खुला परिपथ:- वह परिपथ जो कहीं से टूटा हुआ है, खुला परिपथ कहलाता है। खुले परिपथ में से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती है। यह एक अपूर्ण परिपथ है।

बंद परिपथ:- वह परिपथ जो किसी भी जगह से टूटा हुआ नहीं होता है, बंद परिपथ कहलाता है। बंद परिपथ में से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। बंद परिपथ एक पूर्ण परिपथ होता है।

कैलकुलेटर में प्रयोग होने वाले सेल, बटन सेल के रूप में जाने जाते हैं, क्योंकि ये बटन के आकार के समान होते हैं । इन सेलों की प्लेट निकिल तथा कैडमियम योगिकों से बनी होती है।
इन सेलों का प्रमुख लाभ है कि ये बिना किसी क्षय के महीनों के लिए सक्रिय अवस्था में स्थायी रह सकते हैं ।
नहीं, परिपथ में यह बल्ब नहीं जलेगा। इसके पीछे यह कारण है कि विद्युत् सेल का केवल धनात्मक टर्मिनल दो संयोजक तारों की सहायता से बल्ब के एक टर्मिनल से जुड़ा होता है। तथा सेल का ऋणात्मक बल्ब के दूसरे टर्मिनल से नहीं जुड़ा होता है। इस कारण बल्ब के तन्तु के माध्यम से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है क्योंकि यह परिपथ पूर्ण परिपथ नहीं है।

जब दो या दो से अधिक विद्युत् सेलों को इस तरह से जोड़ते हैं कि एक सेल का धनात्मक टर्मिनल दूसरे सेल के ऋणात्मक टर्मिनल से जुड़ा हो तो हम इस संयोजन को बैटरी कहते हैं । बैटरी बनाने के लिए दो विद्युत सेलों के संयोजन को नीचे चित्र में दिखाया गया है :

घरों में इस्तेमाल होने वाले विद्युत् उपकरणों में अक्सर तीन तारें होती है|
यह तारें लाल,नीली और हरी होती हैं |
लाल तार धनात्मक सिरे से जोड़ी जाती है ,नीली तार ऋणात्मक सिरे से जोड़ते हैं और हरी तार भू संपर्क में होती है|
लाल तार को छूने से हमें झटका लगता हैं |
यदि यह तारें आपस में जुड़ जाएँ तो क्षणिक समय में बहुत सारा अधिक विद्युत् प्रवाह हो जाएगा और आग लग सकती है और उपकरण भी ख़राब हो सकता है |
इस भारी विद्युत् प्रवाह को रोकने और उपकरणों को क्षति से बचने के लिए तारें प्लास्टिक से अवतरित होती हैं |
(i). a. दो या दो से अधिक सेल--- बैटरी
b. विद्धुत सेल के दो टर्मिनलों के बीच विद्धुत प्रवाह—विद्धुत परिपथ
(ii). विद्युत् -चालक- ऐसे पदार्थ जिनके माध्यम से विद्युत् – धारा प्रवाहित हो सकती है |उदहारण: धातु पानी
विद्युत् - रोधक—ऐसे पदार्थ जिनके माध्यम से विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं हो सकती है | उदहारण: कागज प्लास्टिक
(iii).

(i), (ii) और (iii)

(iv) जब भी दो या दो से अधिक सेल को संयोजित किया जाता है तो हमेशा धनात्मक सिरे को ऋणात्मक सिरे से जोड़ना होता है, अन्यथा विद्युत् प्रवाह नहीं होता| यदि सेल की दिशा परिवर्तित की गई तो विद्युत् परिपथ पूर्ण नहीं होगा और बल्ब दीप्त नहीं होगा |
(v) यदि बल्ब का तंतु खंडित हो जाए तो विद्धुत परिपथ पूर्ण नहीं होगा और बल्ब दीप्त नहीं होगा |
A.

B.

C.

D.

केवल भैंस शाकाहारी जन्तु है, क्योंकि ये केवल पादप और उसके उत्पाद ही खाती है।
A.

B.

C.

D.

4 दिनों के लिए पानी में छोड़ने के बाद चने के बीज अंकुरित हो गए।
A.
लवण
B.
घी
C.
चावल
D.
दूध
चावल पादप से उत्पादित होता है।
A.
पत्ती
B.
तना
C.
पुष्प
D.
फल
शर्करा के क्रिस्टल गन्ने के तने के रस को प्रसंस्करण द्वारा उत्पादित करते हैं।
A.
एक स्थान जहाँ मधुमक्खियाँ रहती हैं
B.
बना हुआ शहद
C.
पुष्पों का मीठा रस
D.
रानी मधुमक्खी का नाम
पराग पुष्पों का मीठा रस है। मधुमक्खी पुष्पों से पराग एकत्रित करती है और शहद में परिवर्तित कर देती है तथा अपने करंड में संग्रहित कर लेती हैं।
A.
शाकाहारी जन्तु
B.
मांसाहारी जन्तु
C.
सर्वाहारी जन्तु
D.
कीटाहारी जन्तु
जन्तु जो केवल पादप के उत्पादों को खाते हैं वे शाकाहारी कहलाते हैं।
A. तारें।
B. पृथ्वी।
C. सूर्य।
D. जुगनू।
पृथ्वी एक ग्रह है जो अप्रदीप्त निकाय है क्योंकि, यह अपना स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित नहीं करता है। अन्य सभी प्रदीप्त वस्तुएँ हैं जो अपना स्वयं का प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
A. 10 cm ऊंचाई का।
B. 15 cm ऊंचाई का।
C. अदृश्य।
D. 5 cm ऊंचाई का।
किसी समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा लेकिन, पाश्र्विक प्रतिलोमित होता है तथा वस्तु (मोमबत्ती) के आकार के समान होता है। इस प्रकार, 15 cm ऊंचाई की मोमबती का प्रतिबिम्ब भी 15 cm होगा।
A. परावर्तित किरण।
B. निर्गत किरण।
C. संचरित किरण।
D. आपतित किरण।
यदि प्रकाश की कोई किरण समतल दर्पण, गोलीय दर्पण या किसी लेंस की सतह पर आपतित होती है, तो यह सतह पर आपतन कहलाता है।
A. प्रकाश के परावर्तन के कारण।
B. प्रकाश के अपवर्तन के कारण।
C. छाया के कारण।
D. प्रदीप्त वस्तुओं के कारण।
किसी दर्पण द्वारा बनने वाला प्रतिबिम्ब प्रकाश के परावर्तन के कारण बनता है। किसी वस्तु से आने वाला प्रकाश जब किसी दर्पण पर आपतित होता है तो परावर्तित हो जाता है और हमारी आँखों तक पहुँचता है।
A. गहरी छाया बनाती है।
B. हल्की छाया बनाती है।
C. छाया उत्पन्न करने में असक्षम होती है।
D. लाल रंग की छाया बनाती है।
गहरी छाया केवल तभी बनती है जब प्रकाश किसी वस्तु द्वारा पूर्णतया बाधित हो जाता है। पारभासी पदार्थ प्रकाश को पूर्णतया रोक नहीं पाते है लेकिन, अपने माध्यम से आंशिक रूप से गुजरने देते हैं। और इस प्रकार, ये वस्तुएँ दुर्बल छाया बनाती हैं।
A. छाया के बनने के कारण।
B. प्रकाश के परावर्तन के कारण।
C. प्रकाश के संचरण के कारण।
D. प्रकाश के सरल रेखीय संचरण के कारण।
जल की सतह एक समतल परावर्ती सतह के रूप में कार्य करती है। पेड़ों से आ रहा प्रकाश जल की सतह पर आपतित होता है तथा परावर्तित होकर हमारी आँखों तक पहुँचता है।
A. अपारदर्शी वस्तु द्वारा।
B. पारदर्शी वस्तु द्वारा।
C. पारभासी वस्तु द्वारा।
D. प्रदीप्त वस्तु द्वारा।
सूर्य के प्रकाश में एक स्पष्ट काली छाया केवल अपारदर्शी वस्तु द्वारा ही बनाई जा सकती हैं क्योंकि,ये प्रकाश में बाधा उत्पन्न करते है तथा अपने माध्यम से प्रकाश को नहीं गुजरने देते हैं।
A. मुड़े हुए खोखले पाईप।
B. सीधे खोखले पाईप।
C. वृताकार खोखले पाईप।
D. ठोस पाईप।
प्रकाश, सरल रेखा में संचरण करता है जो प्रकाश का सरल रेखीय संचरण कहलाता है। इस प्रकार, प्रकाश सीधे खोखले पाईप के माध्यम से गुजर सकता है।
A. छाया का बनना।
B. प्रतिबिम्बों का बनना।
C. प्रकाश की दिशा में परिवर्तन।
D. प्रतिबिम्बों के आकार में परिवर्तन।
जब प्रकाश किसी सतह पर आपतित होता है, इसका कुछ भाग अपनी दिशा में परिवर्तित के साथ लौट जाता है। यह प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।
A. अप्रदीप्त वस्तुएँ।
B. प्रदीप्त वस्तुएँ।
C. पारभासी वस्तुएँ।
D. पारदर्शी वस्तुएँ।
प्रदीप्त वस्तुएँ वह वस्तुएँ होती हैं जो अपना स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करती है। उदाहरण के लिए, सूर्य, टॉर्च, तारें, जुगनू आदि।
A. पारदर्शी।
B. पारभासी।
C. अपारदर्शी।
D. प्रदीप्त।
पारदर्शी वस्तु अपने माध्यम से प्रकाश को गुजरने देती है तथा हम इन वस्तुओं के माध्यम से स्पष्ट रूप से देख पाते हैं।
उदाहरण :- काँच।
A. पारभासी वस्तु।
B. पारदर्शी वस्तु।
C. अपारदर्शी वस्तु।
D. प्रदीप्त वस्तु।
बटर पेपर, पारभासी वस्तु का एक उदाहरण है क्योंकि, यह अपने माध्यम से प्रकाश को आंशिक रूप से गुजरने देती है तथा हम इसके माध्यम से पूर्णतया नहीं देख पाते हैं।
A. प्रदीप्त वस्तु।
B. अपारदर्शी वस्तु।
C. पारभासी वस्तु।
D. पारदर्शी वस्तु।
अपारदर्शी वस्तुएँ तथा धातु (अपारदर्शी वस्तुओं का उदाहरण है) जो अपने माध्यम से प्रकाश को गुजरने नहीं देते हैं तथा हम इन वस्तुओं के माध्यम से देख नहीं सकते हैं। लौहे की शीट अपारदर्शी वस्तु का एक उदाहरण है।
A. हमेशा लाल रंग की।
B. काले रंग की।
C. किसी वस्तु के रंग की।
D. श्वेत रंग की।
वस्तु (बिम्ब) किसी भी रंग की हो सकती है, लेकिन, छाया हमेशा बिना रंग की होती है। अर्थात्, काले रंग की होती है क्योंकि, छाया क्षेत्र में कोई प्रकाश नहीं पहुँचता है।
मानव द्वारा निर्मित प्रकाश स्रोत है:- मोमबत्ती, तेल - लैम्प।
वस्तु (बिम्ब) किसी भी रंग की हो सकती है। लेकिन, छाया हमेशा बिना रंग की होती है। अर्थात्, काले रंग की होती है क्योंकि, छाया क्षेत्र में कोई प्रकाश नहीं पहुँचता है।
सूर्य, प्रकाश का प्राकृतिक स्रोत है जो अपना स्वयं का प्रकाश उत्सर्जित करता है।
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा लेकिन, पर्शविक प्रतिलोमित होता है तथा वस्तु के आकार के समान होता है।
यह साधारण कैमरा होता है जिसे पतले प्रकाशरोधी बॉक्स को लेकर एक फलक में छोटा छिद्र बनाकर बना सकते हैं। यह बॉक्स के विपरीत दिशा में उल्टा प्रतिबिम्ब बनाता है।
वह पदार्थ जो अपने में से होकर प्रकाश को गुज़रने देते हैं पारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं । उदाहरण के लिए : काँच ।
A. यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत् ऊर्जा में।
B. रासायनिक ऊर्जा से विद्युत् ऊर्जा में।
C. यांत्रिक ऊर्जा से यांत्रिक ऊर्जा में।
D. विद्युत् ऊर्जा से रासायनिक ऊर्जा में।
किसी शुष्क सेल में, रासायनिक अभिक्रिया के कारण रासायनिक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है।
A. सेल।
B. स्विच।
C. बैटरी।
D. तार।
स्विच एक उपकरण होता है जो आवश्यकता के अनुसार, जोड़ा और हटाया जा सकता है। ऑन स्थिति में, स्विच जुड़ जाता है तथा परिपथ पूर्ण हो जाता है या यह परिपथ बंद परिपथ कहलाता है। ऑफ़ स्थिति में, यह परिपथ से हट जाता है और यह खुला परिपथ कहलाता है।
A. रबर की चप्पल।
B. लौहे के दस्ताने।
C. स्वर्ण लेपित जूते।
D. सिल्वर लेपित जूते।
रबर प्रकृति में अाधात्विक होता है तथा अपने माध्यम से विद्युत् को प्रवाहित होने नहीं देता हैं (अर्थात्, यह विद्युत् धारा के प्रवाह के लिए अत्यधिक प्रतिरोध प्रदान करता है।) इस प्रकार, यह एक कुचालक है।
A. इसके अन्दर विद्युत् बल्ब से।
B. इसके बाहर विद्युत् बल्ब से।
C. इसके अन्दर ट्यूब लाईट से।
D. इसके बाहर ट्यूब लाईट से।
टॉर्च के अन्दर एक बल्ब होता है। जब हम टॉर्च का स्विच चालू करते हैं तो परिपथ पूर्ण हो जाता हैं तथा बैटरी द्वारा बल्ब में धारा प्रवाहित होने से , प्रकाश प्राप्त होता है।
किसी परिपथ में यदि एल्युमीनियम की संयोजक तारों को बदल कर सूती धागा लगा दिया जाये तो विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं हो सकेगी क्यूँकि क्योंकि सूती धारा विद्युत् -रोधक है|
a. विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है|
b. किसी शुष्क सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है|
विद्युत् बल्ब और विद्युत् सेल में दो टर्मिनल इसलिए होते हैं ताकि उन्हें जोड़ कर विद्युत् परिपथ बनाया जा सके और विद्युत् धारा प्रवाहित हो सके|
विद्युत् बल्ब --- थामस एल्वा एडिसन
विद्युत् सेल --- अलेक्सेंडर वोल्टा
विद्युत् धारा किसी सेल या बैटरी के धनात्मक सिरे (टर्मिनल) से ऋणात्मक सिरे (टर्मिनल) की ओर प्रवाहित होती है|
जब बल्ब तथा संयोजक तार एक बंद परिपथ बनाते है
यह विद्युत् का सूक्ष्म स्त्रोत है। यह रासायनिक अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप विद्युत धारा प्रदान करते हैं ।
वह पदार्थ जिनके माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो सकती है, कुचालक कहलाते हैं । उदाहरण के लिए:रबर
विद्युत्-परिपथ
जब किसी बल्ब का तंतु टूट जाता है तो उसे फ्यूज़ बल्ब कहते हैं
स्विच, एक सरल युक्ति है जो परिपथ को विच्छेद करने तथा पूर्ण करने में सहायक होती है।
किसी विद्युत सेल में दो टर्मिनल होते हैं। सेल की धात्विक टोपी, धनात्मक टर्मिनल के रूप में तथा सेल की धात्विक डिस्क, ऋणात्मक टर्मिनल के रूप में चिन्हित की हुई होती है।
पदार्थ जिसके माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है, चालक कहलाते हैं। उदहारण : धातु
विद्युत सेल, सेल के भीतर होने वाली रासायनिक अभिक्रियों के कारण विद्युत उत्पन्न करते हैं।
हमारा शरीर विद्युत का चालक है, इसलिए हमें विद्युत झटके लगते हैं।
किसी विद्धुत परिपथ में मुख्यतः निम्न विद्युत् अवयव होते हैं:
प्रकाश के वह स्रोत जो व्यक्ति द्वारा बनाये गए हैं, प्रकाश के कृत्रिम स्रोत कहलाते हैं। उदाहरण के लिए: विद्युत् बल्ब।
प्रकाश, ऊर्जा का स्रोत है। यह वस्तुओं को देखने में हमें सक्षम बनाता है।
पारदर्शी वस्तु : वस्तु जो अपने में से होकर प्रकाश को गुजरने देती है । उदाहरण : पानी, काँच आदि ।
पारभासी वस्तु : वस्तु जो प्रकाश को अपने में से आंशिक रूप से होकर गुजरने देती है । उदाहरण : वेक्स पेपर।
अपारदर्शी वस्तु : वस्तु जो प्रकाश को अपने में से होकर गुजरने नहीं देती है । उदाहरण : लकड़ी, ईंट ।
वह पदार्थ जो अपने में से प्रकाश को गुज़रने नहीं देते हैं , अपारदर्शी पदार्थ कहलाते हैं । उदाहरण : लकड़ी ।
प्रदीप्त वस्तुएँ: वह वस्तुएं जो स्वयं प्रकाश का उत्सर्जन करती है, प्रदीप्त वस्तुएँ कहलाती हैं। उदाहरण के लिए सूर्य, विद्युत बल्ब।
अप्रदीप्त वस्तुएँ : वह वस्तुएँ जो अन्य निकायों के प्रकाश को परावर्तित करती हैं, अप्रदीप्त वस्तुएँ कहलाती है । उदाहरण के लिए : चन्द्रमा ।
हाँ, प्रकाश सीधी रेखा में
हाँ, छाया हमें वस्तु के आकार के बारे में सूचना देती है ।
छाया अंधकार के क्षेत्र के रूप में परिभाषित की जाती है । जब अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के पथ में आ जाती है तो यह बनती है।
वह पदार्थ जिसके माध्यम से प्रकाश आंशिक रूप से गुजर सकता है, पारभासी पदार्थ कहलाते हैं । उदाहरण के लिए : वेक्स पेपर ।
नहीं, हम दर्पण में हमारा प्रतिबिम्ब देखने में सक्षम नहीं होंगे क्योंकि एक वस्तु को देखने के लिए हमें प्रकाश के स्रोत की आवश्यकता होती है ।
स्वतः प्रकाश उत्पन्न करने वाले प्रकाश स्रोत प्राकृतिक प्रकाश स्रोत कहलाते हैं। सूर्य सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रकाश स्रोत है। इसके अलावा तारे, जुगनू तथा कुछ समुंदरी मछलियाँ भी प्रकाश के प्राकृतिक स्रोत हैं।
प्रकाश उत्पन्न करने वाली वस्तुएँ प्रकाश स्रोत कहलाती हैं। सूर्य सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रकाश स्रोत है। इसके अलावा तारे, जुगनू तथा कुछ समुंदरी मछलियाँ भी प्रकाश के प्राकृतिक स्रोत हैं। मानव निर्मित प्रकाश स्रोत कृत्रिम प्रकाश स्रोत कहलाते हैं। मोमबत्ती, बिजली का बल्ब, टार्च, लेम्प इत्यादि कृत्रिम प्रकाश स्रोत हैं।
(क) स्टील की चमकदार थाली एक दीप्त वस्तु है।
(ख) प्रकाश की अनुपस्थिति में वस्तुओं को देख पाना संभव नहीं है।
(ग) जुगनू एक प्राकृतिक प्रकाश स्रोत है।
(घ) चन्द्रमा में स्वयं का प्रकाश होता है।
वस्तुओं को देखने के लिए प्रकाश आवश्यक है। प्रकाश स्रोत से आने वाली प्रकाश किरण जब किसी वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँख पर पड़ती है तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब हमारी आँख में बनता है और वस्तु हमें दिखाई देती है। प्रकाश की अनुपस्थिति में वस्तु का प्रतिबिम्ब हमारी आँख पर नहीं बन पाता और वस्तु हमें दिखाई नहीं देती है।
जिन वस्तुओं में स्वयं का प्रकाश होता है, दीप्त वस्तुएँ कहलाती हैं सूर्य, तारे, बिजली का बल्ब, टार्च, जुगनू आदि दीप्त वस्तुएँ हैं।
जिन वस्तुओं में स्वयं का प्रकाश नहीं होता होता अदीप्त वस्तुएँ कहलाती हैं। ऐसी वस्तुएँ किसी दूसरे प्रकाश स्रोत के प्रकाश से चमकती हैं चन्द्रमा, दर्पण, चमकदार थाली आदि अदीप्त वस्तुएँ हैं।
प्रकाश के प्राकृतिक स्रोत है :
1. ड्रैगन मछली ।
2. जुगनू ।
3. सूर्य ।
प्रकाश के कृत्रिम स्रोत है :
1. विद्युत बल्ब ।
2. मोमबत्ती ।
3. गैस लेम्प ।
पारदर्शी तथा पारभासी वस्तुओं के बीच मुख्य अन्तर निम्नानुसार है :
|
पारभासी वस्तुएँ |
पारदर्शी वस्तुएँ |
|
1. ये अपने में से प्रकाश का कुछ भाग ही गुज़रने देते हैं । |
1. ये अपने में से प्रकाश को गुज़रने देते हैं । |
|
2. इनके माध्यम से वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख सकते हैं । |
2. इनके माध्यम से वस्तुओं को स्पष्ट देख सकते हैं। |
|
3. बटर पेपर तथा मोम पारभासी वस्तुओं के उदाहरण हैं । |
3. काँच तथा वायु पारदर्शी वस्तुओं के उदाहरण हैं। |
प्रकाश के परावर्तन की घटना हमारे आस पास की वस्तुओं को देखने में अत्यंत सहायक है। प्रकाश स्रोत से आने वाली प्रकाश किरण जब किसी वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँख पर पड़ती है तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब हमारी आँख में बनता है और वस्तु हमें दिखाई देती है। यदि वस्तु से प्रकाश परावर्तित नहीं होता तो वस्तु हमें दिखाई नहीं देती। अतः परावर्तन वस्तुओं को देखने के लिए आवश्यक है।
मानव निर्मित प्रकाश स्रोत कृत्रिम स्रोत कहलाते हैं। मोमबत्ती, बिजली का बल्ब, टार्च, लेम्प आदि कृत्रिम प्रकाश स्रोत हैं। कृत्रिम प्रकाश स्रोत हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रात में जब सूर्य का प्रकाश उपलब्ध नहीं होता, हम अपने आस पास की वस्तुओं को कृत्रिम प्रकाश स्रोतों की सहायता से देख पाते हैं। यदि कृत्रिम प्रकाश स्रोत नहीं होते तो रात में या फिर उन स्थानों पर जहाँ सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता है, कार्य करना अत्यंत कठिन होता है। हमारे दैनिक जीवन में रात के अलावा दिन में भूमिगत स्थानों पर कृत्रिम प्रकाश स्रोतों की सहायता से कार्य किया जाता है।
(1) जब अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के स्त्रोत की तुलना में बड़े आकार की होती है तो छाया में पूर्णतया अँधेरा होता है जिसे परछाई कहते हैं जो वस्तु की तुलना में बड़ी होती है ।

(2)जब अपारदर्शी वस्तु, प्रकाश के स्त्रोत की तुलना में छोटी होती है तो खंडछाया से बनी प्रतिछाया की लम्बाई बढ़ेगी तथा प्रतिछाया का आकार वस्तु की तुलना कम होगा।
अधिक दूरी पर, छाया गायब हो जाएगी।
प्रकाश के कुछ गुण निम्नानुसार है :
1. प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गति करता है ।
2. जब प्रकाश, एक अपारदर्शी वस्तु द्वारा बाधित होता है तो यह इसके पीछे वस्तु की छाया बनाता है ।
3. प्रकाश, परावर्तन का गुण दर्शाता है ।
तीन कार्ड बोर्ड लेते हैं। इनके प्रत्येक के केन्द्रों पर सूक्ष्म छिद्र बनाते हैं। प्रकाश स्रोत जैसे मोमबत्ती या बल्ब एक तरफ रखते हैं तथा बोर्ड को इस प्रकार से व्यवस्थित करते हैं कि तीनो छिद्र सीधी रेखा में रहे।
यदि दूसरी तरफ आँख से देखते है तो पाते है कि मोमबत्ती से प्रकाश केवल तभी दिखाई देता हैं जब तीनो छिद्र सीधी रेखा में हो।
यदि कोई भी कार्ड बोर्ड विस्थापित कर देते हैं तो प्रकाश दिखाई नहीं देगा । इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश सीधी रेखा में गति करता है ।
हम जानते हैं कि वस्तु का दिखना प्रकाश के परावर्तन पर आधारित होता है। प्रकाश स्रोत से आने वाली प्रकाश किरण जब किसी वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँख पर पड़ती है तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब हमारी आँख में बनता है और वस्तु हमें दिखाई देती है। यदि वस्तु से प्रकाश परावर्तित नहीं होता तो वस्तु हमें दिखाई नहीं देती। कभी-कभी काँच द्वारा उस पर पड़ने वाले प्रकाश का अधिकतर भाग अपवर्तित कर दिया जाता है और परावर्तन अल्प मात्रा में ही हो पाता है, जिसके कारण काँच हमें दिखाई नहीं देता है और हम उससे टकरा जाते हैं।
प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो वस्तुओं को देखने में सहायक है। प्रकाश की अनुपस्थिति में वस्तुओं को देख पाना संभव नहीं है। इसलिए, रात के अँधेरे में यदि कृत्रिम प्रकाश स्रोत उपलब्ध नहीं होते तो हम अपने आस - पास की किसी भी वस्तु को नहीं देख पाते। किसी प्रकाश स्रोत द्वारा उत्सर्जित प्रकाश चारों दिशाओं में फ़ैल जाता है तथा वस्तु से परावर्तित होकर यह प्रकाश हमारी आँख पर पड़ता है। आँख पर वस्तु का प्रतिबिम्ब बनने पर हम वस्तु को देख पाते हैं।
प्रकाश की अनुपस्थिति में हमारे आस - पास की वस्तुओं का प्रतिबिम्ब हमारी आँख पर नहीं बन पाता और हम उन्हें देख नहीं पाते हैं। अतः वस्तुओं को देखने के लिए प्रकाश का होना आवश्यक होता है। रात में जब प्राकृतिक प्रकाश स्रोत सूर्य का प्रकाश उपलब्ध नहीं होता तो हम कृत्रिम स्रोतों की मदद लेते हैं।
A. एक।
B. दो।
C. तीन।
D. चार।
एक विद्युत् सेल में दो टर्मिनल होते है:- एक ऋणात्मक जबकी अन्य धनात्मक होता है। विद्युत् धारा धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर प्रवाहित होती है।
A. धातु तथा चालक।
B. धातु तथा कुचालक।
C. अधातु तथा चालक।
D. अधातु तथा कुचालक।
किसी बल्ब का फिलामेंट टंगस्टन का बना होता है जो एक धातु तथा विद्युत् की चालक है क्योंकि, इसके माध्यम से विद्युत् धारा प्रवाहित हो सकती है।
A. होल्डर।
B. बाह्य कांच का आवरण।
C. कांच का रंग।
D. फिलामेंट।
जब किसी विद्युत् बल्ब के फिलामेंट के माध्यम से एक निश्चित मान की विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह बल्ब जलना शुरू हो जाता है।
A. चालक।
B. कुचालक।
C. दुर्बल चालक।
D. अर्धचालक।
मानव शरीर विद्युत् का श्रेष्ठ चालक होता है। केवल इसी कारण से जब हम विद्युतीय तारों के संपर्क में आते हैं, तो विद्युत् आघातों को महसूस करते हैं।
A. अर्धचालक।
B. अधातु।
C. कुचालक।
D. धातु।
एल्युमिनियम एक धातु है तथा इस प्रकार, यह विद्युत् का चालक है।
A. कागज़।
B. प्लास्टिक पैन।
C. रबर बैण्ड।
D. सैफ्टी पिन।
एक स्विच बनाने के लिए, हम लौहे की बनी सैफ्टी पिन का उपयोग कर सकते हैं जो विद्युत् की श्रेष्ठ चालक होती है। यह परिपथ को क्रमशः बंद तथा खुला करने के लिए उपयोग की जा सकती है।
A. टर्मिनल।
B. कैमरा।
C. वहनीय जनित्र।
D. सेल।
किसी कैमरे में प्रकाश प्रभाव प्रदान करने के लिए इसके फ्लैश के संचालन के लिए विद्युत् की आवश्यकता होती है, इसलिए, इसमें विद्युत् आपूर्ति के लिए सेलों का उपयोग किया जाता है।
A. धनात्मक टर्मिनल।
B. ऋणात्मक टर्मिनल।
C. संरक्षी उपकरण।
D. विद्युत् के स्रोत।
एक विद्युत् सेल में दो टर्मिनल होते हैं । एक ओर की धात्विक टोपी धनात्मक टर्मिनल के रूप में जबकि, दूसरी ओर की धात्विक चकती ऋणात्मक टर्मिनल के रूप में कार्य करती है।
A. कुचालक।
B. अधात्विक।
C. चालक।
D. अर्धचालक।
चालक सामान्यतया धात्विक प्रकृति के होते हैं तथा अपने माध्यम से विद्युत् धारा के गुजरने का गुण होता है।
A. ऊर्जा का।
B. दाब का।
C. कार्य का।
D. तापमान का।
विद्युत्, सबसे उपयोगी ऊर्जा है, जो आसानी से ऊर्जा के अन्य रूपों में रूपांतरित की जा सकती है। उदाहरण के लिए: किसी विद्युत् हीटर में, विद्युत् ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है तथा एक विद्युत् बल्ब में, विद्युत् ऊर्जा प्रकाश ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है।
A. सौर ऊर्जा के माध्यम से।
B. बहते हुए पानी से प्राप्त ऊर्जा के माध्यम से।
C. पवन ऊर्जा के माध्यम से।
D. जब सूर्य प्रकाशमान नहीं होता हैं।
विद्युत्, सौर ऊर्जा (सूर्य से प्राप्त ऊर्जा), पवन ऊर्जा इसके साथ ही बहते हुए पानी (बांधों) से प्राप्त ऊर्जा के माध्यम से भी उत्पन्न की जा सकती है।
A. यांत्रिक ऊर्जा में।
B. प्रकाश ऊर्जा में।
C. सक्रियण ऊर्जा में।
D. पवन ऊर्जा में।
जब किसी मिक्सर की मोटर को विद्युत् धारा प्रदान की जाती है, तो यह घूर्णन करना शुरु हो जाती है। इस प्रकार, विद्युत् ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है।
A. यांत्रिक ऊर्जा में।
B. रासायनिक ऊर्जा में।
C. प्रकाश ऊर्जा में।
D. ऊष्मीय ऊर्जा में।
जब जल पम्पों में से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसकी विद्युत् मोटर घूर्णन करने लगाती है और परिणामस्वरूप, पानी पम्पों से खींचने लगता है। इस प्रकार, यहाँ, विद्युत् ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है।
A. रासायनिक ऊर्जा में।
B. यांत्रिक ऊर्जा में।
C. ऊष्मीय ऊर्जा में।
D. प्रकाश ऊर्जा में।
एक टॉर्च में, सेलों के रसायनों से विद्युत् प्राप्त होती है। जब विद्युत् बल्बों के फिलामेंट के माध्यम से विद्युत् धारा की निश्चित मात्रा प्रवाहित की जाती है, तो यह गर्म हो जाता है और बल्ब जलने लगता है।
A. पानी का ।
B. ऊष्मा का ।
C. वायु का ।
D. विद्युत् का ।
विद्युत् मीटर एक अंशांकित उपकरण होता है जो घरों में उपभोग की जाने वाली विद्युत् की इकाइयों की संख्या की गणना करता है।
A. रासायनिक अभिक्रिया।
B. यांत्रिक अन्तःक्रिया।
C. पदार्थ के बीच अन्तःक्रिया।
D. यांत्रिक तथा रासायनिक अन्तःक्रिया।
शुष्क सेल में होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के कारण, मुक्त आयन उत्पन्न होते हैं जो विद्युत् उत्पन्न करते हैं ।
जन्तु जो अपने भोजन के लिए केवल पादप पर निर्भर रहते हैं उन्हें शाकाहारी कहते हैं। गाय और बकरी इनके उदाहरण है।
सरसों के पौधे के बीज तेल देते है और सरसों सब्जी के रूप में भी काम आता है।
उबले हुए चावलों को बनाने के लिए दो सामग्री की आवश्यकता होती है। वे चावल और पानी हैं।
चावल और गेहूँ।
मूँग और चने से स्वादिष्ट नाश्ता उन्हें उबाल कर या उन्हें अंकुरित कर और उनमें मसाले मिलाकर बना सकते हैं।
नहीं, ये केवल साल के कुछ महीने ही उपलब्ध होते हैं।