जलीय आवास ।
स्थलीय आवास ।
हाँ, विभिन्न प्रकार के जन्तु और पौधे एक ही आवास में रह सकते हैं।
श्वसन के लिए गिल्स की उपस्थिति की सहायता से मछलियाँ जल में आराम से जीवित रह सकती हैं।
हल, सिलाई मशीन, रेडियो और नाव।
याक के शरीर पर लंबे बाल होते हैं और हिम तेंदुआ के पेरों के साथ शरीर पर फर की मोटी परत होती है जो उन्हें अत्यधिक ठंड से बचाती है।
-
ये वृक्ष
सामान्य रूप
से आकार में
कोन के समान
होते हैं
जिससे वर्षा
का जल और बर्फ
इनकी शाखाओं
से बह जाते
हैं।
- इनकी
पत्तियाँ
सुई के समान
होती हैं
जिससे बर्फ
इनकी
पत्तियों पर
जमती नहीं हैं।
चूहे और साँप दिन के समय गहरे बिलों में छुप जाते हैं जिससे वे स्वयं को रेगिस्तान की तीव्र गर्मी से बचाते हैं। ये रात के समय जब बाहर ठंडा वातावरण होता है तब अपने बिलों से निकलते हैं।
जैविक
घटक में सभी
जीवित
वस्तुएँ
जैसे पादप और
जन्तु शामिल
हैं।
अजैविक
घटकों में
सभी निर्जीव
वस्तुएँ
जैसे मृदा, जल, वायु, चट्टानें, ऊष्मा और
प्रकाश,
आदि शामिल
हैं।
मक्खन, चमड़ा, ऊन, खाना बनाने का तेल, सेब।
|
लक्षण |
समोद्भिद |
मरूद्भिद |
|
आवास |
स्थल |
मरूस्थल |
|
मूल |
मध्यम आकार |
लम्बे और गहरे |
|
पत्तियाँ |
हरे |
पतले और काँटेदार |
1. परजीवी
2. मरूद्भिद
3. क्लोरोफिल
हाँ, वह सही है, गुलाब को एक झाड़ी की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि यह निम्न लक्षण दर्शाता है-
� पौधे कम मोटाई और ऊँचाई के साथ मध्यम आकार के हैं।
� तना काष्ठीय होता है।
� प्राय:अतिशाखित होते हैं।
� शाखाऐं जमीन से थोड़ा सा ही ऊपर से निकली होती हैं।
A.
दो भाग ऑक्सीजन और एक भाग हाइड्रोजन
B.
दो भाग हाइड्रोजन और एक भाग ऑक्सीजन
C.
दो भाग हाइड्रोजन और एक भाग हीलियम
D.
एक भाग हीलियम और दो भाग हाइड्रोजन
जल का रासायनिक सूत्र H2O होता है जिसका अर्थ है इसमे दो भाग हाइड्रोजन और एक भाग ऑक्सीजन पायी जाती है ।
A.
नाइट्रोजन
B.
हीलियम
C.
कार्बन डाईऑक्साइड
D.
ऑक्सीजन
ऑक्सीजन जल में घुली हुई अवस्था में पायी जाती है । अधिकांश जलीय जंतुओं में श्वसन हेतु ऑक्सीजन के अवशोषण के लिए गिल पाये जाते हैं ।
A.
इससे हानिकारक गैसें निकलती हैं ।
B.
यह उद्योग के लिए मात्र एक औपचारिकता है ।
C.
अन्तरिक्ष को इन गैसों की आवश्यकता होती है ।
D.
यह जल को बहने के स्थान देती है ।
उद्योगों से निकलने वाली गैसें हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं, अतः उन्हे हमसे दूर रखने के लिए उन्हे ऊंची चिमनियों द्वारा ऊँचाई पर उत्सर्जित किया जाता है ।
A.
निर्वात
B.
हाइड्रोजन
C.
ऑक्सीजन
D.
वायु
अन्तरिक्ष में कोई गैस उपलब्ध नहीं होती है इसलिए यह कहा जा सकता है की वहाँ निर्वात होता है ।
A.
जल
B.
पदार्थ
C.
मेथेन
D.
वायु
वायु हमारे वायुमण्डल का मुख्य घटक है । जब यह बहती है तो इसकी ऊर्जा पवन चक्की द्वारा ग्रहण कर ली जाती है ।
A.
कार्बन डाईऑक्साइड
B.
ऑक्सीजन
C.
नाइट्रोजन
D.
हीलियम
श्वसन वह प्रक्रिया है जिसके दौरान पौधे और जन्तु ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ते हैं ।
A.
नाइट्रोजन
B.
ऑक्सीजन
C.
हीलियम
D.
कार्बन डाईऑक्साइड
वायु में 78% नाइट्रोजन होती है ।
A.
नाइट्रोजन
B.
कार्बन
C.
जल वाष्प
D.
धूल के कण
जब वायु एक ठंडी सतह के संपर्क में आती है तो यह संघनित हो जाती है और ठंडी सतह पर जल की बूंदे दिखाई देती है । वायु में जल वाष्प की उपस्थिति प्रकृति में जल चक्र के लिए महत्वपूर्ण है ।
A.
0.01%
B.
0.02%
C.
0.03%
D.
0.04%
वायु कई गैसों का मिश्रण है । इसमें 0.03% कार्बन डाईऑक्साइड गैस होती है ।
A.
कार्बन मोनोक्साइड
B.
कार्बन डाईऑक्साइड
C.
ऑक्सीजन
D.
आर्गन
हरे पौधे कार्बन डाईऑक्साइड, जल और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन (स्टार्च) बनाते हैं । इसके अतिरिक्त इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है ।
A.
फेफड़ों द्वारा
B.
श्वास नली द्वारा
C.
वायु कूपिकाओं द्वारा
D.
नाक में उपस्थित छोटे बालों और श्लेष्मा द्वारा
सांस लेते समय हम अपने नाक से वायु अंदर लेते हैं । नाक में बाल और श्लेष्मा होती है जो हमारे शरीर को वायु में उपस्थित धूल के कणों से बचाती है ।
A.
ऑक्सीजन
B.
कार्बन डाईऑक्साइड
C.
नाइट्रोजन
D.
हाइड्रोजन
कार्बन डाईऑक्साइड ऑक्सीजन से भारी होती है । इसलिए यह आग को एक कंबल की तरह लपेट लेती है । इसके कारण ईंधन को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है और आग बुझ जाती है ।
A.
कार्बन डाईऑक्साइड
B.
नाइट्रोजन
C.
ऑक्सीजन
D.
सल्फर
दहन के लिए ऑक्सीजन अनिवार्य है । कार्बन डाईऑक्साइड दहन का एक सह-उत्पाद है ।
A.
क्षोभमण्डल
B.
वायुमण्डल
C.
बहिर्मण्डल
D.
समताप मण्डल
पृथ्वी वायु में उपस्थित गैसों और जल वाष्प की एक मोटी परत द्वारा ढकी हुई है । वायु का यह आवरण वायुमण्डल कहलाता है ।
A.
ऑक्सीजन
B.
नाइट्रोजन
C.
हीलियम
D.
कार्बन मोनोक्साइड
हम ऑक्सीजन का अन्तःश्वसन और कार्बन डाईऑक्साइड का बहिश्वसन करते हैं । अतः श्वसन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक होती है ।
A.
विद्युत उत्पादन
B.
नलकूपों से वायु निकालना
C.
जीवों को वायु प्रदान करना
D.
जीवों को भोजन उपलब्ध करवाना
एक पवन चक्की का उपयोग विद्युत उत्पादन, ज़मीन से पानी खींचने और एक आटे की चक्की चलाने में किया जाता है ।
कार्बन डाइऑक्साइड गैस की
जब वायु किसी ठंडे पृष्ठ के संपर्क में आती है तो वायु में उपस्थित जल वाष्प संघनित होकर जल की बूँदें बनाती है। यह प्रकिया संघनन कहलाती है।
पौधे श्वसन के लिए ऑक्सीजन गैस का उपयोग करते हैं ।
ऑर्गन
मछली
में निम्न
विशेषताएं जल
में रहने के
लिए
अनुकूलित
करती है -:
1. शरीर
पर जलरोधी
शल्क पाये
जाते हैं।
2. श्वसन के लिए
विशेष रचनाएं जैसे जलक्लोम होते हैं।
3. तैरने
के लिए शरीर
धारा रेखित
तथा चपटे पख और आँखों पर निमेषक
पटल पायी
जाती हैं।
अनुकूलन कम समय में नहीं अपनाया जा सकता है। अजैविक कारकों को परिवर्तित होने में हज़ारों साल लग जाते हैं। जो जन्तु और पादप स्वयं को परिवर्तित नहीं कर पाते हैं और इन परिवर्तनों को अपना नहीं पाते हैं वे मर जाते हैं तथा जो इन परिस्थितियों या परिवर्तनों को अपनाने में सक्षम होते हैं वे जीवित रहते हैं।
i) इनके
लंबे कान
होते हैं
जिससे ये
शिकारियों की
आहट बहुत दूर
से भी सुन
लेते हैं।
ii)
सिर की ओर
इनकी आँखें
सभी दिशाओं
में देखने में
सहायता करते
हैं।
iii) इनकी भागने की गति बहुत अधिक है जो इनकी शिकारियों से दूर भागने में सहायता करते हैं।
जलीय पौधों के विभिन्न लक्षण जिनके कारण वह जलीय
वातावरण में सफलता पूर्वक जीवन यापन करने में
सक्षम होते
हैं, वे
हैं −
1. शरीर
के सभी भागों
में मृदुतक व
काष्ठीय ऊतक
सूक्ष्म
मात्रा में, जिस कारण
पौधे का शरीर
कोमल तथा
कमजोर होता है |
2. पत्तियाँ पतली, कटी-फटी
अथवा तैरने की अवस्था में होती
हैं।
3. पत्तियों में प्राय रन्ध्रों
का अभाव होता
है।
4. अल्प विकसित जड़
तंत्र पाया
जाता है।
5. सभी
भागों पर जलरोधी मोम या उपचर्म की
परत होती है जो
इनको जल में
सड़ने से बचाती है |
कैक्टस
सामान्य रूप
से
रेगिस्तान
में पाये जाते
हैं।
इनमें
निम्न विशेष
लक्षण होते
हैं जिससे ये
रेगिस्तान
में स्वयं को
अनुकूलित
करते हैं।
i) पत्तियाँ
जल की हानि के
दर को कम करने
के लिए कटक
में संशोधित
हो जाती हैं।
ii)
तने प्रकाश
संश्लेषण की
प्रक्रिया
के कार्य को
करने के लिए
हरे और मांसल
हो जाते हैं।
iii) तनों
पर जल को बनाए
रखने के लिए
मोम की एक
मोटी परत
होती है।
iv) इनकी
जड़े मृदा से जल
को अच्छे से
अवशोषित
करने के लिए
बहुत नीचे
जाती हैं।
जीवित
वस्तुओं की
विशेषताएँ
इस प्रकार
हैं-
1. सभी जीवित
वस्तुओं को
भोजन की
आवश्यकता
होती है।
2. ये सभी
साँस लेते
हैं।
3. ये वृद्धि
दर्शाते
हैं।
4. उद्दीपनों
के प्रति
अनुक्रिया दर्शाते
हैं।
5. सभी जीवित वस्तुएँ
जनन कर सकती
हैं।
6. ये गमन
दर्शाते
हैं।
7. सभी जीवित
वस्तुएँ
उत्सर्जन की
प्रक्रिया करते
हैं।
A.
वर्षा जल संग्रहण
B.
फसल संग्रहण
C.
कृत्रिम झीलों का निर्माण
D.
प्रदूषण की रोकथाम
वर्षा जल संग्रहण भौम-जल स्तर में वृद्धि में सहायता करता है ।
A.
बाढ़
B.
सूखा
C.
प्रदूषण
D.
पौधा-घर प्रभाव
जल की कमी के परिणामस्वरूप आने वाली अवस्था सूखा कहलाती है । सूखे के परिणामस्वरूप पौधे नहीं होंगे, वाष्पोत्सर्जन नहीं होगा इसलिए सूखे क्षेत्रों में बारिश नहीं होगी ।
A.
हमारे चारों ओर की वायु ठंडी होती है ।
B.
कपड़े जल्दी नहीं सूखते हैं ।
C.
जल का वाष्पीकरण धीमे होता है ।
D.
कपड़े जल्दी सूखते हैं ।
वाष्पीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें जल, ऊष्मा के कारण जल वाष्प में परिवर्तित हो जाता है । सूर्य की ऊष्मा हमारे चारों ओर की वायु को गर्म कर देती है और यह गर्म वायु उन स्थानों पर वाष्पीकरण के लिए उत्तरदायी है जहाँ सीधे सूर्य की ऊष्मा नहीं पहुँचती है । गर्मियों के गर्म दिनों में सूर्य बहुत तेज चमकता है और अत्यधिक ऊष्मा के कारण वाष्पीकरण तीव्र होता है । अतः गर्मियों के दिनों में कपड़े जल्दी सूखते हैं ।
A.
दो तिहाई
B.
एक तिहाई
C.
एक चौथाई
D.
आधा
पृथ्वी का लगभग दो तिहाई भाग जल से घिरा हुआ है जबकि केवल एक तिहाई भाग ही शुष्क धरातल है । यह जल मुख्यतः समुद्रों और महासागरों के रूप में है ।
A.
जल
की छोटी
बूंदे
B. वायु में जलवाष्प
C. वाहनों से निकला धुआँ
D. गैसों का मिश्रण
बादल जल की छोटी बूंदे होते हैं । जब वायु में उपस्थित जल वाष्प अत्यधिक ऊंचाई पर चली जाती है तो ये बूंदे जल का निर्माण करती हैं, यहाँ की वायु ठंडी होती है । अतः ये जल वाष्प ऊंचाई पर संघनित हो जाती है और जल की बूंदे बनाती है जो आपस में संघनित होकर बादलों का निर्माण करती हैं ।
A.
भौम-जल के रूप में
B.
समुद्री जल के रूप में
C.
वर्षा जल के रूप में
D.
झरने के रूप में
भौम-जल भूमि में उपस्थित जल होता है । यह भूमि में वर्षा जल के मृदा में रिसने से पहुँचता है । इसे नलकूपों आर कुओं से प्राप्त किया जाता है और यह कई झीलों का स्रोत होता है ।
A.
जल संग्रहण तंत्र
B.
भौम-जल संग्रहण
C.
छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण
D.
जल संग्रहण संयंत्र
छत के ऊपर वर्षा जल संग्रहण एक विधि है जिसमें भवनों की छतों पर गिरने वाले जल को पाइपों द्वारा भंडारण टैंक में एकत्रित किया जाता है । इस जल को सीधे ही ज़मीन में बने किसी गड्ढे तक ले जाया जा सकता है जो भौमजल के स्तर को बढ़ाता है ।
A.
यह भौम-जल स्तर में वृद्धि करता है ।
B.
यह भौम-जल स्तर में कमी करता है ।
C.
यह समुद्री जल के स्तर में वृद्धि करता है ।
D.
यह समुद्री जल के स्तर में कमी करता है ।
जब वर्षा जल को संग्रहीत करके धरातल में रिसने दिया जाता है तो भौम-जल का स्तर बढ़ता है । इसके परिणामस्वरूप नलकूपों और कुओं में अधिक जल आ जाता है ।
A.
ठंडा किया जाता है ।
B.
गर्म किया जाता है ।
C.
जमाया जाता है ।
D.
पिघलता है ।
वाष्पीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें जल को गर्म करने पर वह जलवाष्प में परिवर्तित हो जाता है ।
A.
मीठा होता है ।
B.
प्रदूषित होता है ।
C.
लवणीय होता है ।
D.
उच्च घनत्व रखता है ।
समुद्री जल में बहुत से खनिज और लवण घुले हुए होते हैं । यह समुद्री जल को नमकीन बना देते हैं । इसलिए यह लवणीय जल कहलाता है । यह लवणीय जल पीने और अन्य दूसरे उद्देश्यों जैसे कृषि, उद्योगों आदि के लिए अनुपयुक्त होता है ।
A.
फूल
B.
जड़
C.
पत्ती
D.
बीज
पौधों में जल का अवशोषण जड़ों द्वारा किया जाता है जिससे होकर यह तने तक पहुँचता है ।
A.
कोहरा
B.
बर्फ
C.
ओस
D.
वर्षा
जब जल की बूंदे वायु में जम जाती हैं और गिरना प्रारम्भ हो जाती है, ये बर्फ के रूप में गिरती हैं ।
A.
वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन में
B.
संघनन और वाष्पीकरण में
C.
केवल वाष्पोत्सर्जन में
D.
केवल संघनन में
वाष्पीकरण में जब जल द्रव अवस्था से गैस अवस्था में परिवर्तित होता है तो जल वाष्प बनती हैं । वाष्पोत्सर्जन में यह पौधों में उपस्थित जल होता है जो जल वाष्प बनाता है ।
A.
गिलास के अंदर के जल के वाष्पीकरण से
B.
जल पहले से उपस्थित होता है ।
C.
आस-पास की वायु से
D.
कुछ रासायनिक अभिक्रिया से
ये आस-पास के वातावरण में उपस्थित जल वाष्प होती है जो गिलास में उपस्थित बर्फ के कारण ठंडी सतह के संपर्क में आने पर संघनित हो जाती है ।
A.
वाष्पोत्सर्जन
B.
प्रकाश संश्लेषण
C.
वाष्पीकरण
D.
संघनन
वाष्पोत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों से जलवाष्प के रूप में जल की हानि होती है ।
A.
जल का वाष्पीकरण
B.
जल का वाष्पोत्सर्जन
C.
जल का अवक्षेपण
D.
जलवाष्प का संघनन
कोहरे का अर्थ है पृथ्वी की सतह के निकट जल वाष्प की बूंदों का बनना । यह वायु में उपस्थित जल वाष्प के संघनन के कारण होता है ।
A.
जल चक्र
B.
सूखा
C.
भौम-जल
D.
अत्यधिक वर्षा
अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ आती है जो अपने साथ मृदा की ऊपरी परत को बहाकर ले जाती है ।
A.
वाष्पीकरण
B.
भौम-जल संग्रहण
C.
वर्षा जल संग्रहण
D.
वाष्पोत्सर्जन
जल की उपलब्धता बढ़ाने का एक तरीका वर्षा जल को संग्रहीत करना और इसे बाद में उपयोग के लिए भंडारित करना है । इस प्रकार वर्षा जल को संग्रहीत करना वर्षा जल संग्रहण कहलाता है ।
A.
बढ़ता है ।
B.
गिरता है ।
C.
समान रहता है ।
D.
कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।
जब एक क्षेत्र में बहुत अधिक नलकूप और कुएँ होते हैं वहाँ भौम-जल का अत्यधिक उपयोग होता है । इसके परिणामस्वरूप भौम-जल में कमी होती है और जल का स्तर गिरता है ।
A.
मनुष्यों के पीने के लिए अनुपयुक्त
B.
मनुष्यों के पीने के लिए उपयुक्त
C.
पेय जल
D.
समुद्री जल
आसुत जल में खनिज अनुपस्थित होते हैं अतः यह मनुष्यों के पीने के लिए अनुपयुक्त होता है ।
प्राकृतिक जल के दो स्रोत निम्न है:
(i) नदी का जल
(ii) झील का जल
जब किसी क्षेत्र में एक साल से अधिक समय तक वर्षा नहीं होती है
जल के जल-वाष्प में रूपान्तरण की प्रक्रिया, वाष्पीकरण कहलाती है।
समुद्र जल में बड़ी मात्रा में घुलनशील लवण उपस्थित होते हैं। इसलिए यह पीने योग्य नहीं होता है।
जल-वाष्प का शीतलन करने पर यह वाष्प से जल (द्रव) में रूपांतरित हो जाती है यह प्रक्रिया
जल को ठंडा करने पर यह बर्फ में रूपांतरित हो जाता है। बर्फ का घनत्व जल से कम होता है। इसलिए बर्फ जल से हल्की होती है एवं यह जल की सतह पर तैरती है।
धरातल के नीचे पाये जाने वाले जल के स्रोतों को भौम- जल स्रोत कहते हैं। उदाहरण - कुएँ, नलकूप आदि।
जल को सार्वत्रिक विलायक इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें लगभग सभी लवण एवं पदार्थ घुलनशील होते हैं।
वर्षा जल का भविष्य के उपयोग के लिए संग्रहण, वर्षा जल संग्रहण कहलाता है।
बाढ़ का कारण अत्यधिक वर्षा है।
जल के वाष्पीकरण के कारण गीले कपड़े सूख जाते हैं ।
पौधे अपनी पत्तियो के रंध्रों से अतिरिक्त जल को जल वाष्प के रूप में निष्कासित कर देते हैं । यह प्रक्रिया वाष्पोत्सर्जन कहलाती है ।
बर्फ जल का ठोस स्वरूप है ।
जल का पृथ्वी के वायुमण्डल से जल वाष्प के रूप में गति करते हुए वायुमण्डल से वर्षा, बर्फ और ओलावृष्टि के रूप में वापस धरती पर आ जाना जल चक्र कहलाता है ।
मानव कंकाल में 12 जोड़ी पसलियाँ होती हैं, ये इसप्रकार हैं-
i. वास्तविक पसलियाँ (7 जोड़ी)
ii. कूट या मिथ्या पसलियाँ (3 जोड़ी)
iii. मुक्त पसलियाँ (2 जोड़ी)
|
कंकाल का क्षेत्र |
अस्थियों की संख्या |
|
चेहरा |
14 |
|
कर्ण अस्थिकाऐं |
6 |
|
श्रोणि (हिप) मेखला |
2 |
|
उरोस्थि |
1 |
मानव करोटि की कुछ विशेषताऐं इसप्रकार हैं:
i. करोटि, सिर का कंकाल है और दो भागों, कपाल और चेहरे का बना होता है।
कपाल, आठ हड्डियों का बना होता है जो एक-दूसरे से स्थायी रूप से जुडी रहती हैं।
कंधे की संधि और हिप संधि, कन्दुक खल्लिका संधियों के सबसे अच्छे उदाहरण हैं।
1. कंधे की संधि में, ह्यूमरस का सिर, कंधे की मेखला की गर्तिका (ग्लिनॉइड़ गुहा) में फिट रहता है।
2. हिप संधि में, फीमर का बड़ा गेंदनुमा सिर श्रोणि मेखला की गहरी गर्तिका में फिट रहता है।
i. हाइड्रा में झुककर गति जिसके द्वारा इसका शरीर उल्टा खड़ा हो जाता है।
ii. यह बाल समान संरचना जो पैरामीशियम के पूरे शरीर को आवरित कर लेती है।
गमन के दौरान, केंचुआ सबसे पहले पीछे के भाग को जमीन पर स्थिर करके शरीर के सामने वाला भाग प्रसारित करता है। अब यह सामने वाले भाग को स्थिर कर अंतिम सिरे को मुक्त कर देता है। यह अब शरीर को छोटा करता है और पिछले सिरे को आगे खींचता है। यह इसे एक छोटी सी दूरी में आगे बढ़ाता है। इस मांसपेशी विस्तार और संकुचन की पुनरावृत्ति से केंचुआ मिट्टी में गमन करता है।
i. धारारेखित आकार का शरीर
ii. नालपाद
iii. स्टीयरिंग
मानव कंकाल के दो मुख्य प्रभाग हैं-
i. अक्षीय कंकाल- इसमें करोटि, कशेरुक दंड और पसलियाँ शामिल होती हैं।
ii. अनुबंधीय कंकाल- इसमें मेखलाऐं (श्रोणि मेखला और अंस मेखला) और पादास्थियाँ( हयूमरस, फीमर, टीबीया फिबुला, मणिबंधिकाएं रेडियस अल्ना, मेटाकार्पल्स, कार्पल्स और अंगुलास्थियाँ) होती हैं।
|
जीव |
अंग/संरचना |
|
युग्लीना |
कशाभ |
|
हाइड्रा |
स्पर्शक |
|
कीट |
पंख |
|
स्टारफिश |
नालपाद |
|
पैरामीशियम |
पक्ष्माभ |
|
चमगादड |
पंख |
|
अचल संधियाँ |
अल्प चल संधियाँ |
|
एक स्थिर संधि है। |
थोड़ी गति होने देती है। |
|
अस्थियाँ तंतुमय संयोजी उतक के द्वारा कसकर जुड़ी होती हैं। |
अस्थियाँ, उपास्थियों के द्वारा जुड़ी होती हैं, जो थोड़ी सी गति होने देती हैं। |
|
उदाहरण- करोटी की अस्थि |
उदाहरण- उरोस्थि और पसलियों के बीच की संधि |
शूक/सीटी केंचुआ और जोंक के शरीर के निचले हिस्से पर खड़े बालों के समान उभार हैं। केंचुए में हड्डियॉं नहीं होती है, मांसपेशियों में संकुचन और विस्तार उसकी गमन में सहायता करता है। बाल समान ये ब्रिस्टल मांसपेशियों से जुड़े होते हैं। ब्रिस्टल इसकी जमीन पर एक अच्छी पकड़ बनाने में सहायता करती है।
युग्मित पंखों के कार्य इस प्रकार हैं:
1) ये मछली को नीचे की ओर या ऊपर की ओर तैरने में सहायता करते हैं।
2) ये उनके शरीर को एक स्थान पर बनाए रखने में सहायता करते हैं।
3) ये धीमी गति को कम या गमन को रोकने के लिए ब्रेक के रूप में कार्य करते हैं।
संधि, दो अस्थियों के एक साथ जुड़ने का स्थान है। जैसे- कोहनी, कंधे या गर्दन में।
संधियों पर, अस्थियाँ एक साथ स्नायुओं द्वारा जुड़ी होती हैं।
संधियाँ अनेक प्रकार की होती हैं, जैसे- अचल संधियाँ, कन्दुक खल्लिका संधियाँ, धुराग्र संधियाँ, कब्जा संधियाँ, विसर्पी संधियाँ आदि।
a. हृदय-
पसली पिंजर
b. मस्तिष्क
− करोटी
c. मेरुरज्जु
− कशेरुक
दंड
d. फेफड़े − पसली पिंजर
e. मूत्राशय-
श्रोणि
अस्थियाँ
i. गलत, प्रथम ग्रीवा कशेरुक एटलस कहलाता है।
ii. सही
iii. गलत, ह्यूमरस ऊपरी भुजा की एकल और सबसे लम्बी अस्थि है।
iv. गलत, मानव के टखने क्षेत्र में 7 टार्सल होते हैं।
v. सही
मानव कंकाल के कुछ कार्य इसप्रकार हैं:
i. यह पूरे शरीर को आकार, संरचना और ढांचा प्रदान करता है।
ii. यह शरीर के आंतरिक नाजुक ऊतकों और महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करता है।
iii. यह कैल्शियम और फॉस्फोरस के भंडार के रूप में कार्य करता है।
iv. रक्त कोशिकाओं का उत्पादन
v. गति में सहायक है।
A.
खारा
B.
मीठा
C.
अम्लीय
D.
उदासीन
समुद्री जल में कई लवण और खनिज पदार्थ शामिल हैं। इसलिए ये स्वाद में नमकीन होता है और इसे खारा पानी कहते हैं।
A.
अजैविक और मृत
B.
जीवन और अजैविक
C.
जैविक और मृत
D.
जैविक और अजैविक
आवास जीवन के लिए जीवित और निर्जीव दोनों घटकों से बना होता है। आवास के जीवित घटक को जैविक घटक कहते हैं जैसे पादप और जन्तु और निर्जीव घटकों को अजैविक घटक कहते हैं जैसे वायु, जल, सूर्य का प्रकाश आदि।
A.
श्वसन
B.
पाचन
C.
जनन
D.
उत्सर्जन
प्रक्रिया जिसके द्वारा जन्तु अपने समान जीवों को उत्पादित करते हैं उसे जनन कहते हैं।
A.
1 और 4
B.
2 और 3
C.
1 और 2
D.
केवल 4
मेंढक जल में और भूमि दोनों पर रह सकते हैं। इन्हें जलस्थलचर कहते हैं। इसलिए इनका शरीर जल और भूमि दोनों पर रहने में अनुकूलित होता है। इनमें गमन और कीटों को पकड़ने के लिए मजबूत पश्च पाद होते हैं जबकि जल में गमन करने के लिए जालीदार पाद होते हैं।
कोहरा वायु में धूल के कणों पर संघनित जलवाष्प होती है और यह सर्दियों में धरातल की सतह के नजदीक लगता है ।
इंजन अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता है । यह ऊष्मा जल (रेडिएटर में उपस्थित) को जलवाष्प में परिवर्तित करने में उपयोग में ले ली जाती है इससे इंजन के भाग गर्म नहीं होते हैं ।
(i)
वाष्पोत्सर्जन
पौधों की
पत्तियों से
वाष्पीकरण
की
प्रक्रिया
है ।
(ii)
ये
जल की
छोटी-छोटी
बूंदे होती
हैं जो वायु
में तैरती
रहती हैं और
हमें बादलों
के रूप में दिखाई
देती हैं ।
सर्दियों में मुख्यतः सुबह तापमान बहुत कम रहता है, उस समय वायु में उपस्थित जलवाष्प छोटी-छोटी बूंदों में संघनित हो जाती हैं । ये जल की बूंदे धूल के कणों के साथ मिलकर कोहरे के रूप में दिखाई देती हैं ।
पर्वतों की बर्फ जल के रूप में पिघल जाती है । यह जल पर्वतों से जल धाराओं और नदियों के रूप में बह जाता है । वर्षा के रूप में धरातल पर गिरने वाले जल का कुछ भाग भी नदियों और धाराओं के रूप में बह जाता है । अधिकांश नदियाँ भूमि के लंबे भाग को घेरती है और अंततः समुद्र और महासागरों में मिल जाती हैं ।
समुद्री जल लवणीय जल भी कहलाता है। इसे पीने उपयुक्त बनाने के लिए पहले इसका वाष्पीकरण किया जाता है फिर इसे संघनन की प्रक्रिया द्वारा संघनित करके पीने युक्त जल प्राप्त किया जाता है ।