सेवानिवृत साझेदार सेवानिवृति के समय अपने भाग की ख्याति पाने का अधिकारी है क्योंकि ख्याति सभी साझेदार, सेवानिवृत साझेदार सहित द्वारा बीते समय के किए गए प्रयत्नों का परिणाम है। सेवानिवृत साझेदार को उसके भाग की ख्याति के लिए क्षतिपूर्ति की जाती है। लेखा मानक 10(AS-10) के अनुसार बहियों में ख्याति का लेखा केवल तब किया जाता है जब उसके लिए राशि का भुगतान किया गया हो। अतः ख्याति का लेखा बहियों में तभी किया जाएगा जब उसका क्रय किया जाता है। अपने आप से ख्याति खाता नहीं खेला जाएगा।
अतः साझेदार के सेवानिवृत होने की स्थिति में ख्याति का समायोजन साझेदारों के पूँजी खातों द्वारा किया जाएगा।
सेवानिवृत साझेदार के पूँजी खाते को उसके ख्याति के भाग से जमा करेगे एवं शेष साझेदारों के पूँजी खातों को ख्याति की राशि को उनके अधिलाभ अनुपात से नाम करेंगे। इसकी निम्न रोजनामचा प्रविष्टि की जाएगीः-
शेष साझेदारों के पूँजी खाते व्यक्तिगत नाम
सेवानिवृत साझेदार का खाता जमा
(सेवानिवृत साझेदार के भाग की ख्याति का शेष
साझेदारों के अधिलाभ अनुपात में समायोजन)
अधिलाभ अनुपात = नया अनुपात - वर्तमान अनुपात
आशीष ने लिया = 1/2 - 2/5 = 1/10
बर्मन ने लिया = 1/2 - 1/5 = 3/10
अतः आशीष एवं बर्मन के मघ्य अधिलाभ अनुपात 1/10 अनुपात 3/10 अर्थात 1 अनुपात 3 होगा
त्याग अनुपात और लाभ-प्राप्ति अनुपात में अंतर
|
अंतर का आधार, |
त्याग अनुपात |
लाभ-प्राप्ति अनुपात |
|
1. अर्थ |
यह वह अनुपात है जिसमें पुराने साझेदार नए, साझेदार के पक्ष में अपने लाभ के भाग का त्याग करते हैं। |
यह वह अनुपात है जिसमें शेष साझेदारों द्वारा अवकाश ग्रहण करने वाले या मृत साझेदार के हिससे को प्राप्त किया जाता है। |
|
2. गणना का समय |
त्याग अनुपात नये साझेदार के फर्म में प्रवेश के समय ज्ञात किया जाता है। |
लाभ-प्राप्ति अनुपात किसी साझेदार के फर्म से अवकाश ग्रहण अथवा मृतयो के समय ज्ञात किया जाता है। |
|
3. गणना का सूत्र |
पुराना अनुपात – नया अनुपात |
नया अनुपात – पुराना अनुपात |
|
4. गणना का उद्देश्य |
नये साझेदार द्वारा नकद में लायी गई ख्याति की राशि को त्याग अनुपात में पुराने साझेदारों में बॉंटा जाता है। |
अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार को दी गई ख्याति की राशि शेष साझेदारों द्वारा लाभ-प्राप्ति अनुपात में दी जाती है। |
Books of Firm (Journal)
|
Particulars |
|
Dr. Rs. |
Cr. Rs. |
|
|
P & L Suspense A/c |
Dr. |
|
20,000 |
|
|
To Champak’s Capital A/c |
|
|
20,000 |
|
|
(Champak’s share of profit t/f d |
|
|
|
|
|
his capital account) |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
साझेदार के सेवानिवृत होने के बाद शेष साझेदार अपनी पूँजी को समायोजित करने का निर्णय ले सकते हैं। कभी-कभी शेष साझेदार पुनर्गठित फर्म की कुल पूँजी की राशि का निर्धारण कर लेते हैं एवं अपने पूँजी खातों को नए लाभ विभाजन अनुपात में रखने का निर्णय लेते हैं। फर्म की नवनिर्धारित कुल पूँजी, सेवानिवृति के समय की उनकी कुल पूँजी से कम या अधिक हो सकती है। साझेदार की नई पूँजी की तुलना उनके पूँजी खाते में जमा शेष से की जाती है। यदि पूँजी खाते में कुछ आधिक्य है, तब संबंधित साझेदार द्वारा राशि निकाल ली जाएगी। यदि पूँजी खाते का शेष गणना की गई राशि से कम है तो इस स्थिति में साझेदार इसके द्वारा रोकड़ लाएगा।
साझेदार की मृत्यु पर, ख्याति, परिसम्पत्तियों का पुनर्मूल्यांकन एवं दायित्वों का पुनर्निर्धारण, एकत्रित संचय एवं अवितरित लाभों के संबंध में लेखांकन व्यवहार उसी प्रकार होगा जैसाकि साझेदार के सेवानिर्वत होने पर किया जाता है। साझेदार की मृत्यु पर उसके कानूनी उत्तराधिकारी को देय राशि का भुगतान किया जाएगा। उत्तराधिकारी निम्न राशि को प्राप्त करने का अधिकारी हैः-
(क) मृतक साझेदार के पूँजी खाते में जमा शेष
(ख) पूँजी पर ब्याज, यदि साझेदारी संलेख में प्रावधान हो, मृत्यु की तिथि तक।
(ग) फर्म की ख्याति में भाग
(घ) अवितरित लाभों के संचय में भाग
(ङ) मृत्यु की तिथि तक लाभ में भाग
मृतक साझेदार के कानूनी उत्तराधिकारी के खाते में निम्न राशियों को नाम में लिखा जाएगाः
(1) आहरण
(2) आहरण पर ब्याज
(3) परिसम्पत्तियों एवं दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन से हानि का भाग
(4) उसकी मृत्यु की तिथि तक यदि कोई हानि होती है तो उसका भाग
मृतक साझेदार के पूँजी खाते में उपरोक्त समायोजन करके पूँजी खाते के शेष को उसके उत्तराधिकारी के नाम से खाता खोलकर उसमें हस्तांतरित कर दिया जाता है।
नये लाभ विभाजन अनुपात की गणना:-

लाभों के विभाजन के लिए जर्नल प्रविष्टियाँ =
|
Date |
Particular |
L.F. |
Dr. |
Cr. |
|
i. |
P & L Appropriation A/c Dr. To Y's Capital A/c To Z's Capital A/c (Profit is divided in new ratio 5:3) |
|
2,40,000 |
1,50,000 90,000 |
|
ii. |
Y's Capital A/c Dr. Z's Capital A/c Dr. To X's Capital A/c (amount paid by Y and Z to X on his retirement) |
|
60,000 1,00,000 |
1,60,000 |
पुनर्मूल्याकंन खाते एवं लाभ-हानि समायोजन खाते में अंतर निम्न्लिखित हैं:-
|
आधार |
पुनर्मूल्याकंन खाता |
लाभ-हानि समायोजन खाता |
|
अर्थ |
सम्पत्ति एवं दायित्वों के पुनर्मूल्यांकित मूल्य का लेखा करने के लिए बनाया जाने वाला खाता पुनर्मूल्यांकन खाता होता है। |
लाभ-हानि खाता बनाने के पश्चात् बचे हुए समायोजनों के साथ बनाये जाने वाला खाता लाभ-हानि समायोजन खाता होता है। |
|
उद्देश्य |
फर्म की सम्पत्ति एवं दायित्वों को पुनर्मूल्यांकित करने के लिए। |
लाभ-हानि खाते में कुछ मदों के समायोजन हेतु। |
|
तैयार करने का समय |
इस खाते को साझेदारी फर्म के पुनर्गठन पर बनाया जाता है। |
व्यापारिक एवं लाभ-हानि खाता तैयार करने पर। |
Journal
|
date |
particulars |
L.F. |
Dr. |
Cr. |
|
Profit & loss suspense a/cDr. to Harish’s capital a/c (harish’s profit till the date of death) |
50,000 |
50,000 |
कार्यशील टिप्पणी: -
हरीश : मुकेश : सराफ
2 : 2 : 1
चालू वर्ष वर्श के लाभों में सेहरीश के हिस्से का लाभ हैः


| दायित्व | राशि (रू.) | सम्पत्तियाँ | राशि (रु.) |
| विविध लेनदार | 13,590 | नकद | 5,900 |
| पूँजी खातेः | देनदार | 8,000 | |
| ए 15,000 | स्टॉक | 11,690 | |
| बी 1,000 | भवन | 23,000 | |
| सी 10,000 | 35,000 | ||
| 48,590 | 48,590 |
Journal
|
Date |
Particular |
LF |
Dr. |
Cr. |
|
|
Revaluation A/c Dr. To Building A/c |
|
7,000 |
7,000 |
|
|
Revaluation A/c Dr. To Pro. for Doubt full debt A/c |
|
400 |
400 |
|
|
Goodwill A/c Dr. To A's Capital A/c To B's Capital A/c To C's Capital A/c |
|
9,000 |
4,500 3,000 1,500 |
|
|
A's Capital A/c Dr. C's Capital A/c Dr. To Goodwill A/c |
|
6,750 2,250 |
9,000 |
|
|
B's Capital A/c Dr. To Bank A/c |
|
5,000 |
5,000 |
|
|
B's Capital A/c Dr. To B's Loan A/c |
|
5,533 |
5,533 |
Balance Sheet
after B's Retirement
|
Liabilities |
Amt. |
Assets |
Amt. |
|
Sundry Creditors B's Loan Capital A/c A C |
13,590 5,533
9,050 8017 |
Cash (5,900-5,000) Debtors 8,000 Less-Pro. 400 Stock Building |
900
7,600 11,690 16,000 |
|
Total |
36,190 |
|
36,190 |
1- स्टॉक
तथा फर्नीचर
को 10 प्रतिशत
से कम किया
जाये।




A.
समझौते द्वारा समापन
B.
अनिवार्य समापन
C.
आकस्मिक घटनाओं के घटने पर समापन
D.
उपयुर्क्त सभी
निम्नलिखित परिस्थितियों में साझेदारी फर्म का समापन या अन्त हो सकता हैः (1) समझौते द्वारा समापन (2) अनिवार्य समापन (3) आकस्मिक घटनाओं के घटने पर समापन (4) सूचना द्वारा समापन (5) न्यायालय द्वारा समापन
साझेदारों के पूंजी खाते बंद करने के पश्चात् बैंक खाता बनाया जाता है एवं फर्म के समापन पर साझेदारों द्वारा लाई गई रोकड़ सहित बैंक/रोकड़ से संबंधित सभी प्रविष्टियों की इस खाते में खतौनी की जाती है। साझेदारों के पूंजी खातें को बैंक से भुगतान करके बंद किया जाता है एवं इसके बाद बैंक खाता भुगतान करके/प्राप्त करके बंद कर दिया जाता है। इस प्राकार सभी खातों को बंद कर दिया जाता है। यदि रोकड़/बैंक खाता कुछ शेष नहीं दिखाता तब यह दर्शाता है कि फर्म के समापन पर सभी खातों को नियमानुसार बंद किया गया है।
|
Date |
Particular |
L.F. |
Dr. |
Cr. |
|
i. |
Realisation A/c Dr. To Partner's Capital A/c (Profit of realisation to Capital A/c) |
|
35,000 |
35,000 |
|
ii. |
Partner's Capital A/c Dr. To Realisation A/c (Assets taken by him for Rs. 11,000) |
|
11,000 |
11,000 |
|
iii. |
Partner's Capital A/c Dr. To Bank A/c (Balance amount paid to partner) |
|
9,000 |
9,000 |
कार्यशील टिप्पणी:-
पूँजी खाते का डेबिट शेष = (15,000)
(+) पूँजी खाते में वसूली का लाभ = 35,000
(-) साझेदार द्वारा ली गई सम्पत्तियाँ = (11,000)
साझेदार को दिया जाने वाला शेष = 9,000
यदि चिट्ठे में ख्याति खाता है तो उसे अन्य सम्पत्तयों की भाँति वसूली खाते में ले जाते हैं। इस सम्बन्ध में निम्न प्रविष्टियाँ की जाती हैः
|
1. On transfer to Realisation A/c: |
Realisation A/c …. Dr. To Goodwill A/c |
|
2. If it is realized in cash: |
Cash/Bank A/c ….Dr. To Realisation A/c |
|
3. If one of the partners agreed to pay for Goodwill: |
Concerned Partner’s Capital A/c ….Dr. To Realisation A/c |
Realisation A/c
|
Particulars |
Amount |
Particulars |
Amount |
|
To Assets A/c To Bank a/c (Realisation Exp.) To cash (creditors paid off) |
1,00,000 2,000 20,000 |
By libilities By bank (assets sold) By Loss transferred to partner’s capital a/c |
20,000 85,000 17,000 |
|
1,22,000 |
1,22,000 |

Memorandum Balance Sheet


| दायित्व | रकम रु | सम्पत्ति | रकम रु |
| विविध लेनदार | 24,000 | ख्याति | 18,000 |
| A का ऋण खाता | 6,000 | प्लांट व मशीनरी | 60,000 |
| सामान्य संचय | 30,000 | स्टॉक | 45,000 |
| पूँजी खाते | विविध देनदार | 18,000 | |
| A | 30,000 | रोकड़ | 9,000 |
| B | 60,000 | ||
| 1,50,000 | 1,50,000 |
Partners’Capital Account
|
Particular |
A |
B |
Particular |
A |
B |
|
To Realisation |
|
|
By Balance |
|
|
|
A/c |
14,010 |
14,010 |
b/d |
30,000 |
60,000 |
|
To Cash A/c |
30,990 |
60,990 |
By Reserve |
|
|
|
|
|
|
Fund A/c |
15,000 |
15,000 |
|
|
45,000 |
75,000 |
|
45,000 |
75,000 |
A’s loan Account
|
Particulars |
Amount |
Particulars |
Amount |
|
To Cash A/c |
6,000 |
By Balance b/d |
6,000 |
|
|
6,000 |
|
6,000 |
Cash Account
|
Particulars |
Amount |
Particulars |
Amount |
|
To Balance b/d |
9,000 |
By Realisation A/c |
|
|
To Realisation |
|
(Creditors paid) |
23,520 |
|
A/c |
|
By realization A/c |
|
|
(Assets realised) |
1,14,000 |
(Expenses) |
1,500 |
|
|
|
By A’s Loan A/c |
6,000 |
|
|
|
By A’s Capital A/c |
30,990 |
|
|
|
By B’s Capital A/c |
60,990 |
|
|
1,23,000 |
|
1,23,000 |
विघटन
से सम्बंधित मुख्य
जर्नल प्रविष्टियाँ निम्नलिखित
हैं -
सम्पत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरण
करने पर
Realisation
A/c Dr.
To Sundry Assets A/c
(Assets transferred to Realisation
Account)
सम्पत्तियों
से राशि वसूल होने
पर
Cash/Bank A/c Dr.
To Realisation A/c
(Cash realised from sale of
assets)
किसी
साझेदार
द्वारा
सम्पत्ति के
लिए जाने पर
Partners’Capital
A/c Dr.
To Realisation A/c
(Assets taken over by partners)
दायित्वों
को
हस्तांतरण
करने पर
Sundry Liabilities
A/c Dr.
To Realisation A/c
(Liabilities transferred to
Realisation Account)
फर्म
के
दायित्वों
का भुगतान
करने पर
Realisation
A/c Dr.
To Cash/Bank A/c
(Sundry liabilities paid off)
साझेदार
द्वारा किसी दायित्व
का व्यक्तिगत
भुगतान करने पर
Realisation
A/c
Dr.
To Partners’Capital A/c
(Liabilities
taken over by the partners)
वसूली
व्ययों का नकद भुगतान
Realisation
A/c
Dr.
To Cash/Bank A/c
(Realisation
expenses paid in cash)
वसूली
खाते पर लाभ की
दशा में
Realisation A/c
Dr
To
All Partners’Capital A/c
(Profit
on realisation transferred )
वसूली
खाते पर हानि
की दशा
All Partners’Capital
A/c Dr.
To Realisation A/c
(Loss on realization transferred)
| रु | रु | ||
| लेनदार पूँजी अ 60,000 ब 90,000 अ की पत्नी का ऋण | 18,000 1,50,000 32,000 | रोकड़ देनदार 40,000 -आयोजन 2,000 स्टॉक मशीनरी भूमि एवं भवन | 5,000 38,000 52,000 40,000 65,000 |
| 2,00,000 | 2,00,000 |
Realisation A/c
|
Particulars |
Amt. |
Particulars |
Amt. |
|
To Debtor's A/c To Stock A/c To Machinery A/c To Land & Building A/c To Bank A/c (Liabilities paid) Creditors 17,000 Realisation Exp. 1,500 To A's Capital A/c (Wife Loan) |
40,000 52,000 40,000 65,000
18,500
33,000 |
By Creditors A/c By A's wife's loan A/c By Pro. for bad debts A/c By Bank A/c (Assets Realised) Debtor 45,000 Stock 32,000 Machinery 35,000 Land & Building 35,000 By Capital A/c (Loss on realisation) A B |
18,000 32,000 2,000
1,47,000
19,800
29,700 |
|
|
2,48,500 |
|
2,48,500 |
Capital A/c
|
Particulars |
A |
B |
Particulars |
A |
B |
|
To Realisation A/c (Loss) To Bank A/c (Final Payment) |
19,800 73,200 |
29,700 60,300 |
By Balance b/d By Realisation A/c (Wife loan) |
60,000 33,000 |
90,000 - |
|
|
93,000 |
90,000 |
|
93,000 |
90,000 |
Cash A/c
|
Particulars |
Amt. |
Particulars |
Amt. |
|
To Balance b/d To Realisation A/c (Assets Realised) |
5,000 1,47,000 |
By Realisation A/c (Liabilities paid) By A's Capital A/c By B's Capital A/c |
18,500
73,200 60,300 |
|
|
1,52,000 |
|
1,52,000 |
A.
रू 13000
B.
रू 8000
C.
रू 2000
D.
रू 7000
हरण किये गये 300 अंशों पर प्राप्त राशि = 300 X 20 =र 15,000 रु इसलिए, 200 पुनर्निगमित अंशों के लिए अंश हरण खाते में = 200 X 50 = 10,000 रु हैं। पुनर्निगम पर दिया गया बट्टा = 200 X 10 = 2,000 रु अर्थात इस राशि को अंश हरण खाते में शामिल पुनर्निगमित अंशों पर प्राप्त राशि में से घटा कर शेष राशि को पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जायेगा, अर्थात = 10,000 - 2,000 = 8,000 रु
A.
रू 1200
B.
रू 1600
C.
रू 2000
D.
रू 1700
हरण किये गये 400 अंशों पर प्राप्त राशि = 400 X 5 = 2000 रु इसलिए, 300 पुनर्निगमित अंशों के लिए अंश हरण खाते में = 300 X 5 = 1,500 रु हैं। पुनर्निगम पर दिया गया बट्टा = 300 X 1 = 300 रु अर्थात इस राशि को अंश हरण खाते में शामिल पुनर्निगमित अंशों पर प्राप्त राशि में से घटा कर शेष राशि को पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जायेगा, अर्थात = 1,500 - 300 = 1,200 रु
A.
रू 1700
B.
रू 1200
C.
रू 2100
D.
रू 300
हरण किये गये 400 अंशों पर प्राप्त राशि = 400 X 5 = 2000 रु इसलिए, 300 पुनर्निगमित अंशों के लिए अंश हरण खाते में = 300 X 5 = 1,500 रु हैं। पुनर्निगम पर दिया गया बट्टा = 300 X 1 = 300 रु अर्थात इस राशि को अंश हरण खाते में शामिल पुनर्निगमित अंशों पर प्राप्त राशि में से घटा कर शेष राशि को पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जायेगा, अर्थात = 1,500 - 300 = 1,200 रु
A.
रू 3800
B.
रू 2800
C.
रू 1800
D.
रू 6200
अदत्त याचना अर्थात अंशों पर बकाया राशि = 500 अंशों पर 4 रु (2 रु प्रथम मांग, तथा 2 रु अंतिम मांग) प्रतिअंश बकाया है तथा 400 अंशों पर 2 रु (अंतिम मांग के 2रु) प्रति अंश बकाया है। इसलिए 500 X 4 = 2000 रु 400 X 2 = 800 रु कुल बकाया राशि = 2000 + 800 = 2800 रु
A.
B.
C.
कोई सीमा नहीं
D.
कम्पनी अधिनियम 2013 के अनुसार अंशों के प्रीमियम पर निर्गमन पर अधिकतम कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इस प्रकार प्राप्त प्रीमियम की राशि को बोनस अंशों के निर्गमन, पूँजीगत हानियों के अपलेखन जैसे विशेष प्रयोजनों के लिए उपयोग में लिया जाता है।
A.
असीमित दायित्व।
B.
एक सदस्य की मृत्यु या निवृत्ती से प्रभावित अस्तित्व।
C.
पृथक अस्तित्व अवधारणा।
D.
पंजीकरण आवश्यक नहीं।
एक कम्पनी पृथक वैधानिक अस्तित्व के साथ विधि द्वारा निर्मित एक क्रत्रिम व्यक्ति होता है।
A.
लाभों के वितरण में।
B.
बोनस अंशों के निर्गमन में।
C.
निर्देशकों को राशि का भुगतान करने में।
D.
कर्मचारियों को बोनस का भुगतान करने में।
अंशों के निर्गमन पर प्रीमियम का उपयोग बोनस अंशों के निर्गमन में किया जा सकता है।
A.
न मांगी गई पूँजी का भाग को।
B.
समापन के समय प्रयुक्त पूँजी को।
C.
चिट्ठे में नहीं दर्शायी गई राशि को।
D.
अंश हरण के क्रेडिट तथा डेबिट में अंतर को।
पूँजी संचय एक पूँजीगत लाभ होता है। अंश हरण के क्रेडिट तथा डेबिट में अंतर को पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जाता है।
A.
जब इसे चुकाया नहीं गया हो।
B.
जब इसे पहले से चुका दिया गया हो।
C.
जब नया निर्गमन प्रीमियम पर हो।
D.
जब प्रीमियम नहीं मांगा गया हो।
जब एक ऐसे अंश का हरण किया जाता है सि पर प्रीमियम की राशि देय होती है परंतु पूर्णतः या अंशतः प्राप्त नहीं हो, तो हरण की प्रविष्टि में प्रतिभूति प्रीमियम संचय खाते को डेबिट किया जाना चाहिए।
A.
आवेदित अंश प्रस्तुत अंशों से अधिक हैं।
B.
आवेदित अंश प्रस्तुत अंशों के बराबर हैं।
C.
आवेदित अंश प्रस्तुत अंशों से कम हैं।
D.
आवेदित अंश शून्य हैं।
जब जनता को अभिदान हेतु प्रस्तुत अंशों की संख्या जनता द्वारा आवेदित अंशों की संख्या की तुलना में कम हो, तो इसे अंशों का न्यून-अभिदान कहा जाता है।



विनियोजित पूँजी = 5,00,000 रु
औसत लाभ = 45,000 (5,000 रु की सामान्य हानि के पश्चात्)
लाभ की सामान्य दर = 8%
ख्याति = अधिलाभ की पांच गुना




ख्याति के मूल्यांकन के लिए अपनायी जाने वाली विधियाँ
1. औसत लाभ विधि।
2. अधिलाभ विधि।
3. औसत लाभ की पूँजीकरण विधि।
4. अधिलाभों की पूँजीकरण विधि।

ख्याति की विशेषताओं को इस प्रकार प्रकट किया गया है:-
1. यह एक अमूर्त सम्पत्ति होती है परंतु एक काल्पनिक सम्पत्ति नहीं होती है।
2. इसका संगठन से अलग को अस्तित्व नहीं होता है।
3. इसका मूल्य व्यक्तिपरक निर्णय के मूल्य पर निर्भर होता है।
4. यह लाभ कमाने में सहायक होती है।
5. यह एक आकर्षण बल होता है जो ग्राहकों को व्यवसाय के पुराने स्थान पर लाता है।
6. यह विभिन्न पहलूओं का परिणाम होता है जैसे - व्यवसाय का स्थान, व्यवसाय की प्रकृति, अनुकूल सम्पर्क।

निम्नलिखित परिस्थितियों में ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता होती है:
1. लाभ विभाजन अनुपात में एक परिवर्तन पर।
2. एक नये साझेदार के प्रवेश पर।
3. एक साझेदार की मृत्यु या निवृति पर।
4. व्यवसाय के विक्रय पर।
5. दो फर्मों के मिश्रण पर।
Journal
|
Date |
Particulars |
Dr. Rs. |
Cr. Rs. |
|||
|
|
(Case-I) |
|
|
|||
|
2010 |
Neetu |
Dr. |
1,500 |
|
||
|
Apr.1 |
Runita |
Dr. |
6,000 |
|
||
|
|
To Nisha |
|
7,500 |
|||
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(Adjustment made for the amount of goodwill) |
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2010 |
(Case-II) |
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Apr.1 |
Nisha |
Dr. |
22,500 |
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Neetu |
Dr. |
13,500 |
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Runita |
Dr. |
9,000 |
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To Goodwill A/c |
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45,000 |
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(Amount of existing goodwill written off in old ratio) |
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2010 |
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Apr.1 |
Neetu |
Dr. |
1,500 |
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Runita |
Dr. |
6,000 |
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To Nisha |
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7,500 |
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(Adjustment made for the amount of goodwill) |
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साझेदारी के पुनर्गठन अथवा लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन पर सम्पत्तियों एवं दायित्वों के मूल्यांकन से होने वाले लाभ अथवा हानि को जानने के लिए पुनर्मूल्यांकन खाता खोला जाता है। यह एक नाम-मात्र खाता है। इस खाते का क्रेडिट शेष पुनर्मूल्यांकन के कारण हुए लाभों को दर्शाता है जिसे पुराने साझेदारों के पूँजी खाते में पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में क्रेडिट कर देते हैं जबकि डेबिट शेष हानि को दर्शाता है जिसे साझेदारों के पूँजी खाते में डेबिट किया जाता है।




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लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन पर परिसम्पत्तियों और देयतओं का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हो जाता है, क्योंकि सम्पत्तियों का वर्तमान मूल्य पुस्तक मूल्य से भिन्न हो सकता है। इस पुनर्मूल्यांकन का शुद्ध प्रभाव विद्यमान साझेदारों के पूँजी खातों में समायोजित करना आवश्यक होता है। सम्पत्तियों और दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन के लिए पुनर्मूल्यांकन खाता बनाते है। इस खाते का क्रेडिट शेष पुनर्मूल्यांकन से लाभ होता है, जिसे साझेदारों के पूँजी खातों में पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में क्रेडिट कर दिया जाता है। इस खाते का डेबिट शेष हानि को दर्शाता है जिसे साझेदारों के पूँजी खाते में पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में डेबिट कर दिया जाता है।








A.
उसके ऋण खाते में
B.
उसके पूँजी खाते में
C.
उसके व्यक्तिगत खाते में
D.
अन्य साझेदारों के पूँजी खाते में
एक साझेदार की मृत्यु के समय सामान्य संचय में उसके हिस्से को सीधे उसके पूँजी खाते में हस्तांतरित किया जाता है।
A.
एक साझेदार की निवृत्ती के समय
B.
एक साझेदार के प्रवेश के समय
C.
एक साझेदार की मृत्यु के समय
D.
साझेदारी के समापन के समय
एक साझेदार की मृत्यु के समय मृत साझेदार के खाते के निपटान के लिए निष्पादक का खाता बनाया जाता है।
A.
3 : 1
B.
2 : 1
C.
3 : 2
D.
1 : 1
जैसा कि बचे हुए साझेदारों का नया लाभ विभाजन अनुपात नहीं दिया गया है; इसलिए, बचे हुए साझेदारों का फायदा उनके पुराने अनुपात में होगा। इसलिए, इस स्थिति में वाई तथा जैड़ का फायदे का अनुपात 2:1 होगा।
A.
पुनर्मूल्यांकन खाते में
B.
सम्पत्ति खाते में
C.
दायित्व खाते में
D.
रोकड़ खाते में
एक साझेदार की निवृत्ती के समय, साझेदार की निवृत्ती की तिथि को सम्पत्तियों तथा दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन को रिकॉर्ड करने के लिए पुनर्मूल्यांकन खाता खोला जाता है। सम्पत्तियों में किसी भी प्रकार की कमीं तथा दायित्वों में किसी भी प्रकार की वृद्धि को पुनर्मूल्यांकन खाते में डेबिट किया जाता है।
A.
पुनर्मूल्यांकन खाता।
B.
सम्पत्ति खाता।
C.
दायित्व खाता।
D.
रोकड़ खाता।
दायित्वों के मूल्य में वृद्धि के लिए निम्नलिखित जर्नल प्रविष्टि की जायेगी : Revaluation A/c Dr. To Liabilities A/c (Individually) (Increase in the amount of liabilities)
A.
6% वार्षिक
B.
7% वार्षिक
C.
8% वार्षिक
D.
10% वार्षिक
साझेदारी अधिनियम की धारा 37 के अनुसार, मृत साझेदार को देय राशि पर देय ब्याज 6% वार्षिक दर पर दिया जायेगा।
A.
पुनर्मूल्यांकन खाते को।
B.
सम्पत्ति खाते को।
C.
दायित्व खाते को।
D.
लाभ एवं हानि खाते को।
सम्पत्ति के मूल्य में कमीं के लिए निम्नलिखित जर्नल प्रविष्टि की जायेगी : Revaluation A/c Dr. To Assets A/c’s (Individually) (Decrease in the value of assets)
A.
नये लाभ विभाजन अनुपात में।
B.
समान अनुपात में।
C.
पूँजियों के अनुपात में।
D.
पुराने लाभ विभाजन अनुपात में।
सामान्य संचय को सभी पुराने साझेदारों में उनके पुराने लाभ विभाजन अनुपात में हस्तांतरित किया जायेगा। क्योंकि यह मृत साझेदार से भी सम्बंधित होता है।
A.
नया लाभ विभाजन अनुपात = पुराना अनुपात + प्राप्त अनुपात।
B.
नया लाभ विभाजन अनुपात = प्राप्त अनुपात + नया अनुपात।
C.
नया लाभ विभाजन अनुपात = पुराना अनुपात - नया अनुपात।
D.
नया लाभ विभाजन अनुपात = पुराना अनुपात + त्याग अनुपात।
नये लाभ विभाजन अनुपात की गणना इसप्रकार की जा सकती है : पुराना अनुपात + प्राप्त अनुपात।
Profit and Loss Suspense Account
शेष साझेदारों की सहमति के अनुसार।
अवकाश ग्रहण करते समय फर्म की ख्याति में अवकाश ग्रहण करने वाला साझेदार अपने भाग (अंश) की ख्याति का अधिकारी होता है।
सम्पत्तियों तथा दायित्वों के वर्तमान मूल्य पर लाने के लिए सम्पत्तियों का पुनर्मूल्यांकन तथा दायित्वों का पुनर्निधारण किया जाता है।
साझेदार के अवकाश ग्रहण करने या साझेदार की मृत्यु पर ख्याति का समायोजन करने के लिए लाभ-प्राप्ति अनुपात की गणना की जाती है।
वह साझेदार जो फर्म को छोडकर चला जाता है, उसे बाहर जाने वाला साझकदार कहते हैं।

तुरन्त नकद भुगतान द्वारा या एकमुश्त भुगतान द्वारा।
1. आहरण की राशि
2. सम्पत्तियों एवं दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन पर हानि की राशि में हिस्सा।
देय राशि पर मृत्यु की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज या इस देय राशि से अर्जित लाभ को प्राप्त करने का अधिकार होता है।
किसी साझेदार की मृत्यु पर उसके उत्तराधिकारी को फर्म की ख्याति में हिस्सा पाने का अधिकार है। मृतक साझेदार के हिस्से की ख्याति का समायोजन शेष जीवित साझेदारों के मध्य उनके लाभ-प्राप्ति अनुपात में किया जाता है, अतः ख्याति का लेखांकन आवश्यक है।






















A.
रु 20,000
B.
रु 8,000
C.
रु 3,000
D.
रु 4,000
इस विधि में हम यह देखते हैं कि पिछले वर्ष फर्म को कितना लाभ हुआ था और पिछले वर्ष की बिक्री कितनी थी। इसके बाद पिछले वर्ष की बिक्री और चालू वर्ष की मृत्यु की तिथि तक की बिक्री के अनुपात के अनुसार इस वर्ष के लाभ की मात्रा ज्ञात की जाती है।
A.
रु
B.
रु 16,500 और रु 19,500
C.
रु
D.
रु
साझेदार के अवकाश ग्रहण अथवा मृत्यु के समय ख्याति के लिए समायोजन साझेदारों के पूँजी खातों के माध्यम से किया जाएगा। अवकाश ग्रहण करने वाले अथवा मृतक साझेदार के पूँजी खाते की उसके हिस्से की ख्याति से क्रेडिट किया जाएगा और शेष साझेदारों के पूँजी खातों को उनके लाभ प्राप्ति अनुपात में डेबिट किया जाएगा।
A.
रु 60,000
B.
रु 50,000
C.
रु 40,000
D.
रु 10,000
फर्म का ख्याति का मूल्यांकन किया जाता है और अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार के हिस्से की ख्याति को उसके पूँजी खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है।
A.
1 : 1
B.
2 : 1
C.
7 : 8
D.
3 : 5
कभी-कभी अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार का हिस्सा शेष साझेदारों द्वारा किसी विशेष अनुपात में ले लिया जाता है। ऐसी अवस्था में शेष साझेदारों के पुराने अनुपात में उनके द्वारा लिया गया हिस्सा जोड़कर ही नए अनुपात की गणना की जाती है।
A.
A रु 16,000; B रु 12,000; C रु 8,000
B.
A रु 12,000; B रु 16,000; C रु 8,000
C.
A रु 22,500; C रु 13,500
D.
A रु 23,625; C रु 12,375
अवकाश ग्रहण करने की तिथि पर सम्पत्तियों तथा दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है और पुनर्मूल्यांकन के लाभ में अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार के हिस्से को उसके पूँजी खाते में क्रेडिट और हानि को डेबिट की तरफ लिख दिया जाता है।
A.
सी तथा ई को क्रमशः 7,200 रु तथा 4,800 रु होगा।
B.
सी, डी तथा ई को क्रमशः 6,000 रु, 4,000 रु तथा 2,000 रु होगा।
C.
प्रत्येक साझेदार को 4,000 रु होगा।
D.
सी, डी तथा ई को क्रमशः 2,000 रु, 4,000 रु तथा 6,000 रु होगा।
इसे सभी साझेदारों में उनके पुराने अनुपात में विभाजित किया जायेगा, क्योंकि यह सभी से सम्बंधित है।
A.
15,000 रु प्रति।
B.
क्रमशः 20,000 रु तथा 10,000 रु।
C.
क्रमशः 12,000 रु, 12,000 तथा 6,000 रु।
D.
क्रमशः 10,000 रु तथा 20,000 रु।
बी के हिस्से की ख्याति की राशि को बचे हुए साझेदारों द्वारा फायदे के अनुपात में वहन किया जायेगा। इस स्थिति में, बचे हुए साझेदारों का नया तथा फायदे का अनुपात 2:1 है।
A.
0% वार्षिक।
B.
5% वार्षिक।
C.
6% वार्षिक।
D.
ब्याज की बाज़ार दर।
यदि साझेदार के ऋण पर ब्याज सम्बंधित कोई समझौता नहीं हो, तो उसे 6% वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज दिया जायेगा।
A.
रु
B.
रु 6,000
C.
रु
D.
रु
लाभों में बी के हिस्से की गणना इस प्रकार की जायेगी : 1,20,000 X 2/5 X 3/12 = रु 12000
A.
8 : 7
B.
4 : 5
C.
3 : 2
D.
2 : 3
ए तथा बी का नया लाभ विभाजन अनुपात 3 : 2 होगा। 1/3 हिस्से को ए तथा बी 3:2 के अनुपात में प्राप्त करते हैं। ए प्राप्त करता है 1:3 X 3/5 = 3/15 बी प्राप्त करता है 1/3 X 2/5 = 2/15 ए का नया अनुपात = 3/15 + 1/3 = 8/15, बी का नया अनुपात = 2/15 + 1/3 = 7/15
A.
फायदे का अनुपात।
B.
त्याग अनुपात।
C.
नया लाभ विभाजन अनुपात।
D.
पुराना लाभ विभाजन अनुपात।
वह अनुपात जिसमें सतत् साझेदार जाने वाले साझेदार के हिस्से को प्राप्त करते हैं उसे अ. फायदे का अनुपात कहा जाता है। जैसे हम एक नये साझेदार के प्रवेश पर त्याग के अनुपात की गणना करते हैं वैसे ही एक साझेदार की निवृत्ती या मृत्यु पर फायदे के अनुपात की गणना की जाती है।
एक अस्थायी प्रभार सामान्यत: कम्पनी द्वारा लिये गये ऋण के लिए उन सम्पत्तियों को छोड़कर जो विशिष्ट प्रभार के लिए हैं सभी सम्पत्तियों पर निर्मित प्रभार होता है। यदि कम्पनी किसी सम्पत्ति का विक्रय करती है या किसी सम्पत्ति को प्रतिस्थापित करती है तो यह दायित्व नयी सम्पत्तियों पर हस्तांतरित हो जायेगा। इसलिए इसे अस्थायी प्रभार कहा जाता है।
जब ऋणपत्रों के शोधन के लिए लाभों का प्रयोग नहीं किया जाता है तो इसे पूँजी में से शोधन कहा जाता है। ऐसी दशा में लाभों की किसी भी राशि को ऋणपत्र शोधन संचय में हस्तांतरित नहीं किया जाता है।
कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 71(4) तथा प्रतिभूति एवं विनिमयन बोर्ड ऑफ इन्डिया द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार शोधन प्रराम्भ करने से पूर्व निर्गमित किए गए ऋणपत्रों के कम से कम 25% के बराबर एक ऋणपत्र शोधन संचय का निर्माण करना आवश्यक है। अतः ऋणपत्रों को पूर्णतया पूँजी में से शोधन करना सम्भव नहीं है।


यदि राशि को चिट्ठे की तिथि से 12 माह पश्चात् समाप्त किया जाता है तो ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि खाते को गैर-चालू सम्पत्तियों के तहत अन्य गैर-चालू सम्पत्तियों के रूप में दिखाया जाता है।
ऋणपत्रों का लाभों में से शोधन का आशय है कि जितनी राशि के ऋणपत्रों का भुगतान लाभ में से किया जाना है उतनी ही राशि लाभ-हानि विवरण से निकाल कर ऋणपत्र शोधन संचय खाते में हस्तांतरित कर दी जाती है और ऋणपत्रों का भुगतान कर दिया जाता है।