1.1 वास्तविक संख्याएँ - परिचय
वास्तविक संख्याएँ - वे सभी संख्याएँ जिन्हें संख्या रेखा पर दर्शाया जा सकता है।
ये संख्याएँ परिमेय और अपरिमेय दोनों हो सकती हैं।
वास्तविक संख्याओं के प्रकार :-
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परिमेय संख्याएँ :- वे संख्याएँ जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q शून्य के बराबर नहीं है।
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अपरिमेय संख्याएँ :- वे संख्याएँ जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, √2, π, आदि।
वास्तविक संख्याओं के उदाहरण:-
- पूर्णांक: -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, आदि।
- भिन्न: 1/2, 3/4, 5/7, आदि।
- दशमलव: 2.5, 3.14, 0.75, आदि।
- वर्गमूल: √2, √3, √5, आदि।
- पाई (π)।
वास्तविक संख्याओं की विशेषताएं:-
- वास्तविक संख्याओं को संख्या रेखा पर दर्शाया जा सकता है।
- सभी वास्तविक संख्याएँ या तो धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकती हैं।
- वास्तविक संख्याओं पर अंकगणितीय संक्रियाएँ (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) की जा सकती हैं।
वास्तविक संख्याओं का उपयोग:-
वास्तविक संख्याओं का उपयोग भौतिक मात्राओं जैसे कि लंबाई, द्रव्यमान, तापमान, आदि को मापने के लिए किया जाता है।
धनात्मक पूर्णांकों के दो अति महत्वपूर्ण गुण:-
1. यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म (कलन विधि) (Euclid’s division algorithm) और
2. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) ।
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म पूर्णांकों की विभाज्यता से संबंधित है।
साधारण भाषा में कहा जाए, तो एल्गोरिथ्म के अनुसार, एक धनात्मक पूर्णांक a को किसी अन्य धनात्मक पूर्णांक b से इस प्रकार विभाजित
किया जा सकता है कि शेषफल प्राप्त हो, जो b से छोटा (कम) है।


इसका प्रयोग दो धनात्मक पूर्णांकों का महत्तम समापवर्तक (HCF) परिकलित करने में किया जाता है।
HCF = Highest Common Factor
आधारभूत प्रमेय का संबंध धनात्मक पूर्णांकों के गुणन से है।
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय:-
प्रत्येक भाज्य संख्या (composite number) को एक अद्वितीय रूप से अभाज्य संख्याओं (prime numbers)
के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
भाज्य संख्या (composite number) = अभाज्य संख्याओं (prime numbers) का गुणनफल
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय के अनुप्रयोग:-
2. किसी परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार कब सांत (terminating) होता है तथा
कब असांत आवर्ती (non-terminating and non-repeating) होता है।
Note:-
पूर्णतया पता लगाया जा सकता है।
प्राकृत संख्या = उसके अभाज्य गुणनखंडों का एक गुणनफल [अंकगणित की आधारभूत प्रमेय]
उदाहरणार्थ,
253 = 11 × 23
1771 = 7 x 11 x 23
5313 = 3 x 7 x 11 x 23 इत्यादि।
32760 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 5 × 7 × 13 = 23 x 32 x 5 x 7
123456789 = 3 x 3 × 3803 × 3607 = 32 × 3803 × 3607
दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि -
भाज्य संख्याओं को गुणा करके, एक प्राकृत संख्या प्राप्त की जा सकती है।
प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं की घातों के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है।
यदि कोई भाज्य संख्या दी हुई है, तो उसे अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखने की केवल एक ही विधि है।
कार्ल फ्रै ड्रिक गॉस (Carl Friedrich Gauss) -- डिसक्वीशंस अरिथिमेटिकी (Disquisitions Arithmeticae)
कार्ल फ्रै ड्रिक गॉस को प्रायः ‘गणितज्ञों का राजकुमार’ कहा जाता है।
कार्ल फ्रै ड्रिक गॉस (Carl Friedrich Gauss) , आर्किमिडीज़ (Archimedes) और न्यूटन (Newton) -- तीन महानतम गणितज्ञ
महत्तम समापवर्तक (Highest Common Factor) HCF = संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात का गुणनफल
लघुत्तम समापवर्तक (Least Common Multiple) LCM = संख्याओं में संबद्ध प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात का गुणनफल
Last modified: Wednesday, 2 July 2025, 3:16 PM