A. 
B. 
C. 
D. 
प्रकाश की उपस्थिति में, ब्रोमीनन के कारण पार्श्व श्रृंखला प्रतिस्थापन होता है। परमाणु प्रतिस्थापन के लिए हमें हैलोजन वाहक की आवश्यकता होती है।
A. ऊष्मा के अवशोषण के साथ CO2 और जल
B. ऊष्मा के उत्सर्जन के साथ CO2 और जल
C. केवल CO2
D. CO2 और H2
वायु या डाइऑक्सीजन की उपस्थिति में, एल्केन को गरम करने पर यह पूर्णतः ऑक्सीकृत होकर कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनाता है तथा बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित होती है। दहन के दौरान बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित करने के कारण एल्केन ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
A. नाइट्रोबेंज़ीन
B. एनीलीन
C. p-डाइनाइट्रोबेंज़ीन
D. o-डाइनाइट्रोबेंज़ीन
नाइट्रेशन के दौरान हाइड्रोजन का प्रतिस्थापन नाईट्रो समूह द्वारा होता है ।
A. एथेन द्वारा
B. एथीन द्वारा
C. हेक्सेन द्वारा
D. मेथेन द्वारा
मेथेन, निकैल उत्प्रेरक की उपस्थिति में, 1273 K ताप पर भाप के साथ अभिक्रिया करके कार्बन मोनोऑक्साइड और डाइहाइड्रोजन बनाती है। इस विधि का प्रयोग डाइहाइड्रोजन गैस का औद्योगिक उत्पादन करने के लिए किया जाता है।
A. निकैल
B. AlCl3
C. तीव्र सूर्य का प्रकाश
D. जिंक
A. प्रतिमार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार
B. मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार
C. सेत्जेफ नियम के अनुसार
D. हकल नियम के अनुसार
परॉक्साइड की उपस्थिति में, असममित एल्कीन जैसे प्रोपीन में HBr का संकलन मार्कोनीकॉफ नियम के विपरीत होता है। यह केवल HBr के साथ होता है, HCl और Hl के साथ नहीं। यह अभिक्रिया मुक्त-मूलक द्वारा होती है।
A. सांतरित स्थिति में
B. विषमतलीय स्थिति में
C. ग्रस्त स्थिति में
D. सांतरित तथा विषमतलीय दोनों स्थिति में
ऐथेन के असंख्य संरूपण होते हैं। हालाँकि इनमें से दो संरूपण चरम होते हैं। एक रूप में दोनों कार्बन के हाइड्रोजन परमाणु एक-दूसरे के अधिक पास होते हैं। उसे ग्रस्त रूप कहते हैं। दूसरे रूप में, हाइड्रोजन परमाणु दूसरे कार्बन के हाइड्रोजन परमाणुओं से अधिकतम दूरी पर होते हैं। उन्हें सांतरित रूप कहते हैं।
A. LiAlH4
B. सोडा लाइम
C. लाल फ़ोस्फोरस और सांद्रित HI
D. अमल्गमीकृत जिंक और सांद्रित HCl
A. 100
B. 70
C. 50
D. 30
ऑक्टेन संख्या, आइसो-ऑक्टेन और n-हेप्टेन के मिश्रण में आइसो-ऑक्टेन की प्रतिशतता है । चूँकि ईंधन मिश्रण में 70% आइसो-ऑक्टेन है, अतः इसका ऑक्टेन संख्या 70 होगी।
A. जल को अवशोषित करना
B. HCl अवशोषित करना
C. इलेक्ट्रॉनस्नेही उत्पन्न करना
D. नाभिकस्नेही उत्पन्न करना
फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया में आक्रमण इलेक्ट्रॉनस्नेही द्वारा होता है। AlCl3 इलेक्ट्रॉनस्नेही के विरचन में भाग लेता है।
A. हेक्सीन-1
B. हेक्सीन-3
C. साइक्लोहेक्सीन
D. 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सीन
चूँकि, एल्कीन का ओज़ोनी अपघटन करने पर दो ऐल्डिहाइड समूह वाला एकल यौगिक बनता है, अतः यह चक्रीय होगा।
A. नियंत्रित ऑक्सीकरण का
B. ताप-अपघटन का
C. ओज़ोनी अपघटन का
D. बहुलीकरण का
उच्च ऐल्केन को उच्च ताप पर गर्म करने पर निम्नतर ऐल्केनों अथवा एल्कीनों में अपघटित हो जाते हैं। ऊष्मा के अनुप्रयोग से छोटे विखंड बनने की ऐसी अपघटनी अभिक्रिया को ताप-अपघटन अथवा भंजन कहते हैं।
A. मार्कोनीकॉफ नियम
B. सेत्जेफ नियम
C. खराश प्रभाव
D. हॉफमान नियम
विहाइड्रोहैलोजनीकरण और निर्जलन, सेत्जेफ नियम का पालन करते हैं जिसके अनुसार कम संख्या वाले हाइड्रोजन परमाणु युक्त कार्बन परमाणु से, हाइड्रोजन परमाणु को प्रतिस्थापित करके ऐल्कीन बनता है।
A. Ca
B. Sr
C. Mg
D. Ba
Mg की आयनन ऊर्जा उच्च होती है जिससे बर्नर पर जलने पर इसकी विशिष्ट रंग की लौ नहीं बनती है।
A. Li
B. Cs
C. Ca
D. Cu
इलेक्ट्रॉन दाता अपचायक होते हैं। यद्यपि Li की आयनन ऊर्जा क्षार धातुओं में सबसे अधिक होती है, फिर भी यह प्रबल अपचायक होता है क्योंकि इसकी जलयोजन ऊर्जा, इसकी उच्च आयनन ऊर्जा से अधिक होती है।
A. लिथियम
B. सोडियम
C. पोटैशियम
D. रुबिडियम
लिथियम को कैरोसिन में नहीं रखा जा सकता है क्योंकि तेल से कम घनत्व होने के कारण, यह उसकी सतह पर तैरने लगता है। अतः इसको वायु के संपर्क में आने से बचाने के लिए पैराफिन मोम में लपेट कर रखा जाता है।
A. नियॉन लैम्प
B. हैलोजन लैम्प
C. सोडियम वाष्प लैम्प
D. मर्क्युरी लैम्प
सोडियम वाष्प लैंप एक गैस विसर्जन लैंप होता है जो उत्तेजित अवस्था में सोडियम का उपयोग करके प्रकाश उत्पन्न करता है। लैम्प के प्रकाश में सोडियम डी-लाइन का परमाणु उत्सर्जन स्पेक्ट्रम देता है।
A. अम्लीय विलयन बनाते हैं।
B. क्षारीय विलयन बनाते हैं।
C. उभयधर्मी विलयन बनाते हैं।
D. उदासीन विलयन बनाते हैं।
क्षार धातुओं के हाइड्राइड जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं। जो क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
A. NaCl
B. KCl
C. MgCl2
D. CaCl2
प्लास्टर ऑफ पेरिस का जमना एक रासायनिक परिवर्तन है ।NaCl मिलाने पर परिवर्तन की गति बढ़ जाती है और यह शीघ्र कठोर होकर जम जाता है।
A. काँच उद्योग में
B. मिट्टी के बर्तन बनाने में
C. माचिस उद्योग में
D. दाँतों की गुहाओं को भरने में
सोरेल सीमेंट (मैग्नेशिया सीमेंट कहा जाता है) मैग्नीशियम क्लोराइड और मैग्नीशियम ऑक्साइड (तापित मैग्नीशिया) का मिश्रण है। इसका सही रासायनिक सूत्र MgCl2.5MgO.xH2O है। इसका उपयोग दंत-चिकित्सा में दाँतों की गुहाओं को भरने के लिए किया जाता है।
A. ब्राइन विलयन
B. कार्बनयुक्त जल
C. क्लोरीनयुक्त जल
D. अमोनीकृत जल
जब कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अमोनिया से संतृप्त ब्राइन विलयन (28% NaCl) से होकर प्रवाहित किया जाता है, तो यह सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट देता है, जिसको गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट बनता है।
A. O2
B. H2O
C. Cl2
D. NO2
विरंजक चूर्ण पीला श्वेत पाउडर होता है और इसमें क्लोरीन की तेज गंध होती है। हवा में छोड़ने पर यह क्लोरीन में ऑक्सीकृत हो जाता है।
A. जल में
B. एथेनॉल में
C. अमोनिया में
D. कैरोसिन में
क्षार धातुएँ अत्यंन्त अभिक्रियाशील धातुएँ होती हैं इसलिए उनको कैरोसिन में रखा जाता है। वे जल और ऐथेनॉल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके ये अमोनीकृत इलेक्ट्रॉन बनाती हैं।
A. Ca
B. Mg
C. Sr
D. Ba
पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। यह प्रक्रिया क्लोरोफिल नामक हरे वर्णक में होती है। क्लोरोफिल में मैग्नीशियम धातु पायी जाती है।
A. LiCl
B. NaCl
C. MgCl2
D. KCl
लिथियम के यौगिक सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं। अतः, वे ईथर जैसे सहसंयोजक यौगिक से निष्कर्षित किए जा सकते हैं।
A. Be(OH)2
B. Ba(OH)2
C. Mg(OH)2
D. Ca(OH)2
वर्ग-2 के हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता वर्ग में नीचे की ओर जाने पर बढ़ती है। अतः, Be(OH)2 की जल में विलेयता सबसे कम है।
A. ऑक्सीजन
B. क्लोरीन
C. हाइड्रोजन
D. सोडियम ऑक्साइड
जब जलीय NaCl का वैद्युत अपघटन किया जाता है तो एनोड पर क्लोरीन और कैथोड पर हाइड्रोजन मुक्त होती हैं।
A. Li
B. Na
C. K
D. Rb
सभी क्षार धातुओं की लौ का रंग विशिष्ट होता है क्योंकि उनकी आयनन एंथैल्पी निम्न होती है। Li की लौ का रंग गहरा लाल जबकि K की लौ का रंग बैंगनी और और Rb की लौ का रंग लाल -बैंगनी होता है।
A. Li
B. Na
C. K
D. Rb
क्षार धातुओं में, केवल Li ही अपने उभयधर्मी व्यवहार के कारण नाइट्रोजन के साथ अभिक्रिया करके लिथियम नाइट्राइड (Li3N) बनाता है। 6Li+N2 → 2Li3N
A. K2CO3
B. Na2CO3
C. Rb2CO3
D. Li2CO3
क्षार जितना दुर्बल होगा, कार्बोनेट का स्थायित्व उतना ही कम होगा। वर्ग-1 के ऑक्साइडों में LiOH सबसे दुर्बल क्षार है; अतः Li2CO3 का तापीय स्थायित्व सबसे कम होता है।
A. विस्थापन विधि द्वारा
B. वैद्युत अपघटनी विधि द्वारा
C. अपचयन विधि द्वारा
D. चुंबकीय विधि द्वारा
विस्थापन, अपचयन और चुंबकीय विधियों का उपयोग क्षार धातुओं के निष्कर्षण के लिए नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे अपचायक प्रकृति के होते हैं।
A. Ca
B. Mg
C. Ba
D. Be
Be परमाणु के छोटे आकार के कारण इसकी आयनन एंथैल्पी अति उच्च होती है। इसलिए, यह सहसंयोजक हाइड्राइड बनाता है जबकि वर्ग-2 के अन्य तत्व आयनिक हाइड्राइड बनाते हैं।
साल्वे अमोनिया विधि
CaSO4.1/2H2O
Na+ आयन तंत्रिका आवेगों के संचरण, झिल्ली में जलप्रवाह को नियमित करने और शर्करा और एमिनो अम्लों के प्रवाह में सहायता करते हैं। K+ आयन अनेक एंजाइमों को सक्रिय करते हैं तथा ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ATP बनने में भाग लेते हैं।
अधिक वाष्पशील प्रकृति के कारण क्षार धातुएं अथवा उनके लवण ज्वाला में गर्म करने पर ऊर्जा अवशोषित करते हैं और उनके इलेक्ट्रॉन उच्च-ऊर्जा स्तर में आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं। जब ये उत्तेजित इलेक्ट्रॉन पुनः अपनी तलस्थ अवस्था में आते हैं तो वैद्युत-चुंबकीय विकिरण के रूप में अतिरिक्त ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। यह उत्सर्जन दृश्य क्षेत्र में होता है और ज्वाला को अभिलाक्षणिक रंग प्रदान करता है।
जब मैग्नीशियम फीते का एक टुकड़ा SO2 में जलाया जाता है, तो MgO एवं S का निर्माण होता है। यह अभिक्रिया इतनी अधिक ऊष्माक्षेपी होती है कि उत्पन्न ऊष्मा से मैग्नीशियम फीता जलता रहता है।
2Mg + SO2 → 2MgO + S
i) क्षार धातुओं में कम आयनन ऊर्जा होती है, इनमें एकल धनायनों के निर्माण के लिए एकसंयोजी इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने की प्रवृति प्रबल होती है।
ii) छोटे आकार के कारण, K+ आयन की तुलना में Li+ आयन की उच्च वैद्युत-ऋणात्मकता और उच्च जलयोजन एंथैल्पी होती है जिसके कारण LiI एथेनॉल में KI की तुलना में अधिक विलेय होता है।
iii) Na2CO3 दुर्बल अम्ल (H2CO3) और एक प्रबल क्षार (NaOH) का लवण है, इसलिए इसके जल-अपघटन से प्रबल क्षार NaOH का निर्माण होता है और इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
i) उच्च नाभिकीय आवेश के कारण क्षारीय मृदा धातुओं की आयनन एंथैल्पी संगत क्षारीय धातुओं से अधिक होती है।
ii) कम आयनन ऊर्जा के कारण क्षार धातु ऑक्साइड संगत क्षारीय मृदा धातु से अधिक क्षारीय होते हैं।
iii) क्षार धातु हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता क्षारीय मृदा धातु हाइड्रॉक्साइडों से अधिक होती है।
i) O2- की संरचना में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए यह अनुचुंबकीय है।
ii) छोटे आकार, उच्च आयनन एंथैल्पी और ऑक्सीजन की उच्च वैद्युत-ऋणात्मकता के कारण BeO सहसंयोजक प्रकृति का होता है और इसीकारण यह जल में अघुलनशील होता है। Be2+ आयन के छोटे आकार के कारण BeSO4 आयनिक होता है, BeSO4 की जलयोजन ऊर्जा इसकी जालक ऊर्जा से अधिक होती है, इस कारण से BeSO4 जल में अत्यधिक विलेय होता है।
iii) लिथियम तथा मैग्नीशियम के विकर्ण संबंध के कारण मैग्नीशियम की तरह लीथियम नाइट्राइड बनाता हैं जबकि अन्य क्षार धातुएँ ऐसा नहीं करती हैं।
6Li(s) + N2(g) → 2Li3N(s)
लिथियम निम्नलिखित कारणों से समान वर्ग के अन्य तत्वों से असंगत व्यवहार प्रदर्शित करता है-
1. कम परमाण्विक और आयनिक त्रिज्या
2. उच्च वैद्युतऋणात्मकता और आयनन एंथैल्पी
3. धनायन की उच्च ध्रुवण क्षमता
4. संयोजी कोश में रिक्त d- कक्षकों की अनुपस्थिति
लिथियम और मैग्नीशियम में समानताएँ निम्न:-
1. इनमें समान वैद्युत धनात्मक गुण होता है।
2. इनकी परमाण्वीय और आयनिक त्रिज्या समान होती है।
3. इनकी ध्रुवण क्षमता समान होती है।
क्षार धातुओं को आवर्त सारणी के वर्ग I में रखा गया है क्योंकि इनके संयोजी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1 होता है। यहाँ n= 2 से 7 तक है और इनके नाम लीथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रुबिडियम (Rb) और सीजियम (Cs) और फ्रेंसियम (Fr) हैं।
वर्ग में परमाण्विक और भौतिक गुणों की प्रवृत्ति-
1. परमाण्वीय त्रिज्या– वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की परमाण्वीय त्रिज्या कोशों की संख्या में वृद्धि के कारण बढ़ती जाती है।
2. आयनन एन्थैल्पी– वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाण्वीय त्रिज्या में वृद्धि के कारण आयनन एन्थैल्पी बढ़ती जाती है।
3. घनत्व– वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर द्रव्यमान और आयतन के अनुपात में वृद्धि के कारण घनत्व बढ़ता जाता है।
4.धात्विक गुण– वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा में वृद्धि के कारण धात्विक गुण बढ़ता है।
5. गलनांक और क्वथनांक– वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाण्विक आकार में वृद्धि के कारण गलनांक और क्वथनांक घटते हैं।
A. 
B. 
C. 
D. 
सिलिकेट की मूल संरचनात्मक इकाई
है जिसमें सिलिकन परमाणु चार ऑक्सीज़न परमाणुओं से चतुष्फलक के रूप में बंधित रहता है।
A. GeO
B. SnO
C. PbO
D. CO
वर्ग-14 के मोनोऑक्साइडों में CO उदासीन है GeO अम्लीय है जबकि SnO तथा PbO उभयधर्मी हैं।
A. यह अत्याधिक अभिक्रियाशील है।
B. यह अत्याधिक संरन्ध्र है।
C. यह एक प्रबल ऑक्सीकारक है।
D. यह एक प्रबल अपचायक है।
सक्रियत चारकोल, कार्बन का अत्यधिक संरन्ध्र रूप है। इसका सतह क्षेत्रफल अधिक होता है जिसके कारण यह अधिक मात्रा में गैसों का अधिशोषण कर सकता है।
A. CaC2 है।
B. SiC है।
C. AlCl3 है।
D. Al2O3 है।
सिलिकन कार्बाइड का सामान्य नाम कार्बरन्डम है। यह एक बहुत कठोर पदार्थ है तथा इसका उपयोग अपघर्षक के रूप में किया जाता है।
A. CO2
B. O2
C. H2
D. CO
CO हीमोग्लोबिन के साथ संकुल बनाती है, जो ऑक्सीज़न-हीमोग्लोबिन संकुल से 300 गुना अधिक स्थायी होता है। अतः कार्बन मोनोऑक्साइड की प्रकृति विषैली होती है।
A. सिलिकन डाइ ऑक्साइड
B. सिलिकॉन्स
C. सिलिकेट
D. जिओलाइट
जिओलाइट का उपयोग व्यापक स्तर पर पेट्रोरसायन उद्योगों में हाइड्रोकार्बनों के विघटन और एल्केन के समावयवीकरण के लिए किया जाता है। ZSM-5 (एक प्रकार का जिओलाइट) का उपयोग एल्कोहॉल को गैसोलीन में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
A. अम्लीय होता है।
B. क्षारीय होता है।
C. उदासीन होता है।
D. उभयधर्मी होता है।
बोरेक्स जल में घुलकर क्षारीय विलयन बनाता है।
Na2B4O7 + 7H2O → 2NaOH + 4H3BO3
A. कार्बन के समजात हैं।
B. कार्बन के अपररूप हैं।
C. कार्बन के समावयव हैं।
D. कार्बन के समस्थानिक हैं।
शृंखलन तथा pπ -pπ आबंध निर्माण के कारण कार्बन विभिन्न अपररूप दर्शाता है। हीरे और ग्रैफाइट के रासायनिक गुण तो समान होते हैं, किंतु अलग-अलग बंध होने के कारण इनके भौतिक गुण भिन्न-भिन्न होते हैं।
A. द्विक्षारकीय लूइस अम्ल है।
B. एकल क्षारीय लूइस अम्ल है।
C. द्विक्षारकीय लूइस क्षारक है।
D. एकल क्षारीय लूइस क्षारक है।
बोरिक अम्ल एक दुर्बल क्षारीय अम्ल है। यह प्रोटोनी अम्ल नहीं है, परंतु हाइड्रॉक्सिल आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने के कारण यह लूइस अम्ल की भाँति व्यवहार करता है। H3BO3 + 2HOH → [B(OH)4]- + H3O+
A. इसका अम्लीय स्वभाव
B. इसका क्षारीय स्वभाव
C. इसकी ज्यामिती
D. इसमें हाइड्रोजन आबंधों की उपस्थिति
बोरिक अम्ल की संरचना परतीय होती है जहाँ BO3 की इकाइयां हाइड्रोजन आबंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं। हाइड्रोजन आबंधों की उपस्थिति के कारण बोरिक अम्ल की प्रकृति बहुलकी होती है।
A. इलेक्ट्रॉन समृद्ध यौगिक
B. इलेक्ट्रॉन क्षुद्र यौगिक
C. इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध यौगिक
D. आयनिक यौगिक
फ्लूओरीन के तीन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक आबंध बनाने के बाद, बोरॉन के परमाणु में केवल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः, यह एक इलेक्ट्रॉन क्षुद्र यौगिक है।
A. ऐल्किल हैलाइड को जलीय KOH के साथ गरम किया जाता है ।
B. ऐल्किल हैलाइड को ऐल्कहॉलिक KOH के साथ गरम किया जाता है ।
C. ऐल्किल हैलाइड को बेंज़ीन के साथ गरम किया जाता है ।
D. ऐल्किल हैलाइड को जल के साथ गरम किया जाता है ।
ऐल्किल हैलाइड को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गरम करने पर हैलोजेन अम्ल के एक अणु के विलोचन द्वारा एल्कीन बनता है । इस अभिक्रिया को विहाइड्रोहैलोजनीकरण कहते हैं, अर्थात जिसमें हैलोजन अम्ल का विलोपन होता है। यह एक β-विलोपन अभिक्रिया का उदाहरण है क्योंकि हाइड्रोजन परमाणु का विलोपन β कार्बन परमाणु से होता है।
A. COOH
B. CN
C. COCH3
D. NHCOCH3
ऑर्थो एवं पैरा निर्देशी समूह इलेक्ट्रॉन धनी समूह होते हैं जो बेंज़ीन वलय में ऑर्थो एवं पैरा स्थितियों में इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ा देते हैं। फलतः ऑर्थो और पैरा स्थितियों में प्रतिस्थापन होता है। COOH, CN, COCH3 मेटा निर्देशी समूह हैं क्योंकि ये बेंज़ीन वलय से इलेक्ट्रॉन निकालते हैं।

वायु की अनुपस्थिति में उच्च हाइड्रोकार्बनों को गर्म करके निम्न हाइड्रोकार्बनों में विखंडित करने का प्रक्रम भंजन कहलाता है।

दिये गए यौगिक में छ: σ बंध और चार π बंध हैं।
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें केवल हाइड्रोजन और कार्बन ही होते हैं, उन्हें हाइड्रोकार्बन कहते हैं।
(i) साइक्लोऐल्केन: CnH2n
(ii) साइक्लोएल्कीन: CnH2n-2




एल्काइन की एल्कीन की अपेक्षा इलेक्ट्रॉरागी योगज अभिक्रिया के प्रति कम अभिक्रियाशीलता निम्नलिखित कारणों से होती है:
(i) त्रिआबंध के sp-संकरित कार्बन परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता द्विआबंध के sp2-संकरित कार्बन परमाणुओं की तुलना में अधिक होती है।
(ii) एल्काइन के p-इलेक्ट्रॉन अभ्र की आकृति बेलनाकार होती है। अतः त्रिआबंध के p-इलेक्ट्रॉन, द्विआबंध के p-इलेक्ट्रॉन की तुलना में अधिक विस्थानीकृत होते हैं।



A. वंश और कुल
B. संघ और जगत
C. कुल और वर्ग
D. जगत और वर्ग
पदानुक्रम वर्गीकरण उनके सापेक्ष आयामों के आधार पर श्रेणियों के एक निश्चित अनुक्रम में जीवों की व्यवस्था है। पदानुक्रम में सात बाध्य श्रेणियां शामिल होती हैं: जगत, संघ, वर्ग, गुण, कुल, वंश, जाति। वर्गिक्रिय श्रेणी में गण कुल और वर्ग के बीच स्थित होता है|
पौधों के नमूने हरबेरियम शीट पर एकत्र किए जाते हैं। पौधों को समतल सुखाकर, दबाकर और कागज पर लगाकर इसे तैयार किया जाता है। यह पौधों के सुखाए गए और परिरक्षित किए गए नमूनों का एक संग्रहागार होती है।
A. मुंबई
B. जम्मू
C. लखनऊ
D. कोलकाता
नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) लखनऊ में सीएसआईआर इंडिया का एक शोध संस्थान है। यह वर्गीकरण और आधुनिक जीव विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करता है।
A. अमीबा
B. कवक
C. बैक्टीरिया
D. चपटा कृमि
पुनर्जनन अलैंगिक जनन का एक प्रकार है जिसमें लुप्त भाग समसूत्री विभाजन द्वारा पुनर्जनन करते हैं। उपरोक्त जीवों में से चपटा कृमि में पुनर्जनन की प्रक्रिया होती है|
A. जाति
B. जगत
C. संघ
D. कुल
वर्गिकीय संवर्गों का पदानुक्रम है- जाति, वंश, कुल, गण, वर्ग, संघ या वर्ग और जगत। जाति वर्गीकरण की मूल तथा सबसे छोटी इकाई जाति है|
वैज्ञानिक नाम वैज्ञानिक नामकरण की सार्वभौमिक रूप से अनुवर्ती प्रणाली पर आधारित हैं और यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक जीव का केवल एक विशिष्ट नाम हो।
A. चेतना
B. गति
C. वृद्धि
D. प्रजनन
चेतना सजीवों का एक विशिष्ट गुण है, क्योंकि सभी जीव बाह्य और आंतरिक उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया व्यक्त करते हैं।
A. Na+ और SO42-
B. Ca2+ और SO42-
C. Na+ और Cl-
D. Na+ और OH-
जल की स्थायी कठोरता Ca2+, Mg2+, Cl-, SO42- आयनों की उपस्थिति के कारण होती है जबकि जल की अस्थायी कठोरता Ca और Mg के बाइकार्बोनेटों की उपस्थिति के कारण होता है।
A. ईंधन के रूप में
B. मंदक के रूप में
C. शीतलक के रूप में
D. ड्यूटीरियम के स्त्रोत के रूप में
नाभिकीय रिएक्टरों में, D2O का उपयोग न्यूट्रॉनों की गति को कम करने के लिए किया जाता है। यह मंदक के रूप में कार्य करके रिएक्टर को सुचारू रूप से चलाने में सहायता करता है।
A. Pb
B. Hg
C. Sn
D. Ba
सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन के नीचे स्थित धातुएँ अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकती हैं। चूँकि Hg सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित है, अतः यह अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करती है।
A. H2
B. H2O
C. H2O2
D. O2
KH जल के साथ अभिक्रिया करके पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है और हाइड्रोजन निर्मुक्त करता है।
A. Pt से
B. Cu से
C. N से
D. Mg से
सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर रखी गई धातुएँ, अम्ल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन निर्मुक्त करती हैं। चूँकि सक्रियता श्रेणी में Mg को हाइड्रोजन से ऊपर रखा गया है, अतएव यह HCl से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन निर्मुक्त करती है।
A. CuCl2 की उपस्थिति
B. MgCl2 की उपस्थिति
C. NaHCO3 की उपस्थिति
D. KCl की उपस्थिति
जल की कठोरता का कारण उसमें उपस्थित Ca और Mg के बाइकार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट हैं।
A. CO2 और H2 का
B. CO और H2 का
C. CO और H2O का
D. CO और N2 का
जब हाइड्रोकार्बनों को भाप के साथ गरम किया जाता है, तो CO और H2 का मिश्रण प्राप्त होता है जिसको सिन्गैस कहते हैं। इसका उपयोग ईंधन के रूप में और पेट्रोल के उत्पादन में किया जाता है।
A. PbS का
B. O3 का
C. Na2SO3 का
D. KI का
हाइड्रोजन परॉक्साइड PbS, KI और Na2SO3 को ऑक्सीकृत करता है। यह ओजोन को ऑक्सीजन में अपचयित कर देता है।
A. LiAlH4
B. H2O2
C. K2Cr2O7
D. Na-ethanol
H2O2 में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था 1 है, जो -2 तक अपचयित और 0 तक ऑक्सीकृत हो सकती है। इसलिए, यह ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों ही रूपों में कार्य कर सकता है।
तुरंत निकली हुई हाइड्रोजन नवजात हाइड्रोजन [H] कहलाती है। कम दाब पर यह आण्विक हाइड्रोजन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होती है।
ट्रिटियम हाइड्रोजन का एकमात्र समस्थानिक है, जो रेडियोधर्मी होता है ।
डाइहाइड्रोजन एक रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन तथा ज्वलनशील गैस है। यह वायु से हल्की तथा जल में अघुलनशील है।
हाइड्रोजन का इलेक्ट्रानिक विन्यास ns1 होता है। यह वर्ग 1 के क्षार धातुओं और वर्ग 17 के हैलोजनों, दोनों के समान गुणों में समानता प्रदर्शित करता है। अतः इसके विशिष्ट व्यवहार के कारण इसे आवर्त सारणी में विशिष्ट स्थान दिया गया है।
(1)हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग मंद कीटाणुनाशक और पूतिरोधी के रूप में किया जाता है। यह बाजार में परहाइड्रॉल के नाम से बेचा जाता है।
(2)इसका उपयोग सोडियम परबोरेट तथा सोडियम परकार्बोनेट जैसे रसायनों के निर्माण में किया जाता है
(3)|उद्योगों में इसका उपयोग वस्त्र, कागज की लुगदी, चमड़ा, तेल, वसा आदि के विरंजन कारक के रूप में किया जाता है।
गैस प्रावस्था में जल एक बंकित अणु है जिसका आबंध कोण 104.50 और O-H की आबंध लम्बाई 95.7 pm है। यह एक अत्यधिक ध्रुवीय अणु है।
द्रव प्रावस्था में जल के अणु हाइड्रोजन आबंधों द्वारा एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
ठोस प्रावस्था में, जल क्रिस्टलीकरण अवस्था (बर्फ) के रूप में होता और षट्कोणीय आकृति बनाता है।
भारी जल का उत्पादन वैद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है । इसका उपयोग विस्तृत रूप से नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक के रूप में तथा विनिमय अभिक्रियाओं में क्रियाविधियों के अध्ययन में होता है। इसका उपयोग अन्य ड्यूटीरियम यौगिकों को बनाने के लिए किया जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड की संरचना असमतलीय होती है।
(क) गैस प्रावस्था में H2O2 की संरचना में द्वितल कोण 111.50 होता है।
(ख) ठोस प्रावस्था में H2O2 की संरचना में द्वितल कोण 90.20 होता है।
(क) डाइहाइड्रोजन, धातुओं पर जल अथवा तनु खनिज अम्ल की क्रिया द्वारा तैयार किया जाता है।
(i) 2Na (s) + 2 H2O(l) → 2NaOH (aq) + H2
(ii) 2K + 2 H2O→ 2KOH + H2
(ख) प्रयोगशाला में, हाइड्रोजन तनु HCl अथवा H2SO4 के साथ दानेदार जिंक की अभिक्रिया द्वारा तैयार की जाती है।
(i) Zn(s) + 2HCl(aq) → ZnCl2(aq) + H2(g)
(ii) Zn(s) + H2SO4(dil) → ZnSO4 + H2(g)
(ग) गरम जल अथवा भाप की क्रिया द्वारा: धातुएँ जैसे Mg, Zn, Al गरम जल के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड और H2(g) बनाती हैं।
(i) Mg + H2O(hot) → MgO + H2
(ii) 3Fe + 4 H2O(steam) →Fe3O4 + 4 H2
(घ) धातु हाइड्रेट के साथ H2O की अभिक्रिया द्वारा: धातु हाइड्रॉइड जल के साथ अभिक्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
(i) NaH + H2O→ NaOH + H2
(ii) CaH2 + 2 H2O→ Ca(OH)2 + 2H2
(ड.) भाप के साथ मीथेन की अभिक्रिया द्वारा
(i) CH4 + H2O (भाप) → CO + 3 H2
क्षार धातुओं के साथ समानता:
(i) इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s है और यह क्षार धातुओं के समान होता है।
(ii) यह क्षार धातुओं के समान अपचायक गुण दर्शाती है।
(iii) यह क्षार धातुओं की तरह H+ आयन बनाने के लिए एक इलेक्ट्रॉन मुक्त कर सकती है।
(iv)यह क्षार धातुओं की तरह वैद्युत धनात्मक होती है।
(v)यह क्षारीय धातुओं की तरह +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती करती है।
हैलोजनों के साथ समानता:
(i) हैलोजनों के समान हाइड्रोजन अधात्विक होती है।
(ii) यह द्विपरमाण्विक अणु बनाती है।
(iii) यह F2 और Cl2 के सामान गैस है।
(iv) यह H- आयन बनाने के लिए एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकती है।
(v) यह -1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है।
(vii) यह हैलोजनों जैसे सहसंयोजक यौगिक बनाती है।
A. उच्च रक्त दाब होता है ।
B. निम्न रक्त दाब होता है ।
C. खून की कमी होती है ।
D. मधुमेह होता है ।
बढ़ी हुई सोडियम आयन की सांद्रता ADH और Thirst system को उत्तेजित कर देती है, जिससे गुर्दे में पानी का अधिशोषण बढ़ जाता है। अधिक लवण अन्तर्ग्रहण के कारण रक्त वाहिकाओं में अधिक द्रव प्रवेश कर जाता है। इससे परिसंचरण तंत्र में रक्त का आयतन बढ़ जाता है जिससे कारण रक्त दाब बढ़ जाता है।
A. कैल्सियम के लवण
B. सोडियम के लवण
C. मैग्नीशियम के लवण
D. फेरस के लवण
केवल रंगीन लवण ही बोरेक्स मनका परीक्षण देते हैं। फेरस लवण हरे रंग के होते हैं, अतः ये बोरेक्स मनका परीक्षण देते हैं।
A. C
B. Fe
C. Al
D. Mg
थर्माइट प्रक्रम में निम्न अभिक्रिया होती है: Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3 + ऊष्मा यह दर्शाता कि Al थर्माइट प्रक्रम अपचायक की भांति कार्य करता है।
A. C
B. Sn
C. Ge
D. Pb
जैसे-जैसे हम वर्ग में नीचे की ओर जाते हैं, धात्विक अभिलक्षण बढ़ता । वर्ग-14 में, C अधातु है Si और Ge उपधातुएँ हैं तथा Sn और Pb धातुएँ हैं।
A. Al2O3
B. Al2O3.H2O
C. Al2O3.2H2O
D. Al2O3.3H2O
बॉक्साइट, ऐलुमीनियम का एक अयस्क है तथा इसका रसायनिक सूत्र Al2O3.2H2O होता है।
A. इसकी संयोजकता है।
B. इसकी निम्न इलेक्ट्रॉन बंधुता है।
C. इसका शृंखलन का गुण है।
D. इसकी उच्च आयनन एन्थैल्पी है।
कार्बन के छोटे आकार तथा उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण इसमें कार्बन-कार्बन बंध बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है। इसके अतिरिक्त कार्बन अन्य प्रकार के आबन्ध अर्थात द्विआबन्ध, त्रिआबन्ध आदि भी बनाता है अतः इसके यौगिकों की संख्या अधिक होती है।
A. CO + H2O का
B. CO + H2 का
C. CO2 + H2 का
D. CO2 + H2O का
वाटर गैस अथवा संश्लेषण गैस गर्म कोक पर भाप प्रवाहित करके बनाई जाती है। यह CO और H2 का मिश्रण होती है।

A. लेड
B. लेड सल्फाइड
C. ग्रेफ़ाइट
D. सिलिकन