प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत 17 अक्टूबर 1940 ई० को विनोबा भावे ने गाँधी जी के मनोनीत करने पर की थी।
साइमन कमीशन 2 फरवरी, 1928 ई० को भारत में मुंबई पहुँचा था ।
महात्मा गाँधी जी ने 20 अगस्त 1920 ई० को अहिंसात्मक असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ ।
जिन्ना ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए लीग की माँग के समर्थन में एक प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया। इसके लिए 16 अगस्त, 1946 का दिन तय किया गया था। इस दिन शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा की योजना बनाई गई थी किन्तु उसी दिन कलकत्ता में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। यह हिंसा कलकत्ता से शुरू होकर ग्रामीण बंगाल, बिहार और संयुक्त प्रांत व पंजाब तक फैल गई। कुछ स्थानों पर मुसलमानों को तो कुछ अन्य स्थानों पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया।
1935 ई० में भारत सरकार ने एक नया अधिनियम पारित किया । इसके अनुसार, संघात्मक शासन की व्यवस्था की गयी प्रान्तों को स्वतंत्र कर दिया गया ।
महात्मा गाँधी ने निम्न जातियों के लिए पृथक निर्वाचिका की मांग का विरोध किया। उनका मानना था कि ऐसा करने पर समाज की मुख्यधारा में उनका एकीकरण नहीं हो पाएगा और वे सवर्ण हिंदुओं से हमेशा के लिए अलग रह जाएगे।
कांग्रेस ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया था ।
भारत में केवल मद्रास की जस्टिस पार्टी ने साइमन कमीशन का स्वागत किया था ।
पाकिस्तान की माँग मुस्लिम लीग पार्टी द्वारा की गयी थी |
प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत 17 अक्टूबर 1940 ई० को विनोबा भावे ने गाँधी जी के मनोनीत करने पर की थी।
साइमन कमीशन 2 फरवरी, 1928 ई० को भारत में मुंबई पहुँचा था ।
महात्मा गाँधी जी ने 20 अगस्त 1920 ई० को अहिंसात्मक असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ ।
जिन्ना ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए लीग की माँग के समर्थन में एक प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस का आह्वान किया। इसके लिए 16 अगस्त, 1946 का दिन तय किया गया था। इस दिन शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा की योजना बनाई गई थी किन्तु उसी दिन कलकत्ता में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। यह हिंसा कलकत्ता से शुरू होकर ग्रामीण बंगाल, बिहार और संयुक्त प्रांत व पंजाब तक फैल गई। कुछ स्थानों पर मुसलमानों को तो कुछ अन्य स्थानों पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया।
इस अधिनियम के अनुसार भारत को 15 अगस्त 1947 ई० को रात के बारह बजे स्वंतत्रता घोषित किया । भारत स्वतंत्र होकर दो राष्ट्रों में विभाजित को गया ये । दो राष्ट्र भारत और पाकिस्तान थे ।
1935 ई० में भारत सरकार ने एक नया अधिनियम पारित किया ।
इसके अनुसार संघात्मक शासन की व्यवस्था की गयी प्रान्तों को स्वतंत्र कर दिया गया ।
प्रथम गोलमेज सम्मेलन द्वारा स्वीकृत सिद्धांतों पर विचार के लिए कांग्रेस के नेता 16 फरवरी 1931 को बंदीगृह से मुक्त किये गये । 31 मार्च 1931 को गाँधी जी और भारत के वाइसराय के बीच समझौता हुआ । इस समझौते को गाँधी-इरविन समझौते में नाम से जाना गया इसके बाद गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित कर दिया ।
पूर्ण स्वतंत्रता-प्राप्ति के उद्देश्य की घोषणा से राष्ट्रीय आन्दोलन में नवीन उत्साह का संचार करने के लिए हुआ। 14 फरवरी 1930 को साबरमती में कांग्रेस में कार्यकारिणी सभा की। इस सभा में महात्मा गाँधी को सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाने का अधिकार दिया ।
स्वराज दल की स्थापना परिवर्तन दल के नेता मोतीलाल नेहरु व सी० आर० दास ने स्वराज पार्टी की स्थापना की पार्टी को विधानसभाओं में बहुत स्थान मिले इस पार्टी ने सरकारी कार्यों में विघ्न डालना शुरू किया ।
कौंसिल के प्रश्न पर कांग्रेस का दो दलों में विभाजन हो गया । एक दल कौंसिल में प्रवेश कर सरकार के कार्यों में बाधा डालना चाहती थी । यह दल परिवर्तनवादी कहलाया था दूसरेदल ने कौंसिल के त्याग पर बल दिया यह दल अपरिवर्तनवादी कहलाया गया ।
इस अधिनियम के अनुसार भारत को 15 अगस्त 1947 ई० को रात के बारह बजे स्वंतत्रता घोषित किया । भारत स्वतंत्र होकर दो राष्ट्रों में विभाजित को गया ये । दो राष्ट्र भारत और पाकिस्तान थे ।
प्रथम गोलमेज सम्मेलन द्वारा स्वीकृत सिद्धांतों पर विचार के लिए कांग्रेस के नेता 16 फरवरी 1931 को बंदीगृह से मुक्त किये गये । 31 मार्च 1931 को गाँधी जी और भारत के वाइसराय के बीच समझौता हुआ । इस समझौते को गाँधी-इरविन समझौते में नाम से जाना गया इसके बाद गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित कर दिया ।
पूर्ण स्वतंत्रता-प्राप्ति के उद्देश्य की घोषणा से राष्ट्रीय आन्दोलन में नवीन उत्साह का संचार करने के लिए हुआ। 14 फरवरी 1930 को साबरमती में कांग्रेस में कार्यकारिणी सभा की। इस सभा में महात्मा गाँधी को सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाने का अधिकार दिया ।
महात्मा गाँधी का विचार था कि अस्पृश्यों के लिए पृथक निर्वाचिका का प्रावधान करने से उनकी दासता स्थायी रूप ले लेगी। पृथक निर्वाचिका से उनके प्रति कलंक का यह भाव और मजबूत हो जाएगा। जरूरत इस बात की है कि अस्पृश्यता का विनाश किया जाए उन्हें यह भय था कि यह आगे भी उनकी हीनता की स्थिति को बनाए रखते हुए हिन्दू समाज को विभाजित कर देगा और हिंदुओं को अस्पृश्यता की प्रथा के खिलाफ लड़ने की उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी से उन्हें मुक्त कर देगा।
क्रिप्स मिशन के भारत आगमन का प्रमुख कारण :-
1. द्वितीय विशव युद्ध में भिन्न राष्ट्रों की स्थिति कमजोर हो गयी ।
2. कमजोर स्थिति के कारण ब्रिटेन पर यह दबाव बढ़ने लगा की वह भारत की जनता के साथ न्याय पूर्ण व्यवहार करे ।
3. 11 मार्च 1942 ई० को ब्रिटिश सरकार ने क्रिप्स मिशन भारत भेजने की घोषण की सर स्टैफर्ड क्रिप्स भारत के भावी शासन की एक योजना लाये महात्मा गाँधी जी ने क्रिप्स प्रस्तावों को उत्तर तिथिय चेक कहा ।
शिमला सम्मेलन में भारत के नए वायसराय वैवेल ने जून 1945 ई० में कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्यों के समक्ष एक योजना प्रस्तावित की । इस योजना में कहा गया कि वे अपनी कार्यकारिणी में 6 हिन्दू और मुसलमान सदस्य लेने के लिए सहमत हैं, किन्तु नामों के सम्बन्ध में लीग और कांग्रेस को स्वयं निर्णय लेना चाहिए। कांग्रेस और मुस्लिम लीग में सदस्यों के चयन करने के सम्बन्ध में मतभेद था । इसलिए दोनों में कोई सम्झोजा नहीं हो पाया अतः शिमला सम्मेलन विफल हो गया।
15 अगस्त 1947 को राजधानी में हो रहे उत्सवों में भाग लेने से महात्मा गाँधी ने इंकार कर दिया था।उस समय वे कलकत्ता में थे जहां वे हिंदु-मुस्लिम दंगों की वजह से आहत हुए समाज की मरहम पट्टी करने में लगे थे। उन्होंने वहाँ भी न तो किसी कार्यक्रम में हिस्सा लिया, न ही कहीं झंडा फहराया। उन्होंने इतने दिन तक जिस स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था वह एक अकल्पनीय कीमत पर उन्हें मिली थी। उनका राष्ट्र विभाजित हो गया था। गाँधी जी उस दिन 24 घंटे के उपवास पर थे। सांप्रदायिक शांति स्थापित करने के लिए और स्थानीय आबादी पर अनशन के प्रभाव को देखकर कई लोगों द्वारा इसे एक चमत्कार के रूप में माना गया था।गाँधी जी पीड़ितों को सांत्वना देते हुए अस्पतालों और शरणार्थी शिविरों के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने कलकत्ता में मुसलमानों की सहायतार्थ सिखों, हिंदुओं का आह्वान किया। उन्होंने आह्वान किया कि वे एक-दूसरे के प्रति भाईचारे का हाथ बढ़ाएँ ।
महात्मा गाँधी और उनके सहयोगियों व प्रतिद्वंद्वियों, दोनों तरह के समकालीनों के लेखन और भाषण एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है भाषणों से हमें किसी व्यक्ति के सार्वजनिक विचारों को सुनने का मौका मिलता है जबकि उसके व्यक्तिगत पत्र हमें उसके निजी विचारों की झलक देते हैं। हात्मा गाँधी हरिजन नामक अपने अखबार में उन पत्रों को प्रकाशित करते थे जो उन्हें लोगों से मिलते थे। आत्मकथा, "माई एक्सपेरियंस विद ट्रुथ" गांधी के जीवन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं । नेहरू ने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उन्हें लिखे गए पत्रों का एक संकलन तैयार किया और उसे ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स (पुराने पत्रों का पुलिंदा) के नाम से प्रकाशित किया।
क्रिप्स मिशन के भारत आगमन का प्रमुख कारण :-
1. द्वितीय विशव युद्ध में भिन्न राष्ट्रों की स्थिति कमजोर हो गयी ।
2. कमजोर स्थिति के कारण ब्रिटेन पर यह दबाव बढ़ने लगा की वह भारत की जनता के साथ न्याय पूर्ण व्यवहार करे ।
3. 11 मार्च 1942 ई० को ब्रिटिश सरकार ने क्रिप्स मिशन भारत भेजने की घोषण की सर स्टैफर्ड क्रिप्स भारत के भावी शासन की एक योजना लाये महात्मा गाँधी जी ने क्रिप्स प्रस्तावों को उत्तर तिथिय चेक कहा ।
गांधीजी का विचार था कि अस्पृश्य लोगों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र उनमें कलंक का भाव अधिक मजबूती से जड़े जमा लेगा। जबकि जरूरत अस्पृश्यता के निवारण की हैं इसलिए गोलमेज सम्मेलन में पृथक निर्वाचन क्षेत्र का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘अस्पृश्यों के लिए पृथक निर्वाचिका का प्रावधान करने से उनकी दासता स्थायी रूप ले लेगी। क्या आप चाहते हैं कि ‘अस्पृश्य’ हमेशा अस्पृश्य ही बने रहें।
सन् 1924 में जेल से रिहा होने के बाद गांधीजी ने बुनियादी शिक्षा, ग्राम उद्योग संघ, तालीमी व गौ रक्षा संघ स्थापित किये। समाज में फैली शोषण व्यवस्था को समाप्त करने पर जोर दिया। कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया। दलितोद्धार, शराबबन्दी व हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया। आर्थिक तंत्र को मजबूत करने के लिए चरखा व खादी को अपना आधार बनाया।
भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में महात्मा गाँधी जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नया रूप प्रदान किया ।
असहयोग आन्दोलन :- महात्मा गाँधी ने 20 अगस्त 1920 को अहिंसात्मक असहयोग आन्दोलन शुरू कर दिया । राजनीति के क्षेत्र में अहिंसा का अभिनव प्रयोग था उन्होंने भारतीय से अपील की वे ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गयी । उपाधियों, सरकारी पदों को त्याग दे उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा के लिए प्रयास किये ।
गाँधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम :- गाँधी जी ने रचनात्मक कार्यक्रम बनाये ।
एक करोड़ रूपये का तिलक फंड स्थापित करना ।
एक करोड़ स्वयंसेवकों की भर्ती करना ।
20 लाख चरखों का वितरण करना ।
स्वदेशी माल खरीदने पर बल दिया ।
लोक अदालतों की स्थापना करना ।
नेहरु रिपोर्ट :- गाँधी जी ने सर्वमान्य विधान निर्माण करने में लगी पहले दल के नेता सुभाष चन्द्र बोस और दूसरे दल के नेता जवाहर लाल नेहरु के बीच गाँधी जी ने मेल काराने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जिसको कांग्रेस ने स्वीकार कर लिया ।
सविनय अवज्ञा आन्दोलन :- गाँधी जी ने अपने कुछ साथियों के साथ नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ करने की सूचना 2 मार्च 1930 का एक पत्र लिखकर लार्ड इरविन को दी । 12 मार्च को महात्मा गाँधी डांडी में नमक कानून को तोड़ दिया ।
पूना पैक्ट :- पूना पैक्ट का अनुसार 26 सितम्बर 1932 को अम्बेडकर और गाँधी के बीच पूना पैक्ट हो गया । इस पैक्ट में दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था समाप्त कर दी। गयी केंद्रीय विधान मंडल में 18 प्रतिशत सीटे एवं प्रांतीय विधान मंडलों में 148 सीटे दलितों के लिए आरक्षित की गयी ।
भारत छोडो आन्दोलन :- 8 अगस्त 1942 को मुंबई में गाँधी जी के नेतृत्व में भारत छोडो प्रस्ताव शुरू किया ।
A. बलविंदर सिंह द्वारा
B. खुशदेवा सिंह द्वारा
C. खुशवंत सिंह द्वारा
D. मंजरी सिंह द्वारा
खुश्देवा सिंह ने अपने अनुभवों का वर्णन करने के लिए इसे लिखा था
A. पंजाब
B. संयुक्त प्रांत
C. असम
D. उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत
कैबिनेट मिशन प्रस्तावों के अनुसार ग्रुप सी मुस्लिम बहुल प्रांतों के लिए था।
A. ब्रिस्टल विश्वविद्यालय का
B. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का
C. डरहम विश्वविद्यालय का
D. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का
चौधरी रहमत अली एक पंजाबी मुसलमान था
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता अच्छी तरह से प्रशिक्षित थे और बेहद अनुशासित थे, सभी हिन्दू राष्ट्रवाद की विचारधारा के थे
A. 1914
B. 1916
C. 1918
D. 1919
लखनऊ संधि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक समझौते को दर्शाता है।
A. कलकत्ता में दंगे होना
B. मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा सम्मेलन आयोजित किया गया था
C. वेवल योजना पर बातचीत की गई थी
D. क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों पर चर्चा की गई
मुस्लिम लीग ने १६ अगस्त को 'डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा की।
A. मुस्लिम लीग
B. युवा पार्टी
C. संघी पार्टी
D. हिंदू महासभा
मुस्लिम लीग को 30 दिसंबर 1906 में स्थापित किया गया था।
A. एक संभावित देश को हमेशा के लिए छोड़ दें।
B. एक संघ का समर्थन करने के लिए
C. एक संघ से औपचारिक रूप से वापस लेने के लिए
D. किसी दूसरे देश की आजादी के लिए अनुदान
शब्द 'अलग होना' एक संघ या संगठन से औपचारिक रूप से वापस लेने के लिए है।
A. दस
B. नौ
C. आठ
D. सात
1937 के प्रांतीय चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 11 सीटों में से 7 में सत्ता में आई थी ।
A. सुभोरंजन दासगुप्ता
B. जसोधरा बागची
C. उर्वशी बुटालिया
D. अनिता इंदर सिंह
अपनी पुस्तक शान्ति के दूसरी ओर, में उर्वशी बुटालिया, Thoa खालसा, रावलपिंडी के गांव में एक घटना बताती हैं।
A. मोहम्मद इकबाल
B. मुहम्मद अली जिन्ना
C. चौधरी रहमत अली
D. सिकंदर हयात खान
पाकिस्तान की मांग की उत्पत्ती उर्दू शायर मुहम्मद इकबाल से हुई
A. हिंदू महासभा द्वारा
B. संघी पार्टीद्वारा
C. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा
D. मुस्लिम लीग द्वारा
लखनऊ संधि मुस्लिम लीग के हस्ताक्षर करने के समय युवा पार्टी आधारित द्वारा नियंत्रित किया गया था।
पाकिस्तान की माँग मुस्लिम लीग पार्टी द्वारा की गयी थी |
1906 में
जनता अपने शासन विधान की रचना करने के अधिकार का प्रयोग जिस संस्था के माध्यम से करती है, उसे 'संविधान सभा' कहते हैं। संविधान सभा का मुख्य कार्य संविधान की रचना करना है, इसीलिए इसे 'संविधान निर्मात्री सभा' भी कहा जाता है।
लीग ने,1940 में मुसलमानों के लिए "स्वतंत्र राज्य" की मांग का एक प्रस्ताव भेजा, इसने देश के पश्चिमोत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में अपने "स्वतंत्र राज्यों" को स्थापित किया
भारत का विभाजन 1947 में हुआ था।
विभाजन भी टाला जा सकता था, बशर्ते कि ब्रिटिश-नीतियाँ अनुकूल होती तथा जिन्ना की हटधर्मिता एवं द्विराष्ट्रवाद नहीं होते तथा कांग्रेस दूरदर्शिता से कार्य करती। स्वयं जिन्ना ने भी बाद में स्वीकारा कि विभाजन उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी।
(1) दोनों देशों में आज भी विभाजन की टीस है, विभाजन की स्मृतियाँ, घृणाएँ और छवियाँ आज की सरहद के दोनों तरफ के लोगों के इतिहास व सम्बन्धों को तय करती है।
(2) कश्मीर प्रश्न को लेकर दोनों देशों के मध्य तीव्र मनमुटाव और कटुता की स्थिति बनी हुई है।
A.
जनसंख्या भूगोल का
B.
नगरीय भूगोल का
C.
राजनीतिक भूगोल का
D.
सामाजिक भूगोल का
अवकाश का भूगोल सामाजिक भूगोल का उपक्षेत्र है| यह समाजशास्त्र के सहयोगी अनुशासकों से अंतरा पृष्ठ है|
A.
नव-निश्चयवाद
B.
पर्यावरणीय निश्चयवाद
C.
संभववाद
D.
नियतिवाद
ग्रिफिथ टेलर ने एक नयी संकल्पना प्रस्तुत की है जो दो विचारों पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद के बीच मध्य-मार्ग को परिलक्षित करता है। उन्होंने इसे नव-निश्यचवाद अथवा रुको और जाओ निश्चयवाद कहा है|
A.
फ्रैंसिस बेकन ने
B.
ग्रिफिथ टेलर ने
C.
हम्बोल्ट ने
D.
एलेन सेम्पल ने
ग्रिफिथ टेलर एक ऑस्ट्रेलियाई भूगोलवक्ता थे| उन्होंने 1920 में नव-निश्चयवाद का प्रतिपादन किया|
A.
केवल मानव से संबंधित
B.
अन्य विज्ञानों से संबंधित
C.
प्रकृति से अंतःसंबंधित
D.
भूमि से संबंधित
मानव भूगोल प्रकृति और मानव के मध्य अंतःसंबंधों का अध्ययन करता है|
A.
लिंग
भूगोल से
B. ऐतिहासिक भूगोल से
C. बाजार का भूगोल
D. चुनावी भूगोल
राजनीतिक भूगोल की दो उप-शाखाएं हैं- चुनावी भूगोल और सैन्य भूगोल|
A.
भारतीयों
ने
B. फारसियों ने
C. यूनानियों ने
D. रोमनों ने
मानचित्रण का आविर्भाव रोमनों ने किया था| वे नयी भूमियों और नयी प्रौद्योगिकी की खोज करते थे|
A.
मनोविज्ञान
से
B. महामारी विज्ञान से
C. जनसांख्यिकी से
D. समाज शास्त्र से
जनसांख्यिकी के अंतर्गत जनसंख्या और उसकी विशेषताओं का अध्ययन शामिल है|
A.
क्षेत्रीय
भिन्नताएं
B. स्थानिक संगठन
C. मात्रात्मक क्रांतियाँ
D. अन्वेषण और विवरण
क्षेत्रीय भिन्नताओं का संबंध प्रादेशिक भूगोल से है|
A.
एक
एकीकृत विषय
B. मानव और पर्यावरण के मध्य आपसी संबंध का अध्ययन
C. द्वैतवाद विषय
D. वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी के विकास के कारण यह अनुचित है
विरोधाभास यह है कि वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी के विकास ने भूगोल को और भी सुसंगत बना दिया है|
A.
मानव-बुद्धि
B. व्यक्तियों की धारणा प्रौद्योगिकी
C. प्रौद्योगिकी
D. मानव-भाईचारा
व्यक्ति और पर्यावरण के मध्य वार्ता का सबसे महत्वपूर्व कारक मानव-भाईचारा है|
A.
बर्नहार्डस वर्नियस
B.
वाइडल डि लॉ ब्लॉश
C.
एलेन सेम्पल
D.
ग्रिफिथ टेलर
बर्नहार्डस वर्नियस ने भूगोल को दो प्रकारों; सामान्य भूगोल और विशिष्ट भूगोल में विभाजित किया है|
A.
एक
ट्रैवलर का
एकाउंट
B. प्राचीन मानचित्र
C. चन्द्रमा से प्राप्त चट्टानी सामग्री के नमूने
D. प्राचीन ग्रन्थ
प्राचीन ग्रंथों को भौगोलिक सूचनाओं का सरित नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें पौराणिक कथाएं शामिल होती हैं|
A.
15वीं शताब्दी में
B.
16वीं शताब्दी में
C.
19वीं शताब्दी में
D.
17वीं शताब्दी में
19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मानव भूगोल, भूगोल की विशेष शाखा के रूप में उभर कर आई|
A.
B.
C.
हम्बोल्ट
D.
वर्नियस
मानव विकास के क्षेत्र में रेटजेल की एन्थ्रोपोज्योग्राफी एक बेहतरीन कार्य है|
A.
एलेन
सेम्पल
B. वर्नियस
C. कार्ल रिटर
D. ग्रिफिथ टेलर
सेम्पल, रेटजेल की शिष्या थीं| वे भूगोल के निश्चयात्मक विचारों की एक मजबूत समर्थक थीं|
A.
1930
B.
1920
C.
1940
D.
1889
आस्ट्रेलिया के महान भूगोलवेत्ता ग्रिफिथ टेलर (Griffith Taylor) ने 1920 के दशक में निश्चयवाद की आलोचना की तथा नव-निश्चयवाद का दर्शन प्रस्तुत किया।
A.
अमेरिकी
भूगोलवक्ताओं
ने
B. ग्रीक और रोमन भूगोलवक्ताओं ने
C. भारतीय भूगोलवक्ताओं ने
D. यूरोपीय भूगोलवक्ताओं ने
भौतिक और सांस्कृतिक पर्यावरण को समझाने का प्रथम प्रयास ग्रीक और रोमन भूगोलवक्ताओं ने किया|
A.
इमानुएल कांट
B.
इब्न खल्दून
C.
लुसियन फेब्रे
D.
अल-इदरिसी
इस पुस्तक में फेब्रे ने ‘संभववाद’ का इस्तेमाल पहली लाइन में किया था|
A.
भूगोल का अर्थ
B.
भूगोल का अध्ययन
C.
भूगोल का विषय
D.
भूगोल का क्षेत्र
19वीं शताब्दी के दौरान, वैज्ञानिक तरीकों के तेजी से होते विकास के साथ ही भूगोल का क्षेत्र सीमित कर दिया गया|
भारत का विभाजन बीसवीं शताब्दी की सबसे बड़ी दुखद घटना है, इस काल में घटित घटनाओं तथा नेताओं के व्यवहार ने अंत में भारत को दो भागों -हिंदुस्तान एवं पकिस्तान में बाँट दिया, इस विभाजन के निम्नलिखित कारण थे-
1अंग्रेजों की नीति -
अंग्रेजों की नीति भारत में प्रारम्भ से ही फूट डालो राज करो की रही थी, अंग्रेज निरंतर हिंदुओं के खिलाफ मुसलामानों के दिमाग में विष घोलते रहे, उन्हें भड़काते रहे कि हिन्दू और मुसलमान दो अलग-अलग कौमें हैं, अतः डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का यह कथन बिलकुल सत्य प्रतीत होता है कि, "पाकिस्तान के निर्माता कवी इकबाल तथा मी. जिन्ना नहीं, वरन लॉर्ड मिन्टों थे," ।
2 हिन्दू साम्प्रदायिकता -
कुछ विद्वानों का मानना है कि हिन्दू साम्प्रदायिकता भारत विभाजन के लिए दोषी है, किन्तु जब अंग्रेजों ने मुस्लिम लीग को भड़काकर भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगें कराये तो विवश होकर हिंदुओं को संगठित होना पड़ा, यह तथ्य असंगत प्रतीत होता है ।
3लीग के प्रति कांग्रेस की नीति -
मुस्लिम लीग के प्रति कांग्रेस की नीति सदैव तुष्टिकरण की रही थी,जो अंत में देश के विभाजन का कारण बनी, 1916 में लखनऊ पैक्ट के रूप में साम्प्रदायिक निर्वाचन प्रणाली को स्वीकार करना, सिंध को मुम्बई से अलग करना, सी.आर. योजना को स्वीकार करना तथा कांग्रेस मंत्री मंडल में मुस्लिम लीग के मत्रियों को स्वीकार करने में कठोरता दिखाना, ये भयंकर भूलें थीं, जो कि कालान्तर में भारत वीभाजन का कारण बनी ।
4जिन्ना की महत्वाकांक्षा-
मी.मुहम्मद अली जिन्ना एक मटवाकांक्षी व्यक्ति थे, महात्मा गांधी द्वारा दिए गए प्रधानमंत्री के अवसर को भी उन्होंने इसीलिये ठुकरा दीया था, क्योंकि वे एक राष्ट्र निर्माता बनना चाहते थे ।
5 जिन्ना की हठ-
1940 ई. में संवैधानिक गतिरोध दूर करने के लीये अनेक सुझाव कांग्रेस द्वारा दिए गए थे, किन्तु जिन्ना महोदय प्रारम्भ से ही अपनी पाकिस्तान की मांग को लेकर जिद पर अड़े रहे ।
6 अंतरिम सरकार की असफलता-
सन 1946 ई. में निर्वाचन के पश्चात केंद्र में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ, जिसमें कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग दोनों के नेता थे । प. जवाहर नेहरू प्रधानमंत्री बनाये गए , सरदार पटेल को गृह मंत्री एवं मुस्लिम लीग के लियाकत अली वित्त मंत्री बनाये गए, कांग्रेस ने जब भी विकास के लिए अपनी योजनाएं प्रस्तुत की, उन्हें लियाकत अली द्वारा धन की कमी का बहानका बनाकर अस्वीकृत कर दिया जाता , विवश होकर सरदार पटेल को कहना पड़ा कि "एक वर्ष के मेरे प्रशासनिक अनुभव अनुभव ने मुझे यह विशवास दिला दिया कि हैम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं" ।
7 पाकिस्तान की स्थिरता में संदेह-
कांगेस के अनेक नेताओं का मानना था कि पाकिस्तान यदि बन भी गया तो, वह उसकी भौगोलिक, आर्थिक , सैनिक , राजनितिक दृष्टि से स्थायी राष्ट्र नहीं बन सकेगा और एक दिन उसका भारत में विलय हो जाएगा।
8 लीग के साम्प्रदायिक कार्य-
जब मुस्लिम लीग को अपने संवैधानिक कार्यों में असफलता मिली तो उसने मुस्लिम जनता को भड़काकर जगह-जगह सांप्रदायिक दंगें करवा दिए, अकेले नोवाखाली में ही करीब सात हजार लोगों की जानें इन साम्प्रदायिक दंगों में गयी थी ।
9 सत्ता के प्रति कांग्रेसी नेताओं का आकर्षण -
एक अंग्रेजी विचारक माईकल बरचर ने यह विचार प्रस्तुत किये थे कि, कांगेसी नेताओं का सत्ता के प्रति आकर्षण था, और वे विजय की घड़ी में ये आकर्षण छोड़ना नहीं चाहते थे, किन्तु यह आरोप सत्य प्रतीत नहीं होता है, कांग्रेसी नेता शुरू से देशभक्त थे, वे भारत्त की अखंडता में विशवास रखते थे, किन्तु जब उन्हें ये विश्वास हो गया कि या तो भारत स्वतन्त्र होगा अथवा गृहयुद्ध की स्थिति उत्त्पन्न होगी तो उन्होंने एक खंडित भारत को स्वीकार करना तय किया था।
10 सत्ता हस्तांतरण के बारे में अंग्रेजों का दृष्टिकोण-
अंग्रेजों का विचार था कि भारत विभाजन से उत्त्पन्न दोनों राष्ट्र, हिंदुस्तान एवं पाकिस्तान सर्वदा आपस में लड़ते रहेंगें जो कि भारत को एक दुर्बल राष्ट्र बना देगा, यह विचार सत्य साबित हुआ ।
11 लीग के साथ स्थायी एकता न होने का विचार -
मुस्लिम लीग की सीधी कार्यवाही के बाद, कांग्रेस नेताओं को यह आभास होने लगा था कि, उसे साथ लेकर चलना असम्भव होगा, अंग्रेजों ने 30 जून 1947 तक भारत छोड़ने का निर्णय कर लिया था, ऎसी स्थिति में जबकि मुस्लिम लीग सम्पूर्ण भारत में दंगें करा रही थी, कांग्रेस नेताओं के सामने दो ही विकल्प थे-भारत का विभाजन स्वीकार करना या गृह युद्ध, अतः कांग्रेस ने प्रथम विकल्प को चुनना पसंद किया।
12 लॉर्ड माउंटबेटन का प्रभाव- भारत विभाजन को अपने चरम पर पहुंचाने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड माउण्ट बेटन को भारत भेजा, उन्होंने राजनीति, कूटनीति, व्यवहार कुशलता सभी का प्रयोग कर अपने इस कार्य में सफलता प्राप्त कर ली, पं. जवाहरलाल नेहरू तथा सरदार पटेल मुस्लिम लीग के कार्यों एवं कटु अनुभवों के कारण भारत- विभाजन के लिए सहमत हो गए।
उपरोक्त परिस्थितियां भारत-विभाजन के लिए उत्तरदायी रहीं, यद्यपि महात्मा गांधी भारत-विभाजन के विरुद्ध थे और उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि , भारत का विभाजन उनकी लाश पर ही होगा, किन्तु अंग्रेजों की कुटिलता एवं मुस्लिम लीग की हरकतों से भारत विभाजन होकर ही रहा!लॉर्ड माउंटबेटन का प्रभाव- भारत विभाजन को अपने चरम पर पहुंचाने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड माउण्ट बेटन को भारत भेजा, उन्होंने राजनीति, कूटनीति, व्यवहार कुशलता सभी का प्रयोग कर अपने इस कार्य में सफलता प्राप्त कर ली, पं. जवाहरलाल नेहरू तथा सरदार पटेल मुस्लिम लीग के कार्यों एवं कटु अनुभवों के कारण भारत- विभाजन के लिए सहमत हो गए।
उपरोक्त परिस्थितियां भारत-विभाजन के लिए उत्तरदायी रहीं, यद्यपि महात्मा गांधी भारत-विभाजन के विरुद्ध थे और उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि , भारत का विभाजन उनकी लाश पर ही होगा, किन्तु अंग्रेजों की कुटिलता, मुस्लिम लीग की हरकतों से भारत विभाजन होकर ही रहा ।
भारत का बँटवारा उस साम्प्रदायिक राजनीति का अंतिम बिंदु था जो 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई थीं जिसने हिंदु-मुसलमानों में नफरत की भावना को जन्म दिया । धार्मिक समुदायों में परस्पर घृणा फैलाकर झगड़े पैदा किये, व हिंसा की राजनीति को ब1) भारत-विभाजन और सांप्रादायिक तनाव - कई इतिहासकारों के अनुसार भारत के बंटवारे के लिये सांप्रादायिक तनाव जि़म्मेदार था । अपने समर्थन में वे निम्न तर्क देते हैं - i) हिन्दु-मुस्लिम झगड़ों की निरंतरता - इतिहास पर नज़र डाले तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सांप्रादायिक तनाव की जड़ें प्राचीनकाल से ही गहराई से जुड़ी रही हैं लेकिन तार्किक रूप से यह सत्य नहीं है क्योंकि-पद्ध इन दोनो समुदायों में झगड़ों के साथ-साथ मेल-जोल का इतिहास भी है । ii) दोनों समुदायों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता रहा है । iii) बदलती परिस्थितियाँ भी मानसिकता पर असर डालती है, इस सत्य को इतिहासकार नज़र अंदाज कर देते हैं । 2) अगे्रंजों द्वारा 1909 का अधिनियम फूट का कारण - अंग्रेजों द्वारा मार्ले-मिण्टो सुधार के नाम पर पृथक निर्वाचन अधिनियम ने सांप्रादायिक राजनीति के बीच बो दिये व दोनों समुदायों में फूट डाली ।3) पृथक चुनाव के परिणाम - पृथक चुनाव क्षेत्रों ने मुसलमानों को क्षेत्र विशेष से अपना पृथक प्रतिनिधि चुनने की स्वायत्तता प्रदान की । इस व्यवस्था में राजनीतिज्ञों को लालच रहता है कि वह समुदाय विशेष की भावनाओं का लाभ उठाकर समुदाय विशेष को फायदा पहुँचाए । इस कारण चुनावी राजनीति व धार्मिक राजनीति के घाल-मेल ने सांप्रादायिक माहौल को मजबूती प्रदान की । तथापि यह मानना पूर्णतः सही नहीं है कि बँटवारा पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की प्रत्यक्ष देन है। हाँ यह जरूर कहा जा सकता है कि इनकी अप्रत्यक्ष भूमिका अवश्य है। 1920-30 के दशक में कट्टरवाद का प्रसार - इस दशक में आर्य समाज व मुस्लिम लीग जैसी कट्टरपंथी ताकतों ने दोनों समुदायों के एक-दूसरे के प्रति भड़काया । मुसलमान आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन, गौ-रक्षा आंदोलन जैसे मुद्धों पर आक्रोशित हुए तो हिंदु 1923 के बाद प्रचार व संगठन के विस्तार से उत्तेजित हुऐ । इन कारणों से देश के विभिन्न भागों में दंगे फैलते गए व दोनों समुदायों के बीच भेदभाव गहराते गए । भारत विभाजन प्रत्यक्षतः साप्रदायिकता के जहर का परिणाम था । सांप्रदायिकता के इस विष ने दोनों समुदायों के मध्य इतना वैमनस्य पैदा कर दिया जिसकी चरम परिणिति भारत का बंटवारा थी इसीलिये भारत-विभाजन को सांप्रादायिक राजनीति का आखिरी बिंदु कहा गया ।
1. इतिहास को बारीकी से समझााने में सहायक- सरकारी दस्तावेजों से हमें शासक वर्ग द्वारा प्रदŸा जानकारी ही प्राप्त होती है जबकि व्यक्तिगत स्मृतियाँ हमें समग्र जानकारी उपलब्ध कराती हैं। व्यक्तियों के अनुभव स्मृतियों को जानकर इतिहासकार घटना का सजीव वर्णन करने में सफल होते हैं। 2. साक्ष्यों की विश्वसनीयता की परख संभव- कई इतिहासकार मौखिक इतिहास को अविश्सनीय कहकर खारिज करते हैं। उनके अनुसार इस प्रकार की जानकारियाँ सटीक नहीं होती, ना ही घटनाक्रम ही सही होता हैं पर भारत विभाजन के संदर्भ में प्राप्त मौखिक इतिहास सत्य के ज्यादा नजदीक है जिसको पूर्णतः परख लिया गया है वह लोगों के अनगिनत तनावों व कठिनाईयों का सत्य वर्णन करता है। 3. उपेक्षित समूह के अनुभवों को महत्व- मौखिक इतिहास द्वारा समाज के उपेक्षित समूहों जैसे महिलाएँ, शरणार्थी, कमजोरों, विधवाओं, गरीबों आदि के अनुभवों को भी महत्व मिल जाता है, जो इतिहासकारों को विस्तृत साक्ष्य प्रदान करता हैं। 4. मौखिक इतिहासकार हमारे देश के इतिहास की टूटी कडि़यों को जोड़ने मे सहायक हैं जो पुराने लोग विवरण सुनाते है वे अपने संस्मरणों, विवरणों आदि द्वारा इतिहासकारों की अनेक कठिनाईयों और स्त्रोत संबंधी जानकारियों की समस्या हल करने में सहायक होते हैं।निष्कर्षतः विभाजन का समग्र वृतांत जानने के लिए बहुत तरह के स्त्रोतों का सावधानी पूर्वक इस्तेमाल आवश्यक है ताकि घटना के साथ-साथ उसे एक प्रक्रिया के रूप में जान सकें।
1. अंग्रेजो की ‘फूट डालो राज करो’ नीति सन् 1909 में लागू मार्ले-मिण्टो सुधार के नाम पर मुस्लिम लीग का गठन व मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की मंजूरी देकर हिंदू मुस्लिमों को एक दूसरे के विरूद्ध भड़काया, साथ ही घृणा के बीजों को भी बोया।2. कांग्रेस की समझौतावादी नीति-कांग्रेस ने सदा लीग के साथ समझौते की नीति को अपनाया, जिससे लीग को यह आशा हो गई कि पाकिस्तान की माँग पर अड़े रहने पर कांग्रेस झुक जाएगी।3. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवसः- 16 अगस्त को लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस घोषित किया परिणामतः पूरे देश में सांप्रादायिक दंगे भड़क उठे। रक्तपात को रोकने के लिए कांग्रेस ने बँटवारा मंजूर कर लिया। 4. संयुक्त प्रांत में कांग्रेस द्वारा लीग के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार- अंतरिम सरकार के गठन में कांगे्रस ने मुस्लिम लीग को शामिल नहीं किया। कांग्रेस के इस निर्णय से लीग में इस भावना का जन्म हुआ कि स्वतंत्रता के बाद भी कांग्रेस उनके हितों को पूरा नहीं करेगी और वह राजनीतिक सत्ता में दोयम दर्जे की पार्टी बनकर रह जायेगी। 5. लीग की असहयोग की नीति- अनेक अवसरों पर लीग ने कांग्रेस के निर्णयों को नकारा जिसके कारण 1946 ई. में बनी अंतरिम सरकार असफल रही। जिसने दोनों पार्टियों में इस भावना का संचार किया कि हिन्दू व मुस्लिम एक होकर शासन नहीं चला सकते।6. लार्ड माँउटबेटन को विभाजन के उद्धेश्य से भारत भेजा गया था। इसके अलावा नेहरू व जिन्ना की राजनैतिक महत्वकांक्षाओं ने भी विभाजन का समर्थन किया परिणामतः 15 अगस्त 1947 को भारत विभाजित हो गया।
A.
B.
C.
D.
A. केंद्र सरकार।
B. राज्य सरकार।
C. केंद्र और राज्य दोनों सरकारों।
D. संघ, राज्य और स्थानीय सरकारें।
समवर्ती सूची में दिए गए विषयों दोनों केन्द्र और राज्य सरकारों के लिए आम चिंता का विषय हैं।
A. के एम् मुंशी
B. महात्मा गांधी।
C. मोहम्मद अली जिन्ना।
D. डॉ राजेंद्र प्रसाद।
गांधीजी अम्बेडकर की कीमत जानता था, इसलिए वह कांग्रेस नेताओं से पूछा केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक कानून मंत्री के रूप में उन्हें नियुक्त करने के लिए।
A. 1949 जून।
B. 1949 जुलाई ।
C. 1949 अगस्त ।
D. 1949 दिसंबर ।
संविधान १९५०जनवरी, को प्रभाव में आया।
A. डॉ बी आर अम्बेडकर
B. जवाहर लाल नेहरू
C. महात्मा गांधी
D. सरदार पटेल
अम्बेडकर को भारतीय संविधान की आलेखन समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।
A. मोहम्मद अली जिन्ना।
B. लियाकत अली खान।
C. गफ्फार अली खान
D. आसफ अली।
मोहम्मद अली जिन्ना नव जन्मे देश की संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया था।
A. 1920 में
B. 1930 में
C. 1940 में
D. 1950 में
हिंदुस्तानी हिंदी और उर्दू का एक मिश्रण है। हिन्दी भारत की एक आधिकारिक भाषा है।
A. गोपालस्वामी आयंगर।
B. लालकृष्ण संथानम।
C. बी पोकर बहादुर।
D. सरदार वल्लभ भाई पटेल।
बहादुर की राय थी कि अल्पसंख्यक सब देशों में मौजूद थे।
A. बौद्ध धर्म में
B. ईसाई धर्म में
C. हिंदू धर्म में
D. इस्लाम में
स्वामी विवेकानंद एक हिंदू धार्मिक भिक्षु थे।
A. जवाहर लाल नेहरू ने
B. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने
C. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने
D. महात्मा गांधी ने
कैबिनेट मिशन प्लान ने १९४६ में पहली बार अंतरिम सरकार बनाने की पहल की
A. 26 जुलाई, 1945
B. 10 जुलाई, 1945
C. 26 जुलाई, 1946
D. 10 जुलाई, 1947
ब्रिटेन में नई लेबर पार्टी की सरकार 26 जुलाई, 1945 को गठन किया गया था।
A. 10 मई
B. 18 मई
C. 16 मई
D. 22 मई
एक संवैधानिक समस्या के समाधान के लिए योजना एक बयान के रूप में भगवान वेवल द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में पेश किया गया, 16 मई,1946 को ब्रिटिश कैबिनेट मिशन द्वारा जारी किए गए।
A. डॉ राजेंद्र प्रसाद।
B. डॉ बी.आर. अम्बेडकर
C. पंडित जवाहर लाल नेहरू।
D. सरदार वल्लभ भाई पटेल।
डॉ राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में, रचनात्मक पंक्तियों के साथ विचार विमर्श चलाने की कोशिश की
A. हंसा मेहता।
B. सरोजिनी नायडू।
C. श्रीमती जी दुर्गाबाई।
D. कमला नेहरू।
हंसा मेहता ने तर्क दिया कि महिलाओं के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय होना चाहिए ।
A. जवाहर लाल नेहरू ने
B. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने
C. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने
D. महात्मा गांधी ने
सरदार पटेल की राय है कि पृथक निर्वाचक मंडल ने एक समाज को दूसरे के खिलाफ कर दिया है और देश के दुखद विभाजन का नेतृत्व किया है।
A. समाजवादी
B. मुस्लिम लीग।
C. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस।
D. दलित वर्ग।
समाजवादिशुरू में शामिल होने को तैयार नहीं थे क्योंकि वे संविधान सभा को ब्रिटिश द्वारा निर्मित मानते थे
A. अनुच्छेद 28.
B. अनुच्छेद 29
C. अनुच्छेद 25
D. अनुच्छेद 20
अनुच्छेद २९'सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार' की चर्चा करते हैं
A. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार।
B. अल्पसंख्यकों के लिए अलग निर्वाचन देने का।
C. गरीबों की आर्थिक स्थिति का उत्थान।
D. आदिवासी अधिकारों का संरक्षण।
भारत के सभी नागरिकों, जो उम्र के 18 वर्ष और उससे अधिक हैं मतदान का अधिकार दिया जाता है।
A. डॉ राजेंदेरा प्रसाद।
B. डॉ B.R. अम्बेडकर
C. पंडित जवाहर लाल नेहरू।
D. सरदार वल्लभ भाई पटेल।
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारत के किसी भी अधिक डिवीजनों से इनकार करते हुए भारतीय संघ में शामिल होने के लिए रियासतों को राजी कर लिया।
A. चर्चिल।
B. एटली।
C. फ्रेंकलिन।
D. दिस्रेली सरकार के गठन के समय क्लीमेंट एटली ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे ।
सभी चुनौतियों का सामना करते हुए संविधान 24 नवम्बर,1949 को तैयार हो गया और 26 नवम्बर, 1950 को भारत का विश्वपटल पर एक गणतंत्र देश के रूप में उदय हुआ। हर वर्ष २६ जनवरी को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। नीति-निर्देशक तत्व को आयरलैंड के संविधान से लिया गया है।SOLUTION
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