A.
OTCEI
B.
BSEI
C.
SEBI
D.
NSEI
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) प्रतिभूति बाज़ार में व्यापार पर नियंत्रण रखता है। यह सुनिश्चित करता है कि कम्पनियों और निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए स्थापितनिगमनों का पालन कड़ाई से हो।
A.
मूल्य में वृद्धि
B.
मूल्य में गिरावट
C.
बाज़ार योग्य
D.
मोलभाव योग्य नहीं
द्वितीयक बाज़ार में, जो वर्तमान शेयरधारकों को अपनी प्रतिभूतियां बेचने के लिए एक मंच देता है वह वर्तमान प्रतिभूतियों के विक्रेताओं और खरीदारों के बीच एक मध्यस्थ का कार्य करता है।
A.
भारत सरकार
B.
भारतीय रिज़र्व बैंक
C.
सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया
D.
प्रतिभूति विनिमय और नियामक बोर्ड
भारतीय रिज़र्व बैंक कोष बिल जारी करता है। ये बिल सरकार को लघु अवधि के लिए ऋण लेना सक्षम करते हैं क्योंकि इन बिलों को बैंक और सामान्य लोगों को बेचा जाता है।
A.
संस्थान के कर्मी
B.
संस्थान
C.
निवेशक
D.
सरकार के द्वारा
द्वितीयक बाज़ार में दुबारा बेचना सम्मिलित होता है। प्रतिभूतियों को पहले प्राथमिक बाज़ार में बेचा जाता है। उसके बाद ये निवेशक इन प्रतिभूतियों को या तो वित्त बाज़ार में मुनाफा कमाने के लिएदोबारा से बेच देते हैं या फिर वित्तीय आवश्यकताओं के मामले में उन्हें भुना लेते हैं।
A.
भुगतान का निपटान करना
B.
ब्रोकर खोजना
C.
शेयरधारकों से आदेश प्राप्त करना
D.
कम्पनीका सूचीकरण करना
केवल सूचीबद्ध कम्पनियों के शेयर का ही व्यापार एक शेयर बाज़ार में किया जा सकता है। प्रतिभूतियों में व्यापार करने के लिए, कम्पनी को पहले शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होना होता है।
A.
1995 में
B.
1990 में
C.
1980 में
D.
1987 में
सेबी की स्थापना 1990 में हुई।
A.
अंश
B. ऋण-पत्र
C. बॉन्ड्स
D. प्रतिज्ञा-पत्र।
प्रतिज्ञा-पत्र का उपयोग निजी लेनदेनों मे किया जाता है।
A.
12%
B. 52%
C. 10%
D. 14%
सेबी द्वारा तय बदला सौदों पर मार्जिन 10% है
A.
दो
B. पाँच
C. तीन
D. चार
पूंजी बाज़ार के दो अंग है -संगठित पूंजी बाज़ार, असंगठित पूंजी बाज़ार ।
A.
माल का क्रय विक्रय करना
।
B. माल का उत्पादन करना ।
C. वस्तुओं का क्रय विक्रय करना ।
D. प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय करना ।
पूंजी बाज़ार का कार्य दीर्घकालीन प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय करना होता है |
A.
अल्पकालीन
पूंजी बाज़ार
।
B. मध्यकालीन पूंजी बाज़ार ।
C. दीर्घकालीन पूंजी बाज़ार ।
D. अंशकालिक पूंजी बाज़ार।
स्कंध बाज़ार दीर्घकालीन पूंजी बाज़ार होता है।
A.
अप्रैल
1992
B. 31 जनवरी 1992
C. अप्रैल 1990
D. 31जनवरी1996
सेबी की स्थापना तो 1988 में की गई थी परन्तु इसे वैधानिक दर्ज़ा 1992 में प्रदान किया गया, अतः इसकी स्थापना 1992 में ही मानी जाती है ।
A.
जहाँ
दो व्यक्ति हों
।
B. जहाँ कोई वस्तु हो ।
C. जहाँ वस्तुओं का मूल्य निर्धारण करने वाली शक्तियां क्रियाशील रहती हों।
D. जहाँ प्रतिस्पर्धा न हो ।
बाज़ार वह स्थान होता है जहाँ वस्तुओं का मूल्य निर्धारण करने वाली शक्तियां क्रियाशील रहती हों ।
A.
कीमत विचलन में।
B.
लेबलिंग में।
C.
पैकेजिंग में।
D.
कीमत स्थिरता में।
भण्डारण हर समय उत्पाद की पर्याप्त पूर्ति को बनाये रखने में सहायता करता है। यह संग्रहण स्थित को अनदेखा करने में सहायता करता है जो कि उद्यम तथा उसके उत्पादों की गुणवत्ता को सुधारता है।
A.
उत्पाद मिश्रण का।
B.
संवर्धन मिश्रण का।
C.
स्थान या भौतिक वितरण मिश्रण का।
D.
कीमत मिश्रण का।
पैकेजिंग का अर्थ न सिर्फ उत्पादों की पैकिंग करना है बल्कि इसका अर्थ उत्तम रेपर या डिब्बों का चुनाव करना भी है, ताकि उत्पाद को उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक व सुविधाजनक बनाया जा सके।
A.
उत्पादन समूह।
B.
संग्रहण रेखा।
C.
उत्पाद पूरकीकरण।
D.
उत्पाद रेखा।
उत्पाद रेखा समान उत्पादों के लिए प्रयोग में लिया जाने वाला वह शब्द है जो समान उद्देश्य हेतु सेवा प्रदान करता है। उत्पाद रेखा के मुख्य उदाहरण हैं, कार, सौन्दर्य प्रसाधन तथा बिजली के यंत्र। हम कह सकते हैं कि मारूती सुजूकी की उत्पाद रेखा कार है क्योंकि यह विक्रेताओं की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार की कारों का उत्पादन करती है।
A.
पैसा खर्च करना।
B.
आर्थिक खर्चे ना करना।
C.
उपभोक्ताओं के साथ आमने-सामने अंतर्सम्बंध बनाना।
D.
छुट व कुपन देना।
प्रचार-प्रसार संवर्धन का एक गैर-आर्थिक रूप है। इसमें संगठन को लिखित रूप में दर्शाया जाता है। सामान्यतया कम्पनियाँ प्रचार-प्रसार करने हेतु कार्यक्रम आयोजित करती है। जैसे, कुछ कम्पनियाँ बड़े शहरों में मेराथन आयोजित करती है, जिसे मीडिया बिना पैसों के प्रसारित करती है।
A.
उपभोक्ताओं को सुचित करता है।
B.
मांग बढ़ाता है।
C.
उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है।
D.
बेरोजगारी उत्पन्न करता है।
एक कम्पनी समान वर्गों की विभिन्न चीजों का उत्पादन करती है। प्रत्येक कम्पनी ये दावा करती है कि उसका उत्पाद अन्य उत्पादों से बेहतर होगा। ऐसी परिस्थिति में उपभोक्ताओं को उस उत्पाद को ढुंढना मुश्किल हो जाता है जिसे उसे वास्तव में अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए खरीदना चाहिए।
A.
एकतरफा वार्तालाप।
B.
दोतरफा वार्तालाप।
C.
कोई वार्तालाप नहीं।
D.
बिक्री के बाद वार्तालाप।
व्यक्तिगत बिक्री का मुख्य लाभ है कि इसमें उपभोक्ता के साथ आमने सामने वार्तालाप करने की सुविधा होती है। यह इसी जगह उपभोक्ता की शंकाओं व विराधों का समाधान करने में सहायक होता है।
A.
संवर्धन।
B.
पैकिंग।
C.
ग्रेडिंग।
D.
ब्रांडिंग।
वह प्रक्रिया जो उत्पादों का वर्गीकरण, उनसे सम्बंधित गुणवत्ता व कीमत से करती है वही ग्रेडिंग कहलाती है। जब कम्पनी उच्च स्तर की तकनीकी को नहीं अपनाती है तो ग्रेडिंग आवश्यक होती है।
A.
क्रेता व विक्रेता लेन-देन में प्रवेश करने हेतु इकठ्ठा होते हैं।
B.
सिर्फ खुदरा विक्रेता, थोक विक्रेता से वस्तुएँ खरीदते हैं।
C.
थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता को वस्तुएँ बेचते हैं।
D.
सिर्फ थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता को वस्तुएँ बेचते हैं।
बाज़ार एक ऐसा स्थान होता है जहाँ वे वस्तुओं व सेवाओं का लेन-देन करने हेतु प्रवेश करते हैं। यह ऐसा स्थान है जहाँ वस्तुएँ बेची व खरीदी जाती हैं।
A.
ऐसी वस्तुओं का वितरण करना जिनकी बाज़ार में कोई मांग न हो।
B.
सिर्फ प्रचार करना।
C.
व्यक्तिगत तथा संगठनों की आवश्यकताओं व इच्छाओं को संतुष्ट करना।
D.
बिक्री बढ़ाना।
विपणन व्यक्ति को तथा संगठनों को वो प्राप्त करवाने मे सहायता करता है जिनकी उन्हें आवश्यकता व ईच्छा होती है। यह जनता व संगठनों की आवश्यकताओं को संतुष्ट करता है।
A.
केंद्रीत बाज़ार के साथ वांछित परिणाम प्राप्त करना।
B.
केवल वस्तुओं व सेवाओं का संवर्धन।
C.
केवल विज्ञापन।
D.
बिक्री बढाना।
विपणन प्रबंधन से आशय है कि ऐसी योजना, संगठन, दिशा-निर्देशन तथा गतिविधियों पर नियंत्रण करना जो उत्पादनकर्ता तथा उपभोक्ता के बीच वस्तुओं व सेवाओं के विनिमय की सुविधा प्रदान करे।
प्रचार
बिक्री संवर्धन उत्पादों के लिए मांग उत्तेजक करने के उद्देश्य से विज्ञापन और निजी विक्रय के अलावा अन्य लघु अवधि के प्रोत्साहनों को दर्शाता है।
बिक्री संवर्धन तकनीक को वहाँ कंपनी के द्वारा नियंत्रित किया जाता है जहाँ विज्ञापन को मीडिया द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
मूल्य
छूट
प्रीमियम: एक
ही कीमत पर 10% अतिरिक्त
प्राप्त
कीजिए।
अतिरिक्त
मात्रा
प्रीमियम: टूथ
पेस्ट के साथ
टूथब्रश
मुक्त।
ये तकनीक मुक्त प्रस्तुति, प्रदर्शन, व्यापार छूट और पुरस्कार होती हैं।
यहाँ बिक्री संवर्धन की कूपन तकनीक को संदर्भित किया गया है।
मुफ्त प्रस्ताव उत्पाद की खरीद पर मुफ्त उपहार देता है। एक मुफ्त उपहार एक महंगे उत्पाद की खरीद के साथ पेश किया जाता है।
विज्ञापन में तत्काल प्रतिक्रिया संभव नहीं होती है, लेकिन विक्रयकार्य में प्रतिक्रिया तुरंत उपलब्ध हो जाती है।
आमने-सामने बातचीत से मांग पैदा करने की प्रक्रिया का नाम विक्रयकार्य है।
विपणन के क्षेत्र में निष्पादन माप के कोई दो मानक हैं :-
1. उपभोक्ता संतुष्टि
2. लाभ स्तर
वित्तीय बाजार के कोई चार कार्य निम्नलिखित हैं:
1. व्यवहारीय प्रक्रिया द्वारा कोषों/बचतों को निवेशको से उद्यमी (ऋणी) तक पहुँचाने में सहायता करना।
2. पूँजी निर्माण के प्रवाह को विभिन्न स्त्रोतों के माध्यम से बनाये रखना।
3. उद्यमों को आवश्यक कोषों को उपलब्धि कराना।
4. सलाहकारी सेवाएँ प्रदान करना।
सेबी के विनियामक कार्य हैं:
1. सेबी ने दलालों, बैंकरों, अभिगोपकों आदि के रूप में बिचैलियों को विनियमित करने के नियमों एवं विनियमों और आचार संहिता बनाई है
2. इनसाइडर ट्रेडिंग और अधिग्रहण बोलियों को नियंत्रित करना और इस
तरह के व्यवहार के लिए दंड अधिरोपित करना।
3. धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार को रोकना।
4. यह म्युचुअल फंडों की कार्यप्रणाली पंजीकृत करता है।
5. यह शेयर बाजार की जांच और
अंकेक्षण करता है।

सेबी की सुरक्षात्मक कार्य इस प्रकार हैं -
(i) भ्रामक बयान, जोड़तोड़, कीमत हेराफेरी आदि जैसे धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार की रोक।
(ii) ऐसे कार्यों के लिए दंड का अधिरोपण करने के लिए आंतरिक व्यापार पर नियंत्रण।
(iii) उपक्रम में विनियोक्तओं सुरक्षा के लिए कदम उठाना।
(iv) निष्पक्ष प्रथाओं और प्रतिभूति बाजार में आचार संहिता का संवर्धन।
एक शेयर बाजार द्वारा निवेशकों को दी जाने वाली सेवाएँ निम्नलिखित हैं:
1. निवेश की तरलता
- यह एक ऐसा सम्पूर्ण बाजार प्रदान करता है जहाँ प्रतिभूतियों को आसानी से नकदी में परिवर्तित किया जा सकता है। आसान विपणन के कारण प्रतिभूतियों में निवेश तरल में परिवर्तित हो जाता है।
2. सुरक्षा
- डीलरों की गतिविधियों पर पर्यवेक्षण और नियंत्रण शेयर बाजार के प्रबंधन के द्वारा किया जाता है। लेन-देन में निर्धारित नियमों और विनियमों के अनुसार किये जाते हैं। यह प्रतिभूतियों में सुरक्षित और निष्पक्ष व्यवहार को सुनिश्चित करता है।
3. ऋण सुविधा
- व्यापार की जाने वाली प्रतिभूतियाँ लचीली होती है तथा इसे ऋण जुटाने के लिए जमानत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
4. प्रचार
- प्रतिभूतियों के बाजार मूल्य का आसानी से निवेशकों द्वारा पता लगाया जा सकता है क्योंकि इनकी रिपोर्ट समाचार पत्रों में आती है। यह प्रतिभूतियों के बीच एक तर्कसंगत विकल्प बनाने में निवेशक की मदद करता है।
5. कम जोखिम
- केवल शेयर बाजार द्वारा प्रतिभूति की कीमत के संतुष्ट होने पर ही इसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाता है। यह निवेशकों के बीच एक विश्वास पैदा करता है और प्रतिभूतियों में व्यापार करते समय जोखिम के डर को कम करता है।
शेयर बाजारों के कार्य हैं:
1. तैयार बाजार
- वे निवेशकों को प्रतिभूतियों का क्रय तथा विक्रय करने के लिए तैयार तथा नियमित बाजार देते हैं
तथा उन्हें अपनी इच्छानुसार धन को प्रतिभूति में और प्रतिभूतियों को धन में परिवर्तित करने के लिए समान जगह उपलब्ध कराता है।
2. मूल्य निर्धारण
- वे विभिन्न प्रतिभूतियों की कीमतों के निर्धारण में सहायता करते हैं जिसे कोटेशन कहा जाता है। मूल्यांकन करने के लिए प्रतिभूतियों का सतत क्रय और बिक्री मूल्य में व्यापक उतार-चढ़ाव को कम कर देता है। ये कोटेशन अखबारों में प्रकाशित होते हैं जो निवेशकों को अपनी प्रतिभूतियों के बाजार मूल्य का पता करने में मदद करते हैं।
3. निवेशकों की सुरक्षा
- वे निवेशक के धन के कार्यवाहक के रूप में काम करते हैं। वे स्थापित नियमों और विनियमों के अनुसार सख्ती से कार्य करते हैं जो प्रतिभूति के अतिव्यापार और मूल्यों में हेरफेर पर नियंत्रण रखता है।
4. पूँजी निर्माण
- वे बचत तथा प्रतिभूतियों में निवेश करने के लिए लोगों को प्रेरित करने और कमाई की वृद्धि और पूँजी में वृद्धि की संभावना को बनाये रखती है। इस तरह,
वे सार्वजनिक बचत जुटाकर पूँजी निर्माण के एक साधन के रूप में सेवा करते हैं।
5. निवेश के लिए श्रंखला
- वे निवेश योग्य कोषों को अधिक उपयोगी उद्योगों में श्रंखला बद्ध करते हैं। वे सार्थक परियोजनाओं में पूँजी के प्रवाह के निर्देशन द्वारा देश के आर्थिक विकास में मदद करते हैं।


“पूँजी बाज़ार के अंतर्गत उन सभी सुविधाओं व संस्थागत प्रबंधों को सम्मिलित किया जाता है जो दीर्घकालीन ऋणों से सम्बंधित हैं| "
-एल. एन सिन्हा
"विनियोग बाज़ार का आशय ऐसे स्थान से है जहाँ बचतें प्रवाहित होती हैं|"
-बेज़र एवं ग्रुथामैन
"पूँजी बाज़ार वह बाज़ारहै जहाँ दीर्घकालीन निधियों में व्यवहार किये जाते
हैं, तथा जहाँ लम्बी अवधि के लिए निधियों की माँग (उधार) एवं पूर्ति (उधार दिए ) की जाती है|" -श्री एम. सी. वैश्य
स्कंध विपणि
की विशेषताएँ :
· यह व्यक्तियों की संस्था है।
· इसका क्षेत्र राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय है।
· इस बाज़ार की सदस्यता दो भागों में विभक्त होती है –जौबर, दलाल ।
· यह धन की बचत करने व उसे एकत्रित करने का महत्वपूर्ण साधन होता
है।
· यह एक सुसंगठित पूँजी बाज़ार है, स्कंध विपणि समामेलित तथा असमामेलित दोनों प्रकार की हो सकती है।
· यह सौदों का नियमन व नियंत्रण भी करती है।
· यह लाभकारी व अलाभकारी प्रकृति की हो सकती है।
· स्कंध विपणि के लिए प्रतिभूतियों में लेन देन करने से
पूर्व प्रतिभूति अनुबंध अधिनियम
1956 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है ।
पूँजी बाजार एक ऐसा संगठित बाजार है जहाँ अंशों, ऋणपत्रों तथा अन्य दीर्घकालीन प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता है।
पूँजी बाजार के अन्तर्गत हम उन सभी सुविधाओं एवं संस्थाओं को सम्मिलित करते हैं, जो दीर्घकालीन समय के लिए धन उधार लेने और देने का कार्य करती हैं अर्थात् पूँजी बाजार से दीर्घकालीन ऋणों के लेन-देनों का बोध होता है।
पूँजी बाजार उन मार्गो की श्रृंखला की ओर संकेत करता है जिनके द्वारा समाज की बचतें व्यापारिक संस्थाओं एवं जनता को उपलब्ध कराई जाती हैं। यह अपने अन्तर्गत केवल उस व्यवस्था को ही सम्मिलित नहीं करता जिसके द्वारा जनता प्रत्यक्ष या मध्यस्थों के द्वारा प्रतिभूतियों को ग्रहण करती हैं परन्तु संस्थाओं के विस्तृत जाल को भी सम्मिलित करता है जो कि अल्पकालीन एवं मध्यकालीन ऋण प्रदान करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर लेते हैं।
पूँजी बाजार की समस्याएँ -
(1) ऊँची ब्याज दर - भारतीय पूँजी बाजार की सबसे प्रमुख समस्या यहाँ पर ब्याज की दर पश्चिमी देशों की तुलना में अत्यधिक है।
(2) केन्द्रीय संगठन का अभाव - भारत के पूँजी बाजार की दूसरी महत्त्वपूर्ण समस्या यहाँ पर एक केन्द्रीय संगठन का अभाव है जिसके कारण पूँजी बाजार के विभिन्न घटकों को एक झण्डे के नीचे अभी तक नहीं लाया जा सका है।
(3) ब्याज की दरों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव - भारतीय पूँजी बाजार में चलन में ब्याज की दरों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देने मे आता है।
(4) सदस्यों की क्रियाओं पर नियंत्रण का अभाव - भारतीय पूँजी बाजार में केन्द्रीय नियंत्रण का अभाव होने के कारण सदस्यों की क्रियाओं पर समुचित नियंत्रण स्थापित करना सम्भव नहीं हो पाता है।
(5) विनियोक्ताओं के विश्वास का अभाव - भारतीय पूँजी बाजार में स्थिरता का अभाव होने के कारण विशेष रूप से दीर्घकाल की अवधि के लिए पूँजी प्रदान करने वाले विनियोक्ताओं का विश्वास आज की तिथि तक अर्जित नहीं कर पाया है।
(6) अनियमितताओं का बोलबाला - चाहे उद्योगपति हो अथवा विनियोक्ता समुचित शिक्षा तथा नैतिक मूल्यों का अभाव होने के कारण भारतीय पूँजी बाजार में अनियमितताओं की भरमार है। इन अनियमिमताओं का मूलभूत स्रोत अशिक्षा, अज्ञानता, रूढि़वादिता, अनैतिकता आदि हैं।
(7) पूँजी का अभाव - भारतीय पूँजी बाजार की एक बड़ी समस्या यहाँ पर समुचित पूँजी का अभाव होता है। पूँजी बाजार में समुचित मात्रा में पूँजी प्राप्त करना कठिन होता है। इसका मूल कारण आम व्यक्ति की निर्धनता एवं अज्ञानता है।
(8) सट्टेबाजी को प्रोत्साहन - भारतीय पूँजी बाजार में सट्टेबाजी को प्रोत्साहन मिलता है। उन सटोरियों के लिए जिन्होंने धन एकत्रित कर लिया है, यह ‘जादू का पिटारा’ है। परन्तु उनके लिए जिनकी इनसे अपार हानि हुई है, ‘नारकीय पीड़ा के समान’ है जिस समय यह अस्वस्थ रूप धारण कर लेती है, तो यह पतन का मूल कारण बन जाती है।
(9) प्रतिभूतियों के मूल्यों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव - भारतीय पूँजी बाजार में प्रतिभूतियों के मूल्यों में भारी उतार-चढ़ाव आते हैं जिससे उपभोक्ताओं तथा उत्पादकों दोनों को क्षति पहुँचति है। सारा आर्थिक जगत छिन्न-भिन्न हो जाता हैं। ”ऐसे सट्टेबाज, जिन्हें बाजार की वास्तविक स्थिति का पता नहीं होता और जो केवल अटकलों तथा अफवाहों पर कार्य करते हैं, प्रतिभूतियों के मूल्यों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव उत्पन्न कर देते हैं।“
पूँजी बाज़ार षब्द सुसाध्यता और सांस्थानिक व्यवस्था या प्रबंध को संदभ्रित करता है। जिसके माध्यम से दीघकालिक निधि, ऋण एवं समता दोंनों ही, उगाहे या वर्धित एवं निवेषित किया जा सकते हैं। एक आदर्ष पूँजी बाज़ार वह है जहाँ उचित लागत पर वित्त उपलब्ध होता है।
भारत सरकार द्वारा पूँजी बाज़ार का नियमन एवं नियंत्रण के लिए सेबी की स्थापना की गई। पूँजी बाज़ार के नियमन एवं नियंत्रण में सेबी की भूमिका एवं उद्देष्य निम्न प्रकार हैं:-
1- षेयर बाजार तथा प्रतिभूति उद्योग को विनियमित करना ताकि क्रमबद्ध ढंग से उनकी क्रियाषीलता को बढ़ावा मिले।
2- निवेषकों के अधिकारों और हितों की
रक्षा करना विशेष रूप से वैयक्तिक निवेषकों को तथा उन्हें मार्गदर्षित एवं षिक्षित करना।
3- व्यापार कदाचारों को रोकना तथा प्रतिभूति उद्योग के स्व नियामन द्वारा एवं इसके वैधानिक विनियमन के बीच एक संतुलन प्राप्त करना।
4- मध्यस्थों जैसे कि दलाल, मर्चेंट, बैंकर्स आदि के द्वारा एक आचार संहिता एवं निश्पक्ष व्यवहार को, उन्हें प्रतियोगी एवं प्रतियोगी एवं व्यावसायिक बनाने के दृश्टिकोण के साथ विकसित एवं विनियमित करना।
A.
विपणन।
B.
नियंत्रण।
C.
बिक्री।
D.
संगठन।
क्रेता सावधान का अर्थ है क्रेताओं को जागरूक बनायें। यह बिक्री का एक नियम है क्योंकि बिक्री एक निर्धारक तत्व नहीं है जो क्रेताओं को विभिन्न खरीददारी की शर्तों को बताये और उत्पादों का प्रयोग बताये। यह क्रेताओं की जिम्मेदारी है जो स्वयं को खरीदी की स्थिति को सही दिशा में आगे बढ़ाये और उत्पादों का प्रयोग बढ़ाये।
A.
उत्पाद चक्र।
B.
उत्पाद जीवन चक्र।
C.
उत्पाद काल।
D.
उत्पाद आवर्तन।
उत्पाद जीवन चक्र का अर्थ है बाज़ार में उत्पाद का जीवन समय। एक उत्पाद के जीवन चक्र में कई स्तर हैं जिनमें जानकारी स्तर विकास स्तर मतृत्व स्तर तथा गिरावट स्तर शामिल होता है।
A.
पैकेजिंग का।
B.
लेबलिंग का।
C.
ग्रेडिंग का।
D.
मूल्यन का।
ब्रांडिंग लेबलिंग का एक हिस्सा होता है जिसका अर्थ उपभोक्ता को उत्पाद के बारे में जानकारी प्रदान करना है। ब्रांडिंग एक उत्पाद की पहचान तथा विभिन्न समान उत्पादों में अलग बनाता है।
A.
उत्पाद मिश्रण का।
B.
संवर्धन मिश्रण का।
C.
स्थान व भौतिक वितरण मिश्रण का।
D.
मूल्य मिश्रण का।
यातायात स्थान व भौतिक वितरण मिश्रण का उत्पाद।
A.
मांग कम करना।
B.
मांग बढ़ाना।
C.
वस्तुओं का वितरण करना।
D.
वस्तुओं का मूल्य निर्धारित करना।
एक उत्पाद संवर्धन उपभोक्ताओं को उत्पाद कम्पनी के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है ताकि उनके उत्पाद को खरीद कर प्रयोग किया जा सके।
A.
आरंभिक उच्च मूल्य रखना।
B.
उत्पाद के मध्य में निम्न मूल्य रखना।
C.
आरंभ में वस्तुएँ बिना पैसों के वितरित करना।
D.
केवल कर्मचारियों को वस्तुएँ वितरित करना।
स्किमिंग मूल्य रणनीती में उत्पाद की गुणवत्ता को उच्च बनाने हुतु प्रारंभ में उच्च मूल्य रखा जाता है। वे कम्पनियाँ जो अपने उत्पाद की गुणवत्ता को उच्च रखना चाहती है। वे इस रणनीति को अपनाती है जैसे- राॅलेक्स घड़ी, रोलस् राॅयल कारें, आदि। ये ऐसे ब्रांड है जो इस नीति को अपनाते हैं।
A.
बेरोजगारी सृजन।
B.
एकाधिकार निर्माण।
C.
मांग घटाना।
D.
मांग बढ़ाना।
विज्ञापन कुछ अमीर कम्पनियों का एकाधिकार स्थापित करता है। लघु स्तरीय कम्पनियों के पास विज्ञापन पर खर्च करने हेतु उतनी पूँजी नहीं होती है जितनी बड़ी कम्पनियों के पास होती है। इसप्रकार लघु कम्पनियों का ऐसे व्यावसायिक पर्यावरण में स्थिर बने रहना व आगे बढ़ना मुश्किल होता है जबकि बड़े संगठन विज्ञापनों पर बहुतायत में पूँजी खर्च करते हैं।
A.
ब्रांडिंग।
B.
संवर्धन।
C.
पैकेजिंग।
D.
लेबलिंग।
पैकेजिंग माल को पैक करने में प्रयुक्त पात्र होता है तथा इसे मूक विक्रयकर्ता भी कहा जाता है। उचित पैकेजिंग का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह उत्पाद सम्भालने में ग्राहकों की मदद करता है।
A.
स्कंध के स्तर को कम करना।
B.
स्कंध के स्तर को बढ़ाना।
C.
पर्याप्त स्कंध रखना।
D.
माल को पहूँचाना।
स्कंध नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि माल के स्टाॅक में ज्यादा कोष को विनियोजित नहीं किया गया है तथा स्कंध की कमीं से उत्पादन की प्रक्रिया बाधित नहीं हुई है।
A.
आरंभ में उच्च मूल्य निर्धारण।
B.
उत्पाद के आरंभ के समय निम्न मूल्य निर्धारण।
C.
केवल कर्मचारियों को माल का वितरण।
D.
आरंभ में माल का मुफ्त वितरण।
इस मूल्यन रणनीती में, बाज़ार का अधिकतम हिस्सा हासिल करने के लिए निम्न मूल्य निर्धारित किये जाते हैं। रिलायंस कम्यूनीकेशन ने अपने मोबाईल ईसी रणनीती पर आरंभ किये थे। सामान्यतः दैनिक उपयोग के सामान के लिए यही रणनीती अपनायी जाती है। इस रणनीती का मुख्य उद्देश्य उत्पाद के आरंभ से बहुत कम समय में अधिक जनता तक उत्पाद को पहूँचाना होता है।
उत्पादन की अवधारणा।
विपणन एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया होती है जिससे लोग पैसे या किसी अन्य मूल्यवान वस्तु के लिए माल और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
अरिहंत एंड कंपनी ‘भण्डारण’ का कार्य करती है।
यह एक उत्पाद को एक विशिष्ट नाम देने की एक प्रक्रिया होती है जिससे इसे साफ तौर पर ग्राहक द्वारा पहचाना जा सके।
पैकेजिंग
निम्नलिखित
लाभ प्रदान
करता है -
1. उत्पाद
की रक्षा
करने में मदद
करता है।
2. उत्पाद
के रखरखाव को
सुविधाजनक
और सुरक्षित बनाता
है।
विपणन
कार्य के
प्रकार हैं -
1. विनिमय
के कार्य।
2. भौतिक
आपूर्ति के
कार्य।
3. सुविधा
कार्य।
इसका अर्थ पैकेज पर लगाने के लिए लेबल डिजाइन करने की एक प्रक्रिया से होता है।
दो
निशान हैं -
आईएसआई
(भारतीय मानक
संस्थान)
एगमार्क
(कृषि
मार्क्स)
प्रीमियम
निम्नलिखित
प्रकार के हो
सकते हैं:
1. पैक
के साथ
प्रीमियम -
इसमें
प्रीमियम या
उपहार या तो
पैकेज के
अंदर या बाहर
शामिल होते
हैं।
2. मूल्य
छूट प्रीमियम
- एक बड़े पैक
की खरीद पर
कीमत में कमी।
3. पैसे
वापसी
प्रीमियम - जब
खरीदी पिछली
खरीद के
प्रमाण
प्रस्तुत
किये जाते
हैं तो लेख की
लागत पूरी या
आंशिक रूप से
वापस की जाती
है।
4. अतिरिक्त
मात्रा -
निर्दिष्ट
इकाई की खरीद
पर मुफ्त
उत्पाद की एक
इकाई पेश की
जाती है।
बिक्री
संवर्धन
तकनीक दो
प्रकार की
होती है:
1. डीलरों
का विक्रय
संवर्धन -
विशिष्ट
उत्पाद की
बिक्री
बढ़ाने के
लिए डीलरों
को
प्रोत्साहित
करने के लिए
प्रदत्त
प्रोत्साहन
और सहायता।
2. उपभोक्ता
विक्रय
संवर्धन -
बिक्री
बढ़ाने के लिए
उपलब्धता के
बारे में
उपभोक्ताओं
को प्रोत्साहित
करने के लिए
प्रदत्त
प्रोत्साहन
और सहायता।
कंपनी
बिचैलियों
के प्रदर्शन
को प्रभावित
करने के लिए
संवर्धन के
उपकरणों के
निम्न
प्रकारों का
उपयोग कर
सकती है:
1. निः
शुल्क
प्रदर्शन
सामग्री - इस
तकनीक के तहत, डीलर
ग्राहकों को
आकर्षित
करने के लिए
अपनी दुकानों
में बैनर और
साइनबोर्ड
की तरह
अलग-अलग सामग्री
को
प्रदर्शित
करते हैं।
2. पुरस्कार
प्रतियोगिता
- पुरस्कार उन
व्यापारियों
को दिया जाता
है जिनकी
बिक्री
निर्दिष्ट
लक्ष्य के
पार जाती है।
जैसे - विदेशी
यात्राएँ।
अमेरिकन विपणन संघ के अनुसार ‘‘विक्रय संवर्धन में में व्यक्तिगत विक्रय, विज्ञापन तथा प्रचार के अलावा उन विपणन गतिविधियाँ को शामिल किया जाता है जो प्रदर्शनियों, प्रदर्शनों और साधारण दिनचर्या में न शामित होने वाले विभिन्न गैर आवर्ती विक्रय प्रयासों के रूप में उपभोक्ता खरीद और डीलर की प्रभावशीलता को उत्तेजित करती हैं।’’
बिक्री
संवर्धन की
विशेषताऐं
हैं:
1. यह
एक
अल्पकालिक
प्रोत्साहन
योजना होती
है।
2. यह
ग्राहकों और
डीलरों
दोनों पर
निर्देशित होती
है।
3. यह
तत्काल
बिक्री
बढ़ाने के
लिए किया
जाता है।
4. यह
गैर आवर्ती
प्रचारक
प्रयास होते
हैं।
विक्रय संवर्धन हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली किन्हीं दो क्रियाएँ:-
1. मुफ्त नमूने - उपभाक्तताओं को वस्तुओं के नमूने मुफ्त बाँटना संवर्द्धन की एक प्रभावी विधि है। मुफ्त नमूने का वितरण उपभोक्ता के धर या कार्यालय पर किया जा सकता है, किसी अन्य उत्पाद के साथ नत्थी या पैक किया जा सकता है या विज्ञापन के साथ दिखाया जा सकता है।
2. प्रतियोगिता - प्रतियोगिता का आयोजन करना भी उपभोक्ता संवर्द्धन की एक प्रभावी विधि है। इसका उद्देश्य नये उत्पाद को उपभोक्ताओं के समक्ष प्रस्तुत करना या नये ग्राहकों को आकर्षित करना होता है।
शून्य स्तरीय (प्रत्यक्ष क्रम)

यह वितरण की सबसे सरल विधि है, जिसमें बिना किसी मध्यस्थ के माल निर्माता से सीधे ग्राहक को उपलब्ध हो जाता है।
ग्राहकों
के लिए
विज्ञापन के
महत्व इस
प्रकार हैं:
1. सुविधा:
विज्ञापन
विभिन्न
उत्पादों की
उपलब्धता के
बारे में
ग्राहकों को
जागरूक
बनाता है जो
खरीदारी को
आसान बना
देता है।
2. उपभोक्ता
अधिशेष:
विज्ञापन
उपभोक्ता की
संतुष्टि
बढ़ाने के
लिए उत्पादों
और सेवाओं के
बेहतर मिलान
में मदद करता
है।
इसके
गुण हैं:
1. इसमें
श्रव्य और
दृश्य
प्रभाव होता
है जो दृश्य, ध्वनि
और भावना को
जोड़ते हैं।
2. इसमें
संदेश
व्यापक अपील
वाले और
भौगोलिक होते
हैं।
इसके
दोष हैं:
1. इनकी
लागत बहुत
अधिक होती है
इसलिए केवल
बड़े कारोबारों
के लिए सस्ते
होते हैं।
2. इसमें
विज्ञापनों
को केवल एक
छोटी अवधि के
लिए दिखाया
जाता है
इसलिए इनकी
पुनरावृत्ति
की आवश्यकता
होती है।
मीडिया विभाग वह विभाग होता है जो अपने ग्राहकों के लिए उचित विज्ञापन का चयन करता है। यह विभाग अखबारों या पत्रिकाओं में स्थान, रेडियो और टेलीविजन में प्रसारण का समय तथा बाहरी विज्ञापन के लिए मौके का निर्धारण करता है। यह मीडिया के साथ निरंतर संपर्क में होता है।
कुछ हद तक यह कथन सही है क्योंकि ग्राहक इस उलझन में होते हैं कि कौनसा विज्ञापन सही है तथा किस पर भरोसा किया जाना चाहिए। प्रत्येक विज्ञापन यह दावा करता है कि इसमें दिखाया जाने वाला उत्पाद सबसे अच्छा है। विज्ञापन अक्सर निर्माताओं के साथ ग्राहकों को धोखा देने के लिए अपने उत्पादों के बारे में बड़े और झूठे दावे करते हैं। ग्राहक बहुत भ्रमित भी होते हैं क्योंकि एक ही प्रकार के उत्पाद के विभिन्न ब्रांडों के बहुत से विज्ञापन होते हैं।
विक्रयकार्य
की
विशेषताऐं
हैं:
1. इसमें
विक्रेता
तथा क्रेता
के मध्य
प्रत्यक्ष
सम्पर्क
होता है।
2. इसमें
आमने-सामने
सम्पर्क के
साथ मौखिक
संचार शामिल
होता है।
3. यह
एक कला होती
है क्योंकि
यह क्रेता की
मांग को
परिवर्तित
करता है।
4. यह
एक विज्ञान
के रूप में भी
है क्योंकि
यह खरीदार का
विश्वास
जीतता है।
5. यह
लचीला होता
है क्योंकि
इसमें
अलग-अलग क्रेताओं
के साथ संबंध
शामिल होते
हैं।
|
क्र. सं. |
औपचारिक संगठन |
अनौपचारिक संगठन |
|
1 |
अर्थ - इसका अर्थ ऐसे संगठन से है जिसके प्रत्येक स्तर के प्रबन्धकों के अधिकारों, दायित्वों एवं उत्तरदायित्वों की स्पष्ट सीमा होती है। |
यह व्यक्तिगत एवं सामाजिक सम्बन्धों का ऐसा जाल है जिसे स्थापित करने के लिए औपचारिक संगठन की स्थापना करना आवश्यक है। |
|
2 |
उद्गम - इसका उद्गम अधिकारों से होता है। |
इसका उद्गम कर्मचारियों श्रमिकों के सम्बन्धों के प्रभाव से होता है। |
|
3 |
निर्माण - इसका निर्माण संगठन में योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है। |
जबकि इसका निर्माण संगठन में स्वतः ही होता है। |
|
4 |
प्रकृति - यह यान्त्रिक एवं िवधिक प्रकृति का होता है। |
जबकि यह मानवीय एवं वास्तविक प्रकृति का होता है। |
|
5 |
लिखित या मौखिक - इसमें व्यक्तियों के परस्पर सम्बन्ध अधिकार एवं दायित्व स्पष्ट रूप से लिखित होते हैं। |
जबकि इसमें व्यक्तियों के पारस्परिक सम्बन्ध अधिकार एवं दायित्व मौखिक होते हैं। |
|
6 |
अधिकारों का प्रवाह - इसमें अधिकारों का प्रवाह ऊपर से नीचे होता है। |
जबकि इसमें अधिकारों का प्रवाह ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर और समतल हो सकता है। |
|
7 |
उद्देश्य - इसका मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक उद्देश्यों को प्राप्त करना होता है। इसलिए अधिकारों एवं दायित्वों का विभाजन किया जाता है। |
जबकि इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय एवं समाजिक सन्तुष्टि प्राप्त करना है। |
|
8 |
इसका क्षेत्र व्यापक होता है। |
जबकि इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत संकुचित होता है। |
|
9 |
आवश्यकता एवं महत्त्व - प्रत्येक संगठन में इसका निर्माण करना अतिआवश्यक है और यह कार्यालय एवं कार्य पर जोर देता है। |
जबकि इसका निर्माण करना आवश्यक नहीं है। यह मानव एवं उसके व्यवहार पर जोर देता है। |
|
10 |
अवधि - इसकी अवधि दीर्घकालीन होती है। |
जबकि इसकी अवधि अल्पकालीन होती है। |
|
11 |
प्रदर्शन - इस प्रकार के संगठन को संगठन चार्ट में प्रदर्शित किया जाता है। |
जबकि इसे संगठन ार्ट में प्रस्तुत करने का कोई प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता है। |
|
12 |
प्रवृत्ति - इसकी प्रवृत्ति विवेकशील एवं अव्यक्तिगत बनाने की होती है। |
जबकि इसकी प्रवृत्ति भावात्मक एवं व्यक्तिगत होती है। |
|
क्र. सं. |
अधिकार अंतरण |
विकेन्द्रीकरण |
|
1 |
आशय - अधिकारों का प्रत्यायोजन का आशय उच्चाधिकारी द्वारा अधीनस्थों की सत्ता या अधिकार प्रत्यायोजित करने से है। |
जब विकेन्द्रीकरण का आशय सम्पूर्ण संगठन में सत्ता या अधिकार को सौंपने से है। |
|
2 |
प्रकृत्ति - यह व्यक्तिगत प्रकृति का होता है क्योंकि इसमें उच्च पद से निकटतम निम्न पद को कार्य दायित्व एवं अधिकार सौंपे जाते हैं। |
जबकि यह सम्पूर्ण प्रकृति का होता है क्योंकि इसके अन्तर्गत सम्पूर्ण संगठन में उच्च स्तर से निम्न स्तर तक अधिकारों का प्रत्यायोजन किया जाता है। |
|
3 |
समरूपता - अधिकारों के प्रत्यायोजन की नीतियों में समरूपता |
जबकि विकेन्द्रीकरण की नीति में समरूपता होती है। |
|
4 |
प्रक्रिया का पूर्ण होना - उच्चाधिकारियों द्वारा अधीनस्थों को अधिकार सौंपने के पश्चात् प्रत्यायोजन की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। |
जबकि विकेन्द्रीकरण की स्थिति में कार्य को सभी व्यक्तियों में बाँटने पर विकेन्द्रीकरण प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। |
|
5 |
अनिवार्यता - अधिकारों का प्रत्यायोजन व्यावसायिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है। |
जबकि विकेन्द्रीकरण की स्थिति में कार्य को सभी व्यक्तियों में बाँटने पर विकेन्द्रीकरण प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। |
|
6 |
नियन्त्रण की मात्रा - प्रत्यायोजन में नियन्त्रण की मात्रा न तो कम होती है और न ही अधिक अर्थात यथावत् रहती है। |
जबकि इसमें नियन्त्रण की मात्रा उच्च स्तर पर कम हो जाती है। |
|
7 |
क्रिया - यह समसामयिक क्रिया है। |
जबकि यह एक व्यूहरचनात्मक क्रिया है। |
|
8 |
सीमा - प्रत्यायोजन की सीमा एक विभाग से दूसरे विभाग में भिन्न हो सकती है। |
जबकि केन्द्रीकरण, संगठन के किसी भी भाग में कोई भिन्नता नहीं की जा सकती है। |
|
9 |
आधार - अधिकारियों का प्रत्यायोजन, विकेन्द्रीकरण पर आधारित नहीं है। इसलिए यह विकेन्द्रीकरण के बिना भी संभव होता है। |
जबकि विकेन्द्रीकरण प्रत्यायोजन के बिना सम्भव नहीं होता है। |
|
10 |
मार्गदर्शन - अधिकारों के प्रत्यायोजन में अधीनस्थ कर्मचारी अपने अधिकारी अधीनस्थ के मार्गदर्शन में कार्य करते हैं। |
जबकि विकेन्द्रीकरण में प्रत्येक व्यक्ति कार्य को पूर्ण करने में स्वतन्त्र होता है। |
एक प्रबंधक के रूप में किसी व्यावसायिक उद्यम में अन्तरण के महत्व निम्नलिखित है :-
1. प्रभावी प्रबंध - प्रबंधकों द्वारा अपने कर्मचारियों को अधिक अधिकार देकर अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रत करने के लिए अधिक समय मिल जाता है।
2. कर्मचारियों का विकास - अंतरण के परिणामस्वरूप कर्मचारियों को अपनी प्रतिभा का उपयोग करने के लिए अधिक सुअवसर प्राप्त होते हैं तथा उनकी प्रतिभा को और अधिक विकास मिल जाता है।
3. कर्मचारियों को प्रेरणा - अंतरण कर्मचारियों की प्रतिभा को विकसित करता है, जिससे व्यवसाय में कर्मचरियों से उनके कौशल का पूरा लाभ उठाया जा सके।
4. विकास का सरलीकरण - अधिकार अंतरण एक संगठन में उसकी वृद्धि होने में सहायता प्रदान करता है। इसके द्वारा ऊँचे पदों पर नया काम, करने के लिए तुरंत कार्यबल मिल जाता है।
5. प्रबंध सोपानिकी (पदानुक्रम) का आधार - अधिकार अंतरण अधिकारी - अधीनस्थ संबंध बनाता है। जो प्रबंध पदानुक्रम का आधार है।
6. उत्तम सामंजस्य - अधिकार अंतरण के तत्व जैसे - अधिकार, उत्तरदायित्व उत्तरदेयता, क्षमता कर्त्तव्यों और जवाबदेही जो संगठन में विभिन्न स्तरों से संबंधित होते हैं।
एक प्रबंधक के रूप में किसी व्यावसायिक उद्यम में विकेंद्रीकरण के महत्व निम्नलिखित हैं:-
1- अधीनस्थों में पहल भावना का विकास:-
विकेंद्रीकरण, अधीनस्थों में आत्मविष्वास तथा भरोसे की भावना को जागृत करता है। यह इसलिए कि जब निम्नस्तरीय प्रबंधकों को स्वयं के निर्णयों से कार्य करने की स्वतंत्रता दी जाती है तो वे अपने निर्णयों के अनुसार कार्य करते हैं।
2- भविष्य के लिए प्रबंधकीय प्रतिभा का विकास:-
कर्मचारियों में कार्य संबंधी चातुर्थ बढ़ाने तथा संगठन में पदोन्नति पाने में औपचारिक प्रषिक्षण बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
3- शीघ्र निर्णय:-
प्रबंध सोपानकी को संप्रशण श्रृंखला के रूप में देखा जा सकता है। केद्रीकृत संगठन में सूचनाओं का प्रवाह धीमा होता है क्योंकि प्रत्येक निर्णय उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा लिया जाता है।
4- शीर्ष प्रबंध को राहत:-
इसमें अधीनस्थ कर्मचारियों के क्रियाकलापों के प्रत्यक्ष रूप से पर्यवेक्षण आदि में उच्चाधिकारियों को राहत मिल जाती है क्योंकि वे अपने कार्य को निर्धारित सीमाओं के अंदर जो उच्चाधिकारियों द्वारा ही निर्धारित की जाती है।
5- विकास को सरल बनाता है:-
विकेद्रीकरण, निम्नस्तरीय प्रबंधकों तथा प्रभागीय तथा विभागीय मुख्यधिकारियों को महानतम् स्वायत्ता प्रदान करता है।
6- श्रेष्ट नियंत्रण:-
विकेद्रीकरण से प्रत्येक स्तर पर कार्य निष्पादन के मूल्यांकन का अवर मिलता है जिससे प्रत्येक विभाग व्यक्तिगत रूप से उपके परिणामों के लिए जवाबदेह बनाया जा सकता है।
A.
एक अध्यक्ष तथा एक सदस्य।
B.
दो अध्यक्ष तथा एक सदस्य।
C.
दो अध्यक्ष तथा दो सदस्य।
D.
एक अध्यक्ष तथा दो सदस्य।
प्रत्येक जिला मंच का निर्माण एक अध्यक्ष तथा दो सदस्यों से होता है जिनका चुनाव राज्य सरकार के द्वारा होता है।
A.
एक अध्यक्ष तथा दो सदस्य।
B.
दो अध्यक्ष तथा चार सदस्य।
C.
एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य।
D.
एक अध्यक्ष तथा छः सदस्य।
राष्ट्रीय आयोग में उपभोक्ता शिकायतों कोमिटा ने हेतु एक अध्यक्ष तथा चार सदस्य शामिल होते हैं।जिनमें एक महिला होनी चाहिए।इनका चुनाव केन्द्रीय सरकार के द्वारा होता है।
A.
जिलाकेंद्र।
B.
जिलामंच।
C.
जिलान्यायालय।
D.
जिलाकार्यालय।
उपभोक्ता संरक्षण परिषद जिला स्तर पर जिला मंच कहलाती है। इसमें एक अध्यक्ष तथा दो अन्य सदस्य शामिल होते हैं। इस संस्था में 20 लाख तक या इससे कम कीमत की वस्तुओं तथा सेवाओं की शिकायत की जा सकती है।
A.
वस्तुओं की कीमत को अनदेखा करना।
B.
वस्तुओं की गुणवत्ता को अनदेखा करना।
C.
शोषण के विरूद्ध शिकायत दर्ज करना।
D.
उत्पादन कर्ता की बेईमानी को अनदेखा करना।
यह उपभोक्ता का एक उत्तरदायित्व है कि वह ऐसे उत्पादन कर्ता विरूद्ध शिकायत दर्ज कर वाये जो गलत गुणवत्ताकी वस्तुओं को बेचकर जनता को धोका देता है।यदिउपभोक्ताउत्पादनकर्ताकीकिसीगलतगतिविधिकोअनदेखा करता है तो इसका अर्थ है कि वह उस उत्पादनकर्ता को भविष्यमें और अधिक बेईमानी करने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से अनुमोदित तथा आगे बढ़ा रहाहै।
A.
एकअध्यक्षतथाएकसदस्य।
B.
दोअध्यक्षतथाएकसदस्य।
C.
दोअध्यक्षतथादोसदस्य।
D.
एकअध्यक्षतथादोसदस्य।
राज्यआयोगमेंएकअध्यक्षतथादोसदस्यशामिलहैं।राज्यआयोगकाअध्यक्षउच्चन्यायालयकान्यायाधीशहोनाचाहिए।
A.
घटिया व गैर कानुनी वस्तुओं की बिक्री को बढ़ाना।
B.
अनुचित बाज़ार गतिविधि यों को बढ़ाना।
C.
उचित बाज़ार गतिविधियों को घटाना।
D.
घटिया व गैरकानुनी वस्तुओं की बिक्री को घटाना।
एक उपभोक्ता को कानुनी वस्तुओं तथा सेवाओं का ही चुनाव करना चाहिए।उन्हें असामाजिक गतिविधियों को कम करना चाहिए।जैसे- गैरकानुनी तथा घटिया वस्तुओं की बिक्री, काला-बाज़ारीआदि।
A.
गैर-सरकारी कार्यालय।
B.
राष्ट्रीय सरकारी संगठन।
C.
गैर-सरकारी संगठन।
D.
राष्ट्रीय वस्तु कार्यालय।
गैर-सरकारी संगठन उपभोक्ता संरक्षण तथा जागरूकता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।वे उपभोक्ताओं को सक्रिय बनाने हेतु कार्यक्रम आयोजित करते हैं और उन्हें उत्पाद खरीदने की एक सही प्रक्रिया बताते हैं।वे उपभोक्ता को ऐसे विभिन्न विकल्पों के बारे में भी सूचित करतेहैं जिन्हें वे यदि उत्पादनकर्ता उनसे बेईमानी करने की कोशिश करे तो उपयोग में भी ले सकते हैं।
A.
उपभोक्ता को कोई भी सेवा खरीदने से बचना चाहिए।
B.
सरकार को वस्तुएँ मुफ्त में बाँटनी चाहिए।
C.
उत्पादनकर्ताओं को एकाधिकार करना चाहिए।
D.
उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ाना चाहिए।
उपभोक्ता स्वयं एक महत्वपूर्ण व्यक्ति है जो उपभोक्ता संरक्षण को निश्चित कर सकता है क्योंकि स्वयं से वाही सबसे बड़ी सेवा है। यदि उपभोक्ता अपनी जिम्मेदारी तथा अपने अधिकारों के लिए पूर्णजागरूक है तो एक उपभोक्ता इन अधिकारों तथा आदेशों को लागू करने हेतु सक्रिय भागीदारी दे सकता है।कोई उत्पादन कर्ता उसे धोका देने में असक्षम होगा।
A.
राष्ट्रीयआयोगमें।
B.
राज्यआयोगमें।
C.
जिलाआयोगमें।
D.
जिलामंचमें।
20 लाख तक या इससे कम कीमत की वस्तुओं की शिकायत जिला मंच में की जा सकती है। यह संस्था अगर आवश्यक हो तो वस्तुओं को जाँच हेतु प्रयोगशाला में भेज सकती है और तथ्यों तथा प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय देती है।
A.
उत्पादनकर्ताओं को दंडित करके।
B.
उपभोक्ता की शिकायतों कोप् रकाशित करके।
C.
उत्पादनकर्ताओं को आगे बढ़ाके।
D.
उत्पादनकर्ताओं के गलत विज्ञापनों कोप् रकाशित करके।
कुछ समाचार पत्र लगातार मुख्य उपभोक्ता से सम्बंधित मामलो को प्रकाशित करते हैं तथा उनका समाधान भी बताते हैं।ऐसी सुचनाएँ सामान्यरूप्में जनता को जागरूक बनाके उन्हें शिक्षित करती हैं।
A.
अन्य जिला मंच में।
B.
राज्य आयोग में।
C.
राज्य मंच में।
D.
राष्ट्रीय आयोग में।
जिला मंच के निर्णय के खिलाफ अपील राज्य आयोग में की जा सकती है।
A.
खाद्य पदार्थों पर हाॅलमार्क देखना।
B.
खाद्य पदार्थों पर एगमार्क देखना।
C.
खाद्य पदार्थों पर एफ पी ओ चिन्ह देखना।
D.
खाद्य पदार्थों पर आ ईए स आई चिन्ह देखना।
उपभोक्ताओं को उत्तम किस्म की वस्तुओं को खरीदने पर बल देना चाहिए।उन्हें खाद्यपदार्थों पर एफ पी ओ चिन्ह देखना चाहिए।
A.
उत्पादनकर्ता की गलत गतिविधियों के लिए।
B.
उपभोक्ताओं की जागरूकता के लिए।
C.
उत्पादनकर्ता की जागरूकता के लिए।
D.
सरकार की गलत गतिविधियों के लिए।
कुछ बेईमान और असामाजिक उत्पादनकर्ता, उपभोक्ताओं का शोषण करने हेतु अनुचित व्यापार की गतिविधियों को अपनाते हैं और ज्यादा लाभ कमाते हैं। अक्सर उपभोक्ता इनसे डर जाते हैं तथा निम्न स्तर की सेवाएँ प्राप्त करते हैं। ऐसी गलत गतिविधियों को रोकने के लिए निश्चित प्रयास करने की आवश्यकता होती है।
A.
जिलामंच में।
B.
जिला आयोग में।
C.
अन्य राज्य आयोग में।
D.
राष्ट्रीय आयोग में।
राज्य आयोग के आदेश के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर राष्ट्रीय आयोग में की जा सकती है।
A.
शिकायत का।
B.
शिक्षा का।
C.
हानिकारक वस्तुओं से सुरक्षित होने का।
D.
शिकयतें मिटाने का।
इस अधिकार के अनुसार उत्पादनकर्ता को निम्न गुणवत्ता वाली वस्तुओं की बिक्री जैसे अनुचित व्यापार की गतिविधियों के खिलाफ उपभोक्ता को भुगतान करना चाहिए।घटिया उत्पाद में सुधार तथा बदलाव होना चाहिए।यदि उत्पाद सुधाराया बदला नहीं जा सकता है तो उपभोक्ता को उसकी राशि का पुन र्भुगतान किया जाना चाहिए।
A.
वस्तुओं की कीमत घटाताहै।
B.
वस्तुओं की कीमत बढ़ाताहै।
C.
उपभोता को चिन्तामुक्त बनाताहै।
D.
संगठन को लम्बे समय तक चलाने में सहायक।
उत्पादनकर्ता निम्नअ नुकूल व्यापार गतिविधियों के द्वारा तथा उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक कर के अपनी इज्जत तथा प्रसिद्वि में सुधार करते हैं।उत्पादनकर्ता लम्बे समय के लिए उपभोक्ताओं को धोखा नहीं दे सकताहै।
मुद्रा बाज़ार
1. एनएसई (भारतीय राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज)
2. ओटीसीईआई (भारतीय अधिप्रतिदावा परत शेयर बाजार)
के. सी. चाको के अनुसार, ‘‘मुद्रा बाजार को एक ऐसे स्थान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जहाँ अल्पकालीन कोषों का क्रय-विक्रय होता है।’’
वित्तीय बाजार एक संस्था अथवा वह अवस्था है जो चैक, विनिमय साध्य प्रपत्र, सरकारी प्रतिभूतियों, जमा एवं ऋण, स्टॉक एवं बॉन्ड्स आदि के लेन-देन की सुविधा बनाती है।
विक्रेता तथा क्रेता |
सेबी का पूरा नाम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड है |