ओपन-एंडेड विधि वह विधि है जिसमे पहले अंतराल की जो निचली सीमा और पिछले अंतराल की ऊपरी सीमा का वितरण नहीं दिया जाता है जैसे,
|
अंक |
छात्रों की संख्या |
|
70 से नीचे |
21 |
|
80 -90 |
2 |
|
90 से ऊपर |
5 |
आवृत्ति वितरण करते समय ध्यान में रखे जाने वाले मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-
1. कक्षाओं की संख्या के लिए
2. प्रत्येक वर्ग का आकार
3. कक्षा सीमा का निर्धारण
4. प्रत्येक और हर वर्ग की आवृत्ति प्राप्त करने के लिए
|
प्राथमिक आंकड़े |
द्वितीयक आंकड़े |
|
प्रत्यक्ष रूप से क्षेत्रो द्वारा एकत्र |
विभिन्न एजेंसियों से एकत्र |
|
महंगी और समय की बर्बादी |
अपेक्षाकृत सस्ती |
|
यह कच्चे माल के रूप में है। |
यह रेडीमेड उत्पादों के आकार में आम तौर पर होते है। |
आकड़ो: आकड़ो को संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता हैं कि वास्तविक दुनिया से माप का प्रतिनिधित्व करते हैं। संख्यात्मक जानकारी को डेटा कहा जाता है।
जानकारी: जानकारी को या तो एक सार्थक प्रोत्साहन के रूप में परिभाषित किया गया है जो कि आगे के प्रश्नों के रूप में सामने आ सकती हैं।
आकड़ो के प्रक्षेपण से मतलब आकड़ो का सारणीकरण है। कच्चे आंकड़े को प्रोसेसिंग उनकी सारणीकरण और एन वर्गों में वर्गीकरण की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए निम्न तालिका में दिए गए आंकड़ों को समझने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है उनकी कार्रवाई कैसे होती हैं।
|
47 2 26 22 67 65 43 80 56 |
2 9 15 53 50 63 74 64 83 |
39 10 92 62 18 59 64 31 59 |
64 89 84 73 51 75 12 17 90 |
22 96 84 57 36 70 35 31 |
46 74 90 37 58 56 42 41 |
28 06 32 44 28 58 68 71 |
पहले कदम के लिए इसकी मात्रा को कम करने के क्रम में आकड़ो का समूहीकरण करते है और समझने के लिए आसान बनाते हैं।
द्वितीयक आकड़ो के स्रोत हैं:
(i) सरकार प्रकाशन।
(ii) अर्ध/अर्ध सरकारी प्रकाशन।
(iii) के अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन।
(iv) निजी प्रकाशन।
(v) समाचार पत्र और पत्रिकाऍ।
(vi) इलेक्ट्रॉनिक।
सूचकांक संख्या चर परिवर्तन को दिखाने के लिए बनाया गया एक सांख्यिकीय माप है या समय, भौगोलिक स्थान या अन्य विशेषताओं के संबंध में संबंधित चर का एक समूह है। सूचकांक की गणना के विभिन्न तरीके हैं। सरल कुल विधि सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है। इसे निम्न सूत्र का उपयोग कर प्राप्त किया जाता है:
Σq1 x 100
Σq0
Σq1 =
चालू वर्ष उत्पादन का कुल
Σq0 =
आधार वर्ष उत्पादन का कुल
सूचकांक संख्या चर परिवर्तन को दिखाने के लिए बनाया गया एक सांख्यिकीय माप है या समय, भौगोलिक स्थान या अन्य विशेषताओं के संबंध में संबंधित चर का एक समूह है। सूचकांक की गणना के विभिन्न तरीके हैं। सरल कुल विधि सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है। इसे निम्न सूत्र का उपयोग कर प्राप्त किया जाता है:
Σq1 x 100
Σq0
Σq1 =
चालू वर्ष उत्पादन का कुल
Σq0 =
आधार वर्ष उत्पादन का कुल
आकड़ो के संग्रह को साधारण रूप में परिभाषित किया गया है कि जानकारी को विभिन्न स्रोतों से इकट्ठा किया जाता है। यह किसी भी सांख्यिकीय सर्वेक्षण के बहुत सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इसमें संख्यात्मक संदर्भ में जानकारी शामिल है। यह जांच की प्रक्रिया के दौरान जांचकर्ताओं को एकत्र किया है। आकड़ो के संग्रह के विभिन्न तरीके हैं जैसे प्रत्यक्ष व्यक्तिगत जांच, अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत जांच, संवाददाताओं से जानकारी, प्रश्नावली भेज कर, प्रगणक द्वारा भऱी प्रश्नावली और टेलीफोन पर साक्षात्कार रूप में।
विस्तार चर की छोटी से छोटी और सबसे बड़े मूल्य के बीच का अंतर है। हम दोनों वर्ग सीमाओ का निर्धारण अलग- अलग करते है:- उच्च वर्ग की सीमा निम्न वर्ग की सीमा में वर्ग अंतराल के जोड़ने से निर्धारित होता है। जैसे, 10-15 के ऊपरी वर्ग की सीमा 15, 10 + 5 है जहां 10 निम्न वर्ग की सीमा है और 5 वर्ग अंतराल है। निम्न वर्ग की सीमा आपके पास अवलोकन के प्रकार पर निर्भर करती है। जैसे, किसी भी विषय में अंको की निम्न वर्ग सीमा 0 है यह 0 से कम नहीं हो सकती है। इस मामले में, 0 निचली सीमा है।
विभिन्न मंत्रालय और भारत सरकार के विभागों, राज्य सरकारों के प्रकाशन और जिलों के बुलेटिन द्वितीयक सूचनाओं के महत्वपूर्ण साधन हैं इनके अंतर्गत भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित भारत की जनगणना, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्टें, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की मौसम रिपोर्ट, राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित सांख्यिकी सारांश और विभिन्न आयोगों द्वारा प्रकाशित आवधिक रिपोर्टों को सम्मिलित किया जाता है।
इस विधि में शोधकर्ता उत्तर देने वाले से प्रत्यक्ष संवाद और बातचीत करता है। साक्षात्कारकर्ता लोगों से साक्षात्कार करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतता है -
(i) साक्षात्कार द्वारा सूचना इकठ्ठा करने वाली विषयों की एक परिशुद्ध सूची तैयार कर लेनी चाहिए।
(ii) साक्षात्कार लेने वाले को सर्वेक्षण के उद्देश्यों के बारे में स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।
(iii) कोई भी संवदेनशील प्रश्न पूछने से पहले प्रयोज्य को गोपनीयता का विश्वास दिलाना चाहिए।
(iv) वातावरण अनुकूल होना चाहिए जिससे उत्तर देने वाला बिना झिझक के तथ्यों को स्पष्ट कर सके।
(v) प्रश्नों की भाषा साधारण और शिष्ट होनी चाहिए जिससे उत्तर देने वाला सहज ही प्रश्नों से सम्बंधित सूचना देने के लिए सहमत हो जाए।
(vi) ऐसे प्रश्नों को पूछने से बचना चाहिए जिससे उत्तर देने वालों के आत्मसम्मान और धार्मिक भावनाओं को ठेस ने पहुंचे।
(vii) साक्षात्कार के अंत में उत्तर देने वालों से पूछना चाहिए कि वह जो सूचना दे चुके हैं, इसके अतिरिक्त और क्या जानकारी दे सकते हैं।
(viii) अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने के लिए धन्यवाद और कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए।
तथ्यों एवं आकार को जानने के लिए आंकड़ों को एकत्र करना जितना आवश्यक है उतना ही महत्वपूर्ण आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण है। आज सांख्यिकी विधियों का विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण और निष्कर्षों को निकालने में उपयोग किया जाता है। जनसँख्या वन अथवा यातायात या संचार नेटवर्क न केवल स्थान और समय के अनुसार बल्कि आंकड़े के उपयोग से आसानी से समझाए जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि चरों के बीच संबंधों की व्याख्या करने में गुणात्मक विश्लेषण से मात्रात्मक विश्लेषण में स्थानांतरण है। इसलिए विश्लेषणात्मक साधन और तकनीकें, विषय को और अधिक तार्किक बनाने और परिशुद्ध निष्कर्ष निकालने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
A.
कोयला जलाने के कारण
B.
मलजल निपटान के कारण
C.
अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट के निपटान के कारण
D.
घरेलु गन्दगी के कारण
अनुचित मानव गतिविधियां, अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट के निपटान, कीटनाशकों और उर्वरकों का प्रयोग भूमि प्रदूषण के मुख्य कारण होते हैं।
A.
वायु प्रदूषण
B.
जल प्रदूषण
C. भूमि प्रदूषण
D.
ध्वनि प्रदूषण
वायु प्रदूषण के कारण अम्लीय वर्षा भी हो सकती है| वायु में फैले अम्लीय प्रदूषक कण इसके लिए उत्तरदायी होते हैं|
A.
भोपाल में
B.
नागपुर में
C.
गोआ में
D.
बेंगलुरु में
राष्ट्रीय पर्यावरण प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान नागपुर में स्थित है| इसकी स्थापना 1958 में की गयी थी|
A.
मीथेन
छोड़ते हैं
अनुपचारित
अपशिष्ट
पदार्थ
धीरे-धीरे कई
ज़हरीले गैस
छोड़ते हैं,
जिसमें
मीथेन भी
शामिल है|
राष्ट्रीय
पर्यावरण
प्रौद्योगिकी
संस्थान B.
राष्ट्रीय
वैमानिकी और
अन्तरिक्ष
प्रबंधन संस्थान C.
भारतीय
दूर-संवेदन
संस्थान D.
संयुक्त
राष्ट्र
भारतीय
दूर-संवेदन
संस्थान ने
व्यर्थ भूमि
को दूर-संवेदन
तकनीक की
सहायता से
सीमांकित
तथा वर्गीकृत
किया है| ये इस
प्रकार के हो
सकते हैं –
प्राकृतिक
खड्ड,
मरुस्थलीय
या तटीय
रेतीली भूमि
तथा हिमानी
क्षेत्र|
उनमें
रोग-प्रतिरोधक
क्षमता अधिक
होती है
‘गंदी
बस्तियों’
में जो निवास
करते हैं, वे
ग्रामीण
क्षेत्रों
से पलायन
करके रोज़गार
की तलाश में
आते हैं| ये
व्यवस्थित
क्षेत्रों
में घरों के
उच्च मूल्य
और ऊंचे
किराये के
कारण नहीं रह
पाते हैं|
42%. B.
52%. C.
68%. D.
72%.
2011
की जनगणना के
अनुसार भारत
की कुल
जनसंख्या का 68% भाग
ग्रामीण
क्षेत्रों
में निवास
करता है| अधिकतर
ग्रामीण
क्षेत्रों
में लोग अभी
भी प्राथमिक
आर्थिक
क्रियाकालाप
करते हैं|
कृषि B.
अपशिष्ट
पदार्थों का
निपटान C.
प्राकृतिक
आपदाएं D.
सांस्कृतिक
कार्यक्रम
पर्यावरण
की यह
दुर्दशा
मानवीय
गतिविधियों के
द्वारा
उत्पन्न
किये गए
अपशिष्ट पदार्थों
का गलत तरीके
से निपटान है|
नाइट्रेट
की B.
सोडियम
की C.
फॉस्फोरस
की D.
पोटैशियम
की
रासायनिक
उर्वरकों के
उपयोग से
धरातलीय जल में
नाइट्रेट की
बढ़ोत्तरी हो
जाती है| ये
भौम-जल को भी
प्रदूषित
करती है|
प्राकृतिक
ऊर्वरक से B.
जलवायु
में बदलाव से C.
रासायनिक
ऊर्वरक से D.
प्राकृतिक
आपदाओं से
मिट्टी
में मौजूद
सूक्ष्म-जीव
रासायनिक
ऊर्वरकों,
कीटनाशकों,
इत्यादि से
नष्ट हो जाते
हैं| ये रसायन
भौम-जल को भी
प्रदूषित
करते हैं|
B.
इलेक्ट्रॉनिक
उद्योग C.
वस्त्र
एवं रसायन
उद्योग D.
ऑटोमोबाइल
उद्योग
जल
प्रदूषित
करने वाले
प्रमुख
उद्योग हैं
वस्त्र,
रसायन, चमड़ा,
कागज़ उद्योग,
आदि|
भारत
में ओडिशा और
बिहार ऐसे दो
राज्य हैं,
जहाँ निर्धनता
दर 40
प्रतिशत से
अधिक है|
अपकर्ष
और
प्रतिकर्ष
कारक प्रवास
को बढ़ावा देते
हैं|
वायु
प्रदूषण अम्ल
वर्षा का
कारण होता है|
यमुना
नदी भारत की सबसे
प्रदूषित
नदी है|
प्रदूषण
के दो प्रमुख
स्रोत इस
प्रकार हैं: 1. प्राकृतिक
स्रोत 2. मानवीय
स्रोत
प्रदूषकों
को किसी
पदार्थ की
ऊर्जा के रूप
में परिभाषित
किया जा सकता
है| ये मौजूदा
पारिस्थितिकी
तंत्र के प्राकृतिक
संतुलन के
क्षरण तथा
प्रदूषण का
कारण बनते
हैं|
भारत
में 70% कल
प्रदूषित
है|
यमुना
के जल के
प्रदूषण के
लिए
जिम्मेदार
दो शहर इस
प्रकार हैं: 1. मथुरा 2. आगरा
प्रदूषण
की पहचान
करने के दो
मापदंड
निम्नवत हैं: 1. मानवीय
गतिविधियों
से निकलने
वाले
अपशिष्ट पदार्थ| 2. प्रत्यक्ष
और
अप्रत्यक्ष
रूप से
अपशिष्ट के निपटान
से होने वाली
क्षति|
एशिया
की सबसे बड़ी
मलिन बस्ती
ग्रेटर
मुंबई की
धारावी है|
यहाँ एक
मिलियन से भी
अधिक जनसंख्या
निवास करती
है|
जल
प्रदूषण
विभिन्न
जलजनित
बीमारियों;
जैसे आंत के
कीड़े, दस्त और
हिपेटाइटिस
का स्रोत
होता है|
जलसंभरणप्रबंधनकार्यक्रम के
मुख्य
उद्देश्य भूमि, जल और
वनस्पति के मध्य
लिंक
स्थापित
करना है|
प्राकृतिक
संसाधन
प्रबंधन और
समुदायों के
सहयोग से
लोगों की आजीविका
को बेहतर
करना है|
शहरी
अपशिष्ट
निपटान के दो
स्रोत इस प्रकार
हैं:
वायु
प्रदूषण के
कुछ प्रदूषक सल्फर,
नाइट्रोजन
के ऑक्साइड,
कार्बन
मोनोऑक्साइड,
हाइड्रो-कार्बन,
अमोनिया और
सीसा (लेड) हैं|
जल
प्रदूषण के
तीन प्रमुख
प्राकृतिक
स्रोत पौधों
और जंतुओं का अपरदन,
क्षय और
अपघटन हैं|
पर्यावरण
में पाए जाने
वाले
प्रदूषण को
पर्यावरणीय
प्रदूषण की
संज्ञा दी
जाती है|
जिससे असुविधा,
अस्थिरता,
विकार और
भौतिक तंत्र
तथा जीव-जंतुओं
पर हानिकारक
प्रभाव पड़ते
हैं| पर्यावरणीय
प्रदूषण में
मानवीय
गतिविधियों
के अपशिष्ट
पदार्थों से
निकलने वाले
ख़राब पदार्थ
या ऊर्जा
शामिल होती
है|
रासायनिक
उर्वरकों और
कीटनाशकों
का अत्यधिक
उपयोग मृदा
के क्षरण का
कारण बनता है|
इससे मृदा
में मौजूद
प्राकृतिक,
भौतिक,
रासायनिक और जैविक
गुण समाप्त
हो जाते हैं| 1. रासायनिक
उर्वरक मृदा
के सूक्ष्म
कणों, जो मृदा
में
नाइट्रोजन
को ले जाने का
कार्य करते
हैं, को नष्ट
कर देते हैं| 2. ये
भूमि की
बंजरता को
बढ़ाते हैं| 3. ये
मृदा में
मौजूद जल
ग्रहण करने
की क्षमता को
कम कर देते
हैं| 4. रासायनिक
उर्वरक मानव
के लिए एक
धीमी गति के जहर
की भांति
व्यवहार
करते हैं| 5. कार्बनिक
फास्फेट के
घटकों का
उपयोग मृदा
में एक लम्बी अवधि
से मौजूद
कीड़ों को
मारने के लिए
किया जाता है|
विश्व
स्वास्थ्य
संगठन के
अनुसार, वायु प्रदूषण
से तात्पर्य
गैस, तरल और
ठोस अणुओं के
वातावरण में
संक्रमण से
है, जो मानवीय
स्वास्थ्य
के लिए
हानिकारक
होते हैं|
वायु
प्रदूषण की
कोई सीमायें
नहीं होती
हैं, यह
भूमंडलीय घटना
होती है| वायु
प्रदूषण के
स्रोत: हम
वायु
प्रदूषण के
स्रोतों को
निम्न दो
वर्गों में
विभाजित कर
सकते हैं:
i.
मानवजनित
स्रोत
ii.
प्राकृतिकस्रोत मानवजनित
स्रोत
i.
स्थायी
स्रोत जैसे
धुंआ,
विद्युत
संयंत्र, विनिर्माणिक
सुविधाएँ
आदि| पेंट,
बालों का
स्प्रे,
वार्निश,
एरोसोल
स्प्रे का
धुंआ और अन्य
विलयक|
ii.
मोबाइल
स्रोत जैसे
मोटर वाहन,
वायु
क्राफ्ट आदि|
iii.
दहन-
विद्युत
आधारित
संयंत्र| तेल
परिशोधन,
विद्युत संयंत्र
कार्य और
औद्योगिक
गतिविधि|
iv.
कृषि
और वन
प्रबंधन में जले
हुए कणों का
सीमित उपयोग
किया जाता है|
v.
समुद्री
जहाज जैसे
कंटेनर जहाज,
क्रूज पोत और इनसे
संबंधित
बंदरगाह| प्राकृतिक
स्रोत
i.
सामान्यतः
विशाल
क्षेत्रों
में कम या न के
बराबर
वनस्पति
होती है|
ii.
जानवरों
या मवेशियों
द्वारा
चबाया जाने
वाले भोजन के
पाचन से
मीथेन गैस
उत्सर्जित
होती है|
iii.
भू-पर्पटी
पर रेडियोधर्मी
विकिरण से
निकलने वाली
गैस|
iv.
जंगलों
में लगने
वाली आग से
निकलने वाला
धुंआ और
कार्बन
मोनोऑक्साइड|
ii.
5. ज्वालामुखी
विस्फोट, जो
सल्फर,
क्लोरीन और
रख के अणुओं
से ऊत्पन्न
होता है|
प्रदूषण:
हमारे
पर्यावरण
में उपस्थित
हानिकारक
पदार्थ
प्रदूषण
कहलाते हैं|
प्रदूषण हमारे
वायु, भूमि और
जल की भौतिक,
रासायनिक और
जैविक विशेषताओं
का अवांछनीय
बदलाव होता
है, जो मानव पर प्रतिकूल
प्रभाव
डालते हैं|
प्रदूषण कई
प्रकार का होता
है| इसका
वर्गीकरण
प्रदूषकों के
स्थानांतरित
होने के
माध्यम के
आधार पर किया
जाता है| ये इस
प्रकार हैं:
वायु
प्रदूषण, जल प्रदूषण,
मृदा
प्रदूषण और
ध्वनि
प्रदूषण| प्रदूषक:
प्रदूषक को
किसी पदार्थ
की ऊर्जा के रूप
में
परिभाषित
किया जा सकता
है| ये
पारिस्थितिकी
तंत्र के
प्राकृतिक
संतुलन में
प्रदूषण
उत्पन्न
करते हैं|
प्रदूषक
गैसीय, तरल या
ठोस अवस्था
में होसकते
हैं| ‘यदि कोई
पदार्थ
प्रजातियों
के विकास के
बदलाव के
द्वारा वतावारण
पर प्रतिकूल
प्रभाव
डालता है, तो
उसे सामान्यतः
प्रदूषक की
संज्ञा दी जा
सकती है|’
प्राकृतिक
वातावरण के
तीन घटक इस
प्रकार हैं:
i.
भू
ii.
जलवायु
iii.
वनस्पतियाँ सांस्कृतिक
वातावरण के
तीन घटक इस
प्रकार हैं::
i.
धर्म
ii.
शिक्षा
iii.
भाषा
भू-प्रदूषण
के भिन्न
स्रोत इस
प्रकार हैं:
i.
अनुचित
मानवीय
गतिविधियाँ
ii.
अनुपचारित
औद्यगिक
कचरे का
निपटान iii.
कीटनाशकों
और उर्वरकों
का उपयोग प्रदूषण
के भिन्न
स्रोतों के
उदाहरण इस
प्रकार हैं:
i.
मानव
एवं जंतु
अपशिष्ट,
वायरस तथा
बैक्टीरिया
ii.
कीटनाशकों
एवं
उर्वरकों के
अवशेषों की
क्षारीयता iii.
फ्लोराइड
व
रेडियो-एक्टिव
पदार्थ
एक
बड़े पैमाने
पर लोगों का
गाँवों से
शहरों की ओर
प्रवास
निम्न
कारणों से हो
रहा है:
i.
शहरी
क्षेत्रों
में
श्रमिकों की
अधिक मांग|
ii.
ग्रामीण
क्षेत्रों
में रोजगार
और वेतनमानके
निम्न अवसर| iii.
ग्रामीण
एवं शहरी क्षेत्रों
के मध्य
विकास का असंतुलित
स्वरुप|
जल
प्रदूषण को नियंत्रित
करने के कुछ
प्रमुख उपाय
इस प्रकार
हैं:
i.
कचरा
एकत्रण
केंद्र: सभी
प्रकार का
कचरा एकत्रण
केन्द्रों
में फेंका
जाना चाहिए|
कचरे को जल
केन्द्रों
में या उनके
पास नहीं
फेंकना चाहिए|
ii.
प्रसाधनों
का निर्माण:
स्थानीय
लोगों की आवश्यकताओं
के आधार पर
नगरों या गांवों
में
प्रसाधनों
(टॉयलेट्स) का
निर्माण कराया
जाना चाहिए| iii.
औद्योगिक
कूड़ा-करकट का
निपटान:
उद्योगों से
निकलने वाले
कूड़ा-करकट को
जल संसाधनों
के पास बहाने
पर
प्रतिबन्ध
लगाना चाहिए| iv.
कस्बों
और नगरों के
अपशिष्ट का
निपटान:
कस्बों और
नगरों में
निकलने वाले
अपशिष्ट को बिना
उपयोग किए जल
संसाधनों के
निकट निपटान
नहीं करना
चाहिए| v.
सख्त
कानून और
उनका
अनुपालन: जल
प्रदूषण के
नियंत्रण के
लिए सख्त
कानूनों को
प्रेषित
किया जाना
चाहिए तथा
उनका
अनुपालन भी
किया जाना
चाहिए|
नगरीय
अपशिष्ट
निपटान से
संबंधित
प्रमुख समस्याएं
इस प्रकार
हैं:
i.
सीवर
तथा
मानव-अपशिष्ट
निपटान के
अन्य उपायों
की कमी|
ii.
कचरा
एकत्रण
सेवाओं की
अपर्याप्तता
जल प्रदूषण को
बढ़ावा देती
है क्योंकि
बहुत अधिक
मात्रा में
बिना एकत्र
किया हुआ
कचरा नदियों
में बह जाता
है| iii.
नगरीय
केन्द्रों
के पास
औद्योगिक
इकाइयों की
अधिकता से
पर्यावरणीय
समस्याएं
उत्पन्न होने
लगती हैं|
औद्योगिक
कूड़ा-करकट को
नदियों में
फेंकने से
गंभीर
स्वास्थ्य
समस्याएं उत्पन्न
होती हैं| iv.
अनुपचारित
अपशिष्ट
वातावरण में
धीरे-धीरे अप्रिय
गैसें; जैसे
मीथेन
उत्सर्जित
करने लगते
हैं| मीथेन एक
ग्रीन हाउस
गैस है, जो
कार्बन डाइऑक्साइड
की अपेक्षा 34
गुना अधिक
भूमंडलीय ऊष्मीयकरण
को बढ़ावा
देती है|
v.
ठोस
अपशिष्ट
स्वास्थ्य
संबंधी
खतरों को बढ़ावा
देते हैं|
जैसे; मखियों
और चूहों के
पनपने से
टायफाइड,
डिप्थीरिया,
मलेरिया,
कालरा आदि बीमारियाँ
हो सकती हैं|
भू-प्रदूषण
की रोकथाम और
नियंत्रण के
उपाय निम्नवत
हैं: 1.
किसानों
को फसलों में
रसायनों के
उपयोग का उचित
प्रशिक्षण
दिया जाना
चाहिए|
उदाहरण: DDT का
उपयोग पूरी
तरह से प्रतिबंधित
कर देना
चाहिए, जैसा
की विश्व के कई
अन्य
राष्ट्रों
में किया जा
चुका है| 2.
नगर
और औद्योगिक
अपशिष्टों
का सिंचाई
जैसे उद्देश्य
से
पुनर्नवीनीकरण
किया जाना
चाहिए| 3.
खराब
सब्जियां, फल
पत्तियां और
मानव-अपशिष्ट
को उपयुक्त
तकनीक का
इस्तेमाल
करके उपयोगी
खाद में
परिवर्तित
किया जा सकता
है| 4.
झुग्गीवासियों
को ‘सुलभ
शौचालयों’ को
सुविधा उपलब्ध
कराई जानी चाहिए| 5.
प्लास्टिक
को आसानी से
अपघटित नहीं
किया जा सकता
है तथा इसके उपयोगों
को
जल्द-से-जल्द
बंद कर देना
चाहिए|
प्लास्टिक
के थैलों का
उपयोग तत्काल
ही
प्रतिबंधित
कर देना
चाहिए| बारंबारता
बहुभुज B.
बारंबारता
वक्र C.
ओजाइव D.
आइसोटाइप
ओजाइव का अर्थ है-
आंकड़ों के दिए गए सेट में एक संचयी आवृत्ति वक्र| ओजाइव संचयी आवृत्ति पर निर्भर करता है|
वर्ग
आवृत्ति B.
वर्ग
सीमा C.
वर्ग
अंतराल D.
वर्गीकरण
किसी
वर्ग में
बार-बार आने
वाली
वस्तुओं की
संख्या वर्ग
आवृत्ति से
प्रदर्शित
की जाती है|
आंकड़ों
का
प्रस्तुतीकरण
B.
आंकड़ों
का वर्गीकरण C.
आंकड़ों
का चयन D.
आंकड़ों
की
श्रेणीबद्ध
करना
सांख्यिकीय
अध्ययन का
दूसरा कदम
एकत्रित आँकड़ों
का वर्गीकरण
और सारणीकरण
है। वर्गीकरण,
आंकड़ों की
भिन्न
समूहों या
वर्गों में
व्यवस्थित
करने की
प्रक्रिया
है|
B.
उच्च
सीमा C.
अंतराल
D.
निम्न
सीमा
यदि
एक वर्ग में
पांच
विद्यार्थी
हैं और अर्थशास्त्र
में उनके
प्राप्तांक 45
हैं| तब हम कह
सकते हैं कि
इस मान की
बारंबारता
पांच है|
मानों
की B.
संख्याओं
की C.
वर्गों
की D.
वस्तुओं
की
सतत
श्रृंखला
में हम
विभिन्न
वर्गों की
आवृत्ति
दर्शाते हैं|
वर्ग अंतराल
के अनुसार
आंकड़े
व्यक्त या
प्रस्तुत
किये जाते
हैं|
ऊर्ध्वाधर
रेखाओं B.
क्षैतिज
रेखाओं C.
समान्तर
रेखाओं D.
जटिल
रेखाओं
टैली
बार का उपयोग
ऊर्ध्वाधर
रेखाओं के
रूप में किया
जाता है| यदि
उस मान की
आवृत्ति
पांच बार है,
तब चार
रेखाओं पर एक
तिरछी रेखा
खींची जाती
है|
असंतत
श्रृंखला
में
B.
समय
श्रृंखला
में C.
सतत
श्रृंखला
में D.
स्थिति
श्रृंखला
में
वर्गों
और समूहों
में वस्तुओं
को एक सतत
श्रृंखला
में
व्यवस्थित
किया जाता है|
उनके मानों की
वास्तविक
माप ज्ञात
नहीं की जा
सकती है|
B.
सीमा
C.
अंतराल
D.
औसत
सबसे
बड़ी वस्तु और
सबसे छोटी
वस्तु के
मध्य अंतर को
सीमा कहा
जाता है|
वर्ग
आकार B.
वर्ग
रोध C.
वर्ग
अंतराल D.
वर्ग
सीमा
किसी
वर्ग का सबसे
निम्न मान
निम्न सीमा
होती है और
सबसे उच्च
मान को उच्च
सीमा कहा
जाता है|
गुणात्मक
भूगोल B.
मानचित्रकारी
C.
जी
आई एस D.
भूगोल
की
मात्रात्मक
विधियाँ
आधुनिक
भूगोल की
लगभग
प्रत्येक
शाखा के अध्ययन
में आंकड़ों
और उनकी
विधियों का
समावेश हुआ
है। इसे
भूगोल में
मात्रात्मक
विश्लेषण कहते
हैं
आंकड़ों
के प्रक्रमण
के B.
आंकड़ों
के संग्रहण
के C.
आंकड़ों
के विश्लेषण
के D.
इनमें
से कोई नहीं
भिन्न
श्रेणियों
में आंकड़ों
का वर्गीकरण
आंकड़ों का
प्रक्रमण
कहलाता है|
मानचित्र
B.
आरेख
C.
आंकड़े
D.
विवरण
मानचित्र
किसी बड़े
भूभाग को
छोटे रूप में
प्रस्तुत
करते हैं
जिससे एक नजर
में भौगोलिक
जानकारी और
उनके
अन्तर्सम्बन्धों
की जानकारी
मिल सके।
व्यक्तिगत
रूप एकत्रित
आंकडे B.
किताबें
C.
सरकारी
प्रकाशन D.
अंतर्राष्ट्रीय
प्रकाशन
जो
आंकड़े प्रथम
बार
व्यक्तिगत
रूप से अथवा
व्यक्तियों
के समूह
संस्था/संगठन
द्वारा एकत्रित
किए जाते हैं,
आंकड़ों
के प्राथमिक
स्रोत
कहलाते हैं।
सांख्यिकी
माप B.
संदर्भ
संख्या C.
मानचित्र
संख्या D.
मापक
सूचकांक
चर अथवा एक
सांख्यिकीय
माप है जिसे चर
अथवा समय
भौगोलिक
स्थिति या
दूसरी
विशेषताओं
के संदर्भ
में संबंधित
चरों के
संबंधित समूह
में
परिवर्तन को
दर्शाने के
लिए
अभिकल्पित
किया जाता
है।
सरकारी
प्रकाशन B.
अर्द्ध-सरकारी
प्रकाशन C.
अंतर्राष्ट्रीय
प्रकाशन
समाचार पत्र
और पत्रिकाएं
D.
उपर्युक्त
सभी
द्वितीयक
आंकड़ों के
आम स्रोतों
जनगणना, सर्वेक्षण,
संगठनात्मक
रिकॉर्ड और
गुणात्मक
तरीके या गुणात्मक
अनुसंधान के
माध्यम से
एकत्र आंकड़ों
में शामिल
हैं| आंकड़ों
के द्वितीयक
स्रोत
प्राथमिक
स्रोतों की
तुलना में
अत्यधिक
विश्वसनीय
और उत्तरदायी
होते हैं|
आंकड़ों
को सारणीगत
करना B.
आंकड़ों
का विवरण C.
सूचनाओं
का संग्रहण D.
आंकड़ों
का उपयोग
आंकड़ों
के प्रक्रमण
का अर्थ है-
आंकड़ों का
वर्गीकरण,
जिसमें
आंकड़ों के
सारणीयन की
आवश्यकता
होती है|
B.
आंकड़े
C.
संख्या
D.
अक्षर
आंकड़े
एक
महत्वपूर्ण
सूचना होते
हैं| जो सांख्यिकी
में
प्रदर्शित
किये जा सकते
हैं|
संचयी
आवृत्ति में B.
कमतर विधि
में C.
अधिकतर
विधि में D.
साधारण
आवृत्ति में
कमतर
विधि में, हम
श्रेणियों
की उच्च सीमा
से शुरू करते
हैं और
आवृत्ति को
जोड़ते जाते
हैं। जब इन
आवृत्तियों
को अंकित
किया जाता है, तो
हमें एक
उभरता हुआ
वक्र
प्राप्त
होता है|
B.
औसत
की गणना के
लिए C.
माध्यिका
की गणना के
लिए D.
इनमें
से कोई नहीं
सूचकांक
की गणना
निम्न के
द्वारा की
जाती है: सूत्र
इस प्रकार से
है:
एक
फुट नोट एक
बहुत
महत्वपूर्ण
सूचना होती
है क्योंकि
यह सूचना के
विश्वसनीय
होने और न होने
को
प्रदर्शित
करता है|
प्रेषित प्रश्नावली विधि प्राथमिक आकड़ो को इकट्ठा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। प्राथमिक आंकड़ों को इकट्ठा करने में प्रयोग किये जाने वाले सभी तरीके महंगे हैं। समानता के अनुसार विभिन्न वर्गों या उपवर्गों में समूह द्वारा आकड़ो को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया आकड़ो का वर्गीकरण कहा जाता है। वर्ग को एक चर के अधिकतम और न्यूनतम मूल्य के बीच अंतर की गणना के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। एक वर्ग के उच्चतम और सबसे कम मूल्य के बीच अंतर को वर्ग चौड़ाई या वर्ग अंतराल कहा जाता है। एक वर्ग के सबसे अधिक मूल्य को उच्च वर्ग सीमा कहा जाता है और वर्ग के निम्नतम मूल्य निम्न वर्ग सीमा कहा जाता है। विचरण गुणांक मानक विचलन के माध्यम को माध्य की प्रतिशत रूप में अभिव्यक्त करता है इसका निर्धारण निम्नलिखित सूत्रों द्वारा होता है – CV = मानक विचलन/ माध्य × 100 प्रकीर्णन से तात्पर्य केंद्रीय प्रवृत्ति के माप से, इकाइयों के विखराव से लगाया जाता है। यह माप औसत मूल्य से किसी इकाई अथवा संख्यात्मक मान की विषमता या विखराव की प्रवृत्ति का मापन करता है। इस प्रकार प्रकीर्णन केंद्रीय मान से विभिन्न मूल्यों के बिखराव अथवा विषमता की मात्रा है। सहसंबंध आधारभूत रूप से दो या दो से अधिक चरों के मध्य साहचर्य का माप है। विचलनों के वर्ग के औसत के वर्गमूल को मानक विचलन कहते हैं। प्रकीर्णन निम्नलिखित दो उद्देश्यों की पूर्ति करता है - (i) इससे हमें वितरण या श्रेणी के संघटन की प्रकृति का ज्ञान होता है। (ii) इसकी सहायता से दिए हुए वितरण की तुलना स्थिरता अथवा समरूपता के आधार पर हो जाती है।
गुणात्मक आकड़े वे आंकड़े हैं जो संख्या के मामले में मापे नहीं जा सकते है जैसे- खुफिया, ईमानदारी, सच्चाई आदि।
इसका प्रयोग दो या दो से अधिक श्रृंखला तुलना करने के लिए; असमान माध्य होने या माप की विभिन्न इकाइयों को मापने में किया जाता है। बहु सहसंबंध तीन या अधिक चरो के बीच संबंधों को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, चावल उत्पादन, वर्षा और प्रयोग किये गए उर्वरक की राशि के बीच संबंध।
सहसंबंध दो चर के बीच के सम्बन्ध की प्रकृति और अनुरूपता को दर्शाता है।
प्रकीर्णन मापन की निम्नलिखित विधियाँ हैं - 1. विस्तार 2. चतुर्थक विचलन 3. माध्य विचलन 4. मानक विचलन तथा विचरण गुणांक 5. लॉरेंज वक्र R=L- S R= 100-40 =60 विस्तार =60 1. यह एक श्रृंखला या वितरण की रचना की प्रकृति को देता है 2. यह देखते हुए वितरण, स्थिरता या एकरूपता की दृष्टि से तुलना में मदद करता है। प्रत्यक्ष विधि के माध्यम से मतलब की गणना के लिए सूत्र है: सहसंबंध की गहनता की मात्रा गणितीय दृष्टि से अधिकतम 1 तक होती है। इस मात्रा में सहसंबंध की दिशा का पहलू जोड़ने पर इसका विस्तार -1 से शून्य की ओर होते हुए +1 तक होता है। इसका मान किसी भी परिस्थिति में एक से अधिक नहीं हो सकता है। सहसंबंध पूरा 1 होने पर (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) पूर्ण सहसंबंध कहलाता है। इस प्रकार गहनतम सहसंबंध के दी विपरीत सिरों के ठीक मध्य में शून्य (0) सह सम्बन्ध होता है, जिस बिंदु पर चरों के मध्य सहसंबंध का अभाव अथवा सहसंबंध अनुपस्थित होता है। प्रकीर्णन के माप के रूप में मानक विचलन सबसे अधिक प्रचलित माप है। इसे विचलनों के वर्ग के औसत के वर्गमूल के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसकी गणना हमेशा माध्य के परिप्रेक्ष्य में की जाती है। मानक विचलन प्रकीर्णन का सर्वाधिक स्थिर माप है जिसका अन्य सांख्यिकीय गणनाओं में उपयोग किया जाता है। मानक विचलन ज्ञात करने के लिए किसी श्रेणी के माध्य से प्रत्येक मूल्य के विचलन (x) का वर्ग (x2) किया जाता है। यहाँ यह तथ्य ध्यान देने योग्य है कि इस चरण के कारण विचलनों के सभी ऋणात्मक मान धनात्मक हो जाते हैं। माध्य: इसकी गणना मूल्यों के एक समूह को जोड़कर और प्राप्तांको की कुल संख्या से राशि को विभाजित कर जाती है। बहुलक: यह एक स्थानीय औसत है जो दिए गए आंकड़ों में सबसे अधिक बार होता है। अनुरूपता या सहचर्य की अधिकतम डिग्री गणितीय संदर्भ में एक (1) तक जाती है। सहसंबंध की दिशा का एक तत्व जोड़ने पर इसकी अधिकतम सीमा का विस्तार शून्य के माध्यम +। या -1 तक फैलता है यह एक से अधिक नहीं हो सकता है। 1 का सहसंबंध सही सहसंबंध के रूप में जाना जाता है (चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक)। अलग-अलग दो बिंदुओं के बीच सही स्थित एक बिंदु (0) का पारस्परिक संबंध शून्य या कोई संबंध नही या चर के बीच कोई संबंध का अभाव नही होता है। हम निम्न चरणों से बहुलक निर्धारित कर सकते हैं क्रम संख्या प्रकार आरोही क्रम अवरोही क्रम 1. 1 18 2. 2 12 3. 5 10 4. 7 9 5. 7 8 6. 7 7 7. 7 7 8. 8 7 9. 9 7 10. 10 5 11. 12 2 12. 18 1 स्टेप 1: तालिका स्वरूप में आरोही या अवरोही क्रम में डेटा को व्यवस्थित करना। चरण 2: दोनों आरोही और अवरोही क्रम में संख्या '7', सबसे अक्सर आती है अर्थात 4 बार। इसीलिए अवरोही बहुलक = 7 है। एक सामान्य वितरण वक्र, केंद्रीय प्रवृत्ति के तीन उपायों की तुलना में मदद करता है अर्थात माध्य, माध्यिका और बहुलक। एक सामान्य वितरण की अवस्था में माध्य, माध्यिका और बहुलक का एक ही स्कोर होता है सामान्य वितरण वक्र के रूप में सममित है। सर्वोच्च आवृत्ति के साथ स्कोर वितरण बीच में होता है और आधे स्कोर के बीच मूल्य से ऊपर घटित और आधा बीच मूल्य से कम होते हैं। बहुत ऊँचा और बहुत कम स्कोर अक्सर नहीं होती है और दुर्लभ हैं। व्यक्तिगत
श्रेणी में B.
असतत
श्रेणी में C.
सतत
श्रेणी में D.
असंतत
श्रेणी में
असतत
श्रेणी हमें
प्रत्येक
मान की सही
माप देती है|
इस प्रकार,
असतत श्रेणी
में भिन्न
मानों की
बारंबारता
दी जाती हैं|
बारंबारता
B.
व्यूह रचना C.
क्रम
D.
वृत्त
एक
श्रृंखला
में कोई
वस्तु कितनी
बार आई है, इसे
बारंबारता
कहा जाता है|
इसका अर्थ है-
एक वर्ग में
पर्यवेक्षणों
की संख्या|
बारंबारता
B.
वर्गीकरण
C.
वर्ग
अंतराल D.
वितरण
एक
श्रृंखला या
आंकड़ों में
प्रत्येक
दिया गया
अंतराल वर्ग
अंतराल
कहलाता है|
उदाहरण: 0-10, 10-20, 20-30 आदि|
B.
समय
श्रेणी में C.
सतत
श्रेणी में D.
व्यक्तिगत
श्रेणी में
एक
सतत श्रेणी
में, एक विशेष
मान के बजाय
वर्ग की
बारंबारता
व्यक्त की
जाती है|
इसमें दी गयी
सीमा में सभी
मान शामिल
होते हैं|
B.
एक
और दो के मध्य C.
यह
एक से अधिक
नहीं हो सकता
है D.
इनमें
से कोई नहीं
सहसम्बन्ध
का अधिकतम
विस्तार
शून्य से
होता हुआ -1 से +1
तक होता है|
सीमा
B.
माध्य
विचलन C.
मानक
विचलन D.
उपर्युक्त
सभी
माध्य
विचलन या औसत
विचलन को
पर्यवेक्षण
के सटीक
विचलन के
माध्य के रूप
में वर्णित
किया जा सकता
है| यह गणितीय
माध्य,
माध्यिका और
बहुलक हो
सकता है|
केन्द्रीय
प्रवृत्ति
की माप B.
विस्तार
की माप C.
सहसंबंधों
की माप D.
इनमें
से कोई नहीं SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
खाद्य
प्रसंस्करण
उद्योगSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
1) घरेलू
प्रतिष्ठान
2) औद्योगिक
या
व्यावसायिक
प्रतिष्ठान A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
बारंबारता
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
अंतर
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
अंक SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
सूचकांक
की गणना के
लिए SOLUTION
A.
फुट
नोट किसी
स्रोत से
एकत्र किये
गए आंकड़ों के
बारे में
उचित सूचना
प्रदान करता
हैSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
असतत
श्रेणी में SOLUTION
A.
एक
से कम SOLUTION
A.
SOLUTION
A.