1 किलोमीटर > 1 मीटर > 1 सेंटीमीटर > 1 मिलीमीटर।
कोलकाता तथा पटना जैसे दो स्थानों के बीच की दूरी को व्यक्त करने के लिए
1. सीधी सड़क पर चलती कार - सरल रेखीय गति
2. घूर्णन गति - कुम्हार का चाक
3. वृत्तीय गति - सूर्य के चारो ओर पृथ्वी की गति
आवर्तिक गति के उदाहरण है
1. लोलक की गति।
2. झुले पर बच्चे की गति।
मापन की इकाई निम्नलिखित दो बिंदुओं पर निर्भर करती है :
1. मापन की इकाई का चुनाव।
2. कितनी बार वस्तु मापी जाती है ।
मीटर में ऊँचाई
इसलिए, उस व्यक्ति की ऊँचाई सेंटीमीटर में
हाँ, एक निकाय एक समय पर दो प्रकार की गति कर सकता है।
उदाहरण के लिए बढ़ई की ड्रील मशीन।
छेद करने के लिए बढ़ाई द्वारा प्रयोग की गई ड्रील मशीन में स्थानान्तरित तथा घूर्णन गति दोनों होती है। क्योंकि यह समान समय पर लकड़ी में से घूमता (घूर्णन गति) तथा आगे की ओर धक्का (स्थानान्तरित गति) करता है करता है।
सुई की लम्बाई=33.1 सेंटीमीटर - 3.0 सेंटीमीटर
सुई की लम्बाई = (33.1-3.0) सेंटीमीटर
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घूर्णन गति |
वृत्तीय गति |
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1. इसमें, निकाय निश्चित बिन्दु या अक्ष के सापेक्ष इस तरह से गति करता है कि इसके प्रत्येक कण निश्चित बिन्दु या अक्ष से निश्चित दूरी पर रहे। |
1. इस प्रकार की गति में, यह निकाय वृत्त , वृत्तीय पथ या वृत्तकार कक्ष के सापेक्ष गति करता है। |
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2. उदाहरण के लिए: पंखे की ब्लेडों, ग्रामोफ़ोन रिकॉर्डर, कुम्हार के चाक आदि की गति। |
2.उदाहरण : लट्टू की गति, पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा का परिक्रमण, सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का परिक्रमण आदि। |
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3.जब बाह्य बल हटा लिया जाता है तब भी निकाय घूर्णन गति करता रहता है। |
3. एक निकाय केवल तभी वृत्तीय गति करता है जब तक यह बाह्य बल के अन्तर्गत गति करता है। |
मीना द्वारा तय की गई कुल दूरी=550 मी. x 2 = 1100 मी.
एक किलोमीटर = 1000 मीटर
किलोमीटर में कुल दूरी है:
1100 मी. = 1100 मी. x (1किमी./1000 मी.)
= 1.1 किमी.
1. पैमाने की लम्बाई जो हम मापने के लिए उपयोग में लेते है, वस्तु की लम्बाई की तुलना में बड़ी होनी चाहिए।
2. आँख को उस बिंदु की सीध में रखें चाहिए जिसका हम पाठ्यांक ले रहे है अन्यथा त्रुटि उत्पन्न हो जाएगी।
3. यदि पैमाने का शुन्य अंक क्षतिग्रस्त है या पैमाने का किनारा टुटा हुआ है तो अन्य अंक से मापन शुरू करते है।
1. सीधी सड़क पर व्यक्ति की गति सरल रेखीय गति का उदाहरण है।
2. कार के पहियों की गति वृत्तीय गति का उदाहरण है ।
3. गिरते हुए पत्थर की गति सरल रेखीय गति का उदाहरण है।
1. रेखीय गति: सीधी रेखा में गति कर रही कार, रेखीय गति का उदाहरण है।
2. वृत्तीय गति: पंखे की ब्लेडों की गति, वृतीय गति का उदाहरण है।
3. घूर्णन गति: पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन, घूर्णन गति का उदाहरण है।
“Fonts” option is used to add & remove the fonts.
We can turn on the ‘Mouse Keys’ by pressing left Alt, left Shift and NUM LOCK simultaneously.
We can enable the hibernation option of the computer from the “Power Options”.
Hibernation is a state of inactivity or powering down a computer while retaining its state.
“Accessibility” option is used to enable sticky key option.
Control Panel is a part of graphical user interface of Microsoft Windows which allows the users to view & manipulate basic system settings & controls.
Details view provides detailed information about files including name, type, size and date modified.
‘Search Companion’ is the most direct way to search for a file or folder in computer.
Two wild characters ‘*’ and ‘?’ are commonly used to search a file or folder, for example, *.doc, f?.doc.
In windows, files and folders are found either in My Document or in Windows Explorer.
Files or folders
File is the basic unit of storage in windows.
The steps to change the Date & Time settings are as follows:
1.Open the Control Panel -> Click on Date & Time
2.The Date & Time Properties dialog box will appear.
3.We can change the Date & Time settings from the Date & Time Properties dialog box.
The Control Panel can be opened in two ways:
1. Click on Start button -> Go to Control Panel
The second way to open the Control Panel is:
2. Click on ‘My Computer’ -> Control Panel, provided in the common tasks, in left of the window.
Windows offers the option to either hold the combination of keys together or press them one by one. This is possible using Sticky Keys option. By enabling this option, we can press the combination of keys one by one, rather than holding the keys together.
On Screen Keyboard is a virtual keyboard that can be operated using the mouse.
We can open Windows Explorer in two ways:
(1) Right-Click on the Start button and then select Windows Explorer.
(2) Click on Start ->All programs -> Accessories -> Windows Explorer.
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1. Displays files and folders as small icons |
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2. Display file name below the icon |
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It is a set of characters that helps windows to understand the type of information stored in the file and the application that would open it.
We can save our work as a file in the computer by giving it a proper name. The filename consists of two parts, i.e., name of the file and its extension, for example, Myfile.doc.
A. निकिल।
B. लकड़ी।
C. कागज़ के छोटे टुकडे।
D. प्लास्टिक।
एक छड़ चुम्बक चुम्बकीय पदार्थों को आकर्षित कर सकती हैं जैसे:- लौहा, निकिल, कोबाल्ट तथा अन्य मिश्र धातुएं।
A. कोई चुम्बकीय शक्ति नहीं होती है।
B. एक ध्रुव होता है।
C. चुम्बकत्व में वृद्धि।
D. दो ध्रुव होते हैं ।
चुम्बक का अभिलाक्षणिक गुण होता है कि जब इसे दो या दो से अधिक भागों में विभाजित किया जाता है, तो प्रत्येक भाग एक चुम्बक की तरह व्यवहार करता है जिसमें दो ध्रुव होते हैं।
A. लकड़ी पैमाना।
B. प्लास्टिक की चम्मच।
C. लौहे की कील।
D. लेदर बेल्ट।
लौहे की कील चुम्बक द्वारा आकर्षित होती है तथा अन्य आकर्षित नहीं होते हैं।
A. वृताकार चुम्बक।
B. नाल चुम्बक।
C. छड़ चुम्बक।
D. बेलनाकार चुम्बक।
मैग्नेटाइट, दुनिया का पहला चुम्बक है।
चुंबकीय सुई के उत्तरी ध्रुव की पहचान के लिए सामान्यतः इसे भिन्न रंग से पेंट किया जाता है।
यह स्वतंत्रतापूर्वक लटकाई गयी चुंबक का वह सिरा है जो भौगोलिक दक्षिण दिशा की ओर संकेत करता है।
यह स्वतंत्रतापूर्वक लटकाई गयी चुंबक का वह सिरा है जो भौगोलिक उत्तर दिशा की ओर संकेत करता है।
चुंबक की शक्ति उसके दोनों सिरों पर अधिकतम होती है।
स्वतंत्रता पूर्वक लटकी हुई चुम्बक हमेशा स्वयं को भौगोलिक उत्तर-दक्षिण दिशा में संरेखित करती है।
चुंबक की शक्ति उसके दोनों सिरों पर अधिकतम होती है।
विद्युत् घंटी में यु- आकार की विद्युत् चुम्बक उपयोग की जाती है।
चुम्बक के वह सिरे जहाँ चुम्बकीय तीव्रता की उपस्थिति अधिक होती है, चुम्बकीय ध्रुवों के रूप में जाने जाते हैं ।
वह पदार्थ जो चुम्बक द्वारा आकर्षित किए जाते हैं या कृत्रिम चुम्बक में बदले जा सकते हैं, चुम्बकीय पदार्थो के रूप में जाने जाते हैं ।
वह पदार्थ जो न तो चुम्बक द्वारा आकर्षित होते हैं और न हीं कृत्रिम चुम्बक में परिवर्तित किए जा सकते हैं ।
वह पदार्थ जो चुम्बकीय पदार्थ जैसे लौहा, कोबाल्ट तथा निकिल के लिए आकर्षण की प्रकृति दर्शाती है चुम्बक कहलाती है । जब यह स्वतंत्रता पूर्वक लटकी हुई होती है तो इसके बिन्दु भौगोलिक उत्तर-दक्षिण दिशा में निर्देशित होते हैं ।
वह पदार्थ जो प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होते हैं तथा जिसके चुम्बकीय गुण को प्राकृतिक चुम्बक के रूप में जाना जाता है ।
वह पदार्थ जिसके लिए प्राकृतिक चुम्बक के गुण कृत्रिम तरीके से प्रदान किए जाते हैं
नहीं
दिशा निर्धारण करने के लिए चुम्बकीय कंपास का प्रयोग किया जाता है।
बालिश्त: बालिश्त अंगुल तथा छोटी अंगुली के सिरे के बीच की लम्बाई होती है। यह लम्बाई, चौड़ाई तथा ऊँचाई को मापने के लिए अपनाये गए थे।

हाथ: यह कोहनी से बीच की अंगुली के छोर तक की लम्बाई होती है। मिश्र के लोगों ने इसका उपयोग पिरामिडों के मापन के लिए किया था।

अंगुल: यह अंगूठे की चौड़ाई के बराबर होता है। रोमन में इस प्रणाली का उपयोग किया जाता था । इंच शब्द, अंगुल शब्द से व्युत्पन्न हुआ है।
12 अंगुल = 1 फुट
एक वक्रीय रेखा CD खींचते है। एक धागा लेते है तथा इसके एक सिरे पर गाँठ बनाते है। रेखा के बिन्दु C पर धागे में बनी गाँठ रखते है। रेखा के सापेक्ष धागे का सूक्ष्म भाग उँगलियों तथा अंगूठे का उपयोग करके तना हुआ रखते है। वक्रीय रेखा पर धागे को तना हुआ रखकर रेखा के बिन्दु D तक धागे को लाते है। धागे को चिन्हित करते है, जहां ये दूसरे सिरे को स्पर्श करता है। अब, इस धागे को मीटर पैमाने के सापेक्ष विस्तारित करते है। तथा प्रारम्भ में गाँठ तथा चिन्हित धागे के बीच की लम्बाई पैमाने के माध्यम से माप लेते है। पैमाने पर मापित यह लम्बाई आपकों वक्रीय रेखा CD की लम्बाई प्रदान करेगी।
1
सरल रेखीय गति: गति के इस प्रकार में, निकाय सीधी रेखा में गति करते है।
उदाहरण: - स्वतंत्रतापूर्वक गिर रहा पत्थर।
2. वृत्तीय गति: जब निकाय वृत्तीय पथ पर गति करता है तो कहते है कि यह वृत्ताकार गति को संचालित करता है। वृत्तीय गति में, एक निकाय इस तरह से गति करता है कि इसकी निश्चित बिंदु से दूरी परिवर्तित नहीं होती है।
उदाहरण - हाथ घडीघड़ी नोक की गति।
आवर्तिक गति: वह गति जिसमें निकाय निश्चित समय अन्तराल के बाद स्वयं को दोहराता है आवर्तिक गति कहलाती है।
उदाहरण - सूर्य के चारो ओर पृथ्वी का परिक्रमण।
सर्वप्रथम, हम किसी वस्तु की लम्बाई मापने के लिए एक उपयुक्त उपकरण का चयन करना होगा जैसे - मापन टेप, पेड़ की परिधि का मापन करने के लिए उपयोग की जाती है जबकि मापन पैमाना,किसी पुस्तक की लम्बाई का मापन करने के लिए उपयोग किया जाता है। जब हम किसी वस्तु की लम्बाई का मापन पैमाने की सहायता से करते है, तब हमें पैमाने को उस वस्तु की लम्बाई के सापेक्ष संपर्क में रखना चाहिए तथा पैमाने का शुन्य, वस्तु की प्रारम्भिक स्थिति के साथ सम्पाती हो।
पाठयांक लेते समय, आँख उस बिंदु के ऊपर लम्बवत होनी चाहिए , जहाँ का मापन किया जाता है। अन्यथा, लम्बन के कारण पाठ्यांक त्रुटि आ जाएगी।
यदि पैमाना सिरे से क्षतिग्रस्त है या समतल नहीं है तथा यदि पैमाने पर शुन्य अंक क्षतिग्रस्त है, तो मापन किसी अन्य अंक से शुरू करते है।
अन्य सिरे पर पाठ्यांक से इस आँख पर पाठ्यांक का व्यवकलन, वस्तु की यथार्थ लम्बाई प्रदान करेगा। जिसके सापेक्ष यह पैमाना इसके सम्पर्क में रखा है।
A. कोबाल्ट मशीन के भागों को।
B. साईकिल के टायरों को।
C. लौहे के बटनों को।
D. लौहे के बने साईकिल हैन्डल को।
एक चुम्बक, अचुम्बकीय पदार्थों जैसे:- प्लास्टिक को आकर्षित नहीं कर सकती है। जबकि, यह चुम्बकीय पदार्थों जैसे:- लौहे, कोबाल्ट आदि से मिलकर बने साईकिल हैन्डल, बटन आदि को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है।
A. निकिल रिंग।
B. प्लास्टिक रिंग।
C. पीतल रिंग।
D. रबर रिंग।
एक चुम्बक चुम्बकीय पदार्थों जैसे :- लौहे, निकिल तथा कोबाल्ट आदि तथा प्रत्येक उत्पाद जो इन धातुओं से मिलकर बने होते हैं और चुम्बक की ओर आकर्षित होते हैं।
A. मैग्नेटाइट।
B. सीसा।
C. लौहा।
D. पीतल।
मैग्नेटाइट, पृथ्वी की सतह में अपने प्राकृतिक रूप में पाया जाता है। यह आयरन (II, III) ऑक्साइड से मिलकर बना होता है इसके अलावा, यह सामान्य रासायनिक नाम फेरस – फेरिक ऑक्साइड के रूप में भी जाना जाता है।
A. चुम्बक के उत्तरी ध्रुव पर।
B. चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव पर।
C. चुम्बक के ध्रुवों पर।
D. चुम्बक के केन्द्र पर।
किसी चुम्बक की आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है जब हम केंद्र से किसी भी ध्रुव की ओर गति करते है। यह ध्रुवों पर अधिकतम हो जाती है। चुम्बक के केंद्र पर आकर्षण शक्ति बहुत कम होती है।
A. लौहे की छड़ पर हथौड़े से बार - बार प्रहार करने की।
B. उत्तर ध्रुव की पहचान करने के लिए लाल रंग की।
C. एक चुम्बक की।
D. उच्च तापमान के लिए इसे ऊष्मा देने की।
जब चुम्बक को लौहे की छड़ की लम्बाई के अनुदिश समान दिशा में लगभग 30 से 40 बार गुजारा जाता है, तो लौहे की छड़, चुम्बक में परिवर्तित हो जाती है।
A. बैटरी।
B. छड़ चुम्बक।
C. एमीटर।
D. वोल्टमीटर।
एक छड़ - चुम्बक चुम्बकीय पदार्थों जैसे:- लौहे को आकर्षित कर सकती है। यदि खिलौना कार छड़ – चुम्बक द्वारा आकर्षित होती है, तो इसका मतलब है कि वह लौहे की बनी है।
A. नर्म लौहे की छड़।
B. चुम्बकीय सुई।
C. निकिल छड़।
D. प्लास्टिक छड़।
एक चुम्बकीय कंपास वह युक्ति होती है जिसमें एक चुम्बकीय सुई होती है जो वृताकार बॉक्स के केन्द्र बिंदु पर गति करने के लिए स्वतंत्र होती है। यह कंपास सुई घूर्णन करने के लिए स्वतंत्र होती है और हमेशा उत्तर – दक्षिण दिशा में संरेखित रहती है।
A. लौहे की गेंद।
B. कोबाल्ट की छड़।
C. निकिल की जार।
D. काँच की पट्टी।
काँच एक अचुम्बकीय पदार्थ होता है। इस प्रकार, एक चुम्बक काँच की पट्टी द्वारा अप्रभावित होती है।
A. फ़िल्टर के द्वारा।
B. चुम्बक के उपयोग द्वारा।
C. चुनकर।
D. इनकों पानी में मिलाकर।
एक चुम्बक में चुम्बकीय पदार्थों जैसे लौहे को आकर्षित करने का गुण होता है। यदि हम चुम्बक को रेत, नमक तथा लौहे के बुरादे के मिश्रण के ऊपर से गति कराते हैं, तो लौहे का बुरादा चुम्बक से चिपक जाता है और इस प्रकार, यह अलग किया जा सकता है।
A. उत्तरी ध्रुव।
B. दक्षिणी ध्रुव।
C. धनात्मक ध्रुव।
D. ऋणात्मक ध्रुव।
असमान ध्रुवों के बीच हमेशा आकर्षण तथा समान ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण होता है। क्योंकि, कम्पास सुई का उत्तरी ध्रुव छड़ - चुम्बक के एक सिरे द्वारा आकर्षित हो जाता है। यह चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव होना चाहिए।
A. ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आकर्षित कर सकते हैं।
B. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चुम्बकों की चुम्बकीय शक्ति में वृद्धि कर सकता है।
C. ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की क्रियाविधि को प्रभावित कर सकते हैं।
D. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चुम्बकों की चुम्बकीय शक्ति में कमी कर सकते हैं।
चुम्बक अपने प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र के कारण मोबाईल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की क्रियाविधि को प्रभावित करते हैं।
A. लौहा।
B. फेराइट।
C. मैग्नेटाइट।
D. कार्बन।
कार्बन, किसी चुम्बक द्वारा आकर्षित नहीं होता है तथा इस प्रकार, यह अचुम्बकीय प्रकृति का है। तथापि, वह पदार्थ जो लौहे से मिलकर बने होते हैं चुम्बकों की ओर आकर्षित हो जाते हैं।
A. प्रबल।
B. दुर्बल।
C. कठोर।
D. नर्म।
प्राकृतिक रूप से उत्पन्न चुम्बक जैसे:- मैग्नेटाइट जो लौहे से मिलकर बना होता है तथा लौहे को आकर्षित करने का गुण रखता है, चुम्बक कहलाता है।
A. इसकी ओर एक लौहे की कील लेकर आते हैं।
B. इसे एक धागे की सहायता से स्वतंत्रतापूर्वक निलंबित करते हैं।
C. इसे रेशम के कपडे से रगड़ते हैं।
D. ऊनी कपडे से रगड़ते हैं।
जब किसी चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक निलंबित करते हैं, तो इसका एक सिरा भौगोलिक उत्तरी दिशा में संरेखित हो जाता है जो “उत्तरी ध्रुव” कहलाता है। अन्य सिरा भौगोलिक दक्षिणी दिशा की ओर संरेखित हो जाता है, जो “दक्षिणी ध्रुव” कहलाता है।
A. किसी चुम्बक की उपस्थिति की पहचान करने में।
B. चुम्बकीय पदार्थों की पहचान करने में।
C. लौहे की सुई की पहचान करने में।
D. कोबाल्ट की सुई की पहचान करने में।
आकर्षण चुम्बक के असमान ध्रुवों के बीच इसके साथ – साथ चुम्बक तथा चुम्बकीय पदार्थ के बीच सम्भव है। लेकिन, प्रतिकर्षण, केवल दो चुम्बकों के समान ध्रुवों के बीच ही सम्भव है। इस प्रकार, प्रतिकर्षण किसी चुम्बक की उपस्थिति की पहचान करने के लिए विश्वशनीय परीक्षण है।
A. उत्तर – दक्षिण दिशा में विरामवस्था में आ जाती है।
B. चुम्बकीय पदार्थों को आकर्षित करती है।
C. पूर्व – पश्चिम दिशा में विरामवस्था में आ जाती है।
D. अचुम्बकीय पदार्थों को प्रतिकर्षित करती है।
जब किसी छड़ चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक निलंबित किया जाता है, तो यह हमेशा उत्तर – दक्षिण दिशा में विरामवस्था में आ जाती है। किसी चुम्बक यह गुण दिशा ज्ञात करने में किया जाता है। यह गुण चुम्बकों के दैशिक गुण के रूप में जाना जाता है।
चुंबक, रेफ्रिजरेटर के दरवाजे, साइकिल के डायनेमो और बिजली के मीटर आदि में उपयोग किया जाता है। बुलेटिन बोर्ड और खिलौने में भी चुंबक का इस्तेमाल किया जाता है।
दो चुम्बकीय पदार्थ है -
2. कोबाल्ट ।
दो अचुम्बकीय पदार्थ है-
1. चमड़ा ।
समान ध्रुव एक दुसरे को प्रतिकर्षित जबकि असमान ध्रुव एक दुसरे को आकर्षित करते हैं ।
इस प्रकार, इस स्थिति में, दोनों चुम्बक एक दुसरे को प्रतिकर्षित करेंगे।
चुम्बक के दो महत्वपूर्ण गुण हैं-
1. चुम्बक के दो समान ध्रुव एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं ।
2. चुम्बक के दो असमान ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं ।
अस्थायी चुम्बक : वह चुम्बक जिसका चुम्बकत्व किसी सीमित समय तक रहने के बाद ख़त्म होने लगता है।
स्थायी चुम्बक : वह चुम्बक जिसका चुम्बकत्व हमेशा के लिये बना रहता है |
छड़ चुंबक के उपयोग से लोहे की सुई को पहले चुंबकित कीजिए। अब इसे किसी छोटी कॉर्क अथवा फोम के टुकड़े में निविष्ट कीजिए। इसे पानी से भरे प्याले अथवा टब में तैराइए, जैसा की चित्र में दिखाया गया है। ध्यान रखिए कि सुई पानी को न छुए। अब सुई लगी कॉर्क को विभिन्न दिशाओं में घुमाइए। जब बिना घुमाए कॉर्क तैरने लगे तो सुई की दिशा नोट कीजिए। यह उत्तर-दक्षिण दिशा को निर्देशित करती है।
एक सरलतम विधि से लोहे की वस्तु को चुम्बक बनाते हैं। लोहे का एक आयताकार टुकड़ा लीजिए। इसे मज़े पर रखिए। अब एक छड़ चुंबक लीजिए तथा इसका कोई एक ध्रुव लोहे की छड़ के एक सिरे दुसरे सिरे तक बिना हटाए ले जाइए। चुंबक को उठाइए तथा उसी ध्रुव को लोहे के टुकड़े के प्रारंभिक सिरे पर वापस ले आइए। इसी प्रकार चुंबक को लोहे की छड़ के अनुदिश बार-बार ले जाइए। इस प्रक्रिया को लगभग 30-40 बार दोहराइए। आप का चुम्बक तैयार है।
क्योंकि चुम्बक रेडियों, लाउडस्पीकर, और अनेक उपकरणों में उपयोग की जाती है । इनमें शाक्तिशाली चुम्बकों की आवश्यकता होती है । कृत्रिम चुम्बकों के उपयोंग करने के कारणों का उल्लेख निम्नानुसार है:
1. इनको बहुत शाक्तिशाली बनाया जा सकता है जो प्राकृतिक चुम्बक की स्थिति में संभव नहीं है ।
2 इनको कोई भी वांछित रूप तथा आकार दिया जा सकता है ।
2) दैशिक/संकेतक गुण- यदि हम एक चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक हवा में लटका दे तो यह हमेशा भौगोलिक उत्तर-दक्षिण
दिशा में संरेखित हो जाती है । इसे चुम्बक के दैशिक/संकेतक गुण के रूप में जाना जाता है ।
यात्री दिशा निर्धारण करने के लिए एक युक्ति का प्रयोग करते है जो चुम्बकीय सुई ( चुम्बकीय कम्पास) कहलाती है। चुम्बकीय सुई वह युक्ति है जो किसी स्थान पर दिशाओं को जानने के लिए उपयोग की जाती है। चुम्बकीय सुई सामान्यतः काँच के ढक्कन वाली एक छोटी डिब्बी होती है। इस डिब्बी के अंदर एक चुंबकीय सुई स्थित होती है जो स्वतंत्र रूप से घूम सकती है। इस में एक डायल भी होता है जिस पर दिशाएँ अंकित होती हैं। इसकी सुई विरामावस्था में उत्तर-दक्षिण दिशा को निर्देशित करती है।
यदि चुम्बक का उचित रख रखाव न हो तो यह अपनी शक्ति खो देती है और इस प्रकार, यह अचुम्बकीत हो जाती है । छड़ चुम्बको को सुरक्षित रखने के लिए उनके युग्मों के असमान ध्रुवों को पास-पास व्यवस्थित करते हैं । दो नरम लौहे की छड़ को चुम्बक के युग्म के दोनो सिरों पर रखते हैं । इन नरम लौहे की छड़ को चुम्बकीय संरक्षक के रूप में जाना जाता है । यह निकाय विशाल चुम्बकीय श्रृंखला बनाता है और अचुम्बकन से बचाता है ।
पृथ्वी, अपने सिरों पर ध्रुवों के साथ विशाल छड़ चुम्बक की तरह व्यवहार करती है। इस छड़ चुम्बक का उत्तरी ध्रुव लगभग भौगोलिक दक्षिण की ओर तथा इसका दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक उत्तर की ओर संरेखित हो जाता है। स्वतंत्रतापूर्वक लटकी हुई चुम्बक का उत्तरी ध्रुव भौगालिक उत्तरी ध्रुव की ओर संरंखित हो जाता है क्योंकि यह पृथ्वी के चुम्बकीय दक्षिणी ध्रुव द्वारा आकर्षित होता है। तथा स्वतंत्रतापूर्वक लटकी हुई चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव की ओर संरेखित हो जाता है क्योंकि यह पृथ्वी के चुम्बकीय उत्तरी ध्रुव द्वारा आकर्षित होता है। इस प्रकार, स्वतंत्रतापूर्वक लटकी हुई चुम्बक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में संरेखित रहती है।
काँच की कटोरी लेते है तथा इसे पानी से आधी भरते हैं । अब चुम्बकीय सुई की सहायता से उत्तर, पूर्व, पश्चिम, तथा दक्षिण दिशा चिन्हित करते हैं। अब चिन्हित की गए स्थान पर काँच की कटोरी रखते हैं। अब आयताकार लकड़ी की पट्टी काँच की कटोरी में पानी की सतह पर रखते हैं। तैर रहे लकड़ी के टुकड़े पर छड़ चुम्बक रखते हैं । माना लड़की का टुकड़ा विरामवस्था में है । तो पाते है कि छड़ चुम्बक का एक सिरा उत्तर की ओर तथा दूसरा सिरा दक्षिण की ओर इंगित हो जाता है। यदि हम लकड़ी के टुकड़े को 90 डिग्री घुमा दे तो यह पुनः विरामवस्था में आ जाती है तथा चुम्बक उत्तर -दक्षिण दिशा में संरेखित हो जाती है ।
छड़ चुम्बक के ध्रुव इसके दोनों सिरों पर निर्देशित होते हैं ।
एक छड चुम्बक कागज पर रखते है तथा कुछ लौहे का बुरादा इस पर छिडकते हैं तो देखा जाता हैं कि लौहे का बुरादा चुम्बक के दोनों सिरो की ओर, इसके केन्द्रिय भाग की तुलना में अधिक तेजी से आकर्षित होता है। इस प्रकार, चुम्बक के ध्रुव दोनो सिरों पर निर्देशित होते हैं ।

A. पारदर्शी।
B. अपारदर्शी।
C. पारभासी।
D. प्रदीप्त वस्तु।
अपारदर्शी पदार्थ अपने माध्यम से प्रकाश को नहीं गुजरने देते हैं तथा हम इन वस्तुओं के माध्यम से नहीं देख पाते हैं। उदाहरण :- लकड़ी, पत्थर आदि।
A. प्रदीप्त वस्तु।
B. अपारदर्शी वस्तु।
C. पारदर्शी वस्तु।
D. पारभासी वस्तु।
पारदर्शी वस्तुएँ अपने माध्यम से प्रकाश को पूर्णतया गुजरने देती है तथा हम इन वस्तुओं के माध्यम से स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
A. पारदर्शी वस्तु।
B. पारभासी वस्तु।
C. अपारदर्शी वस्तु।
D. प्रदीप्त वस्तु।
अपारदर्शी वस्तुएँ अपने माध्यम से प्रकाश को नहीं गुजरने देती है तथा हम इन वस्तुओं के माध्यम से नहीं देख पाते हैं । कार्डबोर्ड का टुकड़ा एक अपारदर्शी वस्तु का उदाहरण है।
A. लैम्प।
B. काँच की प्लेट।
C. पुस्तक।
D. सूर्य।
प्रदीप्त वस्तु अपना स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करती है। यह प्रकाश की प्राकृतिक या मानव निर्मित (कृत्रिम) स्रोत हो सकती है। लैम्प, प्रकाश का एक कृत्रिम स्रोत है।
A. चन्द्रमा।
B. सूर्य।
C. टॉर्च।
D. मोमबत्ती।
सूर्य, प्रकाश का प्राकृतिक स्रोत है जो अपना स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करता है। टॉर्च तथा मोमबत्ती प्रकाश के मानव निर्मित स्रोत है जो प्रकाश के कृत्रिम स्रोत के रूप में भी जाने जाते हैं। चन्द्रमा का अपना स्वयं का प्रकाश नहीं होता है तथा यह हमें सूर्य से आने वाले प्रकाश के परावर्तन के कारण दिखाई देता है।
A. सूर्य से आने वाला प्रकाश चन्द्रमा पर गिरता है और फिर, हमारी आँखों की संचरण करता है।
B. हमारी आँखों से प्रकाश चन्द्रमा की ओर पहुँचता है।
C. चन्द्रमा प्रकाश को रोकता है।
D. चन्द्रमा का अपना स्वयं का प्रकाश होता है।
हम चन्द्रमा को केवल तभी देख सकते हैं जब सूर्य से आने वाला प्रकाश चन्द्रमा पर आपतित होता है और चन्द्रमा सूर्य के प्रकाश को हमारी आँखों की ओर परावर्तित कर देता है।
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विद्युत् -चालक |
विद्युत् -रोधक |
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पेंसिल की नोंक |
प्लास्टिक |
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चांदी की अंगूठी |
कांच |
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पानी |
कागज |
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पारा |
पत्थर |
तार रबर या प्लास्टिक से आवरित होते हैं क्योंकि, ये कुचालक होते हैं जो विद्युत् का चालन नहीं कर सकते हैं । बिना आवरित धारावाही तार से हमें विद्युत् झटका लग सकता है।
फ्यूज़ बल्ब का तंतु खंडित होने के कारण, विद्युत्-सेल के टर्मिनलों के बीच विद्युत्-धारा का परिपथ टूट जाता है। इसलिए फ्यूज़ बल्ब के तंतु से विद्युत्-धारा प्रवाहित न होने के कारण यह दीप्तिमान नहीं होता है।
बल्ब को दीप्त करने के लिए, संयोजक तारों को नीचे चित्र में दिखाए अनुसार, जोड़ना चाहिए:

दो कुचालक हैं :
1. प्लास्टिक।
2. रबर।
दो चालक है :
1. एल्यूमिनियम।
2. कॉपर।
यदि हम किसी विद्युत् सेल के दोनों टर्मिनलों को स्विच तथा बल्ब जैसी युक्ति के संयोजन के बिना सीधे ही संयोजित करते है, तो इसके अंदर के रसायन बहुत जल्दी समाप्त हो जाएंगे। इसका कारण यह है कि बिना किसी स्विच के, यह परिपथ हमेशा पूर्ण रहता है तथा इसके कारण सेल के अंदर रासायनिक अभिक्रिया निरंतर सक्रिय हो जाती है।
कभी कभी विद्युत् बल्ब विद्युत् सेल से जुड़े होने पर भी दीप्त इसलिए नहीं करता क्योंकि उसका तंतु (फिलामेंट) टूटा होता है| नहीं होते क्योंकि उनका तंतु (फिलामेंट) खंडित होता है बल्ब का तंतु खंडित होने के कारण, विद्युत्-सेल के टर्मिनलों के बीच विद्युत्-धारा का परिपथ टूट जाता है। इसलिए फ्यूज़ -बल्ब के तंतु से विद्युत्- धारा प्रवाहित न होने के कारण यह दीप्तिमान नहीं होता है|