A.
10 अप्रैल 1982
B. 30 अगस्त 1983
C. 30 अप्रैल 1982
D. 14 जुलाई 1982
INSAT 1 – A को 10 अप्रैल 1982 में अंतरिक्ष भेजा गया था|
A.
पश्चिम
में प्रशांत
और पूर्व में
अटलांटिक को
B. अटलांटिक और हिन्द महासागर को
C. हिन्द और प्रशांत महासागर को
D. इनमें से कोई नहीं
पनामा नहर पश्चिम में प्रशांत और पूर्व में अटलांटिक महासागरों को आपस में जोड़ती है|
A.
कच्चे
तेल और
प्राकृतिक
गैस के
B. वनस्पति तेल और प्राकृतिक गैस के
C. वस्तुओं और प्राकृतिक गैस के
D. कच्चे तेल और मक्का के
भारतीय तेल निगम कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन करता है|
A.
भारत
में
B. जापान में
C. चीन में
D. मलेशिया में
भारतीय रेल एशिया का सबसे व्यस्त और सबसे लंबा नेटवर्क है|
A.
न्यूयार्क
के साथ
B. पेरिस के साथ
C. मास्को के साथ
D. टोकियो के साथ
चैनल सुरंग इंग्लैण्ड से होती हुई लंदन को पेरिस से जोड़ती है|
A.
0.5 मी०
B. 1.676 मी०
C. 1.44 मी०
D. 1.5 मी०
भारतीय रेलवे में चार गेज हैं: 1,676 मिमी० (5 फुट 6 इंच) ब्रॉड गेज, 1,000 मिमी० (3 फुट 3 3⁄8 इंच) मीटर गेज, 762 मिमी० (2 फुट 6 इंच) नैरो गेज और 610 मिमी० (2 फुट फुट ) नैरो गेज|
उत्तरी अमेरिका सर्वाधिक सड़क सघनता और सर्वाधिक वाहनों की संख्या के लिए प्रसिद्द है|
‘संचार’शब्द का संबंध भिन्न साधनों; जैसे डाक, टेलीफोन, टेलीग्राफ, फैक्स, इंटरनेट और उपग्रह का उपयोग करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचनाओं के हस्तांतरण से है|
अफ्रीका, रूस के एशियाई भाग और दक्षिण अमेरिका में वायु सेवाओं का अभाव है।
जामनगर रिफाइनरी विश्व की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है| इसमें प्रतिदिन 1.24 मिलियन बैरल (बीपीडी) की क्षमता है| यह रिफाइनरीपरिसर गुजरात के जामनगर में स्थित है| इसका स्वामित्व तथा संचालन रिलायंस उद्योग द्वारा किया जाता है|
‘बिग इंच’ और ‘लिटिल बिग इंच’ पाइपलाइनों का निर्माण 1942-43 में किया गया था| ये ‘युद्ध कालीन पाइपलाइनें’ हैं| ये संयुक्त राज्य अमेरिकी सरकार के लिए उत्पादक क्षेत्रों और उपभोग क्षेत्रों के बीच तेल पाइपलाईनों का सघन जाल हैं| ये पाइपलाइनें खाड़ी वाले राज्यों में स्थित तेल के कुओं से उत्तर-पूर्वी राज्यों में तेल ले जाती हैं तथा न्यू यॉर्क और फिलाडोल्फिया शहर के आस-पास के क्षेत्रों में वितरित करती हैं|
संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और भारत में सघन रेलवे नेटवर्क व्याप्त हैं|
परिवहन वह साधन है, जिससे व्यक्ति और वस्तुएं एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं| इसके अतिरिक्त, समाज की मूल आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए यह एक संगठित उद्योग की तरह है|
A.
43%
B.
75%
C.
73%
D.
11.5%
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विनिर्माण लेखे लगभग 73 प्रतिशत हैं|
A.
संयुक्त राज्य अमेरिका या ग्रेट ब्रिटेन से
B.
जापान से
C.
जर्मनी से
D.
चीन से
1960 तक अधिकतर बहुराष्ट्रीय निगम संयुक्त राज्य अमेरिका या ग्रेट ब्रिटेन से थे, क्योंकि बाकी दुनिया या तो अविकसित थी या फिर अपने उद्योगों का विकास करने में व्यस्त थी|
संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और जापान विश्व के पांच सबसे बड़े व्यापारिक देश हैं|
व्यापार की गई वस्तुओं का वास्तविक तौल परिमाण कहलाता है। व्यापार की गई वस्तुओं तथा सेवाओं के कुल मूल्य को व्यापार के परिमाण के रूप में जाना जाता है।
आदिम समाज में किये जाने वाला व्यापार वस्तु -विनिमय प्रणाली के नाम से जाना जाता था, जिसमें एक वस्तु का व्यापार सीधे दूसरी वस्तु से किया जाता था|
विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है|
1948 में विश्व को उच्च सीमा शुल्क और विभिन्न प्रकार के माल व सेवाओं की बाधाओं से मुक्त कराने हेतु कुछ देशों द्वारा जनरल एग्रीमेंट फॉर ट्रैफिक एंड ट्रेड (GATT) का गठन किया गया।
किसी देश का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उसके ‘आर्थिक बैरोमीटर’ के नाम से जाना जाता है|
व्यापार को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्व की अर्थव्यवस्था को लाभान्वित करता है| इस प्रकार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता व हस्तांतरणीयता के सिद्धांतों पर आधरित होता है|
द्विपार्श्विक व्यापार से तात्पर्य दो देशों के मध्य आपस में निर्दिष्ट वस्तुओं का व्यापार है|
महत्वपूर्ण प्रादेशिक समूह ईईसी, ईएफटीए, एनएएफटीए, ओपेक, आसियान, एसएएआरसी और सीआईएस हैं|
आयत एवं निर्यात की गयी वस्तुओं का अंतर व्यापार संतुलन कहलाता है|
भिन्न देशों के मध्य वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है|
एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान को व्यापार की संज्ञा दी जाती है|
ओपेक के सदस्य राष्ट्र अल्जीरिया, अबू ढाबी, ईक्वाडोर, गबोन, इंडोनेशिया, इरान, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला हैं|
भुगतान का ऋण शेष रखना एक राष्ट्र के लिए हानिकारक होता है क्योंकि इसका अर्थ यह होता है कि वह राष्ट्र वस्तुओं की बिक्री की अपेक्षा वस्तुओं की खरीद पर अधिक खर्च करता है, जिससे उस राष्ट्र का वित्तीय भण्डार शून्य हो जाता है|
1) प्राकृतिक पत्तन के लिए गहरा जल
2) डॉकिंग सुविधाओं के लिए पर्याप्त स्थान
3) रेल-सड़क मार्गों से आतंरिक प्रदेशों की
संयोजकता
4) पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध होना चाहिए|
iii.
iv.
व्यापारिक समूह भौगोलिक निकटता वाले देशों के मध्य वस्तुओं के व्यापार को बढ़ावा देते हैं| विकासशील देशों के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को हटाने के उद्देश्य से ये समूह बनाये गए हैं|
बाह्य पत्तन गहरे जल के पत्तन हैं जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाजों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में अक्षम हैं, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। उदहारण: ग्रीक में एथेंस तथा यूनान में इसके बाह्य पत्तन पिरेइअस|
अवस्थिति के आधार पर पत्तन को प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है:
अंतर्देशीय पत्तन: येपत्तनसमुद्रीतटसेदूरअवस्थितहोतेहैं।येसमुद्रसेएकनदीअथवानहरद्वाराजुड़ेहोतेहैं।ऐसेपत्तनचैरसतलवालेजहाजयाबजरेद्वाराहीगम्यहोतेहैं।जैसे – कोलकाता हुगली नदी, जो गंगा नदी की एक शाखा है, पर स्थित है|
बाह्य पत्तन: येगहरेजलकेपत्तनहैंजोवास्तविकपत्तनसेदूरबनेहोतेहैं।येउनजहाजों, जोअपनेबड़ेआकारकेकारणउनतकपहुँचनेमेंअक्षमहैं,कोग्रहणकरकेपैतृकपत्तनोंकोसेवाएँप्रदानकरतेहैं।
ऐतिहासिक रूप से, वर्तमान कालिक विकासशील देश मूल्यपरक वस्तुओं तथा शिल्प आदि का निर्यात किया करते थे जो यूरोपीय देशों को निर्यात की जाती थी। 19वीं शताब्दी के दौरान व्यापार की दिशा में प्रत्यावर्तन हुआ। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में विश्व व्यापार की पद्धति में तीव्र परिवर्तन हुए| यूरोप के उपनिवेश समाप्त हो गए जबकि भारत, चीन और अन्य विकासशील देशों ने विकसित देशों के साथ प्रतिस्पर्धा आरम्भ कर दी।
1948 में विश्व को उच्च सीमा शुल्क और विभिन्न प्रकार की अन्य बाधओं से मुक्त कराने हेतु कुछ देशों द्वारा जनरल एग्रीमेंट फॉर ट्रैफिक एंड ट्रेड (GATT) गठन किया गया। 1994 में सदस्य देशों के द्वारा राष्ट्रों के बीच मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ा प्रोन्नत करने के लिए एक स्थायी संस्था के निर्माण का निश्चय किया गया था तथा जनवरी 1995 से (GATT) को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में रूपांतरित कर दिया गया। विश्व व्यापार संगठन एकमात्र ऐसा अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य वैश्विक नियमों का व्यवहार करता है। यह विश्वव्यापी व्यापार तंत्र के लिए नियमों को नियत करता है और इसके सदस्य देशों के मध्य विवादों का निपटारा करता है|
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. द्विपार्श्विक व्यापार: दो देशों के द्वारा एक दूसरे के साथ किया जाने वाला निर्दिष्ट वस्तुओं का व्यापार द्विपार्श्विक व्यापार कहलाता है| इस प्रकार के व्यापार में दो देशों की आर्थिक स्थिति स्वतंत्र और परस्पर संबंधित होती है| एक राष्ट्र से कच्चे माल से विनिर्मित वस्तुओं का व्यापार दूसरे राष्ट्र से किया जाता है|
2. बहु-पार्श्विक व्यापार: बहुत से व्यापारिक देशों के द्वारा एक दूसरे के साथ किया जाने वाला निर्दिष्ट वस्तुओं का व्यापार बहु-पार्श्विक व्यापार कहलाता है|
आयत: एक राष्ट्र द्वारा पुनः निर्यात अथवा घरेलू उपभोग के लिए दूसरे देशों से माल और सेवाएं खरीदना आयत कहलाता है|आयत का परिमाण निर्यात के परिमाण से कम होना चाहिए| यदि इस संतुलन का प्रतिलोम हो जाता है, तब व्यापार को ऋणात्मक व्यापार कहा जाता है|
निर्यात: एक राष्ट्र द्वारा अन्य राष्ट्रों को माल और सेवाएं भेजना निर्यात कहलाता है| जब निर्यात का परिमाण आयात के परिमाण से अधिक होता है, तब इसे धनात्मक व्यापार कहा जाता है|

सभी राष्ट्र एक समान प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न नहीं होते हैं| कुछ राष्ट्रों के पास उनकी आवश्यकता से भी अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं और कुछ राष्ट्रों के पास उन्हीं संसाधनों की कमी होती है|इस प्रकार के संसाधनों को अधिशेष देश निर्यात करते हैं और जिन राष्ट्रों में इनकी कमी होती है, वे इनका आयत करते हैं| इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयातक और निर्यातक दोनों ही राष्ट्रों के लिए लाभदायी होता है| उन्नत प्रौद्योगिकी के कारण कुछ राष्ट्र अपने स्वयं के उपभोग की आवश्यकता से अधिक का उत्पादन कर लेते हैं| उन उत्पादों की मांग के आधार पर ये राष्ट्र अधिक विक्रय कर व्यापार करते हैं| इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दोनों ही राष्ट्रों के हित में है|
व्यापार के तीन महत्वपूर्ण अवयव इस प्रकार हैं:
1. व्यापार का परिमाण: व्यापार की गई वस्तुओं का वास्तविक तौल परिमाण कहलाता है। यह आवश्यक नहीं है कि अधिक बजन की वस्तुएं उनके व्यापार के परिमाण का सूचक हों| परिमाण अथवा भार और मूल्य दो भिन्न चीजें हैं| इस प्रकार व्यापार की गई वस्तुओं तथा सेवाओं के कुल मूल्य को व्यापार के परिमाण के रूप में जाना जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात्, विश्व व्यापार में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है| राष्ट्रों के मध्य व्यापार के परिमाण काफी अलग होते हैं| उत्पादित माल के प्रकार, व्यापार प्रतिबन्ध और द्विपार्श्विक समझौता विश्व के भिन्न राष्ट्रों के मध्य व्यापार के परिमाण को प्रभावित करता है|
2. व्यापार संयोजन: सभी प्रकार के माल और सेवाएं विश्व व्यापार में शामिल नहीं हो सकते हैं| वर्तमान वर्षों में, विनिर्मित, तैयार माल के व्यापार में बढ़ोत्तरी हुई है और विश्व व्यापार का सबसे बड़ा अवयव बनाया गया| कच्चा माल और प्राथमिक उत्पाद अपनी महत्ता खोते जा रहे हैं| वर्तमान समय में, पेट्रोलियम विश्व व्यापार के शिखर पर है|
3. व्यापार की दिशा: समय के साथ ही व्यापार की दिशा में भी बदलाव हो रहे हैं| 18वीं शताब्दी के दौरान, विकासशील देशों से बहुत उच्च परिमाण की जटिल वस्तुएं यूरोप को निर्यात की जाती थीं| लेकिन 19वीं शताब्दी में, यूरोप ने दक्षिणी महाद्वीपों से खाद्य सामग्री और अन्य कच्चे माल के बदले में विनिर्मित वस्तुओं का निर्यात करना आरम्भ कर दिया था| 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, विकासशील देशों में भी औद्योगिक विकास होने लगा था तथा इन राष्ट्रों ने तैयार व अर्द्ध-तैयार माल का निर्यात करना आरम्भ कर दिया था|
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विकास के लिए चार कारक उत्तरदायी होते हैं| ये इस प्रकार हैं:
1. भौगोलिक परिस्थितियों में अंतर: भौतिक कारक; जैसे राहत, जलवायु, मृदा और प्राकृतिक वनस्पतियाँ एक ही राष्ट्र में स्थान-स्थान पर भिन्न-भिन्न होते हैं| यह भिन्नता ससाधनों के भिन्न प्रकारों की उपलब्धता में अंतर के लिए उत्तरदायी होती है| प्रत्येक राष्ट्र में सभी प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध नहीं होते हैं जबकि कुछ राष्ट्रों के पास उनकी आवश्यकता से भी अधिक संसाधनों की उपलब्धता होती है| उदहारण के लिए: सऊदी अरब में खनिज तेल की अधिकता है, वह जिसका निर्यात करता है तथा भिन्न उपभोक्ता वस्तुओं कोआयात करता है, जो यहाँ के लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए होती हैं|
2. आर्थिक विकास की स्थिति: भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में आर्थिक विकास का स्तर भी भिन्न-भिन्न होता है| बड़े स्तर पर औद्योगिक विकास से उन्नत राष्ट्रों में भिन्न वस्तुओं का उत्पादन अधिक मात्रा में किया जाता है, जिसका निर्यात कम विकसित और अविकसित राष्ट्रों को किया जाता है| इसके बजाय, भिन्न कच्चे माल की उच्च मांग बनी रहती है, जिसे ये राष्ट्र कम विकसित राष्ट्रों से आयात करते हैं| इन राष्ट्रों में संसाधनों की अधिकता के साथ-साथ औद्योगिक विकास में कमी पाई जाती है|
3.विशेषज्ञता: वैश्विक मांग पर कुछ वस्तुएं कुछ ही राष्ट्रों में उत्पादित की जाती हैं; जैसे स्विस घड़ियाँ, फ्रेंच वाइन और चीन की रेशम आदि| इस प्रकार के उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विशेषता लाते हैं|
4. परिवहन: परिवहन के कुशल साधनों का विकास अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने का एक अन्य आधार है|अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का परिमाण और प्रकृति परिवहन सुविधाओं के विकास के साथ ही परिवर्तित होती रहती है| राजनीतिक स्थिरता, युद्ध और टकराव, विज्ञापन आदि ऐसे कारक हैं जो वस्तुओं और सेवाओं के परिणाम को प्रभावित करते हैं|
A.
100
B.
120
C.
25
D.
35
एक मेगासिटी शब्दावली उन नगरों के लिए प्रयुक्त की जाती है जिनकी जनसंख्या मुख्य नगर व उपनगरों को मिलाकर एक करोड़ से अधिक हो। वर्तमान में 25 मेगासिटी हैं। पिछले 50 वर्षों में विकसित देशों की अपेक्षा विकासशील देशों में इनकी संख्या बढ़ी है।
A.
238
B. 534
C. 468
D. 450
विश्व में एक मिलियन जनसंख्या वाले शहरों की संख्या लगातार बढ़ रही है| वर्ष 1950 में, एक मिलियन की जनसंख्या वाले शहरों की संख्या 83 थी| वर्ष 2007 तक यह संख्या 468 तक बढ़ गयी|
A.
कालकाजी
B. धारावी
C. फ्यूजीयामा
D. अताम्बू
धारावी मुंबई का एक क्षेत्र है। यह एक झुग्गी बस्ती है। यह पश्चिम माहिम और पूर्व सायन के बीच में है और यह 175 हेक्टेयर क्षेत्र में है। 1986 में, जनसंख्या 530,225 में अनुमान लगाया गया था|
A.
जनसंख्या
का आकार
B. व्यवसाय या कार्य
C. प्रशासन
D. क्षेत्र
बस्तियों को जनसंख्या का आकार, व्यवसाय या कार्य और प्रशासन के आधार पर शहरी या ग्रामीण में वर्गीकृत किया जा सकता है|
A.
मेक्सिको नगर तक
B.
वाशिंगटन तक
C.
टोरण्टो तक
D.
लास एंजेल्स तक
विश्वनगरी का सबसे अच्छा उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका में है जहाँ उत्तर में बोस्टन से दक्षिण में वाशिंगटन तक नगरीय भूदृश्य के रूप में दिखाई देता है।
A.
तीन गुना
B.
चार गुना
C.
पांच गुना
D.
दोगुना
एशिया की जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि बहुत अधिक है|
A.
सांस्कृतिक नगर
B.
प्रशासनिक नगर
C.
पर्यटक नगर
D.
धार्मिक नगर
राष्ट्र की राजधनियाँ जहाँ पर केन्द्रीय सरकार वेफ प्रशासनिक कार्यालय होते हैं उन्हें प्रशासनिक नगर कहा जाता है। भारत में चेन्नई (तमिलनाडु) एक प्रशासनिक नगर है|
A.
सूडान की
B.
युगांडा की
C.
इथियोपिया की
D.
सोमालिया की
इथियोपिया की राजधानी ‘अदीस अबाबा’ है| ‘अदीस’ का अर्थ है- ‘नया’ और ‘अबाबा’ का अर्थ है- ‘फूल’| यह एक नया शहर है| इसकी स्थापना 1878 में की गयी थी|
A.
बस्ती
की साइट को
B. बस्ती की स्थितियों को
C. बस्ती की परिस्थितियों को
D. बस्ती की योजना को
एक मलिन बस्ती में उचित आवास, स्वच्छता, शिक्षा, साफ़ पानी और बिजली आदि का अभाव होता है|
A.
वृत्ताकार प्रतिरूप
B.
आयताकार प्रतिरूप
C.
रैखिक प्रतिरूप
D.
तारे के आकार का प्रतिरूप
ग्रामीण बस्तियों का यह प्रतिरूप समतल क्षेत्रों अथवा चौड़ी अंतरा पर्वतीय घाटियों में पाया जाता है। इसमें सड़के आयताकार होती हैं जो एक दूसरे को समकोण पर काटती हैं।
A.
ग्रामीण
से ग्रामीण
B.
ग्रामीण से नगरीय
C. नगरीय से ग्रामीण
D. नगरीय से नगरीय
ग्रामीण से ग्रामीण प्रवास की धाराओं में स्त्रियों की संख्या सर्वाधिक होते है, क्योंकि गाँव से गाँव की दूरी, शहर की अपेक्षाकृत थोड़ा या कम होते हैं।
A.
4 करोड़
B.
7 करोड़
C.
5 करोड़
5 करोड़
6 करोड़
2001 की जनगणना के अनुसार देश के 102.9 करोड़ लोगों में 5 करोड़ लोगों को निवास के आधार पर प्रवासियों पाए जाते हैं |
A.
गुजरात और मध्य प्रदेश
B.
उत्तर प्रदेश और बिहार
C.
तमिलनाडु और महाराष्ट्र
D.
कर्नाटक और केरल
भारत के उत्तर प्रदेश ( -26 लाख) और बिहार ( -17 लाख) यह दो राज्यों में उत्प्रवासियों के संख्या सबसे अधिक हैं।
A.
3 करोड़
B.
1 करोड़
C.
2 करोड़
D.
2.5 करोड़
भारत से उत्प्रवास के आधार पर भारतीय डायास्पोरा के लगभग 2 करोड़ लोग हैं जो 110 देशों में फैले हुए हैं।
A.
50 लाख
B.
60 लाख
C.
40 लाख
D.
70 लाख
भारत में 2001 जनगणना के अनुसार, अन्य देशों से 50 लाख व्यक्तियों का प्रवास हुआ था, जिनमें से 96 प्रतिशत पड़ोसी देशों से आए हैं |
A.
1681
B. 1781
C.
1881
D. 1981
वास्तव में प्रवास को 1881 ई. में भारत की प्रथम संचालित जनगणना से ही दर्ज करना आरंभ कर दिया गया था। इन आँकड़ों को जन्म के स्थान के आधार पर दर्ज किया गया था।
A.
पश्चिम एशिया में हुई सहसा तेल वृद्धि द्वारा जनित श्रमिकों की माँग
B.
देश में फैले हुए महामारी
C.
कोयले के खान के अधिक उत्पादन
D.
उपरोक्त सभी
1970 के दशक में पश्चिम एशिया में हुई सहसा तेल वृद्धि द्वारा जनित श्रमिकों की माँग के कारण भारत से अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों का नियमित बाह्य प्रवास हुआ। कुछ बाह्य प्रवास उद्यमियों, भंडार मालिकों, व्यवसायियों का भी पश्चिमी देशों में प्रवास हुआ।
A.
10%.
B.
30%.
C.
50%.
D.
80%.
2001 की जनगणना के अनुसार देश के 102.9 करोड़ लोगों में से 30.7 करोड़ (30 प्रतिशत) की रिपोर्ट प्रवासियों के रूप में की गई थी जो अपने जन्म के स्थान से अलग रह रहे थे।
A.
1951.
B.
1961.
C.
1971.
D.
1981.
सन 1961 जनगणना में पहला मुख्य संशोधन किया गया था और उसमें दो घटक जैसे,जन्म स्थान अर्थात् गाँव या नगर और यदि अन्यत्र जन्मा है) तो निवास की अवधि सम्मिलित किए गए।
A.
एक ही स्थान पर रहने की अवधि
B.
पिछले निवास की जगह
C.
जन्म की तारीख
D.
जन्म स्थान
वास्तव में प्रवास को 1881 ई. में भारत की प्रथम संचालित जनगणना से ही दर्ज करना आरंभ कर दिया गया था। इन आँकड़ों को जन्म के स्थान के आधार पर दर्ज किया गया था।
A.
2
B.
3
C.
4
D.
5
आंतरिक प्रवास के अंतर्गत चार धाराओं की पहचान की गई है: (क) ग्रामीण से ग्रामीण (ख) ग्रामीण से नगरीय (ग) नगरीय से नगरीय और (घ) नगरीय से ग्रामीण।
2001 की जनगणना के अनुसार में भारत में प्रवासियों की अधिकतम आबादी महाराष्ट्र में है जिसकी संख्या 7.9 मिलियन है। इसके बाद दिल्ली में 5.6 मिलियन और पश्चिम बंगाल में 5.5 मिलियन प्रवासियों की जनसँख्या निवास करती है।
भारत की जनगणना में प्रवास प्रगणन के दो आधार हैं :
1. जन्म का स्थान
2. निवास का स्थान
प्रवास के दो प्रकार निम्नलिखित हैं -
1. आंतरिक प्रवास - देश के अंदर प्रवास
2. अंतर्राष्ट्रीय प्रवास - देश के बाहर प्रवास
जब प्रवासन एक देश से दूसरे देश के लिए होता है तो इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के रूप में जाना जाता है। मात्रा, दूरी और परिवहन के साधन के उपयोग के आधार पर, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन निम्नलिखित रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है :
1. अन्तरमहाद्वीपीय प्रवासन
2. पार-महासागरीय प्रवासन
भारत में सबसे अधिक प्रवासियों को बृहत् मुंबई आकर्षित करता है दूसरा स्थान दिल्ली का है।
भारत की जनगणना द्वारा प्रथम प्रवजन आंकड़े 1881 में दर्ज किए गए थे।
1. जनसँख्या के घनत्व में परिवर्तन
2. जनसँख्या के आयु वर्ग पर प्रभाव
1) दिल्ली 2) जयपुर
अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ भारत में मुख्यतः गुजरात के मैदान एवं राजस्थान में मिलती है ।
वर्तमान समय में भारतीय संविधान में 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।
देश में जनसँख्या की वृद्धि दर अभी भी बहुत ऊँची है। विश्व विकास रिपोर्ट द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि यदि भारत की जनसँख्या वृद्धि दर यही बनी रही तो 2025 ई. तक भारत की जनसँख्या 135 करोड़ तक पहुँच जायेगी।
देश के उत्तर-पश्चिमी, उत्तरी और उत्तर मध्य भागों में पश्चिम से पूर्व स्थित राज्यों की एक सतत पेटी में दक्षिणी राज्यों की अपेक्षा उच्च वृद्धि दर पायी जाती है। उच्च जनसँख्या वृद्धि दर वाले राज्यों में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सिक्किम, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड शामिल हैं।
देश के सम्पूर्ण हिस्से में कम या अधिक बौद्ध समुदाय के लोग मिलते हैं किन्तु इस धर्म को मानने वाले अधिकांश लोग महाराष्ट्र, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर लद्दाख, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश में लाहुल और स्पिति हैं।
अनुसूचित भारतीय भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है जिसको देश की आबादी के 40.42 प्रतिशत लोगों द्वारा बोला जाता है। कश्मीरी और संस्कृत बोलने वाले सबसे कम संख्या में हैं। देश में भाषाई प्रदेशों की सीमाएँ सुनिश्चित और स्पष्ट नहीं हैं बल्कि उनका सीमान्त प्रदेशों में क्रमिक विलय और अध्यारोपण हो जाता है।
भारत में जनसँख्या वृद्धि में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ पाई जाती हैं जहाँ कुछ क्षेत्रों में जनसँख्या वृद्धि दर में तीव्र वृद्धि दर्ज की जा रही है वहीँ कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि दर निम्न है। भारत में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, पुदुच्चेरी और गोवा जैसे राज्यों में निम्न वृद्धि दर पाई जाती है जो दशक में 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हुई। केरल (9.4) में न केवल इस वर्ग के राज्यों में बल्कि पूरे देश में निम्नतम वृद्धि दर दर्ज की गई है।
1921-1951 के दशकों को जनसँख्या की स्थिर वृद्धि की अवधि के रूप में जाना जाता है। देश-भर में स्वास्थ्य और स्वच्छता में व्यापक सुधारों ने मृत्यु दर को नीचे ला दिया। साथ ही साथ बेहतर परिवहन और संचार तंत्र से वितरण प्रणाली में सुधार हुआ। फलस्वरूप अशोधित जन्म दर ऊँची बनी रही जिससे पिछली प्रावस्था की तुलना में वृद्धि दर उच्चतर हुई। 1920 के दशक की महान आर्थिक मंदी और द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में यह वृद्धि दर प्रभावशाली थी।
धर्म आधारित जनगणना आंकड़ों के अनुसार 2011 में भारत की कुल आबादी 1 अरब 21 करोड़ थी। जिसमें विभिन्न समुदायों की भागीदारी को नीचे इंगित किया गया है –
|
धार्मिक समूह |
जनसँख्या का प्रतिशत |
|
हिन्दू मुस्लिम ईसाई सिक्ख बौद्ध जैन अन्य |
79.8% 14.2 % 2.3 % 1.7% 0.7 % 0.45% 0.7 %
|
इस भाषा परिवार का उप-परिवार इंडो-आर्य है और शाखा ईरानी (फ़ारसी), दरदी एवं भारतीय आर्य हैं। देश के विभिन्न राज्य जैसे - जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, महाराष्ट्र, गोआ आदि भारतीय-यूरोपीय भाषा परिवार के अंतर्गत आते हैं। इस भाषा परिवार में देश की आबादी के 73 प्रतिशत लोग शामिल हैं।
भारत सरकार ने किशोर वर्गों को ध्यान में रखते हुए कुछ निश्चित नीतियों का निर्माण किया है जिससे उनके गुणों का बेहतर मार्गदर्शन और उपयुक्त उपयोग किया जा सके। राष्ट्रीय युवा नीति एक ऐसा उदाहरण है जिसे हमारी विशाल, युवा और किशोर जनसँख्या के समग्र विकास की देखरेख हेतु अभिकल्पित किया गया है।
2003 ई. में प्रायोजित की गई भारत सरकार की युवा नीति, युवाओं और किशोरों के चौमुखी विकास पर बल देती है ताकि देश के रचनात्मक विकास में वे अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम हो सकें। इसका एक ध्येय देशभक्ति और उत्तरदायी नागरिकता के गुणों का प्रबलन भी है। इस नीति का मुख्य ध्येय, निर्णय लेने में युवाओं की प्रभावी सहभागिता और सुयोग्य नेतृत्व के उत्तरदायित्वों के निर्वहन के संदर्भ में उनको सशक्त करना है। इसमें महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया है जिससे पुरुषों और महिलाओं की स्थिति में समता लाई जा सके।
देश में धार्मिक समुदायों का स्थानिक वितरण यह दर्शाता है कि कुछ निश्चित क्षेत्रों धर्म की सह्यात्मक प्रबलता विशाल है, जबकि उसी का दूसरे राज्यों में प्रतिनिधित्व नगण्य है। भारत-बांग्लादेश सीमा व भारत - पाक सीमा से संलग्न जिलों, जम्मू और कश्मीर, उत्तर-पूर्व के पर्वतीय राज्यों और दक्कन पठार व गंगा के मैदान के प्रकीर्ण क्षेत्रों को छोड़कर हिन्दू अधिकांश राज्यों में एक प्रमुख समूह के रूप में वितरित हैं।
मुस्लिम आबादी जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल और केरल के कुछ जिलों, उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों, दिल्ली में व उसके आस-पास और लक्षद्वीप में निवास करती है।
ईसाई जनसँख्या देश के ग्रामीण क्षेत्रों तथा गोआ एवं केरल, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड के पहाड़ी राज्यों, छोटानागपुर क्षेत्र और मणिपुर की पहाड़ियों में रहती है।
भारत में अधिकांश सिक्ख पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में रहते हैं।
भारत में अधिकांश सिक्ख पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में रहते हैं।
भारत के सबसे छोटे धार्मिक समूह जैन और बौद्ध देश के गिने-चुने क्षेत्रों में रहते हैं। जैनियों के प्रमुख निवास स्थल राजस्थान के नगरीय क्षेत्रों, गुजरात और महाराष्ट्र में हैं जबकि बौद्ध धर्म को मानने वाले अधिकांश लोग महाराष्ट्र, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर लद्दाख, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश में लाहुल और स्पिति में रहते हैं।
A.
राष्ट्रीय
प्रवासन
B. आंतरिक प्रवासन
C. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन
D. विदेशी प्रवासन
देश के बाहर और देश में भीतर अन्य देशों से प्रवासन को अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन कहा जाता है। देश के भीतर प्रवासन को आंतरिक प्रवास कहा जाता है।
A.
8.4
करोड़
B. 8.1 करोड़
C. 9.2 करोड़
D. 9.1 करोड़
भारत में 2001 के दौरान 8.1 करोड़ अंतःराज्यीय प्रवासी थे। इस धारा में स्त्री प्रवासी प्रमुख थी। इनमें से अधिकांश विवाहोपरांत प्रवासी थीं।
A.
80%
B. 92%
C. 96%
D. 89%
जनगणना 2001 के अनुसार, भारत में अन्य देशों से 50 लाख व्यक्तियों का प्रवास हुआ है, जिनमे से 96 प्रतिशत पड़ोसी देशों से आए हुए है |
A.
अपकर्ष कारक
B.
प्रतिकर्ष कारक
C.
व्यक्तिगत कारक
D.
निष्कर्ष सभी
जो कारक लोगों को निवास स्थान अथवा उद्गम को छुड़वाने का कारण बनते हैं, उसे प्रतिकर्ष कारक कहा जाता है|
A.
30 लाख
B.
10 लाख
C.
9 लाख
D.
5 लाख
जनगणना 2001 के अनुसार, भारत के पड़ोसी देशों से 96 प्रतिशत प्रवासियों आए हुए हैं, इनमे बांग्लादेश से आये हुए व्यक्तियों की कुल संख्या 30 लाख हैं |
A.
30 लाख
B.
10 लाख
C.
9 लाख
D.
5 लाख
जनगणना 2001 के अनुसार, भारत के पड़ोसी देशों से 96 प्रतिशत प्रवासियों आए हुए हैं, इनमे नेपाल से आये हुए व्यक्तियों की कुल संख्या 5 लाख हैं |
A.
65%
B.
55%
C.
50%
D.
45%
65 प्रतिशत स्त्रियाँ विवाह के उपरांत अपने मायके से बाहर जाती हैं। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में यह सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारण हैं|
A.
20%
B.
30%
C.
40%
D.
50%
2001 की जनगणना के अनुसार देश के 102.9 करोड़ लोगों में 30.7 करोड़ तथा 30 प्रतिशत लोगों को अपने जन्म के स्थान से अलग रह रहे प्रवासियों के रूप में पाए जाते हैं|
A.
ग्रामीण
से ग्रामीण
B.
ग्रामीण से नगरीय
C. नगरीय से ग्रामीण
D. नगरीय से नगरीय
आर्थिक कारणों की वजह से अंतर-राज्यीय प्रवास ग्राम से नगर धारा में पुरुष सर्वाधिक हैं।
शब्दावली ‘सन्नगर’ का प्रयोग 1915 में पैट्रिक गिडिज ने किया था| यह विशाल विकसित नगरीय क्षेत्र होते हैं जो कि मूलतः अलग-अलग नगरों या शहरों के आपस में मिल जाने से बनते हैं।
पुरवे गाँव से छोटे होते हैं और गाँव की अपेक्षा कम सघन होते हैंl इनमें मकान प्रायः बिखरे हुए होते हैंl इनकी स्थिति एवं परिवर्तन की दृष्टि से यह सामान्यतः दरिद्र अथवा निकृष्ट होते हैं l
बस्ती की साइट उस भूमि के वास्तविक खंड को प्रदर्शित करती है, जहाँ पर बस्ती बनाई गयी है| उदहारण के लिए, एक गांव नदी के किनारे बसा है| जबकि बस्ती की
उप-नगरीकरण रहन-सहन की बेहतर गुणवत्ता की तलाश में घनी नगरीय क्षेत्रों से नगर के बाहर स्वच्छ क्षेत्रों में चले जाने की एक नवीन प्रवृत्ति है| बड़े शहरों के समीप ऐसे महत्त्वपूर्ण उपनगर विकसित हो जाते हैं, जहाँ से प्रतिदिन हजारों व्यक्ति अपने घरों से कार्यस्थलों पर आते-जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ‘स्वस्थ शहर’ में निम्नलिखित शामिल होना चाहिए:
मलिन बस्तियाँ वे बस्तियाँ होती हैं जहाँ प्रकाश, वायु, शौचालय और स्नान सुविधाओं की कमी होती है| कई परिवार असंतोषजनक जीवन जीते हैं और उनके पास अपना स्वयं का एकांत का कोई स्थान नहीं होता है| मकान एक-दूसरे से अधिक सटे हुए बने होते हैं| इसलिए, इन बस्तियों में आग लगने का खतरा अधिक होता है| मुंबई की धारावी बस्ती एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्ती है|
अनधिवासी बस्तियाँ अवैध रूप से बनी होती हैं| इन बस्तियों की आधारभूत सेवाएं न्यूनतम पर्याप्त स्तर से भी कम होती हैं| अवैध कब्जे के कारण यहाँ के लोगों के पास स्वयं की कोई भूमि नहीं होती है|
मानव बस्ती किसी भी प्रकार और आकार के घरों का संकुल है जिनमें मनुष्य रहते हैं। एक स्थान जो साधारणतया स्थायी रूप से बसा हुआ हो उसे मानव बस्ती कहते हैं| वे नगर या गांव भी बस्ती कहलाते हैं, जहाँ आधारभूत सेवाएं प्रदान की जाती हैं| इसमें रहने के लिए मकान और यात्रा के लिए सड़कें और गलियां शामिल हैं|
बस्तियों को निम्न के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है: