तल तक पहुँचने में खोयी गयी स्थितिज ऊर्जा = – mgh। ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है की स्थितिज ऊर्जा का परिमाण घट रहा हैं।


रॉकेट एक स्वयं निहित उड़ान निकाय है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों, इसे जलाने के लिए आवश्यक ईंधन तथा ऑक्सीजन, रॉकेट में स्वयं निहित हैं। इस कारण से रॉकेट मुक्त स्थान में आगे बढ़ सकता है। दूसरी तरफ, जेट विमान वायुमंडल से अपने ईंधन को जलाने के लिए ऑक्सीजन लेते हैं। इसलिए वे वायु मुक्त या मुक्त स्थान में काम नहीं कर सकते हैं।

सड़क और टायर के बीच घर्षण बल, घुमावदार सड़कों पर वाहन को आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करता है। यदि घर्षण बल वाहन को आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करने के लिए अपर्याप्त है, तो यह फिसल सकता है तथा सड़क से बाहर निकल जाएगा। इससे बचने के लिए, सड़क को ढालू किया जाता है यानी सड़क के बाहरी किनारे को भीतरी किनारे से थोड़ा ऊपर उठाया जाता है।
संवेग संरक्षण नियम यहाँ वैध है। गेंद और पृथ्वी का संयुक्त संवेग संरक्षित है। गेंद पृथ्वी को उसी बल से आकर्षित करती है जिससे पृथ्वी गेंद को आकर्षित करती है। जब गेंद ऊपर की तरफ बढ़ती है, तो इसका संवेग ऊपर की दिशा में घट जाता है तथा पृथ्वी का संवेग बढ़ जाता है।
तार की लंबाई और लंबवत के साथ बलों को हल करें,








A.
18.0 J
B.
13.5 J
C.
9.0 J
D. 4.5 J
किया गया कार्य= F/x आरेख के तहत क्षेत्र = समलम्ब का क्षेत्रफल OABC =
A.
B.
![]()
C.
![]()
D.
सिद्धांत बताता है कि यदि कोई बाहरी बल निकाय पर कार्य नहीं करता है, तो निकाय का कुल रेखीय संवेग नियत रहेगा।
बेलन पर कार्यरत बल आघूर्ण है,
बेलन की घूर्णी गतिज ऊर्जा
मान लीजिए कि एक दृढ पिण्ड पर F बल आरोपित हो रहा है।
किसी व्यास के परितः ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण .
सामानांतर अक्ष की प्रमेय द्वारा, स्पर्श रेखा के परितः गोले का जड़त्व आघूर्ण होगा-
निकाय के द्रव्यमान के केंद्र की चाल बच्चे की गति के निरपेक्ष ही रहेगी क्योंकि निकाय पर कोई बाहरी बल नहीं लग रहा है।
गोली द्वारा निष्पक्ष कोणीय संवेग
A. 32 N
B. 56 N
C. 72 N
D. 0 N

A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A. 
B. 
C. 
D. 

A. 4 W
B. 2 W
C. 0.25 W
D. 0.5 W

A. (m2GM2r)1/2
B. (m2GMr)1/2
C. (mGMr)1/2
D. (mGM2r)1/2

A. 4 N
B. 0.25 N
C. 0.5 N
D. 2 N

A. 129
B. 249
C. 300
D. 365


A. ![]()
B. ![]()
C. ![]()
D. ![]()

A. F
B. 0
C. 2F
D. 3F
गुरुत्वीय बल वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है। अतः, उपग्रह पर कुल बल शून्य है|
B. g/2 C. 4g D. 2g B.
C.
D.
B. C. D. B. C. D. 0 चूंकि वस्तु का वेग पलायन चाल से कम है, तो वस्तु तब तक ऊपर की ओर गतिमान रहेगा जब तक कि उसका अंतिम वेग शून्य न हो। अतः, अधिकतम ऊँचाई पर वेग 0 होगा|
किसी वस्तु का भार इस प्रकार दिया जाता है,
W = mg
चूंकि पृथ्वी के पृष्ठ के निचे जाने पर गुरुत्वीय त्वरण कम हो जाता है इसलिए वस्तु का भार भी कम हो जाता है।
B. 2.68 × 1011 m C. 6.78 × 1011 m D. 7.68 × 1011 m तुल्यकाली उपग्रहों का व्यापक रूप से दूरसंचार के लिए उपयोग किया जाता है। यदि पृथ्वी का घूर्णन बंद हो जाए, तो वस्तु का भार बढ़ जाएगा। यदि किसी कृत्रिम उपग्रह की पृथ्वी-तल से ऊँचाई इतनी हो कि इसका परिक्रमण काल ठीक पृथ्वी की अक्षीय गति के परिक्रमण काल (24 घंटे) के बराबर हो, तो वह उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर रहेगा। इस प्रकार के उपग्रह को तुल्यकाली या भू स्थायी उपग्रह कहते हैं। एकांक द्रव्यमान को अनन्त से गुरुत्वीय क्षेत्र के भीतर किसी बिंदु तक लाने में क्षेत्र के विरुद्ध कृत कार्य उस बिंदु पर गुरुत्वीय विभव कहलाता है| ब्रह्मांड में हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को एक बल के साथ आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है तथा उनके मध्य की दूरी के वर्ग के व्युतक्रमानुपाती होता है। पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी पिंड को पृथ्वी के पृष्ठ से ऊपर की ओर फेंके जाने पर वह गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है अथवा पृथ्वी पर वापस नही आता। ग्रह गति के लिए केप्लर के तीन नियम इस प्रकार हैं : 1. कक्षाओं का नियम : सभी ग्रह दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में गति करते हैं तथा सूर्य इसकी, एक नाभि पर स्थित होता है| 2. क्षेत्रफलों का नियम : सूर्य से किसी ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय अंतरालों में समान क्षेत्रफल प्रसर्प करती है| 3. आवर्त कालों का नियम : किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उस ग्रह द्वारा अनुरेखित दीर्घवृत्त के अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के अनुक्रमानुपाती होता है|
आयतनात्मक प्रत्यास्थता गुणांक के व्युत्क्रम को संपीड्यता कहते हैं।
संपीड्यता को अक्षर k द्वारा निरूपित किया जाता है| B. Kg/ms2 C. Kg/m2s2 D. Kg/m3s2 प्रत्यास्थता गुणांक, प्रतिबल तथा विकृति का अनुपात है।
B. 1 C. -1 D. अनंत
B. समान रहेगा C. दोगुना D. एक चौथाई B. 105 N C. 104 N D. 103 N
B. 1.33 x 1012 Nm-2 C. 7.5 x 1010 Nm-2 D. 3 x 1010 Nm-2 हम जानते हैं,
Y= प्रतिबल /विकृति
प्रतिबल = Y x विकृति B. C. D. तार को खींचने में किया गया कार्य= 1/2 x प्रतिबल x विकृति x आयतन B. 2 x 1011 N C. 2 x 1010 N D. 2 x 106 N तार की लंबाई को दोगुना करने के लिए अगर आवश्यक बल F है, तो B. 2F C. 3F D. 4F
इसलिए, यदि लंबाई 1mm तक बढ़ाने के लिए बल F की आवश्यकता है, तो 2 mm तक लंबाई बढ़ाने के लिए आवश्यक बल 2F होगा|
B. बिंदु Q C. बिंदु R D. बिंदु S ग्राफ का प्रारम्भिक भाग OP एक सीधी रेखा है जिससे स्पष्ट होता है कि बिंदु P तक तार की लम्बाई में वृद्धि उस पर लटकाए गए भार के अनुक्रमानुपाती है| इसलिए भाग OP में हुक का नियम मान्य है तथा बिंदु P पर प्रतिबल के मान को अनुपातिक सीमा कहते हैं|
B. प्रतिबल x विकृति x आयतन C. (प्रतिबल2 x आयतन)/ 2Y D. ½ x Y x प्रतिबल x विकृति x आयतन प्रत्यास्थ ऊर्जा =1/2 x प्रतिबल x विकृति x आयतन
विकृति= प्रतिबल/Y
इसलिए,
प्रत्यास्थ ऊर्जा E= 1/2 x प्रतिबल/Y x प्रतिबल x आयतन
प्रत्यास्थ ऊर्जा E=प्रतिबल2 x आयतन/ 2Y
हुक के नियम के अनुसार, प्रत्यास्थता गुणांक, प्रतिबल तथा विकृति का अनुपात है। यह पिण्ड के पदार्थ की प्रकृति, पिण्ड की विरूपण होने कि प्रकृति तथा पिण्ड के तापमान पर निर्भर करता है।
B. अनुदैर्ध्य विकृति तथा अभिलंब प्रतिबल के अनुपात से C. अनुदैर्ध्य विकृति तथा अभिलंब प्रतिबल के गुणनफल से D. अभिलंब प्रतिबल तथा अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात का पारस्परिक से यंग गुणांक वह पद है जो कि किसी ठोस पिण्ड की लंबाई में परिवर्तन के प्रतिरोध को मापता है।
B. अनंत C. 1 D. परिमित आटा,मिट्टी आदि जैसे पदार्थों से प्रत्यारोपित बल को हटाने पर यह पदार्थ अपनी आकृति और आकार में वापस नहीं आ पाते हैं।। ऐसे पदार्थों को प्लास्टिक पदार्थ कहा जाता है।
B. Q C. R D. S ग्राफ में, बिंदु R द्रव्य की चरम तनन सामर्थ्य है| इस बिंदु के आगे प्रत्यारोपित बल को घटाने पर भी अतिरिक्त विकृति उत्पन्न होती है और बिंदु S पर विभंजन हो जाता है|
B. C. D. अभिलंब प्रतिबल तथा आयतन विकृति के अनुपात को आयतन प्रतिबल कहते हैं। इसे अक्षर B द्वारा दर्शाया जाता है।
विकृति के तीन प्रकार होते हैं- अनुदैर्ध्य विकृति, आयतन विकृति तथा अपरूपण विकृति| एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं|प्रतिबल की S.I इकाई N/m2 है| इसे पास्कल (Pa) से भी निरूपित किया जाता है| प्रतिबल का विमीय सूत्र [ML–1T–2] होता है| पदार्थ जैसे गुब्बारे, रबड़ बैंड, धातु स्प्रिंग आदि पर एक नीयत सीमा तक प्रत्यारोपित बल को हटाने पर ये अपनी प्रारंभिक आकृति एवं आकार को पुनः प्राप्त कर लेते हैं। इस तरह के पदार्थों को प्रत्यास्थ पदार्थ कहा जाता है। प्रत्यास्थ सीमा वह सीमा है जिसमें पिण्ड प्रत्यास्थता के गुण को बनाए रखता है तथा प्रत्यारोपित बल को हटाने पर अपनी प्रारंभिक आकृति एवं आकार को पुनः प्राप्त कर लेता है| समान विरुपक बल लगाने पर इस्पात की स्प्रिंग, तांबे की स्प्रिग की तुलना में कम खिंचती है क्योंकि इस्पात का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक होता है| इसके अतिरिक्त विरूपक बल हटा लेने पर इस्पात की स्प्रिंग तांबे की स्प्रिंग की तुलना में शीघ्र अपनी पूर्व अवस्था प्राप्त कर लेती है| यातायात के कारण पुल सदैव प्रतिबल और विकृति के दाब में रहते हैं| इस कारण पुल में उपयोग किए जाने वाले पदार्थ अपनी प्रत्यास्थता सामर्थ्य खो देते हैं, जिस कारण पुल में प्रतिबल के समान मान के लिए बहुत अधिक विकृति उत्पन्न हो जाती है और पुल के गिरने की सम्भावना बढ़ जाती है| पॉयसन अनुपात, पार्श्विक विकृति तथा अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात है| अनुदैर्ध्य विकृति : विरूपण बल के कारण लम्बाई में परिवर्तन से जो विकृति उत्पन्न होती है, अनुदैर्ध्य विकृति कहलाती है। माना विरूपण बल के कारण ΔL मीटर लम्बी छड़ की लम्बाई में वृद्धि है, तो रेल की पटरी के ऊपरी तथा निचले तल अधिक विकृत होते हैं| अत: उनके क्षेत्रफल अधिक होने चाहिए जिससे कि उन पर दाब अथवा अभिलम्ब प्रतिबल कम लगे| बीच के भाग पर बहुत कम विकृति होती है| अत: वे कम चौड़ाई के बनाये जाते हैं क्योंकि इससे लोहे कि बचत होती है| पदार्थ का अनुमेय प्रतिबल नियत रहता है, परन्तु अनुमेय बल (अथवा भार) क्षेत्रफल पर निर्भर करता है| अधिकतम भार = भंजक प्रतिबल x क्षेत्रफल =108 Nm-2 x = 108 Nm-2 x 3.14 x (2 x 10-2 m)2 = 12.56 x 104 N (i) असत्य, वास्तव में रबड़ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक इस्पात से कम होता है क्योंकि समान विकृति के लिए रबड़ में कम प्रतिबल लगाना पड़ता है| (a) ग्राफ A के सरल रेखीय भाग की ढाल, B के सरल रेखीय भाग की ढाल की अपेक्षा अधिक है| सरल रेखीय भाग की ढाल प्रतिबल/विकृति = यंग प्रत्यास्थता गुणांक प्रकट करता है| अत: A का यंग- प्रत्यास्थता गुणांक, B की अपेक्षा अधिक है| (b) पदार्थ A अधिक मजबूत है क्योंकि इसका प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ B से अधिक है| B. टौरिरिसेली के सिद्धान्त पर C. गुरुत्वाकर्षण के नियम पर D.
कूलम्ब का नियम
हवाई जहाज का आकार इस प्रकार का बनाया जाता है की रनवे पर दौड़ते समय उसके पंखों के नीचे एवं ऊपर में दाबांतर उत्पन्न होता है जिसके कारण उसका उत्थापन होता है |
B. C. D.
B. C. D.
B. C. D.
B. L/2 C. L D. 2L
B. C. D.
B. C. D.
A. R-2 केSOLUTION

A. gSOLUTION

B. gp = ge/2
C. gp = 2ge
D. ge = 3gp
Right Answer is: BSOLUTION

A. दोगुना हो जाएगाSOLUTION

A.
SOLUTION
A. ![]()
![]()


SOLUTION


A. 

![]()
SOLUTION
A.
भार कम हो जाता हैSOLUTION
A. 1.68 × 1011 mSOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

A. 1.68 × 1011 m
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

A. 1.68 × 1011 m
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

A. 1.68 × 1011 m
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION
B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

B. 2.68 × 1011 m
C. 6.78 × 1011 m
D. 7.68 × 1011 m
Right Answer is: SOLUTION

SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
A. विरुपक बल कहते हैंSOLUTION
A. Kg/m2sSOLUTION
A. शून्यSOLUTION
A. आधाSOLUTION
इसलिए जब लम्बाई घट कर आधी होगी, तब अधिकतम भार जो यह संभाल सकेगा, वह दोगुना हो जाएगा|
A. 106 NSOLUTION
A. 1.33 x 1011 Nm-2SOLUTION
= 2 x 1011 Nm-2 x 0.15
= 3 x 1010 Nm-2
A. SOLUTION
A. 2 x 1012 NSOLUTION
A. FSOLUTION
A. बिंदु PSOLUTION
A. Y x (विकृति)2/ आयतनSOLUTION
SOLUTION
A. अभिलंब प्रतिबल तथा अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात सेSOLUTION
A. शून्यSOLUTION
A. PSOLUTION
A. SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
इसका कोई मात्रक नहीं होता तथा यह विमाहीन है|SOLUTION
आयतन विकृति : विरूपण बल के कारण आयतन में परिवर्तन से जो विकृति उत्पन्न होती है, आयतन विकृति कहलाती है। माना किसी निकाय का मूल आयतन ΔV तथा आयतन में परिवर्तन है, तो
Right Answer is:
SOLUTION
SOLUTION
SOLUTION
Right Answer is:
SOLUTION
(i) इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक हैSOLUTION
(ii) सत्य, क्योंकि कुंडली को खींचने पर उसमें विरूपण विकृति उत्पन्न होती है|SOLUTION
SOLUTION
A.
बर्नूली के सिद्धान्त पर
SOLUTION
A.
B.
C.
D. 3 x 10-1 J
Right Answer is: CSOLUTION
A. SOLUTION
त्रिज्या की कक्षा में सूर्य के चारों ओर घूमती है। पृथ्वी का कोणीय वेग है:
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. L/4SOLUTION
A. SOLUTION
A.