A.
केवल
ग्रामीण क्षेत्रों
के लिए है
B. सभी ग्रामीणों के लिए है
C. केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए है
D. केवल ग्रामीण युवाओं के लिए है
राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम को 2004 में देश के 150 सबसे पिछड़े ग्रामीण जिलों में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में रोजगार के माध्यम से खाद्य सुरक्षा बढ़ाना और आंशिक रूप से वस्तु और नकद के रूप में मजदूरी का भुगतान करना है।
A.
ब्रिटिश
शासन
B. गलत आर्थिक नीतियां
C. जनसंख्या की तेज वृद्धि दर
D. बेरोजगारी की तेज वृद्धि दर
ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन के दौरान आर्थिक विकास का निम्न स्तर था। ब्रिटिश सरकार की नीतियों ने भारत की पारंपरिक हस्तशिल्पकारी को नष्ट कर दिया और उद्योगों के विकास को हतोत्साहित कर दिया।
A.
महात्मा
गांधी ग्रामीण
रोजगार योजना
B. अन्त्योदय अन्न योजना
C. स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना
D. प्रधानमंत्री रोजगार योजना
प्रधानमंत्री रोजगार योजना को सन 1993 में ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्व रोजगार के अवसरों का निर्माण करने के लिए शुरू किया गया था।
A.
उचित
क्रियान्वयन
का अभाव
B. उचित क्रियान्वयन
C. सही लक्ष्य
D. उचित निगरानी
गरीबी हटाओ योजनाओं के कम प्रभावी होने के लिए मुख्य कारणों में हैं उचित क्रियान्वय का अभाव।
A. भूमि विकास
B. भूमि सुधार
C. भुमि उत्पादन
D. भूमि वितरण
ग्रामीण क्षेत्रों में परिसम्पत्तियों के पुर्नवितरण के लिए लक्षित उपायों को भूमि सुधार के रूप में जाना जाता है जैसे जमींदारी प्रथा का उन्मूलन, जोतों का एकत्रीकरण आदि।
मनेरगा एक मजदूर को एक वर्ष में कम से कम 100 दिन काम की गांरटी देता है।
स्वतंत्र भारत के सामने निर्धनता उन्मूलन एक सबसे बाध्यकारी चुनौती है।
भारत में निर्धनता अनुपात में महत्वपूर्ण रूप से कमी आई है और 1973 में 55% की तुलना में 1993 में यह 36% तक रह गयी है। 2013-14 के आर्थिक सर्वे के अनुसार यह 2011-12 में 21.9% तक रह गयी है।
निर्धनता के प्रति असुरक्षा एक माप है जो कुछ समुदायों या व्यक्तियों के निर्धन बने रहने या आने वाले समय में निर्धन होने की आशंका व्यक्त करता है। इसका निर्धारण परिसंपत्तियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरी के अवसरों के रूप में जीविका खोजने के लिए विभिन समुदायों के पास उपलब्ध विकल्पों के आधार पर होता है।
NSSO का पूरा नाम है नेशनल सैम्पल सर्वे आर्गेनाईजेशन अर्थात राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन ।
अंतर्राष्ट्रीय निर्धनता रेखा विश्व में निर्धनों की पहचान करने के लिए विश्व बैंक द्वारा प्रयुक्त की गयी एक काल्पनिक निर्धनता रेखा है। 2008 से यह प्रतिदिन $1.25 थी| विश्व बैंक के अनुसार प्रतिदिन $1.25 से कम पर जीवन निर्वाह करने वाले लोग निर्धन कहलाते हैं |
निर्धनता से जुड़ी हुई 4 मुख्य समस्याएं हैं:
1. भूमि रहित किसान (भूमिहीनता)
2. बेरोज़गारी
3. निरक्षरता
4. खराब स्वास्थ्य/कुपोषण
यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें निर्धनों को निर्धनों के ही आसपास रहने के लिए बाध्य किया जाता है और उन्हें किसी भी तरह के सामाजिक लाभ नहीं मिलते हैं। सामाजिक अपवर्जन के अंतर्गत कुछ विशेष समूहों को समाज की गतिविधियों, सुविधाओं, लाभों और अवसरों से वंचित कर दिया जाता है।
श्रमिकों को भुगतान नकद में या वस्तु (जैसे अनाज के रूप में) किया जाता है।
श्रमिकों को दैनिक या वार्षिक आधार पर या विशेष कृषि कार्य के लिए काम पर रखा जाता है।
खेती की आधुनिक विधि में शामिल हैं:
उद्यमी व्यवसाय उद्योग की योजनाएं बनाने, संगठन करने और प्रबंध करने वाला एक व्यक्ति होता है। वह अनिश्चितताओं को वहन करता है और व्यापार के जोखिम को उठाता है।
पालमपुर गांव में मुख्य व्यवसायिक क्रिया कृषि है। पालमपुर गांव की लगभग 75 प्रतिशत जनंसख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
खेतीहर श्रमिकों को कृषि श्रमिक भी कहा जाता है। वे दूसरों के खेतों पर काम करते है। वे या तो भूमिहीन परिवारों से आते है या भूमि के बहुत छोटे टुकड़े पर खेती करने वाले परिवारों से आते हैं।
बहुविध फसल प्रणाली- एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को बहुविध फसल प्रणाली कहते है। यह भूमि के किसी एक टुकड़े में उपज बढ़ाने की सबसे सामान्य प्रणाली है।
पालमपुर गांव में बरसात के मौसम (खरीफ) में ज्वार और बाजरा उगाते है। एक रबी फसल गेहूं को सर्दी के मौसम में उगाया जाता है। भूमि के एक भाग में गन्ने की खेती की जाती है, जिसकी वर्ष में एक बार कटाई होती है।
क) भौतिक पूंजीः उपकरण, मशीनें, भवन आदि भौतिक पूंजी के उदाहरण हैं। इनका बहुत वर्षों तक उत्पादन के लिए प्रयोग किया जा सकता है इसलिए इन्हें स्थिर पूंजी भी कहा जाता है।
ख) कार्यशील पूंजीः नगद मुद्रा और कच्चे माल को कार्यशील पूंजी के रूप में जाना जाता है।
कृषि भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के निम्नलिखित तरीकें हैं-
1) बहुविध फसल प्रणाली
2) आधुनिक कृषि विधियों का प्रयोग
हरित क्रांति के तीन घटक निम्नलिखित हैं-
1) अधिक उपज वाले बीजों की किस्मों का उपयोग।
2) रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का प्रयोग।
3) सिंचाई के लिए नलकूपों का उपयोग।
पालमपुर गांव में बिजली जल्दी ही शुरू हो गयी थी। इसका सिंचाई व्यवस्था पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा था। बिजली से चलने वाले नलकूपों की मदद से किसान अधिक प्रभावी ढंग से भूमि के बड़े-बड़े क्षेत्रों की सिंचाई करने में सक्षम हो गये।
उत्पादन के चार कारक हैं-
1) भूमि
2) श्रम
3) पूंजी
4) उद्यमी
हरित क्रांति से जुड़े नकारात्मक प्रभाव इस प्रकार हैं:
उत्पादन के कारक उत्पादन प्रक्रिया के अभिन्न अंग हैं। श्रमिक बिना औजारों या मशीनों (पूँजी) के काम नहीं कर सकते हैं। कच्चे माल के बिना कुछ भी उत्पादित नहीं किया जा सकता है। मशीनों और कच्चे माल का उपयोग श्रम के बिना नहीं किया जा सकता है। भूमि, श्रम और पूँजी को संयोजित करने के लिए उद्यमी की जरूरत पड़ती है।
हरित क्रांति के सकारात्मक प्रभाव इस प्रकार हैं:
अधिक से अधिक गैर कृषि गतिविधियां शुरू कराने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए-
1) सरकार को लोगों को सस्ती दरों पर ऋण देने चाहिए।
2) सरकार को अधिक से अधिक बुनियादी सुविधाओं का सृजन करना चाहिए।
3) सरकार को अधिक से अधिक प्रशिक्षण केन्द्रों की शुरूआत करनी चाहिए।
गैर सरकारी संगठन भी लोगों की मदद कर सकते है।
खेतीहर श्रमिकों की निम्नलिखित समस्याएं हैं-
1) उन्हें कम मजदूरी का भुगतान किया जाता है।
2) भूमि पर उगाई गई फसल पर उनका कोई अधिकार नहीं होता है।
3) उन्हें केवल कुछ महीनों के लिए रोजगार मिलता है।
4) कृषि के मशीनीकरण के कारण उनके लिए रोजगार के अवसर कम हो गये है।
पारंपरिक बीज-
1) पारंपरिक बीज कम उपज देते हैं।
2) इनको सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है।
3) किसान गाय का गोबर या दूसरे प्राकृतिक खाद का प्रयोग करते है।
4) इनके कारण पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है।
उच्च उपज की किस्मों वाले बीज-
1) उच्च उपज की किस्मों वाले बीज अधिक उपज देते है।
2) इनको सिंचाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
3) इनके लिए रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों की आवश्कयता होती है।
4) इनके कारण पर्यावरण की काफी क्षति होती है।
पालमपुर गांव में भूमि असमान रूप से वितरित है। यह निम्नलिखित आंकड़ों से स्पष्ट होता है-
1. लगभग 150 परिवारों के पास खेती के लिए कोई भूमि नहीं है, जो अधिकांशत दलित है।
2. लगभग 240 परिवार 2 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे भूमि के टुकड़ों पर खेती करते हैं।
3. मझोले और बड़े किसानों के लगभग 60 परिवार 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करते हैं।
4. कुछ किसानों के पास 10 हेक्टेयर या इससे अधिक खेती भूमि है।
A.
प्राथमिक
B. तृतीयक
C. द्वितीयक
D. विनिर्माण
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्रक में सबसे अधिक श्रमिक नियुक्त हैं| अतः वह प्राथमिक क्षेत्रक है जिसमें सबसे अधिक श्रमिक नियुक्त हैं|
‘संसाधन के रूप में लोग’ को देश के कार्यरत लोगों के मौजूदा उत्पादक कौशलता तथा क्षमता के रूप में जाना जाता है|
यह समय के बिंदु पर एक राष्ट्र के लोगों में निहित कौशल, ज्ञान और विशेषज्ञता के स्टॉक को संदर्भित करती है।
इसमें 6 से 14 वर्ष के आयु वर्ग में कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के छात्रों को शामिल किया जाता है।
परंपरागत हस्तशिल्प उद्योग, विशेष रूप से ग्रामीण कारीगरों और गैर कृषि श्रमिकों के लिए रोजगार के मुख्य स्रोत थे। बहुत से ग्रामीण परंपरागत शिल्प ब्रिटिश शासकों की प्रतिकूल नीति और मशीनों से बनी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा के कारण बर्बाद हो गये। परिणामस्वरूप बहुत से मजदूर बेरोजगार हो गये।
इसमें 14 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में कक्षा 8 से कक्षा 12 तक के छात्रों को शामिल किया जाता है।
बेरोजगारी
का एक
अर्थव्यवस्था
के समग्र विकास
पर हानिकारक
प्रभाव
पड़ता है। यह
अर्थव्यवस्था
में मंदी का
सूचक है। यह
ऐसे
संसाधनों को
नष्ट करने के
लिए उत्तरदायी
है जो
लाभप्रद
रोजगार में
लगेगे।
इस
प्रकार, बेरोजगारी
में वृद्धि
धीमे
आर्थिक
विकास
का संकेत
देती
है।
प्रच्छन्न बेरोजगारी एक ऐसी स्थिति है जिसमें आवश्यकता से अधिक संख्या में लोग काम में लगे हुए होते है और यदि श्रमिकों की अतिरिक्त संख्या को हटा दिया जाए, तो उत्पादकता प्रभावित नहीं होती है या उत्पादकता उतनी ही बनी रहती है।
मौसमी बेरोजगारी तब होती है जब लोग साल के कुछ महीनों के दौरान रोजगार खोजने के लिए सक्षम नहीं होते है। कृषि पर निर्भर लोगों को सामान्यत इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। बीज बोने के बाद विशिष्ट मौसम में किसान कुछ नहीं करते है। ऐसे समय पर उन्हें मौसमी बेरोजगार कहा जाता है।
व्यवसायिक प्रशिक्षण से अभिप्राय उस शिक्षा से है जो विभिन्न स्तरों पर नौकरी या व्यवसाय के लिए प्रशिक्षुओं को तैयार करता है। उदाहरण के लिए- प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, व्यापार और वाणिज्य आदि क्षेत्र में प्रशिक्षण।
ये दो संस्थाएं हैं:
1. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी)
2. विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी)
जीवन प्रत्याशा एक व्यक्ति के जीवित रहने की एक औसत वर्षों की संख्या को दर्शाती है। भारत में यह लगभग 64 वर्ष है।
शिशु मृत्यु दर से अभिप्राय एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु की संख्या से है।
मृत्यु दर से अभिप्राय एक विशेष अवधि में प्रति एक हजार व्यक्तियों के पीछे मरने वाले लोगों की संख्या से है।
जन्म दर से अभिप्राय एक विशेष अवधि में प्रति एक हजार व्यक्तियों के पीछे जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या से है।
गैर-बाज़ार क्रियाएँ वह गतिविधियाँ हैं जिसमे स्वयं उपभोग के लिए उत्पादन सम्मिलित होता है| उदाहरण के लिए: स्वयं के उपभोग के लिए खेती, स्वयं के परिवार के लिए झोपड़ी का निर्माण, आदि|
बाज़ार क्रियाएँ वह क्रियाएँ होती हैं जिसमें क्रियाएँ करने वालों को उनका पारिश्रमिक या विवरणियां प्राप्त होता हैं (लाभ, आय, वेतन, किराए आदि के रूप में)|
उदाहरण के लिए: बाज़ार में फल बेचना, कार्यालय में कार्य करना आदि|
भारत में बेरोजगारी की समस्या की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है:
1. बेरोजगारी की समस्या ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में बहुत अधिक है।
2. महिलाओं के लिए बेरोजगारी की दर पुरूषों की तुलना में बहुत अधिक है।
3. महिलाओं के मामले में अल्प रोजगार अधिक है।
4. शिक्षित बेरोजगारों की संख्या बहुत अधिक है।
शहरी क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगार एक सामान्य परिघटना है। मैट्रिक, स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री वाले बहुत से युवा नौकरी खोजन के लिए सक्षम नहीं है।
इसके लिए निम्नलिखित कारण है:
1. भारत में रोजगार के अवसरों में वृद्धि उस दर से नहीं हुयी है जिस दर से जनसंख्या में हुयी है।
2. शिक्षित लोग केवल एक विशेष प्रकार की नौकरी चाहते है। वे निम्न दर्जे की नौकरी स्वीकार करने के बजाय बिना नौकरी के रहना पसंद करते हैं।
इस प्रकार, हम देखते है कि भारत में बहुत से शिक्षित बेरोजगार है।
निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर शिक्षित बेरोजगारी की समस्या को हल किया जाना चाहिए:
1. अधिक से अधिक तकनीकी शिक्षा दी जानी चाहिए।
2. शिक्षा व्यवसायिक होनी चाहिए। उदाहरण के लिए,
3. शिक्षा के द्वारा आत्मनिर्भर और उद्यमी बनने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे उनके लिए नये रास्ते खोलने चाहिए। शिक्षा की उचित ढंग से योजना बनाने और संवेदनशीलता के साथ उनके क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
A. यूगोस्लाविया
B. पोलैंड
C.
जर्मनी
D. इटली
A. स्वतंत्रता फार्म संघ और यूनियन
B. व्यापार संघों पर प्रतिबंध
C. देश का एक हिस्से में निवास
D. पेशे का अभ्यास
A. सामाजिक व्यवहार
B. समान अवसर
C. गैर भेदभाव
D. राजनीतिक कदाचार
A. अस्पृश्यता की प्रथा
B. धार्मिक स्वतंत्रता
C. धन का संचय
D. राजनीतिक असमान अधिकार
अस्पृश्यता की प्रथा सामाजिक भेदभाव का चर्म रूप है। सरकार धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी नागरिक के खिलाफ भेदभाव नहीं किया जाता है।
A. कोई भी आधिकारिक धर्म नहीं है।
B. एक आधिकारिक धर्म है।
C. पुजारी द्वारा शासित है।
D. कठोर धार्मिक विश्वासों से संचालित है।
A. स्वतंत्रता का अधिकार
B. बराबरी का अधिकार
C. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
D. संवैधानिक अधिकार का उपचार
A. लोकतंत्र
B. विदेशियों
C. हमारे जीवन
D. कैदियों
हमारे जीवन के लिए मौलिक अधिकार को एक विशेष अधिकार के रूप में दर्जा दिया जाता है।
A. छह मौलिक अधिकार
B. पांच मौलिक अधिकार
C. चार मौलिक अधिकार
D. सात मौलिक अधिकार
A. गणतंत्रवादी सरकार
B. वंशानुगत राजा
C. अर्द्ध राष्ट्रपति सरकार
D. बहुलवादी सरकार
लोगों के चुनाव और अपने शासकों को बदलने में कोई भूमिका नहीं निभाते है। नागरिक राजनीतिक दल या राजनीतिक संगठन फार्म नहीं भर सकते है। मीडिया न तो सम्राट पसंद कर सकती है और न ही रिपोर्ट कर सकती हैं।
A. भीड़
B. विधानसभा
C. वाहन
D. बिक्री और मानव की खरीद
यातायात बिक्री और मनुष्य अनैतिक उद्देश्यों के लिए आमतौर पर महिलाओं से खरीदता है। संविधान अवैध रूप से घोषित करता है।
A. समानता का अधिकार
B. शोषण के खिलाफ अधिकार
C. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
D. स्वतंत्रता का अधिकार
हमारे मौलिक अधिकारों में समानता अधिकार का धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान, लोक नियोजन विषय में अवसर की समानता, अस्पृश्यता का उन्मूलन और आदि शीर्षकों के उन्मूलन के आधार पर भेदभाव के कानून के समक्ष समानता, निषेध आदि शामिल होते है।
A. काम करने का अधिकार
B. पर्याप्त आजीविका
C. संस्कृति की रक्षा
D. दूसरों को नुकसान
हम नागरिक के रूप में हम अपने काम की पर्याप्त आजीविका और हमारी संस्कृति के अधिकारों की रक्षा करते है, लेकिन हम दूसरों के अधिकारों का नुकसान नहीं करते है। भारतीय संविधान में नीचे है की किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाता है।
A. बराबरी अधिकार
B. संवैधानिक उपचार का अधिकार
C. धर्म अधिकार
D. सांस्कृतिक अधिकार और शैक्षणिक आजादी
मौलिक अधिकारों के मदद व अदालतों के माध्यम से संवैधानिक उपचार का अधिकार प्राप्त कर सकते हैं, और यह हमारे अधिकारों का उल्लंघन करते है।
A. राष्ट्रीय ज्ञान आयोग
B. विद्युत विनियामक आयोग
C. योजना आयोग
D. मंडल आयोग
निम्नलिखित महत्वपूर्ण अंक में नीचे रखी सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ का मामला इंद्र साहनी का है। यह सरकार रोजगार में आरक्षण के मुद्दे पर कानून का सार प्रस्तुत करता है।
जातीय समूह मानव आबादी है जिसके सदस्य आमतौर पर समान वंश के आधार पर एक दूसरे के साथ पहचाने जाते है। एक जातीय समूह के लोग सांस्कृतिक प्रथाओं, धार्मिक विश्वासों आदि से जुड़े होते हैं।
हाँ, यहाँ कई एजेंसियाँ हैं जो भारत में बाल श्रम की प्रथा को रोकने के लिए काम करती हैं। जैसे- राष्ट्रीय सरकारी एजेंसियाँ, एन.जी.ओ., सिविल सोसाइटी व व्यक्तिगत रूप से समाज सेवा के कार्यकर्ता।
यह स्वयंसेवकों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो मानव अधिकारों के लिए अभियान चलता है। संगठन दुनिया भर में सभी मानव अधिकारों के उल्लंघन पर स्वतंत्र रिपोर्ट तैयार करता है।
अधिकार समाज और कानून द्वारा मान्यता प्राप्त व्यक्तियों के लिए किया गया उचित दावा हैं।
मौलिक अधिकार बुनियादी अधिकार हैं जो शान्ति, सुख, समृद्धि और एक नागरिक के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।
जनहित याचिका के तहत कोई भी नागरिक एक विशेष कानून या जनता के हित की रक्षा के लिए या सरकार की कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालयों या सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता हैं।
अधिकार लोकतंत्र में एक बहुत ही खास भूमिका निभाते हैं। यह बहुमत के उत्पीड़न से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करते है।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। यह हेग (नीदरलैंड) में स्तिथ है। न्यायालय दोहरी भूमिका निभाता है: राज्यों द्वारा प्रस्तुत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कानूनी विवादों को निपटाना। अंतरराष्ट्रीय अंगों और एजेंसियों को भेजे गए कानूनी सवालों पर सलाहकार राय देना। न्यायालय ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के नौ साल के कार्यालय सहित 15 न्यायाधीशों को नियुक्ति दी है और सुरक्षा परिषद के एक दूसरे से स्वतंत्र रहेगी।
जातीय समूह मानव आबादी है जिसके सदस्य आमतौर पर समान वंश के आधार पर एक दूसरे के साथ पहचाने जाते है। यह विभाजन से पहले कोसोवो यूगोस्लाविया का एक प्रांत था। यह संकीर्ण विचारो वाले सर्ब राष्ट्रवादी मिलोसेविक ने चुनाव जीता था। सर्बों देश पर हावी होना चाहता था। उनकी सरकार ने अप्रैल 1999 में कोसोवो में अल्पसंख्यक अल्बेनीया के खिलाफ जातीय नरसंहार को अंजाम दिया। यह हाल के दिनों में जातीय भेदभाव के आधार पर हत्याओं के सबसे बुरे उदाहरणों में से एक था।
संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति व्यक्तिगत स्वतंत्रता छोड़कर कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार अपने जीवन से वंचित नही किया जा सकता है। इसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को तब तक कोई व्यक्ति मारा जा सकता जब तक कि अदालत द्वारा मौत की सजा का आदेश नही दिया गया हो। यह गारंटी देता है कि जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कानून की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी व्यक्ति को दंडित या कुछ अधिकारो का हनन करने पर महज कैद किया जा सकता है। व्यक्ति कानून के उल्लंघन के लिए केवल दंडित किया जा सकता है।
राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतो का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का सृजन करना है जिसके द्वारा नागरिक एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सके। यह एक कल्याणकारी राज्य के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए मदद करता है। यह सरकार पर एक जाँच के रूप में कार्य करता है। यह सरकार के प्रदर्शन को मापने और सत्ता हेतु मतदान देने के लिए लोगों के हाथों में एक मापदंड है जो चुनावों के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करते है। नीति निर्देशक सिद्धांतों में वे लक्ष्य और उद्देश्य शामिल है जो समाज को अपनाने चाहिए।
सऊदी अरब की सरकार की प्रणाली एक राजशाही है। क़ानून निर्माण संस्थापक राजा के बेटों द्वारा किया जाता है। नागरिक राजा के प्रति निष्ठा का भाव रखते हैं। सरकार के राजशाही व्यवस्था की विशेषताएं निम्नलिखित हैं: -
एमनेस्टी इंटरनेशनल उद्देश्य "अनुसंधान का संचालन करने के लिए और मानव अधिकारों के गंभीर हनन का अंत करने के लिए और उन लोगो के लिए न्याय की मांग करना था जिनके अधिकारों" का उल्लंघन किया गया हो। 1961 में ब्रिटेन में स्थापित किया गया था, यह मानव अधिकारों के होने वाले हनन की ओर अपना ओर ध्यान खींचता है। यह स्वयंसेवकों के एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो मानव अधिकारों के लिए अभियान चलाता है। यह संगठन विश्व स्तर पर मानव अधिकारों के उल्लंघन पर स्वतंत्र रिपोर्टों तैयार करता है।
संविधान में मौलिक अधिकार महत्वपूर्ण हैं क्योकि इन्हे लागू किया जा सकता हैं। मौलिक अधिकारों को लागू करने के फलस्वरूप संविधान संवैधानिक उपचारों का अधिकार नागरिकों को प्रदान किया गया है जो अपने आप में एक मौलिक अधिकार है। यदि हमारे अधिकारों का साथी नागरिकों द्वारा उल्लंघन किया जाता हैं तो हम सरकार या निजी निकायों द्वारा इस अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं और अदालतों के माध्यम से उपायो की तलाश कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों को लागू के लिए निर्देश, आदेश या न्यायिक आदेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
समानता के अधिकार के निम्नलिखित चार पहलू है: -
• कानून से पहले समानता :- संविधान के अनुसार, "राज्य कानून से पहले किसी भी व्यक्ति को समानता के लिए इनकार नहीं करेगा या भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर उसे समान रूप से क़ानूनी संरक्षण दिया जाएगा"। 'कानून के समक्ष समानता' का अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नही है और सभी कानून के समक्ष समान हैं तथा प्रत्येक व्यक्ति की पहुँच अदालतों तक समान रूप से है।
• किसी भी नागरिक का प्रवेश दुकानो, रेस्तरां और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों से निषेध नही किया जाएगा और ना ही किसी को भी राज्य-निधि से पूरी तरह या आंशिक रूप से निर्मित कुओं, तालाबों, स्नान घाटों, सड़कों आदि के उपयोग से वंचित किया जाएगा।
• संविधान अस्पृश्यता को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसका प्रयोग करने से रोकता है।
• सभी राष्ट्रीय या विदेशी खिताब जो लोगो के बीच सामाजिक स्थिति में कृत्रिम भेद पैदा करते हैं, को समाप्त कर दिया गया है।
नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार निम्नलिखित हैं:-
(i) लोकतंत्र हमेशा व्यक्ति की गरिमा को उच्च रखता हैं तथा उसे सम्मान देता हैं। गरिमा को उच्च रखता हैं तथा उसे सम्मान देता हैं। गरिमा और आजादी की चाह ही लोकतंत्र का आधार हैं। लोकतंत्र में सिद्धांत रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो व्यवहार में उसे पाना अधिक आसान हो जाता हैं। उदाहरण के लिए भारत की स्थानीय संस्थाओं में स्त्रियों और निम्न जातियों को आरक्षण प्रदान किया गया हैं ताकि राजनीतिक निर्णयों में इन वर्गों की सहभागिता हो। अलोकतांत्रिक सरकारों में व्यक्ति की गरिमा न तो वैधानिक रूप से मान्य है और न नैतिक रूप से।
(ii) व्यक्ति की आजादी:- लोकतंत्र में सभी व्यक्तियों को राजनीतिक, व्यावसायिक, धार्मिक स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं ताकि नागरिक अच्छा जीवन जी सके। गैर लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों को ये स्वतंत्रताएँ नहीं दी जाती है; यदि दी जाती हैं तो केवल सैद्धांन्तिक दृष्टि से, व्यवहार में वे नहीं मिलती हैं।
(iii) उत्तरदायी सरकार:- लोकतंत्र में सरकार अपने कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं। जनता सरकार आगामी चुनाव में बदल भी सकती हैं।
(iv) क्रांति की संभावना का अभाव:- लोकतंत्र में मत द्वारा सरकार को बिना क्रांति के सरकार को बदला जा सकता है। इसलिए लोकतंत्र में सरकार की बदलने के लिए हिंसक क्रांति की आवश्यकता नहीं होती।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 मानव अधिकार अधिनियम, 1993 के संरक्षण हेतु विधायी जनादेश के तहत किया गया था। इसमे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश; उच्च न्यायालय और सदस्यों के पूर्व चीफ जस्टिस शामिल हैं जिन अधिकारियो को मानव अधिकारों से संबंधित मामलों में ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है।
इसका कार्य हैं:
• मानव अधिकारों के उल्लंघन सम्बन्ध में पूछताछ
• मानव अधिकारों की संधियों और सिफारिशो का अध्ययन करना
• मानव अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना और चलाना।
• समाज के विभिन्न वर्गों के बीच में मानव अधिकारों साक्षरता प्रसार करना।
संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। कोई अन्य कानून या सरकार की कार्रवाई संविधान के उपबंधों की जगह नही ले सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका का संविधान अपने नागरिकों को नए अधिकारो की गारंटी कई प्रकार से देता है:-
जे. उलमेर के अनुसार,
“प्रकृति प्रदत्त सभी आर्थिक वस्तु, धन और मूल अवस्था में प्राकृतिक संसाधन, भूमि के अंतर्गत आतें हैं।”
इसमें प्रकृति प्रदत्त निःशुल्क प्रदेय शामिल हैं।
उदाहरण
के लिए: हवा, सूरज
की रोशनी, वन, जल, खनिज, मिट्टी, आदि।
प्रोफेसर थॉमस के अनुसार,
“श्रम, मानव के शरीर या दिमाग द्वारा किए गए उन सभी प्रयासों को संदर्भित करता है जो प्रतिफल प्राप्ति की आशा से किए जाते हैं”।
श्रम उत्पादन का एक सक्रिय कारक है
उत्पादन प्रक्रिया में मनुष्य द्वारा किए गए मानसिक और शारीरिक प्रयासों के सभी रूप इसमें सम्मिलित हैं।
भौतिक पूँजी को उन सभी भौतिक परिसंपत्तियों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो वस्तुओं और सेवाओं के आगामी उत्पादन में मदद करते हैं। उदाहरण स्वरूप, मशीन, कच्चा माल, मुद्रा आदि।
कार्यशील पूँजी वह पूँजी है, जिसकी प्रतिदिन के कार्यों के लिए जरूरत होती है।
इसका उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है| यह उत्पादन के स्तर के साथ धनात्मक रूप से जुड़ी हुई होती है| इसमें हस्तगत मुद्रा और कच्चा माल शामिल है।
स्थायी पूँजी वह पूँजी होती है जो उत्पादन की प्रक्रिया में पूर्णतः प्रयुक्त (समाप्त) नहीं होती।
इसका पुन: प्रयोज्य मूल्य होता है और यह कई वर्षों तक उत्पादन में योगदान देती हैं।
इसमें औजार
पालमपुर गांवों में कामकाजी आबादी का लगभग २५ प्रतिशित गैर-कृषि क्रियाओं में कार्यरत हैं।
पालमपुर गाँव में मुख्य गैर-कृषि क्रियाएँ— डेरी उद्योग, लघुस्तरीय विनिर्माण, व्यापार और परिवहन हैं।
शहरों में फैक्ट्रियों में होने वाले विनिर्माण के विपरीत,पालमपुर में विनिर्माण में बहुत सरल उत्पादन विधियों का प्रयोग होता है और उसे छोटे पैमाने पर ही किया जाता है। लघुस्तरीय विनिर्माण कार्य अधिकतर परिवार के सदस्यों की मदद से घर पर ही किया जाता है।
प्रधानमंत्री रोजगार योजना 2 अक्टूबर, 1993 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई थी।
इसका उद्देश्य, उद्योग, सेवा और व्यापार क्षेत्रों की स्थापना करके शिक्षित बेरोजगार युवकों को रोजगार प्रदान करना और 24000 रुपये से भी कम वार्षिक आय वाले परिवारों और 18 से 35 साल की उम्र वाले युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
हालांकि वैश्विक रूप से निर्धनता में काफी कमी आई है, फिर भी यह कई क्षेत्रों में असमान है। निर्धनता चीन और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में त्वरित आर्थिक प्रगति और मानव संसाधन के विकास के लिए किए गए निवेश के कारण बहुत कम हो गयी है।
निर्धनता रेखा एक काल्पनिक रेखा है जो लोगों की मूल आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए खरीदने की क्षमता के आधार पर उन्हें धनी तथा निर्धन में विभाजित करती है। यह समय और स्थान के अनुसार अलग अलग होती है। हर देश एक काल्पनिक रेखा का प्रयोग करता है जिसे उसके विकास के वर्तमान स्तर के लिए और उसके स्वीकृत न्यूनतम सामाजिक शर्तों के लिए उचित माना जाता है।
भारत में नगरीय क्षेत्रों में स्वीकृत कैलोरी आवश्यकता 2100 कैलोरी प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन है।
आय की असमानता निर्धन परिवारों में होती है। निर्धन परिवार के सभी सदस्य हालांकि पीड़ित होते हैं परन्तु महिलाओं, वृद्ध लोगों और बच्चियों को सुव्यवस्थित ढंग से परिवार के उपलब्ध संसाधनों तक पहुँच से वंचित किया जाता है। इसलिए वह निर्धनों में भी निर्धन होते हैं और सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं|
शहरी निर्धनता का एक कारण है, ग्रामीण-शहरी स्थानांतरण। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के कम अवसर होने के कारण बहुत से निर्धन ग्रामीण रोजगार पाने की आषा में शहर चले जाते हैं।
हालांकि उनमें से अधिकांश को, पहले से ही भीड़-भाड़ वाले शहरों में जाने से कोई राहत नहीं मिलती है। इसके परिणामस्वरूप वे शहरों से बाहर झुग्गियों में रहने लगते हैं |
इसके परिणामस्वरूप निर्धनता की समस्याएँ जो मुख्य रूप से एक ग्रामीण परिघटना थी, नगरीय क्षेत्रा की भी एक विशषेता बन गई।
हां, उच्च आर्थिक संवृद्धि दर के साथ-साथ निर्धनता उन्मूलन के लिए आय का समान वितरण भी उतना ही आवश्यक है। अगर उच्च आर्थिक संवृद्धि के परिणाम गरीबों तक पहुँचते हैं तो इससे गरीबी कम होती है और अगर आय केवल अमीर वर्ग तक ही सिमट जाती है तो अमीर और गरीब का अंतर और बढ़ जाता है। निर्धनता के प्रमुख कारणों में से एक आय असमानता है। इसका एक प्रमुख कारण भूमि और अन्य संसाधनों का असमान वितरण है।
भूमि सुधार जैसी प्रमुख नीति-पहल को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित नहीं किया गया है।