व्यापार दूत द्वारा प्रमाणित बीजक की तीन प्रतिलिपियाँ बनाई जाती हैं।
इण्डेण्ट दो प्रकार को होते हैं
(1) खुला इण्डेण्ट, एवं (2) बन्द इण्डेण्ट
जो व्यापार एक देश की सीमाएँ पार करके कियी जाता है, विदेशी व्यापार कहलाता है। इस प्रकार भारत और श्रीलंका के मध्य होने वाला व्यापार विदेशी व्यापार कहलाएगा।
जो व्यापार एक देश की सीमाएँ पार करके कियी जाता है, विदेशी व्यापार कहलाता है। इस प्रकार भारत और अमेरिका के मध्य किया जाने वाला व्यापार विदेशी व्यापार कहलाएगा।
जो व्यापार एक देश की सीमाएँ पार करके कियी जाता है, विदेशी व्यापार कहलाता है। इस प्रकार भारत और अमेरिका के मध्य किया जाने वाला व्यापार विदेशी व्यापार कहलाएगा।
व्यापार दूत द्वारा प्रमाणित बीजक की तीन प्रतिलिपियां बनाई जाती हैं।
यदि माल कम मात्रा में होता है, तो उसे अन्य व्यापारियों का माल ले जाने वाले किसी साधारण जहाज द्वारा भेजा जाता है। जहाजी कम्पनी माल प्राप्त करने की रसीद तथा माल ले जाने के प्रसंविदे के रुप में जो प्रलेख देती है, उसे जहाजी बिल्टी कहते हैं। इसे माल का अधिकार-पत्र भी कह सकते हैं।
आयात कर चुका देने को बाद डॉक व्यय भी चुकाने होंगे। इसके लिए दो प्रतिलिपियों में एक चालान फॉर्म भरना होगा। इसकी एक प्रतिलिपि डॉक अधिकारी द्वारा रख ली जाती है तथा दूसरी प्रतिलिपि हस्ताक्षर करके तथर मुहर लगाकर वापस कर दी जाती है।
आयात कर चुका देने को बाद डॉक व्यय भी चुकाने होंगे। इसके लिए दो प्रतिलिपियों में एक चालान फॉर्म भरना होगा। इसकी एक प्रतिलिपि डॉक अधिकारी द्वारा रख ली जाती है तथा दूसरी प्रतिलिपि हस्ताक्षर करके तथर मुहर लगाकर वापस कर दी जाती है।
माल छुडाने से पूर्व निकासी प्रतिनिधि को आयात-सा चुकाने के लिए कर गृह जाना होगा। कर चुकाने के लिए तीन प्रतिलिपियों में एक चालान फॉर्म भरना होगा। इस चालान फॉर्म को प्रवेश बिल कहते हैं। इसमें से एक प्रतिलिपि कर अधिकारी अपने पास रख लेता है तथा शेष दो प्रतिलिपियॉं निकासी प्रतिनिधि को हस्ताक्षर करके तथा मुहर लगाकर वापस कर दी जाती है।
जब आयातकर्ता माल के क्रय के सम्बन्ध में उत्पादक या निर्माता को ऑर्डर भेजता है तब वह विदेशी ऑर्डर कहलाता है। यदि यह ऑर्डर उतपादक या निर्माता को न भेजकर निर्यात एजेण्ट को भेजा जाता है तब इसे इण्डेण्ट कहा जाता है।
जब जहाज का माल लद जाता है
जो व्यापार एक देश की सीमाएँ पार करके कियी जाता है, विदेशी व्यापार कहलाता है। इस प्रकार भारत और अमेरिका के मध्य किया जाने वाला व्यापार विदेशी व्यापार कहलाएगा।
फुटकरव्यापारीअपनेग्राहकोकोप्रायःमालकेउधारविक्रयकीसुविधाएँ भीप्रदानकरताहै।इससेउपभोक्ताओंकोअपनीआवश्यकताकीअधिकतमवस्तुएँप्राप्तकरनेमेंसुविधाहोजातीहै।
फुटकरव्यापारीउत्पादकोवथोकव्यापारियोंको उपभोक्ताओंकीरूचि, फैशनएवंरीति-रिवाजआदिकीजानकारीदेताहै।यहजानकारीउत्पादकोंकेलिएअत्यन्तउपयोगीहोतीहै।इससेवेनवीनतमवस्तुओंकाउत्पादनकरतेहैं।
फुटकर व्यापारी उपभोक्ताओं को अनेक प्रकार की सेवाएँ और सुविधायें प्रदान करता है, जैसेः- वस्तु की घर पर सुपुर्दगी, वस्तु के चयन, पसंदगी में सहायता प्रदान करना एवं परामर्श देना, माल वापसी की सुविधाएँ देना, समय-समय पर उनको छूट सुविधाएँ उपलब्ध कराना आदि।
फुटकर व्यापार से आशय उस व्यापार से है जिसमें व्यापारी थोक व्यापारी से माल का बड़ी मात्रा में क्रय करके उपभोक्ताओं को फुटकर या थोड़ी-थोड़ी मात्राओं में विक्रय किया जाता है।
एटीएम वेंडिंग मशीनों के ऐसे प्रकार हैं जो खुदरा व्यापार का एक हिस्सा होता है।
डाक
द्वारा
व्यापार के
लाभ हैं:
1. कम
लागत।
2. बिचैलिया
के उन्मूलन।
डाक द्वारा व्यापार में माल की सुपुर्दर्गी से पूर्व डाकघर द्वारा ग्राहकों से कीमतों को वसूल किया जाता है तथा उधार में कोई विक्रय नहीं किया जाता है।
बहुसंख्यक दुकानें एक व्यक्ति संगठन द्वारा नियंत्रित तथा इसके स्वामित्व की ऐसी खुदरा दुकानें जो समान मूल्यों के उत्पादों के साथ देश भर के कई शहरों के विभिन्न भागों स्थित होती हैं।
विभागीय स्टोर एक छत के नीचे अलग विभागों के माध्यम से उत्पादों की एक विस्तृत श्रंखला प्रदान करता है।
वेंडिंग मशीन प्रत्यक्ष खुदरा बिक्री के नया प्रारूप है जिसमें मशीन को सिक्कों या टोकनों से संचालित किया जाता है।
मताधिकार एक ऐसा समझौता होता है जिसमें एक निर्माता किसी व्यक्ति को समझौते के नियम व शर्तों के अधीन विशिष्ट क्षेत्रों में अपने उत्पाद या सेवाओं को बेचने के लिए अनन्य अधिकार प्रदान करता है।
1. ग्राहकों
को आदेश देने के
लिए टेलीफोन
नंबर डायल
करने की
आवश्यकता होती
है - टेली
शोपिंग।
2. आदेश
माउस के
क्लिक के साथ
दिया सकता है -
इंटरनेट
विपणन।
बड़े पैमाने पर खुदरा संगठन एक व्यापार को संदर्भित करता है जिसमें या तो एक ही छत के नीचे एक बड़ी दुकान में उपभोक्ताओं की एक बड़ी संख्या के लिए एक माल के प्रकार या माल की एक किस्म को उपलब्ध कराया जाता है या ग्राहकों की सुविधानुसार उपलब्ध कराया जा सकता है।
थोक व्यापारी इकट्ठी की गयी वस्तुओं को उनके गुणों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में बांटता है ।
थोक व्यापारी फुटकर व्यापारियों को उनकी आवश्यकता के आधार पर उधार में माल देते हैं तथा उन्हें यह साख सुविधा भी देते हैं जिससे वह माल का भुगतान किश्तों में चैक, विनिमय पत्र आदि की सहायता से कर सकें।
थोक व्यापारी अनुमानित मांग के अनुसार वस्तुओं का स्टॉक पहले से गोदाम में रख लेता है ।
थोक व्यापारी फुटकर व्यापारी को माल बेचने के साथ साथ परिवहन तथा साख की सुविधा भी उपलब्ध करवाते हैंI
थोक व्यापारी दुकान व गोदाम की सजावट में बहुत कम मात्रा में व्यय करते हैं ।
उत्पादक द्वारा निर्मित माल का विज्ञापन थोक व्यापारी द्वारा किया जाता है।
फुटकर व्यापारी की विशेषताएं
-
· कई वस्तुओं का व्यापार,
· थोड़ी मात्रा
में क्रय
करना।
A.
थोक विक्रेता के साथ।
B.
उत्पादक के साथ।
C.
खुदरा विक्रेता के साथ।
D.
एजेंट के साथ।
प्रत्यक्ष व्यापार की प्रक्रिया में उपभोक्ता उत्पादक के साथ वस्तुओं का विनिमय करते हैं।
A.
सरकार के माध्यम से।
B.
बीमा के माध्यम से।
C.
बैंकों के माध्यम से।
D.
विज्ञापन के माध्यम से।
बीमा कंपनियाँ को अचानक होने वाली दुर्घटनाओं के खिलाफ संरक्षण देकर जोखिम से बचाती हैं।
A.
कम मात्रा में।
B.
बड़ी मात्रा में।
C.
दोनों।
D.
इनमे से कोई नहीं ।
जब थोक में माल खरीदा और बेचा जाता है तो इसे थोक व्यापार के रूप में जाना जाता है।
A.
अनिश्चितता से।
B.
निश्चितता से।
C.
लचीलेपन से।
D.
जवाबदेही से।
जोखिम अनिश्चितता है जो अवांछनीय घटनाओं के कारण होती है।
A.
प्राथमिक उद्योग।
B.
द्वितीयक उद्योग।
C.
जननीक उद्योग।
D.
निर्माण उद्योग।
बिजली उत्पादन एक द्वितीयक उद्योग है क्योंकि विद्युत उत्पादन मुख्य रूप से जल के प्रसंस्करण द्वारा किया जाता है।
A.
पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना।
B.
पहाड़ी क्षेत्रों में विद्यालयों की स्थापना।
C.
स्कूलों के लिए दान बढ़ाना।
D.
बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना।
बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी के परिणामस्वरूप एक व्यवसाय के राजस्व और मुनाफे की वृद्धि होती है, इसलिए यह व्यापार का एक आर्थिक उद्देश्य है।
A.
स्थान।
B.
समय।
C.
धन।
D.
सूचना।
संग्रहण एवं भंडारण गतिविधियाँ आवश्यकता के लिए वस्तुओं के स्टाॅक को रखकर समय की बाधा को दूर करती हैं।
A.
प्रसंस्करण उद्योग का।
B.
संयोजक उद्योग का।
C.
कृत्रिम उद्योग का।
D.
विश्लेषणात्मक उद्योग का।
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी संयोजक उद्योग का एक भाग है क्योंकि यह नए उत्पादों को बनाने के लिए विभिन्न घटकों को संयोजित करती है।
A.
प्रकति के कारण।
B.
मानव के कारण।
C.
आर्थिक कारण।
D.
यांत्रिक विफलता।
माल की मांग, प्रतियोगिता आदि से संबंधित अनिश्चितता आर्थिक कारणों से संबंधित होती है।
भण्डारण निर्माता को वैज्ञानिक भण्डारण की सुविधा प्रदान करता है।
संचार दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा तथ्यों या विचारों के विनिमय को संदर्भित करता है।
वाणिज्य एक ऐसी व्यावसायिक गतिविधि है जो माल तथा सेवाओं को उत्पादन के स्थान से खपत के स्थान पर लाने का कार्य करती है।
जब माल को बड़ी मात्रा में क्रय किया जाता है तथा इसे खुदरा व्यापारियों को छोटी मात्रा में बेचा जाता है, तो ऐसे व्यापार को थोक व्यापार कहा जाता है।
1. वह व्यापार जिसे एक देश की सीमाओं के मध्य चलाया जाता है
- आंतरिक व्यापार।
2. एक व्यापारी जो ग्राहकों को सीधे माल का विक्रय करता है
- खुदरा विक्रेता।
वाणिज्य अंतिम उपभोक्ता से पहले उत्पाद के रखने से संबंधित सभी गतिविधियों का कुल योग है। यह माल के निर्माता और उपभोक्ता के बीच आवश्यक संबंध प्रदान करता है।
तृतीयक उद्योग अन्य उद्योगों को सहायता सेवा प्रदान करता है।
एक अर्थव्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं के निर्माण में लगे उद्योग का नाम निर्माण उद्योग है।
यह विक्रय, माल के विनिमय या हस्तांतरण तथा अंतिम उपभोक्ताओं के लिए माल के उत्पादन को संदर्भित करता है।
ज्ञान के बाधा को हटाने के लिए की जाने वाली सहायता का नाम विज्ञापन होता है।
हाँ
प्रबन्धन की उपयोगिता केवल एक देश तक सीमित नहीं अपितु विश्व भर के आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, तथा राजनैतिक क्षेत्रों में भी प्रबन्धनका उपयोग किया जाता है ।
संगठन अत्यंत उपयोगी है क्योंकि प्रबन्धनद्वारा निर्दिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु संगठन का निर्माण किया जाता है।
प्रबन्धन का कार्य मूलतः मानव से सम्बन्ध रखता है और मानव समाज का निर्माण करता है इसलिए इसे सामाजिक क्रिया माना जाता है ।
प्रबन्धन और प्रशासन की तुलना में संगठन का क्षेत्र संकुचित है I
प्रबन्धन मानव शक्ति द्वारा प्रभावित होता है ।
प्रशासन नीतियां लागू करने हेतु समूह का निर्माण करता है ।
हाँ,
वाणिज्य मानव इच्छाओं का सामना करता है क्योंकि यह व्यापार और वाणिज्य की अन्य शाखाओं द्वारा उत्पादन के स्थान से खपत के स्थान तक माल की आवाजाही की सुविधा देता है।
व्यापार ऐसी श्रंखला होती है जिसके द्वारा माल उपभोक्ताओं तक जाता है। यह आंतरिक व्यापार और विदेशी व्यापार हो सकता है। परिवहन और वितरण,
वाणिज्य की ऐसी शाखाऐं हैं जो उत्पादों की उपलब्धता में सहायता करता है।
आर्थिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ होती है जो पैसे या आजीविका कमाने के उद्देश्य से की जाती है।
वाणिज्य को एक गतिविधि के रूप में माना जाता है क्योंकि यह मुनाफा कमाने के लिए माल और सेवाओं के आदान प्रदान से संबंधित है।
बीमा वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान में शामिल जोखिम के विरूद्ध सुरक्षा प्रदान करता है। यह व्यापार और व्यवसाय को इसके सभी संभावित नुकसान के विरूद्ध प्रावधान बनाकर सुरक्षित करता है।
संचार निर्माताओं,
व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करता है। इसमें डाक सेवाओं,
टेलीफोन सुविधाऐं शामिल हैं।
प्रबन्धन की सहायता से मानवीय कार्यों का निर्देशन, नियंत्रण, समन्वय, अभिप्रेरण तथा नेतृत्व सम्भव होता है तथा प्रबन्धनका कार्य मूलत: मानव से सम्बंधित है और मानव समाज का एक अंग है अत: इसे सामाजिक क्रिया कहना गलत नहीं होगा ।
प्रो. जे.एन.शुल्जे के अनुसार
"प्रशासन उद्योग की वह शक्ति है जो उन उद्देश्यों को निर्धारित करती है जिनकी पूर्ति हेतु संगठन एवं प्रबन्धनप्रयत्न करते हैं और जिसके अनुकूल ही उनका आचरण होता है"।
प्रबन्धन
के आधारभूत तत्व :
१. नियोजन
२. संगठन
३. अभिप्रेरणा
४. नियंत्रण ।
प्रबन्धन का तात्पर्य नियंत्रण द्वारा किसी भी संगठन में कम लागत में बेहतर उत्पादन करना है. साधारण शब्दों में कहा जा सकता है कि प्रबन्धनअन्य व्यक्तियों से कार्य करवाने की विधि है ।
वर्तमान समय में प्रबन्धनने पेशे का रूप धारण कर लिया है प्रबन्धनभी अन्य मान्य पेशों की तरह विकसित हो रहा है पेशे की भांति इसमे भी संचित ज्ञान उपलब्ध है तथा व्यवहारिक जगत में सफलता प्राप्त करने के लिए उस ज्ञान को प्राप्त करना भी जरूरी है I
प्रबन्धन की शक्ति का एहसास व्यवसाय की सफलता व असफलता के आधार पर ही होता है यदि व्यवसाय सफल होता है तो उसे प्रबन्धनकौशल माना जाता है तथा व्यवसाय में असफलता मिलने पर उसे प्रबन्धकीय कुशलता का आभाव माना जाता है । अतः यह न दिखते हुए भी व्यवसाय पर प्रबन्धनका प्रभाव देखा जा सकता है।
वाणिज्य में ऐसी गतिविधियाँ शामिल होती है जो माल और सेवाओं के आदान प्रदान से संबंधित होती हैं। वाणिज्य की प्रकृति हैं:
1. यह एक आर्थिक गतिविधि है।
2. यह माल और सेवाओं के आदान प्रदान के सौदे करता है।
3. इसकी गतिविधियाँ लाभ कमाने से संबंधित होती है।
4. यह माल में स्थान और समय उपयोगिता का निर्माण करता है।
5. इसके लेन-देनों में नियमितता शामिल है।
वाणिज्य की तीन विशेषताएं इस प्रकार हैंः
1. आर्थिक गतिविधि
- वाणिज्य को आर्थिक गतिविधि के रूप में माना जाता है क्योंकि यह आय के लिए माल और सेवाओं के आदान प्रदान से संबंधित होती है।
2. लाभ कमाना
- वाणिज्य का मुख्य उद्देश्य अपने अस्तित्व के लिए लाभ कमाना होता है। व्यापारी लाभ को अधिकतम करने के लिए हर संभव प्रयास करता है।
3. उपयोगिता का निर्माण
- उत्पादन और खपत के स्थान अलग-अलग होते हैं इसलिए वाणिज्य को ग्राहकों के लिए उत्पादों को उपलब्ध कराने हेतु यातायात के साथ-साथ भंडारण की भी आवश्यकता होती है। इसलिए,
यह स्थान और समय उपयोगिता का निर्माण करता है।

व्यापार वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री,
हस्तांतरण या विनिमय को दर्शाता है। इसमें एक स्थान/व्यक्ति से किसी अन्य स्थान/व्यक्ति को माल बेचने के लिए माल के क्रय को शामिल किया जाता है। व्यापार को आंतरिक व्यापार और विदेशी व्यापार के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1. आंतरिक व्यापार
- इसमें एक देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की खरीद और बिक्री शामिल है। इसे गृह व्यापार के रूप में जाना जाता है तथा इसे राज्य व्यापार और अंतर राज्यीय व्यापार के प्रारूप में स्थानीय व्यापार के रूप में जाना सकता है। आंतरिक व्यापार को थोक व्यापार और खुदरा व्यापार के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
2. बाहरी व्यापार
- इसमें एक देश की भौगोलिक सीमाओं के बाहर माल और सेवाओं की खरीद और बिक्री शामिल है। इसके अलावा इसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार या विदेशी व्यापार के रूप में भी जाना जाता है। इसके आगे विदेशी व्यापार को आयात व्यापार और निर्यात व्यापार के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
प्रबन्धन के निश्चित सिद्धांत होते है तथा इन सिद्धांतो को क्रियान्वित कर लक्ष्य की प्राप्ति की जाती है इसीलिए यह कहना गलत नहीं होगा की प्रबन्धनकला व विज्ञान दोनों ही है ।
एक पंजीकृत कम्पनी उन कम्पनियाँ को संदर्भित करती हैं जो कम्पनी अधिनियम 1956 अधिनियम के तहत पंजिकृत हो। इसे निगमित कम्पनी के नाम से भी जाना जाता है।
यह एक ऐसी कम्पनी होती है जो किसी और कंपनी के माध्यम से, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी भी अन्य कंपनी के या तो आधे से ज्यादा समता अंश रखती है या किसी अन्य कंपनी के निदेशक मंडल की संरचना को नियंत्रित करती है।
नहीं, एक निजी कम्पनी ‘प्रविवरण पत्र’ या ‘प्रविवरण पत्र के स्थान पर स्टेटमेंट’ जारी नहीं कर सकती है क्योंकि यह अपने अंशों एवं ऋणपत्रो के निर्गमन के लिए जनता का आमंत्रित नहीं कर सकती है।
एक प्रविवरण पत्र जनता को अंशों एवं ऋणपत्रों का अभिदान करने के लिए आमंत्रित करने के लिए एक विज्ञापन है।
पार्षद अंतर्नियम ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें एक कम्पनी के आंतरिक प्रबंधन के लिए उपनियम होते हैं।
एक कम्पनी के प्रावधानों की स्थिति में पार्षद सीमानियम के प्रावधान सहायक के रूप में कार्य करेंगे।
पार्षद अंतर्नियम, पार्षद सीमानियमों में वर्णित उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं इसलिए इस दस्तावेज को एक पूरक दस्तावेज कहा जाता है।
कम्पनी के पार्षद अंतर्नियम शासन के लिए नियम एवं कानून तथा एक कम्पनी के आंतरिक प्रबंधन को स्पष्ट करती है।
एक कम्पनी अपने पार्षद अंतर्नियमों में एक विशेष प्रस्ताव पारित करके परिवर्तन कर सकती है।
कम्पनी के पार्षद सीमानियम को कम्पनी का चार्टर कहा जाता है।
कम्पनी के गठन के उद्देश्य को सीमानियम का उद्देश्य खण्ड स्पष्ट करता है।
पूँजी खण्ड अधिकृत पूँजी की उस राशि को स्पष्ट करता है जिससे कम्पनी पंजीकृत होती है।
एक निजी कंपनी निगमन का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद व्यापार शुरू कर सकती है।
एक प्रवर्तक वह व्यक्ति होता है जो एक नया व्यापार शुरू करने के विचार का पता लगाता है तथा एक उद्यम को अस्तित्व में लाता है। वह एक व्यक्ति, एक फर्म या कंपनी का हो सकता है।
पार्षद अंतर्नियम दस्तावेज में एक कंपनी के आंतरिक प्रबंधन के लिए नियमों को शामिल किया जाता है।
नहीं, ऐसा नहीं है क्योंकि एक निजी कंपनी आम जनता को अभिदान के लिए आमंत्रित नहीं कर सकती है।
तृतीय चरण अर्थात पूँजी अभिदान।
कंपनी के गठन के समय पार्षद सीमानियम दस्तावेज की आवश्यकता अनिवार्य होती है।
निगमन एक ऐसा चरण है जिसके द्वारा एक कम्पनी को पंजीकृत कराया जाता है।
एक सार्वजनिक कंपनी कारोबार प्रारंभ का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद व्यापार शुरू कर सकती है।
कंपनियों के रजिस्ट्रार।
प्रवर्तक।
1. गुप्त साझेदार फर्म की पूँजी में योगदान देता है जबकि नाममात्र का साझेदार फर्म को पूँजी में योगदान नहीं देता है।
2. गुप्त साझेदार फर्म के प्रबंधन में चुपके से भाग लेता है जबकि नाममात्र का साझेदार फर्म के प्रबंधन में भाग नहीं लेता है।
एक अंशों द्वारा सीमित सार्वजनिक कम्पनी जो पूँजी जुटाने के लिए अपने अंशों एवं ऋणपत्रो के निर्गमन के लिए जनता का आमंत्रित नहीं कर सकती है, इसे एक ‘प्रविवरण पत्र के स्थान पर स्टेटमेंट’ कम्पनी के रजिस्ट्रार को जमा करवाना आवश्यक होता है। इसमें प्रविवरण पत्र के समान सूचनाएँ सम्मिलित रहती है। यह अंशों का आवंटन करने से तीन दिन पहले जमा कराया जाता है।
नहीं, एक अंशों द्वारा सीमित सार्वजनिक कम्पनी के लिए पार्षद सीमानियम के साथ अंतर्नियम पंजीकृत कराना आवश्यक नहीं होता है। यह कम्पनी अधिनियम 1956 की प्रथम अनुसूची की सारणी अ में शामिल सभी तथा कुछ नियमों को अपना सकती है।
पार्षद अंतर्नियम में एक कम्पनी के आंतरिक प्रबंधन के लिए नियम एवं शर्तों को उल्लेखित किया जाता है। ये एक कम्पनी के सदस्यों/अंशधारियों को व्यावसायिक गतिविधियों पर उचित नियंत्रण करने में सहायता करते हैं। ये कम्पनी के गठन के विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भी सहायता करते हैं। अतः यह अंतर्नियम एक कम्पनी के उचित शासन में सहायता करता है।