A. पर्ण कलिकाओं
B. कक्षीय कलिकाओं
C. भूमिगत तने।
D. भूमिगत जड़
प्रवर्धन की इस विधि में, मांसल पत्तियों के किनारों पर उपस्थित अपस्थानिक कलिकाओं से नए पौधे उत्पन्न होते हैं। ये कलिकाएँ ज़मीन पर गिर जाती हैं और नए पौधों के रूप में वृद्धि करने लगती हैं।
A. विखंडन द्वारा
B. खंडन द्वारा
C. मुकुलन द्वारा
D. कायिक प्रवर्धन द्वारा
विखंडन सबसे सामान्य प्रकार का अलैंगिक जनन है, जो मुख्य रूप से एक कोशिकीय जीवों जैसे मोनेरा और प्रोटिस्टा में संपन्न होता है।
A. लैंगिक जनन
B. अनिषेक जनन
C. खंडन
D. अनिषेक जनन
केले अनिषेकजनित होते हैं | वे बिना निषेचन के फल विकसित करते हैं |
A. कायिक प्रवर्धन
B. बहु विखंडन
C. बीजाणु निर्माण
D. खंडन
कायिक प्रवर्धन पौधों में अलैंगिक जनन के लिए प्रयुक्त होने वाला पारिभाषिक शब्द है। इस विधि में, किसी कायिक कोशिका से नए पौधे उत्पन्न होते हैं। कायिक प्रवर्धन में नए पौधे या तो भूमिगत तनों, भूपृष्ठीय तनों, आदि के द्वारा प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होते हैं, उदाहरण- जैस्मीन, गुलाब आदि |
A. आलू
B. अदरक
C. लिली
D. स्पाइडर पादप
कंद पर कक्षीय कलिकाओं से नए प्ररोह उत्पन्न होते हैं, जो पतले भूमिगत प्रकंदों के परिवर्धित अग्र भाग होते हैं। आलू के कंद में तना फूला हुआ होता है और आसंधि भागों को आँख (कलिका) कहा जाता है। प्रत्येक आँख में कक्षीय कलिकाएँ होती हैं, जो कंद को रोपने पर नए पौधों के रूप में विकसित हो जाती हैं।
A. कंद
B. अंतः भूस्तारी
C. उपरिभूस्तारी
D. प्रकंद
उपरिभूस्तारी भूमि के ऊपर स्थित क्षैतिज तनों की पर्वसंधियों से उत्पन्न होते हैं। उदाहरण- स्ट्रॉबेरी
A. विखंडन
B. खंडन
C. मुकुलन
D. कायिक प्रवर्धन
विखंडन सबसे सामान्य प्रकार का अलैंगिक जनन है, जो मुख्य रूप से एक कोशिकीय जीवों जैसे मोनेरा और प्रोटिस्टा में संपन्न होता है। इस विधि द्वारा दो संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है।
A. कंद
B. अंतः भूस्तारी
C. शल्क कंद
D. प्रकंद
छोटे भूमिगत तनों पर कक्षीय कलिकाओं से नए शल्क कंद उत्पन्न होते हैं। इनमें तना बहुत छोटा और बिंब के समान होता है।
A. प्रकंद
B. घनकंद
C. अंतः भूस्तारी
D. कंद
घनकंद में, छोटे, मोटे और ऊर्ध्वाधर भूमिगत तनों पर कक्षीय कलिकाओं से नए पौधे उत्पन्न होते हैं।
A. 1
B. 2
C. 3
D. 4
लैंगिक जनन लिए एक मादा और एक नर जनक की आवश्यकता होती है। इसमें युग्मक के निर्माण और निषेचन की प्रक्रिया सम्मिलित होती है। प्रत्येक जनक आधे गुणसूत्रों का योगदान करता है।
युग्मनज अगली पीढ़ी का प्रारंभिक चरण है | जो माता-पिता के युग्मकों के संयुग्मन द्वारा निर्मित होता है। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले सभी जीवों में सर्वव्यापी होता है।
A. मुर्गी
B. सांप
C. रोहू
D. चूहा
चूहा एक सजीव प्रजक है | सही भ्रूणीय देखभाल और संरक्षण के कारण इनमें संततियों की उत्तरजीविता के अवसर बढ़ जाते हैं।
A. बीज
B. जड़ें
C. तने
D. पत्ते।
पुदीना एक जड़ी बूटी है जो उपरिभूस्तारी विधि के माध्यम से कायिक प्रवर्धन करता है| इस विधि में भूमि के ऊपर स्थित क्षैतिज तनों की पर्वसंधियों से नए पौधे उत्पन्न होते हैं।
ऑक्सीटॉसिन प्रसव प्रक्रिया में सहायक होता है, यह मजबूत गर्भाशय संकुचनों को प्रेरित करता है, जिससे शिशु माँ के गर्भाशय से जनन नाल के द्वारा निष्कासित हो जाता है।
भ्रूणीय विकास के प्रक्रम में लगभग 3 सप्ताह में, भ्रूण की ह्रदय की धड़कन को सुना जा सकता है।
B. एफ.एस.एच C. एल.एच D. एच.सी.एन.जी एच.पी.एल (ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन अर्थात मानव अपरा लैक्टजन) अपरा द्वारा स्रावित किया जाता है, यह स्तनपान के लिए स्तन ग्रंथियों के विकास को उद्दीपित करता है|
अपरा विकासशील भ्रूण को ऑक्सीजन तथा पोषण की आपूर्ति करता है| यह भ्रूण द्वारा निर्मुक्त कार्बन डाईऑक्साइड तथा उत्सर्जी पदार्थों को बहार निकालता है|
B. संभोग के बाद चौदहवें दिन C. निषेचन के बाद सातवें दिन D. निषेचन के बाद चौदहवें दिन अंतर्रोपण यानि इम्प्लांटेशन के दौरान, भ्रूण 32-कोशिका वाले चरण में गर्भाशय की दीवार से जुड़ा होता है| यह निषेचन के बाद सातवें दिन होता है|
B. युग्मनज, कोरक, तूतक C. कोरक, युग्मनज तूतक D. कोरक, तूतक, युग्मनज एक युग्मनज निरंतर विभाजन जिसे विदलन कहा जाता है के द्वारा पहले कोशिकाओं की एक गेंद - तूतक अर्थात मेरुला फिर द्रव से भरी कोशिकाओं का समूह कोरक अर्थात ब्लास्टुला का निर्माण करता है|
संभोग के परिणामस्वरुप शुक्राणु गर्भाशय में प्रवेश करते हैं और तैरते हुए अंडवाहिनी नली के संकीर्ण पथ (इस्थमस) तथा तुंबिका (एंपुला) के संधिस्थल तक पहुँचते हैं जहां निषेचन होता है।
B. एस्ट्रोजन C. प्रोजेस्टेरोन D. रेलैक्सिन प्रोजेस्टेरोन द्वारा अन्तः स्तर का पुनर्निर्माण और रखरखाव, अंतर्रोपण के लिए अन्तः स्तर को तैयार करना तथा सफल अंतर्रोपण के पश्चात गर्भावस्था की निरन्तरता नियंत्रित की जाती है|
आर्तव चक्र अर्थात मेन्सट्रूअल साइकिल के दौरान एक माह में एक ही द्वितीयक अंडक का निर्माण होता है| जो कि बाद में एक परिपक्व अंडाणु में परिवर्तित हो जाता है|
अन्डोत्सर्ग के उपरान्त ग्राफी पुटक एक पीले कोशिकाओं के समूह में परिवर्तित हो जाता है जिसे पीत पिंड अर्थात कार्पस ल्युटियम कहते हैं जो अंत में कार्पस एल्बीकेन्स बनाता है|
गोनैडोट्रापिन रिलीजिंग हार्मोन में वृद्धि अग्र पीयूष ग्रन्थि पर कार्य करती है तथा निम्न दो गोनैडोट्रापिनस के स्रावण को उद्दीपित करती है: पित पिंडकर तथा पुट कोददीपक हार्मोन|
B. पाली नलिकाएँ C. स्तन तुम्बिका D. स्तन ग्रन्थियाँ एक स्त्री में, अनेक स्तन वाहिनियाँ मिलकर एक स्तन तुम्बिका का निर्माण करती हैं, जो दुग्ध वाहिनी से जुड़ी होती है, जिससे दूध स्तन से बाहर निकलता है |
B. 23 C. 28 D. 14 मानव में निषेचन के दौरान, 23 गुणसूत्रों वाला एक अंडाणु 23 गुणसूत्रों वाले एक शुक्राणु से संलयन करता है, जिससे 46 गुणसूत्रों वाले एक युग्मनज का निर्माण होता है|
B. एल.एच तथा एफ़.एस.एच का स्रवण C. प्रोजेस्ट्रोन तथा एस्ट्रोजन का स्रवण D. एंड्रोजनस तथा ऐस्ट्रोजेन का स्रवण अधश्चेतक या हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित होने वाला गोनैडोट्रोपिन रिलीज़िंग होर्मोन (जीएनआरएच), पियूष ग्रंथि से एल.एच या ल्यूटिनाइजिंग होर्मोन तथा एफ़.एस.एच या फ़ॉलिकल स्टिमुलेटिंग होर्मोन के स्रवण को उद्दीप्त करता है |
बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ पुरस्थ ग्रंथि के भीतर स्थित होती हैं| ये मूत्रमार्ग की अम्लता को निष्क्रिय करने के लिए एक क्षारीय तरल उत्पादित करती हैं। ये स्खलन से पहले एक तरल पदार्थ स्रावित करती हैं, जो शिश्न के स्नेहन में सहायक होता है।
शुक्राणुजनन की प्रक्रिया को लिडीग कोशिकाओं द्वारा संश्लेषित तथा स्रावित किया जाता है|
शुक्राशय तरल में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक होर्मोन्स पाए जाते हैं, जो शुक्राणु कोशिकाओं को अंडाणु तक स्थानांतरित करने के लिए मादा गर्भाशय की मांसपेशियों को उत्तेजित करते हैं
B. शुक्रवाहिका C. पीयूष D. थाइरोइड पुरुष सहायक ग्रंथियाँ होती हैं- शुक्राशय, पुरस्थ ग्रंथि तथा काउपर की ग्रंथियाँ या बल्बोयुरेथ्रल ग्रंथियाँ |
B. टेस्टोस्टेरोन C. एस्ट्रोजन D. रेलैक्सिन वृषण नर जनन हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्रावण करते हैं और नर युग्मकों का उत्पादन अर्थात शुक्राणुजनन में सहायक होते हैं |
अर्धसूत्री विभाजन द्वारा स्त्री में अंडाणु और पुरुष में शुक्राणु उत्पादित होते हैं । ये कोशिकाएँ निषेचन के दौरान संलयित होकर युग्मनज का निर्माण करती हैं।
मैलामाइन-फॉर्मेल्डीहाइड बहुलक क्र. सं. योगज बहुलक संघनन बहुलक 1. ये बहुलक द्वि अथवा त्रि-आबंध युक्त एकलक अणुओं के पुनरावृत्त योग से बनते हैं। ये बहुलक दो भिन्न द्विक्रियात्मक अथवा त्रिक्रियात्मक एकलक इकाइयों के बीच पुनरावृत्त संघनन अभिक्रिया द्वारा बनते हैं। 2. उदाहरण: पॉलिथीन उदाहरण: नाइलॉन-6,6 सहबहुलकन वह बहुलकन प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक प्रकार एक एकलकों के मिश्रण का बहुलकन करने पर एक सहबहुलक बनता है। उदाहरण के लिए- 1, 3 ब्यूटाडाईन और स्टाइरीन का मिश्रण एक सहबहुलक बनाता है। प्राकृतिक रबर उच्च ताप पर नरम और निम्न ताप पर भंगुर होती है। इसमें उच्च जल अवशोषण क्षमता होती है। यह अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील और ऑक्सीकरण कर्मकों के प्रति प्रतिरोधी नहीं है। इन भौतिक गुणों में सुधार के लिए वल्कनीकरण की प्रक्रिया की जाती है। इसमें 373 K से K ताप परास के बीच अपरिष्कृत रबर को सल्फर के साथ गरम किया जाता है। वल्कनीकरण से, द्विबंधों की अभिक्रियाशीलता स्थितियों पर सल्फर तिर्यक बंध बनाता है और इस प्रकार रबर कठोर हो जाती है। नाइलॉन-6, उच्च ताप पर जल के साथ कैप्रोलैक्टम को गरम करके प्राप्त किया जाता है। 1. नाइलॉन-6 का उपयोग टायर बनाने में किया जाता है। 2. नायलॉन -6 का उपयोग पर्वतारोहण की रस्सियों के निर्माण के लिए किया जाता है। संरचना के आधार पर बहुलक तीन विभिन्न प्रकार के होते हैं: (1) रैखिक बहुलक: इन बहुलकों में लंबी एवं रेखीय शृंखलाएँ होती हैं। उदाहरण: पॉलिथीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड आदि। (2) शाखित शृंखला बहुलक: इन बहुलकों में रेखीय शृंखलाओं में कुछ शाखाएँ होती हैं। उदाहरण: निम्न घनत्व पॉलिथीन (3) तिर्यकबंधित बहुलक: यह सामान्यतः द्विक्रियात्मक और त्रिक्रियात्मक एकलकों से बनते हैं तथा विभिन्न रेखीय बहुलक शृंखलाओं के बीच प्रबल सहसंयोजक बंध होते हैं। उदाहरण: बैकेलाइट, मैलामाइन आदि। (ख) इस बहुलक–[–CH2–CH(C6H5)–]–n का एकलक स्टाइरीन (CH2=CHC6H5) है। इसलिए यह स्टाइरीन का समबहुलक है। (ग) प्रोटीन एक प्राकृतिक बहुलक है। (घ) टेरिलीन बहुलक के दो एकलक एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल हैं। एनालजीन B. ऐस्पिरिन C. फेनासेटिन D. नेपरोक्सन ऐस्पिरिन में पीड़ाहारी तथा ऐंटीपायरेटिक दोनों के गुणधर्म होते हैं।
B. मैक्स प्लांक C. एलेक्जेंडर फ्लेमिंग D. डॉल्टन पेनिसिलिन पहला प्रतिजैविक है, जिसे एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने खोजा था।
B. बाइथायोनॉल C. बोरिक अम्ल D. आयोडोफ़ार्म बाइथायोनॉल एक पूतिरोधी है, जो जीवाणु अपघटन द्वारा उत्पन्न दुर्गंध को कम करने के लिए साबुन में मिलाया जाता है।
प्रतिअम्ल B. पीड़ाहारी C. निद्राजनक D. प्रतिअवसादक मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड एक प्रतिअम्ल है और यह पेट में अम्ल के आधिक्य को उदासीन करता है।
ज़ाइलिनॉल + टर्पीनिऑल B. क्लोरोज़ाइलिनॉल C. क्रीसॉल + एथेनॉल D. क्लोरोज़ाइलिनॉल डेटॉल क्लोरोज़ाइलिनॉल तथा टर्पीनिऑल का मिश्रण होता है।
औषध साबुन B. दाढ़ी बनाने का साबुन C. पारदर्शी साबुन D. पानी में तैरने वाले साबुन पारदर्शी साबुन, साबुन को एथेनॉल में घोलकर और फिर विलायक के आधिक्य को वाष्पित करके बनाए जाते हैं।
धनायनी अपमार्जक बनता है। B. ऋणायनी अपमार्जक बनता है। C. अनायनिक अपमार्जक बनता है। D. साबुन बनता है। जब स्टीऐरिक अम्ल, पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल के साथ अभिक्रिया करता है, तो अनायनिक अपमार्जक बनता है। अनायनिक अपमार्जकों की संरचना में कोई आयन नहीं होता है।
सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम क्लोराइड B. सेटिलटेट्रामेथिल अमोनियम ब्रोमाइड C. सेटिलटेट्रामेथिल अमोनियम क्लोराइड D. सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड यह केश कंडीशनिंग के अतिरिक्त जीवाणुनाशी के रूप में भी कार्य करता है।
ऐम्पिसिलिन B. पेनिसिलिन C. ल्यूमिनल D. सेलडेन सेलडेन प्रतिहिस्टैमिन का एक उदाहरण है। प्रतिहिस्टैमिन शरीर में मुक्त हिस्टैमिन के प्रमुख प्रभावों को समाप्त करती है तथा एलर्जी के कारणों को रोकती है।
B. पेनिसिलिन C. नॉरएथिनड्रान D. सोफ्रामाइसिन पेनिसिलिन एक संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक है। जो प्रधानतः ग्रैम -ग्राही अथवा ग्रैम-अग्राही जीवाणुओं की विरुद्ध प्रभावी होते हैं संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक कहलाते हैं।
B. पूतिरोधी C. संक्रमणहारी D. पीड़ाहारी डेटॉल एक पूतिरोधी है और यह क्लोरोज़ाइलिनॉल तथा टर्पीनिऑल का मिश्रण होता है।
एलिटेम B. ऐस्पार्टेम C. सुक्रालोस D. डल्सिन सुक्रालोस सुक्रोस का ट्राइक्लोरो व्युत्पन्न है। यह कैलोरी नहीं देता है।
B. चीनी C. विटामिन D. ऐस्पार्टेम परिरक्षक वह पदार्थ होते हैं, जो सूक्ष्मजीवों, खमीर तथा फंफूदी से खाद्य पदार्थों को बचाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। उदाहरणार्थ – चीनी, नमक आदि।
साबुन B. उत्प्रेरक C. शोधन अभिकर्मक D. झाग संश्लिष्ट अपमार्जक वह शोधन अभिकर्मक होते हैं जिनमें साबुन के सभी गुण होते हैं परंतु ये वास्तव में साबुन नहीं होते हैं।
B. C. D. ऋणायनी अपमार्जक दीर्घ शृंखला वाले ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सल्फोनेटित व्युत्पन्न होते हैं। संश्लिष्ट ऋणायनी अपमार्जकों में सामान्यतः -SO3Na समूह उपस्थित होता है।
इप्रोनाइज़िड B. क्लोरफेनिरामिन C. ओमेप्राजोल D. ऑफ्लोक्सासिन इप्रोनाइज़िड एक प्रतिअवसादक औषध है। प्रतिअवसादक औषधियाँ नॉरएड्रीनेलिन का निम्नीकरण उत्प्रेरित करने वाले एंजाइमों को संदमित करती हैं।
वसा अम्लों के कैल्सियम लवण B. वसा अम्लों के सोडियम लवण C. एस्टर D. वसा अम्लों के खनिज लवण सफाई के लिए प्रयोग किए जाने वाले साबुन, दीर्घ शृंखला वाले वसा-अम्लों के सोडियम अथवा पोटैशियम लवण होते हैं। उदाहरणार्थ- स्टिऐरिक, ओलीक तथा पामिटिक अम्ल। सोडियम लवण युक्त साबुन (अर्थात् वसा अम्लों के ग्लिसरिल एस्टर) सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन के साथ वसा अम्लों को गर्म करके बनाए जाते हैं।
आयोडोफार्म B. सोफ्रामाइसिन C. डेटॉल D. ऐस्पार्टेम ऐस्पार्टेम एक कृत्रिम मधुरक अभिकर्मक है जबकि डेटॉल, सोफ्रामाइसिन तथा आयोडोफार्म पूतिरोधी हैं।
क्लोरोज़ाइलिनॉल B. ऑफ्लोक्सासिन C. नॉरएथिनड्रान D. वैलियम नॉरएथिस्टेरोन (अथवा नॉरएथिनड्रान) एक अणु है, जिसका उपयोग जनन नियंत्रण औषधियों में किया जाता है। यह एक प्रोजेस्टोजेन है जिसका उपयोग पीड़ायुक्त मासिक धर्म, असामान्य अति रक्तस्राव, अनियमित मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति लक्षण, रुके हुए मासिक धर्म के उपचार के लिए किया जाता है।
एड्स B. मानसिक रोगों C. संक्रमण D. बुखार प्रशांतकों का उपयोग मानसिक बीमारियों के इलाज लिए किया जाता है। मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति में होने वाला एक मनोवैज्ञानिक अथवा व्यावहारिक परिवर्तन है, जो कि पीड़ा या अक्षमता का कारण बनता है।
ऐम्पिसिलिन B. पेनिसिलिन C. ल्यूमिनल D. पीड़ाहारी (एनैलजेसिक) शरीर के दर्द को कम करते हैं। 2- एसीटॉक्सीबेंज़ोइक अम्ल एक पीड़ाहारी है, जिसे सामान्यतः ऐस्पिरिन के रूप में जाना जाता है।
1. रैनिटिडीन 2. सिमेटिडीन : जब एक औषध एक से अधिक ग्राही स्थलों को प्रभावित करती है, तो यह दुष्प्रभाव का कारण बनती है। दूसरी ओर दवा की खुराक का भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि कुछ दवाओं की अधिक खुराक हानिकारक होती है। इसलिए सही दवा चुनने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। पूतिरोधी वे रसायन होते हैं, जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकने अथवा उनको मारने के लिए उपयोग किए जाते हैं लेकिन ये सजीव ऊतकों के लिए हानिकारक नहीं होते हैं। ऐल्कोहॉल तथा जल में आयोडीन का 2-3% विलयन, टिंक्चर आयोडीन कहलाता है। यह घावों के लिए पूतिरोधी के रूप में प्रयोग किया जाता है। (क) इक्वैनिल: प्रशांतक क) ऋणायनी अपमार्जक: (ख) धनायनी अपमार्जक: [CH3(CH2)16COO(CH2CH2O)nCH2CH2OH] मान लीजिए कुछ वसा अथवा तेल एक कपड़े की सतह पर लगा हुआ है। जब यह साबुन के विलयन के संपर्क में आता है, तो स्टिऐरेट आयन का जलविरागी भाग तेल की ओर होता है और जलरागी भाग तेल के बाहर की ओर होता है । चूँकि जलरागी भाग ध्रुवीय होता है, इसलिए यह तेल की बूंदों के चारो ओर उपस्थित जल अणुओं के साथ अंतः क्रिया करता है। परिणामस्वरुप तेल की बूँद कपड़े की सतह से निकल कर जल में गिरती हैं तथा आयनिक मिसेल का निर्माण करती हैं, जो जल के आधिक्य के साथ बह जाती हैं। (i) खाद्य परिरक्षक: वे रासायनिक पदार्थ, जो खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजीवों जैसे - जीवाणुओं, यीस्ट तथा कवक की वृद्धि के कारण होने वाली खराबी से बचाते हैं। (ii) जैव निम्नीकृत अपमार्जक: सीधी हाइड्रोकार्बन शृंखला वाले अपमार्जक सूक्ष्मजीवों से आसानी से अपघटित होते हैं। (iii) कृत्रिम मधुरक कर्मक : वे रासायनिक पदार्थ जो खाद्य पदार्थों को मीठा बनाने के लिए तथा उनकी महक तथा स्वाद को बढ़ाने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं कृत्रिम मधुरक कर्मक कहलाते है। (i) प्रशांतक: ऐसे रसायन जिसका उपयोग तनाव तथा छोटी या बड़ी मानसिक बीमारियों के उपचार में किया जाता है, प्रशांतक कहलाते है। उदाहरण- क्लोरडाइजेपॉक्साइड तथा मेप्रोबमेट आदि। (ii)प्रतिजननक्षमता औषध: ऐसे रसायन जिनका उपयोग गर्भाधान या निषेचन में अवरोध डालकर गर्भावस्था को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, प्रतिजननक्षमता औषध कहलाते हैं। उदाहरण- नॉरएथिनड्रान, माइफप्रिस्टॉन। (iii)प्रतिहिस्टैमिन: औषधियाँ, जो हिस्टैमिन के बनने को रोकती हैं, उन्हें प्रतिहिस्टैमिन कहा जाता है। क) ऐसे रसायन जिनका उपयोग तीव्र ज्वर में शरीर के तापमान को कम करने के लिए किया जाता है, ऐंटीपायरेटिक अथवा ज्वरनाशी कहलाते है। ख) औषधियों को निम्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है: ii. ऐन्टीपायरेटिक: तीव्र ज्वार में शरीर के तापमान को कम करता है। iv. प्रतिअवसादक : मनः स्थिति बदलने में सहायक होते हैं। 2. औषध प्रभाव 3. रासायनिक संरचना समान रासायनिक संरचना वाली औषधियों की समान भेषजगुणविज्ञानीय क्रियाशीलता हो सकती है। सभी सल्फोनेमाइडों के संरचनात्मक सूत्र समान होते हैं और उन सभी में जीवाणुरोधी गुण होते है। 4. लक्ष्य अणु औषध जैव अणुओं जैसे- कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, प्रोटीन तथा न्यूक्लीक अम्लों से अन्योन्यक्रिया करती है, जिन्हें लक्ष्य – अणु अथवा औषध – लक्ष्य कहते हैं। समान संरचनात्मक विशेषताओं वाली औषधों की लक्ष्यों पर क्रियाविधि समान हो सकती है। युग्मनज अगली पीढ़ी का प्रारंभिक चरण है | जो माता-पिता के युग्मकों के संयुग्मन द्वारा निर्मित होता है। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले सभी जीवों में सर्वव्यापी होता है।
B. युग्मनज का गठन। C. बीजाणुओं का अंकुरण। D. बीजाणुओं का विकास और गठन। बीजाणुजनन की प्रक्रिया बीजाणुधानी मे होती है | इस प्रक्रिया में बीजाणुधानी कोशिकाएं विभाजित होकर बीजाणु उत्पन्न करती हैं |
B. गन्ना C. सरसों D. मटर गन्ना एकबीजपत्री पादप है, इसके बीज में एक बीजपत्र होता है |
B. कशाभिका। C. वर्तिका D. युग्मकों निषेचन की प्रक्रिया के दौरान युग्मकों को परागनली द्वारा अंडाशय तक स्थानांतरित किया जाता है।
B. वर्तिकाग्र C. बीज D. पुष्पासन निषेचन के बाद स्ट्रॉबेरी का पुष्पासन गूदेदार या मांसल हो जाता है और फल में परिवर्तित हो जाता है। जिसको हम फल के रूप में खाते हैं|
B. मूंगफली C. सूरजमुखी D. मक्का गैर-एल्बुमिनसबीजों में कोई अवशिष्ट भ्रूणपोष नहीं होता क्योंकि भ्रूण के विकास के दौरान यह पूरी तरह से उपयोग हो जाता है। जैसे- मूंगफली| बाकी पादप एल्बुमिनस बीजों को उत्पादित करते हैं।
B. अरंडी C. नारियल D. लिची मटर के पौधे में, भ्रूण के विकास के दौरान भ्रूणपोष पूरी तरह उपयोग किया जाता है जबकि अन्य पौधों में यह परिपक्व बीज में बना रहता है।
B. पानी परागित C. पक्षी परागित D. कीट परागित किसी पुंकेसर के परागकोश से पराग कण का किसी स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र में स्थानांतरण/संचारण परागण कहलाता है। युक्का पुष्प मे परागण कीट के द्वारा होता है |
एकलिंगता वह स्थिति है जिसमें एकलिंगी पुष्प होते हैं| इस स्थिति में परानिषेचन अनिवार्य होता है।
B. एक सप्ताह C. 30 मिनिट D. 60 सेकंड गेहूं और चावल में, पराग 30 मिनट तक दिखाई देते है।
B. लीची C. काजू D. आर्किड ऑर्किड में एक से अधिक अंडप होते हैं जबकि आम, लिची और काजू प्रत्येक में एक-एक ही अंडप होता है।
ऑर्निथोफिलिस चमगादड़ द्वारा परागित पौधों को चिरॉपटेरोफिलिस पौधे कहते हैं| जल परागण, प्राणी परागण तथा वायु परागण| बाह्य दल पुंज: बाह्य दल सामान्यतः हरे होते हैं। कभी-कभी ये चमकीले रंग के होते हैं और इन्हें दलाभ कहा जाता है। कभी-कभी बाह्य दल पुंज के बाहर एक या एक से अधिक बाह्य चक्र होते हैं, जो अभिबाह्यदलपुंज कहलाते हैं। असंगजनन शब्द विंकलर ने वर्ष 1908 में प्रस्तुत किया था। असंगजनन जनन या प्रवर्धन की अलैंगिक विधि के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है, जिसमें भ्रूण का निर्माण और उसके बाद निषेचन सम्मिलित नहीं होता। अनिषेकबीजता में भ्रूण अभी भी जनन या प्रवर्धन का कारक होता है, लेकिन इसका निर्माण अर्धसूत्री विभाजन और युग्मक संलयन द्वारा नहीं होता। सामान्य लैंगिक चक्र को असंगजनन के विपरीत उभयमिश्रण कहा जाता है। पुमंग जायांग निषेचन युग्मकों के युग्मन की प्रक्रिया है। इसके परिणामस्वरूप द्विगुणित युग्मनज का निर्माण होता है।यह लैंगिक जनन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना है। प्रॉटिस्टा और मोनेरा में अलैंगिक जनन द्वारा संततिओं का निर्माण होता हैं| कवक में अलैंगिक जनन होता है | जंतुओं में अलैंगिक जनन के चार प्रकार निम्न हैं : अलैंगिक जनन जीवों में जनन की वह विधि है जिसमें संतति को उत्पन्न करने के लिए केवल एक जनक की आवश्यकता होती है। इसमें न तो युग्मक का निर्माण होता है और न ही निषेचन की प्रक्रिया होती है। इसके अंतर्गत संततियों में कोई विविधताएँ दिखाई नहीं देतीं, अतः इसके कारण कोई विकासमूलक परिवर्तन नहीं होते।
A. दुग्धस्रवण को उद्दीपित करता हैSOLUTION
A. 24 सप्ताह मेंSOLUTION
A. एच.पी.एलSOLUTION
Right Answer is: C
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A. संभोग के बाद चौदहवें दिनSOLUTION
A. युग्मनज, तूतक, कोरकSOLUTION
Right Answer is: A
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A. एंड्रोजनSOLUTION
Right Answer is: A
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A. अंडाणु मेंSOLUTION
A. पित पिंड तथा पुट कोददीपक हार्मोन स्रवणSOLUTION
A. कुपिकाएँSOLUTION
A. 46SOLUTION
A. एच.पी.एल तथा एच.सी.जी का स्रवणSOLUTION
A. प्रोजेस्ट्रोन के उद्दिपन्न मेंSOLUTION
A. अधिवृषण द्वाराSOLUTION
Right Answer is: C
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A. शुक्राशयSOLUTION
A. प्रोजेस्टेरोनSOLUTION
A. अंडाणु में समसूत्री विभाजन द्वाराSOLUTION
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SOLUTION
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उदाहरण: डेटॉल, सोफ्रामाइसिन आदि।
विसंक्रामी वे रसायन होते हैं जिनका उपयोग सूक्ष्म जीवों को मारने के लिए किया जाता है लेकिन ये सजीव ऊतकों के लिए हानिकारक होते हैं।
उदाहरण: फीनॉल, क्लोरीन आदि।SOLUTION
(क) इक्वैनिल
(ख) मॉर्फीन
(ग) माइफप्रिस्टन
(घ) आप्रेज़ोल
SOLUTION
(ख) मॉर्फीन: पीड़ाहारी
(ग) मिफेप्रिस्टोन: प्रतिजननक्षमता औषध
(घ) आप्रेज़ोल: प्रति-अम्ल
(क) ऋणायनी अपमार्जक
(ख) धनायनी अपमार्जक
(ग) अनायनिक अपमार्जक
SOLUTION
ऋणायनी अपर्माजक, दीर्घ शृंखला वाले ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सोडियम लवण होते हैं।
ये दो प्रकार के होते हैं:
i) सोडियम एल्किल सल्फेट: उदाहरण- सोडियम लॉराइल सल्फेट (C11H23CH2OSO3Na)
ii) सोडियम एल्किलबेंजीनसल्फोनेट: उदाहरण- सोडियम डोडेसिल बेंजीनसल्फोनेट
धनायनी अपमार्जक ऐमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड अथवा ब्रोमाइड ऋणायनों के साथ बने चतुष्क अमोनियम लवण होते हैं। उदाहरण: सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड
(ग) अनायनिक अपमार्जक:
ये ऐल्कोहॉल तथा वसीय अम्लों वाले उच्च आण्विक द्रव्यमान के एस्टर होते हैं। उदाहरण- पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल स्टिएरेटSOLUTION
(i) खाद्य परिरक्षक
(ii) जैव-निम्ननीकृत अपमार्जक
(iii) कृत्रिम मधुरक कर्मक
SOLUTION
उदाहरण – सोडियम बेंजोएट, नमक, चीनी इत्यादि।
उदाहरण: सोडियम लॉराइल सल्फेट आदि।
उदाहरण: ऐस्पार्टेम, सूक्रालोस आदि।
(ii) प्रतिजननक्षमता औषध
(iii) प्रतिहिस्टैमिन
SOLUTION
उदाहरण- ब्रोमफ़्रेनिरामिन और टरफेनाडीनSOLUTION
1. भेषजगुणविज्ञानीय प्रभाव:
i. पीड़ाहारी: पीड़ानाशक प्रभाव
iii. पूतिरोधी: सूक्ष्म जीवों को नष्ट करते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं।
हिस्टैमिन यौगिक के प्रभाव को सभी प्रतिहिस्टैमिन कम करते हैं, जो कोशिकाओं में विमोचित होती है और शरीर में एलर्जी अथवा सूजन का कारण बनती है।

SOLUTION
A. भ्रूण का गठन।SOLUTION
A. सेब SOLUTION
A. परागनलीSOLUTION
A. अंडाशय SOLUTION
A. गेहूंSOLUTION
A. मटरSOLUTION
A. हवा परागितSOLUTION
Right Answer is: A
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A. एक महीनाSOLUTION
A. आमSOLUTION
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