A. ट्यूबुलिन जीन का मानव कोशिकाओं में रूपांतरण ।
B. कोई भी रूपांतरित मानव हार्मोन।
C. कृत्रिम रूप से तैयार मानव इंसुलिन।
D. मानव कोशिकाओं में कृत्रिम विधि से एंटीबॉडी का बनना ।
ह्युमुलिन कृत्रिम रूप से संश्लेषित (पुनर्योगज) मानव इंसुलिन की ब्राण्ड का नाम है। इसे 1978 में जीनटेक द्वारा संश्लेषित किया गया था।
A. हर 24 घंटे में नवीनीकरण होता है ।
B. प्रयोग के अंत में नवीनीकरण होता है ।
C. एक विशिष्ट कोशिका घनत्व पर नवीनीकरण होता है ।
D. नवीनीकरण नहीं होता है ।
सतत् संवर्धन तंत्र में कोशिकाओं के गुणन के लिए, माध्यम का विशिष्ट कोशिका घनत्व पर नवीनीकरण होता है क्योँकि कोशिका घनत्व कोशिकीय विकास का एक बहुत अच्छा मापदण्ड है। इस दृष्टिकोण का उपयोग विशिष्ट कोशिका घनत्व को संवर्धन में बनाए रखने के लिए किया जाता है।
इस प्रतिक्रिया में, वांक्षित जीनों की कई अनुकृतियाँ “पात्रे ” में उपक्रामकों के दो सेट एवं एंजाइम DNA पॉलीमरेज का उपयोग करके संश्लेषित होती हैं ।
डी.एन.ए खंड को या तो पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया या सूक्ष्मजीव क्लोनिंग विधि द्वारा प्रवर्धित किया जाता है। प्रतिकृति का स्थल, गुणसूत्र अथवा प्लास्मिड में एक विशेष डी.एन.ए अनुक्रम है जहाँ डी.एन.ए प्रतिकृति का आरम्भ होता है। जैव प्रौद्योगिकी को विभिन्न उत्पादों और सेवाओं का उत्पादन करने के लिए, जीवित जीवों (या उनके अंगों) के औद्योगिक उपयोग के रूप में परिभाषित किया गया है। यह जीवविज्ञान और प्रौद्योगिकी का संयोजन है। उपक्रामक एक छोटा डी.एन.ए अनुक्रम है जो एक बड़े डी.एन.ए खंड के एक पूरक अनुक्रम पर जुड़ता है एवं डी.एन.ए प्रतिकृति के लिए प्रारंभिक बिंदु का कार्य करता है। डी.एन.ए पॉलीमरेज इसमें न्यूक्लियोटाइड्स को जोड़कर, अनुक्रम को बढ़ाता है और इस प्रकार एक उपक्रामक रज्जुक की आवश्यकता होती है। EFB का अर्थ यूरोपीय संघ जैव प्रौद्योगिकी (EFB) है |EFB द्वारा दी गई जैव प्रौद्योगिकी की परिभाषा इस प्रकार है: ‘नए उत्पादों तथा सेवाओं के लिए, प्राकृतिक विज्ञान व जीवों, उनकी कोशिकाओं व उनके अंग तथा आण्विक अनुरूपों का समायोजन है’। लैंगिक जनन, जीव की आनुवांशिक संरचना में विविधता के अवसर प्रदान करता है, जो जीवों के साथ-साथ जनसंख्या, मुख्य रूप से पर्यावरणीय तनाव में लाभदायक हो सकता है। चिपचिपे सिरों को परलम्बी भी कहा जाता है जो, द्वि-रज्जुक DNA अणु के छोरों पर अयुग्मित न्यूक्लियोटाइड का प्रसार होता है । यह जुड़े हुए न्यूक्लियोटाइड या रज्जुक हो सकते हैं या, 3' या 5' परलम्बी निर्मित कर सकते हैं चिपचिपे सिरों में अपने पूरक कटे हुए प्रतिरूप के साथ हाईड्रोजन आबंध बनाने की क्षमता होती है एवं ये DNA लाईगेज के कार्य में सहायता प्रदान करते हैं | जैल वैद्युत संचलन अणुओं के मिश्रण को विद्युत क्षेत्र के अंतर्गत, उनके आकार के आधार पर अलग करने की एक तकनीक है । DNA, RNA एवं प्रोटीन को इस प्रक्रिया का उपयोग करके अलग किये जा सकते हैं । छोटे अणुओं की तुलना में, बड़े अणुओं को सामान्यतः एग्रोस से बने मैट्रिक्स से गुजरने में अधिक समय लगता है । इसका उपयोग नमूनों के विश्लेषण और शुद्धिकरण (छोटे पैमाने पर) दोनों के लिए किया जा सकता है। विभिन्न विधियाँ हैं : अ) प्रतिरक्षात्मक कोशिकाओं का उपयोग: इनमें बाह्य कोशिकीय DNA को ग्रहण करने की क्षमता होती है। कोशिकाओं को कैल्शियम जैसे द्विसंयोजनों से उपचारित करके और ताप आघात द्वारा प्रतिरक्षा को प्रेरित किया जा सकता है। ब) सूक्ष्म अन्तःक्षेपण : कोशिका में संवाहक को प्रविष्ट करने के लिए एक सूक्ष्म सुई का उपयोग किया जाता है । स) जीन गन: बायोलिस्टिक कण वितरण प्रणाली में, संवाहक (एक सोने के कण पर लेपित) को परपोषी कोशिका में प्रविष्ट कराया जाता है, जो सामान्यतः पौधों की कोशिकाएँ होती हैं । अहानिकारक रोगजनकों का उपयोग: रोगजनक जो उग्र जीन से रहित होते हैं लेकिन परपोषी में पुनर्योगज DNA को स्थानांतरित करने की क्षमता रखते हैं। संवाहक एक जीव है जो स्वयं रोग उत्पन्न नहीं करता है, लेकिन रोग उत्पन्न करने वाले रोगजनकों के लिए वाहक के रूप में कार्य करता है। क्लोनिंग संवाहक एक छोटा DNA वाहक है जो बाहरी DNA खंड का वहन करता है। आनुवंशिक अभियांत्रिकी प्रयोगों के दौरान, इसका उपयोग वांछित जीन को परपोषी में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। क्लोनिंग संवाहक में खंड का प्रवेश उसी प्रतिबंध एंजाइम के साथ संवाहक और बाहरी डीएनए को उपचारित करके एवं फिर उन खंडों को एक साथ जोड़कर करके किया जाता है। कई प्रकार के क्लोनिंग संवाहक उपस्थित हैं। उदाहरण : प्लाज्मिड , जीवाणुभोजी (λ phage), कॉस्मिड, जीवाणु कृत्रिम गुणसूत्र (BAC), ;यीस्ट कृत्रिम गुणसूत्र (YAC) आदि . प्लाज्मिड ‘pBR322’ एक ई. कोलाई क्लोनिंग संवाहक है, जिसमें प्रतिबंधन स्थल (HindIII, EcoRI, BamHI, SalI, PvuII, PstI, ClaI), ori एवं एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन (ampR एवं tetR) उपस्थित हैं। जैव विविधता के तीन स्तर हैं- i. आनुवांशिक विविधता ii. जातीय विविधता iii. परिस्थितिकीय विविधता डोडो पक्षी विलुप्त प्रजाति का एक उदाहरण है | मानस राष्ट्रीय उद्यान आसाम में स्थित है| नहीं अ) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में लागू किया गया था। ब) इसका उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों में प्रतिबंधित गतिविधियों जैसे वन्य जीवों का शिकार, अवैध शिकार, वनों की कटाई आदि को सीमित करना था। जैव विविधता संरक्षण के कारण विवरण अल्प मान्य उपयोगिता जैव विविधता को इसके द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र को अनेक तरीकों से बनाये रखने के कारण संरक्षित किया जा चाहिए। नीतिपरक उपयोगिता जैवविविधता को संरक्षित किया जाना चाहिए क्यों कि पृथ्वी पर जीवित सभी प्रजातियों को जीने का बराबर अधिकार है। बहुव्यापी उपयोगिता जैवविविधता को मानव हित में अनेक लाभ उठाने के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। i. गलत, बहि:स्थाने संरक्षण प्राणी उद्यान की स्थापना के द्वारा किया जा सकता है। ii. गलत, नीलगिरी जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र तमिलनाडू में स्थित है। i. निम्न ताप परिरक्षण ii. कन्वेंशन ऑन बायोलोजिकल डाइवर्सिटी(CBD) iii. पवित्र वृक्ष iv. स्वस्थाने संरक्षण v. 2%से कम B. एसपीएम C. कार्बन के ऑक्साइड्स D. सल्फर के ऑक्साइड्स दिल्ली में प्रमुख पर्यावरणीय प्रदूषक कार्बन के ऑक्साइड्स है | औद्योगिक चिमनियों और वाहनों से अत्यधिक मात्रा में CO2 मुक्त होती है |
B. अजैवनिम्नीकरणीय प्रदूषक C. वायु प्रदूषक D. मृदा प्रदूषक अजैवनिम्नीकरणीय प्रदूषक वह पदार्थ हैं जो सूक्ष्मजीवों या अन्य जैविक प्रक्रियायों द्वारा अपघटित या खनिजीकृत नहीं हो सकते | परिणामस्वरूप अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ भूमि में एकत्रित होते जा रहे हैं जो पर्यवारण के लिए बढ़ता हुआ खतरा है |
B. लाल शैवाल C. जल-कुंभी D. जलीय कुमुद जल-कुंभी (ईकोर्निया क्रैसिपिस) दुनिया की सबसे समस्यात्मक जलीय खरपतवार है। ये सुपोषित जल निकायों में प्रचुर मात्रा में उगते हैं और विभिन्न जल उपयोगों में हस्तक्षेप करते हैं, स्थानीय जलीय वनस्पतियों और जीवों को विस्थापित करते हैं। जल-कुंभी का सूर्य के प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करके उसे विकास के लिए पूरी तरह से बाधित कर प्रभावित करता है । यह जल की सतह के निकट शाखाओं के रूप में फ़ैल कर वनस्पति की एक चादर का उत्पादन करती है |
ऊर्जा के लिए ईंधन के रूप में परमाणु ऊर्जा का उपयोग करने का एक नुकसान यह है कि यह रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न करता है | रेडियोधर्मी अपशिष्ट हमारे जीन पूल में गंभीर उत्परिवर्तन कर सकते हैं जिसके कारण कैंसर हो सकता है |
B. वनीकरण C. अल्ट्रावनीकरण D. पुनर्वनीकरण कृषि विस्तार के कारण दुनिया के उष्णकटिबंधीयवन एक संकेतिक दर से लुप्त होते जा रहे हैं। इसे वन उन्मूलन के रूप में जाना जाता है, जिससे स्थानीय पौधों और पशु प्रजातियों के विलुप्त होने के परिणामस्वरूप, ग्रीन हाउस गैसों में अतिवृद्धि होती है जो ग्लोबल वार्मिंग में योगदान देती है, मिट्टी के कटाव, सूखे और बाढ़ में वृद्धि होती है। पुनर्वनीकरण कार्यक्रम में वनों को संरक्षित किया जाता है और निम्नीकृत भूमि पर पेड़ लगाए जाते हैं, उस वन के प्राकृतिक वनस्पतियों और जीवों को पुनः स्थापित करने के प्रयास किए जाते हैं।
ग्रामीण आबादी के लिए वन भोजन, ईंधन और जीवनयापन के लिए चारा प्रदान करते हैं | चूंकि औद्योगिक आवश्यकता के लिए इन वनों की कटाई में वृद्धि हो रही थी, इसलिए भारतीय ग्रामीणों ने गांधीवादी तरीके से अपनी जीविका को बचाने के लिए इसका अहिंसक विरोध किया |पहला चिपको आन्दोलन अप्रैल 1973 में हुआ, जहाँ नेता और कार्यकर्त्ता मुख्य रूप से महिलाएं थी जबकि सुन्दरलाल बहुगुणा चिपको आन्दोलन के प्रमुख थे| उन्होंने चिपको नारा दिया –““पारिस्थिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है” ”
B. अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में पौधों और मछलियों की अत्याधिक वृद्धि लेकिन, उच्च तापमान के प्रति संवेदनशील वनस्पति और जीवों को हानि ऊष्मीय अपशिष्ट जल का प्राकृतिक जल निकायों में निष्कासन के प्रभाव के कारण पौधों की वृद्धि में कमी, उच्च तापमान के प्रति संवेदनशील वनस्पति और जीवों में कमी और विभिन्न सूक्ष्म जीवों में अत्यधिक वृद्धि होती है |
B. 1978. C. 1986. D. 1990. भारतीय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 में पारित किया गया| इसका लक्ष्य पर्यावरण (जिसमें जल, वायु, भूमि, मनुष्य, अन्य जीव-जंतु, पौधे, सूक्ष्मजीव और सम्पदा सम्मिलित है) का संरक्षण और इससे जुड़े हुए मुद्दों में सुधार करना है |
सहक्रिया तत्वों की परस्पर क्रिया है ,जिसमें संयुक्त उत्पादन का कुल प्रभाव व्यक्तिगत योगदान से अधिक होता है |
बायोरासायन ऑक्सीजन माँग (बीओडी) वह दर है जिस पर सूक्ष्मजीव जल या अपशिष्ट जल में उपलब्ध ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं जबकि विघटनयोग्य कार्बनिक पदार्थ को वायवीय स्थितियों में स्थिर करते हैं।
B. परजीविता C. सहजीविता D. परभक्षण ऑर्किड अधिपादप हैं, जो अन्य वृक्षों पर उगते हैं। इस प्रकार, वे अपने आवास के लिए अन्य जीव का उपयोग करते हैं। इस प्रकार की सह्भोजिता को परवासिता के रूप में जाना जाता है |
B. निम्न C. स्थिर D. परिवर्तनशील जन्म दर समष्टि घनत्व को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। यदि जन्म दर कम हो, तो समष्टि घनत्व भी कम होगा | यह विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है।
समष्टि में आकार परिवर्तन को परम समष्टि घनत्व के रूप में चित्रित किया जाता है, जो उस आवास की स्थितियों के विषय में जानकारी देता है। अतः समष्टि घनत्व, समष्टि वृद्धि को निर्धारित करता है।
B. सह्भोजिता C. परजीविता D. सहोपकारिता सहोपकारिता में, दोनों जीव लाभान्वित होते हैं। लाइकेन इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। लाइकेन एक कवक और शैवाल का साहचर्य हैं, जो एक साथ इतने करीब रहते हैं कि वे एक ही जीव के रूप में दिखाई देते हैं। लाइकेन के लिए भोजन का उत्पादन करने के लिए शैवाल प्रकाश संश्लेषण करता है और कवक घटक खनिजों के अवशोषण में मदद करता है और लाइकेन दोनों घटकों के लिए आश्रय प्रदान करता है।
अंतराजातीय स्पर्धा एक पारिस्थितिकी तंत्र में एक ही संसाधन (जैसे भोजन, प्रकाश, पोषक तत्व और स्थान) के लिए एक ही जाति के व्यष्टियों के बीच प्रतिस्पर्धा का एक विशेष रूप है।
B. आवास C. रेगिस्तान D. ध्रुवीय क्षेत्र आवास एक भौतिक परिरोध है, जिसमें जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) दोनों कारक शामिल हैं, जो उस आवास में रहने वाले जीव को प्रभावित करते हैं।
B. मृत्यु दर को C. उत्पादकता को D. जनन क्षमता को मृत्यु दर का अर्थ, समष्टि में मृत्यु के कारण व्यष्टियों की हानि है। यह प्रति इकाई समय में समष्टि के व्यष्टियों की मृत्यु की संख्या है।
भोजन, प्रकाश और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा एक ही आवास/निकेत में विकसित होने वाले व्यष्टियों के बीच सबसे गंभीर है क्योंकि सभी संसाधनों की मात्रा उनके बीच स्थिर और समान होती है।
B. परासरण नियमन C. स्वपोषण D. लवणन कुछ समुद्री जीव जैसे मोलस्क और मछली आसपास के जल की सांद्रता के अनुसार, अधिक जल ग्रहण करके या इसे निकालकर अपने शरीर के तरल की परासरण सांद्रता को बदल सकते हैं। इस प्रक्रिया को परासरण नियमन कहते हैं |
B. जन्म दर मृत्यु दर से कम हो। C. जन्म दर शून्य के बराबर और अधिक हो । D. जन्म दर मृत्यु दर के बराबर हो। जब मृत्युओं की संख्या जन्म की संख्या के बराबर होती है, तो समष्टि घनत्व लगभग स्थिर रहता है।
B. सह्भोजिता C. परभक्षण D. सहजीविता परजीविता और परभक्षण दोनों में केवल एक जाति को लाभ होता है और पारस्परिक क्रिया दूसरी जाति के लिए हानिकारक होती है |
B. N t = N t+1 + [(B + I) – (D – E)] C. N t+1 = N t + [(B + E) – (D – I)] D. N t+1 = N t + [(B + I) + (D – E)] यदि N एक समय पर समष्टि घनत्व है; तो समय (t + 1) पर समष्टि घनत्व को अभिव्यक्त किया जा सकता है:
N t+1 = N t + [(B + I) – (D – E)]
जहाँ,
N= समष्टि घनत्व
B= मृत्यु दर
D= जन्म दर
I= अप्रवासन
E= प्रवासन
B. 800 C पर C. 900 C पर D. 1000 C पर चरम थर्मोफिल्स की झिल्ली में प्रोटीन पाए जाते हैं, जो 1000 C तापमान पर स्थिर होते हैं।
B. स्टेनोथर्मल। C. पैराथर्मल। D. हाइपोथर्मल। जीव, जो तापमान की एक संकीर्ण सीमा में जीवित रहने के लिए प्रतिबंधित हैं, उन्हें स्टेथोथर्मल के रूप में जाना जाता है। इनमें विशिष्ट भौगोलिक वितरण पाया जाता है। इस श्रेणी में अधिकांश जीव जैसे मनुष्य, पेंगुइन, अधिकांश स्तनधारी और प्राइमेट आदि आते हैं।
मेंढक और अन्य सरीसृप ठंडे रक्त वाले जीव होते हैं। बदलते तापमान में समायोजित होने के लिए उनके शरीर का तापमान बदल जाता है। उन्हें बाह्योष्मी के रूप में भी जाना जाता है।
B. सह्भोजिता द्वारा C. परजीविता द्वारा D. सहोपकारिता द्वारा परभक्षी अप्रत्यक्ष रूप से जैव विविधता को बनाए रखते हैं। यदि परभक्षण न हो तो शिकारों के बीच अंतर-जातीय स्पर्धा अधिक सक्रिय हो जाएगी और इसके परिणामस्वरूप उनमें से कुछ विलुप्त भी हो सकते हैं ।
B. वसा की परत C. सेलूलोज़ की परत D. विशिष्ट हार्मोन ध्रुवीय पक्षियों की त्वचा के नीचे वसा की एक परत होती है जिसे ब्लब्बर कहते हैं | यह एक कंबल के रूप में कार्य करती है। उनके शरीर का तापमान कभी भी एक निश्चित स्तर से नीचे नहीं आता है और वे कभी भी अपने आसपास के तापमान से अधिक तापमान प्राप्त करने में सक्षम नहीं होते।
B. रेगिस्तान में रहने वाले । C. उच्च ऊंचाई पर जाने वाले । D. कम ऊंचाई पर जाने वाले । उच्च ऊंचाई पर जाने से प्रायः ‘तुंगता रोग’ नामक एक लक्षण उत्पन्न होता है। इसमें, व्यक्ति मितली, थकान और घबराहट का अनुभव करता है। जैसे ही शरीर कम ऑक्सीजन घनत्व का सामना करना शुरू कर देता है, लक्षण कुछ समय बाद गायब हो जाते हैं।
B. समष्टि का C. सहक्रियाशीलता का D. समुदाय का 'एक वृक्ष में सभी दीमक' समष्टि का एक उदाहरण है, जो एक सीमांकित भौगोलिक क्षेत्र में एक साथ रहने वाली समान जातियों के जीवों का एक समूह है।
B. पर्यावरण C. जीव विज्ञान D. वनस्पति विज्ञान पारिस्थितिकी विज्ञान की वह शाखा है, जो जीवों और उनके पर्यावरण के बीच पारस्परिक क्रियाओं के वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित है।
f-1 o f = If चूँकि a*b = निम्नतम {a, b} इसलिए: 2*1 = निम्नतम {2,1} = 1 3*1 = निम्नतम {3,1} = 1 4*1 = निम्नतम {4,1} = 1 5*1 = निम्नतम {5,1} = 1 इस प्रकार, ऊपर गणना की गई संक्रिया (*) की संक्रिया सारणी है: B. C. D.
B. C. D.
B. C. D.
B. C. D.
B. 3 C. 5 D. 9
B. 5 C. 6 D. 7
B. –x2 C. x D. x2
B. C. D.
B. C. D. 1
B. C. D.
B. 7 C. 5 D. 3
B. C. D.
B. tan3x C. tanx3 D. cos3x
B. cos3x C. sin x3 D. cos x3
B. 64 C. 24 D. 12
B. cos x C. sin x2 D. cos x2
B. cos x C. sin2 x D. cos2 x
B. IB C. f D. g
B. C. D. B. [0, 1] C. (0, 1] D. [0, 1)
B. C. D.
B. संक्रामक (transitive) C. सममित (symmetric) D. तुल्यता (equivalence) किसी तल में, यदि l1, l2 पर लंब (perpendicular) है, तो l2 भी l1 पर लंब है। अतः, R सममित है।
B. संक्रामक लेकिन स्वतुल्य नहीं और सममित नहीं C. सममित, लेकिन स्वतुल्य नहीं और संक्रामक नहीं D. न तो स्वतुल्य, न संक्रामक और न सममित
B. स्वतुल्य और संक्रामक (transitive) C. सममित और संक्रामक D. न तो सममित और न संक्रामक
B. f(c) + g(a) C. f(b) - g(b) D. f(d) - g(b) f(g(x)-g(f(x)) = a(cx + d) + b - {c(ax + b) + d} = ad + b - bc - d = (ad + b) - (bc + d) = f(d) - g(b)
B. आच्छादक, लेकिन एकैकी नहीं C. एकैकी और आच्छादक दोनों D. न तो एकैकी और न आच्छादक चूँकि f(x) = (x - 1)(x - 2)(x - 3) B. सममित, लेकिन संक्रामक नहीं C. संक्रामक लेकिन स्वतुल्य नहीं D. न तो सममित, और न संक्रामक यदि a, b का सह-अभाज्य (co-prime) है, तो b भी a का सह-अभाज्य है। इसलिए R एक सममित संबंध है| B. 7 C. 6 D. 13 दिया गया है: a*b=2a+b-3 B. संक्रामक (transitive) C. सममित (symmetric) नहीं D. एक फलन
B. -2 C. 0 D. 2
B. C. D.
B. C. D.
B. C. D.
B. C. D.
B. C. D.
B. x = 7, y = 5 और z = 9 C. x = 6, y = -1 और z = 4 D. x = 7, y = 2 और z = 4
B. a = 4, b = -3 और c = 1 C. a = -4, b = -3 और c = -1 D. a = 4, b = 3 और c = 1
A. mRNA से DNA की उत्पत्ति होती हैSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
i. आनुवांशिक विविधता क्या है?
ii. क्या होगा यदि जातियों में आनुवांशिक विविधता अधिक हो?
SOLUTION
ii. यदि जातियों के बीच आनुवांशिक विविधता अधिक हो तो कुछ जीवों में पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अनुकूलन की अद्भुत क्षमता होगीSOLUTION
SOLUTION
ii. वन्य जीव अभ्यारण्य और
iii. बायोलोजिकल हॉटस्पॉट
SOLUTION
जैव विविधता संरक्षण के कारण विवरण जैव विविधता को इसके द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र को अनेक तरीकों से बनाये रखने के कारण संरक्षित किया जा चाहिए। नीतिपरक उपयोगिता जैवविविधता को मानव हित में अनेक लाभ उठाने के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। SOLUTION
SOLUTION
iii. सही
iv. गलत, पवित्र वृक्ष स्थानीय लोगों द्वारा संरक्षित होते हैं।
v. सहीSOLUTION
A. नाइट्रेट्स के ऑक्साइड्सSOLUTION
A. जैवनिम्नीकरणीय प्रदूषकSOLUTION
A. सिंघाड़ाSOLUTION
A. वायु प्रदूषण उत्पन्न करता है SOLUTION
A. वनोन्मूलनSOLUTION
SOLUTION
A. उच्च तापमान के प्रति संवेदनशील जीवों की वृद्धि में कमी या कोई वृद्धि नही SOLUTION
A. 1969.SOLUTION
SOLUTION
A. 37oC पर जल में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा SOLUTION
A. सह्भोजिताSOLUTION
A. उच्चSOLUTION
Right Answer is: C
SOLUTION
A. स्पर्धाSOLUTION
A. अंतराजातीय स्पर्धाSOLUTION
A. निकेतSOLUTION
A. जन्म दर कोSOLUTION
SOLUTION
A. तनुतापीSOLUTION
A. जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो।SOLUTION
A. स्पर्धाSOLUTION
A. N t+1 = N t + [(B + I) – (D – E)]SOLUTION
A. 700 C परSOLUTION
A. यूरीथर्मल।SOLUTION
SOLUTION
A. परभक्षण द्वाराSOLUTION
A. ताप नियामकSOLUTION
A. महासागरों के पास रहने वाले ।SOLUTION
A. ऐस्टिवेशन काSOLUTION
A. पारिस्थितिकीSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
1*1 = निम्नतम {1,1} = 1
1*2 = निम्नतम {1,2} = 1
1*3 = निम्नतम {1,3} = 1
1*4 = निम्नतम {1,4} = 1
1*5 = निम्नतम {1,5} = 1
2*2 = निम्नतम {2,2} = 2
2*3 = निम्नतम {2,3} = 2
2*4 = निम्नतम {2,4} = 2
2*5 = निम्नतम {2,5} = 2
3*2 = निम्नतम {3,2} = 2
3*3 = निम्नतम {3,3} = 3
3*4 = निम्नतम {3,4} = 3
3*5 = निम्नतम {3,5} = 3
4*2 = निम्नतम {4,2} = 2
4*3 = निम्नतम {4,3} = 3
4*4 = निम्नतम {4,4} = 4
4*5 = निम्नतम {4,5} = 4
5*2 = निम्नतम {5,2} = 2
5*3 = निम्नतम {5,3} = 3
5*4 = निम्नतम {5,4} = 4
5*5 = निम्नतम {5,5} = 5
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. 1SOLUTION
A. 3SOLUTION
A. -xSOLUTION
A. SOLUTION
A.
SOLUTION
A. SOLUTION
A. 11SOLUTION
A. SOLUTION
A. sin3xSOLUTION
A. sin3xSOLUTION
A. 144SOLUTION
A. sin xSOLUTION
A. sin xSOLUTION
A. IASOLUTION
A. SOLUTION
A. (0, 1)SOLUTION
A. SOLUTION
A. स्वतुल्य (reflexive)SOLUTION
A. संक्रामक (transitive) और सममित (symmetric), लेकिन स्वतुल्य (reflexive) नहींSOLUTION
A. न स्वतुल्य (reflexive), न सममित (symmetric)SOLUTION
A. f(a) - g(c)SOLUTION
f: R → R है:
A. एकैकी (one-one), लेकिन आच्छादक (onto) नहींSOLUTION
f(1) = f(2) = f(3) = 0
f(x) एकैकी नहीं है।
प्रत्येक y ∈R, के लिए x∈ R
इस तरह है कि f(x) = y इसलिए f आच्छादक (onto) है।
A. स्वतुल्य (reflexive) और संक्रामक (transitive)SOLUTION
यदि a, b का सह-अभाज्य है और b, c का सह-अभाज्य है, तो a, c का सह-अभाज्य हो सकता है या नहीं हो सकता है।
2 और 3 सह-अभाज्य हैं तथा 3 और 4 सह-अभाज्य हैं, लेकिन 2 और 4 सह-अभाज्य नहीं हैं।
अतः, R एक सममित संबंध है, लेकिन संक्रामक संबंध नहीं है।
A. 12SOLUTION
3*4=2(3)+4-3
=6+4-3
=7
A. स्वतुल्य (reflexive)SOLUTION
A. -4SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. x = 6, y = 1 और z = 4SOLUTION
A. a = -4, b = 3 और c = -1