CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

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Q. 160501 Convert the following sentences into different degrees of comparison as mentioned below. (a) Platinum is a precious metal. (Into superlative degree) (b) King Solomon was a wise man. (Into superlative degree) (c) Lauren is faster than Sophia. (Into positive degree) (d) Bill Gates is the richest man in the world. (Into positive degree) (e) He has won the competition with highest number of marks. (Into positive degree)
Right Answer is:

SOLUTION

(a) Platinum is the most precious of all metals.

(b) King Solomon was the wisest of all men.

(c) Sophia is not as fast as Lauren.

(d) No one in the world is as rich as Bill Gates.

(e) No one in the competition has as high marks as him.


Q. 160502 Correct the following sentences. (a) Lead is more heavy than other metals. (b) He is the wisest of all other men. (c) Of the two evils, choose the least. (d) Samantha loves to eat sweeter dishes. (e) Abu Dhabi is a bigger city.
Right Answer is:

SOLUTION

(a) Lead is heavier than other metals.

(b) He is the wisest of all men.

(c) Of the two evils, choose the less.

(d) Samantha loves to eat sweet dishes.

(e) Abu Dhabi is a big city.


Q. 160503 Fill in the blanks with the correct degrees of comparison given below. [Better, faithful, richest, older, eldest] (a) Dogs are ______ animals. (b) Guacamole dip tastes ______than tartar sauce. (c) His father is ______ than his mother. (d) Sansa is the _____in the family. (e) Bill Gates is the ______ man in the world.
Right Answer is:

SOLUTION

 (a) Dogs are the most faithful animals.

(b) Guacamole dip tastes better than tartar sauce.

(c) His father is older than his mother.

(d) Sansa is the eldest in the family.

(e) Bill Gates is the richest man in the world.


Q. 160504 Choose the correct option to complete each sentences correctly: (a) My brother is five years _____ than me. (elder/older) (b) Which is the _____ of the two? (best/better) (c) We can’t go any ______ without a rest. (further/farther) (d) Sam’s painting is ________ to Ian’s. (superior to/superior than) (e) Solomon was wiser than all ______ men. (other/the)
Right Answer is:

SOLUTION

(a) My brother is five years older than me.

(b) Which is the better of the two?

(c) We can’t go any farther without a rest.

(d) Sam’s painting is superior to Ian’s.

(e) Solomon was wiser than all other men.


Q. 160505 ‘द मिथिकल मैसेकर एट मोहनजोदड़ो’ नामक किताब के लेखक थे -


A. अर्नेस्ट मैके

B. जी. एफ. डेल्स

C. जॉन मार्शल

D. आर. ई. एम. व्हीलर

Right Answer is: B

SOLUTION

1960 के दशक में, जॉर्ज डेल्स ने मोहनजोदड़ो में नरसंहार के सबूत पर सवाल उठाए| उन्होंने दिखाया कि उस स्थल में मिले ढाँचे उस युग के नहीं थे|


Q. 160506 भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के डायरेक्टर जनरल, जिसने हडप्पन सभ्यता का उत्खनन करने हेतु, यूनान में अपने कार्यों का अनुभव लाया, वह था -


A.

अलेक्जै़डर कनिंघम

B.

हारग्रीव्स

C.

जेम्स बुर्गेस

D.

जॉन मार्शल

Right Answer is: D

SOLUTION

सिन्धु घाटी में उत्खनन शुरू करने से पूर्व, जॉन मार्शल ने यूनान व क्रीट में पुरातत्वेत्ता का काम किया था| उन्होंने वहाँ के कार्यानुभव का उपयोग सिन्धु घाटी में में उत्खनन के दौरान किया|


Q. 160507 चन्हुदड़ो में, हडप्पावासियों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण उद्योग था -


A.

मनके बनाना

B. ईंट बनाना

C. हथकरघा

D. जहाज निर्माण

Right Answer is: A

SOLUTION

चन्हुदडो एक महत्वपूर्ण बस्ती थी, जो लगभग पूरी तरह से शिल्प-उत्पादन में संलग्न थी। शिल्प कार्यांे में मनके बनाना, शंख की कटाई, धातुकर्म, मुहर निर्माण तथा बाट बनाना सम्मिलित थे।


Q. 160508 मेसोपोटामिया के लेख मेलुहा के साथ संपर्क के बारे में बताते हैं, जिसकी पहचान इस क्षेत्र से की गई है -


A.

बहरीन द्वीप

B.

ओमान

C.

हडप्पा क्षेत्र

D.

जापान द्वीप

Right Answer is: C

SOLUTION

रासायनिक विश्लेषण दर्शाते हैं कि ओमानी ताँबे तथा हड़प्पाई पुरावस्तुओं, दोनों में निकल के अंश मिले हैं, जो दोनों के साझा उद्भव की ओर संवेफत करते हैं।


Q. 160509 तीसरे सहस्राब्दि ईसा पूर्व में मेसोपोटामिया के लेख, इस क्षेत्र से ताँबा की आपूर्ति का विवरण करते हैं -


A.

दिलमुन

B.

खेतड़ी

C.

मगान

D.

मेलुहा

Right Answer is: C

SOLUTION

तीसरी सहस्राब्दि ईसा पूर्व में दिनांकित मेसोपोटामिया के लेखों में मगान जो संभवतः ओमान के लिए प्रयुक्त नाम था, नामक क्षेत्रा से ताँबे के आगमन के संदर्भ मिलते हैं।


Q. 160510 छेद करने के विशेष उपकरण, हाल ही में, इस स्थल से प्राप्त हुए हैं -


A.

लोथल

B.

राखीगढ़ी

C.

धौलावीरा

D.

हडप्पा

Right Answer is: C

SOLUTION

मनके बनाने की तकनीकों में प्रयुक्त पदार्थ के अनुसार भिन्नताएँ थीं। पत्थर के पिंडों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोड़ा जाता था, और फिर बारीकी से शल्क निकाल कर इन्हें अंतिम रूप दिया जाता था। घिसाई, पाॅलिश और इनमें छेद करने के साथ ही यह प्रक्रिया पूरी होती थी। चन्हुदड़ो, लोथल और, हाल ही में, धौलावीरा से छेद करने के विशेष उपकरण मिले हैं।


Q. 160511 अधिकांश विकसित हड्प्प्न स्थल, जैसे चोलिस्तान को, लगभग इस समय तक, त्याग किया गया था-


A. 1500 ईसा पूर्व

B. 1600 ईसा पूर्व

C. 1700 ईसा पूर्व

D. 1800 ईसा पूर्व

Right Answer is: D

SOLUTION

विकसित हड्प्प्न चरण के दौरान इस सभ्यता का शेहरी कल था, जब समृद्ध हड्प्प्न शहरों का विकास हुआ| इसके बाद उत्तर हड्प्पा हुआ, जहाँ की संस्कृति एक ग्रामीण जीवनशैली की थी|


Q. 160512 पुरातत्विदों को गणेश्वर-जोधपुर संस्कृति के साक्ष्य यहाँ मिले हैं -


A. अफ़ग़ानिस्तान

B. गुजरात

C. पंजाब

D. राजस्थान

Right Answer is: D

SOLUTION

गणेश्वर-जोधपुर संस्कृति का सटीक स्थान राजस्थान के खेतड़ी क्षेत्र में है| पुरातत्विदों के अनुसार, यहाँ के मृदभाण्ड हडप्पा के मृदभाण्डों से भिन्न थे, और ताम्बे की वस्तुओं की असाधारण संपदा थी|


Q. 160513 चन्हुदड़ो और लोथल से तैयार मनके इन शहरों तक लाया जाता था -


A. चोलिस्तान और बनावली

B. धौलावीरा और लोथल

C. मोहनजोदड़ो और हडप्पा

D. नागेश्वर और बालाकोट

Right Answer is: C

SOLUTION

मोहनजोदड़ो और हडप्पा विशाल बस्तियाँ थी| फयाँन्स से बने लघुपात्र, जो संभवतः सुगंधित द्रव्यों के पात्रों के रूप में प्रयुक्त होते थे, अधिकांशतः मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से मिले हैं।


Q. 160514 मानचित्र में मथुरा, कन्नौज, सोपारा, विदिशा, राजगृह को दर्शाइये।
Right Answer is:

SOLUTION


Q. 160515 मानचित्र पर अशोक स्तंभ शिलालेख के 5 महत्वपूर्ण स्थलों को नामांकित कीजिए।


Right Answer is:

SOLUTION


Q. 160516 मानचित्र में मगध, वज्जी, अवन्ति, गांधार एवं चेदी महाजनपद को दर्शाइये।
Right Answer is:

SOLUTION


Q. 160517 जेम्स प्रिंसेप द्वारा किया गया महत्वपूर्ण योगदान क्या था, उन्होने भारतीय इतिहास के बेहतर बोध की दिशा में किस प्रकार सहायता की थी?
Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय अभिलेख विज्ञान में एक उल्लेखनीय प्रगति 1830 के दशक में हुई, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का अर्थ निकाला। इन लिपियों का उपयोग सबसे आरंभिक अभिलेखों और सिक्कों में किया गया है। प्रिंसेप को पता चला कि अधिकारी अभिलेखों और सिक्कों पर पियदस्सी, यानी मनोहर मुखाकृति वाले राजा का नाम लिखा है। कुछ अभिलेखों पर राजा का नाम अशोक भी लिखा है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक सर्वाधिक प्रसिद्ध शासकों में से एक था। इस शोध् से आरंभिक भारत के राजनीतिक इतिहास के अध्ययन को नयी दिशा मिली, क्योंकि भारतीय और यूरोपीय विद्वानों ने उपमहाद्वीप पर शासन करने वाले प्रमुख राजवंशों की वंशावलियों की पुनर्रचना के लिए विभिन्न भाषाओं में लिखे अभिलेखों और ग्रन्थों का उपयोग किया। परिणामस्वरूप बीसवीं सदी के आरंभिक दशकों तक उपमहाद्वीप के राजनीतिक इतिहास का एक सामान्य चित्र तैयार हो गया। उसके बाद विद्वानों ने अपना ध्यान राजनीतिक इतिहास के संदर्भ की ओर लगाया और यह छानबीन करने की कोशिश की कि क्या राजनीतिक परिवर्तनों और आर्थिक तथा सामाजिक विकासों के बीच कोई संबंध् था।


Q. 160518 खरोष्टी लिपि को कैसे पढ़ा गया था?
Right Answer is:

SOLUTION

खरोष्टी लिपि, ब्राह्मी लिपि की समकालीन थी। यह 3 शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास दिखाई दी और 4 शताब्दी ईस्वी तक इसका उत्तर पश्चिमी भारत और मध्य एशिया में प्रयोग किया गया था। इसे आड़ी रेखाओं में दाईं से बाईं ओर लिखा जाता था। ब्राह्मी की तरह खरोष्टी प्राकृत बोलियों के लिए विकसित की गई थी । खरोष्टी लिपि का उत्तर पश्चिम में शिलालेख में इस्तेमाल किया जाता था। इस क्षेत्र पर शासन करने वाले इंडो-ग्रीक राजाओं के द्विभाषी सिक्कों ने उद्वाचन में सहायता की। सिक्कों में राजाओं के नाम यूनानी और खरोष्ठी में लिखे गए हैं । यूनानी भाषा पढ़ने वाले यूरोपीय विद्वानों ने अक्षरों का मेल किया। उन्होने प्रिंसेप के साथ खरोष्ठी में लिखे अभिलेखों की भाषा की पहचान प्राकृत के रूप में की थी इसलिए अशोक के शिलालेख में लंबे अभिलेखों को पढ़ना सरल हो गया जिनमें से कुछ एशियाई उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम से थे वो खरोष्टी लिपि में लिखे गए थे


Q. 160519 मौर्य साम्राज्य का प्रशासन किस तरह संचालित किया जाता था?
Right Answer is:

SOLUTION

मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्र थे, राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि। इन सबका उल्लेख अशोक के अभिलेखों में किया गया है। यदि हम इन अभिलेखों का परीक्षण करें तो पता चलता है कि आधुनिक पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत से लेकर आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और उत्तराखंड तक हर स्थान पर एक जैसे संदेश उत्कीर्ण किए गए थे। क्या इतने विशाल साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था समान रही होगी? इतिहासकार अब इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि ऐसा संभव नहीं था। साम्राज्य में शामिल क्षेत्रा बड़े विविध् और भिन्न-भिन्न प्रकार के थे: कहाँ अफगानिस्तान के पहाड़ी क्षेत्र और कहाँ उड़ीसा के तटवर्ती क्षेत्र।

यह संभव है कि सबसे प्रबल प्रशासनिक नियंत्रण साम्राज्य की राजधानी तथा उसके आसपास के प्रांतीय केन्द्रों पर रहा हो। इन केन्द्रों का चयन बड़े ध्यान से किया गया। तक्षशिला और उज्जयिनी दोनों लंबी दूरी वाले महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर स्थित थे जबकि सुवर्णगिरि (अर्थात् सोने के पहाड़) कर्नाटक में सोने की खदान के लिए उपयोगी था।

साम्राज्य के संचालन के लिए भूमि और नदियों दोनों मार्गों से आवागमन बना रहना अत्यंत आवश्यक था। राजधानी से प्रांतों तक जाने में कई सप्ताह या महीनों का समय लगता होगा। इसका अर्थ यह है कि यात्रियों के लिए खान-पान की व्यवस्था और उनकी सुरक्षा भी करनी पड़ती होगी। यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि सेना सुरक्षा का एक प्रमुख माध्यम रही होगी।

मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य (322 – 295 )ईसा पूर्व)के दरबार में यूनानी राजदूत मेगस्थनीज़ ने सैनिक गतिविधियों के  संचालन के लिए एक समिति और छः उपसमितियों का उल्लेख किया है। इनमें से एक का काम नौसेना का संचालन करना था, तो दूसरी यातायात और खान-पान का संचालन करती थी, तीसरी का काम पैदल सैनिकों का संचालन, चौथी का अश्वारोहियों, पाँचवीं का रथारोहियों तथा छठी का काम हाथियों का संचालन करना था। दूसरी उपसमिति का दायित्व विभिन्न प्रकार का था: उपकरणों के ढोने के लिए बैलगाडि़यों की व्यवस्था, सैनिकों के लिए भोजन और जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था करना तथा सैनिकों की देखभाल के लिए सेवकों और शिल्पकारों की नियुक्ति करना। अशोक (273 – 232) ईसा पूर्व , ने अपने साम्राज्य को अखंड बनाए रखने का प्रयास किया। ऐसा उन्होंने धम्म के प्रचार द्वारा भी किया। जैसा कि हमने अभी ऊपर पढ़ा, धम्म के सिद्धान्त बहुत ही साधारण और सार्वभौमिक थे। अशोक के अनुसार धम्म के माध्यम से लोगों का जीवन इस संसार में और इसके बाद के संसार में अच्छा रहेगा। धम्म के प्रचार के लिए धम्म महामात्त नाम से विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की गई।


Q. 160520 आम लोगों एवं राजा के मध्य क्या संबंध था?
Right Answer is:

SOLUTION

शिलालेख से राजाओं और उनकी जनता के मध्य संबंध के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त नहीं होती है।वस्तुतः साधरण जनता द्वारा राजाओं के बारे में अपने विचारों और अनुभव के विवरण कम ही छोड़े गए हैं। फिर भी इतिहासकारों ने इसका निराकरण करने का प्रयास किया है।

उदाहरण के तौर पर, जातक और पंचतंत्र जैसे ग्रंथों में वर्णित कथाओं की समीक्षा करके  इतिहासकारों ने पता लगाया है कि इनमें से अनेक कथाओं के स्रोत मौखिक किस्से-कहानियाँ हैं जिन्हें बाद में लिपिबद्ध किया गया होगा।

जातक कथाएँ पहली सहस्राब्दि ई. के मध्य में पालि भाषा में लिखी गईं। गंदतिन्दु जातक नामक एक कहानी में बताया गया है कि एक कुटिल राजा की प्रजा किस प्रकार से दुखी रहती है। इन लोगों में वृद्ध महिलाएँ,पुरुष, किसान, पशुपालक, ग्रामीण बालक और यहाँ तक कि जानवर भी शामिल हैं। जब राजा अपनी पहचान बदल कर प्रजा के बीच में यह पता लगाने गया कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं तो एक-एक कर सबने अपने दुखों के लिए राजा को भला-बुरा कहा। उनकी शिकायत थी कि रात में डकैत उन पर हमला करते हैं तो दिन में कर इकठ्ठा करने वाले अधिकारी। ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए लोग अपने-अपने गाँव छोड़ कर जंगल में बस गए। जैसा कि इस कथा से पता चलता है कि राजा और प्रजा, विशेषकर ग्रामीण प्रजा, के बीच संबंध् तनावपूर्ण रहते थे, क्योंकि शासक अपने राजकोष को भरने के लिए बड़े-बड़े कर की माँग करते थे जिससे किसान खासतौर पर त्रस्त रहते थे। इस जातक कथा से पता चलता है कि इस संकट से बचने का एक उपाय जंगल की ओर भाग जाना होता था।

दूसरा, इसी बीच करों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए किसानों ने उपज बढ़ाने के और उपाए ढूँढ़ने शुरू किए। उपज बढ़ाने के लिए कईं नीतियाँ जैसे कि लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग, कुओं, तालाबों और कहीं-कहीं नहरों के माध्यम से सिंचाई करना आदि अपनाई गई । व्यक्तिगत लोगों और कृषक समुदायों ने मिलकर सिंचाई के साधन निर्मित किए। व्यक्तिगत तौर पर तालाबों, कुओं और नहरों जैसे  सिंचाई के साधन निर्मित करने वाले लोग प्रायः राजा या प्रभावशाली लोग थे जिन्होंने अपने इन कामों का उल्लेख अभिलेखों में भी करवाया।

यह उत्पादकता बढ़ाने के लिए खेती को बढ़ाने के प्रयासों के रूप में राज्य के संभावित समर्थन का संकेत हो सकता है जिसका अप्रत्यक्ष रूप से करों की बढ़ती मांग को पूरा करने हेतु राजस्व की बड़ी राशि एकत्र करने में इस्तेमाल किया जाता था, जिसकी निर्माण गतिविधियों और कृषि क्षेत्र में आगे निवेश करने के लिए राजा को आवश्यकता होती थी ।


Q. 160521 वि० एस० सुकथंकर और उनकी मंडली ने महाभारत के समालोचनात्मक संस्करण का प्रकाशन किया:


A. 16,000 पृष्ठों में

B. 15,000 पृष्ठों में

C. 14,000 पृष्ठों में

D. 13,000 पृष्ठों में

Right Answer is: D

SOLUTION

वि० एस० सुकथंकर ने 1919 में महाभारत के समालोचनात्मक संस्करण की परिकल्पना आरम्भ का दी| उनकी मंडली ने भिन्न प्रदेशों से भिन्न भाषाओँ में लिखी गयी महाभारत की पांडुलिपियों का संग्रह किया| वे चुने हुए छंदों पर ही कार्य करते थे, जो कि कई संस्करणों में एक समान थे| उन्होंने इन छंदों का प्रकाशन 13000 पृष्ठों में किया| यद्यपि इस कार्य के पूर्ण होने में 47 वर्ष लगे|


Q. 160522 पुरातत्ववेत्ता बी.बी. लाल ने मेरठ के हस्तिनापुर गाँव में उत्खनन किया :


A. 1955-56

B. 1953-54

C. 1952-5

D. 1951-52

Right Answer is: D

SOLUTION

बी.बी. लाल ने मेरठ (उ०प्र०) जिले के हस्तिनापुर नामक गाँव में उत्खनन किया| उन्हें यहाँ आबादी के पाँच स्तरों के साक्ष्य मिले थे, जिनमें से दूसरा और तीसरा स्तर हमारे लिए महत्वपूर्ण है|


Q. 160523 गोत्र के सबसे प्रमुख नियमों में से एक है


A. स्त्रियाँ विवाह के पश्चात भी पिता के गोत्र को ही बरकरार रखती थीं

Right Answer is: D

SOLUTION

प्रत्येक गोत्र एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था और उस गोत्र के सदस्य ऋषि के वंशज माने जाते थे| गोत्र का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि विवाह के पश्चात स्त्रियों को पिता के स्थान पर पति के गोत्र का माना जाता था|


Q. 160524 200 ईसा पूर्व और 200 ईसवी के मध्य, संगम साहित्य के साथ-साथ एक धार्मिक ग्रन्थ की रचना हुई थी:


A. रामायण

B. महाभारत

C. मनुस्मृति

D. पुराण

Right Answer is: C

SOLUTION

‘स्मृति’हिन्दू धर्म से संबंधित एक ग्रन्थ है| लगभग 500 ईसा पूर्व वेदों की रचना के बाद स्मृति का संग्रह रखने वाला साहित्य है| इनमें से सबसे प्रमुख ग्रन्थ मनुस्मृति था|


Q. 160525 गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन को बतायी गयी दो बुराइयां थीं:


A. बेईमानी और झूठ

B. लालच और क्रोध

C. हिंसा और छल

D. पेटूपन और झूठ

Right Answer is: B

SOLUTION

गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन को ललचा और क्रोध से दूर रहने की सलाह दी थी| ये बुराइयां एक व्यक्ति को उसकी उन्नतियों से दूर ले जाती हैं| इन दोनों बुराइयों को हराकर एक राजा पृथ्वी पर विजय पा सकता है|


Q. 160526 निम्न में से किस विवाह के प्रकार से कन्यादान उभर कर सामने आया?


A. अंतर्विवाह

B. बहिर्विवाह

C. बहुपत्नी प्रथा

D. बहुपति प्रथा

Right Answer is: B

SOLUTION

हिन्दू विवाह में कन्यादान (विवाह में कन्या की भेंट) अधिक मूल्यवान है| समकालीन और रूढ़िवादी के अनुसार, हिन्दू सिद्धांत यह कहता है कि अपनी कन्या को उसके पति के घर भेजना न केवल एक माता-पिताकी मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है, बल्कि उन्हें उनके पापों से भी मुक्त करता है|


Q. 160527 जनपद जहाँ पांडवों और कौरव भाइयों का निवास था:


A. शूरसेन

B. मल्ल

C. शाक्य

D. कुरु

Right Answer is: D

SOLUTION

कुरु उत्तरी लौह युग भारत का एक वैदिक आर्य आदिवासी संघ था, जो आधुनिक युग में दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शामिल हो गया है| यह मध्य वैदिक काल प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र था|


Q. 160528 लघु कथा ‘कुंती ओ निषादी’ की लेखिका हैं:


A. सुभद्रा कुमारी चौहान

B. महाश्वेता देवी

C. सरोजनी नायडू

D. महादेवी वर्मा

Right Answer is: B

SOLUTION

कम-से-कम तीन कहानियाँ ऎसी हैं, जिनका प्रारंभ वहां से होता है, जहाँ पर महाभारत के प्रसंग का अंत होता है| ये इस प्रकार से हैं- पंचकन्या, कुंती ओ निषाद और सौवाली| लघु कथा ‘कुंती ओ निषादी’ की लेखिकामहाश्वेता देवी हैं| ये बंगाल की एक उपन्यासकार हैं| यह कुंती (पांडवों की माता) की कहानी है और निषाद, जिसकी सास, पति और भाई एक दुर्घटना में मार दिय गए|


Q. 160529 हिन्दू धर्म में लोगों को उनके गोत्र के आधार पर वर्गीकृत किया गया :


A. लगभग 1300 ईसा पूर्व

B. लगभग1200 ईसा पूर्व

C. लगभग1100 ईसा पूर्व

D. लगभग1000 ईसा पूर्व

Right Answer is: D

SOLUTION

मुख्य रूप से ब्राह्मणों ने लोगों को उनके गोत्र के आधार पर वर्गीकृत किया था| प्रत्येक गोत्र एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था और उस गोत्र के सदस्य ऋषि के वंशज माने जाते थे|


Q. 160530 चरक और सुश्रुत संहिता विषय के ग्रन्थ थे:


A. अर्थशास्त्र

B. इतिहास

C. औषधि

D. राजनीति

Right Answer is: C

SOLUTION

चरक और सुश्रुत संहितालगभग 100 ईसवी से संबंधित हैं| इन पुस्तकों की रचना संस्कृत में की गयी है| चरक संहिता के लेखक महान ऋषि चरक हैं|


Q. 160531 वास्तव में, महाभारत रचना थी:


A. ब्राह्मण की

B. क्षत्रिय की

C. वैश्य की

D. शूद्र की

Right Answer is: B

SOLUTION

महाभारत की वास्तविक कहानी संभवतः भाट सारथी (सूत) ने रची थी, जो क्षत्रिय योद्धाओं के साथ युद्ध क्षेत्र में जाते थे और उनकी विजय व उपलब्धियों के बारे में कवितायें लिखते थे| इन रचनाओं का प्रेषण मौखिक रूप में हुआ|


Q. 160532 युद्ध के अवश्यंभावी होने से पूर्व, गांधारी ने अंतिम विनती की :


A. अर्जुन से

B. युधिष्ठिर से

C. दुर्योधन से

D. कृष्ण से

Right Answer is: C

SOLUTION

दुर्योधन गांधारी का ज्येष्ठ पुत्र था| जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध अवश्यंभावी हो गया, तो उसने दुर्योधन से इस लालच और क्रोध से दूर रहने की विनती की


Q. 160533 बौद्धों के वर्ण संबंधी रवैये को दर्शाता है :


A. मज्झिमनिकाय

B. अंगुत्तर निकाय

C. संयुत्त निकाय

D. दीघनिकाय

Right Answer is: A

SOLUTION

मज्झिमनिकाय में एक धनाढ्य शूद्र की कहानी है| यह कहानी एक राजाअवन्तिपुत्र और बुद्ध के अनुयायी कच्चन के बीच हुए संवाद का हिस्साहै। यह बौद्धों के वर्ण संबंधी रवैये को दर्शाती है|


Q. 160534 महाकाव्य क्या हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

महाकाव्य दीर्घ रचनाएँ हैं । महाकाव्यों में उत्कृष्ट रचनाओं में स्त्री-पुरुषों की वीरगाथाएँ तथा देवताओं से जुड़ी कथाएँ हैं।


Q. 160535 महाभारत के अनुसार, किस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध लड़ा गया था?

Right Answer is:

SOLUTION

यह युद्ध कुरु के सिंहासन और उनकी राजधानी हस्तिनापुर को नियंत्रित करने के लिए लड़ा गया था।


Q. 160536 वैदिक काल में आर्य लोगों द्वारा राजा को बलि देने के महत्त्व पर प्रकाश डालिए?
Right Answer is:

SOLUTION

यज्ञ के बाद जन की एक सभा होती थी सभा में सब लोग चुने गये। राजा को बधाई देते थे जन के लोग अपने घर से उसके लिए कुछ भेंट चढ़ाव लाते थे । कोई घी, गाय या सोने के जेवर देते थे । इस भेंट को आर्य लोग बलि कहते थे । राजा इन भेटों को जरुरत के अनुसार बाँट देता था


Q. 160537 वैदिकालीन यद्धों में राजा की क्या भूमिका थी?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिकालीन युद्धों में जन के सभी लोग मिलकर लड़ते थे । युद्ध की अगुवाई करने के लिए जन का राजा चुना जाता था   जन को युद्ध में विजय दिलाना राजा का काम था जन की सुरक्षा निश्चित करना भी उसका प्रमुख दायित्व था 


Q. 160538 आर्यों ने अपनी आवश्यकता पूर्ण करने के लिए किन व्यवसाय को अपनाया था ?
Right Answer is:

SOLUTION

आर्य लोग पहले पशुपालन करते थे ये लोग युद्ध से प्राप्त सम्पति पर ही हमेशा निर्भर रहते थे  आर्यों ने अपनी आवश्यकता पूर्ण करने के लिए कृषि पर ध्यान दिया और वे लोग नदियों के किनारे गेहूँ, धान, दाल तिलहन भी उगाने लगे थे


Q. 160539 वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डालिए ?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिक काल में घर में ही रहकर घरेलू कार्यों, संगीत नृत्य की शिक्षा प्राप्त करती थीं । यद्यपि महिलाओं की स्थिति पुरषों के बराबर नहीं थी किन्तु घर में उनका सम्मान था


Q. 160540 तमिल-संगम साहित्यिक संग्रह में क्या चित्रण किया गया है?
Right Answer is:

SOLUTION

तमिल भाषा के संगम साहित्यिक संग्रह में सामाजिक और आर्थिक संबंधों का अच्छा चित्रण है जो इस ओर इंगित करता है कि हालाँकि धनी और निर्धन के बीच विषमताएँ थीं, जिन लोगों का संसाधनों पर नियंत्रण था उनसे यह अपेक्षा की जाती थी कि वे मिल-बाँट कर उसका उपयोग करेंगे।

 


Q. 160541 मनुस्‍मृति के आधार पर पुरूषों के लिए संपत्ति अर्जन के कोई चार तरीके बताइए।
Right Answer is:

SOLUTION

क) विरासत से प्राप्त संपत्ति । ख) खोज द्वारा प्राप्त संपत्ति । ग) निवेश कार्य द्वारा खरीदी गई संपत्ति । घ) सज्जनों द्वारा भेट में प्राप्त संपत्ति । ड.) कार्य करके प्राप्त संपत्ति ।


Q. 160542 महाभारत कालीन स्त्रियों की विभिन्न समस्याएँ लिखिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

क) महाभारत काल में स्त्रियों की दशा निम्न थी । ।ख) बहुविवाह का प्रचलन था ।ग) अनैतिक वर्गीकरण । घ) समाज का नैतिक पतन ।


Q. 160543
मनुस्‍मृति के अनुसार स्त्रियाँ किस प्रकार धन प्राप्त कर सकती थीं?
Right Answer is:

SOLUTION

मनुस्मृति के अनुसार स्त्रियाँ निम्न छः तरीकों से धन प्राप्त कर सकती थीं- 1. वैवाहिक अग्नि के समक्ष मिली भेंट। 2. स्नेह के प्रतीक स्वरूप प्राप्त उपहार। 3. वधू गमन के समय प्राप्त धन। 4. माता-पिता, भाई द्वारा दिये गए उपहारों द्वारा। 5. परवर्ती काल में मिली भेंट।6. पति द्वारा प्रदान की गई भेंट।


Q. 160544 इतिहासकार किसी भी ग्रंथ की विषयवस्तु का इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल करते समय किन मुद्दों पर ध्यान देते हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

इतिहासकार किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय निम्नलिखित अनेक पहलुओं पर विचार करते हैं –

(1)वे इस बात का परीक्षण करते हैं कि ग्रंथ किस भाषा में लिखा गया: पालि, प्राकृत अथवा तमिल, जो आम लोगों द्वारा बोली जाती थी अथवा संस्कृत जो विशिष्ट रूप से पुरोहितों और खास वर्ग द्वारा प्रयोग में लाई जाती थी।

(2)इतिहासकार ग्रन्थ के प्रकार पर भी ध्यान देते हैं। क्या यह ग्रंथ ‘मंत्र’ थे जो अनुष्ठानकर्ताओं द्वारा पढ़े और उच्चारित किए जाते थे अथवा ये ‘कथा’ ग्रंथ थे जिन्हें लोग पढ़ और सुन सकते थे तथा दिलचस्प होने पर जिन्हें दुबारा सुनाया जा सकता था?

(3)इसके अलावा इतिहासकार लेखक के बारे में भी जानने का प्रयास करते हैं जिनके दृष्टिकोण और विचारों ने ग्रंथों को रूप दिया।

(4)इन ग्रंथों के श्रोताओं का भी इतिहासकार परीक्षण करते हैं क्योंकि लेखकों ने अपनी रचना करते समय श्रोताओं की अभिरुचि पर ध्यान दिया होगा।

(5)इतिहासकार ग्रंथ के संभावित संकलन/रचना काल और उसकी रचनाभूमि का भी विश्लेषण करते हैं। इन सब मुद्दों का जायजा लेने के बाद ही इतिहासकार किसी भी ग्रंथ की विषयवस्तु का इतिहास के पूनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल करते हैं।


Q. 160545 सुत्त पीटक में प्राप्त होने वाले बौद्ध मिथक में महासम्मत्त के महत्व को परिभाषित कीजिये?
Right Answer is:

SOLUTION

बुद्ध के समय में राजत्व के दैवीय उत्त्पत्ति होने का पौराणिक सिद्धान्त प्रचलित था। ऐसा माना जाता था कि युद्ध ने राजा द्वारा अपना नेतृत्व देने की अपरिहार्यता को जन्म दिया। लेकिन दीघ निकाय में दी गयी बौद्ध अवधारणा ने ब्राह्मण सिद्धांत के दैवीय उत्त्पत्ति के सिद्धांत का विरोध करते हुए समाज की एक वास्तविक राजनीतिक आवश्यकता को राजत्व की उत्पत्ति का कारण बतलाया है। सुत्त पिटक के अनुसार, चोरी और अन्य दोषों को रोकने के लिए विकास के एक निश्चित चरण पर, माँ प्रकृति द्वारा प्रदत चीजों को ग्रहण करने की जरूरत ने कभी भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर न्याय करने के लिए एक महान नेता की एक वास्तविक सामाजिक आवश्यकता को प्रेरित किया।इसलिए राजा का चुनाव एवं अनुमोदन लोगों (महासम्मत्त) द्वारा किया जाता था। करवह मूल्य था जो लोग राजा द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा के बदले उसे देते थे। यह इस बात को भी दर्शाता है कि राजत्व की संस्था सामाजिक आवश्यकता का तर्कसंगत परिणाम था।


Q. 160546 साहित्यिक महाकाव्य महाभारत की मूल का वर्णन कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

अपने मौजूदा स्वरूप में विशद महाकाव्य महाभारत में सामाजिक श्रेणियों और स्थितियों की एक विस्तृत श्रृंखला के चित्रण के साथ एक लाख से अधिक श्लोक हैं। साहित्यिक परंपरा में इस बृहत रचना के रचयिता ऋषि व्यास माने जाते हैं। महाभारत में अन्य किसी भी प्रमुख महाकाव्य की भाँति युद्धों, वनों, राजमहलों और बस्तियों का अत्यंत जीवंत चित्रण है।महाभारत की मूल कथा बांधवों के दो दलों (कौरव और पांडव) के बीच भूमि और सत्ता को लेकर हुए संघर्ष का चित्रण करती है। दोनों ही दल कुरु वंश से संबन्धित थे जिनका एक जनपद पर शासन था। यह संघर्ष एक युद्ध में परिणत हुआ जिसमें पांडव विजयी हुए। इनके उपरांत पितृवंशिक उत्तराधिकार को उद्घोषित किया गया।


Q. 160547 एक परिवार अथवा कुल की व्यापक संरचना को परिभाषित कीजिए ?
Right Answer is:

SOLUTION

हम बहुधा पारिवारिक जीवन को सहज ही स्वीकार कर लेते हैं। किन्तु आपने देखा होगा कि सभी परिवार एक जैसे नहीं होते: पारिवारिक जनों की गिनती, एक दूसरे से उनका रिश्ता और उनके क्रियाकलापों में भी भिन्नता होती है। कई बार एक ही परिवार के लोग भोजन और अन्य संसाधनों का आपस में मिल-बाँटकर इस्तेमाल करते हैं, एक साथ रहते और काम करते हैं और अनुष्ठानों को साथ ही संपादित करते हैं। परिवार एक बड़े समूह का हिस्सा होते हैं जिन्हें हम संबंधी कहते हैं। तकनीकी भाषा का इस्तेमाल करें तो हम संबंधियों को जाति समूह कह सकते हैं। पारिवारिक रिश्ते नैसर्गिकऔर रक्त संबंध माने जाते हैं किन्तु इन संबंधों की परिभाषा अलग-अलग तरीके से की जाती है। कुछ समाजों में भाई-बहन (चचेरे, मौसेरे आदि) से खून का रिश्ता माना जाता है किन्तु अन्य समाज ऐसा नहीं मानते। आरंभिक समाजों के संदर्भ में इतिहासकारों को विशिष्ट परिवारों के बारे में जानकारी आसानी से मिल जाती है किन्तु सामान्य लोगों के पारिवारिक सम्बन्धों को पुनर्निर्मित करना मुश्किल हो जाता है। इतिहासकार परिवार और बंधुता संबंधी विचारों का भी विश्लेषण करते हैं। इनका अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लोगों की सोच का पता चलता है। संभवतः इन विचारों ने लोगों के क्रियाकलापों को प्रभावित किया होगा। इसी तरह व्यवहार ने विचारों पर भी असर डाला होगा।


Q. 160548 शब्द 'जाति' को स्पष्ट कीजिए। किसी एक दस्तावेज का उल्लेख कीजिए जो इस तरह के समूहों के इतिहास का रिकॉर्ड रखता है ?
Right Answer is:

SOLUTION

ये जटिलताएँ समाज के वर्गीकरण के लिए शास्त्रों में प्रयुक्त एक और शब्द जाति से भी स्पष्ट होती हैं। ब्राह्मणीय सिद्धान्त में वर्ण की तरह जाति भी जन्म पर आधरित थी। किन्तु वर्ण जहाँ मात्रा चार थे वहीं जातियों की कोई निश्चित संख्या नहीं थी। वस्तुतः जहाँ कहीं भी ब्राह्मणीय व्यवस्था का नए समुदायों से आमना-सामना हुआ - उदाहरणतः जंगल में रहने वाले निषाद या फिर व्यावसायिक वर्ग जैसे सुवर्णकार, जिन्हें चार वर्णों वाली व्यवस्था में समाहित करना संभव नहीं था, उनका जाति में वर्गीकरण कर दिया गया। वे जातियाँ जो एक ही जीविका अथवा व्यवसाय से जुड़ी थीं उन्हें कभी-कभी श्रेणियों में भी संगठित किया जाता था।

संस्कृत के ग्रंथ और अभिलेखों में व्यापारियों के लिए वणिक शब्द प्रयुक्त किया जाता है। हालाँकि शास्त्रों में व्यापार को वैश्यों की जीविका बताया जाता है अन्य स्रोतों में अधिक जटिल परिस्थिति देखने को मिलती है। जैसे शूद्रक के नाटक मृच्छकटिकम् (लगभग चौथी शताब्दी ईसवी) में नायक चारुदत्त को ब्राह्मण-वणिक बताया गया है। पाँचवीं शताब्दी ईसवी के एक अभिलेख में दो भाइयों को क्षत्रिय-वणिक कहा गया है, जिन्होंने एक मंदिर के निर्माण के लिए धन दिया।

 

हालाँकि इन समुदायों के इतिहास का लेखा-जोखा हमें कम ही प्राप्त होता है, किन्तु कुछ अपवाद हैं जैसे कि मंदसौर (मध्य प्रदेश) से मिला अभिलेख (लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी)। इसमें रेशम के बुनकरों की एक श्रेणी का वर्णन मिलता है जो मूलतः लाट (गुजरात) प्रदेश के निवासी थे और वहाँ से मंदसौर चले गए थे, जिसे उस समय दशपुर के नाम से जाना जाता था। यह कठिन यात्रा उन्होंने अपने बच्चों और बांधवों के साथ संपन्न की। उन्होंने वहाँ के राजा की महानता के बारे में सुना था अतः वे उसके राज्य में बसना चाहते थे।

 

यह अभिलेख जटिल सामाजिक प्रक्रियाओं की झलक देता है तथा श्रेणियों के स्वरूप के विषय में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। हालाँकि श्रेणी की सदस्यता शिल्प में विशेषज्ञता पर निर्भर थी। कुछ सदस्य अन्य जीविका भी अपना लेते थे। इस अभिलेख से यह भी ज्ञात होता है कि सदस्य एक व्यवसाय के अतिरिक्त और चीजों में भी सहभागी होते थे। सामूहिक रूप से उन्होंने शिल्पकर्म से अर्जित धन को सूर्य देवता के सम्मान में मंदिर बनवाने पर खर्च किया।

मंदसोर शिलालेख से संस्कृत भाषा में रचित एक उद्वरण एक श्रेणी संगठन के विभिन्न सदस्यों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न व्यवसायों का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है: कुछ लोगों को संगीत से अत्यंत प्रेम है जो कानों को प्रिय होता है; अन्य को गर्व है सैकड़ों उत्तम जीवनियों (के रचयिता होने) का, इस तरह वे अनेक कथाओं से परिचित हैं। (अन्य) विनीत भाव से उत्तम धार्मिक व्याख्यानों में तल्लीन हैं... कुछ लोग अपने धार्मिक अनुष्ठानों में श्रेष्ठ हैं; इसी तरह अपने पर निग्रह रखने वाले (वैदिक) खगोल शास्त्र में पारंगत हैं। अन्य जन युद्ध करने में शूरवीर, शत्रुओं का अनिष्ट करते हैं।


Q. 160549 भारत में गैर-क्षत्रिय वंश के राजा कौन थे? बताइये।
Right Answer is:

SOLUTION

सूत्रों और धर्मशास्त्रों में एक आदर्श व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में चारों वर्गों के लिए आदर्श जीविकासे जुड़े कई नियम मिलते हैं। ब्राह्मणों का कार्य अध्ययन, वेदों की शिक्षा, यज्ञ करना और करवाना था तथा उनका काम दान देना और लेना था। क्षत्रियों

का कर्म युद्ध करना, लोगों को सुरक्षा प्रदान करना, न्याय करना, वेद पढ़ना, यज्ञ करवाना और दान-दक्षिणा देना था।

व्यवस्था के भीतर पदसौपान का निर्धारण जन्माधारित माना जाता था। ब्राह्मण, इस क्रम में शीर्ष पर थे। वे शासकों को यह उपदेश देते थे कि वे इस व्यवस्था के नियमों का अपने राज्यों में अनुसरण करें। किन्तु ऐसा करना आसान बात नहीं थी।

शास्त्रों के अनुसार केवल क्षत्रिय राजा हो सकते थे,किन्तु अनेक महत्वपूर्ण राजवंशों की उत्पत्ति अन्य वर्णों से भी हुई थी। मौर्य वंश जिसने एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया, के उद्भव पर गर्मजोशी से बहस होती रही है। बाद के बौद्ध ग्रंथों में यह इंगित किया गया है कि वे क्षत्रिय थे किन्तु ब्राह्मणीय शास्त्र उन्हें निम्नकुल का मानते हैं। शुंग और कण्व जो मौर्यों के उत्तराधिकारी थे, ब्राह्मण थे। वस्तुतः राजनीतिक सत्ता का उपभोग हर वह व्यक्ति कर सकता था जो समर्थन और संसाधन जुटा सके । राजत्व क्षत्रिय कुल में जन्म लेने पर शायद ही निर्भर करता था।

अन्य शासकों को, जैसे शक जो मध्य एशिया से भारत आए, ब्राह्मण मलेच्छ, बर्बर अथवा अन्यदेशीय मानते थे। किन्तु संस्कृत के संभवतः आरंभिक अभिलेखों में से एक में प्रसिद्ध शक राजा रुद्रदामन (लगभग दूसरी शताब्दी ईसवी) द्वारा सुदर्शन सरोवर के जीर्णोद्धार का वर्णन मिलता है। इससे यह ज्ञात होता है कि शक्तिशाली मलेच्छ संस्कृतीय परिपाटी से अवगत थे। एक और दिलचस्प बात यह है कि सातवाहन कुल के सबसे प्रसिद्ध शासक गोतमी-पुत्त सिरी-सातकर्णी ने स्वयं को अनूठा ब्राह्मण और साथ ही क्षत्रियों के दर्प का हनन करने वाला बताया था। उसने यह भी दावा किया कि चार वर्णों के बीच विवाह संबंध् होने पर उसने रोक लगाई।किन्तु फिर भी रुद्रदामन के परिवार से उसने विवाह संबंध् स्थापित किए। जैसा आप इस उदाहरण में देख सकते हैं, जाति प्रथा के भीतर आत्मसात होना बहुधा एक जटिल सामाजिक प्रक्रिया थी। सातवाहन स्वयं को ब्राह्मण वर्ण का बताते थे जबकि ब्राह्मणीय शास्त्र के अनुसार राजा को क्षत्रिय होना चाहिए। वे चतुर्वर्णी व्यवस्था की मर्यादा बनाए रखने का दावा करते थे किन्तु साथ ही उन लोगों से वैवाहिक संबंध् भी स्थापित करते थे जो इस वर्ण व्यवस्था से ही बाहर थे और जैसा हमने देखा वह अंतर्विवाह पद्धति का पालन करते थे न कि बहिर्विवाह प्रणाली का जो ब्राह्मणीय ग्रन्थों में प्रस्तावित है।


Q. 160550 गोत्र क्या है? गोत्र के विषय में कुछ महत्वपूर्ण नियमों का उल्लेख कीजिये ?
Right Answer is:

SOLUTION

गोत्र एक वंश अथवा गण होता है जो जन्म के समय में एक हिंदू को दिया जाता है । एक ब्राह्मणीय पद्धति जो लगभग 1000 ई.पू. के बाद से प्रचलन में आई, वह लोगों (खासतौर से ब्राह्मणों) को गोत्रों में वर्गीकृत करने की थी। प्रत्येक गोत्र एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था। उस गोत्र के सदस्य ऋषि के वंशज माने जाते थे। गोत्रों के दो नियम महत्वपूर्ण थे:विवाह के पश्चात स्त्रियों को पिता के स्थान पर पति के गोत्र का माना जाता था तथा एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह संबंध नहीं रख सकते थे। क्या इन नियमों का सामान्यतः अनुसरण होता था, इस बात को जानने के लिए हमें स्त्री और पुरुष नामों का विश्लेषण करना पड़ेगा जो कभी-कभी गोत्रों के नाम से उद्धृत होते थे। हमें कुछ नाम सातवाहनों जैसे प्रबल शासकों के वंश से मिलते हैं। इन राजाओं का पश्चिमी भारत और दक्कन के कुछ भागों पर शासन था (लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू.से दूसरी शताब्दी ईसवी तक)। सातवाहनों के कई अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिनके आधार पर इतिहासकारों ने पारिवारिक और वैवाहिक रिश्तों का खाका तैयार किया है।कुछ सातवाहन राजा बहुपत्नी प्रथा(अर्थात् एक से अधिक पत्नी) को मानने वाले थे। सातवाहन राजाओं से विवाह करने वाली रानियों के नामों का विश्लेषण इस तथ्य की ओर इंगित करता है कि उनके नाम गौतम तथा वशिष्ठ गोत्रों से उद्भूत थे जो उनके पिता के गोत्र थे। इससे प्रतीत होता है कि विवाह के बाद भी अपने पति कुल के गोत्र को ग्रहण करने की अपेक्षा, जैसा ब्राह्मणीय व्यवस्था में अपेक्षित था, उन्होंने पिता का गोत्र नाम ही कायम रखा। यह भी पता चलता है कि कुछ रानियाँ एक ही गोत्र से थीं। यह तथ्य बहिर्विवाह पद्धति के नियमों के विरुद्ध था। वस्तुतः यह उदाहरण एक वैकल्पिक प्रथा अंतर्विवाह पद्धति अर्थात् बंधुओं में विवाह संबंध् को दर्शाता है जिसका प्रचलन दक्षिण भारत के कई समुदायों में (भी) है। बांधवों (ममेरे, चचेरे इत्यादि भाई-बहन) के साथ जोड़े गए विवाह संबंधें की वजह से एक सुगठित समुदाय उभर पाता था।

अभिलेखों से सातवाहन राजाओं की कई पीढि़यों के नाम प्राप्त हुए हैं।इन सभी नामों में राजा की एक जैसी पदवी पर ध्यान दीजिए। इसके अलावा अगले शब्द को भी लक्षित कीजिए जिसका पुत्त से अंत होता है। यह एक प्राकृत शब्द है जिसका अर्थ पुत्रहै। गोतमी-पुत्त का अर्थ है गोतमी का पुत्र। गोतमी और वसिथि स्त्रीवाची नाम हैं गौतम और वशिष्ठ के। ये दोनों वैदिक ऋषि थे जिनके नाम से गोत्र हैं।

संभवतः उपमहाद्वीप के और भागों में अन्य विविधताएं भी मौजूद थीं किन्तु उनके विशिष्ट ब्योरों को पुनर्निर्मित करना संभव नहीं हो पाया है।

 


Q. 160551 नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़िये और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये: ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी ने युधिष्ठिर से यह प्रश्न किया था कि वह उसे दाँव पर लगाने से पहले स्वयं को हार बैठे थे अथवा नहीं। इस प्रश्न के उत्तर में दो भिन्न मतों को प्रस्तुत किया गया। प्रथम तो यह कि यदि युधिष्ठिर ने स्वयं को हार जाने के पश्चात द्रौपदी को दाँव पर लगाया तो यह अनुचित नहीं क्योंकि पत्नी पर पति का नियंत्रण सदैव रहता है। दूसरा यह कि एक दासत्व स्वीकार करने वाला पुरुष(जैसे उस क्षण युधिष्ठिर थे) किसी और को दाँव पर नहीं लगा सकता। इन मुद्दों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला और अंततः धृतराष्ट्र ने सभी पांडवों और द्रौपदी को उनकी निजी स्वतंत्रता पुनः लौटा दी। (क) युधिष्ठिर कौन था? उसने द्रौपदी को दाँव पर क्यूँ लगाया था ?
(ख) क्या युधिष्ठिर के पास उसकी पत्नी को दाँव पर लगाने का अधिकार था?
(ग) किसने मध्यस्थता कर पांडवों और द्रौपदी की स्वतन्त्रता को पुनः बहाल किया था?
Right Answer is:

SOLUTION

(अ) युधिष्ठिर राजा पांडु और रानी कुंती के ज्येष्ठ पुत्र थे। वह दोनों इंद्रप्रस्थ और बाद में हस्तिनापुर के राजा बने थे। उन्होंने कौरवों के हाथों द्यूत क्रीड़ा में सब कुछ खो दिया था। अंतिम वस्तु जो शेष रह गई थी वो उनकी पत्नी द्रोपदी थी अतः उन्होने उसे भी जो कुछ वो खो चुके थे उसे पुनः प्राप्त करने के लिए दाँव पर लगा दिया था।

(ब)द्रौपदी ने युधिष्ठिर द्वारा स्वयं (युधिष्ठिर) को हार जाने एवं अपनी स्वतन्त्रता खो देने के पश्चात उसे(द्रौपदी को)दाँव पर लगाने के उसके अधिकार की वैधता पर लगातार प्रश्न उठाया।

इस प्रश्न के उत्तर में दो भिन्न मतों को प्रस्तुत किया गया।

1.प्रथम तो यह कि यदि युधिष्ठिर ने स्वयं को हार जाने के पश्चात द्रौपदी को दाँव पर लगाया तो यह अनुचित नहीं क्योंकि पत्नी पर पति का नियंत्रण सदैव रहता है।

2.दूसरा यह कि एक दासत्व स्वीकार करने वाला पुरुष(जैसे उस क्षण युधिष्ठिर थे) किसी और को दाँव पर नहीं लगा सकता।

 

(स) इन मुद्दों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला और अंततः धृतराष्ट्र ने अपने वंश के हाथों द्रौपदी के साथ हुए शर्मनाक व्यवहार में बदलाव करने के लिए हस्तक्षेप किया। उन्होंने द्रौपदी को जो भी वो चाहती है , उसकी मंशा प्रकट करने को कहा, इस पर द्रौपदी ने पांडवों को बंधन मुक्त करने को कहा। इस पर धृतराष्ट्र ने उसकी इच्छापूर्ति करते हुए पांडवों को जो कुछ उन्होने द्यूत क्रीड़ा में हारा था उसे उन्हें पुनः लौटा दिया और सभी पांडवों और द्रौपदी को उनकी निजी स्वतंत्रता पुनः लौटा दी।


Q. 160552 नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़िये और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये: यह कहानी पालि भाषा के बौद्ध ग्रंथ मज्झिमनिकाय से है जो एक राजा अवन्तिपुत्र और बुद्ध के अनुयायी कच्चन के बीच हुए संवाद का हिस्सा है। यद्यपि यह कहानी अक्षरशः सत्य नहीं थी तथापि यह बोद्धों के वर्ण संबंधी रवैये को दर्शाती है। अवन्तिपुत्र ने कच्चन से पूछा कि ब्राह्मणों के इस मत के बारे में उनकी क्या राय है, कि वे सर्वश्रेष्ठ हैं और अन्य जातियाँ निम्न कोटि की हैं ब्राह्मण का वर्ण शुभ्र है और अन्य जातियाँ काली हैं; केवल ब्राह्मण पवित्र है अन्य नहीं; ब्राह्मण ब्रह्मा के पुत्र हैं, ब्रह्मा के मुख से जन्मे हैं, उनसे ही रचित हैं तथा ब्रह्मा के वंशज हैं।कच्चन ने उत्तर दियाः क्या यदि शूद्र धनी होता... दूसरा शूद्र...अथवा क्षत्रिय या फिर ब्राह्मण अथवा वैश्य... उससे विनीत स्वर में बात करता?” अवन्तिपुत्र ने प्रत्युत्तर में कहा कि यदि शूद्र के पास धन अथवा अनाज, स्वर्ण या फिर रजत होती वह दूसरे शूद्र को अपने आज्ञाकारी सेवक के रूप में प्राप्त कर सकता था, जो उससे पहले उठे और उसके बाद विश्राम करे; जो उसकी आज्ञा का पालन करे, विनीत वचन बोले; अथवा वह क्षत्रिय, ब्राह्मण या फिर वैश्य को भी आज्ञावाही सेवक बना सकता था। कच्चन ने पूछा, “यदि ऐसा है, तो क्या फिर यह चारों वर्ण एकदम समान नहीं हैं?” अवन्तिपुत्र ने यह स्वीकार किया कि इस आधार पर चारों वर्णों में कोई भेद नहीं है। अ. यह कहानी किस बौद्ध ग्रंथ से उद्धत है ? ब. ब्राह्मणों ने किस प्रकार संपूर्ण भारतीय सामाजिक व्यवस्था पर अपने स्वयं का वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास किया था?
स. इस ग्रंथ के अनुसार क्या स्थिति सामाजिक अंतर को स्पष्ट करती है ?
Right Answer is:

SOLUTION

अ) यह कहानी पालि भाषा के बौद्ध ग्रंथ मज्झिमनिकाय से है जिसमें एक राजा अवन्तिपुत्र और बुद्ध के अनुयायी कच्चन के बीच हुए दीर्घ संवाद निहित है।

ब) ब्राह्मणों ने अपनी स्थिति को दैवीय शक्ति द्वारा प्रदत होने के सिद्धान्त को जनप्रिय बनाकर उनके द्वारा प्राप्त शक्ति का औचित्य साबित करने का प्रयत्न किया। वे स्वयं को निम्नरुपेण मानते थे:

 1)वे सर्वश्रेष्ठ हैं और अन्य जातियाँ निम्न कोटि की हैं

2)ब्राह्मण का वर्ण शुभ्र है और अन्य जातियाँ काली हैं।

3)केवल ब्राह्मण पवित्र है अन्य नहीं।

4) ब्राह्मण ब्रह्मा के पुत्र हैं, ब्रह्मा के मुख से जन्मे हैं, उनसे ही रचित हैं तथा ब्रह्मा के वंशज हैं।

स) इस ग्रंथ के अनुसार सामाजिक वर्गों में से कोई भी एक वर्ग यदि धन अर्जित करता है तो वह अन्य जाति के सेवक को अपना आज्ञावाही सेवक बना सकता है।यदि शूद्र के पास धन है तो वह क्षत्रिय या फिर ब्राह्मण अथवा वैश्य को अपने आज्ञाकारी सेवक के रूप में प्राप्त कर सकता है, इस आधार पर चारों वर्णों में कोई भेद नहीं है।


Q. 160553 नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़िये और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये: महाभारत के आदिपर्वन् में इस नगर का चित्रण इस प्रकार मिलता है: यह नगर जो समुद्र की भाँति भरा हुआ था, जो सैकड़ों प्रासादों से संकुलित था। इसके सिंहद्वार, तोरण और कंगूरे सघन बादलों की तरह घुमड़ रहे थे। यह इंद्र की नगरी के समान शोभायमान था। (क) हस्तिनापुर के उत्खनन के साथ किस पुरातत्वविद् का नाम सम्बद्ध है?
(ख) इतिहासकारों द्वारा हस्तिनापुर की खोज को महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
(ग) छठी से तीसरी शताब्दी ई.पू. में हस्तिनापुर में निर्मित घरों की मुख्य विशेषताएं क्या थीं? [2+3+2=8]
Right Answer is:

SOLUTION

क )हस्तिनापुर का उत्खनन कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बी बी लाल द्वारा 1951-1952

 में किया गया था । वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक थे। उन्हें बड़ी संख्या में उत्खनन कार्य करने का श्रेय प्राप्त है जिसमें पुरापाषाण काल से प्रारंभिक इतिहास तक का एक विस्तृत क्षेत्र सम्मिलित है।

ख)महाभारत में कुरुओं की राजधानी हस्तिनापुर की खोज को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि-

i) यह महाकाव्य और 'वास्तविक इतिहास' के मध्य पुरातात्विक कड़ी उपलब्ध कराने वाला पहला पर्याप्त साक्ष्य है।
ii) दूसरा, यह 'डार्क एज' (अंधकार युग) पर रोशनी डालने वाला प्रथम सुनिर्देशित चरण था।

ग) छठी से तीसरी शताब्दी ई.पू. में हस्तिनापुर में निर्मित घरों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं?

1) इस अवधि के घर कच्ची और कुछ पक्की ईंटों के बने हुए थे।

2)इनमें शोषक-घट और ईंटों के नाले गंदे पानी के निकास के लिए इस्तेमाल किए जाते थे, तथा 3) टेरकोटा वलय-कूपों का इस्तेमाल, कुओं और मल की निकासी वाले गर्तों, दोनों ही रूपों में किया जाता था।


Q. 160554 एक प्रमुख वंश, जिसे ब्राह्मणीय शास्त्र निम्न कुल का मानते हैं:


A. मौर्य

B. कुरु

C. सातवाहन

D. शुंग

Right Answer is: A

SOLUTION

शास्त्रों के अनुसार, केवल क्षत्रिय ही राजा बन सकते हैं| लेकिन कई शासकों के वंश भिन्न थे| केवल मौर्यों की पृष्ठभूमि पर ही चर्चा की जाती है| बौद्ध ग्रन्थ उन्हें क्षत्रिय कुल का बताते हैं, लेकिनब्राह्मणीय शास्त्र मौर्यों को निम्न कुल का मानते हैं|


Q. 160555 शक राजा, जिन्होंने सुदर्शन सरोवर काजीर्णोद्धार कराया था:


A. चस्ताना

B. नहापाना

C. रुद्रदामन

D. शूदोसा

Right Answer is: C

SOLUTION

शक राजा मध्य एशिया से भारत आये थे| शक्तिशाली मलेच्छसंस्कृत परिपाटी से अवगत थे क्योंकि शक को संस्कृत का ज्ञान नहीं था|


Q. 160556 चीनी तीर्थयात्री, जो यह कहता है कि वधिक और सफाई करने वालों को भारत में नगर से बाहर रहना पड़ता था:


A. सो जियान

B. श्वैन-त्सांग

C. ती-जिंग

D. आई कियान

Right Answer is: B

SOLUTION

श्वैन-त्सांग एक प्रसिद्द चीनी बौद्ध भिक्षु, विद्यां, यात्री और अनुवादक था, जो भारत और चीन के मध्य वार्ता लाया था| उसने भारत की सामाजिक प्रथाओं पर टिप्पणी की है| वह बौद्ध शिक्षा तथा बौद्ध पांडुलिपियों के संग्रहण के लिए भारत आया था|


Q. 160557 पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ एक रचना है:


A. संस्कृत व्याकरण पर

B. संस्कृत के इतिहास पर

C. संस्कृत के मंत्रों पर

D. संस्कृत के नाटकों पर

Right Answer is: A

SOLUTION

पाणिनि लगभग 5वीं शताब्दी ईसवी के व्याकरण के एक पंडित थे| ‘अष्टाध्यायी’ पुस्तक में उन्होंने 3959 सूत्रों में संस्कृत की रूपरेखा का वर्णन किया है|अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण की सबसे प्राचीनतम पुस्तकों में से एक है|


Q. 160558 वि० एस० सुकथंकर ने निम्न में से किसके समालोचनात्मक संस्करण का प्रकाशन आरम्भ किया?


A. रामायण

B. इलियद

C. ऋगवेद

D. महाभारत

Right Answer is: D

SOLUTION

वि० एस० सुकथंकर के अंतर्गत 1919 में यह परिकल्पना आरम्भ की गयी| वे एक संस्कृतगज्ञ थे| उनकी मंडली ने उन छंदों को चुना, जो की कई संस्करणों में एकसमान थे और 13,000 पृष्ठों का प्रकाशन आरम्भ किया|


Q. 160559 सातवाहन शासक, जो स्वयं को क्षत्रियों का गौरव घोषित कर चुके थे:


A. गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि

B. वसिथि-पुत्त (सामि) सिरि-पुलुमायि

C. गोतमी-पुत्त सामि-सिरि-यन-सातकनि

D. वसिथि-पुत्त सातकनि

Right Answer is: A

SOLUTION

गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि ने भी यह घोषित कर दिया कि चार वर्णों के सदस्यों के मध्य कोई भी अंतर्जातीय विवाह नहीं कराया गया है|


Q. 160560 लगभग 400-500 ईसवी पूर्व जैन ग्रंथों का संग्रहण किया गया:


A. संस्कृत में

B. तमिल में

C. पाली में

D. प्राकृत में

Right Answer is: D

SOLUTION

लगभग 400-500 ईसवी के प्राचीन भारत में कई ग्रन्थ लिखे गए| इसमें कालिदास के नाटक, आर्यभट्ट और वराह मिहिर के खगोल और गणित आधारित कार्य (संस्कृत में) तथा प्राकृत में जैन ग्रंथों का संग्रहण शामिल है|


Q. 160561 वैदिक काल में समाज में किस प्रकार के परिवार होते थे ?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिक काल में समाज में  परिवार पितृसत्तात्मक  होते थे


Q. 160562 आर्यावर्त किसे कहते थे ?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिक काल में मध्य भारत को आर्यावर्त कहते थे 


Q. 160563 वैदिक काल में राजा का पद कैसे प्राप्त होता था?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिक काल में राजा का पद वंशानुगत  होता था।


Q. 160564 वैदिक साहित्य का सृजन किस काल में हुआ था ?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिक साहित्य का सृजन वैदिक काल में हुआ था।


Q. 160565 वर्ण व्यवस्था को पुजारियों द्वारा कैसे उचित बताया गया था?
Right Answer is:

SOLUTION

पुजारियों द्वारा वर्ण व्यवस्था को जन्माधारित बताकर उचित ठहराया गया था ।


Q. 160566 पुराणों और महाभारत का संकलन किसने किया था ?

Right Answer is:

SOLUTION

पुराणों और महाभारत का संकलन व्यास द्वारा किया गया था


Q. 160567 दो प्रसिद्ध संस्कृत महाकाव्य कौनसे हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

महाभारत और रामायण दो प्रसिद्ध संस्कृत महाकाव्य हैं


Q. 160568 श्रेणी से क्या अभिप्राय है ?
Right Answer is:

SOLUTION

वे जातियाँ जो एक ही जीविका अथवा व्यवसाय से जुड़ी थीं उन्हें कभी-कभी श्रेणियों में भी संगठित किया जाता था। ये श्रेणियां अपने सदस्यों के जीवन के कई पहलुओं को नियंत्रित किया करती थीं। ये श्रेणियां माल के विक्रय मूल्य का निर्धारण करती थीं और अपने सदस्यों के लिए इनकी स्वयं अपनी न्याय-प्रणाली थी।


Q. 160569 महाभारत के रचयिता कौन थे?
Right Answer is:

SOLUTION

कृष्ण द्वैपायन व्यास (वेदव्यास)


Q. 160570 धर्मशास्त्रों के अनुसार क्षत्रियों के किन्हीं दो आदर्श कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

1. युद्ध करना 2. लोगों को सुरक्षा प्रदान करना।


Q. 160571 वैदिक काल के वर्ण व्यवस्था में शूद्रों की क्या भूमिका थी?
Right Answer is:

SOLUTION

वैदिक काल के वर्ण व्यवस्था में शूद्र चौथा वर्ण था शूद्रों का कार्य तीनों वर्णों की सेवा करना था इस वर्ण का समाज के अन्य वर्णों की अपेक्षा बहुत निम्न स्थान होता था इस वर्ण को धर्मपालन और अध्ययन से वंचित रखा गया था।


Q. 160572 वेद कितने हैं उनके नाम बताओं।
Right Answer is:

SOLUTION

वेद चार हैं उनके नाम हैं :- 
1. ऋग्वेद    
2. सामवेद 
3. यजुर्वेद 
4. अर्थवेद


Q. 160573   शब्द आश्रम से क्या अभिप्राय था ?
Right Answer is:

SOLUTION

शब्द आश्रम का उपयोग जीवन के एक चरण के लिए किया गया था। ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास को चार आश्रम के रूप में जाना जाता था ।


Q. 160574 मौर्य साम्राज्य का एक प्रांतीय केंद्र, जो अब मध्य प्रदेश का एक आधुनिक शहर है, वह है


A. विदिशा।

B. उज्जयिनी।

C. भाबरु

D. सांची।

Right Answer is: B

SOLUTION

उज्जैन उज्जयिनी का आधुनिक नाम है। उज्जयिनी भी मौर्य साम्राज्य में पांच प्रमुख राजनीतिक केन्द्रों में से एक था।


Q. 160575 जिस राजवंश नें चौथी शताब्दी ई.पू. में पाटलिपुत्र पर शासन किया था


A. नंदा वंश।

B. गुप्ता राजवंश।

C. मौर्य वंश।

D. मगध राजवंश।

Right Answer is: C

SOLUTION

शुरू में एक गांव जो पाटलिग्राम कहा जाता है, 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में, पाटलिपुत्र मगध शासकों की राजधानी बन गया।


Q. 160576 पहले सोने के सिक्के भारतीय उपमहाद्वीप में जारी किए गए थे इनके द्वारा


A. गुप्त।

B. कुषाण।

C. मौर्य।

D. शक्या

Right Answer is: B

SOLUTION

कुषाण सोने के सिक्के लगभग समकालीन रोमन सम्राटों और ईरान के पार्थियन शासकों द्वारा जारी किए गए सिक्कों के वजन में समान थे।


Q. 160577 मेगस्थनीज, एक यूनानी राजदूत के अनुसार, एक समिति में छह उपसमितियाँ निम्न का समायोजन करती थीं


A. कृषि गत्विधियाँ।

B. धम्म।

C. सैन्य गत्विधियाँ।

D. धार्मिक गत्विधियाँ।

Right Answer is: C

SOLUTION

मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में मौर्य साम्राज्य के प्रशासन का विस्तार में वर्णन किया है। यह ग्रंथ खंडित रूप में उपलब्ध है।


Q. 160578 सुवर्णगिरि, मौर्य साम्राज्य के एक प्रांतीय केंद्र, सोने की खदानों के दोहन के लिए महत्वपूर्ण था


A. बंगाल।

B. कर्नाटक।

C. ओडिशा।

D. केरल।

Right Answer is: B

SOLUTION

सुवर्णगिरि का मतलब है "गोल्डन माउंटेन"। आज भी, कर्नाटक अपनी कोलार गोल्ड फील्ड्स के लिए लोकप्रिय है।


Q. 160579 प्राचीन भारत की सबसे पुरानी किताब, सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों द्वारा रचित है


A. यजुर वेद।

B. ऋग्वेद।

C. समा वेद।

D. अथर्ववेद।

Right Answer is: B

SOLUTION

ऋग्वेद किसी भी अन्य इंडो-आर्यन पाठ से कहीं अधिक पुरातन माना जाता है। इस पुस्तक में, शहरों और सिंधु नदी के किनारे रहने वाले लोगों, और उसकी सहायक नदियों का एक विवरण दिया गया है।


Q. 160580 ज्यादातर अशोक के शिलालेख इस भाषा में लिखे गये थे


A. प्राकृत।

B. संस्कृत।

C. ग्रीक।

D. अरमेक।

Right Answer is: A

SOLUTION

अशोका पहले शासक थे जिन्होंने शिलालेख के माध्यम से लोगों को अपने संदेश देने की कोशिश की थी।


Q. 160581 कुषाण के सोने के सिक्के इन सिक्कों पर आधारित थे


A. रोमन और पार्थियन शासकों।

B. पार्थियन और यौधेया

C. यौधेया और शाका शत्रप

D. रोमन और शाका शत्रप

Right Answer is: A

SOLUTION

कुषाण के सोने के सिक्के ईरान के रोमन और पार्थियन शासकों के सिक्के पर आधारित हैं। इन सिक्कों को उत्तर भारत और मध्य एशिया में कई साइटों से पाया गया है।


Q. 160582 अग्रहारा वह ज़मीन थी जो प्रदान की गई थी


A. ब्राह्मण।

B. क्षत्रिय।

C. वैश्य

D. शूद्र।

Right Answer is: A

SOLUTION

ब्राह्मणों को आम तौर पर राजा को भू-राजस्व और अन्य बकाया भुगतान से छूट दी गई थी, और अक्सर स्थानीय लोगों को इन बकाया राशि इकट्ठा करने का अधिकार दिया गया।


Q. 160583 "एरीथ्रियन" का यूनानी नाम था -


A. काला सागर।

B. लाल सागर।

C. भूमध्य - सागर।

D. अरब सागर।

Right Answer is: B

SOLUTION

लाल सागर मिस्र में स्वेज से दक्षिण पूर्व में फैली हुई है|


Q. 160584 पहले शासक धम्म के सिद्धांतों का प्रचार करने वाले थे


A. बिम्बिसार।

B. चंद्रगुप्त द्वितीय।

C. चंद्रगुप्त मौर्य

D. अशोका

Right Answer is: D

SOLUTION

धम्म, एक धर्म या धार्मिक व्यवस्था नहीं है बल्कि एक नैतिक कानून है, जो सभी धर्मों के लिए एक आम आधार है|


Q. 160585 उपमहाद्वीप में, बड़े राज्यों के होने का सबूत है, जिनमें से एक गुप्त साम्राज्य है, इस शताब्दी में


A. तीसरी शताब्दी।

B. चौथी सदी।

C. पांचवीं शताब्दी।

D. छठी शताब्दी।

Right Answer is: B

SOLUTION

चौथी सदी के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में कई राज्य सामंता, पर निर्भर करते थे।


Q. 160586 चौथी सदी में सबसे शक्तिशाली गुप्ताशासक था


A. चंद्रगुप्त प्रथमI

B. चंद्रगुप्त द्वितीय।

C. स्कन्दगुप्त।

D. समुद्रगुप्त।

Right Answer is: D

SOLUTION

समुद्रगुप्त चंद्रगुप्त प्रथम के उत्तराधिकारी था। अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने राज्य शासन करना शुरू कर दिया और आराम नहीं किया जब तक उन्होंने पूरे भारत में विजय प्राप्त की।


Q. 160587 प्राचीन भारत में, सिक्के एक आदिवासी गणराज्य द्वारा जारी किए गए थे, यौधेय के तहत


A. कर्नाटक

B. डेक्कन

C. पंजाब

D. राजस्थान

Right Answer is: C

SOLUTION

हरियाणा भी यौधेय गणराज्य का हिस्सा था। पुरातत्वविदों ने यौधेय द्वारा जारी किए गए कई हजार तांबे के सिक्के का पता लगाया है, जो बाद के हित और आर्थिक आदान-प्रदान में भागीदारी की ओर इशारा करते हैं।


Q. 160588 अशोक के शिलालेख, जो उसके साम्राज्य के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में पाए जाते हैं, इस भाषा में हैं


A. खरोश्ती और ​​ग्रीक।

B. ब्राह्मी और खरोश्ती​।

C. पाली और खरोश्ती​।

D. प्राक्रित और ​​ग्रीक।

Right Answer is: A

SOLUTION

राजा अशोक ने अपने विचारों का प्रचार करने के लिए प्राकृत और ब्राह्मी लिपियों का इस्तेमाल किया। इन विचारों को अलग-अलग भाषाओं में प्रचारित किया गया|


Q. 160589 मौर्य साम्राज्य में पांच प्रमुख राजनीतिक केन्द्रों में से सबसे उत्तर में था -


A. पाटलिपुत्र।

B. तोसाली

C. तक्षिला

D. उज्जयिनी

Right Answer is: C

SOLUTION

मौर्य साम्राज्य में पाँचप्रमुख राजनीतिक केंद्र थे - राजधानी पाटलिपुत्र और प्रांतीय केंद्र तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसाली और सुवर्णगिरि।


Q. 160590 मेगस्थनीज ग्रीक राजदूत था इनकी अदालत में


A. अशोक।

B. बिन्दुसार।

C. चंद्रगुप्त मौर्य।

D. सम्प्रति।

Right Answer is: C

SOLUTION

मेगस्थनीज के खाते जो टुकड़ों में बच गये हैवह मूल्यवान समकालीन कृत्य है जो इतिहासकारों द्वारा इस्तेमाल किये गये है प्राचीन भारतीय इतिहास को फिर से संगठित करने के लिए


Q. 160591 राजा जिसने खुद को 'देवानांपिय' और 'पियदस्सी' के रूप में वर्णित किया, वह इस राजवंश का था


A. गुप्ता राजवंश

B. कुषाण राजवंश।

C. मौर्य राजवंश।

D. नंदा राजवंश।

Right Answer is: C

SOLUTION

अशोका, मौर्य शासक, ने खुद को 'देवानांपिय' अर्थात देवताओं के प्रिय और 'पियदस्सी' अर्थात , सुखद रूप सेनिहारना में वर्णित किया है|


Q. 160592 मौर्य शासकों की राजधानी पाटलिपुत्र का वर्तमान नाम क्या है ?
Right Answer is:

SOLUTION

मौर्य शासकों की राजधानी पाटलिपुत्र का वर्तमान नाम ‘पटना’ है।


Q. 160593
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह कहाँ से लिया गया है।
Right Answer is:

SOLUTION

सारनाथ से प्राप्त अशोक कालीन लघु स्तंभ लेख है जिससे भारत का राष्ट्रीय चिन्ह लिया गया है।


Q. 160594 संतचरित्र निम्न में से एक का जीवन-चरित्र है -


A. चित्रकार

B. ब्राह्मण

C. किसान

D. संत

Right Answer is: D

SOLUTION

संतचरित्र अक्सर संत की सफलताओं का गुणगान करते हैं, तो वे वस्तुतः परिशुद नहीं हो सकते| उनकी महत्ता यह है कि वे उस धार्मिक परंपरा के अनुयायी के विश्वासों का विवरण करते हैं|


Q. 160595 जैन धर्म में, सबसे महत्वपूर्ण विचार है कि सम्पूर्ण संसार _______________ है
A.
B.
C.
D.

Right Answer is: A

SOLUTION

जैन धर्म के अनुसार; पत्थर, चट्टान व पानी इत्यादि में जीवन है| मनुष्य, जानवर, पौधे व कीडे समित सभी जीवित प्राणियों के प्रति अहिंसा का भाव जैन धर्म का केंद्र है|


Q. 160596 बुद्ध का वास्तविक नाम था -


A. गौतम

B. सिद्धार्थ

C. तीर्थंकर

D. तथागत

Right Answer is: B

SOLUTION

गौतम बुद्ध, जो सिद्धार्थ के नाम से जन्मे थे, सकय कुल के एक स्थानीय सरदार के बेटे थे|


Q. 160597 जैन शिक्षण के अनुसार, जन्म व पुनर्जन्म का क्रम इसके द्वारा निर्धारित किया जाता है-


A. आत्मा

B. स्वर्ग

C.

कर्म

D. माया

Right Answer is: C

SOLUTION

जैन धर्म के अनुसार, मनुष्य, त्याग व तपस्या के द्वारा, अपनेआप को कर्म के चक्र से मुक्त कर सकता है| यह केवल संसार को त्याग करने से संभव है|


Q. 160598 ‘चैत्य’ शब्द संभवतः इस शब्द से उत्पन्न हुई है -


A. चित्र

B. चित

C. शकीय

D. सिद्ध

Right Answer is: B

SOLUTION

'चित' शब्द का अर्थ है अंतिम संस्कार, और विस्तार से, अंत्येष्टि टीला| बौद्ध साहित्य कई चैत्य का विवरण करते है|


Q. 160599 बौद्ध संघ की पहली भिक्कुनी ये बनी -


A.

महाप्रजापति गोतमी

B. मेहेनी उड़वा

C. तथालोक

D. यशोधरा

Right Answer is: A

SOLUTION

संघ में शामिल होने वाली कई महिलाओं धम्म के शिक्षक बने, और बाद में थेरी बने – आदर्निय्पूर्ण महिलाएँ जिन्होनें मोक्ष प्राप्त किया|


Q. 160600 वर्धमान को इस नाम से जाना जाता था -


A.

बुद्ध

B.

कल्हण

C.

कालिदास

D.

महावीर

Right Answer is: D

SOLUTION

जैन परंपरा के अनुसार, महावीर से पूर्व, 23 तीर्थंकर थे|


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