A. तात्या टोपे।
B. दामोदर राव।
C. गंगाधर राव।
D. नाना साहब।
नाना साहब का असली नाम धोंडू पंत था। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया क्योंकि उनके लिए पेशवा की पेंशन बंद कर दी गई थी। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि वह पेशवा के मुंहबोले बेटे थे।
अवध अंग्रेजों का एक मित्र राज्य था जिसका कंपनी के शासन के विस्तार में बड़ा योगदान था।लेकिन कंपनी की लालची नज़रें इस पर गड़ी हुई थीं। लार्ड डलहौज़ी ने एक बार कहा था 'अवध एक चेरी है जो एक दिन हमारे मुंह में गिर जाएगी"।अंग्रेजों ने कुशासन का बहाना बनाकर अवध पर क़ब्ज़ा कर लिया।अवध के लोगों ने इसे विश्वासघात के रूप में देखा।
साहूकारों पर हमला किया गया क्योंकि उन्हें न केवल उत्पीड़कों के रूप में बल्कि अंग्रेजों के सहयोगी के रूप में भी देखा गया था। उनके बहीखातों को लोगों ने आग में डाल दिया था।
A. आजादी का सबसे पहला युद्ध।
B. मुस्लिम द्वारा हिंदू शिकायतों का शोषण।
C. मध्युगीन सामंती प्रणाली की गुज़री हुई महिमा को लौटाने की कोशिश।
D. शुद्ध रूप से सैन्य प्रकोप।
बीसवीं सदी का राष्ट्रवादी आंदोलन 1857 की घटनाओं से प्रेरित था।राष्ट्रवादी कल्पनाओं की एक पूरी दुनिया विद्रोह के आस-पास बुनी गई थी।यह आज़ादी की पहली लड़ाई थी जिसमे भारत के सभी वर्गों के लोग साथ आये और शाही शासन के खिलाफ प्रतिरोध किया।
A. मार्च 1858
B. अप्रैल 1858
C. 1858 मई
D. जून 1858
रानी लक्ष्मीबाई 1857 के विद्रोह की सबसे लोकप्रिय महिला महिला विद्रोही थीं।उन्होंने झाँसी में विद्रोह का नेतृत्व किया।उन्हें जून 1858 में अंग्रेजों द्वारा युद्ध में मारा गया।
मई और जून 1857 में पारित किए गए कई क़ानूनों के जरिए न केवल समूचे उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया बल्कि फौजी अफसरों और यहाँ तक कि आम अंग्रेजों को भी ऐसे हिंदुस्तानियों पर मुकदमा चलाने और उनको सजा देने का अधिकार दे दिया गया जिन पर विद्रोह में शामिल होने का शक था।
लार्ड कैनिंग ने 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में आयोजित एक भव्य दरबार में महारानी विक्टोरिया के उद्घोषणा पत्र को पढ़ा था।
ब्रिटिश भारत के प्रथम वायसराय वारेन हेस्टिंग्स (1774 – 1785) थे।
भारत में रेलवे की शुरूआत 1853 AD में हुई।
नाना साहब का सहयोगी अजीम उल्ला खां था |
भारतीय अंतिम सम्राट बहादुरशाह जफ़र की मृत्यु सन 1862 ई० में रंगून में हुई थी
सन 1848 ई० में
विद्रोह के असफल होने के निम्न कारण थे -
1. स्थानीय विद्रोह थे ।
2. इनमे संगठन का आभाव था।
A. जावा, सुमात्रा और पेनांग
B. फ्रांस, इटली और जर्मनी
C. क्यूबा, अमेरिका और जापान
D. ऑस्ट्रेलिया, आइसलैंड और फिनलैंड
ये देश दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित है। भारतीय कपड़ा दक्षिण पूर्व एशिया के व्यापार में एक प्रमुख वस्तु थी।
A. अफ़ीम
B. लोहा और इस्पात
C. सूती वस्त्र
D. चमड़ा
भारत में अंग्रेज़ों के आने से पहले, भारत, दुनिया में, सूती वस्त्रों का सबसे बडा उत्पादक था। भारतीय कपड़ा उनके ठीक गुणवत्ता और सुंदर शिल्प कौशल के लिए जाने जाते थे। भारतीय कपास कपडे का विक्रय दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में; जैसे जावा, सुमात्रा और पेनांग; और पश्चिम और मध्य एशिया में होता था।
A. दक्षिण अफ्रीका
B. बर्मा
C. श्रीलंका
D. भारत
औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि के साथ, ब्रिटिश व्यवसायियों को अपने औद्योगिक उत्पादों के लिए, एक विशाल बाज़ार के रूप में, भारत को देखा, और इंग्लैंड से निर्मित माल की बाढ़ भारत में आई।
A. पृथ्वी पर स्वर्ग
B. दुनिया की कार्यशाला
C. सपनों का देश
D. आध्यात्मिकता की भूमि
1850 के दशक के बाद से, ब्रिटेन में लोहा और इस्पात उद्योग की वृद्धि हुई। कपास, ब्रिटेन में, औद्योगिक क्रांति का प्रतीक था।
A. शिपिंग और वस्त्र
B. चमड़ा और तेल उद्योग
C. कागज और वस्त्र उद्योग
D. वस्त्र एवं लोहा और इस्पात उद्योग
वस्त्र एवं लोहा और इस्पात उद्योग ब्रिटेन में पहले यंत्रीकृत उत्पादन हुआ। येदोनों उद्योग आधुनिक दुनिया में औद्योगिक क्रांति के लिए महत्वपूर्ण थे। लोहा और इस्पात उद्योग के विकास के साथ, ब्रिटेन 'दुनिया की कार्यशाला' के रूप में जाना जाने लगा।
2)सूती वस्त्रों अथवा खादी पर उनके अत्यधिक दबाव के कारण , यह भारत में राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1931 में तिरंगा ध्वज के केंद्र में चरखे को स्थान दिया
लौह प्रगालकों के एक समुदाय अगरिआ ने, दोराबजी टाटा को राजहरा पहाड़ियों में लौह अयस्क की उपलब्धता के बारे में संकेत दिए थे।
भारत से तलवारें और हथियार निर्माण उद्योग अंग्रेजों द्वारा भारत की विजय के साथ समाप्त हो गए, इंग्लैंड से लोहा और इस्पात के आयात ने भारतीयों द्वारा उत्पादित लौह और इस्पात का स्थान ले लिया
बुनकर उन समुदायों से सम्बंधित थे जो बुनाई के क्षेत्र में पारंगत थे, बुनाई का उनका कौशल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित कर दिया गया था।
यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों ने, 16 वीं सदी से यूरोपीय बाजारों में विक्रय हेतु भारतीय कपड़ा खरीदना शुरू किया था।
मीजी शासन जो जापान में सत्ता में था, ने पश्चिमी वर्चस्व का विरोध करने के लिए औद्योगीकरण को महत्वपूर्ण माना
यूरोपीय वैज्ञानिक, माइकल फैराडे (बिजली और विद्युत के आविष्कारक) भारतीय वुट्ज से आकर्षित थे, उन्होंने चार वर्ष तक भारतीय वुट्ज के अवयवों का अध्ययन किया था
वुट्ज़, कन्नड़ शब्द उक्कु का एक आंग्लीकृत संस्करण है, इस्पात अर्थ - तेलुगु में इसे हुक्कू और तमिल और मलयालम में उरुक्कु सम्बोधित किया जाता है।
दक्षिण के कैकोल्लर और देवांग, उत्तर के जुलाहा अथवा मोमिन बुनकर और बंगाल के तांती बुनकर, भारत के कुछ महत्वपूर्ण बुनाई समुदायों में से हैं।
बंगाल, अपनी उपजाऊ भूमि एवं डेल्टा में कई नदियों के साथ अपनी स्थिति जो कि उत्पादित माल के परिवहन के लिए उपयोगी थी, के कारण भारत के महत्वपूर्ण वस्त्र उत्पादन क्षेत्रों में से एक था
"कपड़े के थान" यूरोपीय व्यापार में कपास और रेशमी वस्त्रों की किस्मों के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला एक आम नाम था, प्रत्येक वस्त्र थान, बुना हुआ वस्त्र थान हुआ करता था, जो कि लम्बाई में 20 यार्ड और चौड़ाई में 1 यार्ड हुआ करता थी
औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि के साथ, ब्रिटिश व्यवसायियों ने अपने औद्योगिक उत्पादों के लिए एक विशाल बाजार के रूप में भारत को देखा, और इंग्लैंड में निर्मित माल की भारतीय बाजारों में बाढ़ सी आ गई
ब्रिटेन, को "दुनिया की कार्यशाला 'के रूप में जाना जाता था, क्योंकि 19 वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान ब्रिटेन के लौह और इस्पात उद्योग की संख्या में बढ़ौतरी होना शुरू हो गई थी
स्पिनिंग जेनी का आविष्कार 1764 में जेम्स हरग्रीव्ज़ द्वारा किया गया था
A.
हेक्टर मुनरो
B.
रॉबर्ट क्लार्क
C.
वारेन हेस्टिंग्स
D.
रॉबर्ट क्लाइव
1782 में,जेम्स रेंनेल को रॉबर्ट क्लाइव द्वारा हिन्दुस्तान का मानचित्र तैयार करने के लिए कहा गया था।
A.
सर रॉबर्ट क्लाइव
B.
लॉर्ड कार्नवालिस
C.
वारेन हेस्टिंग्स
D.
लॉर्ड डलहौज़ी
1773 के विनियमन अधिनियम ने भारतीय मामलों के लिए भारत के गवर्नर जनरल को उत्तरदायी बना दिया, बंगाल के गवर्नर को भारत के गवर्नर जनरल के रूप में मान्यता दी गई थी, इस प्रकार वारेन हेस्टिंग्स भारत के प्रथम गवर्नर जनरल बने।
A.
चांसलर
B.
गवर्नर
C.
गवर्नर जनरल
D.
वायसराय
इन सभी ब्रिटिश अधिकारियों का कार्यकाल 1773 और 1858 के मध्य की अवधि के दौरान रहा था, इस समयावधि के दौरान गवर्नर जनरल भारतीय प्रशासन का प्रमुख होता था, 1858 में भारत के वायसराय के पद का निर्माण किया गया था।
चंपारण आंदोलन इसीलिए हुआ था, क्योंकि किसानों को ब्रिटिश अभिकर्ताओं द्वारा खाद्यान्न के स्थान पर नील विकसित करने के लिए बाध्य किया जाता था, अंग्रेजों ने इस उद्देश्य के लिए तीन काठिया प्रणाली लागू की थी।
अ) अकाल: यह प्राकृतिक आपदा की अवस्था होती है, जब विभिन्न कारकों की वजह से, एक क्षेत्र में भोजन की अत्यधिक कमी हो जाती है।
ब ) नील : यह नील के पौधे से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक गहरा नीला रंग(डाई) होता है और दुनिया के कुछ भागों में ही उपलब्ध होता है, इसका सस्ता विकल्प वोड नामक पौधा होता है, जिसका व्यापक रूप से इंग्लैंड के कारखानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था
अ)ऐसे व्यक्ति, जिन्हें व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित कर दिया जाता है, और जिन्हें दिन-रात कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है, दास के रूप में जाने जाते हैं
ब) कैरेबियाई द्वीप समूह में स्थित सेंट डोमिंग्वे के फ्रांसीसी उपनिवेश में, अफ्रीकी गुलाम जो बागानों में कार्य किया करते थे, ने 1791 में विद्रोह कर दिया
मार्च 1859 में शुरू हुआ विद्रोह, जिसमें हजारों रैयतों ने नील का उत्त्पादन करने से इंकार कर दिया था,नीला विद्रोह के नाम से जाना जाता है,जो बागान मालिकों के लिए कार्य करते थे, उन्हें सामजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया, और बागान-मालिको पर किसानों द्वारा हमले किये गए
फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय देशों में भारतीय नील का प्रयोग किया जाता था
भारत में नील की खेती दो प्रकार की होती है-निज और रैयती।
एलेक्ज़ेंडर रीड और थॉमस मुनरो रैयतवाड़ी प्रणाली के विस्तार में सम्मिलित दो व्यक्ति थे, इस प्रणाली को मुनरो व्यवस्था के रूप में भी जाना जाता है।
मुगल सम्राट ने 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल के दीवान के रूप में नियुक्त किया गया था।
भारतीय कारीगरों को कम कीमत पर कंपनी को अपना माल बेचने के लिए बाध्य किया गया था।
1770 के दौरान बंगाल में एक भीषण अकाल पड़ा था,जिसमें आबादी के एक-तिहाई हिस्से का सफाया हो गया था।
राजा और तालुकदारों को स्थायी बंदोबस्त अधिनियम के तहत जमींदार के रूप में मान्यता दी गई थी ।
यूरोपीय देश-फ्रांस, इटली और ब्रिटेन के द्वारा भारतीय इंडिगो( नील) का प्रयोग किया जाता था।
1-8, 2 -7, 3 -10 , 4 -9 , 5 -12, 6 -11
एक बागान,बागान-मालिक (आमतौर पर स्वतंत्रता से पूर्व अंग्रेज) द्वारा बेगार के विभिन्न रूपों का उपयोग करके प्रबंधित किया जाने वाला एक बड़ा खेत होता है
उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध
कपड़ा रंगरेज, डाई हेतु, नील को वोड से अधिक प्राथमिकता देते थे, क्योंकि नील से उत्त्पन्न रंग गहरा नीला होता है, जबकि वोड से की जाने वाली डाई का रंग पीला एवं हल्का होता था
A. हिमाचल प्रदेश
B. पंजाब
C. कश्मीर
D. सिक्किम
कश्मीर के बकरवाल बकरियां चरहने वाली समुदाय है।
A. 19 वीं सदी
B. 18 वीं सदी
C. 17वीं सदी
D. 16वीं सदी
जनजातीय लोग मुख्य रूप से असम क्षेत्र में चाय बागानों में भर्ती थे।
A. पंजाब
B. सिक्किम
C. आंध्र प्रदेश
D. कुल्लू
यह जनजाति चरवाहे थे।
A. मध्य भारत
B. पूर्वी भारत
C. पश्चिमी भारत
D. दक्षिण भारत
यह जनजाति महत्वपूर्ण वनवासियों में से एक था।
A. साल और महुआ बीज
B. गुलमोहर और पलाश बीज
C. अमलतास और जब्रंद बीज
D. टेसू और कुसुम बीज
आदिवासियों के जीवन पूरी तरह जंगल से इकट्ठा किए गए संसाधनोंपर निर्भर रहता था ।
A. बिहार
B. उड़ीशा
C. बंगाल
D. झारखण्ड
खोंड़ जनजाति शिकारी थे।
A. उत्तर-पूर्वी भारत
B. पश्चिमी भारत
C. दक्षिण भारत
D. दक्षिण पश्चिमी भारत
भारतीय महाद्वीप के इस प्रांत में पहाड़ी और गहरा जंगलों से घिरा है।
A. गोंड जनजाति
B. ओरांवजनजाति
C. बैगा जनजाति
D. नागा जनजाति
बिरसा मुंडा की मांग अन्य आदिवासी समुदायों को भी प्रोत्साहित किया।
A. बिहार
B. वैशाली –उड़ीशा
C. बेगू साराय- बिहार
D. कालाहांडी - उड़ीशा
वे छोटानागपुर अंचल के मुंडा जनजाति से सम्बंधित थे ।
A. संथाल जनजाति
B. मुंडा जनजाति
C. गारो जनजाति
D. बोडो जनजाति
बिरसा मुंडा (1875-1900) एक आदिवासी नेता और एक लोक नायक थे, वे मुंडा जनजाति से संबंधित।
'परती' भूमी का एक प्रकार होता है, जिसे कुछ वर्षों के लिए बिना खेती के छोड़ दिया जाता है, ताकि मिट्टी की उर्वरता को पुनः प्राप्त किया जा सके, और भूमि को पुनः उपयोग में लाया जा सके
यूरोपीय बाजारों में भारतीय रेशम की बहोत अधिक मांग थी,झारखंड के संथाल कोकून(कच्चे रेशम का कोवा) पालते थे, और उन्हें निर्यातकों और रेशम उत्पादकों के मध्य कार्यरत बिचौलियों द्वारा एक हजार कोकूनों के लिए 3 रुपये से 4 रुपये तक का भुगतान किया जाता था, उनके द्वारा भी अधिक लाभ अर्जित किया जाता था।
स्वर्ण युग की बिरसा की दृष्टि, अतीत की पुनः प्राप्ति करना था जो वह काल हुआ करता था जब, मुंडा अच्छा जीवन व्यतीत किया करते थे, तटबंधों निर्माण किया करते थे, प्राकृतिक झरने निकालते थे, वृक्ष एवं बगीचे लगाते थे, और बगीचों, उनके जीविकोपार्जन हेतु खेती किया करते थे
बैसाख मास के दौरान,जंगल जलने लगते थे, उस दौरान महिलाएं बिना जली हुई लकड़ियाँ चूल्हे में जलाने हेतु एकत्र करने के लिए जाया करती थीं,पुरुष गाँव के समीप शिकार करने के लिए जाया करते थे
1. जनजातियों के रीति-रिवाज़ एवं प्रथाएं ब्राह्मणों से बहुत अधिक भिन्न थीं ।
2. उनमें, जाति व्यवस्था पर आधारित कोई स्पष्ट सामाजिक विभाजन नहीं था,जिसका ब्राह्मणों द्वारा अनुसरण किया जाता था।
शब्द 'बेवर" का उपयोग मध्य प्रदेश में स्थानांतरित कृषि हेतु किया जाता है
भगवान विष्णु के उपासक वैष्णव के रूप में पहचाने जाते हैं
पंजाब पहाड़ियों के वन गुर्जर, चरवाहे थे और कश्मीर के बकरवाल बकरियों को पालते थे ।
जनजातीय समूह, जो झूम खेती जो कि स्थानांतरित खेती होती थी, किया करते थे, वे 'झूम किसान' के रूप में पहचाने जाते थे।
बिरसा, मुंडा परिवार से सम्बंधित,छोटानागपुर में निवास करने वाले एक आदिवासी समूह के थे।
वॉरेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में मदरसे की नींव रखी थी ।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन संस्था शुरू की थी।
ब्रिटिश सरकार ने लोगों को सभ्य बनाने और उनकी रुचि, मूल्यों और संस्कृति को बदलने के क्रम में भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार हेतु प्रयास किए थे।
वर्नाक्यूलर शब्द का प्रयोग साधारणतः मानक भाषा से पृथक रूप में एक स्थानीय भाषा अथवा बोली के सन्दर्भ में किया जाता है।
भारत में विश्वविद्यालय शिक्षा की स्थापना के लिए वुड्स डिस्पैच रिपोर्ट द्वारा प्रावधान निर्धारित किये गए थे।
वुड्स डिस्पैच ने 1854 ई० में स्थानीय भाषा में परीक्षाओं की आवश्यकता का प्रस्ताव रखा था।
थॉमस बेबिंगटन मैकाले, जो सर्वदा पश्चिमी विज्ञान और सभ्यता की समृद्धि की वकालत किया करते थे, ने यह कहा था।
बंबई, कलकत्ता और मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना, वर्ष 1857 ई० में की गई थी।
प्राच्यविद विद्वान थे, जिन्हें एशिया की भाषा और संस्कृति का विद्वतापूर्ण ज्ञान था।
कोलब्रूक एवं नथानिएल हल्हेड ने सर विलियम जोन्स की बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना करने में सहायता की थी।
विलियम जोन्स, अंग्रेजों द्वारा भारत में स्थापित किये गए उच्चतम न्यायालय में कनिष्ठ न्यायाधीश थे।
वॉरेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में मदरसे की नींव रखी थी ।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन संस्था शुरू की थी।
ब्रिटिश सरकार ने लोगों को सभ्य बनाने और उनकी रुचि, मूल्यों और संस्कृति को बदलने के क्रम में भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार हेतु प्रयास किए थे।
महात्मा गांधी की दृढ़ मान्यता थी कि शिक्षा केवल भारतीय भाषाओं में ही दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक अंग्रेजी में दी जा रही शिक्षा भारतीयों को अपाहिज बना देती है, उसने उन्हें अपने सामाजिक परिवेश से काट दिया है और उन्हें अपनी ही भूमि पर अजनबी बना दिया है।
गांधीजी ने पश्चिमी सभ्यता और उसके द्वारा मशीनों और तकनीक की प्रशंसा की आलोचना की। टैगोर आधुनिक पश्चिमी सभ्यता और भारतीय परंपरा के श्रेष्ठ तत्वों का सम्मिश्रण चाहते थे। उन्होंने शांतिनिकेतन में कला, संगीत और नृत्य के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शिक्षा पर भी जोर दिया।
विलियम एडम ईसाई प्रचारक थे उन्होंने बंगाल और बिहार के जिलों का दौरा किया था। कंपनी ने उन्हें देशी स्कुलों में शिक्षा की प्रगति पर रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा था।
1854 के बाद वर्नाक्यूलर शिक्षा प्रणाली में सुधार हेतु कंपनी द्वारा विभिन्न कदम उठाए गए थे। वर्नाक्यूलर शिक्षा प्रणाली के भीतर नई व्यवस्था पेश की गई।कंपनी द्वारा एक नई दिनचर्या, नए नियम और नियमित निरीक्षण लागु किए गए ।
1781 में अरबी, फारसी, इस्लामिक कानून के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए कलकत्ता में एक मदरसा खोला गया ताकी मुसलमान एक अधिकारी के रुप में प्रशासनिक एवं न्यायिक संचालन हेतु अपने उत्तरदायित्व निभा सकें।
यूरोपीय व्यापार कंपनियों जैसे कि डच, फ्रेंच और अंग्रेज ने चांदी के आयात द्वारा भारत से कपास और रेशम का क्रय किया था, जब अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल में अपनी राजनीतिक सत्ता की स्थापना की थी, तब उसने भारतीय माल खरीदने के लिए कीमती धातुओं का आयात नहीं किया था, बल्कि भारत में किसानों और जमींदारों से कर के रूप में एकत्र राजस्व का प्रयोग किया था।
भारतीय वस्त्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए, इंग्लैंड में तकनीकी नवाचार की आवश्यकता थी, इसका परिणाम दो महत्वपूर्ण नवाचारों के रूप में हुआ, पहला, 1764 में जॉन के द्वारा, वस्त्र- उद्योग में सूत कातने के चरखे (स्पिनिंग जेनी) का उपयोग था और दूसरा जेम्स वाट ने भाप के इंजन का आविष्कार किया था, और1786 में रिचर्ड आर्कराइट द्वारा वस्त्र-उद्योगों में इसके उपयोग ने कपास बुनाई के क्षेत्र में इसकी मात्रा में अभिवृद्धि कर क्रांति ला दी थी
यूरोपीय व्यापार कंपनियों जैसे कि डच, फ्रेंच और अंग्रेज ने चांदी के आयात द्वारा भारत से कपास और रेशम का क्रय किया था, जब अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल में अपनी राजनीतिक सत्ता की स्थापना की थी, तब उसने भारतीय माल खरीदने के लिए कीमती धातुओं का आयात नहीं किया था, बल्कि भारत में किसानों और जमींदारों से कर के रूप में एकत्र राजस्व का प्रयोग किया था।
भारतीय वस्त्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए, इंग्लैंड में तकनीकी नवाचार की आवश्यकता थी। इसका परिणाम दो महत्वपूर्ण नवाचारों के रूप में हुआ। पहला, 1764 ई० में जॉन के द्वारा, वस्त्र- उद्योग में सूत कातने के चरखे (स्पिनिंग जेनी) का उपयोग था और दूसरा जेम्स वाट ने भाप के इंजन का आविष्कार किया था, और 1786 ई० में रिचर्ड आर्कराइट द्वारा वस्त्र-उद्योगों में इसके उपयोग ने कपास बुनाई के क्षेत्र में इसकी मात्रा में अभिवृद्धि कर क्रांति ला दी थी।
2) सूती वस्त्रों अथवा खादी पर उनके अत्यधिक दबाव के कारण, यह भारत में राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1931 ई० में तिरंगा ध्वज के केंद्र में चरखे को स्थान दिया।