A.
रोकड़ का अंतर्वाह और बहिर्वाह
B.
लाभ और हानि
C.
संचय और अधिशेष
D.
अधिमूल्यन
एक रोकड़ प्रवाह विवरण एक रोकड़ और एक विशेष अवधि के दौरान एक कम्पनी की विविध गतिविधियों से रोकड़ समतुल्य के अंतर्वाह और बहिर्वाह को प्रदर्शित करता है।
| विवरण |
|
| 31 मार्च 2012 के बाद कर के बाद लाभ | 6,00,000 |
| वर्ष के लिए बनाए गए कर के लिए प्रावधान | 60,000 |
A.
5,40,000
B.
6,00,000
C.
6,60,000
D.
60,000
कर
से पूर्व लाभ 6,00,000 + 60,000 = 6,60,000। हो
जाता है कराधान
के लिए
प्रावधानों
को कर से
पूर्व लाभ से
काटा जाता है,
तो इस प्रकार
इसे जोड़ा
जाता है।
A.
विनियोग गतिविधियाँ
B.
परिचालन गतिविधियाँ
C.
वित्तीय गतिविधियाँ
D.
बैंकिंग गतिविधियाँ
उधार ली गयी राशि का रोकड़ पुनर्भुगतान, वित्तीय गतिविधियों के अंतर्गत बहिर्वाह के अंतर्गत आता है
A.
परिचालन गतिविधियों से रोकड़ अंतर्वाह में वृद्धि
B.
परिचालन गतिविधियों से रोकड़ अंतर्वाह में कमी होना
C.
परिचालन गतिविधियों से रोकड़ अंतर्वाह प्रभावित नहीं होगा
D.
विनियोग गतिविधियों से नकद अंतर्वाह नहीं बढेगा
पूर्वदत्त व्यय में कमी से परिचालन गतिविधियों से रोकड़ अंतर्वाह में वृद्धि होगी। जैसे ही पूर्वदत्त व्यय कम होते हैं (इसमें विनियोग कम हो जाता है), यह परिचालन गतिविधियों में रोकड़ प्रवाह में वृद्धि करता है। इस प्रकार इसे परिचालन गतिविधियों से रोकड़ प्रवाह की गणना करते हुए शुद्ध लाभ में जोड़ा जाता है।
A.
लाभांश का भुगतान
B.
विनियोग पर लाभांश की प्राप्ति
C.
उपभोक्ता से प्राप्त रोकड़
D.
नियत संपत्तियों की खरीद
वित्तीय गतिविधियों में सम्मिलित है लम्बे समय स्रोतों के माध्यम से राशि उगाहना, राशि का पुनर्भुगतान या इन स्रोतों पर लाभांश।
A.
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के अंतर्गत कर्मचारियों को भुगतान
B.
कर्मचारी लाभ व्ययों के लिए भुगतान
C.
भवन के विध्वंस के लिए बीमा कम्पनी से प्राप्त दावा
D.
शेयर के बाई बैक के लिए किए गए भुगतान
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के अंतर्गत कर्मचारियों को भुगतान, ऐसे भुगतान सामान्य व्यापार में नहीं बनाए जाते हैं और व्यापार में बार बार होना अपेक्षित नहीं है।
A.
रोकड़
का कोई
प्रवाह नहीं
B. रोकड़ अंतर्वाह
C. विनियोग गतिविधियाँ
D. रोकड़ बहिर्वाह
बैंक में जमा रोकड़ का परिणाम होगा रोकड़ का कोई प्रवाह न होना क्योंकि यह रोकड़ प्रबंधन के लिए रोकड़ मदों के अंतर्गत आवागमन है।
A.
उपकरण
की बिक्री से
आगे बढ़ता है
B. स्कंध विक्रय
C. रोकड़ साख में वृद्धि/कमी
D. क्षरण
रोकड़ साख को एक ऋण की तरह देखा जाएगा और इस प्रकार इसे वित्तीय गतिविधियों से रोकड़ प्रवाह के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
रोकड़ का अन्तःप्रवाह होगा क्योंकि फर्म द्वारा पेटेण्ट्स के क्रय का नकद में भुगतान किया गया है।
विनियोग क्रियाओं के अन्तर्गत वर्गीकृत करेंगे।
इसे विनियोजन क्रियाकलाप के अन्तर्गत वर्गीकृत किया जाएगा।
कोई प्रवाह नहीं होगा।
वित्तीय क्रियाओं के अन्तर्गत वर्गीकृत करेंगे।
फर्नीचर का अपलेखन गैर-नकद व्यय है, अतः इससे रोकड़ का कोई प्रवाह नंही होगा।
अंशों पर लाभांश का भुगतान।
लेनदारों को रोकड़ में भुगतान से रोकड़ बहिर्भाव होगा।
प्रचालन क्रियाओं के अन्तर्गत वर्गीकृत करेंगे।
रोकड़ के शुद्ध स्त्रोत रु0 15000 – रु0 5000 = रु0 10,000
उन स्त्रोतों का पता लगाना (परिचालन, विनियोजन तथा वित्तपूर्ति क्रियाओं से), जिनसे व्यवसाय में रोकड़ तथा रोकड़ तुल्य का सृजन होता है।
यदि किसी व्यवहार से रोकड़ एवं रोकड़ तुल्य में कमी होती है ता उसे रोकड़ का बहिर्वाह कहते हैं।
उपक्रम में रोकड़ और रोकड़ तुल्यों का आना-जाना रोकड़ प्रवाह कहलाता है।
विनियोग सम्बंधी क्रियाओं से रोकड़ बहिर्वाह की दो मदें इस प्रकार हैं -
रोकड़ प्रवाह विवरण को लेखांकन प्रमाप - 3 के तहत तैयार किया जाता है।
असाधारण मदें है-(1) डूबते ऋण की वसूली (2) बीमा कंपनी से प्राप्त दावे की राशि।
कोई प्रवाह नहीं होगा क्योंकि ऋणपत्रों का निर्गमन मशीन के मूल्य को चुकाने के लिए किया गया है न कि रोकड़ के वदले ऋणपत्रों का निर्गमन किया गया है।
जब एक वित्तीय कम्पनी लाभांश प्राप्त करती है तो उस कम्पनी के लिए यह परिचालन क्रियाकलाप समझा जाता है। गैर-वित्तीय उपक्रम की दशा में प्राप्त लाभांश एक निवेशी क्रिया है।
रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करते समय अमौद्रिक लेन-देनों की उपेक्षा इसलिए की जाती है क्योंकि रोकड़ प्रवाह विवरण एक निश्चित अवधि के दौरान रोकड़ तथा रोकड़ तुल्य के प्रवाह को दर्शाता है।
मशीनरी के क्रय से हुआ रोकड़ प्रवाह निवेशी क्रियाकलापों से हुआ रोकड़ प्रवाह होगा क्योंकि यह मशीन दीर्घकाल तक व्यवसाय में प्रयोग की जाएगी तथा इस मशीन का क्रय विक्रय के उद्देश्य से नहीं हुआ।
वित्तीय गतिविधियों के द्वारा उत्पन्न रोकड़ प्रवाह को पृथक दर्शाना इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसके आधार पर संस्था को धन देने वाले व्यक्तियों की भावी रोकड़ प्रवाहों पर दावों की भविष्यवाणी की जा सकती है।
विनियोजन क्रियाओं में स्थायी सम्पत्तियों का क्रय एंव निस्तारण और अन्य विनियोगों (जो रोकड़ तुल्य में शामिल नहीं हैं) को सम्मिलित किया जाता है।
रोकड़ प्रवाह विवपण एक विशिष्ट अवधि में उपक्रम की रोकड़ एवं रोकड़ तुल्यों के अन्तर्वाहों (स्त्रोतो) तथा वहिर्वाह (उपयोगों) का विवरण है। यह विवरण दो चिट्ठों की तिथियों में एक व्यावसायिक संस्था की रोकड़ स्थिति में हुए परिवर्तन के कारणों की व्याख्या करता है।
रोकड़ प्रवाह विवरण एक विशेष अवधि के रोकड़ अंर्तवाहों तथा बहिर्वाहों को प्रदर्शित करने वाला विवरण हैं।
अतिरिक्त सूचनाएँ:
अंशधारी व्यवसाय को चलाने के लिए आधार पूँजी प्रदान करते हैं। वे अपने विनियोगों पर लाभप्रदत्ता, लाभांश, बाज़ार मूल्य तथा व्यवसाय से सम्बंधित दीर्घकालीन शोधन क्षमता जानने के लिए वित्तीय विवरण विश्लेषण में रूचि रखते हैं।
हम वित्तीय विवरणों का विश्लेषण निम्नलिखित तथ्यों के कारण से करते हैः -
1) लाभप्रदता का मापन करने के लिए।
2) तरलता का मापन करने के लिए।
3) शोधन क्षमता का मापन करने के लिए।
यह एक फर्म की एक समयावधि के वित्तीय चरों की तुलना होती है। यह फर्म के कई वर्षों के प्रदर्शन का विश्लेषण करता है तथा वित्तीय तथ्यों के प्रवाह को प्रदर्शित करता है।
वित्तीय विश्लेषण के उद्देश्य निम्नलिखित हैः-
1). फर्म की आय तथा लाभप्रदत्ता का मापन करना।
2). फर्म की प्रबंधकीय योग्यता का मापन करना।
3). उद्यम की अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन ऋण शोधन क्षमता का मापन करना।
4).अंतः फर्म तुलना करने के लिए।
5). बजट निर्माण तथा पूर्वानुमान के लिए।
6). वित्तीय विश्लेषण के द्वारा उपयोगकर्ता फर्म के आंकड़ों को अधिक आसानी से समझ सकता है।
रोकड प्रवाह ओर आय विवरण में अंतर निम्नलिखित हैं-
|
आधार |
रोकड प्रवाह विवरण |
आय विवरण |
|
उद्देश्य |
रोकड प्रवाह विवरण काउद्देश्य एक निश्चित अवधि के अंदर रोकड आगमन तथा बहिगर्ममन के बारे में जानकारीदेता है। |
आयविवरण व्यवसाय कीलाभ कमाने की क्षमता के बारे में जानकारी प्रदान करता है। |
|
प्रकृति |
यह रोकड के परिवर्तनोकाविवरण है। |
यह निश्चित अवधि मेंलाभ हानि दर्शाता है। |
|
क्षेत्र |
यह रोकड़ और रोकड़मूल्यों के बारे में सूचना देता है। अतःइसका क्षेत्र सीमित है। |
यह व्यवसय की आय परव्यापारिकलेन देनों के प्रभाव दर्शाने के कारण इसका क्षेत्र व्यापक है। |
|
लेखांकन |
यह रोकड आधार परतैयार किया जाता है। |
यहविवरण उपार्जनआधार पर बनाया जाता हैं |
|
विषय सामाग्री |
इसकी विषय सामाग्रीरोकड हाथ में |
इसकी विषय सामाग्री एकसंस्था की संचालन आय एवं व्यय है। |
|
काल |
यह विवरण रोकड मेंभूतकाल में हुएपरिवर्तनों का विश्लेषण करता है। |
यह संबंधित वर्ष कालाभ हानि प्रदर्शित करता है। |
| विवरण | 2009 | 2010 |
| ` | ` | |
| विक्रय | 10,00,000 | 16,00,000 |
| बिक्री हुए माल की लागत | विक्रय का 70 % | विक्रय का 70 % |
| परिचालन व्यय | विक्रय का 5 % | विक्रय का 5 % |
| आय कर | कर से पूर्व शुद्ध लाभ का 50 % | कर से पूर्व शुद्ध लाभ का 50 % |

| विवरण | 2009 | 2010 |
| ` | ` | |
| विक्रय | 4,00,000 | 6,00,000 |
| बिक्री हुए माल की लागत | विक्रय का 60 % | विक्रय का 70 % |
| परिचालन व्यय | सकल लाभ का 50 % | सकल लाभ का 40 % |
| आय कर | कर से पूर्व शुद्ध लाभ का 50 % | कर से पूर्व शुद्ध लाभ का 50 % |

| विवरण | 2011 (₹) | 2012 (₹) |
| प्रचालन से आगम | 10,00,000 | 12,50,000 |
| उपभोग की गई सामग्रियों की लागत | 80% आगम | 70% आगम |
| कर्मचारी हितार्थ व्यय | 20,000 | 75,000 |
| आय कर | 40% | 70% |
|
Particulars |
2011 |
2012 |
Abs. Change |
% Change |
|
|
|
|
₹ |
₹ |
|
Total Revenue |
10,00,000 |
12,50,000 |
2,50,000 |
25 |
|
Expenses |
|
|
|
|
|
Cost of materials Cons |
8,00,000 |
8,75,000 |
75,000 |
9.375 |
|
Employee Benefit Exp |
20,000 |
75,000 |
55,000 |
275 |
|
Total |
8,20,000 |
9,50,000 |
1,30,000 |
15.85 |
|
NP before Tax (I-II) |
1,80,000 |
3,00,000 |
1,20,000 |
66.66 |
|
Less: Income Tax |
72,000 |
2,10,000 |
1,38,000 |
191.6 |
|
NP after Tax(III-IV) |
1,08,000 |
90,000 |
(18,000) |
(16.6) |
| Particulars | Note No. | Monga Ltd | Gupta Ltd |
|
|
|
||
| Equity & Liabilities | |||
| Shareholder's Funds: | 1,50,000 | 2,00,000 | |
| Non-Current Liabilities: | 1,00,000 | 1,50,000 | |
| Current Liabilities: | 50,000 | 25,000 | |
| Total | 3,00,000 | 3,75,000 | |
| Assets | |||
| Non-Current Assets: | |||
| Tangible Assets | 1,25,000 | 1,50,000 | |
| Intangible Assets | 75,000 | 50,000 | |
| Current Assets: | 1,00,000 | 1,75,000 | |
| Total | 3,00,000 | 3,75,000 |
Common Size Balance Sheet
As on 31st March 2010
|
Particulars |
Note |
Monga Ltd. |
Gupta Ltd |
||
|
|
|
Amount |
% of Total |
Amount |
% of Total |
|
|
|
|
|
% |
% |
|
Equity & Liabilities |
|
|
|
|
|
|
Shareholder's Funds: |
|
1,50,000 |
50 |
2,00,000 |
53.33 |
|
Non-Current Liabilities: |
|
1,00,000 |
33.33 |
1,50,000 |
40 |
|
Current Liabilities: |
|
50,000 |
16.67 |
25,000 |
6.67 |
|
Total |
|
3,00,000 |
100 |
3,75,000 |
100 |
|
Assets |
|
|
|
|
|
|
Non-Current Assets: |
|
|
|
|
|
|
Tangible Assets |
|
1,25,000 |
41.67 |
1,50,000 |
40 |
|
Intangible Assets |
|
75,000 |
25 |
50,000 |
13.33 |
|
Current Assets: |
|
1,00,000 |
33.33 |
1,75,000 |
46.67 |
|
Total |
|
3,00,000 |
100 |
3,75,000 |
100 |
| Particulars |
2011 ( |
2012( |
| Equity Share Capital | 50,00,000 | 50,00,000 |
| Fixed Assets (Tangible) | 60,00,000 | 72,00,000 |
| Reserve & Surplus | 10,00,000 | 12,00,000 |
| Investments (Non-current) | 10,00,000 | 10,00,000 |
| Long-term Loans | 30,00,000 | 30,00,000 |
| Current Assets | 30,00,000 | 21,00,000 |
| Current Liabilities | 10,00,000 | 11,00,000 |

| विवरण | 2011 (₹) | 2010 (₹) |
| प्रचालन से आगम | 12,00,000 | 9,50,000 |
| अन्य आय | 50,000 | 50,000 |
| उपभोग की गई सामग्रियों की लागत | 8,50,000 | 7,00,000 |
| वित्तीय लागत | 1,00,000 | 80,000 |
| अन्य व्यय | 50,000 | 70,000 |

सभी प्रतिशतों की गणना परिचालनों से आय के आधार पर ज्ञात की गई है।
प्रतिशतों की गणना इस प्रकार की गई :
वर्ष 2011 वर्ष 2010
(1) ₹(12,00,000/12,50,000) x 100 = 96%
(2) ₹(50,000/12,50,000) x 100 = 4%
(3) ₹(8,50,000/12,50,000) x 100 = 68%
(4) ₹(9,50,000/10,00,000) x 100 = 95%
(5) ₹(50,000/10,00,000) x 100 = 5%
(6) ₹(7,00,000/10,00,000) x 100 = 70%
ऋणपत्रधारी, बैंकर तथा वित्तीय संस्थान कम्पनी के लिए दीर्घकालीन वित्त के साधन होते हैं। ये कम्पनी से केवल ब्याज का भुगतान प्राप्त करते हैं।
ये स्थायी सम्पत्तियों के मूल्यों तथा उनके प्रतिस्थापन के लिए प्रावधानों की पर्याप्तता से सम्बंधित नहीं होते हैं।
ऋणपत्रधारी कम्पनी की शोधन क्षमता अर्थात ऋणपत्रों की परिपक्वता पर ब्याज के साथ मूलधन के भुगतान के लिए वित्तीय सुदृढ़ता में रूचि रखते हैं।
| वर्ष 2013 | वर्ष 2014 | |
| ₹ | ₹ | |
| विक्रय | 5,00,000 | 6,00,000 |
| बेचे गये माल की लागत | विक्रय का 60% | विक्रय का 70% |
| अप्रत्यक्ष व्यय | सकल लाभ का 40% | सकल लाभ का 30% |
| आयकर | कर से पूर्व शुद्ध लाभ का 30% | कर से पूर्व शुद्ध लाभ का 30% |
Common Size Income Statement
for the year ending 2013-14
|
Particular |
Absolute Amt. |
% Change |
||
|
|
2013 ₹ |
2014 ₹ |
2013 |
2014 |
|
I. Sales |
5,00,000 |
6,00,000 |
100% |
100% |
|
II. Less :- Expense Cost of goods sold |
3,00,000 |
4,20,000 |
60% |
70% |
|
III. Gross Profit (I-II) |
2,00,000 |
1,80,000 |
40% |
30% |
|
Less:- Indirect Expense |
80,000 |
54,000 |
16% |
9% |
|
IV. Net Profit Before Tax |
1,20,000 |
1,26,000 |
24% |
21% |
|
V. Less :- Tax 30% |
36,000 |
37,800 |
7.2% |
6.3% |
|
Net Profit After Tax |
84,000 |
88,200 |
16.8% |
14.7% |
| Particulars | 2011 (₹) | 2012 (₹) |
|
A. Equity & Liabilities |
||
| 1. Shareholder's Funds | ||
| Share Capital | 8,72,000 | 6,88,000 |
| 2. Non-Current Liabilities | ||
| Long-term Borrowings | 13,92,000 | 8,76,000 |
| 3. Current Liabilities | 5,96,000 | 1,56,000 |
| Total | 28,40,000 | 17,20,000 |
| B. Assets | ||
| 1. Non-Current Assets | ||
| Fixed Assets | 11,36,000 | 8,60,000 |
| Investments | 12,000 | 8,000 |
| 2. Current Assets | 16,92,000 | 8,52,000 |
| Total | 28,40,000 | 17,20,000 |

| Particulars |
2012( |
2013( |
| 1. Income | ||
| Revenue from Operations(net sale) | 2,00,000 | 2,50,000 |
| Other Income | 10,000 | 15,000 |
| Total | 2,10,000 | 2,65,000 |
| 2. Expenses | ||
| Purchase of Stock in trade | 90,000 | 1,55,000 |
| Changes in Inventories of Stock | 10,000 | (5,000) |
| Employees Benefit Expenses | 15,000 | 40,000 |
| Other Expenses | 35,000 | 45,000 |
| Total | 1,50,000 | 2,35,000 |
| 3. Profit | 60,000 | 30,000 |
| Particulars |
2012( |
2013( |
| Other Expenses include Provision | ||
| For Tax | 30,000 | 35,000 |

नोट : अन्य व्यय कर के लिए प्रावधान नहीं होता है।
वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की सर्वाधिक ज्ञान तकनीकें ये हैं-
(1) तुलनात्मक विवरण विश्लेषणः यह वे विवरण है जो दो अथवा अधिक समयावधि में एक फर्मकी लाभप्रदता एवं वित्तीय अवस्था को दर्शाते हैं जिससे कि दो या अधिक समयावधि फर्मकी स्थिति का पता चलता है। यह समान्यतः तुलनात्मक रूप से तुलनपत्र और आय विवरण नामकदो महत्त्वपूर्ण वित्तीय विवरणों पर लागू होता है।
(2) समरूप/सामान्य आकार विवरण विश्लेषणः यह विवरण कुछ सामान्य मदों के साथ एक वित्तीयविवरण के विभिन्न मदों के बीच संबंध् का संकेत देते हैं जिसमें सामान्य मद के प्रत्येक मद कोप्रतिशत के रूप में व्यक्त करता है। इस प्रकार से परिकलित प्रतिशत को अन्य फर्मों के अनुकूल प्रतिशत के साथ आसानी से समझा या तुलना की जा सकती है।
(3) प्रवृत्ति विश्लेषणः यह कई वर्षों की एक शृंखला के अनेकों वित्तीय विवरणों के अध्ययन कीएक तकनीक है। एक व्यावसायिक उद्योग/उद्यम के पिछले वर्षों के आँकड़ों का उपयोग करतेहुए, प्रवृत्ति का विश्लेषण संकलित आँकड़ों में एक अवधि के दौरान आए बदलावों का अवलोकनकरके किया जा सकता है।
(4) अनुपात विश्लेषणः यह महत्त्वपूर्ण संबंधों का वर्णन करता है जोकि तुलन पत्र में, लाभ व हानि खातेमें, बजट नियंत्रण तंत्र या लेखांकन संगठन के किसी अन्य भाग में दर्शाए गए आँकड़ों के बीचविद्यमान होते हैं।
(5) रोकड़ प्रवाह विश्लेषणः यह किसी संस्थान के रोकड़ के वास्तविक अंतर्वाह एवं बाहिर्वाह कोदर्शाता है। एक व्यवसाय में आवक रोकड़ के बहाव को रोकड़ अंतर्वाह तथा पफर्म से बाहर जानेवाली रोकड़ के बाहिर्वाह रोकड़ प्रवाह कहते हैं।
वित्तीय विश्लेषण विभिन्नउपयोगकर्ताओं के लिए निम्न प्रकार से उपयोगी एवंमहत्त्वपूर्ण होता है-
1). वित्त प्रबंध्क- इसमें वित्तीय विश्लेषण का केन्द्र बिन्दु कंपनी के प्रबंधकीय निष्पादन, निगमसक्षमता, वित्तीय सुदृढ़ता तथा कमजोरियों और कंपनी के लिए सार्थक लेनदारों से संबंधित तथ्योंएवं संबंधों पर होता है। एक वित्त प्रबंध्क को निश्चित रूप से विश्लेषण के विभिन्न साधनों सेसुसज्जित होना चाहिए ताकि फर्म के लिए उचित तथा निष्पक्ष निर्णय लिए जा सकें।
2). उच्चतर प्रबंधन : वित्तीय विश्लेषणों का महत्त्व केवल वित्त प्रबंधको तक ही सीमित नहीं है। इसके महत्त्व का परिक्षेत्र पर्याप्त व्यापक है जिसके अंतर्गत सामान्यतः उच्च प्रबंधन तथा विशेष रूप से उच्चप्रबंधकर्मी शामिल होते हैं। फर्म का प्रबंधन वित्तीय विश्लेषण के प्रत्येक पहलू में रूचि दिखा सकताहै। यह कुल मिलाकर उनकी ही जिम्मेदारी होती है कि वे देखें कि फर्म के संसाधनों कोअधिकतम सक्षमता के साथ इस्तेमाल किया जाए ताकि फर्म की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ रहे।
3). व्यापारिक लेनदार- एक लेनदार, वित्तीय विवरणों के विश्लेषण द्वारा न केवल कंपनी की क्षमता कोआँकलित करता है, बल्कि एक समय विशेष पर उसकी स्थिति, वित्तीय देयताओं को पूरा करने कीक्षमता के साथ-साथ सातत्य रूप से वित्तीय देयताओं को पूरा करने की संभावना को भी देखता है।
4). ऋणदाता- दीर्घकालिक ऋण या उधार के पूर्तिकार, फर्म के दीर्घकालिक ऋण शोधन क्षमता एवंउत्तरजीविता से चिंतित होते हैं। यह समयोपरि फर्म की लाभप्रदता, ब्याज तथा मूलपूँजी को चुकानेके लिए रोकड़ पैदा करने की क्षमता तथा विभिन्न निधियों का स्रोत का विश्लेषण करते हैं।
5). निवेशकःनिवेशक, जोकि फर्म के अंशों में अपना धन निवेश करते हैं, फर्म के अर्जन के संदर्भमें रूचि रखते हैं। इस तरह से, वे फर्म की वर्तमान एवं भावी लाभप्रदता के बारे में विश्लेषण करतेहैं। इसके साथ ही फर्म के वित्तीय ढांचे में रूचि रखते है ताकि वे फर्म के अर्जन एवं जोखिमों कोप्रभावित करने वाली सीमाओं के बारे में जान सके।
वित्तीय विवरणों में किसी संस्था की सम्पत्तियोंए दायित्वों, आयों, व्ययों और लाभ.हानियों के निरपेक्ष आंकड़े दिये हुए होते हैं। यह विवरण उस संस्था की लाभोपार्जन क्षमताएँ तरलता और वित्तीय सुदृढ़ता को प्रदर्शित नहीं करते हैं जिससे यह इनके उपयोगकर्ताओं को सरलता से समझ में आने योग्य नहीं होते। अतः इन्हें सरल और समझ में आने योग्य रूप में प्रस्तुत करने के लिए इनका विश्लेषण किया जाता है। वित्तीय विवरणों के विश्लेषण के लिए प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न उपकरण या साधन निम्नलिखित हैं:
1). तुलनात्मक विवरणः जब दो या दो से अधिक अवधियों के वित्तीय विवरणों की मदों को साथ-साथ इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके तो ऐसे विवरण को "तुलनात्मक वित्तीय विवरण" कहते हैं।
2). समानाकार विवरण: इन विवरणों में विभिन्न आंकड़ों को किसी समान आधार के प्रतिशतों में परिवर्तित कर प्रदर्शित किया जाता है।
3). प्रवृति विश्लेषण: विभिन्न वर्षों के वित्तीय विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए यह समस्तर विश्लेषण की एक महत्वपूर्ण पद्धति है। प्रवृति प्रतिशत ज्ञात करने के लिए किसी एक वर्ष को आधार मान लिया जाता है। आधार वर्ष की प्रत्येक मद को 100 मान लिया जाता है तथा इसी आधार पर प्रत्येक वर्ष की प्रत्येक मद की प्रतिशत ज्ञात की जाती है। यह प्रतिशत आधार वर्ष के संदर्भ में विभिन्न वर्षों में विभिन्न मदों की परिवर्तन की दिशा वृद्धि अथवा कमी को प्रकट करने में सहायक है।
4). लेखांकन अनुपात: अनुपात साधारणतया एक संख्या को दूसरी संख्या की तुलना में प्रकट करना है और विभिन्न मदों अथवा मदों के समूह का आपसी सम्बंध अध्ययन करना "अनुपात विश्लेषण" कहलाता है।
5). रोकड़ प्रवाह विवरण: यह दो अवधियों के मध्य रोकड़ एवं रोकड़ तुल्यों के स्त्रोतों और उपयोगों को प्रकट करता है और दो स्थिति विवरणों की तिथियों के मध्य रोकड़ में हुए परिर्वतनों के कारणों का विश्लेषण करता है।
6). कोष प्रवाह विवरण रू. कोष प्रवाह विवरण दो तिथियों के बीच सम्पत्तियोंए दायित्वों और पूँजी में हुए परिवर्तनों के कारणों पर प्रकाश डालता है। यह विवरण यह भी स्पष्ट करता है कि व्यावसायिक संस्था द्वारा किन स्त्रोतों से कोष प्राप्त किए गए तथा इन कोषों का कहाँ प्रयोग किया गया।
| Particulars |
2012( |
2013( |
|
| 1. Equity & Liabilities | |||
| (a)Shareholder's Funds | |||
| Share Capital | 1 | 11,00,000 | 16,00,000 |
| Reserves & Surplus | 3,00,000 | 3,00,000 | |
| (b)Non-Current Liabilities | |||
| 12% Deb.(Long term Borrowings) | 6,00,000 | 6,00,000 | |
| Deferred Tax Liabilities (Net) | 50,000 | 62,500 | |
| (c)Current Liabilities | |||
| Trade payables | 2 | 1,25,000 | 2,87,500 |
| Provision for Tax-Short-term | 1,25,000 | 2,50,000 | |
| Total | 23,00,000 | 31,00,000 | |
| 2. Assets | |||
| (a)Non-Current Assets | |||
| Fixed Assets | 3 | 12,00,000 | 15,00,000 |
| Non-current Investments(Trade) | 5,00,000 | 4,00,000 | |
| (b)Current Assets | |||
| Inventories | 2,00,000 | 4,00,000 | |
| Trade Receivables | 1,50,000 | 3,00,000 | |
| Cash & Cash Equivalents | 2,50,000 | 5,00,000 | |
| Total | 23,00,000 | 31,00,000 |
| Particulars |
2012( |
2013( |
| 1. Share Capital | ||
| Equity Share Capital | 8,00,000 | 10,00,000 |
| 9% Preference Share Cap. | 3,00,000 | 6,00,000 |
| 11,00,000 | 16,00,000 | |
| 2. Trade Payables | ||
| Creditors | 1,00,000 | 2,00,000 |
| Bills Payable | 25,000 | 87,500 |
| 1,25,000 | 2,87,500 | |
| 3. Fixed Assets (tangible) | ||
| Land & Building | 8,00,000 | 10,00,000 |
| Plant & Machinery | 3,00,000 | 3,50,000 |
| Furniture | 1,00,000 | 1,50,000 |
| 12,00,000 | 15,00,000 |
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A. कोष प्रवाह विवरणों पर
B. वित्तीय विवरणों पर
C. रोकड़ प्रवाह विवरणों पर
D. बाह्य स्त्राव विविरण पर
पारंपरिक वर्गीकरण वित्तीय विवरणों पर आधारित होता है जिनसे निर्धारित अनुपात संबंध रखता है।
पारंपरिक वर्गीकरण के अनुसार अनुपातों के प्रकारः-
1. आय विवरण अनुपातः आय विवरण के दो चरों का एक अनुपात आय विवरण अनुपात के नाम से जाना जाता है।
2. चिट्ठा अनुपातः चिट्ठे के दो चरों का एक अनुपात चिट्ठा अनुपात के नाम से जाना जाता है।
3. मिश्रित अनुपातः यदि एक अनुपात की गणना आय विवरण के एक चर तथा चिट्ठे के एक चर से की जाती है तो ऐसा अनुपात मिश्रित अनुपात के नाम से जाना जाता है।
| सकल स्थायी सम्पत्तियाँ | 30,000 |
| संचित मूल्यहृस | 10,000 |
| कुल विक्रय | 85,000 |
| विक्रय वापसी | 5,000 |
| रोकड़ विक्रय कुल विक्रय की 40% है। |
| विवरण | |
| समता अंश पूँजी | 4,00,000 |
| संचय एवं आधिक्य | 3,20,000 |
| 10: ऋणपत्र | 3,00,000 |
| चालू दायित्व | 2,00,000 |
| प्रारंभिक व्यय | 10,000 |
| विवरण | |
| अंशधारियों का कोष | 5,00,000 |
| कुल ऋण | 15,00,000 |
| चालू दायित्व | 2,00,000 |
अनुपातों की सीमाऐं:-
1. अंतहीन:- अनुपात स्वयं अपनेआप में एक अंत नहीं होता है, इसलिए अंतिम परिणामों के विश्लेषण में यह सर्वव्यापी नहीं होता है।
2. समस्या समाधान की योग्यता की कमीं:- अनुपात प्रारंभिक तौर पर समस्या को इंगित कर देता है परंतु यह उस समस्या का समाधान देने में सक्षम नहीं होता है।
3. मानकीकृत परिभाषा की कमीं:- अनुपात विश्लेषण में प्रयुक्त विभिन्न अवधारणाओं की मानकीकृत परिभाषा की कमीं होती है।
4. सार्वभौमिकतौर पर स्वीकृत मानक स्तरों की कमीं:- इनमें ऐसी कोई सार्वभौमिक सीमा नहीं होती है, जो आदर्श अनुपातों के स्तर को विनिर्दिष्ट करता है।
5. असम्बंधित आंकड़ों पर आधारित अनुपात:- असंबंधित आंकड़ों पर आधारित अनुपात अर्थहीन होता है।
| चालू अनुपात | 2.5 |
| तरल अनुपात | 1.5 |
| स्वामित्व अनुपात (स्वामित्व कोष पर स्थायी सम्पत्तियाँ | 0.75 |
| कार्यशील पूँजी | `6.000 |
| संचय एवं आधिक्य | `4.000 |
| बैंक अधिविकर्ष | `1.000 |
| विवरण | |
| समता अंश पूँजी | 4,00,000 |
| 12 सर्वाधिकार अंश पूँजी | 1,00,000 |
| सामान्य संचय | 1,89,000 |
| 10 ऋणपत्र | 4,00,000 |
| चालू दायित्व | 1,00,000 |
| अंशों के निर्गमन पर बट्टा | 5,000 |
| स्थायी सम्पत्तियाँ | 9,50,000 |
| चालू सम्पत्तियाँ | 2,34,000 |
| Particulars |
|
| I. EQUITY AND LIABILITIES | |
| 1. Shareholders’ Funds | |
| (a) Share Capital | 5,50,000 |
| (b) Reserves and Surplus | 1,25,000 |
| 2. Non-Current Liabilities | |
| (a) 12% Long-term Borrowings | 4,00,000 |
| (b) Deferred Tax Liabilities (Net) | 25,000 |
| 3. Current Liabilities | |
| (a) Trade Payables (Creditors) | 1,50,000 |
| (b) Other Current Liabilities | 20,000 |
| Total | 12,70,000 |
| II. ASSETS | |
| 1. Non-Current Assets | |
| (a) Fixed Assets (Tangible Assets) | 9,75,000 |
| (b) Non-Current Investments | 25,000 |
| 2. Current Assets | |
| (a) Short-term Investments | 50,000 |
| (b) Inventories | 2,00,000 |
| (c) Cash and Cash Equivalents | 20,000 |
| Total | 12,70,000 |
कर तथा ब्याज पूर्व शुद्ध लाभ तथा विनियोजित पूँजी की गणनाः
|
Particulars |
|
|
1. Calculation of Net Profit before Interest and Tax |
1,21,500 |
|
Net Profit after Interest and Tax |
|
|
Add: Tax[ [(1,21,500/60) X 40] |
81,000 |
|
Net Profit before Tax |
2,02,500 |
|
Add: Interest on Long-term Debts (12% of 4,00,000) |
48,000 |
|
|
2,50,500 |
|
Less: Interest on Non-trade Investments* (10% of 35,000) |
3,500 |
|
Net Profit before Interest and Tax |
2,47,000 |
|
*Other Investments being not for business, have not been considered. |
|
|
2. Calculation of Capital Employed |
|
|
Share Capital |
5,50,000 |
|
Add: Reserves and Surplus |
1,25,000 |
|
Deferred Tax |
25,000 |
|
Shareholders’ Funds |
7,00,000 |
|
Add: Long-term Debts |
4,00,000 |
|
|
11,00,000 |
|
Less: Non-trade Investments |
25,000 |
|
Capital Employed (Assets Approach) |
10,75,000 |
|
Or |
|
|
Fixed Assets (Tangible Assets) |
9,75,000 |
|
Trade Investments* |
50,000 |
|
Working Capital (Current Assets – Current Liabilities) |
50,000 |
|
( 2,20,000 – 1,70,000) |
|
|
Capital Employed (Liabilities Approach) |
10,75,000 |
अनुपात विश्लेषण के लाभ :-
1. निर्णयों की कुशलता को समझने में सहायक:-. अनुपात विश्लेषण से यह पता चलता है कि व्यवसाय फर्म
ने परिचालनए विनियोग तथा वित्तीय गतिविधियों से सम्बंधित सही निर्णय लिये हैं या नहीं।
2. जटिल आंकड़ों का सरलीकरण तथा सम्बंधों की स्थापना: अनुपात विश्लेषण जटिल आंकड़ों का सरलीकरण
करता है तथा उनमें संबंधों को स्पष्ट करता है।
3. तुलनात्मक विश्लेषण में सहायकः- अनुपातों की गणना केवल एक वर्ष के लिए नहीं की जाती है। जब कई
वर्षों के आंकड़ों को दायें बांये रखा जाता है तो वे व्यवसाय का प्रवाह दिखाने में मदद करते हैं। इस प्रवाह का
ज्ञान होने से परियोजना निर्माण में सहायता मिलती हैं जो व्यवसाय के लिए उपयोगी तत्व होता है।
4. स्वॉट विश्लेषण में सहायकः- अनुपात व्यवसाय में होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करने में सहायक होता
है।
5. विभिन्न तुलनाः- अनुपात विभिन्न मानकों से फर्म के परिणामों की तुलना कर यह सूनिश्चित करती है कि फर्म का प्रदर्शन सही है या नहीं।
स्कंध आवर्त अनुपात = परिचालनों से आय की लागत/ औसत स्कंध
परिचालनों से आय की लागत =
64,000 (कार्यशील टिप्पणी - 1 के अनुसार)
औसत स्कंध = (प्रारंभिक स्कंध रु अंतिम स्कंध) / 2
अब, मानिये की प्रारंभिक स्कंध ग है, तो अंतिम स्कंध होगा x +
2,000
इसलिए, औसत स्कंध = (x + x 2,000)/ 2
स्कंध आवर्त अनुपात के सूत्र में मान रखने पर,
या x + 1,000 = 64,000/5
या x = 12,800 – 1,000 =
11,800
प्रारंभिक स्कंध =
11,800
अंतिम स्कंध = 11,800 + 2,000 =
13,800
अम्ल परीक्षण अनुपात = त्वरित सम्पत्तियाँ/चालू दायित्व
0.75 = त्वरित सम्पत्तियाँ / 24,000
उपरोक्त समीकरण को सरल करने पर, त्वरित सम्पत्तियाँ होंगी (24,000 x 0.75) = 18,000
चालू सम्पत्तियाँ = त्वरित सम्पत्तियाँ + स्कंध
= 18,000 + 13,800 =
31,800
इसलिए, चालू अनुपात = चालू सम्पत्तियाँ/चालू दायित्व
= 31,800 / 24,000
= 1.325: 1
कार्यशील टिप्पणी :
1. परिचालनों से आय की लागत की गणना -
माना की लागत 100 रु है।
सकल लाभ - 25 (क्योंकि यह लागत का ( भाग है।)
अब, विक्रय होगा (100 + 25) =
125
जब विक्रय 125 रु का होगा, तो लागत 100 रु होगी।
जब विक्रय 80,000 रु है, तो लागत होगी -
80,000 x 100 / 125 =
64,000
A.
विनियोग गतिविधि
B.
परिचालन गतिविधि
C.
वित्तीय गतिविधि
D.
रोकड़ समतुल्य
नियत संपत्तियों का विक्रय विनियोग गतिविधियों के अंतर्गत आता है।
A.
विनियोग गतिविधि
B.
परिचालन गतिविधि
C.
वित्तीय गतिविधि
D.
रोकड़ समतुल्य
ऋणपत्र जारी करना एक वित्तीय गतिविधि है
A.
विनियोग गतिविधि
B.
परिचालन गतिविधि
C.
वित्तीय गतिविधि
D.
रोकड़ समतुल्य
ख्याति का विक्रय एक विनियोग गतिविधि है क्योंकि ख्याति एक नियत संपत्ति है और नियत संपत्तियों का विक्रय विनियोग गतिविधियों के अंतर्गत आता है।
A.
परिचालन गतिविधि
B.
रोकड़ समतुल्य
C.
विनियोग गतिविधि
D.
वित्तीय गतिविधि
एक विनिर्माण कम्पनी के द्वारा प्राप्त किराया एक विनियोग गतिविधि है
A.
रोकड़ और रोकड़ समतुल्यों में वृद्धि
B.
रोकड़ और रोकड़ समतुल्यों में कमी
C.
रोकड़ और रोकड़ समतुल्यों में कोई कमी नहीं
D.
चालू संपत्तियों में वृद्धि
चालू दायित्वों में कमी का परिणाम रोकड़ और रोकड़ समतुल्यों में कमी होती है क्योंकि इसे दायित्वों का भुगतान माना जाता है।
A.
परिचालन,
वित्तीय और
आर्थिक
गतिविधियों
में
B. परिचालन, विनियोग और वित्तीय गतिविधियों में
C. विनियोग, उधार और वित्तीय गतिविधियों में
D. परिचालन, विनियोग और आर्थिक गतिविधियों में
लेखांकन प्रमाप 3 (संशोधित) के अनुसार रोकड़ और रोकड़ तुल्य के अंतर्वाह और बहिर्वाह में होने वाले परिवर्तन तीन श्रेणियों परिचालन, विनियोग और वित्तीय गतिविधियों में वर्गीकृत किए जाते हैं
A.
परिचालन लाभ से कम होती है
B.
परिचालन लाभ में जोड़ी जाती है
C.
विनियोग से रोकड़ में जोड़ी जाती है
D.
विनियोग गतिविधियों से कम की जाती हैं
चालू संपत्तियों में परिवर्तन परिचालन गतिविधियों से रोकड़ प्रवाह को प्रभावित करता है और इस प्रकार परिचालनों से रोकड़ लेने के लिए परिचालन लाभ में जोड़ा जाता है।
A.
गैर रोकड़ मद
B.
रोकड़ मद
C.
गैर परिचालन मद
D.
रोकड़, गैर रोकड़, परिचालनन और गैर परिचालन मद
लाभ और हानि के विवरण में रोकड़ और गैर रोकड़ दोनों ही व्यय सम्मिलित होते हैं। इसमें परिचालन और गैर परिचालन दोनों ही व्यय सम्मिलित होते हैं
A.
विनियोग गतिविधियों में दिखाए गए हैं
B.
परिचालन गतिविधि से रोकड़ प्रवाह में पहुँचने के लिए शुद्ध लाभ से घटाए गए हैं
C.
विनियोग गतिविधि से रोकड़ प्रवाह में पहुँचने के लिए शुद्ध लाभ में जोड़े गए
D.
परिचालन गतिविधि से रोकड़ प्रवाह में पहुँचने के लिए शुद्ध लाभ में जोड़े गए
नियत संपत्तियों के विक्रय पर लाभ एक गैर परिचालन आय है इसलिए परिचालन गतिविधि से रोकड़ प्रवाह में पहुँचने के लिए शुद्ध लाभ से घटाए जाते हैं
A.
विनियोग
गतिविधि में
दिखाया गया
है
B. वित्तीय गतिविधि में दिखाया गया है
C. परिचालन गतिविधि में शुद्ध लाभ में जोड़ा गया है
D. परिचालन गतिविधि में शुद्ध लाभ से कम किया गया है
नियत संपत्तियों पर नुकसान को परिचालन गतिविधि में शुद्ध लाभ के लिए जोड़ा गया है।
A.
परिचालन गतिविधियाँ ।
B.
विनियोग गतिविधियाँ
C.
वित्तीय गतिविधियाँ
D.
असाधारण गतिविधियाँ
मुख्य आय सृजन गतिविधियों को परिचालन गतिविधियों के अंतर्गत दिखाया गया है।


रोकड़ प्रवाह विवरण को तैयार करने की निम्न प्रक्रिया हैः-
चरण-1 सर्वप्रथम परिचालन क्रियाओं से रोकड़ के प्रवाह की गणना करें- यह गणना लाभ-हानि विवरण, तुलनात्मक चिट्ठे एवं सम्बन्धित आतिरिक्त सूचनाओं से कीजिए।
चरण-2 विनियोजन क्रियाओं से रोकड़ के प्रवाह का योग कीजिए।
चरण-3 वित्तिय क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह की गणना कीजिए।
चरण-4 परिचालन क्रियाओं, विनियोजन एंव वित्तीय क्रियाओं से रोकड़ के प्रवाह का योग कीजिए। यह योग रोकड़ एवं रोकड़ तुल्य में वृद्धि कमी को दिखाएगा।
चरण-5 उपरोक्त योग में प्रारम्भिक रोकड़ एवं रोकड़ तुल्य को जोड़िए तथा देखिए कि यह जोड़ अन्तिम रोकड़ एवं रोकड़ तुल्य के बराबर है।
रोकड़ प्रवाह विवरण के निम्नलिखित महत्व हैः-
(1) विभिन्न क्रियाओं से अलग-अलग रोकड़ प्रवाह ज्ञात करने में सहायक- रोकड़ प्रवाह विवरण का मुख्य उद्देश्य परिचालन, विनियोग और वित्तिय क्रियाओं से अलग-अलग रोकड़ प्रवाह ज्ञात करना है। यह सूचित करता है कि इन क्रियाओं से कितनी-कितनी रोकड़ प्राप्त हुई अथवा इनमें कितनी-कितनी रोकड़ प्रस्तुत की गई।
(2) रोकड़ स्थिति – फर्म की रोकड़ की स्थिति के मूल्यांकन में यह बहुत उपयोगी है।
(3) वित्तीय नीतियों के नियोजन एवं समन्वय में सहायक – रोकड़ प्रवाह विवरण संस्था की वित्तीय नीतियों और नियोजन एवं समन्वय में उपयोगी होता है। इससे प्रबंधक को यह जानकारी हो जाती है कि कितनी रोकड़ की आवश्यकता होगी तथा इसमें के कितनी आन्तरिक साधनों से उपलब्ध होगी और कितनी राशि के लिए बाह्य साधनों से व्यवस्था की जाएगी। रोकड़ प्रवाह विवरण से रोकड़ बजट भी तैयार किया ज सकता है।
4. नियंत्रण में सहायक - रोकड़ प्रवाह विवरण प्रबंधकीय नियंत्रण तकनीक भी है। रोकड़ प्रवाह विवरण की रोकड़ बजट से तुलना करके बजट के मौलिक पूर्वानुमानों और रोकड़ प्रवाह विवरण के वास्तविक परिणामों में अंतर ज्ञात किया जा सकता है।
5. रोकड़ परिवर्तन का ज्ञान – रोकड़ प्रवाह विवरण द्वारा व्यवसाय की रोकड़ स्थिति में परिवर्तन किन कारणों से हुआ है, इसकी जानकारी मिलती है। कभी-कभी व्यवसाय में लाभ होने पर भी रोकड़ शेष घट जाता है अथवा हानि होने पर भी रोकड़ शेष में वृद्धि हो जाती है। रोकड़ प्रवाह विवरण इस प्रकार की स्थिति होने के कारणों को स्पष्ट करता है।
6. अल्पकालीन वित्तीय निर्णय में सहायक – व्यवसाय के दैनिक लेन-देन रोकड़ में होते हैं, अतः कोषों का वह भाग जो रोकड़ से सम्बन्धित है, प्रबन्ध को अल्पकालीन निर्णयों में बहुत सहायता पहुँचाता है। जैसे यदि प्रबंधक एक मास के बाद दायित्वों का शोधन (भुगतान) करने की क्षमता का पता लगाना चाहते हैं तो वे रोकड़ प्रवाह विवरण से ऐसा कर सकते हैं।
7. प्रबन्धकीय निर्णयों का मूल्यांकन – रोकड़ प्रवाह विवरण से प्रचालन क्रियाओं एवं वित्तिय क्रियाओं, विनियोजन क्रियाओं एवं वित्तिय क्रियाओं से रोकड़ प्रवाह की जानकारी मिलती है। इस जानकारी के आधार पर विनियोजक तथा लेनदार प्रबन्धकीय निर्णयों का मूल्यांकन कर सकते हैं।



अतिरिक्त सूचनाएँ:
(i)प्लांट तथा भूमि एवं भवन पर क्रमश: 7,500 तथा 12,500 का मूल्यह्रास लगाया गया।
(ii)2013 में 10,000 का एक अंतरिम लाभांश चुकाया गया।
(iii)2013 के दौरान 17,500 का आयकर चुकाया गया।
लेखा मानक - 3 (संशोधित) के अनुसार परिचालन गतिविधियों से रोकड़ प्रवाह की गणना कीजिए।


| 31.3.2017 | 31.3.2018 | |
| ₹ | ₹ | |
| समता अंश पूँजी | 3,00,000 | 5,00,000 |
| 18% अधिमान अंश पूँजी | 2,00,000 | 1,50,000 |
| प्रतिभूति प्रीमियम आरक्षिति | 50,000 | 1,30,000 |
| 14% ऋणपत्र | 1,00,000 | 1,25,000 |
| ऋणपत्र पर बट्टा | 2,500 | 3,000 |
| शेयर निर्गमन पर अपलिखित कमीशन | - | 10,000 |
| बैंक अधिविकर्ष | 50,000 | 75,000 |
| बैंक अधिविकर्ष पर ब्याज | 7,500 | 10,000 |
| लाभ व हानि शेष | 1,75,000 | 2,50,000 |
|
प्रचालन क्रियाकलापों से रोकड़ प्रवाह |
|
|
|
₹ |
|
कर से पूर्व निवल लाभ (नोट 1) |
1,56,000 |
|
गैर-नकद और गैर-प्रचालन मदों हेतु समायोजन: |
|
|
जोड़ें: अधिमान अंशों के मोचन पर प्रीमियम का भुगतान |
2,500 |
|
ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान |
14,000 |
|
बैंक अधिविकर्ष पर ब्याज |
10,000 |
|
प्रचालन क्रियाकलापों से निवल रोकड़ प्रवाह |
1,82,500 |
नोट 1
|
कर से पूर्व निवल लाभ की गणना |
₹ |
|
31 मार्च, 2018 को लाभ व हानि का शेष |
2,50,000 |
|
घटाएँ: 31 मार्च, 2017 को लाभ व हानि का शेष |
1,75,000 |
|
|
75,000 |
|
जोड़ें: अधिमान अंशों पर भुगतान किया गया लाभांश ( ₹ 2,00,000 पर 18%) |
36,000 |
|
समता अंशों पर प्रस्तावित लाभांश का भुगतान ( ₹3,00,000 पर15% ) |
45,000 |
|
|
1,56,000 |
|
वित्तीय क्रियाकलापों से रोकड़ प्रवाह |
|
|
|
₹ |
|
समता अंश पूँजी का निर्गमन (₹2,00,000)+प्रतिभूति प्रीमियम आरक्षिति ₹80,000 – अपलिखित कमीशन ₹10,000 |
2,70,000 |
|
अधिमान अंशों का मोचन (₹50,000 +₹2,500 प्रीमियम) |
(52,500) |
|
ऋणपत्र निर्गमन (₹25,000–₹500) |
24,500 |
|
बैंक अधिविकर्ष में वृद्धि |
25,000 |
|
बैंक अधिविकर्ष पर ब्याज |
(10,000) |
|
अधिमान अंशों पर लाभांश का भुगतान (₹2,00,000 पर 18%) |
(36,000) |
|
31 मार्च, 2017 को समता अंशों पर प्रस्तावित लाभांश का भुगतान (₹3,00,000 पर 15%) |
(45,000) |
|
ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान (₹1,00,000 पर 14%) |
(14,000) |
|
वित्तीय क्रियाकलापों से निवल रोकड़ |
1,62,000 |
A.
विचलनों का विश्लेषण।
B.
प्रदर्शन मानकों की स्थापना।
C.
सुधारात्मक कार्रवाई करना।
D.
मानकों से वास्तविक प्रदर्शन की तुलना।
आकस्मिक दायित्व वे दायित्व हैं, जो अभी तक तो नहीं आए हैं,नियंत्रण की प्रक्रिया में अंतिम चरण सुधारात्मक कार्रवाई करना होता है। जब कभी भी कोई विचलन होता है तो सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
A.
नियोजन।
B.
संगठन।
C.
नियुक्तिकरण।
D.
निर्देशन।
नियंत्रण का अनुपूरक कार्य नियोजन होता है। नियोजन तथा नियंत्रण अलग नहीं हो सकते हैं। नियोजन नियंत्रण को प्रभावी और कुशल बनाता है, जबकि नियंत्रण भविष्य के नियोजन में सुधार करता है।
A.
पत्रिका सरल होना चाहिए।
B.
कठिन होना चाहिए।
C.
और अधिक कर्मचारी रखने चाहिए।
D.
लम्बा होना चाहिए।
नियंत्रण तकनीक को सरल होना चाहिए जिससे पर्यवेक्षक इसे सही ढंग से समझ सके तथा सुधार क्षेत्रों में शीघ्र निर्णय ले सके।
A.
गुणात्मक होना चाहिए।
B.
कठोर होना चाहिए।
C.
लोचशील होना चाहिए।
D.
परिवर्तन का विरोध करना चाहिए।
एक अच्छी नियंत्रण प्रणाली को बाहरी वातावरण में हो रहे परिवर्तन को समायोजित करने में सक्षम होना चाहिए। यदि एक संगठन फोन के तार का उत्पादन करती है और बाद में तार रहित फोन बाजार में आता है, तो इस संगठन को फोन के तार की अपनी बिक्री के लक्ष्य को कम करके और तार रहित फोन का उत्पादन भी शुरू कर देना चाहिए।
A.
योजनाओं के सुधार में।
B.
लाभों में कमीं करने में।
C.
लागते बढ़ाने में।
D.
बजट को नजरअंदाज करने में।
नियंत्रण, योजना में कमियों का पता लगाने में और मानकों के संशोधन में मदद करता है। इस प्रकार, अगली बार बेहतर योजनाओं का निर्माण होता है।
A.
नियोजन के बिना।
B.
संगठन के बिना।
C.
निर्देशन के बिना।
D.
नियंत्रण के बिना।
प्रदर्शन मूल्यांकन अर्थात वास्तविक प्रदर्शन के लिए पुरस्कार या सुझाव देना। वास्तविक प्रदर्शन को प्रबंधन के नियंत्रण कार्य में मापा जाता है। इस प्रकार, नियंत्रण कर्मचारियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए आधार प्रदान करता है।
A.
लागत बढ़ाने में मदद करता है।
B.
मुनाफे को कम करने में मदद करता है।
C.
कर्मचारियों के प्रदर्शन को बढ़ाता है।
D.
विचलन पर ध्यान नहीं देता है।
नियंत्रण ऐसे मानक प्रदान करता है जिसके खिलाफ कर्मचारियों के वास्तविक प्रदर्शन को मापा जाता है। यह कर्मचारियों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है। यदि कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें सम्मान और पुरस्कार मिलता है, जो उनकी सामाजिक जरूरतों को संतुष्ट करते हैं। इस प्रकार, नियंत्रण कर्मचारियों के मनोबल में सुधार करता है और वे अधिक समर्पण और उत्साह के साथ काम करते हैं।
A.
वास्तविक प्रदर्शन, मानक से कम है।
B.
वास्तविक प्रदर्शन, मानक की तुलना में अधिक है।
C.
वास्तविक प्रदर्शन, मानकों के बराबर है।
D.
कोई मानक तय नहीं है।
यदि वास्तविक प्रदर्शन योजनानुसार कम होता है, तो यह एक प्रतिकूल स्थिति होती है। इस स्थिति पर काबू पाने के लिए, हमें वास्तविक प्रदर्शन को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होती है जिससे लक्ष्य निर्धारित समय और लागत की सीमा के भीतर प्राप्त किये जा सके।
A.
नियोजन कार्य का।
B.
संगठन कार्य का।
C.
निर्देशन कार्य का।
D.
नियंत्रण कार्य का।
नियंत्रण प्रबंधन का एक ऐसा कार्य है जिसमें विचलनों का पता करने के लिए वास्तविक प्रदर्शन को निर्धारित मानकों से मापा जाता है।
A.
भविष्य के प्रदर्शन में सुधार करता है।
B.
पिछले प्रदर्शन का मापन करता है।
C.
संगठन संरचना का निर्माण करता है।
D.
पर्यवेक्षण से संबंधित है।
नियंत्रण पिछले प्रदर्शन को मापने में मदद करता है। इन्हें वास्तविक प्रदर्शन से मापा तथा तुलना की जाती है जिससे पिछले त्रुटियों का पता लगाया जा सके। इसके अलावा, यह त्रुटि की अनावर्ति को सुनिश्चित करता है, जिससे अगली बार हम कम से कम गलतियों और अधिकतम गुणवत्ता के साथ काम कर सके।
A.
निर्देशन।
B.
नियंत्रण।
C.
संगठन।
D.
नियोजन।
नियंत्रण कार्य मानकों के साथ वास्तविक प्रदर्शन की तुलना में मदद करता है। अगर वास्तविक प्रदर्शन योजना की तुलना में बेहतर होता है, तो अगली बार मानकों में सुधार किया जाना होता है। यदि मानकों को हासिल नहीं किया जा सकता है, तो योजनाओं को उसके अनुसार समायोजित करने की जरूरत होती है।
A.
वास्तविक प्रदर्शन, मानक की तुलना में अधिक है।
B.
वास्तविक प्रदर्शन, मानकों के बराबर है।
C.
कोई मानक तय नहीं है।
D.
शेयर पूंजी
इसका अर्थ वास्तविक प्रदर्शन, मानक की तुलना में अधिक है। यह अनुकूल स्थिति होती है क्योंकि वास्तविक प्रदर्शन योजना से बेहतर है।
A.
नियोजन।
B.
संगठन।
C.
नियुक्तिकरण।
D.
आर्थिक संसाधनों और बाध्यताओं निर्देशन।
नियंत्रण की अंतः निर्भर तथा अंतः संबंधित गतिविधि नियोजन है। नियोजन के बिना, नियंत्रण के लिए कोई आधार नहीं होता है तथा इसका उल्टा।
A.
आकस्मिक दायित्व
B.
वर्तमान/चालू दायित्व
C.
दीर्घ अवधि दायित्व
D.
शोधनयोग्य ऋणपत्र
किसी भी अनिश्चित घटना के होने पर आकस्मिक दायित्व उत्पन्न होते हैं. ये बाद में हो भी सकते हैं और नहीं भी
A.
B.
C.
D.
कुल परिसंपत्तियां = 1,00,000 + 1,50,000 =
2,50,000
कुल परिसंपत्तियों के % के रूप में नियत परिसंपत्तियां = 1,00,000/2,50,000 x 100 = 40%
A.
लाभ और हानि का विवरण
B. चिट्ठा
C.
लेखा टिप्पणीयाँ
D.
लाभ और हानि का विवरण, चिट्ठा और लेखा टिप्पणीयाँ
वित्तीय विवरण किसी उपक्रम के द्वारा लेखांकन प्रक्रिया के अंत में प्रस्तुत किए गए लेखांकन आंकड़ों का सारांशीकृत विवरण होते हैं. वित्तीय विवरण में लाभ और हानि के विवरण, चिट्ठा और लेखा टिप्पणीयाँ सम्मिलित होते हैं
A.
ह्रास
B. बिक्री और वितरण व्यय
C. नियत परिसंपत्तियों की बिक्री पर नुकसान
D. खराब ऋण
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री पर नुकसान को संचालन व्यय से बाहर रखा जाता है. वे गैर संचालन व्ययों का हिस्सा होते हैं
A. प्राप्त किराया
B.
प्राप्त ब्याज और लाभांश
C.
नियत परिसंपत्तियों की बिक्री पर लाभ
D. सामानों की बिक्री
गैर संचालन आय वे आय होती हैं जो उन गतिविधियों से होती हैं जो व्यापार की मुख्य गतिविधियों से संबंधित नहीं होती हैं. सामानों की बिक्री एक संचालन आय है
A.
1,10,000.
B.
4,50,000.
C.
3,50,000.
D.
2,50,000.
सकल लाभ= संचालन क्रियाओं से आगम−संचालन क्रियाओं से आगम की लागत, तो इस प्रकार संचालन क्रियाओं से आगम = सकल लाभ+ संचालन क्रियाओं से आगम की लागत
| विवरण | 2012 |
|
संचालनों से आय ( |
7,00,000 |
| उपभोग की गयी सामग्री की लागत | संचालनों से होने वाली आय का 60% |
A.
4,20,000.
B.
2,80,000.
C.
7,00,000.
D.
3,20,000.