भारत से अन्य राष्ट्रों को निर्यात की जाने वाली चार महत्वपूर्ण वस्तुएं इस प्रकार हैं:
i. चमड़ा और उसके उत्पाद
ii. कपास के कच्चे धागे
iii. तैयार वस्त्र
iv. विनिर्मित माल, रत्न और आभूषण
बंदरगाहसमुद्र, नदी तथा झीलों के किनारे जहाजों के आने, माल व व्यक्तियों के परिवहन की सुविधा प्रदान करते हैं| पत्तनों में विशेष रूप से तैयार उपकरण होते हैं, जो इन जहाजों के लिए माल लादने, उतरने की सुविधा प्रदान करते हैं|
शब्द ‘पृष्ठ प्रदेश’ अंतर्देशीय प्रदेशों के लिए प्रयुक्त किया जाता है| यह किसी प्रदेश द्वारा अधिशासित तटों के पीछे स्थित होता है| किसी पत्तन का पृष्ठ प्रदेश वह क्षेत्र होता है, जो आयात और निर्यात दोनों की सुविधा प्रदान करता है| एक पृष्ठ प्रदेश का आकार उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है और साथ ही पत्तन और पृष्ठ प्रदेश के मध्य परिवहन की सरलता, गति और लागत पर भी निर्भर करता है|
CISका अर्थ है- स्वतंत्र राज्यों का परिसंघ|CIS सोवियत संघ के विघटन के बाद अस्तित्व में आया|
भारत सरकार ने भारत से निर्यात किये जाने वाले माल में मदद के लिए ‘खुले आकाश की नीति (1992)’ बनायी, ताकि हम अपने निर्यात को और भी प्रतिस्पर्धात्मक बना सकें| इस नीति के अंतर्गत कोई भी विदेशी वायुसेवा अथवा निर्यातकों का संघ देश में मालवाहक जहाज ला सकता है|
भारत के चार प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे इस प्रकार हैं:
i. मुंबई
ii. कोलकाता
iii. नयी दिल्ली
iv. चेन्नई
यदि निर्यात, आयात से अधिक है, तब व्यापार का संतुलन सकारात्मक व्यापार कहलाता है|
भारत के साथ व्यापार करने वाले अफ्रीका के पांच राष्ट्र इस प्रकार हैं:
1. दक्षिणी अफ्रीका
2. नाइजीरिया
3. केन्या
4. इथोपिया
5. तंजानिया
किसी राष्ट्र का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उसका ‘आर्थिक बैरोमीटर’ कहलाता है|
यदि आयात, निर्यात से अधिक है, तब व्यापार का संतुलन ऋण व्यापार कहलाता है|
आयात और निर्यात का अंतर व्यापार का संतुलन कहलाता है|
जब एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र से वस्तुएं खरीदता है, तो यह आयात कहलाता है|
जब एक राष्ट्र अपनी उत्पादित वस्तुएं दूसरे राष्ट्रों को बेचता है, तो यह निर्यात कहलाता है|
A.
विकास में संसाधनों के प्रयोग
B.
किसी भी अवस्था में विकास
C.
संसाधनों
का इस तरह
प्रयोग कि
आने वाली
पीढियां भी
उनका उपयोग
कर सकें
सततपोषणीय
विकास का
अर्थ होता है संसाधनों
का इस तरह
प्रयोग कि
आने वाली
पीढियां भी
उनका उपयोग
कर सकें|
172 B.
182 C.
162 D.
154
भारतीय
नियोजन आयोग
ने 182 जिलों को
सूखा संभावी
घोषित किया
था| इनमें 16
राज्यों के
जिले शामिल
थे|
B.
पांचवी
पंचवर्षीय
योजना C.
छठी
पंचवर्षीय
योजना D.
सातवीं
पंचवर्षीय
योजना
पर्वतीय
क्षेत्र
विकास
कार्यक्रम
को पांचवी
पंचवर्षीय
योजना के
अंतर्गत
आरम्भ किया
गया था| इसमें
उत्तर
प्रदेश के 15
जिले, मिकिर
पहाड़ी, असम की
उत्तरी कछार
की पहाड़ियाँ, आदि
शामिल थीं|
B.
बिहार C.
केरल D.
गोआ
गोआ की
प्रति
व्यक्ति आय
सबसे अधिक है|
यह 2013-14 में 224,138 रूपए
था|
B.
सूखा
संभावी
क्षेत्र
विकास
कार्यक्रम C.
परिवहन
विकास
कार्यक्रम D.
क्षेत्रीय
विकास
कार्यक्रम
यह
कार्यक्रम
सूखा
प्रभावित क्षेत्रों
में लोगों को
रोज़गार
उपलब्ध कराने
और उत्पादक
परिसंपत्तियां
बनाने के
उद्देश्य से
किया गया था।
1937 में B.
1942 में C.
1938 में D.
1940 में
भारतीय
राष्ट्रीय
कांग्रेस
द्वारा 1938
ईस्वी में
कर्नल सोखी
की
अध्यक्षता
में राष्ट्रीय
नियोजन आयोग
का गठन किया
गया था|
चंडीगढ़
के लिए B.
बेंगलुरु
के लिए C.
मैसुरु
के लिए D.
दिल्ली
के लिए
देश
का पहला
मास्टर
प्लान 1950 ईस्वी
में दिल्ली के
लिए तैयार
किया गया था|
1992 में
B.
1990 में C.
1991 में D.
1998 में
नई
औद्योगिक
नीति की
घोषणा ने
उदारीकरण और
भूमंडलीकरण
को बढ़ावा
दिया|
राष्ट्रीय B.
क्षेत्रीय C.
अंतर्राष्ट्रीय D.
स्थानीय
नियोजन के
दो उपगमन
होते हैं,
खंडीय और
क्षेत्रीय|
खंडीय
नियोजन का
अर्थ है
अर्थव्यवस्था
के विभिन्न
सेक्टरों के
विकास के लिए
कार्यक्रम
बनाना और
उनको लागु
करना| हम पाते
हैं कि विकास
का प्रारूप
असमान है|
इसलिए
नियोजक एक
स्थानिक परिप्रेक्ष्य
अपनाएँ तथा
विकास में
प्रादेशिक
असंतुलन कम
करने के लिए
योजना बनाएँ|
इस प्रकार के
नियोजन को
प्रादेशिक
नियोजन कहा
जाता है|
छठी
पंचवर्षीय
योजना B.
सातवीं
पंचवर्षीय
योजना C.
आठवीं
पंचवर्षीय
योजना D.
नवीं
पंचवर्षीय
योजना
आठवीं
पंचवर्षीय
योजना से
नियोजन का
पुनर्भिविन्यास
हुआ| ये समय
उदारीकरण के
दौर का आरम्भ
था|
B.
फसल
उत्पादन में C.
चरागाह
भूमि में D.
परती
भूमि में
नहर
सिंचाई के
प्रसार से फसल
उत्पादन में
वृद्धि हुई
है| किसी
क्षेत्र में
उगने वाली
पारंपरिक
फसलों के जगह
गेहूँ, कपास,
मूंगफली,
चावल,
इत्यादि की
खेती की जाने लगी|
अर्थव्यवस्था
के विभिन्न
सेक्टरों के
विकास से B.
क्षेत्रीय
विकास से C.
परिवहन
में
क्षेत्रीय
भिन्नताओं
से D.
ग्रामीण
क्षेत्रों
के विकास से
खंडीय
नियोजन का
अर्थ है –
अर्थव्यवस्था
के विभिन्न
सेक्टरों,
जैसे कृषि,
सिंचाई,
विनिर्माण,
ऊर्जा,
परिवहन,
संचार,
इत्यादि के
विकास के लिए
कार्यक्रम
बनाना और
उनको लागु
करना|
B.
फसल उगाने
के तीव्रता
में वृद्धि
हुई C.
जल
भराव और मृदा
लवणता में
वृद्धि हुई D.
कृषि
योग्य
क्षेत्र में
वृद्धि हुई
सघन
सिंचाई का एक
महत्वपूर्ण
दुष्प्रभाव
ये पड़ा कि जल
भराव और मृदा
लवणता में
वृद्धि हो गयी|
इससे कृषि की स्थिरता
बाधित हुई|
आठवीं
पंचवर्षीय
योजना B.
छठी
पंचवर्षीय
योजना C.
नवीं
पंचवर्षीय
योजना D.
सातवीं
पंचवर्षीय योजना
आठवीं
पंचवर्षीय
योजना के
दौरान सबसे
अधिक विकास दर
दर्ज किया
गया था| ये
योजना 1992 से 1997 तक
चली थी|
प्रधान
मंत्री B.
उपाध्यक्ष C.
राष्ट्रपति D.
मुख्य
मंत्री
योजना
आयोग का
प्रमुख देश
का प्रधान
मंत्री हुआ
करता था| अब
योजना आयोग
को भंग करके
उसके जगह
नीति आयोग का
गठन किया गया है|
उनकी
शैक्षिक
स्थिति को
ध्यान में रख
कर B.
उनकी
सांस्कृतिक स्थिति
को ध्यान में
रख कर C.
उनकी
राजनीतिक
स्थिति को
ध्यान में रख
कर D.
उनकी
स्थलाकृतिक
स्थिति को
ध्यान में रख
कर
पहाड़ी
क्षेत्रों
के विकास के
लिए विस्तृत
योजना उनके
स्थलाकृतिक
और
पारिस्थितिक
स्थिति को
ध्यान में रख
कर की जाती है|
तीसरी
पंचवर्षीय
योजना B.
सातवीं
पंचवर्षीय
योजना C.
छठी
पंचवर्षीय
योजना D.
पांचवी
पंचवर्षीय
योजना
जवाहर
रोज़गार
योजना को 1985 और 1990
के बीच सातवीं
पंचवर्षीय
योजना के
दौरान लागु
किया गया था|
B.
भूमि
के विकास के
लिए C.
मुर्गीपालन
तकनीक में
विकास के लिए D.
लघु
उद्योग के
विकास के लिए
सूखा
संभावी
क्षेत्र के
विकास के
कार्यक्रमों
को चौथी
पंचवर्षीय
योजना के
दौरान शुरू
किया गया था|
इसके
अंतर्गत
सूखा संभावी
क्षेत्रों
में भूमि के
विकास को
महत्त्व
दिया गया|
B.
नियोजन C.
कार्रवाई D.
क्रियान्वयन
नियोजन,
योजनाओं के
निर्माण, सोच,
और किसी लक्ष्य
को प्राप्त
करने हेतु
बनाये गए
नियमों की
प्रक्रिया
को कहते हैं|
भरमौर जनजातीय क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की दो तहसीलें, भरमौर और होली शामिल हैं। यह क्षेत्र 32°11’ उत्तर से 32°41’ उत्तर अक्षांशों तथा 76° 22’ पूर्व से 76° 53’ पूर्व देशांतरों के बीच स्थित है। 2 B.
3 C.
4 D.
6
चार
महानगरों - दिल्ली, मुंबई, चेन्नई
और कोलकाता को
5846 किलोमीटर
लंबी राजमार्ग
से जोड़ने वाली
योजना स्वर्णिम
चतुर्भुज
कहलाते हैं |
पहला B.
दूसरा C.
तीसरा D.
चौथा
भारतीय
सड़क
नेटवर्क
पूरे विश्व
में दूसरा
सबसे बड़ा
नेटवर्क है , जिसका
कुल लम्बाई सन
2015 के अनुसार, 5,472,144
किलोमीटर है |
परिवहन B.
गंतव्य C.
समाप्ति D.
सीमा
जहां
एक यातायात
समाप्त हो
जाता है, उस
बिंदु को
गंतव्य कहा
जाता है और
जहां यह शुरू
होता है उसे
शुरुयात के
बिंदु कहा
जाता है।
सादिया-धुबरी B.
हल्दिया-इलाहाबाद C.
कोट्टापुरम-कोल्लम D.
हल्दिया-फरक्का
भारत
में तीन
प्रमुख
राष्ट्रीय
जलमार्ग हैं।
राष्ट्रीय
जलमार्ग 2
भारत के दो
प्रमुख
शहरों -
सादिया-धुबरी
के बीच स्थित
है, जिसकी
लंबाई कुल 891
किलोमीटर
है।
राष्ट्रीय
राजमार्ग वे
राजमार्ग
होते हैं,जिनकी
अपनी एक
राष्ट्रीय
महत्ता होती
है तथा जो कई
राज्यों को
आपस में
जोड़ते हैं|
इनका रख-रखाव
और निर्माण
कार्य
केंद्र सरकार
द्वारा
कराया जाता
है|
एक्सप्रेस-वे
राष्ट्रीय
राजमार्ग
चार या छह लेन
के बने होते
हैं| इनका
निर्माण देश
के तेजी से
बढ़ते हुए
यातायात को
देखते हुए
कराया गया है|
प्रसार
भारती भारत
का स्वशासी
प्रसारण
निगम है| यह
देश के
इलेक्ट्रॉनिक
मीडिया पर
नियंत्रण
रखता है|
प्रसार
भारती के दो
महत्वपूर्ण
अवयव इस
प्रकार है:
i.
आल
इंडिया
रेडियो ii.
दूरदर्शन
दो
राष्ट्रीय
जलमार्ग इस
प्रकार हैं: 2. राष्ट्रीय
जलमार्ग -1 : यह
ब्रह्मपुत्र
नदी(891 किमी०) के
सादिया-धुबरी
प्रदेशों पर
बना हुआ है|
परिवहन
के तीन
प्रमुख
संसाधन इस
प्रकार हैं;
i.
स्थल
परिवहन ii.
जल
परिवहन iii.
वायु
परिवहन
कंडलापश्चिमी
भारत के
गुजरात
राज्य के
कच्छ का एक समुद्री
बंदरगाह है|
यह कच्छ की
खाड़ी में
स्थित है|यह
पश्चिमी तट के
प्रमुख
बंदरगाहों
में से एक है| कंडलाका
निर्माण
पश्चिमी
भारत के
प्रमुख
बंदरगाह के
रूप में 1950 के
दशक में
कराया गया था|
यह
सभी ओर से
स्थल का एक
घेरा होता है,
जहाँ से समुदी
या
महासागरीय
जल गुजर नहीं
सकता है| आंध्र
प्रदेश का
विशाखापट्टनम
बंदरगाह एक स्थल-रुद्ध
बंदरगाह है,
जो समुद्र को
ठोस चट्टान
और रेत के
द्वारा चैनल
से अलग करता
है|
मनाली
(हिमाचल
प्रदेश) को
लद्दाख में
लेह
(जम्मू-कश्मीर)से
जोड़ने वाली
सड़क भारत की
ही नहीं
बल्कि विश्व
की उच्चतमसड़क
है|
सड़कों
की महत्ता,
रख-रखाव एवं
प्रशासन के
आधार पर, भारत
में सड़कों को
छह वर्गों
में विभाजित किया
जा सकता है:
i.
स्वर्णिम
चतुर्भुज
महा
राजमार्ग
ii.
राष्ट्रीय
राजमार्ग
iii.
राज्य
राजमार्ग
iv.
जिला
मार्ग
v.
ग्राम
सड़कें vi.
सीमावर्ती
सड़कें भारत में सुदूर संवेदन के सारे कार्यों का आयोजन एवं निरीक्षण राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र, हैदराबाद द्वारा किया जाता है जो भारत सरकार के विज्ञान मंत्रालय के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत काम करने वाली एजेंसी है|
व्यक्तियों
और वस्तुओं
को एक स्थान
से दूसरे स्थान
तक वहन करने
की सुविधा को
परिवहन कहा
जाता है|
मुग़लसराय
उत्तर
भारत का
व्यस्ततम
रेलवे
जंक्शन है|
यह
समुद्र में
आंशिक रूप से
बंद क्षेत्र
होता है, जैसे
छोटी नदी, एक
नदी का
मुहाना और एक
समुद्री
इनलेट, जो
जहाजों को
आश्रय देने
के लिए बनाये
आते हैं| परिवहन के प्रमुख साधन इस प्रकार हैं: i. रेलमार्ग ii. सड़क-मार्ग iii. जल-मार्ग iv. पाइपलाइन v. वायु-मार्ग एकीकृत विद्युत ग्रिड प्रणाली के लाभइस प्रकार हैं: i. कंप्यूटर के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
व्यापार
के मुख्यतः
दो प्रकार
होते हैं, ये
इस प्रकार
हैं:
जब एक
राष्ट्र
वस्तुओं और
सेवाओं का
कुछ अन्य राष्ट्रों
के साथ आयात और
निर्यात
करता है, इसे
विदेशी
व्यापार कहा
जाता है| जब माल
और वस्तुओं
का आयात
और
निर्यात एक
ही राष्ट्र
के अंतर्गत
किया जाता है,
तो यह घरेलू
व्यापार
कहलाता है| व्यापार का अर्थ वस्तुओं का क्रय और विक्रय करना है| अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में, क्रय और विक्रय को आदान-प्रदान की संज्ञा दी जाती है| व्यापार के संतुलन को आयात और निर्यात के परिमाण में अंतर से परिभाषित किया जा सकता है| जब किसी राष्ट्र का निर्यात उसके आयात से अधिक होता है, तो यह स्थिति व्यापार के संतुलन के अनुकूल कहलाती है| और जब किसी राष्ट्र का आयात उसके निर्यात से अधिक होता है, तो यह स्थिति प्रतिकूल या ऋण व्यापार कहलाती है| भारत का विदेशी व्यापार समय के साथ बहुत बदल चुका है| इसे निम्न उदाहरणों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से वर्णित किया जा सकता है: बन्दरगाह पत्तन 1. यह एक समुद्री तट होता है, जहाँ जहाजों को सहारा देने के लिए बाँधा जाता है| 1. यह समुद्र का वह क्षेत्र होता है, जहाँ से जहाजों को अन्दर आने की जगह दी जाती है| 2. यह जहाजों की उतराई, चढ़ाई की सुविधा प्रदान करते हैं| 2. यहाँ जहाजों को रुकने का स्थान, तूफ़ान व तरंगों से बचने का स्थान प्रदान किया जाता है| 3. दांतेदार बन्दरगाह प्राकृतिक बन्दारगाह प्रदान करते हैं| ये उपजाऊ और उत्पादक इलाकों से सम्बद्ध होते हैं| 3. नदी का मुहाना प्राकृतिक पत्तन; जैसे मुंबई पत्तन प्रदान करता है| ये जहाजों को शरण देने के लिए एक पर्याप्त कमरेनुमा जगह प्रदान करते हैं|
द्विपार्श्विक
व्यापार: इसे
दो
राष्ट्रों
के मध्य
वस्तुओं के विनिमय
से परिभाषित
किया जा सकता
है| उदहारण:
भारत और
ब्रिटेन के
मध्य
व्यापार बहुराष्ट्रीय
व्यापार: इसे
दो से अधिक
राष्ट्रों
के मध्य
वस्तुओं या
सेवाओं के विनिमय
से परिभाषित
किया जा सकता
है| उदहारण:
भारत का
संयुक्त
राज्य
अमेरिका,
ब्रिटेन और
चीन के साथ
व्यापार| अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के दो प्रकार इस प्रकार हैं:
वस्तुओं
और सेवाओं का
स्वैच्छिक
विनिमय व्यापार
कहलाता है| यह
विनिमय
द्विपार्श्विक
या बहुराष्ट्रीय
हो सकता है|
व्यापार के
वास्तविक
रूप में,
वस्तु-विनिमय
आवश्यक होता
है| आयात निर्यात
1. विनिर्मित
वस्तुएं :
तैयार
वस्त्र, रत्न
आभूषण,
मशीनें,
दवाइयां और
रसायन आदि| 2. कृषि
आधारित
वस्तुएं : चाय,
कॉफ़ी, भोजन के
लिए अनाज,
तम्बाकू,
मसाले, पेय
पदार्थ और फल
आदि|
भारत के
विदेशी
व्यापार की
विशेषताएं
इस प्रकार
हैं: B.
आगरा,
मोरादाबाद C.
आगरा,
मथुरा
D.
कानपुर,
लखनऊ
बागपत,
दिल्ली,
नोएडा, मथुरा,
आगरा,
फिरोजाबाद, आदि
औद्योगिक
नगर यमुना के
किनारे
स्थित हैं|
B.
सतलज C.
यमुना D.
गोदावरी
यमुना
बहुत अधिक
प्रदूषित है|
यमुना में
प्रदूषण
अनुपचारित
औद्योगिक और
नगर निगम के
अपशिष्ट के
कारण होता है|
B.
हाइड्रोजन C.
कार्बन
डाइऑक्साइड D.
कार्बन
मोनोऑक्साइड
क्लोरो-फ्लोरो
कार्बन और
इससे
मिलते-जुलते
अन्य
रासायनिक
पदार्थ ओज़ोन
परत के क्षय
का प्रमुख
कारण हैं|
B.
वर्षा C.
कृषि D.
प्राकृतिक
आपदाएं
जल
प्रदूषण के
प्राकृतिक
कारणों में अपरदन
और भू-स्खलन
प्रमुख हैं|
मानवीय
कारणों में
कृषि और
औद्योगिक
अपशिष्ट का
जल में बहाना
प्रमुख है|
B.
डायरिया C.
दमा D.
ब्रोंकाइटिस
जल
प्रदूषण कई
जल-जनित
रोगों का
मुख्य कारण
है| इसके कारण
होने वाली
प्रमुख
बीमारियाँ
हैं: डायरिया,
हेपाटाइटिस,
आँतों की
बीमारियाँ,
इत्यादि|
B.
दमा C.
आँतों
की
बीमारियाँ D.
हेपाटाइटिस
वायु
प्रदूषण के
कारण दमा
सहित कई अन्य
प्रकार की
फेफड़ों की
बीमारियाँ
होती हैं|
चंडीगढ़ B.
हरिद्वार C.
कानपुर D.
दिल्ली
कानपुर
गंगा के
किनारे
स्थित है और
एक महत्वपूर्ण
औद्योगिक
केंद्र है|
यहाँ चमड़े के
कई कारखाने
हैं, जिनके
अपशिष्ट से
गंगा
प्रदूषित
होती है|
भूमि B.
पेड़-पौधे C.
मिट्टी D.
वायु
जैविक
घटकों में वो
सब शामिल हैं,
जो जीवित हैं,
जैसे मानव,
जंतु,
पेड़-पौधे,
इत्यादि|
अजैविक घटकों
में मिट्टी,
जल, वायु,
इत्यादि
जैसे निर्जीव
शामिल होते
हैं|
पौधों
का अपघटन B.
मानवीय
गतिविधियाँ C.
भू-स्खलन D.
चक्रवात
जल
प्रदूषण
प्राकृतिक
कारणों से भी
हो सकता है पर
मानवीय
गतिविधियाँ
इसका प्रमुख
कारण हैं|
औद्योगिकीय,
कृषि, और कई
अन्य मानवीय
कारणें हैं
जिनसे जल
प्रदूषण
होता है|
उनके महत्व के बावजूद केंद्रीय प्रवृत्ति की माप की कई सीमाएं हैं जिनका नीचे उल्लेख किया गया हैं: 1) केंद्रीय प्रवृत्ति की माप के वितरण की सही संरचना का वर्णन नहीं है। दो या दो से अधिक वितरण एक ही मतलब हो सकता है, लेकिन विभिन्न संरचनाऍ हो सकती है। 2) इस तरह के मूल्य में कभी कभी, औसत का वितरण नहीं होता है अतः वास्तविक प्रतिनिधि नहीं होता है। जैसे, 200, 10, 6 और 4 का मध्य 55 है जो एक वास्तविक प्रतिनिधिकारी नहीं है है। 3) कभी कभी औसत बेतुका परिणाम देता है। जैसे हमें प्रति परिवार के सदस्यों की औसत संख्या 2.3, 1.3, आदि के रूप में मिल जाती है। चतुर्थक वे मान हैं, जो श्रृंखला को चार बराबर भागों में विभाजित करते है। यदि एक सांख्यिकीय श्रृंखला को चार बराबर भागों में बांटा जाता है, प्रत्येक भाग के अंतिम मूल्य को एक चतुर्थक कहा जाता है। किसी भी श्रृंखला के लिए तीन चतुर्थक हो जाएगे। दूसरा चतुर्थक मध्यिका के रूप में ही है। कम या पहले चतुर्थक और ऊपरी या तीसरे की गणना चतुर्थक के तहत इस प्रकार की जाती हैं: Q1 = मद का मूल्य (N+1)∕4th Q3 = मद का मूल्य 3(N+1)/4th
माध्यिका वह मूल्य है जो दो बराबर भागों में एक श्रृंखला को बांटती हैं, एक हिस्सा सभी मूल्यों की तुलना में अधिक और अन्य मूल्य माध्यिका से कम होते है। यह श्रृंखला के बीच का मूल्य है आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित है।
एम = माध्य एन = श्रृंखला की संख्या। इस अवधारणा का प्रयोग दो या दो से अधिक श्रृंखला के बीच फैलाव या परिवर्तन की तुलना करने के लिए किया जाता है। यह भिन्नता से सम्बंधित उपाय है। कार्ल पियर्सन के शब्दों में, "विभिन्नता का गुणांक माध्य में प्रतिशत भिन्नता है, मानक का उपयोग कुल बदलाव के रूप में किया जाता है। "वास्तव में, विभिन्नता का गुणांक मानक विचलन के प्रतिशत अभिव्यक्ति है। सबसे पहले इन सभी आकड़ो को आरोही और अवरोही क्रम में व्यवस्थित करेंगे: क्रम संख्या आरोही क्रम अवरोही क्रम 1. 5 20 2. 8 15 3. 9 14 4. 11 13 5. 12 (M) 12 (M) 6. 13 11 7. 14 9 8. 15 8 9. 20 5 n = 9 स्पीयरमैन ने कोटियों के आधार पर सहसंबंध गणना की युक्ति की व्याख्या की। यह विधि गणना में आसान होने के कारण अधिक प्रचलित है। इस सम्बन्ध की गणना निम्न चरणों में की जाती है : (i) अभ्यास में दिए गए X तथा Y के आकड़ों को तालिका के क्रमशः प्रथम व द्वितीय स्तम्भों में उतार लिया जाता है। (ii) दोनों चरों की अलग-अलग कोटियाँ निर्धारित की जाती हैं। X-चर की कोटियों को तृतीय स्तम्भ में अंकित किया जाता है जिसका शीर्षक (XR) (X-चर की कोटियाँ) है। इसी प्रकार Y-चर की कोटियों (YR) चतुर्थ स्तम्भ में अंकित किया जाता है। आंकड़ों में उच्चतम मान को कोटि एक, दूसरे सर्वोच्च मान को कोटि दो तथा इसी प्रकार अन्य कोटियों का आवंटन किया जाता है। (iii) XR तथा YR के निर्धारण के पश्चात् दोनों कोटियों में अंतर ज्ञात किया जाता है। इस अंतर का अभिलेखन पांचवें स्तम्भ में लिखा जाता है। इन अंतरों के साथ जुड़े ऋणात्मक अथवा धनात्मक चिन्हों का कोई महत्त्व नहीं है। (iv) प्रत्येक अंतर का वर्ग का ज्ञात करके उनका योग कर लिया जाता है ये मान छठे स्तम्भ में लिखे जाते हैं। (v) इसके पश्चात कोटि सहसंबंध की गणना निम्न सूत्र के आधार पर की जाती है - मध्यिका के निम्नलिखित गुण हैं 1. परिणाम को रेखांकन द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। 2. आंकड़े अधूरे होने पर भी इसकी गणना करना संभव है। 3. यह आसान है और कुछ परिणाम देता है। 4. यह गुणात्मक आकड़ो के लिए उपयुक्त है। 5. यह चरम मूल्यों से अप्रभावित है। दोष 1. यह सभी टिप्पणियों पर आधारित नहीं है 2. यह गणित गणना का अभाव है। 3. यह प्रतिदर्श के उतार चढ़ाव से प्रभावित हो सकता है 4. इसमें प्रतिनिधि चर का अभाव है।
उच्च
पर्वतों पर,
कठिन जलवायु
के कारण
जनसंख्या
घनत्व कम
पाया जाता है|
समलवणता रेखाएं B.
रूप-रेखा
C.
सम गहराई रेखा D.
समवायुदाब रेखाएं
सागरों
एवं
महासागरों
में समान
खारेपन को मिलाकर
खींची गई
रेखाएं
समलवणता
रेखाएं
कहलाती हैं।
द्वि-आयामी
आरेख B.
त्रि-आयामी
आरेख C.
एक-आयामी
आरेख D.
वहु-आयामी
आरेख
वृत
आरेख और
आयताकार
आरेख, द्वि-आयामी
आरेख हैं|
सममान
रेखाएं B.
समवायुदाब रेखाएं C.
समताप रेखाएं D.
समलवणता रेखाएं
समताप रेखाएं, समान तापमान के क्षेत्रों की रेखाओं को निरूपित करती हैं|
दंड
आरेख B.
वृत्त
आरेख C.
मिश्रित दंड आरेख D.
रेखाचित्र
मिश्रित दंड आरेख को उप-विभाजित दंड आरेख के नाम से भी जाना जाता है| यह भिन्न घटकों के आकार की तुलना करने के लिए उपयोगी होता है|
B.
आइसोहेल C.
सममेघ रेखाएं D.
समवायुदाब रेखाएं
समवर्षा रेखाएं-मानचित्र
पर
प्रदर्शित
वह रेखा जो एक निश्चित
अवधि में
वर्षा की
समान मात्रा
प्राप्त
करने वाले
स्थानों को
मिलाती है।
वर्णमात्री
मानचित्र
द्वारा B.
छायांकन
विधि द्वारा C.
सममानरेखा
मानचित्र
द्वारा D.
बिंदुकित
मानचित्र
द्वारा
छायांकन
विधि से सटीक
आंकड़ों को
प्रदर्शित नहीं
किया जाता है|
यह वर्गों के
सापेक्ष
आंकड़ों को
निरूपित
करता है|
वर्णमात्री
मानचित्र B.
सममानरेखा
मानचित्र C.
बिंदुकित
मानचित्र D.
प्रवाह
संचित्र
एक
वर्णमात्री
मानचित्र
प्रत्येक
वर्ग के औसत
मानों को
निरूपित
करता है|
B.
तारे
आलेख का
उपयोग C.
बहुभुज
का उपयोग D.
दंड
आरेख का
उपयोग
मापनी
का उपयोग
आरेख तथा
मानचित्रों
पर आंकड़ों की
माप को
प्रदर्शित
करने वेफ लिए
किया जाता
है।
B.
वृत्त
C.
आयत D.
त्रिभुज
वृत्त आरेख विभाजित वृत्त आरेख के नाम से भी जाना जाता है| इस प्रकार के आरेख में कुल भागों को दर्शाया जाता है|
B.
दंड
आरेख C.
रेखाचित्र
D.
प्रवाह
संचित्र
एक
दंड आरेख में
सभी स्तंभों
की चौड़ाई
समान होती है|
B.
रेखाचित्र
C.
ओजाइव D.
वृत्त
आरेख
एक
बहुरेखाचित्र
से कई चरों के
समय-श्रृंखला
आंकड़ों को एक
ही आरेख में
आसानी से
दर्शाया जा
सकता है|
B.
समवायुदाब
रेखाएं
(आइसोबार) C.
सममेघ
रेखाएं D.
रूप-रेखा
'आइसो’
का अर्थ है-
समान और ‘बार’
का अर्थ है-
भार या
वायुदाब| यह
ग्रीक भाषा
से लिए गया है|
इसलिए, समवायुदाब रेखाएं समान वायुदाब के क्षेत्रों को निरूपित करती हैं|
आवृत्ति वितरण मूल्यों की एक व्यवस्था है जिसमे एक या एक से अधिक चर वितरण में लिए जाते है। आवृत्ति वितरण दो प्रकार का होता हैं: असतत आवृत्ति वितरण: इन वितरण को अक्सर प्रत्येक मान की प्रदर्शित संख्या द्वारा दिखायी गयी मात्रा के आदेश सूची के रूप में प्रस्तुत किया जाता हैं। सतत आवृति वितरण: इस वितरण में उन चरो पर विचार किया जाता है, जो लगातार संख्या में है जैसे ऊंचाई, वजन, आदि। आंकड़ों के अर्थपूर्ण निष्कर्ष निकालने और उपयोग हेतु अपरिष्कृत कच्चे आंकड़ों के सारणीयन और वर्गीकरण की आवश्यकता होती है। सांख्यिकी सारणी के द्वारा आंकड़ों को संक्षिप्त और प्रस्तुत किया जाता है। आंकड़ों की कालम और पंक्तियों में की गई सुव्यवस्थित व्यवस्था से सारणी का प्रस्तुतीकरण आसान और सरल हो जाता है। तालिकाएँ विश्लेषक के लिए कम स्थान में आंकड़ों के विशाल समूह को प्रस्तुत करना संभव बनाती हैं। वह आंकड़े जो प्रथम बार व्यक्तिगत रूप से अथवा व्यक्तियों के समूह संस्था/संगठन द्वारा एकत्रित किए जाते हैं, आंकड़ों के प्राथमिक स्रोत कहलाते हैं। प्राथमिक आंकड़ों के साधनों में व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली अनुसूची, अन्य विधियाँ शामिल हैं। सूचकांक चर अथवा सांख्यिकी माप है जिसे चर या दूसरी विशेषताओं के संदर्भ में सम्बंधित चरों के सम्बंधित समूह में परिवर्तन को दर्शाने के लिए अभिकल्पित किया जाता है। आंकड़े निम्नलिखित विधियों से एकत्रित किए जाते हैं - 1. प्राथमिक स्रोत 2. द्वितीयक स्रोत आंकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में निरूपिति किया जाता है जो यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करते हैं।SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
तीसरी
पंचवर्षीय
योजनाSOLUTION
A.
चंडीगढ़SOLUTION
A.
पर्यटन
विकास
कार्यक्रमSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. कृषि योग्य बंजर भूमि मेंSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
परंपरागत
फसलों का
प्रतिस्थापन
हुआSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
बागवानी
के विकास के
लिएSOLUTION
A.
कार्यSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
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B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
1. राष्ट्रीय
जलमार्ग -1 :यह भागीरथी-हुगली
नदी
परियोजना(1620
किमी०) पर
इलाहाबाद और हल्दिया
के मध्य बना
हुआ है|
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
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A.
B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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A.
B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
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A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
1. द्विपार्श्विक व्यापार: जब दो देश निर्दिष्ट वस्तुओं का व्यापार करने के लिए सहमत होते हैं, तो यह द्विपार्श्विक व्यापार कहलाता है| इसमें दो राष्ट्रों की आर्थिक स्थिति एक-दूसरे पर निर्भर होती है और एक-दूसरे से संबंधित होती है| एक राष्ट्र से कच्चे माल का आदान-प्रदान दूसरे राष्ट्र की विनिर्मित वस्तुओं के साथ किया जाता है|
2.बहु पार्श्विक व्यापार: जब अनेक देश एक–दूसरे के साथ व्यापार करते हैं, तो यह बहु पार्श्विक व्यापार कहलाता है| A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
इलाहबाद,
कानपुरSOLUTION
A.
कृष्णाSOLUTION
A.
क्लोरो-फ्लोरो
कार्बनSOLUTION
A.
अपरदन
और भू-स्खलनSOLUTION
A.
मधुमेहSOLUTION
A.
डायरियाSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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B.
C.
D.
Right Answer is: DSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
समवर्षा रेखाएंSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
मापनी
का उपयोगSOLUTION
A.
दंड SOLUTION
A.
वृत्त
आरेख SOLUTION
A.
बहुरेखाचित्र
SOLUTION
A.
आइसोहेलSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
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B.
C.
D.
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