A. 28 cm
B. 30 cm
C. 28.5 cm
D. 29.5 cm
A. -20 cm
B. 40 cm
C. -12 cm
D. 60 cm
A. -4
B. -3
C. 3
D. 4
A. 3/2
B. 2/3
C. 2
D. 3/4
A. F से कम
B. F
C. F से अधिक
D. 2F
एक उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब की ध्रुव से दूरी सदैव वस्तु की ध्रुव से दूरी से कम होती है|
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में गमन करता है, तो प्रकाश अपवर्तित होता है और अपवर्तन के दौरान आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है ।
एक समतल दर्पण से बना प्रतिबिंब गोलीय तथा वर्ण विपथन दोनों से स्वतंत्र होता है क्योंकि वह प्रकाश की किरणों को अभिसरित या अपसरित नहीं करता है|
B. 20 cm C. 0 D. 5 cm यहां, प्रत्येक भाग की फोकल दूरी 10 सेमी cm है। पहले भाग से गुज़रने के दौरान प्रकाश की किरणें नीचे की ओर अभिसरित होंगी परंतु दूसरे भाग से गुज़रने के दौरान वे समान रूप से ऊपर की ओर अपसरित करेंगी| इसलिए संयोजन की फोकल दूरी शून्य होगी।
B. 60 cm/s C. 15 cm/s D. 25 cm/s मान लीजिए, दर्पण एवं वस्तु एक दूसरे से x दूरी पर हैं| इस कारण प्रतिबिंब से वस्तु की दूरी 2x (दोगुनी) होगी, क्योंकि एक समतल दर्पण में, दर्पण की वस्तु से तथा उसके प्रतिबिंब से दूरी समान होती है| इसलिए, अगर दर्पण x/t चाल से वस्तु की ओर बढ़ रहा है, तो प्रतिबिंब 2x/t (दोगुनी) चाल से वस्तु की ओर बढ़ेगी|
B. पूर्ण आंतरिक परावर्तन C. अपवर्तन D. परावर्तन
क्योंकि, अपवर्तनांक = 1.5
क्रांतिक कोण=sin-1(1/1.5)= 41.8o
ज्यामिति से, प्रिज्म का आपतित कोण 45o होगा| क्योंकि यह कोण क्रांतिक कोण से अधिक है यहाँ पूर्ण आंतरिक परावर्तन होगा|
B. sin–1(1/2) C. tan–1(1/4) D. sin–1 (4)
B. C. D.
B. C. D.
B. न्यूट्रॉन C. ऐल्फा D. बीटा अनावेशित न्यूट्रॉन, प्रतिकर्षण हुए बिना लक्षित नाभिक में गहराई से प्रवेश कर सकते हैं। B. कैडमियम C. ग्रेफाइट D. बेरीलियम ऑक्साइड जब कैडमियम रॉड को रिएक्टर में डाला जाता है, तो विखंडन दर कम हो जाती है और जब उन्हें बाहर निकाला जाता है, तो विखंडन बढ़ता है।
परमाणु का नाभिक रेडियोऐक्टिव विकिरण उत्सर्जित करता है। रेडियोऐक्टिव नाभिक से उत्सर्जित होने वाले विद्युत्चुम्बकीय विविकरण का नाम ‘गामा किरण’ है? सूर्य तथा तारों में निरंतर उर्जा, ताप नाभिकीय अभिक्रियाओं से उत्पन्न होती है| किसी नाभिक को अपने अवयव न्यूक्लियॉन में विभक्त करने के लिए न्यूनतम ऊर्जा की मात्रा बंधन ऊर्जा कहलाती है। प्रोटॉन की संख्या परमाणु संख्या के बराबर होती है, Z = 92 हाँ, ये समान तत्व के समस्थानिक हैं, क्योंकि दोनों न्यूक्लाइड की परमाणु संख्या समान है। नाभिकीय संलयन सूर्य में ऊर्जा के उत्पादन के लिए उत्तरदाई अभिक्रिया है। नाभिक के द्र्व्यमान तथा न्यूक्लिऑन के द्र्व्यमान के बीच अंतर द्र्व्यमान क्षति के रूप में जाना जाता है। 1eV = 1.602176565 x 10-19 J किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ की मात्रा अर्थात् उसके परमाणुओं की संख्या जितने समयान्तराल में विघटन के कारण घटकर अपने प्रारम्भिक मान की आधी रह जाती है, वह समयान्तराल उस पदार्थ की अर्ध आयु कहलाता है। दिया गया है:- B. C. D. ध्रुवित कोण :
B. 53º16’ C. 55º16’ D. 75º16’
B. 5 mm C. 1.5 mm D. 1 mm
दिया गया है कि दो तरंगें सामान कला में बिंदु तक पहुंचते हैं,तो परिणामी आयाम होगा:
= 3 mm + 2 mm = 5 mm
केन्द्रीय उच्चिष्ठ के दोनों ओर प्रथम निम्निष्ठों के बीच की कोणीय दूरी को केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई कहते हैं। प्रकाश के विवर्तन के कारण दूरदर्शक में तारों के प्रतिबिम्ब अस्पष्ट धब्बों के रूप में दिखाई पड़ते हैं, तीक्ष्ण बिन्दुओं की तरह नहीं। जब प्रकाश किरण काँच-वायु अंतरापृष्ठ पर आपतन (iC) के क्रांतिक कोण पर आपतित होती है, तो यह पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से गुजरेगी।
जल रहे बल्ब, बिन्दु स्त्रोत होता है इसलिए यह गोलीय तरंगाग्र उत्पन्न करता है। ट्यूब लाइट प्रकाश का रेखीय स्त्रोत है जो बेलनाकार तरंगाग्र उत्पन्न करेगा। सूर्य प्रकाश द्वारा समतल तरंगाग्र उत्पन्न होता है। माध्यम मे प्रकाश तरंगो द्वारा प्राप्त ऊर्जा इसके वेग से स्वतंत्र होती है तथा केवल प्रकाश की आवर्ती पर निर्भर करती है। क्योंकि अपवर्तन पर प्रकाश तरंग की आवर्ती अपरिवर्तित रहती है। इसलिए प्रकाश की ऊर्जा मे कोई कमी नहीं होती है। जब साधारण प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम पर आपतित होता है, तो एक विशेष आयतन कोण (ध्रुवण कोण) पर परावर्तित प्रकाश समतल ध्रुवित होता है | पारदर्शी माध्यम का अपवर्तनांक, n है तो ब्रूस्टर के नियम के अनुसार n = tan ip दो समरूप सोडियम लैम्पों से प्रकाश समान तरंग दैर्ध्य तथा समान आवृत्ति की प्रकाश तरंगे उत्सर्जित करेगा। परन्तु यह तरंगे सतत व्यतिकरण प्रतिरूप से निश्चित कला संबद्ध नहीं होती है। इस प्रकार, ये नियत कला में अध्यारोपित नहीं होगी और परिणाम स्वरूप सामान्य प्रकाश उत्पन्न होगा। पोलेरॉइड एक युक्ति है जिसका उपयोग समतल ध्रुवीकृत प्रकाश का उत्पादन करने के लिए किया जाता है। आरेखित तरंगाग्र निम्न दी गई हैं:
हाँ, हाइगेंस सिद्धान्त ध्वनि तरंगो के लिए मान्य है। हाइगेंस सिद्धान्त के अनुसार, तरंगाग्र पर प्रत्येक बिन्दु सूक्ष्म तरंगिका के द्वितीयक स्त्रोत के रूप में माने जा सकते है। जो तरंग के आगे की दिशा में बाहर फ़ैले होते है। उदाहरण के लिए, जब दो व्यक्ति एक दूसरे से बात कर रहे है। अन्य व्यक्ति दो व्यक्ति के बीच बात करने के आदान प्रदान को सीधे ही अलग नहीं कर सकता है क्योंकि विस्तृत तरंगाग्र पर सभी कण द्वितीयक तरंगिकाओं के स्त्रोत के रूप में व्यवहार करते हैं जो सभी विभिन्न दिशाओं में बाहर फ़ैल जाते है। प्रकाश का ध्रुवण - सामान्य प्रकाश की तरंग में वैद्युत सदिश के कम्पन, तरंग की गति के लम्बवत तल में प्रत्येक दिशा में सममित रूप से होते हैं। जब कोई प्रकाश की तरंग किसी क्रिस्टल पर डाली जाती है तो प्रकाश की तरंग के केवल वे ही कम्पन बाहर निकल पाते हैं जो क्रिस्टल के अक्ष के समान्तर होते हैं, शेष कम्पन क्रिस्टल द्वारा रोक दिए जाते हैं । इस प्रकार क्रिस्टल से निकलने के पश्चात प्रकाश की तरंग के कम्पन तरंग की गति के लम्बवत तल में केवल एक ही दिशा में होते हैं ऐसी तरंग को समतल-ध्रुवित तरंग कहते हैं और इस परिघटना को “ प्रकाश का ध्रुवण ” कहते हैं। ध्रुवण-तल - वह तल जिसमें प्रकाश के संचरण की दिशा स्थित हों तथा जो कम्पन तल के अभिलम्बवत हो ‘ध्रुवण-तल’ कहलाता है। (i) बैंगनी प्रकाश तथा पीला प्रकाश : यद्यपि दोनों विकिरणे प्रकाश के दृश्य स्पेक्ट्रम का भाग है। ये आवृत्ति(या तरंग दैर्ध्य) में परिवर्तित होते है। आपतित प्रकाश पूर्णतया समतल ध्रुवित हो जाता है। जब आपतित प्रकाश के विद्युत क्षेत्र सदिश के कम्पन पोलेरॉइड के संचरण तल के समानान्तर होते है, तो यह पोलेरॉइड के माध्यम से संचरित होता है। जैसे ही पोलेरॉइड का विन्यास परिवर्तित किया जाता है, पोलेरॉइड का संचरण तल तथा विद्युत क्षेत्र सदिश के कम्पन अब और एक दूसरे के समानान्तर नहीं होते है तथा तीव्रता कम हो जाती है।
उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देने तथा समझाने के लिए हम निम्न सूत्र का उपयोग करेंगे:
क्रांतिक कोण: अभिलम्ब से मापा जाने वाला सबसे अधिक कोण जिस पर प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में निकासित हो सकता है तथा अभिलम्ब पर सबसे लघु कोण जिस पर प्रकाश सघन माध्यम में पूर्ण रूप से परावर्तित हो जाता है उसे क्रांतिक कोण कहा जाता है।
चूंकि धुंध प्रकाश का प्रकीर्णन करती है, इस कारणवश प्रकाश की किरणें विभिन्न दिशाओं मे फैल जाती हैं तथा धुंध में देखना कठिन हो जाता है|
B. 8 m/s C. 10 m/s D. 2 m/s प्रतिबिंब सदैव दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितना दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है। इसलिए, वस्तु तथा उसका प्रतिबिंब दोनों एक ही वेग के साथ आगे बढ़ते हैं, परंतु विपरीत दिशा में।
व्यक्ति के सापेक्ष में प्रतिबिंब की आपेक्षित गति = v + v= 2v
B. प्रकाश का वेग जल की तुलना में वायु के माध्यम में अधिक होता है अपवर्तन की घटना को समझाने के लिए, न्यूटन ने कहा कि प्रकाश के कणों की गति हवा की तुलना में पानी या ग्लास में अधिक होनी चाहिए| यानी, प्रकाश के कणिका मॉडल से पता चलता है कि प्रकाश घनत्व माध्यम में तेजी से गमन करना चाहिए।
प्रकाश को गमन के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
प्रकाश का अपवर्तन निम्न दो नियमों के अनुसार होता है- किसी पारदर्शी पदार्थ का अपवर्तनांक, दृश्य प्रकाश के बैंगनी रंग के लिए अधिकतम तथा लाल रंग के लिए न्यूनतम होता है| यदि लैंस के दोनों ओर के दोनों माध्यमों का अपवर्तनांक बराबर हो तो उसकी दोनो फ़ोकस दूरियों के मान बराबर होंगे। किसी अपवर्तक माध्यम का वह भाग जो दो गोलीय या एक गोलीय तथा एक समतल पृष्ठ से घिरा हो, को लेंस कहते हैं। प्रकाशिक तंतु, प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन की परिघटना पर आधारित है।
अपवर्तनांक निम्न कारणों पर निर्भर करता है:
1. दो माध्यमों की प्रकृति, तथा
2. उपयोग की गई प्रकाश का तरंगदैर्ध्य । आवृत्ति स्थिर रहती है। निर्वात में प्रकाश के वेग तथा माध्यम में प्रकाश के वेग का अनुपात, माध्यम का अपवर्तनांक कहलाता है। एक पारदर्शी ठोस को समान अपवर्तनांक वाले द्रव में डालने पर वह अदृश्य हो जायेगा। इसका कारण यह है कि ठोस तथा द्रव का अपवर्तनांक समान होने के कारण अपवर्तन नहीं होगा। परावर्तन के दो नियम हैं : 1. परावर्तन कोण सदैव आपतन कोण के बराबर होता है। 2. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा परावर्तक पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब एक ही तल में होते हैं | क्रांतिक कोण सघन माध्यम में वह आपतन कोण है जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90o होता है| क्रांतिक कोण का मान: 1. दोनों माध्यमों की प्रकृति तथा 2. प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है। गोलीय दर्पण के लिए कार्तीय चिन्ह परिपाटी :- 1. दर्पण पर आपतित प्रकाश किरणों की दिशा हमेशा बाईं ओर से दाईं ओर होती है। 2. आपतित प्रकाश की दिशा में मापी जाने वाली दूरियाँ धनात्मक ली जाती है। 3. आपतित प्रकाश की दिशा के विपरीत दिशा में मापी जाने वाली दूरियाँ ऋणात्मक ली जाती है। 4. मुख्य अक्ष के लम्बवत तथा ऊपर की ओर मापी जाने वाली दूरियाँ धनात्मक ली जाती है। 5. मुख्य अक्ष के लम्बवत तथा नीचे की ओर मापी जाने वाली दूरियाँ ऋणात्मक ली जाती है। प्रकाश के एक एकवर्णी स्रोत द्वारा प्रकाशित एक झिरी के कारण एक विवर्तन पैटर्न है:
माध्यम के सभी कणों द्वारा बना काल्पनिक पृष्ठ तरंगाग्र कहलाता है जिसमें स्थित सभी कण कम्पन की समान कला में होते है। तरंगाग्र के गुण : (i) तरंगाग्र पर सभी कण समान कला में कम्पन करते हैं। (ii) सतत तरंगाग्रों के बीच नियत कलान्तर होता है। (iv) तरंग के संचरण की दिशा तरंगाग्र के लम्बवत होती है तथा यह प्रकाश किरण द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। (v) तरंगाग्र का आकार स्त्रोत की प्रकृति के अनुसार परिवर्तित होता है। बिन्दु स्त्रोत से उत्पन्न तरंगे गोलीय तरंगाग्र के रूप में होती है। स्त्रोत से उत्पन्न ये तरंगे अनंत पर तथा समतल तरंगाग्र के रूप में विशेष दिशा में गुजरती है। जब प्रकाश स्त्रोत रेखीय होता है, बेलनाकार अक्ष बनाने के लिए तरंगाग्र स्त्रोत के साथ प्रकृति में बेलनाकार होता है।
व्यतिकरण वह परिघटना है जिसमें एक माध्यम में प्रकाश ऊर्जा का पुनर्वितरण दो कला-सम्बद्ध स्रोतों से प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण के कारण होता है।
व्यतिकरण दो प्रकार के हो सकता हैं: -
1. सम्पोशी व्यतिकरण।
2. विनाशी व्यतिकरण।
दिया गया है कि,
B. C. D. B. आवेश -2e C. एक ड्यूट्रान के समान द्रव्यमान D. एक ड्यूट्रान के समान द्रव्यमान तथा अनुपात का आवेश ड्यूट्रान परमाणु का आवेश = e
ड्यूट्रान परमाणु का द्रव्यमान = 2mp
ड्यूट्रान परमाणु का द्रव्यमान अनुपात का आवेश = e/2mp
एक ऐल्फ़ा कण का आवेश = 2e
एक ऐल्फ़ा कण का द्रव्यमान = 4mp
ऐल्फ़ा कण के द्रव्यमान अनुपात का आवेश = 2e/4mp = e/2mp
B. बामर C. पाशन D. ब्रैकेट तरंगदैर्ध्य जो कि परमाण्विक स्पेक्ट्रम में विशेष समुच्चयों में उपस्थित होते हैं, स्पेक्ट्रमी श्रेणी कहलाते हैं। प्रत्येक श्रेणी में तरंगदैर्ध्य को एक सरल आनुभविक सूत्र द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है जिसमें विभिन्न श्रेणियों के सूत्र के बीच महत्वपूर्ण समानता होती है तथा अवयव के पूर्ण स्पेक्ट्रम शामिल होते हैं।
जेकब बामर ने हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के दृश्य भाग में इस प्रकार की पहली श्रेणी को देखा। इस श्रेणी को बामर श्रेणी कहते हैं|
B. बामर C. लाईमैन D. ब्रैकेट लाईमैन श्रेणी तब प्राप्त की जाती है जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी बाहरी कक्षा से पहली कक्षा (n1=1) तक आता है।
B. -27.2 eV C. 1 eV D. 2 eV निम्नतम अवस्था में ऊर्जा = P.E + K.E
-13.6 eV = -2 E + E = - E
इस प्रकार, E = 13.6 eV
निम्नतम अवस्था में P.E = -2 E = - 27.2 eV
B. 27.2 eV C. 3.4 eV D. 6.8 eV nth अवस्था की आयनन ऊर्जा –
En = (13.6)/n2 eV B. He द्वारा C. H2 द्वारा D. Na द्वारा बैंड स्पेक्ट्रम अणुओं का गुण है|
B. C. D. B. सीधी रेखा C. परवलयिक D. सर्पिल पथ ऊर्जा के लगातार क्षय के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर एक सर्पिल पथ के साथ आगे बढ़ेगा।
B. Eo = - 27.2 eV ; ro = ao C. Eo = - 13.6 eV ; ro = ao / 2 D. Eo = - 13.6 eV ; ro = ao r ∝ (1/ m), ro = (1/2) ao
E ∝ m, Eo = 2 (-13.6) eV = - 27.2 eV
Re ∝ e4, जहाँ e = इलेक्ट्रॉन पर आवेश
B. C. D. इलेक्ट्रॉन प्रवाह की ऊर्जा = 12.75 eV| इलेक्ट्रॉन की निम्नतम अवस्था ऊर्जा है –13.6 eV यह ऊर्जा अर्जित होगी तथा कुल ऊर्जा है –13.6 + 12.75 = –0.85 eV| चौथी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा के सांगत है। जब इलेक्ट्रॉन चौथी कक्षा से नीचे की कक्षा तक जाता है तो यह ऊर्जा को उत्सर्जित करेगा।
B. कोणीय संवेग का संरक्षण C. क्वांटम आवृत्ति का संरक्षण D. ऊर्जा का संरक्षण B. मध्य C. न्यूनतम D. उच्चतम एक परमाणु की कक्षा में इलेक्ट्रॉन का वेग कक्षा की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती है।
एक इलेक्ट्रॉन उर्जा उत्सर्जित करता है जो कि, एक परमाणु द्वारा उच्च उर्जा अवस्था से निम्न उर्जा अवस्था में संक्रमण करतें समय, दो उर्जा स्तरों के बिच के अंतर के बराबर होता है| गणितीय रूप में, किसी स्तर पर निकले न्यूट्रॉनों के द्वारा विखंडनों की संख्या का उसके पिछले स्तर पर निकले न्यूट्रॉनों के द्वारा विखंडनों की संख्या के साथ अनुपात, को गुणन कारक कहते हैं| B. C. D. ऐल्फा क्षयता के दौरान, मूल नाभिक की द्रव्यमान-संख्या 4 से कम हो जाती है तथा परमाणु संख्या 2 से कम हो जाती है। B. 21 C. 92 D. 52
A. लाल प्रकाश के लिए कम और नीले प्रकाश के लिए अधिक हो जाती हैSOLUTION
SOLUTION
A. 10 cmSOLUTION
A. 30 cm/sSOLUTION
A. परिक्षेपण SOLUTION
A. sin–1 (1/4)SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. प्रोटॉन SOLUTION
अन्य आवेशित कण नाभिक द्वारा स्थिर-वैद्युत्कीय रूप से विकर्षण करते है।
A. खारा पानीSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
इसके अलावा, न्यूट्रॉन की संख्या = A - Z
= 238-92
= 146SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
द्र्व्यमान, m = 10 mg = 10 x 10-6 kg
हम जानते है कि,
E = mc2
E = 10 x 10-6 kg x ( 3 x 108 m/s)2
= 9 x 1011 JSOLUTION
A. SOLUTION
A. 35º16’SOLUTION
A. 13 mmSOLUTION
A. अप्रभावित रहेगी SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
(i) बैंगनी प्रकाश तथा पीला प्रकाश।
(ii) एक्स किरण तथा गामा किरण।
SOLUTION
(ii) एक्स किरण तथा गामा किरण: एक्स किरण परमाणु के आंतरिक कोश के इलेक्ट्रान के उत्तेजन द्वारा उत्पन्न होती है जबकि गामा किरण रेडियोएक्टिव नाभिक, कॉस्मिक विकिरण, तथा विनाशकारी प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होती है।SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. धुंध प्रकाश का परावर्तन करती हैSOLUTION
A. 4 m/sSOLUTION
A. प्रकाश एक सीधी रेखा में गमन करता है।SOLUTION
Right Answer is: B
SOLUTION
SOLUTION
1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
2. दो निश्चित माध्यमों तथा दो निश्चित रंगों के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है।SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. 



SOLUTION
A. आवेश + eSOLUTION
A. लाइमैनSOLUTION
A. पाशन SOLUTION
A. 0 eVSOLUTION
A. 13.6 eV SOLUTION
पहली उत्तेजित अवस्था के लिए n = 2 और उस अवस्था में ऊर्जा है [ 13.6 / 22] eV = 3.4 eV
A. H द्वाराSOLUTION
A. 



SOLUTION
A. यह सार्वत्रिक नियतांक हैSOLUTION
A. वृतीय
SOLUTION
A. Eo = - 27.2 eV ; ro = ao / 2 SOLUTION
SOLUTION
A. 



SOLUTION
SOLUTION
A. रैखिक संवेग का संरक्षणSOLUTION
A. शून्यSOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION

SOLUTION

SOLUTION

जब हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन, उर्जा अवस्था ni =4 से ni =3,2,1 में जाता है, तो उस वर्णक्रमीय श्रृंखला की पहचान करें, जो उत्सर्जन रेखा से सम्बन्धित है।
SOLUTION

A. 1 होता हैSOLUTION
A. SOLUTION
बीटा क्षयता के दौरान, मूल नाभिक के परमाणु संख्या 1 से बढ़ हो जाती है।
गामा क्षयता के दौरान, मूल नाभिक के द्रव्यमान-संख्या तथा परमाणु संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है|
A. 11