
हाँ, क्योंकि एकसमान वृत्तीय गति में, चाल अचर होती है, लेकिन इसकी दिशा लगातार परिवर्तित होती रहती है ताकि दिशा में परिवर्तन के कारण वस्तु त्वरित हो।







सदिश योग के समानांतर चतुर्भुज नियम के अनुसार, यदि एक ही समय में एक कण पर कार्य करने वाले दो सदिशों के परिमाण तथा दिशा को, एक बिंदु से खींचे गए समानांतर चतुर्भुज के दो आसन्न भुजाओं द्वारा दर्शाए जाते हैं, तो उनके परिणामी सदिश के परिमाण तथा दिशा को उसी बिंदु से खिंची गई समानांतर चतुर्भुज के विकर्ण द्वारा व्यक्त किया जाता है|

मान लें, PA = h+x गेंद द्वारा प्राप्त की गई अधिकतम ऊँचाई है|
A पर, u= O. B बिंदु P के ऊपर h ऊँचाई पर है तथा C बिंदु P के निचे h दुरी पर है| B पर v1 वेग है|


मुख्य रूप से सात प्रकार के सदिश होते हैं:
समान सदिश : यदि दो सदिश समान परिमाण रखते हैं और एक ही दिशा में अनुदिश होते हैं तो वे समान सदिश कहलाते हैं|

ऋणात्मक सदिश: दो समान परिमाण के सदिश यदि विपरीत दिशा में अनुदिश हो तो वे ऋणात्मक सदिश कहलाते हैं।

एकांक सदिश : सदिश जिसका परिमाण एक हो वे एकांक सदिश कहलाते हैं| यह विमाहिन होता है तथा केवल दिशा को व्यक्त करता है|

सह-प्रारंभिक वैक्टर: एक ही प्रारंभिक बिंदु से प्रारंभ होने वाले सदिश को सह-प्रारंभिक सदिश कहा जाता है।

लाम्बिक सदिश: सदिश जो एक-दूसरे के लिए लंबवत होते हैं उसे लाम्बिक सदिश कहा जाता है।

संरेखीय सदिश : वे सभी सदिश जो अपने परिमाण के निरपेक्ष एक ही रेखा के अनुदिश हो, वे संरेखीय सदिश कहलाते हैं|
स्थिति और विस्थापन सदिश : एक वस्तु की स्थिति मूल बिंदु के सापेक्ष में व्यक्त करने वाले सदिश को स्थिति सदिश कहा जाता है।
वे सदिश जो किसी वस्तु का दिए गए समय अंतराल में एक बिंदु से दूसरे बिंदु के मध्य का विस्थापन दर्शाए, वे विस्थापन सदिश कहलाते हैं|


A. 1.49N ↓
B. 0.49N ↓
C. 2.49N ↓
D. 0.36N ↓
A. 0.3 N
B. 30 N
C. 300 N
D. 3000 N
A. शून्य
B. mvn
C. Mvn
D. Mvn/m
एक गोली के संवेग में परिवर्तन = mv इसलिए, अगर n गोलियाँ प्रति सेकंड दागी गई है तो संवेग के परिवर्तन की दर होगी = mnv
समरूपता का सिद्धांत यह बताता है कि समीकरण के दोनों पक्षों पर प्रत्येक पद का विमा समान रहना चाहिए।
यदि किसी राशि की नियत विमाएँ हैं तो उसका एक मात्रक अवश्य होगा।
जो राशियाँ एक-दूसरे से स्वतंत्र होती हैं, उन्हें मूल राशियाँ कहा जाता है। लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय मूल राशि हैं। इन राशियों के मात्रक को मूल मात्रक कहा जाता है। हमारे पास कुछ अन्य मूल राशियाँ जैसे ताप, प्रकाशीय तीव्रता, धारा और कणों की मात्रा है। इन राशियों का मात्रक क्रमशः केल्विन, कैंडेला, एम्पियर और मोल हैं।
इनके अलावा, दो पूरक मात्रकों को भी परिभाषित किया गया है। यह समतल कोण के लिए रेडियन और ठोस कोण के लिए स्टेरेडियन है।
मात्रक प्रणाली के लाभ हैं: 1: यह मात्रकों की सुसंगत प्रणाली है। 2: मात्रकों की यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत है। 3: मात्रकों की यह प्रणाली मात्रकों की cgs प्रणाली के बहुत करीब है और इसे आसानी से उस प्रणाली में बदला जा सकता है।
4: इस प्रणाली में सभी गुणज और अपवर्तक को 10 की घात के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
भौतिक राशि की तुलना करने के लिए संदर्भ के रूप में जो मानक लिया जाता है उसे मात्रक कहा जाता है। मात्रक की विशेषताएँ हैं: 1: इसे अच्छी तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए 2: यह आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। 3: यह सभी स्थानों पर आसानी से प्रस्तुत करने योग्य होना चाहिए।
4: यह समय, स्थान और अन्य भौतिक स्थितियों के साथ नहीं बदलना चाहिए।
किसी भौतिक राशि का परिमाण संख्याओं में व्यक्त करने को मापन कहा जाता है। मापन मूलतः तुलना करने की एक प्रक्रिया है। इसमें किसी भौतिक राशि की मात्रा की तुलना एक पूर्वनिर्धारित मात्रा से की जाती है। जैसे कमरे की लंबाई 17 m है। इसका मतलब है कि कमरे की लंबाई में 1 m 17 बार समाहित है।
समय के बहुत बड़े अंतराल को कार्बन डेटिंग या रेडियोधर्मी डेटिंग की विधि द्वारा मापा जाता है। कार्बन डेटिंग का उपयोग जीवाश्मों की आयु को मापने के लिए किया जाता है और यूरेनियम डेटिंग का उपयोग चट्टान की आयु का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस आयु की गणना रेडियोधर्मी परमाणुओं की संख्या के अनुपात को ध्यान में रखकर की जा सकती है, जो कि अनिर्दिष्ट परमाणुओं की संख्या में क्षय के समान होता है।
जल के नीचे वस्तुओं को ढूँढने व उनके स्थान का पता लगाने के लिए सोनार (SONAR) में पराश्रव्य तरंगों का प्रयोग होता है। यह तरंगों के परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है जिसे प्रतिध्वनि (ECHO) कहते हैं। तेज पराश्रव्य संकेत समुद्र के तल की ओर भेजा जाता है। संकेत समुद्र के तल से या मार्ग में कुछ बाधा से टकराने पर वापस परावर्तित होता है। इन तरंगों को जहाज में रिसीवर द्वारा प्राप्त किया जाता है। पूरे कार्य के लिए कुल समय, t है और पराश्रव्य तरंगों के वेग, v है।
सूत्र d = v·t/2 का उपयोग करके बाधा या समुद्र की गहराई की गणना की जा सकती है।
एक लेजर किरण तीव्र, एकवर्णी तथा एकदिश किरण का स्रोत है। चंद्रमा की ओर लेजर किरण पुंज भेजकर पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी निर्धारित की जा सकती है। यदि c लेज़र किरण पुंज का वेग है और t, लेज़र किरण पुंज द्वारा चंद्रमा की ओर जाने और वापस आने में लिया गया कुल समय है, तो सूत्र, d = c·t/2 का उपयोग करके, पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी की गणना की जा सकती है। सूत्र में 2 का कारक आ रहा है क्योंकि दोगुनी दूरी के लिए समय का उल्लेख किया गया है।
चंद्रमा का आकार लंबन विधि द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। मान लीजिए कि चंद्रमा का व्यास D है, जिसे मापा जाना है। कोण O का मान प्राप्त करने के लिए चंद्रमा के दोनों किनारों पर पृथ्वी के एक बिंदु E से दूरबीन को स्थापित करें। कोण को चांद का कोणीय व्यास कहा जाता है। यदि d पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी है तो सूत्र θ = D/d का उपयोग करके, D ज्ञात किया जा सकता है।

सार्थक अंक वे अंक हैं, जिन्हें माप में माना जाता है। सार्थक अंकों को मापने के लिए निम्नलिखित नियम हैं: 1: सभी शून्येतर अंक सार्थक हैं, जैसे अंक 3476, इसमें 4 सार्थक अंक हैं। 2: शून्येतर अंकों के बीच सभी शून्य सार्थक हैं। जैसे 14005, इसमें 5 सार्थक अंक हैं। 3: दशमलव भाग में अंतिम शून्येतर अंक के दाईं ओर सभी शून्य महत्वपूर्ण हैं। 0.00800 में 3 सार्थक अंक हैं। 4: शून्येतर अंक के दायीं तरफ सभी शून्य सार्थक अंक नहीं हैं। 378000 में 3 सार्थक अंक हैं।
5: एक से कम संख्या में, दशमलव बिंदु के दाईं ओर सभी शून्य और शून्येतर के बाईं ओर सभी शून्य सार्थक नहीं हैं। जैसे 0.0084 में 2 सार्थक अंक हैं।
दिया गया है, u=0, s=15 m तथा t=15 s
a=? ; v =?
गति के दूसरे समीकरण द्वारा,
s = ut + ½ at2
या, 15 m = (0 + ½ x a x 152) m
या, a = (2/15) m/s2
गति के पहले समीकरण से, v = u + at
या, v = (0 + [2/15] x 15) m/s
= 2 m/s
अधिकतम वेग
वस्तु 5वें तथा 6ठे सेकंड में समान दूरी तय करती है| अगर वस्तु अधिकतम ऊंचाई पर 5 वें सेकंड में पहुँच जाती है, तो
t= 5 s, a = -9.8 m/s2 तथा v=0 का उपयोग करते हुए|
गति के पहले समीकरण द्वारा,
v = u + at दिया गया, s = 6t2-t3 विस्थापन प्रारंभिक बिंदु तथा अंतिम बिंदु के मध्य वस्तु द्वारा तय की जाने वाली सबसे न्यूनतम दूरी है। यहां, कुल विस्थापन शून्य है|
एकसमान गति के दौरान, वस्तु समान समय अंतराल में समान विस्थापन को तय करती है। इसलिए, औसत तथा तात्क्षणिक वेग समान होते हैं।
B. R/r C. 1 D. (R/r)1/2 B. 40 m C. 20 m D. 30 m B. C. D. B. C. D. B. 30 m C. 25 m D. 20 m B. 349 km/h2 C. 339 km/h2 D. 434 km/h2 B. 45o C. 60o D. 90o B. 30o C. 45o D. 60o B. R C. 2R D. R/2 B. 45o C. 60o D. 90o वृत्तिय पथ पर किसी बिंदु पर कण का वेग सदिश की दिशा उस बिंदु पर स्पर्श रेखा के अनुदिश होती है तथा त्वरण सदिश की दिशा केन्द्र की ओर होती है| अतः, उनके बिच का कोण 90o है| जब निकायों को संपूरक कोणों के साथ प्रक्षेपित किया जाता है, तब उनकी क्षैतिज परास समान होती हैं। B. ऊर्ध्वाधर ऊंचाई का दोगुना C. ऊर्ध्वाधर ऊंचाई का चार गुना D. ऊर्ध्वाधर ऊंचाई का तीन गुना B. विद्युत् विभव C. स्वर्ण पत्र विद्युतदर्शी का आवेश D. किसी निकाय का बलाघूर्ण किसी निकाय का बलाघूर्ण एक सदिश राशि है क्योंकि इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों हैं। B. विद्युत् विभव C. संवेग D. भार अदिश राशि वे हैं जिसके पास केवल परिमाण है लेकिन कोई दिशा नहीं है। विद्युत विभव को छोड़कर सभी के पास परिमाण तथा दिशा दोनों हैं। B. 2 C. -1 D. 0 B. C. D. B. 28.69 N C. 69.28 N D. 96.28 N B. 27% C. 9% D. 6% B. r/y के C. ωt/r के D. yr/ωt के ωt तथा kx दोनों विमाहीन हैं| दिए गए विकल्पों में से, केवल r/y विमाहीन है।
B. प्रतिबल तथा ऊर्जा C. बल तथा प्रतिबल D. प्रतिबल तथा कार्य प्रतिबल = कार्य = [ML2T-2]
B. 2% C. 0.2% D. 0.02% B. A + B C. A - B D. A = B यदि दो भौतिक राशियाँ के अलग-अलग विमीय हैं तो उन्हें एक साथ जोड़ा या घटाया नहीं जा सकता है। उन्हें गुणा या विभाजित किया जा सकता है।
B. N>H>P C. P>H>N D. N>P>H
प्रोटोन का आकार, P = 10-15 m,
नाभिक परमाणु का आकार, N = 10-14 m,
हाइड्रोजन परमाणु का आकार, H = 10-10 m
अतः, H>N>P
B. 7% C. 9% D. 10% B. N - 1 C. 0.1/N D. N-1 - 1 B. [LT-1] C. [L2T-1] D. [ML-1]
F = [MLT-2]
V =[L1T-1]
दिया गया, F = Kv2
अतः, [MLT-2] = K [LT-1]2 = K[L2T-2]
K=[ML-1]
B. [ML2T-2K-1] C. [ML2T-1K] D. [ML2T-1K-1] B. [L4] C. [ML5T] D. [ML5T-2] B. C. D. B. 0.62 C. 5.66 D. 4.88 B. 3.5 gm/cm3 C. 3.48 gm/cm3 D. 3.4 gm/cm3 B. ML2T-3 C. ML1T-3 D. ML3T-3 B. a = ML2T-2, b = ML0T-2 C. a = MLT-2, b = ML0T-2 D. a = ML0T-2, b = MLT-2 B. ML2T-3 C. ML1T-3 D. ML3T-3 बलाघूर्ण एवं कार्य [ML-1T-2] आयाम वाली दो भौतिक राशियाँ हैं। दाब, प्रतिबल तथा यंग प्रत्यास्थता मापांक [ML-1T-2] आयाम वाली तीन भौतिक राशियाँ हैं। परमाणु के आकार को मापने के लिए रदरफोर्ड विधि का उपयोग किया जाता है। 1:2 B. 1:1 C. 4:1 D. 1: 4 Mgl B. ½ Mgl C. 2 Mgl D. शून्य 50% B. 100% C. 125% D. 150% B. C. D. जूल B. इलेक्ट्रॉन वोल्ट C. कैलोरी D. किलोवाट प्रसिद्ध भौतिकविद जैम्स प्रेसकॉट जूल के नाम के बाद कार्य तथा ऊर्जा दोनों के निरपेक्ष S.I मात्रक को जूल के रूप में जाना जाता है| शक्ति का S.I मात्रक वाट तथा इसका बड़ा मात्रक किलोवाट (kW) के रूप में जाने जाते है। B. C. D.
किया गया कार्य शून्य है, क्योंकि विस्थापन शून्य है|
B. C. D. P =106 kW
= 106 x 103 J/s
चूँकि,
1 day =24 h
=24x60x60 s
प्रतिदिन कुल ऊर्जा उत्पाद
= 109 x24x60x60 J
50 J B. 75 J C. 100 J D. 200 J B. C. D. यहाँ, B. C. D.
26 J B. 23 J C. 29 J D. किया कार्य गया, B. C. m1:m2 D.
विरोधी बल के प्रतिकूल किया गया कार्य = 100 × 2 = 200 J
इसलिए b पर शेष ऊर्जा,
b = 800 – 200 = 600 J
B.
C.
D.
B. C. D. B. ऋणात्मक C. शून्य D. ये सभी घर्षण बल और विस्थापन की दिशा के आधार पर घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। टक्कर के बाद पृथक्करण का सापेक्षिक वेग तथा टक्कर से पहले सन्निकट सापेक्षिक वेग का अनुपात प्रत्यानयन गुणांक के रूप में जाना जाता है। हम जानते है कि शक्ति, P = F. V प्रशनानुसार, P = (4500 न्यूटन) x (2 मीटर / सेकंड) =9 KW किया गया कार्य निकाय पर आरोपित बल तथा उस में उत्पन्न विस्थापन के गुणन के बराबर होता है। चूंकि, किसी स्थान पर सुटकेश को पकड़ने में विस्थापन शून्य होता है। इसलिए, किया गया कार्य भी शून्य होता है। घर्षण बल, संपर्क पृष्ट के क्षेत्र पर निर्भर नहीं करता है। इस प्रकार बड़े ब्रेक तथा छोटे ब्रेक का एक ही प्रभाव होगा। हालांकि, तेज़ी से घिसने के कारण, छोटा ब्रेक पहले खराब हो सकता हैं। यह घर्षण बल को बढ़ाने के लिए किया जाता है। अगर पहियों की सतह अनियमित नहीं होगी, तो पहिये तथा सड़क के बीच घर्षण बल बहुत कम होगा। कम घर्षण के कारण, ब्रेक लागू होने पर मोटर गाड़ी सड़क पर फिसल सकती है। यह न्यूटन के गति के तीसरे नियम के कारण है। आदमी नाव से बाहर कूदता है, तो वह इस प्रक्रिया में नाव को विपरीत दिशा में धकेलता है तथा इसकी प्रतिक्रिया में, नाव आदमी को बाहर की तरफ धकेलती है। पृथ्वी में उत्पन्न त्वरण इस प्रकार है, a=F/Me, Me पृथ्वी की संहति। क्योंकि पृथ्वी की संहति बहुत अधिक है इसलिए इसमें उत्पन्न त्वरण नगणय होता है। इसी कारण पृथ्वी की गति ध्यान देने योग्य नहीं है। हालांकि, गेंद में उत्पादित त्वरण a=F/m द्वारा दिया जाता है। चूंकि m बहुत छोटा है इसलिए गेंद में उत्पादित त्वरण अधिक है। इसलिए गेंद की नीचे की गति आसानी से ध्यान देने योग्य है। निकाय का त्वरण होगा,
A. 50 m हैSOLUTION
A. 45 ms-1 होगीSOLUTION
= समय-त्वरण ग्राफ के अंतर्गत क्षेत्रफल
= (½ x 12 x 15) ms-1
= 90 ms-1
A. s1= s2 होगाSOLUTION
A. 19 m/s हैSOLUTION
A. 2 s हैSOLUTION
वेग,
v = ds/dt = 12t – 3t2
या, v = 12t – 3t2 ........ (1)
अगर वेग शून्य हो, तो
समीकरण (1) से प्राप्त होता है,
0 = 12t – 3t2
या तो, t =0 s या, t= 4.0 s
क्यूंकि समय शून्य नहीं हो सकता; अतएव, t=4.0 s होगा|
A. 0 हैSOLUTION
A. असमान गति से गतिमान हैSOLUTION
SOLUTION


SOLUTION

A. r/RSOLUTION

A. 50 mSOLUTION

A. ![]()
![]()
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![]()
SOLUTION


A. ![]()
![]()
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SOLUTION

A. 10 mSOLUTION

A. 439 km/h2SOLUTION

A. 30oSOLUTION


A. 15oSOLUTION

A. R/4SOLUTION

A. एकसमान त्वरण के साथSOLUTION

A. 30oSOLUTION
A. उनके क्षैतिज परास समान होंगीSOLUTION
A. ऊर्ध्वाधर ऊंचाई के समान SOLUTION

A. एक धातु में प्रवाहित विद्युत् धाराSOLUTION

A. बल SOLUTION

A. 6SOLUTION

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A. ![]()
![]()
![]()
![]()
SOLUTION

A. 18 NSOLUTION

A. 3%SOLUTION
A. r/ω केSOLUTION
A. बलाघूर्ण तथा कार्यSOLUTION
A. 22%SOLUTION
A. A/BSOLUTION
A. H>N>PSOLUTION
A. 5%SOLUTION
A. NSOLUTION
A. [MLT-2]SOLUTION
A. [ML2T-2K]SOLUTION
A. [ML-1T-3]SOLUTION
A. 



SOLUTION
A. 1.88SOLUTION
A. 3.488 gm/cm3SOLUTION
A. ML2T-2 SOLUTION
A. a = ML2T-2, b = ML1T-2SOLUTION
A. ML2T-2SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
A. SOLUTION

A. SOLUTION

A. SOLUTION

A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: CSOLUTION
N,
m का विस्थापन पैदा करता है। किया गया कार्य कितना होगा?
A. 25 JSOLUTION
= 2x2+3x3+4x4 = 4+9+16 =29 J
A. m1:m2![]()
![]()
SOLUTION
B.
400J
C.
600J
D.
800J
Right Answer is: CSOLUTION
A.
SOLUTION
A. 



SOLUTION
A. धनात्मकSOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D. ये सभी
Right Answer is: SOLUTION
