रूलर की अपेक्षा डिवाइडर से रेखाखण्ड की लम्बाई मापना इसलिए अधिक अच्छा है क्योंकि रूलर से मापने पर निम्नलिखित त्रुटियाँ होने की सम्भावना रहती है।
1. रूलर की मोटाई के कारण उस पर अंकित चिन्ह को पढ़ने में कठिनाई हो सकती हैं
2. आँख की स्थिति सही न होने पर माप में त्रुटि हो सकती है।
लीला के द्वारा नापी गई रेखाखण्ड AB की लम्बाई गलत है क्योंकि उसने रूलर के 0 को रेखाखण्ड के A बिन्दु पर नही रखा है जो कि गलत है ।
| चतुर्भुज | सम्मुख भुजाऐं | सभी भुजाऐं | सम्मुख कोंण समान | विकर्ण | |
| समान्तर | बराबर | बराबर | |||
| 1. समान्तर चतुर्भुज | |||||
| 2. आयत | |||||
| 3. वर्ग | |||||
| 4. सम चतुर्भुज | |||||

1)प्रिज्म एक बहुफलक होता है जिसमें आधार और शीर्ष बहुभुज हेाते हैं जबकि पिरामिड एक बहुफलक होता है जिसमें आधार बहुभुज होता है।
2)प्रिज्म में पाश्र्व फलक समान्तर चतुर्भुज होते हैं जबकि पिरामिड में पाश्र्व पृष्ठ त्रिभुज होते हैं जिनका शीर्ष उभयनिष्ठ होता है।
a) नहीं इस प्रकार का बहुफलक संभव नहीं है । एक बहुफलक में न्यूनतम 4 फलक होते हैं ।
b) हाँ एक वर्ग पिरामिड में एक वर्ग और 4 त्रिभुजाकर फलक हो सकते हैं।
भुजाओं के आधार पर त्रिभुज निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
1. समबाहु त्रिभुज
2. समद्विबाहु त्रिभुज
3. विषमबाहु त्रिभुज
कोणों के आधार पर त्रिभुज तीन प्रकार के होते हैं।
1. न्यून कोंण त्रिभुज
2. अधिक कोंण त्रिभुज
3. समकोंण त्रिभुज
1. सभी समान्तर चतुर्भुज, चतुर्भुज भी होते हैं।
2. सभी समान्तर चतुर्भुज समलम्ब चतुर्भुज भी होते हैं।
3. कुछ समलम्ब चतुर्भुज समद्विबाहु होते हैं।
4. सभी समलम्ब चतुर्भुज, चतुर्भुज होते हैं।
(i) 6 भुजाएँ, षट्भुज
(ii) 8 भुजाएँ, अष्टभुज
1. समान्तर चतुर्भुज: समचतुर्भुज: वर्ग: आयत
2. वर्ग समचतुर्भुज
पिरामिड जिसका आधार आयताकार होता है, आयताकार पिरामिड कहलाता है ।

आयताकार पिरामिड में ,
किनारों की संख्या = 8 किनारे
शीर्षो की संख्या = 5 शीर्ष
फलकों
की
संख्या
=
5 फलक
1. नहीं क्योंकि यहाँ दो कोणों का योग
2. नहीं
3. हाँ
a) चूँकि
b)एक
c)
इसलिए

गुलदस्तों की अधिकतम संख्या ज्ञात करने के लिए 37, 27, 18 का म.स. की गणना कीजिए।
36
=2
2
3
3
27 =3
3
3
18 =2
3
3
36, 27 और 18 का उभयनिष्ठ
गुणनखण्ड 3, दो बार
प्राप्त होता
है।
इस
प्रकार म.स. = 3X3 = 9
इसलिए
अधिकतम संख्या
में बनाए जा सकने
वाले गुलदस्तों
की संख्या 9 है।
सबसे पहले हम 6,8,9 का लघुत्तम ज्ञात करते हैं।
|
2 |
6, 8,9 |
|
2 |
3, 4,9 |
|
2 |
3, 2,9 |
|
3 |
3, 1,9 |
|
3 |
1, 1,3 |
|
|
1, 1,1 |
ल.स.=
2
2
2
3
3=72
4 अंकों की छोटी
से छोटी संख्या =1000
1000 =72
13+64
जब 1000 को 72, से विभाजित
किया जाता है तो
64 शेष बचता है इसे1000
में जोड़ने की
आवश्यकता है ताकि
यह 72 से पूरी तरह
विभाज्य हो।
अभीष्ट संख्या = 1000+ 8= 1008
हमें 3675, 2100 और 1050 का म.स. ज्ञात करना है।
3675 और 2100 का म.स.
2100) 3675(1
2100
1575)2100(1
1575
525)1575(3
1575
X
(3675, 2100)
का म.स. = 525
525 और 1050 का म.स.
525) 1050(2
1050
X
525 और 1050 का म.स.
= 525
फीते की लम्बाई जो हाल की तीनों भुजाओं को पूरा –पूरा नाप सकती है
= 525 सेमी
सबसे पहले हम 20, 40 तथा 75 का ल.स. ज्ञात करेंगे।
|
2 |
20, 40, 75 |
|
2 |
10, 20, 75 |
|
2 |
5, 10 75 |
|
5 |
5, 5 75 |
|
5 |
1 1, 15 |
|
3 |
1, 1, 3 |
|
1, 1, 1 |
ल.स. = 2
2
2
5
5
3
= 600
5 अंकों की सबसे छोटी संख्या

चूँकि शेष 400 शेष बचता है इसमें 200 जोड़ने पर यह 600 से पूर्ण रूपेण विभाज्य हैं।
अभीष्ट संख्या = 1000 + (200+9) (हमें वह संख्या ज्ञात करनी है जिसमें 9 शेष बचता है।)
= 10209

A.
1
B.
2
C.
3
D.
अनंत
दो अलग अलग बिन्दुओं से होकर जाने वाली केवल एक रेखा खींची जा सकती है।
A.
प्रत्येक किरण की एक निश्चित लंबाई होती है।
B.
प्रत्येक रेखा की एक निश्चित लंबाई होती है।
C.
प्रत्येक रेखाखण्ड की एक निश्चित लंबाई होती है।
D.
एक रेखाखण्ड दोनों दिशाओं में आगे तक जाता है।
प्रत्येक रेखाखण्ड एक रेखा का एक निश्चित भाग होता है | अतः इसकी एक निश्चित लंबाई होती है।
BAC तथा
DAC का
उभयनिष्ठ
बिंदु है
A.
A
B.
B
C.
C
D.
D
दोनों कोणों के शीर्ष उभयनिष्ठ हैं |
A.
एक बिदु का
B.
एक किरण का
C.
समांतर रेखाओं का
D.
प्रतिच्छेदी रेखाओं का
वे रेखाएँ जो दोनों ओर आगे बढ़ाए जाने पर भी आपस में नहीं काटती हैं, समांतर रेखाएँ कहलाती हैं।
A.
बाह्य बिन्दु
B.
अन्तःबिन्दु
C.
संगमन बिन्दु
D.
असंगमन बिन्दु
तीन से अधिक रेखाएँ जब एक ही बिन्दु से होकर जाती हैं तो वे संगामी रेखाएँ कहलाती हैं तथा यह बिन्दु उनका संगमन बिन्दु कहलाता है।
A.
व्यास
B.
जीवा
C.
त्रिज्या
D.
इनमें से कोई नहीं
वृत्त की सबसे लंबी जीवा वृत्त का व्यास कहलाती है।
A.
रेखाएँ
B.
किरणें
C.
भुजाएँ
D.
स्थिरबिन्दु
किसी भी कोण में उभयनिष्ठ प्रारम्भिक बिन्दु कोण का शीर्ष कहलाता है तथा कोण बनाने वाली किरणें भुजाएं कहलाती हैं
A.
कोई घूर्णन नहीं
B.
एक घूर्णन
C.
दो घूर्णन
D.
अनंत घूर्णन
जब एक किरण एक स्थिर बिन्दु से परिक्रमण प्रारम्भ करती है और एक पूर्ण चक्कर के बाद वापस उसी बिन्दु पर लौट आती है,तब हम कहते हैं कि इसने एक घूर्णन पूरा किया है।
180 अंश का कोण सरल कोण कहलाता है।
A.
85°.
B.
95°.
C.
175°.
D.
185°.
हम जानते हैं,कि
कोटिपूरक कोणों
का योग = 90°
इसलिए, 5° का
कोटिपूरक कोण
= 90°- 5° = 85°
A.
171°.
B.
C.
D.
211°.
हम जानते हैं,कि संपूरक कोणों का योग = 180°
इसलिए, 29° का संपूरक कोण = 180° - 29°
= 151°
A.
संरेख
B.
असंरेख
C.
संगामी
D.
अंतबिन्दु
संरेख बिन्दु(एक ही रेखा पर स्थित बिन्दु संरेख बिन्दु कहलाते हैं)
= 3 सेमी
तथा
= 6.2 सेमी,तब
उस रेखाखण्ड की
लम्बाई नापिए
जिसकी लम्बाई
तथा
के
योग के बराबर है।
A.
3.2 सेमी
B.
4 सेमी
C.
4.2 सेमी
D.
9.2 सेमी
स्पष्टतःयोग=
+
= 3 + 6.2 = 9.2 सेमी
A.
66 सेमी
B.
C.
D.
परिधि = (22/7) x व्यास
= (22/7) x 14
= 44 सेमी
A.
B.
C.
D.
0.356 सेमी
व्यास = 2
त्रिज्या
त्रिज्या = (7.12/2)
= 3.56 सेमी
DOE तथा
FOE की
उभयनिष्ठ भुजा
का नाम बताइए ।
उभयनिष्ठ भुजा किरण OE है ।
रेखा पर अगणित बिन्दु विद्यमान हैं।
रेखा युग्म के गुण :
(a) रेखायुग्म एक दूसरे को किसी बिंदु पर प्रतिच्छेद करते हैंI
(b) यदि रेखायुग्म किसी भी दशा
तो रेखाओं को समांतर रेखाएँ कहा जाता हैं|

(ii) 
एक त्रिभुज में तीन भुजाएँ तथा तीन कोण होते हैं।

(ii) CD
दी हुई
आकृति
में
8 कोण
हैं
।
ABC,
BCD,
CDA,
DAB,
ABD,
CBD,
ADB
तथा
CDB.
रेखा
:
रेखा में कोई
भी अन्त्य
बिंदु नहीं
होता है|
रेखायुग्म :
रेखायुग्म
में दो
अन्त्य
बिंदु होते
हैं|
किरण :
किरण में
केवल एक ही
अन्त्य
बिंदु होता
है|
बेलन :
समतलों
की संख्या = 2
वक्रतलों की
संख्या = 1
शंकु
:
समतलों
की संख्या = 1
वक्रतलों की
संख्या= 1
गोला :
समतलों
की संख्या = 0
वक्रतलों की
संख्या= 1
a) सम्मुख
भुजाओं
के
दो
युग्मों
के
नाम
बताइए ।
b) संलग्न
भुजाओं
के
चार
युग्मों
के
नाम
बताइए ।
c) सम्मुख कोणों
के दो युग्मों
के नाम बताइए ।
a) PO तथा MN; PM तथा ON.
b) OP तथा PM; PM तथा MN; MN तथा NO; NO a तथा OP.
c)
P तथा
N;
M तथा
O.

1) A, B तथा C
2) AB, BC तथा CA
3)
A या
BAC या
CAB
B या
ABC या
CBA
C या
ACB या
BCA
1)
DOE,
EOF,
DOF
2) O
3) किरण
OD, किरण
OE, किरण
OF
(i) रेखाखण्ड:
रेखाखण्ड
दो बिन्दुओं
के बीच
की सबसे
न्यूनतम
दूरी
के संगत
होता
है।
बिन्दुओं
A तथा
B को मिलाने
वाला
रेखाखण्ड
द्वारा
दर्शाया
जाता
है।
(ii) रेखा: जब एक रेखाखण्ड को अनिश्चित रूप से दोनों ओर बढ़ाया जाता है तो एक रेखा प्राप्त होती है ।
(iii) प्रतिच्छेदी
रेखाएँ:
दो प्रथक
प्रथक
रेखाएँ
जब एक
बिन्दु
पर काटती
हैं
तो वे
प्रतिच्छेदी
रेखाएँ
कहलाती
हैं।
(iv) समांतर
रेखाएँ:
एक समतल
में
जब दो
रेखाएँ
एक दूसरे
को नहीं
काटती
हैं
तो वे
समांतर
रेखाएँ
कहलाती
हैं
।
|
|
एक बिन्दुगामी रेखाएँ |
|
संगमन बिंदु |
|
(a) |
p,q,r |
(i) |
A |
|
(b) |
p,s,t |
(ii) |
B |
|
(c) |
s,u |
(iii) |
C |
|
(d) |
q,t,u |
(iv) |
D |
(i) OB, OL, OA तथा
OC
(ii) BC
(iii) BC या
DE
(iv) लघु
वृत्तखण्ड
DE (छायांकित
भाग
)
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
एक
त्रिभुज
के
सभी
तीनो
कोणों
का
योग
के
बराबर
होता
है।
इसलिए, त्रिभुज
ABC
में,
a + a + a = ![]()
a =
A.
विषमबाहु त्रिभुज
B.
समद्विबाहु त्रिभुज
C.
समबाहु त्रिभुज
D.
समकोण त्रिभुज
एक समद्विबाहु त्रिभुज में, सभी भुजाएं समान होती है।
A.
35°, 65° और 80°.
B.
40°, 65° और 75°.
C.
45°, 60° और 75°.
D.
55°, 55° और 70°.
माना
कि
दिये
गये
कोणों
की
माप
3x,
4x और
5x
है।
तब
3x
+ 4x + 5x = 180°
x = 15°
इस
प्रकार, कोण
3x
= 45°, 3x = 60°
और 5x
= 75° है।
A.
100 मिमी
B.
10 मिमी
C.
0.1 मिमी
D.
0.01 मिमी
एक स्केल में, प्रत्येक सेमी 10 उपभागों में विभाजित होता है और प्रत्येक उपभाग 1 मिमी का होता है।
A.
एक समकोण
B.
दो समकोण
C.
तीन समकोण
D.
चार समकोण
एक घूर्णन 360o के बराबर होता है।
इसलिए,
(3/4)
360
= 3
90
या तीन समकोण।
हाँ, ये अभाज्य युग्म हैं (दो अभाज्य संख्याए जिनके बीच का अंतर 2 होता है अभाज्य युग्म कहलाती हैं।)
दो अभाज्य संख्याओं का म.स.1 होता है।
हाँ,
6 एक सम्पूर्ण
संख्या है।
(याद रखिए :वह संख्या
जिसके सभी गुणन
खंडों का योग इस
संख्या के दो गुने
के बराबर होता
है, सम्पूर्ण संख्या
कहलाती है।)
49
के गुणनखण्ड 1,7 और
49 हैं ।
51 के गुणनखण्ड
1,3,17 और 51 हैं।
चूँकि उनका उभयनिष्ठ
गुणनखण्ड 1 है इसलिए
वे सह अभाज्य हैं
।
4, 6, 8, 9
11, 13, 17, 19
चूँकि
,
32 = 2
2
2
2
2
52
= 2
2
13
म.
स = 2
2
= 4
ल.स.=
2
2
2
2
2
13
= 416
1
24
2
12
3
8
4
6
संभव
गुणनखंड 1, 2,3,4,6,
8,12, तथा 24 हैं ।
दी हुई संख्या = 390612
अंकों का योग = 3+9+0+6+1+2 = 21
चूँकि अंकों का योग 21 है, तथा यह 3 से विभाज्य है इसलिए 390612 भी 3 से विभाज्य है।
89 = 1 X 89
127 = 1 X 127
चूंकि दोनों संख्याओं
के केवल दो गुणनखंड,
केवल 1 तथा संख्या
स्वयं हैं, इसलिए
वे अभाज्य हैं।
1
64
2
32
4
16
8
8
संभव
गुणनखंड 1,
2, 4, 8, 16, 32 तथा 64 हैं ।
7 X 1 = 7
7 X 2 = 14
7 X 3 = 21
7 X 4 = 28
7
X 5 = 35
इसलिए, 7
के प्रथम पाँच
गुणज 7, 14, 21, 28, तथा
35 हैं ।
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|






हमें
ल. स.ज्ञात करना
है
8 = 2
2
2
6 = 2
3
ल. स =2
2
2
3=24
इसलिए दोनों को
साथ साथ प्रारंभिक
बिंदु पर पहुँचने
में 24 मिनट लगेंगे
।
|
|
112,160,188 |
|
|
56, 80, 94 |
|
|
28, 40, 47 |
|
|
14, 20, 47 |
|
|
7, 10, 47 |
|
|
7, 5, 47 |
|
|
7, 1, 47 |
|
|
1, 1, 47 |
|
|
1, 1, 1 |

= 52640
96और 128 का म. स.इन संख्याओं के अभाज्य गुणनखण्डन द्वारा प्राप्त किया जा सकता है ।
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
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|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
इस प्रकार
96 = 2 




128 = 2 





96 और 128 के सार्व गुणनखण्ड 2 



2 



वैकल्पिक विधि
म. स. (96, 128)
|
96)128(1 |
|
96 |
|
32) 96(3 |
|
|
|
X |
8 के
गुणज 8, 16, 24, 32, 40, 48, 56, 64, 72, ...हैं।
12 के गुणज
12, 24, 36, 48, 60, 72, .. ...हैं।.
इसलिए, 8 तथा 12 के प्रथम
तीन गुणज 24,
48, तथा 72 हैं ।
दी हुई संख्या 376948 है।
विषम स्थानों के अंकों का योग (दाहिने से) = 8+9+7 = 24
सम स्थानों के अंकों का योग (दाहिने से )
= 4+6+3 = 13
अन्तर = 24 –13 = 11
क्योंकि अन्तर 11 से विभाज्य है, इसलिए 376948 , 11 से विभाज्य है।
दी
हुई संख्या
438750
विभाज्यता
2
हाँ,
क्योंकि इकाई
स्थान पर सम संख्या
है।
4
नहीं,
क्योंकि अंतिम
दो अंकों से बनी
संख्या 50 है जो 4
से विभाज्य नहीं
है।
5
हाँ,
क्योंकि इकाई
स्थान पर 0 है।
A.
परिमाप
B.
व्यास
C.
वृत्तखंड
D.
त्रिज्या
एक वृत्त की परिधि इसका परिमाप कहलाती है।
A.
समबाहु त्रिभुज
B.
समद्विबाहु त्रिभुज
C.
विषमबाहु त्रिभुज
D.
समकोण त्रिभुज
एक समद्विबाहु त्रिभुज में दो भुजाएं समान होती है।
A.
आयत
B.
त्रिभुज
C.
वृत्त
D.
वर्ग
एक शंकु का आधार हमेशा एक वृत्त की आकृति में होता है।
A.
रेखाएं
B.
बिन्दु
C.
रेखाखंड
D.
केन्द्र
रेखाखंडों की मिलान स्थिति बिन्दु के रूप में जानी जाती है।

A.
PQR.
B.
QPR.
C.
PRQ.
D.
PRS.
PRS एक
बहिष्कोण
है
क्योंकि
यह
त्रिभुज
के
बाहर
स्थित
होता
है।
A.
आयत
B.
वर्ग
C.
वृत्त
D.
त्रिभुज
एक रूपये का एक सिक्का एक वृत्त की आकृति के रूप में दिखाई देता है।
AOB है
A.
सरल कोण
B.
अधिक कोण
C.
वृहत कोण
D.
न्यून कोण
एक वृहत कोण 180°से बडा और 360°से छोटा होता है।
A.
फलक
B.
किनारें
C.
शीर्ष
D.
रेखा
तीर का निशान घनाभ के किनारें को दर्शाता है जो कि एक रेखाखंड है जहाँ घनाभ के दो फलक मिलते है।
A.
90o
B.
60o
C.
180o
D.
0o
एक सरल कोण दो समकोणो के योग के बराबर होता है जो कि एक सरल रेखा के रूप में होते है।
A.
उनकी चौड़ाई की तुलना द्वारा
B.
उनकी लम्बाई की तुलना द्वारा
C.
उनकी ऊँचाई की तुलना द्वारा
D.
इनमें से कोई नही
दोनो रेखाखंडो की लम्बाई को ज्ञात करके हम दोनो रेखाखंडो की एक दूसरे से तुलना कर सकते है।
A.
सभी भुजाएं समान होती है।
B.
सम्मुख भुजाएं समान्तर और बराबर होती है।
C.
केवल सम्मुख भुजाएं समान्तर होती है।
D.
केवल सम्मुख भुजाएं बराबर होती है।
समान्तर चतुर्भुज एक आकृति होती है जिसकी सम्मुख भुजाएं बराबर और समान्तर होती है।
A.
PQ
B.
AB
C.
CD
D.
OA
हम जानते हैं कि वह रेखा जो वृत्त के एक बिंदु से प्रारम्भ होती है ,केन्द्र O से गुजरती है वृत्त के अन्य बिंदु से मिलती है वृत्त का व्यास कहलाती है । इसलिए , इस दशा में AB वृत्त का व्यास है ।
A.
लीटर
B.
मीटर
C.
घण्टा
D.
अंश
कोण मापने की इकाई अंश होती है अंश का प्रतीक o होता है । उदहारण के लिए जब हम एक कोण को 45 डिग्री मापते हैं तो हम इसे 450 लिखते हैं ।
A.
रेखा की लम्बाई अनिश्चित होती है जबकि रेखाखण्ड की लम्बाई निश्चित होती है
B.
रेखा की लम्बाई निश्चित होती है जबकि रेखाखण्ड की लम्बाई अनिश्चित होती है।
C.
रेखा में कोई लम्बाई नहीं होती और रेखाखण्ड में चौड़ाई होती है
D.
रेखा और रेखा खंड के बीच कोई अंतर नहीं
रेखा की लम्बाई अनिश्चित होती है जबकि रेखाखण्ड की लम्बाई निश्चित होती है
A.
लघु वृत्त खंड
B.
दीर्घ चाप
C.
दीर्घ वृत्त खण्ड
D.
अर्धवृत्त
दीर्घ वृत्त खण्ड (जीवा और दीर्घ चाप)
सामने का दृश्य, पाश्र्व दृश्य और शीर्ष दृश्य।
यहाँ एक त्रिकोणीय पिरामिड में

साइकिल का पहिया एक वृत्त के आकार का होता है।
नहीं, क्योंकि दो अधिक कोंणों का योग 1800 से अधिक होता है और त्रिभुज में यह सम्भव नहीं है।
सरल कोण की माप = 180º
A.
1000
B.
1160
C.
1260
D.
1360
12,15,20 तथा 35 का ल.स. = 420 420) 1000 (2 840 16 अभीष्ट संख्या = 1000 + (420 –160) = 1260
A.
5
B.
1
C.
2
D.
3
सबसे छोटी विषम अभाज्य संख्या 3 है क्योंकि इसका 1 & स्वयं के अतिरिक्त कोई अन्य गुणनखंड नहीं है।
A.
B.
C.
D.
80 तथा 90 के बीच की अभाज्य संख्या 83 तथा 89 हैं ।
80 तथा 90 के बीच की अभाज्य संख्याओं का योग = 83 + 89
= 172
A.
9
B.
6
C.
2
D.
1
यदि
हम * के स्थान पर
1 रखते हैं तो यह
संख्या 11 से भाज्य
होगी
अंतर
= (6 + 3 + 4) - (5 + * + 7)
0 या 11 = 13 - 12 - *
0 = 1 - *
* = 1
A.
16
B.
32
C.
64
D.
128
(258 – 2) तथा (323 – 3)का म.स.ज्ञात कीजिए 256) 320 (1 256 64) 256 (4 256 0 अभीष्ट उत्तर = 64
A.
2 × 3 × 4
B.
2 × 2 × 2 × 3
C.
6 × 4
D.
8 × 3
24 = 2 × 2 × 2 × 3
A.
720
B.
723
C.
823
D.
750