A.
10
B.
9
C.
7
D.
6
समकोण त्रिभुज में,
कर्ण 2 = आधार 2 + लम्ब 2
52 = 42 + लम्ब 2
25 = 16 + लम्ब 2
25 - 16 = लम्ब 2
9 = लम्ब 2
लम्ब = 3
त्रिभुज का क्षेत्रफल = (1/2)
3
4 = 6 सेमी 2
A.
B.
C.
D.
त्रिभुज BCD में, कोण C =
900
पाइथागोरस प्रमेय से
BD2 = BC2 + DC2
= 242 + 102
= 676
BD = 26 सेमी
चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = त्रिभुज BCD का क्षेत्रफल + त्रिभुज ABD का क्षेत्रफल
त्रिभुज BCD का क्षेत्रफल =
x आधार x ऊँचाई
=
x 24 x 10 = 120 सेमी 2
त्रिभुज ABD में, अर्धपरिमाप S = (18 +26 + 16)/2 = 30 मी
त्रिभुज ABD का क्षेत्रफल =
30(30 - 18) (30 - 26) (30 - 16)
= 141.90 or 142 मी 2
इसलिए चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = 120 + 142 = 262 सेमी 2
A.
B.
C.
D.
त्रिभुज की भुजाओं का अनुपात 13 : 12 : 5 है, अर्थात,
a : b : c = 13 : 12 : 5
माना a = 13x, b = 12x और c = 5x
इस प्रकार 13x + 12x + 5x = 450.
या 30x = 450
या x = 15
इसलिए, त्रिभुज की भुजाएं है
a = 13
15 = 195 मी, b = 12
15 = 180 मी और c = 5
15 = 75 मी
यह दिया गया है कि परिमाप = 450 = 2s
इस प्रकार, s = 225
अतः, क्षेत्रफल
= 6750 मी2
A.
B.
C.
D.
BCD , C पर एक समकोण त्रिभुज है।
DB2 = CD2 + CB2 (पाइथागोरस प्रमेंय)
DB2 = 52 + (12)2 = 25 + 144 = 169
DB =
169 = 13 मी
DCB का क्षेत्रफल =
× आधार × ऊँचाई =
× 12 × 5 = 30 मी 2
DBA में, माना a = 9, b = 8, c = 13
s = 15
क्षेत्रफल =
(15(15 - 9) (15 - 8) (15 - 13) = 35.46 मी 2
पार्क ABCD का क्षेत्रफल =
DCB का क्षेत्रफल +
DAB का क्षेत्रफल
= 30 + 35.46
=65.46 मी 2
A.
(a +b + c)/4
B.
(a + b + c)/2
C.
(a + b + c)
D.
2(a + b + c)
एक त्रिभुज का परिमाप इसकी सभी भुजाओं की लम्बाईयों का एक साथ योग करने पर प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए, यदि त्रिभुज की लम्बाईयां a, b और c है, तक त्रिभुज के परिमाप (P) का सूत्र है: P = a + b + c
A.
B.
C.
D.
विकर्ण BD = 10 m
ABCD का परिमाप = 32 m
समचतुर्भुज में सभी भुजाएँ समान होती है, इसलिए माना प्रत्येक भुजा a है।
परिमाप = a + a + a + a
32 = 4a,
a = 32/4 = 8
ADB में, AB = 8, AD = 8, BD = 10
s= (8 + 8 + 10)/2 = 26/2 = 13 मी
ADB का क्षेत्रफल =
13(13 - 8)(13 - 8) (13-10) = 5
39 मी 2
ABCD का क्षेत्रफल = 2 x
ADB का क्षेत्रफल = 2 x 5
39 मी 2.
चूंकि शीट के दोनो ओर प्रति
5 मी 2 की दर से पेन्ट किया गया है, इसलिए क्षेत्रफल दुगुना होगा।
अभीष्ट क्षेत्रफल = 2 x 10
39 = 20
39 मी 2.
पेन्टिग की कीमत = 5 x 20
39 = 100
39 =
624.50.
A.
B.
C.
D.
विकर्ण AC = 24 मी
समचतुर्भुज ABCD का परिमाप = 80 मी
माना प्रत्येक भुजा a मी है, तब
परिमाप = a + a + a + a
80 = 4a
a =20 मी
ABC में, AB = 20 मी; BC = 20 मी; AC = 24 मी
s = (20 + 20 + 24)/2 = 32 मी
ABC का क्षेत्रफल =
32(32 - 20)(32 - 20)(32 - 24) = 192 मी 2.
ABC का क्षेत्रफल =
ACD का क्षेत्रफल [चूंकि भुजाएँ समान है।]
इसलिए, ABCD का क्षेत्रफल = 2 ×
ABC = 2 × 192 = 384 मी 2
A.
B.
C.
D.
ABC में, a = 7, b = 6, c = 9
s = (a + b + c)/2 = (7 + 6 + 9)/2 = 11
ABC का क्षेत्रफल =
11(11 - 7)(11 - 6)(11 - 9)
= 20.98 सेमी 2
ACD में, a = 9, b = 12, c = 15
s = (9 + 12 + 15)/2 = 18
क्षेत्रफल =
18(18 - 9)(18 - 12)(18 - 15) = 54 सेमी 2
ABCD का क्षेत्रफल = (20.98 + 54) = 74.98 सेमी 2
A.
B.
C.
D.
ABC , B पर एक समकोण त्रिभुज है।
AC2 = AB2 + BC2
= (9)2 + (40)2 = 81 + 1600 = 1681
AC= 41 मी
ABC में, a = 9 मी, b = 40 मी, c= 41 मी
s = (9 + 40 + 41)/2 = 90/2 = 45.
क्षेत्रफल =
45(45 - 9)(45 - 40)(45 - 41) = 180 मी 2.
अब
ADC में, a = 15, b = 28, C = 41
s =(15 + 28 + 41)/2 = 84/2 = 42.
क्षेत्रफल =
42(42 - 15) (42 - 28)(42 - 41) = 126 मी 2
ABCD का क्षेत्रफल =
ABC का क्षेत्रफल +
ADC का क्षेत्रफल = 180 + 126 = 306 मी 2
A.
B.
C.
D.
भुजाओं का अनुपात = 12 : 11 : 7
माना त्रिभुज की भुजाएँ a = 12x, b = 11x और c = 7x हैं।
परिमाप = 550 = 12x + 11x + 7x = 30x
तब x = 55/3 = 18.33 मी
अतः, a = 12 x18.33 = 219.96 मी, b = 11 x 18.33 = 201.63 मी,
c = 7 x18.33 = 128.31 मी
क्योंकि त्रिभुज एक समकोण त्रिभुज है, इसलिए इसका आधार और लम्ब 201.63 मी और 128.31 मी है।
इसलिए , क्षेत्रफल =
x आधार x ऊँचाई
क्षेत्रफल =
x 201.63 x 128.31 = 12935.57 मी 2
A.

B.
C.

D.
माना कि तीसरी भुजा x सेमी है, तब भुजाएँ a = 8 सेमी , b = 11 सेमी और c = x सेमी है।
परिमाप = 32 सेमी = a + b + c = 8 + 11 + x
32 = 19 + x
x = 32 – 19 = 13 सेमी
2s = परिमाप = 32
s = 32/2 = 16 सेमी
क्षेत्रफल =
A.
16015.93
B.
15185.93
C. 16185.93
D.
16815.93
भुजाएँ a : b : c = 10 : 9 : 4 अनुपात में है।
माना, a = 10x, b = 9x और c = 4x
परिमाप = 690 मी = 10x + 9x + 5x = 23x
690 = 23x or x = 690/23 = 30 मी
इसलिए भुजाएँ है
a = 10
30 = 300 मी
b = 9
30 = 270 मी
c = 4
30 =120 मी
परिमाप = 690, 2s =690
s = 690/2 = 345
A.
(a +b + c)/4
B.
(a + b + c)/2
C.
(a + b + c)
D.
2(a + b + c)
त्रिभुज का परिमाप (p) =
2s = (a + b + c)
त्रिभुज का आधा परिमाप (s) = (a + b + c)/2









![]()
सबसे पहले, एक त्रिभुजाकार टुकडे का क्षेत्रफल ज्ञात करते है।


1. त्रिभुज की ऊँचाई ज्ञात कीजिए ।
2.परिमाप ज्ञात कीजिए ।
3. क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।













त्रिभुज AOD में

A. 28.875 सेमी 2
B. 57.750 सेमी 2
C. 80.880 सेमी 2
D. 86.880 सेमी 2
A. 116
B. 216
C. 332
D. 364
घनो की अभीष्ट संख्या = बडे घन का आयतन / छोटे घन का आयतन =123/23 = (12/2)3 = 6 x 6 x 6 = 216
A. 6000
B. 8000
C. 9000
D. 10000
खुले टैंक का पृष्ठीय क्षेत्रफल =2 [ lb+ bh + hl ] – टैंक के ऊपरी भाग का क्षेत्रफल = 2[600 + 240 + 360] – 30 x 20 = 2400 – 600 = 1800 इसलिए, लोहे की चादर की लम्बाई = 1800/3 = 600 मी अतः, लोहे की चादर की कीमत = 600 x 10 = ` 6000
A.
6
B.
5
C.
4
D.
3
पहली पाँच प्राकृत संख्याओं का समान्तर माध्य है = (1+2+3+4+5)/5 =15/5= 3
A.
B.
C.
D.
10 प्रेक्षणों का योग 250 है। नया माध्य = (250–25)/9 =225/9 = 25
A.
B.
C.
D.
समांतर माध्य = (x1+x2+x3+x4+x5)/5 =85
उनका योग = 85 × 5 = 425
A.
B.
C.
D.
चूंकि 6, 4, 7, p, p+1 और 10 का माध्य 9 है।
A.
B.
C.
D.
यहाँ n= 11(विषम) और माध्यिका = 24 है।
तब , हमें ज्ञात है
माध्यिका = प्रेक्षण [(n+1)/2]th का मान
24 = प्रेक्षण [(11+1)/2]th का मान
24= प्रेक्षण 6th का मान
24 = x-1
x= 25
A.
7, 7 और 9
B.
7, 9 और 7
C.
9, 7 और 7
D. 9, 9 और 7
माध्य इस प्रकार ज्ञात किया जा सकता है
माध्यिका आँकड़ो के मध्य का मान होता है। यहाँ यह 7 है।
बहुलक सबसे अधिक बार आने वाला प्रेक्षण का मान होता है। यहाँ यह 7 है।
A. माध्य
B. माध्यक
C. बहुलक
D. केन्द्रीय प्रवृत्ति
माध्य इस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है
माध्यिका आँकड़ो के मध्य का मान होता है। यहाँ यह 6 है।
बहुलक सबसे अधिक बार आने वाला प्रेक्षण का मान होता है। यहाँ यह 4 या 6 है।
अतः माध्य अधिकतम माप है।

जब एक आयतचित्र के आयतो के आसन्न शीर्षो के मध्य बिन्दुओं को सरल रेखाओं द्वारा मिलाया जाता हैं, तो इस प्रकार प्राप्त आकृति को बारम्बारता बहुभुज कहते हैं।
ऊर्ध्वाधर दंडो वाला एक आलेख जिसके क्षेत्रफल, दिए गए आंकड़ों की बारंबारता के अनुपात में होते हैं, तथा इन दंडो की चौड़ाई वर्ग अंतराल के बराबर होती है, आयतचित्र कहलाता है।
एक दंड आलेख या दंड चार्ट दिए गए मानों के अनुपातिक लम्बाईयों वाले आयतकार दंडो का एक चार्ट होता है। दंड आलेखो को क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर रूप में आलेखित किया जाता है।
हम जानते हैं कि परिसर = उच्चतम प्रेक्षण -न्यून्तम प्रेक्षण
= 83 – 16.7 = 66.3

वे आंकडे जो अन्वेषण के दौरान अन्वेषक के द्वारा मूल रूप से एकत्रित नहीं किये जाते हैं , लेकिन अन्य साधनों से प्राप्त किये जाते हैं ।
अन्वेषण प्रक्रिया में अन्वेषक स्वयं के द्वारा मूल रूप से एकत्रित किये गए आंकड़े प्राथमिक आंकड़े कहलाते हैं ।
वे आंकड़े जो अन्वेषण प्रक्रिया में अन्वेषक स्वयं के द्वारा मूल रूप से एकत्रित नहीं किये जाते, किन्तु कुछ अन्य स्रोतों से प्राप्त किये जाते हैं गौण आंकड़े कहलाते हैं ।
परिसर = सबसे बड़ा प्रेक्षण – सबसे छोटा प्रेक्षण
= 12 – 1
= 11
हमें ज्ञात है कि परिसर = उच्चतम पेक्षण – निम्नतम पेक्षण
= 32.5 – 15.3 = 17.2.


हम जानते है कि
बेलन का आयतन = (आधार का क्षेत्रफल) x (ऊँचाई)
दिया हैः आधार का क्षेत्रफल = 154 सेमी2 तथा ऊँचाई = 15 सेमी
इसलिए, बेलन का आयतन = (154 x 15)सेमी3 = 2310 सेमी3
सबसे बडे लम्ब वृत्तीय शंकु का आधार घन के किसी भी एक फलक पर बनाया गया सबसे बडा वृत्त होगा तथा शंकु की ऊँचाई घन की ऊँचाई के बराबर होगी।
अतः r = शंकु के आधार की त्रिज्या = 9/2 सेमी तथा h = शंकु की ऊँचाई = 9 सेमी
इसलिए, शंकु का आयतन 

अर्धगोलीय प्याले का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल=![]()
अर्धगोलीय प्याले का बाह्य वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = ![]()
कुल वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल


परिणामी ठोस का आयतन= बेलन का आयतन – शंकु का आयतन


दिया है
धन का आयतन = 27 सेमी
(भुजा
भुजा
दो ठोसो को मिलाने पर प्राप्त घनाभ की लम्बाई = 3+3 = 6 सेमी
घनाभ की ऊँचाई
घनाभ की चौड़ाई
घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2(6 x 3 + 3 x 3 + 3 x 6 )
= 2(18 + 9+ 18)
4 मी
6 मी है। कमरे की सभी दीवारों पर कमरे की चारों दीवारों का क्षेत्रफल = 2(लम्बाई + चौड़ाई) ऊँचाई
= 2
(10 + 4)
6
= 168 मी 2
रंग रोहन की दर =
5 प्रति मी 2
इसलिए,
रंग रोहन की कुल कीमत
=
5
168 =
840
दिया गया है कि दो शंकुओ का व्यास समान है
![]()
तथा दोनो शंकुओं की तिर्यक ऊँचाईयों का अनुपात

दोनो शंकुओ के वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफलो का अनुपात

दोनो शंकुओं के वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात


परिणामी घनाभ की लम्बाई
परिणामी घनाभ की चौड़ाई
परिणामी घनाभ की ऊँचाई
घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल



तरण ताल की चारों दीवारों का क्षेंत्रफल
तरण ताल के फर्श का क्षेत्रफल
सीमेन्ट करने के लिए सम्पूर्ण क्षेत्रफल
वर्ग मीटर सीमेन्ट करने का व्यय
12
फर्श तथा दीवारों को सीमेन्ट करने का व्यय![]()
माना घन की भुजा = a
दिया है:
2 (घन का आयतन) = गोले का आयतन





कितने विद्यार्थी ऐसे है जिनके अंक बहुलक मान से कम है?
चूंकि सारणी में 50 अंक की बारम्बारता सबसे अधिक है।
इसलिए, आँकड़ों का बहुलक = 50
इसलिए, 14 विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके अंक बहुलक मान से कम है।

दिए हुए आंकड़ों के लिए बारम्बारता सारणी इस प्रकार है ।

(i)पाँचवें वर्ग की उच्च सीमा = 52 , पाँचवें वर्ग की निम्न सीमा = 48
(ii) पाँचवें वर्ग की वास्तविक वर्ग सीमा (48 – 1/2) - (52 + 1/2) अर्थात , 47.5 - 52.5
(iii) तीसरे वर्ग की वर्ग परिसीमा (38 – 1/2) – ( 42 + 1/2) अर्थात, 37.5 – 52.5
(iv)चौथे वर्ग का वर्ग चिन्ह
(43 + 47)/2= 90/2= 45
पाई ग्राफ : वृत्त आरेख सम्पूर्ण वृत्त और उसके भागों में सम्बन्ध दर्शाता है। सम्पूर्ण वृत्त को त्रिज्य खण्डों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक त्रिज्य खण्ड की माप उसके द्वारा निरुपित सुचना के समानुपाती होती है। त्रिज्य खण्ड एक पाई की फाँकों के समान है, अतः इसे पाई-चार्ट या पाई आरेख कहते हैं।
महत्व: आँकड़ों के चित्रों द्वारा वृत्तारेखा या पाई ग्राफ द्वारा निरूपण एक सशक्त माध्यम है। इस प्रकार के प्रदर्शन में आँकड़ों को किसी वृत्त के त्रिज्य खण्डों के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

दो क्रमागत मध्य बिन्दुओं के बीच का अंतर = 15 – 5 = 10
वर्ग अन्तराल की माप = 10
दिए हुए आँकड़ों के लिए बारम्बारता बंटन सारणी इस प्रकार है


वर्ग माप = दो क्रमागत वर्ग चिन्हों के बीच का अंतर
= 31-26 = 5
निम्न वर्ग सीमा = 26 – 5/2 = 23.5
उपरि वर्ग सीमा = 26+5/2 = 28.5
अत: वर्ग-चिह्न 26 के लिए वर्ग अंतराल 23.5-28.5 है।
इसी प्रकार हम अन्य के लिए भी गणना कर सकते है।




निम्नलिखित को आरोही क्रम में लगाइये।
2.1, 2.2 ,2.3, 2.4, 2.5, 2.5, 2.6, 2.7, 2.7, 2.8, 2.8, 2.9, 2.9, 3.0, 3.1
(1) परिसर = उच्च मान – निम्न मान
= 3.1 - 2.1 = 1.0
(2) 2.5 किग्रा से कम भार वाले बच्चे = 4
(3) 2.8 किग्रा से अधिक भार वाले बच्चे = 4
(i) चुनाव में कौन विजयी रहा? (i) जैसा की हम पाई ग्राफ में देख सकते हैं की दीपक के केन्द्रीय कोण की माप सबसे अधिक है।
अतः हम कह सकते हैं कि चुनाव में दीपक विजयी रहा।
(ii) दीपक के मतों की संख्या = (130° × 684)/360° = 247
(iii) जैसा की हम पाई ग्राफ में देख सकते हैं की माइकल के केन्द्रीय कोण की माप सबसे कम है। अतः हम कह सकते
हैं कि चुनाव में सबसे कम मत माइकल को प्राप्त हुए।
इसलिए माइकल के मतों की संख्या
= (50° × 684)/360° = 95



(i) दिए गए आंकड़ों के लिए वर्गीकृत बारम्बारता बंटन:

(ii) वर्ग अन्तराल 20 – 30 की बारम्बारता सबसे अधिक अर्थात 15 है ।
(iii) 40 छात्रों के अंक 40 से कम अंक हैं।
(iv) 18 छात्र प्रथम श्रेणी से पास हुए ।

A.
0
B.
1/3
C.
2/3
D.
1
चूँकि फलो की कुल संख्या= 5 + 4 + 3 = 12
केले के प्राप्त होने के परिणामों की संख्या 4 है ,
अतः
A.
B.
C.
D.
उन अभिप्रयोगों की संख्या जिसमें दो पट प्राप्त होते है
= 300 – (63 + 102)
= 135
इसलिए,
A.
B.
C.
D.
उन अभिप्रयोगों की संख्या जिसमें कोई भी चित प्राप्त नही होता है
= 100 – (20 + 50) = 30
इसलिए,
A.
B.
C.
D.
यहाँ, हमारें पास चार स्थितियां हो सकती है (i) a सम हो और b सम हो। (ii) a सम हो और b विषम हो। (iii) a विषम हो और b सम हो। (iv) a विषम हो और b विषम हो। स्थिति (ii) और (iii) में योग विषम है। इसलिए अभीष्ट प्रायिकता= 2/4 = 1/2
A.
B.
C.
D.
चूँकि तरीकों की कुल संख्या जिसमें सिक्के दिखाई दे सकते है= 26 = 64 हम एक तरीके से ठीक छह चितों को प्राप्त कर सकते है। इस प्रकार, अभीष्ट प्रायिकता= 1/64
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं, अर्थात, 52 सप्ताह और 1 दिन। चूँकि सामान्य वर्ष का प्रथम दिन शनिवार है, इसलिए अंतिम सप्ताह का पहला दिन भी शनिवार होगा और इस अंतिम सप्ताह का अंतिम दिन शुक्रवार होगा। इसलिए, सामान्य वर्ष का अंतिम दिन, अर्थात, 365 वाँ दिन) शनिवार होगा। इसलिए, अभीष्ट प्रायिकता= 0
A.
B.
C.
D.
एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं, अर्थात, 52 सप्ताह और 1 दिन। चूँकि सामान्य वर्ष का प्रथम दिन गुरूवार है, इसलिए अंतिम सप्ताह का पहला दिन भी गुरूवार होगा और इस अंतिम सप्ताह का अंतिम दिन बुधवार होगा। इसलिए, सामान्य वर्ष का अंतिम दिन, अर्थात, 365 वाँ दिन गुरूवार होगा। इसलिए, अभीष्ट प्रायिकता= 1/1 = 1
A.
B.
C.
D.
चरखी में भागों की कुल संख्या = 8
चरखी में नीले भागों की संख्या = 3
इसलिए,
A.
B.
C.
D.