नहीं, लेखाकार सही नहीं है क्योंकि यह राशि फर्म से संबंधित नहीं थी तथा जब भी बैंक को इस त्रुटि का पता चलेगा तो बैंक इस राशि को खाते से डेबिट कर लेगा।
रोकड़
बही तथा बैंक
पास बुक में
अंतर के लिए कारण:
(1) चेक
जारी किया
गया परंतु
अभी तक
भुगतान के
लिए
प्रस्तुत
नहीं किया
गया।
(2) चेक
जमा कराये
गये परंतु
भुगतान
प्राप्त नहीं
हुआ।
(3) बैंक
द्वारा
ब्याज तथा
व्यय चार्ज
किये गये।
(4) ग्राहक
द्वारा बैंक
में सीधे
भुगतान किया
गया।
1. 36,700
रु
के जारी किये
गये परंतु
अभी तक
भुगतान के लिए
प्रस्तुत
नहीं किये
गये चेकों को
पास बुक के अनुसार
अधिविकर्ष
शेष में
जोड़ा
जायेगा।
2. फर्म
द्वारा योग
में 5,100
रु
की कमी को पास
बुक के
अनुसार
अधिविकर्ष
शेष में
जोड़ा
जायेगा।
3. बैंक
द्वारा
प्रतिभुतियों
पर 4,623
रु
के सीधे
प्राप्त
ब्याज को पास
बुक के अनुसार
अधिविकर्ष
शेष में
जोड़ा
जायेगा।

(1) चैक जो बैंक में जमा करने के लिए भेजे गए परन्तु अभी तक जमा नहीं हुए – जब यह चैक बैंक में जमा करने के लिए भेजे गए होंगे उसी समय इन्हें रोकड़ बही के डेबिट पक्ष में लिख दिया गया होगा जिससे रोकड़ बही का डेबिट शेष बढ़ गया होगा परंतु बैंक इनकी प्रविष्टि तब तक नहीं करेगा जब तक कि बैंक को इनका रु वसूल न हो जाए। जिससे कि रोकड़-बही का शेष पास बुक की तुलना में अधिक होगा। अतः बैंक समाधान विवरण में इन्हें घटाया जाएगा।
(2) चेक बैंक में जमा करने के लिए भेजे किन्तु बैंक ने उन्हें अप्रतिष्ठित (अनादरण) कर दिया – इन चैकों को भी रोकड़ बही के डेबिट पक्ष में लिख दिया गया होगा परन्तु पास बुक में प्रविष्टि नहीं हुई होगी जिससे रोकड़ बही का जोड़ बढ़ा हुआ होगा अतः इन्हें भी बैंक समाधान विवरण में घटाया जाएगा।
सामान्चतः बैंक समाधान विवरण बनाना अनिवार्य नहीं है लेकिन फिर भी निम्नलिखित उद्दश्यों की पूर्ति हेतु इसे बनाया जाता है-
(1.) रोकड़ बही में अंतर के कारणों का पता लगाना और उनका सन्तुलन करना,
(2.) रोकड़ बही तथा पास-बुक के लिखने में हुई किसी भी प्रकार की अशुद्धि का ठीक किया जाना
(3.) व्यापारी या व्यापार के स्वामी एवं प्रबन्धकों को बैंक में रोकड़ स्थिति का सही एवं वास्तविक ज्ञान होना
(4.) रोकड़ बही के लिखने में होने वाली धोखा-धड़ी, लापरवाही, गबन एवं छल-कपट की जानकारी होना



बैंक
समाधान
विवरण
निम्नलिखित
कारणों की वजह
से
महत्वपूर्ण
एवं आवश्यक
होता है:-
1. बैंक
समाधान
विवरण केवल
उन त्रुटियों
को सामने
लाता है जो या
तो रोकड़ बही
में या पास
बुक में हुई
है।
2. चेक
की निकासी
में किसी भी
प्रकार की
अनुचित देरी
को इस विवरण
द्वारा
दिखाया
जाएगा।
3. एक
नियमित
समाधान
विवरण
ग्राहकों के
कर्मचारियों
या यहां तक कि
बैंक गबन को
भी
हतोत्साहित
करता है। यहाँ
ऐसे कई मामले
होते हैं जब
रोकडि़या
पुस्तकों
में ऐसी
प्रविष्टियाँ
कर देता है वे
केवल समाधान
विवरण की
कमीं के कारण
ऐसे
लेनदेनों को
छुपाने में
सक्षम होते
हैं।
4. समाधान
विवरण रोकड़
बही में की गई
प्रविष्टियों
की सटीकता की
जाँच में तथा
चेक का ध्यान
रखने में
प्रबंधन की
मदद करता है।



A. भूल की अशुद्धि।
B. सैद्धांतिक अशुद्धि।
C. हिसाब की अशुद्धि।
D. क्षतिपूरक अशुद्धि।
जब किसी लेनदेन को लेखांकन सिद्धांतों का उलंघन कर रिकाॅर्ड किया जाता है तो इसे सैद्धांतिक अशुद्धि के रूप में जाना जाता है। ऐसी अशुद्धि तलपट को प्रभावित नहीं करती है क्योंकि राशि को सही पक्ष में तो लिखा जाता है परंतु सही खाते में नही।
A. दो भागों में।
B. तीन भागों में।
C. पांच भागों में।
D. आठ भागों में।
भूल की अशुद्धि को दो भागों में विभाजित किया जात सकता है: पूर्णतः भूल की अशुद्धि तथा आंशिक भूल की अशुद्धि।
A. भूल की अशुद्धि।
B. सैद्धांतिक अशुद्धि।
C. हिसाब की अशुद्धि।
D. क्षतिपूरक अशुद्धि।
हिसाब की अशुद्धि:- ये ऐसी त्रुटियाँ होती है जो गलत लेनदेन की गलत खतौनी, खातों के गलत शेष या योग, सहायक बहियों के गलत राशि लिखने से होने वाली त्रुटियाँ होती है।
A. सैद्धांतिक अशुद्धि।
B. लिपिकीय अशुद्धि।
C. जानबूझकर की गई अशुद्धि।
D. क्षतिपूकर अशुद्धि।
लेखांकन स्टाफ द्वारा लापरवाही से की गई अशुद्धि लिपिकीय अशुद्धि होती है। लिपिकीय अशुद्धि को विभाजित किया जाता है: भूल की अशुद्धि, हिसाब की अशुद्धि तथा क्षतिपूरक अशुद्धि।
A. अभिलेखन की त्रुटि।
B. योग की त्रुटि।
C. खतौनी की त्रुटि।
D. आगे ले जाने की त्रुटि।
यह त्रुटि तब होती है जब किसी लेनदेन को गलती से प्रारंभिक लेखा बहियों में रिकाॅर्ड किया जाता है। उदाहरण के लिए: सोहन से 7,000 रु के माल की उधार क्रय को क्रय बही में 70,000 रु से रिकाॅर्ड किया गया।
A. सैद्धांतिक अशुद्धि।
B. हिसाब की अशुद्धि।
C. क्षतिपूरक अशुद्धि।
D. भूल की अशुद्धि।
लेनदेनों को गलत सहायक बही या खाताबही में लिखना या गलत खतौनी करना हिसाब की अशुद्धि के नाम से जाना जाता है।
A. डूबत ऋण वसूली खाता।
B. स्मिथ का खाता।
C. रोकड़ खाता।
D. डूबत ऋण खाता।

A. आग से समाप्त हुआ माल।
B. विक्रय खाता।
C. रोकड़ खाता।
D. क्रय खाता।

सामान्यतः अंतिम रहतिये को तलपट में नहीं दिखाया जाता है। इसे केवल तब दिखाया जा सकता है जब इसे क्रयों के साथ समायोजित किया गया हो।
ऐसी अशुद्धियाँ, जो दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्तों का उल्लंघन
करती हैं, सैद्धान्तिक अशुद्धि कहलाती हैं ।
जब सभी सम्भव उपायों के पश्चात् भी तलपट के दोनों पक्षों का योग न मिले, तो उस दशा में जो खाता खोला जाता है, उसे उचन्त खाता कहते हैं।
इस विधि में प्रत्येक खाते के सिर्फ शेष का लेखा ही तलपट के डेबिट या क्रेडिट में किया जाता है। .
वे अशुद्धियाँ, जो एक-दूसरे का समतोलन करती हैं, अर्थात् जिनमें एक अशुद्धि का प्रभाव दूसरी अशुद्धि के प्रभाव से स्वंय दूर हो जाता है, क्षतिपूरक अशुद्धियाँ कहलाती हैं, जैसे- क्रय खाते के ऋणी पक्ष की ओर रु0 100 कम लिखे गए तथा साथ ही मोहन के खाते के धनी पक्ष में रु 70 और सोहन के खाते में धनी पक्ष में रु 30 कम लिखे गए। इससे त्रुटियों का प्रभाव ऋणी पक्ष की ओर बराबर रहा, अतः यह अशुद्धि तलपट पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी।
तलपट खाताबही के खातों से ज्ञात किये गये डेबिट और क्रेडिट पक्षों के योगों की एक सूची है, जो खाताबही की गणितीय शुद्दता की जाँच करने के उद्देश्य से निश्चित तिथि को तैयार की जाती है ।
सामान्यतः अंतिम रहतिये को तलपट में नहीं दिखाया जाता है। इसे केवल तब दिखाया जा सकता है जब इसे क्रयों के साथ समायोजित किया गया हो।
ऐसी अशुद्धियाँ, जो दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्तों का उल्लंघन
करती हैं, सैद्धान्तिक अशुद्धि कहलाती हैं ।
जब सभी सम्भव उपायों के पश्चात् भी तलपट के दोनों पक्षों का योग न मिले, तो उस दशा में जो खाता खोला जाता है, उसे उचन्त खाता कहते हैं।
इस विधि में प्रत्येक खाते के सिर्फ शेष का लेखा ही तलपट के डेबिट या क्रेडिट में किया जाता है। .
वे अशुद्धियाँ, जो एक-दूसरे का समतोलन करती हैं, अर्थात् जिनमें एक अशुद्धि का प्रभाव दूसरी अशुद्धि के प्रभाव से स्वंय दूर हो जाता है, क्षतिपूरक अशुद्धियाँ कहलाती हैं, जैसे- क्रय खाते के ऋणी पक्ष की ओर रु0 100 कम लिखे गए तथा साथ ही मोहन के खाते के धनी पक्ष में रु 70 और सोहन के खाते में धनी पक्ष में रु 30 कम लिखे गए। इससे त्रुटियों का प्रभाव ऋणी पक्ष की ओर बराबर रहा, अतः यह अशुद्धि तलपट पर कोई प्रभाव नहीं डालेगी।
तलपट खाताबही के खातों से ज्ञात किये गये डेबिट और क्रेडिट पक्षों के योगों की एक सूची है, जो खाताबही की गणितीय शुद्दता की जाँच करने के उद्देश्य से निश्चित तिथि को तैयार की जाती है ।
निम्न अशुद्धियाँ तलपट से प्रकट नहीं होती हैं-
तलपट से प्रकट होने वाली अशुद्धियाँ निम्न लिखित हैं-
तलपट बनाने के निम्न उद्देश्य होते हैं-
v. दोहरा लेखा प्रणाली के नियमों का पालन करना आदि।
निम्न अशुद्धियाँ तलपट से प्रकट नहीं होती हैं-
तलपट से प्रकट होने वाली अशुद्धियाँ निम्न लिखित हैं-
तलपट बनाने के निम्न उद्देश्य होते हैं-
v. दोहरा लेखा प्रणाली के नियमों का पालन करना आदि।

व्याख्या (ब): मुख्य जर्नल में खतौनी अर्थात दोनों खातों में खतौनी नहीं की गयी।
सभी अशुद्धियों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. हिसाब की अशुद्धि
2. भूल की अशुद्धि
3. सैद्धांतिक अशुद्धि
4. क्षतिपूरक अशुद्धि
Rectifying Journal Entries
|
Particulars |
LF |
Dr. (रु) |
Cr. (रु) |
||||
|
a) Rent A/c |
Dr |
|
20,000 |
|
|||
|
|
To Landlord’s A/c |
|
|
20,000 |
|||
|
(Being rent wrongly debited to landlord’s a/c, now rectified) |
|
|
|
||||
|
b) Sales A/c |
Dr |
|
66,000 |
|
|||
|
|
To Machinery A/c |
|
|
66,000 |
|||
|
(Being old machinery sold, wrongly credited to sales a/c, now rectified) |
|
|
|
||||
|
c) Sohan |
Dr |
|
40,000 |
|
|||
|
|
To Rohan |
|
|
40,000 |
|||
|
(Being amount received from Rohan, wrongly credited to Sohan, now rectified) |
|
|
|
||||
सामान्यतया तलपट के डेबिट तथा क्रेडिट शेषों का योग मिलना चाहिए क्योंकि दोहरा लेखा प्रणाली के अनुसार प्रत्येक व्यवहार का दो खातों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है अर्थात जितनी धनराशि किसी एक खाते को डेविट की जाती है, उतनी ही धनराशि किसी अन्य खाते को क्रेडिट की जाती है। इस प्रकार डेबिट एवं क्रेडिट दोनों पक्षों के योग समान होते हैं।
Journal
|
S.N. |
Particulars |
L.F. |
Dr. (रु) |
Cr. (रु) |
|
i. |
Returns Inward A/c Dr. |
|
5,000 |
|
|
|
To Customer |
|
|
5,000 |
|
|
(Goods returned by customer not recorded, now rectified) |
|
|
|
|
ii. |
Telephone Charges A/c Dr. |
|
100 |
|
|
|
To Outstanding Telephone Charges |
|
|
100 |
|
|
(Outstanding telephone charges not recorded now recorded) |
|
|
|
|
iii. |
Suspense A/c Dr. |
|
150 |
|
|
|
To Expenses A/c |
|
|
150 |
|
|
(Total of debit side of expenses account has been cast in excess, now corrected) |
|
|
|
Journal
|
S.N. |
Particulars |
L.F. |
Dr. |
Cr. |
|
i. |
Sundry Debtors Dr. |
|
200 |
|
|
|
To Suspense A/c |
|
|
200 |
|
|
(Sales wrongly credited to debtors, now rectified) |
|
|
|
|
ii. |
Sales A/c Dr. |
|
180 |
|
|
|
To Suspense A/c |
|
|
180 |
|
|
(Excess posting in sales account, rectified) |
|
|
|
|
iii. |
Bills Receivable A/c Dr. |
|
100 |
|
|
|
Bills Payable A/c Dr. |
|
100 |
|
|
|
To Harish’s A/c |
|
|
200 |
|
|
(Bills receivable received passed through bills payable book, now rectified) |
|
|
|
तलपट के उद्देश्य:
1) खाताबही खातों की गणितीय शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए: तलपट यह बताने में सक्षम होता है कि खतौनी तथा काम में ली गयी लेखांकन प्रक्रियाओं में कोई गणितीय त्रुटि है या नहीं।
2) अंतिम खाते तैयार करने में सहायता के लिए: वित्तीय विवरणों को तलपट के आधार पर तैयार किया जाता है। बिना तलपट को तैयार करे यह कार्य कठिन हो सकता है, इसलिए, यह तलपट तैयार करने का दुसरा उद्देश्य होता है।
3) प्रत्येक खाते का सारांश: तलपट खाताबही खातों का सारांश पेश करता है। खाताबही को केवल तब देखा जाता है जब एक खाते से संबंधित अधिक जानकारियों की आवश्यकता होती है।
4) त्रुटियों का पता लगाने में सहायता के लिए: पुस्तपालन कार्य में त्रुटियों का पता लगाने में तलपट मदद करता है। हालांकि यह देखा गया है कि यह पुस्तपालन की सभी त्रुटियों का खुलासा नहीं परंतु केवल गणितीय त्रुटियों का पता लगाता है।
|
Name of Account
|
L.F.
|
Dr.
![]() |
Cr.
![]() |
|
Cash in Hand
|
|
4,100
|
|
|
Machine
|
|
25,000
|
|
|
Purchase
|
|
66,200
|
|
|
Sundry Debtors
|
|
24,300
|
|
|
Carriage Inward
|
|
1,800
|
|
|
Carriage Outward
|
|
|
700
|
|
Wages
|
|
17,500
|
|
|
Rent and Taxes
|
|
5,300
|
|
|
Sundry Creditors
|
|
|
17,000
|
|
Discount Allowed
|
|
|
1,200
|
|
Return Outward
|
|
2,400
|
|
|
Return Inward
|
|
|
9,600
|
|
Capital
|
|
30,000
|
|
|
Drawings
|
|
|
6,300
|
|
Bank Loan
|
|
10,000
|
|
|
Interest on Loan
|
|
1,500
|
|
|
Opening Stock
|
|
|
26,200
|
|
Sales
|
|
|
1,28,700
|
|
Discount Received
|
|
1,600
|
|
|
Total
|
|
1,89,700
|
1,89,700
|
|
Name of Account
|
L.F.
|
Dr.
![]() |
Cr.
![]() |
|
Cash in Hand
|
|
4,100
|
|
|
Machine
|
|
25,000
|
|
|
Purchase
|
|
66,200
|
|
|
Sundry Debtors
|
|
24,300
|
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|
Carriage Inward
|
|
1,800
|
|
|
Carriage Outward
|
|
700
|
|
|
Wages
|
|
17,500
|
|
|
Rent and Taxes
|
|
5,300
|
|
|
Sundry Creditors
|
|
|
17,000
|
|
Discount Allowed
|
|
1,200
|
|
|
Return Outward
|
|
|
2,400
|
|
Return Inward
|
|
9,600
|
|
|
Capital
|
|
|
30,000
|
|
Drawings
|
|
6,300
|
|
|
Bank Loan
|
|
|
10,000
|
|
Interest on Loan
|
|
1,500
|
|
|
Opening Stock
|
|
26,200
|
|
|
Sales
|
|
|
1,28,700
|
|
Discount Received
|
|
|
1,600
|
|
Total
|
|
1,89,700
|
1,89,700
|

व्याख्या (ब): मुख्य जर्नल में खतौनी अर्थात दोनों खातों में खतौनी नहीं की गयी।
सभी अशुद्धियों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. हिसाब की अशुद्धि
2. भूल की अशुद्धि
3. सैद्धांतिक अशुद्धि
4. क्षतिपूरक अशुद्धि
Rectifying Journal Entries
|
Particulars |
LF |
Dr. (रु) |
Cr. (रु) |
||||
|
a) Rent A/c |
Dr |
|
20,000 |
|
|||
|
|
To Landlord’s A/c |
|
|
20,000 |
|||
|
(Being rent wrongly debited to landlord’s a/c, now rectified) |
|
|
|
||||
|
b) Sales A/c |
Dr |
|
66,000 |
|
|||
|
|
To Machinery A/c |
|
|
66,000 |
|||
|
(Being old machinery sold, wrongly credited to sales a/c, now rectified) |
|
|
|
||||
|
c) Sohan |
Dr |
|
40,000 |
|
|||
|
|
To Rohan |
|
|
40,000 |
|||
|
(Being amount received from Rohan, wrongly credited to Sohan, now rectified) |
|
|
|
||||
सामान्यतया तलपट के डेबिट तथा क्रेडिट शेषों का योग मिलना चाहिए क्योंकि दोहरा लेखा प्रणाली के अनुसार प्रत्येक व्यवहार का दो खातों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है अर्थात जितनी धनराशि किसी एक खाते को डेविट की जाती है, उतनी ही धनराशि किसी अन्य खाते को क्रेडिट की जाती है। इस प्रकार डेबिट एवं क्रेडिट दोनों पक्षों के योग समान होते हैं।
Journal
|
S.N. |
Particulars |
L.F. |
Dr. (रु) |
Cr. (रु) |
|
i. |
Returns Inward A/c Dr. |
|
5,000 |
|
|
|
To Customer |
|
|
5,000 |
|
|
(Goods returned by customer not recorded, now rectified) |
|
|
|
|
ii. |
Telephone Charges A/c Dr. |
|
100 |
|
|
|
To Outstanding Telephone Charges |
|
|
100 |
|
|
(Outstanding telephone charges not recorded now recorded) |
|
|
|
|
iii. |
Suspense A/c Dr. |
|
150 |
|
|
|
To Expenses A/c |
|
|
150 |
|
|
(Total of debit side of expenses account has been cast in excess, now corrected) |
|
|
|
प्रति-प्रविष्टियाँ उन्हें कहते हैं जो रोकड़ बही के दोनों पक्षों में लिखी जाती है।
रोकड खाता खाताबही में बनाया जाता है जबकि रोकड पुस्तक एक पृथक पुस्तक है।
खुदरा रोकडि़ये को खुदरा रोकड़ बही को बनाए रखने के लिए मुख्य रोकडिये द्वारा नियुक्त किया जाता है। वह मुख्य रोकडिये के बोझ को कम करने के लिए खुदरा रोकड़ बही में छोटे-मोटे खर्चों से संबंधित सभी लेन-देनों को रिकॉर्ड करता है।
एक ‘प्रारंभिक प्रविष्टि’ मौजूदा लेखा अवधि की पुस्तकों के लिए, पिछले लेखांकन अवधि के चिट्ठे में प्रदर्शित विभिन्न परिसंपत्तियों, देनदारियों और पूँजियों के अंतिम शेष कह राशि लाने के लिए की जाती है।
एक प्रारंभिक प्रविष्टि करते समय, सभी परिसंपत्तियों के खातों को डेबिट और सभी दायित्वों के खातों को क्रेडिट किया जाता है।
इस पद्धति में
क्योंकि कोई भी व्यवसायी उस राशि से अधिक का भुगतान नहीं कर सकता है जितनी राशि उसके पास मौजूद है।
खुदरा रोकड़ व्ययों के उदाहरण:
1. यात्रा व्यय
2. ढुलाई व्यय
3. डाक व्यय
4. मुद्रण एवं स्टेशनरी व्यय
5. भाड़ा व्यय
क्रय बही में तथा क्रय खाते में निम्नलिखित अन्तर है-
(1) क्रय बही रोजनामचे का एक भाग है जबकि क्रय खाता खाताबही का भाग है।
(2) क्रय बही तथा क्रय खाते के प्रारुप में अंतर है। क्रय बही में डेबिट तथा क्रेडिट पक्ष नहीं होते जबकि क्रय खाते में डेबिट तथा क्रेडिट पक्ष होते हैं।
(3) क्रय बही में केवल उधार खरीदे गए माल का लेखा होता है जबकि क्रय खाते में नकद तथा उधार दोनों प्रकार के क्रय का लेखा किया जाता है।
एक रोकड़ बही एक जर्नल के उद्देश्य के साथ-साथ एक खाताबही के उद्देश्यों को भी पूरा करती है, इसलिए इसे जर्नल या खाताबही दोनों कहा जाता है। इसे जर्नलीकृत खाताबही के रूप में भी जाना जाता है।
राहुल को विक्रय खाते में 3,75,000 रुपए क्रेडिट होगा अर्थात् कुल विक्रय राशि में से व्यापारिक छूट को घटाया गया। नकद छूट प्रदान करना एक व्यय है और छूट प्रदान खाते में डेबिट की जाती है।
रोशन क्रय खाते में 40,000 रुपए अर्थात् व्यापारिक छूट के बाद की क्रय की राशि को डेबिट करेगा। वह इनपुट सीजीएसटी खाते में 2,400 रुपए और इनपुट एसजीएसटी खाते में 2,400 रुपए भी डेबिट करेगा। प्राप्त नकद छूट रोशन के लिए एक आय है। इसे छूट प्राप्त खाते में क्रेडिट किया जाएगा।
क्रय बही में तथा क्रय खाते में निम्नलिखित अन्तर है-
(1) क्रय बही रोजनामचे का एक भाग है जबकि क्रय खाता खाताबही का भाग है।
(2) क्रय बही तथा क्रय खाते के प्रारुप में अंतर है। क्रय बही में डेबिट तथा क्रेडिट पक्ष नहीं होते जबकि क्रय खाते में डेबिट तथा क्रेडिट पक्ष होते हैं।
(3) क्रय बही में केवल उधार खरीदे गए माल का लेखा होता है जबकि क्रय खाते में नकद तथा उधार दोनों प्रकार के क्रय का लेखा किया जाता है।
क्रय बही मैं निम्नलिखित सौदों का लेखा नहीं किया जाता-
(1) नकद क्रय – नकद क्रय का लेखा इस बही में नहीं किया जाता है।
(2) सम्पत्ति का खरीदना – इस बही में केवल उधार क्रय किए गए माल का ही लेखा किया जाता है। यदि कोई सम्पत्ति नकद या उधार खरीदी जाए जैसे मशीनरी, फर्नीचर, टाईपराईटर आदि तो इसका लेखा बही में नहीं किया जाएगा। सम्पत्तियों का लेखा उधार खरीदने पर Journal Proper में और नकद खरीदने पर रोकड़ बही में किया जाता है।



एक व्यवसाय में प्रयुक्त सबसे सामान्य सहायक बहियाँ निम्नलिखित हैं:
1. रोकड़ बही
2. क्रय बही
3. विक्रय बही
4. क्रय वापसी (जावक वापसी) बही
5. विक्रय वापसी (आवक वापसी) बही
6. प्राप्य विपत्र बही
7. देय विपत्र बही
8. मुख्य जर्नल

माल वापस लौटाए जाने पर नाम पत्र तैयार किया जाता है और इसके आधार पर क्रय वापसी पुस्तक में प्रविष्टि अभिलेखित की जाती है। जीएसटी (आईजीएसटी अथवा सीजीएसटी व एसजीएसटी) का भुगतान माल के क्रय के समय किया जाता है। इस प्रकार, क्रय वापसी पुस्तक या बाह्य वापसी पुस्तक, इनपुट आईजीएसटी अथवा इनपुट सीजीएसटी और इनपुट एसजीएसटी भी रिवर्स किए जाते हैं।
नाम पत्र का प्रारूप निम्नानुसार है:
|
Bazar Mart 11/1500, Mathura Road, Faridabad, Haryana DEBIT NOTE |
|
|
Debit Note No. 111 |
7th March, 2018 |
|
M/s. ABC Mobiles 1/100, Rajiv Chowk, New Delhi |
|
|
Return of 50 pieces Mobile Handsets |
|
|
Being received in damaged condition ( |
5,00,000 |
|
Less: Trade Discount @ 25% |
1,25,000 |
|
|
3,75,000 |
|
Add: IGST @ 12% |
45,000 |
|
Rupees Four lakhs twenty thousand only) |
4,20,000 |
|
|
|
|
E.& O.E. |
For Bazar Mart Sd/- Manager (Materials) |
खुदरा रोकड़ बही रखने के मुख्य लाभ हैं:
1. समय की बचत: यह मुख्य रोकडि़ये के समय की बचत करती है।
2. श्रम की बचत: यह खाताबही में लिखने में श्रम को बचाती है।
3. नियंत्रण: यह निरंतर प्रकृति के छोटे भुगतानों पर नियंत्रण प्रदान करता है।
4. खाताबही खाते तैयार करने में सुविधा: खाताबही में खताने के लिए योग लिये जाते हैं।
अनावश्यक विवरण नहीं लिये जाते हैं।
इस बही में ऐसे माल की वापसी का लेखा किया जाता है जो उधार क्रय किए गए थे। इसे बाह्रय वापसी बही भी कहते हैं। माल वापिस करने के निम्न कारण हो सकते है-
1. जब माल दिखाये गये नमूने के अनुसार न भेजा गया हो।
2. यदि माल आदेश के अनुसार नहीं है अथवा माल घटिया किस्म का है।
3. यदि माल खराब दशा में है अथवा रास्ते में खराब हो गया है।
4. यदि बीजक में मूल्य अधिक लगा दिया गया हो।
5. यदि माल देर से भेजा गया हो।
A. भूल की अशुद्धि।
B. सैद्धांतिक अशुद्धि।
C. हिसाब की अशुद्धि।
D. क्षतिपूरक अशुद्धि।
जब किसी लेनदेन को लेखांकन सिद्धांतों का उलंघन कर रिकाॅर्ड किया जाता है तो इसे सैद्धांतिक अशुद्धि के रूप में जाना जाता है। ऐसी अशुद्धि तलपट को प्रभावित नहीं करती है क्योंकि राशि को सही पक्ष में तो लिखा जाता है परंतु सही खाते में नही।
A. दो भागों में।
B. तीन भागों में।
C. पांच भागों में।
D. आठ भागों में।
भूल की अशुद्धि को दो भागों में विभाजित किया जात सकता है: पूर्णतः भूल की अशुद्धि तथा आंशिक भूल की अशुद्धि।
A. भूल की अशुद्धि।
B. सैद्धांतिक अशुद्धि।
C. हिसाब की अशुद्धि।
D. क्षतिपूरक अशुद्धि।
हिसाब की अशुद्धि:- ये ऐसी त्रुटियाँ होती है जो गलत लेनदेन की गलत खतौनी, खातों के गलत शेष या योग, सहायक बहियों के गलत राशि लिखने से होने वाली त्रुटियाँ होती है।
A. सैद्धांतिक अशुद्धि।
B. लिपिकीय अशुद्धि।
C. जानबूझकर की गई अशुद्धि।
D. क्षतिपूकर अशुद्धि।
लेखांकन स्टाफ द्वारा लापरवाही से की गई अशुद्धि लिपिकीय अशुद्धि होती है। लिपिकीय अशुद्धि को विभाजित किया जाता है: भूल की अशुद्धि, हिसाब की अशुद्धि तथा क्षतिपूरक अशुद्धि।
A. अभिलेखन की त्रुटि।
B. योग की त्रुटि।
C. खतौनी की त्रुटि।
D. आगे ले जाने की त्रुटि।
यह त्रुटि तब होती है जब किसी लेनदेन को गलती से प्रारंभिक लेखा बहियों में रिकाॅर्ड किया जाता है। उदाहरण के लिए: सोहन से 7,000 रु के माल की उधार क्रय को क्रय बही में 70,000 रु से रिकाॅर्ड किया गया।
A. सैद्धांतिक अशुद्धि।
B. हिसाब की अशुद्धि।
C. क्षतिपूरक अशुद्धि।
D. भूल की अशुद्धि।
लेनदेनों को गलत सहायक बही या खाताबही में लिखना या गलत खतौनी करना हिसाब की अशुद्धि के नाम से जाना जाता है।
A. डूबत ऋण वसूली खाता।
B. स्मिथ का खाता।
C. रोकड़ खाता।
D. डूबत ऋण खाता।

A. आग से समाप्त हुआ माल।
B. विक्रय खाता।
C. रोकड़ खाता।
D. क्रय खाता।

A. केवल व्यापार खाता।
B. केवल लाभ-हानि खाता।
C. केवल स्थिति-विवरण।
D. अन्तिम खाते।
तलपट की सहायता से अन्तिम खातों को तैयार किया जाता है (जिसमें व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता एवं आर्थिक चिट्ठे होते हैं )।
A. क्रय खाते को डेबिट तथा उचंती खाते को 4,500 रु से क्रेडिट किया जाता है।
B. उचंती खाते को डेबिट तथा क्रय खाते को 4,500 रु से क्रेडिट किया जाता है।
C. क्रय खाते को डेबिट तथा उचंती खाते को 500 रु से क्रेडिट किया जाता है।
D. क्रय खाते को डेबिट तथा उचंती खाते को 5,000 रु से क्रेडिट किया जाता है।
क्रय खाते को डेबिट तथा उचंती खाते को क्रेडिट किया जायेगा क्योंकि यह एक पक्षीय अशुद्धि है। हमने केवल क्रय खाते में गलत राशि प्रविष्टि की है।
A. मजदूरी खाता।
B. रोकड़ खाता।
C. भवन खाता।
D. छाया का निर्माण खाता।
छाया के निर्माण के लिये चुकता मजदूरी को भवन खाते में डेबिट किया जाना चाहिए। छाया का निर्माण भवन का एक भाग होता है। यह एक पूँजीगत व्यय है। अतः इसे भवन खाते में डेबिट किया जाना चाहिए।
A. विक्रय बही का योग 1,000 रु से कम लगाया गया।
B. मधु द्वारा 1,000 रु की विक्रय वापसी को रिकाॅर्ड नहीं किया गया।
C. मधु द्वारा 1,000 रु की विक्रय वापसी को 100 रु से रिकाॅर्ड किया गया।
D. मधु द्वारा 1,000 रु की विक्रय वापसी को क्रय वापसी बही में रिकाॅर्ड किया गया।
इस त्रुटि को उचंती खाते का उपयोग करते हुए सुधारा जायेगा क्योंकि सभी एक पक्षीय त्रुटियों को उचंती खाते में प्रविष्टि करते हुए सुधारा जाता है।
A. हिसाब की अशुद्धि।
B. भूल की अशुद्धि।
C. क्षतिपूरक अशुद्धि।
D. सैद्धांतिक अशुद्धि।
ये ऐसी त्रुटियाँ होती है जो गलत लेनदेन की गलत खतौनी, खातों के गलत शेष या योग, सहायक बहियों के गलत राशि लिखने से होने वाली त्रुटियाँ होती है।
A. मजदूरी खाता।
B. मशीनरी खाता।
C. पूँजी खाता।
D. रेाकड़ खाता।
इसे मशीनरी खाते में डेबिट किया जाना चाहिए, क्योंकि किसी भी सम्पत्ति पर किया गया अतिरिक्त व्यय उसी सम्पत्ति का एक भाग होता है तथा इसे सम्पत्ति खाते में शामिल किया जाता है।
A. खाता है।
B. विवरण है।
C. प्रारम्भिक लेखे है।
D. खाताबही है।
प्रारम्भिक लेखे की पुस्तकों में लिखे गए व्यवहारों की खाताबही में खतौनी कर चुकाने के पश्चात यह सुनिश्चत करना आवश्यक है कि लेखांकन कार्य में कोई अशुद्धि तो नहीं हुई है। इस हेतु एक निश्चित तिथि को विभिन्न खातों के योग अथवा शेषों के द्वारा एक सूची या विवरण-पत्र बनाया जाता है जिसे तलपट या परीक्षा-सूची कहा जाता है।
A. क्रेडिट शेष।
B. शून्य शेष।
C. डेबिट शेष।
D. ऋणात्मक शेष।
आवक वापसी खाता या विक्रय वापसी खाता हमेशा डेबिट शेष प्रदर्शित करता है, इसलिए, इसे तलपट के डेबिट काॅलम में प्रदर्शित किया जाता है।
A. क्रेडिट शेष।
B. शून्य शेष।
C. डेबिट शेष।
D. ऋणात्मक शेष।
प्रारंभिक रहतिया एक डेबिट शेष प्रदर्शित करता है, जिसे तलपट के डेबिट काॅलम में दिखाया जाता है।
A. पूँजी खाता।
B. आहरण खाता।
C. विक्रय खाता।
D. क्रय खाता।

A. त्रुटियों का संशोधन।
B. अशुद्धियों का सुधार।
C. द्विप्रविष्टि प्रणाली।
D. एकल प्रविष्टि प्रणाली।
अशुद्धियाँ चाले तलपट को प्रभावित करे या नहीं करे उनका पता लगाना तथा सुधारना आवश्यक होता है। लेखों में हुयी अशुद्धियों को सही करने के लिए तथा लेखांकन रिकाॅर्डों को सही करने के लिए अपनायी गई प्रक्रिया को अशुद्धियों का सुधार कहा जाता है।
A. तीन वर्गों में।
B. पांच वर्गों में।
C. चार वर्गों में।
D. चार वर्गों में।
सभी अशुद्धियों को चार वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है: सैद्धांतिक अशुद्धि, भूल की अशुद्धि, हिसाब की अशुद्धि तथा क्षतिपूरक अशुद्धि।
A.
500 रु
B.
2,000 रु
C.
1,000 रु
D.
2,500 रु
रोकड़ बही का शेष ज्ञात करने के लिए गलत क्रेडिट को घटाया जाएगा।
A.
15,000 रु
B.
55,000 रु
C.
25,000 रु
D.
40,000 रु
बिल का भुगतान शेषों को प्रभावित नहीं करेगा।
A.
400 रु
B.
300 रु
C.
200 रु
D.
500 रु
कुल अंतर 400 रु - 100 रु = 300 रु होगा।
A.
2,000 रु
B.
2,100 रु
C.
2,200 रु
D.
1,900 रु
व्याख्या अधिक जोड़ की समस्या केवल रोकड़ कॉलम को प्रभावित करेगी तथा रोकड़ बही के बैंक कॉलम को नहीं।
A.
2,200 रु
B.
2,000 रु
C.
1,800 रु
D.
2,400 रु
ग्राहक के खाते से बैंक प्रभार पहले से सीधे चार्ज तथा पासबुक में डेबिट किये जा चुके हैं। इस स्थिति में, इसे रोकड़ बही में भी रिकॉर्ड किया गया है। अतः, दोनों पुस्तकों के शेषों में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
A.
50,000 रु
B.
2,200 रु
C.
47,800 रु
D.
52,200 रु
रोकड़ बही का शेष ज्ञात करने के लिए गलत क्रेडिट को घटाया जाएगा।
A.
2,000 रु
B.
200 रु
C.
2,200 रु
D.
1,800 रु