफ्तों बाद वे अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचे। वहाँ उन्होने मुट्ठी भर नमक बनाकर स्वयं को कानून की निगाह में अपराधी बना दिया। इसी बीच देश के अन्य भागों में समान्तर नमक यात्राएँ अयोजित की गईं।

नमक यात्रा कम से कम तीन कारणों से उल्लेखनीय थी। पहला, यही वह घटना थी जिसके  चलते महात्मा गाँधी दुनिया की नजर में आए। इस यात्रा को यूरोप और अमेरिकी प्रेस ने व्यापक कवरेज दी। अमेरिकी समाचार पत्रिका टाइम को गाँधी जी की कदकाठी पर हँसी आती थी। पत्रिका ने उनके तकिए जैसे शरीर और मकड़ी जैसे पैर का ख़ूब मजाक उड़ाया था। इस यात्रा के बारे में अपनी पहली रिपोर्ट में ही टाइम ने नमक यात्रा के मंजिल तक पहुँचने पर अपनी गहरी शंका व्यक्त कर दी थी। उसने दावा किया कि दूसरे दिन पैदल चलने के बाद गाँधी जी जमीन पर पसर गए थे। पत्रिका को इस बात पर विश्वास नहीं था कि इस मरियल साधु के शरीर में और आगे जाने की ताकत बची है। लेकिन एक हफ्ते में ही पत्रिका की सोच बदल गई। टाइम ने लिखा कि इस यात्रा को जो भारी जनसमर्थन मिल रहा है उसने अंग्रेज शासकों को गहरे तौर पर बेचैन कर दिया है। अब वे भी गाँधी जी को ऐसा साधु और राजनेता कह सलामी देने लगे हैं जो ईसाई धर्मावलंबियों के खिलाफ ईसाई तरीकों का ही हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

दूसरे, यह पहली राष्ट्रवादी गतिविधि थी जिसमें औरतों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। समाजवादी कार्यकर्ता कमलादेवी चट्टोंपाध्याय ने गाँधी जी को समझाया कि वे अपने आंदोलनों को पुरुषों तक ही सीमित न रखें। कमलादेवी खुद उन असंख्य औरतों में से एक थीं जिन्होंने नमक या शराब कानूनों का उल्लंघन करते हुए सामूहिक गिरफ्तारी दी थी। तीसरा और संभवतः सबसे महत्वपूर्ण कारण यह था कि नमक यात्रा के कारण ही अंग्रेजों को यह अहसास हुआ था कि अब उनका राज बहुत दिन नहीं टिक सकेगा और उन्हें भारतीयों को भी सत्ता में हिस्सा देना पड़ेगा।


Q. 161384 भारत छोड़ो आंदोलन का प्रसार कैसे हुआ था और इसके क्या प्रभाव हुए थे ? सत्ता हस्तांतरण के लिए उत्तरदायी इसकी परवर्ती घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना तीसरा बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला लिया। अगस्त 1942 में शुरू हुए इस आंदोलन को अंग्रेजों भारत छोड़ो  का नाम दिया गया था। हालांकि गाँधी जी को फौरन गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन देश भर के युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फोड़ की कार्रवाइयों के जरिए आंदोलन चलाते रहे। कांग्रेस में जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी सदस्य भूमिगत प्रतिरोध गतिविधियों में सबसे ज्यादा सक्रिय थे। पश्चिम में सतारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में स्वतंत्र सरकार (प्रतिसरकार) की स्थापना कर दी गई थी। अंग्रेजों ने आंदोलन के प्रति काफी सख्त रवैया अपनाया फिर भी इस विद्रोह को दबाने में सरकार को साल भर से ज्यादा समय लग गया। भारत छोड़ो आंदोलन सही मायने में एक जनांदोलन था जिसमें लाखों आम हिंदुस्तानी शामिल थे। इस आंदोलन ने युवाओं को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने अपने कॉलेज छोड़कर जेल का रास्ता अपनाया। जिस दौरान कांग्रेस के नेता जेल में थे उसी समय जिन्ना तथा मुस्लिम लीग वेफ उनवेफ साथी अपना प्रभाव क्षेत्र फैलाने में लगे थे। इन्हीं सालों में लीग को पंजाब और सिंध में अपनी पहचान बनाने का मौका मिला जहाँ अभी तक उसका कोई खास वजूद नहीं था। जून 1944 में जब विश्व युद्ध समाप्ति की ओर था तो गाँधी जी को रिहा कर दिया गया। जेल से निकलने के बाद उन्होंने कांग्रेस और लीग के बीच फासले को पाटने के लिए जिन्ना के साथ कई बार बात की। 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी। यह सरकार भारतीय स्वतंत्राता के पक्ष में थी। उसी समय वायसराय लॉर्ड वावेल ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों के बीच कई बैठकों का आयोजन किया। 1946 की शुरुआत में प्रांतीय विधान मंडलों के लिए नए सिरे से चुनाव कराए गए। सामान्य श्रेणी में कांग्रेस को भारी सफलता मिली।

मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर मुस्लिम लीग को भारी बहुमत प्राप्त हुआ। राजनीतिक ध्रुवीकरण पूरा हो चुका था। 1946 की गर्मियों में कैबिनेट मिशन भारत आया। इस मिशन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग को एक ऐसी संघीय व्यवस्था पर राज़ी करने का प्रयास किया जिसमें भारत के भीतर विभिन्न प्रांतों को सीमित स्वायत्तता दी जा सकती थी। कैबिनेट मिशन का यह प्रयास भी विफल रहा। वार्ता टूट जाने के बाद जिन्ना ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए लीग की माँग के समर्थन में एक प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया। इसके लिए 16 अगस्त, 1946 का दिन तय किया गया था। उसी दिन कलकत्ता में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। यह हिंसा कलकत्ता से शुरू होकर ग्रामीण बंगाल, बिहार और संयुक्त प्रांत व पंजाब तक फैल गई। वुफछ स्थानों पर मुसलमानों को तो कुछ अन्य स्थानों पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया।

फरवरी 1947 में वावेल की जगह लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय नियुक्त किया गया। उन्होंने वार्ताओं के एक अंतिम दौर का आह्वान किया। जब सुलह के लिए उनका यह प्रयास भी विफल हो गया तो उन्होंने ऐलान कर दिया कि ब्रिटिश भारत को स्वतंत्राता दे दी जाएगी लेकिन उसका विभाजन भी होगा। औपचारिक सत्ता हस्तांतरण के लिए 15 अगस्त का दिन नियत किया गया।


Q. 161385 गांधी जी के बारे में जानकारी के कौनसे स्रोत उपलब्ध हैं। उन स्रोतों की खामियों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

हमारे पास बहुत सारे स्त्रोत उपलब्ध हैं जिनके जरिए हम गाँधी जी के गांधीजी के विषय में राजनीतिक एवं व्यक्तिगत जानकारी की पुनर्रचना कर सकते हैं। कुछ महत्वपूर्ण स्त्रोत इस प्रकार हैं -

1)समकालीन साहित्य:

समकालीन साहित्य से हमें गांधीजी राजनीतिक जीवन एवं व्यक्तित्व की जानकारी प्राप्त होती है। प्रसिद्ध विद्वानों द्वारा गांधीजी पर अच्छी तरह से छानबीन कर लिखी गई पुस्तकें उपलब्द्ध हैं।  इन प्रसिद्ध विद्वानों द्वारा गांधीजी एवं उनके सहयोगियों एवं राजनीतिक विरोधियों सहित उनके समकालीनों द्वारा रचित लेखनों एवं भाषणों का अध्ययन किया गया था।

इन लेखनों में हमें इस बात का खयाल रखना चाहिए कि किस चीज को जनता के लिए लिखा गया था और किस चीज को अन्य उद्देश्यों के लिए लिखा गया था। बहुत सारे पत्र व्यक्तियों को लिखे जाते हैं इसलिए वे व्यक्तिगत पत्र होते हैं लेकिन कुछ हद तक वे जनता के लिए भी होते हैं। उन पत्रों की भाषा इस अहसास से भी तय होती है कि संभव है एक दिन उन्हें प्रकाशित कर दिया जाएगा।

इसलिए, समकालीन साहित्य गांधी जी के जीवन के बारे में बहुत से तथ्यों को उजागर करते हैं। हमें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि एक लेखक का लेखन प्राप्त साक्ष्यों पर आधारित होता है और हो सकता है साक्ष्यों की उपलब्धता से लेखक का लेखन प्रभावित रहा होगा।

2)गांधी की आत्मकथा:

आत्मकथाए भी हमें उस अतीत का ब्यारा देती हैं जो मानवीय विवरणों के हिसाब से काफी समृद्ध होता है। परंतु यहा भी हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम आत्मकथाओं को किस तरह पढ़ते हैं और उनकी कैसे  व्याख्या करते हैं। आत्मकथा लिखना अपनी तसवीर गढ़ने का एक तरीका है। फलस्वरूप, इन विवरणों को पढ़ते हुए हमें वह देखने का प्रयास करना चाहिए जो लेखक हमें नहीं दिखाना चाहता। हमें उन चुप्पियों का कारण समझना चाहिए-इच्छित या अनिच्छित विस्मृति के उन कृत्यों को समझना चाहिए।

हमें उन व्यक्तिगत कारणों को समझने का प्रयत्न करना चाहिए कि क्यों वह कुछ तथ्यों को छुपाना चाहता है और क्यों अन्य तथ्यों को प्रकाशित करना चाहता है। दूसरे शब्दों में, एक विद्वान जिस दृष्टिकोण से आत्मकथा को पढ़ने का प्रयास करता है उसे समझने हेतु पाठक को एक तटस्थ दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है ।

3) सरकारी रिकॉर्ड: पुलिस की डायरी:

औपनिवेशिक शासक ऐसे तत्वों पर हमेशा कड़ी नजर रखते थे जिन्हें वे अपने विरुद्ध मानते थे। इस लिहाज से सरकारी रिकोर्ड्स भी हमारे अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं। उस समय पुलिसकर्मियों तथा अन्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए पत्र तथा रिपोर्टें गोपनीय होती थीं, लेकिन अब ये दस्तावेज अभिलेखागारों में उपलब्ध हैं जिन्हें कोई भी देख सकता है।

ये रिकॉर्ड आसानी से महात्मा गांधी के संबंध में सरकार के रुख के बारे में सूचना प्रदान कर सकते हैं।

4) समाचार पत्र और पत्रिकाएँ: एक महत्वपूर्ण स्रोत:

अंग्रेजी तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं में छपने वाले समकालीन अख़बार भी एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं जो महात्मा गाँधी की गतिविधियों पर नजर रखते थे और उनके बारे में ख़बरें छापते थे। ये अख़बार इस बात का भी संकेत देते हैं कि आम भारतीय उनके बारे में क्या सोचते थे। लेकिन अख़बारी ब्योरों को पूर्वाग्रह से मुक्त नहीं माना जाना चाहिए। ये अख़बार प्रकाशित करने वाले ऐसे लोग थे जिनकी अपनी राजनीतिक सोच और विश्व दृष्टिकोण था। उनके विचारों से ही यह तय होता था कि क्या प्रकाशित किया जाएगा और घटनाओं की रिपोर्टिंग किस तरह की जाएगी।

ऐसी बहुत सी पत्रिकाएँ भी थीं जिंहोने गांधी जी के बारे में तथ्यों को प्रकाशित किया। गांधीजी ने नियमित रूप से अपनी पत्रिका हरिजन, में भारत में कार्यस्थिति पर अपने स्वयं के विचार प्रकाशित किए। हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत विचार थे जो समाज के बारे में उनकी समझ से निर्मित हुए थे और इन्हें ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।


Q. 161386 किस के बाद ज्यादातर कांग्रेसीने अपरिहार्य रूप में विभाजन स्वीकार कर लिया


A. भारत छोड़ो आंदोलन

B. मुस्लिम सीटों पर मुस्लिम लीग की जीत

C. कैबिनेट मिशन की विफलता

D. द्वितीय विश्वयुद्ध

Right Answer is: C

SOLUTION

कांग्रेस और मुस्लिम लीग में कैबिनेट मिशन प्रस्तावों की अस्वीकृति के बाद, विभाजन लगभग अपरिहार्य हो गया।


Q. 161387 हिंदू महासभा पार्टी स्थापित कि गई थी:


A. 1900

B. 1905

C. 1910

D. 1915

Right Answer is: D

SOLUTION

हिंदू महासभा हिंदू राष्ट्रवादी संगठन था।


Q. 161388 पंजाबी मुस्लिम छात्र जो 'पाक-स्टेन'जाना गया :


A. रहमान अली

B. चौधरी रहमत अली

C. रहमान-उर-अली

D. रहमत खान

Right Answer is: B

SOLUTION

१९३३ में चौधरी रहमत अली ने 'पाक-स्टेन',बनाया था


Q. 161389 मुस्लिम लीग को शुरू किया गया था


A. ढाका।

B. दिल्ली।

C. बंबई।

D. कोलकाता।

Right Answer is: A

SOLUTION

मुस्लिम लीग नवाब सलिमुल्ला खान द्वारा स्थापित किया गया था।


Q. 161390 1940 में मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता की गई थी


A. चौधरी रहमत अली द्वारा

B. एम ए जिन्ना द्वारा

C. मौलाना आजाद

D. मोहम्मद इकबाल।

Right Answer is: B

SOLUTION

१९४० में लाहौर सेशन में मुसलिम लीग की अध्यक्षिका जिन्नाह ने की थी


Q. 161391 द्विराष्ट्र सिद्धांत' इस पार्टी के द्वारारखा गया था:


A. हिंदू महासभा

B. संघी पार्टी

C. मुस्लिम लीग

D. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

Right Answer is: C

SOLUTION

द्विराष्ट्र सिद्धांत' भारत और पाकिस्तान के गठन का आधार बना ।


Q. 161392 तब्लिघ और तंजीम आंदोलनों भारत में शुरू किए गए थे:


A. 1920 में

B. 1921 में

C. 1922 में

D. 1923 में

Right Answer is: D

SOLUTION

ताब्लिध  (प्रचार) और तंजीम 1923 के बाद, सांप्रदायिक मुसलमानों द्वारा शुरू किये गये


Q. 161393 मुस्लिम लीग शुरू किया गया था


A. 1904 में

B. 1906 में

C. 1908में

D. 1910में

Right Answer is: B

SOLUTION

मुस्लिम लीग को ढाका में १९०६ में नवाब सलीमुल्लाह द्वारा स्थापित किया गया था


Q. 161394 भूगोल के अर्थ एवं विषय क्षेत्र की विवेचना कीजिये।
Right Answer is:

SOLUTION

भूगोलभूगोल को अंग्रेजी भाषा में ज्योग्राफी कहते हैं ज्यो का अर्थ है पृथ्वी और ग्राफी का अर्थ है वर्णन। हैटनर के अनुसार -“भूगोल एक क्षेत्र विवरण विज्ञान है। “स्टेम्प के अनुसार -“भूगोल पृथ्वी को मानव का ग्रह मानकर उसके भौतिक पर्यावरण एवं मानवीय प्रजाति के अध्ययन की विधा है। “अर्थात् पृथ्वी तल की विभिन्नताओं, परिवर्तनशीलता स्थानीय सम्बन्धों और दृश्य भूमि के अध्ययन को भूगोल में सम्मिलित किया गया है । भूगोल की विषय - वस्तु अथवा क्षेत्र - भूगोल का क्षेत्र व विषय सामग्री विकसित होती गई है और इसके क्षेत्र को सीमा बदलती रही हैं । संक्षेप में प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक भूगोल के अध्ययन क्षेत्रों को निम्नलिखित भागों में बाँटा जा सकता है । 1) प्राचीन काल में भूगोल का क्षेत्र तथा सामग्री-प्राचीन काल में मानव का पृथ्वी से अत्यंत निकट सम्बन्ध था अतः उस समय केवल पृथ्वी ही भूगोल का विषय क्षेत्र था। 2) मध्यकाल में भूगोल का क्षेत्र तथा सामग्री - 16वीं शताब्दी में जर्मन विद्धान वारेनियस ने सबसे पहले भूगोल को एक नया रूप दिया । 3) वर्तमान काल में भूगोल का क्षेत्र तथा सामग्री - इस युग में भूगोल के अध्ययन की नयी-नयी विधियों का विकास हुआ । भूगोल को अनेक शाखाओं में बाँटकर उनका अलग-अलग विवरण प्रस्तुत किया गया । यह शाखाएँ है भौतिक-भूगोल, मानव भूगोल, वाणिज्य भूगोल, प्रादेशिक भूगोल आदि । को अंगे्रजी भाषा में ळमवहतंचील कहते है ळमव का अर्थ है पृथ्वी और हतंचील का अर्थ है वर्णन। हैटनर के अनुसार -“भूगोल एक क्षेत्र विवरण विज्ञान है। “स्टेम्प के अनुसार -“भूगोल पृथ्वी को मानव का ग्रह मानकर उसके भौतिक पर्यावरण एवं मानवीय प्रजाति के अध्ययन की विधा है। “अर्थात् प्थ्वी तल की विभिन्नताओं, परिवर्तनशीलता स्थानीय सम्बन्धों और दृश्य भूमि के अध्ययन को भूगोल में सम्मिलित किया गया है । भूगोल की विषय - वस्तु अथवा क्षेत्र - भूगोल का क्षेत्र व विषय सामग्री विकसित होती गई है और इसके क्षेत्र को सीमा बदलती रही हैं । संक्षेप में प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक भूगोल के अध्ययन क्षेत्रों को निम्नलिखित भागों मेे ंबाँटा जा सकता है । 1) प्राचीन काल में भूगोल का क्षेत्र तथा सामग्री-प्राचीन काल में मानव का पृथ्वी से अत्यंत निकट सम्बन्ध था अतः उस समय केवल पृथ्वी ही भूगोल का विषय क्षेत्र था । 2) मध्यकाल में भूगोल का क्षेत्र तथा सामग्री - 16वीं शताब्दी में जर्मन विद्धान वारेनियस ने सबसे पहले भूगोल को एक नया रूप दिया । 3) वर्तमान काल में भूगोल का क्षेत्र तथा सामग्री - इस युग में भूगोल के अध्ययन की नयी-नयी विधियों का विकास हुआ । भूगोल को अनेक शाखाओं में बाँटकर उनका अलग-अलग विवरण प्रस्तुत किया गया । यह शाखाएँ है भौतिक-भूगोल, मानव भूगोल, वाणिज्य भूगोल, प्रादेशिक भूगोल आदि ।


Q. 161395 यूरोप का जनसंख्या घनत्व है:


A.

प्रति वर्ग किमी० 120 व्यक्ति

B.

प्रति वर्ग किमी० 105 व्यक्ति

C.

प्रति वर्ग किमी० 104 व्यक्ति

D.

प्रति वर्ग किमी० 102 व्यक्ति

Right Answer is: B

SOLUTION

छोटे क्षेत्र का घनत्व अधिक होने के कारण कुल जनसंख्या कम है|


Q. 161396 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत का जनसंख्या घनत्व था है:


A.

प्रति वर्ग किमी० 289 व्यक्ति

B.

प्रति वर्ग किमी० 327 व्यक्ति

C.

प्रति वर्ग किमी० 382 व्यक्ति

D.

प्रति वर्ग किमी० 325 व्यक्ति

Right Answer is: C

SOLUTION

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार भारत की में जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति है, जबकि 2001 में यह 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था l


Q. 161397 संयुक्त राज्य अमेरिका का जनसंख्या घनत्व है:


A.

प्रति वर्ग किमी० 112 व्यक्ति

B.

प्रति वर्ग किमी० 25 व्यक्ति

C.

प्रति वर्ग किमी० 28 व्यक्ति

D.

प्रति वर्ग किमी० 85 व्यक्ति

Right Answer is: C

SOLUTION

संयुक्त राज्य अमेरिका जनसंख्या के मामले में तीसरे स्थान पर है लेकिन बहुत बड़ा क्षेत्र होने के कारण जनसंख्या घनत्व बहुत कम है|


Q. 161398 सांस्कृतिक पर्यावरण में शामिल है:


A.

जल

B.

भू-आकृतियाँ

C.

जलवायु

D.

बस्तियां

Right Answer is: D

SOLUTION

बस्तियां, सांस्कृतिक पर्यावरण का एक भाग हैं|


Q. 161399 कृषि के विकास से संबंधित है:


A.

आखेट एवं भोजन संग्रह

B.

कृषि क्रांति

C.

औद्योगिक क्रांति

D.

हरित क्रांति

Right Answer is: D

SOLUTION

हरित क्रांति सन् 1940-60 के मध्य कृषि क्षेत्र में हुए शोध विकास, तकनीकि परिवर्तन एवं अन्य कदमों की श्रृंखला को संदर्भित करता है जिसके परिणाम स्वरूप पूरे विश्व में कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।


Q. 161400 1998 का विश्व में औसत जनसंख्या घनत्व था:


A.

42 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०

B.

48 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०

C.

43 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०

D.

52 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी०

Right Answer is: C

SOLUTION

1998 का विश्व में औसत जनसंख्या घनत्व 43 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी था|


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