A.
माध्यिका
B.
बहुलक
C.
माध्य
D.
मानक विचलन
एक श्रेणी में, जिस वस्तु की बारंबारता सबसे अधिक होती है, उसे श्रेणी का बहुलक कहा जाता है|
A.
माध्यिका
B.
बहुलक
C.
माध्य
D.
इनमें से कोई नहीं
माध्यिका उस रैंक का मान होती है, जो व्यवस्थित श्रेणियों को दो बराबर संख्याओं में विभाजित करती है|
A.
माध्य
B.
माध्यिका
C.
बहुलक
D.
उपर्युक्त सभी
इन सभी को केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप कहा जाता है क्योंकि ये केन्द्रीयता का आकलन करती हैं|
A.
मूल
माध्य वर्ग
विचलन
B. सीमा
C. औसत
D. सहसंबंध
मानक विचलन को वर्ग विचलन के माध्य के धनात्मल वर्गमूल से परिभाषित किया जा सकता है| यह आंकड़ों के गणितीय माध्य से लिया गया है|
A.
कार्ल मार्क्स
B.
कार्ल पियर्सन
C.
हिर्षमैन
D. इसा बोमेन
‘मानक विचलन’ शब्द सर्वप्रथम कार्ल पियर्सन की पुस्तक में वर्ष 1894 में प्रयोग किया गया था|
A.
पूर्ण सहसंबंध
B.
अपूर्ण सहसंबंध
C.
ऋणात्मक सहसंबंध
D.
इनमें से कोई नहीं
पूर्ण सहसंबंध तब होता है, जब एक चर का मान दूसरे चर के मान को उसी अनुपात में परिवर्तित कर देता है|
A.
उनके माध्य मान से वस्तुओं का विचलन
B.
उनके माध्यिका मान से वस्तुओं का विचलन
C.
उनके बहुलक से वस्तुओं का विचलन
D.
उपर्युक्त सभी
मानक विचलन यह निरूपित करता है कि माध्य से कितनी भिन्नता और परिवर्तन है| एक निम्न मानक विचलन दर्शाता है कि आकडे माध्य के बहुत ही निकट हैं|
A.
सामान्य
वितरण वक्र
B. दंड आरेख
C. आवृत्ति बहुभुज
D. ओजाइव
माध्य, माध्यिका और बहुलक लगभग समान हैं क्योंकि असामान्य वितरण सममित होता है|
A.
बिखरे हुए आरेख
B.
मध्य विचलन
C.
तारा आरेख
D.
वृत्त आरेख
यह केवल धनात्मक और ऋणात्मक के संबंध में दो चरों के मध्य सहसंबंध को प्रदर्शित करता है|
A.
सभी मानों पर आधारित
B.
निश्चित माप
C.
बीजीय मान
D.
उपर्युक्त सभी
मानक विचलन सभी मानों पर आधारित और निश्चित माप के साथ एक बीजीय मान है|
A.
व्यापक विस्तार
B.
प्रकीर्णन की
C.
निम्न परिवर्तनशीलता
D.
उच्च परिवर्तनशीलता
मानक विचलन, व्यापक रूप से प्रयोग होने वाला एक मापदंड है प्रकीर्णन की माप करता है कि आंकड़े कितने 'फैले हुए' हैं। विचलन की गणना 1 से की जाती है|
A.
B.
प्रकीर्णन होगा।
C.
माध्य
होगा
सम
संख्याए
होने पर दो
मध्यस्थ
कोटि मानों
का औसत
माध्यिका
होगा।
B.
माध्य
और बहुलक C.
बहुलक
D.
माध्यिका
माध्य
पर विषम
मानों का कोई
प्रभाव नहीं
पड़ता है
क्योंकि यह
श्रृंखला का
औसत होता है|
समय
श्रृंखला
आंकड़े B.
कोई
भी आंकड़े C.
औद्योगिक
आंकड़े D.
विवरणात्मक
आंकड़े
समय
के साथ
बदलावों की
तुलना के लिए
रेखाचित्र
उपयुक्त
होते हैं|
B.
रेखाओं
C.
वृत्त
D.
भिन्न
रंगों
एक
सममानरेखा
मानचित्र एक
रेखा के
द्वारा समान
मानों के
स्थानों को
आपस में
जोड़ते हैं|
औसत
B.
प्रतिशत
C.
सटीक
मान D.
अनुपात
एक
बिंदुकित
मानचित्र
में, बिंदुओं
की संख्या की
गणना करके
सटीक आंकड़े
प्राप्त
किये जा सकते
हैं|
बिंदुकित
मानचित्र B.
वर्णमात्री
मानचित्र C.
सममान
रेखा
मानचित्र D.
प्रवाह
संचित्र
प्रवाह
मानचित्र, एक
प्रकार का
मानचित्र
जिस पर
यातायात
मार्गों को
रेखा द्वारा
तथा उन मार्गों
पर चलने वाले
यात्रियों
तथा वाहनों
की आवृत्ति
अथवा ढोये
जाने वाले
भार को
रेखाओं की
आनुपातिक मोटाई
द्वारा
प्रदर्शित
किया जाता
है। इसे यातायात
प्रवाह
मानचित्र (traffic flow
map) भी
कहा जाता है।
केवल
एक चर B.
केवल
दो चर C.
दो
से अधिक चर D.
कोई
चर नहीं
बहुरेखाचित्र
दो से अधिक
भिन्नताओं
को प्रदर्शित
करता है|
रेखाचित्र
B.
दंड
आरेख C.
वृत्त
आरेख D.
प्रवाह
संचित्र
रेखाचित्र
में समय के
साथ बदलाव
प्रदर्शित किये
जाते हैं|
B.
बिंदुकित
मानचित्र C.
सममान
मानचित्र D.
वर्गमूल
मानचित्र
जनसंख्या
के वितरण को
प्रदर्शित
करने के लिए बिंदुकित
मानचित्र का
उपयोग किया
जाता है| ये मानचित्र
दृश्य रूप
में
जनसंख्या के
वितरण को
प्रदर्शित
करते हैं|
वर्णमापी विधि में विभिन्न रंगों को अलग-अलग एक तत्व की तीव्रता या घनत्व को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं। वर्णमापी विधि को छायांकन पद्धति के रूप में भी जाना जाता है। वर्णमापी विधि एक सरल विधि है जो घनत्व या अनुपात दिखाने के लिए उपयोगी है। यह मूल्यों में कठोर और स्थानिक परिवर्तन को अचानक दिखाने का सबसे अच्छा तरीका है। समान मूल्यों के स्थानों में शामिल होने वाली रेखा को आइसोप्लेथ के रूप में जाना जाता है। समवायु दाब रेखा, समताप रेखा, समवर्षा रेखा आदि सममान रेखाचित्र के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। प्रक्षेप ज्ञात मूल्य दो स्थानों के बीच कुछ निश्चित मूल्यों के स्थान खोजने की प्रक्रिया है। आकृति बराबर ऊंचाई के स्थानों को जोड़ने वाली रेखाऍ हैं। आकृति का एक उदाहरण सममान रेखा मानचित्र है। बिंदुकिंत रेखाचित्र मानचित्रण घटना के लिए फायदेमंद हैं कि यह एक स्थान पर सुचारू रूप से बदलते है जैसे बिंदुकिंत रेखाचित्र आखो से देखी गयी घटना से मेल खाते हैं। समवर्षा रेखा समान वर्षा के स्थानों में शामिल होने वाली रेखाऍ हैं। एक तत्व की ढलान सममान रेखा के बीच की दूरी से माना जाता है। जबी सममान रेखा विस्तृत होती हैं इसके अलावा वे कोमल ढलान को भी दर्शाता है, जबकि जब वे एक दूसरे के करीब होती हैं, वे खड़ी ढलान को दर्शाते है। वर्णमापी मानचित्र उस मामले में प्रयोग किया जाता है जब आंकड़े प्रति इकाई क्षेत्र, औसत आंकड़े या प्रतिशत मान में दिए गए हो। उदाहरण के लिए यह आबादी का घनत्व, खेती की भूमि का अनुपात आदि का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रयोग किये जाते है। इसका मानव भूगोल में अधिकतम उपयोग किया जाता है। प्रवाह चित्र महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों का निर्धारण करने में उपयोगी होते हैं और अभिसरण के केन्द्रों में नोड्स के रूप में जाने जाते है। ये नोड्स के प्रभाव के क्षेत्र का निर्धारण करने में भी सहायक होते हैं। सममान रेखा मानचित्र वितरण और भिन्नता दिखाने के लिए उपयुक्त हैं। यह प्रभावी ढंग से जलवायु तत्वों, ढाल और संक्रमणकालीन बेल्ट दिखा सकते हैं। सममान रेखा मानचित्र के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं; समताप रेखा, समवायु दाब रेखा, समवर्षा रेखा, आइसोहेल आदि। प्रशासनिक सीमाऍ इन नक्शों का पालन नहीं करती और तत्वों को अपने प्राकृतिक रूप में दिखाया जाता है। गैर-स्थानिक
आंकड़े अथवा
गुण न्यास B.
कृषि
भूमि आंकड़े C.
यातायात
नेटवर्क
आंकड़े D.
बिंदु
आंकड़े
मानचित्र
स्थानिक
आंकड़ों का
वर्णन करने
वाले आंकड़े
गैर-स्थानिक
आंकड़े अथवा
गुण न्यास
कहलाते हैं।
काल-श्रेणी
आंकड़ों को B.
विभिन्न
इकाइयों की आवृतियों
को C.
इकाइयों
के अंशो को D.
मानचित्रों
को
काल-श्रेणी
आंकड़ों को
रेखा ग्राफ
अथवा दंड आरेख
द्वारा
प्रदर्शित
किया जाता
है।
तीन
B.
दो
C.
पांच
D.
एक
डिफ़ॉल्ट
से एम
एस-एक्सेल
में तीन
वर्कशीट होती
हैं|
आवश्यकता
पड़ने पर और भी
वर्कशीट
जोड़ी जा सकती
हैं|
15,384
पंक्तियाँ B.
16,384 पंक्तियाँ
C.
16,383 पंक्तियाँ
D.
16,453 पंक्तियाँ
डिफ़ॉल्ट
से एक्सेल
में 16,384 पंक्तियाँ
होती हैं|
की-बोर्ड
B.
सी
पी यू C.
हार्ड
डिस्क D.
मॉनिटर
ग्राफिक
डिस्प्ले
सिस्टम या
मॉनिटर सभी
कंप्यूटर
में एक
प्रमुख
दृश्य संचार
माध्यम के रोप
में कार्य
करते हैं|
वर्कबुक
B.
स्प्रेड
शीट C.
मेमोरी
D.
सी
पी यू
एम
एस-एक्सेल को
इलेक्ट्रॉनिक
स्प्रेड शीट
भी कहा जाता
है| इसका
उपयोग
भण्डारण के
लिए किया
जाता है|
बिंदु
से B.
रेखाचित्र
से C.
बहुभुज
से D.
चतुभुज
से
भौगोलिक
विशेषताओं;
जैसे स्कूल,
शहर, दीवार, गांव
आदि के
स्थानीय
लक्षणों को
बिंदु
आंकड़ों से
निरूपित
किया जाता है|
रेखाचित्र
B.
कई दंड
आरेख C.
वृत्त
आरेख D.
ओजाइव
भिन्न
आंकड़ों के
भाग को
प्रदर्शित
करने के लिए
वृत्त आरेख
उपयुक्त
माना जाता है|
अंतिम
क्रिया को दोहरानेका
की-बोर्ड
शॉर्टकट Ctrl+Y
है|
कुछ
महत्वपूर्ण
आउटपुट डिवाइसेस
मॉनीटर,
प्रिंटर,
स्पीकर और
प्लॉटर हैं|
एमएस-एक्सेल
एक डायलाग
बॉक्स
खोलेगा कि
आपको ये
बदलाव सेव
करने हैं या
नहीं|
फंक्शन
पूर्व-निर्धारित
फ़ॉर्मूले
होते हैं|एक
एक्सेल
वर्कशीट में
फ़ॉर्मूले ‘=’ के
चिन्ह से
आरम्भ होते
हैं|
खाली सेल
गिनी नहीं
जाती है,
लेकिन शून्य
मान वाली सेल गिनी
जाती है|
भौगोलिक
आंकड़े
एनालॉग (वायव
फोटोग्राफ
और मानचित्र)
और डिजिटल
फॉर्म (स्कैन
चित्रों) में
उपलब्ध हैं|
एमएस
एक्सेल में
एक चार्ट
आंकड़ों को
चित्रमय रूप
में
प्रदर्शित
करने का
उपयुक्त
तरीका होता
है|
आयताकार
रूप में पंक्ति
और स्तम्भ का
प्रतिच्छेदन
सेल कहलाता
है|
फील्ड सूचनाधार(डाटाबेस)
में एक
स्तम्भ होता
है, जिसमें
केवल एक
प्रकार के
आंकड़े लिखे
होते हैं|
सूचनाधार
(डाटाबेस) के
लिए
प्रयुक्त
सामान्य
शब्दवालियां
फील्ड और
रिकॉर्ड हैं|
सूचनाधार
आंकड़ों का एक
संगठित
संग्रह होता
है|
कंप्यूटर
एक सामान्य
प्रयोग की एक
मशीन होता है
जो आपके दिए
गए
निर्देशों
के आधार पर
डाटा प्रोसेसिंग
करता है| गरीबी
रेखा के मापन
के मापदंड की
पहचान करना B.
गरीबी
की स्थिति का
वर्णन करना C.
गरीबी
के
निहितार्थों
का परीक्षण
करना D.
संस्तुतियों
को लागू करना
किसी
भी
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
का उद्देश्य
समस्या की
पहचान करना,
आंकड़े एकत्र
करना और आंकड़ों
का संकलन
करना तथा
समस्या के
निपटान के लिए
उपाय सुझाना
हैं|
संस्तुतियों
को लागू करना सरकार
का दायित्व
है|
अच्छी
जनसंचार
कुशलता B.
लोगों
के साथ
तालमेल C.
विषय
की समझ D.
उपर्युक्त
सभी
अच्छी
जनसंचार
कुशलता,
लोगों के साथ
तालमेल और
विषय की समझ आदि
कुछ गुण हैं,
जो एक
साक्षात्कार-कर्ता
में होने
चाहिए|
भू-कर
संबंधी
मानचित्र से B.
थिमैटिक
मानचित्र से C.
स्थलाकृतिक
मानचित्र से D.
मौसम
मानचित्र से
भू-आकृतियों
के लक्षण,
अपवाह,
वनस्पति आदि
विशेषताओं
को
स्थलाकृतिक
मानचित्र से
दर्शाया जा
सकता है| ये
मानचित्र
सभी भौतिक और
सांस्कृतिक
विशेषता लिए
होते हैं|
प्राथमिक
सर्वेक्षण B.
द्वितीयक
सर्वेक्षण C.
अप्रत्यक्ष
सर्वेक्षण D.
साधारण
सर्वेक्षण
जैसा
कि नाम से
स्पष्ट है
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
प्राथमिक
रूप से
सूचानाओं के
एकत्रण और संग्रहण
पर आधारित है|
प्रत्यक्ष
सर्वेक्षण,
परस्पर
बातचीत और
स्थानीय
लोगों के साथ
वार्ता आदि
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
का भाग हैं|
थिमैटिक
मानचित्र से B.
उपग्रह
चित्रों से C.
भू-कर
संबंधी
मानचित्रों
से D.
राजनीतिक
मानचित्रों
से
भू-कर
संबंधी
मानचित्र
क्षेत्रों
की सीमाएं और
खसरा
संख्याएँ
प्रदर्शित
करते हैं| ये
मानचित्र
गाँव के
पटवारी या
प्रशासन से
प्राप्त किये
जा सकते हैं|
कठोरता
पर B.
अवधि
पर C.
प्रभावित
क्षेत्र के
आकार पर D.
उपर्युक्त
सभी
सूखे
के प्रभाव
उसकी कठोरता,
अवधि और
प्रभावित
क्षेत्र के
आकार पर
निर्भर करते
हैं|
समस्या
को वर्णित
करना B.
अध्ययन
के
उद्देश्यों
का निर्धारण C.
परिसीमन
करना D.
उपर्युक्त
सभी
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
की
प्रक्रिया
में प्रथम
अवस्था
समस्या का
वर्णन करना
है| फिर उद्देश्यों
का निर्धारण
और फिर
परिसीमन
किया जाता है|
मानसून
की देरी से B.
दीर्घकालीन
और नमी की
तीव्र कमी की
स्थिति से C.
वर्षा
वितरण में
परिवर्तन से D.
दो
बाढ़ों के बीच
के समय से
दीर्घकालीन
और नमी की
तीव्र कमी की
स्थिति सूखा
कहलाती है|
इससे कृषि,
पशु, औद्योगिक
ढांचों और
मानव पर
प्रतिकूल
प्रभाव पड़ते
हैं|
व्यक्तिगत
साक्षात्कार
B.
सरकारी
रिपोर्ट C.
अवलोकन
D.
मापन
सरकारी
रिपोर्ट
पहले से ही
एकत्रित की
गयी होती हैं,
जो क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
के लिए
संदर्भ की
भाँति ली जा
सकती हैं| इस
प्रकार, ये
सूचनाओं का
द्वितीयक
स्रोत होती
हैं|
B.
रिपोर्ट
लिखना C.
सूचकों
की संगणना D.
सर्वेक्षण
डिजाइन
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
की अंतिम
अवस्था रिपोर्ट
लिखना है|
एकत्रित
आंकड़ों और
सूचनाओं को रिपोर्ट
के रूप में
लिखा जाता है|
इसे
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
का निष्कर्ष
कहा जाता है|
विस्तृत
और वर्णित B.
संक्षिप्त
और सामान्य C.
व्यक्तिगत
D.
सारणी
के रूप में
प्रश्नावली
में आपके
प्रश्नों का
चयन ऐसा होना
चाहिए कि
प्रश्न
संक्षिप्त
और सामान्य
हों, और केवल
उचित प्रश्न
ही हों|
प्रश्न बहुत
बड़े और
विस्तृत
नहीं होने
चाहिए|
अध्ययन
में प्रयोग
किये गए लेख B.
सर्वेक्षण
किये जाने
वाले
क्षेत्र C.
पूछे
जाने वाले
प्रश्न D.
प्रयोग
किये जाने
वाले
द्वितीयक
आंकड़े
एक
प्रश्नावली
में
पूर्व-नियोजित
प्रश्न शामिल
होते हैं, जो उत्तरकर्ता से
सूचनाएं
एकत्र करने
के लिए होते
हैं|
ब्रह्मपुत्र
घाटी का B.
निचले
गंगा के
मैदानों का C.
कर्नाटक
के बेलगांव जिले
का D.
केरल
के तटीय
जिलों का
बेलगांव
जिला
कर्नाटक के अत्यधिक
सूखा
प्रभावित
क्षेत्रों
में से एक
है| यह
वृष्टिछाया
क्षेत्र में अवस्थित है, जिससे यहाँ कम वर्षा होती है| जबकि ब्रह्मपुत्र घाटी, धारवाड़ जिला और गंगा के निचले
मैदान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं|
प्राथमिक अवस्था
B.
परिचालन
अवस्था C.
रिपोर्टिंग अवस्था D.
क्रियान्वयन अवस्था
क्षेत्रीय सर्वेक्षण की प्रक्रिया केवल उत्पादन तक ही सीमित है|
प्राप्त परिणामों पर विचार और क्रियान्वयन सरकारी अधिकारियों और संबंधित संस्थानों द्वारा किया जाता है|
सभी
वस्तु B.
चयनित
वस्तु C.
एकल
वस्तु D.
अनियमित
विश्लेषण
प्रतिदर्श
सर्वेक्षण,
सर्वेक्षण
की विशिष्ट
विधि हैं
जिसमें
संपूर्ण में
से चुने हुए
कुछ अंश
(प्रतिदर्श)
का सर्वेक्षण
किया जाता है
और उसके आधार
पर निकाले
गये
निष्कर्ष को
सम्पूर्ण पर
लागू किया जाता
है।
क्षेत्रीय
अवलोकन B.
किताबें
और अन्य
प्रकाशन
सामग्री C.
लोगों
का
साक्षात्कार
करके D.
उपर्युक्त
सभी
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
के लिए ये सभी
साधन प्रमुख
है| इन साधनों
से उस
क्षेत्र के
बारे में हमें
विस्तृत
जानकारी
प्राप्त
होती है|
किताबें और
अन्य
प्रकाशन
सामग्री
द्वितीयक
स्रोत हैं, जो
सर्वेक्षणकर्ता
की सहायता के
लिए होती हैं|
क्षेत्रीय सर्वेक्षण सुनियोजित प्रक्रिया के साथ आरम्भ किये जाते हैं|
जिसमें सबसे
पहले समस्या
और उसके
उद्देश्यों
को समझाया
जाता है| फिर
विषय समझाया
जाता है और
फिर
विश्लेषण,
परामर्ष और
प्रयोज्यता
को परखा जाता
है|
लोगों
को जागरूक
करने के लिए B.
सूक्ष्म
स्तर की
जानकारी
प्राप्त
करने के लिए C.
घनिष्ठ
संबंध
स्थापित
करने के लिए D.
रोजगार
प्राप्त
करने के लिए
व्यक्तिगत
अवलोकन और
साक्षात्कार
के द्वारा
वास्तविक
स्थिति पर
लोगों के
विचार जानने
के लिए
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
कराया जाता
है| एक सर्वेक्षणकर्ता
द्वितीयक
स्रोतों से
प्राप्त
सूचनाओं पर
निर्भर नहीं
रह सकता है|
यहाँ तक कि
उसे
मिनट-मिनट की
रिपोर्ट भी प्रेषित
करनी होती है|
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
के
प्रयोजनों
को संदर्भित
भौगोलिक
क्षेत्र
अन्वेषण की
समय सारणी,अध्ययन
के प्रसंगों के
रूप में
सर्वेक्षण के
प्रयोजन को
सीमांकित किया
जाना चाहिए|
ये
अन्वेषक के
लिए तथ्यों
और
स्थितियों
की समझ को
आसान बनाते
हैं| B.
रिमोट
सेंसिंग
तकनीक C.
सूचना
संसाधन
तंत्र D.
डिवाइस
भौगोलिक
सूचना तंत्र कंप्यूटर सहायक मानचित्र कला
और सूचनाधारित
प्रबंधन तंत्र का सम्मिश्रण
है|
B.
भौगोलिक
सूचना तंत्र C.
वैश्विक
सूचना तंत्र D.
जियो-
कोओर्डीनेटेड
सूचना तंत्र
जीआईएस
का अर्थ है-
भौगोलिक
सूचना तंत्र| यह एक
कंप्यूटर में स्तरीय मानचित्र-सूचनाएँ होती
हैं|
B.
अधिचित्रण
विश्लेषण C.
स्थानिक
सूचना तकनीक D.
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
स्थानिक
सूचना
तकनीकी
रिमोट
सेंसिंग,
जीपीएस,
जीआईएस और
मानचित्रकारी
का उपयोग है|
B.
आंकड़ों
के रूपांतरण
से C.
आंकिक
भू-भाग मॉडल D.
अधिचित्रण
विश्लेषण
अधिचित्रण
विश्लेषण में मानचित्रों
के बहुगुणी
स्तरों का
समन्वय शामिल
है| इसमें
मानचित्र
नया संस्तर
बनाने के लिए
अधिचित्रित
होते हैं|
B.
स्थानिक
आंकड़े C.
ज्यामितीय
आंकड़े D.
सहलग्न
आंकड़े
स्थानिक
आंकड़ों में
गुण न्यास
होता है,
जिन्हें
विशिष्ट
स्थान
प्राप्त
होता है|
मानचित्र पर
इन रेयान को
विशिष्ट
स्थान
प्राप्त है,
इसलिए इन
आंकड़ों का
उपयोग
भौगोलिक
सूचना तंत्र
में किया जा
सकता है|
बफर
विश्लेषण B.
परिपथ जाल
विश्लेषण C.
अधिचित्रण
विश्लेषण D.
आंकिक
भू-भाग मॉडल
बफर
प्रचालन भौगोलिक सूचना तंत्र में
महत्वपूर्ण स्थानिक विश्लेषण
की एक क्रिया है| यह
सुविधाओं और
सेवाओं से
लाभान्वित
अथवा वंचित
क्षेत्रों
की स्थिति
निर्धारण
में उपयोगी है|
सदिश
आंकड़ा
प्रारूप B.
ग्रिड
आंकड़ा
प्रारूप C.
फिज़ी
आंकड़ा
प्रारूप D.
परिपथ
जाल आंकड़ा
प्रारूप
सदिश
आंकड़ा
प्रारूप में
विशिष्ट
बिंदुओं के
मध्य रेखाओं
के सेट को
भौगोलिक
विशेषता के
रूप में
निरूपित
किया जाता है|
सदिश
आंकड़ा
प्रारूप B.
रैस्टर
आंकड़ा
प्रारूप C.
ग्रिड
आंकड़ा
प्रारूप D.
फिज़ी
आंकड़ा
प्रारूप
रैस्टर
आंकड़े प्रारूप
में, भौगोलिक
विशेषताओं
को
वर्गों के
ग्रिड का
प्रारूप में
निरूपित किया
जाता है, जिन्हें
तकनीकी रूप
से पिक्सल्स
कहा जाता है|
संबंधित
सारणीगत
आंकड़ों के
साथ स्थानिक
आंकड़ों को भौगोलिक
सूचना तंत्र
की रीढ़ की
हड्डी माना
जाता है|स्थानिक
आंकड़े
वास्तविक
आउटपुट
बनाने के लिए
प्रयुक्त
किए जाते हैं|
स्थानिक
आंकड़ों का
सेट तब ही
लिंक हो सकता
है, जब वे एक ही
भौगोलिक क्षेत्र
से संबंधित
हों|
कैमरे
की
विकृतियों
की वजह से
वायव फोटोग्राफ
में
त्रुटीपूर्ण
पैमाना
प्रदर्शित
होता है|
सॉफ्टवेयर
मॉड्यूल का
उपयोग
आंकड़ा-निवेश,
संपादन,
विश्लेषण,
जोड़-तोड़,
प्रदर्शन और
लेआउट बनाने
में किया
जाता है|
भौगोलिक
सूचना तंत्र
के अनुरूप
कुछ स्टोरेज तंत्र
इस प्रकार
हैं: फ्लॉपी
डिस्क,
कॉम्पैक्ट
डिस्क, पेन
ड्राइव, डिजिटल
ऑडियो टेप और
हार्ड डिस्क
आदि|
राज्यों
के महिला और
पुरुष
साक्षरता
प्रतिशत को
प्रदर्शित
करती हुई एक
सूची स्थानिक
आंकड़ों के सेट
का आदर्श उदाहरण
है| मानचित्र
पर इन
राज्यों की
एक निश्चित
अवस्थिति
होती है| इस
प्रकार, इनके
आंकड़े भौगोलिक
सूचना तंत्र
में उपयोग
किये जा सकते हैं|
सदिश
आंकड़ा
फॉर्मेट
बिंदु, रेखा
और क्षेत्र की
विशेषताओं
को
प्रदर्शित
कर सकता है|
इसमें बिंदुओं
का उपयोग
किया जाता है,
जिनके इन
विशेषताओं
को
प्रदर्शित
करने के लिए अपने
निर्देशांक
होते हैं| भौगोलिक सूचना तंत्र में स्थानिक आंकड़ों को प्रदर्शित करने के दो फॉर्मेट होते हैं| ये हैं: चित्रारेखापुँज (रैस्टर) फॉर्मेट और सदिश (वैक्टर) फॉर्मेट|
भौगोलिक
सूचना तंत्र
में स्थानिक
आंकड़ों के अत्यधिक
सामान्य
स्रोतस्थलाकृतिक
शीट और थिमैटिक
मानचित्र
हैं|
भौगोलिक
सूचना तंत्र
के दो
सॉफ्टवेयर आर्क
व्यू और
जियो-मीडिया
हैं|
स्कैनर
इलेक्ट्रॉनिक
यंत्र होते
हैं, जो एनालॉग
आंकड़ों को
डिजिटल-सेल
आधारित
चित्रों में
परिवर्तित
करते हैं|
भौगोलिक
सूचना तंत्र
के
महत्वपूर्ण
घटक हार्डवेयर,
सॉफ्टवेयर,
आंकड़े और लोग
हैं| स्थलाकृतिक मानचित्र उस क्षेत्र की भौतिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझने में मदद करते हैं| स्थलाकृतिक मानचित्र अधिक महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि:
यह
आंकड़ों के
सेट का औसत
होता है| इसे संख्याओं
के योग से और
योग को सभी
अंकों की
संख्या के
मान से भाग
देने पर
प्राप्त
किया जा सकता
है| निम्न
फ़ॉर्मूले से अंकगणितीय
औसत की गणना
की जा सकती है:
व्यक्तिगत
अवलोकन का
अर्थ उस
व्यक्ति को
परखें, लोगों
से बात करें
और जो आपने
आपने सुना या देखा
है, उसे लिखें|
यह भूगोल के
लिए
महत्वपूर्ण
माना जाता है|
सूचना की
गुणवत्ता
पर्यवेक्षक
के
प्रशिक्षण
और
पृष्ठभूमि
पर निर्भर
करती है| एक
सतर्क और
सचेत पर्यवेक्षक
प्रासंगिक
विवरण के लिए
सदैव सचेत
रहता है| क्षेत्रीय सर्वेक्षण की प्रक्रिया के भिन्न चरण इस प्रकार हैं:
(i) उस
क्षेत्र के
निवासियों
से झूठे
वायदे ना करें| (ii) यदि
लोग अपने
कार्यों में
व्यस्त हैं,
तब आप उनसे
प्रश्न ना
पूछें| (iii) उस
क्षेत्र के
निवासियों
से उचित समझ
का विकास
करें| (iv) आपके
प्रश्न
संक्षिप्त
और साधारण
होने चाहिए| (v) प्राप्त
उत्तर को
तुरंत लिख लें| (vi) उन्हें
अपने
सर्वेक्षण
के
उद्देश्यों
से अवगत कराएँ|
एक
प्रश्नावली
विधि में,
प्रश्नों की
एक श्रंखला
पहले से ही
तैयार कर ली
जाती है|
प्रश्नों का
क्रम अध्ययन
के
उद्देश्यों
को ध्यान में
रखकर करना
चाहिए| ये
प्रश्न पहले
एक वर्ग के लोगों
क्ले सामने
रखने चाहिए| प्रश्नों
का क्रम
साक्षात्कार
देने वाले व्यक्ति
के दृष्टिकोण
के अनुरूप
बनाना
चाहिए|यहाँ
एक अच्छी प्रश्नावली
की कुछ
विशेषताएँ दी
गयी हैं:
i.
प्रश्नावली
का उद्देश्य
साक्षात्कार
देने वाले के
सामने
बिल्कुल साफ़
होना चाहिए| ii.
प्रश्न
बहुत अधिक
नहीं होने
चाहिए| iii.
प्रश्न
संक्षिप्त,
उपयुक्त और
स्पष्ट होने
चाहिए| iv.
कोई
भी प्रश्न व्यक्तिगत
नहीं होना
चाहिए| v.
प्रश्न
ऐसे होने
चाहिए कि वे
समझ में आयें
और उनका
उत्तर देने
में आसानी हो|
vi.
प्रश्नों
का दोहराव
नहीं होना
चाहिए|
इस
प्रक्रिया
में उस
क्षेत्र के
अध्ययन की आवश्यक
सूचनाओं का एकत्रण,
संग्रहण, संकलन
और
प्रस्तुतीकरण
शामिल है|
क्षेत्रीय सर्वेक्षण
के उपकरणों
में अवलोकन,
ढांचा तैयार
करना, उपाय और
व्यक्तिगत
साक्षात्कार
शामिल हैं| क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
आवश्यक होता
है क्योंकि:SOLUTION
A.
माध्य
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
बिन्दुओं
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
वर्णमात्री
मानचित्र SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
राज्य
कच्चे
लोहे का
उत्पादन
(प्रतिशत में)
मध्य
प्रदेश
23.44
गोआ
21.82
कर्नाटक
20.95
बिहार
16.98
ओडिशा
16.30
आंध्र
प्रदेश
0.45
महाराष्ट्र
0.04
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
आंकड़े
भरना और
सारणी बनाना SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
समस्या जिस पर आप सर्वेक्षण करना चाहते हैंSOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
सॉफ्टवेयर
SOLUTION
A.
जियो-रिफरेन्स
सूचना तंत्रSOLUTION
A.
फिज़ी
मिलान SOLUTION
A.
फिज़ी
मिलान से SOLUTION
गेंहूँ
का उत्पादन
(टन में)
राज्य
वर्ष 2001 में
वर्ष 2011 में
पंजाब
23012
30212
उत्तर
प्रदेश
25320
25532
बिहार
11253
13665
मध्य
प्रदेश
15542
22544
हरियाणा
11225
13326
A.
गैर –
स्थानिक
आंकड़े SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
i. राहत सुविधा का स्वरुप (आकृति, प्रमुख शीर्षों की ऊंचाई)
ii. धार्मिक स्थान जैसे मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा|
iii. सड़क और रेलवे की संयोजकता और उनका प्रतिरूप|
iv. कृषि योग्य भूमि, नहरें, नदियाँ और तालाब|
v. विद्युत खम्भे, डाकघर, विद्यालय और बैंक|
ये सभी तथ्य विभिन्न प्रतीक चिन्हों से प्रदर्शित किये जाते हैं| इस प्रकार, यह अन्वेषक को सर्वेक्षण किये जाने वाले क्षेत्र के बारे में सक्षम बनाता है|
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
i. समस्या को परिभाषित करना
ii. उद्देश्य
iii. प्रयोजन
iv. विधियाँ और तकनीकें
v. संकलन एवं परिकलन
vi. मानचित्रकारी अनुप्रयोग
vii. प्रस्तुतीकरण
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
1.भूगोल
एक
क्षेत्रीय
विज्ञान
होता है| इसकी
विषय-वस्तु
क्षेत्रीय
कार्यों पर
आधारित होती
है| यह हमारे
सामने
स्थानिक
वितरण और
स्थानीय
स्तर पर
संबंध की स्पष्ट
छवि
प्रस्तुत
करता है|
2.प्राप्त
आंकड़े अधिक
विश्वसनीय
होते हैं क्योंकि
शोधकर्ता
व्यक्तिगत
रूप से लोगों
से मिलता है,
अवलोकन करता
है और
स्थानीय
लोगों का साक्षात्कार करता
है| वे उनसे
बात करते हैं,
परिदृश्य को
समझते हैं और
अंत में
एकत्र की गई
सूचनाओं का
संकलन करते
हैं|
3.
क्षेत्रीय
सर्वेक्षण
मुख्यतः
प्राथमिक सर्वेक्षण
होते हैं|
इनसे
प्राप्त
सूचनाएँ माध्यमिक
स्तर के लिए
एक आधार
प्रदान करती
हैं| इनसे
प्राप्त
सूचनाएँ
किसी अन्य
शोधकर्ता या
किसी एजेंसी
द्वारा
संदर्भित की
जा सकती हैं|
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