1978 में पार्टी ने आधुनिकीकरण के अपने चार सूत्री लक्ष्य की घोषणा की। यह था,विज्ञान, उद्योग, कृषि और रक्षा का विकास। यह चीन में समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था की शुरुआत का हिस्सा था।
माओ द्वारा चीन में 1965 में महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति छेड़ी गई। पुरानी संस्कृति, पुराने रीति-रिवाजों, और पुरानी आदतों के खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए रेड गार्ड्स - मुख्यतः छात्रों और सेना का इस्तेमाल किया गया।
(i) राष्ट्रीयकरण एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सरकार आर्थिक समानता के लिए किसी भी निजी संपत्ति, व्यापार और उद्योग को अपने सीधे नियंत्रण में लेने का दावा करती है।
(ii) ऐसा करने का उद्देश्य लोगों में भौतिक धन का समान रूप से पुनः वितरण करना है।
साम्यवाद की स्थापना करने हेतु कौमिंटर्न और सोवियत संघ ने दुनिया भर में साम्यवादी पार्टियों का समर्थन किया जो परंपरागत मार्क्सवादी समझ पर कार्य करते थे।
सन यात सेन के बुनियादी सिद्धांतों में राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और लोगों की आजीविका सम्मिलित थे।
1911 की क्रांति मंचू के निरंकुश शासन के खिलाफ सन यात सेन की KMT के नेतृत्व में एक राष्ट्रवादी लहर थी। 1911 में विद्रोह के बाद नानकिंग को अधिकृत कर लिया गया था और फरवरी 1912 1912 में गणराज्य घोषित किया गया।
युआन शि काई एक रूढ़िवादी-राष्ट्रवादी थे जो चीन में राजतंत्रीय प्रणाली को पुनः स्थापित करना चाहते थे। इसने विशेष रूप से दक्षिणी चीनी प्रांतों में, लोगों के विद्रोह का नेतृत्व किया। 1916 में उनकी मृत्यु हो गई।
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार ने चीन में अपने समेकन के लिए साम्यवादियों के लिए एक अवसर प्रदान किया। जापानी राष्ट्रवादियों को कम्युनिस्टों द्वारा खदेड़ दिया गया और चीन पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के बैनर तले कम्युनिस्ट शासन के अधीन आ गया था।
लांग मार्च , कुओमीनतांग की यनान में एक नए संचालन केंद्र बनाने की गतिविधियों जिससे कि वे उनके कार्यक्रम का अनुसरण कर सके, से बचने के लिए चीन के साम्यवादी दल की सेना द्वारा 1934-35 में किया गया एक कूच था।
चियांग काई-शेक के नेतृत्व में कुओमीनतांग की पराजय ने उसे ताइवान पलायन करने के लिए बाध्य कर दिया । वहाँ उन्होंने चीनी गणतंत्र की स्थापना की। 1894-95 में जापान के साथ हुई लड़ाई में यह जगह चीन को जापान के हाथ में सौंपनी पड़ी थी और तब से वह जापानी उपनिवेश बनी हुई थी।
अपनी भयंकर हार के बावजूद जापानी अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनर्निर्माण हुआ, उसे एक युद्धोत्तर ‘चमत्कार’ कहा गया है। लेकिन यह चमत्कार से कहीं अधिक था और इसकी जड़ें जापान के लंबे इतिहास में निहित थीं। संविधान को औपचारिक स्तर पर गणतांत्रिक रूप इसी समय दिया गया। लेकिन जापान में जनवादी आंदोलन और राजनीतिक भागेदारी का आधार बढ़ाने में बौद्धिक सक्रियता की ऐतिहासिक परंपरा रही है। युद्ध से पहले के काल की सामाजिक संबद्धता को गणतांत्रिक रूपरेखा के बीच सुदृढ़ किया गया। इसके चलते सरकार, नौकरशाही और उद्योग के बीच एक करीबी रिश्ता कायम हुआ। अमरीकी समर्थन और साथ ही कोरिया और वियतनाम में जंग से जापानी अर्थव्यवस्था को मदद मिली।
1870 के दशक से नयी विद्यालय-व्यवस्था का निर्माण शुरू हुआ। लड़के और लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य हो गया, और 1910 तक तकरीबन ऐसी स्थिति आ गई कि स्कूल जाने से कोई वंचित नहीं रहा। पढ़ाई की फीस बहुत कम थी। शुरू में पाठ्यचर्या पश्चिमी नमूनों पर आधारित थी लेकिन 1870 के दशक के आते-आते आधुनिक विचारों पर ज़ोर देने के साथ-साथ राज्य के प्रति निष्ठा और जापानी इतिहास के अध्ययन पर बल दिया जाने लगा। शिक्षा मंत्रालय पाठ्यचर्या पर, किताबों के चयन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर नियंत्रण रखता था। जिसे नैतिक संस्कृति का विषय कहा गया उसे पढ़ना ज़रूरी था और किताबों में माता पिता के प्रति आदर, राष्टं के प्रति वफादारी और अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी जाती थी।
मेजियों की पुनर्स्थापना के पीछे कई कारण थे। देश में तरह-तरह का असंतोष था, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व कूटनीतिक संबंधें की भी मांग की जा रही थी। इसी बीच 1853 में अमरीका ने कॉमोडोर मैथ्यू पेरी (1794-1858) को जापानी सरकार से एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग के साथ भेजा जिसमें जापान ने अमरीका के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंध बनाए। जापान ने अगले साल ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए। जापान चीन के रास्ते में था और अमरीका चीन में एक बड़ा बाज़ार देखता था। इसके अलावा अमरीका को प्रशांत महासागर में अपने बेड़ों के लिए ईंमान लेने की जगह चाहिए थी। उस समय केवल एक ही पश्चिमी देश जापान के साथ व्यापार करता था। वह था, हॉलैंड।
A.
कालिक संश्लेषण का प्रयास करता है।
B.
क्षेत्रीय संश्लेषण का प्रयास करता है।
C.
विस्तृत क्षेत्रीय संश्लेषण का प्रयास करता है।
D.
अर्थशास्त्रीय संश्लेषण का प्रयास करता है।
भूगोल एक संश्लेषण विषय है। यह क्षेत्रीय संश्लेषण का प्रयास करता है तथा इतिहास कालिक संश्लेषण का अध्ययन करता है।
A.
क्या, कहाँ के संबंध में होते हैं।
B.
कहाँ, क्यों के संबंध में होते हैं।
C.
क्या, कहाँ और क्यों के संबंध में होते हैं।
D.
क्यों, कैसे के संबंध में होते हैं।
भूगोल एक विषय के रूप में प्रश्नों के तीन सेट से सम्बंधित होता है। वे प्रश्न क्या, कहाँ और क्यों के संबंध में होते हैं।
A.
स्थिर हैं।
B.
स्थिर एवं गतिशील हैं।
C.
अत्यधिक गतिशील हैं।
D.
अत्यधिक स्थिर हैं।
भौतिक तथा मानवीय दोनों प्रकार के भौगोलिक तथ्य स्थैतिक नहीं, अपितु गत्यात्मक होते हैं। वे सतत् परिवर्तनशील पृथ्वी तथा अथक एवं निरंतर सक्रिय मानव के बीच आबद्ध प्रक्रियाओं के फलस्वरूप कालांतर में परिवर्तित होते रहते हैं।
A.
आर्थिक भूगोल
B.
परिवहन भूगोल
C.
अधिवास भूगोल
D.
सामाजिक भूगोल
अधिवास भूगोल मानव भूगोल की एक प्रमुख शाखा हैं। इस शाखा में ग्रामीण एवं नगरीय अधिवासों की स्थिति, उत्पत्ति, प्रतिरूप, व्याव्सायिक संरचना आदि तथ्यों का अध्ययन किया जाता हैं।
A.
पृथ्वी का अध्ययन
B.
हमारी पृथ्वी
C.
पृथ्वी तथा सौर प्रणाली
D.
ग्रहों का अध्ययन
भूगोल पृथ्वी का वर्णन है। सर्वप्रथम भूगोल शब्द का प्रयोग ग्रीक विद्वान इरेटॉस्थेनीज़ ने (276-194 ई॰पू) ने किया। यह शब्द, ग्रीक भाषा के दो मूल ‘Geo ’(पृथ्वी) एवं ‘graphos’ (वर्णन) से लिया गया है।
A.
समाज शास्त्र है।
B.
मानव-शास्त्र है।
C.
भूगोल है।
D.
इतिहास है।
इतिहास, कालिक संश्लेषण का प्रयास करता है।
A.
क्यों
B.
क्या
C.
कहाँ
D.
कब
एक भूगोलवेत्ता तथ्यों की व्याख्या कार्य-कारण संबंधों के ढाँचे में ही करता है, क्योंकि यह केवल व्याख्या में ही सहायक नहीं होता, अपितु तथ्य के पूर्वानुमान एवं भविष्य के परिप्रेक्ष्य में देखने की क्षमता भी रखता है।
A.
हेरोडटस
B.
गैलीलियो
C.
इरेटास्थेनीज़
D.
अरस्तू
सर्वप्रथम भूगोल शब्द का प्रयोग ग्रीक विद्वान इरेटास्थेनीज़ ने 276 -194 ई॰ पू॰ में किया।
A.
क्षेत्रीय भूगोल
B.
वस्तुगत भूगोल
C.
आर्थिक भूगोल
D.
भौतिक भूगोल
आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करने वाली भूगोल की शाखा को आर्थिक भूगोल कहते हैं।
A.
तत्त्वों के मध्य कार्य-कारण संबंध को ज्ञात करने में है।
B.
तत्त्वों का अध्ययन करने में है।
C.
ब्रह्मांड का अध्ययन करने में है।
D.
शैलों के अध्ययन करने में है।
भूगोल संश्लेषण की एक विषय-वस्तु है। भूगोल स्थानिक संदर्भ में यथार्थता को समग्रता से समझने में सहायक होता है।
A.
भौतिक भूगोल का भाग है।
B.
जैव भूगोल का भाग है।
C.
मानव भूगोल का भाग है।
D.
राजनीतिक भूगोल का भाग है।
जैव भूगोल, विभिन्न जीवधारियों और प्रजातियों के भूस्थानिक वितरण, स्थानिक वितरण के कारण और वितरण के प्रतिरूपों और उनमें समय के सापेक्ष होने वाले बदलावों का अध्ययन करता है|
A.
पत्तन
B.
सड़क
C.
मैदान
D.
जल उद्यान
मैदान प्राकृतिक बलों द्वारा निर्मित होता है।
A.
इतिहास और भूगोल
B.
भूगोल और समाजशास्त्र
C.
भूगोल और नृविज्ञान
D.
भूगोल और दर्शन
इतिहास समय से और भूगोल स्थान से संबंधित है।
A.
दूर संवेदन तकनीक, भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS.), वैश्विक स्थितीय तंत्र (GPS) हैं।
B.
कंप्यूटर मानचित्रकारी है।
C.
गुणात्मक तकनीक है।
D.
मात्रात्मक तकनीकें हैं।
भू-सूचना विज्ञान तकनीकें दूर संवेदन तकनीक, भौगोलिक सूचना तंत्र, वैश्विक स्थितीय तंत्र आदि हैं।
A.
अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट
B.
हैटनर
C.
कार्ल रिटर
D.
रिचर्ड हार्टशोर्न
वस्तुगत भूगोल का उपागम वही है जो सामान्य भूगोल का होता है। इस उपागम को एक जर्मन भूगोलवेत्ता, अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट (1769-1859) द्वारा प्रवर्तित किया गया।
इरैटोस्थनिज़ (276 ईसापूर्व – 194 ईसापूर्व) ने पृथ्वी के आकार की गणना की थी|
बीसवीं शताब्दी के दौरान पश्चिम में, भूगोल चार अवस्थाओं से गुजरा:
क. पर्यावरण नियतिवाद
ख. प्रादेशिक भूगोल
ग. मात्रात्मक क्रांति
घ. आलोचनात्मक भूगोल
18वीं और 19वीं शताब्दी में, भूगोल यूरोप के साथ-साथ पेरिस और बर्लिन के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गया था|
याकूत-अल-हमावी, अबू रेहान बिरूनी, इब्न बतूता और इब्न खाल्दून आदि अरब भूगोलवेक्ताओं ने अपनी यात्राओं में भौगोलिक वर्णन किया है|
A. पर्ल नदी
B. शी नदी
C. यांग्त्से नदी
D. येलो नदी
यांग्त्से नदी, जिसका अर्थ है 'लंबी नदी ", चीन और एशिया की सबसे लंबी नदी है और दुनिया में तीसरी सबसे लंबी नदी है।
A. हिरोशिमा
B. ओसाका
C. टोक्यो
D. क्योटो
1868 में, एक आंदोलन से शोगुन जबरन को सत्ता से हटा दिया गया था, उसके पहले, सम्राट क्योटो शहर से जापान पर शासन किया करता था।
A. चीन और अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी
B. चीन और डच ईस्ट इंडिया कंपनी
C. अमेरिका और डच ईस्ट इंडिया कंपनी
D. अमेरिका और अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी
तोकुगावा अवधि के दौरान; जापान पर बाहरीराजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक प्रभाव सीमित था। केवल चीन और डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस अवधि के दौरान जापान की यात्रा के लिए सही आनंद लिया।
A. ईदो
B. चीड़ो
C. मीडो
D. निप्पॉन
टोक्यो को मूल रूप से ईदो के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'मुहाना'।
A. अच्छा उत्पादन,आध्यात्मिक भूमि
B. अच्छी शिक्षा, मजबूत सेना
C. स्वस्थ लोग, अमीर देश
D. अमीर देश, मजबूत सेना
मीजी सरकार ने जापानी अर्थव्यवस्था और सेना के विकास के महत्व पर जोर दिया जिसका नारा 'फुकोकू क्योहेई’ था।
A. ब्रिटेन
B. जापान
C. संयुक्त राज्य अमेरिका
D. हॉलैंड
ब्रिटिश हांगकांग 1841 से 1997 तक एक क्राउन कॉलोनी और बाद में ब्रिटिश प्रशासन के तहत एक ब्रिटिश अधीन क्षेत्र था।
A. सुअर का मांस और गेहूं
B. चावल और गेहूं
C. चावल और दूध
D. सोया और मक्का
पूर्वी चीन में, लोग चावल और गेहूं खा रहे हैं। यह चीन की भोजन की आदतों और एक अलग स्वाद को रेखांकित करता है।
A. 1949
B. 1947
C. 1943
D. 1942
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने 1921 में 1917 की रूसी क्रांति से प्रेरणा लेकर असमानताओं को समाप्त करने और विदेशियों को बाहर निकालने के लिए संघर्ष किया था।
A. 1839-1842
B. 1839-1843
C. 1839-1844
D. 1839-1845
प्रथम अफ़ीम युद्ध चीन और ब्रिटेन के बीच लड़ा गया था। युद्ध के लिए मुख्य कारणब्रिटेन की अफीम व्यापार का विस्तार करने की महत्वाकांक्षा थी।
A. कांग यूवेई
B. माओत्से तुंग
C. च्यांग काई शेक
D. सन यात सेन
सन यात-सेन के तहत 1911 में मांचू साम्राज्य को परास्त किया गया था और एक गणतंत्र स्थापित किया गया था।
A. 1902
B. 1904
C. 1908
D. 1910
पीकिंग विश्वविद्यालय आधुनिक चीनी इतिहास का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है। यह चीन के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है।
सामुराई (योद्धा वर्ग) शासन करने वाले कुलीन थे और वे शोगुन तथा दैम्यो की सेवा में थे।
1943 में एक संगोष्ठी हुई ‘आधुनिकता पर विजय’। इसमें जापान के सामने जो दुविधा थी उस पर चर्चा हुई, यानि आधुनिक रहते हुए पश्चिम पर कैसे विजय पाई जाए।
मोगा ‘आधुनिक लड़की’ के लिए संक्षिप्त शब्द है । बुरबुरा का अर्थ है ‘बिना किसी लक्ष्य के घूमना’।
जापानीयों द्वारा विकसित दो ध्वन्यात्मक वर्णमालाओं का नाम -हीरागाना और कताकाना था ।
जापान में नयी सरकार ने ‘सम्राट-व्यवस्था’ के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया था। सम्राट व्यवस्था से जापानी विद्वानों का अभिप्राय है एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सम्राट, नौकरशाही और सेना इकट्ठे सत्ता चलाते थे और नौकरशाही व सेना सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे।
17वीं शताब्दी के समय तक जापान में एदो दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन गया।
लेनिन रूसी क्रांति के प्रसिद्ध नेता थे।
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार 1949 में स्थापित हुई थी ।
माओत्से तुंग का जन्म 1893 में हुनान प्रांत में हुआ था।
भूगोल में हम उन सभी घटनाओं का अध्ययन करते है जो स्थान के साथ बदलती हैं। भूगोलवेत्ता पृथ्वी की सतह (स्थान) पर घटनाओ में केवल विविधताओं का अध्ययन नहीं करते लेकिन अन्य कारकों के साथ संबंधो का भी अध्ययन करते है जो इन बदलावों के कारण है।
भूगोल का अध्ययन आसान और अधिक प्रभावी हो जाता है।
कारण और प्रभाव का संबंध स्पष्ट हो जाता है।
विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक असमानता स्पष्ट हो जाती हैं।
अध्ययन की वजह से सीमित क्षेत्र तक ही गहन है।
क्षेत्रीय योजना की नींव 1928 में बेंटन मक्काये द्वारा रखी गई थी उनके स्मारकीय काम से लिया गया था जिसका शीर्षक "न्यू एक्सप्लोरेशन - क्षेत्रीय योजना का एक दर्शन" था जिसमें उन्होंने मानव जाति द्वारा विकास का कार्य करते समय प्राकृतिक सीमाओ की अवहेलनाओ के विरुद्ध उन्हें सचेत किया।
जनसंख्या भूगोल मानव भूगोल की एक शाखा है जो लोगों के वैज्ञानिक अध्ययन, उनके स्थानिक वितरण और घनत्व पर ध्यान केंद्रित करता है। यह जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं जैसे उनके विकास, वितरण, घनत्व, साक्षरता, लिंग अनुपात, जाति समूहों, धार्मिक संरचना, प्रवास स्वरूप आदि का अध्ययन करता है।
i) यह सभी भौगोलिक अध्ययन के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।
ii) यह भूगोल की मौलिक और सबसे महत्वपूर्ण शाखा है।
iii) यह मूल्यांकन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में मदद करता है।
iv) भौतिक भूगोल के एक अध्ययन में सतत विकास के लिए आवश्यक है।
इरेटॉस्थेनीज एक यूनानी भूगोलवेत्ता थे जिन्होंने पृथ्वी का वर्णन करने के लिए भूगोल शब्द का प्रयोग किया। वे सही रूप में पृथ्वी की परिधि को मापने के लिए पहले विद्वान थे।
भूविज्ञान मुख्य रूप से पृथ्वी की उत्पत्ति, इसकी आंतरिक संरचना, खनिजों, चट्टानों और इसकी सतह पर पायी जाने वाली भू आकृतियों का विवरण प्रस्तुत करता है। भूगोल इन तत्वों के क्षेत्रीय वितरण और मानव जाति के लिए उनकी उपयोगिता का अध्ययन करता है। इसीलिए भू-आकृति विज्ञान, भौतिक भूगोल की शाखा और भूविज्ञान के बीच ज्ञान के जानकारी का आदान प्रदान बड़े पैमाने पर होता है।
एक विषय के रूप में भूगोल स्थान से संबंधित है और स्थानिक विशेषताओं को ध्यान में लेता है और निम्न कारणों से गुणों को बताता हैं:
1. यह वितरण के स्वरूप,, स्थान और स्थान पर घटना की एकाग्रता का अध्ययन करता है और इन नमूनों का स्पष्टीकरण प्रदान करके उनकी व्याख्या करता है।
2. यह संबंधो को जोड़ता है और घटना के बीच अंतर-संबंधों गतिशील प्रभाव से उत्पन्न मनुष्य और उनके भौतिक वातावरण के बीच।
प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करते हुए मानव अपने सृजनात्मक योगदान का दावा करता है। तकनीकी की सहायता से मानव आवश्यकता की अवस्था से स्वतंत्राता की ओर अग्रसर हुआ। उसने सर्वत्रा अपनी छाप छोड़ी तथा प्रकृति के सहयोग से नयी संभावनाओं का सृजन किया। इस प्रकार हमें मानवीकृत प्रकृति तथा प्रकृति-प्रभावित मानव के दर्शन होते हैं।
1) एक मानचित्र जानकारी का भण्डार है और इस पर स्पष्ट रूप से प्राकृतिक और मानव तत्वो को दर्शाया जाता है।
2) भूगोल में पृथ्वी का अध्ययन किया जाता है और एक मानचित्र पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न तत्वों का संगठित विवरण प्रस्तुत करता है।
3) यह एक विशेष क्षेत्र, प्राकृतिक स्थिति, जलवायु, वनस्पति और मानव जीवन के बारे में बता सकता हैं।
भूगोल में क्षेत्रीय विश्लेषण के लिए अलग-अलग तरीके और तकनीके प्रयोग में लायी जाती हैं:
1. संगणक आधारित मानचित्रण
2. परिमाणात्मक तकनीक/ सांख्यिकी तकनीक
3. क्षेत्र सर्वेक्षण विधियाँ
4. भू-सूचना विज्ञान तकनीक
हम विभिन्न विशेषताओ का अवलोकन करते है जैसे- सड़के, रेलवे, बाजार और मनुष्य द्वारा बनाए गए अन्य तत्व। इनकी भिन्न विशेषताएं हैं और भूगोल के अध्ययन में इसे शामिल किया जाना चाहिए चूँकि वे पृथ्वी की सतह पर पाए जाते हैं और भूगोल के विषय की सभी विशेषताओ, घटना और उन दोनों के बीच प्रभाव के अध्ययन के साथ इनका संबंध है।
जैवभूगोल की शाखाऍ और उनके अध्ययन के क्षेत्र हैं:
i) पादप भूगोल: यह जंगलों और घास के मैदानों और उनके वितरण का अध्ययन है।
ii) प्राणी भूगोल: यह जानवरों और सूक्ष्म जीवों के वितरण का अध्ययन करता है।
iii) मानव पारिस्थितिकीय: यह मानव-प्रकृति संबंध और मानव जीवन पर उसके परिणामों को बदलने का अध्ययन किया जाता है।
iv) पर्यावरण भूगोल: यह प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता और मानव जीवन पर इसके प्रभाव के अध्ययन करता है।
|
विषय वस्तुगत भूगोल |
प्रादेशिक भूगोल |
|
यह पृथ्वी या उसके विभिन्न हिस्सो पर एक विशेष तत्व का अध्ययन करता है। |
यह सभी भौगोलिक तत्वों के संदर्भ में एक विशेष क्षेत्र का अध्ययन करता है। |
|
यह क्षेत्र के एकीकृत रूप को प्रस्तुत करता है। |
यह क्षेत्र के अलग प्रपत्र को प्रस्तुत करता है। |
|
इस अध्ययन के तथ्यों को प्रस्तुत करता है। |
यह अध्ययन व्यक्ति और पर्यावरण के संबंध की परख करता है। |
|
प्रकार और उप-प्रकार एक विशेष पहलू को निर्धारित करते हैं अर्थात, जलवायु। |
क्षेत्रों की सीमाओं क्षेत्रीकरण से पहचाने जाते हैं। |
|
यह राजनीतिक इकाइयों पर आधारित है। |
यह भौगोलिक इकाइयों पर आधारित है। |
इतिहास और भूगोल निकट रूप से एक दूसरे से संबंधित हैं क्योकि दोनों विषय समय और स्थान के विषय के साथ संबंध रखते हैं। हार्टशोर्न के अनुसार, "'समय' के अनुसार विवरण इतिहास है और 'अंतरिक्ष' के अनुसार, "भूगोल है। किसी भी क्षेत्र के विकास का इतिहास उसकी जड़ों में है। वूलड्रिज ने बल दिया कि "भूगोल वास्तव में इतिहास से अविभाज्य है जिसने इसे बनाया"। पृथ्वी की वर्तमान चेहरे की कहानी इतिहास में शुरू होती है जब भूमि की सतह को 250 मिलियन साल पहले एक ही महाद्वीप में विलय कर दिया गया।
A.
पदार्थ का घनत्व घटता है।
B.
पदार्थ का घनत्व बढ़ता है।
C.
घनत्व में कोई परिवर्तन नहीं आता है।
D.
पदार्थ ठंडा हो जाता है।
पृथ्वी के ऊपरी भाग से आंतरिक भाग तक पदार्थ का घनत्व बढ़ता है। परिणामस्वरूप पृथ्वी के अंदर पदार्थ अपने घनत्व के आधार पर अनेक परतों में अलग हो गए।
A.
द्वैतारक
सिद्धांत
B.
महाविस्फोट सिद्धान्त (बिग बैंग सिद्धांत)
C.
इंटर स्टेलर धूलि परिकल्पना
D.
निहारिका परिकल्पना
बेल्जियम के एक पादरी जार्ज लेमैत्रे ने सर्वप्रथम 1920 के दशक में महाविस्फोट सिद्धान्त (बिग बैंग सिद्धांत) का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड का प्रारम्भ एक मौलिक अणु से हुआ। बाद में इस विचार को एडविन हब्बल के पर्यवेक्षण से बढ़ावा प्राप्त हुआ।
A.
वह प्रक्रिया जिससे पृथ्वी के भीतरी भाग से गैसें धरती पर आईं।
B.
गैसों की कमी।
C.
वातावरण से गैसों का अभाव।
D.
वह प्रक्रिया जिसके माध्यम से जो गैसें तरल में परिवर्तित हो गईं।
पृथ्वी के ठंडा होने और विभेदन के दौरान, पृथ्वी के अंदरूनी भाग से बहुत सी गैसें व जलवाष्प बाहर निकले। इसी से आज के वायुमंडल का उद्भव हुआ। आरंभ में वायुमंडल में जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन व अमोनिया अधिक मात्रा में, और स्वतंत्र ऑक्सीजन बहुत कम थी। वह प्रक्रिया जिससे पृथ्वी के भीतरी भाग से गैसें धरती पर आईं, इसे गैस उत्सर्जन कहा जाता है।
A.
दूरी मापने की इकाई
B.
समय की इकाई
C.
स्थान की इकाई
D.
कोई नहीं
प्रकाश वर्ष खगोलीय दूरी को व्यक्त करने के लिए अनौपचारिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली लंबाई की एक इकाई है। प्रकाश वर्ष वह दूरी है, जो प्रकाश द्वारा निर्वात में, एक वर्ष में पूरी की जाती है।
A.
4.6 अरब वर्ष
B.
3.6 अरब वर्ष
C.
13.7 अरब वर्ष
D.
13.7 खरब वर्ष
नीहारिका को सौरमंडल का जनक माना जाता है उसके ध्वस्त होने व क्रोड के बनने की शुरूआत लगभग 5 से 5.6 अरब वर्षों पहले हुई व ग्रह लगभग 4.6 से 4.56 अरब वर्षों पहले बने।
16वीं शताब्दी के अंतिम भाग में तीन परिवर्तनों ने आगे के विकास की तैयारी की। पहला, किसानों से हथियार ले लिए गए, और अब केवल सामुराई तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति और व्यवस्था बनी रही जबकि पिछली शताब्दी में इस वजह से अक्सर लड़ाइयाँ होती रहती थीं।
दूसरा, दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए और उन्हें काफी हद तक स्वायनता प्रदान की गई।
तीसरा, मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए ज़मीन का सर्वेक्षण किया गया तथा उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया गया। इन सबका मिलाजुला मकसद राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।
कुओमीनतांग का सामाजिक आधार शहरी इलाकों में था। औद्योगिक विकास धीमा और गिनेचुने क्षेत्रों में था। देश को एकीकृत करने की अपनी कोशिशों के बावजूद कुओमीनतांग अपने संकीर्ण सामाजिक आधार और सीमित राजनीतिक दृष्टि के चलते असफल हो गया। सन यात-सेन के कार्यक्रम का बहुत अहम हिस्सा - पूँजी का नियमन और भूमि-अधिकारों में बराबरी लाना - कभी अमल में नहीं आया, क्योंकि पार्टी ने किसानों और बढ़ती सामाजिक असमानता की अनदेखी की। इसने 1937 में जापानीयों द्वारा चीन पर आक्रमण के दौरान लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की बजाय फौजी व्यवस्था थोपने का प्रयास किया।
1.1960 के उत्तरार्द्ध से प्रवाह बदलने लगा। सांस्कृतिक क्रांति से खलबली का दौर शुरू हो गया, पार्टी कमजोर हो गई और अर्थव्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था में भारी रुकावट आई।
2.1975 में एक बार फिर पार्टी ने अधिक सामाजिक अनुशासन और औद्योगिक अर्थव्यवस्था का निर्माण करने पर ज़ोर दिया ताकि चीन शताब्दी के खत्म होने से पहले एक शक्तिशाली देश बन सके।
3. इस प्रकार सांस्कृतिक क्रांति के चीन में सामंती बोझ के लिए एक प्रभावी समाधान बनने पर अंकुश लग गया ।
अपनी भयंकर हार के बावजूद जापानी अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनर्निर्माण हुआ, उसे एक युद्धोत्तर ‘चमत्कार’ कहा गया है। लेकिन यह चमत्कार से कहीं अधिक था और इसकी जड़ें जापान के लंबे इतिहास में निहित थीं। संविधान को औपचारिक स्तर पर गणतांत्रिक रूप इसी समय दिया गया। लेकिन जापान में जनवादी आंदोलन और राजनीतिक भागेदारी का आधार बढ़ाने में बौद्धिक सक्रियता की ऐतिहासिक परंपरा रही है। युद्ध से पहले के काल की सामाजिक संबद्धता को गणतांत्रिक रूपरेखा के बीच सुदृढ़ किया गया। इसके चलते सरकार, नौकरशाही और उद्योग के बीच एक करीबी रिश्ता कायम हुआ। अमरीकी समर्थन और साथ ही कोरिया और वियतनाम में जंग से जापानी अर्थव्यवस्था को मदद मिली।
1870 के दशक से नयी विद्यालय-व्यवस्था का निर्माण शुरू हुआ। लड़के और लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य हो गया, और 1910 तक तकरीबन ऐसी स्थिति आ गई कि स्कूल जाने से कोई वंचित नहीं रहा। पढ़ाई की फीस बहुत कम थी। शुरू में पाठ्यचर्या पश्चिमी नमूनों पर आधारित थी लेकिन 1870 के दशक के आते-आते आधुनिक विचारों पर ज़ोर देने के साथ-साथ राज्य के प्रति निष्ठा और जापानी इतिहास के अध्ययन पर बल दिया जाने लगा। शिक्षा मंत्रालय पाठ्यचर्या पर, किताबों के चयन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर नियंत्रण रखता था। जिसे नैतिक संस्कृति का विषय कहा गया उसे पढ़ना ज़रूरी था और किताबों में माता पिता के प्रति आदर, राष्टं के प्रति वफादारी और अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी जाती थी।
मेजियों की पुनर्स्थापना के पीछे कई कारण थे। देश में तरह-तरह का असंतोष था, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व कूटनीतिक संबंधें की भी मांग की जा रही थी। इसी बीच 1853 में अमरीका ने कॉमोडोर मैथ्यू पेरी (1794-1858) को जापानी सरकार से एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग के साथ भेजा जिसमें जापान ने अमरीका के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंध बनाए। जापान ने अगले साल ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए। जापान चीन के रास्ते में था और अमरीका चीन में एक बड़ा बाज़ार देखता था। इसके अलावा अमरीका को प्रशांत महासागर में अपने बेड़ों के लिए ईंमान लेने की जगह चाहिए थी। उस समय केवल एक ही पश्चिमी देश जापान के साथ व्यापार करता था। वह था, हॉलैंड।
16वीं शताब्दी के अंतिम भाग में तीन परिवर्तनों ने आगे के विकास की तैयारी की। पहला, किसानों से हथियार ले लिए गए, और अब केवल सामुराई तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति और व्यवस्था बनी रही जबकि पिछली शताब्दी में इस वजह से अक्सर लड़ाइयाँ होती रहती थीं।
दूसरा, दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए और उन्हें काफी हद तक स्वायनता प्रदान की गई।
तीसरा, मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए ज़मीन का सर्वेक्षण किया गया तथा उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया गया। इन सबका मिलाजुला मकसद राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।
जापान के अन्य देशों के साथ सम्बन्धों पर जापानी बुद्धिजीवियों की आधुनिक पीढ़ियों के विचार अलग-अलग थे। कुछ के लिए अमरीका और पश्चिमी यूरोपीय देश सभ्यता की ऊँचाइयों पर थे जहां जापान पहुँचने की आकांक्षा रखता था। फुकुजावा यूकिची मेजी काल के प्रमुख बुद्धिजीवीयों में से थे। उनका कहना था कि जापान को अपने में से एशिया को निकाल फेंकना चाहिए। यानि जापान को अपने एशियाई लक्षण छोड़ देने चाहिए और पश्चिम का हिस्सा बन जाना चाहिए। अगली पीढ़ी ने पश्चिमी विचारों को पूरी तरह से स्वीकार करने पर सवाल उठाये और कहा कि राष्ट्रीय गर्व देसी मूल्यों पर निर्मित होना चाहिए। दर्शनशास्त्री मियाके सेत्सुरे ने तर्क पेश किया कि विश्व सभ्यता के हित में हर राष्ट्र को अपने खास हुनर का विकास करना चाहिए। “अपने को अपने देश के लिए समर्पित करना अपने को विश्व को समर्पित करना है”। इसकी तुलना में बहुत से बुद्धिजीवी पश्चिमी उदारवाद की तरफ आकर्षित थे और वे चाहते थे कि जापान अपना आधार सेना की बजाय लोकतंत्र पर बनाए। संवैधानिक सरकार की मांग करने वाले जनवादी अधिकारों के आंदोलन के नेता उएकी एमोरी फ़्रांसीसी क्रांति में मानवों के प्राकृतिक अधिकार और जन प्रभुसना के सिद्धांतों के प्रशंसक थे। वे उदारवादी शिक्षा के पक्ष में थे जो प्रत्येक व्यक्ति को विकसित कर सके : ‘व्यवस्था से ज़्यादा कीमती चीज़ है, आज़ादी’। कुछ दूसरे लोगों ने तो महिलाओं के मताधिकार की भी सिफारिश की। इस दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर बाध्य किया।
जापान पर क्योतो में रहनेवाले सम्राट का शासन हुआ करता था, लेकिन बारहवीं सदी आते-आते असली सना शोगुनों के हाथ में आ गई जो सैद्धांतिक रूप से राजा के नाम पर शासन करते थे।1603 से 1867 तक तोकुगावा परिवार के लोग शोगुनपद पर कायम थे। देश 250 भागों में विभाजित था जिनका शासन दैम्यो चलाते थे। शोगुन दैम्यो पर नियंत्रण रखते थे। शोगुन दैम्यो को लंबे अरसे के लिए राजधानी एदो (आधुनिक तोक्यो) में रहने का आदेश देते थे ताकि उनकी तरफ से कोई खतरा न रहे। शोगुन प्रमुख शहरों और खदानों पर भी नियंत्रण रखते थे। सामुराई (योद्धा वर्ग) शासन करनेवाले कुलीन थे और वे शोगुन तथा दैम्यो की सेवा में थे।
16वीं शताब्दी के अंतिम भाग में तीन परिवर्तनों ने आगे के विकास की तैयारी की। पहला, किसानों से हथियार ले लिए गए, और अब केवल सामुराई तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति और व्यवस्था बनी रही जबकि पिछली शताब्दी में इस वजह से अक्सर लड़ाइयाँ होती रहती थीं।
दूसरा, दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए और उन्हें काफी हद तक स्वायतता प्रदान की गई। तीसरा, मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए ज़मीन का सर्वेक्षण किया गया तथा उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया गया। इन सबका मिलाजुला मकसद राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।
दैम्यो की राजधानियाँ बड़ी हुईं, जिसके चलते 17वीं शताब्दी के ममय तक जापान में एदो
दुनिया का सबसे अधिक जनसख्ंया वाला शहर बन गया। इसके अलावा ओसाका और क्योतो अन्य बड़े शहरों के रूप में उभरे। कम से कम छह ऐसे गढ़ वाले शहर उभरे जहाँ जनसंख्या 50,000 से अधिक थी। इसकी तुलना में उस समय के ज़्यादातर यूरोपीय देशों में केवल एक बड़ा शहर था। इससे वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और वित और ऋण की प्रणालियां स्थापित हुईं। व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे। शहरों में जीवंत संस्कृति खिलने लगी जहाँ तेज़ी से बढ़ते व्यापारी वर्ग ने नाटक और कलाओं को प्रोत्साहन दिया। चूंकि लोगों को पढ़ने का शौक था, होनहार लेखकों के लिए यह संभव हो सका कि वे केवल लेखन से अपनी जीविका चला लें। एदो में लोग नूडल की कटोरी की कीमत पर किताब किराये पर ले सकते थे। इससे यह पता चलता है कि छपाई ’ किस स्तर पर होती थी और पढ़ना कितना लोकप्रिय था।जापान अमीर देश समझा जाता था, क्योंकि वह चीन से रेशम और भारत से कपड़ा जैसी विलासी वस्तुएँ आयात करता था। इन आयातों के लिए चांदी और सोने में कीमत अदा करने से अर्थव्यवस्था पर भार ज़रूर पड़ा जिसकी वजह से तोकुगावा ने कीमती धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी। उन्होंने क्योतो के निशिजिन में रेशम उद्योग के विकास के लिए भी कदम उठाये जिससे रेशम का आयात कम किया जा सके । निशिजिन का रेशम दुनिया भर में बेहतरीन रेशम माना जाने लगा। मुद्रा का बढ़ता इस्तेमाल और चावल के शेयर बाजार का निर्माण जैसे अन्य विकास दिखाते हैं कि अर्थतंत्र नयी दिशाओं में विकसित हो रहा था। सामाजिक और बौद्धिक बदलावों- मिसाल के लिए, प्राचीन जापानी साहित्य के अध्ययन ने लोगों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया कि जापान पर चीन का प्रभाव किस हद तक है और यह तर्क पेश किया गया कि जापानी होने का सार चीन के संपर्क में आने से बहुत पहले का है। यह सार की कहानी जैसे उच्च प्राचीन साहित्य में और जापान की उत्पत्ति की पौराणिक कथाओं में देखी जा सकती है, ये मिथकीय कहानियां बताती हैं कि इन द्वीपों को भगवान ने बनाया था और सम्राट सूर्य देवी के उत्तराधिकारी थे।
1.माओवादी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ ‘समाजवादी व्यक्ति’ की रचना करने के इच्छुक थे।
2.समाजवाद पर आपत्ति जताने वाले लोगों ने दक्षता और सदियों पुराने रीति-रिवाजों पर बल दिया।
3. अपने आलोचकों का सामना करने के लिए माओ द्वारा 1965 में महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति छेड़ी गई।
4.पुरानी संस्कृति, पुराने रीति-रिवाजों, और पुरानी आदतों के खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए रेड गार्ड्स - मुख्यतः छात्रों और सेना - का इस्तेमाल किया गया।
5.छात्रों और पेशेवर लोगों को जनता से ज्ञान हासिल करने के लिए ग्रामीण इलाकों में भेजा गया।
6.दोषारोपण और नारेबाजी ने तर्कसंगत बहस की जगह ले ली।
1.पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार 1949 में स्थापीत हुई।
2. यह सभी सामाजिक वर्गों के गठबंधन के सिद्धांतों पर आधारित था जो ‘नया लोकतंत्र’ कहलाता था। साम्यवाद की प्राप्ति पार्टी का सर्वोच्च आदर्श और अंतिम लक्ष्य था।
3.अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में रखे गए और निजी कारखानों और भूस्वामित्व को धीरे-धीरे खत्म किया गया।
4.यह कार्यक्रम 1953 तक चला जब सरकार ने समाजवादी बदलाव का कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। 1958 में लंबी छलाँगवाले आंदोलन की नीति के ज़रिये देश का तेज़ी से औद्योगीकरण करने की कोशिश की गई। लोगों को अपने घर के पिछवाड़े में इस्पात की भट्टियाँ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
5. ग्रामीण इलाकों में पीपुल्स कम्यून्स - जहाँ लोग इकट्ठे ज़मीन के मालिक थे और मिलजुलकर फसल उगाते थे - शुरू किये गए।
6. किसानों से लेकर महिलाओं तक समाज के सभी वर्गों के लिए जन संगठनों का निर्माण किया गया।
चीनी उत्पादों जैसे चाय, रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तनों की माँग ने व्यापार में असंतुलन की भारी समस्या खड़ी कर दी। पश्चिमी उत्पादों को चीन में बाज़ार नहीं मिला जिसकी वजह से भुगतान चाँदी में करना पड़ता था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक विकल्प ढूँढ़ा - अफीम। यह हिंदुस्तान के कई हिस्सों में बहुत आराम से उगती थी। चीन में अफीम बेचने के जरिये वे चाँदी कमाकर केंटन में उधार पत्रों के बदले कंपनी के प्रतिनिधियों को देने लगे। इस तरह कंपनी उस चाँदी का इस्तेमाल ब्रिटेन के लिए चाय, रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तन खरीदने के लिए करती थी। ब्रिटेन, भारत और चीन के बीच यह उत्पादों का ‘त्रिकोणीय व्यापार’ था।
जापान के अन्य देशों के साथ सम्बन्धों पर जापानी बुद्धिजीवियों की आधुनिक पीढ़ियों के विचार अलग-अलग थे। कुछ के लिए अमरीका और पश्चिमी यूरोपीय देश सभ्यता की ऊँचाइयों पर थे जहां जापान पहुँचने की आकांक्षा रखता था। फुकुजावा यूकिची मेजी काल के प्रमुख बुद्धिजीवीयों में से थे। उनका कहना था कि जापान को अपने में से एशिया को निकाल फेंकना चाहिए। यानि जापान को अपने एशियाई लक्षण छोड़ देने चाहिए और पश्चिम का हिस्सा बन जाना चाहिए। अगली पीढ़ी ने पश्चिमी विचारों को पूरी तरह से स्वीकार करने पर सवाल उठाये और कहा कि राष्ट्रीय गर्व देसी मूल्यों पर निर्मित होना चाहिए। दर्शनशास्त्री मियाके सेत्सुरे ने तर्क पेश किया कि विश्व सभ्यता के हित में हर राष्ट्र को अपने खास हुनर का विकास करना चाहिए। “अपने को अपने देश के लिए समर्पित करना अपने को विश्व को समर्पित करना है”। इसकी तुलना में बहुत से बुद्धिजीवी पश्चिमी उदारवाद की तरफ आकर्षित थे और वे चाहते थे कि जापान अपना आधार सेना की बजाय लोकतंत्र पर बनाए। संवैधानिक सरकार की मांग करने वाले जनवादी अधिकारों के आंदोलन के नेता उएकी एमोरी फ़्रांसीसी क्रांति में मानवों के प्राकृतिक अधिकार और जन प्रभुसना के सिद्धांतों के प्रशंसक थे। वे उदारवादी शिक्षा के पक्ष में थे जो प्रत्येक व्यक्ति को विकसित कर सके : ‘व्यवस्था से ज़्यादा कीमती चीज़ है, आज़ादी’। कुछ दूसरे लोगों ने तो महिलाओं के मताधिकार की भी सिफारिश की। इस दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर बाध्य किया।
जापान पर क्योतो में रहनेवाले सम्राट का शासन हुआ करता था, लेकिन बारहवीं सदी आते-आते असली सना शोगुनों के हाथ में आ गई जो सैद्धांतिक रूप से राजा के नाम पर शासन करते थे।1603 से 1867 तक तोकुगावा परिवार के लोग शोगुनपद पर कायम थे। देश 250 भागों में विभाजित था जिनका शासन दैम्यो चलाते थे। शोगुन दैम्यो पर नियंत्रण रखते थे। शोगुन दैम्यो को लंबे अरसे के लिए राजधानी एदो (आधुनिक तोक्यो) में रहने का आदेश देते थे ताकि उनकी तरफ से कोई खतरा न रहे। शोगुन प्रमुख शहरों और खदानों पर भी नियंत्रण रखते थे। सामुराई (योद्धा वर्ग) शासन करनेवाले कुलीन थे और वे शोगुन तथा दैम्यो की सेवा में थे।
16वीं शताब्दी के अंतिम भाग में तीन परिवर्तनों ने आगे के विकास की तैयारी की। पहला, किसानों से हथियार ले लिए गए, और अब केवल सामुराई तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति और व्यवस्था बनी रही जबकि पिछली शताब्दी में इस वजह से अक्सर लड़ाइयाँ होती रहती थीं।
दूसरा, दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए और उन्हें काफी हद तक स्वायतता प्रदान की गई। तीसरा, मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए ज़मीन का सर्वेक्षण किया गया तथा उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया गया। इन सबका मिलाजुला मकसद राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।
दैम्यो की राजधानियाँ बड़ी हुईं, जिसके चलते 17वीं शताब्दी के ममय तक जापान में एदो
दुनिया का सबसे अधिक जनसख्ंया वाला शहर बन गया। इसके अलावा ओसाका और क्योतो अन्य बड़े शहरों के रूप में उभरे। कम से कम छह ऐसे गढ़ वाले शहर उभरे जहाँ जनसंख्या 50,000 से अधिक थी। इसकी तुलना में उस समय के ज़्यादातर यूरोपीय देशों में केवल एक बड़ा शहर था। इससे वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और वित और ऋण की प्रणालियां स्थापित हुईं। व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे। शहरों में जीवंत संस्कृति खिलने लगी जहाँ तेज़ी से बढ़ते व्यापारी वर्ग ने नाटक और कलाओं को प्रोत्साहन दिया। चूंकि लोगों को पढ़ने का शौक था, होनहार लेखकों के लिए यह संभव हो सका कि वे केवल लेखन से अपनी जीविका चला लें। एदो में लोग नूडल की कटोरी की कीमत पर किताब किराये पर ले सकते थे। इससे यह पता चलता है कि छपाई ’ किस स्तर पर होती थी और पढ़ना कितना लोकप्रिय था।जापान अमीर देश समझा जाता था, क्योंकि वह चीन से रेशम और भारत से कपड़ा जैसी विलासी वस्तुएँ आयात करता था। इन आयातों के लिए चांदी और सोने में कीमत अदा करने से अर्थव्यवस्था पर भार ज़रूर पड़ा जिसकी वजह से तोकुगावा ने कीमती धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी। उन्होंने क्योतो के निशिजिन में रेशम उद्योग के विकास के लिए भी कदम उठाये जिससे रेशम का आयात कम किया जा सके । निशिजिन का रेशम दुनिया भर में बेहतरीन रेशम माना जाने लगा। मुद्रा का बढ़ता इस्तेमाल और चावल के शेयर बाजार का निर्माण जैसे अन्य विकास दिखाते हैं कि अर्थतंत्र नयी दिशाओं में विकसित हो रहा था। सामाजिक और बौद्धिक बदलावों- मिसाल के लिए, प्राचीन जापानी साहित्य के अध्ययन ने लोगों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया कि जापान पर चीन का प्रभाव किस हद तक है और यह तर्क पेश किया गया कि जापानी होने का सार चीन के संपर्क में आने से बहुत पहले का है। यह सार की कहानी जैसे उच्च प्राचीन साहित्य में और जापान की उत्पत्ति की पौराणिक कथाओं में देखी जा सकती है, ये मिथकीय कहानियां बताती हैं कि इन द्वीपों को भगवान ने बनाया था और सम्राट सूर्य देवी के उत्तराधिकारी थे।
A.
प्रजातियों के निवास का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
B.
पर्यावरण का अध्ययन किया जाता है।
C.
जीवित प्राणियों का अध्ययन किया जाता है।
D.
निर्जीव प्राणियों का अध्ययन किया जाता है।
पारिस्थितिकीय / पारिस्थितिकी तंत्र में प्रजातियों के निवास क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
A.
विडाल
डी ला ब्लाचे
B. हंटिंग्ट
C. कार्ल रिटर
D. रेटज़ेल
प्रादेशिक भूगोल को जर्मन भूगोलवेत्ता कार्ल रिटर (1779-1859) द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
A.
वस्तुगत उपागम के रूप में जाना जाता है।
B.
प्रादेशिक उपागम के रूप में जाना जाता है।
C.
क्षेत्रीय उपागम के रूप में किया जाता है।
D.
कालिक उपागम के रूप में जाना जाता है।
वस्तुगत उपागम के अंतर्गत एक तथ्य का पूर्वे विश्वस्तर पर अध्ययन किया जाता है और उसके बाद क्षेत्रीय स्वरुप के वर्गीकरण की पहचान की जाती हैं|
A.
स्थलाकृतियों का अध्ययन किया जाता है।
B.
राजनीति का अध्ययन किया जाता है।
C.
जनसँख्या का अध्ययन किया है।
D.
मानव का अध्ययन किया जाता है।
भौतिक भूगोल के अंतर्गत स्थलाकृतियों, मृदाओं, वायुमंडल और प्राकृतिक वातावरण के प्रतिरूप की प्रक्रियाओं को समझने का अध्ययन किया जाता है।
A.
एक जर्मन भूगोलवेत्ता थे।
B.
एक फ़्रांसीसी भूगोलवेत्ता थे।
C.
एक ब्रिटिश भूगोलवेत्ता थे।
D.
एक अमेरिकी भूगोलवेत्ता थे।
वस्तुगत भूगोल उपागम को अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट द्वारा प्रवर्तित किया गया था, वह एक जर्मन भूगोलवेत्ता थे।
चीन की साम्यवादी पार्टी की स्थापना 1921 में, रूसी क्रांति की सफलता के कुछ समय बाद हुई थी।
लेनिन और ट्रॉट्स्की जैसे नेताओं ने मार्च 1918 में कौमिंटर्न या तृतीय अंतर्राष्ट्रीय (थर्ड इंटेरनेशनल) का गठन किया ।
समाजवाद एक दर्शन और राजनीतिक विचार है। यह निजी संपत्ति का विरोध का विरोध करता है और श्रमिक वर्ग के लिए आर्थिक संसाधनों की समानता की वकालत करता है।
19 वीं सदी में सबसे पहले चीन को उपनिवेश बनाने का प्रयास पुर्तगाल ने किया था।
सन यात सेन ने 1911 की क्रांति का नेतृत्व किया था।
1934 में माओ ने अपनी लांग मार्च शुरू की थी।