घर पर प्रयुक्त किये जाने वाले संसाधन –बर्तन, सब्जी,विद्युत,जल एवेम वस्त्र| कक्षा में प्रयुक्त किये जाने वाले संसाधन –चाक,ब्लैक बोर्ड ,कुर्सी, किताबें,कम्प्यूटर व स्टेशनरी
संसाधनों की वह संख्या जो उपयोग के लिए उपलब्ध हो |
संसाधनों के संरक्षण का सबसे अच्छा तरीका उनका उपयोग कम से कम करना, पुनर्चक्रण एवं पुन प्रयोग करना है |
मानव संसाधान विकास का अर्थ मानवीय क्षमताओं की गुणवत्ता के विकास द्वारा संसाधनों का निर्माण करना है|
पेटेंट का अर्थ किसी विचार या खोज पर सम्पूर्ण अधिकार होता है |
तकनीक मानव जनित संसाधन है |
संसाधन प्राकृतिक एवेम मानवीय सम्पदा है जो मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति करता है|
उद्गम के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण –
1.अजैविक संसाधन - यह पर्यावरण के अजीवित घटक हैं | जैसे –मृदा 2.जैविक संसाधन – यह पर्यावरण के जीवित घटक हैं| जैसे – पौधे एवम जंतु|
संसाधनों की दो मुख्य विशेषताएँ हैं- 1.उपयोगिता –इसका अर्थ उपयोग एवं किसी वस्तु या पदार्थ का यह उपयोग उसे संसाधन बनाता है |
2.मूल्य – इसका अर्थ महत्त्व है, जो आर्थिक या गैर आर्थिक महत्त्व का हो सकता है |
प्रकृति में मौजूद पदार्थ जिन्हें मानव जरूरतों की पूर्ति हेतु यथा रूप में उपयोग किया जा सके प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं | उदहारण –जल एवं भूमि|
संसाधनों के वितरण को प्रभावित करने वाले दो भौगोलिक कारक-
1.जलवायु
2.तराई
हमारे पर्यावरण में संसाधन बेहद सीमित मात्रा में हैं, समय व तकनीक के साथ मानव की आवश्यकताएं लगातार बढ़ रही हैं जिससे संसाधनों का अपक्षय हो रहा है, यह हमारेआर्थिक विकास में भी बाधक हो सकती है | अतः यह बेहद जरुरी है की वर्तमान आर्थिक विकास के लिए संसाधनों के संरक्षण के साथ ही भावी पीढ़ी के विकास के लिए भी इनका संरक्षण किया जाए |
संसाधन संरक्षण के तीन चरण हैं- 1.गैर नवीकृत संसाधनों का प्रयोग कम से कम करना|
2.प्रयुक्त संसाधनों का पुनः चक्रण करना |
3.संसाधनों का पुनः प्रयोग करना |
A.
भारत
B.
रूस
C.
जापान
D.
चीन
जापान की 67% भूमि पर वन हैं।
A.
उत्तर प्रदेश
B.
कर्नाटक
C.
आंध्र प्रदेश
D.
असम
यह असम के नगांव जिले के गोलाघाट में स्थित है और इसे वर्ष 1974 में स्थापित किया गया था।
A.
जल संरक्षण
B.
वन संरक्षण
C.
मृदा संरक्षण
D.
वायु संरक्षण
वन महोत्सव, वन संरक्षण और जागरूकता के लिए एक क्षेत्रीय और सामुदायिक स्तर का कार्यक्रम है।
A.
प्रति दिन प्रति व्यक्ति 132 लीटर
B.
प्रति दिन प्रति व्यक्ति 133 लीटर
C.
प्रति दिन प्रति व्यक्ति 134 लीटर
D.
प्रति दिन प्रति व्यक्ति 150 लीटर
शहर में रहने वाले एक भारतीय नागरिक को प्रतिदिन औसतन आवश्यक जल की मात्रा लगभग 150 लीटर है। शहरीकरण की उच्च दर के कारण, पानी की मांग काफी बढ़ गई है।
एक वर्ष में एक टपकते नल कचरे 1200 लीटर पानी व्यर्थ हो जाता है।
सौराष्ट्र क्षेत्र में अमरेली शहर 1.25 लाख की जनसंख्या पानी के क्रय पर पूरी तरह से निर्भर है।
प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवों का संपर्क स्थलमंडल, जलमंडल और वातावरण के बीच संकीर्ण क्षेत्र में मौजूद हैं इस क्षेत्र को जैवमंडल के रूप में जाना जाता है।
पौधे जो मानव हस्तक्षेप के बिना क्षेत्र में विकसित हो जाती है उन्हें प्राकृतिक वनस्पति के रूप में जाना जाता है।
ये तापमान, ठंड, पौधों, जानवरों और मनुष्य में परिवर्तन के कारण खस्ताहाल चट्टानों को तोड़ने और कमी से संदर्भित है।
सीपीआर का मतलब सामुदायिक संपत्ति संसाधन से है। वे सामान्यतः समुदाय द्वारा भूमि पर स्वामित्व रखते हैं जैसे पार्क, शादी हॉल, बढ़ते क्षेत्र आदि।
यह एक जागरूकता कार्यक्रम है जो वृक्षारोपण को बढ़ावा देता है। यह जुलाई के पहले हफ्ते में हर साल मनाया जाता है।
बायोस्फीयर रिजर्व संरक्षित क्षेत्रों की एक श्रृंखला है, संरक्षण और विकास के बीच सम्बन्ध को प्रदर्शित करने का इरादे से एक वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से जुड़ा हुआ है।
अक्षांश के आधार पर वन 2 प्रकार के होते हैं:
1. उष्णकटिबंधीय।
2. शीतोष्ण।
यह मिट्टी में रंग, बनावट, रासायनिक गुणों, खनिज सामग्री और पारगम्यता को निर्धारित करती है।
मिट्टी ह्यूमस के साथ स्थलमंडल की सबसे ऊपरी परत है।
पानी की कमी के लिए जिम्मेदार मुख्य कारक हैं:
1) बढ़ती आबादी
2) बढ़ता शहरीकरण
3) नकदी फसलों के लिए मांग
4) बढ़ता औद्योगीकरण।
पृथ्वी पर कुल पानी की 97.3% महासागरों में उपलब्ध है। महासागर पानी की खपत के लिए उपयुक्त नहीं है यह खारा है। ताजा पानी केवल 2.7% है। इसका 70% बर्फ की चादर और ग्लेशियरों के रूप में है। वे दुर्गम हैं। ताजा पानी का केवल 1% मानव उपभोग के लिए उपलब्ध है और उपयुक्त है। यह नदियों, झीलों, तालाबों में और वातावरण में जल वाष्प के रूप में पाया जाता है।
जल पृथ्वी की सतह पर 71% पर पाया जाता है और केवल 29% क्षेत्र भूमि से आच्छादित है। पृथ्वी अंतरिक्ष से पानी की उपस्थिति के कारण नीले रंग की दिखती है। इसीलिए पृथ्वी नीला ग्रह कहा जाता है।
पौधों का उपयोग कुछ इस प्रकार हैं:
I) लकड़ी प्रदान करते है।
II) जानवरों को शरण देते है।
III) हमारे सांस के लेने के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन करते है।
IV) मिट्टी को सुरक्षित रखते है।
V) भूमिगत पानी के भंडारण में मदद करते है।
VI) हमें सूखे मेवे, फल, दवाई आदि प्रदान करते है।
कृषि और निर्माण गतिविधियों के विस्तार के कारण कुछ प्रमुख खतरे हैं:
1. भूमि गिरावट
2. भूस्खलन
3. मिट्टी का कटाव
4. मरुस्थलीकरण।
1.केंद्रीय सूची- में कराधान, रक्षा और विदेशी मामलों आदि को रखा गया। ये ऐसे विषय थे जो केवल केंद्र सरकार के अधीन थे।
2.राज्य सूची-में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषय लिए गए जिनकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों के उपर थी।
3 समवर्ती सूची- में वन एवं कृषि आदि ऐसे विषयों को रखा गया जिनके बारे में केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों संयुक्त रूप से फैसला ले सकते थे।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर एक महान राष्ट्रवादी, राजनीतिक विचारक और सुधारक थे। उन्होंने संविधान तैयार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । डॉ. बी.आर. अम्बेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया गया था। उनके विचार में संविधान देश के शासन के लिए सिर्फ बुनियादी कानून नहीं था बल्कि यह देश की प्रगति का एक वाहन था।
जब भारत आजाद हुआ तो उसके सामने कई बड़ी चुनौतियाँ थी। स्वतंत्रता के समय भारत की एक विशाल संख्या गाँवों में रहती थी। आजीविका के लिए किसान और काश्तकार बारिश पर निर्भर रहते थे। शहरों में फैक्ट्री मजदूर भीड़ भरी झुग्गी बस्तियों में रहते थे जहाँ शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं की खास व्यवस्था नहीं थी। नए राष्ट्र के लिए इस विशाल आबादी को गरीबी के चंगुल से निकालने के लिए न केवल खेती की उपज बढ़ाना जरूरी था बल्कि नए उद्योगों का निर्माण भी करना था जहाँ लोगों को रोजगार मिल सके।
पोट्टी श्रीरामुलु आँध्रप्रदेश में एक गांधीवादी नेता थे । पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलुगूभाषियों के लिए आंध्र राज्य के गठन की माँग की थी और इसी मांग को पूरा कराने के लिए उन्होंने अनशन किया था ।
स्वतंत्रता के तत्काल बाद भारत के सामने आने वाली दो प्रमुख समस्याएं-एकता को बनाए रखने और राष्ट्र के विकास को सुनिश्चित करने की थी।
1.भारतीय संविधान द्वारा अपने सभी नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, यानी प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार दिया गया था। सभी नागरिकों को उनके स्वयं के प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए समान अधिकार प्राप्त हुआ था।
2 सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को एक क्रांतिकारी कदम माना गया था क्योंकि इससे पहले कभी भी भारतीयों को स्वयं अपने नेता चुनने का अधिकार नहीं मिला था।
3 इसने देश के सभी स्त्री-पुरुषों को भले ही वे अमीर हों या गरीब, पढ़े लिखे हों या अनपढ़ स्वयं अपने नेता चुनने का अधिकार दिया ।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के अंगीकरण को लोकतंत्र की आधारशिला के रूप में माना जाता है।
1) केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के मध्य मतभेदों को दूर करने के लिए संविधान में विभिन्न विषयों को तीन सूचियों - केंद्रीय सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में बाँट दिया गया।
2) प्रशासन के विभिन्न विषयों को बिना देरी किए इन तीन सूचियों में बाँट दिया गया।
3) केंद्रीय सूची के विषय केवल केंद्र सरकार के अधीन थे। राज्य सूची के विषयों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों के उपर थी। समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों संयुक्त रूप से फैसला ले सकते थे।
1.आंध्र की स्थापना के बाद अन्य भाषायी समुदाय भी अपने-अपने अलग राज्यों की माँग करने लगे। फलस्वरूप एक राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया।
2.जिसने1956 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। आयोग ने सुझाव दिया कि भाषाई आधार पर प्रांतों की सीमा को पुनः तय किया जाए।
3.असमिया, बंगला, उडि़या, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगू भाषियों को उनकी भाषा के आधार पर संगठित किया गया।
१. केंद्र और राज्य सरकार के सत्ता के बंटवारे को लेकर चल रहे संघर्ष में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची, द्वारा हल निकला:
२. शासन के विषयों को सरसरी तौर पर इन सूचियों में विभाजित किया गया।
३. संघ सूची केन्द्र सरकार के अंतर्गत विषयों और राज्य सूची राज्य सरकार के तहत विषयों के लिए आरक्षित थे। हालांकि, दोनों केन्द्र और राज्य सरकार को समवर्ती सूची में उल्लिखित विषयों पर विधान पारित कर सकता है ।
१. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, अर्थात, प्रत्येक वयस्क नागरिक को वोट करने की शक्ति भारतीय संविधान द्वारा सभी नागरिकों को प्रदान की गई थी। सभी नागरिक अपने स्वयं के प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए बराबर का अधिकार रखते है ।
२. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में माना जाता था क्योंकि पहले कभी भी भारतीयों को अपने ही नेताओं को चुनने के लिए अनुमति दी गई थी ।
३. यह प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है चाहे व्यक्ति अनपढ़ या साक्षर, अमीर या गरीब हो वह अपने नेता चुनने के लिए अपना मत डाल सकता है।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को लोकतंत्र की आधारशिला के रूप में माना जाता है।
समाज में स्वतंत्रता के ६३ साल बाद भी गहरी असमानता जारी है।
१. संवैधानिक गारंटी के बावजूद आज भी अछूत और दलितों से भेदभाव कीया जाता हैं।
२. कई जगहों पर जैसे जल स्रोतों, मंदिरों, पार्क और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर उनका बहिष्कार किया जाता है ।
३. धर्मनिरपेक्ष आदर्शों के बावजूद, कई राज्यों में अलग-अलग जाति समूहों के बीच संघर्ष होता है।
निचे दिये गए निम्नलिखित मुद्दों पर सविंधान सभा में विचार विमर्श किया गया: १. अल्प सुविधाप्राप्त समूह की समस्याएं - आदिवासियों व कमजोर वर्ग के लोगों के लिये विशेष अधिकारो के तहत विधायिकाओं के नौकरीयों में स्थान सुरक्षित करने के लिए उनके पर्तिनिधियो ने अपनी आवाज उठाई थी
२. राष्ट्रीय भाषा का मुद्दा राष्ट्रीय भाषा के चयन - के मुद्दे पर काफी बहस हुई । क्षेत्रीय राज्य हिंदी को सर्वोच्च भाषा के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे | उन्होंने हिंदी भाषा को उनकी सांस्कृतिक और भाषाई स्वतंत्रता पर अतिक्रमण के रूप में लिया।
३. केंद्र और राज्य के बीच सत्ता के बंटवारे- राज्यों के पर्तिनिधियो को लगा कि वे आय के पर्याप्त संसाधन प्राप्त करने में सक्षम नहीं होगे इसलिए वे केंद्र को ज्यादा शक्ति देने के लिए तैयार नहीं थे।
४. राज्यों का पुर्नगठन – जनता ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुर्नगठन की मांग की
1.भारतीय संविधान द्वारा अपने सभी नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, यानी प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार दिया गया था। सभी नागरिकों को उनके स्वयं के प्रतिनिधियों का चुनाव करने के लिए समान अधिकार प्राप्त हुआ था।
2 सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को एक क्रांतिकारी कदम माना गया था क्योंकि इससे पहले कभी भी भारतीयों को स्वयं अपने नेता चुनने का अधिकार नहीं मिला था।
3 इसने देश के सभी स्त्री-पुरुषों को भले ही वे अमीर हों या गरीब, पढ़े लिखे हों या अनपढ़ स्वयं अपने नेता चुनने का अधिकार दिया ।
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के अंगीकरण को लोकतंत्र की आधारशिला के रूप में माना जाता है।
1) केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के मध्य मतभेदों को दूर करने के लिए संविधान में विभिन्न विषयों को तीन सूचियों - केंद्रीय सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में बाँट दिया गया।
2) प्रशासन के विभिन्न विषयों को बिना देरी किए इन तीन सूचियों में बाँट दिया गया।
3) केंद्रीय सूची के विषय केवल केंद्र सरकार के अधीन थे। राज्य सूची के विषयों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों के उपर थी। समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों संयुक्त रूप से फैसला ले सकते थे।
1.आंध्र की स्थापना के बाद अन्य भाषायी समुदाय भी अपने-अपने अलग राज्यों की माँग करने लगे। फलस्वरूप एक राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया।
2.जिसने1956 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। आयोग ने सुझाव दिया कि भाषाई आधार पर प्रांतों की सीमा को पुनः तय किया जाए।
3.असमिया, बंगला, उडि़या, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगू भाषियों को उनकी भाषा के आधार पर संगठित किया गया।
अगस्त 1947 में भारत आज़ाद हुआ और देश भारत एवं पाकिस्तान नामक दो पृथक देशों में विभाजित हो गया।
सीमा पार से बड़ी संख्या में लोगों ने भारत आना शुरू कर दिया। इन लोगों के लिए रहने का इंतजाम करना और उन्हें रोजगार देना जरूरी था।
1 इसके बाद रियासतों की समस्या थी। तकरीबन 500 रियासतें राजाओं या नवाबों के शासन में चल रही थीं। जो स्वतत्रं रुप से शासन करने का सपना संजोएँ थीं। इन सभी को नए राष्ट्र में शामिल होने के लिए तैयार करना एक टेढ़ा काम था।
2 शरणार्थियों और रियासतों की समस्या पर सरकार द्धारा तुरन्त ध्यान देना आवश्यक था।
3 हालांकि, स्वतंत्रता के तत्काल बाद भारत के सामने आने वाली दो प्रमुख समस्याएं- एकता को बनाए रखने और राष्ट्र के विकास को सुनिश्चित करने की थी।
1. पोट्टी श्रीरामुलु कौन थे? वह क्यों प्रसिद्ध थे ?
2. उनकी क्या मांग थी?
3. आंध्र राज्य का गठन कब किया गया था?
1.पोट्टी श्रीरामुलु गांधीवादी नेता थे । वयोवृद्ध गांधीवादी पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगूभाषियों के हितों की रक्षा के लिए आंध्र राज्य के गठन की माँग करते हुए भूख हड़ताल पर बैठ गए। जैसे-जैसे अनशन आगे बढ़ा, बहुत सारे लोग श्रीरामुलु के समर्थन में आगे आने लगे। और उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।
2. गांधीवादी पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलुगूभाषियों के हितों की रक्षा के लिए आंध्र राज्य के गठन की माँग करी थी ।
3. 58 दिन के अनशन के बाद 15 दिसंबर1952 को पोट्टी श्रीरामुलु का देहांत हो गया। जैसा कि एक अखबार ने लिखा था, श्रीरामुलु के देहांत की खबर ने पूरे आंध्र को अस्त-व्यस्त कर डाला। विरोध इतना व्यापक और गहरा था कि केंद्र सरकार को आखिरकार यह माँग माननी पड़ी। इस तरह, 1 अक्तूबर 1953 को आंध्र के रूप में एक नए राज्य का गठन हुआ, जो बाद में आंध्र प्रदेश बना।
1.भारत को एक ‘‘स्वतंत्र सम्प्रभु गणराज्य घोषित किया गया। 2. अल्पसंख्यकों, पिछड़े व जनजातीय क्षेत्रों व दमित व अन्य पिछड़े वर्गो के लिए पर्याप्त रक्षात्मक प्रावधान किए जाएँगे। 3. समस्त नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता व न्याय का आश्वासन दिया गया। 4. लोकतंत्र के उदारवादी विचारों व आर्थिक न्याय के समाजवादी विचारों का मेल किया जाएगा व भारतीय संदर्भ में इनकी रचनात्मक व्याख्या की जाएगी।
लम्बे विचार-विमर्श के बाद भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। भारत का संविधान तैयार करने हेतु बहुत सारी राजनीतिक पार्टियां एकजुट हो गई। इसकी जो विशेषताएं लागू की गई वो इस प्रकार थीं-
1. उसमें सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया था। इसका मतलब यह था कि: 21 साल से ज्यादा उम्र के सभी भारतीयों को प्रांतीय और राष्ट्रीय चुनावों में वोट देने का अधिकार था। भारतीयों को खुद अपने नेता चुनने का अधिकार मिल गया।
2. संविधान की दूसरी विशेषता यह थी कि उसमें तमाम जातियों, धर्मों या किसी भी तरह की पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले सभी नागरिकों को कानून की नजर में समान माना गया था।
3. तीसरी विशेषता यह थी कि इसमें समाज के अछूतों, निर्धन और सबसे वंचित तबकों के लिए भारत के संविधान द्वारा विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। आदिवासियों या अनुसूचित जनजातियों को भी विधायिका और नौकरियों में आरक्षण दिया गया था।
4. राज्य और केंद्र के मध्य शक्तियों का संतुलित बंटवारा लागू करने के लिए संविधान में विभिन्न विषयों को तीन सूचियों में बाँट दिया गया। केंद्रीय सूची- इसके विषय केवल केंद्र सरकार के अधीन थे। राज्य सूची के विषयों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों के उपर थी। समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों संयुक्त रूप से फैसला ले सकते थे।
संसाधनों को उपयोगी बनाबे में तकनीक महती भूमिका निभा सकती है| तकनीक शब्द अपने में लोगों की वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता को संयोजित करती है | प्रत्येक संसाधन मानव मात्र के लिए उपयोगी है लेकिन उसका मानव के लिए उपयोग उचित तकनीक के आधार पर निर्भर करता है | जैसे बहते पानी को जलविद्युत में बदलना |
संसाधनों की बचत एवेम संरक्षण के लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा की -
1.सभी उपयोगों अक्षय संसाधनों को बनाये रखा जाना चाहिए |
2.पृथ्वी पर स्थित जैव विभिन्नताओं का संरक्षण किया जाए |
3. प्राकृतिक पर्यावरण तंत्र को कम से कम हानि पहुंचाइ जाए |
प्राकृतिक संसाधनों का विभिन्न आधारों पर वर्गीकरण
1.विकास के स्तर के आधार पर-
a.वास्तविक संसाधन –उदाहरण के लिए –छोटा नागपुर के पठार पर स्थित कोयला क्षेत्र |
b.संभावित संसाधन-उदाहरण के लिए -लद्दाख में युरेनियम के भण्डार |
2.उद्गम के आधार पर
a.अजैविक संसाधन-उदाहरण के लिए-पत्थर
b.जैविक संसाधन-उदाहरण के लिए-पौधे
3.भण्डारण के आधार पर
a.नवीकृत संसाधन- जैसे – पवन, जल
b.गैर नवीकृत संसाधन – उदाहरण के लिए – कोयला , पेट्रोलियम|
4.विकास के आधार पर
a.सर्वव्यापक - उदाहरण के लिए –पवन|
b.स्थानीय - उदाहरण के लिए -पेट्रोलियम
भण्डारण की दृष्टि से प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण-
1.नवीकृत संसाधन – वह प्राकृतिक संसाधन जो मात्रा की दृष्टि से असीमित हैं व जो थोड़े ही समय में फिर से भर जाते हैं नवीकृत संसाधन कहलाते हैं | जैसे – पवन, जल|
2.गैर नवीकृत संसाधन – वह प्राकृतिक संसाधन जो मात्रा की दृष्टि से बेहद सीमित हैं व जिनको भरने में बेहद अधिक समय लगता है | जैसे – कोयला , पेट्रोलियम|
A.
कचरा
B.
जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट
C.
मानव अपशिष्ट
D.
अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट
अपघटक बचे हुए जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट का अपघटन करते हैं। अपघटक वे जीव होते हैं जो पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।
A.
शैलों के टूटने और बनने के द्वारा
B.
शैलों के टूटने और क्षय के द्वारा
C.
कठोर शैलों के मृदु शैलों में परिवर्तन होने के द्वारा
D.
मृदु शैलों के कठोर शैलों में परिवर्तन के द्वारा
यह मृदा निर्माण की एक प्रक्रिया है जो मौसमी कारकों की मदद से कठोर शैलों को छोटे कणों में तोड़ती है।
A.
वन और कवक
B.
वन, घास के मैदान और झाड़ी
C.
वन, घास के मैदान और कवक
D.
वन, घास के मैदान, कवक और शैवाल
वन और घास के मैदान प्राकृतिक वनस्पति के दो मुख्य वर्ग हैं।
A.
घड़ा सिंचाई
B.
स्प्रिंकलर सिंचाई
C.
नलकूप सिंचाई
D.
टपकन सिंचाई
रिसाव और वाष्पीकरण से होने वाली जल क्षति को रोकने के लिए स्प्रिंकलरों से सिंचाई करना अधिक प्रभावी विधि है।
A.
रूस
B.
उप सहारा अफ्रीका
C.
दक्षिण अमेरिका
D.
उत्तरी अमेरिका
अजगर अधिकांश तौर पर उप-सहारा अफ्रीका, नेपाल, भारत, बर्मा, दक्षिणी चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं।
A.
मोर
B.
बकरी
C.
बंदर
D.
भैंस
वे जानवर, जो विश्व में विलुप्त या लुप्तप्राय श्रेणी के अंतर्गत आते हैं उन्हें कानूनी तौर पर मारने से प्रतिबंधित किया गया है। उदाहरण के लिए: मोर, काला हिरन, शेर, आदि।
A.
जैव मंडल भण्डार
B.
राष्ट्रीय उद्यान
C.
सामजिक वानिकी
D.
वन महोत्सव
वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी के लिए एक या एक से अधिक पारितंत्रों की पारिस्थितिक एकता की रक्षा के लिए नामित किये गए प्राकृतिक क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में जाना जाता है।
A.
भारी वर्षा वाले क्षेत्र
B.
तटवर्ती क्षेत्र
C.
पहाड़ी क्षेत्र
D.
मैदानी क्षेत्र
तटीय प्रदेशों और शुष्क प्रदेशों में पवन गति रोकने के लिए वृक्ष कतारों में लगाए जाते हैं ताकि मृदा आवरण को बचाया जा सके।
A.
10%.
B.
0.1%.
C.
0.001%.
D.
0.01%.
वायुमंडल वह परत होती है जो हमारे ग्रह को आच्छादित किये हुए है। जल वाष्प का एक छोटा सा प्रतिशत ( 0.001% के आसपास) यहाँ हमेशा मौजूद रहता है।
A.
मृदा
B.
जल
C.
भूमि
D.
वायु
जल ही एक तत्व है जो पृथ्वी की सतह पर सभी रूपों अर्थात ठोस, द्रव और गैसीय अवस्था में पाया जाता है।
A.
ब्राजील
B.
चीन
C.
भारत
D.
जापान
चीन की 10%, जापान की 12% और ब्राजील की 9% खेती योग्य भूमि की तुलना में भारत की 57% भूमि फसल के योग्य है।
A.
नमक
B.
विघटित कैल्शियम कार्बोनेट
C.
लोहा
D.
सीसा
सीसा तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत खतरनाक होता है। हालांकि जल शोधक सीसे के मिश्रण को हटा देते हैं, पर जल शोधन प्रणाली में सीसे के कणों का अवशोषण हो जाता है। इसलिए समय-समय पर जल शोधकों को बदलते रहने की आवश्यकता होती है।
A.
पेट्रोल का रिसाव
B.
धातुएँ
C.
कीटनाशक
D.
मृदा अपरदन
जल और मृदा दोनों तेल के फैलने एवं रिसाव से प्रदूषित होते हैं। तेल रिसाव प्रमुख जल प्रदूषक है।
A.
वनों की कटाई
B.
भूमंडलीय ताप
C.
गुर्दे में क्षति
D.
भोजन की कमी
डिक्लोफेनाक दवा देकर इलाज किए गए पशुधन के खाने से गिद्धों के गुर्दे में भारी क्षति पहुँचने से उनकी मौत हो रही है।
A.
सदाबहार वर्षावन
B.
पर्णपाती वन
C.
पर्वतीय वन
D.
रेगिस्तानी वन
100 - 200 सेमी वर्षा के श्रेणी में आने वाले लगभग सभी राज्यों में पर्णपाती वन पाए जाते हैं। इसलिए सम्पूर्ण देश इसके अंतर्गत आता है।
A.
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान
B.
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
C.
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
D.
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान
जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1936 में हेली राष्ट्रीय उद्यान के रूप में की गई थी। बाद में इसका नाम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया। इसकी स्थापना में प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्बेट का महत्वपूर्ण योगदान था। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। यह उद्यान लुप्तप्रायः बंगाल टाइगर संरक्षित क्षेत्र के रूप में कार्य करता है।
अगस्त 1947 में भारत आज़ाद हुआ और देश भारत एवं पाकिस्तान नामक दो पृथक देशों में विभाजित हो गया।
सीमा पार से बड़ी संख्या में लोगों ने भारत आना शुरू कर दिया। इन लोगों के लिए रहने का इंतजाम करना और उन्हें रोजगार देना जरूरी था।
1 इसके बाद रियासतों की समस्या थी। तकरीबन 500 रियासतें राजाओं या नवाबों के शासन में चल रही थीं। जो स्वतत्रं रुप से शासन करने का सपना संजोएँ थीं। इन सभी को नए राष्ट्र में शामिल होने के लिए तैयार करना एक टेढ़ा काम था।
2 शरणार्थियों और रियासतों की समस्या पर सरकार द्धारा तुरन्त ध्यान देना आवश्यक था।
3 हालांकि, स्वतंत्रता के तत्काल बाद भारत के सामने आने वाली दो प्रमुख समस्याएं- एकता को बनाए रखने और राष्ट्र के विकास को सुनिश्चित करने की थी।
1. पोट्टी श्रीरामुलु कौन थे? वह क्यों प्रसिद्ध थे ?
2. उनकी क्या मांग थी?
3. आंध्र राज्य का गठन कब किया गया था?
1.पोट्टी श्रीरामुलु गांधीवादी नेता थे । वयोवृद्ध गांधीवादी पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगूभाषियों के हितों की रक्षा के लिए आंध्र राज्य के गठन की माँग करते हुए भूख हड़ताल पर बैठ गए। जैसे-जैसे अनशन आगे बढ़ा, बहुत सारे लोग श्रीरामुलु के समर्थन में आगे आने लगे। और उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई।
2. गांधीवादी पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलुगूभाषियों के हितों की रक्षा के लिए आंध्र राज्य के गठन की माँग करी थी ।
3. 58 दिन के अनशन के बाद 15 दिसंबर1952 को पोट्टी श्रीरामुलु का देहांत हो गया। जैसा कि एक अखबार ने लिखा था, श्रीरामुलु के देहांत की खबर ने पूरे आंध्र को अस्त-व्यस्त कर डाला। विरोध इतना व्यापक और गहरा था कि केंद्र सरकार को आखिरकार यह माँग माननी पड़ी। इस तरह, 1 अक्तूबर 1953 को आंध्र के रूप में एक नए राज्य का गठन हुआ, जो बाद में आंध्र प्रदेश बना।
लम्बे विचार-विमर्श के बाद भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। भारत का संविधान तैयार करने हेतु बहुत सारी राजनीतिक पार्टियां एकजुट हो गई। इसकी जो विशेषताएं लागू की गई वो इस प्रकार थीं-
1. उसमें सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया था। इसका मतलब यह था कि: 21 साल से ज्यादा उम्र के सभी भारतीयों को प्रांतीय और राष्ट्रीय चुनावों में वोट देने का अधिकार था। भारतीयों को खुद अपने नेता चुनने का अधिकार मिल गया।
2. संविधान की दूसरी विशेषता यह थी कि उसमें तमाम जातियों, धर्मों या किसी भी तरह की पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले सभी नागरिकों को कानून की नजर में समान माना गया था।
3. तीसरी विशेषता यह थी कि इसमें समाज के अछूतों, निर्धन और सबसे वंचित तबकों के लिए भारत के संविधान द्वारा विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। आदिवासियों या अनुसूचित जनजातियों को भी विधायिका और नौकरियों में आरक्षण दिया गया था।
4. राज्य और केंद्र के मध्य शक्तियों का संतुलित बंटवारा लागू करने के लिए संविधान में विभिन्न विषयों को तीन सूचियों में बाँट दिया गया। केंद्रीय सूची- इसके विषय केवल केंद्र सरकार के अधीन थे। राज्य सूची के विषयों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों के उपर थी। समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य सरकारें, दोनों संयुक्त रूप से फैसला ले सकते थे।
A.
सर्वव्यापी संसाधन
B.
स्थानीय संसाधन
C.
अनवीकरणीय संसाधन
D.
जैविक संसाधन
हवा सर्वव्यापी संसाधन का उदाहरण है क्योंकि यह सभी स्थानों पर उपलब्ध होती है। यह किसी स्थान विशेष पर नहीं पाई जाती है।
A.
संसाधनों के पुनःचक्रण और पुनः उपयोग के साथ-साथ वस्तुओं के उपभोग को कम करना
B.
संसाधनों के उपयोग का केवल पुनःचक्रण
C.
संसाधनों का केवल पुनः उपयोग
D.
संसाधन क्षति
संसाधन संरक्षण उपायों में संसाधनों के पुनःचक्रण और पुनः उपयोग के साथ-साथ वस्तुओं के उपभोग को कम करना शामिल है।
A.
सजीव संसाधन
B.
निर्जीव संसाधन
C.
मानव संसाधन
D.
मानव निर्मित संसाधन
जैव संसाधन पारिस्थितिकी तंत्र के सजीव घटकों को संदर्भित करता है। उदाहरण के लिए: पौधे और जंतु|
A.
सजीव संसाधन
B.
निर्जीव संसाधन
C.
नवीकरणीय संसाधन
D.
अनवीकरणीय संसाधन
अजैव संसाधन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्जीव घटकों को संदर्भित करता है। उदाहरणार्थ: मिट्टी, धूप और पानी|
A.
आधारिक संरचना
B.
प्रौद्योगिकी
C.
बच्चे
D.
पैसे
किसी भी देश का आर्थिक विकास उस देश की प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्नति पर निर्भर करता है।
A.
कोयला
B.
सौर ऊर्जा
C.
पेट्रोलियम
D.
प्राकृतिक गैस
सौर ऊर्जा नवीकरणीय संसाधन का एक उदाहरण है, क्योंकि यह असीमित संसाधन के रूप में उपलब्ध है।
A.
मशीन
B.
उपकरण
C.
मकान
D.
सूर्य
मशीन, उपकरण और मकान मानव निर्मित संसाधन हैं, जबकि सूर्य एक प्राकृतिक संसाधन है।
A.
जीवाश्म ईंधन
B.
लकड़ी
C.
सौर ऊर्जा
D.
पवन ऊर्जा
जीवाश्म ईंधन बनने में हज़ारों वर्ष लग सकते हैं।
A.
मानव निर्मित
B.
स्वाभाविक रूप से निर्मित
C.
मानव
D.
कृत्रिम
प्राकृतिक संसाधन प्रकृति के वरदान होते हैं जो हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति द्वारा प्रदान किये जाते हैं।
A.
संभाव्य संसाधन
B.
भण्डार
C.
नवीकरणीय संसाधन
D.
वास्तविक संसाधन
काली मिट्टी वास्तविक संसाधन का एक उदाहरण है। यह कुछ ऐसी है जो वर्तमान समय में विद्यमान है।
A.
राजस्थान
B.
गुजरात
C.
तमिलनाडु
D.
केरल
भारत में तमिलनाडु 'पवन ऊर्जा' में एक अग्रणी राज्य बन गया है। भारत की कुल पवन ऊर्जा क्षमता का लगभग 35% इस राज्य के पास है। तमिलनाडु में अरलवाईमोड़ी का मुप्पंदल पवन फार्म इस उपमहाद्वीप में सबसे बड़ा है।
A.
पैसा
B.
संपत्ति
C.
धन
D.
शिक्षा
शिक्षा और स्वास्थ्य, मानव को बहुमूल्य संसाधन बनाने में मदद करते हैं।
A.
अन्योन्याश्रित
B.
निर्भर
C.
स्वतंत्र
D.
पृथक
मनुष्य एक दूसरे पर अन्योन्याश्रित है| उदाहरण के लिए, किसान सभी के लिए फसलों को उगाता है, बदले में वैज्ञानिक उसे इसकी सुरक्षा कैसे की जाए, उसमें मदद करते हैं और बैंकर पैसे, आदि प्रदान करता है।
A.
2 आर
B.
4 आर
C.
3 आर
D.
1 आर
सततपोषणीय विकास का मूल सिद्धांत 3 आर रियूज (पुनःउपयोग), रिसाइकिल (पुनःचक्रण), और रिड्यूस (कम उपभोग) पर आधारित है।
A.
व्यक्ति
B.
समाज
C.
आसपास के क्षेत्र
D.
राष्ट्र
संरक्षण तभी संभव है जब इसमें प्रत्यके व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों का वहन करता है। इसे जमीनी स्तर पर प्रारम्भ करना होता है।
A.
लोहा
B.
कपास
C.
परिदृश्य
D.
आदमी
कुछ संसाधनों का कोई आर्थिक मूल्य नहीं होता है। धातुओं का आर्थिक मूल्य होता है किन्तु मनोरम भूदृश्य का आर्थिक मूल्य नहीं होता।
A.
इमली
B.
सागौन
C.
चाय
D.
हल्दी
इसका तात्पर्य किसी विचार अथवा आविष्कार पर एकमात्र अधिकार से है। भारत में हल्दी का उपयोग प्राचीन काल से ही एक दवा के रूप में किया जाता रहा है।
प्राकृतिक वनस्पतियों और वन्य जीवों का संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि:
1. वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन रहता है।
2. प्राकृतिक वनस्पति उद्योगों के लिए कच्चा माल देते है और जानवरों को पनाह देते हैं।
भूमि की गुणवत्ता, मिट्टी, पानी, प्राकृतिक वनस्पति जानवरों और प्रौद्योगिकी के उपयोग में अंतर की वजह से दुनिया के विभिन्न भागों में लोग अलग- अलग जीवन व्यतीत करते हैं।
भारतीय उप-महाद्वीप में गिद्ध दर्दनाशक डिक्लोफेनाक इंजेक्शन के कारण गुर्दे की विफलता से मर रहे हैं। डाईक्लोफेनाक व्यापक रूप से एनाल्जेसिक, वातरोगरोधी और रोगाणुरोधी की तैयारी के लिए पशु चिकित्सकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
गिद्ध को मृत पशुओं को खाने की अपनी क्षमता के कारण गिद्ध को महत्वपूर्ण वातावरण शोधनकर्ता के रूप में मेहतर और माना जाता है।
भूमि का उपयोग कई कारकों की संख्या से निर्धारित होता है जैसे:
1) स्थलाकृति।
2) मृदा।
3) जलवायु।
4) पानी की उपलब्धता।
मानव कारक जैसे जनसंख्या और प्रौद्योगिकी भूमि उपयोग प्रारूप के महत्वपूर्ण निर्धारक हैं।