A. 120°
B. 90°
C. 60°
D. 45°
यदि हम एक किरण BF द्वारा ÐABC = 120° को समद्विभाजित करें, तब हमें दो समान कोण ÐABF और ÐFBC इस प्रकार प्राप्त होते हैं कि ÐABF + ÐFBC = ÐABC = 120° और ÐABF = ÐFBC इसलिए, ÐFBC = 60° हैं ।
A. कोण समद्विभाजन
B. रेखा समद्विभाजन
C. माध्यिका समद्विभाजन
D. लम्ब समद्विभाजन
ABC के लिए, BF एक कोण समद्विभाजक है।

A. 60° और 30°.
B. 45° और 45°.
C. 40° और 50°.
D. 30° और 60°.
A. 25°
B. 15° और 25°
C. 45°
D. 45° और 75°
A. 70°, 80°, 30°.
B. 65°, 70°, 45°.
C. 55°, 60°, 65°.
D. 45°, 65°, 75°.

A. 60°
B. 85°
C. 90°
D. 100°
A. 5
B. 6
C. 8
D. 10
माना कि भुजाओं की संख्या n है, तब
A. 30°.
B. 40°.
C. 45°.
D. 60°.


दी गयी आकृति में बिंदु O रेखाखंड AB को अनुपात 3:4 में विभाजित करता है|


A.
7 सेमी
B.
14 सेमी
C.
28 सेमी
D.
42 सेमी
चूंकि, हमें
ज्ञात
है
त्रिज्या = व्यास/2
इसलिए,अभीष्ट
त्रिज्या
=
14/2
= 7 सेमी
A.
EF
B.
CD
C.
BC
D.
AB
चूंकि जीवा AB जैसा कि आकृति में बताया गया है वृत्त के केन्द्र O से होकर गुजरती है। इसलिए, यह वृत्त का व्यास होगी।
A.
वृत्त का वृत्तखंड
B.
वृत्त का चाप
C.
वृत्त की परिधि
D.
वृत्त की जीवा
आकृति से यह स्पष्ट है कि AB वृत्त की परिधि का ही एक भाग है। इसलिए, यह वृत्त के चाप के नाम से जाना जाता है।
A.
d = 2r
B.
r = 2d
C.
d = 2/r
D.
d = r/2
हम जानते है कि वृत्त का व्यास त्रिज्या का दोगुना होता है। इसलिए, वृत्त के व्यास और त्रिज्या के बीच संबंध होगा d = 2r
A.
वृत्त की परिधि पर
B.
वृत्त के अभ्यंतर
C.
वृत्त के बर्हिभाग में
D.
वृत्त की परिधि पर या अभ्यंतर में
वृत्त
का
केन्द्र
जैसा
कि
आकृति
में
दिखाया
गया
है
वृत्त
के
अभ्यंतर
में
होता
है, इसलिए
यह
वृत्त
के
अभ्ंयतर
में
स्थित
होगा।

वृत्त का व्यास = 2a
वृत्त की भुजा
वर्ग का परिमाप
अतः दिया गया कथन सत्य है।
नही, यह केवल लघु वृत्तखंड की स्थिति में सत्य है।

नीचे दिए गए चित्र में बिंदु A,B,D,G तथा E वृत्त की परिधि पर स्थित हैं, अतः ये बिंदु चक्रीय बिंदु हैंI बिंदु C,F तथा H वृत्त की परिधि पर स्थित न होने के कारण चक्रीय नहीं हैंI
असत्य।
असत्य, (संगत जीवाएँ समान होती है।)

असत्य, तीन दिये गये असंरेख बिन्दुओं के माध्यम से गुजरते हुए केवल एक और एक ही वृत्त को खींचा सकता है।



SOT=30°.
चूंकि , हमें ज्ञात है


ABC एक समबाहु त्रिभुज है।
(i)
ABC (ii)
AEC ज्ञात कीजिए ।
चूंकि






चूंकि
इसलिए

60°

= 120°


चूंकि समान्तर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते है। इसलिए,

इसलिए, अभीष्ट सम्मुख कोण 31o और 31o है।
चूंकि ARPQ एक समान्तर चतुर्भुज
है।
ARPQ का परिमाप
=2(AR+AQ)
=2AR+2AQ
=AB+AC
[
AB=2AR,AC=2AQ]
=30+21
=51
सेमी
चूंकि ABCD एक समान्तर चतुर्भुज
है। इसलिए,
AB || DC और AB = DC
EB || DF और 1/2 AB = 1/2 DC
EB || DF और EB = DF
EBFD एक समान्तर चतुर्भुज है।

, 30
, 92
और x है। x का मान ज्ञात कीजिए।
चतुर्भुज
के सभी कोणों का
योग
= 360
100
+ 30
+ 92
+ x =
360
222
+ x =
360
x
= 138
कोण भी ज्ञात कीजिए जैसा कि आकृति में दिखाया गया है।
त्रिभुज
त्रिभुज के सभी कोणों का योग


इसलिए
और
इसी प्रकार
इसलिए
चूंकि
इसलिए
इसलिए
अतः
इसलिए
ABC में,
ABC=90°
पाइथागोरस
प्रमेय से
BC2=AC2-AB2=(15)2-(9)2
BC=12 सेमी
ABC में, , D और
E मध्य बिन्दु
है।
इसलिए, मध्यबिन्दु
प्रमेय से, हमें ज्ञात है
DE=1/2(BC)
=1/2(12)=6 सेमी
समलम्ब चतुर्भुज
का क्षेत्रफल
DECB=1/2(DE+BC)
DB
=1/2(DE+BC)
AB/2
=1/2(6+12)
9/2
=1/2(18)
9/2
=81/2
=40.5 सेमी 2







A. m : n
B. m2 : n2
C. m : 2n
D. n : m
A. क्षेत्रफल (ABCD) = क्षेत्रफल (PQRS)
B. क्षेत्रफल (ABCD) < Δ क्षेत्रफल (PQRS)
C. क्षेत्रफल (ABCD) > Δक्षेत्रफल (PQRS)
D. इनमे कोई सम्बन्ध नहीं है
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आयत का क्षेत्रफल = जैसे की हम आकृति से देखते है कि इसलिए, हम देख सकते है कि आयत का क्षेत्रफल समान्तर चतुर्भुज के क्षेत्रफल से बडा होता है।
A. 6 √2 सेमी
B. 6 सेमी
C. 3 √ 2 सेमी
D. 3 सेमी
माना कि समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई h है। इसलिए, समान्तर चतुर्भुज का आधार 2h है। इसलिए, समान्तर चतुर्भुज का क्षे़त्रफल 2h h = 72 (दिया है) ⇒ h = 6 सेमी
A. 10 सेमी
B. 8 सेमी
C. 6 सेमी
D. 4 सेमी
A. 9 सेमी2
B. 18 सेमी2
C. 36 सेमी2
D. 72 सेमी2
X और Y , BC और AD के मध्य बिन्दु है। इसलिए, CDYX का क्षेत्रफल = 1/2 ABCD का क्षेत्रफल अतः ABCD का क्षेत्रफल = 2 × 36 = 72 सेमी2
एक विकर्ण की लम्बाई = 20 सेमी
दूसरे विकर्ण की लम्बाई = 15 सेमी
अतः समचतुर्भुज का क्षेत्रफल = ½ x विकर्णों का गुणनफल
= 1/2 x 20 x 15 सेमी2
= 150 सेमी2
असत्य, चूंकि इस स्थिति में त्रिभुज का क्षेत्रफल समान्तर चतुर्भुज के क्षेत्रफल से आधा होता है।
सत्य।
सत्य।
आयत का परिमाप
= 2(13.4 + 10.3)
= 2 × 23.7
= 47.4 मीटर
समान्तर चतुर्भुज में आमने सामने की भुजाऐं बराबर होती हैं।
इसलिए समान्तर चतुर्भुज का परिमाप = 11+6+11+6 = 34 सेमी
हम जानते है कि
त्रिभुज की ऊँचाई = 2 x क्षेत्रफल/ संगत आधार
= 2 x 45 सेमी2/15 सेमी
= 6 सेमी


चूंकि
PQR और
PQS एक
ही
आधार
PQ
पर
और
एक
ही
समान्तर
SR
पर
है।
क्षेत्रफल
(PQR)
= क्षेत्रफल
(PQS)
क्षेत्रफल
(PQR)
- क्षेत्रफल
(POQ)
= क्षेत्रफल
(PQS)
- क्षेत्रफल
(POQ)
क्षेत्रफल
(QOR)
= क्षेत्रफल
(POS)
RPQ = 900, QR का मध्य बिन्दु S है और SP = 2.5 सेमी। त्रिभुज के क्षेत्रफल PQR की गणना कीजिए।

चूंकि एक समकोण त्रिभुज में कर्ण का मध्य बिन्दु शीर्षो से समदूरस्थ होता है।

इसलिए

RQ2 = RP2 + PQ2 (पाइथागोरस प्रमेय




अब 






= 



BCE)
= क्षेत्रफल (
BCD).
दर्शाइये कि DE
क्षेत्रफल(
BCE) = क्षेत्रफल(
BCD)
ये
दोनो
त्रिभुज
समान
आधार
BC
पर
है।
इसलिए
आधार
BC
पर
बिन्दु
D
और
E
से
ऊँचाई
समान
होगी।
[चूंकि
त्रिभुज
का
क्षेत्रफल = 1/2
(आधार
ऊँचाई) ]
DE ||
BC समान्तर
रेखाओं
के
बीच
की
दूरी
समान
रहती
है।
माना समान्तर चतुर्भुज की अन्य भुजा की लम्बाई
समान्तर चतुर्भुज का परिमाप
24मीटर
24/2 = 7 + x
x = 12 – 7
= 5 मीटर
इस प्रकार समान्तर चतुर्भुज की अन्य भुजा की लम्बाई
ACB) = क्षेत्रफल (
ACF).
चूंकि
त्रिभुज
क्षेत्रफल
क्षेत्रफल

ABP) = क्षेत्रफल (चतुर्भुज).
क्षेत्रफल

क्षेत्रफल
क्षेत्रफल



क्षेत्रफल


AB और BF
AD . यदि AB = 16 सेमी, DE = 8 सेमी और BF = 10 सेमी, AD ज्ञात कीजिए
समान्तर
चतुर्भुज
का
क्षेत्रफल
ABCD
= AB
DE
समान्तर
चतुर्भुज
का
क्षेत्रफल ABCD =
AD
BF
इसलिए,
AB X DE = AD
BF
16
8 = AD
10
AD
= 12.8 सेमी
के बराबर होता है जहाँ h समान्तर भुजाओं के बीच की लम्बवत दूरी है और a, b समान्तर भुजाओं की मापे है

विकर्ण


क्षेत्रफल

समलम्ब
चतुर्भुज
का
परिमाप = 52 सेमी
समांतर
भुजाओं
का
योग + असमांतर
भुजाओं
का
योग = 52 सेमी
समांतर
भुजाओं
का
योग = 52 -
20
= 32सेमी
समलम्ब
चतुर्भुज
का
क्षेत्रफल =
(1/2)(समांतर
भुजाओं
का
योग)शीर्ष
लम्ब
समलम्ब
चतुर्भुज
का
क्षेत्रफल=
(1/2)(32)8
समलम्ब
चतुर्भुज
का
क्षेत्रफल= 128 सेमी2
दिया गया है: त्रिभुज PQR में, PS त्रिभुज की माध्यिका हैं।
सिद्व करना हैं: PQ + QR + RP > 2PS
उपपत्ति:-

त्रिभुज PQS में,
PQ + QS > PS …
(1) (चूकिं
त्रिभुज
में
दो
भुजाओं
का
योग
तीसरी
भुजा
से
अधिक
होता
हैं।)
त्रिभुज PRS में,
PR + RS > PS … (2) (चूकिं
त्रिभुज
में
दो
भुजाओं
का
योग
तीसरी
भुजा
से
अधिक
होता
हैं)
सम्बन्ध (1) और (2) को जोडने पर, हमने पाया
PQ + QS + PR + RS >
2PS
PQ + QR + PR >
2PS [चूकिं, QS +
SR = QR]

BD
चतुर्भुज ABCD का
विकर्ण
है, जो
कि
इसे
दो
बराबर
भागों
में
विभाजित
करता
है।
इसलिए,
क्षेत्रफल (
ADB) = क्षेत्रफल (
DCB)
A और C से
विकर्ण BD के
लम्बवत
रेखाएं
खीचिए।
AOE =
COF (शीर्षाभिमुख
कोण)
AOE और
COF में,
AEO =
CFO
(दोनो 90 डिग्री
के
कोण)
AE =
CF
(दोनो
त्रिभुजों ADB और BDC के
आधार
और
क्षेत्रफल
समान
है।)
EAO =
FCO (
AEO =
CFO =
90° और
AOE =
COF )
इसलिए ,
AOE 
COF
( ASA से)
AO
= OC (CPCT से).
अतः BD, AC को O पर
समद्विभाजित
करता
है।

बिन्दु P के माध्यम से गुजरती हुई EF || AB खींचिए।
AB || DC समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाए है।
इसलिए, EF || DC
चूंकि त्रिभुज का क्षेत्रफल, एक ही आधार पर समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल और समान समान्तर रेखाओ के बीच आधा है।
इसलिए,
क्षेत्रफल (
APB) = ½
क्षेत्रफल (समान्तर
चतुर्भुज
ABFE) ...(1)
इसी
प्रकार
क्षेत्रफल (
DPC) = ½
क्षेत्रफल (समान्तर
चतुर्भुज
DEFC)
..(2)
(1)
और
(2)
को
जोडने
पर, हमे
ज्ञात
होता
है
क्षेत्रफल (
APB) + क्षेत्रफल (
DPC) = ½
[क्षेत्रफल (समान्तर
चतुर्भुज
ABFE)
+ क्षेत्रफल (समान्तर
चतुर्भुज
DEFC)]



A.
B.
C.
D.
BAD = 650, तब x+y का मान है
A.
450
B.
900
C.
1350
D.
1800
चूंकि CDEF एक चक्रीय चतुर्भुज है, इसलिए x + y = 180°
ADC का मान है
A.
1100
B.
700
C.
400
D.
300
ABC में, हमें
ज्ञात
है
ABC =
180° - (40° + 30°) = 110° [त्रिभुज
के
कोण
योग
गुणधर्म
से]
तथा
,
ADC =
180° - 110° = 70° [चक्रीय
चतुर्भुज
के
सम्मुख
कोण
]
चूंकि,
B +
D = 180°
और
A +
C =
180° ...(1)
[चक्रीय
चतुर्भुज
के
सम्मुख
कोण]
तथा,
B +
A = 180°
और
C +
D =
180°
...(2)
(1)
और
(2)
से, हमें
ज्ञात
है
2
B +
D +
A = 2
C +
A +
D = 360°
B =
c
BOD = 1400, तब दिये गये चित्र में y का मान है
A.
B.
C.
D.
चूंकि,
BCD =
x
BOD
=
x 140° = 70° [प्रमेय से]
तथा,
BAD = 180° -
BCD
y = 180° - 70° = 110°
[चक्रीय चतुर्भुज में सम्मुख कोण संपूरक होते है।]
A.
500
B.
600
C.
700
D.
800
चूंकि,
BDC =
BAC =
50° [एक
वृत्त
के
बराबर
चाप
में
बने
कोण
]
त्रिभुज
BDC
में, हमें
ज्ञात
है
y
+ 70° + 50° = 180°
y = 60°
A.
350
B.
850
C.
1250
D.
1650
समद्विबाहु
त्रिभुज
AOB
में , हमें
ज्ञात
है
AOB =
180° - 2 x 35° = 110°.
ACB =
180° -
AOB/2 =
180° - 55° = 125°
z = 125°
A.
500
B.
600
C.
700
D.
800
प्रमेय से, हम जानते हैं कि एक चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के युग्म का योग 1800 होता है।
इसलिए, आकृति से, हमें ज्ञात है
ABD
+
ACD =
180°
100° + x = 180°
x = 80°
A.
चक्रीय
B.
एक वर्ग
C.
एक आयत
D.
एक समान्तर चतुर्भुज
यदि एक चतुर्भुज के सभी चारों शीर्ष वृत्त की परिधि पर स्थित हो, तब यह एक चक्रीय चतुर्भुज के नाम से जाना जाता है।
ABC = 920 और
FAE = 200, तब
BCD के बराबर है
A.
1080
B.
900
C.
380
D.
200
B +
D = 180°
D = 180°
-
B = 180°
- 92° = 88°
DAE =
D = 88°
FAD
= 88° + 20° = 108°
BCD =
FAD =
108°
BCD =
108°
BDO = 50°, तब
ACO है
A.
50°
B.
75°
C.
90°
D.
100°
त्रिभुज OBD में , OB = OD (त्रिज्या), इसलिए
BDO =
OBD = 50°
अब,
ACD और
ABD एक ही वृत्तखंड में है,
अर्थात,
ACD =
ABD = 50°
A.
B.
C.
D.
माना कि वृत्त की त्रिज्या x सेमी है इसलिए, AO = x सेमी
OE = OC – EC = (x – 3) सेमी
AOE में, AO2 = AE2 + OE2
x2 = 42 + (x – 3)2
x2 = 16 + x2 – 6x + 9
x2 – x2 + 6x = 16 + 9
6x = 25
x = 25/6
AOB =
90°,
BOC =
120° , तब
ABC
के
बराबर
है
A.
150°
B.
120°
C.
90°
D.
75°
केन्द्र
के
सभी
कोणों
का
योग
होता
हैं, इसलिए
AOC
+
AOB
+
BOC
= 360°
AOC
= 360° –
AOB
–
BOC
= 360° – 90° – 120° = 150°
ABC
= 75°
BCF =
80°,
CBE का
मान
है
A.
130°
B.
100°
C.
95°
D.
85°
ABC
एक
सरल
रेखा
है, इसलिए
ABE+
CBE=180°
[कोणों
के
रैखिक
युग्म]
95°+
CBE=180°
CBE=180°-95°
=85°
A.
108°
B.
72°
C.
60°
D.
36°
एक
चक्रीय
चतुर्भुज
है, इसलिए, सम्मुख
कोणों
का
योग 180° होता
है।
A +
C = 180°
2x + 3x = 180°
5x = 180
x = 36°
A. 111 सेमी
B. 112 सेमी
C. 114 सेमी
D. 144 सेमी
ΔSQR में, RS2 = QS2 + QR2 ⇒ 172 = QS2 + 82 ⇒ QS2 = 172 - 82 = 225 ⇒ QS = 15 ΔPQS में, QS2 = PQ2 + PS2 Þ 152 = PQ2 + 92 Þ PQ2 = 152 - 92 = 144 ⇒ PQ = 12 इसलिए चतुर्भुज का क्षेत्रफल = (1/2)(12 × 9) + (1/2)(8 × 15) = 114 सेमी2
A. 160
B. 155
C. 150
D. 145
यहाँ समान्तर चतुर्भुज PQRS और PQXY एक ही आधार और एक ही समान्तर के बीच पर स्थित है PQ और SX इसलिए, क्षेत्रफल (PQXY) = क्षेत्रफल (PQRS) इस प्रकार, PQXY का क्षेत्रफल = 160 सेमी2
A. 4200
B. 420
C. 42
D. 40
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार x ऊँचाई = 20 x 15 = 300 मी2
पेन्टिग के लिए कुल क्षेत्रफल = 2 x 300 = 600 मी2
पेन्टिग की कीमत है = 600 x 7 =
4200
A. 12
B. 8
C. 4
D. 2
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 48 मी2
आधार: संगत ऊँचाई = 3: 4
माना कि इसके आधार और संगत ऊँचाई की लम्बाईया क्रमशः 3x और 4x है।
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई
= 3x ×4x = 48
x = 2
इसलिए, ऊँचाई = 4x = 4 × 2 = 8 सेमी
A. 12
B. 9
C. 6
D. 3
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 48 मी2
आधार: संगत ऊँचाई = 3: 4
माना कि इसके आधार और संगत ऊँचाई की लम्बाईया क्रमशः 3x और 4x है।
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार x ऊँचाई
= 3x x 4x = 48
x = 2
इसलिए , आधार = 3x = 3 x 2 = 6 सेमी
A. 300
B. 150
C. 60
D. 30
समान्तर चतुर्भुज का एक विकर्ण इसको समान क्षेत्रफलों के दो त्रिभुजों में विभाजित करता है।
इसलिए, त्रिभुज ABD का क्षेत्रफल
30मी2 है।
त्रिभुज BCD का क्षेत्रफल = त्रिभुज ABD का क्षेत्रफल
क्षेत्रफल ( ΔBCD) = क्षेत्रफल ( ΔABD) = 30 मी 2
A. 11
B. 12
C. 121
D. 132