A.
142
B.
132
C.
122
D.
112
132
के गुणनखंड 2
2
3
11 हैं
।
A.
B.
C.
D.
सह अभाज्य संख्याएँ वे होती हैं जिनमें 1 के अतिरिक्त कोई अन्य सार्व गुणनखंड नहीं होता है। दिए हुए युग्मों में से केवल (2,3) ही इस प्रकार का युग्म है, क्योंकि क्योंकि 2, 3 का म.स. 1 के बराबर है।
A.
2, 4
B.
3, 5
C.
7, 11
D.
13, 17
दो अभाज्य संख्याओं को अभाज्य युग्म कहा जाता है यदि उनके बीच का अंतर 2 है । यहाँ 3 तथा 5 अभाज्य संख्याएँ हैं तथा उनके बीच का अंतर 2 है।
A.
सह अभाज्य
B.
अभाज्य युग्म
C.
भाज्य
D.
पूर्णांक
सह अभाज्य संख्याओं का 1 के अतिरिक्त कोई दूसरा गुणनखंड नहीं होता है।
A.
0
B.
1
C.
2
D.
3
सबसे छोटी तथा सम अभाज्य संख्या केवल 2 है ।
A.
B.
C.
D.
चूँकि 90 और 100 के बीच केवल 97 ही अभाज्य संख्या है । 90 तथा 100 के बीच की अभाज्य संख्या केवल 97 है ।
A.
विषम संख्याएँ
B.
सम संख्याएँ
C.
पूर्णांक
D.
अभाज्य संख्याएँ
वे संख्याएँ जो 2 की गुणज होती हैं सम संख्याएँ कहलाती हैं जैसे 2, 4, 6, 8, 10, 12,.........इत्यादि।
A.
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 18
B.
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 20
C.
2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11
D.
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19
"वह संख्या जिसके केवल दो गुणनखंड(1, स्वयं संख्या) होते हैं अभाज्य संख्या कहलाती है।
असत्य (उदाहरण : 3 + 5 = 8)
6
= 2x3
8 = 2x2x2
लघुतम सार्व
गुणज (ल.स.) =
2x3x2x2 = 24
6 तथा 8 का लघुतम
सार्व गुणज 24 है।
सत्य (उदाहरण : 4 + 6 = 10)
34 = 23 + 11
A.
.
B.
.
C.
.
D.
.
रेखा का कोई
अंतबिन्दु नहीं
होता है तथा इसे
से निरूपित
किया जाता है।
का मान लगभग बराबर होता है:
A.
3.41
B.
C.

D.

का मान (22/7) होता है जोकि लगभग 3.14 के बराबर होता है|
A.
.
B.
.
C.
.
D.
.
चाप का प्रतीक
है।
C =
d = 2
r
एक रेखाखण्ड सरल रेखा का एक भाग होता है। इसके दो अंतबिन्दु होते हैं।
असत्य : (समांतर रेखाएँ आपस में नहीं काटती हैं। )
वृत्त के चारों ओर की दूरी इसकी परिधि होती है।
वृत्त का कोई भाग वृत्त का चाप कहलाता है।
बराबर,
वृत्त की सभी त्रिज्याएं बराबर होती हैं।
व्यास ,
वृत्त की सबसे लम्बी जीवा व्यास होती है।
चतुर्भुज,
चार रेखाखण्डों से बना बहुभुज चतुर्भुज कहलाता है।
DOF के
अन्तः में
बिन्दु
K तथा
E स्थित
हैं ।
सत्य
रेखाखण्ड
इस
एक दिए हुए बिन्दु से होकर अनंत रेखाएँ खींची जा सकती हैं।

असत्य
(दो
रेखाएँ एक
उभयनिष्ठ
बिन्दु पर
काटती हैं)
एक समतलीय बन्द आकृति, जो रेखाखण्डों से घिरी होती है बहुभुज कहलाती है
DOE
के
अन्तः में
बिन्दु
K स्थित
है।
सरल वक्र:
सरल वक्र वह होता है जो स्वयं को न काटे।
बन्द वक्र:
बंद सीमा वाला वक्र, बंद वक्र कहलाता है।










A.
B.
C.
D.
–1, –6 के दाईं ओर है, इसलिए हम 5 उछाल दाईं ओर चलेंगे।
A.
+14
B.
+10
C.
-10
D.
-14
A.
शून्य की दाईं ओर
B.
शून्य की बाईं ओर
C.
संख्या रेखा पर कही भी
D.
संख्या रेखा पर कहीं भी नहीं
-20 एक ऋणात्मक संख्या है और इसलिए संख्या रेखा पर यह शून्य की बाईं ओर होता है|
A.
1
B.
6
C.
9
D.
2
एक पूर्णांक को दूसरे पूर्णांक में से घटाने के लिए जिस पूर्णांक को अन्य पूर्णांक में से घटाना है, उसके योज्य प्रतिलोम को जोड़ना पर्याप्त होता है।
A.
–12
B.
–48
C.
+24
D.
+36
-18-(-18)+(-9)+(-3) = -18+18-9-3
= 0-12[चूँकि-(-) = + तथा +(-)
= -]
= -12
A.
+14
B.
+2
C.
-2
D.
-14
8+(-6) = 8 - 6 = 2 i.e +2
A.
-14, -15 के बाईं ओर है
B.
-15, -14 के बाईं ओर है
C.
संख्या रेखा पर संख्याएँ कहीं भी हो सकती है
D.
-15 और -14 शून्य के दाईं ओर है
-15, -14 से छोटा है और इसीलिए -14 की बाईं ओर आयेगा जो कि संख्या रेखा पर शून्य के बाईं ओर होता है|
=धनात्मक पूर्णांक,
= ऋणात्मक पूर्णांक,
= शून्य
A. 
B. 
C. 
D. ऊपर दिए गए सभी विकल्प
सभी धनात्मक पूर्णांक, ऋणात्मक पूर्णांक और शून्य, पूर्णांकों में सम्मलित होते हैं|
A.
6
B. 5
C. -5
D. -6
-3 तथा -9 के मध्य में आने वाले पूर्णांक हैं -4, -5, -6, -7, -8. स्पष्ट रूप से -6 ठीक मध्य में है।
A.
0 > 1 > 2
B.
0 > –1 > 1
C.
–1 > 1 > 2
D.
2 > –2 > –3
संख्या रेखा पर, जब हम बाएं से दाएं चलते हैं, तो संख्याओं का मान बढ़ता है।
A.
0 के दाईं ओर
B.
0
C.
संख्या रेखा पर कहीं भी
D.
संख्या रेखा पर कहीं नहीं
–20 एक ऋणात्मक संख्या है तथा यह संख्या रेखा पर 0 के बाईं ओर होगी।
A.
पूर्ण संख्याओं का समुच्चय
B.
प्राकृत संख्याओं तथा पूर्ण संख्याओं का समुच्चय
C.
धनात्मक & ऋणात्मक पूर्ण संख्याओं का समुच्चय
D. धनात्मक & ऋणात्मक प्राकृत संख्याओं का समुच्चय
पूर्णांक पूर्ण संख्याए होते हैं तथा ये धनात्मक तथा ऋणात्मक दोनों होते हैं।
A.
0 < –1 < –2
B.
1 < –1 < 0
C.
-1 < 0 < 1
D.
–2 < –3 < –4
संख्या
रेखा पर दाईं
ओर
चलने पर संख्या
का मान बढ़ता है
तथा बाईं
ओर
चलने पर संख्या
का मान घटता है।
A.
-21 तथा -19
B.
-19 तथा -18
C.
-19 तथा -21
D.
-22 तथा -21
दी हुई संख्या के परवर्ती तथा पूर्ववर्ती क्रमशः 1 अधिक तथा 1 कम होते हैं । इसलिए इस स्थिति में -20 का परवर्ती = -19 तथा -20 का पूर्ववर्ती = -21.
A.
+89.
B.
-89.
C.
+98.
D.
-98.
89 का योज्य प्रतिलोम -89 है क्योंकि ऋणात्मक चिन्ह, धनात्मक चिन्ह का व्युत्क्रम होता है।
532
पैसे
= 5.32 रूपए
अब, 24.03
रूपए + 5.32 रूपए
= 29.35 रूपए


चूँकि 1
मिली
= (1/1000) l
इसलिए, 42 मिली
= (42/1000) = 0.042 l
27.076 + 0.557 + 0.004 = 27.637


एकत्रित किया गया कुल धन + रीटा द्वारा एकत्रित किया गया धन
=
39.75 +
20.50
=
60.25
पहली रस्सी की लम्बाई = 10 मीटर 67 सेमी =10.67 मीटर
दूसरी रस्सी की लम्बाई = 16 मीटर 32 सेमी = 16.32 मीटर
एक रस्सी की अधिकतम लम्बाई = (10.67 + 16.32) मीटर= 26.99 मीटर
(1280.69
+ 1024.25) - (13.5 + 2121.32)
(1280.69 + 1024.25) = 2304.94
(13.5 + 2121.32) = 2134.82
2304.94
- 2134.82 = 170.12


रस्सी की कुल लम्बाई = 7.47 मीटर
काटी गई रस्सी की लम्बाई = 7.47-2.43
= 5.04 मीटर
दो हुकों के बीच की दूरी = 6 मीटर
चूँकि रस्सी की लम्बाई 6 मीटर से कम है
इसलिए दो हुकों के बीच कपड़े टाँगने के लिए यह पर्याप्त नहीं है।
बस द्वारा तय की गई दूरी = 4 किमी 340 मीटर
कार द्वारा तय की गई दूरी = 3 किमी 493 मीटर
मोटरसाइकिल द्वारा तय की गई दूरी = 3 किमी 298 मीटर
रोमा द्वारा चली गई कुल दूरी
|
किमी |
मीटर |
|
4 |
340 |
|
3 |
493 |
|
3 |
298 |
|
11 |
131 |
इस प्रकार उसने 11 किमी 131 मीटर की यात्रा की।

महाराष्ट्र, में 1100 अर्थात स्वाइन फ्लू के मामलों की अधिकतम संख्या दर्ज की गई जबकि, केरल में 220 अर्थात स्वाइन फ्लू के मामलों की न्यूनतम संख्या की सूचना दी। इसलिए, अभीष्ट अनुपात = 220 : 1100 = 1 : 5
A.
2
B.
3
C.
3.2
D.
27
संख्याओं
का योग = 6 x 4.5 = 27
A.
9
B.
12
C.
25
D.
8
सबसे अधिक बार आने वाला अंक = 9
अंक बारंबारता
7 1
8 2
9 4
12 2
13 1
14 1
18 2
20 1
25 1
A.
37
B.
100
C.
62
D.
48
सबसे कम 37 प्राप्तांक है।
A.
B.
C.
D.
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
जब
हम 226 को 9 से भाग देते
हैं, तो हमें भागफल
25 प्राप्त होता
है तथा शेषफल 1 प्राप्त
होता है।
इसलिए , 226/9 =
A.
5/20
B.
6/20
C.
16/20
D.
18/20
3/10 की तुल्य भिन्न = (2 x 2)/(3 x10) = 6/20
A.
41/60
B.
(-
41/60)
C.
(3/40)
D.
2
‘+’
चिन्ह योग को दर्शाता
है(योग )
1/12 + 3/5
12,5का ल. स. = 12 x 5 = 60
प्रत्येक भिन्न
के हर को 60 बनाइए
1/12 = 1/12 x 5/5 = 5/60
3/5= 3/5 x 12/12 = 36/60
अब
5/60 + 36/60 = 41/60
A.
A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
B.
A-(iv), B-(ii), C-(i), D-(iii)
C.
A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
D.
A-(iv), B-(i), C-(ii), D-(iii)
60/84 = 5/6; 20/100 1/5; 52/390 = 4/30 तथा 12/72 = 2/12
| 1/2 | 1/3 | 5/6 |
| 1/3 | 1/4 | 7/12 |
| x | 1/12 | 1/4 |
A.
1/31
B.
1/6
C.
1/5
D.
1/11
x + 1/12 = 1/4 x = 1/4 – 1/12 = 1/6
A.
3/8 मीटर
B.
2/8 मीटर
C.
1/8 मीटर
D.
5/8 मीटर
7/8 - 1/4 = 5/8 मीटर
A.

B.

C.
D.

A.
B.
C.
D.

A.
9/25
B.
8/35
C.
6/14
D.
7/90
प्रश्न
में दी हुई भिन्न
120/525 को सरल करने के बाद हमें प्राप्त होता है 8/35, 120 तथा 525 का म.स. 15 है
120/15 = 8
525/15 = 35
120/525 का सरलतम रूप है 8/35
की हर 80 के साथ तुल्य
भिन्न है
A.

B.

C.

D.

A.
<
B.
>
C.
=
D.
>
जब भाजक और भाज्य समान हैं तो उत्तर 1 होगा ।
A.

B.

C.

D.
उपरोक्त सभी
भिन्न 3/9 कुल 9 भागों में से 3 छायांकित भागों को निरूपित करती है।
का अंश है
A.
B.
C.
3
D.
7
भिन्न की रेखा के ऊपर की संख्या अंश होती है।
A.

B.
C.

D.

A.
B.
C.
D.
![]()
दी हुई भिन्न का हर 9 है।






केलों की कुल सख्या = 12 दर्जन
= 12
12 = 144
सड़े हुए केलों की कुल सख्या
= 144 का (5/24)
= (5/24)
144
= 30
वापस भेजे जाने वाले केलों की कुल सख्या
= 144 का(1/3)
= (1/3)
144
= 48
चूंकि , 30 + 48 = 78
खाए जाने योग्य केलों की कुल संख्या = 144 - 78 = 66



(i) - (d)
(ii) - (e)
(iii) - (a)
(iv) - (c)
(v) - (b)
A.
![]()
B.
![]()
C.
![]()
D.
![]()
23.75 –
17.35 =
6.40
A.
300.9
B.
30.5
C.
20.6
D.
20.5