A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A. 2 s
B. 12 s
C. 20 s
D. 22 s
A. 10 m/s
B. 12 m/s
C. 10.8 m/s
D. 14 m/s
A. 3.6 kW
B. 36 kW
C. 63 kW
D. 6.3 kW
यदि बाह्य बालों का परिमाण शून्य होता है, तो द्रव्यमान केंद्र में कोई त्वरण नहीं होता है।
दो कणों के एक निकाय का द्रव्यमान कणों के केन्द्रों को जोड़ने वाली रेखा पर स्थित होता है।
ठोस गोला पहले नीचे पहुंच जाएगा क्योंकि उसका जड़त्व आघूर्ण खोखले गोले से अधिक होता है।
एकसमान घन के द्रव्यमान का केंद्र विकर्णों के कटान बिंदु पर स्थित होता है।
नहीं। यह घूर्णन की अक्ष की स्थिति और अक्ष के परितः पिण्ड के द्रव्यमान के वितरण पर निर्भर करता है।
कोणीय संवेग की S.I. इकाई kgm2/s है।
चूंकि निकाय पर कोई बाह्य बल नहीं आरोपित हुआ है, इसलिए द्रव्यमान के केंद्र की स्थिति नहीं बदलेगी।
हम जानते है कि किया गया कार्य
इस प्रमेय के अनुसार, किसी कण पर कार्यरत सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उस कण की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। अलग - अलग बलों के कारण किसी कण पर किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर नहीं होता है।
किसी वस्तु के कार्य करने की दर उसकी शक्ति के रूप में जानी जाती है।
यदि किसी वस्तु द्वारा किया गया कार्य W तथा उसमें लगा समय t है, तो उस वस्तु की शक्ति,
P = W / t
इसका SI मात्रक जूल/सेकंड (वाट) होता है।

m =10-2 kg, u= 800 m/s, s= 1 m, v = 100 m/s
कार्य-ऊर्जा प्रमेय से, किया गया कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
F
s = (1/2)mv2 - (1/2)mu2
F
1m= (1/2)10-2kg [(100m/s)2 - (800m/s)2]
इसलिए, F = (1/2)102[ 1- 64]N = 3150 J
संवेग संरक्षण के नियम से, हमें प्राप्त होता है,
m1v = (m1 + m2) v/4
4 m1v = m1v + m2v
m2 / m1= 3
किसी स्प्रिंग के संपीड़न तथा प्रसार दोनों के फालस्वरूप, इसके अभिविन्यास में परिवर्तन होता है तथा किसी स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा, इसके अभिविन्यास के आधार पर स्प्रिंग द्वारा प्राप्त ऊर्जा होती है। इसलिए, किसी स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाती है जब स्प्रिंग को या तो संकुचित किया जाता है या खींचा जाता है।
स्प्रिंग नियतांक, k = F/x
स्प्रिंग की नई लंबाई, x' = x/2 इसलिए, नया स्प्रिंग नियतांक, k' = F/(x/2) = 2F/x = 2k
इसलिए, जब स्प्रिंग की लम्बाई को आधा कर दिया जाता है, तो इसका स्प्रिंग नियतांक दुगुना हो जाएगा।
चूंकि
इसी तरह
उपरोक्त दोनों समीकरणों से
क्योंकि

जब वाहन की गतिज ऊर्जा टायरों तथा सड़कों के बीच घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में व्यय हो जाती है, तो वाहन रुक जाता है। यह घर्षण बल वाहन के भार के साथ – साथ परिवर्तित होता जाता है।
चूँकि, गतिज ऊर्जा = किया गया कार्य = घर्षण बल x दूरी
इस प्रकार, E = F x s या s = E / F
किसी गतिज ऊर्जा के लिए, दूरी s सूक्ष्म हो जाएगी। जहाँ, F ट्रक की स्थिति में अधिक है।

A. 1: 8
B. 1: 9
C. 1: 6
D. 1: 2
A.
B.
C.
D.
है, जहाँ
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
A.
B.
C.
D.
बर्तन का आयतन प्रसार गुणांक = 750 K B. 670 oC C. 67.5 oC D. 577 oC द्विधात्वीय पट्टी में अधिक रैखिक प्रसार गुणांक वाला धातु उत्तल पक्ष पर स्थित है। प्रसार, वायु के गुहाओं पर निर्भर नहीं करता है। 1.4 x 10-4 m B. 1.4 x 10-3 m C. 7 x 10-3 m D. 7 x 10-4 m 1900 m3 B. 1700 m3 C. 1500 m3 D. 2700 m3 सामान्य गैस समीकरण से: वृद्धि होती है 0.5 x 10-3 /oC B. 5 x 10-6 /oC C. 0.5 x 10-4 /oC D. 5 x 10-7 /oC 1.5 B. 2 C. 3 D. 2.5 P B. 2P C. 8P D. 4P जब अणुओं के बीच की दूरी r/2 हो जाती है, तो गैस का आयतन V/8 तक कम हो जाता है क्योंकि आयतन r3 के अनुक्रमानुपाती होता है। P1V1=P2V2 का उपयोग करके, वक्र की प्रवणता में लगातार वृद्धि हो रही है जो दर्शाती है कि प्रतिरोध में ताप के साथ वृद्धि हो रही है। ताप में वृद्धि केवल तभी होगी जब 368o F B. +178o F C. -146o F D. -288o F B. C. D. किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता, किसी पदार्थ के एकांक द्र्व्यमान के ताप को बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा होती है। 4oC से 0oC के बीच जल के असंगत प्रसार के कारण सर्दियों के दिनों में झीलों के तल पर जल नहीं जमता है। वह ताप तथा दाब जिस पर किसी पदार्थ की तीनों प्रावस्थाएँ (ऊर्ध्वपातन, संगलन तथा वाष्पन) सहवर्ती होती है, त्रिक बिन्दु कहलाता है। किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का, द्रव अवस्था से गुजरे बिना वाष्प अवस्था में परिवर्तन, ऊर्ध्वपातन कहलाता है। स्थिर आयतन पर किसी गैस की विशिष्ट ऊष्मा धारिता ऊष्मीय ऊर्जा की वह मात्रा है जो, किसी गैस के एक ग्राम के ताप को 1 oC अथवा 1K तक बढ़ाने के लिए आवश्यक होती है। जब किसी पदार्थ में किसी एक स्थान का ताप दूसरे स्थान की तुलना में उच्च होता है, तो उच्च ताप वाले कण ऊपर उठने लगते हैं तथा उनका स्थान निम्न ताप वाले कण लेने लगते हैं। यह प्रक्रिया सम्पूर्ण पदार्थ का ताप समान होने तक चलती रहती है। ऊष्मा स्थानांतरण की यह प्रक्रिया संवहन कहलाती है। इसमें पदार्थ के कण स्थानांतरित होते हैं। जब बर्फ के टुकड़े को द्विधातु पट्टी पर रखा जाता है, तो पट्टी का ताप कम होता जाता है। इसके कारण, यह पट्टी नीचे की ओर झुक जाती है। इस प्रकार, बर्फ का टुकड़ा नीचे की ओर गति करता है। जब कोई द्रव इस प्रकार प्रवाहित होता है कि उसका प्रत्येक कण अपने से ठीक आगे वाले कण के मार्ग का अनुसरण करता है, तो द्रव के प्रवाह को धारारेखी प्रवाह कहते है तथा कण के मार्ग को धारा-रेखा कहते है। तापमान बढ़ने पर तरल का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। पदार्थ जो प्रवाह कर सकता है उसे तरल पदार्थ कहा जाता है। तरल पदार्थ अपने पात्र का आकार लेता है। एक तरल का पृष्ठ तनाव बल की तरल के पृष्ठ पर स्पर्शीय रेखा पर प्रति एकांक लंबाई पर कार्यरत बल है। चूंकि बल तरल पृष्ठ के क्षेत्र से स्वतंत्र है, इसलिए पृष्ठ तनाव तरल पृष्ठ के संपर्क के क्षेत्र से भी स्वतंत्र है। मानव शरीर में रक्त स्तंभ की ऊँचाई पैरों की तुलना में मस्तिष्क पर अधिक है। यही कारण है कि मस्तिष्क की तुलना में रक्त पैरों पर अधिक दबाव डालता है। वस्तु का त्वरण शून्य होगा क्योंकि सीमांत वेग प्राप्त करने के बाद वस्तु श्यान माध्यम में एकसमान वेग के साथ गतिमान रहेगा। 37 o C B. 73 o C C. 100 o C D. 93.2 o C लकड़ी का टुकड़ा अथवा धातु का टुकड़ा समान रूप से गर्म अथवा ठंडे होंगे,जब कोई ऊष्मा निकाय से अथवा निकाय में स्थानांतरित नहीं की जाएगी। ऐसा तब होता है जब उनमें से प्रत्येक एक ही ताप पर आ जाए जो प्रयोगात्मक रूप से 37 oC पाया गया है। 40 B. 50 C. 52.2 D. 25 द्रव का ताप = 2/5 गुना निचले तथा ऊपरी बिन्दुओं की दूरी B. C. D. दिया गया है : 4.1 B. 2.5 C. 2.4 D. 1.4 यहाँ cm/s B. cm2/s C. cm s D. cm2/s2 जल का घनत्व 4 oC तक बढ़ जाता है इसलिए उत्क्षेप बढ़ता है तथा फिर घनत्व कम हो जाता है तथा उत्क्षेपकम हो जाता है। 25 oC B. 250 oC C. 2500 K D. 250 K B. द्रव के घनत्व को मापने के लिए किया जाता है C. द्रव के प्रवाह की चाल को मापने के लिए किया जाता है D. द्रव के पृष्ठ तनाव को मापने के लिए किया जाता है वैनटूरिमापी सांतत्य सिद्धान्त पर आधारित है, जिसके उपयोग से किसी नली में से प्रवाहित होने वाले द्रव की चाल प्राप्त करी जा सकती है| B. ऊपर की ओर उत्तल होगा C. नीचे की ओर अवतल होगा D. नीचे की ओर उत्तल होगा एक द्रव जो पृष्ठ को भिगा नहीं पाता, उसका स्पर्श कोण अधिककोण होता है, इस कारणवश नवचंदरक का आकार ऊपर की दिशा में उत्तल होता है| B. गुरुत्वीय त्वरण शून्य हो जाता है C. गुब्बारे का घनत्व शून्य हो जाता है D. गुब्बारे का आभासीय भार शून्य हो जाता है आभासीय भार = शुद्ध भार – उत्प्लावक बलशुरुआत में शुद्ध भार से अधिक होता है, इसलिए गुब्बारा ऊपर की ओर जाता है| ऊंचाई पर वायुमंडल में पहुँचने से उत्प्लावक बल शुद्ध भार के समान हो जाता है, जिसके फलस्वरूप आभासीय भार शून्य हो जाता है और गुब्बारा और ऊपर नहीं उड पाता| पिंड नीचे के दिशा में वेग प्राप्त करने के कारण डूब जाएगा क्योंकि वापस ऊपर की ओर जाने के लिए उसपर कोई बल आरोपित नहीं हो रहा है| क्योंकि बुलबुले की दो पृष्ठ होती हैं और बूंद की सिर्फ एक| काँच के पृष्ठ पर जल का नवचंदरक अवतल होता है, इसलिए संपर्क कोण न्यून कोण होता है| B. पृष्ठ तनाव C. दाब D. आर्किमीडीज का उत्प्लावक बल B. C. D. गैसों की पिंड का कितना क्षेत्र पानी के बाहर रहेगा, वह द्रव के घनत्व पर निर्भर करता है और गुरुत्वीय त्वरण के मान से स्वतंत्र है| बरनूलि के सिद्धान्त के अनुसार नलिका के प्रत्येक बिन्दु पर कुल ऊर्जा एक समान होती है| धमनी संकीर्ण होने पर क्षेत्रफल कम हो जाता है तथा वेग बढ़ जाता है, जिस कारणवश कुल ऊर्जा को एकसमान रखने के लिए दाब अधिक हो जाता है और रक्त चाप बढ़ जाता है| B. बोयल के नियम पर C. गुरुत्वाकर्षण बल पर D. केशिकत्व तथा पृष्ठ तनाव के सिद्धान्त पर पेन और उसके तने की नोक एक पतली केशिका की तरह कार्य करती है और केशिकत्व के कारण स्याही तने की नोंक तक पहुँचती है और पेन कार्य करता है| क्योंकि लकड़ी का घनत्व जल के घनत्व से कम है, इसलिए लकड़ी का टुकड़ा ऊपर की ओर घटते हुए त्वरण के साथ ऊपर की ओर आता है| द्रव का पृष्ठ तनाव शून्य है a B. b C. c D. d क्योंकि एक दिए गए आयतन में, गोलाकार आकृति का न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल होता है, तरल के इस गुण के कारण वह गोलाकार आकृति ले लेती है| परंतु कमरे के गुरुत्वाकर्षणहीन होने के कारण वह नीचे नहीं गिरेगी| प्रवाह की दर अध्कि होने पर प्रवाह रेखीय न रहकर विक्षुब्ध् हो जाता है। विक्षुब्ध् प्रवाह में किसी बिंदु पर तरल का वेग द्रुत तथा यादृच्छिक रूप से समय में बदलता रहता है। एक विमाहीन अंक जिसके मान से हमें ज्ञात होता है की प्रवाह विक्षुब्ध् होगा अथवा नहीं को रेनल्ड्स संख्या कहते हैं। जल 0oC तथा 4oC के बीच गर्म करने पर संकुचित होने लगता है। जैसे ही जल को कमरे के ताप से ठंडा किया जाता है, जल की दी गई मात्रा का आयतन कम होने लगता है, जब तक कि इसका ताप 4oC तक नहीं पहुँच जाए। यहाँ, l15= 30cm l90 - l15= 0.027cm धातु का रेखीय प्रसार गुणांक होगा, धातु का आयतन प्रसार गुणांक होगा: ऊष्मा गर्म फ़लक से ठंडे फ़लक की ओर प्रवाहित होती है। ऊष्मा प्रवाह के लम्बवत अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल है – A =(15 cm)2 प्रति सेकंड प्रवाहित होने वाली ऊष्मा की मात्रा है- दिया गया है: ताप, T = 373.15 K भाप बिंदु पर गैस का दाब, P = 1.50 x 104 Pa केल्विन में ताप निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है: मान रखने पर, न्यूटन के शीतलन नियम के अनुसार किसी निकाय द्वारा ऊष्मा क्षय की दर, परिवेश तथा निकाय के तापान्तर के अनुक्रमानुपाती होती है | इसमें केवल सूक्ष्म तापान्तर ही प्रदान किया जाता है | इसके अतिरिक्त, विकिरण द्वारा ऊष्मा क्षय निकाय के पृष्ठ की प्रकृति तथा खुले पृष्ठ के क्षेत्रफल पर भी निर्भर करती है| जहाँ, -dQ/dt = निकाय ऊष्मा क्षय की दर है | DT = T2 - T1 (परिवेश तथा निकाय के ताप में परिवर्तन) तथा k = नियतांक चूंकि, दोनों छड़े श्रेणीक्रम में हैं, इसलिए, दोनों छड़ों के माध्यम से ऊष्मा के प्रवाह की दर समान होगी। परम मापक्रम A पर, जल का त्रिक बिन्दु, T1=200A परम मापक्रम B पर, जल का त्रिक बिन्दु, T2 =350B केल्विन मापक्रम पर, जल का त्रिक बिन्दु, TK =273.15 K केल्विन मापक्रम पर ताप 273.15 K, निरपेक्ष मापक्रम A पर ताप 200A के बराबर होता है। T1 = TK 200A = 273.15 K A = 273.15/200 K अब, केल्विन मापक्रम पर ताप 273.15 K, निरपेक्ष मापक्रम B पर ताप 350B के बराबर होता है। T2 = TK 350B = 273.15 K B = 273.15/350 K माना TA, मापक्रम A पर जल का त्रिक बिन्दु है। माना TB, मापक्रम B पर जल का त्रिक बिन्दु है। 273.15/200 K x TA =273.15/350 x TB TA =200/350 TB = 4/7 TB इस प्रकार, TA तथा TB का अनुपात 4:7 है।
A. पहले वृद्धि होगी तथा फिर गिरावट होगी SOLUTION
द्रव का आयतन प्रसार गुणांक = 3 x
/3=
द्रव तथा बर्तन दोनों का आयतन प्रसार गुणांक समान है,तो ताप की एक विशेष वृद्धि के लिए आयतन में परिवर्तन समान होगा।
A. SOLUTION
A. बाहरी तरफ लोहे के साथ मुड़ जाएगी SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: DSOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
आवस्था 1 के लिए, V तथा T लगभग बराबर हैं,अत:
होगा| जबकि आवस्था 2 के लिए, V, T से बहुत अधिक है, इसलिए, P2,
से कम है। इसलिए, जब गैस आवस्था 1 से 2 तक जाती है, तो दाब में कमी होती है |
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
द्वारा दर्शाया जाता है, तो:
A.
ऋणात्मक है तथा
धनात्मक है SOLUTION
तथा
दोनों धनात्मक होंगे |
A. SOLUTION
A.
![]()
![]()
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SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. ![]()
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![]()
SOLUTION
स्टील की तार का रैखिक प्रसार गुणांक:
स्टील की तार का आयतन प्रसार गुणांक:
होगा
A. SOLUTION
A. SOLUTION
A. शुरुआत से अंत तक घटता जाता हैSOLUTION
A. SOLUTION
A. द्रव के दाब को मापने के लिए किया जाता हैSOLUTION
A. ऊपर की ओर अवतल होगाSOLUTION
A. वायुमंडलीय दाब शून्य हो जाता हैSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
B.
C.
D. 4 M होगा
Right Answer is: BSOLUTION

A. P1 = P2 = P3
B.
C.
D. P1 = P2 P3
Right Answer is: ASOLUTION
समान ऊंचाई वाले बिन्दुओं पर तरल का दाब समान है|
B.
C.
D. Pd = (Pb) 2
Right Answer is: BSOLUTION
A. 90o से कम होता हैSOLUTION
A. समुंद्री तल पर वायुमंडलीय दाब अधिकतम होता हैSOLUTION

A. श्यानताSOLUTION

तथा तापमान T के बीच का संबंध
A. ![]()
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SOLUTION
का तापमान T के साथ परिवर्तन सदरलैंड के सूत्र
द्वारा निर्धारित होती है|
B.
C.
D. 3/4
Right Answer is: CSOLUTION
B.
C.
D. बरनूलि का सिद्धान्त
Right Answer is: DSOLUTION
A. श्यानता के सिद्धान्त परSOLUTION
A. एकसमान त्वरण के साथ ऊपर की ओर आता हैSOLUTION
A. SOLUTION
A. SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: BSOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION


A. वह अपनी घनाकार आकृति को बनाए रखता है|
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION

स्टील संधि का ताप ज्ञात कीजिए? स्टील की ऊष्मीय चालकता 46 J/msoC है तथा कॉपर की ऊष्मीय चालकता 386 J/msoC है।
B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION


B.
C.
D.
Right Answer is: SOLUTION
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