चिरसम्मत भौतिकी के अंतर्गत यांत्रिकी, वैद्युत गतिकी, प्रकाशिकी तथा उष्मागतिकी जैसे विषय सम्मिलित होते हैं।
B. निकाय के तापीय गुणों पर विचार नहीं किया जाता है। C. वस्तु की गति पर विचार किया जाता है किन्तु समग्र गति पर विचार किया जाता है। D. वस्तु की गति पर विचार किया जाता है किन्तु समग्र गति पर विचार नहीं किया जाता है। उष्मागतिकी के अंतर्गत वस्तु की समग्र गति पर विचार नहीं किया जाता किन्तु वस्तु के अन्दर अवयवी कणों के संचार (गति), ताप, आदि का अध्ययन किया जाता है|
प्रकाशिकी के अंतर्गत प्रकाश पर आधारित परिघटनाओं पर विचार किया जाता है। प्रकाश किरणों के व्यतिकरण के कारण साबुन के बुलबुले की पतली झिल्ली में जीवंत रंगों प्रदर्शित होते हैं|
रेडियो तरंग विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं तथा वैद्युत गतिकी भौतिकी की वह शाखा है जो आवेशित तथा चुम्बकित वस्तुओं से संबद्ध विद्युत चुम्बकीय अथवा वैद्युत तथा चुम्बकीय परिघटनाओं से सरोकार रखती है|
स्थूल प्रभावी क्षेत्र में प्रयोगशाला, पार्थिव तथा खगोलीय स्तर की परिघटनाएं सम्मिलित होतीं हैं। जबकि सूक्ष्म प्रभावी क्षेत्र के अंतर्गत परमाण्वीय, आण्विक तथा नाभिकीय परिघटनाएं आती हैं।
किसी अपेक्षाकृत बड़े, अधिक जटिल निकाय के गुणों को इसके अवयवी सरल भागों की पारस्परिक क्रियाओं तथा गुणों से व्युत्पन्न करना एक संबद्ध प्रयास होता है। इस उपगमन को न्यूनीकरण कहते हैं।
भौतिकी के अंतर्गत हम विविध भौतिक परिघटनाओं की व्याख्या कुछ संकल्पनाओं एवं नियमों के पदों में करने का प्रयास करते हैं। इसका उद्देश्य विभिन्न प्रभाव क्षेत्रों तथा परिस्थितियों में भौतिक जगत को कुछ सार्वत्रिक नियमों की अभिव्यक्ति के रूप में देखने का प्रयास है। प्रकृति की मूल ताकतों को एकजुट करने के प्रयास एकीकरण के लिए एक ही खोज को दर्शाते हैं।
भौतिकी के दो प्रमुख विचार एकीकरण तथा न्यूनीकरण हैं|
एकीकरण : भौतिकी के अंतर्गत हम विविध भौतिक परिघटनाओं का विश्लेषण कुछ संकल्पनाओं एवं नियमों के पदों में करते हैं|
न्यूनीकरण : इसका तात्पर्य किसी अपेक्षाकृत बड़े, अधिक जटिल निकाय के गुणों को इसके अवयवी सरल भागों की पारस्परिक क्रियाओं तथा गुणों से व्युत्पन्न करना है|
स्वर्ण पर्णिका पर ऐल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामस्वरुप अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन युक्त एक विशाल केंद्र है और यह इलेक्ट्रॉनों से घिरा हुआ है।
प्रकाश-विद्युत के सिद्धांत केवल यह मानकर समझाया जा सकता है कि प्रकाश कण से बना ना की तरंग से इसलिए प्रकाश की तरंगीय प्रकृति इसकी व्याख्या नहीं कर सकती|
भूविज्ञान पृथ्वी के अध्ययन से संबंधित विज्ञान की शाखा है| क्रिस्चियन हाईगेंस ने प्रकाश का तरंग का सिद्धांत का प्रस्ताव दिया| हिडेको युकावा ने नाभिकीय बलों का सिद्धांत दिया| लेसर यंत्र विकिरणों के उद्दीपित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश प्रवर्धन पर आधारित है| वर्ष 1998 में हन और मीटनर ने यूरेनियम के न्यूट्रॉन प्रेरित विखंडन की परिघटना की खोज की। न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम ऐसा ही एक नियम है। यह नियम बताता है कि ब्रह्मांड में हर पिण्ड हर दूसरे पिण्ड को आकर्षित करता है।
ऐसी भौतिक राशियाँ जो किसी प्रक्रिया में अपरिवर्तित हैं, संरक्षित राशियाँ कहलाती हैं|
भौतिकी में, संरक्षण नियम बताता है कि कुछ राशियाँ एक प्रक्रिया के दौरान तथा उसके बाद अचर रहती हैं| आवेश संरक्षण नियम के अनुसार, आवेश न तो बनाए जा सकते हैं तथा न ही नष्ट हो सकते हैं, परन्तु इन आवेशों एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया जा सकता है।
भौतिकी के दो प्रमुख विचार एकीकरण तथा न्यूनीकरण हैं|
एकीकरण : भौतिकी के अंतर्गत हम विविध भौतिक परिघटनाओं का विश्लेषण कुछ संकल्पनाओं एवं नियमों के पदों में करते हैं|
न्यूनीकरण : इसका तात्पर्य किसी अपेक्षाकृत बड़े, अधिक जटिल निकाय के गुणों को इसके अवयवी सरल भागों की पारस्परिक क्रियाओं तथा गुणों से व्युत्पन्न करना है| भौतिकी तथा प्रौद्योगिकी परस्पर संबंधित हैं| कभी प्रौद्योगिकी नविन भौतिकी को जन्म देती है तो किसी अन्य समय पर भौतिकी नविन प्रौद्योगिकी का जनन करती है| दोनों का समाज पर प्रत्यक्ष प्रभाव है| भौतिकी को सटीक विज्ञान कहा जाता है क्योंकि इसमें समाहित सभी भौतिक राशियों का परिशुद्ध माप सम्मिलित होता है। इसे वैज्ञानिक अविष्कार तथा प्रगति का उपयोग करके यंत्रों तथा मशीनों के उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीकों का अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जाता है। वर्तमान समय में आधुनिक समाज में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में भौतिकी का अभूतपूर्व योगदान है| भौतिकी में हो चुके अथवा वर्तमान में चल रहे अनुसन्धान कार्य एवं परिणाम समाजिक सोच तथा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं| अब हमारे पास बेहतर जीवनशैली है जो टेलीविजन, रेडियो तथा वायुयान जैसे भौतिकी के आविष्कारों के कारण संभव है। भौतिकी ग्रीक शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ प्रकृति है। वास्तव में कुछ मूल नियमों के अनुसार प्रकृति में कई परिघटनाएं हो रही हैं। प्रेक्षिक परिघटनाएँ के साथ उन नियमों का सम्बन्ध स्थापित करना भौतिकी है। भौतिकी का कार्यक्षेत्र विस्तार के बारे में बोध इसके विभिन्न उपविषयों को देखकर हो सकता है| मूल रूप से इसके दो प्रभाव क्षेत्र हैं स्थूल तथा सूक्ष्म| स्टूल प्रभाव क्षेत्र में प्रयोगशाला, पार्थिव तथा खगोलीय स्तर की परिघटनाएँ सम्मिलित होती हैं| जबकि सूक्ष्म प्रभाव क्षेत्र में परमाण्वीय, आण्विक तथा नाभिकीय परिघटनाएँ सम्मिलित होती हैं|
प्राकृतिक परिघटनाओं का अध्ययन करने तथा इन परिघटनाओं को नियंत्रित करने वाले नियमों की स्थापना में वैज्ञानिक द्वारा उपयोग किए जाने वाले चरण-दर-चरण दृष्टिकोण को वैज्ञानिक विधि कहा जाता है।
प्रायः इसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं :
विज्ञान की प्रगति के लिए सिद्धांत और प्रयोग का अंतःक्रिया महत्वपूर्ण है। यह निम्नलिखित उदाहरण से स्पष्ट है : प्रकृति की सममितियों का संरक्षण नियमों से गहरा संबंध है। प्रकृति के ये नियम समय के साथ परिवर्तित नहीं होते। हालांकि, विभिन्न अवस्थितियों में विभिन्न परिस्थितियां होने के कारण स्थान परिवर्तन के साथ परिघटनाएं परिवर्तित हो सकती हैं| दिक्स्थान में स्थानान्तरण के सापेक्ष प्रकृति के नियमों कि सममितिता से रैखिक संवेग संरक्षण नियम प्राप्त होता है| इसी प्रकार, दिक्स्थान की समदैशिकता कोणीय संवेग संरक्षण नियम के आधार है| आवेश संरक्षण नियम तथा मूल कणों के अन्य लक्षणों को भी कुछ अमूर्त सममितियों से सम्बंधित किया जा सकता है| दिक्काल की सममितियाँ तथा अन्य अमूर्त सममितियाँ प्रकृति में मूल बलों के आधुनिक सिद्धांतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| प्रकृति में मूल रूप से चार प्रकार के बल होते हैं: 1. गुरुत्वाकर्षण बल 2. प्रबल नाभिकीय बल 3. विद्युत-चुम्बकीय बल 4. दुर्बल नाभिकीय बल गुरुत्वाकर्षण बल : गुरुत्वाकर्षण बल किन्हीं दो पिण्डों के मध्य उनके द्रव्यमानों के कारण लगने वाला आकर्षण बल है| विद्युत-चुम्बकीय बल : यह आवेशित कणों के मध्य लगने वाला बल है| सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षण तथा विजातीय आवेशों में आकर्षण बल होता है| प्रबल नाभिकीय बल : यह नाभिकीय में न्यूक्लियंस के मध्य लगने वाला बल है। यह लघु परास बल है जोकि लगभग 10-15 m से भी कम दूरी पर कार्य करता है, तथा विद्युत चुम्बकीय बल से लगभग सौ गुना अधिक शक्तिशाली होता है| दुर्बल नाभिकीय बल : कुछ परिघटनाओं जैसे रेडियोएक्टिव नाभिक के बीटा-क्षय में तथा मूल कणों के मध्य कार्य करने वाला बल है| प्रबल नाभिकीय बल के भांति दुर्बल नाभिकीय बल लघु परास बल है|यह नाभिकीय आकार से अधिक दूरियों पर विलुप्त हो जाता है| भौतिकी के तीन संरक्षण नियम हैं : ऊर्जा संरक्षण के नियम : ऊर्जा के संरक्षण के नियम के अनुसार, ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है या एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है, लेकिन ऊर्जा की कुल राशि कभी नहीं बदलती| रेखीय संवेग संरक्षण के नियम : रेखिय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, बाह्य बल की अनुपस्थिति में, एक निकाय की रेखिय संवेग संरक्षित या अपरिवर्तित बनी रहती है। कोणीय संवेग संरक्षण के नियम : कोणीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, यदि निकाय पर आरोपित कुल बाह्य बलाघूर्ण शून्य है, तो उस निकाय की कोणीय संवेग, संरक्षित होता है| B. [EV-2T-2] C. [E2V-1T-3] D. [EV-2T-1] B. [M0LT-1] C. [M0L-1T0] D. [M0L0T-1] वेग-समय ग्राफ, समय अक्ष के समानांतर खींची गई रेखा होगी। एक वस्तु को ऊपर की ओर फेंका गया तो अधिकतम ऊंचाई पर उसका वेग शून्य होगा, परंतु इसका त्वरण गुरुत्वीय त्वरण यानी 9.8 m/s2 होगा, जोकि लंबवत नीचे की ओर कार्य करता है। जब दोनों साइकिल चालक एक ही दिशा में एक दूसरे के समानांतर समान वेग साथ गति करते हैं, तो वे दोनों एक दूसरे को स्थिर दिखाई देते हैं| प्रारंभिक रूप से विभिन्न स्थितियों पर शून्य आपेक्षिक वेग के साथ उपस्थित दो वस्तुओं के लिए स्थिति समय ग्राफ दो सामानांतर रेखाएँ होंगी| 1. एक वस्तु समान समय अंतराल में समान विस्थापन तय करती है| 2. एकसमान गति में वेग मूल बिंदु के चुनाव पर निर्भर नहीं करता है। 3. एकसमान गति में वेग समय अंतराल पर निर्भर नहीं करता है। 4. एक सरल दिशा में अनुदिश एकसमान गति के लिए विस्थापन का परिमाण दूरी के परिमाण के समान होता है।
यदि कोई वस्तु समान समय अंतराल में समान विस्थापन तय करती है, तो उस वस्तु की गति एकसमान वेग कहलाती है|
यदि कोई वस्तु के समय के सापेक्ष में गति या दिशा या दोनों परिवर्तित होते हैं, तो उस वस्तु की गति परिवर्तनीय वेग कहलाती है|
किसी विशेष क्षण पर वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है, जब समय अंतराल अनन्तः सूक्ष्म हो
वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी पथ AB की दूरी से दोगुनी होगी, AB=2x.
क्योंकि, AB = -BA है.
अतः, वस्तु का विस्थापन शून्य होगा|
1.विस्थापन दो बिंदुओं के मध्य वस्तु द्वारा तय की जाने वाली न्यूनतम दूरी है। इसका मात्रक दूरी की तरह ही मीटर है।
2. वस्तु का विस्थापन घनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
3. यह एक सदिश राशि है|
4. यह दो बिंदुओं के मध्य तय की गई दूरी के बराबर या उससे कम हो सकता है।
चाल दूरी तथा दूरी तय करने में लिये गया समय का अनुपात है जबकि वेग समय के सापेक्ष में विस्थापन का अनुपात है।
चाल एक अदिश राशि है जबकि वेग सदिश राशि है। अदिश राशि वह होती हैं जिनमें केवल परिमाण होता है लेकिन सदिश राशि वह होती है जिसके पास परिमाण और दिशा दोनों होते हैं| (i) यह ग्राफ दर्शाता है कि वस्तु एकसमान वेग से गतिमान है। A. वस्तु विरामावस्था में है| B. वस्तु स्थिर वेग के साथ गतिमान है| C. वस्तु स्थिर वेग के साथ प्रारंभिक बिंदु पर वापस आ रही है| D. वस्तु का वेग बढ़ रहा है| E. वस्तु घटते हुए वेग से गतिमान है| F. वस्तु पहले बढ़ते हुए वेग से गतिमान होती है तथा फिर वेग घट जाता है| त्वरण का SI मात्रक m/s2 है| B. g ms-2 C. (g/3) ms-2 D. (g/6) ms-2
चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण की अपेक्षा 1/6 गुणा है।
इसलिए, वस्तु का त्वरण = (g/6) ms-2 होगा|
किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। अतः, वेग के तरह त्वरण में दिशा तथा परिमाण दोनों होते हैं|
गति के दूसरे समीकरण से,
s = ut + ½ at2 दिया गया है, u =0, a = 20 m/s2, D8 =? B. 1/4 C. 1/3 D. 2/3 चूंकि व्यक्ति के साथ-साथ बैग भी समान ऊर्ध्वाधर ऊंचाई से गिरता है तथा गुरुत्वाकर्षण के कारण समान त्वरण का अनुभव करता है; इसलिए, वे ज़मीन तक पहुँचने के लिए एक ही चाल प्राप्त करते हैं|
दिया गया है, s = 3t3 + 7t2 + 5t +8 त्वरण = dv/dt = 3 x 2t = 6t तात्क्षानिक वेग = किसी क्षण में दूरी-समय ग्राफ की प्रवणता,
चूंकि प्रवणता C में अधिकतम है, इसलिए तात्क्षानिक वेग = ds/dt = C पर अधिकतम है|
ऊपर जाने में लिया गया समय (t1) = नीचे आने में लिया गया समय (t2)
अतएव, हाँ| यदि दिशा निरंतर परिवर्तित होती रहे, तो वस्तु की चाल स्थिर होती है किन्तु वेग भिन्न होता है| निर्देशांक अक्ष जिसके सापेक्ष में सभी मापन किए जाते हैं वह निर्देश तंत्र कहलाता है। दोनों समान दूरी पर रुकेंगे। हाँ। एकसमान वृतीय गति में, वस्तु की अचर चाल होती है तथा त्वरण केंद्र की ओर होता है| एक वस्तु के औसत वेग का परिमाण उसके औसत गति के परिमाण के बराबर होता है यदि वह एक सीधी रेखा में अचर वेग के साथ गतिमान है। नहीं। दूरी एक वस्तु द्वारा दो बिंदुओं के मध्य तय की गई कुल पथ-लंबाई है जो कभी शून्य नहीं हो सकती। जबकि यदि वस्तु प्रारंभिक बिंदु पर वापस लौटती है, तो विस्थापन शून्य होता है। नहीं, एकविमीय गति में यदि गति शून्य है, तो वेग आवश्यक रूप से शून्य होगा| नहीं, जब भी गति बदलती है, वेग बदलता है| B. संवेग घटेगा C. गतिज ऊर्जा बढ़ेगी D. गतिज ऊर्जा घटेगी विस्फोट में, गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, क्योंकि विस्फोटक की रासायनिक ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
B. 60 m/s C. 0.1 m/s D. 5 m/s B.
दूरी के दूसरे एक-तिहाई भाग में
C.
दूरी के आखिरी एक-तिहाई भाग में
D.
बराबर ऊर्जा खर्च की जाती है
पहले एक-तिहाई में अधिकतम ऊर्जा खर्च इसलिए होती है क्योंकि आदमी की आरामवस्था की जड़ता को दूर करने के लिए अधिक बल लागू करना पड़ता है।
B. -3 m/s2 C. 0.3 m/s2 D. -0.3 m/s2 B. बल C. संवेग D. कोणिए संवेग B. t C. t-1/2 D. t0 B. 0.5 m/s2 C. 1.05 m/s2 D. 1 m/s2 B. वेग C. त्वरण D. संवेग B. 32.98° C. 16.98° D. 36.98° B. 5 s C. 4 s D. 2 s B. 0.49N ↓ C. 2.49N ↓ D. 0.36N ↓ B. 9.8 N C. 2.8 N D. 8.2 N B. 15.65 m/s C. 6.15 m/s D. 3.15 m/s B. 12532 m C. 13252 m D. 12235 m B. 102 dyne C. 103 dyne D. 10-5 dyne B. 2 s C. 4 s D. 3 s B. -250 N C. -2400 N D. -2800 N नहीं, प्रकृति में वियुक्त बल मौजूद नहीं हो सकता है। प्रत्येक क्रिया के लिए बराबर तथा विपरीत प्रतिक्रिया होती है। इसलिए बल हमेशा जोड़े में पाए जाते हैं। यात्री के शरीर का निचला हिस्सा बस के साथ गति में आता है, जबकि शरीर का ऊपरी भाग विरामावस्था के जड़त्व के कारण विरामावस्था में रहता है, इसलिए यात्री पीछे की तरफ गिरता है। जब एक पत्थर वृत्तिए पथ पर घूमता हैं तो इसका वेग हमेशा वृत्त से स्पर्शरेखीय होता है। जब डोरी टूटती है तो अभिकेन्द्र बल, पत्थर पर कार्ये करने के लिए समाप्त हो जाता हैं। इसलिए न्यूटन के पहले नियम के अनुसार पत्थर अपनी गति की दिशा में दूर उड़ जाता है। B.
C.
D.
B. विस्थापन C. भार D. वेग विद्युत् धारा सदिश राशि नहीं है, क्योंकि यह सदिश योग के नियम का अनुसरण नहीं करती है| वृत्ताकार पथ पर किसी बिंदु पर कण का वेग सदिश उस बिंदु पर स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है| एक क्रम में लिए गए चार सदिश जिसके परिमाण और दिशा चतुर्भुज के चार भुजाओं द्वारा व्यक्त किया जाता है उसका परिणाम शून्य होगा। सदिश योग के त्रिभुज नियम के अनुसार, यदि एक ही समय में एक कण पर कार्य करने वाले दो सदिशों के परिमाण तथा दिशा को त्रिभुज की दो भुजाओं द्वारा दर्शाते हैं, तो उनके परिणामी सदिश के परिमाण तथा दिशा को त्रिभुज की तीसरी भुजा द्वारा व्यक्त किया जाता है|
A. सूक्ष्म परिघटनाओं पर विचार किया जाता हैSOLUTION
A. वस्तुओं की समग्र गति पर विचार किया जाता है जबकि यांत्रिकी पर नहीं।SOLUTION
A. वैद्युत गतिकी द्वारा समझाया गया हैSOLUTION
A. वैद्युत गतिकी द्वारा विचार किया जाता हैSOLUTION
A. क्रमशः सूक्ष्म तथा स्थूल प्रभावी क्षेत्र में SOLUTION
A. एकीकरण को दर्शाता हैSOLUTION
A. एकीकरण को दर्शाता हैSOLUTION
Right Answer is: B
SOLUTION
A. प्रकाशविद्युत प्रभाव के कारण फोटोइलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन प्रयोग सेSOLUTION
A. परावर्तन के सिद्धांत कीSOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. [EV-1T-2]SOLUTION
A. विमाहीन हैSOLUTION
A. [M0L0T0]SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION

Right Answer is:
SOLUTION
(ii) यह ग्राफ दर्शाता है कि वस्तु किसी प्रारंभिक वेग से गतिमान है तथा उसमें एकसमान त्वरण हो रहा है।
(iii) यह ग्राफ दर्शाता है कि वस्तु किसी प्रारंभिक वेग से गतिमान है तथा उसमे मंदन हो रहा है|SOLUTION
SOLUTION

SOLUTION

SOLUTION

SOLUTION

SOLUTION


SOLUTION

Right Answer is: B
SOLUTION
त्वरण का CGS मात्रक cm/s2 है|
A. 6g ms-2SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is: C
SOLUTION
A. 35 m हैSOLUTION
वस्तु की ऊर्ध्वाधर नीचे की गति के लिए, हमारे पास है
45 m = (0 + ½ x 10 x t2)m
या, t = 3s
जैसा की हमे जानते हैं,
Dn = u + ½ a (2n-1)
D3 = [u + ½ a (2x 3-1)] m =
(0 + ½ x 10 x 5) m = 25 m
A. 90 m हैSOLUTION
जैसा की हम जानते हैं,
Dn = [u + ½ a (2n-1)
∴ D8 = 0 + ½ x 20 x [(2x8)-1]] m
= (10 x 15) m = 150 m
A. 1/2SOLUTION
A. (vm) > (vb) होनी चाहिएSOLUTION
यहाँ, s मीटर में है, तथा t सेकंड में हैSOLUTION
∴ वेग, v = ds/dt = 9t2 + 14t +5
∴ त्वरण, a = dv/dt = 18t +14
∴ त्वरण, a(t=1) = 18 + 14 = 32 m/s2.
A. असमान त्वरण से गुज़र रही हैSOLUTION
क्योंकि वेग समय t पर निर्भर करता है; इसलिए, वस्तु में असमान त्वरण है।
A. D पर हैSOLUTION
SOLUTION
t1 + t2 = 8 s
या, t2 + t2 = 8 s
या, t2 = 4 s
गेंद की उच्चतम बिंदु से ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर पृथ्वी की सतह तक जाने में तय की गई दूरी:
हमारे पास है
u =0; a = 10 m/s2; t= 4 s, s =?
गति के दूसरे समीकरण से,
s = ut + ½ at2
या, s = (0 + ½ x 10 x 42)m
= 80 m
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. संवेग बढ़ेगाSOLUTION
A. 1.5 m/sSOLUTION
A.
दूरी के पहले एक-तिहाई भाग में
SOLUTION
A. 3 m/s2SOLUTION
A. त्वरणSOLUTION
A. t3/2SOLUTION
A. 0.05 m/s2SOLUTION
A. चालSOLUTION
A. 63.98°SOLUTION
A. 6 sSOLUTION
A. 1.49N ↓SOLUTION
A. 0.98 NSOLUTION
A. 25 m/sSOLUTION
A. 15232 mSOLUTION
A. 105 dyneSOLUTION
A. 5 sSOLUTION
A. -2500 NSOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A.
SOLUTION
A. विद्युत् धारा SOLUTION
B. विस्थापन
C. भार
D. वेग
Right Answer is: SOLUTION
B. विस्थापन
C. भार
D. वेग
Right Answer is: SOLUTION

B. विस्थापन
C. भार
D. वेग
Right Answer is: SOLUTION
B. विस्थापन
C. भार
D. वेग
Right Answer is: SOLUTION