CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 159301 परासरण के दौरान, अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर जल का प्रवाह होता है


A. अर्धपारगम्य झिल्ली के दोनों ओर एक-समान दर से

B. अर्धपारगम्य झिल्ली के दोनों ओर असमान दर से

C. तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर 

D. सांद्र विलयन से तनु विलयन की ओर

Right Answer is: C

SOLUTION

परासरण, अर्धपारगम्य झिल्ली से शुद्ध विलायक का विलयन की ओर अर्थात तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर प्रवाह होता है।


Q. 159302 हेनरी का नियम लागू होता है


A. उच्च दाब और उच्च ताप पर

B. निम्न दाब और निम्न ताप पर

C. उच्च दाब और निम्न ताप पर

D. निम्न दाब और उच्च ताप पर

Right Answer is: D

SOLUTION

हेनरी के नियम के अनुसार स्थिर ताप पर साम्यावस्था में किसी गैस की द्रव में विलेयता गैस के दाब के समानुपाती होती है। यह तभी लागू होता है जब वास्तविक गैस, आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती है अर्थात जब दाब निम्न और ताप उच्च होता है।


Q. 159303 वह विलयन जो राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन नहीं दर्शाता है


A. ऐसीटोन-क्लोरोफॉर्म

B. बेंज़ीन-ऐसीटोन

C. जल-एथेनॉल

D. क्लोरोफॉर्म-कार्बन टेट्राक्लोराइड

Right Answer is: A

SOLUTION

अनादर्श विलयन राउल्ट के नियम से धनात्मक अथवा ऋणात्मक विचलन दर्शाता है। राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयनों की विरचन की ऊष्मा और मिश्रण का आयतन दोनों धनात्मक होते हैं। राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयनों की विरचन की ऊष्मा और मिश्रण का आयतन दोनों ऋणात्मक होते हैं। एसीटोन-क्लोरोफॉर्म विलयन ऋणात्मक विचलन दर्शाता है।


Q. 159304 निम्न में से अणुसंख्य गुणधर्म नहीं हैं


A. हिमांक में अवनमन

B. क्वथनांक में उन्नयन

C. परासरण दाब

D. वाष्प दाब

Right Answer is: D

SOLUTION

अणुसंख्य गुणधर्म का मान कणों की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह कणों की संख्या पर निर्भर करता है।


Q. 159305 अणुसंख्य गुणधर्म का एक उदाहरण है


A. मुक्त उर्जा में परिवर्तन

B. दाब में परिवर्तन

C. वाष्पीकरण की ऊष्मा

D. परासरण दाब

Right Answer is: D

SOLUTION

विलयन के वे गुण जो विलायक की निश्चित मात्रा में घुली हुई विलेय (अणुओं या आयनों) के कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं अणुसंख्य गुणधर्म  कहलाते हैं। ये गुण विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करते हैं। यहाँ पर केवल परासरण दाब ही कणों की संख्या पर निर्भर करता है। अतः यह एक अणुसंख्य गुणधर्म है।


Q. 159306 जब आम को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के तनु जलीय विलयन में रखा जाता है, तो यह


A. सिकुड़ जाता है।

B. फूल जाता है।

C. पक जाता है।

D. अप्रभावित रहता है।

Right Answer is: B

SOLUTION

विलायक कणों का निम्न सांद्रता से उच्च सांद्रता की ओर संचलन परासरण है। आम में जल के संचलन के कारण आम फूल जाता है।


Q. 159307 एथेनॉल में एसीटोन का विलयन दर्शाता है


A. राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन ।

B. राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन ।

C. राउल्ट के नियम का पालन ।

D. आदर्श विलयन की तरह व्यवहार ।

Right Answer is: A

SOLUTION

जब ऐसीटोन को एथेनॉल में मिलाया जाता है, तो ऐसीटोन के अणु एथेनॉल अणुओं के मध्य के स्थान को ग्रहण कर लेते हैं। परिणामस्वरूप, एल्कोहॉल अणुओं के मध्य उपस्थित कुछ हाइड्रोजन आबंध टूट जाते हैं और एल्कोहॉल अणुओं के मध्य आकर्षण बल दुर्बल हो जाते हैं तथा एथेनॉल और ऐसीटोन अणुओं की पलायन की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप, विलयन का वाष्प दाब अपेक्षित वाष्प दाब से अधिक हो जाता है।


Q. 159308 परासरण दाब निर्भर करता है


A. विलेय के अंतराआण्विक बलों पर

B. विलायक के अणुभार पर

C. विलयन की सांद्रता पर

D. विलायक की गतिज ऊर्जा पर

Right Answer is: C

SOLUTION

अर्धपारगम्य झिल्ली में से विलायक का तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर प्रवाह, परासरण के कारण होता है। यह ध्यान  रखना चाहिए  कि विलायक के अणु हमेशा विलयन की निम्न सांद्रता से उच्च सांद्रता की ओर प्रवाहित होते हैं। अतः परासरण दाब विलयन की सांद्रता पर निर्भर करता है।


Q. 159309 जल में गैस की विलेयता निर्भर करती है


A. केवल गैस की प्रकृति पर

B. केवल ताप पर

C. केवल गैस के आयतन पर

D. गैस के दाब, ताप और प्रकृति पर

Right Answer is: D

SOLUTION

हेनरी नियम के अनुसार स्थिर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता साम्यावस्था पर गैस के दाब के समानुपाती होती है।


Q. 159310 1 मोल यूरिया, 1 मोल ग्लूकोस और 1 मोल सोडियम क्लोराइड के हिमांक में अवनमन का अनुपात है


A. 1:2:3

B. 3:2:2

C. 1:1:2

D. 3:1:2

Right Answer is: C

SOLUTION

हिमांक में अवनमन अणुसंख्य गुणधर्म  है। यूरिया, ग्लूकोस और सोडियम क्लोराइड में कणों की मोलर सांद्रता का अनुपात 1: 1: 2 है, अतः इनके हिमांक में अवनमन का अनुपात भी समान होगा। राउल्ट के नियम के अनुसार जब एक अवाष्पशील ठोस विलायक में मिलाया जाता है तो विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है और अब इसका वाष्पदाब कुछ कम ताप पर ठोस विलायक के वाष्पदाब के बराबर होता है।


Q. 159311 मोलल उन्नयन स्थिरांक निर्भर करता है


A. विलेय की प्रकृति पर

B. विलायक की प्रकृति पर

C. विलायक के क्वथनांक पर

D. विलयन के वाष्प दाब पर

Right Answer is: B

SOLUTION

मोलल उन्नयन स्थिरांक (Kb) को 1 kg विलायक में 1 मोल विलेय घोलने पर क्वथनांक में उन्नयन के रूप में परिभाषित किया जाता है। Kb की इकाई केल्विन किलोग्राम प्रतिमोल होती है।


Q. 159312 प्रेशर कुकर में खाना कम समय में ही पक जाता है, क्योंकि


A. उच्च दाब भोजन को नरम कर देता है।

B. निम्न दाब भोजन को नरम कर देता है।

C. कुकर के अंदर जल का क्वथनांक अधिक हो जाता है।

D. कुकर के अंदर जल का क्वथनांक कम हो जाता है।

Right Answer is: C

SOLUTION

द्रव का क्वथनांक वह ताप है जिस पर इसका वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है। प्रेशर कुकर के अंदर दाब अधिक होता है, इसलिए इसके अंदर जल का क्वथनांक भी बढ़ जाता है और भोजन कम समय में पक जाता है।


Q. 159313 ग्लूकोस के 10% w/w जलीय विलयन की मोललता है


A. 0.062

B. 0.62

C. 6.2

D. 0.0062

Right Answer is: B

SOLUTION


Q. 159314 अभिक्रिया की आण्विकता तथा कोटि के बीच का अंतर लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

आण्विकता
कोटि

1. यह अणुओं की कुल संख्या होती है, जो  संतुलित रासायनिक अभिक्रिया में उपस्थित होती है, जिनसे उत्पादों का निर्माण होता है

1. यह अणुओं की कुल संख्या होती है जिनकी सांद्रता परिवर्तित होती है

2. अभिक्रिया की आण्विकता कभी भी भिन्न संख्या नहीं हो सकती है

2.अभिक्रिया की कोटि भिन्न संख्या हो सकती है

3. अभिक्रिया की आण्विकता शून्य नहीं हो सकती है

3.अभिक्रिया की कोटि शून्य हो सकती है


Q. 159315 एक प्रथम कोटि अभिक्रिया में, 1.386 घंटे में 75% अभिक्रियक अभिक्रिया कर लेते हैं। अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION


Q. 159316 अभिक्रिया 2X + Y → X2Y के लिए अभिक्रिया वेग = k[X][Y]2 तथा k =2.0 x 10-6 mol-2 L2s-1 है। (i) उपर्युक्त अभिक्रिया की कोटि तथा आण्विकता क्या है? (ii) [X]=0.1 mol L-1, [Y] =0.2 mol L-1 हो, तो अभिक्रिया के प्रारंभिक वेग की गणना कीजिए। (iii) गैसीय अवस्था में तृतीय कोटि अभिक्रिया की इकाई लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

(i) अभिक्रिया की आण्विकता 3 है तथा अभिक्रिया की कोटि भी 3 है

(ii) वेग = 2.0 x 10-6 x 0.1 x 0.2 x 0.2

= 8 x 10-9 mol L-1s-1

(iii) atm-2 s-1


Q. 159317 (i) अभिक्रिया वेग, वेग स्थिरांक से कैसे भिन्न होता है? (ii) अभिक्रिया के वेग की ताप निर्भरता प्रदर्शित करने के लिए ग्राफ खींचिए। (iii) ताप में वृद्धि से अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है, क्यों?
Right Answer is:

SOLUTION

(i) 

अभिक्रिया वेग

वेग स्थिरांक

प्रति इकाई समय में अभिक्रियक की सांद्रता में परिवर्तन

वेग नियम समीकरण में समानुपातन स्थिरांक

किसी निश्चित समय पर  अभिक्रियकों की मोलर सांद्रताओं पर निर्भर करता है

अभिक्रियक की मोलर सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है 

अभिक्रिया वेग की इकाई हमेशा mol L-1s-1 होती है

इकाई अभिक्रिया की कोटि पर निर्भर करती है

(ii)

(iii) तापमान में वृद्धि के साथ अभिक्रिया वेग में वृद्धि मुख्यतः प्रभावी संघट्टों की संख्या में वृद्धि के कारण होती है


Q. 159318 कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाता है


A. ब्राउनी गति

B. वैद्युत परासरण

C. टिंडल प्रभाव

D. वैद्युत् अपोहन

Right Answer is: C

SOLUTION

टिंडल ने इस परिघटना को 1869 में प्रेक्षित किया था। यह कोलॉइडी कणों की विषमांगी प्रकृति की पुष्टि करने में सहायक है।


Q. 159319 आकाश का नीला रंग किनके प्रकीर्णन के कारण होता है ?


A. हरे प्रकाश के

B. लाल प्रकाश के

C. श्वेत प्रकाश के

D. नीले प्रकाश के

Right Answer is: D

SOLUTION

हवा में जल के साथ निलंबित धूल के कण हमारी आँखों तक पहुँचने वाले नीले प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं एवं हमें आकाश नीला दिखाई देता है।


Q. 159320 समांगी उत्प्रेरण का एक उदाहरण है


A. अमोनिया उत्पादन का हाबर प्रक्रम

B. संपर्क प्रक्रम में SO2 का SO3 में उत्प्रेरकी रूपांतरण

C. तेलों का उत्प्रेरकी हाइड्रोजनीकरण

D. मेथिल एसिटेट का अम्लीय जल अपघटन

Right Answer is: D

SOLUTION

मेथिल एसीटेट के अम्लीय जल अपघटन में उत्प्रेरक और अभिकर्मक दोनों एक ही प्रावस्था (द्रव) में होते हैं।


Q. 159321 जलरागी सॉल का पृष्ठ तनाव


A. जल से कम होता है।

B. जल से अधिक होता है।

C. जल के बराबर होता है।

D. जल से कम या अधिक हो सकता है।

Right Answer is: A

SOLUTION

जलरागी सॉल का जल के प्रति आकर्षण होता है। जलरागी सॉल का पृष्ठ तनाव जल से कम होता है।


Q. 159322 द्रवविरागी कोलॉइड का एक उदाहरण है


A. गोंद

B. जिलेटिन

C. स्टार्च

D. धातु सल्फाइड

Right Answer is: D

SOLUTION

ये सॉल आसानी से अवक्षेपित हो जाते हैं, अतः ये स्थायी नहीं होते हैं।


Q. 159323 पायस का एक उदाहरण है


A. धुँआ

B. झाग

C. धुँध

D. दूध

Right Answer is: D

SOLUTION

पायस, कोलॉइडी परिक्षेपण है जिसमें परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम दोनों द्रव होते हैं।


Q. 159324 कोलॉइडी कणों का आकार होता है


A. 10-9 से 104

B. 10-9 से 10-6

C. 10-7 से 10-4

D. 10-7 से 10-6

Right Answer is: B

SOLUTION

कोलॉइडी कणों के आकार यथार्थ विलयन और निलंबन के मध्य का होता है।


Q. 159325 वह सॉल चुनें जिसमें परिक्षेपण माध्यम जल है


A. ऐल्कोसॉल

B. बेन्जोसॉल

C. एरोसॉल

D. हाइड्रोसॉल

Right Answer is: D

SOLUTION

परिक्षेपण माध्यम में पदार्थ कोलॉइडी कणों के रूप में परिक्षिप्त प्रावस्था में रहता है।


Q. 159326 उस गैस का चुनाव करें जो सक्रियित चारकोल द्वारा सर्वाधिक मात्रा में अधिशोषित होगी ।


A. N2

B. CO2

C. Cl2

D. O2

Right Answer is: B

SOLUTION

अधिक क्रांतिक ताप वाली गैसें आसानी से द्रवित हो जाती है और यह अधिक मात्रा में अधिशोषित होती हैं।


Q. 159327 मिसेल का एक उदाहरण है


A. सोडियम स्टिऐरेट

B. गोल्ड सॉल

C. NaCl का विलयन

D. माणिक्य

Right Answer is: A

SOLUTION

सोडियम स्टिऐरेट मिसेल बनाता है और  इसका उपयोग तेलयुक्त गंदगी वाले गंदे कपड़े को धोने के लिए किया जाता है। वास्तव में, सोडियम स्टिऐरेट अणु (C17H35COONa) के दो भाग होते हैं: लंबी श्रृंखला वाला  हाइड्रोकार्बन भाग (C17H35) और ध्रुवीय भाग (-COONa)। हाइड्रोकार्बन भाग जल विरोधी प्रकृति का होता है जो तेलयुक्त गंदगी से जुड़ जाता है और ध्रुवीय भाग जल में ही रहता है और इस प्रकार मिसेल बनता है।


Q. 159328 रक्त को शुद्ध किया जा सकता है


A. अपोहन द्वारा

B. वैद्युत परासरण द्वारा

C. स्कंदन द्वारा

D. निस्यंदन द्वारा

Right Answer is: A

SOLUTION

मानव शरीर में रक्त, जो कि कोलॉइडी प्रकृति की होता है, उसको शुद्ध करने के लिए किडनी अपोहक की तरह कार्य करती है। कृत्रिम किडनी भी अपोहन के सिद्धांत पर ही कार्य करती है।


Q. 159329 1 g सक्रियित चारकोल निम्न में से किसका सर्वाधिक अधिशोषण करेगा।


A. एथेन

B. मेथेन

C. सल्फर डाइऑक्साइड

D. डाइहाइड्रोजन

Right Answer is: C

SOLUTION

ठोस द्वारा अधिशोषित गैस की मात्रा गैस की प्रकृति पर निर्भर करती है। सामान्यत: अधिक आसानी से द्रवित की जा सकने वाली गैसें (अर्थात उच्च क्रांतिक ताप वाली) आसानी से अधिशोषित होती हैं, क्योंकि क्रांतिक ताप पर वान्डर वाल्स बल प्रबल होते हैं। अतः 1 ग्राम सक्रियित चारकोल, मेथेन (क्रांतिक ताप 190 K) की अपेक्षा सल्फर डाइऑक्साइड (क्रांतिक ताप 630K) को अधिक अधिशोषित करता है।


Q. 159330 फेरिक हाइड्रॉक्साइड की स्कन्दन क्षमता सबसे अधिक होती है


A. NaCl के लिए

B. BaCl2 के लिए

C. K2CrO4 के लिए

D. K3[Fe(CN)6] के लिए

Right Answer is: D

SOLUTION

फेरिक हाइड्रॉक्साइड एक धनात्मक सॉल है अतः यह K3[Fe(CN)6] का सबसे अधिक स्कंदन करता है क्योंकि इस पर सबसे अधिक ऋणावेश होता है।


Q. 159331 एक कोलॉइडी विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विलेय कोलॉइडी कणों की गति कहलाती है


A. ब्राउनी गति

B. वैद्युत परासरण

C. वैद्युतकणसंचलन

D. विद्युत अपोहन

Right Answer is: C

SOLUTION

कोलॉइडी विलयन में विद्युतधारा प्रवाहित करने पर उसके कणों की गति वैद्युतकण संचलन कहलाती है।


Q. 159332 द्रवरागी कोलॉइडो के स्थायित्व का कारण है


A. उनके कणों पर उपस्थित आवेश

B. उनके कणों का आकार बड़ा होना

C. उनके कणों का आकार छोटा होना

D. परिक्षेपण माध्यम की परत उपस्थित होना

Right Answer is: D

SOLUTION

द्रवरागी कोलॉइड का स्थायित्व सॉल कणों के चारों ओर परिक्षेपण माध्यम की परत की उपस्थिति के कारण होता है|


Q. 159333 एन्जाइम होते हैं


A. रसायनज्ञों द्वारा कपड़े धोने के पाउडर को सक्रियित करने के लिए बनाये गए पदार्थ

B. अति क्रियाशील वनस्पति उत्प्रेरक

C. जीवों में पाए जाने वाले उत्प्रेरक

D. संश्लेषिक उत्प्रेरक

Right Answer is: C

SOLUTION

एन्जाइम जटिल नाइट्रोजनी कार्बनिक यौगिक होते हैं जो कि जीवित पौधों एवं जन्तुओं में निर्मित होते हैं। ये अत्यंत विशिष्ट प्रकृति के होते हैं।


Q. 159334 परमाणुओं का एक समूह लिगन्ड के रूप में कार्य करता सकता है, केवल जब:


A. यह एक छोटा अणु होता है

B. यह ऋणायन आवेशित आयन होता है

C. इसमें इलेक्ट्रॉनों के असहभाजित युग्म होते हैं

D. यह धनायन आवेशित आयन होता है

Right Answer is: C

SOLUTION

उपसहसंयोजन यौगिक में, केंद्रीय धातु धनायन की द्वितीयक संयोजकता उस स्पीशीज द्वारा संतुष्ट की जाती है जिसमें इलेक्ट्रॉन का असहभाजित युग्म होता है और वह इस असहभाजित युग्म से दाता आबंध बनाता है। अतः लिगन्ड पर असहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म का उपस्थित होना आवश्यक है।


Q. 159335 किसी संकुल में भिन्न धातुओं के आयनों के मध्य लिगन्डों के अंतरपरिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है:


A. ध्रुवण समावयवता

B. उपसहसंयोजन समावयवता

C. विलायकयोजन समावयवता

D. स्थिति समावयवता

Right Answer is: B

SOLUTION

संकुल में उपस्थित भिन्न धातु आयनों की धनायनिक एवं ऋणायनिक सत्ता के मध्य लिगन्डों का अंतरपरिवर्तन के कारण यौगिक उपसहसंयोजन समावयवता प्रदर्शित करता है। उदाहरणार्थ: Co(NH3)6][Cr(CN)6


Q. 159336 उपसहसंयोजन संख्या 4 वाले उस संकुल का चुनाव करें जो ध्रुवण समावयता प्रदर्शित कर सकता है।


A. [Pt (gly)2]

B. [Pt Cl2 (py)2]

C. [Ni (CH2NH2COO)2]

D. [Pt (NH3)2 Cl2]

Right Answer is: C

SOLUTION

उपसहसंयोजन संख्या 4 के लिए, वर्ग समतलीय संकुल ध्रुवण समावयवता प्रदर्शित नहीं करते हैं क्योंकि उनमें सममिति तल होता है लेकिन असममित उभयदंती लिगन्ड वाले चतुष्फलकीय संकुल ध्रुवण समावयवता प्रदर्शित करते हैं।


Q. 159337 विटामिन B12 __________ का उपसहसंयोजन संकुल है।


A. मैग्नीशियम आयन

B. आयरन आयन

C. कोबाल्ट आयन

D. क्रोमियम आयन

Right Answer is: C

SOLUTION

विटामिन B12 रासायनिक रूप से सायनोकोबालऐमीन और कोबाल्ट एवं कोरिन वलय अणुओं का समुच्चय है।


Q. 159338 [Cr(NH3)6][Co(CN)6] का IUPAC नाम है:


A. हेक्साऐम्मीनक्रोमियम(III)हेक्सासायनोकोबाल्ट(III)

B. हेक्सासायनोकोबाल्ट (III)हेक्साऐम्मीनक्रोमिमेट(III)

C. हेक्साऐम्मीनक्रोमियम(III)हेक्सासायनोकोबाल्टेट (III)

D. हेक्सासायनोकोबाल्टेट (III) हेक्साऐम्मीनक्रोमियम (III)

Right Answer is: C

SOLUTION

[Cr(NH3)6][Co(CN)6] में, धनायन तथा ऋणायन दोनों संकुल होते हैं। 
इस प्रकार Cr तथा Co की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्रमशः 3 तथा 3 होती हैं।
संकुल का नामकरण करते समय धनावेशित संकुल को प्राथमिकता दी जाती है तथा ऋणावेशित संकुल में धातु के नाम के अंत में ऐट जोड़ दिया जाता है।


Q. 159339 [Fe(NO2)3Cl3] तथा [Fe(ONO)3Cl3] प्रदर्शित करते हैं:


A. उपसहसंयोजन समावयवता

B. बंधनी समावयवता

C. ज्यामितीय समावयवता

D. ध्रुवण समावयवता

Right Answer is: B

SOLUTION

[Fe(NO2)3Cl3] तथा [Fe(ONO)3Cl3] बंधनी समावयवता प्रदर्शित करते हैं। उभयदंतुर लिगन्ड युक्त उपसहसंयोजन यौगिकों में बंधनी समावयवता पायी जाती है। NO2 एक उभयदंतुर लिगन्ड है।


Q. 159340 Ca2+ आयन के साथ अष्टफलकीय संकुल के निर्माण के लिए आवश्यक EDTA अणुओं की संख्या है:


A.  2

B.  3

C.  6

D.  1

Right Answer is: D

SOLUTION

चूँकि EDTA एक षटदंतुर लिगन्ड है, इसलिए EDTA का केवल एक अणु इसके अष्टफलकीय संकुल में Ca2+ आयनों की द्वितीयक संयोजकताओं को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त होता है।


Q. 159341 द्विलवण का उदाहरण है:


A. क्युप्रेमोनियम सल्फेट

B. मोर लवण

C. पोटैशियम फेरीसायनाइड  

D. कोबाल्ट हेक्साएम्मीन क्लोराइड

Right Answer is: B

SOLUTION

जलीय विलयन में, मोर लवण दो भिन्न प्रकार के लवण प्रदान करता है। इसलिए यह एक द्विलवण है।


Q. 159342 उपसहसंयोजन सत्ता अथवा उपसहसंयोजन मंडल की परिभाषा दीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

उपसहसंयोजन यौगिकों का वह भाग जो गुरू कोष्ठक में लिखा होता है, उपसहसंयोजन सत्ता अथवा उपसहसंयोजन मंडल कहलाता है।


Q. 159343 कीलेटीकारक क्या होते हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

बहुदंतुर लिगंड जो दो या दो से अधिक दाता परमाणुओं से केंद्रीय धातु आयन से जुड़े होते हैं और इसके चारों  ओर एक या एक से अधिक वलय का निर्माण करते हैं, कीलेटीकारक अथवा कीलेटिंग लिगंड कहलाते हैं।


Q. 159344 बंधनी समावयवता को परिभाषित कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

वे यौगिक जिनके आण्विक सूत्र समान होते हैं, लेकिन केंद्रीय परमाणु अथवा आयन पर बंधित लिगन्ड भिन्न-भिन्न हो, बंधनी समावयवी कहलाते हैं और यह परिघटना बंधनी समावयवता कहलाती है
उदाहरणार्थ:  [Co(ONO)(NH3)5]Cl2  और  [Co(NO2)(NH3)5]Cl2


Q. 159345 उपसहसंयोजक यौगिकों को परिभाषित कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

वे संकुल यौगिक जिनमें संक्रमण धातु परमाणु अनेक ऋणायनों अथवा उदासीन अणुओं से परिबद्ध रहते हैं, उपसहसंयोजक यौगिक कहलाते हैं।   


Q. 159346 संकुल के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

संकुल के स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं:
1. केंद्रीय धातु आयन की प्रकृति: अधिक आवेश तथा छोटा आयनिक आकार संकुल के स्थायित्व में सहायक होता है। अतः, अधिक आवेश वाला छोटा आयन अधिक स्थायी संकुल बनाएगा।

2. लिगन्ड की प्रकृति: लिगन्ड इलेक्ट्रॉन दाता परमाणु होते हैं। सामान्यतः इनमें एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म रखने वाले एक या एक से अधिक परमाणु होते हैं। लिगन्ड लूईस क्षारों के समान व्यवहार दर्शाते हैं।


Q. 159347 संयोजकता आबंध सिद्धान्त का उपयोग करते हुए [Cr(NH3)5Cl]2+ आयन के आकार तथा चुंबकीय व्यवहार की व्याख्या कीजिए। (Cr की आण्विक संख्या 24 है)
Right Answer is:

SOLUTION


Q. 159348 धातु कार्बोनिल की सामान्य विशेषताएँ लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

धातु कार्बोनिल की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं:

1. सभी कार्बोनिल सहसंयोजक यौगिक होते हैं और इसलिए कार्बनिक विलायकों में आसानी से घुल जाते हैं। 

2. Ni(CO)4, Fe(CO)5, Ru(CO)5 तथा Os(CO)5  द्रव होते हैं, जबकि  अन्य सभी क्रिस्टलीय ठोस होते हैं। ये कम ताप पर द्रवित या विघटित हो जाते हैं।

3. V(CO)6 को छोड़कर, अन्य सभी कार्बोनिल प्रतिचुंबकीय होते हैं।

4. V(CO)6 एक आयुग्मित इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण अनुचुंबकीय होता है।


Q. 159349 संयोजकता आबंध सिद्धांत की सीमाएँ लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

संयोजकता आबंध सिद्धांत संकुलों के ज्यामिती तथा चुंबकीय व्यवहार को गुणात्मक रूप से समझाने में सफल रहा। किन्तु यह निम्नलिखित की व्याख्या नहीं कर सका:

1. उनके अवशोषण स्पेक्ट्रम की उत्पत्ति को समझाया नहीं जा सका।

2. विभिन्न संकुलों के सापेक्ष स्थायित्व को नहीं समझाया जा सका।  

3. एक ही धातु के विभिन्न संकुल अलग-अलग रंग क्यों प्रदर्शित करते हैं?

4. क्यों कुछ लिगन्ड उच्च प्रचक्रण संकुल बनाते हैं जबकि अन्य लिगन्ड निम्न प्रचक्रण संकुल बनाते हैं?    


Q. 159350 निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए। (i) [Ni(CO)4] (ii) [CoCl2(en)2]SO4 (iii) [ptClNO2(NH3)4]SO4
Right Answer is:

SOLUTION

(i) [Ni(CO)4] - टेट्राकार्बोनिलनिकैल(0)
(ii) [CoCl2(en)2]SO4 - डाइक्लोरोबिस (एथिलीनडाइऐमीन) कोबाल्ट
(III) सल्फेट

(iii) [PtClNO2(NH3)4]SO4 – टेट्राऐम्मीनक्लोरोनाइट्रोप्लैटिनम (IV) सल्फेट  


Q. 159351 ज्यामितीय समावयवता की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

ज्यामितीय समावयवता 4 अथवा 6 उपसहसंयोजन संख्या वाले द्विप्रतिस्थापित संकुलों में पाई जाती है, जिसमें क्रमशः वर्ग समतली तथा अष्टफलकीय विन्यास होते हैं। जब समान समूह एक-दूसरे के विपरीत होते हैं, तो इसे विपक्ष समावयव कहा जाता है, वहीं जब समान समूह एक ही दिशा में होते हैं, तो यह समपक्ष समावयव कहलाते हैं


Q. 159352 सैंडमायर अभिक्रिया के समान मुख्य उत्पाद देने वाली अभिक्रिया का चुनाव करें।


A.

एटार्ड अभिक्रिया

B.

मेंडियस अभिक्रिया

C.

रोजेनमुन्ड अभिक्रिया

D.

गाटरमान अभिक्रिया

Right Answer is: D

SOLUTION

गाटरमान अभिक्रिया में, ताम्र चूर्ण की उपस्थिति में डाइऐज़ोनियम लवण को हैलोजन अम्ल के साथ गरम करने पर उसके संगत हैलोबेंजीन बनते हैं। सैंडमायर अभिक्रिया की तुलना में गाटरमान अभिक्रिया की लब्धि कम होती है।


Q. 159353 बेंजीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड जब पोटैशियम आयोडाइड के साथ अभिक्रिया करता है तो


A.

फेनिल आइसोसायनाइड बनता है।

B.

फीनॉल बनता है।

C.

बेंज़ीन बनती है।

D. आयोडोबेंज़ीन बनती है।

Right Answer is: D

SOLUTION

यह डाइएज़ो समूह के प्रतिस्थापन की अभिक्रिया है जिसके लिए  उत्प्रेरक के रूप में क्यूप्रस हैलाइड अथवा कॉपर की आवश्यकता नहीं होती है। 


Q. 159354 बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम लवण की क्यूपरस क्लोराइड तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कहलाती है:


A. शॉटन बोमान अभिक्रिया

B. हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया

C. गाटरमान अभिक्रिया

D. सैंडमायर अभिक्रिया

Right Answer is: D

SOLUTION

जब बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम लवण को क्यूपरस क्लोराइड तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ गरम किया जाता है तो क्लोरोबेंजीन का निर्माण होता है। इस अभिक्रिया को सैंडमायर अभिक्रिया कहते है।    


Q. 159355 डाइऐज़ोनियम लवण तथा ऐनिलीन की युग्मन अभिक्रिया p-ऐमीनोएज़ोबेंज़ीन देती है, जो _____________ का होता है।


A. पीले रंग

B. नारंगी रंग

C. हरे रंग

D. लाल रंग

Right Answer is: A

SOLUTION

ऐज़ो यौगिकों का रंग, असंतृप्त केंद्र अथवा क्रोमोफोरिक समूह के कारण होता है तथा दोनों ऐरोमैटिक वलयों एवं इन्हें जोड़ने वाले –N=N– द्विबन्ध के बीच विस्तारित संयुग्मन होता है।  


Q. 159356 0ºC पर ऐनिलीन, HCl तथा NaNO2 के साथ गरम करने पर देती है:


A.

डाइऐज़ोनियम लवण

B.

क्लोरोऐनिलीन

C.

2-नाइट्रोबेंज़ीन

D. फेनिलहाइड्राजीन

Right Answer is: A

SOLUTION

 /stryde/uploadfiles/Image/2007/11/27/2007112714414800119615262507021108.gif यह प्रक्रम डाइऐज़ोकरण कहलाता है।


Q. 159357 बेंजीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड ________ से अभिक्रिया करने पर नारंगी रंग का डाइ बनाता है।


A.

क्लोरोबेंज़ीन

B.

फीनॉल

C.

बेंज़ीन

D.

टॉलूईन

Right Answer is: B

SOLUTION

बेंज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड, फ़ीनॉल से अभिक्रिया करके पैरा- हाइड्रोक्सीऐज़ोबेंज़ीन अथवा नारंगी रंजक बनाता है।  दो बेंज़ीन वलय नाइट्रोजन सेतु से जुड़े होते हैं।


Q. 159358 जब ऐनिलीन, ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करती है, तो अभिक्रिया द्वारा प्राप्त मुख्य उत्पाद है :


A.

आर्थो  तथा पैरा-ब्रोमोऐनिलीन का मिश्रण

B.

2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन

C.

m-ब्रोमोऐनिलीन

D.

केवल p-ब्रोमोऐनिलीन

Right Answer is: B

SOLUTION

ऐनिलीन कक्ष ताप पर ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6- ट्राइब्रोमोऐनिलीन का सफ़ेद अवक्षेप बनाती है। ऐनिलीन + Br2 जल → 2,4,6- ट्राइब्रोमोऐनिलीन


Q. 159359 ऐलीफैटिक तथा ऐरोमैटिक द्वितीयक ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करने पर देती हैं:


A. डाइऐल्किलअमोनियम नाइट्राइट

B. ट्राइऐल्किलअमोनियम नाइट्राइट

C. डाइऐज़ोनियम लवण

D. N-नाइट्रोसोऐमीन

Right Answer is: D

SOLUTION

ऐलीफैटिक तथा ऐरोमैटिक- दोनों द्वितीयक ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके N-नाइट्रोसोऐमीन उत्पन्न करते हैं, जो तनु खनिज लवणों में अविलेय होने के कारण पीले रंग के तैलीय यौगिकों के रूप में पृथक हो जाते हैं।


Q. 159360 यौगिक (X) का आण्विक सूत्र C7H7NO है। जब (X), Br2 तथा NaOH के साथ अभिक्रिया करता है, तो यह ऐमीन (Y) देता है, जो कार्बिलऐमीन परीक्षण दर्शाती है तथा डाइऐज़ोकरण करने पर और उसके पश्चात् फीनॉल के साथ अभिक्रिया करने पर यह एज़ो डाइ देता है। (X) है:


A.

C6H5CONH2

B.

C6H5CHNO2

C.

C6H5 CH2NH2

D.

o-C6H4(NH2) CHO

Right Answer is: A

SOLUTION

यह अभिक्रिया दर्शाती है कि (X) एक ऐमाइड है तथा (Y) प्राथमिक 1º ऐमीन है। (क्योंकि केवल प्राथमिक ऐमीन ही कार्बिलऐमीन परीक्षण दर्शाती हैं।  )


Q. 159361 कार्बिलऐमीन परीक्षण देने वाले यौगिक का चुनाव करें।


A.

CH3CH2NH2

B.

C6H5CH2NHC6H5

C.

C6H5CH2NHCH3

D.

C2H5-NH-C2H5

Right Answer is: A

SOLUTION

द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन यह परीक्षण नहीं दर्शाती हैं जबकि प्राथमिक ऐमीन यह परीक्षण दर्शाती है।


Q. 159362 बेंज़ोनाइट्राइल का सूत्र है:


A.

C6H5CN

B.

C6H5NC

C.

C6H5NH2

D.

C6H5OH

Right Answer is: A

SOLUTION

बेंज़ोनाइट्राइल फेनिल सायनाइड C6H5CN है।


Q. 159363 हिन्सबर्ग अभिकर्मक है:


A.

टारट्रेट ऋणायन से कॉपर आयनों का संकुलन

B.

बेंज़ीन सल्फोनिल क्लोराइड

C.

β-नैप्थाल का ऐल्कोहॉलिक विलयन

D.

टारट्रेट ऋणायन से जिंक आयनों का संकुलन

Right Answer is: B

SOLUTION

हिन्सबर्ग अभिकर्मक C6H4SO2Cl है। इसका उपयोग प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐमीन के मध्य विभेद के लिए किया जाता है।


Q. 159364 बेंजीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड जब हाइपोफॉस्फोरस अम्ल के साथ क्रिया करता है तो :


A.

फेनिल आइसोसायनाइड बनता है।

B.

फीनॉल बनता है।

C.

बेंजीन बनती है।

D. ऐनिलीन बनती है।

Right Answer is: C

SOLUTION

/stryde/uploadfiles/Image/2007/11/27/2007112761615600119615187307021114.gif  


Q. 159365 प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन की उसके संगत डाइऐज़ोनियम लवण में परिवर्तन की प्रक्रिया है:


A. एसिटिलीकरण

B. ऐसिलन

C. डाइऐज़ोकरण

D. बेंज़ाइलन

Right Answer is: C

SOLUTION

प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन के डाइऐज़ोनियम लवण में परिवर्तन को डाइऐज़ोकरण कहते हैं।


Q. 159366 ऐनिलीन में -NH2 समूह है:


A.

केवल o-निर्देशक

B.

केवल p- निर्देशक

C.

केवल m- निर्देशक

D.

o, और p- निर्देशक

Right Answer is: D

SOLUTION

ऐनिलीन में -NH2 समूह में o, p-निर्देशक होता है क्योंकि यह इन स्थानों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व में वृद्धि करता है।


Q. 159367 डाइऐज़ोनियम लवण तथा फीनॉल की युग्मन अभिक्रिया एक उदाहरण है:


A.

इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन का

B.

नाभिकरागी प्रतिस्थापन का

C.

इलेक्ट्रॉनरागी योगज का

D.

नाभिकरागी योगज का

Right Answer is: A

SOLUTION

बेंजीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड फीनॉल से अभिक्रिया करने पर इसके पैरा स्थान पर डाइऐज़ोनियम लवण से युग्मित होकर p-हाइड्रोक्सीऐज़ोबेंजीन बनाता है।   


Q. 159368 प्रबल क्षार के लिए pKb का मान होता है:


A.

कम

B.

अधिक  

C.

शून्य

D.

एक

Right Answer is: A

SOLUTION

pKb का मान जितना कम होता है, क्षार उतना प्रबल होता है।


Q. 159369 ऐमीन का निर्माण करने वाली अभिक्रिया है:


A.

गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण

B.

राइमर-टीमान अभिक्रिया

C.

ऐल्केनों का अमोनीअपघटन

D.

कार्बिलऐमीन अभिक्रिया

Right Answer is: A

SOLUTION

गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा प्राथमिक ऐमीन का निर्माण होता है। कार्बिलऐमीन अभिक्रिया द्वारा आइसोसायनाइड बनते हैं।  राइमर-टीमान अभिक्रिया एल्डिहाइड देती है।


Q. 159370 प्रबलतम क्षार है:


A.

ऐनिलीन

B.

2, 4, 6 ट्राइनाइट्रोऐनिलीन

C.

2, 4, 6 ट्राइमेथिलऐनिलीन

D.

N, N- डाइमेथिलब्यूटेनऐमीन

Right Answer is: C

SOLUTION

इलेक्ट्रॉन मुक्त करने वाले समूह (मेथिल) क्षारकीय प्राबल्य में वृद्धि करते हैं।


Q. 159371 एथिल ऐमीन का विरचन किया जा सकता है:


A.

एथिल आयोडाइड पर अमोनिया की अभिक्रिया द्वारा

B.

एथिल ऐल्कोहॉल पर अमोनिया की अभिक्रिया द्वारा

C.

एथिल आयोडाइड पर अमोनिया की अभिक्रिया द्वारा तथा एथिल ऐल्कोहॉल पर अमोनिया की अभिक्रिया द्वारा

D.

मेथिल ऐल्कोहॉल पर अमोनिया की अभिक्रिया द्वारा

Right Answer is: C

SOLUTION

एथिल ऐमीन के विरचन के लिए दोनों अभिक्रियाएँ अर्थात एथिल आयोडाइड पर अमोनिया की अभिक्रिया तथा एथिल ऐल्कोहॉल पर अमोनिया की अभिक्रिया उपयोग की जाती हैं।


Q. 159372 हिंसबर्ग अभिकर्मक की सहायता से प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों के मध्य अंतर कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

हम 'हिंसबर्ग परीक्षण' से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों को पृथक कर सकते हैं। जब ऐमीन, बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड के गर्म किए जाते है, तो निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:

(i) प्राथमिक ऐमीन मोनोऐल्किल बेंजीन सल्फोनैमाइड बनाते हैं, जो KOH में विलेय होता है।

(ii) द्वितीयक ऐमीन डाइऐल्किल बेंजीन सल्फोनैमाइड बनाते हैं, जो KOH में अविलेय होता है।

(iii) तृतीयक ऐमीन यह अभिक्रिया नहीं देते हैं।


Q. 159373 NO2 समूह को उभयदंती समूह क्यों कहा जाता है?
Right Answer is:

SOLUTION

नाइट्रो समूह दो भिन्न परमाणुओं अर्थात् O परमाणु तथा N परमाणु से जुड़ सकता है। अतः नाइट्रो समूह एक उभयदंती समूह है


Q. 159374 ढलवाँ लोहा, कच्चे लोहे से कैसे भिन्न होता है?
Right Answer is:

SOLUTION

कच्चे लोहे में 4% कार्बन होता है तथा इसे विभिन्न आकृतियों में आसानी से ढाला जा सकता है जबकि ढलवाँ लोहे में कार्बन की मात्रा कम होती है तथा यह अति कठोर और भंगुर होता है।


Q. 159375 ZnS तथा PbS अयस्कों को फेन प्लवन प्रक्रिया का उपयोग करके किसी मिश्रण से कैसे अलग किया जा सकता है?
Right Answer is:

SOLUTION

फेन प्लवन प्रक्रिया के दौरान अवनमक जैसे NaCN को टैंक में मिलाया जाता है। अवनमक चयनित रूप से ZnS को फेन में आने से रोकता है परंतु PbS को फेन में आने देता है और इस प्रकार फेन के साथ PbS को पृथक करने में सहायता करता है। 


Q. 159376 फेन प्लवन के दौरान संग्राही तथा फेन स्थायीकारी को मिलाने का क्या उद्देश्य होता है? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

फेन प्लवन प्रक्रिया के दौरान संग्राही जैसे चीड़ का तेल तथा वसा अम्ल खनिज कणों की अक्लेदनीयता बढ़ाने के लिए मिलाये जाते हैं तथा फेन स्थायीकारक जैसे क्रिसॉल, ऐनीलिन फेन को स्थायित्व प्रदान करते हैं।


Q. 159377 आयरन तथा कॉपर के एक-एक अयस्क का नाम तथा उनके रासायनिक सूत्र लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

आयरन का अयस्क हेमेटाइट-Fe2O3 है तथा कॉपर का अयस्क कॉपर पाइराइट CuFeS2 होता है।


Q. 159378 वात्या भट्टी में आयरन उत्पन्न करने के लिए आयरन ऑक्साइड के अपचयन में शामिल अभिक्रियाओं को लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:

C + O2  CO2

CaCO3 CaO + CO2

CO2+ C  CO

3Fe2O3 + CO Fe3O4 +CO2

Fe3O4 + CO 3FeO + CO2

FeO +CO Fe + CO2

FeO + C Fe + CO

CaO + SiO2 CaSiO3


Q. 159379 भर्जन एवं निस्तापन के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

भर्जन:
i) इसमें वायु की अनुपस्थिति में अयस्क को गर्म किया जाता है।
ii) इसका उपयोग सामान्यतः कार्बोनेट अयस्कों के लिए किया जाता है।

iii) अयस्क से नमी तथा कार्बनिक अशुद्धियाँ निकल जाती हैं।
निस्तापन:
i) अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है।
ii) इसका उपयोग सामान्यतः सल्फाइड अयस्कों के लिए किया जाता है।
iii) वाष्पशील अशुद्धियाँ ऑक्साइड के रूप में निकल जाती हैं।


Q. 159380 उपसहसंयोजक यौगिकों के वर्नर सिद्धांत के अनुसार:


A. उपसहसंयोजक यौगिकों की प्राथमिक संयोजकता आयननीय होती है

B. उपसहसंयोजक यौगिक की द्वितीयक संयोजकता आयननीय होती है

C. प्राथमिक संयोजकताएँ धनायनों द्वारा संतुष्ट होती हैं

D. द्वितीयक संयोजकताएँ धनायनों द्वारा संतुष्ट होती हैं

Right Answer is: A

SOLUTION

उपसहसंयोजक यौगिकों में धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएँ दर्शाती हैं- प्राथमिक एवं द्वितीयक। प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्य रूप से आयननीय होती हैं तथा ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। द्वितीयक संयोजकताएँ अन-आयननीय होती हैं। ये उदासीन अणुओं अथवा ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। द्वितीयक संयोजकता उपसहसंयोजन संख्या के बराबर होती है तथा इसका मान किसी धातु के लिए निश्चित होता है।


Q. 159381 किसी संकुल में केंद्रीय धातु परमाणु की उपसहसंयोजन संख्या ____________ के आधार पर निर्धारित की जाती है।


A. सिग्मा तथा पाइ-आबंधों दोनों से आबंधित धातु आयन के चारों ओर लिगन्डों की संख्या

B. पाइ-आबंधों से आबंधित धातु आयन के चारों ओर लिगन्डों की संख्या

C. उपसहसंयोजन-आबंधों से आबंधित धातु आयन के चारों ओर लिगन्डों की संख्या

D. धातु आयन से आबंधित केवल आयनिक लिगन्डों की संख्या

Right Answer is: C

SOLUTION

किसी संकुल में केंद्रीय धातु परमाणु की उपसहसंयोजक संख्या, उपसहसंयोजन-आबंधों से आबंधित धातु आयन के चारों ओर एकदंतुर लिगन्डों की संख्या के बराबर, द्विदंतुर लिगन्डों की संख्या की दोगुनी और इसी प्रकार अन्य लिगन्डों में होती है।


Q. 159382 कीलेट का निर्माण करने वाला लिगन्ड है:


A. एसीटेट

B. ऑक्सैलेट

C. सायनाइड

D. अमोनिया

Right Answer is: B

SOLUTION

ऑक्सैलेट आयन एक द्विदंतुर लिगन्ड है। यह अपने दो ऑक्सीजन परमाणुओं से दो उपसहसंयोजन आबंधों के निर्माण के द्वारा कीलेट बना सकता है।


Q. 159383 [Pt(NH3)3(Br)(NO2)Cl]Cl का IUPAC नाम है:


A. ट्राइऐम्मीनक्लोरोब्रोमोनाइट्रोप्लेटिनम

B. ट्राइऐम्मीनब्रोमोनाइट्रोक्लोरोप्लेटिनम

C. ट्राइऐम्मीनब्रोमोक्लोरोनाइट्रोप्लेटिनम (IV) क्लोराइड

D. ट्राइऐम्मीननाइट्रोक्लोरोब्रोमोप्लेटिनम

Right Answer is: C

SOLUTION

चूँकि क्लोरीन समन्वय मंडल के बाहर होता है, इसलिए संकुल में इसका नाम क्लोराइड लिखा जाता है। समन्वय मंडल के अन्दर लिगंडों का नाम अंग्रेजी के वर्ण माला के क्रमानुसार लिखा जाता है तथा प्लेटिनम की ऑक्सीकरण अवस्था IV है क्योंकि 3 लिगंडों पर एकल ऋणात्मक आवेश है।


Q. 159384 विल्किन्सन उत्प्रेरक में होती है:


A. चाँदी

B. रूथीनीयम धातु

C. रोडियम धातु

D. रीनीयम धातु

Right Answer is: C

SOLUTION

अनेक औद्योगिक प्रक्रमों में उपसहसंयोजक यौगिकों का उपयोग उत्प्रेरकों के रूप में किया जाता है। उदाहरणार्थ- विल्किन्सन उत्प्रेरक [(Ph3P)3RhCl] का उपयोग एल्कीनों के हाइड्रोजनन में किया जाता है।


Q. 159385 क्यूप्रामोनियम आयन का आकार होता है:


A.  चतुष्फलकीय

B.  त्रिकोणीय

C.  वर्ग समतलीय

D.  अष्टफलकीय

Right Answer is: C

SOLUTION

क्यूप्रामोनियम आयन में, केंद्रीय धातु Cu, dsp2 संकरित है। अतः इसका आकार वर्ग समतलीय होता है।


Q. 159386 सबसे स्थायी संकुल को चुनें ।


A. K2[Ni(EDTA)]

B. [Pt(en)2Cl2]

C. K3[Al(C2O4)3]

D. [Ag(NH3)2]Cl

Right Answer is: A

SOLUTION

K2[Ni(EDTA)] में वलयों की अधिकतम संख्या अर्थात् 6 होती है। जब एक लिगन्ड अपने दो या अधिक दाता परमाणुओं का प्रयोग एक ही धातु आयन से आबंधन के लिए करता है, तो यह कीलेट लिगन्ड कहलाता है। बृहत् कीलेशन वाला संकुल अधिक स्थायी होता है। इस प्रकार, 6 दाता परमाणुओं वाला K2[Ni(EDTA)] अधिक स्थायी होता है।    


Q. 159387 डाइएथिलीन ट्राइऐमीन (डाइईन) एक _______ है।


A. द्विदंतुर लिगन्ड  

B. त्रिदंतुर लिगन्ड  

C. चार दंतुर लिगन्ड

D. पाँच दंतुर लिगन्ड

Right Answer is: B

SOLUTION

डाइएथिलीन ट्राइऐमीन (डाइईन) एक त्रिदंतुर लिगन्ड  है। इसमें तीन एमिनो समूह होते हैं जिनमें से तीन नाइट्रोजन परमाणु होते हैं जो प्रत्येक एक एकाकी-युग्म दान करते हैं तथा तीन उपसहसंयोजन आबंध का निर्माण करते हैं।  


Q. 159388 [Ni(C2O4)(en)2]2- में केंद्रीय धातु आयन की उपसहसंयोजन संख्या होती है:


A. दो  

B. चार  

C. पाँच  

D. छह  

Right Answer is: D

SOLUTION

Ni एक ऑक्सैलेट आयन (द्विदंतुर लिगन्ड) तथा दो एथिलीनडाइऐमीन (द्विदंतुर लिगन्ड) से आबंधित होता है। द्विदंतुर लिगन्ड केंद्रीय धातु आयन में दो भिन्न स्थानों से जुड़े होते हैं। इस प्रकार 3 द्विदंतुर लिगन्ड वाले इस संकुल में Ni की उपसहसंयोजन संख्या 6 है।   


Q. 159389 क्यूप्रामोनियम सल्फेट में कॉपर की उपसहसंयोजन संख्या है:


A. 2

B. 4

C. 6

D. 8

Right Answer is: B

SOLUTION

क्यूप्रामोनियम  सल्फेट [Cu (NH3)4]SO4 है। चूँकि कॉपर चार एकदंतुर लिगन्ड से जुड़ा होता है, इसलिए इस यौगिक में कॉपर की उपसहसंयोजन संख्या चार है।


Q. 159390 त्सीगलर-नाटा उत्प्रेरक______धातु का एक कार्बधात्विक यौगिक है।


A. आयरन

B. जिर्कोनियम

C. टाइटेनियम

D. रोडियम

Right Answer is: C

SOLUTION

त्सीगलर–नाटा उत्प्रेरक R3Al + TiCl3 अथवा  TiCl4 है।


Q. 159391 [Co(NH3)6]Cl3, में सहसंयोजक आबंधों की संख्या है:


A. 3

B. 6

C. 9

D. 18

Right Answer is: D

SOLUTION

लिगन्ड के रूप में उपस्थित छह अमोनिया अणुओं  में सहसंयोजक आबंध के होते हैं। प्रत्येक अमोनिया अणु में 3 सहसंयोजक आबंध होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप इस यौगिक में 18 सहसंयोजक आबंध हैं।


Q. 159392 क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन __________पर निर्भर करता है।


A. लिगन्ड के आवेश

B. उपसहसंयोजन संख्या

C. धातु परमाणु पर लिगन्ड एवं आवेश से उत्पन्न क्षेत्र

D. धातु परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या

Right Answer is: C

SOLUTION

क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत एक स्थिर वैद्युत मॉडल है जिसके अनुसार धातु-लिगन्ड आबंध आयनिक होते हैं, जो केवल धातु आयन तथा लिगन्ड के मध्य स्थिरवैद्युत अन्योन्य क्रियाओं द्वारा उत्पन्न होते हैं। क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन धातु पर आवेश तथा लिगन्ड द्वारा उत्पन्न क्षेत्र पर निर्भर करता है।


Q. 159393 ज्यामितीय तथा ध्रुवण समावयवता प्रदर्शित करने वाले संकुल का चुनाव करें।


A. [Co(en)2Cl2]+

B. [Co(NH3)5Cl]2+

C. [Co(NH3)4Cl2]+

D. [Cr(ox)3]3-

Right Answer is: A

SOLUTION

ज्यामितीय समावयवता लिगन्डों की  भिन्न संभव व्यवस्थाओं के कारण होती है। इस व्यवहार के प्रमुख उदाहरण 4 एवं 6 उपसहसंयोजन संख्या वाले संकुलों में पाए जाते हैं। ध्रुवण समावयव दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, जो अध्यारोपित नहीं किए जा सकते हैं। [Co(en)2Cl2]+ दो प्रतिबिंब रूपों दक्षिण ध्रुवण घूर्णक और वाम ध्रुवण घूर्णक के रूप में होता है तथा यह समपक्ष एवं विपक्ष समावयवता दर्शाता है।      


Q. 159394 ज्वीटर आयन शब्द से आप क्या समझते हैं? ज्वीटर आयन का एक उदाहरण दीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

ज्वीटर आयन एक उदासीन अणु है, जो उस अणु में विभिन्न स्थानों पर धनात्मक एवं ऋणात्मक आवेश से युक्त होता है
उदाहरणार्थ – सल्फैनिलिक अम्ल


Q. 159395 क्या होता है जब डाइएजोनियम लवण को CuCl के HCl में विलयन से उपचारित किया जाता है? इस अभिक्रिया का नाम भी लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप क्लोरोबेन्जीन बनती है।

यह अभिक्रिया सैंडमायर अभिक्रिया कहलाती है।


Q. 159396 निम्नलिखित यौगिकों की संरचना लिखिए-
(i) ऐजोक्सीबेंजीन (ii) सल्फैनिलिक अम्ल (iii) पिक्रिक अम्ल
Right Answer is:

SOLUTION


Q. 159397 युग्मन अभिक्रिया की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड और फीनॉल की अभिक्रिया के दौरान फीनॉल अणु अपनी पैरा स्थिति से डाइएजोनियम लवण से युग्मित होकर p-हाइड्रॉक्सीऐजोबेंजीन बनाता है। इस प्रकार की अभिक्रिया को युग्मन अभिक्रिया कहते हैं।


Q. 159398 ऐमीनों के प्रमुख उपयोग लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

ऐमीनों के उपयोग निम्न हैं:

1. ये कार्बनिक संश्लेषणों में अभिकर्मकों के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
2. इनका उपयोग योगज के रूप में तथा वल्कनीकरण में किया जाता है।
3. इनका उपयोग फेनिल आइसोसाइनेट के विरचन के लिए किया जाता है।


Q. 159399 ऐमीनों के भौतिक गुणधर्म लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

ऐमीनों के भौतिक गुणधर्म निम्न हैं:
1. ऐमीन रंगहीन होते हैं परंतु लंबे समय तक वायु के संपर्क में रखने पर ये रंगीन हो जाते हैं।
2. ऐमीन के क्वथनांक अधिक होते है।

3. निम्नतर ऐलिफैटिक ऐमीन जल में विलेय होते हैं।


Q. 159400 (क) निम्नलिखित अभिक्रियाओं में A तथा B की पहचान कीजिए: (ख) ऐनिलीन का pKb मेथिलऐमीन की तुलना में अधिक होता है।
Right Answer is:

SOLUTION

(क)

(ख) ऐनिलीन में, N-परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युगल बेंजीन वलय पर विस्थानीकृत होता है। परिणामस्वरूप नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है। इसके विपरीत, CH3NH2 में CH3 के +I प्रभाव के कारण N-परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। इसलिए, ऐनिलीन, मेथिलऐमीन की तुलना में दुर्बल क्षार होता है और इसका pKb मान मेथिलऐमीन से अधिक होता है।


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