






कम्पनी अंश पूँजी एवं ऋणपत्र की नियमावली-2014 का नियम 18 (7) (C) के अनुसार, प्रत्येक कम्पनी जिसके लिए DRR बनाना अनिवार्य है वह अगले वर्ष 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान देय होने वाले (शोधनीय) ऋणपत्रों की राशि का कम से कम 15 % प्रत्येक वर्ष 30 अप्रैल तक बैंक में जमा करेगी अथवा विनियोजित करेगी।
इस प्रकार जमा की गई अथवा विनियोजित राशि का उपयोग केवल वर्ष के दौरान शोधन होने वाले ऋणपत्रों के भुगतान करने के लिए ही किया जाएगा।
ऋणपत्र की निम्नलिखित विशेषाताएँ हैं –
1. ऋणपत्र एक सर्टीफिकेट के रुप में निर्गमित किया जाता है जो कि कम्पनी द्वारा लिए गए ऋण का एक लिखित प्रमाण है।
2. ऋणपत्र पर कम्पनी की सार्वमुद्रा अंकित होती है।
3. यह मूल राशि की एक निश्चित तिथि पर वापसी का अनुबन्ध होता है।
4. कम्पनी अधिनियम 2013 के अनुसार किसी भी कम्पनी को निर्गमन की तिथि से 10 बर्ष से अधिक देय तिथि वाले ऋणपत्र निर्गमन करने की अनुमति नहीं है। परन्तु एक ऐसी कम्पनी जो इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में लगी हुई है वह 10 वर्ष से अधिक परन्तु 30 वर्ष से अधिक नहीं के ऋणपत्र निर्गमन कर सकती है।
5. प्रायः ऋणपत्रों का निर्गमन एक निश्चित व्याज दर पर किया जाता है जिसे कूपन दर कहा जाता है। ऋणपत्र पर किसी निश्चित दर से ब्याज दिया जाता है चाहे कम्पनी लाभ अर्जित कर रही हो या नहीं।
6. ऋणपत्र प्रायः कम्पनी की सम्पत्तियों पर सुरक्षित होते हैं। यदि कम्पनी निर्गमन की शर्तों के अनुसार इनका भुगतान नहीं कर पाती है तो ये न्यायलय में दावा करके कम्पनी की सम्पत्तियाँ बिकवा कर अपना ऋण वसूल कर सकते हैं।
7. ऋणपत्रों के द्वारा कम्पनी द्वारा लिया गया ऋण दीर्घकालीन प्रकृति का होता है और ऋणपत्रों के धन की वापसी (शोधन) प्रायः एक लम्बे समय जैसे 7 वर्ष अथवा 12 वर्ष पश्चात की जाती है। अतः ऋणपत्रों द्वारा लिए गए ऋण को ऋण पूँजी भी कहा जाता है।
अंश तथा ऋणपत्र में अंतर
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अंतर का आधार |
अंश |
ऋणपत्र |
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1. पूँजी अथवा ऋण |
एक अंश कम्पनी की पूँजी का हिस्सा होता है। अतः अंशधारी कम्पनी से स्वामी होते हैं। |
एक ऋणपत्र ऋण का हिस्सा होता है। अतः ऋणपत्रधारी कम्पनी के लेनदार होते हैं। |
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2. लाभांश अथवा ब्याज |
इन्हें लाभों में से लाभांश दिया जाता है। |
इन पर ब्याज दिया जाता है। |
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3. लाभांश अथवा ब्याज का परिवर्तनशील अथवा निश्चित होना |
लाभांश का भुगतान लाभ होने पर ही किया जाता है। लाभांश की दर भी प्रतिवर्ष बदलती रहती है और यह लाभों पर तथा संचालको के निर्णय पर निर्भर रहती है। |
इन पर ब्याज की दर निश्चित होती है और ब्याज का भुगतान करना अनिवार्य होता है चाहे कम्पनी को लाभ हो या न हो। |
|
4. ऐच्छिक अथवा आवश्यक रुप से रुपये वापिस करना |
यह कम्पनी की इच्छा पर निर्भर करता है कि यदि वह चाहे ता अपने ही अंशों को वापस क्रय करके अंशों का रुपया वापस कर सकती है। |
निर्गमन की शर्तों के अनुसार इनका रुपया अवश्य ही वापस करना पड़ता है। |
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5. समापन पर मूलधन की वापसी अन्त में अथवा पहले |
कम्पनी के समापन पर अंशों की राशि सबसे अन्त में लौटाई जाती है। |
कम्पनी के समापन पर ऋणपत्रों की राशि अंश पूँजी से पहले लौटाई जाती है। |
परिवर्तनीयता के दृष्टिकोण से ऋणपत्र दो प्रकार के होते हैः
(क) परिवर्तनीय ऋणपत्रः- परिवर्तनीय ऋणपत्र वह ऋणपत्र हैं जो एक निश्चित समय के पश्चात् ऋणपत्रधारियों अथवा कम्पनी की इच्छा पर एक निश्चित दर पर समता अंशों अथवा अन्य प्रतिभूतियों में परिवर्तनीय हैं।
(ख) गैर.परिवर्तनीय ऋणपत्रः- अपरिवर्तनीय ऋणपत्र वह ऋणपत्र हैं जिन्हें ऋणपत्रधारियों अथवा कम्पनी की इच्छा पर समता अंशों अथवा अन्य प्रतिभूतियों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। कम्पनियों द्वारा निर्गमित अधिकांश ऋणपत्र इस श्रेणी में आते हैं।








ऋणपत्र शोधन संचय (डीआरआर) आधिक्य में से अलग से रखी गयी राशि होती है अर्थात ऋणपत्रों के शोधन के लिए लाभ एवं हानि विवरण में शेष। कंपनी अधिनियम की धारा 71 (4) 2013 के अनुसार लाभांश के भुगतान करने के लिए उपलब्ध लाभों में से ऋणपत्र शोधन संचय बनाया जाता है और कंपनी द्वारा इस राशि का उपयोग ऋणपत्रों के शोधन के अलावा नहीं किया जायेगा।
कम्पनियों (अंश पूँजी और ऋणपत्र) के नियमए 2014 के नियम 18(7) के अनुसारए कंपनियों को अब ऋणपत्रों के मूल्य की 25% राशि ऋणपत्र शोधन संचय खाते में क्रेडिट करनी आवश्यक होगी।
नियम 18 (7) के अनुसार अतिरिक्त प्रत्येक कम्पनियों को प्रत्येक वर्ष 30 अप्रेल या पहले डीआरआर बनानाए निर्दिष्ट प्रतिभूतियों में निवेश या जमा करनाए 31 मार्च को समाप्त हुए वर्ष के दौरान भुगतान के लिए परिपक्व होने वाले ऋणपत्रत्रों की राशि के कम से कम 15 % के बराबर होना आवश्यक होता है।
अंशधारियों का कोष।
(1) समता तथा दायित्व (2) सम्पत्तियाँ
अनुसूची-3 में शीर्ष लम्बवत प्रारुप दिया गया है।
चिट्ठे में गुणात्मक तत्वों जैसे प्रबन्धकों की योग्यता को नहीं दर्शाया जा सकता है।
(1) अल्पकालीन ऋण
(2) व्यापार देय
(3) अन्य चालू दायित्व
(4) अल्पकालीन प्रावधान
अंशधारियों के कोष को निम्न शीर्षकों में बांटा जाएगाः
(1) अंश पूँजी
(2) संचय एवं आधिक्य
(3) शेयर वारंट के बदले प्राप्त धन
(1) पूँजी संचय
(2) पूँजी शोधन संचय
(3) ऋणपत्र शोधन संचय
(4) प्रतिभूति प्रीमियम संचय
समता और दायित्व पक्ष के प्रमुख शीर्षकः
(1) अंशधारी कोष
(2) अंश आवेदन राशि, जब तक आबंटन न हो
(3) गैर-चालू दायित्व
(4) चालू दायित्व
(1) कम्पनी के विरुद्ध ऐसे दावे जिन्हें कम्पनी ने देना स्वीकार नहीं किया है।
(2) कम्पनी द्वारा दी गई गारंटी।
सामान्य व्यावसायिक क्रियाओं के अन्तर्गत माल के क्रय अथवा सेवाएँ प्राप्त करने के सम्बन्ध में देय राशि व्यापारिक देयता है। इनमें विविध लेनदार तथा देय विपत्रों को सम्मिलित किया जाता है।
व्यापारिक प्राप्य व्यवसाय की सामान्य व्यावसायिक क्रियओं में माल के विक्रय अथवा सेवाएँ प्रदान करने के सम्बन्ध में प्राप्य राशि से सम्बन्धित है। इनमें विविध देनदार तथा प्राप्य विपत्रों को सम्मिलित किया जाता है।
संचालन चक्र किसी सम्पत्ति को प्रक्रियण के लिए क्रय करने और इसके नकद अथवा नकद तुल्यों में परिवर्तन होने के मध्य की अवधि है।
इस राशि को सकता और दायित्व पक्ष के चालू दायित्व शीर्षक के उप-शीर्षक अन्य चालू दायित्व में दिखाया जाएगा।
चिट्ठा या स्थिति-विवरण व्यवसाय में एक निश्चित समय बिन्दू पर सम्पत्तियों, दायित्वों एवं स्वामियों के हित सम्बन्धी सूचना दर्शाता है। उदाहरणार्थ, 31 मार्च, 2016 को बनाया गया किसी संस्था का चिट्ठा इस विशेष तिथि को संस्था की वित्तीय स्थिति प्रकट करता है।
लाभ-हानि विवरण अथवा आय विवरण वह विवरण है जो व्यवसाय की एक निश्चित अवधि की आय एवं व्ययों को तथा शुद्ध लाभ शुद्द हानि को प्रदर्शित करता है।
(1) चालू निवेश
(2) स्कन्ध
(3) व्यापार
(4) नकद एवं नकद समतुल्य
(5) अल्पकालीन
(6) अन्य चालू परिसम्पत्तियाँ
(1) दीर्घकालीन चिन्ह
(2) संचय तथा अधिशेष
(3) अल्पकालीन प्रावधान
(4) स्थायी सम्पत्तियाँ-अमूर्त सम्पत्तियाँ
(5) दीर्घकालीन प्रावधान
(6) स्थायी सम्पत्तियाँ-अमूर्त सम्पत्तियाँ
(1) गैर-चालू दायित्व
(2) चालू दायित्व
(3) चालू दायित्व
(4) अंशधारी कोष
(5) गैर-चालू सम्पत्तियाँ
(6) चालू सम्पत्तियाँ
|
चालू सम्पत्तियाँ |
चालू दायित्व |
|
(1) चालू निवेश |
(1) अल्पकालीन ऋण |
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(2) स्टॉक |
(2) व्यापार देय |
|
(3) व्यापार प्राप्य |
(3) अन्य चालू दायित्व |
वित्तीय विवरणों में सामान्यतः चिट्ठे तथा लाभ एवं हानि खाते के नाम से पहचाने जाने वाले दो विवरणों को शामिल किया जाता है जो बाह्य रिपोर्टिंग के लिए तथा नियोजन, नियंत्रण, निर्णयन आदि जैसी प्रबंधन की आंतरिक आवश्यकताओं के लिए भी आवश्यक होते हैं।
किसी दायित्व को चालू दायित्व तभी माना जाएगा जब वह निम्न में से किसी एक कसौटी को पूरा करता हैः
(1) इसके कम्पनी के सामान्य संचालन चक्र की अवधि में भुगतान की सम्भावना है।
(2) यह मुख्यतः व्यापार करने के उद्देश्य से रखा गया है।
(3) इसके विवरण तैयार करने की तिथि के 12 माह से अधिक स्थगित करने का अधिकार नहीं है।
(4) इसे चिट्ठे की तिथि से शर्तरहित 12 माह से अधिक स्थगित करने का अधिकार नहीं है।
शेष सभी दायित्वों को गैर-चालू दायित्व माना जाएगा।
किसी सम्पत्ति को चालू सम्पत्ति तभी माना जाएगा जब वह निम्न में से किसी एक कसौटी को पूरा करती होः
(1) इसके कम्पनी के सामान्य संचालन चक्र में वसूल होने की सम्भावना है अथवा यह विक्रय करने या उपभोग करने के लिए है।
(2) यह मुख्यतः व्यापार करने के लिए रखी गई है।
(3) इसके विवरण तैयार ( रिपोर्टिंग तिथि) होने की तिथि के 12 माह के अन्दर वसूल होने की सम्भावना है।
(4) यह रोकड़ अथवा रोकड़ तुल्य है जब तक कि यह किसी ऐसे दायित्व के विनिमय या प्रयोग के लिए प्रतिबंधित है जो रिपोर्टिंग तिथि से 12 माह बाद देय है।
शेष सभी सम्पत्तियोँ को गैर-चालू सम्पत्तियाँ माना जाएगा।
लेखा प्रारुप में आय विवरण तैयार करने के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया हैः-
(1) अप्राप्त परंतु कमाली गयी आयों की अग्रिम प्राप्त आयों आदि के लिए उचित समायोजन करने के पश्चात् तलपट के क्रेडिट पक्ष में दिखायी गयी सभी आयगत प्राप्तियों को आय विवरण के क्रेडिट पक्ष में रिकॉर्ड करना।
(2) अदत्त, पूर्वदत्त व्ययों, मूल्यहास, डुबत ऋणों के लिए आयोजनों, करों आदि के लिए उचित समायोजन के पश्चात् तलपट के डेबिट पक्ष में दिखाये गये सभी आयगत व्ययों को आय विवरण के डेबिट पक्ष में रिकॉर्ड करना।
(3) आय विवरण के क्रेडिट पक्ष पर गैर, परिचालन आयों एवं प्राप्तियों को रिकॉर्ड करना।
(4) आय विवरण के डेबिट पक्ष पर गैर,परिचालन व्ययों एवं हानियों को रिकॉर्ड करना।
(5) कुल क्रेडिट मदों के योग तथा कुल डेबिट मदों के योग में अंतर को निश्चित करना।
(6) यदि क्रेडिट मदें, डेबिट मदों से अधिक होती है, तो इसे शुद्ध लाभ के नाम से जाना जाता है तथा यदि यह उल्टा हो तो अंतर को शुद्ध हानि के रूप में माना जायेगा।
(7) भारत में, कम्पनियों के लिए वित्तीय विवरण तैयार करने के लिए लेखांकन वर्ष 01 अप्रेल से 31 मार्च होता है।
वित्तीय विवरणों की सीमाऐः
(1) वर्तमान स्थिति को प्रदर्शित नहीं करता हैः वित्तीय विवरणों को ऐतिहासिक लागत के आधार पर तैयार किया जाता है। वित्तीय विवरणों में दर्शाये गये सम्पत्तियों तथा दायित्वों के मूल्य वर्तमान बाजार स्थिति को नहीं दर्शाते हैं।
(2) सम्पत्तियों से स्पष्टीकृत मूल्य प्राप्त नहीं होता हैः लेखांकन कुछ संकल्पनाओं के आधार पर किया जाता है। यदि कम्पनी का समापन बलपूवर्क कराया जाता है तो कुछ सम्पत्तियों से उल्लेखित मूल्य वसूल नहीं होता है। चिट्ठे में दिखायी गयी सम्पत्तियों को केवल समाप्त नहीं होने वाले मूल्य पर दिखाया जाता है।
(3) पूर्वाग्रहः वित्तीय विवरण दर्ज तथ्यों, लेखा अवधारणाओं एवं संकल्पनाओं और लेखाकार द्वारा विभिन्न स्थितियों में लिए गए व्यक्तिगत निर्णयों के परिणाम होते हैं।
(4) सकल सूचनाः वित्तीय विवरण सकल सूचनाऐं प्रदर्शित करते हैं परंतु विवरण सहित सूचनाऐं प्रदर्शित नहीं करते हैं। इसलिए ये उपयोगकर्ता की निर्णयन में अधिक मदद नहीं करते हैं।
(5) महत्वपूर्ण सूचनाओं का अभावः चिट्ठा बाजारों की हानि तथा समझौतों की समाप्ति से संबंधित जानकारी का खुलासा नहीं करता है जिनका उद्यम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
(6) कोई गुणात्मक सूचना नहीः वित्तीय विवरण में केवल मौद्रिक सूचना को ही शामिल किया जाता है बल्कि औद्योगिक संबंध, औद्योगिक वातावरण, श्रम संबंधों आदि जैसी गुणात्मक सूचनाओं को शामिल नहीं किया जाता है।
(1.) स्थायी सम्पत्तियाँ (मूर्त)- कार्यालय उपकरण, भूमि, पट्टे की भूमि, फर्नीचर, वाहन, प्लांट।
(2.) पूँजी अर्धनिर्मित उत्पादन - अर्धनिर्मित उत्पादन, मशीनरी।
(3.) स्थायी सम्पत्तिया - अमूर्त, ख्याति, ट्रेडमार्क।
(4.) स्कंध - फुटकर औजार, व्यापार में स्टॉक, स्टोर एवं अतिरिक्त पूर्जे।
(5.) व्यापार प्राप्यताऐ - प्राप्य विपत्रए देनदार।
(6.) रोकड़ तथा रोकड़ समतुल्य - बैंक में रोकड़, हस्तगत रोकड़।
(7.) दीर्घकालीन ऋण तथा अग्रिम - सहायकों को अग्रिम, विद्युत आपूर्तिकर्ता कम्पनी में जमाऐं।
(8.) अन्य चालू सम्पत्तियाँ - विनियोगों पर उपार्जित ब्याज।
A.
व्यापार लेनदार
B.
ऋणदाता
C.
प्रबंधन के लोग
D.
शोधकर्ता
वित्तीय विवरणों के आतंरिक उपयोगकर्ता प्रबंधन के लोग हैं. वे इसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए इस्तेमाल करते हैं
A.
प्रवृत्ति विश्लेषण
B.
तुलनात्मक विवरण
C.
तुलना विश्लेषण
D.
समान आकार विवरण
समान आकार विवरण तुलना के लिए आम आधार प्रदान करते हैं. शुद्ध बिक्री या कुल चिट्ठा एक आम आधार के रूप में लिया जा सकता है
A.
निवेशक
B.
स्वामी
C.
देनदार
D.
लेनदार
लेनदार कम्पनी की लघु अवधि वित्तीय स्थिति के बारे में जानने के लिए इच्छुक होते हैं. व्यापार को अपने उधार कम समय में चुकाने होते हैं
A.
निदेशकों के लिए
B.
लेखापरीक्षकों के लिए
C.
प्रबन्धन के लिए
D.
शेयर धारकों के लिए
कोई भी कम्पनी अपने शेयरधारकों के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करती है. निदेशक इस रिपोर्ट को शेयरधारकों के लिए जारी करते हैं
A.
प्राप्त किराया
B.
सेवाओं से राजस्व
C.
प्राप्त ब्याज और लाभांश
D.
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री से आय
संचालनों से होने वाले राजस्व से अर्थ उस राजस्व से है जो मूl राजस्व उत्पन्न करने वाली गतिविधियों से प्राप्त होती हैं जैसे किसी उपक्रमी का व्यापार
A.
वर्तमान दायित्व
B.
प्राथमिक शेयर पूंजी
C.
नियत परिसंपत्तियां
D.
ऋणपत्र
ऋणपत्रदीर्घ अवधि ऋण का हिस्सा होते हैं. ऋणपत्र कंपनी के द्वारा लिए गए ऋण की एक लिखित पुष्टि होती है क्योंकि वे कम्पनी की मोहर के अंतर्गत जारी किए जाते हैं
A.
सामानों की बिक्री से आय
B.
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री से आय
C.
सेवाएं प्रदान करने से आय
D.
रियल एस्टेट कम्पनी के लिए किराए से आय
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री से आय गैर संचालन आय है क्योंकि यह यह व्यापार की मुख्य गतिविधियों से संबंधित नहीं है
A.
मूल्य स्तर परिवर्तन को प्रतिबिंबित नहीं करता है
B.
निर्णय लेने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है
C.
सीमित उपयोग है
D.
केवल रोकड़ लेनदेन ही रिकोर्ड करता है
वित्तीय विवरणों की सबसे बड़ी सीमा यह है कि मूल्य स्तर परिवर्तन को प्रतिबिंबित नहीं करता है. वित्तीय विवरणों की रिकोर्डिंग भी वास्तविक लागत के आधार पर की जाती है, जहां धन का मूल्य बदलता रहता है.
A.
1.
B.
10.
C.
100.
D.
1000.
एक समान आकार विवरण वह विवरण है जिसमें संचालनों से होने वाले राजस्व के आंकड़े
100 के बराबर माने जाते हैं. विवरण के अन्य आंकड़ों की तुलना संचालनों से होने वाली आय से की जाती है
A.
बिक्री व्यय
B.
उपभोक्ताओं के लिए नकद छूट
C.
कार्यालय व्यय
D.
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री पर नुकसान
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री पर नुकसान गैर संचालन व्यय है क्योंकि यह व्यापार की मुख्य गतिविधियों से संबंधित नहीं है
A.
तलपट
B.
वित्तीय विवरण
C.
अनुपात विश्लेषण और रोकड़ प्रवाह विवरण
D.
चिट्ठा
लेखांकन प्रक्रिया जर्नल/रोजनामचा के साथ शुरु होती है और वित्तीय विवरणों की तैयारी के साथ. अर्थात लाभ और हानि विवरण एवं चिट्ठा के साथ समाप्त होती है
A.
संचालनों से होने वाली आय
B.
लाभ
C.
कुल आय (संचालनों से होने वाली आय और अन्य आय)
D.
संचालन लाभ
आय कर की गणना हमेशा ही कर से पूर्व लाभ पर की जाती है
A.
8,00,000.
B.
6,00,000.
C. ![]()
D. ![]()
कर से पूर्व लाभ (या कर से पूर्व शुद्ध लाभ) = 8,00,000 - 2,00,000 - 2,00,000=
4,00,000.
| विवरण |
राशि ( |
| सकल लाभ | 15,00,000 |
| कर्मचारी लाभ व्यय | 4,00,000 |
| ह्रास और प्रत्युसर्जन व्यय | 1,00,000 |
| अन्य संचालन व्यय | 2,00,000 |
A.
15,00,000.
B.
13,00,000.
C.
12,00,000.
D. ![]()
सभी तीन संचालन व्यय श्रेणी से संबंधित हैं:
संचालन से आय:=15,00,000 - 4, 00,000 - 1,00,000 - 2,00,000=
8,00,000.
A.
अंत:फर्म
विश्लेषण
B. अंतर्फर्म विश्लेषण
C. ऊर्ध्वाधर विश्लेषण
D. समानाकार विश्लेषण
दो या दो से अधिक फर्म के वित्तीय विवरणों की तुलना को अंतर्फर्म विश्लेषण कहते हैं. वित्तीय वक्तव्यों के विविध अंत उपयोगकर्ता दो या दो से अधिक फर्म का विश्लेषण करते हैं
A.
चालू सम्पत्तियाँ
B.
अन्य गैर चालू सम्पत्तियाँ
C.
नियत सम्पत्तियाँ
D.
अन्य चालू सम्पत्तियाँ
पेटेंट और व्यापार चिन्ह को गैर चालू सम्पत्तियाँ के मद के अमूर्त सम्पत्तियाँ के रूप में नियत सम्पत्ति उपमद के अंतर्गत प्रदर्शित किया जाता है
A.
सामानों और सेवाओं की बिक्री से आय
B.
स्थिर सम्पत्ति और निवेश की बिक्री पर लाभ
C.
प्राप्त ब्याज और लाभांश
D.
आयकर की वापसी
गैर वित्तीय कम्पनियों के मामले में परिचालनों से होने वाली आय में वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री से होने वाली आय सम्मिलित होती है।
A.
व्यापार प्राप्तियां
B.
गैर चालू दायित्व
C.
व्यापार भुगतान योग्य
D.
लघु अवधि उधार
बैंकों से या अन्य पक्षों से मांग पर पुनर्भुगतान होने वाले ऋण को लघु अवधि उधार कहते हैं।
A.
1-4-2013
B.
1-10-2013
C.
1-1-2014
D.
1-4-2014
दिशानिर्देशों के अनुसार दिनांक 1-4-2014 से या उसके बाद आरंभ होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए तैयार होने वाले कम्पनी के लाभ और हानि विवरण और चिट्ठे के लिए अनुसूची III प्रभाव में आया।
A.
लाभांश
B.
ब्याज
C.
प्रतिपूर्ति
D.
कोर्पोरेट कर
शेयरधारकों को उनके निवेश पर लाभ के रूप में लाभांश का भुगतान किया जाता है।
A.
शेयर पूंजी
B.
संचय और अधिशेष
C.
शेयर वारंट के खिलाफ प्राप्त धन
D.
दीर्घ कालीन उधार
गैर चालू दायित्व के अंतर्गत उप मद है दीर्घ कालीन उधार।
A.
संचय और अधिशेष
B.
गैर-चालू बाध्यताएं
C.
हितधारकों का कोष
D.
शेयर पूंजी
चिट्ठे के दायित्व पक्ष की तरफ पहला मद है हितधारकों का कोष और इसे शेयर पूंजी, संचय और अधिशेष, और शेयर वारंट के लिए प्राप्त धन के उपमदों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है।
A.
केवल किसी फर्म के आर्थिक संसाधनों और बाध्यताओं के बारे में सूचना प्रदान करना
B.
केवल फर्म की केवल अर्जन क्षमता के बारे में जानकारी प्रदान करना
C.
केवल नकद प्रवाह के बारे में सूचना प्रदान करना
D.
आर्थिक संसाधनों और बाध्यताओं, फर्म की केवल अर्जन क्षमता और फर्म की नकद प्रवाह क्षमता के बारे में जानकारी प्रदान करना
वित्तीय विवरणों के उद्देश्य के विषय में ये सभी सही हैं।
A.
उपभोग की गयी सामग्री और अन्य व्यय
B.
व्यापार में स्टॉक की खरीद और अन्य व्यय
C.
उपभोग की गयी सामग्री की लागत और क्षरण और ऋणमुक्ति व्यय
D.
व्यापार और वित्त लागतों की खरीद
उपभोग की गई सामग्री की लागत और अन्य व्यय
A.
उपभोग की गयी सामग्री की मात्रा
B.
व्यापार में माल/स्टॉक की खरीद
C.
बेचे गए सामानों की लागत
D.
चालू परिसम्पत्तियाँ
व्यापार में माल/स्टॉक की खरीद पुनर्बिक्री के लिए खरीदे गए सामान है।
A.
लाभ हानि विवरण नियोजन
B.
लाभ हानि विवरण
C.
चिट्ठा
D.
लेखा विवरण
शेड्यूल/ अनुसूची III लाभ हानि विवरण नियोजन के लिए तैयारी नहीं प्रदान करता है। इसका अर्थ यह कि नियोजन को लेखा विवरण पर नहीं प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
A.
लागत मूल्य
B.
बाज़ार मूल्य
C.
लागत या बाज़ार मूल्य जो भी अधिक हो
D.
लागत या बाज़ार मूल्य जो भी कम हो
स्कंध का मूल्यांकन लागत या बाज़ार मूल्य जो भी कम हो पर दर्शाया जाता है।
A.
चालू दायित्व
B.
गैर चालू दायित्व
C.
समान सूची या स्टॉक
D.
अन्य चालू सम्पत्तियाँ
प्रगति में दिखाया गया कार्य स्टॉक का हिस्सा होता है और उसे उसकी सूचियों के अंतर्गत मुख्य मद के अंतर्गत दिखाया जाता है।
A.
दीर्घ अवधि ऋण
B.
अन्य गैर चालू दायित्व
C.
गैर चालू निवेश
D.
हितधारक कोष
बंधक ऋण वह ऋण है जो किसी ख़ास प्रकार की सम्पत्ति की सुरक्षा के बदले लिया जाता है। इस प्रकार के ऋण लम्बी अवधि के ऋण होते हैं और उनमें मुख्य मद गैर चालू दायित्वों के अंतर्गत दायित्व सम्मिलित होते हैं।
सांयोगिक दायित्व वे दायित्व हैं जो वर्तमान में दायित्व नहीं हैं परम्तु इनका होना न होना भविष्य की किसी घटना पर आधारित होता है। इन दायित्वों को चिट्ठे में न दिखाकर नीचे टिप्पणी के रुप में दिखाया जाता है।
(1) माँग पर देय ऋण (2) बैंक अधिविकर्ष
जब संचालन चक्र की अवधि को मापा नहीं जा सकता है तो वह अवधि 12 की मान ली जाती है।
खातों की पुस्तकों को बंद करने के पश्चात् आगे लाये गये शेषों के सारांश तथा लेखांकन सिद्वांतों के अनुसार रखा जाने वाला एक सारणी रूप में विवरण होता है।
गैर-चालू सम्पत्तियाँ (1) भूमि एवं भवन तथा (2) संयंत्र एवं मशीनरी।
(1) अल्पकालीन ऋण (2) व्यापारिक देय
A.
वाहक
B.
बन्धक
C.
शोध्य एवं अशोध्य
D.
ये सभी
ऋण-पत्र एक कम्पनी द्वारा लिए गए ऋण की लिखित स्वीकृति है, जो कम्पनी की सामान्य मुद्रा के अन्तर्गत निर्गमित की जाती है एवं जिसमें रकम के पुनर्भुगतान एवं ब्याज की दर आदि से सम्बन्धित शर्तें लिखी रहती हैं।
A.
पूँजी संचय में।
B.
सामान्य संचय में।
C.
ऋणपत्र खाते में।
D.
संचित पूँजी में।
एक बार ऋणपत्रों के शोधन के पश्चात् ऋणपत्र शोधन संचय के शेष को सामान्य संचय में हस्तांतरित किया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित प्रविष्टि की जाती है। DBR A/c Dr. To General Reserve A/c
A.
एक वास्तविक खाता।
B.
एक नाममात्र का खाता।
C.
एक व्यक्तिगत खाता।
D.
एक व्यक्तिगत या नाममात्र का खाता।
ऋणपत्रों के शोधन पर प्रीमियम खाता एक व्यक्तिगत खाता है क्योंकि यह ऋणपत्रधारियों के लिए कम्पनी का दायित्व होता है।
A.
परिवर्तनीय ऋणपत्रों के लिए।
B.
आंशिक परिवर्तनीय ऋणपत्रों के परिवर्तनीय भाग के लिए।
C.
गैर परिवर्तनीय ऋणपत्रों के लिए।
D.
उपरोक्त में से कोई नहीं।
ऋणपत्र शोधन संचय गैर परिवर्तनीय ऋणपत्रों या आंशिक परिवर्तनीय ऋणपत्रों के गैर-परिवर्तनीय भाग के लिए बनाया जाता है।
A.
100%
B.
50%
C.
25%
D.
10%
कम्पनी नियम अधिनियम 2014 के साथ कम्पनी अधिनियम 2013 के धारा 71 (4) के अनुसार ऋणपत्रों के शोधन से पूर्व शोधनीय ऋणपत्रों के अंकित मूल्य का कम से कम 25% ऋणपत्र शोधन संचय में हस्तांतरित करना आवश्यक होता है।
A.
1,00,000
B.
75,000
C.
1,25,000
D.
2,50,000
कम्पनी नियम अधिनियम 2014 के साथ कम्पनी अधिनियम 2013 के धारा 71 (4) के अनुसार शोधनीय ऋणपत्रों के अंकित मूल्य का कम से कम 25% ऋणपत्र शोधन संचय में हस्तांतरित करना आवश्यक होता है।
समस्त ऋणपत्रों के शोधन के पश्चात ऋणपत्र शोधन संचय का शेष सामान्य संचय खाते में हस्तांतरित करते हैं।
ये वह ऋणपत्र होते हैं जो केवल सुपुर्दगी द्वारा हस्तान्तरित हो जाते हैं। कम्पनी ऋणपत्र-धारकों का कोई ब्यौरा अपने पास नहीं रखती और ब्याज के भुगतान के लिए ऋणपत्रों के साथ कूपन संलगित होते हैं।
ये ऋणपत्र सामान्य अंशों में परिवर्तनीय नहीं होते हैं अर्थात इन ऋणपत्रों को कम्पनी द्वारा समता अंशों में बदला जा सकता।
ऋणपत्र से आशय एक ऐसे प्रपत्र से है जो कम्पनी द्वारा ऋणदाता को ऋण-प्राप्ति की स्वीकृति के रुप में दिया जाता है। इस प्रपत्र पर कम्पनी की सार्वमुद्रा अंकित होती है तथा उन सभी शर्तों का उल्लेख होता है जिनके अन्तर्गत कम्पनी द्वारा ऋण लिया जा रहा है।
ऋणपत्रों पर अदत्त ब्याज खाता एक व्यक्तिगत खाता होता है क्योंकि यह ऋणपत्रधारियों को संदर्भित करता है।
ऐसी राशि जो ऋणपत्र धारकों को ऋणपत्रों के भुगतान तक कम्पनी द्वारा आवधिक रूप में एक स्थायी दर पर चुकायी जाती है। यह कम्पनी के लाभों के विरूद्ध एक प्रभार होता है तथा यह ऋणपत्र धारी के लिए एक आय होती है।
ऋणपत्रों पर उपार्जित ब्याज को चिट्ठे के समता एवं दायित्व पक्ष में चालू दायित्वों के तहत अन्य चालू दायित्वों के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
जब एक कम्पनी विक्रेता को क्रय प्रतिफल के नकद भुगतान के स्थान पर ऋणपत्र जारी करती है तो इसे क्रय प्रतिफल के रूप में ऋणपत्रों का निर्गमन कहा जाता है।
सुरक्षा
के
दृष्टिकोण
से ऋणपत्रों
के दो प्रकार
होते हैं:
(1) सुरक्षित
ऋणपत्र: ऐसे
ऋणपत्र जो एक
कम्पनी की सम्पत्तियों
पर या तो
स्थायी
प्रभार या चल प्रभार
से सुरक्षित
हो।
(2) असुरक्षित
ऋणपत्र: वो
ऋणपत्र जो
कम्पनी की किसी
भी
सम्पत्तियों
से सुरक्षित
नहीं होते है।
असुरक्षित
ऋणपत्र
कहलाते है।
शोधन
के दृष्टिकोण
से ऋणपत्रों
के दो प्रकार
होते हैं:
(1) शोधनीय
ऋणपत्र: इन
ऋणपत्रों का
एक विशिष्ट
समायावधि के
समाप्त होने
पर
पुनर्भुगतान
कर दिया जाता
है।
(2) अशोधनीय
ऋणपत्र: इन
ऋणपत्रों को
एक कम्पनी द्वारा
अपने
जीवनकाल में नहीं
चुकाया जाता
है, परंतु
कम्पनी के
समापन पर
शोधनीय होते
है।
कम्पनी (अंश पूँजी एवं ऋणपत्र) की नियमावली-2014 का नियम 18 (7) (C) निम्न प्रकार की कम्पनियों को DRR के निर्माण करने से छूट प्रदान करता हैः-
(i) रिर्जव बैंक ऑफ इन्डिया द्वारा नियंत्रित All India Financial Institutions’.
(ii) रिजर्व बैं ऑफ इन्डिया द्वारा नियंत्रित अन्य वित्तीय संस्थाएँ।
(iii) बैंकिग कम्पनियॉ (निजी रूप से अथवा सार्वजनिक रूप से निर्गमित सभी ऋणपत्रों के लिए) ।
(iv) National Housing Bank के पास रजिस्टर्ड आवास वित्तीय कम्पनियॉं (Housing Finance Companies).
पंजीकरण
के
दृष्टिकोण
से ऋणपत्र दो
प्रकार के
होते है:
(1) पंजीकृत
ऋणपत्र: ऐसे
ऋणपत्र
जिनको नाम, पते आदि
जैसी सभी
सूचनाओं के साथ
कम्पनी की
पुस्तकों
में पंजीकृत
किया जाता है
पंजीकृत
ऋणपत्र होते
है।
(2) वाहक
ऋणपत्र: ये वो
ऋणपत्र होते
है जो कम्पनी की
पुस्तकों
में पंजीकृत
नहीं होते
है।
बॉन्ड भी एक संगठन की सार्वमुद्रा के तहत जारी किया गया ऋण का दस्तावेज है। पारंपरिकतौर पर सरकार बॉन्ड निर्गमित करती है परंतु आजकल बॉन्ड अर्द्धसरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा भी काम में लिया जाता है। सामान्यतः बॉन्ड को कुपन दर के बिना तथा अधिक बट्टे पर जारी किया जाता है। बॉन्ड के निर्गमन मूल्य तथा अंकित मूल्य का अंतर बॉन्ड धारक के लिए आय होती है। हालांकि कम्पनियाँ बॉन्डों को ब्याज की स्थायी दर के साथ जारी कर सकती है जिसे कुपन दर कहा जाता है।
एक सहायक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों का निर्गमन अर्थात सहायक या द्वितीयक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों का निर्गमन ।
सहायक प्रतिभूति अर्थात अतिरिक्त प्रतिभूति अर्थात ऋण के लिए मुख्य प्रतिभूति के अतिरिक्त प्रतिभूति। इसकी वसूली तब की जानी होती है जब मूख्य प्रतिभूति ऋण की राशि चुकाने में असफल हो जाती है।
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Journal of Govind Ltd. |
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|
Particulars |
Dr. |
Cr. |
|
|
Bank A/c |
Dr. |
1,20,000 |
|
|
To 12% Debenture Application |
|
1,20,000 |
|
|
(Application money received on 6,000 debentures @ |
|
|
|
|
12% Debenture Application |
Dr. |
1,20,000 |
|
|
To 12% Debentures A/c |
|
1,00,000 |
|
|
To 12% Debenture Allotment |
|
6,000 |
|
|
To Bank A/c |
|
14,000 |
|
|
(Application money transferred) |
|
|
|
|
12% Debenture Allotment |
Dr. |
1,00,000 |
|
|
To 12 % Debentures A/c |
|
1,00,000 |
|
|
(Allotment money due on 5,000 debentures @ |
|
|
|
|
Bank A/c |
Dr. |
94,000 |
|
|
To 12% Debenture Allotment |
|
94,000 |
|
|
(Balance of allotment money received i.e. |
|
|
|
|
12% Debenture First Call |
Dr. |
1,50,000 |
|
|
To 12% Debentures A/c |
|
1,50,000 |
|
|
(First Call due) |
|
|
|
|
Bank A/c |
Dr. |
1,50,000 |
|
|
To 12% Debenture First Call |
|
150,000 |
|
|
(First Call money received) |
|
|
|
|
12% Debenture Second & Final Call A/c |
Dr. |
1,50,000 |
|
|
To 12 % Debentures A/c |
|
1,50,000 |
|
|
(Second & Final Call due) |
|
|
|
|
Bank A/c |
Dr. |
1,44,000 |
|
|
To 12% Debenture Second & Final Call |
|
1,44,000 |
|
|
(Second & Final Call money received on 4,800 debentures @ |
|
|
|
लाभों में से शोधन का अर्थ है कि निर्गमित ऋणपत्रों के बराबर राशि अर्थात ऋणपत्रों की राशि का 100 प्रतिशत को लाभ-हानि विवरण के आधिक्य (Surplus of Statement of Profit and Loss) से एक नए खोले गए ऋणपत्र शोधन संचय खाते में हस्तांतरित किया जाता है। इसे लाभों में से शोधन इसलिए कहा जाता है क्योंकि ऋणपत्र शोधन संचय में लाभ हस्तांतरित करने से लाभांश के लिए उपलब्ध लाभ घट जाते हैं। इसका अर्थ है कि ऋणपत्र शोधन संचय में हस्तांतरित किए गए लाभ लाभांश वितरण के लिए उपलब्ध न होकर ऋणपत्र शोधन में प्रयोग किए जाएँगें। अतः इस प्रकार के शोधन से कम्पनी के मौजूदा तरल साधनों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।
ऋणपत्रों के शोधन के लिए सेबी द्वारा जारी दिशा-निर्देशः-
(i) DRR का निर्माण केवल गैर-परिवर्तनीय एवं अंशतः परिवर्तनीय ऋणपत्रों के केवल गैर-परिवर्तनीय हिस्से के लिए ही करना अनिवार्य है।
(ii) शोधन प्रारम्भ करने से पूर्व ऋणपत्रों की कुल राशि के कम से कम 25% के बराबर DRR बनाया जाएगा।
अतः कोई भी कम्पनी अपने ऋणपत्रों की पूर्णतया पूँजी में से शोधन नहीं कर सकती। निर्गमित ऋणपत्रों का कम से कम 25 % लाभों में से ऋणपत्रों शोधन संचय के निर्माण द्वारा शोधन करना अनिवार्य है। शेष ऋणपत्रों को लाभों में से अथवा पूँजी में से शोधन किया जा सकता है।


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Journal of Surya Ltd. |
|||
|
Particulars |
Dr. |
Cr. |
|
|
Bank A/c |
Dr. |
50,000 |
|
|
To 15% Debenture Application A/c |
|
50,000 |
|
|
(Application money received for 2,000 debentures @ |
|
|
|
|
15% Debenture Application A/c |
Dr. |
50,000 |
|
|
To 15% Debentures A/c |
|
50,000 |
|
|
(Application money transferred) |
|
|
|
|
15% Debenture Allotment A/c |
Dr. |
50,000 |
|
|
Discount on Debentures A/c |
Dr. |
20,000 |
|
|
To 15 % Debentures A/c |
|
70,000 |
|
|
(Allotment due) |
|
|
|
|
Bank A/c |
Dr. |
50,000 |
|
|
To 15% Debenture Allotment A/c |
|
50,000 |
|
|
(Amount received on allotment) |
|
|
|
|
15% Debenture First & Final Call |
Dr. |
80,000 |
|
|
To 15% Debentures A/c |
|
80,000 |
|
|
(First & Final Call due) |
|
|
|
|
Bank A/c |
Dr. |
80,000 |
|
|
To 15% Debenture First & Final Call |
|
80,000 |
|
|
(Amount received on First & Final Call) |
|
|
|
|
Expenses on Issue A/c |
Dr. |
8,000 |
|
|
To Bank A/c |
|
8,000 |
|
|
(Expenses paid on issue of debentures.) |
|
|
|
|
Statement of Profit & Loss |
Dr. |
5,600 |
|
|
To Discount on Debentures A/c |
|
4,000 |
|
|
To Expenses on Issue A/c |
|
1,600 |
|
|
(1/5th of 'Discount on debentures' and 1/5th of Expenses on issue' written off) |
|
|
|
यह बात नोट करने योग्य है कि यदि ऋणपत्र की पूरी राशि एक ही किश्त में प्राप्त हो जाती है तो इस राशि को 'Debenture Application A/c' में क्रेडिट करने की बजाय 'Debenture Application & Allotment A/c' में क्रेडिट किया जाता है।

A.
अतीत
B.
भविष्य
C.
वर्तमान
D.
वर्तमान और अतीत
वित्तीय विवरण अतीत की अवधि से सम्बन्धित हैं और इस प्रकार ऐतिहासिक दस्तावेजों से सम्बन्धित हैं।
A.
लेखे का सारांश
B.
वित्तीय स्थिति
C.
लाभ अर्जन क्षमता
D.
परिचालन गतिविधियाँ