ब्राउन स्विस, साहीवाल और जर्सी, गाय की तीन उच्च उत्पादक नस्ल हैं।
गर्मियों में जुताई भूमि के खरपतवार और कीटों को नष्ट करने में सहायता करती है।
जंतुओं और पादप अपशिष्ठों के अपघटन द्वारा उत्पादित कार्बनिक पदार्थ को खाद कहते हैं।
कम मात्रा में पादपों द्वारा उपयोग में लिए गए पोषक तत्वों को सूक्ष्मपोषक तत्व कहते हैं जैसे ज़िंक, आयरन आदि।
उर्वरक वाणिज्यिक रूप से उत्पादित पादप पोषक तत्व हैं। ये नाइट्रोजन, फोस्फोरस और पोटेशियम उपलब्ध कराते हैं।
पादपों के रोग कीटनाशक और पीड़कनाशक द्वारा नियंत्रित किए जा सकते हैं।
बरसीम, जई और सूडान घास।
नाइट्रोजन और फोस्फोरस।
| फसल | स्रोत |
| कार्बोहाइड्रेट | |
| अरहर | |
| तिल | |
| हल्दी |
|
फसल |
स्रोत |
|
गेंहू/चावल |
कार्बोहाइड्रेट |
|
अरहर |
प्रोटीन |
|
तिल |
वसा |
|
हल्दी |
विटामिन/खनिज पदार्थ |
नीम पाउडर और पीसी हुई काली मिर्च।
जैविक कारक − कीट, चूहे, पक्षी और बैक्टीरिया।
अजैविक कारक− नमी की मात्रा, तापमान और आर्द्रता।
देशज नस्लों की हानियॉं:-
|
श्रमिक |
ड्रॉन |
|
बंध्य मादा |
जननक्षम नर |
|
केवल एक बार डंक मारकर मर जाती हैं |
कभी डंक नहीं मारती |
|
कार्य- पराग, मकरंद और मधुछत्ते की रक्षा करता है। |
कार्य- रानी मधुमक्खी के साथ मिलन |
|
मधुमक्खियों में सबसे छोटी |
आकार में बड़ी व विभेदित आँखें |
|
खाद |
उर्वरक |
|
1. जन्तु और पादप अपशिष्ट द्वारा बनता है। |
1. रसायनों द्वारा बनता है। |
|
2. पादपों को कार्बनिक पोषक तत्व प्रदान करता है। |
2. पादपों को अकार्बनिक पोषक तत्व प्रदान करता है जैसे नाइट्रोजन, पोटेशियम और फोस्फोरस। |
|
स्वपोषी |
विषमपोषी |
|
जो जीव अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं उन्हें स्वपोषी कहते हैं। |
जो जीव स्वयं के भोजन का उत्पादन नहीं करते हैं और भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं उन्हें विषमपोषी कहते हैं। |
|
उदाहरण - हरे पौधे और प्रकाश संश्लेषी बैक्टीरिया |
उदाहरण − मानव, बिल्ली, कुत्ता, आदि। |
| सामान्य नाम | वानस्पतिक नाम | उपयोग |
| जौ | ||
| जई |
|
सामान्य नाम |
वानस्पतिक नाम |
उपयोग |
|
जौ |
होर्डियम वल्गेयर |
रोटी बनायी जाती है| इसके अतिरिक्त एल्कोहाल भी बनाया जाता है | |
|
जई |
एविना सेटाइवा |
इससे केक, बिस्कुट बनाए जाते हैं | |
उर्वरकों का निरन्तर उपयोग मृदा की उर्वरता को नष्ट कर देता है, क्योंकि:-
फसल सुधार के तीन आम उद्देश्य इस प्रकार हैं-
I. फसल की उपज और गुणवत्ता में सुधार करना।
II. फसल के पौधों में रोग प्रतिरोध का विकास।
III. परिपक्वता की छोटी अवधि वाली फसलों का विकास जिससे एक साल में कई फसल की उपज हो सके।
मुर्गीपालन के लिए पक्षियों की किस्मों का चयन करते समय निम्नलिखित गुण ध्यान में रखने चाहिए:
i. चूजों की संख्या तथा गुणवत्ता और चूजों के व्यवसायिक उत्पादन के लिए बौने बॉइलर जनक का चयन करना।
ii. गर्मी अनुकूलन क्षमता/ उच्च ताप सहने की क्षमता और देखभाल में कम खर्च की आवश्यकता।
iii. अण्डे देने वाले पक्षियों के आकार में कमी के साथ ही ये कृषि सहउत्पादों से तैयार सस्ते तंतुयुक्त आहार खा सकने में सक्षम हो।
1. पॉल्ट्री का आश्रय साफ, खुला, विशाल, हवादार, पर्याप्त रूप से प्रकाशित और अच्छी तरह वातायित होना चाहिए।
2. पॉल्ट्री के पक्षियों को अच्छा, पोषक और स्वस्थ भोजन और साफ जल दिया जाना चाहिए।
3. संक्रामक रोगों से बचने के लिए सही प्रकार से टीकाकरण किया जाना चाहिए।
(a)
राइजोबियम
(b) फलीदार
फसल
(c) सनहेम्प
और ढेंचा
(a)
FYM = फार्म
यार्ड
मेन्योर
(b) HYV = हाई
यील्ड
वैराइटी
(c) NDRI = नेशनल
डेयरी
रिसर्च
इंस्टीट्यूट
| फसल | उपयोग |
| सनहेम्प | |
| जैवपीड़कनाशी | |
| हल्दी | |
| गाजर घास | |
| बरसीम | |
| पशुओं के लिए खाद्य |
|
फसल |
उपयोग |
|
सनहेम्प |
खाद |
|
नीम |
जैवपीड़कनाशी |
|
हल्दी |
जैवपीड़कनाशी |
|
गाजर घास |
खरपतवार |
|
बरसीम |
पशुओं के लिए खाद्य |
|
जई |
पशुओं के लिए खाद्य |
मिश्रित मत्सय संवर्धन प्रणाली - इस प्रणाली में मछली की स्थानीय और विदेशी प्रजातियों का उपोग किया जाता है। इस प्रणाली में, पांच या छह मत्सय प्रजातियों का एकल मछली तालाब में प्रयोग किया जाता है। ये प्रजातियाँ इसलिए चयनित की जाती हैं जिससे इनमें भोजन के लिए संघर्ष न हो अर्थात, वे विभिन्न पोषक व्यवहार वाली होनी चाहिए। यह तालाब से मछली उत्पादन को बढ़ाता है। परिणामस्वरूप, तालाब के सभी भागों में उपलब्ध भोजन का उपयोग हो जाता है। उदाहरण के लिए, कटला, रोहू, मृगल और कॉमन कार्प के संयोजन का एक ही तालाब में संवर्धन हो सकता है। कटला में सतही भक्षण, रोहू तालाब के मध्य क्षेत्र से पोषण प्राप्त करती हैं, मृगल और कॉमन कॉर्प तली पोषण प्राप्त करती हैं और कॉमन कॉर्प खरपतवार को खाती हैं। ये सभी प्रजातियाँ एक साथ एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा के बिना एक ही तालाब के पोषक पदार्थ का उपयोग कर सकती हैं।
|
सामान्य नाम |
कुल |
उपयोगिता |
|
बादाम |
रोजेसी |
बीज स्वादिष्ट व शक्तिवर्धक होते हैं |
|
पिस्ता |
एनाकर्डीऐसी |
बीज स्वादिष्ट |
|
अखरोट |
जुगलेंडेसी |
बीजपत्र स्वादिष्ट व पौष्टिक होते हैं शरद ऋतु में अधिक खाये जाते हैं I |
|
काजू |
एनाकर्डीऐसी |
बीजपत्र खाये जाते हैं इनसे प्राप्त तेल दवाइयों में प्रयुक्त होता है | |
|
चिलगोजा |
जिम्नोस्पर्म |
बीज स्वादिष्ट |
| सामान्य नाम | वानस्पतिक नाम | कुल | उपयोगिता |
| आम | एनाकार्डिऐसी | ||
| केला | पक्का केला फल के रूप में व कच्चे केले की सब्जी खाई जाती है। | ||
| मैलस सिल्वेस्ट्रिस | रोजेसी | ||
| अंगूर | वाइटेसी | ||
| अमरुद | फल में अम्ल, शक्कर व पेक्टिन होता है। विटामिन A, B, C भी पाये जाते हैं। |
|
सामान्य नाम |
वानस्पतिक नाम |
कुल |
उपयोगिता |
|
आम |
मैग्निफेरा इंडिका
|
एनाकार्डिऐसी |
कच्चा फल अचार के लिए तथा पके फल का सीधे खाने में प्रयोग होता है। |
|
केला |
म्यूसा प्रजातियाँ |
मूजेसी |
पका केला फल के रूप में व कच्चे केले की सब्जी खाई जाती है। |
|
सेब |
मैलस सिल्वेस्ट्रिस |
रोजेसी |
पका फल खाया जाता है गूदे की जेली बनायी जाती है। |
|
अंगूर |
विटिस विनीफेरा |
वाइटेसी |
फल खाया जाता है तथा शराब भी बनायी जाती है |
|
अमरुद |
साइडियम ग्वाजावा |
मिरटेसी |
फल में अम्ल |
A.
1/3
B.
1/30
C.
1/300
D.
1/3000
माना x =
0.3333... ...(1)
10x =
3.3333... ...(2)
9x = 3
[(2) में
से (1)
को घटाने
पर]
x = 1/3
A.
B.
C.
D.
A.
0
B.
1
C.
u/v
D.
vu
A.
एक परिमेय संख्या
B.
एक वास्तविक संख्या
C.
एक अपरिमेय संख्या
D.
एक प्राकृत संख्या
क्योंकि वास्तविक संख्याएँ सभी प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं, परिमेय संख्याओं और अपरिमेय संख्याओं से मिलकर बनी होती है।
2 + 5
3 और
2 - 3
3 का
योग है-
A.
3
2 - 2
3
B.
2
3 - 3
2
C.
3
2 + 2
3
D.
2 +
3
(2
2 + 5
3) + (
2 - 3
3) = (2
2 +
2) + (5
3 - 3
3)
= (2 + 1)
2 + (5 -
3)
3
= 3
2 + 2
3
2) के हर का
परिमेयकरण
करने के
पश्चात, हमने
प्राप्त
किया
A.
(3
-
2)
B.
1/(3
-
2)
C.
(3
-
2)/7
D.
(3
+
2)/7
5 और –3 +
5 का अन्तर
है-
A.
एक असांत संख्या
B.
एक अनवसानी अनावृर्ती संख्या
C.
एक परिमेय संख्या
D.
एक अपरिमेय संख्या
जो
कि एक परिमेय
संख्या है।
1) जीवाश्म ईंधन के प्रबंधन के लिए दो विधियाँ हैं-
a) ईंधन के दहन के लिए कुशल इंजन का प्रयोग करें।
b) दैनिक जीवन में अनवीनीकरणीय ऊर्जा के संरक्षण के लिए वैकल्पिक स्रोत अपनाए।
2) जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाली दो हानियाँ हैं-
a) दहन से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन होता है जिसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग है ।
b) जीवाश्म ईंधन के दहन से ज़हरीली गैसों का उत्पादन होता है जो वातावरण में जमा हो रही है और इसके परिणाम से जीवों की मृत्य होती है ।
3) संसाधन जो पुनर्नवीनीकरण और नवीकृत नहीं हो सकते हैं उन्हें ऊर्जा के क्षयशील स्रोत कहते है ।
प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए तरीके इस प्रकार हैं-
1) कम्पोस्ट में कार्बनिक अपशिष्ट और मल सामग्री का परिवर्तन।
2) निचले क्षेत्रों में नष्ट ना होने वाले अपशिष्टों को फेंकना और सीवेज का उचित निपटान।
3) गोबर गैस संयंत्रों की स्थापना।
4) कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड स्थिरीकरण में सक्षम पौधों को लगाना।
5) ऑटोमोबाइल में सीएनजी का प्रयोग करना।
1) ग्लोबल वार्मिंग
2) 14%
3) 18 किमी
4) ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्शन (OTEC)
5) 50-60%
A.
कम समय के लिए
B.
कम मात्रा में
C.
इष्टतम मात्रा में
D.
लंबे समय के लिए
जैविक कृषि वह कृषि है जिसमें रसायन जैसे उर्वरक, शाकनाशी और पीड़कनाशी का उपयोग बहुत कम मात्रा में होता है और जैविक खाद का उपयोग अधिक मात्रा में होता है।
A.
यदि
अतिरिक्त
में उपयोग
में लिए जाए
तो वे विषाक्त
हो सकते हैं।
B.
वे मृदा को उपजाऊ बनाते हैं।
C.
वे पौधों की वृद्धि को बढ़ाते हैं।
D.
वे बहुत मंहगे हैं।
उर्वरक का ध्यान से उपयोग किया जाना चाहिए क्योंकि उनका अतिरिक्त उपयोग मृदा की उर्वरता में कमी करता है। ये मानव निर्मित रसायन है और इसलिए मृदा में उपस्थित सूक्ष्मजीवों के लिए हानिकारक है तथा वर्षा द्वारा जल के साथ बह कर ये जल प्रदूषण का कारण भी बनते हैं।
A.
उर्वरकों के उपयोग में कमी
B.
अपशिष्ट का उत्पादन
C.
कीट नियंत्रण
D.
रोग नियंत्रण
खाद पोषक तत्वों की कम मात्रा की आपूर्ति के द्वारा मृदा की उर्वरता और संरचना में सुधार लाने में सहायता करते हैं । यह उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण की रक्षा, कृषि अपशिष्ट की पुनरावृत्ति और जैविक अपशिष्ट के निपटान में लाभदायक है।
A.
कार्बन, ऑक्सीज़न, नाइट्रोजन, फोस्फोरस, कॉपर और क्लोरीन
B.
कार्बन, ऑक्सीज़न, हाइड्रोजन, कैल्शियम, सल्फर और ज़िंक
C.
नाइट्रोजन, फोस्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम और सल्फर
D.
आयरन, मैंगनीज, बोरॉन, ज़िंक, कॉपर, मोलिब्डेनम और क्लोरीन
दीर्घपोषक तत्व अधिक मात्रा में पादपों के लिए आवश्यक हैं।
A.
दस
B.
ग्यारह
C.
सोलह
D.
बीस
पादप के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की संख्या सोलह है। इन्हें मात्रा, जिसमें ये आवश्यक हैं उसके आधार पर दीर्घपोषक तत्व और सूक्ष्मात्रिक तत्व में वर्गीकृत किया गया है।
A.
यह फसल की किस्मों में वांछनीय विशेषताओं को शामिल करने के लिए किया जाता है।
B.
यह आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधों के बीच संकरण को संदर्भित करता है।
C.
अंतरजाति या अंतर विशिष्ट हो सकता है।
D.
यह केवल समान जातियों के बीच हो सकता है।
संकरण फसल की किस्मों में वांछनीय विशेषताओं को शामिल करने के लिए किया जाता है। यह आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधों के बीच संकरण को संदर्भित करता है जो अंतरजाति या अंतरविशिष्ट हो सकती है।
A.
फसल की विविधता में सुधार
B.
खाद्य उत्पादन में सुधार
C.
फसल सुरक्षा प्रबंधन
D.
सतत प्रबंधन
फसल की उपज में सुधार के लिए गतिविधियाँ शामिल हैं- फसल की विविधता में सुधार, फसल उत्पादन में सुधार, फसल उत्पादन प्रबंधन।
A.
अनाज
B.
सब्जियाँ, मसाले और फल
C.
दालें
D.
शर्करा और लवण
सब्जियों, मसालों और फलों के द्वारा विटामिन और खनिज पदार्थ प्राप्त होते हैं। इनकी सुरक्षात्मक भूमिका है।
A.
ऊर्जा की आवश्यकता के लिए कार्बोहाइड्रेट्स
B.
शरीर के निर्माण के लिए प्रोटीन
C.
ऊर्जा की आवश्यकता के लिए वसा
D.
विटामिन
दालें जैसे चना, मूंग, अरहर और मसूर हमें शरीर के निर्माण के लिए प्रोटीन देते हैं।
A.
ऊर्जा की आवश्यकता के लिए कार्बोहाइड्रेट्स
B.
शरीर के निर्माण के लिए प्रोटीन
C.
ऊर्जा की आवश्यकता के लिए वसा
D.
विटामिन
अनाज जैसे गेंहू, चावल और मक्का हमें ऊर्जा की आवश्यकता के लिए कार्बोहाइड्रेट्स देते हैं।
A.
मिश्रित कृषि
B.
एकल कृषि
C.
परंपरागत उपकरण
D.
अधिक प्रभावशाली उर्वरक
सतत आजीविका मिश्रित कृषि, फसल बदल बदल कर बोना और समाकलित कृषि द्वारा प्राप्त की जा सकती है।
A.
खाद्य की उपलब्धता
B.
खाद्य का बनना
C.
पादप
D.
केवल सरकार की नीतियाँ
खाद्य की सुरक्षा खाद्य की उपलब्धता और उसके उपयोग पर निर्भर करती है।
A.
खाद्यान्न
B.
दूध
C.
शहद
D.
अंडे
खाद्यान्न के लिए खाद्य उत्पादन में वृद्धि हरित क्रांति की सफलता से और दूध के लिए श्वेत क्रांति संभव हुई थी।
A.
जैवपीड़कनाशक
B.
शाकनाशी
C.
अनाज के लिए वांछित गंध प्रदान करना
D.
जैवउर्वरक
अनाज भंडारण के दौरान नीम के पत्ते या हल्दी का उपयोग जैवपीड़कनाशक का कार्य करते हैं। ये लार्वानाशी, कवकनाशी और कीटभक्षी के रूप में कार्य करते हैं।
A.
मत्स्य पालन
B.
मधुमक्खी पालन
C.
मुर्गीपालन
D.
जल संचयन
सबसे आम गतिविधि जो किसानों द्वारा अतिरिक्त आय के लिए की जाती है वह मधुमक्खी पालन है क्योंकि इसमें ना तो बड़ी परासंरचना और ना ही अधिक आय लगाने की आवश्यकता है।
A.
आश्रय की सफाई
B.
दुधारू पशुओं की स्तनपान की अवधि
C.
पशुओं का टीकाकरण
D.
पशुओं की सुरक्षा
दुधारू पशुओं की स्तनपान की अवधि पर दूध का उत्पादन निर्भर करता है। ये विभिन्न पशुओं के लिए विभिन्न अवधि होती है।
A.
"कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट के लिए गड्ढे में कृषि अपशिष्ट पदार्थ के अपघटन की आवश्यकता होती है"
B.
"कम्पोस्ट कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्वों से समृद्ध है।"
C.
"केंचुओं का उपयोग पौधों और जानवरों के अपघटन की रफ्तार तेज करता है जिससे वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होता है।"
D.
"कम्पोस्ट बहुत कम मात्रा में उपयोग में लिया जाता है।"
कम्पोस्ट मृदा को समृद्ध बनाने के लिए बागबान द्वारा उपयोग में लिए गए क्षय पादप और अन्य कार्बनिक पदार्थ का मिश्रण है। कम्पोस्ट अधिक मात्रा में उपयोग किया जाता है।


x = 3
x एक परिमेय संख्या है।
हाँ

नही, क्योंकि
0
एक पूर्ण
संख्या है, लेकिन
एक प्राकृत
संख्या नही
है।
हाँ, यह असांत और अनावृति के रूप में एक दशमलव संख्या है।
नहीं






चूकि पाँच परिमेय संख्याओं की आवश्यकता हैं। इसलिए, हमारे पास
5 + 1 = 6, अब हम 1 और 2 को निम्न प्रकार से लिख सकते हैः



के बीच
तीन अलग-अलग
अपरिमेय
संख्याओं को
ज्ञात
कीजिए।

हम
देखते हैं कि a में दशमलव
के पहले
स्थान में 7 है
तथा b
में दशमलव
के पहले
स्थान में 8 है।
इसलिए a < b. a
तथा b में
दशमलव के दूसरे
स्थान पर अंक
1 है। इसलिए
के
बीच तीन
अलग-अलग
अपरिमेय
संख्याए है%
X = 0.72072007200072000072……
Y = 0.73073007300073000073…….
Z = 0.74074007400074000074 ……
(i)
= 4.79583 ……. [वर्गमूल विधि द्वारा
जो कि अनवसानी अनावर्ती है।
इसलिए
अपरिमेय है।
(ii)![]()
इसलिए
परिमेय है।
(iii) परिमेय के दशमलव-प्रसार गुणधर्म से
1) सत्य, क्योंकि वास्तविक संख्याए परिमेय और अपरिमेय संख्याओं से मिलकर बनी होती है।
2) असत्य, धनात्मक संख्याए किसी भी प्राकृत संख्याओं का वर्गमूल हो सकती है।
3) असत्य, उदाहरण 2 एक वास्तविक संख्या है लेकिन अपरिमेय संख्या नही है।

A.
444/500
B.
888/1000
C.
88/99
D.
8/9
माना
x
= 0.888… ……… (1)
10x=8.888….
……… (2)
समीकरण
(2)
से (1) को
घटाने पर, हमने
प्राप्त
किया
9x = 8
x = 8/9
x =
0.888…
= 8/9.
A.
10.0056
B.
10.0560
C.
10.5600
D.
10.6500
चूंकि,
A.

B.

C.

D.



A.
0.27027002700027…
B.
0.72072007200072…
C.
0.72072007207200…
D.
0.720720720720…
चूंकि 5/7 =
0.714285714285…
9/11 = 0.818181…
इसलिए, 5/7 और 9/11 के
बीच
0.72072007200072… एक अपरिमेय
संख्या है जो
कि अनवसानी
अनावर्ती है।
A.
0
B.
1
C.
2
D.
4
प्रत्येक हर का परिमेयकरण करने पर, हम ज्ञात करते है
A.
B.
86/45
C.
D.
संख्याओं (4/7),(1/3),(2/5),(5/9) का आरोहीं क्रम हैः
(1/3)<(2/5)<(5/9)<(4/7)
2/5 और 5/9 दो मध्य की संख्याएँ है।
औसत = [(2/5) + (5/9)]/2 = 43/90.
में ‘a’ और ‘b’ है-
A.
a = 9/11 , b = 19/11
B.
a = 19/11, b = 9/11
C.
a = 2/11, b = 8/11
D.
a = 10/11, b = 21/11
A.
B.
C.
D.
का मान है-
A.
एक अपरिमेय संख्या
B.
एक सांत दशमलव
C.
एक पूर्णांक
D.
एक प्राकृत संख्या
(सांत दशमलव) = 1.5
5 - 4)/(
5 + 4) है-
A.
एक परिमेय संख्या
B.
एक अपरिमेय संख्या
C.
एक पूर्णांक
D.
एक प्राकृत संख्या
यहाँ,
5 अनवसानी
अनावृर्ती
दशमलव है।
इसलिए(
5 - 4)/(
5 + 4)
एक अपरिमेय
संख्या है।
का मान
है-
A.
(
3/2)
B.
(
3/4)
C.
(3/2)
D.
(3/4)
A.
a = 11, b = -6
B.
a = -6, b = 11
C.
a = -11, b = 6
D.
a = -11, b = -6
परिमेयकरण
करने पर, हमने
प्राप्त
किया

A.
1/2
B.
2/3
C.
4/3
D. 3/2
किन्हीं दो दी हुई परिमेय संख्याओं के बीच अपरिमित रूप से अनेक परिमेय संख्याएँ होती हैं।
नही,
अनवसानी
अनावृति है, इसलिए
यह एक परिमेय
संख्या नही
है।

5x-2 = 125
5x-2 =
53
x
- 2 = 3 (घांताक
को बराबर
करने पर)
x = 5
सत्य, क्योंकि
हम प्रत्येक
पूर्णांक को
के रूप में
लिख सकते है, जहाँ
p
और q पूर्णांक
है लेकिन q
0.

अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य की पीढ़ी की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने के रूप में सतत विकास को परिभाषित किया गया है|
0.03%
ओज़ोन परत वातावरण के समतापमण्डल में उपस्थित होती है।
जल के तेज बहाव की गतिज ऊर्जा जलविद्युत को उत्पन्न करने के लिए प्रयोग में ली जाती है।
क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC)
एक विशेष क्षेत्र के जन्तु और पौधों के जीवन को बायोटा कहते हैं।