CBSE - MCQ Question Banks (के. मा. शि. बो . -प्रश्नमाला )

PreviousNext

Q. 160901
आपके अनुसार कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति किस हद तक एक कारक थी।
Right Answer is:

SOLUTION

कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति की भूमिकाः- 1. खेतिहर किसानों का अनेक समूहों में विभक्त होनाः- समाज में व्याप्त जातिगत भेदभावों के कारण खेतिहर किसान कई प्रकार के समूहों में विभक्त थे खेतों की जुताई करने वाले किसानों को प्रायः निकृष्ट समझे जाने वाले कार्य ही दिये जाते थे। इस प्रकार वह निर्धनता में जीवन व्यापन करने को बाध्य थे। 2. अन्य संप्रदायों में भेदभाव का प्रसारः- अन्य समाजों में फैले भेदभाव का प्रसार मुस्लिम समुदायों में भी देखा जाने लगा था। निकृष्ट कार्य जैसे हलालखोरान, मल्लाहजादाओं को गाँव की सीमा से बाहर रहने को बाध्य किया गया व उनकी स्थिति दासों की तरह थी। 3. मध्य समूहः- जिस प्रकार निम्न वर्गों की जाति, गरीबी व सामाजिक स्थिति में सीधा संबंध था वह स्थिति मध्य समूहों में नहीं थी। सत्रहवीं शताब्दी में मारवाड़ में लिखी एक पुस्तक राजपूतों की चर्चा किसान के रूप में करती हैं पुस्तक के अनुसार जाट भी किसान थे पर जाति व्यवस्था में उनकी स्थिति राजपूतों से निम्न थी। 4. अन्य जातियों की स्थितिः- पशुपालन व बागवानी में बढ़ते मुनाफे नें अहीर, गुज्जर व माली जैसी जातियों के सामाजिक सोपान में वृद्धि की। पूर्वी प्रदेश में पशुपालक व मछुआरा जातियाँ भी किसानों जैसी सामाजिक स्थिति पाने लगी।


Q. 160902
कृषि इतिहास लिखने में ‘आइन’ को स्त्रोत रूप में इस्तेमाल करने में क्या समस्याएँ हैं? इतिहासकार इन समस्याओं से कैसे निपटते हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

1. आंकड़ों के जोड़ में गलतियाँ-आँकड़ो के जोड़ में कई गलतियाँ पाई गई हैं।2. शासक वर्ग का दृष्टिकोण-‘आइन’ से किसानों के बारें में प्राप्त जानकारी शासक वर्ग का दृष्टिकोण मात्र है ना कि किसानों का। 3. संख्यात्मक आँकड़ो में विषमताएँ- सभी प्रान्तों से आँकड़े एक ही मानक के अनुरूप एकत्र नहीं किये गए। कुछ प्रांतो की विस्तृत सूचनाएँ संकलित की गई हैं, जबकि बंगाल व उड़ीसा के लिए सूचनाएँ उपलब्ध नहीं हैं।4. मूल्यों और मजदूरों की दरों की अपर्याप्त सूची-‘आइन’ में मौजूद मूल्यों व मजदूरी की दरें मात्र राजधानी क्षेत्र व उसके आस-पास के क्षेत्रों से ली गई हैं ना कि संपूर्ण देश से। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए इतिहासकार संबंधित सदियों के उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा ईस्ट इंडिया कंपनी के सरकारी दस्तावेजों की मद्द ली जा सकती है।


Q. 160903
कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण दीजिये।
Right Answer is:

SOLUTION

1. सोलहवीं तथा सत्रहवीं शताब्दी में महिलाएँ और पुरूष कन्धे से कन्धा मिलाकर खेतों में काम करते थे। महिलाएँ बुआई, निराई व कटाई के साथ-साथ पकी हुई फसल का दाना निकालने का काम करती थीं। 2. पश्चिम भारत में महिलाओं की जैव वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रति अनेक पूर्वाग्रह थे उदाहरणस्वरूप पश्चिम भारत में रजस्वला स्त्रियों को हल या कुम्हार का चाकू छूने की इजाजत नहीं थी। 3. कृषि आधारित अन्य कार्यो में भी महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण था जैसे सूत कातना, बर्तन बनाने के लिए मिट्टी साफ करना और कपड़ों पर कढ़ाई जैसे दस्तकारी आदि। 4. किसी वस्तु का जितनी वाणिज्यीकरण होता था, उस वस्तु के उत्पादन के लिए महिलाओं के श्रम की उतनी अधिक माँग होती थी। जरूरत होने पर किसान व दस्तकार महिलाएँ खेतों में भी जाती थीं व नियोक्ताओं के घरों व बाजार में जाकर भी काम करती थीं।


Q. 160904 कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण दीजिये।
Right Answer is:

SOLUTION

1. सोलहवीं तथा सत्रहवीं शताब्दी में महिलाएँ और पुरूष कन्धे से कन्धा मिलाकर खेतों में काम करते थे। महिलाएँ बुआई, निराई व कटाई के साथ-साथ पकी हुई फसल का दाना निकालने का काम करती थीं। 2. पश्चिम भारत में महिलाओं की जैव वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रति अनेक पूर्वाग्रह थे उदाहरणस्वरूप पश्चिम भारत में रजस्वला स्त्रियों को हल या कुम्हार का चाकू छूने की इजाजत नहीं थी। 3. कृषि आधारित अन्य कार्यो में भी महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण था जैसे सूत कातना, बर्तन बनाने के लिए मिट्टी साफ करना और कपड़ों पर कढ़ाई जैसे दस्तकारी आदि। 4. किसी वस्तु का जितनी वाणिज्यीकरण होता था, उस वस्तु के उत्पादन के लिए महिलाओं के श्रम की उतनी अधिक माँग होती थी। जरूरत होने पर किसान व दस्तकार महिलाएँ खेतों में भी जाती थीं व नियोक्ताओं के घरों व बाजार में जाकर भी काम करती थीं।


Q. 160905 कृषि इतिहास लिखने में ‘आइन’ को स्रोत रूप में इस्तेमाल करने में क्या समस्याएँ हैं इतिहासकार इन समस्याओं से कैसे निपटते हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

कृषि इतिहास को लिखने में ‘आइन’ को स्त्रोत रूप में प्रयोग करने में मुख्य समस्याऐंः-1. आंकड़ों के जोड़ में गलतियाँ- आँकड़ो के जोड़ में कई गलतियाँ पाई गई हैं।2. शासक वर्ग का दृष्टिकोण-‘आइन’ से किसानों के बारें में प्राप्त जानकारी शासक वर्ग का दृष्टिकोण मात्र है ना कि किसानों का। 3. संख्यात्मक आँकड़ो में विषमताएँ- सभी प्रान्तों से आँकड़े एक ही मानक के अनुरूप एकत्र नहीं किये गए। कुछ प्रांतो की विस्तृत सूचनाएँ संकलित की गई हैं, जबकि बंगाल व उड़ीसा के लिए सूचनाएँ उपलब्ध नहीं हैं।4. मूल्यों और मजदूरों की दरों की अपर्याप्त सूची-‘आइन’ में मौजूद मूल्यों व मजदूरी की दरें मात्र राजधानी क्षेत्र व उसके आस-पास के क्षेत्रों से ली गई हैं ना कि संपूर्ण देश से। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए इतिहासकार संबंधित सदियों के उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा ईस्ट इंडिया कंपनी के सरकारी दस्तावेजों की मदद ली जा सकती है।


Q. 160906 कौनसे सामाजिक कारक वनवासियों के जीवन में परिवर्तन लेकर आये?
Right Answer is:

SOLUTION

(i)समुदाय के नेताओं के रूप में जनजातियों के सरदार (मुखिया) हुआ करते थे, और उनमें से कई जमींदार बन गए थे और कुछ तो राजा भी बन गए थे, जो जमींदार और राजा बन गए थे उन लोगों को एक सेना रखनी आवश्यक होती थी, सेना के लिए लोगों को एक ही वंश समूह से भर्ती किया जाता था, अथवा उनकी बिरादरी द्वारा सैन्य सेवा उपलब्ध कराने की मांग की जाती थी

(ii) स्त्रोतों के अनुसार, सिंध क्षेत्र में जनजातियों के पास 6000 घुड़सवार फ़ौज और 7000 पैदल सेना से युक्त सेना थी, असम के अहोम राजाओं के पास पाइक लोग, जो भूमि के बदले में सैन्य सेवा प्रदान करते थे, हुआ करते थे, हाथियों पर अधिकार को अहोम राजाओं द्वारा एक शाही एकाधिकार घोषित कर दिया गया था

(iii) आइन-ए-अकबरी के अनुसार, शासकों की महत्वाकांक्षा के कारण युद्ध होना, एक सामान्य घटना हुआ करती थी


Q. 160907 सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के दौरान चांदी के प्रवाह पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के दौरान मुगल साम्राज्य, चीन में मिंग, ईरान में सफ़वीद, तुर्की में ऑटोमन (उस्मान राजवंश) की भाँती अपनी शक्ति को मजबूत बनाने और संसाधनों को संचित करने में सक्षम थाइतिहासकारों के अनुसार, समुद्री यात्रा की खोज और यूरोप के साथ एशिया के व्यापार की शुरुआत ने मुगल साम्राज्य की सहायता की, इसका परिणाम भारत के विदेशी व्यापार के विकास के रूप में हुआ, व्यापार में यह विकास, भारत से प्राप्त वस्तुओं के लिए भुगतान करने हेतु बुलियन विशेष रूप से चांदी की भारी मात्रा लेकर आया, चांदी के प्रवाह ने भारत की सहायता की क्योंकि उसके पास चांदी का कोई स्रोत नहीं था, सोलहवीं और अठारहवीं शताब्दी के मध्य की अवधि में भारत में धातु मुद्रा विशेष रूप से चांदी रूपया की उपलब्धता देखी गयी थी, इसने सिक्को की ढलाई के विस्तार और पैसो के व्यापक प्रचलन में मदद की


Q. 160908 कौनसे सामाजिक कारक वनवासियों के जीवन में परिवर्तन लेकर आये?
Right Answer is:

SOLUTION

(i)समुदाय के नेताओं के रूप में जनजातियों के सरदार (मुखिया) हुआ करते थे, और उनमें से कई जमींदार बन गए थे और कुछ तो राजा भी बन गए थे, जो जमींदार और राजा बन गए थे उन लोगों को एक सेना रखनी आवश्यक होती थी, सेना के लिए लोगों को एक ही वंश समूह से भर्ती किया जाता था, अथवा उनकी बिरादरी द्वारा सैन्य सेवा उपलब्ध कराने की मांग की जाती थी

(ii) स्त्रोतों के अनुसार, सिंध क्षेत्र में जनजातियों के पास 6000 घुड़सवार फ़ौज और 7000 पैदल सेना से युक्त सेना थी, असम के अहोम राजाओं के पास पाइक लोग, जो भूमि के बदले में सैन्य सेवा प्रदान करते थे, हुआ करते थे, हाथियों पर अधिकार को अहोम राजाओं द्वारा एक शाही एकाधिकार घोषित कर दिया गया था

(iii) आइन-ए-अकबरी के अनुसार, शासकों की महत्वाकांक्षा के कारण युद्ध होना, एक सामान्य घटना हुआ करती थी


Q. 160909 सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के दौरान चांदी के प्रवाह पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के दौरान मुगल साम्राज्य, चीन में मिंग, ईरान में सफ़वीद, तुर्की में ऑटोमन (उस्मान राजवंश) की भाँती अपनी शक्ति को मजबूत बनाने और संसाधनों को संचित करने में सक्षम थाइतिहासकारों के अनुसार, समुद्री यात्रा की खोज और यूरोप के साथ एशिया के व्यापार की शुरुआत ने मुगल साम्राज्य की सहायता की, इसका परिणाम भारत के विदेशी व्यापार के विकास के रूप में हुआ, व्यापार में यह विकास, भारत से प्राप्त वस्तुओं के लिए भुगतान करने हेतु बुलियन विशेष रूप से चांदी की भारी मात्रा लेकर आया, चांदी के प्रवाह ने भारत की सहायता की क्योंकि उसके पास चांदी का कोई स्रोत नहीं था, सोलहवीं और अठारहवीं शताब्दी के मध्य की अवधि में भारत में धातु मुद्रा विशेष रूप से चांदी रूपया की उपलब्धता देखी गयी थी, इसने सिक्को की ढलाई के विस्तार और पैसो के व्यापक प्रचलन में मदद की


Q. 160910 कृषि प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति पर एक टिप्पणी लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

महिलाओं और पुरुषों को खेतों में कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होता था, पुरुष खुदाई और जुताई करते थे जबकि महिलाएं फसल की बुवाई, निराई , पीट कर दानों को भूसे से अलग करने एवं पछोरने का कार्य करती थींएकल गांवों के विकास और किसानों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर खेती के विस्तार, जो मध्यकालीन भारतीय कृषि की विशेषता होती थी, के साथ उत्पादन का आधार पूरे घर का श्रम और संसाधन होता था, स्वाभाविक रूप से, घर (महिलाओं के लिए) और विश्व (पुरुषों के लिए)के मध्य लिंग अलगाव इस संदर्भ में संभव नहीं था

हालांकि, महिलाओं के जैविकीय कार्यों, से संबंधित भेदभाव जारी रहा, उदाहरणस्वरूप, पश्चिमी भारत में मासिक धर्म अवस्था से गुजर रही महिलाओं को हल या कुम्हार का चाक स्पर्श करने की स्वीकृति नहीं थी, और उन्हें बंगाल में उन उद्यानों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी जहाँ पान के पत्तों को उगाया जाता था कारीगरी कार्य जैसे कि सूत कताई, मिट्टी के बर्तनों के लिए मिट्टी को छानना और सानना, और कढ़ाई आदि उत्त्पादन के कई पहलु थे जो महिला श्रम पर निर्भर करते थे, उत्पाद जितना अधिक वाणिज्यिक होता था, इसके उत्त्पादन हेतु महिलाओं के श्रम की उससे कहीं अधिक मांग होती थी वास्तव में, किसान और कारीगर महिलाएँ केवल खेतों में ही कार्य नहीं करती थी बल्कि यदि आवश्यक हो तो नियोक्ताओं के घर एवं बाजार में भी जाया करती थीं महिलाओं को कृषि प्रधान समाज में एक महत्वपूर्ण संसाधन माना जाता था, क्योंकि वो समाज में बच्चों की जन्मदायीनी होती थी, जो श्रम पर निर्भर करता था, इसी समय, महिलाओं की मृत्यु दर भी उच्च थी, कुपोषण, बार बार गर्भधारण, एवं बच्चे के जन्म के समय महिलाओं की मृत्यु, से प्रायः पत्नियों की संख्या में कमी हो जाती थी, कई ग्रामीण समुदायों में विवाह में दुल्हन के परिवार को दहेज के स्थान पर दुल्हन की कीमत का भुगतान करने की आवश्यकता होती थी, पुनर्विवाह, तलाकशुदा और विधवा महिलाओं दोनों के के लिए वैध माना जाता था एक प्रजनन शक्ति के रूप में महिलाओं के साथ एक महत्ता जुड़ी हुई थी, इसके अलावा उन पर से नियंत्रण खोने का डर भी बड़ा होता था, स्थापित सामाजिक मानदंडों के अनुसार एक पुरुष, घर का मुखिया होता था इस प्रकार महिलाओं को, परिवार और समुदाय के पुरुष सदस्यों द्वारा सख्त नियंत्रण में रखा जाता था यदि महिलाओं की ओर से बेवफाई (दाम्पत्य विश्वासघात) किये जाने का संदेह होता था तो उन्हें कठोर दण्ड दिया जा सकता था पश्चिमी भारत से प्राप्त दस्तावेज़ में, महिलाओं द्वारा निवारण और न्याय की मांग हेतु ग्राम पंचायत को भेजी गई याचिकाएं आलेखबद्ध हैं, पत्नीयाँ अपने पति की बेवफाई या घर (गृहस्थी) के पुरुष मुखिया, द्वारा पत्नी और बच्चों की उपेक्षा के खिलाफ प्रत्यापत्ति व्यक्त किया करती थीं, पुरुष द्वारा बेवफाई हमेशा दंडित नहीं की जाती थी, जबकि राज्य और "श्रेष्ठतर" जाति समूहों द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कि परिवार को पर्याप्त रूप से सुविधाएं प्रदान की गई हैं, अथवा नहीं, हस्तक्षेप किया जाता था,अधिकाँश मामलों में जिनमें महिलाओं द्वारा पंचायत को याचिका दी गई थी, महिलाओं के नाम दस्तावेज़ों में सम्मिलित नहीं किये गए थे: याचिकाकर्ता को घर के पुरुष मुखिया की मां, बहन अथवा पत्नी के रूप में संदर्भित किया गया था

संपत्तिवान कुलीन वर्ग में, महिलाओं को संपत्ति का वारिस होने का अधिकार था पंजाब से प्राप्त उदाहरण दर्शाते हैं कि विधवाओं सहित महीलाएँ, उन्हें विरासत में प्राप्त हुई संपत्ति के विक्रेता के रूप में ग्रामीण क्षेत्र के बाजार में सक्रिय रूप से भाग लिया करती थीं,हिन्दू और मुस्लिम महीलाएँ, उन्हें विरासत में प्राप्त जमींदारी को बेचने अथवा गिरवी रखने के लिए स्वतंत्र थीं, महिला जमींदार अठारहवीं सदी के बंगाल में पहचानी जाती(विख्यात) थीं, वास्तव में, अठारहवीं सदी की जमींदारीयों में से एक सबसे बड़ी और सर्वाधिक विख्यात जमींदारी जो कि राजशाही की थी, के शीर्ष पर एक महिला थी


Q. 160911 सोलहवीं और सत्रहवीं सदियों के कृषि इतिहास एवं इसकी जानकारी के स्त्रोतों पर प्रकाश डालिए।
Right Answer is:

SOLUTION

चूंकि किसान अपने बारे में खुद नहीं लिखा करते थे इसलिए ग्रामीण समाज के क्रियाकलापों की जानकारी हमें उन लोगों से नहीं मिलती जो खेतों में काम करते थे। नतीजतन, सोलहवीं और सत्रहवीं सदियों के कृषि इतिहास को समझने के लिए हमारे मुख्य स्त्रोत वे ऐतिहासिक ग्रंथ व दस्तावेज हैं जो मुगल दरबार की निगरानी में लिखे गए थे। इसके अलावा प्रसिद्ध लेखकों और यात्रियों के विवरण भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

सबसे महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथों में एक था आइन-ए-अकबरी (संक्षेप में आइन)जिसे अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा था। खेतों की नियमित जुताई की तसल्ली करने के लिए, राज्य के नुमाइंदों द्वारा करों की उगाही के लिए और राज्य व ग्रामीण सत्तापोशों यानी कि जमींदारों के बीच के रिश्तों के नियमन के लिए जो इंतजाम राज्य ने किए थे, उसका लेखा-जोखा इस ग्रंथ में बड़ी सावधानी से पेश किया गया है। आइन का मुख्य उद्देश्य अकबर के सम्राज्य का एक ऐसा खाका पेश करना था जहाँ एक मजबूत सत्ताधारी वर्ग सामाजिक मेल-जोल बना कर रखता था। आइन के लेखक के मुताबिक, मुगल राज्य के खिलाफ कोई बगावत या किसी भी किस्म की स्वायत्त सत्ता की दावेदारी का असफल होना पहले ही तय था। दूसरे शब्दों में, किसानों के बारे में जो कुछ हमें आइन  से पता चलता है वह सत्ता के ऊंचे गलियारों का नजरिया है। खुशकिस्मती से आइन की जानकारी के साथ-साथ हम उन स्त्रोतों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो मुगलों की राजधानी से दूर के इलाकों में लिखे गए थे। इनमें सत्रहवीं व अठारहवीं सदियों के गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से मिलने वाले वे दस्तावेज शामिल हैं जो सरकार कीआमदनी की विस्तृत जानकारी देते हैं। इसके अलावा, ईस्ट इंडिया कंपनी के बहुत सारे दस्तावेज भी हैं जो पूर्वी भारत में कृषि-संबंधों का उपयोगी खाका पेश करते हैं। ये सभी स्त्रोत किसानों, जमींदारों और राज्य के बीच तने झगड़ों को दर्ज करते हैं। लगे हाथ, ये स्त्रोत यह समझने में हमारी मदद करते हैं कि किसान राज्य को किस नजरिये से देखते थे और राज्य से उन्हें कैसे न्याय की उम्मीद थी।

किसान और उनकी जमीन-

 मुगल काल के भारतीय-फारसी स्त्रोत किसान के लिए आमतौर पर रैयत (बहुवचन,  रिआया ) या मुजरियान शब्द का इस्तेमाल करते थे। साथ ही, हमें किसान या आसामी जैसे शब्द भी मिलते हैं। सत्रहवीं सदी के स्त्रोत दो किस्म के किसानों की चर्चा करते हैं–

खुद-काश्त व पाहि-काश्त-पहले किस्म के किसान वे थे जो उन्हीं गाँवों में रहते थे जिनमें उनकी जमीन थीं। दूसरे (पाहि-काश्त) वे खेतिहर थे जो दूसरे गाँवों से ठेके पर खेती करने आते थे। लोग अपनी मर्जी से भी पाहि-काश्त बनते थे (मसलन, अगर करों की शर्तें किसी दूसरे गाँव में बेहतर मिलें) और मजबूरन भी (मसलन, अकाल या भुखमरी के बाद आर्थिक परेशानी से)। उत्तर भारत के एक औसत किसान के पास शायद ही कभी एक जोड़ी बैल और दो हल से ज्यादा कुछ होता था, ज़्यादातर के पास इससे भी कम। गुजरात में जिन किसानों के पास 6 एकड़ के करीब जमीन थी वे समृद्ध माने जाते थे, दूसरी तरफ, बंगाल में एक औसत किसान की जमीन की उपरी सीमा 5 एकड़ थी, 10 एकड़ जमीन वाले आसामी को अमीर समझा जाता था। खेती व्यक्तिगत मिल्कियत के सिद्धान्त पर आधारित थी। किसानों की जमीन उसी तरह खरीदी और बेची जाती थी जैसे दूसरे संपत्ति मालिकों की।

सिंचाई और तकनीक-

जमीन की बहुतायत, मजदूरों की मौजूदगी, और किसानों की गतिशीलता की वजह से कृषि का लगातार विस्तार हुआ। चूंकि खेती का प्राथमिक उद्देश्य लोगों का पेट भरना था, इसलिए रोजमर्रा के खाने की जरूरतें जैसे चावल, गेहूँ, ज्वार इत्यादि फसलें सबसे ज्यादा उगाई जाती थीं। जिन इलाकों में प्रति वर्ष 40 इंच या उससे ज्यादा बारिश होती थी, वहाँ कमोबेश चावल की खेती होती थी। कम और कमतर बारिश वाले इलाकों में क्रमशः गेहूँ व ज्वार-बाजरे की खेती ज्यादा प्रचलित थी।मानसून भारतीय कृषि की रीढ़ था, जैसा कि आज भी है। लेकिन कुछ ऐसी फसलें भी थीं जिनके लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत थी। इनके लिए  सिंचाई के कृत्रिम उपाय बनाने पड़े।  सिंचाई कार्यों को राज्य की मदद भी मिलती थी। मसलन, उत्तर भारत में राज्य ने कई नयी नहरें व नाले खुदवाए और कई पुरानी नहरों की मरम्मत करवाई, जैसे कि शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान पंजाब में शाह नहर ।वैसे तो खेती मेहनतकशी का काम था लेकिन किसान ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल भी करते थे जो अकसर पशुबल पर आधारित होती थीं। ऐसा एक उदाहरण लकड़ी के उस हल्के हल का दिया जा सकता है जिसको एक छोर पर लोहे की नुकीली धार या फाल लगाकर आसानी से बनाया जा सकता था। ऐसे हल मिट्टी को बहुत गहरे नहीं खोदते थे जिसके कारण तेज गर्मी के महीनों में नमी बची रहती थी। बैलों के जोड़े के सहारे खींचे जाने वाले बरमे का इस्तेमाल बीज बोने के लिए किया जाता था। लेकिन बीजों को हाथ से छिड़क कर बोने का रिवाज ज्यादा प्रचलित था। मिट्टी की गुड़ाई और साथ-साथ निराई के लिए लकड़ी के मूठ वाले लोहे के पतले धार काम में लाए जाते थे।

फसलें -

मौसम के दो मुख्य चक्रों के दौरान खेती की जाती थीः एक खरीफ (पतझड़ में) और दूसरी रबी (वसंत में)। यानी सूखे इलाकों और बंजर जमीन को छोड़ दें तो ज़्यादातर जगहों पर साल में कम से कम दो फसलें होती थीं। जहाँ बारिश या  सिंचाई के अन्य साधन हर वक्त मौजूद थे वहाँ तो साल में तीन फसलें भी उगाई जाती थीं। इस वजह से पैदावार में भारी विविधता पाई जाती थी। उदाहरण के तौर पर, आइन हमें बताती है कि दोनों मौसम मिलाकर, मुगल प्रांत आगरा में 39 किस्म की फसलें उगाई जाती थीं जबकि दिल्ली प्रांत में 43 फसलों की पैदावार होती थी। बंगाल में सिर्फ चावल की 50 किस्में पैदा होती थीं। हालाँकि दैनिक आहार की खेती पर ज्यादा ज़ोर दिया जाता था मगर इसका मतलब यह नहीं था कि मध्यकालीन भारत में खेती सिर्फ गुजारा करने के लिए की जाती थी। स्त्रोतों में हमें अकसर जिन्स-ए-कामिल (सर्वोत्तम फसलें) जैसे लफ़्ज़ मिलते हैं । मुगल राज्य भी किसानों को ऐसी फसलों की खेती करने के लिए बढ़ावा देता था क्योंकि इनसे राज्य को ज्यादा कर मिलता था। कपास और गन्ने जैसी फसलें बेहतरीन जिन्स-ए-कामिल थीं। मध्य भारत और दक्कनी पठार में फैले हुए जमीन के बड़े-बडे़ टुकड़ों पर कपास उगाई जाती थी, जबकि बंगाल अपनी चीनी के लिए मशहूर था। तिलहन (जैसे सरसों) और दलहन भी नकदी फसलों में आती थीं। इससे पता चलता है कि एक औसत किसान की जमीन पर किस तरह पेट भरने के लिए होने वाले उत्पादन और व्यापार के लिए किए जाने वाले उत्पादन एक दूसरे से जुडे़ हुए थे।

सत्रहवीं सदी में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कई नयी फसलें भारतीय उपमहाद्वीप पहुँचीं। मसलन, मक्का भारत में अफ्रीका और स्पेन के रास्ते आया और सत्रहवीं सदी तक इसकी गिनती पश्चिम भारत की मुख्य फसलों में होने लगी। टमाटर, आलू और मिर्च जैसी सब्जियाँ  नयी दुनिया से लाई गईं। इसी तरह अनानास और पपीता जैसे फल वहीं से आए।


Q. 160912 पंचायत और मुखिया पर एक टिप्पणी लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

पंचायत का संगठन-

गाँव की पंचायत  में बुजुर्गों का जमावड़ा होता था। आमतौर पर वे गाँव के महत्त्वपूर्ण लोग  हुआ करते  थे जिनके पास अपनी संपत्ति के पुश्तैनी अधिकार होते थे। जिन गाँवों में कई जातियों के लोग रहते थे, वहाँ अकसर पंचायत में भी विविधता पाई जाती  थी। यह एक ऐसा अल्पतंत्र था जिसमें गाँव के अलग-अलग संप्रदायों और जातियों की नुमाइंदगी होती थी। फिर भी इसकी संभावना कम ही है कि छोटे-मोटे और नीच काम करने वाले खेतिहर मजदूरों के  लिए इसमें कोई जगह होती होगी। पंचायत का फैसला गाँव में सबको मानना पड़ता था।

 

मुखिया का चयन-

पंचायत का सरदार एक मुखिया होता था जिसे मुक़द्दम या मंडल कहते थे। कुछ स्त्रोतों से ऐसा लगता है कि मुखिया का चुनाव गाँव के बुजुर्गों की आम सहमति से होता था और इस चुनाव के बाद उन्हें इसकी मंजूरी जमींदार से लेनी पड़ती थी। मुखिया अपने ओहदे पर तभी तक बना रहता था जब तक गाँव के बुजुर्गों को उस पर भरोसा था। ऐसा नहीं होने पर बुजुर्ग उसे बर्खास्त कर सकते थे। गाँव के आमदनी व खर्चे का हिसाब-किताब अपनी निगरानी में बनवाना मुखिया का मुख्य काम था और इसमें पंचायत का पटवारी उसकी मदद करता था।

पंचायत के कार्य-

पंचायत का खर्चा गाँव के उस आम ख़जाने से चलता था जिसमें हर व्यक्ति अपना योगदान देता था। इस ख़जाने से उन कर अधिकारियों की ख़ातिरदारी का ख़र्चा भी किया जाता था जो समय-समय पर गाँव का दौरा किया करते थे। दूसरी ओर, इस कोष का इस्तेमाल बाढ़ जैसी प्राकृतिक विपदाओं से निपटने के लिए भी होता था और ऐसे सामुदायिक कार्यों के लिए भी जो किसान खुद नहीं कर सकते थे, जैसे कि मिट्टी के छोटे-मोटे बाँध बनाना या नहर खोदना। पंचायत का एक बड़ा काम यह तसल्ली करना था कि गाँव में रहने वाले अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी जाति की हदों के अंदर रहेंगे । पूर्वी भारत में सभी शादियाँ मंडल की मौजूदगी में होती थीं। यूँ कहा जा सकता है कि जाति की अवहेलना रोकने के लिए लोगों के आचरण पर नजर रखना गाँव के मुखिया की जिम्मेदारियों में से एक था। पंचायतों को जुर्माना लगाने और समुदाय से निष्कासित करने जैसे ज्यादा गंभीर दंड देने के अधिकार थे। समुदाय से बाहर निकालना

एक कड़ा कदम था जो एक सीमित समय के लिए लागू किया जाता था। इसके तहत दंडित व्यक्ति को (दिए हुए समय के लिए) गाँव छोड़ना पड़ता था। इस दौरान वह अपनी जाति और पेशे से हाथ धो बैठता था। ऐसी नीतियों का मकसद जातिगत रिवाजों की अवहेलना रोकना था। ग्राम पंचायत के अलावा गाँव में हर जाति की अपनी पंचायत होती थी। समाज में ये पंचायतें काफी ताकतवर होती थीं। राजस्थान में जाति पंचायतें अलग-अलग जातियों के लोगों के बीच दीवानी के झगड़ों का निपटारा करती थीं। वे जमीन से जुड़े दावेदारियों के झगड़े सुलझाती थीं, यह तय करती थीं कि शादियाँ जातिगत मानदंडों के मुताबिक हो रही हैं या नहीं, और यह भी कि गाँव के आयोजन में किसको किसके उपर तरजीह दी जाएगी। कर्मकांडीय वर्चस्व किस क्रम में होगा। फौजदारी न्याय को छोड़ दें तो ज़्यादातर मामलों में राज्य जाति पंचायत के फैसलों को मानता था।

 

पंचायत और न्याय-

पश्चिम भारत -ख़ासकर राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे प्रांतों- के संकलित दस्तावेजों में ऐसी कई अर्ज़ियाँ हैं जिनमें पंचायत से ऊंची जातियों या राज्य के अधिकारियों के खि़लाफ जबरन कर उगाही या बेगार वसूली की शिकायत की गई है। आमतौर पर यह अर्ज़ियाँ ग्रामीण समुदाय के सबसे निचले तबके के लोग लगाते थे। अकसर सामूहिक तौर पर भी ऐसी अर्ज़ियाँ दी जाती थीं। इनमें किसी जाति या संप्रदाय विशेष के लोग संभ्रांत समूहों की उन माँगों के खि़लाफ अपना विरोध जताते थे जिन्हें वे नैतिक दृष्टि से अवैध् मानते थे। उनमें एक थी बहुत ज्यादा कर की माँग क्योंकि इससे किसानों का दैनिक गुजारा ही जोखिम में पड़ जाता था, ख़ासकर सूखे या ऐसी दूसरी विपदाओं के दौरान। उनकी नजरों में जिंदा रहने के लिए न्यूनतम बुनियादी साधन उनका परंपरागत रिवाजी हक था। वे समझते थे कि ग्राम पंचायत को इसकी सुनवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य अपना नैतिक फर्ज  अदा करे और न्याय करे।

 

नीचली जाति के किसानों और राज्य के अधिकारियों या स्थानीय जमींदारों के बीच झगड़ों में पंचायत के फैसले अलग-अलग मामलों में अलग-अलग हो सकते थे। अत्यधिक कर की माँगों के मामले में पंचायत अकसर समझौते का सुझाव देती थी। जहाँ समझौते नहीं हो पाते थे, वहाँ किसान विरोध के ज्यादा उग्र रास्ते अपनाते थे, जैसे कि गाँव छोड़कर भाग जाना। जोतने लायक खाली जमीन अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध थी जबकि श्रम को लेकर प्रतियोगिता थी। इस वजह से, गाँव छोड़कर भाग जाना खेतिहरों के हाथ में एक बड़ा प्रभावी हथियार था।


Q. 160913 निम्नलिखित के विशेष संदर्भ में मुगल समाज में कृषि संबंधों की संरचना के प्रभाव की व्याख्या कीजिये- (I) ग्रामीण दस्तकार (ii) जाति और ग्रामीण माहौल ।
Right Answer is:

SOLUTION

ग्रामीण दस्तकार

अलग-अलग तरह के उत्पादन कार्य में जुटे लोगों के बीच फैले  लेन-देन के रिश्ते गाँव का एक और रोचक पहलू था। अग्रेजी शासन के शुरुआती वर्षों में किए गए गाँवों के सर्वेक्षण और मराठाओं के दस्तावेज बताते हैं कि गाँवों में दस्तकार काफी अच्छी तादाद में रहते थे। कहीं-कहीं तो कुल घरों के 25 प्रतिशत फीसदी घर दस्तकारों के थे। कभी-कभी किसानों और दस्ताकारों के बीच फर्क करना मुश्किल होता था क्योंकि कई ऐसे समूह थे जो दोनों किस्म के काम करते थे। खेतिहर और उसके  परिवार के सदस्य कई तरह की वस्तुओं के उत्पादन में शिरकत करते थे।

मसलन-रँगरेजी, कपड़े पर छपाई, मिट्टी के बरतनों को पकाना, खेती के औजारों को बनाना या उनकी मरम्मत करना। उन महीनों में जब उनके पास खेती के काम से फूरसत होती-जैसे कि बुआई और सुहाई के बीच या सुहाई और कटाई के बीच-उस समय ये खेतिहर दस्तकारी का काम करते थे। कुम्हार, लोहार, बढ़ई, नाई, यहाँ तक कि सुनार जैसे ग्रामीण दस्तकार भी अपनी सेवाएँ गाँव के लोगों को देते थे जिसके  बदले गाँव वाले उन्हें अलग-अलग तरीकों से उन सेवाओं की अदायगी करते थे। आमतौर पर या तो उन्हें फसल का एक हिस्सा दे दिया जाता था या फिर गाँव की जमीन का एक टुकड़ा, शायद कोई ऐसी जमीन जो खेती लायक होने के बावजूद बेकार पड़ी थी। अदायगी की सूरत क्या होगी ये शायद पंचायत ही तय करती थी। महाराष्ट्र में ऐसी जमीन दस्तकारों की  मीरास या वतन बन गई जिस पर दस्तकारों का पुश्तैनी अधिकार होता था।यही व्यवस्था कभी-कभी थोडे़ बदले हुए रूप में भी पायी जाती थी जहाँ दस्तकार और हरेक खेतिहर परिवार परस्पर बातचीत करके  अदायगी

की किसी एक व्यवस्था पर राजी होते थे। ऐसे में आमतौर पर वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय होता था। उदाहरण के तौर पर,

अठारहवीं सदी के स्त्रोत बताते हैं कि बंगाल में जमींदार उनकी सेवाओं के बदले लोहारों, बढ़ई और सुनारों तक को रोज़  का भत्ता और खाने के लिए नकदी देते थे।  इस व्यवस्था को जजमानी कहते थे, हालांकि यह शब्द सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में बहुत इस्तेमाल नहीं होता था। ये सबूत रूचिकर हैं क्योंकि इनसे पता चलता है कि गाँव के छोटे स्तर पर फेर-बदल के रिश्ते कितने पेचीदा थे। ऐसा नहीं है कि नकद अदायगी का चलन बिलकुल ही नदारद था।

 

जाति और ग्रामीण माहौल-

जाति और अन्य जाति जैसे भेदभावों की वजह से खेतिहर किसान कई तरह के समूहों में बँटे थे। खेतों की जुताई करने वालों में एक बड़ी तादाद ऐसे लोगों की थी जो नीच समझे जाने वाले कामों में लगे थे, या फिर खेतों में मजदूरी करते थे। हालाँकि खेती लायक जमीन की कमी नहीं थी, फिर भी कुछ जाति के लोगों को सिर्फ नीच समझे जाने वाले काम ही दिए जाते थे। इस तरह वे गरीब रहने के लिए मजबूर थे। जनगणना तो उस वक्त नहीं होती थी, पर जो थोडे़ बहुत आँकड़े और तथ्य हमारे पास हैं उनसे पता चलता है कि गाँव की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा ऐसे ही समूहों का था। इनके पास संसाधन सबसे कम थे और ये जाति व्यवस्था की पाबंदियों से बँधे थे। इनकी हालत कमोबेश वैसी ही थी जैसी कि आधुनिक भारत में दलितों की। दूसरे संप्रदायों में भी ऐसे भेदभाव फैलने लगे थे। मुसलमान समुदायों में हलालख़ोरान जैसे  ‘नीच’ कामों से जुड़े समूह गाँव की हदों के बाहर ही रह सकते थे, इसी तरह बिहार में मल्लाहजादाओं(शाब्दिक अर्थ, नाविकों के पुत्र), की तुलना दासों से की जा सकती थी।


Q. 160914 कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण दीजिये।
Right Answer is:

SOLUTION

1. सोलहवीं तथा सत्रहवीं शताब्दी में महिलाएँ और पुरूष कन्धे से कन्धा मिलाकर खेतों में काम करते थे। महिलाएँ बुआई, निराई व कटाई के साथ-साथ पकी हुई फसल का दाना निकालने का काम करती थीं। 2. पश्चिम भारत में महिलाओं की जैव वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रति अनेक पूर्वाग्रह थे उदाहरणस्वरूप पश्चिम भारत में रजस्वला स्त्रियों को हल या कुम्हार का चाकू छूने की इजाजत नहीं थी। 3. कृषि आधारित अन्य कार्यो में भी महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण था जैसे सूत कातना, बर्तन बनाने के लिए मिट्टी साफ करना और कपड़ों पर कढ़ाई जैसे दस्तकारी आदि। 4. किसी वस्तु का जितनी वाणिज्यीकरण होता था, उस वस्तु के उत्पादन के लिए महिलाओं के श्रम की उतनी अधिक माँग होती थी। जरूरत होने पर किसान व दस्तकार महिलाएँ खेतों में भी जाती थीं व नियोक्ताओं के घरों व बाजार में जाकर भी काम करती थीं।


Q. 160915 कृषि इतिहास लिखने में ‘आइन’ को स्रोत रूप में इस्तेमाल करने में क्या समस्याएँ हैं इतिहासकार इन समस्याओं से कैसे निपटते हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

कृषि इतिहास को लिखने में ‘आइन’ को स्त्रोत रूप में प्रयोग करने में मुख्य समस्याऐंः-1. आंकड़ों के जोड़ में गलतियाँ- आँकड़ो के जोड़ में कई गलतियाँ पाई गई हैं।2. शासक वर्ग का दृष्टिकोण-‘आइन’ से किसानों के बारें में प्राप्त जानकारी शासक वर्ग का दृष्टिकोण मात्र है ना कि किसानों का। 3. संख्यात्मक आँकड़ो में विषमताएँ- सभी प्रान्तों से आँकड़े एक ही मानक के अनुरूप एकत्र नहीं किये गए। कुछ प्रांतो की विस्तृत सूचनाएँ संकलित की गई हैं, जबकि बंगाल व उड़ीसा के लिए सूचनाएँ उपलब्ध नहीं हैं।4. मूल्यों और मजदूरों की दरों की अपर्याप्त सूची-‘आइन’ में मौजूद मूल्यों व मजदूरी की दरें मात्र राजधानी क्षेत्र व उसके आस-पास के क्षेत्रों से ली गई हैं ना कि संपूर्ण देश से। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए इतिहासकार संबंधित सदियों के उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा ईस्ट इंडिया कंपनी के सरकारी दस्तावेजों की मदद ली जा सकती है।


Q. 160916 शाहजहाँ के अधीन मुगल स्थापत्य की दो प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। [1 + 1]
Right Answer is:

SOLUTION

शाहजहाँ को संगमरमर की सफेद इमारत बनवाने का शौक था जैसे उसने आगरा में ताजमहल तथा मोती मस्जिद का निर्माण करवाया इसके अतिरिक्त उसने लाल पत्थर से दिल्ली का लाल किला, दीवाने खास, जामा मस्जिद इत्यादि इमारतों का निर्माण करवाया। मयूर सिंहासन का निर्माण भी शाहजहाँ ने ही कराया था। शाहजहाँ की इमारतों में सोने के रंग का अधिक प्रयोग नक्काशी, रत्नों और मणियों का कलात्मक जड़ाव दृष्टिगोचर होता है।


Q. 160917 फरीद कौन था वह सहसराम की जागीर पर किस प्रकार बैठा था ?
Right Answer is:

SOLUTION

शेरशाह सूरी का बचपन का नाम फरीद था । वह बिहार में सहसराम की जागीर के स्वामी हसन का पुत्र था । अपने पिता हसन की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में सहसराम की जागीर पर बैठा था


Q. 160918 शेरशाह व जलाल खाँ में युद्ध होने के क्या कारण थे ।
Right Answer is:

SOLUTION

जलाल की माँ ने शेरशाह को जलाल खाँ के छोटे होने के कारण उसका संरक्षक नियुक्त किया शेरशाह ने बिहार की लिए अच्छी व्यवस्था की जिससे कुछ सरदारों ने युवक जलाल खाँ के कान शेरशाह के विरुद्ध भर दिए।  जिस कारण जलाल खाँ ने सत्ता वापस लेने का निश्चय किया। और जलाल खाँ ने शेरशाह से युद्ध किया


Q. 160919 ग्राम शासन में कौन-कौन से पद होते थे?
Right Answer is:

SOLUTION

शासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी। प्रत्येक ग्राम में एक मुखियामुकद्दम, पटवारी  और चौकीदार होते थे । ग्राम में शांति व्यवस्था और सुरक्षा का भार स्थानीय जनता और कर्मचारियों पर छोड़ दिया गया था 


Q. 160920 शेरशाह को गुप्तचर विभाग के गठन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
Right Answer is:

SOLUTION

शेरशाह ने जिस समय सुल्तान का पद ग्रहण किया था । वह काल षड्यन्त्रों एवं कुचक्रों का काल था । इन षड्यन्त्रों से बचने के लिए उसने एक गुप्तचर विभाग का गठन किया था  


Q. 160921 शेरशाह द्वारा निर्मित चार सड़कों के नाम बताओं ?
Right Answer is:

SOLUTION

शेरशाह ने चार प्रमुख सडकों का निर्माण कराया :-

(1) आगरा से बुरहानपुर तक।

(2) आगरा से मारवाड़ तक।

(3) मुल्तान से लाहौर तक।  

(4) बंगाल से सिंध तक ।


Q. 160922 स्थानीय शासन में शिकदार-ए-शिकदारान और मुसिफ-ए-मुसिफान का क्या कार्य था
Right Answer is:

SOLUTION

स्थानीय शासन में केंद्र की ओर से दो पदाधिकारी नियुक्त किये जाते थे शिकदार--शिकदारान और मुसिफ--मुसिफान  स्थानीय शासन में केंद्र की ओर से दो पदाधिकारी नियुक्त किये जाते थे । सरकार में शान्ति स्थापित करने के लिए सर्वोच्च  अधिकारी के पास एक सेना रहती थी वह अपने अधीन परगनों के शिकदारों का निरीक्षण  एवं नियंत्रण करता था  । इन दोनों पदाधिकारों के अधीन अनेक कर्मचारी सरकारों का पूर्ण प्रबन्ध करने के लिए होते थे


Q. 160923 खुसरो के विद्रोह के खुर्रम के उत्थान का प्रारम्भ किस प्रकार हुआ?
Right Answer is:

SOLUTION

खुसरो के विद्रोह के साथ ही खुर्रम के उत्थान का काल आरम्भ होता है खुसरो के विद्रोह का दमन करने के लिए जहाँगीर को राजधानी छोड़कर बहार जाना पड़ा तथा राजधानी की देखभाल का भर उसने खुर्रम पर छोड़ दिया।


Q. 160924 शहजादे परवेज की दक्षिण असफलता के बाद खुर्रम ने दक्षिण में क्या नीति अपनाई थी ?
Right Answer is:

SOLUTION

शहजादे परवेज के असफल होने पर खुर्रम दक्षिण भारत गया तथा अहमदनगर को पराजित कर उसने मलिक अम्बर को स्वीकार करने के लिए बाध्य किया इन विजयों ने शहजादे की शान और प्रतिष्ठा में अभिवृद्धि हुई


Q. 160925 शाहजहाँ द्वारा जुझार सिंह के पिता की अनुचित ढंग से संपत्ति प्राप्त करने की जाँच का जुझार सिंह पर क्या प्रभाव पड़ा ?
Right Answer is:

SOLUTION

शाहजहाँ ने जुझार सिंह के पिता की अनुचित ढंग से संपत्ति प्राप्त करने की जाँच की जाये इस बात से क्रुद्ध होकर जुझार सिंह आगरा से अपने राज्य ओरछा लौट आया तथा शाहजहाँ के विरुद्ध  युद्ध किया


Q. 160926 शाहजहाँ ने खानेजहाँ को मराठों से सहयोग न देने के लिए क्या योजना बनाई थी ?
Right Answer is:

SOLUTION

शाहजहाँ ने कूटनीति से काम लिया उसने बड़े-बड़े मराठा सरदारों को उच्च पद तथा जागीर देकर उन्हें अपने सहयोगी बना लिया जिससे वे खानेजहाँ के कोई सहायता  कर सके


Q. 160927 रतनपुर के जमींदार द्वारा शाहजहाँ की अवज्ञा का क्या परिणाम हुआ ?
Right Answer is:

SOLUTION

रतनपुर के जमींदार बाबू लक्ष्मण था उसने शाहजहाँ की अवज्ञा की जिसे अवज्ञा करने का दण्ड देने के लिए अब्दुल्ला खाँ को भेजा गया बाबू  लक्ष्मण ने अमर सिंह की मध्यस्थता से क्षमा माँग ली तथा उसे मुग़ल दरबार में भेज दिया गया


Q. 160928 खानेजहाँ लोदी के दमन का श्रेय किसे प्राप्त हुआ उन्हें शाहजहाँ ने कौन सी उपाधि प्रदान की?
Right Answer is:

SOLUTION

खानेजहाँ लोदी के दमन का श्रेय अब्दुल्ला खाँ और सैय्यद मुजफ्फर खाँ को है इन्हें शाहजहाँ ने क्रमशः फिरोज जंग तथा खानेजहाँ की उपाधि प्रदान की


Q. 160929 मुगल बादशाहों द्वारा इत्तिवृत क्यों तैयार करवाये जाते थे ? लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

इसका कारण धार्मिक था। तारीख के माध्यम से पैगंबर मोहम्मद, पवित्र ख़लीफ़ाओं और दूसरे धार्मिक नेताओं के जीवन और उनके काल से संबंधित सूचना प्राप्त की जाती थी।


Q. 160930 मुगल पांडुलिपियों में चित्रों के समावेश का क्या महत्व था? (कोई दो)
Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय ग्रामीण दस्तकारों की स्थिति:-1. गाँवों में बड़ी संख्या में दस्तकारों की उपस्थितिः-अंग्रेजी शासन के सर्वेक्षण दस्तावेज व मराठों के दस्तावेजों से गाँवों में दस्तकारों की बड़ी संख्या का पता चलता हैं। कुछ गाँवों की कुल जनसंख्या का 2.5 प्रतिशत से जयादा दस्तकारों का था।2. ग्रामीण दस्तकारों द्वारा सेवाएँ देनाः- गाँव के अन्य लोग इन दस्तकारों की सेवाओं पर निर्भर थ। कुम्हार, बबंगाल में जमींदार सेवाओं के बदले दस्तकारों को ‘दैनिक 1. चित्र पुस्तक के सौंदर्य में अभिवृद्धि करते थे।2. यह राजा या ताकतवर पद के विरोध में विचारों को सुंदर तरीके से व्यक्त करने का सशक्त माध्यम था। व खाने के लिए नकदी देते थे इस व्यवस्था को ‘‘जजमानी’’ कहते थे। इसके अलावा वस्तु/सेवाओं के विनिमय का प्रचलन भी था।कभी-कभी किसानों व दस्तकारों के मध्य अंतर करना कठिन होता था क्योंकि कई ऐसे समूह भी थे जो दोनों प्रकार के कार्य करते थे। 1. चित्र पुस्तक के सौंदर्य में अभिवृद्धि करते थे।2. यह राजा या ताकतवर पद के विरोध में विचारों को सुंदर तरीके से व्यक्त करने का सशक्त माध्यम था।


Q. 160931 हुमायूँ की प्रारम्भिक दो कठिनाइयों का उल्लेख कीजिए। [1+1]
Right Answer is:

SOLUTION

हुमायूँ की प्रारम्भिक दो कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैः

1. असंगठित साम्राज्यः बाबर का साम्राज्य संगठित था और राज्यों का समूह-मात्र था। बाबर की मृत्यु पर हुमायूँ को वह गद्दी प्राप्त हुई जो काँटों की सेज थी।

2. अफगानों की महत्वाकांक्षा- महमूद लोदी, शेर खाँ, नुसरत शाह, बहादूर शाह तथा आलम खाँ आदि अफगान शासक बाबर की मृत्यु की प्रतीक्षा में थे। जैसे ही उसका प्राणान्त हुआ वे स्वतन्त्र हो गये।


Q. 160932 हुमायूँ के पतन के दो कारणों का उल्लेख कीजिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

1) शेरशाह के पास प्रशिक्षित सेना थी। 2) शेरशाह महान् सेनानायक एवं कूटनीतिक था। 3) हुमायूँ को भाइयों व संबंधियों का सहयोग नहीं मिला।


Q. 160933 आप जात व सवार से क्या समझते हैं ? स्पष्ट करें
Right Answer is:

SOLUTION

अकबर द्वारा शुरू की गइ द्वैध मनसब प्रथा थी, ‘जात’ से व्यक्ति के वेतन तथा पद की स्थिति का बोध होता था जबकि ‘सवार’ से घुड़सवार दस्ते की संख्या प्रकट होती थी, और उन्हें दिया जाने वाला वेतन निश्चित होता था।


Q. 160934 मुगलों के अधीन क्षेत्रीय राज्यों के विस्तार को समझाइए ।
Right Answer is:

SOLUTION

मुगलों व स्थानीय सरदारों के बीच राजनीतिक-मैत्रियों के जरिए तथा विजयों के जरिए भारत के विविध क्षेत्रीय राज्यों को मिलाकर साम्राज्य की रचना की गई। साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन बाबर को उसके मध्य एशियाई स्वदेश फरगाना से प्रतिद्वंद्वी उजबेकों ने भगा दिया था। उसने सबसे पहले स्वयं को काबुल में स्थापित किया और फिर 1526 में अपने दल के सदस्यों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए क्षेत्रों और संसाधनों की खोज में वह भारतीय उपमहाद्वीप में और आगे की ओर बढ़ा। इसके उत्तराधिकारी नसीरुद्दीन हुमायूँ (1530-40, 1555-56) ने साम्राज्य की सीमाओं में विस्तार किया किन्तु वह अफगान नेता शेरशाह सूर से पराजित हो गया जिसने उसे ईरान के सफावी शासक के दरबार में निर्वासित होने को बाध्य कर दिया। 1555 में हुमायूँ ने सूरों को पराजित कर दिया किन्तु एक वर्ष बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। कई लोग जलालुद्दीन अकबर (1556-1605) को मुगल बादशाहों में महानतम मानते हैं क्योंकि उसने न वेफवल अपने साम्राज्य का विस्तार ही किया बल्कि इसे अपने समय का विशालतम, दृढ़तम और सबसे समृद्ध राज्य बनाकर सुदृढ़ भी किया। अकबर हिंदुकुश पर्वत तक अपने साम्राज्य की सीमाओं के विस्तार में सफल हुआ और उसने ईरान के सफावियों और तूरान (मध्य एशिया) के उजबेकों की विस्तारवादी योजनाओं पर लगाम लगाए रखी। अकबर के बाद जहाँगीर (1605-27), शाहजहाँ (1628-58) और औरंगजेब (1658-1707) के रूप में भिन्न-भिन्न व्यक्तित्वों वाले तीन बहुत योग्य उत्तराधिकारी हुए। इनके अधीन क्षेत्रीय विस्तार जारी रहा यद्यपि इसकी गति काफी धीमी रही। तीनों शासकों ने शासन के विविध यंत्रों को बनाए रखा और उन्हें सुदृढ़ किया।

सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दियों के दौरान शाही संस्थाओं के ढाँचे का निर्माण हुआ। इनके  अंतर्गत प्रशासन और कराधान के प्रभावशाली तरीके शामिल थे। मुगल शक्ति का सुस्पष्ट केंद्र दरबार था।

यहाँ राजनीतिक संबंध गढ़े जाते थे, साथ ही श्रेणियाँ और हैसियतें परिभाषित की जाती थीं। मुगलों द्वारा शुरू की गई राजनीतिक व्यवस्था सैन्य शक्ति और उपमहाद्वीप की भिन्न-भिन्न परंपराओं को समायोजित करने की चेतन नीति के संयोजन पर आधारित थी।

1707 के बाद औरंगजेब की मृत्योपरांत राजवंश की शक्ति घट गई। दिल्ली, आगरा अथवा लाहौर जैसे भिन्न राजधानी नगरों से नियंत्रित एक विशाल साम्राज्य तंत्र की जगह क्षेत्रीय शक्तियों ने अधिक स्वायत्तता अर्जित कर ली। फिर भी सांकेतिक रूप में ही सही पर मुगल शासक की प्रतिष्ठा ने अभी अपनी आभा नहीं खोई थी। 1857 में इस वंश के अंतिम वंशज बहादुरशाह ज़फर द्वितीय को अंग्रेजों ने उखाड़ फेंका।


Q. 160935 फ्रांसिस बुचानन भारत से इंग्लैंड सन ___में वापस चले गए थे।


A. 1816

B. 1815

C. 1818

D. 1813

Right Answer is: B

SOLUTION

फ्रांसिस बुकानन 1815 में भारत से इंग्लैंड लौट गए। वे पहरी राजमहल की पहाड़ियों में रहने वाले की जीवन शैली के बारे में वृत्तांत लिखा था।


Q. 160936 महाराजा मेहताब चंद___ के दौरान अंग्रेजों कि मदद की।


A. संथाल विद्रोह

B. पहरी विद्रोह

C. कोल विद्रोह

D. कोल विद्रोह

Right Answer is: A

SOLUTION

1868 में हथियारों की एक कोट के अनुदान के साथ उनको पुरस्कृत किया गया था, और 1877 में 13 तोपों की सलामी के साथ उनको नवाज़ा गाया था।


Q. 160937 जो व्यक्ति, जमींदार कीदबंग अधिकारी के कार्यके रूप में जाना जाता था, वह था__


A. हवालदार

B. मंडल

C. जोतेदार

D. लाथ्यल

Right Answer is: D

SOLUTION

लाथ्यल का शाब्दिक अर्थहै, जो लाठी या छड़ी ताकतें है। वह जमींदार के एक दिग्गज के रूप में कार्य किया करता था।


Q. 160938 1861 में, भारत में __की उत्पादन भरी मात्र में हुई।


A. कपास उत्पादन

B. चाय बाग़ान

C. रबर बागान

D. चावल उत्पादन

Right Answer is: A

SOLUTION

भारत में कपास की उत्पादन भरी मात्र में  1861 में हुई थी,उसी दौरान अमेरिकी नागरिक युद्ध छिड़ गई थी। बंबई से कई कपास विशेषज्ञों ने कई कपास जिलों का दौरा किया और उनको  प्रोत्साहित किया ।


Q. 160939 अम्लाह ___के अधिकारी था।


A. जमींदार

B. सांगत

C. गांव के चयनित रैयतों

D. जोतेदार

Right Answer is: A

SOLUTION

अम्लाह जमींदार का एक अधिकारी था,जिसको  किराए के संग्रह करने के लिए गांवों का दौरा करना पड़ता था।


Q. 160940 जोतेदार आमिर लोगो के उच्च वर्ग के__थे।


A. कलाकार

B. किसान

C. पंडित

D. जमींदार

Right Answer is: B

SOLUTION

जोतेदार अन्य रैयतों को ऋण के तौर पर  अपनी उपज बेच दिया करते थे । वे  उत्तर बंगाल में सबसे अधिक शक्तिशाली थे।


Q. 160941 वह लोगजो मुख्य रूप से राजमहल पहाड़ियों के आस पास रहते थे, वे थे-


A. पहाड़ी लोग

B. कोल

C. खासिस

D. भिल्स

Right Answer is: A

SOLUTION

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, अठारहवीं सदी के दौरान पहाड़ी लोग राजमहल की आसपास की पहाडियों में रहते थे, वे जीवित रहना के लिए वन उपज एवं झूम कृषि का आभास करते थे।


Q. 160942 अंग्रेजों के द्वारा पहली बार नए राजस्व प्रणाली स्थापित की जाने वाली प्रयास__में हुई थी।


A. अवध

B. ह्य्द्राबाद

C. बंगाल

D. हरयाणा

Right Answer is: C

SOLUTION

औपनिवेशिक शासन पहली बार 1757 में, बंगाल में स्थापित किया गया था। जब अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के वित्त पोषित सैनिकों ने सिराज-उद-दौला को प्लासी की लड़ाई मेंहराया था।


Q. 160943 1765 में,ईस्ट इंडिया कंपनी___ की दीवानी का अधिग्रहण किया था।


A. मद्रास

B. बॉम्बे

C. बंगाल

D. डेक्कन

Right Answer is: C

SOLUTION

1760 में, बंगाल (बर्दवान, मिदनापुर और चटगांव) के तीन बड़े और संसाधनों जिलों हासिल किया गया। बंगाल, बिहार और ओडिशा के राजस्व प्रशासन की दीवानी 1765 में अधिग्रहण कर लिया गाया था।


Q. 160944 वह व्यक्ति जो साहूकार एवं व्यापारी के रूप में काम किया करता था, वह है


A. साहूकार

B. जमींदार

C. जोतेदार

D. तालुकदार

Right Answer is: A

SOLUTION

साहूकार हमेशा रैयतों के लिए लंबी अवधि के ऋण का विस्तार करने के लिए तैयार रहते थे।


Q. 160945 संथाल विद्रोह के नेता___ थे।


A. महताब चाँद

B. सिधु मांझी

C. अंदुल राज

D. तेज्चंद

Right Answer is: B

SOLUTION

सिद्धू मांझी संथाल विद्रोह के नेता थे। 30 वीं जून 1855 पर, सिद्धू और कान्हू मुर्मू दस हजार संथाल जुटाए और ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के खिलाफ एक विद्रोह की घोषणा की।


Q. 160946 फ्रांसिस बुचानन सन__से सन __ के बीच बंगाल मेडिकल सेवा में कार्य किया था।


A. 1793-1815.

B. 1794-1815.

C. 1795-1815.

D. 17961815.

Right Answer is: B

SOLUTION

वे एक चिकिशक थे। उन्होंने कलकत्ता चिड़ियाघर का आयोजन किया था।


Q. 160947 अर्थशास्त्री डेविड रिकार्डो____ की जनि मानी हस्ती थे।


A. अमेरिका

B. इंग्लैंड

C. फ्रांस

D. जर्मनी

Right Answer is: A

SOLUTION

औपनिवेशिक अधिकारियों ने अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान रिकार्डियन विचारों से प्रभावित थे।


Q. 160948 रैयतवारी राजस्व प्रणाली के तहत, राजस्व ___द्वारा नियुक्त किया जाता था।


A. जमींदार

B. रैयत

C. जोतेदार

D. साहूकार

Right Answer is: B

SOLUTION

रैयतवारी राजस्व प्रणाली बॉम्बे डेक्कन द्वारा शुरू की गई थी। इसका पुन: सर्वेक्षण हर ३० वर्ष के बाद होती थी।


Q. 160949 ईस्ट इंडिया कंपनीबंगाल में अपना साशन मध्य ___ में शुरू की थी।


A. 1770के दशक

B. 1760के दशक

C. 1750के दशक

D. 1740के दशक

Right Answer is: B

SOLUTION

अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी (E.E.I.C.) बंगाल के ग्रामीण इलाकों में अपने राज स्थापित किया और वहां अपने राजस्व नीतियों को लागू किया।


Q. 160950 ज़मींदारो की 'कच्चारी' __ में हुआ करता था।


A. दरबारियों

B. न्यायालय

C. राजस्व

D. मंदिरों

Right Answer is: B

SOLUTION

ईस्ट इंडिया कंपनीज़मींदारो को नियंत्रित करने और विनियमित करना चाहती थी।


Q. 160951 रेलवे की आविष्करण के पहले मिर्ज़ापुर ___ राज्य से कपास इकठ्ठा करने का केंद्र था।


A. असम

B. बंगाल

C. चेन्नई

D. डेक्कन

Right Answer is: A

SOLUTION

रेलवे के तेजी विकास से पुराने पारंपरिक व्यापारिक केंद्रों में से अर्थव्यवस्था हिल गई। मिर्जापुर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में, कच्चे कपास की एक मशहूर संग्रह केंद्र था।


Q. 160952 रैयतवारी प्रणाली के तहत भूमि का पुन: सर्वेक्षण हर __ वर्ष के बाद होता था।


A. 10 वर्ष

B. 20 वर्ष

C. 30 वर्ष

D. 40 वर्ष

Right Answer is: C

SOLUTION

रैयतवारी प्रणाली ब्रिटिश भारत के कुछ भागों में स्थापित किया गया था। इस प्रणाली को कृषि भूमि के कृषकों से राजस्व इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। इस प्रणाली के तहत भूमि हर 30 साल का सर्वेक्षण किया जाता  था।


Q. 160953 कलकत्ता अलीपुर चिड़ियाघर__द्वारा आयोजित किया गाया था।


A. चार्ल्स कोर्न्वाल्लिस

B. फ्रांसिस बुचानन

C. लार्ड ऐक्टन

D. लार्ड वेल्लेस्ले

Right Answer is: B

SOLUTION

फ्रांसिस बुचानन बॉटनिकल गार्डन के प्रभारी थे। वे एक चिकिशक थे। वे सन 1794 से सन 1815 के बीच बंगाल मेडिकल सेवा में कार्य किया था।


Q. 160954 महाराजा मेहताब चंद____ का राजा थे।


A. बर्दवान

B. कर्नाटक

C. मालवा

D. राजमहल पहाड़िया

Right Answer is: A

SOLUTION

यह बंगाल के प्रांत में सबसे अमीर और सबसे बड़ा सामंती सम्पदा में से एक था।


Q. 160955 किन्हें कम कीमत पर कंपनी को अपना माल बेचने के लिए बाध्य किया गया था ?
Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय कारीगरों को कम कीमत पर कंपनी को अपना माल बेचने के लिए बाध्य किया गया था।


Q. 160956 आप 'शब्द उपनिवेशवाद' से क्या समझते हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

जब एक देश दूसरे देश पर अधिकार कर लेता है, इसकी संप्रभु स्थिति अपने हाथों में ले लेता है, और उसकी राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था का निर्देशन करता है, तब यह प्रक्रिया औपनिवेशीकरण के रूप में जानी जाती है


Q. 160957 उन्नीसवीं सदी में, निर्धन लोग अपने गांवों को छोड़कर शहर क्यों चले गए थे ?
Right Answer is:

SOLUTION

उन्नीसवीं सदी में, निर्धन लोगों ने अपने गावों को छोड़ दिया था और वे नव निर्मित कारखानों और नगर ​​पालिकाओं में रोजगार की तलाश में शहरों की ओर चले गए थे


Q. 160958 साहूकारों को अपनी संपत्ति दे देने के बाद किसानों द्वारा अपनी खेती का बंदोबस्त कैसे किया जाता था?
Right Answer is:

SOLUTION

किसान के पास उत्पादन के मुख्य साधन के रूप में पशु होते थे। ऋण का भार उतारने हेतु ऋणदाता को अपने पशु देने के बाद उसे जमीन और पशु भाड़े पर लेने पड़े। अब उसे उन पशुओं के लिए, जो मूल रूप से उसके अपने ही थे, भाड़ा चुकाना पड़ता था।


Q. 160959 रैयतवाड़ी प्रणाली के विस्तार में सम्मिलित दो व्यक्तियों के नाम बताइये। इस प्रणाली को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
Right Answer is:

SOLUTION

एलेक्ज़ेंडर रीड और थॉमस मुनरो रैयतवाड़ी प्रणाली के विस्तार में सम्मिलित दो व्यक्ति थे, इस प्रणाली को मुनरो व्यवस्था के रूप में भी जाना जाता है।


Q. 160960 किन्हें कम कीमत पर कंपनी को अपना माल बेचने के लिए बाध्य किया गया था ?
Right Answer is:

SOLUTION

भारतीय कारीगरों को कम कीमत पर कंपनी को अपना माल बेचने के लिए बाध्य किया गया था।


Q. 160961 1770 के दौरान बंगाल में कौन सी त्रासदी हुई थी ?
Right Answer is:

SOLUTION

1770 के दौरान बंगाल में एक भीषण अकाल पड़ा था,जिसमें आबादी के एक-तिहाई हिस्से का सफाया हो गया था।


Q. 160962 स्थायी बंदोबस्त अधिनियम के तहत किन्हें जमींदार के रूप में मान्यता दी गई थी ?
Right Answer is:

SOLUTION

राजा और तालुकदारों को स्थायी बंदोबस्त अधिनियम के तहत जमींदार के रूप में मान्यता दी गई थी ।


Q. 160963 ‘जोतदार’ कौन थे?
Right Answer is:

SOLUTION

फ्रांसिस बुकानन के उत्तरी बंगाल के दिनाजपुर जिले के सर्वेक्षण में हमें धनी किसानों के इस वर्ग का, जिन्हें ‘जोतदार’ कहा जाता था। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों तक आते-आते, जोतदारों ने जमीन के बड़े-बड़े रकबे, जो कभी-कभी तो कई हजार एकड़ में फैले थे,अर्जित कर लिए थे। स्थानीय व्यापार और साहूकार के कारोबार पर भी उनका नियंत्रण था और इस प्रकार वे उस क्षेत्र के गरीब काश्तकारों पर व्यापक शक्ति का प्रयोग करते थे।


Q. 160964 किरायाजीवी शब्द को स्पष्ट कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

किरायाजीवी शब्द ऐसे लोगों का द्योतक है जो अपनी संपत्ति के किराए की आय पर जीवनयापन करते हैं।

 


Q. 160965 किसानों द्वारा साहूकारों को दी गई संपत्ति क्या थी ?
Right Answer is:

SOLUTION

किसान को अपने कृषि के मुख्य साधन जमीन,गाडि़याँ, पशुधन देने पड़े। 


Q. 160966 बागान मालिकों के खिलाफ किसानों के विद्रोह को किसने समर्थन दिया था ?
Right Answer is:

SOLUTION

बागान मालिकों के खिलाफ किसानों के विद्रोह को स्थानीय जमींदार और गांव के मुखिया द्वारा समर्थित किया गया था, गांव के मुखिया ने लाठियों के साथ जमकर लड़ाई लड़ी थी, जमींदारों ने रैयतों से बागान मालिकों का विरोध करने का आग्रह किया


Q. 160967 संथालों द्वारा ब्रिटिश शासन के विरूद्ध किए गये विद्रोह के कारणों पर प्रकाश डालिए।
Right Answer is:

SOLUTION

1) साहूकारों (दीकू) द्वारा ऊंची ब्याज दर पर कर्ज देना व कर्ज न चुका पाने पर भूमि पर बलात् अधिकार ।2) ब्रिटिश सरकार द्वारा संथालों की कृषि भूमि पर भारी कर लगाना ।


Q. 160968 कपास आपूर्ति संघ एवं मैनचेस्टर कॉटन कंपनी की स्थापना कब और किस उद्देश्य से की गई थी?
Right Answer is:

SOLUTION

1857 में, ब्रिटेन में कपास आपूर्ति संघ की स्थापना हुई और 1859 में मैनचेस्टर कॉटन कंपनी बनाई गई। उनका उद्देश्य दुनिया के हर भाग में कपास के उत्पादन को प्रोत्साहित करना था जिससे कि उनकी कंपनी का विकास हो सके।


Q. 160969 दक्कन दंगा रिपोर्ट क्या थी ? इसके अनुसार रैय्यत विद्रोह का क्या कारण था ?
Right Answer is:

SOLUTION

बॉम्बे प्रेजिडेंसी में पूना एवं अहमदनगर जीले में, अनेक गाँवों में 1875 में हुए दंगों के कारणों की खोज-बीन करने हेतु भारत में नियुक्त किये गए दक्कन दंगा आयोग की रिपोर्ट थी । इसके अनुसार रैय्यत विद्रोह का कारण किसानों की ऋणग्रस्तता थी ।


Q. 160970 ब्रिटिशकाल में दक्कन में दंगा होने का मुख्य कारण बताइए ।
Right Answer is:

SOLUTION

ब्रिटिश काल में दक्कन में दंगा होने का मुख्य कारण - महाराष्ट्र के सतारा, पुणे व नगर जिले के कुछ भागों में किसानों द्वारा साहुकारों के विरूद्ध ऊँची ब्याज पर ऋण देने व ऋण बंध पत्र व अन्य दस्तावेजों को नष्ट करने के लिए हुआ था ।


Q. 160971 जमींदार राज्य को निश्चित राजस्व का भुगतान करने में असफल क्यूँ रहे थे ?
Right Answer is:

SOLUTION

जमींदार राज्य को निश्चित राजस्व का भुगतान करने में असफल रहे थे।

इस असफलता के कई कारण थे:

1)प्रारंभिक माँगें बहुत ऊंची थी।

2) यह ऊंची माँग उस समय में लागू की गई थी जब कृषी की उपज की कीमतें नीची थीं, जिससे रैयत (किसानों) के लिए, जमींदार को उनकी देय राशियाँ चुकाना मुश्किल था।

3) राजस्व असमान था, फसल अच्छी हो या ख़राब राजस्व का ठीक समय पर भुगतान जरूरी था।

4) सूर्यास्त विधि कानून के अनुसार, यदि निश्चित तारीख़ को सूर्य अस्त होने तक भुगतान नहीं आता था तो जमींदारी को नीलाम किया जा सकता था।


Q. 160972 राजमहल पहाड़ियों के पहाड़ीया लोगों की मुख्य विशेषताएं क्या हैं ?
Right Answer is:

SOLUTION

1)बुकानन की पत्रिका से हमें पहाड़ीया लोगों के बारे में जानकारी के स्त्रोत प्राप्त होते हैं। उसने अपनी पत्रिका,उन स्थानों जिनका उसने भ्रमण किया था के बारे में एक डायरी के रूप में लिखी थी।

2) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पहाड़ीया लोग राजमहल की पहाडि़यों के इर्द-गिर्द रहा करते थे। वे राजमहल की पहाडि़यों के जंगल की उपज से अपनी गुजर-बसर करते थे और झूम खेती किया करते थे।

3) उन्होने अपने मुख्य औज़ार कुदाल से जंगल को साफ कर उसे खेती योग्य बनाया।जमीन पर ये पहाडि़या लोग अपने खाने के लिए तरह-तरह की दालें और ज्वार-बाजरा उगा लेते थे।


Q. 160973 जोतदारों की शक्तियों पर एक टिप्पणी लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

गाँवों में, जोतदारों की शक्ति, जमींदारों की ताकत की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती थी। जमींदार के विपरीत जो शहरी इलाकों में रहते थे, जोतदार गाँवों में ही रहते थे और गरीब ग्रामवासियों के काफी बडे़ वर्ग पर सीधे अपने नियंत्रण का प्रयोग करते थे। जमींदारों द्वारा गाँव की जमा (लगान) को बढ़ाने के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों का वे घोर प्रतिरोध् करते थे, जमींदारी अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकते थे, जो रैयत उन पर निर्भर रहते थे उन्हें वे अपने पक्ष में एकजुट रखते थे और जमींदार को राजस्व के भुगतान में जान-बूझकर देरी करा देते थे। सच तो यह है कि जब राजस्व

का भुगतान न किए जाने पर जमींदार की जमींदारी को नीलाम किया जाता था तो अकसर जोतदार ही उन जमीनों को ख़रीद लेते थे।उत्तरी बंगाल में जोतदार सबसे अधिक शक्तिशाली थे, हालांकि धनी किसान और गाँव के मुखिया लोग भी बंगाल के अन्य भागों के देहाती इलाकों में प्रभावशाली बनकर उभर रहे थे। कुछ जगहों पर उन्हें ‘हवलदार ’ कहा जाता था और कुछ अन्य स्थानों पर वे गाँटीदार या ‘ मंडल ’ कहलाते थे।

 


Q. 160974 मुगल सम्राट अकबर के दरबार में होने वाली गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
Right Answer is:

SOLUTION

दरबार लगाते समय एक विशाल


Q. 160975 मुगल कालीन किन्हीं दो आंतरिक व्यापार मार्गों पर प्रकाश डालिए।
Right Answer is:

SOLUTION

1) सूरत से आगरा मार्ग जो प.राजस्थान से होकर गुजरता था । दूसरा मार्ग मालवा व खानदेश होता हुआ सूरत व आगरा को जोड़ता था। 2) आगरा से मध्य एशिया तक - यह मार्ग दिल्ली लाहौर व काबुल होता हुआ कंधार तक जाता था।


Q. 160976 दीवान के कार्य बताओं ?
Right Answer is:

SOLUTION

दीवान की नियुक्ति सम्राट करता था यह सूबेदार के  बाद सबसे बड़ा अधिकारी था दीवान सूबेदार पर नियंत्रण रखता था दीवान समस्त सूचनाएँ दीवान--अशरफ को भेजता था दीवान  भूमि-कर वसूलता था दीवान दीवानी के मुकदमों का निर्णय करता था तथा कृषि में सुधार करना पड़ता था सूबे के कोष पर उसका नियंत्रण होता था उसकी अनुमति के बिना धन व्यय नहीं किया जाता था ।


Q. 160977 अहदी सेना की नियुक्ति कौन करता था । इसका क्या कार्य था
Right Answer is:

SOLUTION

यह सेना सम्राट की अंगरक्षक सेना थी इसके सैनिकों की नियुक्ति सम्राट द्वारा की जाती थी इस सेना का अपना एक पृथक विभाग था इसका प्रत्येक सैनिक अपना घोड़ा स्वयं लाता था सम्राट इस सेना को नगद वेतन देता था सम्राट का कोई विश्वस्त आमीर इस सेना का प्रधान होता था


Q. 160978 मुग़ल सम्राट ने अपनी सेना को कितने भागों में विभाजित किया था ?
Right Answer is:

SOLUTION

मुग़ल सम्राट ने अपनी सेना को चार भागों में विभाजित किया था इन चार सैन्य विभागों के नाम थे -

1-अहदी सेना

2- दाखिली सेना 

3-  स्थायी सेना

4- मनसबदारी सेना।


Q. 160979 ग्राम प्रबंध का भार किसपर था ?
Right Answer is:

SOLUTION

ग्राम के प्रबंध का भार ग्राम पंचायतों के हाथों में था ग्राम का मुकद्दम ग्राम पंचायत की बैठक की अध्यक्षता करता था ग्राम पंचायत के निर्णय को सरकारी अधिकारी भी मान्यता देते थे ग्रामीणों के विवाद का निर्णय पंच  करते थे ।


Q. 160980 मनसबदार का क्या अभिप्राय है?
Right Answer is:

SOLUTION

मनसब  अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है पद  मुग़लकाल में बड़े-बड़े पदाधिकारियों के पद मनसबदारी प्रथा के द्वारा निश्चित किये जाते थे उनके पद, वेतन और मुग़ल दरबार में उनके स्थान का पता उनके मनसब के द्वारा ही लगाया जा सकता था


Q. 160981 जात और स्वर में क्या अंतर है
Right Answer is:

SOLUTION

अकबर ने मनसबदारों में जात और सवार का नवीन पद का आरम्भ किया

जात पद का अर्थ है पैदल सैनिक

सवार पद का अर्थ है घुड़सवार


Q. 160982 भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना किसने की थी ?
Right Answer is:

SOLUTION

जहीरुद्दीन बाबर मुगल साम्राज्य का संस्थापक था। उसने सबसे पहले स्वयं को काबुल में स्थापित किया और फिर 1526 में अपने दल के सदस्यों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए क्षेत्रों और संसाधनों की खोज में वह भारतीय उपमहाद्वीप में और आगे की ओर बढ़ा क्योंकि उसका पहला उद्देश्य अपने पैतृक प्रदेशों को पुनः प्राप्त करने के लिए संसाधनों को पुनः प्राप्त करना था।


Q. 160983 अकबर को मुगल साम्राज्य का एक महान शासक क्यों माना जाता है?
Right Answer is:

SOLUTION

जलालुद्दीन अकबर को मुगल बादशाहों में महानतम माना है क्योंकि उसने न केवल अपने साम्राज्य का विस्तार ही किया बल्कि इसे अपने समय का विशालतम, दृढ़तम और सबसे समृद्ध राज्य बनाकर सुदृढ़ भी किया। अकबर हिंदुकुश पर्वत तक अपने साम्राज्य की सीमाओं के विस्तार में सफल हुआ और उसने ईरान के सफावियों और तूरान (मध्य एशिया) के उजबेकों की विस्तारवादी योजनाओं पर लगाम लगाए रखी। इसके अलावा उसने कई सांस्कृतिक तत्वों का भी विस्तार किया।


Q. 160984 शब्द 'मुगल' का व्युत्पन्न कैसे हुआ था?
Right Answer is:

SOLUTION

मुगल नाम का व्युत्पन्न मंगोल से हुआ है। यद्यपि आज यह नाम एक साम्राज्य की भव्यता का अहसास कराता है लेकिन राजवंश के शासकों ने स्वयं के लिए यह नाम नहीं चुना था। उन्होंने अपने को तैमूरी कहा क्योंकि पितृपक्ष से वे तुर्की शासक तिमूर के वंशज थे। सोलहवीं शताब्दी के दौरान यूरोपियों ने परिवार की इस शाखा के भारतीय शासकों का वर्णन करने के लिए मुगल शब्द का प्रयोग किया।


Q. 160985 सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के दौरान मुगल साम्राज्य की संरचना की क्या विशेषताएं थीं ?
Right Answer is:

SOLUTION

सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दियों के दौरान शाही संस्थाओं के ढाँचे का निर्माण हुआ। इनके अंतर्गत प्रशासन और कराधान के प्रभावशाली तरीके शामिल थे। मुगल शक्ति का सुस्पष्ट केंद्र दरबार था। यहाँ राजनीतिक संबंध गढ़े जाते थे, साथ ही श्रेणियाँ और हैसियतें परिभाषित की जाती थीं। मुगलों द्वारा शुरू की गई राजनीतिक व्यवस्था सैन्य शक्ति और उपमहाद्वीप की भिन्न-भिन्न परंपराओं को समायोजित करने की चेतन नीति के संयोजन पर आधारित थी।


Q. 160986 गुलबदन बेगम कौन थी?
Right Answer is:

SOLUTION

गुलबदन बेगम बाबर की पुत्री, तथा हूमायूँ की बहन थी उसने राजाओं और राजकुमारों के बीच चलने वाले संघर्षों और तनावों के साथ ही इनमें से कुछ संघर्षों को सुलझाने में परिवार की उम्रदराज स्त्रियों की महत्त्वपूर्ण भूमिकाओं के बारे में विस्तार से लिखा।

 


Q. 160987
कृषि इतिहास लिखने में ‘आइन’ को स्त्रोत रूप में इस्तेमाल करने में क्या समस्याएँ हैं? इतिहासकार इन समस्याओं से कैसे निपटते हैं?
Right Answer is:

SOLUTION

1. आंकड़ों के जोड़ में गलतियाँ-आँकड़ो के जोड़ में कई गलतियाँ पाई गई हैं।2. शासक वर्ग का दृष्टिकोण-‘आइन’ से किसानों के बारें में प्राप्त जानकारी शासक वर्ग का दृष्टिकोण मात्र है ना कि किसानों का। 3. संख्यात्मक आँकड़ो में विषमताएँ- सभी प्रान्तों से आँकड़े एक ही मानक के अनुरूप एकत्र नहीं किये गए। कुछ प्रांतो की विस्तृत सूचनाएँ संकलित की गई हैं, जबकि बंगाल व उड़ीसा के लिए सूचनाएँ उपलब्ध नहीं हैं।4. मूल्यों और मजदूरों की दरों की अपर्याप्त सूची-‘आइन’ में मौजूद मूल्यों व मजदूरी की दरें मात्र राजधानी क्षेत्र व उसके आस-पास के क्षेत्रों से ली गई हैं ना कि संपूर्ण देश से। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए इतिहासकार संबंधित सदियों के उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा ईस्ट इंडिया कंपनी के सरकारी दस्तावेजों की मद्द ली जा सकती है।


Q. 160988
कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण दीजिये।
Right Answer is:

SOLUTION

1. सोलहवीं तथा सत्रहवीं शताब्दी में महिलाएँ और पुरूष कन्धे से कन्धा मिलाकर खेतों में काम करते थे। महिलाएँ बुआई, निराई व कटाई के साथ-साथ पकी हुई फसल का दाना निकालने का काम करती थीं। 2. पश्चिम भारत में महिलाओं की जैव वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के प्रति अनेक पूर्वाग्रह थे उदाहरणस्वरूप पश्चिम भारत में रजस्वला स्त्रियों को हल या कुम्हार का चाकू छूने की इजाजत नहीं थी। 3. कृषि आधारित अन्य कार्यो में भी महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण था जैसे सूत कातना, बर्तन बनाने के लिए मिट्टी साफ करना और कपड़ों पर कढ़ाई जैसे दस्तकारी आदि। 4. किसी वस्तु का जितनी वाणिज्यीकरण होता था, उस वस्तु के उत्पादन के लिए महिलाओं के श्रम की उतनी अधिक माँग होती थी। जरूरत होने पर किसान व दस्तकार महिलाएँ खेतों में भी जाती थीं व नियोक्ताओं के घरों व बाजार में जाकर भी काम करती थीं।


Q. 160989 किसानों एवं उनकी भूमी पर एक टिप्पणी लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

उस अवधि के भारत-फारसी स्रोतों द्वारा किसानों के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द रैयत (बहुवचन,रियाया) अथवा मुज़ारियन था, हम किसान अथवा असामी शब्द भी प्राप्त करते हैं, 17 वी शताब्दी के स्त्रोत दो प्रकार के किसानों का वर्णन करते हैं- खुदकाश्त एवं पाहीकाश्त, खुदकाश्त, गाँव का निवासी होता था, जिसमें उनकी भूमी होती थी,पाहीकाश्त अनिवासी कृषक होते थे, जो किसी अन्य गाँव से संबंद्ध रखते थे, एवं अनुबंध के आधार पर भूमि जोतते थेअकाल के संकट का सामना करने के कारण, लोग अपनी स्वेच्छा से पाहीकाश्त बन गएकिसानों के पास बैल की एक जोड़ी और दो ​​हल से अधिक नहीं होता थागुजरात में छह एकड़ जमीन रखने वाले किसानों को धनवान समझा जाता था, और बंगाल में, एक औसत किसान के पास अधिकतम 5 एकड़ जमीन होती थी, और 10 एकड़ जमीन एक किसान को समृद्ध असामी बनाती थीखेती व्यक्तिगत स्वामित्व के सिद्धांत पर आधारित थी और किसान की भूमि को उसी तरह से खरीदा और बेचा जाता था जैसे कि अन्य संपत्ति के मालिक की भूमि को


Q. 160990
आपके अनुसार कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति किस हद तक एक कारक थी।
Right Answer is:

SOLUTION

कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति की भूमिकाः- 1. खेतिहर किसानों का अनेक समूहों में विभक्त होनाः- समाज में व्याप्त जातिगत भेदभावों के कारण खेतिहर किसान कई प्रकार के समूहों में विभक्त थे खेतों की जुताई करने वाले किसानों को प्रायः निकृष्ट समझे जाने वाले कार्य ही दिये जाते थे। इस प्रकार वह निर्धनता में जीवन व्यापन करने को बाध्य थे। 2. अन्य संप्रदायों में भेदभाव का प्रसारः- अन्य समाजों में फैले भेदभाव का प्रसार मुस्लिम समुदायों में भी देखा जाने लगा था। निकृष्ट कार्य जैसे हलालखोरान, मल्लाहजादाओं को गाँव की सीमा से बाहर रहने को बाध्य किया गया व उनकी स्थिति दासों की तरह थी। 3. मध्य समूहः- जिस प्रकार निम्न वर्गों की जाति, गरीबी व सामाजिक स्थिति में सीधा संबंध था वह स्थिति मध्य समूहों में नहीं थी। सत्रहवीं शताब्दी में मारवाड़ में लिखी एक पुस्तक राजपूतों की चर्चा किसान के रूप में करती हैं पुस्तक के अनुसार जाट भी किसान थे पर जाति व्यवस्था में उनकी स्थिति राजपूतों से निम्न थी। 4. अन्य जातियों की स्थितिः- पशुपालन व बागवानी में बढ़ते मुनाफे नें अहीर, गुज्जर व माली जैसी जातियों के सामाजिक सोपान में वृद्धि की। पूर्वी प्रदेश में पशुपालक व मछुआरा जातियाँ भी किसानों जैसी सामाजिक स्थिति पाने लगी।


Q. 160991 अकबर की मनसबदारी व्यवस्था को संक्षेप में बताएं ।
Right Answer is:

SOLUTION

अकबर को सुदृढ़ता की ज़रूरत थी। इसके लिए अकबर ने अपने सैनिक-अधिकारियों और सिपाहियों को सुगठित किया । उसने इन लक्ष्यों की पूर्ति मनसबदारी प्रणाली से की। शासन का काम चलाने वाले कई अधिकारी और करमचारियों को मनसबदार कहा जाता था। पुरे मुग़ल साम्राज्य में हजारों छोटे-बड़े मनसबदार यानी शासकीय अधिकारी कर्मचारी थे। मनसबदार साम्राज्य में बादशाह के कानून और आदेश लागू करते थे। बादशाह के खिलाफ अगर कोई विद्रोह करे तो मनसबदार विद्रोह दबाते थे। मुग़ल साम्राज्य की रक्षा करना और दूसरे क्षेत्रों में मुग़ल वंश का राज्य फैलाना भी मनसबदारों का काम था। यह मनसबदार सम्राट के लिए घुड़सवारों की सेना बनाते थे एवं ज़रूरत पड़ने पर सम्राट के साथ युद्ध में भी जाते थे ।


Q. 160992 शेरशाह एक राष्ट्रीय सम्राट था उचित तर्क द्वारा पुष्टि कीजिये ?
Right Answer is:

SOLUTION

शेरशाह एक कुशल प्रशासक था वह धर्म-निरपेक्ष और उदार ह्रदय वाला सम्राट था । उसने जिस नवीन प्रशासनिक व्यवस्था की योजना बनाई। वह उनकी योग्यता को दर्शाता है उसने इन योजनाओं को बिना किसी भेदभाव के सम्पूर्ण राज्य में क्रियान्वित कराया । उसने अपनी अर्थव्यस्था को भी सुधारने में अपनी बुद्धि का परिचय दिया।  भूमि कर एवं जन-कल्याण से सम्बंधित कार्यों को बिना किसी भेदभाव के पूर्ण किया । उसने   न्याय तथा नियुक्ति के मामलों को भी निष्पक्ष रखा । इस प्रकार हम कहा सकते है कि शेरशाह एक राष्ट्रीय सम्राट था।


Q. 160993 शेरशाह ने धार्मिक साहिष्गुता के सिद्धांत का पालन किया टिप्पणी कीजिये?
Right Answer is:

SOLUTION

शेरशाह ने धार्मिक  सहिष्णुता का सिद्धांत अपनाया था । वह प्रथम मुस्लिम शासक था। जिसकी दृष्टि में उसकी सम्पूर्ण  प्रजा समान थी । चाहे वह किसी भी धर्म के अनुयायी क्या  हो एक दूरदर्शी राजनीतिय  होने के नाते वह इस बात को समझ चुका था कि हिन्दुओं के देश भारत में, जहाँ की अधिकांश जनता हिन्दू हैउसका विचार था कि धार्मिक अत्याचारों के आधार पर राज्य को स्थायी नहीं बनाया जा सकता 


Q. 160994 रैयतवाड़ी व्यवस्था पर एक टिप्पणी लिखिए ।
Right Answer is:

SOLUTION

जो राजस्व प्रणाली बम्बई दक्कन में लागू की गई उसे रैयतवाड़ी कहा जाता है। बंगाल में लागू की गई प्रणाली के विपरीत, इस प्रणाली के अंतर्गत राजस्व की राशि सीधे रैयत के साथ तय की जाती थी। भिन्न-भिन्न प्रकार की भूमि से होने वाली औसत आय का अनुमान लगा लिया जाता था। रैयत की राजस्व अदा करने की क्षमता का आकलन कर लिया जाता था और सरकार के हिस्से के रूप में उसका एक अनुपात निर्धारित कर दिया जाता था। हर 30 साल के बाद जमीनों का फिर से सर्वेक्षण किया जाता था और राजस्व की दर तदनुसार बढ़ा दी जाती थी। इसलिए राजस्व की माँग अब चिरस्थायी नहीं रही थी।


Q. 160995 अंग्रेज़ किससे प्रेरित होकर भारत में कच्चे कपास के लिए विकल्प तलाशने लगे थे और संक्षेप में इसके मुख्य परिणामों के बारे में बताइये?
Right Answer is:

SOLUTION

1860 के दशक से पहले, ब्रिटेन में कच्चे माल के तौर पर आयात की जाने वाली समस्त कपास का तीन-चौथाई भाग अमेरिका से आता था ब्रिटेन के सूती वस्त्रों के विनिर्माता काफी लंबे अरसे से अमेरिकी कपास पर अपनी निर्भरता के कारण बहुत परेशान थे उनकी चिंता का विषय यह था कि अगर यह स्त्रोत बंद हो गया तो उनका क्या होगा। इस प्रश्न से विचलित होकर, वे बड़े उत्सुकता से कपास की आपूर्ति के वैकल्पिक स्त्रोत खोज रहे थे।

1857 में, ब्रिटेन में कपास आपूर्ति संघ की स्थापना हुई और 1859 में मैनचेस्टर कॉटन कंपनी बनाई गई। उनका उद्देश्य दुनिया के हर भाग में कपास के उत्पादन को प्रोत्साहित करना था जिससे कि उनकी कंपनी का विकास हो सके। भारत को एक ऐसा देश समझा गया जो अमेरिका से कपास की आपूर्ति बंद हो जाने की सूरत में, लंकाशायर को कपास भेज सकेगा। भारत की भूमी और जलवायु दोनों ही कपास की खेती के लिए उपयुक्त थे और यहाँ सस्ता श्रम उपलब्ध था।

जब सन् 1861 में अमेरिकी गृहयुद्ध छिड़ गया तो ब्रिटेन के कपास क्षेत्र (मंडी तथा कारखानों) में तहलका मच गया। अमेरिका से आने वाली कच्ची कपास वेफ आयात में भारी गिरावट आ गई। वह सामान्य मात्रा का 3 प्रतिशत से भी कम हो गयाः 1861 में जहाँ 20 लाख गाँठें (हर गाँठ 400 पाउंड की) आई थीं वहीं 1862 में केवल 55 हजार गाँठों का आयात हुआ। भारत तथा अन्य देशों को बड़ी व्यग्रता के साथ यह संदेश भेजा गया कि ब्रिटेन को कपास का अधिक मात्रा में निर्यात करें। 


Q. 160996 दक्कन के दंगों पर एक लेख लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

जून, 1875 में, महाराष्ट्र के किसानों ने पुणे, सतारा और नागर जिलों के कुछ हिस्सों में बढ़ते कृषि संकट के खिलाफ विद्रोह कर दिया।

1875 के दंगों ने साहूकारों के अधीन ऋणदासों की दयनीय स्थिति को अपना निशाना बनाया। दंगा करने वालों का मुख्य उद्देश्य साहूकारों से उनके बही-खातों और ऋणबंधों को प्राप्त कर उन्हें नष्ट कर देना था।

क्योंकि भारतीय कृषि को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया गया था अतः ऋण, वाणिज्य, असमानता और विकास परस्पर संबद्ध थे। किसानों के संकट की उत्पत्ति कृषि कीमतों में गिरावट, भारी कराधान, और राजनीतिक दुर्बलता की भावना की वजह से हुई थी। ब्रिटिश भू-राजस्व की नीतियों के अंतर्गत कृषि के वाणिज्यीकरण के तहत भूमि में उत्पादक निवेश का वित्तपोषण करने हेतु ऋण लेने पर उसके साथ सूद जोड़ने की व्यवस्था से छोटे किसानों पर बोझ बढ़ गया।

यूरोपीय व्यापारियों द्वारा अग्रिम पूंजी निवेश से स्थानीय साहूकारों ने उनके लेनदारों की संपत्ति और श्रम पर असीमित अधिकार प्राप्त कर लिए; इससे उन्हें लेनदारों को पूरी तरह से बर्बाद करने और अपना गुलाम बनाने की शक्ति दे दी।

वासुदेव बलवंत फड़के ने 1879 में ब्रिटिश शासन को खदेड़ कर एक भारतीय गणतंत्र की स्थापना करने के लिए उनके खिलाफ एक हिंसक अभियान छेड़ दिया। लेकिन, उनके विद्रोह को सीमित सफलता ही हाथ लगी।


Q. 160997 बुकानन और उसके विवरण पर एक टिप्पणी लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

फ्रांसिस बुकानन एक चिकित्सक था जो भारत आया और बंगाल चिकित्सा सेवा में (1794 से 1815 तक ) कार्य किया। कुछ वर्षों तक, वह भारत के गर्वनर जनरल लार्ड वेलेजली का शल्य-चिकित्सक रहा। कलकत्ता (वर्तमान में कोलकत्ता) के अपने प्रवास के दौरान उसने कलकत्ता में एक चिडि़याघर की स्थापना की, जो कलकत्ता अलीपुर चिडि़याघर कहलाया। वे थोड़े समय के लिए वानस्पतिक उद्यान के प्रभारी रहे। बंगाल सरकार के अनुरोध पर उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार क्षेत्र में आने वाली भूमि का विस्तृत सर्वेक्षण किया। 1815 में वह बीमार हो गए और इंग्लैण्ड चले गए।

वह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का एक कर्मचारी था। उसकी यात्राएँ केवल भूदृश्यों के प्यार और अज्ञात की खोज से ही प्रेरित नहीं थीं। वह नक्शा नवीसों, सर्वेक्षकों, पालकी उठाने वालों कुलियों आदि के बड़े दल के साथ सर्वत्र यात्रा करता था। उसकी यात्राओं का खर्च ईस्ट इंडिया कंपनी उठाती थी क्योंकि उसे उन सूचनाओं की आवश्यकता थी जो बुकानन प्रत्याशित रूप से इकट्ठी करता था। बुकानन को यह साफ-साफ हिदायत दी जाती थी कि उसे क्या देखना, खोजना और लिखना है। वह जब भी अपने लोगों की फौज के साथ किसी गाँव में आता तो उसे तत्काल सरकार के एक एजेंट के रूप में ही देखा जाता था।जब कंपनी ने अपनी शक्ति को सुदृढ़ बना लिया और अपने व्यवसाय का विकास कर लिया तो वह उन प्राकृतिक साधनों की खोज में जुट गई जिन पर कब्जा करके उनका मनचाहा उपयोग कर सकती थी। उसने परिदृश्यों तथा राजस्व स्त्रोतों का सर्वेक्षण किया, खोज यात्राएँ आयोजित कीं, और जानकारी इकट्ठी करने के लिए अपने भूविज्ञानियों, भूगोलवेत्ताओं, वनस्पति विज्ञानियों और चिकित्सकों को भेजा। निस्संदेह असाधारण प्रेक्षण शक्ति का धनी बुकानन ऐसा ही एक व्यक्ति था।बुकानन जहाँ कहीं भी गया, वहाँ उसने पत्थरों तथा चट्टानों और वहाँ की भूमि के भिन्न-भिन्न स्तरों तथा परतों को ध्यानपूर्वक देखा। उसने वाणिज्यिक दृष्टि से मूल्यवान पत्थरों तथा खनिजों को खोजने की कोशिश की, उसने लौह खनिज और अभ्रक, ग्रेनाइट तथा साल्टपीटर से संबंधित सभी स्थानों का पता लगाया। उसने सावधानीपूर्वक नमक बनाने और कच्चा लोहा निकालने की स्थानीय पद्धतियों का निरीक्षण किया। जब बुकानन किसी भूदृश्य के बारे में लिखता था तो वह अकसर इतना ही नहीं लिखता था कि उसने क्या देखा है और भूदृश्य कैसा था, बल्कि वह यह भी लिखता था कि उसमें फेरबदल करके उसे अधिक उत्पादक कैसे बनाया जा सकता है- वहाँ कौन-सी फसलें बोई जा सकती हैं, कौन-से पेड़ काटे जा सकते हैं और कौन-से उगाए जा सकते हैं और हमें यह भी याद रखना होगा कि उसकी सूक्ष्म दृष्टि और प्राथमिकताएँ स्थानीय निवासियों से भिन्न होती थीं:

क्या आवश्यक है इस बारे में उसका आकलन कंपनी के वाणिज्यिक सरोकारों से और प्रगति के संबंध में आधुनिक पाश्चात्य विचारधारा से निर्धारित होता था। वह अनिवार्य रूप से वनवासियों की जीवन-शैली का आलोचक था और यह महसूस करता था कि वनों को कृषी भूमि में बदलना ही होगा।


Q. 160998 संथाल और अंग्रेजों के साथ उनके संबंध पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
Right Answer is:

SOLUTION

संथाल 1780 के दशक के आस-पास बंगाल में आने लगे थे। जमींदार लोग खेती के लिए नयी भूमि तैयार करने और खेती का विस्तार करने के लिए उन्हें भाड़े पर रखते थे और ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें जंगल महालों में बसने का निमंत्राण दिया। जब ब्रिटिश लोग पहाडि़यों को अपने बस में करके स्थायी कृषि के लिए एक स्थान पर बसाने में असफल रहे तो उनका ध्यान संथालों की ओर गया। पहाडि़या लोग जंगल काटने के लिए हल को हाथ लगाने को तैयार नहीं थे और अब भी उपद्रवी व्यवहार करते थे। जबकि,इसके विपरीत, संथाल आदर्श बाशिंदे प्रतीत हुए, क्योंकि उन्हें जंगलों का सफाया करने में कोई हिचक नहीं थी और वे भूमि को पूरी ताकत लगाकर जोतते थे।संथालों को जमीनें देकर राजमहल की तलहटी में बसने के लिए तैयार कर लिया गया। 1832 तक, जमीन के एक काफी बड़े इलाके को दामिन-इ-कोह के रूप में सीमांकित कर दिया गया। इसे संथालों की भूमि घोषित कर दिया गया। उन्हें इस इलाके के भीतर रहना था, हल चलाकर खेती करनी थी और स्थायी किसान बनना था। संथालों को दी जाने वाली भूमि के अनुदान-पत्र में यह शर्त थी कि उनको दी गई भूमि के कम-से-कम दसवें भाग को साफ करके पहले दस वर्षों के भीतर जोतना था। इस पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण करके उसका नक्शा तैयार किया गया। इसके चारों ओर खंबे गाड़कर इसकी परिसीमा निर्धारित कर दी गई और इसे मैदानी इलाके के स्थायी कृषकों की दुनिया से और पहाडि़या लोगों की पहाडि़यों से अलग कर दिया गया। दामिन-इ-कोह के सीमांकन के बाद, संथालों की बस्तियाँ बड़ी तेजी से बढ़ीं, संथालों के गाँवों की संख्या जो 1838 में 40 थी, तेजी से बढ़कर 1851 तक 1,473 तक पहुँच गई। इसी अवधि में, संथालों की जनसंख्या जो केवल 3,000 थी, बढ़कर 82,000 से भी अधिक हो गई। जैसे-जैसे खेती का विस्तार होता गया, वैसे-वैसे कंपनी की तिजोरियों में राजस्व राशि में वृद्धि होती गई। उन्नीसवीं शताब्दी वेफ संथाल गीतों और मिथकों में उनकी यात्रा के लंबे इतिहास का बार-बार उल्लेख किया गया हैः उनमें कहा गया है कि संथाल लोग अपने लिए बसने योग्य स्थान की खोज में बराबर बिना थके चलते ही रहते थे। अब यहाँ दामिन-इ-कोह में आकर मानो उनकी इस यात्रा को पूर्ण विराम लग गया। जब संथाल राजमहल की पहाडि़यों पर बसे तो पहले पहाडि़या लोगों ने इसका प्रतिरोध किया पर अंततोगत्वा वे इन पहाडि़यों में भीतर की ओर चले जाने के लिए मजबूर कर दिए गए। उन्हें निचली पहाडि़यों तथा घाटियों में नीचे की ओर आने से रोक दिया गया और ऊपरी पहाडि़यों के चट्टानी और अधिक बंजर इलाकों तथा भीतरी शुष्क भागों तक सीमित कर दिया गया। इससे उनके रहन-सहन तथा जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ा और आगे चलकर वे गरीब हो गए। झूम खेती नयी-से-नयी जमीनें खोजने और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता का उपयोग करने की क्षमता पर निर्भर रहती है। अब सर्वाधिक उर्वर ज़मीनें उनके लिए दुर्लभ हो गईं क्योंकि वे अब दामिन का हिस्सा बन विरुद्ध विद्रोह करने का समय अब आ गया है। 1855-56 के संथाल विद्रोह के बाद संथाल परगने का निर्माण कर दिया गया, जिसके लिए 5,500 वर्गमील का क्षेत्र भागलपुर और बीरभूम जिलों में से लिया गया। औपनिवेशिक राज को आशा थी कि संथालों के लिए नया परगना बनाने और उसमें कुछ विशेष कानून लागू करने से संथाल लोग संतुष्ट हो जाएँगे।

 


Q. 160999 सती प्रथा को सं ..... में समाप्त कर दिया गया था।


A. 1829.

B. 1830.

C. 1831.

D. 1832.

Right Answer is: A

SOLUTION

सती प्रथा भारत में प्रचलित सामाजिक बुराइयों में से एक थी।इसके अनुसार हिन्दू विधवा को अपने मृत पति की चिता पर खुद को जलाना पड़ता था।लार्ड विलियम बेंटिंक ने राजा राममोहन रॉय की मदद से इस प्रथा को समाप्त कराया।लेकिन इसे भारतियों के धार्मिक विश्वासों में ईस्ट इंडिया कंपनी के हस्तक्षेप के रूप में देखा गया।


Q. 161000 1857 का विद्रोह वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के किस शहर से शुरू हुआ था


A. लखनऊ।

B. मेरठ।

C. बरेली।

D. कानपुर।

Right Answer is: B

SOLUTION

1857 का विद्रोह मेरठ से शुरू हुआ था।10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सिपाहियों ने हथियार और गोला बारूद पर क़ब्ज़ा कर लिया और फिर गोरों पर हमला कर दिया। उनके घरों को लूटा व उनमें आग लगा दी।सभी सरकारी इमारतों को लूटा व तबाह किया गया।दिल्ली के लिए टेलीग्राफ लाइन को काट दिया गया।


PreviousNext