CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 170901 पार्षद सीमानियम के उद्देश्य की पहचान कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सीमानियम का उद्देश्य कम्पनी के साथ कार्य करने वाले अंशधारकों, लेनदारों तथा अन्य व्यक्तियों को कम्पनी की गतिविधियों की अनुमत सीमा के बारे में अवगत कराना होता है। यह कंपनी की शक्तियों एवं उद्देश्यों तथा बाहरी पक्षों के साथ कंपनी के संबंधों को परिभाषित करता है।


Q. 170902 कम्पनी के नाम का चयन करते समय ध्यान रखी जाने वाली किन्हीं दो बातों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कम्पनी के नाम का चयन करते समय ध्यान रखी जाने वाली दो बातें हैं:-
1. कम्पनी का नाम किसी मौजूदा कम्पनी के नाम के समान तथा उसका परिचायक नहीं होना चाहिए।
2. कम्पनी का नाम प्रतिक एवं नाम अधिनियम 1950 के प्रावधानों के तहत आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए।


Q. 170903 प्रविवरण के स्थान पर विवरण क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अंशों द्वारा सीमित एक सार्वजनिक कंपनी अपनी पूँजी जुटाने के लिए सदस्यता लेने के लिए जनता को आमंत्रित नहीं करती है। इसके बजाय, इसे अंशों का आवंटन करने से तीन पहले कंपनी रजिस्ट्रार को एक प्रविवरण के स्थान विवरण जमा कराना आवश्यक होता है। इसमें एक प्रविवरण के समान जानकारी शामिल होती है।


Q. 170904 निगमन का एक प्रमाण पत्र क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

निगमन का प्रमाणपत्र एक कंपनी के पंजीकरण पर कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र होता है। यह एक कंपनी के निगमन के लिए आवश्यक सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने का एक सबूत होता है। निगमन का प्रमाण पत्र कंपनी के जन्म का प्रमाण पत्र होता है।


Q. 170905 व्यापार प्रारंभ के प्रमाण पत्र का वर्णन करें?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह निगमन के प्रमाण पत्र के अलावा, एक सार्वजनिक कंपनी के लिए कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा दिया गया एक प्रमाण पत्र होता है। यह व्यापार संचालन शुरू करने के लिए कंपनी को अधिकृत करता है। एक निजी कंपनी इस प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह निगमन का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद अपने व्यवसाय को शुरू कर सकती हैं। यह कम्पनी की अंश पूँजी के लिए न्यूनतम अभिदान प्राप्त करने के बाद जारी किया जाता है।


Q. 170906 एक निजी कंपनी के गठन में शामिल चरणों स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक निजी कंपनी के गठन में शामिल चरण हैं: -
1. संवर्धन - यह एक कंपनी शुरू करने के लिए एक व्यापार के अवसर अपनाने की एक प्रक्रिया है। इसमें एक कम्पनी के गठन के लिए आवश्यक सभी संसाधनों को संगठित करता तथा नियोजन को शामिल किया जाता है।
2. निगमन - यह कंपनी अधिनियम 1956 के तहत तहत कंपनी के पंजीकरण को संदर्भित करता है। इसमें बहुत से चरण अपनाये जाते हैं, दस्तावेज तैयार किये जाते हैं तथा इन्हें कम्पनी के रजिस्ट्रार के पास जमा कराये जाते हैं।


Q. 170907 व्यवसाय के प्रारंभ होने का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के नाम बताईए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज हैं:
1. ऐसी घोषणा कि न्यूनतम अभिदान प्राप्त हो गया है।
2. ऐसी घोषणा कि निदेशकों ने योग्यता अंश ले लिये हैं और नकदी में आवेदन और आबंटन राशि का भुगतान कर दिया है।
3. आवेदकों को कोई राशि वापस नहीं की जाती है।
4. सभी आवश्कताओं को पूर्ति के बारे में बताते हुए घोषणा को निदेशकों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाता है।


Q. 170908 पार्षद सीमानियम में उद्देश्य खंड को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

उद्देश्य खंड एक कंपनी के उद्देश्यों को स्पष्ट करता है। इसमें कम्पनी के मुख्य उद्देश्यों और सहायक उद्देश्यों, साथ ही साथ अन्य उद्देश्यों को भी शामिल किया जा सकता है। कंपनी केवल उद्देश्य खंड में उल्लेखित उद्देश्यों के लिए उद्देश्यों के दायरे के भीतर की गतिविधियों का प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होती है। इसे केवल केन्द्र सरकार और पूरी अन्य कानूनी औपचारिकताओं से अनुमोदन के बाद ही बदला जा सकता है।


Q. 170909 अभिगोपक कौन है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अभिगोपक वह व्यक्ति होते हैं जो जनता द्वारा अंषों के अभिदान करने पर स्वंय खरीदने का वचन देते हैं। इसके बदले में वे कमीशन लेते हैं।


Q. 170910 स्थानापन्न प्रविवरण पत्र के लिए वैधानिक आवश्यकताओं को सूचीबद्ध कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

स्थानापन्न प्रविवरण पत्र के लिए वैधानिक आवश्यकताऐं निम्नलिखित हैं:-

- कम्पनी के सभी निदेशकों द्वारा विधिवत् हस्ताक्षर।

- दिनांकित।

- अंशों के आवंटन के कम से कम 3 दिन पूर्व कम्पनी रजिस्ट्रार के पास जमा।

- इसे रजिस्ट्रार को सुपुर्द किया गया था जब के संकेत।


Q. 170911 एक प्रविवरण पत्र में गलत कथन के लिए दायित्व क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रविवरण में किसी भी प्रकार का गलत कथन या गलत प्रस्तुतिकरण दो प्रकार के दायित्वों का अधिरोपण कर सकता हैः

        1. दीवानी दायित्व: यह एक व्यक्ति का, नये अभिदित अंशों एवं ऋणपत्रों के धारकों को प्रविवरण पत्र में गलत कथन के कारण हुई क्षतिपूर्ति चुकाने के लिए दायित्व होता है।

        2. आपराधिक दायित्व: जिम्मेदार पाये गये व्यक्ति को 2 वर्ष तक कारावास या 50,000 रु का जुर्माना या दानों हो सकती है।


Q. 170912 एक कम्पनी के पार्षद अंतर्नियमों के पंजीकरण के लिए पूरी की जाने वाली किन्हीं तीन वैधानिक आवश्यकताओं को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक कम्पनी के पार्षद अंतर्नियमों के पंजीकरण के लिए पूरी की जाने वाली तीन वैधानिक आवश्यकताऐं हैं:
1. दस्तावेजों को मुद्रित, अनुच्छेदों में विभाजित और लगातार क्रम में किया जाना चाहिए।
2. यदि इसमें यह कंपनी अधिनियम, 1956 या कंपनी के सीमा नियम के प्रावधानों के विपरीत कुछ भी होता है तो यह निष्क्रिय हो जाता है।
3. असीमित कम्पनियों, गारंटी द्वारा सीमित कम्पनियों तथा अंशों द्वारा सीमित निजी कम्पनियों द्वारा अपने सीमा नियमों के साथ-साथ अंतर्नियमों का पंजीकरण आवश्यक होता है।


Q. 170913 पार्षद अंतर्नियमों की प्रकृति तथा विस्तार के आधार पर इसमें तत्वों को बदलने पर लागायी जाने वाली कोई तीन प्रतिबंधों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक कम्पनी के पार्षद अंतर्नियमों में तत्वों के परिवर्तन पर लगायी जाने वाले प्रतिबंध हैं:
1. इसके परिवर्तन कंपनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करते हों और इसे एक कंपनी के पार्षद सीमानियम के विपरीत नहीं होना चाहिए।
2. इस परिवर्तन का प्रभाव अल्पसंख्यक अंशधारकों के हितों पर प्रतिकूल नहीं होना चाहिए।
3. इसमें कुछ भी गैरकानूनी मंजूरी नहीं होनी चाहिए।


Q. 170914 स्टारलाईट कम्प्यूटर लिमिटेड अपने पार्षद अंतर्नियम के पंजीकरण की प्रक्रिया में है। पार्षद अंतर्नियम के कुछ ऐसे आवश्यक तत्वों के बारे में बताईए जिनको इसमें शामिल किया जाना चाहिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पार्षद अंतर्नियम के कुछ आवश्यक तत्व इस प्रकार है जिन्हें अंतर्नियम के पंजीकरण से पूर्व स्टारलाईट कम्प्यूटर लिमिटेड को शामिल करने चाहिए:-
1. जारी की जाने वाली अंशपूँजी की राशि।
2. जारी किये जाने वाले अंशों के प्रकार।
3. अंशों के आवंटन की प्रक्रिया।
4. अंशों के हरण एवं हस्तांतरण की प्रक्रिया।
5. ऋणपत्रों तथा स्टाॅक के निर्गमन की प्रक्रिया।
6. कम्पनी की बैठकों के आयोजन की प्रक्रिया।
7. निर्देशकों की नियुक्ति, शक्तियों, दायित्वों तथा परिश्रमिक के नियम।


Q. 170915 पार्षद सीमानियम के महत्व की चर्चा कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह एक व्यवसाय की नींव है। इसमें कंपनी की शक्तियों और उद्देश्यों को शामिल किया जाता है। यह एक कम्पनी का संविधान होता है जो बाहर की दुनिया से संबंधित होता है। किसी भी कम्पनी को केन्द्र सरकार या अदालत के कानून की मंजूरी के बिना इसके तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं होती है। सीमानियमों के अनुसार निर्धारित गतिविधियों के दायरे से बाहर किया जाने वाला कार्य अनधिकृत कार्य माना जाता है।


Q. 170916 एक दायित्व खण्ड क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

वह खण्ड जो कंपनी के सदस्यों के दायित्वों को परिभाषित करता है। अंशों द्वारा सीमित कंपनी की स्थिति में, दायित्व अंशों अचुकता मूल्यों तक सीमित होता है। गारंटी द्वारा सीमित कंपनी के स्थिति में दायित्व एक सदस्य द्वारा दी गयी गारंटी राशि तक सीमित होता है। भारत में केवल अंशों द्वारा सीमित कंपनियाँ ही होती है। माना कि एक सदस्य के पास 10 रु वाले अंश हैं जिस पर उसने 9 रु का भुगतान कर दिया है। इस मामले में कंपनी की ओर सदस्य का दायित्व केवल 1 रु तक सीमित है।


Q. 170917 कम्पनी के पार्षद सीमानियम के उद्देश्य खण्ड को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह एक कंपनी के पार्षद सीमानियम का सबसे महत्वपूर्ण खंड होता है। यह कंपनी के गठन  के उद्देश्य को परिभाषित करता है। इसमें कम्पनी द्वारा वांछित मुख्य तथा अन्य उद्देश्यों को शामिल किया जाता है। यह कंपनी के क्षेत्रों और सीमाओं को परिभाषित करता है। एक कंपनी एक ऐसी गतिविधि प्रारंभ करने की अधिकारी नहीं होती है यदि वह गतिविधि कानूनी रूप से इस खंड के उद्देश्यों से परे हो। यह खंड मुख्य उद्देश्यों और अन्य उद्देश्यों नाम के दो उप-खंडों में विभाजित होता है।


Q. 170918 अनधिकृत कार्यों के सिद्धांत से आप क्या समझते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सीमानियम कम्पनी की गतिविधियों की सीमा का निर्धारण करती है। यदि कोई गतिविधि सीमानियम के क्षेत्र से बाहर होती है तो उसे अनाधिकृत करार दिया जायेगा। यह कम्पनी को बांधने का कार्य नहीं करता है। इसे अनधिकृत कार्यों के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है।


Q. 170919 एक परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता से आप क्या समझते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक परियोजना तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो सकती है परंतु यह एक ही समय में लाभदायक नहीं हो सकती है। एक परियोजना की लाभप्रदता को आर्थिक व्यवहार्यता कहा जाता है। यदि कुछ परियोजनाऐं आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होती हैं, तो विचार को त्यागना पड़ सकता है। प्रवर्तक आम तौर पर इन अध्ययनों का संचालन करने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेते हैं। यह देखा जा सकता है कि ये विशेषज्ञ प्रवर्तक नहीं बनते हैं क्योंकि वे इन अध्ययनों में प्रवर्तकों की सहायता करते हैं।


Q. 170920 प्रवर्तकों की कानूनी स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रवर्तक तो एक एजेंट होता है और ही एक न्यासी होता है। प्रवर्तक की कानूनी स्थिति इस प्रकार है:
1. इसका कंपनी के साथ विश्वास का एक रिश्ता होता है।
2. इसे कंपनी के व्यवहार से किसी भी गुप्त लाभ नहीं रखना चाहिए।
3. उसे कंपनी के खाते में कंपनी के पैसे जमा करना चाहिए।
4. उसे उचित देखभाल और बुद्धि के साथ प्रचार के लिए सही निर्णय लेना चाहिए।
5. उसे प्रारंभिक अनुबंध के लिए जिम्मेदार होना चाहिए।
6. उसे कंपनी के लिए अपनी निजी संपत्ति की बिक्री करने से बचना चाहिए।


Q. 170921 पार्षद अंतर्नियम में शामिल बातों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पार्षद अंतर्नियम में शामिल बाते हैं:-
1. अंशों के प्रकार।
2. अंशधारकों के प्रत्येक वर्ग के अधिकार।
3. अंशों के आवंटन की प्रक्रिया।
4. अंश प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया।
5. बैठकों का आयोजन करने की प्रक्रिया।
6. निदेशकों की नियुक्ति एवं पारिश्रमिक के लिए नियम।
7. अंश परिवर्तन संबंधी प्रक्रिया।
8. कंपनी के समापन की प्रक्रिया।


Q. 170922 एक कंपनी के एक प्रवर्तक कौन होते हैं?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक प्रवर्तक वह व्यक्ति होता है जो कम्पनी के निगमन के लिए सभी आवश्यक कार्य करता है। एक प्रवर्तक व्यवसाय का नियोजन तथा संगठन करता है तथा ऐसी सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करता है जिससे नई कंपनी अस्तित्व में सके। यह एक व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह या एक कंपनी हो सकता है।


Q. 170923 निगमन का प्रमाण पत्र क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

निगमीकरण का प्रमाणपत्र कंपनी के कानूनी अस्तित्व का निर्णायक सबूत होता है। एक कंपनी कानूनी तौर इस प्रमाण पत्र पर अंकित तारीख को जन्म लेती है। यह उस तारीख पर सतत उत्तराधिकार के साथ एक अलग कानूनी इकाई बन जाती है। एक निजी कंपनी के निगमन का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद अपना कारोबार शुरू कर सकती है और उसे व्यापार के प्रारंभ के लिए प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होती है।


Q. 170924 आवंटन पर वापसी क्या होती है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

आवंटन पर वापसी एक ऐसा विवरण होता है जिसमें अंशों के आवंटन से संबंधित सभी जानकारियाँ होती है। यह निर्देशकों या सचिव द्वारा हस्ताक्षरित होता है। इसे आवंटन के 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास जमा कराना होता है। आवंटन की वापसी निम्नलिखित जानकारी देता है:
1. अंशधारकों के नाम और पते।
2. प्रत्येक अंशधारक को जारी किये गये अंशों की संख्या।


Q. 170925 प्रविवरण पत्र तथा स्थानापन्न प्रविवरण पत्र में अंतर कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

Description: /stryde/images/2015/10/09/20151009210890001444365020.jpg


Q. 170926 पंजीकरण के लिए प्रविवरण पत्र के साथ जमा होने वाले किन्हीं चार दस्तावेजों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रविवरण पत्र के साथ जमा होने वाले चार दस्तावेज हैः

1. प्रविवरण पत्र में विशेषज्ञों की सहमती उल्लेखित हो, यदि इसमें उनकी रिपोर्ट सम्मिलित हो

2. प्रबंध निदेशक या प्रबंधक के वेतन एवं नियुक्ति से सम्बंधित सभी समझौतों की प्रति

3. लाभ एवं हानि, सम्पत्तियों तथा दायित्वों में कोई समायोजन के लिखित स्टेटमेंट

4. अभिगोपन समझौते की प्रति, यदि कोई हो तो


Q. 170927 पार्षद अंतर्नियम क्या होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पार्षद अंतर्नियमों में कंपनी के आंतरिक प्रबंधन के लिए नियमों और विनियमों को शामिल किया जाता है। इन नियमों और विनियमों को पार्षद सीमानियमों में स्पष्ट किये गये उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनाया जाता है। पार्षद अंतर्नियमों में अंशों के निर्गमन, अंशों के हरण, बैठकों तथा पुस्तकों के रखरखाव को शामिल किया जाता है। यह अंतर्नियम सीमानियम के अधीनस्थ होता है अतः यह सीमानियमों में वर्णित किसी भी नियम का विरोधी नहीं होना चाहिए।


Q. 170928 एकाकी व्यापार के दोष बताइए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एकाकी व्यापार के दोष
सीमित पूँजी- इसके अंतर्गत व्यापारी के पूँजी साधन सीमित होते हैं आर्थिक दृष्टि से अपने तथा अपने पारिवारिक सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता है 
अनुपस्थिति में हानि- इस व्यापार में व्यवसाय पूर्ण रूप से व्यापारी पर निर्भर रहता है अतः उसकी अनुपस्थिति में व्यवसाय को हानि हो सकती है 
अस्थायी अस्तित्व- इस व्यवसाय में यदि व्यापार का स्वामी कार्य करने में असमर्थ रहता है या मर जाता है तो व्यापार का अस्तित्व समाप्त हो जाता है 
सीमित ख्याति- प्रत्येक व्यक्ति की ख्याति सीमित होती है एकाकी व्यापारी को केवल व्यक्तिगत ख्याति पर ही उधार प्राप्त होता है इस प्रकार एकाकी व्यापार की साख क्षमता सीमित होती है 
उतावले निर्णय- एकाकी व्यापारी खुद ही सम्पूर्ण व्यापार का संचालन करता है जिस कारण वह कभी कभी जल्दबाजी में अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से निर्णय ले लेता है जो अधिकांशः गलत साबित होते हैं


Q. 170929 एकाकी व्यापार के लक्षण बताइए ?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एकाकी व्यापार के लक्षण
एकाकी स्वामित्व- इस व्यवसाय में एक ही स्वामी होता है जो समस्त व्यवसायिक क्रियाओं के लिए उत्तरदायी होता है तथा स्वयं ही संचालन एवं वित्त व्यवस्था करता है 
अविभाजित जोखिम- इस व्यवसाय के अंतर्गत लाभ तथा हानि दोनों का सम्बन्ध एकल स्वामी से है वह अकेले ही लाभ का फ़ायदा उठा सकता है 
एकाकी प्रबंध- एकाकी व्यापारी अपने व्यवसाय में सम्बंधित समस्त मामलों का सर्वोच्च निर्णायक होता है वह अपने व्यापार का एकमात्र मालिक होने के साथ साथ एकमात्र प्रबंधक भी होता है 
सीमित कार्यक्षेत्र- इस व्यवसाय के साधन क्षमता सीमित होती है किन्तु दायित्व असीमित होने के कारण व्यवसाय का कार्य अधिक विस्तृत नहीं होता 
व्यवसाय के चुनाव की स्वतन्त्रता- एकाकी व्यापार के स्वामी को व्यवसाय के चुनाव की पूर्ण स्वतन्त्रता होती है तथा वो उसमें इच्छानुसार परिवर्तन भी कर सकता है


Q. 170930 पंजीयन न होने के प्रभाव बताइए?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

फर्म को अभियोग चलाने का अधिकार-

पंजीयन के अभाव में फर्म अन्य पक्षों पर अभियोग नहीं चला सकती।

पंजीयन के अभाव में अन्य पक्ष फर्म पर अभियोग चला सकते हैं।

इससे फर्म को हानि होती है एवं अधिकार प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

फर्म का साझेदारों के विरुद्ध अभियोग चलाने का अधिकार-

पंजीयन के अभाव में फर्म  साझेदारों के विरुद्ध अपने अधिकारों के लिए अभियोग नहीं चला सकती।

 फर्म या फर्म का कोई साझेदार अन्य साझेदारों के प्रति वाद प्रस्तुत नहीं कर सकता।

साझेदारों का फर्म के विरुद्ध अभियोग चलाने का अधिकार-

साझेदारी के पंजीयन के अभाव में  साझेदार फर्म के ऊपर वाद प्रस्तुत नहीं कर सकते।

साझेदारों का एक दूसरे के प्रति वाद प्रस्तुत करने का अधिकार-

साझेदारी के पंजीयन के अभाव में साझेदार एक दूसरे पर अपने अधिकारों के लिए वाद प्रस्तुत नहीं कर सकते।

साझेदार पारस्परिक समझौते से उत्पन्न होने वाले अधिकारों को प्रवर्तित करने का अधिकार नहीं रखते।


Q. 170931 पंजीयन के लाभ बताइए?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पंजीयन के लाभ-

फर्म को लाभ-

पंजीयन के अभाव में फर्म को दीवानी अदालत में अन्य पक्ष के विरुद्ध वाद प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं होता है।

पंजीयन के उपरान्त फर्म अपने हित के लिए अन्य पक्षकारों पर अभियोग चला सकती है।

साझेदार को लाभ-

फर्म के पंजीयन के उपरान्त साझेदार फर्म के विरुद्ध तथा एक दूसरे के विरुद्ध अभियोग चलाने के अधिकारी हो जाते हैं।

ऋणदाताओं को लाभ

फर्म के पंजीयन हो जाने के उपरान्त कोई भी साझेदार अपने आपको साझेदार होने से मना नहीं कर सकता है।

अतः ऋणदाता अपने ऋण के लिए किसी भी साझेदार पर दावा प्रस्तुत कर सकता है।

प्रवेश होने वाले साझेदार को लाभ-

पंजीकृत फर्म में नया साझेदार फर्म में अपने अधिकारों के लिए लड़ सकता है।

पृथक होने वाले साझेदार को लाभ-

पृथक होने वाला साझेदार यदि फर्म के रजिस्ट्रार को सार्वजनिक सूचना  दे तो वह फर्म से अलग होने वाली तिथि से फर्म के किसी कार्य के लिए उत्तरदायी नहीं होगा


Q. 170932 एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा प्रविवरण पत्र जारी करने के उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक पब्लिक लिमिटेड कम्पनी द्वारा प्रविवरण पत्र जारी करने के उद्देश्य हैं-

        1. जनता को कम्पनी के बारे में सूचना देने के लिए

        2. कम्पनी के अंशों एवं ऋणपत्रों में विनियोग करने के लिए लोगो को प्रेरित करने के लिए

        3. अंशों एवं ऋणपत्रों के निर्गमन की शर्तों एवं नियमों को प्रमाणिकता साबित करने के लिए

        4. उनके द्वारा दी गई सूचनाओं के लिए सम्बंधित व्यक्तियों का उत्तरदायित्व निश्चित करने के लिए


Q. 170933 एक प्रविवरण पत्र के कुछ आवश्यक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक प्रविवरण पत्र के कुछ आवश्यक विशेषताएँ हैं-

        1. यह साधारण जनता को अंशों एवं ऋणपत्रों के अभिदान के लिए एक निमंत्रण होना चाहिए ना कि निदेशकों को।

        2. निमंत्रण अंशों एवं ऋणपत्रों को क्रय करने के लिए बनाया जाना चाहिए।

        3. निमंत्रण अंशों एवं ऋणपत्रों के अभिदान एवं क्रयसे सम्बंधित होना चाहिए।

        4. कम्पनी के अंशों एवं ऋणपत्रों के निमंत्रण के प्रस्ताव से सम्ंबधित होने चाहिए।

        5. निमंत्रण लिखित होना चाहिए क्योंकि मौखिक निमंत्रण अमान्य होता है।

        6. निमंत्रण कम्पनी के लिए या कम्पनी द्वारा जनता को प्रस्तावित होना चाहिए।


Q. 170934 समामेलन के लिए प्रमुख प्रलेख


A. पार्षद सीमानियम होता है

Right Answer is: A

SOLUTION

पार्षद सीमानियम समामेलन के लिए प्रमुख प्रलेख होता  है क्योंकि इसके बिना किसी भी कम्पनी का समामेलन नहीं हो सकता है|


Q. 170935 पार्षद सीमानियम में कम्पनी के


A. कर्तव्यों का वर्णन रहता है।

B. अधिकार का वर्णन रहता है।

C. अधिकार और कर्तव्यों का वर्णन रहता है।

D. प्रविवरण का वर्णन रहता है।

Right Answer is: A

SOLUTION

पार्षद सीमानियम में कम्पनी के अधिकार और कर्तव्यों का वर्णन रहता है।यह कम्पनी की आधारशिला होती है।


Q. 170936 निजी कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम


A. 5 सदस्य होते हैं।

B. 3 सदस्य होते हैं।

C. 2 सदस्य होते हैं

D. 4 सदस्य होते हैं।

Right Answer is: C

SOLUTION

निजी कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम 2 सदस्य होते हैं


Q. 170937 न्यायालय के निरीक्षण में कम्पनी समापन के लिए


A. अंशधारी आवेदन कर सकता है ।

B. समापक आवेदन कर सकता है ।

C. निदेशक आवेदन कर सकता है ।

D. देनदार आवेदन कर सकता है

Right Answer is: A

SOLUTION

न्यायालय के निरीक्षण में कम्पनी समापन के लिए एक अंशधारी न्यायालय आवेदन कर सकता है।


Q. 170938 कम्पनी के समापन के लिए


A. समापक की नियुक्ति की जाती है।

B. अंशधारियों की नियुक्ति की जाती है।

C. अंकेक्षक की नियुक्ति की जाती है।

D. कम्पनी सचिव की नियुक्ति की जाती है।

Right Answer is: A

SOLUTION

कम्पनी के समापन में समापक की नियुक्ति की जाती है जिसे निस्तारक कहते हैं। निस्तारक के प्रमुख कार्य होते हैं- कम्पनी की संपत्ति को बेचना, ऋणों का भुगतान करना, शेष धन को अंशधारियों  में वितरित करना।


Q. 170939 सार्वजनिक कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम


A. 2 सदस्यों का होना अनिवार्य है

B. 5 सदस्यों का होना अनिवार्य है

C. 8 सदस्यों का होना अनिवार्य है

D. 7 सदस्यों का होना अनिवार्य है

Right Answer is: D

SOLUTION

सार्वजनिक कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम 7 सदस्य होते हैं एवं अधिकतम सदस्य असीमित व्यक्ति हो सकते हैं ।


Q. 170940 निस्तारक का दूसरा नाम


A. समापक है

B. लेनदार है

C. ऋणदाता है

D. अंशधारी है

Right Answer is: A

SOLUTION

निस्तारक को समापक भी कहा जाता है ।


Q. 170941 कम्पनी अधिनियम के अनुसार कम्पनी की समापन विधियां


A. चार हैं।

B. दो हैं।

C. छह हैं।

D. तीन हैं

Right Answer is: D

SOLUTION

कम्पनी अधिनियम के अनुसार कम्पनी का समापन तीन विधियों के अंतर्गत होता है ।


Q. 170942 निजी कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम


A. 5 सदस्य होते हैं।

B. 3 सदस्य होते हैं।

C. 2 सदस्य होते हैं

D. 4 सदस्य होते हैं।

Right Answer is: A

SOLUTION

निजी कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम 2 सदस्य होते हैं


Q. 170943 न्यायालय के निरीक्षण में कम्पनी समापन के लिए


A. अंशधारी आवेदन कर सकता है ।

B. समापक आवेदन कर सकता है ।

C. निदेशक आवेदन कर सकता है ।

D. देनदार आवेदन कर सकता है

Right Answer is: A

SOLUTION

न्यायालय के निरीक्षण में कम्पनी समापन के लिए एक अंशधारी न्यायालय आवेदन कर सकता है।


Q. 170944 कम्पनी के समापन के लिए


A. समापक की नियुक्ति की जाती है।

B. अंशधारियों की नियुक्ति की जाती है।

C. अंकेक्षक की नियुक्ति की जाती है।

D. कम्पनी सचिव की नियुक्ति की जाती है।

Right Answer is: D

SOLUTION

कम्पनी के समापन में समापक की नियुक्ति की जाती है जिसे निस्तारक कहते हैं। निस्तारक के प्रमुख कार्य होते हैं- कम्पनी की संपत्ति को बेचना, ऋणों का भुगतान करना, शेष धन को अंशधारियों  में वितरित करना।


Q. 170945 सार्वजनिक कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम


A. 2 सदस्यों का होना अनिवार्य है

B. 5 सदस्यों का होना अनिवार्य है

C. 8 सदस्यों का होना अनिवार्य है

D. 7 सदस्यों का होना अनिवार्य है

Right Answer is: A

SOLUTION

सार्वजनिक कम्पनी की दशा में कम्पनी में न्यूनतम 7 सदस्य होते हैं एवं अधिकतम सदस्य असीमित व्यक्ति हो सकते हैं ।


Q. 170946 निस्तारक का दूसरा नाम


A. समापक है

B. लेनदार है

C. ऋणदाता है

D. अंशधारी है

Right Answer is: D

SOLUTION

निस्तारक को समापक भी कहा जाता है ।


Q. 170947 नाम वाक्य के अन्तर्गत कम्पनी के नाम का चुनाव


A. निम्न प्रबंधक द्वारा किया जाता है

Right Answer is: B

SOLUTION

नाम वाक्य के अन्तर्गत कम्पनी के नाम का चुनाव संचालकों द्वारा किया जाता है |


Q. 170948 पार्षद सीमानियम पर पब्लिक कम्पनी की दशा में


A. कम से कम 9 व्यक्तियों के हस्ताक्षर होते हैं

Right Answer is: A

SOLUTION

पार्षद सीमानियम  पर पब्लिक कम्पनी की दशा में कम से कम 7 व्यक्तियों के हस्ताक्षर होते हैं|


Q. 170949 प्रत्येक कम्पनी के लिए अलग से पार्षद अन्तर्नियम बनाना


A. अनिवार्य नहीं है

Right Answer is: C

SOLUTION

प्रत्येक कम्पनी के लिए अलग से पार्षद अन्तर्नियम बनाना जरूरी नहीं है| इसके स्थान पर कम्पनी समामेलन के समय रजिस्ट्रार के समक्ष यह वाक्य लिख देती है पार्षद अन्तर्नियम के स्थान पर सारणी 'अ' (Table A) के नियम लागू होंगे|


Q. 170950 कम्पनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रलेख


A. प्रविवरण होता है

Right Answer is: A

SOLUTION

पार्षद अन्तर्नियम कम्पनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रलेख होता है |


Q. 170951 समामेलन के लिए प्रमुख प्रलेख


A. पार्षद सीमानियम होता है

Right Answer is: A

SOLUTION

पार्षद सीमानियम समामेलन के लिए प्रमुख प्रलेख होता  है क्योंकि इसके बिना किसी भी कम्पनी का समामेलन नहीं हो सकता है|


Q. 170952 साझेदारी क्या है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह ऐसे दो या अधिक व्यक्तियों के बीच संबंध होता है जो व्यवसाय के लाभों का विभाजन करने के लिए तथा व्यापार को सभी के द्वारा या सभी के लिए किसी एक द्वारा चलाने के लिए सहमत होते हैं।


Q. 170953 एक सरकारी कंपनी की चुकता अंश पूँजी में सरकार के पास कितना हिस्सा होना चाहिए?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

यह 51% से कम नहीं होना चाहिए।


Q. 170954 संगठन को किसी एक वाणिज्य शास्त्री के शब्दों में परिभाषित कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रो. डोनेल के अनुसार"

                  वर्तमान युग में अनेक घटकों के सहयोग से उत्पादन किया जाता है - इन विभिन्न घटकों में प्रभावी सामंजस्य  स्थापित करना ही संगठन है"


Q. 170955 व्यापार, वाणिज्य तथा उद्योग में अंतर कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170956 वाणिज्य की किन्हीं 5 शाखाओं का वर्णन कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

वाणिज्य की विभिन्न शाखाऐं हैं:
1. परिवहन - यह कच्चे माल को कारखाने तक तथा तैयार माल को खपत के स्थानों तक पहुँचाने की सुविधा प्रदान करता है। यह स्थान उपयोगिता का निर्माण करता है तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए और एक लाभकारी मूल्य अर्जित करने के लिए एक निर्माता की मदद करता है।
2. बैंकिंग - कोष व्यावसायिक गतिविधियों को चलाने और प्रतिदिन के खर्चों को चुकाने के लिए आवश्यक होता है इसे बैंकों से प्राप्त किया जा सकता है। बैंक ऋण, अधिविकर्ष या नकद ऋण उपलब्ध कराने के द्वारा वित्त की समस्या पर काबू पाने में मदद करते हैं।
3. भण्डारण - यह माल के भंडारण को दर्शाता है। वस्तुओं को निर्माताओं, थोक और खुदरा विक्रेताओं द्वारा परिवहन से पहले कुछ समय के लिए भंडारित किया जाना होता है। यह समय उपयोगिता का निर्माण करता है।
4. विज्ञापन - यह उपलब्ध सामान के बारे में जानकारी प्रदान करने एवं विशिष्ट आइटम खरीदने के लिए ग्राहकों के उत्प्रेरण में मदद करता है। यह एक उत्पाद की उपलब्धता, उपयोग, गुणवत्ता, मूल्य आदि के लिए ग्राहकों को जागरूक बनाने के द्वारा संभावित ग्राहकों को प्रेरित करता है।
5. बीमा - यह एक व्यापार के सामने आने वाली विभिन्न जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। व्यवसाय की सम्पत्तियों, कच्चे माल के स्टाॅक, तैयार माल और कर्मचारियों को जोखिमों से संरक्षित करना आवश्यक होता है। इसलिए, बीमा सभी संभावित नुकसान के विरूद्ध आयोजन बनाकर व्यापार और व्यवसाय को सुरक्षित करता है।


Q. 170957 प्रशासन, संगठन तथा प्रबन्धन में अंतर बताइए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रशासन प्रबन्धनतथा संगठन में अंतर निम्नलिखित हैं

अंतर का आधार 

 प्रबन्धन

प्रशासन 

संगठन

       

        नीति

नीति लागू  करना

नीति बनाना 

नीतियां लागू करने हेतु व्यक्तियों के समूह का निर्माण  

      

         क्षेत्र  

नीतियों के क्रियान्वयन तक विस्तृत 

नियंत्रण का   दायित्व 

दोनों की तुलना में   बहुत संकुचित

  

    किसके द्वारा 

      प्रभावित 

मानव शक्ति द्वारा

बाहरी शक्ति द्वारा

प्रबन्धनका सहयोगी है

और उसी से प्रभावित होता है

    

       दायित्व 

सम्पूर्ण दायित्व

नीति तथा पूँजी प्रदान करने का दायित्व

प्रबन्धनतथा प्रशासन के मध्य समन्वय

      भूमिका  

आत्मा

मस्तिष्क

शरीर

 


Q. 170958 प्रबन्धन की कोई ५ विशेषताएं लिखिए ।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

प्रबन्धन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1.  गतिशीलताप्रबन्धनके सिद्धांत गतिशील है, प्रबन्धनसामाजिक परिवर्तन के साथ साथ तकनीक में  नवीनता लाने  का प्रयत्न करता है

2 पेशा:   वर्तमान समय में प्रबन्धनको भी डाक्टर, इंजीनियर की भांति एक पेशे के रूप में माना जाता है

3. महत्वपूर्ण प्रक्रियाप्रबन्धनएक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है इसमें नियोजन, क्रियान्वन, नियंत्रण, समन्वय, अभिप्रेरण, निर्देशन इत्यादि सम्मलित है जो की पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हैं

4.  सामूहिक प्रयासकिसी भी संस्था में प्रबन्धनसमूह के प्रयासों पर बल देता है कि व्यक्तिगत प्रयासों को इसीलिए प्रबन्धनको सामूहिक प्रयास का दर्जा दिया गया है 

5. कार्यों में समन्वय :  प्रबन्धनके माध्यम से विभिन्न विभागों व्यक्तियों में समन्वय स्थापित किया जा सकता है


Q. 170959 फर्म के समापन पर-


A. साझेदारी का समापन होगा।

B. साझेदारी का पुनर्निर्माण होगा।

C. साझेदारी का समापन नहीं होगा।

D. नई साझेदारी का प्रारम्भ होगा ।

Right Answer is: A

SOLUTION

फर्म के समापन पर साझेदारी का अनिवार्य समापन होगा।


Q. 170960 यदि फर्म का व्यवसाय अवैधानिक घोषित हो जाए तो इस स्थिति में-


A. फर्म का समापन हो जाएगा।

B. साझेदारी का समापन हो जाएगा

C. फर्म का पुनर्निर्माण होगा ।

D. साझेदारी का पुनर्निर्माण होगा

Right Answer is: A

SOLUTION

यदि फर्म का व्यवसाय अवैधानिक घोषित हो जाए तो इस स्थिति में फर्म का समापन हो जाएगा।


Q. 170961 जब सभी साझेदार फर्म का व्यवसाय समाप्त करते हैं तब उसे-


A. फर्म का समापन कहते हैं।

B. फर्म का पुनर्निर्माण कहते हैं।

C. फर्म का प्रारंभ कहते हैं।

D. साझेदारी का पुनर्निर्माण कहते हैं।

Right Answer is: A

SOLUTION

जब सभी साझेदार फर्म का व्यवसाय समाप्त करते हैं तब उसे फर्म का समापन कहते हैं।


Q. 170962 जब एक नया साझेदार फर्म में प्रवेश करता है तो-


A. पुरानी फर्म का विघटन करना पड़ता है।

B. पुरानी साझेदारी का विघटन करना पड़ता है ।

C. पुरानी फर्म और साझेदारी दोनों को समाप्त करना पड़ता है ।

D. साझेदारी का विघटन नहीं करना पड़ता

Right Answer is: B

SOLUTION

जब एक नया साझेदार फर्म में प्रवेश करता है तो पुरानी साझेदारी का विघटन करना पड़ता है।


Q. 170963 एक साझेदारी संस्था को सूचना देकर समाप्त किया जा सकता है जब-


A. साझेदारी निश्चित अवधि के लिए हो।

B. अनिश्चित अवधि के लिए हो।

C. विशेष उद्देश्य के लिए हो।

D. साझेदारी ऐच्छिक हो।

Right Answer is: D

SOLUTION

साझेदारी ऐच्छिक होने पर किसी साझेदार द्वारा लिखित रूप में फर्म को भंग करने की सूचना अन्य साझेदारों को देने पर फर्म का समापन हो जाएगा।


Q. 170964 एक व्यापारी द्वारा भविष्य की परेशानियों से बचने के लिए फर्म का-


A. समापन कराना चाहिए

B. पंजीयन कराना चाहिए

C. विघटन कराना चाहिए

D. गठन कराना चाहिए

Right Answer is: B

SOLUTION

एक व्यापारी द्वारा भविष्य की परेशानियों से बचने के लिए फर्म का पंजीयन कराना चाहिए  ।


Q. 170965 साझेदारी फर्म के पंजीयन की व्यवस्था भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 की-


A. धारा 59 से 69 के अंतर्गत की गई है।

B. धारा 56 से 69 के अंतर्गत की गई है।

C. धारा 55 से 59 के अंतर्गत की गई है।

D. धारा 65 से 69 के अंतर्गत की गई है।

Right Answer is: B

SOLUTION

साझेदारी फर्म के पंजीयन की व्यवस्था भारतीय साझेदारी  अधिनियम 1932 की धारा 56  से 69 के अंतर्गत की गई है।


Q. 170966 साझेदारी फर्म का पंजीयन कराना-


A. आवश्यक होता है ।

B. ऐच्छिक होता है

C. अनावश्यक होता है ।

D. अनिवार्य होता है ।

Right Answer is: B

SOLUTION

साझेदारी फर्म का पंजीयन कराना ऐच्छिक होता है ।


Q. 170967 भारतीय साझेदारी अधिनियम -


A. समस्त भारत में लागू होता है ।

B. चार महानगरों में लागू होता है

C. कुछ राज्यों में लागू होता है ।

D. राजधानी में लागू होता है ।

Right Answer is: A

SOLUTION

समस्त भारत में भारतीय साझेदारी अधिनियम लागू  होता है।


Q. 170968 एक साझेदारी फर्म का पंजीयन-


A. कभी भी कराया जा सकता है।

B. कराना आवश्यक होता है।

C. निश्चित समय पर कराया जाता है

D. फर्म की स्थापना के समय कराना आवश्यक होता है।

Right Answer is: A

SOLUTION

एक साझेदारी फर्म का पंजीयन कभी भी कराया जा सकता है ।


Q. 170969 भारत में साझेदारी फर्म पंजीयन का नियम-


A. 17 अगस्त 1944 से लागू हुआ

B. 1 अक्टूबर 1933 से लागू हुआ

C. 15 जून 1947 से लागू हुआ

D. 28 मार्च 1978 से लागू हुआ।

Right Answer is: B

SOLUTION

भारत में साझेदारी फर्म पंजीयन का नियम 1 अक्टूबर 1933 से लागू हुआ ।


Q. 170970 नाम वाक्य के अन्तर्गत कम्पनी के नाम का चुनाव


A. निम्न प्रबंधक द्वारा किया जाता है

Right Answer is: C

SOLUTION

नाम वाक्य के अन्तर्गत कम्पनी के नाम का चुनाव संचालकों द्वारा किया जाता है |


Q. 170971 पार्षद सीमानियम पर पब्लिक कम्पनी की दशा में


A. कम से कम 9 व्यक्तियों के हस्ताक्षर होते हैं

Right Answer is: B

SOLUTION

पार्षद सीमानियम  पर पब्लिक कम्पनी की दशा में कम से कम 7 व्यक्तियों के हस्ताक्षर होते हैं|


Q. 170972 प्रत्येक कम्पनी के लिए अलग से पार्षद अन्तर्नियम बनाना


A. अनिवार्य नहीं है

Right Answer is: A

SOLUTION

प्रत्येक कम्पनी के लिए अलग से पार्षद अन्तर्नियम बनाना जरूरी नहीं है| इसके स्थान पर कम्पनी समामेलन के समय रजिस्ट्रार के समक्ष यह वाक्य लिख देती है पार्षद अन्तर्नियम के स्थान पर सारणी 'अ' (Table A) के नियम लागू होंगे|


Q. 170973 कम्पनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रलेख


A. प्रविवरण होता है

Right Answer is: C

SOLUTION

पार्षद अन्तर्नियम कम्पनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रलेख होता है |


Q. 170974 पार्षद सीमानियम के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पार्षद सीमानियम निम्नलिखित कारणों की वजह से एक कम्पनी के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है:
1. यह कम्पनी के निगमन का आधार होता है तथा किसी भी कम्पनी को पार्षद सीमानियम के बिना पंजीकृत नहीं कराया जा सकता है।
2. यह कम्पनी की गतिविधियों को निर्धारित करती है।
3. यह विनियोगकर्ताओं को उस उद्देश्य से अवगत कराता है जिसके लिए कम्पनी उनके धन का उपयोग करती है।
4. यह कम्पनी के उद्देश्यों को स्पष्ट करता है।
5. यह कम्पनी के प्रवर्तकों के नाम तथा पते प्रकट करता है।


Q. 170975 “एकल व्यापार भारत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।” कारण सहित व्याख्या कीजिए तथा एकल व्यापार के लक्षण लिखिए। [4+2]
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

भारत में एकाकी व्यापार का भविष्य -

भारत एक विकासशील राष्ट्र है, जहाँ जनसंख्या की समस्या प्रधान है। देश का औद्योगिक विकास असंतुलित हुआ है, पूँजी शर्मीली है, व्यापारी प्रारम्भिक जोखिमों को उठाने में असमर्थ है, व्यापारिक कुशलता सीमित है, परन्तु शक्ति अधिक है। राष्ट्रों में साधनों की कमी नहीं, केवल उनके उचित शोधन का अभाव है। बेकारी की समस्या का विकराल रूप है। सस्ता श्रम बड़ी मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी है। यह सब बातें स्पष्ट करती हैं कि हमारे देश के आर्थिक विकास हेतु लघु उद्योग कृषि पर आधारित उद्योग बड़ी सरलता से विकसित किये जा सकते हैं। उनके संगठन का स्वरूप एकाकी व्यापार ही होगा।

भारत में एकाकी व्यापार का भविष्य सुनिश्चित एवं उज्जवल होने के निम्नलिखित कारण हैं-

(1)  पूँजी का अभाव - देश की अधिकांश जनता अत्यंत गरीब है। फलस्वरूप पर्याप्त पूँजी का संचय नहीं होता और नये-नये व्यवसाय या उद्योग नहीं खुल पाते।

(2)  जोखिम उठाने का अभाव - अगर जनता किसी भी तरह से धन का संचय  करती भी है तो भी उसमें जोखिम उठाने की क्षमता नहीं है। वह अपने आपको जोखिम भरे उद्योग या व्यवसाय करने के अनुपयुक्त समझती है। वह सिर्फ आसान एवं जोखिम रहित व्यापार ही करना चाहती है।

(3)  व्यापारिक कुशलता का अभाव - देश की अधिकांश जनता अशिक्षित है। वह उद्योग-धन्धे या व्यापार की पेचीदगियों को समझने में असमर्थ रहती है। इसलिए उद्योग-धन्धों को चलाने में अपने आपको असमर्थ पाती है।

(4)  बढ़ती हुई जनसंख्या - बेरोजगारी अत्यंत तेजी से बढ़ रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले, इसके लिए एकाकी व्यापार व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।विशेषकर छोटे-छोटे व्यवसाय खोश्लने चाहिए   जिससे ज्यादा से ज्यादा व्यक्ति अपने आपको खपा सकें।

(5)  ग्रामीण विकास - वर्तमान समय में लघु एवं कुटीर उद्योगों को अत्यधिक संख्या में खोलना चाहिए। लघु एवं कुटीर उद्योग बहुत ज्यादा संख्या में अगर  गाँवों में खोले जाये तो ज्यादा उचित होगा। लघु और कुटीर उद्योग के विकास   से दो फायदे होंगे- अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, गाँव आत्मनिर्भर होंगे, गाँवों की उन्नति होगी।

(6)  बाजार की सीमितता - भारत में अभी भी बाजार का क्षेत्र सीमित ही है। इसका प्रमुख कारण यातायात संचार के साधनों की कमी है। इस कारण    बाजार स्थानीय हैं। अतः स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए एकाकी व्यापार का विस्तार अत्यधिक सफल होगा।

(7)  उपयुक्तता - कुछ व्यवसाय ऐसे होते हैं जो साझेदारी या सहकारिता या संयुक्त स्कन्ध प्रमण्डल के रूप में चलाने में अनुपयुक्त होते हैं। जोखिम भी विश्वास वाले छोटे व्यवसाय, निजी सेवाएँ आदि एकाकी व्यापार के रूप में ज्यादा सफल होते हैं।

(8)  नियमों का अभाव - एकाकी व्यापार को खोलने उसको चलाने में विशेष  नियमों का पालन नहीं करना पड़ता और उस पर सरकार का कोई विशेष   नियंत्रण होता है। हाँ, थोड़ी बहुत औपचारिकता जरूर पूरी करनी पड़ती है।

(9)  कम कर भार - अन्य व्यावसायिक संगठनों की तुलना में एकाकी व्यापार पर कर का भार भी कम है। यही कारण है कि एकाकी व्यापार का फैलाव निरन्तर बढ़ता जा रहा है।

अन्त में कह सकते हैं कि एकाकी व्यापार का भविष्य भारत में उज्जवल है  तथा नवीन विचवारधारा उसके अनुकूल है। राजनीतिक स्थिरता ने उसे अपनी शक्ति विकसित करने का अवसर प्रदान किया है।


Q. 170976 अंश क्या है? विभिन्न प्रकार के अंशों को समझाइए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक कम्पनी की कुल पूँजी छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित होती है। जिन्हें अंश कहा जाता है। अंशों के निर्गमन से प्राप्त पूँजी को अंश पूँजी कहा जाता है। सामान्यतः अंश दो प्रकार के होते हैं:-

1- समता अंश

2- पूर्वाधिकार अंश

1. समता अंश - ऐसे अंश जो कम्पनी के लाभ एवं हानि में हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं। ऐसे अंषों पर लाभ की दर स्थायी नहीं होता है।

2. पूर्वाधिकार अंश - ऐसे अंश जिन्हें समता अंशों से पूर्व पूँजी की पुनः प्राप्ति का अधिकार होता है तथा ऐसे अंषों पर लाभांश की दर पूर्व निष्चित होती है। ये अंश सामान्यतः आठ प्रकार के होते हैं:-

1          संचयी -

2          असंचयी

3          भागीदारी

4          अभागीदारी

5          परिवर्तनीय

6          अपरिवर्तनीय


Q. 170977 एक पब्लिक लिमिटेड कम्पनी के प्रविवरण पत्र के तत्वों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा जारी प्रविवरण पत्र के तत्वों को नीचे वर्णित तीन भागों में बांटा जाता हैं-

        अनुसूची II का भाग I

1- सामान्य सूचना

2- कम्पनी का पूँजीगत ढ़ांचा

3- वर्तमान निर्गमन की शर्तें

4- निर्गमन का विवरण

5- कम्पनी तथा प्रबंधन द्वारा ली गई परियोजना

6- वित्तीय स्थितियों तथा विवरणों के विश्लेषण पर आधारित प्रबंधन के निर्णय

7- प्रबंधन द्वारा जोखिम कारकों का बोध

8- समान प्रबंधन के तहत अन्य कम्पनियों का विवरण

9- समूह कम्पनियों की वित्तीय सूचना

10- अनुमान

11- बकाया मुकदमों तथा दायित्वों के विवरण

12- विनियोगकर्ता की शिकायतों तथा निवारण प्रणाली का खुलासा

        अनुसूची II का भाग II

1- सामान्य सूचना:

i. निर्गमन के लिए निदेशकों, अंकेक्षकों, प्रबंधकों की सहमती

ii. विशेषज्ञों की राय

iii. निर्गमन के लिए पारित प्रस्ताव का विवरण

iv. अंश आवंटन अनुसूची

2- वित्तीय सूचना:

i.  वित्तीय विवरण

ii. वित्तीय ऋणग्रस्तता (ऋण)

iii. पिछले पांच वर्षों में चुकाये गये लाभांश की दर, सम्पत्तियों तथा दायित्वों, लाभों तथा हानियों आदि के सम्बंध में अंकेक्षकों की रिपोर्ट

iv. लेखाकर द्वारा रिपोर्ट

3- वैधानिक तथा अन्य सूचना:

i.  न्यूनतम अभिदान

ii. प्रारंभिक व्यय

iii. अभिगोपन कमीशन

iv. रोकड़ के लिए पिछले निर्गमन

v. निदेशकों , पूर्णकालिक निदेशकों आदि के विवरण

vi.मद, लाभांश आदि के सम्बंधित सदस्यों के अधिकार

        अनुसूची II का भाग III - इसमें अनुसूची II के भाग-I तथा भाग-II पर लागू होने वाले प्रावधान सम्मिलित है, जो कि अनुसूची II के दोनों भागों में उपयोगिता अभिव्यक्ति की व्याख्या के साथ काम में ली जाती हैं।


Q. 170978 कम्पनी अधिनियम 1956 के अनुसार ‘प्रविवरण पत्र’ को परिभाषित कीजिए। एक प्रविवरण पत्र जारी करते समय कम्पनियों द्वारा पालन किये जाने वाले नियमों तथा कानूनों का उल्लेख कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

कम्पनी अधिनियम 2013 के अनुसार, एक प्रविवरण पत्र को इस प्रकार परिभाषित किया गया है, ‘‘प्रविवरण से तात्पर्य किसी ऐसे विवरण-पत्र, सूचना, परिपत्र, विज्ञापन अथवा अन्य ऐसे निमन्त्रण से है जिसके द्वारा किसी कम्पनी के अंशों या ऋणपत्रों का क्रय करने के लिए जनता को आमन्त्रित किया जाता है’’

एक प्रविवरण पत्र जारी करते समय कम्पनियों द्वारा पालन किये जाने वाले नियम तथा कानून इस प्रकार हैं-

        1. दिनांकित होना चाहिए, प्रविवरण पत्र की दिनांक को प्रकाशन की दिनांक की तरह माना जाना चाहिए।

        2. उन प्रत्येक व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए जिनको कम्पनी के निदेशक या प्रस्तावित निदेशक या उनके अधिकृत अभिकर्ता के नाम से जाना जाता है।

        3. इसे तब तक जारी नहीं किया जाता है जब तक की इसकी एक प्रति रजिस्ट्रार के कार्यालय में तिथि पर या पहले जमा नहीं करा दी जाती है।

        4. या तो समाचार पत्र के विज्ञापन या अन्य द्वारा पंजीकरण की के 90 दिनों के भीतर जारी किये जाने चाहिए।

        5. यह लिखित में होना चाहिए, मौखिक निमंत्रण को प्रविवरण पत्र नहीं माना जाता है।


Q. 170979 पार्षद सीमानियम तथा पार्षद अंतर्नियम में अंतर कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

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Q. 170980 एक कम्पनी का पार्षद सीमा नियम क्या होता है? इसके वाक्यों को स्पष्ट कीजिए।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

पार्षद सीमानियम कम्पनी का आधारभूत दस्तावेज होता है जो एक कम्पनी के उन उद्देश्यों को करता है जिनके लिए कम्पनी का गठन किया गया है। यह कम्पनी का चार्टर होता है।
इसके वाक्य हैं:
1. नाम वाक्यइस वाक्य के अंतर्गत कंपनी का कॉर्पोरेट नाम इसके नाम पर अंतिम शब्द के रूप में ‘‘लिमिटेड’’ या ‘‘प्राइवेट लिमिटेड’’ के साथ आता है। यह नाम किसी भी पंजीकृत कंपनी के नाम के समान नहीं होना चाहिए। किसी कम्पनी को उस नाम से पंजीकृत नहीं किया जा सकता है जिसे केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत नहीं किया जाता है।
2. स्थान वाक्य - इस वाक्य के अंतर्गत कंपनी को उस राज्य का नाम उल्लेखित करना होता है जिसमें कंपनी का पंजीकृत कार्यालय होता है। पंजीकृत कार्यालय का सही पता प्रारंभ में आवश्यक नहीं होता है परंतु यह यह कंपनी के निगमन 3 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को अधिसूचित किया जाना चाहिए।
3. उद्देश्य वाक्य - यह उन उद्देश्यों की एक लम्बी श्रृंखला को स्पष्ट करते हुए कम्पनी की गतिविधियों के परिचालनों के क्षेत्र को परिभाषित करता है जिनके लिए एक कंपनी को शुरू किया गया है। उद्देश्य खंड में कंपनी के मुख्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इनके साथ संबंधित अन्य उद्देश्यों को शामिल किया जाना चाहिए। कंपनी उद्देश्य खण्ड में अवर्णित कार्य करने के लिए अधिकृत नहीं होती है।
4. दायित्व वाक्य - यह खण्ड स्पष्ट करता है कि कंपनी के सदस्यों का दायित्व उनके अंशों पर अचुकता राशि तक सीमित होता है। यदि एक अंशधारी 10रु वाले 100 अंशों का क्रय करता है तथा उसे अपने अंशों पर 8रु प्रतिअंश चुका दिया है। अब उसका दायित्व अंशों पर अचुकता राशि अर्थात 2 रु प्रति अंश तक सीमित है।
5. पूँजी वाक्य - यह अंश पूँजी की उस राशि तथा अंशों में उसके विभाजन को दर्शाता है जिसके साथ कम्पनी पंजीकृत होती है। इस पूँजी को पंजीकृत पूँजी कहा जाता है तथा एक कम्पनी पूँजी वाक्य में परिवर्तन के पहले अपने जीवनकाल में इससे अधिक अंश जारी नहीं कर सकती है।
6. संघ वाक्य - यह खंड अपनेआप को निगमित निकाय बनाने के लिए अधिकारियों द्वारा फार्म पर हस्ताक्षर करने की इच्छा का प्रतीक होता है। सभी हस्ताक्षरकर्ता योग्यता अंश खरीदने के लिए अपनी सहमती देते हैं।


Q. 170981 अनौपचारिक सम्प्रेषण का अन्य नाम है


A.

अदिश श्रंखला।

B.

आदेश की श्रंखला।

C.

अंगूरीलता।

D.

उल्टा वी।

Right Answer is: C

SOLUTION

आकस्मिक दायित्व वे दायित्व हैं, जो अभी तक तो नहीं आए हैं, अनौपचारिक संप्रेषण को अंगूरीलता भी कहा जाता है क्योंकि इसके मूल और पथ का आसानी से पता नहीं किया जा सकता है।


Q. 170982 आज सार्वजनिक उद्यमों की भूमिका


A.

बढ़ा दी गई है।

B.

निजी उद्यमों द्वारा निभाई जाती है।

C.

प्रतिबंधित कर दी गई है।

D.

बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निभाई जाती है।

Right Answer is: C

SOLUTION

सरकार ढांचागत सुविधाएँ, सामरिक रक्षा, तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका सीमित कर दी गई है।


Q. 170983 मुंबई मेट्रो मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और वोलिआ परिवहन की परियोजना है। मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट नाम के साथ इस परियोजना के लिए एक विशेष उद्देश्य परिवहन (एसपीवी) को बनाया गया था। यहाँ पर प्रकाश डाले गये व्यापार संगठन का प्रारूप है


A.

संयुक्त उद्यम।

B.

निजी कम्पनी।

C.

वैश्विक कम्पनी।

D.

सार्वजनिक निजी भागीदारी ।

Right Answer is: D

SOLUTION

सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) ऐसे उद्यम होते हैं जिसमें एक परियोजना या सेवा का वित्त पोषण तथा संचालन सरकारी और निजी उद्यमों की भागीदारी के माध्यम से किया जाता है।


Q. 170984 राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद, जीएमआर समूह, भारत सरकार, तेलंगाना और मलेशिया विमानपत्तन होल्डिंग र्बेहद सरकार की परियोजना है। यहाँ व्यापार संगठन के किस प्रारूप पर प्रकाश डाला गया है


A.

संयुक्त उद्यम पर।

B.

सार्वजनिक निजी भागीदारी पर।

C.

वैश्विक कम्पनी पर।

D.

निजी कम्पनी पर।

Right Answer is: B

SOLUTION

सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) ऐसे उद्यम होते हैं जिसमें एक परियोजना या सेवा का वित्त पोषण सरकारी और निजी उद्यमों की भागीदारी के माध्यम से किया जाता है।


Q. 170985 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर स्वामित्व होता है


A.

केवल राज्य सरकार का।

B.

केवल केन्द्र सरकार का।

C.

केंद्र सरकार या राज्य सरकार या दोनों का।

D.

निजी उद्यमियों का।

Right Answer is: C

SOLUTION

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर केंद्र सरकार या राज्य सरकार या दोनों का स्वामित्व होता है। इन्हें देश की आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए सरकार द्वारा गठित किया जाता है।


Q. 170986 भर्ती एक हिस्सा है दिखलाए जाएंगे? विनिवेश में शामिल है


A.

ढांचागत सुविधाओं में निवेश।

B.

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बंद करना।

C.

विदेशी बाजारों में निवेश।

D.

निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को समता अंशों की बिक्री।

Right Answer is: D

SOLUTION

विनिवेश में इन उद्यमों के स्वामित्व में आम जनता और कार्यकर्ताओं की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा संसाधन जुटाने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में समता अंशों की बिक्री शामिल होती है।


Q. 170987 कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) पूर्व कोयला मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत भारत के केन्द्र सरकार द्वारा औपचारिक रूप से स्वामित्व में थी। 2010 में इसके प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आईपीओ) जिसमें सरकार ने जनता को इसके 10% अंश बेच दिये, इसके पश्चात् यह कम्पनी


A.

विभागीय उपक्रम बनेगी।।

B.

सांविधिक संगठन बनेगी।

C.

सरकार कंपनी बनेगी।

D.

निजी कम्पनी बनेगी।

Right Answer is: C

SOLUTION

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) वर्तमान में एक सरकारी कम्पनी है क्योंकि इसके अंशों का 90% भाग भारत सरकार के पास है। एक सरकारी कंपनी वह कंपनी है जिसके 51% या अधिक अंश राज्य सरकार या केंद्र सरकार या दोनों के पास है।


Q. 170988 कई देशों में शाखाओं के नेटवर्क के माध्यम से संचालित विशाल औद्योगिक संगठनों को जाना जाता है निगरानी को कहा जाता है क्या कहते हैं?


A.

वैश्विक उद्यम।

B.

विभागीय उपक्रम।

C.

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम।

D.

वैधानिक निगम।

Right Answer is: A

SOLUTION

वैश्विक उद्यम कई क्षेत्रों में सक्रिय और कई उत्पादों का उत्पादन करने वाले विशाल औद्योगिक संगठन होते हैं। उनकी व्यापार रणनीति कई देशों में फैली हुई है।


Q. 170989 संगठन का वह प्रारूप जिसे एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम नहीं ले सकता है


A.

विभागीय उपक्रम।

B.

सांविधिक निगम।

C.

निजी कम्पनी।

D.

सरकार कम्पनी।

Right Answer is: C

SOLUTION

निजी कंपनी पूरी तरह से निजी लोगों के स्वामित्व में होती है। इसे कम्पनी के स्वामियों तथा अंशधारियों द्वारा संचालित तथा नियंत्रित किया जाता है।


Q. 170990 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का प्राथमिक उद्देश्य है


A.

विदेशी बाजारों में प्रवेश।

B.

जनकल्याण को बढ़ावा देना।

C.

सरकार के लिए आय कमाना।

D.

व्यापार के गैर सामरिक क्षेत्रों में एकाधिकार को हतोत्साहित करना।

Right Answer is: B

SOLUTION

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण को बढ़ावा देना होता है। ये पिछड़े क्षेत्रों के विकास, रोजगार के सृजन, आदि जैसे सामाजिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शुरू किये जाते हैं।


Q. 170991 वैधानिक निगमों के लाभ जाते हैं


A.

राज्य सरकार को।

B.

केंद्र सरकार को।

C.

संसद को।

D.

जिला सरकार को।

Right Answer is: A

SOLUTION

संगठन का यह प्रकार पूरी तरह से राज्य के स्वामित्व में होता है। सरकार पर इसके परम वित्तीयन की जिम्मेदारी और इसके लाभों के नियोजन की शक्ति होती है।


Q. 170992 ऐसा उद्यम जिसमें एक परियोजना या सेवा का वित्त पोषण सरकारी और निजी उद्यमों की साझेदारी के माध्यम से किया जाता है जाना जाता है


A.

सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी)

B.

जेवी।

C.

एमएनसी।

D.

पीएसयू।

Right Answer is: A

SOLUTION

सार्वजनिक निजी साझेदारी ऐसा उद्यम है जिसमें एक परियोजना या सेवा का वित्त पोषण सरकारी और निजी उद्यमों की साझेदारी के माध्यम से किया जाता है।


Q. 170993 संयुक्त उद्यम का आधार बनाने वाले समझौते का एक प्रकार है


A.

एमओए।

B.

एनडब्ल्यूआर।

C.

एफआईपीबी।

D.

एमओयू।

Right Answer is: D

SOLUTION

एक संयुक्त उद्यम समझौते पर प्रकाश डालते हुए सभी पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षरित सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर आधारित होना चाहिए।


Q. 170994 अस्वस्थ निजी इकाइयों के राष्ट्रीयकरण के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अस्वस्थ निजी इकाइयों के राष्ट्रीयकरण के पीछे मुख्य उद्देश्य बीमार कर्मचारियों की छंटनी को रोकना है।


Q. 170995 सार्वजनिक उद्यमों में प्रबंधन को अकुशल कौन बनाता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

अधिकार केंद्रीकरण की अधिकता और अभिप्रेरण की कमी सार्वजनिक उद्यमों में प्रबंधन को अकुशल बनाती है।


Q. 170996 सार्वजनिक उद्यमों की कार्यप्रणाली की जांच कौन करता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सार्वजनिक उद्यम की कार्य प्रणाली की जांच संसद समितियों और राज्य विधानमंडल द्वारा की जाती है।


Q. 170997 सार्वजनिक उद्यमों का निदेशक मंडल नियुक्त करने का अधिकार किसके पास होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

सार्वजनिक उद्यमों का निदेशक मंडल नियुक्त करने का अधिकार सरकार के पास होता है।


Q. 170998 विभागीय उपक्रमों से आप क्या समझते हैं।
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

इन उद्यमों को इनसे संबंधित मंत्रालय के विभागों के रूप में स्थापित किया है और इन्हें सरकार के विस्तार के रूप में माना जाता है।


Q. 170999 उत्तर प्रदेश राज्य सरकार का एक इस्पात निर्माण कंपनी में 50ः हिस्सा है। क्या यह स्टील कंपनी एक सरकारी कंपनी है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

नहीं, सरकार के पास या तो अकेले या एक से अधिक राज्य सरकारों के संयुक्त रूप के साथ कंपनी में कम से कम 51% हिस्सा होना चाहिए।


Q. 171000 जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल हो वहाँ सार्वजनिक उद्यम का कौनसा रूप सबसे अधिक उपयुक्त होता है?
A.
B.
C.
D.

Right Answer is:

SOLUTION

विभागीय उपक्रम


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