A. पूंजीवाद।
B. साम्यवाद।
C. फासीवाद।
D. नाजीवाद
हिटलर, 1933 से 1945 तक जर्मनी में नाजीवादी विचारधारा के एक प्रमुख नेता थे
A.
B.
C.
D.
A. जर्मनी ने आक्रमण किया।
B. इटली ने आक्रमण किया।
C. जापान ने आक्रमण किया।
D. पोलैंड ने आक्रमण किया।
अमेरीका ने जापान को कच्चे तेल की आपूर्ती देना बंद कर दिया था परन्तु वह मित्र देशों को गुप्त रूप से मदद कर रहा थे जो की जापान को अछी नहीं लगी । अमेरीका को सबक सिखाने व उसकी नौ शक्ती को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जापान ने पर्ल हार्बर पर आक्रमण किया ।
A. लायड जार्ज था ।
B. एडमिरल डोनिज था ।
C. एडोल्फ हिटलर था ।
D. मुसोलिनी था ।
वर्साय जैसी हीन संधि पर हस्ताक्षर करने के कारण वियेमार सरकार ने जनता में अपना विश्वास खो दिया । विश्व आर्थिक संकट ने जर्मनी की अर्थव्यवस्था को झकझोर के रख दिया । ऎसी परिस्थितियों में हिटलर ने जर्मनी की जनता को खोया गौरव वापस दिलाने एवं जर्मनी को विश्व में श्रेष्ठ ताकत बनाने का वादा किया । उसकी वाकशक्ति एवं आक्रामक तेवरों ने जनता को उसका प्रशंसक बना दिया जिससे उसे जर्मनी का अधिनायक बनाने में सहयोग मिला ।
A. वर्साय की संधि थी ।
B. तुष्टिकरण की नीति थी ।
C. जापान का साम्राज्यवाद था ।
D. राष्ट्रसंघ की विफलता थी ।
जर्मनी में नाज़ीवाद पनपने की सबसे बड़ी वजह वर्साय की संधि थी । वर्साय की संधि के अनुसार जर्मनी के कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्र उससे ले लिए गए थे । जर्मनी को प्रथम विश्वयुध का दोषी मन कर उस पर क्षतिपूर्ति के लिए हर्जाना लगा दिया गया जो की उसके लिए दे पाना बहुत ही मुश्किल हो गया था । अपने साथ हुए दुर्व्यवहार ने जर्मनी को बदला लेने के लिए प्रेरित किया ।
अधिकांश जर्मन लोगों ने न केवल इस हार के लिए बल्कि वर्साय में हुए इस अपमान के लिए भी वाइमर गणराज्य को ही जिम्मेदार ठहराया था।
1914 में ऑस्ट्रियाई साम्राज्य ने जर्मनी के साथ मिलकर प्रथम विश्व युद्ध लड़ा था।
वीमर गणराज्य को शुरुआत में जिन दो मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था वो थीं-
1. बोल्शेविक द्वारा समर्थित साम्यवादियों ने देश की अस्थिरता का लाभ उठा क्रांतियां की ।
2. वाइमर गणराज्य के समर्थकों में मुख्य रूप से समाजवादी, कैथोलिक और डेमोक्रेट खेमे के लोग थे। रूढि़वादी/पुरातनपंथी राष्ट्रवादी मिथकों की आड़ में उन्हें तरह-तरह के हमलों का निशाना बनाया जाने लगा।
1. वीमर गणराज्य ने जर्मनी की मौद्रिक प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए रेनटेनमार्क नामक एक नई मुद्रा शुरू की।
2 1924 में, जर्मनी और उसके सहयोगी दलों ने युद्ध क्षति पूर्ति भुगतान की एक नई पद्धति पर समझौता किया और फ्रांसीसी सेना से रूर क्षेत्र को मुक्त करा लिया।
हिटलर के प्रचार मंत्री का नाम गोबेल्स था । उसके पूरे परिवार ने अप्रैल 1945 में बर्लिन बंकर में सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली।
नस्लीय रूप से अवांछित, बच्चों को धारण करने वाली, महिलाओं को दण्डित किया जाता था ।नस्लीय रूप से वांछित, बच्चों को धारण करने वाली, महिलाओं को पुरस्कृत किया जाता था । कई बच्चे उत्त्पन्न करने हेतु महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए, सम्मान पदक से सम्मानित किया जाता था :
चार बच्चों के लिए कांस्य पदक ।छह बच्चों के लिए रजत।
आठ या उससे अधिक बच्चों को उत्त्पन्न करने पर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाता था।
औपनिवेशिक शासन के दौरान वयोवृद्ध और योद्धाओं के बीच आयु के आधार पर व्याप्त परंपरागत अंतर बाधित हो गया था। अमीर और गरीब चरवाहों के बीच एक नया विभेद विकसित हो गया था।
रैका का एक समूह मारू रैका के रूप में जाना जाता था और वे ऊंटों के झुंड को चराया करते थे।
गद्दी चरवाहे झाड़ी वन में अपनी भेड़ों को चराते हुए, शिवालिक श्रृंखला की पहाड़ियों की तलहटी में उनकी सर्दियाँ व्यतीत करते हैं। अप्रैल से, वे उत्तर की ओर चले जाते हैं और लाहुल और स्पीति में अपनी गर्मियाँ व्यतीत करते हैं।
गढ़वाल और कुमायूं (उत्तरांचल) के गिरिपीठ की तलहटी में सूखे वन क्षेत्र भाबर के रूप में जाने जाते हैं।
ऊंची पहाड़ियों और पर्वतीय क्षेत्रों में विशाल घास के मैदान अथवा चारागाह को बग्याल कहा जाता है।
खानाबदोश चरवाहे एक ही स्थान पर निवास नहीं करते हैं, बल्कि आजीविका की खोज में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र पर भटकते रहते हैं।
खानाबदोश जनजातियों द्वारा निरंतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण चारे की पुनः उगाही में और उनके अत्यधिक उपयोग को रोकने में सहायक होता है।
चरवाहा समुदाय के पास उनकी एकमात्र सम्पति उनके मवेशी होते हैं। अपने मवेशियों को चराने के क्रम में अच्छे चारागाह की तलाश में उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करना होता था।
गर्मियों में, गुर्जर चरवाहे उच्च घास के मैदान-बग्याल में चले जाते हैं और सर्दियों में वे भाबर के सूखे जंगलों में नीचे उत्तर आते हैं।
बंजारे उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं। ये खानाबदोश होते हैं और अनाज और चारा प्राप्त करने के लिए ग्रामीणों को हल, मवेशी और अन्य वस्तुओं का विनिमय करने के पक्षधर हैं ।
बंजारे चरवाहों का एक प्रसिद्ध समूह है । वे उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के गांवों में देखे जा सकते हैं।
गुर्जर चरवाहे मूल रूप से जम्मू के निवासी थे। वे 19 वीं सदी में चराई की खोज में उत्तर प्रदेश की पहाड़ियों में पहुंच गए थे। आज भी वे जम्मू-कश्मीर में बकरी और भेड़ के कुशल चरवाहे हैं।
क्षेत्रीय सीमाओं और प्रतिबंध ने पशुचारण और व्यापारिक गतिविधियों दोनों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया था।
1)मासई ने उनके अधिकाँश चारागाहों को खो दिया था। यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों ने अफ्रीका को विभिन्न उपनिवेशों में काट दिया था। सर्वोत्कृष्ट चराई भूमि को शनेः-शनेः अंग्रेज बस्तियों के निर्माण हेतु अधिग्रहित कर लिया गया था और मासई द्वारा भूमि का करीब 60 प्रतिशत खो दिया गया था और उनको एक छोटे से क्षेत्र में धकेल दिया गया था।
2) औपनिवेशिक सरकार ने उनकी गतिशीलता पर विभिन्न प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए थे। चरवाहा समूह को विशेष प्रतिबंध के अंदर रहने के लिए बाध्य किया गया था। वे विशेष आज्ञा के बिना सीमाओं से आगे नहीं जा सकते थे।
3)मासई एक निश्चित क्षेत्र में बंधे हुए थे, अतः वे सबसे अच्छी चराई भूमि से अलग कर दिए गए थे और वे एक अर्द्ध शुष्क क्षेत्र के भीतर रहने के लिए बाध्य कर दिए गए थे जहाँ वे लगातार सूखे से ग्रस्त थे।
वर्ष 1885 में, ब्रिटिश, केन्या और जर्मन तन्गान्यिका के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा की शुरूआत के साथ, मासई भूमी को आधा काट दिया गया था। सर्वोत्कृष्ट चराई भूमि को शनेः-शनेः अंग्रेज बस्तियों के निर्माण हेतु अधिग्रहित कर लिया गया था और मासई को दक्षिण केन्या और उत्तरी तंजानिया में एक छोटे से क्षेत्र में धकेल दिया गया था। मासई ने उनके पूर्व औपनिवेशिक भूमि का करीब 60 प्रतिशत खो दिया। वे अनिश्चित वर्षा और निकृष्ट चारागाह के साथ एक शुष्क क्षेत्र तक ही सीमित कर दिए गए थे।
चारागाह सन्दर्भ में छापा मारने का अर्थ पशु और पशुओं का चारा चोरी करना है। मासाईयों के लिए, मात्र पशु ही उनका धन होते थे। मासाई योद्धा अन्य चरवाहा समूहों के पशुधन पर इस तरह के छापे का आयोजन करके, अपना वर्चस्व स्थापित कर उनका पौरुष साबित करते थे। ऐसा मवेशियों की बड़ी संख्या के रूप में अधिक धन प्राप्त करने के लिए भी किया जाता था।
धांगर महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण समुदाय है। उनमें से अधिकांश गड़रिये हैं जबकि अन्य कंबल बुनकर और भैंस के चरवाहों के रूप में थे। केंद्रीय पठार अर्ध शुष्क है और धांगर बाजरा उगाते हैं जिसकी कटाई वे अक्टूबर में करते हैं।
चरवाहे मुख्य रूप से निम्नलिखित भौगोलिक क्षेत्रों में कार्य करते हैं:
1)पर्वत,
2)पठार,
3)मैदान,
4)रेगिस्तान और
5)वन।
1) रैका राजस्थान के रेगिस्तान में पाई जाने वाली जनजातियाँ हैं।
2) इस क्षेत्र में वर्षा अल्प और अनिश्चित होती है, भूमि के विशाल हिस्सों में कोई फसल विकसित नहीं की जा सकती है। कृषित भूमि पर फसल अनिश्चित और अस्थिर होती है। अतः रैका ने पशुचारणता के साथ कृषि के संयोजन को अपनाया।
3) मानसून के दौरान, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के रैका उनके पैतृक गाँव में निवास करते हैं जहाँ चरागाह उपलब्ध होता है। अक्टूबर तक जब ये चराई के मैदान शुष्क और समाप्त हो जाते हैं, तो वे अन्य चारागाह और पानी की तलाश में बाहर चले जाते हैं।
1)भारत में कुछ चरवाहों ने उनके झुंड में मवेशियों की संख्या घटा दी थी,क्योंकि इनकी अधिसंख्या को खिलाने के लिए पर्याप्त चरागाह नहीं था।
2)कुछ लोगों ने जब उनके लिए पुराने चराई क्षेत्रों में जाना संभव नहीं रहा तो नए चरागाहों की खोज की जैसे कि देश के पाकिस्तान में विभाजित होने पर रैका उनकी भेड़े चराने हेतु सिंध नहीं जा सकते थे।
3)कुछ अमीर चरवाहों ने खानाबदोश जीवन को छोड़कर भूमि खरीदना और वहां बसना शुरू कर दिया। वे स्थायी कृषक बन गए और भूमि पर खेती करने लगे, दूसरों ने अपने जीवन के स्थायित्त्व हेतु साहूकारों से पैसा उधार लेकर व्यापार करना शुरू कर दिया।
A. गांव के जंगल
B. संरक्षित वन
C. घने जंगल
D. बागान
ब्रिटिश उपनिवेशवादियों ने वनों को तीन प्रकार के वनों में वर्गीकृत किया था। संरक्षित वन ग्रामीणों को सुलभ नहीं थे।
A. बांस कृषि
B. स्थानांतरण की खेती
C. टाँगिया खेती
D. निज खेती
स्थानांतरण खेती या झूम कृषि एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में एक कृषि का परंपरागत तरीका है।
A. 1947 में
B. 1978 में
C. 1988 में
D. 1967 में
1947 में, बस्तर राज्य का कांकेर राज्य के साथ विलय कर दिया गया था, बाद में यह छत्तीसगढ़ का हिस्सा बन गया।
A. बंगाल
B. बम्बई
C. मद्रास
D. पंजाब
वन क्षेत्रों पर औपनिवेशिक वर्चस्व की प्रक्रिया में, कोरवा, कराचा और येरुकुला खानाबदोश जो मद्रास प्रेसीडेंसी में रहते थे, ने उनकी आजीविका खो दी थी।
A. जॉर्ज यूल
B. जॉर्ज शॉ
C. माइकल
D. लार्ड डलहौजी
वन संसाधनों का शोषण करने के अलावा औपनिवेशिक शासक बाघों की तरह दुर्लभ जानवरों का शिकार किया करते थे।
A. 1880
B. 1770
C. 1879
D. 1779
1770 में, कलंग ने जोआना के डच किले पर हमला करके विरोध दर्ज किया था
A. 765,000 किमी
B. 789,000 किमी
C. 345,000 किमी
D. 456,000 किमी
भारत में रेल को 1853 में प्रारम किया गया था
A. झारखंड
B. असम
C. कश्मीर
D. नीलगिरि
ब्रिटिश शासकों ने चाय बागान पर काम करने के लिए ओरोंस को भर्ती किया था।
A. वारेन हेस्टिंग्स
B. लार्ड डलहौजी
C. ई पी स्तेब्बिंग
D. ई पी थॉम्पसन
इस पुस्तक में विस्तार से औपनिवेशिक भारत में रेलवे की शुरूआत के बारे में लिखा गया था।
A. 1878 और 1927
B. 1890 और 1900
C. 1895 और 1928
D. 1943 और 1945
वन अधिनियम को 1927 में 1878 में दो बार संशोधन किया गया था।
A. 1,000
B. 2,000
C. 3,000
D. 4,000
उनके अनुयायियों में से कुछ ने अपनी जमीन पर लेट कर विरोध प्रदर्शन किया था
A. खाली
B. विशाल
C. उष्ण कटिबंधीय पेड़ो से भरा
D. न बसने योग्य
एक जगह खेती के अभाव में निर्जन है तो इसका मतलब यह नहीं है की महाद्वीप वीरान है
A. ब्राज़िल
B. क्यूबा
C. इंडोनेशिया
D. सिंगापुर
जावा इंडोनेशिया के एक चावल उत्पादक द्वीप के रूप में प्रसिद्ध है।
A. 1917
B. 1927
C. 1937
D. 1947
बस्तर छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग में स्थित है और इसकी सीमा आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और महाराष्ट्र से मिलती है
A. आंध्रप्रदेश
B. बंगाल
C. बम्बई
D. मद्रास
अल्लूरी सीता राम राजू ने आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी और विशाखापट्टनम जिलों के सीमावर्ती इलाकों में अपने अभियान को अंजाम दिया था।
A. 1864
B. 1867
C. 1868
D. 1869
ब्रंदिस जर्मनी से था। उन्हें भारतीय वनों का प्रबंधन और वन संसाधनों से अधिक लाभ प्राप्त करने के अंग्रेजों ने भारत आमंत्रित किया था।
A. स्लीपर
B. प्लंकेर्स
C. ट्रैकर्स
D. लॉग
स्लीपर पटरियों को एक साथ पकडे रहते हैं। भारत के ब्रिटिश शासन के दौरान लाखों पेड़ रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए काटे गए थे
A. असम
B. बंगाल
C. छत्तीसगढ़
D. उड़ीसा
बस्तर छत्तीसगढ़ के के सुदूर दक्षिण भाग में स्थित है
देवसारी या दंड बस्तर के गांवों की सीमा से लगे अन्य गांवों के लोगों द्वारा अदा किया जाने वाला एक छोटा सा शुल्क होता था। यह तब लगाया जाता था जब एक गाँव के लोगों को दूसरे गाँव के जंगल से थोड़ी लकड़ी चाहिए होती थी तो इसके बदले में उन्हें एक छोटा शुल्क अदा करना होता था जिसे देवसारी, दंड या मान कहा जाता था।
विकासशील सभ्यताओं की मांग की पूर्ती हेतु वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई को निर्वनीकरण कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, वन संसाधनों को काटना और नष्ट करना निर्वनीकरण कहलाता है। उपनिवेशवाद की अवधि के दौरान, निर्वनीकरण ने औद्योगिक विकास के उद्देश्य से एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया।
A.
नामीबिया
B.
यूगांडा
C.
दक्षिण अफ्रीका
D.
इथियोपिया
दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका में नामीबिया के काओकोलैंड चरवाहे, परम्परगत तौर पर, काओकोलैंड और पास में स्तिथ ओवंबोलैंड के बीच घूमते थे| वे आसपास के बाज़ारों में खाल, गोश्त और अन्य वस्तुएं बेचते थे|
A.
10,000-11,000 फुट की ऊँचाई
B.
11,000-12,000 फुट की ऊँचाई
C.
9,000-10,000 फुट की ऊँचाई
D.
8,000-9,000 फुट की ऊँचाई
इन मंडपों का निर्माण 10,000-11,000 फुट की ऊँचाई पर किया जाता है| भैंस इससे ऊपर नहीं चढ़ सकते|
A. असम
B. बंगाल
C. कर्णाटक
D. हिमालय
किन्नौरी के आलावा, यहाँ गद्दी, गुज्जर, इत्यादि जैसे समुदाय भी इस क्षेत्र में रहते थे|
A. राजस्थान
B. पंजाब
C. कश्मीर
D. गुजरात
हर साल, राजस्थान में स्तिथ पुष्कर में, एक ऊँट मेला का आयोजन होता है|
A. कच्छ का रण
B. महाराष्ट्र
C. कश्मीर की घाटी
D. राजस्थान
मलधारी गुजरात में, कच्छ के रण के क्षेत्र में रहते है|
A. इन समुदायों को बाज़ारों में आने हेतु परमिट की ज़रूरत थी
B. श्वेत उपनिवेशवादी उन्हें खतरनाक मानते थे
C. वे निपुण व्यापारी थे
D. सब लोग उन्हें नापसंद करते थे
उपनिवेशवादीयों ने इन समुदायों का उपयोग खानें, सड़कें और इमारतों का निर्माण करने हेतु किया| परंतु, उन्हें वहां बसने या घर बनाने की अनुमति नहीं थी|
A. मासाई, औपनिवेशिक शासन के कारण, अपनी चरागाह भूमि खो दी
B. मासाई को, सम्रज्यवादों द्वारा, दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा
C. उनकी चरागाह भूमि का आधा हिस्सा सम्रज्यवादों द्वारा छीन लिया गया, और वे छोटे क्षेत्रों तक सिमित रहे
D. उन्हें अपनी चरागाह भूमि से बेकब्ज़ा किया गया
अंग्रेजों और जर्मनी के बीच युद्ध, जो पूर्वी अफ्रीका पाने हेतु था, के कारण, अंतराह्त्रिया सरहदें दोबारा बनायी गयी| इससे मासाई को ऐसे क्षेत्रों में सिमित रखा, जहाँ न वर्षा, न चरागाह पर्याप्त थी| इससे, उनके जानवर, अधिक संख्या में मरे गए|
A. जन्म
B. भाग्य
C. अधिकार
D. पद
अंग्रेजों को यायावर जनजातियों पर भरोसा नहीं था| उन्हें अपराधी घोषित किया गया और उनके संकलन को सिमित कर दिया गया|
A.
चरवाही टैक्स
B. पास या परमिट टैक्स
C. चरने वाले एक-एक जानवर पर टैक्स
D. भू-राजस्व
चरने वाले एक-एक जानवर पर टैक्स ने चरवाहों के दुखों को बढाया| कई गरीब चरवाहों ने अपने मवेशी बेचकर, अन्य पेशे अपनाये|
A.
आरक्षित वनों में वे प्रवेश नहीं कर सकते थे
B.
औपनिवेशिक अधिकारी ने उन्हें वनों में प्रवेश करने नहीं दिया
C.
संरक्षित वनों को छोड़कर, इन नियमों द्वारा चरवाहों को अन्य स्थलों में चरागाहों हेतु जाने का परम्परगत अधिकार छीन लिया गया
D.
उन्हें पास दिए जाते थे
पास देने की प्रणाली के कारण, चरवाहों के संकलन पर सिमित हो गयी| वे अपने मवेशियों के साथ स्वतंत्रतापूर्वक नहीं घूम सकते थे| पर्याप्त चारा के अभाव का मवेशियों पर बुरा असर पड़ा|
A. उनकी चरागाह भूमि में बढ़त हुई
B. उनके संचलन में निरंतर बढ़त हुई
C. औपनिवेशिक सरकार ने उनके द्वारा चरागाह, जंगल और कृषक भूमि का उपयोग करने पर प्रतिबन्ध लगाया
D. उन्हें सरकारी सुरक्षा मिलती थी
औपनिवेशिक अधिनियमों ने चरवाहों के जंगलों और चरागाहों में संचलन को रोका| इसके आलावा, चरवाहों के कुछ अधिकारों को भी उनसे छीना गया|
A. चारागाह की तलाश में घूमना
B. लम्बी दूरियों तक चलना
C.
वास्तु-विनिमय
D. लोगों के बीच संदेशवाहक
बंजारे एक यायावर समुदाय थे, जो उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान व मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में घूमते थे|
A.
मैसूर के गोल्ला
B.
हिमाचल प्रदेश के गद्दी चरवाहे
C. आंध्र प्रदेश के बंजारा
D. महाराष्ट्र के धंगर
फ्रांसिस हैमिलटन बुकानन ने, भारत में अपने यात्राओं के दौरान, एक किताब लिखी, जिसका नाम है ‘ए जर्नी फ्रॅाम मद्रास थ्रू दि कंट्रीज़ आफ मैसूर, कनारा एण्ड मालाबार’|
A.
कोंकण क्षेत्र
B.
मालाबार क्षेत्र
C.
कोरोमंडल क्षेत्र
D.
हिमालय क्षेत्र
यहाँ के कृषक और चरवाहे, अपने-अपने अतिजीवन बचने हेतु, एक दुसरे पर निर्भर करते थे|
A.
खरीफ
B.
कुरुवाई
C.
रबी
D.
साम्बा
खरीफ फसल की कटाई पतझड़ में होती है|
A.
असम
B.
बंगाल
C.
हिमाचल प्रदेश
D.
तमिल नाडू
हिमाचल प्रदेश के गद्दी चरवाहे एक महत्वपूर्ण चारागाही समुदाय है| वे शिवालिक की निचली पहाड़ियों में अपने मवेशियों को झाड़ियों में चराते हुए जाड़ा बिताते थे। अप्रैल में, वे उत्तर की तरफ चल पड़ते और पूरी गर्मियाँ लाहौल और स्पीति में बिताते। जब र्बफ पिघलती और ऊँचे दर्रे खुल जाते तो उनमें से बहुत सारे ऊपरी पहाड़ों में स्थित घास वेफ मैदानों में जा पहुँचते थे। सितंबर तक वे दोबारा वापस चल पड़ते।
शब्द 'आरक्षित' और 'संरक्षित' वन को औपनिवेशिक भारत के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा गढ़ा गया था।'आरक्षित' वन वो थे जिनका चरवाहों द्वारा उपयोग में लेना पूर्ण रूप से वर्जित कर दिया गया था। असल में, इन वनों में देवदार या साल, जैसे व्यावसायिक रूप से मूल्यवान लकड़ी का उत्पादन होता था जो देगी औपनिवेशिक राज्य के राजस्व में वृद्धि करते थे। अन्य सभी वनों को 'संरक्षित' वन के रूप में वर्गीकृत किया गया था जहाँ चरवाहों को प्रथागत चराई का अधिकार दिया गया था। हालांकि, यहां भी उनकी गतिविधियों को कड़ाई के साथ प्रतिबंधित किया गया था।
खानाबदोश जनजातियों को अपने मवेशियों के लिए चारागाह की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमना पड़ता था।
नूर्नबर्ग ट्रिब्यूनल ने मात्र ग्यारह प्रमुख नाजियों को मौत की सजा सुनाई थी। अन्य कई लोगों को आजीवन कैद की सजा सुनाई गई थी।
नाज़ीवाद में एक या दो अलग अधिनियमों का समावेश नहीं था। यह विश्व और राजनीति के बारे में विचारों की एक प्रणाली एवं एक संरचना थी ।
2 मई 1945 को सोवियत सेनाओं ने बर्लिन में प्रवेश किया और हिटलर ने आत्महत्या कर ली।
जर्मनी ने 7 मई 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया और सभी शत्रुता 9 मई 1945 को यूरोप में दोपहर 12 बजे समाप्त हो गई ।
1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर जर्मनी के हमले से द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया ।
'शब्द मित्र राष्ट्रों' का अर्थ, शुरू में ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक सामूहिक शक्ति-समूह से था । 1941 में सोवियत संघ और USA इससे जुड़ गए, इन्होंने जर्मनी, इटली और जापान के नेतृत्व में 'धूरी' सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया।
नवम्बर 1918 में मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी पर विजय प्राप्त की, वाइमर गणराज्य के समर्थकों में मुख्य रूप से समाजवादी, कैथोलिक और डेमोक्रेट खेमे के लोग थे। रूढि़वादी/पुरातनपंथी राष्ट्रवादी मिथकों की आड़ में उन्हें तरह-तरह के हमलों का निशाना बनाया जाने लगा। इन लोगों को 'नवंबर अपराधी' के रूप में चिह्नित किया गया था।
मई 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया। जर्मनी ने मित्र राष्ट्रों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, उनके साथ क्या घटित होने जा रहा था से आशंकित होकर हिटलर, उसके प्रचार मंत्री गोबेल्स और उसके पूरे परिवार ने अप्रैल में बर्लिन बंकर में सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली।
1933 में हिटलर लीग ऑफ नेशंस से अलग हो गया।उसने1936 में राइनलैंड को पुनः-अधिकृत कर लिया और 1938 में जर्मनी और ऑस्ट्रिया का विलय कर लिया। उसने चेकोस्लोवाकिया से, एक जर्मन भाषी राज्य स्यूडीटनलैंड ले लिया गया । इसमें, इंग्लैंड जिसने वर्साय की संधि की शर्तों को बहुत कठोर पाया, ने हिटलर का समर्थन किया।
जर्मनी में हिटलर द्वारा सत्ता प्राप्त करने का मुख्य कारण निम्न था :
1) जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध में पराजित हो गया था। इससे हुई क्षति ने जर्मनवासियों को अपनी गरिमा पुनः स्थापित करने एवं एक अधिक स्थिर राष्ट्र का निर्माण करने की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा दी। हिटलर के वक्तृत्व कौशल ने भी इसमें प्रभावोत्पादक योगदान दिया ।
2) जर्मनी 'वर्साय की संधि' की शर्तों को बर्दाश्त नहीं कर सका था। हिटलर ने एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करने और वर्साय के अन्याय को मिटाने का वादा किया। जर्मनी के लोग किसी भी सरकार जो साम्यवाद के विरुद्ध थी के पक्ष में थे।
संधि के निम्नलिखित परिणाम हुए थे:
1) जर्मनी द्वारा उसके समूर्ण विदेशी उपनिवेश खो दिए गए थे। उसने अपनी आबादी का दसवा और अपने क्षेत्र का लगभग तेरह प्रतिशत हिस्सा खो दिया।
2) उसे अपने लोह भण्डार के पचहत्तर प्रतिशत और अपने कोयले का पच्चीस प्रतिशत भाग फ्रांस, पोलैंड, डेनमार्क और लिथुआनिया के हाथों खोना पड़ा।
3) लगभग सम्पूर्ण जर्मनी को असैनिकीकृत कर दिया गया था जिससे इसकी शक्ति का ह्वास हुआ। मुआवजे की राशि के रूप में जर्मनवासियों को छः अरब पौंड का भुगतान करना पड़ा।
एक नियमित रूप से एक पुलिस बल हरी वर्दी में तैनात रहती थी और इसे एसए या हिंसात्मक हमला करने वाला सैनिकों द्वारा समर्थन प्राप्त था। इस के अलावा, समाज गेस्टापो या राज्य ख़ुफ़िया पुलिस, एस एस (सुरक्षा दस्तों), आपराधिक पुलिस और सुरक्षा सेवा (एसडी)द्वारा नियंत्रित किया जाता था। इन संगठित बलों ने नाजी को एक खौफनाक प्रतिष्ठा दिलाई।
3 मार्च 1933 को प्रसिद्ध सक्षम अधिनियम पारित किया गया था। इस अधिनियम ने जर्मनी में तानाशाह की स्थापना की। इसने हिटलर को सर्वेसर्वा रूप से शासन करने और संसद को किनारे करने की शक्ति दे दी। नाजी पार्टी का सर्वोच्च शासन स्थापित हो गया। सभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया । राज्य का, अर्थव्यवस्था, सेना, मीडिया और न्यायपालिका पर पूरा अधिकार था।
नाजी जर्मनी में, महिलाएं पुरुषों से बिल्कुल भिन्न थी।
1 )लड़कों को मन से, आक्रामक, मर्दाना और कठोर हृदय का होने की शिक्षा दी जाती थी। लड़कियों को अच्छी मां बनने के लिए कहा जाता था।
2 )महिलाओं से शुद्ध रक्तयुक्त आर्य जाति की उत्त्पत्ति एवं की जाति की शुद्धता एवं पवित्रता बनाए रखने की आशा की जाती थी।
3 )उन्हें स्वयं को यहूदियों से दूरी बनाए रखना होता था, एवं अपने बच्चों को नाजी मूल्यों की शिक्षा प्रदान करनी होती थी।
1929 के आर्थिक संकट जिसे महान आर्थिक मंदी के रूप में भी जाना जाता है, ने जर्मनी के लोगों में गहरी बेचैनी और डर पैदा कर दिया था।
1) जैसे-जैसे मुद्रा का अवमूल्यन होता जा रहा था मध्यवर्ग, खासतौर से वेतनभोगी कर्मचारी और पेंशनधारियों की बचत भी सिकुड़ती जा रही थी।
2 ) कारोबार ठप्प हो जाने से छोटे-मोटे व्यवसायी, स्वरोजगार में लगे लोग और खुदरा व्यापारियों की हालत भी खराब होती जा रही थी।
3) किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि उत्पादों की कीमतों में बेहिसाब गिरावट की वजह से परेशान था। गरीब लोग एक कठिन दौर से गुजर रहे थे क्योंकि वे उनकी पोषण सम्बन्धी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में असमर्थ थे।
4) अब सिर्फ संगठित मजदूर ही थे जिनकी हिम्मत टूटी नहीं थी। लेकिन बेरोजगारों की बढ़ती फ़ौज उनकी मोल-भाव क्षमता को भी चोट पहुँचा रही थी।
राजनीतिक स्तर पर वाइमर गणराज्य एक कमजोर गणराज्य था। वाइमर संविधान में कुछ ऐसी कमियाँ थीं जिनकी वजह से गणराज्य कभी भी अस्थिरता और तानाशाही का शिकार बन सकता था। इनमें से एक कमी आनुपातिक प्रतिनिधित्व से संबंधित थी। इस प्रावधान की वजह से किसी एक पार्टी को बहुमत मिलना लगभग नामुमकिन बन गया था। हर बार गठबंधन सरकार सत्ता में आ रही थी। राष्ट्रपति को आपातकाल लागू करने, नागरिक अधिकार रद्द करने और अध्यादेशों के जरिए शासन चलाने का अधिकार दिया गया था। इससे लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था में लोगों का विश्वास खत्म होने लगा क्योंकि वह उनके लिए कोई समाधान नहीं खोज पा रही थी।1929-1932 के दौरान आर्थिक मंदी ने वाइमर गणराज्य के लिए संकट और बढ़ा दिया था क्योंकि जर्मनी के औद्योगिक उत्पादन में अत्यधिक गिरावट आई । लोगों के पास एक उद्धारकर्ता खोजने के अलावा कोई अन्य विकल्प शेष नहीं रह गया था ।
प्रथम विश्व युद्ध के अंत में साम्राज्यवादी जर्मनी मित्र सेनाओं के हाथों पराजित हो गया था और यह वर्साय की कठोर और अपमानजनक संधि को स्वीकार करने के लिए बाध्य किया गया था। संधि में जर्मनी द्वारा उसके समूर्ण विदेशी उपनिवेश खो देना सुनिश्चित किया गया था। उसने अपनी आबादी के दसवें और अपने क्षेत्र का लगभग तेरह प्रतिशत हिस्सा खो दिया। प्राकृतिक संसाधनों के सन्दर्भ में, उसे अपने लोह भण्डार के पचहत्तर प्रतिशत और अपने कोयले के पच्चीस प्रतिशत भाग का फ्रांस, पोलैंड, डेनमार्क और लिथुआनिया के साथ बंटवारा करना पड़ा। सम्पूर्ण देश को पूरी तरह से निःशक्त करने के लिए उसे असैनिकीकृत कर दिया गया था। मित्र देशों की सेनाओं ने पंद्रह वर्ष की अवधि के लिए राइनलैंड कब्जा कर लिया। मुआवजे की राशि के रूप में जर्मनवासियों को 6000000000 पॉन्ड्स का भुगतान करना पड़ा। जर्मन लोगों ने जर्मनी के गौरव को पुनः प्राप्त करने और संधि को निष्क्रिय करने हेतु किसी की प्रतीक्षा करना शुरू कर दिया,जैसा कि हिटलर ने किया।
A. जिले का केंद्र
B. गांवों के समूह
C. देवताओं के समूह
D. खेती की विधि
परगना, भारतीय उपमहाद्वीप में एक प्रशासनिक इकाई थी।
A. पुणे
B. देहरादून
C. भोपाल
D. कानपुर
देहरादून में इंपीरियल वन स्कूल को पहले वानिकी स्कूल के रूप में वर्ष 1906 में स्थापितं किया गया था।
औपनिवेशिक सरकार एक आवासित जनसँख्या पर शासन करना चाहती थी और खानाबदोश लोगों को आपराधिक समझा जाता था क्योंकि उन्हें नियंत्रित करना और भी अधिक कठिन माना जाता था।
1)औपनिवेशिक सरकार द्वारा क्रिमिनल ट्राइब एक्ट 1871 में पारित किया गया था। इस अधिनियम के द्वारा कारीगरों, व्यापारियों और चरवाहों के कई समुदायों को आपराधिक जनजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया था ।
2)उन्हें प्रकृति और जन्म से अपराधी कहा गया था । एक बार जब यह अधिनियम अस्तित्व में आ गया तो इन समुदायों से अधिसूचित ग्रामीण बस्तियों में रहने की आशा की गई थी।
3)उन्हें आज्ञा के बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। गांव की पुलिस उन पर एक सतत नजर रखती थी ।
भू-राजस्व औपनिवेशिक सरकार के वित्त का मुख्य स्रोत था। कृषि के विस्तार से यह अपने राजस्व संग्रह में वृद्धि कर सकती थी। यह और अधिक जूट, कपास, गेहूं और अन्य कृषि उपज प्राप्त कर सकती थी जिसकी इंग्लैंड में मांग थी। अकृषित भूमि औपनिवेशिक अधिकारियों को अनुत्पादक लगी।इससे न तो राजस्व और न ही कृषि उपज का उत्पादन हो रहा था, इसे एक निरर्थक भूमि के रूप में देखा गया, जिसे कृषि-अन्तर्गत लाए जाने की आवश्यकता थी।
1)औपनिवेशिक सरकार ने 19 वीं सदी के मध्य में चराई कर लागू किया था। यह उसके राजस्व में वृद्धि करने के लिए किया गया था।
2)एक चराई क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए, एक पशु चरवाहे को प्रवेश आज्ञा दिखानी पड़ती थी और प्रत्येक पशु पर कर का भुगतान करना पड़ता । उसके पास जितने मवेशी होते थे उसकी संख्या और उसके द्वारा भुगतान की गई कर की राशि प्रवेश पात्र में दर्ज कर दी जाती थी।
3)1850 से1880 के मध्य के दशक में कर संग्रह करने के अधिकार को ठेकेदारों को नीलाम कर दिया जाता था, इन ठेकेदारों ने चरवाहों से अधिक कर वसूलने का प्रयत्न किया।
चरवाहों का जीवन और आंदोलन औपनिवेशिक शासन के अधीन बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। उनके चारागाह क्षेत्र संकुचित हो गए थे। उनके आंदोलनों को विनियमित और प्रतिबंधित कर दिया गया था और राजस्व जिसका उन्हें भुगतान करना पड़ता था उसमें वृद्धि कर दी गई थी। उनके कृषि भण्डार का क्षय हो गया था एवं व्यापार और शिल्प पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा था ।
आधुनिकीकरण के प्रतिकूल प्रभावों के बावजूद, दुनिया भर में चरवाहों ने कैसे स्वयं को नए समय के अनुकूल ढालना जारी रखा है। उन्होंने अपनी वार्षिक गति का मार्ग बदल दिया, अपने मवेशियों की संख्या कम कर दी और उनके मवेशियों की चराई के लिए नए क्षेत्रों में प्रवेश करने के अधिकार पर बल दिया है। वे सरकार पर राहत, सब्सिडी और अन्य प्रकार के समर्थन प्राप्त करने के लिए सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने में सफल रहे हैं, और वन्य और जल संसाधनों के प्रबंधन में उनके अधिकार की भी मांग की है।
आधुनिक विश्व अंततः यह स्वीकार कर चूका है कि चरवाहे अतीत के अवशेष नहीं हैं और उनके पास सह अस्तित्व के लिए तथाकथित सभ्य दुनिया के अन्य मनुष्य जितना स्थान है। पर्यावरणविदों और अर्थशास्त्रियों ने भी तेजी से पशुचारण ख़ानाबदोशी को जीवन का एक रूप स्वीकार किया है जिन्हें वे दुनिया के कई पहाड़ी और शुष्क क्षेत्रों के लिए पूरी तरह से अनुकूल मानते हैं।