जेम्स रेंनेल ने, ब्रिटिश शासन के अंतर्गत, भारत का पहला मानचित्र तैयार किया था।
1922 में निर्मित लिप्टन चाय के विज्ञापन ने सुझाव दिया था कि विश्व भर में राजपरिवार के सदस्य इस चाय का इस्तेमाल करते हैं
इतिहास में तिथियों का उपयोग करना अनिवार्य होता है, जब हम एक कहानी के रूप में एक चरण या अवधि विशेष का अध्ययन करते हैं, तो दिनांक एक अनुक्रम में कहानी प्रस्तुत करने हेतु एक रूपरेखा प्रदान करती है, क्योंकि इतिहास में तिथियों का उपयोग जरूरी है। तिथियों की मुख्य उपयोगिता यह है कि ये घटनाओं की उचित समय-रेखा के अंतर्गत एक तर्कसंगत कहानी की रचना करने में सहायक होती हैं
सरकारी दस्तावेजों का लेखन ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा किया गया था
अंग्रेजों की यह मान्यता थी, कि एक देश को प्रशासित करने से पूर्व इसे भली-भांति जानना महत्वपूर्ण है
सुलेखकर, वो होते हैं जो सुलेख कला में निपुण होते हैं,उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में जब मुद्रण आमतौर पर इतना प्रचलित नहीं था, इन सुलेखकारों को इन दस्तावेजो की सावधानीपूर्वक नक़ल करने अथवा प्रतिलिपि तैयार करने हेतु एवं उनका खूबसूरती से लेखन करने हेतु, नियुक्त किया जाता था
अंग्रेज, महत्वपूर्ण दस्तावेजों और पत्रों के महत्व के बारे में सजग थे, इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए, उनके द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए थे :
2.महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संरक्षित करने हेतु, अभिलेखागारों एवं संग्रहालयों जैसी विशेषीकृत संस्थाओं की भी स्थापना की गई थी
आधुनिक काल को विज्ञान, कारण, लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता जैसे आधुनिकता के सभी लक्षणों की वृद्धि के साथ संबद्ध किया गया था
एक युग विशेष के बारे में अधिक जानकारी एवं ज्ञान प्राप्त करने हेतु हमें व्यक्तियों अथवा समाज से सम्बंधित, अन्य स्त्रोतों जैसे कि जीवनी, संस्मरण, उपन्यास(कथा), समाचार पत्र आदि का पता लगाना होगा, यात्रियों, तीर्थयात्रियों के विवरण, एवं महत्वपूर्ण व्यक्तियों की आत्मकथाएं भी महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में हैं।
नहीं, हम आधिकारिक दस्तावेज़ो को हमारी जानकारी के सबसे अच्छे स्रोत नहीं मान सकते, क्योंकि वे उस समय की घटनाओं एवं लोगों का मात्र प्रशासनिक दृष्टिकोण प्रदान एवं उसका प्रतिनिधित्व करते हैं, ये दस्तावेज़ किसी भी घटना के मात्र प्रशासकीय दृष्टिकोण प्रदान कर सकते हैं, किन्तु साधारण व्यक्ति अथवा दस्तावेज़ों में जिन व्यक्तियों के विषय में चर्चा की गई है, उनकी जानकारी उपलब्द्ध नहीं करा सकते हैं
ब्रिटिश इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को तीन काल यथा प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक में विभाजित किया था, कालानुक्रम करने की यह विधि भारतीय परिदृश्य के लिए उपयुक्त नहीं थी, क्योंकि इसकी अपनी कुछ सीमाएं थी, कमी यह थी कि सिवाय यूरोप के विश्व के अन्य देशों में इन तीन युगों को परिभाषित करने हेतु अनुक्रम एवं साक्ष्य हमें प्राप्त नही हो सके हैं , उदाहरण के लिए अंग्रेज भारत आए और लोकतंत्र, समानता, और स्वतंत्रता आदि सिद्धांतों का पालन किए बिना उन्होंने शासन किया, यूरोप में इन लक्षणों की उपस्थिति आधुनिक युग का प्रतीक थी।
1817 में जेम्स मिल द्वारा तीन संस्करण वाली रचना - 'अ हिस्ट्री ऑफ़ ब्रिटिश इण्डिया' प्रकाशित की, इसमें उसने भारतीय इतिहास को तीन अल्पावधि में विभाजित किया है, ये हिंदू काल, मुस्लिम काल एवं ब्रिटिश काल था, यह एक पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि जेम्स मिल जो एक साम्राज्यवादी इतिहासकार था, का मानना था कि यूरोपीय संस्कृति को छोड़कर विश्व के सभी अन्य देश अशिक्षित थे और उनकी संस्कृति असभ्य थी, अतएव जब उसने इतिहास लिखा, उसने ब्रिटिश उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का गुणगान किया
दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद, बिहार के एक किसान के प्रोत्साहन पर, महात्मा गांधी ने नील उत्त्पादकों की दुर्दशा देखने के लिए चंपारण का दौरा किया. नील उत्त्पादकों की दुर्दशा से व्यथित होकर, उन्होंने नील बागान मालिकों के खिलाफ 1917 में चंपारण आंदोलन शुरू कर दिया
1.बागान-मालिकों को दोषी माना गया
2.नील उत्त्पादकों के साथ बागान-मालिकों द्वारा अपनाए जाने वाले बलात तरीकों के लिए, आयोग ने बागान-मालिकों की आलोचना की
3.नील-उत्त्पादन को किसानों के लिए, गैर लाभदायक घोषित किया गया
4.रैयतों को उनके मौजूदा अनुबंधों को पूरा करने के लिए कहा गया, किन्तु उन्हें यह भी कहा गया कि, वे भविष्य में नील का उत्पादन करने की मांग को अस्वीकृत करने के लिए स्वतंत्र हैं।
बागान मालिकों के खिलाफ किसानों के विद्रोह को स्थानीय जमींदार और गांव के मुखिया द्वारा समर्थित किया गया था, गांव के मुखिया ने लाठियों के साथ जमकर लड़ाई लड़ी थी, जमींदारों ने रैयतों से बागान मालिकों का विरोध करने का आग्रह किया।
नील की खेती के प्रकार थे:
1निज : इस श्रेणी की खेती में बागान मालिक उनके प्रत्यक्ष नियंत्रण में आने वाली भूमि में नील का उत्त्पादन किया करते थे।
2रैयती: खेती की इस श्रेणी में, बागान मालिक, रैयतों को कम ब्याज दरों पर उन्हें ऋण उपलब्ध कराने के एवज में अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य करते थे।
किसान, नील की खेती की रैयत प्रणाली को कठोर समझते थे,क्योंकि-
1.उन्हें, उनके द्वारा उत्त्पादित की जाने वाली नील के लिए बहुत कम कीमत प्राप्त होती थी ।
2.ऋण का चक्र कभी समाप्त नहीं होता था।
1.18 वीं शताब्दी तक, नील के लिए मांग में, सूती वस्त्रों के औद्योगीकरण के साथ वृद्धि हुई
2.जैसे ही मांग में वृद्धि हुई, वेस्ट इंडीज और अमेरिका से कई कारणों से मौजूदा आपूर्ति बंद हो गई
3.1783 और 1789 के बीच, दुनिया में नील का उत्पादन आधे तक गिर गया और ब्रिटेन ने नील-उत्त्पादन एवं आपूर्ति हेतु भारतीय किसानों की ओर रुख किया।
रैयत, निम्न कारणों से उनके देश में नील विकसित करने के लिए अनिच्छुक थे:
1.नील के पौधों की गहरी जड़ें होती थी, और यह तेजी से मृदा का क्षय करते थे, नील की फसल के कटने के बाद, भूमि का चावल की खेती के लिए पुन: उपयोग नहीं किया जा सकता था।
2.नील उत्त्पादकों, को उनके द्वारा उत्पादित नील के लिए अल्प कीमत मिला करती थी, इसके अलावा, बागान-मालिक निर्दयता से किसानों को खाद्य-फसलों के स्थान पर नील का उत्त्पादन करने हेतु तैयार किया करते थे।
नील की खेती के साथ जुड़ी हुई, दो मुख्य प्रकार की प्रणालियाँ निज और रैयतवाड़ी थी, निज खेती में बागान-मालिक भूमी में जो इसके सीधे नियंत्रण में होती थी, नील का उत्त्पादन किया करता था, वह या तो भूमी का क्रय किया करता था, अथवा अन्य जमींदारों से वह किराए पर लिया करता था और किराए पर लिए गए मजदूरों को सीधे नियुक्त कर नील का उत्त्पादन किया करता था, बागान-मालिकों को निज खेती के अंतर्गत क्षेत्र का विस्तार करना मुश्किल लगा था। नील की खेती केवल उपजाऊ भूमि पर की जा सकती थी, और ये सब पहले से ही सघन आबादी वाले क्षेत्र थे, बागान मालिकों द्वारा, बागानों में नील का उत्त्पादन करने के लिए सघन क्षेत्रों में बड़े क्षेत्रों की आवश्यकता होती थी, श्रम जुटाना आसान नहीं था। एक बड़े बागान को संचालित करने के लिए कईं श्रमिकों की आवश्यकता होती थी, इसके अलावा जब किसान साधारण तौर पर चावल की खेती में व्यस्त होते थे, तब उन्हें तुरंत किसानों की सख्त आवश्यकता होती थी।
उत्तर: 1 लठैत, लाठियां धारण करने वाले सशक्त पुरुष थे, उनकी देख-रेख(व्यवस्था)बागान मालिकों द्वारा की जाती थी।
2.18 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में बंगाल में नील की खेती आरम्भ हुई थी। किसानों को बागान-मालिकों द्वारा धान, तंबाकू और अन्य फसलों के बजाय नील उगाने के लिए बाध्य किया गया था। किसानों को अमानवीय उत्पीड़न का सामना करना पड़ा । 19 वीं सदी के तीसरे दशक तक, बलात नील उत्त्पादन कराने का अत्यधिक विस्तार हो गया,और औपनिवेशिक उत्पीड़न अपने चरम पहुंच गया था,किसानों ने अंततः बंगाल के विभिन्न भागों में खुद को संगठित किया और 1859-60 में उनके संघर्ष का एक हिंसक क्रांति के रूप में समापन हुआ।
यूरोपीय कपड़ा निर्माता, कपड़े को रंगने के लिए नील का इस्तेमाल किया करते थे, इस उद्देश्य के लिए अन्य किसी भी पौधे के विपरीत, यह गहरा नीला रंग दिया करता था, इसलिए कपड़ा रंगरेज एक डाई के रूप में नील को प्राथमिकता दिया करते थे, नील का पौधा केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विकसित होता है और यूरोप की समशीतोष्ण जलवायु में नील के पौधों को विकसित करना असंभव था।
A. दोस्तों
B. किसानों
C. गार्ड
D. बाहरी लोग
बाहरी लोग आदिवासियों को गुलाम बना कर रखा करते थे।
A. वैष्णव शिक्षक
B. वैष्णव नर्तकी
C. वैष्णव उपदेशकों
D. वैष्णव गायक
वैष्णव उपदेशकों के प्रभाव के कारण बिरसा मुंडा श्री कृषण के भक्त बन गए।
A. 1899
B. 1890
C. 1900
D. 1905
बिरसा मुंडा की मृत्यु हैज़ा के कारण हुई थी, जिसके बाद मुंडा विद्रोह की पतन हो गाया।
A. उलेमा
B. काज़ी
C. खलीफा
D. सदर
मुंडा ब्रिटिश और उनके समर्थकों के खिलाफ थे।
A. 1895.
B. 1896.
C. 1905.
D. 1897.
दो साल जेल में बिताने के बाद, बिरसा मुंडा 1897 में जेल से रिहा हुए थे।
A. कोयले की खान
B. कॉफ़ी के बागानों में काम करने
C. चाय के बागानों में काम करने
D. स्टील कारखानों
इन कर्मियों को कोयले की खान से बहार जाने की अनुमति नही थी और न ही अपने गाव जाने की अनुमति थी।
A. कोयले की खान
B. कॉफ़ी के बागानों में काम करने
C. चाय के बागानों में काम करने
D. स्टील कारखानों
इन कर्मियों को बहुत कम पगार मिलती थी।
A. 1880
B. 1885
C. 1890
D. 1895
अंग्रेजों ने 1895 में दंगा करने के आरोप में बिरसा मुंडा को गिरफ्तार किया था।
A. 1910 के दशक
B. 1920 के दशक
C. 1930 के दशक
D. 1940 के दशक
यह आंदोलन वन और ग्रामीण समुदायों के प्रति अंग्रेजों के द्वारा लागु की गई नियमो का विरोध करने के लिए शुरू किया गया था।
A. भूमि प्राप्त करने के लिए
B. फलों को प्राप्त करने के लिए
C. लकड़ीको प्राप्त करने के लिए
D. पशु उत्पादके लिए
जहाजों और रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए ब्रिटेन में लकड़ी की उच्च मांग थी।
महुआ के फूल, मध्य भारत के वनों में विकसित होते हैं, फूल खाए जाते हैं, अथवा भारत के आदिवासियों द्वारा शराब बनाने हेतु इस्तेमाल किये जाते हैं
स्थानांतरित खेती, प्राचीनतम कृषि प्रणाली है, इसका उत्तर-पूर्व और मध्य भारत के पर्वतीय और वन्य क्षेत्रों में प्रचलन था।
आदिवासियों को जुटाने और आंदोलन शुरू करने हेतु, आदिवासी नेताओं को जाग्रत करने हेतु अनेक कारण उत्तरदायी थे :
1.कठोर एवं प्रतिकूल वन कानून और अधिनियम,
2.आदिवासी प्रमुखों के कार्यों और शक्तियों में बदलाव, उन्होंने पूर्व में अपने लोगों के बीच जि
ऋण सुविधाओं का अभाव और व्यापारियों और साहूकारों द्वारा शोषण,
1. 1906 में,असम में संग्राम संगमा का विद्रोह।
2. मध्य प्रांतों में1930 के दशक में, वन-सत्याग्रह।
कुसुम एवं पलाश के फूल कपड़े और चमड़े को रंगने हेतु, आदिवासियों द्वारा प्रयुक्त किये जाते थे ।
आदिवासियों द्वारा उनकी आजीविका प्राप्त करने के लिए अपनाए जाने वाले दो महत्वपूर्ण तरीके (विधियां)निम्न थे-
1) पशुओं का शिकार और (ii) वन-उत्पाद का संग्रहण
1.झूम अथवा स्थानांतरित कृषि, वन क्षेत्रों में छोटे भू-खंड पर की जाती थी।
2.सूरज की रोशनी को जमीन तक पहुँचने देने हेतु, किसान वृक्षों के शीर्ष को काट देते थे।
3.कृषि हेतु भूमि को साफ करने के लिए, भूमी पर वनस्पति को जला दिया जाता था ।
4.जली हुई वनस्पति से उत्सर्जित पोटाश का उपयोग मृदा को उपजाऊ बनाने के लिए किया जाता था, कृषि के पश्चात मृदा द्वारा अपनी उत्त्पादन क्षमता प्राप्त करने हेतु भूमि को परती छोड़ दिया जाता था।
बिरसा, अपने प्रगतिशील वर्षों में जिन विचारों के साथ संपर्क में आया था, उनसे गहराई से प्रभावित था । उनके आंदोलन का उद्देश्य आदिवासी समाज में सुधार लाना था
बिरसा, अपने बाल्यकाल के वर्षों में जिन विचारों के साथ संपर्क में आया था, उनसे गहराई से प्रभावित हुआ था । उनके आंदोलन का उद्देश्य आदिवासी समाज में सुधार लाना था।
1)उसने मुंडाओं से आग्रह किया कि वो शराब पीना छोड़ दें, उनके गांव को साफ रखें, और जादू टोने और जंतर मंतर में विश्वास करना छोड़ दें।
2)बिरसा, मिशनरियों और हिन्दू जमींदारों के भी खिलाफ हो गए थे, उन्होंने, उन्हें बाहरी शक्ति के रूप में देखा, जो कि मुंडा जीवन शैली को तबाह कर रहे थे।
3) उन्होंने अतीत के स्वर्ण-युग-सतयुग पर चर्चा की जब, मुंडा अच्छा एवं ईमानदार जीवन व्यतीत किया करते थे, एवं तटबंधों निर्माण किया करते थे, और वृक्ष एवं बगीचे लगाते थे।
4)अंग्रेजों ने बिरसा को गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि एक अध्यक्ष के रूप में एक सरकारी मुंडा राज स्थापित करने का उसका आंदोलन फ़ैल गया था और उसे 2 साल के लिए जेल में बंद कर दिया गया था, उसने फिर भी आदिवासी गांवों का दौरा किया और बिरसा राज की स्थापना की।
औपनिवेशिक शासन, आदिवासी समाज में भारी बदलाव लेकर आया था
स्थानांतरित कृषि को समाप्त कर दिया गया था, क्योंकि अंग्रेज स्थाई रूप से बसे हुए किसानों को प्राथमिकता देते थे, क्योंकि उन्हें नियंत्रित करना एवं प्रशासित करना आसान था, कईं वनों को राज्य की संपत्ति घोषित कर दिया गया था, और उन्हें सुरक्षित वन का दर्जा दे दिया गया था। आदिवासियों को इन आरक्षित वन क्षेत्रों में सहजता से भ्रमण करने की अनुमति नहीं थी
A. 1829.
B. 1830.
C. 1831.
D. 1832.
सती प्रथा भारत में प्रचलित सामाजिक बुराइयों में से एक थी।इसके अनुसार हिन्दू विधवा को अपने मृत पति की चिता पर खुद को जलाना पड़ता था।लार्ड विलियम बेंटिंक ने राजा राममोहन रॉय की मदद से इस प्रथा को समाप्त कराया।लेकिन इसे भारतियों के धार्मिक विश्वासों में ईस्ट इंडिया कंपनी के हस्तक्षेप के रूप में देखा गया।
A. लखनऊ।
B. मेरठ।
C. बरेली।
D. कानपुर।
1857 का विद्रोह मेरठ से शुरू हुआ था।10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सिपाहियों ने हथियार और गोला बारूद पर क़ब्ज़ा कर लिया और फिर गोरों पर हमला कर दिया। उनके घरों को लूटा व उनमें आग लगा दी।सभी सरकारी इमारतों को लूटा व तबाह किया गया।दिल्ली के लिए टेलीग्राफ लाइन को काट दिया गया।
A. नाना साहब।
B. बहादुर शाह द्वितीय।
C. रानी लक्ष्मी बाई।
D. बेगम हजरत महल।
मेरठ के सिपाही दिल्ली पहुंचे और मुगल सम्राट बहादुर शाह द्वितीय से आग्रह किया, विद्रोह का नेतृत्व संभालने के लिए। बूढी उम्र के शासक ने पहले प्रस्ताव को अस्वीकार करना चाहा लेकिन सिपाहियों के दबाव के कारण प्रस्ताव को स्वीकार करना पड़ा।इस तरह इस सिपाहियों के ग़दर ने एक आम विद्रोह का रूप ले लिया।
A. कुंवर सिंह।
B. गोनू
C. शाह मल।
D. मौलवी अहमदुल्लाह शाह
शाह मल उत्तर प्रदेश के परगना बरौटमें एक बड़े गांव में रहते थे। वह जाट किसानों के एक क़बीले से सम्बंधित थे जिसकी नातेदारी 84 गांवों तक फैली हुई थी।उन्होंने गांवों के मुख्याओं और किसानों को साथ मिलाया और अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा लिया।
A. झांसी
B. कलकत्ता
C. दिल्ली
D. नागपुर
अवध राज्य पर 1856 में अंग्रेजों द्वारा कब्जा कर लिया गया था, नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता (कोलकाता) के पड़ोस में मटियाबुर्ज भेज दिया गया था।
A. एक राज्य के शासक।
B. एक ब्रिटिश प्रतिनिधि।
C. एक सैनिक।
D. एक कमांडर।
'रेजिडेंट' गवर्नर-जनरल का एक प्रतिनिधि होता था, जो ऐसे राज्य में रहता था जो सीधे तौर पर अंग्रेजी शासन के तहत नहीं आता हो।रेजिडेंट उस राज्य के शासक को मजबूर करता था कि वह उनकी सलाह के अनुसार कार्य करे।
A. लार्ड कैनिंग।
B. लॉर्ड कर्जन।
C. लार्ड विलियम बेंटिंक।
D. लार्ड वारेन हेस्टिंग्स।
लार्ड विलियम बेंटिंक भारतीय समाज, जो काफी पिछड़ा और रूढ़िवादी था, में परिवर्तन लाना चाहते थे।लेकिन भारतीय रूढ़िवादियों ने उसे अच्छी नज़र से नहीं देखा।
A. नाना साहेब।
B. तात्या टोपे।
C. मौलवी शाह अहमदुल्लाह ।
D. रानी लक्ष्मी बाई।
कानपूर में विद्रोह का नेतृत्व संभालने के बाद, नाना साहेब ने अंग्रेजों की एक बड़ी संख्या को पकड़ लिया, उनकी पत्नियों और बच्चों के साथ। हालांकि नाना साहेब ने उनसे सुरक्षित हिरासत का वादा किया था,लेकिन एक नाराज भीड़ ने उन्हें गोली मार दी, जबकि वे गंगा पार कर रहे थे।
क. फकीरों
ख. करों
ग. मुग़ल सम्राट
घ. नाना साहब
ड़. अंतिम गवर्नर
च. न्याय प्रणाली
1857 ई० का प्रथम स्वतंत्रता भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसने एक युग का अंत कर दिया और एक नवीन युग की शुरआत हुई । परदेशिक विस्तार के स्थान पर आर्थिक शोषण का युग प्रारंभ हुआ । अंग्रेजों के लिए सामंतवादी युग का भय हमेशा के लिए समाप्त को गया।
इस क्रांति में भारतीयों को सफलता तो नहीं प्राप्त हुई लेकिन भारत से कंपनी का शासन समाप्त हो गया और ब्रिटिश सरकार का भारत पर प्रत्यक्ष शासन स्थापित हो गया। इससे अंग्रेजों के अत्याचारों में कमी हो गयी तथा भारतीयों को और अनेक लाभ हुए। सबसे प्रमुख लाभ इस क्रांति में राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत हो गयी ।
इसने भारत में अंग्रेजी साम्राज्य को जड़ से हिला दिया था। दोबारा 1857 जैसी घटना न हो तथा ब्रिटिश शासन को व्यवस्थित और सुदृढ़ करने के लिए महारानी विक्टोरिया ने 1858 ई० में अपने घोषणा पत्र में कुछ महत्वपूर्ण नीतियों का उल्लेख किया । इस घोषणा से दोहरा नियंत्रण समाप्त हो गया और ब्रिटिश सरकार सीधे तौर पर भारतीय मामलों के लिए उत्तरदायी हो गयी । इस क्रांति ने भारतियों ने राष्ट्रीय भावना का संचार किया और उन्हें अपनी मातृभूमि को विदेशी शासकों से मुक्त दिलाने के लिए प्रेरित किया ।
1857 ई० की क्रांति की में भारतीय क्रांतिकारियों ने बड़ी वीरता से लड़ाई छेदी थी परन्तु फिर भी उन्हें आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हुई इसके मुख्य कारण थे :- इस संग्राम में असफलता का कारण भारतीय क्रांतिकारियों में राष्ट्रीयता का आभाव था।
कुछ प्रान्तों के शासकों ने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए अंग्रेजों का साथ दिया । रियासतों के राजाओं के असहयोग एक मुख्य कारण था ।
यदि इंदौर, ग्वालियर और हैदराबाद के नरेश क्रांतिकारियों का साथ देते तो शायद स्थिति में कुछ और परिवर्तन होता ।
क्रांतिकारियों के प्रारंभ और प्रगति दोनों में संगठित योजना एवं तालमेल का आभाव था । स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों की अपेक्षा अंग्रेजों की सेना संगठित थी । इस क्रांति में योग्य और कुशल नेतृत्व का पूर्णतः आभाव था क्रांति के नेता अपने अपने ढंग से क्रांति का संचालन कर रहे थे ।
इस स्वतंत्रता संग्राम में क्रांति केवल उत्तर भारत में ही केन्द्रित थी। दूसरे राज्य सिंध, पंजाब, राजपूताना, कश्मीर तथा अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों ने इस में हिस्सा नहीं लिया था ।
अंग्रेजों के पास अच्छे किस्म के हथियार थे एवं वे प्रशिक्षित सैनिक भी थे ।
अंग्रेजी सेना ने नयी रायफल का प्रयोग बड़े अच्छे ढंग से किया था भारतीय सैनिकों के पास गोला-बारूद की कमी थी ।
अंग्रेजों ने डाक-तार व्यवस्था का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त किया क्रांतिकारियों ने निर्धारित तिथि 31 मई 1857 से पहले ही क्रांति प्रारंभ की जिससे पूरा देश एक साथ संगठित नहीं हो पाया था।
|
क. |
बिहार |
मंगल पाण्डे |
|
ख. |
मध्य प्रदेश |
लक्ष्मी बाई |
|
ग. |
लखनऊ |
बहादुर शाह जफ़र |
|
घ. |
दिल्ली |
बेगम हजरत महल |
|
ड़. |
झाँसी |
अवन्ती बाई |
|
च. |
मेरठ |
कुँवर सिंह |
|
क. |
बिहार |
कुँवर सिंह |
|
ख. |
मध्य प्रदेश |
अवन्ती बाई |
|
ग. |
लखनऊ |
बेगम हजरत महल |
|
घ. |
दिल्ली |
बहादुर शाह जफ़र |
|
ड़. |
झाँसी |
लक्ष्मी बाई |
|
च. |
मेरठ |
मंगल पाण्डे |
क. बैरकपुर
ख. कमल के फूल
ग. 1862
घ. अवन्ती
ड़. राष्ट्रीय भावना
च. चर्बीयुक्त
A. कन्नड़
B. उडीया
C. बंगाली
D. हिंदी
'वुट्ज़' इस्पात का एक प्रकार है। यह शब्द उक्कु (कन्नड़), हुक्कू (तेलुगु) और उरुक्कु (तमिल और मलयालम) की एक अंग्रेज़ीकृत संस्करण है। सारे शब्दों का अर्थ 'इस्पात' है।
A. 1857 ईसवी
B. 1854 ईसवी
C. 1859 ईसवी
D. 1800 ईसवी
भारत की पहली सूती मिल, 1854 ईसवी में, बम्बई (मुंबई) में, एक कताई मिल के रूपे में, स्थापित हुई|
A. बंगाली
B. तामिल
C. हिंदी
D. गुजराती
'समाचार दर्पण' भारत में सबसे पहला स्थानीय भाषा अखबार था। औपनिवेशिक शासन के दौरान, बुनकरों की दुर्दशा इस समाचार पत्र में व्यक्त की गई थी।
A. औरंग
B. चिप्पिगर
C. रंगरेज़
D. कैलिको
रंगीन कपड़ा बनाने हेतु रँगरेज़ धागे को रँग देते थे। छपाईदार कपड़ा बनाने के लिए बुनकरों को चिप्पीगर नामक माहिर कारीगरों की ज़रूरत होती थी, जो ठप्पे से छपाई करते थे।
A. बन्डाना
B. तांती
C. साले, कैक्कोलार और देवांग
D. जुलाहेया मोमिन
दक्षिण भारत के साले, कैक्कोलार और देवांग; उत्तर भारत के जुलाहे या मोमिन बुनकरों, और बंगाल के तांती बुनकर भारत में महत्वपूर्ण बुनाई समुदायों में से कुछ थे|
A. 16वीं शताब्दी
B. 17वीं शताब्दी
C. 18वीं शताब्दी
D. 15वीं शताब्दी
डच ने, इस समय, कोचीन में, किलों और अन्य बस्तियों की स्थापना की। डच ईस्ट इंडिया कंपनी, भारत में महत्वपूर्ण डच कंपनियों में से एक था।
A. जेम्स हारग्रीव्स
B. थॉमस अल्वा एडीसन
C. स्टीफेंसन
D. जॉन कीट्स
स्पिनिंग जेनी, इंग्लैंड में, भारतीय कपड़ा के बाज़ार के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा करने हेतु, तकनीकी नवाचार की खोज का परिणाम था। यह, वस्त्र उद्योग में, जॉन के द्वारा इस्तेमाल किया गया था।
A. मुद्रित कपास कपड़ा
B. इस्पात और लौह उत्पादों
C. शिपिंग सामग्री
D. अफीम उत्पादों
इंग्लैंड में, 1720 में, ब्रिटिश सरकार ने कैलिको अधिनियम नामक कानून बनाया। इस अधिनियम द्वारा छींट (मुद्रित सूती कपड़े) के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
A. फ्रेंच
B. जर्मन
C. मलयालम
D. हिंदी
शब्द ‘बन्डाना’ "बांधना" से आता है। ‘बन्डाना’ पैटर्न ज्यादातर राजस्थान और गुजरात में उत्पादित किए गए थे।
A. फारसी
B. अरबी
C. हिंदी
D. मलयालम
'शिन्ट्ज़' हिंदी शब्द ‘छींट’ से आता है। इसका मतलब एक कपडा है, जिसपर छोटे और रंगीन फूलों के डिज़ाइन हैं।
A. कालीकट
B. ढाका और लखनऊ
C. अहमदाबाद और पाटन
D. आंध्र प्रदेश
जमदानी, एक बारीक मलमल है, जिसपर सजावटी, विशेष रूप से, करघा पर बुना जाता है, आमतौर पर भूरा और सफेद रंगों में।
A. कैलिकौ
B. पटोला
C. जामदानी
D. मलमल
कैलिको का उद्धव, भारत में, 11वीं शताब्दी में शुरू हुआ था, और 12वीं शताब्दी में, इसका उल्लेख भारतीय साहित्य में मिला, जब हेमचन्द्र नामक लेखक ने, कमल के रूप में, कैलिको कपड़े के डिज़ाइन छपे जाने का उल्लेख किया।
A. कालीकट
B. मछलीपट्टनम
C. त्रिवेंद्रम
D. मद्रास
11वीं सदी के दौरान कैलिको, मूल रूप से, दक्षिण पश्चिम भारत में कालीकट जगह से उभरा। इस कपड़े को मूल निवासी 'कलियाँ' के नाम से जानते थे।
A. मलमल
B. पटोला
C. कलामगरी
D. जमदानी
17वीं सदी में यूरोप का परिचय मलमल, जो एक पतला बुना सूती कपडा था, मध्य पूर्व एशिया द्वारा, मलमल, के साथ हुआ। इसका पहला अभिलिखित उपयोग 1670 में, इंग्लैंड में, हुआ था। यह फ्रांस में, 18वीं सदी के अंत में, बहुत लोकप्रिय हो गया। मलमल आमतौर पर एक बारीकी से बुना सख़्त या सफेद कपड़ा है, जो डोरीदार सूती धागे से निर्मित है।
A. ईरान
B. इराक
C. मिस्र
D. श्री लंका
यूरोपीय व्यापारी, पहली बार, इराक के मोसुल शहर में, भारत के सबसे बारीक सूती कपडे को देखा, जो अरब व्यापारियों द्वारा लाया गया था। वे बारीक बुनाई वाले सभी कपड़ों को ‘मस्लिन’ कहने लगे।
1858 ई० के अधिनियम के पारित होने के दो मुख्य कारण –
1. दोहरी शासन प्रणाली के दोष
2. 1858 ई० का महान विद्रोह
भारत सैनिकों को दिए गये कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी लगी होने की अफवाह भारतीय सैनिकों को ब्रिटिश सैनिकों की अपेक्षा कम वेतन दिया जाता था ।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में लखनऊ का नेतृत्व वाजिद अलीशाह की बेगम हजरत महल ने सम्भाला क्रांतिकारियों ने रेजीडेंसी का घेराव कर लिया । अंत में अंग्रेजों का लखनऊ पर आधिपत्य हो गया बाद में बेगम हजरत महल नेपाल चली गयी ।
सही
सैनिक कारण
विद्रोह को कुचलना अंग्रेजों के लिए बहुत आसान साबित नहीं हुआ। मई और जून 1857 में पारित किए गए कई क़ानूनों के जरिए न केवल समूचे उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया बल्कि फौजी अफसरों और यहाँ तक कि आम अंग्रेजों को भी ऐसे हिंदुस्तानियों पर मुकदमा चलाने और उनको सजा देने का अधिकार दे दिया गया जिन पर विद्रोह में शामिल होने का शक था।
“1857 को विद्रोह से अधिक भाग्यशाली घटना अन्य कोई नहीं घटी । इसने भारतीय गगन मण्डल को अनेक शंकाओं से मुक्त कर दिया । “असफल होकर भी इस स्वतंत्रता संघर्ष ने भावी स्वतंत्रता संघर्ष के लिए पे्ररणादायक वातावरण तैयार किया । विशेषकर क्रांतिकारी तो इसे अपना प्रकाश स्तंभ मानते थे । दिल्ली चलों का नारा अनवरत रूप से 1947 ई. तक चलता रहा । इस आंदोलन में हिंदुओं व मुसलमानों ने समान रूप से भाग लिया व दोनों ही जातियों के नेताओं ने क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया व कन्धे से कन्धा मिलाकर युद्ध किया ।
क.
ख. गलत
ग. सही
घ. गलत
क. सही
ख.
ग.
घ. सही
मध्य भारत में अंग्रेजों ने विद्रोह का दमन सर हयूरोज की सेना ने किया। उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई को झाँसी में हरा दिया। कालपी में तात्यां टोपे के साथ मिलकर सिंधिया पर आक्रमण कर किले को अधिकार में ले लिया लेकिन बाद में सर हयूरोज ने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया । रानी बहादुरी से लड़ते हुए मरी गयी तात्यां टोपे को फाँसी दी गयी। इस प्रकार मध्य भारत में विद्रोहियों का दमन हुआ ।
जनरल हैवलॉक ने कानपुर पर कब्जा करके नाना साहब को नेपाल भेज दिया । नाना साहब के बाद तात्यां टोपे ने कानपुर की कमान सँभाली लेकिन उनके साथियों ने उनके साथ विश्वासघात किया। जिससे उन्हें 1859 ई० में फाँसी दे दी गयी और कानपुर की क्रांति शांत को गयी।
लार्ड कैनिंग ने चर्बीयुक्त कारतूस के प्रयोग के लिए भारतीय सैनिकों के साथ धोखा धड़ी की 29 मार्च 1857 को बंगाल छावनी के सिपाही मंगल पण्डे ने कारतूस के प्रयोग से मना कर दिया । इसके परिणाम स्वरुप मंगल पण्डे को फाँसी दे दी गयी इसलिए इस घटना को भारतीय इतिहास में याद रखा जाता है ।
क.
ख. गलत
ग. गलत
घ. सही
लार्ड डलहौजी ने भारतीय देश राज्य को ब्रिटिश राज्य में मिलाने के लिए एक विलय नीति अपनाई थी । इससे सभी देशी राज्य आतंकित हो गये । इन देशी राज्य का अस्तित्व संकट में पड़ गया अंग्रेजी शासन एक पक्षीय निर्णय लेता था। उसने इस नीति से सतारा, झाँसी, नागपुर और दुसरे राज्य अपने कब्जे में ले लिए थे । डलहौजी ने पेशवा बाजीराव के दत्तक पुत्र नाना साहब की वार्षिक पेंशन भी बंद कर दी थी।
अंग्रेजों ने नई रायफलों का प्रयोग किया । इससे सेना में अफवाह फ़ैल गयी कि इसमें गाय और सूअर कि चर्बी लगी कारतूसों का प्रयोग होता है । बंदूकों में कारतूसों को दाँत से खींचना पड़ता था । हिन्दुओं में गाय की पूजी जाती है और मुसलमानों में सूअर को अशुद्ध माना जाता है । अतः सेना में रोष व्याप्त हो गया इससे दोनों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का षड्यंत्र समझा यह बात बहुत तेजी से फ़ैल गयी और देश स्वतंत्रता संघर्ष के रस्ते पर चले गये ।
मेरठ वासियों ने जेल में धावा बोलकर उन्हें छुड़ा लिया और कई अंग्रेज अधिकारीयों को मार डाला। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की और कूच किया। ये क्रन्तिकारी एक साथ मिलकर लाल किले पहुंचे । वहाँ बहादुरशाह द्वितीय को भारत का शासक घोषित किया गया परन्तु चार महीने के बाद अंग्रेजों ने पुनः दिल्ली पर अधिकार कर लिया। बहादुरशाह द्वितीय को रंगून भेज दिया गया। वहाँ पर 1862 ई० में उनकी मृत्यु हो गयी यह घटना मध्य भारत तथा रूहेलखण्ड में आग की तरह फ़ैल गयी। इसके कारण बरेली, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी तथा झाँसी के सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध हधियर उठा लिये।
नाना साहब कानपुर में पेशवा घोषित हुए नाना साहब ने अंग्रेजों की सारी फैज को कानपुर से खदेड़ दिया । नाना साहब ने आत्म समर्पण करने वाले सिपाहियों को छोड़ दिया। इन सिपाहियों को नाव द्वारा भेजा जा रहा था । इन्हें नाना साहब सुरक्षित इलाहबाद भेज रहे थे । जब ये सिपाही नाव में बैठे उसी समय नाना साहब के आदमियों ने उन सिपाहियों की हत्या कर दी और महिलायाओ और बच्चों को छोड़ दिया । इस घटना से क्रोधित होकर जनरल हैवलॉक ने कानपुर पर कब्ज़ा कर अधिकार कर लिया और भविष्य में ऐसी घटना न हो इसलिए नाना साहब को नेपाल भेज दिया।
अंग्रेजों ने 150 वर्षों में भारत की सभी संस्थाओं पर राजनैतिक, धार्मिक, सामाजिक न्यायिक दखल दिया । इससे भारत में प्रभुत्व वर्ग वालों को सीधे ठेस पँहुची और शासक एवं जनता के बीच शक संशय का माहौल बन गया।
7. इसके आलावा भारतीय शासन में ऊँचे पद प्राप्त नहीं हो सकते थे। जिससे भारतीयों के बीच अविश्वास व असंतोष बढ़ता गया ।
अंग्रेजों ने 150 वर्षों में भारत की सभी संस्थाओं पर राजनैतिक, धार्मिक, सामाजिक न्यायिक दखल दिया । इससे भारत में प्रभुत्व वर्ग वालों को सीधे ठेस पँहुची और शासक एवं जनता के बीच शक संशय का माहौल बन गया।
सन 1857 ई० की क्रांति के निम्नलिखित कारण थे - ब्रिटिश औपनिवेशिक शक्ति व भारतीय उपनिवेशों की अर्थव्यवस्था को अपनी अर्थव्यवस्था का पूरक बना रही थी । भारतीय उपनिवेश से इंग्लैंड अपनी आवश्यकतानुसार कच्चा माल ले जाते थे ।
अंग्रेज हमारे देश से कच्चे माल को सस्ते दामों पर ले जाते थे और मशीनों से तैयार माल को भारत में लाकर ऊँचे दामों पर बेचते थे ।
अंग्रेजों के ऊँची दरों पर करों के कारण भारतीय वस्त्र उद्योग निर्यात बहुत प्रभावित हुआ ।
भारतीय शिल्प की दशा बिगडती गयी और शिल्पकार बेरोजगार होते चले गये ।
अंग्रेज शासकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया इससे भारत के उद्योग की स्थिति शीघ्र क्षीण हो गयी ।
भारतीय कारीगरों की दशा ख़राब होती चली गयी ।
आकाल के कारण गरीबों, किसानो की स्थिति बिगड़ रही थी लगान वसूलने के कारण किसान क्षुब्ध थे ।
ब्रिटिश सरकार ने सेना से सैनिकों को हटाकर कोई अन्य रोज्जर नहीं दिया ।
शिक्षित भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्त नहीं किया जाता था उन्हें अंग्रेज कर्मचारियों की तुलना में भारतीय कर्मचारियों को कम वेतन दिया जाता था।
| क. |
कम्पनी के सिक्कों से मुग़ल सम्राट का नाम हटा |
1757 ई० में |
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ख. |
प्लासी का युद्ध |
1835 ई० में |
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ग. |
विलय नीति |
लार्ड डलहौजी |
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घ. |
सहायक नीति |
बहादुरशाह जफ़र |
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ड़. |
अंतिम मुग़ल बादशाह |
लार्ड वेलेजली |
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च. |
अंतिम अंग्रेजों का गवर्नर |
लार्ड कैनिंग |
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क. |
कम्पनी के सिक्कों से मुग़ल सम्राट का नाम हटा |
1835 |
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ख. |
प्लासी का युद्ध |
1757 |
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ग. |
विलय नीति |
लार्ड डलहौजी |
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घ. |
सहायक नीति |
लार्ड वेलेजली |
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ड़. |
अंतिम मुग़ल बादशाह |
बहादुरशाह जफ़र |
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च. |
अंतिम अंग्रेजों का गवर्नर |
लार्ड कैनिंग |
A. सिपाहियों।
B. किसानों।
C. जमींदार।
D. जागीरदारों।
'गदर' सशस्त्र बलों के भीतर नियमों और विनियमों की एक सामूहिक अवज्ञा करने के लिए संदर्भित करता है। 1857 के विद्रोह के संदर्भ में, शब्द 'गदर' मुख्य रूप से सिपाहियों के विद्रोह को दर्शाता है।
1858 के अंत में, जब 1857 का विद्रोह ध्वस्त हो गया, नाना साहिब नेपाल के लिए भाग निकले। उनके भागने की कहानी नाना साहब के साहस और वीरता में एक और तमग़ा है।
A. लार्ड बेंटिंक।
B. लॉर्ड हार्डिंग।
C. लार्ड डलहौजी।
D. लार्ड कैनिंग।
1851 में लार्ड डलहौज़ी ने कहा था "अवध एक चेरी है जो एक दिन हमारे मुंह में गिर जाएगी"। ठीक 5 साल बाद, 1856 में अवध औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया।
A. 7वीं नेटिव इन्फेंट्री।
B. 34 वीं नेटिव इन्फेंट्री
C. 7वीं अवध अनियमित कैवेलरी
D. 17वीं मेरठ नेटिव कैवेलरी
ईस्ट इंडिया कंपनी ने अलग-अलग नामों से, अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेना को संगठन के आधार पर बांटा था। 7 वीं अवध अनियमित कैवेलरी ने नए कारतूसों को इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था क्योंकि अफवाह फैल गई थी कि उनमे गाये व सुवर की चर्बी की परत है जिसे दांतों से काटना पड़ता है। यह लोगों की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ था।
मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने हैदराबाद में शिक्षा प्राप्त की।वह विदेशी शासन के खिलाफ थे और भारत में दोबारा से मुस्लिम शासन लाना चाहते थे।इसलिए उन्होंने ने लोगों को प्रेरित किया कि अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद के लिए उठ खड़े हों।
A. लार्ड कैनिंग।
B. लार्ड डलहौजी।
C. लॉर्ड हार्डिंग।
D. भगवान वेलेस्ले।
अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी (EEIC) ने भारत में अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए कई नीतियों को अपनाया। लार्ड डलहौजी की "डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स" एक ऐसी नीति थी। इस नीति के मुताबिक, अगर एक सहायक राज्य के शासक एक स्वाभाविक उत्तराधिकारी होने के बिना मर गया, उसका राज्य EEIC के साम्राज्य में मिला लिया जाएगा।
A. समाचार पत्र।
B. पत्र।
C. घोषणाओं।
D. भाषण।
विद्रोहियों ने इश्तिहार और घोषणाओं का सहारा लिया ताकि वह अपने विचार व्यक्त कर सकें और लोगों को प्रेरित करें कि वह विद्रोह में शामिल हों।इन इश्तिहारों और घोषणाओं में लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाता था।हर धर्म और हर जाती के लोगों से विनती की जाती थी कि वह विदेशी शासकों के खिलाफ युद्ध में शामिल होकर अपने आप को आज़ाद करा लें।