A.
केवल कार्य पर।
B.
कार्यों के द्वारा समर्थित उत्पाद लाइनों पर।
C.
निर्णयन पर।
D.
अंतरण पर।
एक प्रभागीय ढाँचे में, व्यावसायिक संगठन में अलग-अलग व्यावसायिक इकाईयाँ या प्रभाग होते हैं। प्रत्येक इकाई में एक प्रभागीय प्रबंधक प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार होता है और इकाई पर अधिकार रखता है।
A.
कार्य बल के बीच कार्यों के व्यवस्थित आवंटन द्वारा।
B.
संचार की स्पष्ट रेखा की स्थापना द्वारा।
C.
कारोबारी माहौल में परिवर्तन करने के लिए समायोजन द्वारा।
D.
नए कार्य ले कर।
संगठन कार्यबल के बीच कार्यों का एक व्यवस्थित आवंटन होता है। यह कार्यभार को कम करता है और उत्पादकता को बढ़ाता है क्योंकि लगातार विशिष्ट कार्य विशिष्ट कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाता है। किसी विशेष कार्य का दोहराव एक कार्यकर्ता को उस विशेष क्षेत्र में अनुभवी तथा विशेषज्ञ बनाता है।
A.
पूरे संगठन के उत्तरदायित्वों का अंतरण।
B.
पूरे संगठन की जिम्मेदारियों का अंतरण।
C.
पूरे संगठन के अधिकारों का अंतरण।
D.
एक वरिष्ठ तथा एक अधिनस्थ के मध्य सहयोग।
विकेंद्रीकरण संगठन में अधिकारों के अंतरण से संबंधित होता है। यह अधिकार के अंतरण का एक विस्तार होता है।
A.
यह एक अनिवार्य कार्य नहीं है।
B.
कार्यों के विभाजन के लिए इसका पालन नहीं किया जाता है।
।
C.
इसका क्षेत्र संकीर्ण होता है।
D.
यह वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी को बढ़ाता है।
अंतरण का क्षेत्र संकीर्ण होता है क्योंकि यह वरिष्ठ तथा उसके अधिनस्थ तक सीमित होता है।
A.
समूह के सदस्य।
B.
उच्चस्तरीय प्रबंधन।
C.
मध्यमस्तरीय प्रबंधन।
D.
पर्यवेषक स्तरीय प्रबंधन।
एक अनौपचारिक संगठन में नेताओं द्वारा समूह के सदस्यों को चुना जाता है।
A.
एक विकेन्द्रीकृत संगठन।
B.
एक अनौपचारिक संगठन।
C.
एक औपचारिक संगठन।
D.
एक केंद्रीत संगठन।
कर्मचारियों के व्यक्तिगत सम्बंधों के परिणामस्वरूप एक औपचारिक संगठन में से ही एक अनौपचारिक संगठन का उदगम होता है। एक अनौपचारिक संगठन की सदस्यता स्वैच्छिक होती है तथा इसमें संचार का कोई तय प्रवाह नहीं होता है।
A.
उच्च प्रबंधन।
B.
मध्यम प्रबंधन।
C.
निम्न प्रबंधन।
D.
परिचालन प्रबंधन।
विकेन्द्रीकरण उच्च प्रबंधन के नीति निर्णय का परिणाम है। यह निम्नस्तरीय प्रबंधन को अधिकारों के अंतरण के लिए एक व्यवस्थित प्रयास को संदर्भित करता है।
रेखा संगठन ‘अदिश श्रृंखला सिद्धांत’ को अपनाते हैं जिसमें अधिकार ऊपर से नीचे तक ऊध्र्वाधर नीचे की ओर प्रवाहित होते हैं और उत्तरदायित्व शीर्ष स्तर तक निचले स्तर से ऊपर की ओर प्रवाहित होते हैं।
रेखा संगठन में उत्तरदायित्व निचले स्तर से शीर्ष स्तर की तरफ ऊपर की ओर प्रवाहित होते हैं।
एबीसी लिमिटेड को प्रभागीय संरचना अपनानी चाहिए।
प्रमुख कार्यों के आधार पर संगठनात्मक संरचना के दो बुनियादी प्रकार है:
1. कार्यात्मक संरचना
2. प्रभागीय संरचना
कार्यात्मक संरचना ऐसे बड़े संगठनों के लिए अधिक उपयोगी होती है जहाँ संचालन में विशेषज्ञता एक उच्च स्तर की आवश्यकता होती है।
अनौपचारिक संगठन
कार्यात्मक संरचना और प्रभागीय संरचना।
यह कर्मचारियों के आधिकारिक तौर पर परिभाषित कर्तव्यों से परे, कार्य पर उनके अनुकूल तथा सामाजिक बातचीत के कारण निर्मित औपचारिक संगठन होता है।
यह एक वरिष्ठ के अंतर्गत अधिनस्थों की संख्या को दर्शाता है।
औपचारिक संगठन की सीमाएँ हैं:
1. कठोरता
2. प्रक्रियागत देरी।
संगठन का उद्देश्य एक दूसरे से संबंधित करने के लिए और एक आम उद्देश्य के लिए एक साथ कार्य करने के लिए लोगों को सक्षम करना होता है।
रेखा और कर्मचाररी संगठन में, विशेष और सहायक गतिविधियाँ ऐसे स्टाफ कर्मी उपलब्ध कराकर निर्देश की रेखा से जुड़े होते हैं जो अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में सलाह प्रदान करते हैं। यह रेखा संगठनों और कार्यात्मक संगठनों दोनों का मिश्रण होता है। रेखा प्रबंधकों को कार्यकारी अधिकार प्रदान किये जाते हैं और कर्मचारियों के अधिकारी उनके सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं।
रेखा अधिकारी आम तौर पर शिकायत करते हैं कि:
क) स्टाफ अधिकारी व्यावहारिक सलाह नहीं दे।
ख) स्टाफ अधिकारी केवल उन कार्यक्रमों की साख के लिए दावा करें जो सफल रहे।
ग) स्टाफ अधिकारी उन कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं जो उनके विशेषज्ञता क्षेत्र से बाहर होते हैं।
घ) स्टाफ अधिकारी में श्रेष्ठता जटिलता उनमें तथा रेखा अधिकारियों में संघर्ष और घर्षण पैदा करता है।
रेखा और कर्मचारी संगठन के गुण निम्नलिखित हैं:
1. स्टाफ अधिकारियों की विशेषज्ञता और ज्ञान रेखा प्रबंधकों के लिए उपलब्ध होता है।
2. स्टाफ अधिकारियों की सहायता से उपलब्ध विशेषज्ञ राय के कारण रेखा कर्मचारी संतुलित और प्रभावी निर्णय लेने के लिए सक्षम होता है।
निर्देश की एकता तथा और एकीकृत नियंत्रण एक संगठन में अनुशासन को बढ़ावा देता है। इसमें परस्पर विरोधी आदेशों का कोई खतरा नहीं होता है। प्रत्येक स्थिति को इसके तत्काल वरिष्ठ स्थिति नियंत्रण द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
प्रभागीय संरचना में, संगठन की गतिविधियाँ कुछ विभागों में वर्गीकृत होती है जिन्हें उत्पादों के आधार पर बनाया जाता है। प्रत्येक उत्पाद का एक विभागीय मुख्य की अध्यक्षता में एक अलग विभाग होता है।
संगठन के कार्यात्मक संरचना के लाभ हैं:
1. यह व्यावसायिक विशेषज्ञता प्रदान करता है जो संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए सक्षम बनाता है।
2. यह पर्यवेक्षण को सुविधाजनक बनाता है क्योंकि एक व्यक्ति इससे संबंधित कार्यों और गतिविधियों से परिचित हो जाता है।
प्रभागीय संगठन ढाँचे के दो दोष निम्नलिखित हैं:-
1. विभागों के बीच टकराव को बढ़ाता है।
2. लागत को बढ़ाता है।
|
आधार |
कार्यात्मक संगठन |
प्रभागीय संगठन |
|
विशिष्टीकरण |
कार्यात्मक विशिष्टीकरण |
उत्पाद विशिष्टीकरण |
औपचारिक संगठन की विशेषताएँ हैं:
1. औपचारिक संगठन जानबूझकर शीर्ष प्रबंधन द्वारा बनाया जाता है।
2. यह स्पष्ट रूप से प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार और जिम्मेदारी को परिभाषित करता है।
1. ध्यान:
औपचारिक संगठन रोजगार,
कार्यों और तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित होता है जबकि अनौपचारिक संगठन हित और अन्य मानवीय पहलुओं पर केंद्रित होता है।
2. अन्योन्याश्रय:
औपचारिक स्वतंत्र रूप से अनौपचारिक संगठन के लिए मौजूद होते हैं जबकि अनौपचारिक संगठन औपचारिक संगठन के ढांचे के भीतर मौजूद होता है।
बिजली के सामान की विनिर्माण कंपनी के महाप्रबंधक को कार्यात्मक संरचना को अपनाना चाहिए।
कार्यात्मक संरचना के निम्न दो लाभ होते हैं:
1. कार्यात्मक संरचना के तहत,
व्यापार के प्रत्येक प्रमुख कार्यों को एक अलग विभाग के रूप में संगठित किया जाता है। एक विशेषज्ञ प्रत्येक विभाग का प्रबंधन कर सकता है। यह कार्यों में दक्षता को सुनिश्चित करता है।
2. कार्यात्मक संरचना के तहत,
विभागों के भीतर समन्वय आसान होता है क्योंकि विशेषज्ञ होने के नाते विभागीय प्रबंधक कार्य में शामिल कार्य की सही प्रकृति को समझते हैं।

कार्यात्मक संरचना ऐसे स्थिर वातावरण में अधिक उपयुक्त होती है जहाँ तकनीकी दक्षता और गुणवत्ता को महत्वपूर्ण माना जाता है।
कार्यात्मक संरचना विशेषज्ञता और काम के विभाजन को सुनिश्चित करती है। हर उद्यम को बुनियादी कार्य अर्थात उत्पादन,
विपणन,
कार्मिक और वित्त आदि करने होते हैं। प्रत्येक कार्य में विभिन्न कौशल और ज्ञान की आवश्यकता होती है। कार्यात्मक संरचना गहरे कौशल,
विशेषज्ञता और विकास को बढ़ावा देते हैं।
अधिकारों का अंतरण प्रबंधकों के विकास का एक स्त्रोत होता है। यह प्रबंधकों को नेतृत्व करने के लिए तथा प्रबंधकों को अवसर प्रदान करता है। उन्हें स्थिति को संभालने के लिए तथा प्रबंधकीय समस्या को सुलझाने के लिए अपने अधिकारों को उपयोग में लेने की आवश्यकता होती है। उन्हें अपने अधिनस्थों को अभिप्ररित कर अपने अधिनस्थों से परिणाम प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार इन अनुभवों के आधार पर एक प्रबंधक कई प्रकार से कई परिस्थितियों का अध्ययन कर उच्च उत्तरदायित्व लेने के लिए तैयार होता है।
1. प्रबंधकों के कार्यभार में कमीं - अधिकारों के अंतरण का अर्थ अधिनस्थों को कार्य सौंपना होता है। अंतरण दैनिक छौटे-छौटे दायित्वों को पुरा करके अपने प्रबंधकों को सहायता प्रदान करता है इसके द्वारा एक प्रबंधक अपने कार्य के महत्वपूर्ण हिस्से की तरफ अधिक ध्यान तथा प्रयास करने की स्थिति में होता है।
2. अधिनस्थों को अभिप्रेरणा - अंतरण का अर्थ अधिकारियों द्वारा अपने अधिनस्थों को कुछ कार्य करने के लिए एक अधिकार प्रदान करना होता है। इसके परिणामस्वरूप, अधिनस्थ पहचान करने का ज्ञान प्राप्त करते हैं। अधिनस्थों को कार्य करने के लिए अभिप्रेरित किया जाता है। अधिकारो का अंतरण कर्मचारियों की शिक्षा के लिए योगदान तथा कार्य के लिए संतुष्टी को बढ़ाता है।
इस कथन द्वारा व्यावसायिक वातावरण की विशेषता ‘जटिलता’ पर प्रकाश डाला गया है। व्यापार वातावरण में कई अंतः संबधित और गतिशील परिस्थितियों या बलों का समावेश होता है जो विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होते हैं। इसलिए, वास्तव में एक दिये गये पर्यावरण के गठन को एक ही बार में समझना मुश्किल होता है।
व्यापार संगठनों पर कानूनी वातावरण में परिवर्तन के प्रभाव के दो उदाहरण इस प्रकार हैं:
1. मादक पेय पदार्थों के विज्ञापनों पर रोक।
2. सिगरेट के विज्ञापन और पैक पर
‘‘धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।’’
वैधानिक चेतावनी होती है।
व्यापार पर सामाजिक परिवेश में परिवर्तन के प्रभाव के दो उदाहरण हैं:
1. प्रयोज्य आय में वृद्धि की वजह से घरेलू उपकरणों के लिए मांग में वृद्धि।
2. भारतीय त्योहारों के समय ग्रीटिंग कार्ड कंपनियों,
कन्फेक्शनरों,
बुटीक आदि के लिए अवसरों में वृद्धि।
व्यापार संगठनों को प्रभावित करने वाले आर्थिक वातावरण के दो घटक हैं:
1. आर्थिक प्रणाली की प्रकृति में सार्वजनिक क्षेत्र,
आर्थिक नियोजन आदि की भूमिका शामिल है।
2. संरचनात्मक संगठन की अर्थव्यवस्था में व्यापार की संरचना,
पूँजी निवेश का पैटर्न आदि शामिल होता है।
एक व्यावसायिक वातावरण में विशिष्ट बल वे बल होते हैं जो सीधे एकल व्यापार उद्यम को प्रभावित करते हैं और जिसमें निवेशकों,
ग्राहकों,
प्रतियोगियों,
आपूर्तिकर्ताओं आदि का समावेश होता है।
सामान्य बल वे बल होते हैं जो परोक्ष रूप से सभी व्यावसायिक उद्यमों को प्रभावित करते हैं तथा जिसमें सामाजिक,
राजनीतिक,
कानूनी,
तकनीकी स्थितियाँ आदि का समावेश होता है।
तकनीकी वातावरण में ऐसे वैज्ञानिक सुधारों और नवाचारों से संबंधित बलों में शामिल है जो माल और सेवाओं का निर्माण करने के लिए नए तरीके और एक व्यापार के संचालन की तकनीक के नए तरीके प्रदान करते हैं। यह व्यापार के लिए अनुसंधान एवं विकास और विदेशी प्रौद्योगिकी तक पहुंच के लिए भी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
व्यावसायिक पर्यावरण के महत्व:-
1. नियोजन एवं नीति निर्धारण में सहायता - व्यावसायिक पर्यावरण व्यवसाय के लिए चुनौतियाँ तथा अवसर दोनों लाता है। अतः पर्यावरण को समझना प्रबंध की, भविष्य हेतु नियोजन करने और निर्णय लेने में मदद करता है।
2. निष्पादन में सुधार - पर्यावरण-जागरूकता प्रबंध को एक निरंतर, विस्तृत आधार पर शिक्षण प्रदान करती है। ऐसी समझ से उद्देश्यपूर्ण गुणात्मक सूचनाएँ उत्पन्न होती हैं जो नीति-विचर के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है।
इंटरनेट उपयोगकर्ता, मुद्रास्फीति मूल्य, लोगों की प्रयोज्य आय, बाजार सूचकांक के मूल्य में परिवर्तन एक व्यावसायिक उद्यम में प्रबंधन के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं क्योंकि यह आर्थिक कारक भी हैं। छोटी और लंबी अवधि के लिए ब्याज काफी उत्पाद और सेवाओं के लिए मांग को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, निर्माण कंपनियों और ऑटोमोबाइल विनिर्माण कम्पनियों की स्थिति में यह लाभकारी होता है क्योंकि इससे उपभोक्ता के खर्च करने के स्तर में वृद्धि होती है।
निजीकरण के कारण राष्ट्र में व्यवसाय के निजी क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को कम कर दिया जाता है। विनिवेष उद्यम के लिए एक कमजोर कडी होती है।
(i) नई सरकार सत्ता में आना - राजनैतिक वातावरण
· आयात-निर्यात नीति में परिवर्तन - आर्थिक वातावरण
(ii). व्यावसायिक वातावरण की विशेषता
एक-दूसरे से संबंधित : व्यावसायिक वातावरण के विभिन्न घटक एक-दूसरे से संबंधित होते हैं। उदाहरण के लिए, नई सरकार के सत्ता में आते ही आयात-निर्यात नीति में परिवर्तन होना। यहां नई सरकार का सत्ता मे आना राजनैतिक तथा आयात-निर्यात नीति में परिवर्तन आर्थिक परिवर्तन है।
राजनीतिक वातावरण में सार्वजनिक मामलों के प्रबंधन और व्यापार पर उनके प्रभाव से संबंधित बल सम्मिलित होते हैं। एक व्यापार को देश में व्याप्त राजनीतिक वातावरण के प्रभाव का विश्लेषण और उपयुक्त निर्णय लेना होता है। एक व्यवसाय का राजनीतिक वातावरण निम्न में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैः
1. नए व्यापार के अवसरों का विकास।
2. एक व्यावसायिक उद्यम को स्थिरता प्रदान करना।
3. व्यापार लोगों के बीच आत्मविश्वास का निर्माण करना।
4. देश में निवेश बढ़ाना।
यह कथन सत्य है कि ऐसी कम्पनियाँ जो उनके पर्यावरण के लिए अनुकूल बनने में विफल होती हैं उनके लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना नहीं होती है। यह कथन एक संगठन के ‘व्यावसायिक पर्यावरण’ को दर्शाता है। व्यावसायिक वातावरण ऐसे बाह्य कारकों का कुल योग है जो एक व्यावसायिक उद्यम को प्रभावित करते हैं। एक संगठन के व्यावसायिक वातावरण में प्रौद्योगिकीय परिवर्तन, आर्थिक परिवर्तन, सरकार की नीति में परिवर्तन, उपभोक्ता वरीयताओं में परिवर्तन आदि के रूप में ऐसे विभिन्न बलों और कारकों को शामिल किया जाता है जो उनके नियंत्रण से बाहर होते हैं। एक व्यापार को लंबे समय तक जीवित रहने के लिए इन बलों और कारणों को दूर करना पड़ता है।
निजीकरण शब्द ऐसे आर्थिक सुधारों को दर्शाता है जिनका उद्देश्य निजी क्षेत्र को एक बड़ी भूमिका प्रदान करना और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को कम करना होता है।
निजीकरण के तहत भारत सरकार द्वारा अपनाये गये उपायों में से कुछ इस प्रकार हैं:
1. सरकार की हिस्सेदारी को कम करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के नियोजित विनिवेश।
2. एक इकाई के पुनर्गठन तथा इसे बंद करने के संबंध में निर्णय लेने के लिए औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण
(बीआईएफआर)
बोर्ड की स्थापना।
व्यावसायिक वातावरण के आयाम:
1. तकनीकी वातावरण।
2. कानूनी वातावरण।
3. सामाजिक वातावरण।
A.
नीचे की ओर।
B.
ऊपर की ओर।
C.
क्षैतिज।
D.
संगठन के बाहर।
आकस्मिक दायित्व वे दायित्व हैं, जो अभी तक तो नहीं आए हैं, निम्नस्तरीय प्रबंधक अपने उन अधिनस्थों के लिए जिम्मेदार होते हैं जो संगठन में उनसे एक स्तर ऊपर होते हैं। इस प्रकार जिम्मेदारी ऊपर की ओर प्रवाहित होती है।
A.
जिम्मेदारी से।
B.
अधिकार से।
C.
चर्चा से।
D.
अनौपचारिक संगठन से।
जवाबदेही की अवधारणा जिम्मेदारी से संबंधित होती है। एक अधीनस्थ किये गये कार्य के लिए पर्यवेक्षक के प्रति जवाबदेह होता है।
A.
वह अधीनस्थ के कार्य के लिए जिम्मेदार होता है।
B.
वह अधीनस्थ के कार्य के लिए जिम्मेदार नहीं होता है।
C.
जिम्मेदारी का अंतरण होता है।
D.
उत्तरदायित्वों का अंतरण होता है।
अधिकार सौंपे जा सकते है लेकिन नहीं जवाबदेही नहीं। एक व्यक्ति को आवश्यक अधिकार दिये जाने के बाद उसे कार्य करने के लिए कहा जा सकता है परंतु यदि कार्य स्थापित मानकों के अनुसार नहीं किया जाता है तो वह जवाबदेही से बच नहीं सकता है।
A.
प्रभागीय ढाँचा।
B.
कार्यात्मक फोरमेनशिप।
C.
अधिकार अंतरण।
D.
कार्यात्मक ढाँचा।
अधिकार अंतरण अर्थात किये जाने वाले कार्य का विभाजन तथा फिर कार्य करने के लिए अधिकार प्रदान करना। यह कार्य विभाजन एक वरिष्ठ के कार्यभार को कम करता है।
A.
केन्द्रीयकरण का।
B.
अदिश श्रंखला का।
C.
शक्ति की एकाग्रता का।
D.
उत्तरदायित्वों के स्थानान्तरण का।
अधिकार अंतरण प्रबंधकों के बीच वरिष्ठ-अधिनस्थ संबंधों की एक श्रृंखला का निर्माण करता है। इस अदिश श्रंखला कहा जाता है।
A.
निर्णयन के अधिकार की अवधारणा।
B.
निर्णयन के अधिकार का प्रसार।
C.
लाभ केंद्रों के रूप में प्रभागों का निर्माण।
D.
नये केंद्र या शाखाएँ खोलना।
केन्द्रीयकरण प्रबंधन पदानुक्रम में शीर्ष स्तर पर निर्णयन के अधिकार की एकाग्रता को दर्शाता है। छोटे तथा बड़े सभी निर्णय शीर्ष स्तर के प्रबंधन द्वारा किए जाते हैं।
तकनीकी वातावरण में ऐसे वैज्ञानिक सुधारों और नवाचारों से संबंधित बलों में शामिल है जो माल और सेवाओं का निर्माण करने के लिए नए तरीके और एक व्यापार के संचालन की तकनीक के नए तरीके प्रदान करते हैं।
व्यापार वातावरण उन खतरों को जानने तथा संभावित खतरे के प्रभाव को कम करने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में मदद करता है जो भविष्य में संगठन को प्रभावित कर सकते हैं।
वैश्वीकरण व्यापार, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, पूँजी प्रवाह, प्रवास और प्रौद्योगिकी के प्रसार के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण होता है।
भारत में आर्थिक सुधारों का मुख्य उद्देश्य विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को जोड़ना है।
उदारीकरण व्यापार और वाणिज्य पर सरकार के नियंत्रण को कम करने को संदर्भित करता है।
राजनीतिक वातावरण के प्रमुख तत्वों में से एक प्रचलित राजनीतिक प्रणाली है।
नई सरकार की नीति में विदेशी कंपनियों को आसानी से भारत में व्यापार करने के लिए अनुमति दी गई है जिसने विशेष रूप से दूरसंचार, एयरलाइंस, बीमा आदि जैसे सेवा उद्योगों में भारतीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया है।
व्यावसायिक वातावरण ऐसे बाह्य कारकों का कुल योग है जो एक व्यावसायिक उद्यम को प्रभावित करते हैं।
सामान्य बल वे बल होते हैं जो परोक्ष रूप से सभी व्यावसायिक उद्यमों को प्रभावित करते हैं तथा जिसमें सामाजिक, राजनीतिक, कानूनी, तकनीकी स्थितियाँ आदि का समावेश होता है।
विशिष्ट बल वे बल होते हैं जो केवल एक व्यक्ति के व्यापार उद्यम को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं तथा जिसमें निवेशकों, ग्राहकों, प्रतियोगियों और आपूर्तिकर्ताओं आदि का समावेश होता है।
व्यावसायिक वातावरण बहुत अनिश्चित होता है क्योंकि भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी करना मुश्किल होता है जो एक उद्यम के संचालन को प्रभावित कर सकता है।
व्यावसायिक वातावरण को ‘सापेक्ष’ माना जाता है क्योंकि यह एक देश से दूसरे देश में तथा एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में अलग होता है।
राजनीतिक वातावरण क्योंकि कर व्यवस्था में परिवर्तन राज्य की राजनीतिक संरचना में परिवर्तन के कारण होता है।
व्यावसायिक वातावरण को ‘जटिल’ माना जाता है क्योंकि इसमें कई ऐसे अंतः संबंधित तथा गतिशील बलों को शामिल किया जाता है जो वातावरण को समझने में मुश्किल बनाता है।
वैश्वीकरण में सम्पूर्ण विश्व को एक बाजार का रूप प्रदान किया जाता है। वैश्वीकरण से आशय विश्व अर्थव्यवस्था में आये खुलेपन, बढ़ती हुई अन्तनिर्भरता तथा आर्थिक एकीकरण के फैलाव से होता है।
सामाजिक पर्यावरण की दो शक्तियाँ:-
1. प्रतिस्पर्धा
2. सरकारी नीतियाँ
(i) यहां व्यावसायिक वातवारण की निजीकरण अवधारणा का वर्णन किया गया है।
निजीकरणः संक्षिप्त रूप में, निजीकरण का अभिप्राय ऐसी आर्थिक प्रक्रिया से है जिसके द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के किसी उपक्रम को पूर्णतया या अंशतः निजी स्वामित्व में लाया जाता है।
(ii) समन्वय
यहां उदारीकरण का वर्णन किया गया है।
इसका अभिप्राय अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतियोगी बनाने के लिए नौकरशाही शिकंजे से मुक्ति दिलाना है।
अवसरों का अभिप्राय व्यावसायिक वातावरण में होने वाले सकारात्मक परिवर्तनों से है जो संगठन के विकास में सहायक होते हैं।
इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा पारित सभी अधिनियमों न्यायालयों के फैसले तथा देश में नियुक्त विभिन्न आयोगों व एजेंसियों के निर्णयों को सम्मिलित किया जाता है।
विकेंद्रीकरण का महत्व -
1. अधीनस्थों में पहल भावना का विकास - विकेंद्रीकरण, अधीनस्थों में आत्मविश्वास तथा भरोसे की भावना को जगृत करता है। यह इसलिए कि जब निम्नस्तरीय प्रबंधकों को स्वयं के निर्णयों से कार्य करने की स्वतंत्रता दी जाती है तो वे अपने निर्णयों के अनुसार कार्य करते हैं।
2. शीघ्र निर्णय - प्रबंध सोपानकी को संप्रेषण श्रृंखला के रूप में देखा जा सकता है। प्रबंधक अपने को कार्यों को अंतरण कर भार मुक्त रहते हैं जिससे वे शीघ्र एवं सही निर्णय लेते हैं।
3. शीर्ष प्रबंध को राहत - अंतरण की सहायता से शीष स्तर प्रबंधन केवल बडे़ मामलों को देखता है। बहुत से छोटे-छोटे मामलों को निम्नस्तरीय या मध्यस्तरीय प्रबंधन देखता है जिससे शीर्षस्तर प्रबंधन पर भार में कतीं होती है।
अंतरण का अर्थ दुसरों को कार्य देना तथा उसे करने के लिए अधिकार प्रदान करना होता है। एक प्रबंधक अपने कार्यों को विभाजित करता है तथा अपने अधिनस्थों को कार्य देता है। इस प्रकार वह अपना विकास करता है।
अंतरण में तीन तत्वों को शामिल किया जाता है।
1. उत्तरदायित्व - यह अधिनस्थों को दिये गये कार्य को उचित रूप से करने के लिए उनका एक दायित्व होता है।
2. अधिकार - यह निर्णय लेने के लिए शक्ति होती है।
3. जवाबदेही - अर्थात अपने कार्य को करने के लिए अपने उच्चाधिकारी के लिए अधिनस्थों की उत्तरदेयता होती है।

उत्तरदायित्व दिये गये कार्य को करने के लिए अधिनस्थों का दायित्व होता है। यह उच्च अधिकारी तथा अधिनस्थों के मध्य के सम्बंधों से पैदा होता है जिसमें अधिनस्थ उसको दिये गये कार्य को करने पर सहमत होता है।
यह नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित होता है।
अधिनस्थ उनको दिये गये कार्य के लिए दायी होते हैं।
कमल को दिये गये कार्य को पूरा करने के लिए कमल स्वयं दायी है।
उत्तरदायित्व उच्चअधिकारी के निर्देशानुसार अपनी पूरी योग्यता से एक कार्य को करने के लिए दायित्व होता है। उत्तरदायित्व अधिकारी को प्रभाव प्रदान करती है।
इसी समय, उत्तरदायित्व को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।
अधिकार के अंतरण में अधिकार, उत्तरदायित्व तथा जवाबदेही को इसके तत्वों के रूप में शामिल किया जाता है।
अधिकार - अधिकार से तात्पर्य एक व्यक्ति के उस अधिकार से है जिसके आधार पर वह अपने अधीनस्थों को नियंत्रित करता है। तथा अपने पद के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत कार्यवाही करता है। यह हमेशा उपर से नीचे की ओर प्रवाहित होता है।
उत्तरदायित्व - एक अधीनस्थ कर्मचारी के लिए दिए गए कार्य का भली-भांति उत्तरदायित्व है। इसका अभ्युदय उच्चाधिकारी तथा अधीनस्थ अपने अधिकारी द्वारा बतलाये गए कार्यों को पूरा करने के लिए बाध्य होता है।
जवाबदेही - इससे तात्पर्य अंतिम परिणाम का उत्तर देने योग्य होने से है। यदि एक बार अधिकार अंतरित हो जाता है तथा उत्तरदायित्व स्वीकार कर लिया जाता है तो भी कोई जवाबदेही से इंकार नहीं कर सकता। इसका न तो भारार्पण ही संभव है और नहीं इसका प्रवाह उपर की ओर होता है।
कार्यात्मक संगठनात्मक संरचना की हानियाँ हैं:
1. संगठनात्मक उद्देश्यों की अनदेखी:
विभाग अपने तरीके में विशेषज्ञ बनते हैं। वे पूरे संगठन की संभावनाओं को देखने में असफल होते हैं।
2. अंतः विभागीय समन्वय में कठिनाई:
सभी विभागीय प्रमुखों अपने पसंद के अनुसार काम करते हैं और केवल अपने विभाग पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो अंतर्विभागीय समन्वय को कठिन बना देता है।
3. हित का संघर्ष:
हर विभागीय प्रमुख एक कार्यात्मक सम्राट बनना चाहते हैं। उनमें से प्रत्येक अपने विभाग के लिए अधिकतम संसाधनों की मांग करते हैं जो आपसी हितों में संघर्ष को उत्पन्न करता है।
4. विकास में बाधा:
कर्मचारी पूरे काम के केवल एक हिस्से का विशेषज्ञ बनता है इसलिए यह पूर्ण विकास में एक बाधा होती है।
क्रियात्मक फोरमैनशिप:-

संगठन भौतिक,
वित्तीय और मानव संसाधन को एक साथ लाने और विशिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उनके बीच उत्पादक संबंधों को स्थापित करने की एक प्रक्रिया होती है। संगठन एक उद्यम के विभिन्न अंतः संबंधित भागों में एक स्थिर ढांचे या संरचना के निर्माण से संबंधित है और इसमें प्रत्येक भाग का अपना स्वयं का कार्य होता है तथा ये केन्द्रीय विनियमित होते हैं।
संगठन की प्रक्रिया
- संगठन में निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
1. कार्य का विभाजन
- संगठन में पहला कदम विशिष्ट नौकरियों में किये जाने वाले कुल कार्य को विभाजित करना है। प्रत्येक नौकरी में निश्चित संबंधित कार्य होते हैं जिन्हें एक व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है।
2. नौकरियों का समूहिकरण और विभागीकरण
- संगठन के दूसरे चरण में समान तथा संबंधित नौकरियों को विभाग,
विभाजन या वर्ग कहे जाने वाले बड़े समूहों में संयोजित किया जाता है। इस समूह प्रक्रिया को विभागीकरण कहा जाता है।
3. अधिकार संबंधों की स्थापना
- संगठन की प्रक्रिया में तीसरा चरण नौकरी धारकों या नौकरी पदों के बीच अधिकार संबंधों की रचना होती है। संगठन के ऐसे विभिन्न सदस्य,
जो संगठन की प्रक्रिया के माध्यम से अधिकार जिम्मेदारी संबंधों से जुड़े हुए कार्य करते हैं।
नहीं,
बिक्री प्रबंधक लक्ष्य को प्राप्त नहीं करने के लिए जिम्मेदार नहीं है। इस स्थिति में,
अधिकार और जिम्मेदारी की समता का सिद्धांत लागू होता है।
इस सिद्धांत के अनुसार,
अधिकार और जिम्मेदारी हाथ जानी चाहिए। एक विशेष कार्य के लिए एक अधीनस्थ को जिम्मेदार बनाने के लिए,
उसे कार्य करने के लिए पर्याप्त अधिकार दिया जाना आवश्यक होता है। उपरोक्त स्थिति में,
कमला लिमिटेड के निदेशक ने बिक्री प्रबंधक को या तो बिक्री के खर्च को बढ़ाने के लिए या एक उचित तरीके से कार्य करने के लिए नए सेल्समैन नियुक्त करने के लिए पर्याप्त अधिकार नहीं दिये हैं। इसलिए,
बिक्री प्रबंधक को लक्ष्य प्राप्त नहीं करने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
हाँ,
औपचारिक संगठन निम्न कारणों से अनौपचारिक संगठन की तुलना में बेहतर होते हैं:
1. औपचारिक संगठन स्पष्ट रूप से संबंधों को परिभाषित करता है इसलिए यह जिम्मेदारी तय करने में आसान होता है।
2. स्थापित आदेश की श्रंखला के माध्यम से आदेश की एकता को बनाए रखा जाता है।
3. यह आपरेशन के लिए एक रूपरेखा प्रदान करके लक्ष्यों को प्रभावी उपलब्धि की ओर ले जाता है।
4. प्रत्येक सदस्य द्वारा किये गये अपने कार्य में कोई अस्पष्टता नहीं होती है।
अनौपचारिक संगठन की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं जो इसकी प्रकृति को इंगित करती है:
1. सामाजिक सहभागिता
- एक अनौपचारिक संगठन इसके सदस्यों के बीच सामाजिक संपर्क का नतीजा होता है और इसके गठन के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किये जाते हैं।
2. आम हित
- एक अनौपचारिक संगठन का उद्देश्य इसके सदस्यों की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को पूरा करना होती है। सदस्यों सामान्य हित के आधार पर अनौपचारिक संगठन में शामिल होते हैं।
3. अनौपचारिक संचार
- अनौपचारिक संगठन में चर्चा के रूप में जाना जाने वाला अनौपचारिक संचार किया जाता है। अनौपचारिक संगठन में सूचना तेजी से फैलती है।
4. कोई स्पष्ट संरचना नहीं
- अनौपचारिक संगठन की एक स्पष्ट संरचना नहीं होती है। यह अनौपचारिक अधिकार पर आधारित होती है। समूह के किसी भी व्यक्ति को इसके नेता के रूप में नामित किया जा सकता है।
संगठन निम्न के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता लाने में मदद करता है:
1. विशेषज्ञता:
सभी गतिविधियाँ संगठन के तहत विभिन्न भागों में उप विभाजित होती है। प्रत्येक व्यक्ति को एक विशेष कार्य सौंपा जाता है। वह निरंतर उसी कार्य को समय पर तथा पुनः करता है इसलिए एक विशेष कार्य में विशेषज्ञता का लाभ मिलता है।
2. कार्य संबंध की स्पष्टता:
संगठन काम की रेखा को परिभाषित करता है और यह विर्निष्ट करने में मदद करता है कि कौन किसे रिपोर्ट करेगा जिसके परिणामस्वरूप संचार प्रभावी होता है तथा जवाबदेही तय करने में मदद मिलती है।
3. संसाधनों की इष्टतम उपयोग:
कार्य का उचित आवंटन किसी भी अतिव्यापी से बचाता है जिसके परिणामस्वरूप मानव,
सामग्री और वित्तीय संसाधनों जैसे सभी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाता है।
4. परिवर्तन के लिए अनुकूलन:
प्रबंधन का संगठन कार्य संगठन की अनुकूलन में मदद करता है क्योंकि इसमें अधिकार और जिम्मेदारी की एक उचित लाइन होती है।
अधिकारों का अंतरण के तीन अंतःसंबंधित तत्व होते हैं। ये कार्य तथा दायित्व सौंपना, अधिकार प्रदान करना तथा उत्तरदायित्वों एवं जवाबदेही का निर्माण करना होते हैं।
कार्य तथा दायित्व सौंपना: अंतरण की प्रक्रिया में, प्रत्येक उच्चअधिकारी अपने अधिनस्थों के द्वारा किये जाने वाले कार्य का निर्धारण करता है। उसे वांछित परिणामों का भी निर्धारण किया जाना चाहिए। उसे अधिनस्थों के लिए कार्य स्थल का निर्धारण भी करना चाहिए।
अधिकार प्रदान करना - एक अधिकारी को अपने अधिनस्थों को कार्य के निष्पादन के लिए उचित निर्णय लेने के लिए पर्याप्त अधिकार देने होते हैं। प्रत्येक अधिनस्थ को दिये गये कार्य को करने के लिए अधिकारों की आवश्यकता होती है। सभी स्तरों के प्रबंधकों को अपने उच्चअधिकारियों द्वारा कार्य करने के लिए उचित अधिकार दिये जाते हैं। इसी प्रकार, प्रत्येक प्रबंधक भी अपने अधिकारों का एक हिस्सा अपने अधिनस्थों में वितरित करता है।
उत्तरदेयता तथा जवाबदेही का निर्माण: किये जाने वाले कार्य तथा अधिकार प्रदान करने के साथ अधिनस्थों को उनके द्वारा किये जाने वाले कार्य के लिए भी बाध्य कर एक दायित्व का निर्माण किया जाता है। उन्हें दिये गये मानक परिणाम के अनुसार कार्य का निष्पादन करना होता है। अधिनस्थों के दायित्व निश्चित होते हैं। इसका अंतरण या हस्तांतरण नहीं किया जा सकता है। उत्तरदेयता के निर्माण पर अधिनस्थ अपने द्वारा किये जाने वाले कार्य के लिए उत्तरदायी होते हैं।
रेखा संगठन संरचना के लाभ निम्नलिखित हैं:
1. सादगी
- रेखा संगठन की स्थापना और संचालन सरल और स्पष्ट होता है।
2. अधिकार और उत्तरदायित्व
- रेखा संगठन,
संगठन के प्रत्येक व्यक्तियों के अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों को तय करने में मदद करता है।
3. समन्वय
- महाप्रबंधक सभी विभागों को संभालता है और वह आसानी से विभिन्न विभागों के कार्यों का समन्वय कर सकता है।
4. प्रभावी संचार
- वरिष्ठों और अधीनस्थों के बीच सीधा संबंध उचित और प्रभावी संचार में मदद करता है।
5. आर्थिक
- रेखा संगठन कम खर्चीला होता है क्योंकि इसमें रेखा अधिकारियों को सलाह देने के लिए विशेष कर्मियों की भर्ती को शामिल नहीं किया जाता है।
6. जल्द निर्णय
- इसमें एक विभाग या विभाजन के लिए केवल एक व्यक्ति सभी निर्णय लेता है जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाती है।
7. आदेश की एकता
- प्रत्येक व्यक्ति केवल एक स्वामी के आदेश के अधीन होता है जिससे काम के दोहराव से बचा जाता है।
रेखा और कर्मचारी संगठन के दोष हैं:
1. संघर्ष:
रेखा अधिकारियों और कर्मचारियों के विशेषज्ञों के बीच आम तौर पर एक संघर्ष होता है। रेखा प्रबंधक व्यावहारिक होतेे हैं जबकि स्टाफ पुरुष अधिक सैद्धांतिक होते हैं।
2. समन्वय की कमी:
भ्रम की स्थिति में अच्छी तरह से परिभाषित अधिकारों के परिणामों की कमी और समन्वय की कमी होती है।
3. अप्रभावी कर्मचारी:
स्टाफ अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं क्योंकि वे परिणामों के लिए जवाबदेह नहीं होते हैं। स्टाफ अप्रभावी भी हो सकता है क्योंकि इसमें सलाह कार्यान्वित करने के लिए अधिकारों का अभाव होता है।
4. महंगा:
रेखा और कर्मचारी संरचना रेखा संगठन से ज्यादा महंगा होता है क्योंकि इसमें कर्मियों के दो अलग-अलग समुह आवश्यक होते हैं।
5. रचनात्मकता का अभाव:
रेखा प्रबंधक सलाह और मार्गदर्शन के लिए कर्मचारियों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। यह रेखा के अधिकारियों की ओर से निर्णय और पहल को निरूत्साह कर सकता है।
इन कर्मचारियों ने एक अनौपचारिक संगठन का गठन किया है।
अनौपचारिक संगठन की विशेषताएँ:
1. औपचारिक संगठन पर आधारित:
एक अनौपचारिक संगठन एक औपचारिक संगठन से निकलता है। लोग एक औपचारिक संगठन की स्थापना करते हैं और उसके बाद इसमें से अनौपचारिक संगठन निकाला जाता है।
2. कोई लिखित नियम और प्रक्रियाएँ नहीं:
संगठन के इस प्रकार में,
अंतर संबंधों को नियंत्रित करने के लिए कोई लिखित नियम और प्रक्रियाएँ नहीं होती है। लेकिन अपने काम से संबंधित एक समस्या का समाधान खोजने के लिए समूह के सदस्य की मदद करने जैसे कुछ सामान्य मानदंडों का पालन किया जाता है।
3. संचार की स्वतंत्र श्रंखला:
संचार के इस प्रकार के तहत,
संचार के किसी भी प्रवाह को परिभाषित नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसमें निम्न स्तर पर कार्यरत कोई भी व्यक्ति उच्चर स्तर पर कार्यरत व्यक्ति से सीधे सम्पर्क कर सकता है।
4. इसे जानबूझ निर्मित नहीं किया जाता है:
अनौपचारिक संगठन को लोगों के बीच आपसी संबंध से स्थापित किया जाता है। इसे जानबूझ निर्मित नहीं किया जाता है क्योंकि इसे संगठन में कार्यरत व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया जाता है।
संगठन का महत्व:
1. विशेषज्ञता:
सभी गतिविधियाँ संगठन के तहत विभिन्न भागों में उप विभाजित होती है। प्रत्येक व्यक्ति को एक विशेष कार्य सौंपा जाता है। वह निरंतर उसी कार्य को समय पर तथा पुनः करता है इसलिए एक विशेष कार्य में विशेषज्ञता का लाभ मिलता है।
2. कार्य संबंध की स्पष्टता:
संगठन काम की रेखा को परिभाषित करता है और यह विर्निष्ट करने में मदद करता है कि कौन किसे रिपोर्ट करेगा जिसके परिणामस्वरूप संचार प्रभावी होता है तथा जवाबदेही तय करने में मदद मिलती है।
3. संसाधनों की इष्टतम उपयोग:
कार्य का उचित आवंटन किसी भी अतिव्यापी से बचाता है जिसके परिणामस्वरूप मानव,
सामग्री और वित्तीय संसाधनों जैसे सभी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाता है।
4. परिवर्तन के लिए अनुकूलन:
प्रबंधन का संगठन कार्य संगठन की अनुकूलन में मदद करता है क्योंकि इसमें अधिकार और जिम्मेदारी की एक उचित लाइन होती है।
5. कर्मियों का विकास:
एक प्रबंधक के रूप में वह अपने कार्य को अपने अधिनस्थों को सौपता है,
वह कुछ अन्य परियोजना पर काम करने के लिए और नए तरीके और कार्य प्रदर्शन के तरीके को विकसित करने में अपनी रचनात्मकता और ज्ञान लागू करने के लिए पर्याप्त समय लगाता है। यह उसे विकास के क्षेत्रों का पता लगाने के लिए समय देता है। दूसरी ओर,
अधिनस्थ उन्हें आवंटित कार्य को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से करते हैं जो उनके निजी और पेशेवर विकास में मदद करता है।



A.
अप्रैल 1992
B.
31 जनवरी 1992
C.
अप्रैल 1990
D.
सेबी की स्थापना तो 1988 मे की गई थी परन्तु इसे वैधानिक दर्ज़ा 1992 में प्रदान किया गया,अतः इसकी स्थापना1992 में ही मानी जाती है।
A.
जहाँ दो व्यक्ति हों।
B.
जहाँ कोई वस्तु हो।
C.
जहाँ वस्तुओं का मूल्य निर्धारण करने वाली शक्तियां क्रियाशील रहती हों
D.
जहाँ प्रतिस्पर्धान हो।
बाज़ार वह स्थान होता है जहाँ वस्तुओं का मूल्य निर्धारण करने वाली शक्तियां क्रियाशील रहती हों।
A.
कॉल मनी पर ब्याज
B.
कॉल दर
C.
कॉल ब्याज
D.
एक दिन का ब्याज
कॉल मनी पर एक बैंक द्वारा दूसरे बैंक के लिए भुगतान किए जाने वाले ब्याज को कॉल दर कहते हैं। यह समय अनुसार बदलता रहता है।
A.
शेयर बाज़ार
B.
मुद्रा बाज़ार
C.
धन बाज़ार
D.
पूंजी बाज़ार
धन बाज़ार को एक वर्ष तक की छोटी अवधि के लिए लघु अवधि निधियों को उधार लेने के लिए प्रयोग किया जाता है।
A.
प्रतिभूतियों के लिए निरंतर बाज़ार प्रदान करना
B.
निवेशों के मूल्यांकन के लिए कुटेशन प्रदान करना
C.
परिवारों के द्वारा बचत को प्रोत्साहित करना
D.
खरीद और बिक्री के लिए प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करना
परिवारों के बीच बचत को प्रोत्साहित करना शेयर बाज़ार का कार्य है। साथ ही वे घरों से बचत को गतिशील करते हैं।
A.
मुद्रा बाज़ार
B.
खुदरा बाज़ार
C.
पूंजी बाज़ार
D.
थोक बाज़ार
पूंजी बाज़ार को प्राथमिक या द्वितीयक बाज़ार के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।प्राथमिक बाज़ार को नया इश्यु बाज़ार भी कहा जाता है और द्वितीयक बाज़ार को शेयर बाज़ार कहा जाता है।
A.
पूंजी बाज़ार
B.
मुद्रा बाज़ार
C.
प्राथमिक बाज़ार
D.
द्वितीयक बाज़ार