A. 19.5 सेमी2
B. 18.5 सेमी2
C. 17.5 सेमी2
D. 15 सेमी2
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = AB x BD = 5 x 7 = 35 सेमी 2
त्रिभुज BDC का क्षेत्रफल = ½ x समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = ½ x 35 = 17.5 सेमी 2
A. 45
B. 35
C. 25
D. 15
समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = AB x BD = 5 x 7 = 35 सेमी2
A. 144
B. 169
C. 196
D. 225
हम जानते है कि
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार x संगत ऊँचाईया
y2 = (y – 3)(y + 4)
y2 = y2 + 4y – 3y – 12
या y = 12
अतः समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = (12 – 3) (12 + 4)
= 9 x 16
= 144 वर्ग इकाई
A. 156
B. 100
C. 78
D. 39
AD, त्रिभुज ABC की माध्यिका है।
हम जानते है कि माध्यिका एक त्रिभुज को दो बराबर भागो में विभाजित करती है।
क्षेत्रफल ( ΔABD) = क्षेत्रफल ( ΔADC) [Δक्षेत्रफल ( ΔABD = 156 सेमी 2)]
क्षेत्रफल ( Δ ADC) = 156 सेमी 2
A. 156
B. 100
C. 78
D. 39
A. 425
B. 400
C. 437.5
D. 350
त्रिभुजाकार पार्क का क्षेत्रफल =
A. 20 मी
B. 25 मी
C. 28.4 मी
D. 30 मी
Δ PES , E पर एक समकोण त्रिभुज है। माना कि SE = FR = a इस प्रकार, a2 = 142 - 132 = 27 तब, a = 5.2 y = SE + EF + FR = 5.2 + 18 + 5.2 = 28.4 मी
A. 5 सेमी
B. 25 सेमी
C. 125 सेमी
D. 625 सेमी
माना कि समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई = xसेमी तब, आधार = 5x सेमी समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई = 5x × x = 5x2 सेमी 2 लेकिन, क्षेत्रफल = 125 सेमी 2 125 = 5x2 x2 = 125/5 = 25 x = 5 सेमी आधार = 5x = 5 × 5 = 25 सेमी
हम
जानते हैं
कि
ऊँचाई
= समांतर
चतुर्भुज का
क्षेत्रफल/आधार
= 32 सेमी2/8 सेमी
= 4 सेमी
अतः समांतर
चतुर्भुज की ऊँचाई
अर्थात
समांतर
भुजाओं के
बीच की दूरी = 4
सेमी

त्रिभुज का क्षेत्रफल = (1/2) × आधार × ऊँचाई
=(1/2)) × 24
=12 सेमी 2
समलम्ब
चतुर्भुज
का
क्षेत्रफल =
26 सेमी 2
(1/2)(a+b)h = 26सेमी2
(1/2)(6.5)h = 26 सेमी2
h = (2
26)/6.5
= 8 सेमी
इस
प्रकार,
समलम्ब चतुर्भुज
की ऊँचाई 8 सेमी
है
।
असत्य।
सभी
सर्वागसम
त्रिभुज
क्षेत्रफल
में
समान
होते
हैं
लेकिन
यह
आवश्यक
नही
हैं
कि
क्षेत्रफल
में
समान
सभी
त्रिभुज
सर्वागसम
हो।
रेखाखंड BD की लम्बाई = AB + AC = 8.5 सेमी
तीन भुजाएँ दिये होने पर हम एक अद्वितीय त्रिभुज की रचना कर सकते हैं ।
तीन कोण दिये होने पर हम अनन्त संख्या में त्रिभुजों की रचना कर सकते हैं ।
जब दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दिया हो तो हम एक अद्वितीय त्रिभुज की रचना कर सकते हैं ।

जब दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दिया हो तो हम एक अद्वितीय त्रिभुज की रचना कर सकते हैं ।
जब दो कोणऔर उनकी संगत भुजा दी हो तो हम एक अद्वितीय त्रिभुज की रचना कर सकते हैं।










चरण 1 : एक रेखा PQ खींचिए।
चरण 2 : इस पर कोई बिन्दु D लीजिए।
चरण 3 : D से PQ पर लम्ब डालिए।
चरण 4 : किरण DE सेAD =4सेमी काटिए।
चरण 5 : A बिन्दु से 300 का कोंण बनाइये जो PQ को B पर काटता है।PQ से DC इस प्रकार काटिए कि DC=BD
चरण 6 : A को C से मिलाइये।
ABC अभीष्ट त्रिभुज है।




रचना
के
चरण:
कोई उपयुक्त लम्बाई लेकर एक रेखाखंड AB खींचिए और इसके बाहर एक बिंदु P लीजिए।
· P को केंद्र मानकर उपयुक्त त्रिज्या से एक चाप लगाइए जो रेखाखंड AB को C और D बिंदुओं पर काटता है।
· C और D को केंद्र मानकर, CD की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर समान त्रिज्या से दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को E पर काटते हैं।
· P और E को मिलाइए ।
PE, AB पर लंबवत है और यह लम्ब अद्वितीय है।






रचना के चरण:
चरण 1: एक रेखा खण्ड AB= 8 सेमी का खींचिए।
चरण 2: A को केन्द्र लेकर और AB की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर AB के दोनों तरफ दो चाप लगाइये।
चरण 3: B को केन्द्र लेकर उसी त्रिज्या से पुनः दो चाप लगाइये जो पहले वाले चाप को C और D पर काटते हैं।
चरण 4: C को D से मिलाइये। रेखाखण्ड CD, AB को बिन्दु O पर काटता है। जहाँ O , AB का मध्य बिन्दु है।
प्रत्येक भाग की लम्बाई = 4 सेमी
A.

B.

C.

D.

परिमाप = 17 + 14 + x
38 = 31 + x
x = 7 सेमी
क्षेत्रफल =
s(s - a)(s - b)(s - c) =
19 x 2 x 5 x 12 = 2
570
क्षेत्रफल = (1/2) x आधार x ऊँचाई
= (1/2) x 17 x ऊँचाई
= 2
570
ऊँचाई = (4
570)/17
A.
B.
C.
D.
भुजाओं का अनुपात= 3 : 4 : 5
माना त्रिभुज की भुजाएँ है; a = 3x, b = 4x और c = 5x
परिमाप = 48 = 3x + 4x + 5x = 48 = 12x
x = 48/12 = 4 मी
अतः, a = 3
4 = 12 मी, b = 4
4 = 16 मी, c = 5
4 = 20 मी
चूंकि त्रिभुज एक समकोण त्रिभुज है, इसलिए इसका आधार और लम्ब 12 मी और 16 मी है।
इसलिए, क्षेत्रफल =
आधार
ऊँचाई
क्षेत्रफल = 
16
12 = 96 मी 2
A.
B.
C.

D.
यहाँ a = 16 सेमी, b = 22 सेमी, माना c = x सेमी
अब परिमाप = a + b + c
64 = 16 + 22 + x
x = 64 – 38
x = 26 सेमी
S = (a + b + c)/2
=64/2
= 32 सेमी
क्षेत्रफल =
s(s - a)(s - b)(s - c)
=
32(32 - 16)(32 - 22)(32 - 26)
=
(32 x 16 x 10 x 6)
= 32
30 सेमी 2
A.

B.

C.

D.

A.
B.
C.
D.
त्रिभुज की भुजाएँ अनुपात 25:17:12 में है, अर्थात
माना लीजिये a:b:c = 25:17:12
⇒ a = 25x, b = 17x और c = 12x
परिमाप 540 = 25x + 17x + 12x
54x = 540
x = 10
इसलिए त्रिभुज की भुजाएँ है
a = 25x10 = 250 मी, b = 17x10 = 170 मी और c = 12x10 = 120 मी
A.
18
B.
20
C.
22
D.
24
समद्विबाहु
त्रिभुज
का
परिमाप = 42 सेमी
माना
की
समान
भुजाएँ
=
a सेमी
आधार= (3/2)a
सेमी
परिमाप
42
= a + a + (3/2)a
42 = 7a/2
a = 84/7 = 12
तब, इसका
आधार
=
3a/2 = (3
12)/2 =
18 सेमी
A.
(bh)2
B.
2bh
C.
bh
D.
x
b x h
त्रिभुज का क्षेत्रफल =
x
b x h.
त्रिभुज का अर्धपरिमाप (s) = 
जहाँ, a, b और c त्रिभुज की भुजाएं है।


त्रिभुज का क्षेत्रफल
=
{s(s-a)(s-b)(s-c)}
त्रिभुज के शीर्षलंबों का प्रतिच्छेद बिन्दु त्रिभुज का लम्बकेन्द्र कहलाता है ।

त्रिभुज का क्षेत्रफल
आधार
24

= 216 सेमी
समलम्ब चतुर्भुज का क्षेत्रफल

= 6 सेमी
इस प्रकार

वह बिन्दु जहाँ त्रिभुज की दो भुजाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेदित करती हैं त्रिभुज का शीर्ष कहलाता है ।
त्रिभुज के दो शीर्षों को जोड़ने वाला रेखाखण्ड त्रिभुज की भुजा कहलाता है ।
समलम्ब चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 26 सेमी 2
(1/2)(a+b)h = 26सेमी2
(1/2)(6.5)h = 26 सेमी2
h = (2
26)/6.5
= 8 सेमी
इस प्रकार, समलम्ब चतुर्भुज की ऊँचाई 8 सेमी है ।
समकोण
समद्विबाहु
त्रिभुज का
क्षेत्रफल
= (1/2) आधार
ऊँचाई =
(1/2) a2.


A. 3600
B. 3000
C. 2600
D. 2400
हम जानते है कि l = 6 x 10 = 60, b = 10 और h = 10. इसलिए, पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 [ lb +bh+ hl ] = 2(60 x 10 + 10 x 10 + 10 x 60) = 2600 सेमी 2
A. 12 सेमी
B. 16 सेमी
C. 32 सेमी
D. 64 सेमी
माना कि घनाभ की चौड़ाई x मी है। तब घनाभ की ऊँचाई = x/2, और घनाभ की लम्बाई = 2x इसलिए, घनाभ का आयतन = x(x/2)2x = x3. अतः, x3 = 512 (दिया है) अर्थात, x = 8. इसलिए, लम्बाई = 2x = 2 x 8 = 16 सेमी
A. 6 सेमी
B. 6√2 सेमी
C. 6√3 सेमी
D. 18 सेमी
माना कि नये घन की भुजा = x सेमी तब नये घन का आयतन = तीनो घनों के आयतनों का योग या, x3 = 33 + 43 + 53 = 216 = 63 या, x = 6 अत: नये घन के विकर्ण इस प्रकार है = √(x2 + x2 + x2) = x√3 = 6√3 सेमी
A. 25
B. 27
C. 125
D. 144
A. 500
B. 550
C. 600
D. 650
यदि a एक घन की भुजा है, तब विकर्ण = a√3
यहाँ घन का विकर्ण 10√3 सेमी हैं ।
अत, a = 10 सेमी होगा ।
इसलिए , पृष्ठीय क्षेत्रफल इस प्रकार है
= 6 a2
= 6 x 10 x 10
= 600 सेमी 2
A. 294.61 सेमी 3
B. 331.43 सेमी 3
C. 589.21 सेमी 3
D. 883.82 सेमी 3
A. 66r2
B. 44r2
C. 22r2
D. 11r2
A. 544 सेमी 2
B. 272 सेमी 2
C. 60 सेमी 2
D. 30 सेमी 2
A. 345.71 मी 3
B. 691.43 मी 3
C. 1382.86 मी 3
D. 1728.57 मी 3
A. 66 सेमी 3
B. 99 सेमी 3
C. 198 सेमी 3
D. 396 सेमी 3
A. 88 मी 3
B. 176 मी 3
C. 1232 मी 3
D. 2464 मी 3
A. 12 मी
B. 54 मी
C. 144 मी
D. 216 मी
माना कि एक घन की भुजा 'a' है। हम जानते है कि एक घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a2 6a2 = 864 a2 = 144 a = 12 मी
A. 5 इंच
B. 7 इंच
C. 26 इंच
D. 35 इंच
A. 78 सेमी 3
B. 432 सेमी 3
C. 864 सेमी 3
D. 1728 सेमी 3
बाक्स का आयतन = 24 सेमी x 6 सेमी x 3 सेमी = 432 सेमी 3
A. 103.71 सेमी 2
B. 125.60 सेमी 2
C. 175.84 सेमी 2
D. 200.96 सेमी 2
एक शंकु का पृष्ठीय क्षेत्रफल = वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + शंकु के आधार का क्षेत्रफल
A. h12 : h22
B. r1 : r2
C. r12 : r22
D. r13 : r23
अभीष्ट अनुपात
A. 6 सेमी
B. 7 सेमी
C. 12 सेमी
D. 22 सेमी
माना कि नये घन की भुजा= x सेमी दिया गया है, प्रत्येक x सेमी भुजा के 8 घनो का कुल आयतन = 14 सेमी भुजा के ठोस घन का आयतन 8x3 = 143 8x3 = 2744 x3 = 343 x = 7

मान लीजिए कि घन के प्रत्येक किनारे की लम्बाई a सेमी है।
इसलिए, आयतन = 1000 सेमी3
a3 = 1000
a = 10 सेमी
इसलिए, सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षे़त्रफल = 6a2 सेमी2 = 6 x 102 सेमी2 = 600 सेमी2
दिया गया है कि,
आयतन = 440 सेमी3 तथा आधार का क्षेत्रफल= 88 सेमी2


माना कि पहले बेलन की त्रिज्या
तब उनके आयतनों का अनुपात


=(2x)2(1y)/(5x)2(4y)
= 4x2y/25x2(4y)
= 1/25
= 1:25






![]()



A.
7
B.
8
C.
9
D.
11
दिये गये आँकड़ो को अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर, हमें प्राप्त होता है
7, 8, 9, 9, 9, 10, 11, 11, 11, 12, 13, 13, 13 और x
दिये गये आँकड़ो में, हम देखते है कि 9, 11 और 13 समान बार आते है, अर्थात, 3 बार, लेकिन आँकड़ो का बहुलक 9 है।
इसलिए, x का मान 9 होना चाहिए जिससे कि यह अधिक से अधिक बार आ सकता है।
A.
B.
C.
D.
औसत = (15+16+17+15+16+16+17+ 16+14+15) /10
=15.7
A.
B.
C.
D.
दिये गये आँकड़ो को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर, हमें प्राप्त होता है
35, 42, 51, 56, 67, 69, 72, 81, 85, 92.
ध्यान दीजिए 10/2= 5 है जो एक विषम सख्या है।
इसलिए, अभीष्ट माध्यिका
= (10/2)th और [(10/2)+1]th पद का माध्य
= (5th पद +6th पद)/2
= (67+69)/2
= 136/2= 68
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
सबसे पहले हम आँकड़ो को आरोही क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित करते है कि 14, 14, 14, 14, 17, 18, 18, 18, 22, 23, 25, 28. यहाँ 14 सबसे ज्यादा बार आया है, अर्थात, चार बार। इसलिए बहुलक 14 है।
A.
B.
C.
D.
सबसे पहले हम आँकड़ो को आरोही क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित करते है कि 7, 7, 7, 7, 7, 9, 12, 12, 12, 13, 15, 18, 25. यहाँ 7 सबसे ज्यादा बार आया है, अर्थात, 5 बार। इसलिए बहुलक 7 है।
A.
B.
C.
D.
9 प्रेक्षणों का योग = 9 × 36 = 324 पहले 5 प्रेक्षणों का योग= 5 × 32 = 160 अंतिम 5 प्रेक्षणों का योग = 5 × 36 = 180 इसलिए, 5th प्रेक्षण = 180 + 160 – 324 = 16
A.
B.
C.
D.
A + B = 50
B + C = 56
C + A = 44
__________
2(A + B + C) = 150
A + B + C = 75
अतः, A, B और C का औसत = (A + B + C)/3 = 75/3 = 25
A.
B.
C.
D.
अभीष्ट माध्य = 420/15 = 28
A.
B.
C.
D.
चूंकि 24 सबसे अधिक बार आया है, अर्थात, 3 बार। इसलिए बहुलक 24 है।
A.
10
B.
15
C.
20
D.
25
वर्ग -चिन्ह = (10+20)/ 2 = 15
A.
B.
C.
D.
प्रश्नानुसार,
माध्य= (6+y+7+x+14)/5 =8
x + y + 27 = 40
x + y = 13
चरण
चरण
B तथा ![]()
![]()
![]()
चरण
LPQ और ![]()
चरण
चरण
इसलिए

चरण

रचना के चरण:
· उपयुक्त लम्बाई का एक रेखाखण्ड AB खींचिए और इस पर एक बिंदु O लीजिए।
· O को केन्द्र मानकर, किसी त्रिज्या से कोई चाप लगाइए जो AB को C और F काटता है।
· C को केन्द्र मानकर, उसी त्रिज्या का चाप लगाइए जो पहले वाले चाप को D पर काटता है ।
· D को केन्द्र मानकर, उसी त्रिज्या का चाप लगाइए जो पहले वाले चाप को E पर काटता है ।
· OE को मिलाइए और इसे P बिन्दु तक आगे बढ़ाइए।
अब हम कोण POA (अर्थात, 60°) को समद्विभाजित करते हैं।
· E और F को केन्द्र मानकर, EF की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर और समान त्रिज्या से दो चाप लगाइए
जो आपस में G पर काटते हैं।
· OG को मिलाइए और इसे Q बिंदु तक आगे बढ़ाइए।
इसप्रकार,OQ कोण POA का समद्विभाजक है।
![]()

B = 30o
दिया हुआ है –
BC=3.4 सेमी, AB-AC=1.5 सेमी और ![]()
B = 30o,तो ∆ABC की रचना कीजिए।
रचना के चरणः
चरण 1: 3.4 सेमी लम्बाई का एक रेखाखण्ड BC खींचिए।
चरण2 : बिन्दु B पर 30o का कोंण बनाइये।
चरण3 : किरण BX से रेखाखण्ड BD=1.5 सेमी काटिए।
चरण 4 : D को C से मिलाइये।
चरण 5 : DC का समद्विभाजक बनाइये।
चरण 6 : DC के समद्विभाजक को आगे बढ़ाइये यह किरण BX को A पर काटती है।
चरण7: A तथा C को मिलाइये।
ABC अभीष्ट त्रिभुज है।
रचना के चरणः
चरण1: BC=5 सेमी खींचिए।
चरण2: B पर 90o के कोंण की रचना कीजिए।
चरण3: B को केन्द्र मानकर किरण BX पर 8 सेमी त्रिज्या का एक चाप लगाइये माना यह BX को D पर काटता है।
चरण4: D तथा C को मिलाइये और CD का लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो BX को A पर काटता है।
चरण5: A तथा C को मिलाइये।
ABC अभीष्ट समकोंण त्रिभुज हैं।

दिया हुआ है![]()
![]()
रचना के पद :
पद
पद
पद![]()
X तथा ![]()
पद
पद
ABC अभीष्ट त्रिभुज है।
B = 45°

रचना के चरणः
चरण
चरण
चरण
चरण
चरण
चरण

रचना के चरण :
1. एक रेखा खण्ड AB उपयुक्त लम्बाई का खींचिए।
2. A को केन्द्र मानकर,कोई भी त्रिज्या लेकर एक चाप लगाइए जो AB को C पर काटता है।
3. C को केन्द्र मानकर, उसी त्रिज्या से एक और चाप लगाइए जो पहले वाले चाप को D पर काटता है ।
4. D को केन्द्र मानकर, उसी त्रिज्या से एक और चाप लगाइए जो पहले वाले चाप को F पर काटता है ।
5. D और F को केन्द्र मानकर और DF की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को G पर काटते हैं।।
6. A और G को मिलाइए और इसे H तक आगे बढ़ाइए।
अब, हम कोण HAB (अर्थात, 90°)को समद्विभाजित करते हैं।
7. C और E को केन्द्र मानकर और CE की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को K पर काटते हैं।
8. A और K मिलाइए और इसे L बिन्दु तक आगे बढ़ाइए।
अब, हम कोण HAL (अर्थात, 45°)को समद्विभाजित करते हैं।
9. N और E को केन्द्र मानकर और NE की आधे से अधिक त्रिज्या लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को P पर काटते हैं।
10. A और P को मिलाइए और इसे M तक आगे बढ़ाइए।
कोण MAB (अर्थात, 67.5°) अभीष्ट कोण है।