व्यय
विधि द्वारा
राष्ट्रीय
आय के आंकलन
में निम्नलिखित
चरणों शामिल
होते हैं:
1. अंतिम
उत्पादों
पर व्यय
होने वाली
सभी आर्थिक
इकाइयों को
चार समूहों
में विभाजित
किया जाता
है।
(1) परिवार
(2) व्यवसायिक
क्षेत्र
(3) सरकारी
क्षेत्र
(4) शेष विश्व
2. अर्थव्यवस्था
में अंतिम
वस्तुओं और
सेवाओं पर
हुये अंतिम
व्यय को चार
व्यापक श्रेणियों
में विभाजित
किया जाता है:
(1) उपभोग व्यय
(2) निवेश व्यय
(3) सरकारी व्यय
(4) निवल
निर्यात
3. इस
चरण में
अंतिम व्यय
के घटकों की
माप शामिल
होती है जिसमे
विदेशों से
प्राप्त
शुद्ध कारक
आय जोड़कर
राष्ट्रीय
आय प्राप्त
की जाती है |
नकद या अन्य किसी प्रकार से अपने कर्मचारियों को मजूदरी, वेतन के रूप में उत्पादकों द्वारा किये गये भुगतान को मुआवजे के रूप में परिभाषित किया जाता है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, दुर्घटना बीमा, जीवन बीमा आदि के योगदान में भी मुआवजे में शामिल होता है।
कर्मचारियों का पारिश्रमिक है:
* नगद मजदूरी और वेतन
* सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए कर्मचारी का योगदान
अपने कार्य के लिए प्राप्त किये गये सभी भुगतान जिसमें मजूदरी और वेतन भी शामिल होते हैं।
मजूदरी किसी भी रूप में हो सकती है:
* नि:शुल्क आवास
* नि:शुल्क राशन
* नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाएं
* अन्य दूसरी सुविधाएं
| (1) | बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद |
|
| (2) | मूल्य ह्रास |
|
| (3) | अप्रत्यक्ष कर |
|
| (4) | अनुदान |
|
राष्ट्रीय आय की गणना-
कारक लागत पर राष्ट्रीय उत्पाद
कारक लागत पर राष्ट्रीय उत्पाद
कारक लागत पर राष्ट्रीय उत्पाद
900 करोड़
उत्पाद विधि- किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को जोड़ कर जो मूल्य प्राप्त होता है, वह सकल घरेलू उत्पादन कहलाता है। इस मूल्य में विदेशों से प्राप्त कारक आय को जोड़कर (या घटाकर) जो मूल्य प्राप्त होता है उसे सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं। शुद्ध राष्ट्रीय आय प्राप्त करने के लिए सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से मूल्य ह्रास तथा प्रतिस्थापन की राशि घटायी जाती है।
सावधानियां-
1. दोहरी गणना की गलती से बचने के लिए केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं की कीमत को जोड़ा जाता है।
2. वर्ष विशेष में उत्पादित नर्इ पूंजी परिसम्पत्तियों को भी उसी वर्ष की राष्ट्रीय आय में जोड़ा जाता है।
पूँजी की हानि में प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, सुनामी आदि तथा अनापेक्षित कारक जैसे चोरी, युद्ध आदि के कारण अचल संपत्ति के मूल्य की हानि शामिल होती है। उत्पाद का निवल मूल्य प्राप्त करने के लिए पूँजी की हानि का मूल्य, उत्पाद के सकल मूल्य से नहीं घटाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यह हानि उत्पादन प्रक्रिया के दौरान नहीं होती है।
|
( |
|
| (1) सरकारी अंतिम उपभोग व्यय | 1000 |
| (2) लाभ | 700 |
| (3) निवल अप्रत्यक्ष कर | 110 |
| (4) निजी अंतिम उपभोग व्यय | 1500 |
| (5) निवल निर्यात | (-)20 |
| (6) कर्मचारियों का मुआवजा | 1200 |
| (7) किराया | 200 |
| (8) ब्याज | 270 |
| (9) विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय | 30 |
| (10) स्वनियोजित की मिश्रित आय | 600 |
| (11) सकल घरेलू पूंजी निर्माण | 700 |
| (12) निवल घरेलू पूंजी निर्माण | 600 |
आय विधि द्वारा
राष्ट्रीय आय
राष्ट्रीय आय
![]()
व्यय विधि द्वारा
राष्ट्रीय आय
राष्ट्रीय आय
(i) विदेशी
पर्यटकों द्वारा
किया गया व्यय
देश द्वारा
किये गये
निर्यात की
तरह है। व्यय
विधि द्वारा
राष्ट्रीय
आय का आकलन
करते समय
विदेशी
पर्यटकों द्वारा
किए गए व्यय
को शामिल
किया जाता
है।
(2) एक
कर्मचारी के
लिए किराया
मुक्त आवास
पर अध्यारोपित
किराये को
राष्ट्रीय
आय में शामिल
किया जाता है
क्योंकि यह
उत्पादक
सेवाएं
प्रदान करने
के लिए एक
कर्मचारी किस्म
के रूप में एक
मुआवजा है।
(3) पेंशन एक व्यक्ति
को उत्पादक
सेवाओं के
लिए नहीं
बल्कि उसको
वृद्धावस्था
में
जीवन यापन के
लिए दी जाती
है। वह केवल
अंतरण आय
जिसका राष्ट्रीय
आय में कोई
योगदान नहीं
होता हैं।
मध्यवर्ती वस्तुएं वे वस्तुएं होती है जिन्हें उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल होने या बेचने से पहले परिवर्तित किया जाता है। ऐसी वस्तुएं ज्यादातर अंतिम वस्तुओं में परिवर्तित कर दी जाती हैं। मध्यवर्ती वस्तुओं की कीमत को राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है। मकान बनाने में प्रयुक्त होने वाली र्इंटें, सीमेंट और लोहा मध्यवर्ती वस्तुएं हैं।
अंतिम वस्तुएं वे वस्तुएं है जिन्हें एक वर्ष के दौरान अंतिम उपयोगकर्ताओं को बेचा जाता है। ये वस्तुएं उपभोक्ताओं द्वारा अंतिम उपभोग के लिए और उत्पादकों द्वारा निवेश के लिए खरीदी जाती हैं, न कि पुनर्विक्रय के लिए। अंतिम वस्तुओं की कीमत को राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल किया जाता है। कारें, टेलीविजन, कपडें आदि अंतिम वस्तुएं हैं।
मध्यवर्ती और अंतिम वस्तुओं के बीच अंतर केवल एक उत्पाद के आधार पर नहीं किया जाता है, बल्कि इसे अंतिम उपयोग के आधार किया जाता है। उदाहरण के लिए, जब नानबाई द्वारा आटा ब्रेड बनाने के लिए खरीदा जाता है, तब इसे एक मध्यवर्ती वस्तु कहा जाता है, लेकिन जब एक परिवार द्वारा उसी आटे को खरीदा जाता है, तब इसे अंतिम वस्तु कहा जाता है। इसी तरह, कारखानों में प्रयुक्त कोयला एक मध्यवर्ती वस्तु है, जबकि घर की रसोई में प्रयुक्त कोयला एक अंतिम वस्तु है।
सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक कल्याण में घनिष्ट संबंध है। कल्याण से अभिप्राय कुल कल्याण के उस भाग से है जिसे मुद्रा के रूप में व्यक्त किया जा सकता है अथवा मापा जा सकता है। सकल राष्ट्रीय उत्पाद अथवा सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि से आर्थिक कल्याण में प्राय: धनात्मक सम्बन्ध होता है। सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि से आर्थिक कल्याण में भी वृद्धि होती है। किन्तु सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक कल्याण निम्नलिखित कई घटकों पर निर्भर करता है।
(1) सकल घरेलू उत्पाद का आकार एवं प्रति व्यक्ति आय - यदि सकल घरेलू उत्पाद का आकार बढ़ता है, तो प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ती है जिससे आर्थिक कल्याण में वृद्धि होती है तथा सकल घरेलू उत्पाद के आकार के घटने पर प्रति व्यक्ति आय भी घटती है जिससे आर्थिक कल्याण में कमी होती है।
(2) सकल घरेलू उत्पाद का वितरण- यदि सकल घरेलू उत्पाद का वितरण असमान है तथा इसका वितरण गरीबों के पक्ष में होता है तो आर्थिक कल्याण बढ़ेगा और यदि इसका वितरण धनवानों के पक्ष में होता है तो आर्थिक कल्याण कम होगा।
(3) राष्ट्रीय आय का उपयोग या व्यय- यदि राष्ट्रीय आय का व्यय / उपयोग उत्पादक एवं स्वास्थ्यवर्धक कार्यों में किया जाता है तो आर्थिक कल्याण में वृद्धि होगी और यदि नशीली वस्तुओं के उपभोग, आदि पर व्यय किया जाता है तो आर्थिक कल्याण कम होगा।
आय के चक्रीय ( वर्तुल ) प्रवाह का महत्त्व निम्नलिखित है :
A.
आरक्षित
नकद अनुपात को
बढ़ाना चाहिए
और सांविधिक
तरलता
अनुपात को कम
करना चाहिए
मुद्रा
स्फीति को कम
करने के लिए
सरकार को अर्थव्यवस्था
में मुद्रा
पूर्ति कम
करनी चाहिए जिसके
लिए वह
आरक्षित नकद
अनुपात और सांविधिक
तरलता
अनुपात , या
रेपो रेट को
बढ़ा कर
बैंकों की ऋण
के द्वारा मुद्रा
सृजन की
श्रमता को कम
कर सकती है|
कम
होती है B.
बढ़
जाती है C.
अपरिवर्तित
रहती है D.
असीमित
हॉट जाती है
सीमांत
सांविधिक
आवश्यकता
में वृद्धि
से बैंकों के
पास कुल
जमाओं में से
क़ानूनी तौर
पर ऋण देने की
श्रमता कम हो
जाती है|
माल-सूची
निवेश के लिए B.
विज्ञापन
के लिए C.
पुन:स्थापन
निवेश के लिए D.
इनमें
से कोई नहीं
मूल्यहास
आरक्षित कोष
का प्रयोग
घिसी-पिटी स्थिर
परिसंपत्त्तियों
का
पुन:स्थापन
करना हैं|
केवल
स्टॉक चरों
को B.
केवल
प्रवाह चरों
को C.
स्टॉक
तथा प्रवाह
दोनों चरों
को D.
इनमें
से कोई नहीं
कुछ
स्टॉक चरों
का प्रवाह
पहलू भी होता
हैं, उदहारण
के लिए, समय के
एक बिंदु पर
पूँजी एक
स्टॉक है
किन्तु
पूँजी के
स्टॉक में
वृद्धि
अर्थात एक
वर्ष के
दौरान पूँजी
निर्माण एक
प्रवाह है|
B.
मौद्रिक
प्रवाह C.
वास्तविक
प्रवाह D.
माल-सूचि
प्रवाह
परिवार
क्षेत्र से
उत्पादक
क्षेत्र की
ओर कारक
सेवाओं के
प्रवाह अथवा
उत्पादक
क्षेत्र से
परिवार
क्षेत्र की
ओर वस्तुओं
तथा सेवाओं के
वास्तिविक
प्रवाह के
उदाहरण माने
जा सकते हैं |
दिल्ली
तथा मनाली के
बिच की दूरी
स्टॉक चर हैं क्योंकि
समय की एक
विशेष बिंदु
पर इसे मापा
जाता हैं|
स्टॉक
का B.
स्टॉक
तथा प्रवाह
दोनों का C.
प्रवाह
का D.
न
ही स्टॉक का
और न ही
प्रवाह का
परिवार
की आय प्रवाह
हैं क्योंकि
इसे प्रति इकाई
समय अवधि में
मापा जाता
हैं|
प्रवाह
चर B.
स्थिर
सूचि C.
स्टॉक
चर D.
इनमें
से कोई नहीं
समय
के एक बिंदु
पर पूँजी एक
स्टॉक है उदहारण
जैसे
संपत्ति,
पूँजी आदि|
प्राकृतिक
आपदाएँ B.
माँग
में
परिवर्तन C.
तकनीक
में
परिवर्तन D.
दोनों
(2)
तथा (3)
तकनीक
और मांग किसी
भी समय बदली
जा सकती हैं उत्पादन
के अनुसार|
प्राकृतिक
आपदाएँ B.
माँग
में
परिवर्तन C.
तकनीक
में
परिवर्तन D.
इनमें
से कोई नहीं
प्राकृतिक
आपदाएँ किसी
भी समय आ सकती
हैं जैसे
भूकंप|
B.
बाढ़
के कारण हानि C.
बाज़ार
में आई
गिरावट के
कारण हानि D.
इनमें
से कोई नहीं
समय
के साथ
वस्तुओं के
मूल्य में
गिरावट होती हैं|
B.
वमुल्यहास
में वृद्धि
होती हैं C.
लाभ
में वृद्धि
होती हैं D.
लागत
में वृद्धि
होती हैं
ज्यादा
पूँजी से कम
समय में
वस्तुओं का
ज्यादा
उत्पादन
होगा|
रिज़र्व
बैंक और
व्यवसाहिक
बैंको की
कार्यवाही
से पूँजी के
स्टॉक में
पूँजी
निर्माण
होता हैं|
जिनका
उत्पादन
प्रक्रिया
में कुछ
वर्षों तक प्रयोग
किया जाता है B.
जिनका
उत्पादन
प्रक्रिया
में कई
वर्षों तक प्रयोग
किया जाता है C.
जिनमे
मूल्य्हास
की हानि
शामिल होती
हैं D.
दोनों
(2)
तथा (3)
पूँजीगत
वस्तुएँ वेह
वस्तुएँ हैं
जिनका उत्पादन
प्रक्रिया
में कई
वर्षों तक
प्रयोग किया
जाता है और
जिनमे
मूल्य्हास
की हानि
शामिल होती
हैं क्योंकि
इन वस्तुओं
का इस्तेमाल
निवेश के लिए
किया जाता
हैं|
B.
उपभोक्ता
वस्तुएँ C.
पूँजीगत
वस्तुएँ D.
इनमें
से कोई नहीं
मानवीय
आवश्यकताओं
को
प्रत्यक्ष
रूप से संतुष्ट
करने वाली
वस्तुएँ
उपभोक्ता
वस्तुएँ कहलाती
हैं क्योंकि
इनका सीधा
उपयोग
आवश्यकताओं की
संतुष्टि के
लिए किया
जाता हैं।
B.
रेडियो
C.
पेट्रोल
D.
दूध
कपडें
एक
अर्ध-टिकाऊ
वस्तु हैं
क्योंकि
इनका उपयोग
कुछ समय तक ही
किया जा सकता
हैं |
B.
टिकाऊ
उपभोक्ता
वस्तुओं के C.
एकल-उपयोग
उपभोक्ता
वस्तुओं के D.
पूँजीगत
वस्तुओं के
फ्रिज,
वाशिंग मशीन,
ए.सी उदाहरण
हैं टिकाऊ
उपभोक्ता
वस्तुओं के
क्योंकि इन
वस्तुओं का
इस्तेमाल
लम्बे समय तक
किया जा सकता
हैं |
B.
एक पूँजीगत
वस्तु C.
एक
अंतिम वस्तु D.
दोनों
(2)
तथा (3)
टैक्सी
चालक द्वारा
खरीदी हुई
कार पूँजीगत वस्तु
ओर अंतिम
वस्तु दोनों
ही कहलाएगी
क्योंकि वेह
इसका प्रयोग
खुद के उपभोग
के लिए भी कर
सकता हैं और
निवेश के तोर
पर भी|
B.
एक
अंतिम वस्तु
हैं C.
एक
मध्यवर्ती
वस्तु हैं D.
इनमें
से कोई नहीं
चीनी
के उत्पाद
में गन्ना एक
मध्यवर्ती
वस्तु हैं
क्योंकि
गन्ने के
बिना चीनी का
उत्पादन नही
हो सकता|
B.
मध्यवर्ती
वस्तुओं के C.
पूँजीगत
वस्तुओं के D.
इनमें
से कोई नहीं
परिवारों
द्वारा
उपयोग किए
जाने वाले फल
उदाहरण हैं
उपभोग
वस्तुओं के
क्योंकि वेह
अंतिम उपभोग
के लिए
प्रयोग किए
जाते हैं और
उनका निवेश
नहीं किया जा
सकता|
प्रवाह
किसी आर्थिक
चर की वह
मात्रा है
जिसे किसी
समय अवधि के
दौरान मापा
जाता है |
द
जनरल थ्योरी
ओफ
एम्प्लोयमेंट, इंटरेस्ट
एंड मनी | B.
S = C C.
Y = C D.
C = 0
समविच्छेद
बिंदु पर आय
उत्पादन के
बराबर होती है यह शून्य
बचत की
स्थिति को
दर्शाता है।
इसे समस्तर बिंदु
भी कहा जाता
है।
B.
C.
D.
MPS= DS/DY
0.3= DS/5000
DS=
5000 x 0.3
DS=
1500
B.
1- MPC = MPS C.
1-
MPS = MPC D.
MPS= 1+MPC
MPC+MPS=1,
MPS= 1- MPC
MPS बचत
व्यय वक्र का ढलान
है।
B.
सीमांत
बचत
प्रवृत्ति C.
सीमांत
उपभोग
प्रवृत्ति 0 D.
C के
मूल्य से जब
में Y
स्थिर होता
है
उपभोग
फलन उपभोग और
आय के बीच के
फलनात्मक
संबंधों को
प्रदर्षित
करता है।
B.
0.60 C.
250 D.
0.25
APC= C/Y
APC= 3000/5000 = 0.60
B.
C.
D.
MPC= DC/DY
0.6= DC/100
DC= 60
B.
निजी
उपभोग व्यय + निजी
निवेश व्यय के
रूप में C.
निजी
निवेश व्यय +
निजी उपभोग
व्यय + सरकारी
व्यय के रूप
में D.
निजी
उपभोग व्यय +
सरकारी व्यय +
निजी निवेश
व्यय + शुद्ध
निर्यातों
के रूप में
2-क्षेत्रीय
बंद
अर्थव्यवस्था
में समग्र
माँग का
अनुपात निजी
उपभोग व्यय + निजी
निवेश व्यय के
रूप में लगाया
जाता है|
B.
निजी
/ घरेलू उपभोग
व्यय + निजी
निवेश व्यय +
सरकारी व्यय +
शुद्ध निर्यात
C.
सरकारी
व्यय + निजी
निवेश व्यय D.
निजी
निवेश व्यय
समग्र
मांग एक वित्तीय
वर्ष के दौरान
आय के दिए गए स्तर
पर देश में उत्पादित
वस्तुओं तथा सेवाओं
की खरीद पर वांछित
व्यय या नियोजित
व्यय है।
समग्र
मांग के चार
घटक हैं:
1)
घरेलू
उपभोग व्यय (C)
2)
निजी
निवेश व्यय (I)
3)
सरकारी
व्यय (G) तथा
4) शुद्ध
निर्यात (X-M)
समग्र
मांग वक्र के
ऊपर की ओर
खिसकने के
परिणामस्वरूप
राष्ट्रीय
आय में
वृद्धि
होगी।
गुणक
और MPC का एक
दूसरे के साथ
धनात्मक
संबंध है।
उपभोग
और बचत
दो
दृष्टिकोण
हैं:
मौद्रिक
पूर्ति में
वृद्धि के
कारण अर्थव्यवस्था
में अतिरिक्त
मांग या अधि
मांग हो जाती
है।
राजकोषीय
नीति
स्वायत्त
निवेष से अर्थ
उस निवेष से होता
है जो आय या उत्पादन
के स्तर से परिवर्तित
नहीं होता है।
चूंकि
MPC + MPS = 1 होता
है, यदि
सम्पूर्ण
आय को बचाया
जाता है तो MPS का
अधिकतम मान 1 के
बराबर होगा। इसलिए,
0 < MPC <
1
उपभोग
और आय के बीच
के संबंध को
उपभोग फलन
कहा जाता है
और इसे C=
a+bY द्वारा
दर्शाया
जाता है।
सीमांत
बचत प्रवृत्ति
आय में परिवर्तन
के फलस्वरूप बचत
में परिवर्तन
के अनुपात को व्यक्त
करती है। प्रतीकात्मक
रूप में, MPS
= ΔS/ΔY
समग्र
मांग के चार
घटक हैं: 1) घरेलू
उपभोग व्यय (C) 2) निजी निवेश
व्यय (I) 3) सरकारी
व्यय (G)
तथा 4) शुद्ध
निर्यात (X-M)
पूर्ण
रोजगार एक
ऐसी स्थिति
को दर्शाता
है जहां
अर्थव्यवस्था
में उपलब्ध
सभी
संसाधनों को
पूर्ण रूप से
प्रयुक्त
या नियोजित
किया जाता
है।
प्राथमिक
घाटे का
ऋणात्मक
होना यह
दर्शाता है
कि सरकार को
अभी भी ब्याज
का भुगतान
करना है |
भारत
में वित्तीय
वर्ष 1 अप्रैल
से दूसरे
वर्ष के 31 मार्च
की तक होता है |
सरकार
अपनी आय तथा
व्यय निति
द्वारा
संवृद्धि के
उच्च स्तर को
प्राप्त
करती है |
राजस्व
प्राप्तियाँ
वह प्राप्तियाँ
हैं जिसमे न
तो कोई देयता
उत्पन्न
होती है और न
ही
परिसंपत्तियों
में कमी आती
है|
राजस्व
व्यय से
अभिप्राय
सरकार के उस
व्यय से है
जिससे न तो
सरकार की
परिसंपत्तियाँ
उत्पन्न हैं
और न ही यह
व्यय सरकार
की देयता को
कम करता है|
प्रत्यक्ष कर वह कर है जिस कर का अंतिम भार उसी व्यक्ति को वहन करना पड़ता है जिस पर वह कानूनी तौर पर आरोपित किया गया है|
अप्रत्यक्ष
कर वह कर हैं
जिसमे कर का
भार और
भुगतान का
दायित्व अलग
अलग व्यक्तियों
पर पड़ता है।
उदाहरण ·
बिक्री
कर ·
उत्पाद
शुल्क
पूँजीगत
प्राप्तियाँ
वह
प्राप्तियाँ
हैं जिनसे
देयता
उत्पन्न
होती है या
परिसंपत्तियाँ
कम होती है|
पूँजीगत
व्यय वह व्यय
है जो सरकार
की परिसंपत्तियों
में वृद्धि
करता है अथवा
सरकार की देयता
को कम करता है|
(i) सरकार
द्वारा भूमि
खरीदने पर
व्यय, (ii) केन्द्रीय
सरकार
द्वारा
राज्य
सरकारों को दिए
गए ऋण|
ब्याज
के भुगतान को
राजस्व व्यय
इसलिए माना जाता
है क्योंकि
यह न तो देने
वाले की
देयता को कम करता
है और न ही
उसकी
परिसंपत्तियों
में वृद्धि
करता है|
विनिवेश
सरकार की
पूँजीगत
प्राप्ति है
क्योंकि यह
परिसंपत्तियों
में कमी करता
है|
संतुलित
बजट वह बजट है
जिसमे
सरकारी व्यय
तथा सरकारी
प्राप्तियाँ
बराबर होती
हैं|
राजकोषीय
एक वित्तीय
वर्ष के
दौरान सरकार
के कुल
उधारों को
प्रकट करता
है| प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे तथा ब्याज के भुगतान का अंतर है| प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज का भुगतान
अधिशेष
बजट वह बजट जिसमें
सरकार की अनुमानित
प्राप्तियां
उसके अनुमानित
व्यय के अधिक होती
हैं, अधिशेष बजट
कहलाता है ।
शुल्क
केवल एक अनिवार्य
भुगतान है जो दाता
के द्वारा विशिष्ट
सेवाओं को प्राप्त
करने के लिए की
जाती है। उदाहरणर
भूमि पंजीकरण
शुल्क पासपोर्ट
शुल्क कोर्ट शुल्क
जन्म और मृत्यु
पंजीकरण शुल्क
आदि | जबकि
लाइसेंस या परमिट
शुल्क सरकार द्वारा
किसी विशष्ट कार्य
को करने की अनुमति
देने के लिए प्राप्त
की जाती हैं | उदाहरण
ड्राइविंग लाइसेंस
शुल्क, आयात लाइसेंस
शुल्क आदि |
i) यह कथन गलत
है| विद्यालय
की इमारत का
निर्माण एक
पूँजीगत
व्यय है
क्योंकि यह
सरकार के लिए परिसंपत्ति
का निर्माण
करता है|
प्राथमिक
घाटा =
राजकोषीय
घाटा – ब्याज
का भुगतान 4,500
करोड़ =
राजकोषीय
घाटा – 400 करोड़
सार्वजनिक
वस्तुएँ वे
वस्तुएँ
होती हैं जो समाज
के सभी
वर्गों
द्वारा
सामूहिक
प्रयोग के लिए
होती हैं|
सरकार
द्वारा
केंद्रीय
बैंक से उधार
मुद्रा-स्फीति
को बढ़ावा
देती है
क्योंकि
मुद्रा की पूर्ति
में वृद्धि
की सामान्य
कीमत स्तर पर
प्रत्यक्ष
प्रभाव होता
है विशेषकर
अल्पविकसित
देशों में
जहाँ
उत्पादन
क्षमता
अत्यधिक सीमित
होती है|
यह
कथन सही है|
सरकार का
पूँजीगत
व्यय सरकार के
लिए
परिसंपत्तियाँ
उत्पन्न
करता है
(पूँजीगत
वस्तुओं की
परियोजनाओं
पर व्यय
द्वारा) या इसके
दायित्व को
कम करता है
(ऋणों की
अदायगी द्वारा)
|
रिकार्डो
के अनुसार जब
उच्च घाटे की
स्थिति में
लोग अधिक बचत
करते हैं तो
उसे समतुल्यता
कहते हैं | ऐसा
इसलिए कहा
जाता है
क्योंकि
करारोपण और
ऋण ग्रहण
व्यय के लिए
समतुल्य
वित्त साधन
हैं। आज
यदि सरकार ऋण
लेकर व्यय
में
बढोत्तरी
करती है उसका
भुगतान
भविष्य में
करों की दर
में वृद्धि
करके किया
जायेगा इसका
अर्थव्यवस्था
पर वैसा ही
प्रभाव
पड़ेगा
जैसाकि
सरकार आज
करों की दर में
वृद्धि करके
सरकारी व्यय
में वृद्धि
करने पर पड़ता
है |
आर्थिक
मंदी वह
स्थिति है
जिसमें
निम्न समग्र
माँग के कारण
निम्न निवेश
होता है तथा
इसलिए सकल
घरेलू
उत्पाद की संवृद्धि
दर कम होती
जाती है| जब
सकल घरेलू उत्पाद
की संवृद्धि
दर गिरती है
सरकार की कर
प्राप्तियों
(प्रत्यक्ष
तथा
अप्रत्यक्ष
करों के
द्वारा) में
कमी होती है|
अंतत: मंदी के
दौरान सरकार
प्राप्तियों
का कम होना|
वेतन
संरचना की
पुनरावृति
सरकार के
राजस्व व्यय
को बढाती है|
इसका अर्थ
होता है कि
सरकार के
राजकोषीय
घाटे में
वृद्धि होना |
यदि ब्याज भुगतान
समान रहता है
तो राजकोषीय
घाटे में वृद्धि
के कारण
प्राथमिक
घाटे में भी
वृद्धि होगी
(राजकोषीय
घाटा – ब्याज
भुगतान =
प्राथमिक
घाटा )|
सरकारी
बजट
संवृद्धि
में योगदान
देता है क्योंकि
बजट व्यय का
एक
महत्वपूर्ण
प्रतिशत सार्वजनिक
क्षेत्र के
उपक्रमों की
संवृद्धि तथा
विस्तार पर
खर्च किया
जाता है|
सरकार
अनिवार्य
वस्तुओं के
उत्पादन के
उच्च स्तर को
बनाए रखने के
लिए आर्थिक
सहायता भी
प्रदान करती
है| स्थिरता
को वित्तीय
अनुशासन के
द्वारा मुद्रा-स्फीति
का समान करके
तथा सरकार
द्वारा उदारीकृत
खर्च के
द्वारा
अवस्फीति का
समान करके प्रोत्साहित
किया जाता है |
वित्तीय
अनुशासन का
लक्ष्य
मुद्रा-स्फीति
के दौरान
समग्र माँग
को कम करना
होता है|
उदारीकृत
खर्च
अवस्फीति के
दौरान समग्र
माँग को बढाता
है इस प्रकार
अर्थव्यवस्था
में स्थिरता
बनी रहती है |
(i) एक
सार्वजनिक
क्षेत्र के
उपक्रम के
अंश की बिक्री
से प्राप्ति
एक पूँजीगत
प्राप्ति है
क्योंकि
इसके कारण
सरकार की
परिसंपत्तियों
में कमी होती
है| (iv)
सरकार
द्वारा
प्राप्त
किया गया
आयकर राजस्व प्राप्ति
है क्योंकि
इसके कारण न
तो कोई देयता
उत्त्पन्न
होती है और न
ही सरकार की
परिसंपत्तियों
में कमी होती
है |
राजस्व
घाटा तब
उत्त्पन्न
होता है जब
सरकार राजस्व
व्यय को
अनुत्पादक
व्यय (जैसे –
आर्थिक
सहायता पर
तथा देश के
कानून एंव
व्यवस्था और
सुरक्षा से
संबंधित
खरीद पर किया
गया व्यय) पर
किया जाता है
तथा राजस्व
व्यय राजस्व
प्राप्तियों
से अधिक होता
है| अतः यह
अर्थव्यवस्था
में वस्तुओं
एंव सेवाओं
के प्रवाह
में बिना कुछ
जोड़े, राजकोषीय
घाटे में
योगदान करता
है| राजस्व
घाटा सरकार
को उधार लेने
के लिए के लिए
या विनिवेश
करने के लिए
बाध्य करता
है| उधार के
कारण राष्ट्रीय
ऋण में
वृद्धि होती
है| विनिवेश
के कारण
परिसंपत्तियों
का स्वामित्व
सार्वजनिक
क्षेत्रोँ
से निजी
क्षेत्रोँ की
ओर
हस्तांतरित
होता रहता है
जिसका
उद्देश्य
केवल लाभ
अर्जित करना
होता है| यह
घाटा न केवल
वर्तमान के
लिए वरन
भविष्य के लिए
भी संकट की
स्थिति
उत्पन्न कर
देता है | अतः
हम यह कह सकते
हैं की
राजस्व घाटा
को कम किया
जाना चाहिए|
निम्नलिखित
अवलोकन
उजागर करते
हैं कि किस प्रकार
सरकार अपनी
बजट नीति के
द्वारा
संसाधनों के
आबंटन को
प्रभावित कर
सकती हैः (ii)
सरकार
‘जीवन-रक्षक ‘
दवाईयों
जैसी
अनिवार्य
वस्तुओं के
उत्पादन में
निवेश को
प्रेरित
करने के लिए
कर-मुक्तता (टैक्स हॉलिडे) दे
सकती है| राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ पर्प्तियाँ = = 39,700 करोड़ – 7,000 करोड़ = राजस्व घाटा = राजकोषीय घाटा = प्राथमिक घाटा =
राजकोषीय
घाटे में
कटौती निम्न
प्रकार से की
जा सकती हैं B.
स्थिर
विनिमय दर
प्रणाली C.
तिरती
विनिमय दर
प्रणाली D.
अधिकीलित
दर प्रणाली
प्रबंधित
तिरती प्रणाली
को जिसे त्रुटिबहुल
प्रणाली के
रूप में भी
जाना जाता है, उसमें
स्थिर और
नम्य दोनों
ही विनिमय दर
प्रणालियों
की
विशेषताएं
होती हैं।
विदेशी
विनिमय B.
सेवाएं
C.
स्थिर
संपत्तियां D.
संयंत्र
और मशीनरी
स्पॉट
बाज़ार
विदेशी मुद्रा
के क्रय और
विक्रय को
परिलक्षित
करता है। यह
विनिमय की स्पॉट
दर को
परिभाषित
करता है।
B.
संकुचित
अवधारणा C.
कम
महत्वपूर्ण D.
अधिक
महत्वपूर्ण
अदायगी
संतुलन एक
वृहद
अवधारणा है
क्योंकि
इसमें व्यापार
संतुलन, सेवा
संतुलन,
एकतरफा
हस्तांतरण
संतुलन और
पूंजी
लेनदेन
संतुलन
सम्मिलित
है।
अदायगी
संतुलन का ऋण
विभिन्न
मदों का खाता दिखाता
है जिसके लिए
देश ने शेष
विश्व को
भुगतान किया
होता है। यही
कारण हैं कि
सामानों के
आयात को ऋण
में डाला जाता
है।
B.
गिरने,
अधिक होती है C.
बढ़ने
से, अधिक होती
है D.
गिरने,
कम होती है
ऐसा
इसलिए
क्योंकि
मांग में
वृद्धि से आय
का एक हिस्सा
विदेशी
सामानों पर
खर्च हो जाता
है।
साख
कार्य B.
हस्तांतरण
कार्य C.
जोखिम
पूर्वोपाय
कार्य D.
प्रबंधित
तिरती
वह
बाज़ार
जिसमें कई
देशों की
राष्ट्रीय
मुद्राओं को किसी
दूसरे देश की
मुद्रा में
बदला जाता है,
विनिमय किया
जाता है या
व्यापार
किया जाता है
उसे विदेशी
विनिमय
बाज़ार कहते
हैं। विदेशी
विनिमय
बाज़ार जो
अंतर्राष्ट्रीय
व्यापार के
लिए साख की
व्यवस्था
करते हैं उसे
बाज़ार का साख
कार्य कहते
हैं।
बंद
अर्थव्यवस्था
गुणक
= B.
सांकेतिक
प्रभावी
विनिमय दर C.
ब्याज
दर विभेदक D.
क्रय
शक्ति समता
ब्याज
दर विभेदक
विनिमय दर की
गतिविधियां
निर्धारित
करने में एक
महत्वपूर्ण
कारक है।
त्रुटिपूर्ण
विनिमय दर B.
वास्तविक
प्रभावी
विनिमय दर C.
विदेशी
विनिमय दर D.
सांकेतिक
प्रभावी
विनिमय दर
किसी
दी गयी
मुद्रा की
सापेक्ष क्रय
शक्ति का
मापन
प्रभावी
विनिमय दर कहलाता
है। जब हम विदेशी
वस्तुओं की दी
हुई टोकरी की एक
इकाई का क्रय करने
के लिए
आवश्यक घरेलू
वस्तुओं की मात्रा
के रूप में
विनिमय दर
परिकलित
करते हैं तो
इसे वास्तविक
प्रभावी
विनिमय दर कहा
जाता है|
व्यापार
संतुलन दूसरे
देशों के साथ
वस्तुओं और
सेवाओं के लेन-देन
अभिलिखित करता
है।
यह
वह दर होती है
जिस दर पर एक
देश की
मुद्रा
दूसरे देश की
मुद्रा से
बदली जाती
है।
विदेशी
विनिमय की
कीमत में
वृद्धि से
विदेशी वस्तुएँ
खरीदने की
रुपये के रूप
में लागत में वृद्धि
होती है| इससे
आयात में कमी
आती है और
विदेशी
विनिमय की
माँग कम हो
जाती है|
वह
मुद्रा जिसे
अंतर्राष्ट्रीय
भुगतान करने
के लिए
प्रयोग किया
जाता है उसे
विदेशी मुद्रा
कहते हैं।
अदायगी
संतुलन के दो
घटक हैं: (i) चालू
खाता (ii) पूंजी
खाता
अदायगी
संतुलन एक
देश का विशव
के बाकि
देशों के साथ
लेन-देन की लेखाओं
का संक्षिप्त
विवरण करता
है।
विदेशी
मुद्रा की अपूर्ति
के विभिन्न
सोत्र इस प्रकार
हैं: ·
विदेशियों
द्वारा
घरेलू
वस्तुओं तथा
सेवाओं का
क्रय ·
विदेशियों
द्वारा देश
में यात्रा विदेश
में काम करने
वाले भारतीय
श्रमिकों के द्वारा
भारत भेजी गई
बचत एवं
उपहार, और ·
विदेशियों
द्वारा देश
में
परिसंपत्तियों
का क्रय|SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
चक्रीय
प्रवाहSOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: CSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
SOLUTION
A.
सामान्य
टूट-फूट SOLUTION
A.
उत्पादन
क्षमता में
वृद्धि होती
हैं SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: CSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
मध्यवर्ती
वस्तुएँ SOLUTION
A.
कपडें
SOLUTION
A.
अर्ध-टिकाऊ
उपभोक्ता
वस्तुओं के SOLUTION
A.
एक
मध्यवर्ती
वस्तु SOLUTION
A.
एक पूँजीगत
वस्तु हैं SOLUTION
A.
उपभोग
वस्तुओं के SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
Y = SSOLUTION
Y = 5,000 हो, तो
S क्या
होगा?
A.
1500
300
600
900SOLUTION
A.
MPC+MPS=1SOLUTION
में b धारणा
से अभिप्राय
है :
A.
C के
मूल्य से जब Y = 0SOLUTION
यहां
C=
उपभोग
यह
उपभोग व्यय
की राषि है जब
आय षून्य है।
=
स्वायत्त
उपभोग
b =
सीमांत
उपभोग
प्रवृत्ति 0
5,000
तथा (C) =
3000, तो औसत
उपभोग
प्रवृत्ति
होगी
A.
750SOLUTION
100 की
वृद्धि होने
पर उपभोग
व्यय में
कितना परिवर्तन
होगा ?
A.
60
50
40
90SOLUTION
A.
निजी
उपभोग व्यय
के रूप मेंSOLUTION
A.
निजी
/ घरेलू उपभोग
व्यय SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
1. AS और
AD दृष्टिकोण
2. S और
I दृष्टिकोण
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(ii) यह
कथन गलत है कि
उपहार कर एक
पूँजीगत
प्राप्ति है
क्योंकि इसके
कारण न तो
देयता
उत्पन्न
होती है और न
ही सरकार की
परिसंम्पत्तियों
में कमी होती
है| A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
राजकोषीय
घाटा = 4900 करोड़
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
उदाहरण:
राष्ट्रीय
सुरक्षा तथा
न्यायतंत्र|
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(ii)
जनता से ऋण एक
पूँजीगत
प्राप्ति है
क्योंकि इसके
कारण सरकार
की देयता में
वृद्धि होती
है |
(iii)
सार्वजनिक
उपक्रमों से
लाभ एक
राजस्व
प्राप्ति है
क्योंकि
इसके कारण न
तो कोई देयता उत्पन्न
होती है और न
ही सरकार की
परिसंपत्तियों
में कमी होती
है |
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
(i)
सरकार ऐसी
वस्तुओं (
जैसे – मोटा
कपड़ा) पर
आर्थिक
सहायता
प्रदान कर
सकती है
जिनका
उत्पादन
समाज के
निर्धन
वर्गों के द्वारा
किया जाता है|
इसलिए
संसाधनों को
‘धनी वर्ग के
लिए वस्तुओं’
के उत्पादन
से ‘निर्धन वर्ग
के लिए
वस्तुओं के
उत्पादन की
ओर स्थानांतरित
किया जाता है
(iii) सरकार
अपने
निवेशों को
उत्पादन की
अकुशल इकाइयों
की ओर से
हस्तांतरित करके
संसाधनों के
आबंटन को
प्रभावित कर
सकती है|
संसाधनों का
आबंटन तब भी
प्रभावित
होगा जब
सरकार
सार्वजनिक
वस्तुओं के
उत्पादन पर
किए जाने
वाले निवेश
में वृद्धि
करती है|
(iv)
ऐसी वस्तुओं
(जैसे शराब
तथा सिगरेट)
पर उच्च कर
लगाया जा
सकता है
जिनका
उत्पादन
समाज के लिए
हानिकारक
होता है|
तदनुसार,
संसाधन
सामाजिक उपयोगी
गतिविधियों के
उत्पादन की
ओर वितरित
होंगे |
(v)
सरकार खाद्य
फसलों के
पक्ष में
अपनी समर्थन कीमत
नीति (सपोर्ट
प्राइस
पालिसी)
बनाती है बजटीय
आबंटन बना
सकती है| इससे
संसाधन
गैर-खाद्य
फसलों से खाद्य
फसलों की ओर स्थानांतरित
होते है |
मदें
(
करोड़ )
![]()
राजस्व व्यय
32,250
पूँजीगत व्यय
30,000
राजस्व प्राप्तियाँ
12,550
पूँजीगत प्राप्तियाँ (उधार रहित)
10,000
ब्याज भुगतान
7,000
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
=
32,250 करोड़ –
12,550 करोड़
19,700 करोड़
राजकोषीय घाटा = राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ - पूँजीगत प्राप्तियाँ (उधार रहित) = उधार
= 32,250 + 30000 - 12,550 - 10,000 =
39,700 करोड़
|प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान
32,700 करोड़
19,700 करोड़ |
39,700 करोड़ |
32,700 करोड़|
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
प्रबंधित
तिरतीSOLUTION
A.
SOLUTION
A.
वृहद
अवधारणा SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: ASOLUTION
A.
बढ़ने,
कम होती है SOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: ASOLUTION
A.
वास्तविक
प्रभावी
विनिमय दर SOLUTION
A.
SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
A.
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
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