A. 63
B. 255
C. 256
D. 257
A. 581
B. 2443
C. 12219
D. 256599
A. ग्यूसेप पियानो (G.Peano)
B. ब्लेज पास्कल
C. जॉन वॉलिस
D. डी मॉर्गन
‘mathematical induction’ (गणितीय आगमन) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ऑगस्टस डि मॉर्गन (1806-1871) ने 1838 में Penny Cyclopedia के लिए लिखे अपने लेख Induction (Mathematics) में किया था। डि मॉर्गन ने इस लेख में successive induction नाम का सुझाव पेश किया था और mathematical induction शब्द का प्रयोग केवल प्रसंगवश ही किया था। जब डेडेकिंड ने 1887 में एक समाचारपत्र में complete induction शब्द का प्रयोग किया, तो यह जर्मनी में प्रचलित होने लगा।
A. पाइथागोरस
B. ब्लेज पास्कल
C. जॉन वॉलिस
D. ग्यूसेप पियानो (G.Peano)
‘induction’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग जॉन वॉलिस ने 1656 में (Arithmetica Infinitorum) नामक अपनी पुस्तक में (per modum inductionis) के रूप में किया था। वॉलिस इस प्रक्रिया के लिए नाम निर्धारित करने वाले प्रथम व्यक्ति थे।
A. पाइथागोरस
B. ब्लेज पास्कल
C. जॉन वॉलिस
D. डि मॉर्गन
पास्कल्स ट्रीटाइज में गणितीय आगमन का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया है। पास्कल ने त्रिभुज की संख्याओं के संबंध में उपपत्तियों (proofs) के विशेष संदर्भ में इस सिद्धांत का उल्लेख किया है। गणितीय आगमन का मूलभूत विचार मध्यकालीन युग में इस्लामिक गणित के क्षेत्र में और चौदहवीं सदी के दक्षिणी यूरोप में प्रारंभ हुआ था। लेकिन, “पास्कल्स ट्रीटाइज” प्रथम पुस्तक है, जिसने आधुनिक गणित में उपपत्ति की इस अत्यंत महत्वपूर्ण विधि पर पूर्ण और स्पष्ट रूप से प्रकाश डालते हुए इसका औचित्य सिद्ध किया है। गणितीय आगमन आश्चर्यजनक रूप से बुद्धिमत्तापूर्व एक विधि है, जो हमें अनंत रूप से परस्पर जुड़ी हुई अनेक घटनाओं के संबंध में सभी दावों को तुरंत सिद्ध करने देती है, जबकि उनमें से एक ही दावे को पृथक रूप से सिद्ध करना अत्यंत कठिन होता है।
A.
B.
C.
D.
संक्षेप में, निगमन एक ऐसा दिया गया कथन है, जिसे सिद्ध किया जाना है और जिसे प्रायः एक अनुमानित कथन (conjecture) या प्रमेय (theorem) कहा जाता है। गणित में, तर्कसंगत निगमन के चरण प्राप्त किए जाते हैं और एक उपपत्ति स्थापित की जा सकती है अथवा नहीं की जा सकती है अर्थात निगमन व्यापक स्थिति से विशेष स्थिति प्राप्त करने का अनुप्रयोग है।
A. व्यापक स्थिति से विशेष स्थिति
B. विशेष स्थिति से व्यापक स्थिति
C. व्यापकीकरण की स्थिति
D. स्थापन (establishment) की स्थिति
आगमन तर्क विशेष प्रेक्षणों से प्रारंभ होता है और व्यापक व्यापकीकरणों (generalisations) और प्रमेयों तक पहुँचता है। अनौपचारिक रूप से, हम कभी-कभी इसे "ऊपर से नीचे" दृष्टिकोण कहते हैं।
A. व्यापक स्थिति से विशेष स्थिति
B. विशेष स्थिति से व्यापक स्थिति
C. व्यापकीकरण (generalization) की स्थिति
D. विशेष स्थिति
संक्षेप में, निगमन एक ऐसा दिया गया कथन है, जिसे सिद्ध किया जाना है और जिसे प्रायः एक अनुमानित कथन (conjecture) या प्रमेय (theorem) कहा जाता है। गणित में, तर्कसंगत निगमन के चरण प्राप्त किए जाते हैं और एक उपपत्ति स्थापित की जा सकती है अथवा नहीं की जा सकती है अर्थात निगमन व्यापक स्थिति से विशेष स्थिति प्राप्त करने का अनुप्रयोग है।
A. 2
B. 1
C. 3
D. 4
माना कि P(n): xn - 4 = λ (x - k)
P(1): x - 4 = λ1 (x - k)
P(2): x2 - 4 = λ2 (x - k)
P(2): (x - 2)(x + 2) = λ2 (x - k)
अतः, k=2
A. n > 1
B. n ≥ 1
C. n > 2
D. n ≥ 2;
A. a – b
B. a + b
C. 2a – b
D. 2a + b
माना कि P(n) : an + bn , तो P (1) ; a + b ⇒ P (2) ; a2 + b2 ⇒ P (3) ; a3 + b3 = (a + b)(a2 – ab + b2) ⇒ P (4); a4 + b4 अतः, P (n), (a + b) द्वारा विभाज्य है, क्योंकि n विषम है और (a+b) द्वारा विभाज्य नहीं है, यदि n सम है।
A. एक पूर्णांक (integer)
B. एक प्राकृत संख्या (a natural number)
C. एक धनात्मक भिन्न (positive fraction)
D. एक विषम संख्या (odd number)
सभी प्राकृत संख्याओं का योग प्राकृत संख्या होती है।
A. 25
B. 35
C. 45
D. 55
माना कि
P(n) : 72n + 23n–3 3n–1, तो
P (1) : 49 + 20.30 = 49 + 1
= 50
= 25 × 2
P (2) : 72.2 + 26–3 .32–1 = 2401 + 24 = 2425
= 25 × 97
P (3) : 76 + 26.32 = 117649 + 576
= 118225
= 25 × 4729
जो कि केवल 25 द्वारा विभाज्य हैं।
A. n > 2
B. n ≥ 3
C. n ≥ 4
D. n < 4
n = 1, 3 > 1
n = 2, 32 > 23
n = 3, 33 = 33
n = 4, 34 > 43
n = 5, 35 > 53
यह n ≥ 4 के लिए सही है।
A. 5
B. 7
C. 6
D. 4
माना कि P(n): n(n + 1)(n+ 2)
P(1): (1)(2)(3) = 6
P(2): (2)(3)(4) = 24
P(3): (3)(4)(5) = 60
यहाँ हम देखते हैं कि P(1), P(2) और P(3), 6 द्वारा विभाज्य हैं।
A. 
B. 
C. 
D. 
P(n) : an + abn, जो a द्वारा विभाज्य है।
P(1) : a + b, जो a द्वारा विभाज्य है।
P(2): a2 + ab2 = a(a + b2), जो a द्वारा विभाज्य है।
अतः P(1) और P(2) सही हैं।
यहाँ
P(n) = n(n + 1)(n + 2)
P(1) = 1(1 + 1)(1 + 2) = 6, जो कि 6 द्वारा विभाज्य है।
P(2) = 2(2 + 1)(2 + 2) = 24, जो कि 6 द्वारा विभाज्य है।
P(1) = 3(3 + 1)(3 + 2) = 60, जो कि 6 द्वारा विभाज्य है।
अतः P(1), P(2) और P(3) सही हैं।
n = 1 के लिए,
a2n -b2n = a – b, जो a – b द्वारा विभाज्य है।
n = 2 के लिए,
a2n -b2n = a4 - b4 = (a2 - b2)(a2 + b2) = (a - b)(a + b)(a2 + b2), जो a – b द्वारा विभाज्य है।
n = 3 के लिए,
a2n -b2n = a6 - b6 = (a2 - b2)(a2 + b2 + ab) = (a - b)(a + b)(a2 + b2 + ab), जो a – b द्वारा विभाज्य है।
P(n) : 72n + 23n - 3 3n - 1
P(1) : 72 + 23 - 3 3 1- 1 = 49 + 20 3 0 = 49 + 1 = 50
P(2) : 72.2 + 23.2 - 3 3 2- 1 = 2401 + 24 = 2425
जो केवल 25 द्वारा विभाज्य है।






N के लिए, 7n - 3n, 4 द्वारा विभाज्य है।



A. ![]()
B. ![]()
C. ![]()
D. ![]()
A. एक मात्र काल्पनिक संख्या (Purely Imaginary Number)
B. ![]()
C. एक मात्र वास्तविक संख्या (Purely Real Number)
D. ![]()
A. 1
B. –1
C. i
D. –i
A. ![]()
B. ![]()
C. ![]()
D. ![]()
A.
B.
C.
D.
A.
2i
B.
-i
C.
1
D.
i
A.
1 और -1
B.
1 और 0
C.
-1 और 0
D.
0 और -1
वास्तविक भाग और काल्पनिक भाग को समान लेने पर (Equating), हम प्राप्त करते हैं:
x-y = 1 और x+y =-1
इन समीकरणों को हल करने पर, हम प्राप्त करते हैं: x = 0 और y=-1
A.
π
B.
π/2
C.
0
D.
–π/2
A.

B.

C.

D.

A.
B.

C.
0
D.
– 18
A.
7
B.
5
C. 3
D.
2
सम्मिश्र संख्या z = a+bi के लिए a को वास्तविक भाग (real part) और b को काल्पनिक भाग (imaginary part) कहा जाता है। इसीलिए z = 5 + 2i का वास्तविक भाग 5 है|
A.
B.
C.
D.
A.
i
B.
0
C.
1
D.
-i
हम जानते हैं कि, i2 = –1
अतः, 1+ i2 = 0 इस प्रकार, (1+i20) (1+i15) (1+i10) (1+i5) (1+i2) = 0
A.
i
B.
-1
C.
1
D.
-i
A.
-16
B.
1
C.
16
D. 2i
A.
1
B.
2
C.
3
D.
4
A.
B.
C.
D.
A. 
B. 
C.

D.

A.
/3
B. 2
/3
C.
0
D.
/2
A.
संरेख (collinear)
B.
असंरेख (non-collinear)
C.
रैखिक रूप से स्वतंत्र (linearly independent)
D.
असमतलीय (non-coplanar)
aZ1 + bZ2 +cZ3 =0
aZ1 + bZ2 – (a + b)Z3 = 0
Z3 = (aZ1 + bZ2)/(a+b)
Z1, Z2, Z3 संरेख हैं।




यहाँ, 2x+ i(x - y) = 5
या 2x+ i(x - y) = 5 + 0.i
वास्तविक भाग (real part) और काल्पनिक भाग (imaginary part) की तुलना करने पर, हम प्राप्त करते हैं:
2x = 5 और x - y = 0
x = 5/2 और x = y
इस प्रकार, x = y = 5/2.


विद्यार्थी निम्नलिखित प्रकार से 8 प्रश्नों का चयन कर सकते हैं:
I (5 प्रश्न) II (7 प्रश्न)
(a) 3 5
(b) 4 4
(c) 5 3
यदि चयन के तरीकों की अभीष्ट संख्या P है, तो
यहाँ दो प्रकार की स्थितियाँ हैं:
(a) यदि तीनों विद्यार्थी भ्रमण-दल में शामिल होते हैं, तो संचयों (combinations) की संख्या होगी
C1 = C(12, 7)
(b) यदि तीनों विद्यार्थी भ्रमण-दल में शामिल नहीं होते हैं, तो संचयों की संख्या होगी
C2 = C(12, 10)
यदि भ्रमण-दल का चयन करने का संचय C है, तो
(i) P और S के बीच के अक्षर हैं: E, R, M, U, T, A, T, I, O, N
इन 10 अक्षरों में 'T' दो बार है।
इन अक्षरों को
= 1814400 तरीकों से व्यवस्थित किया जा सकता है।
(ii) PERMUTATIONS शब्द में 12 अक्षर हैं, जिनमें 'T' दो बार है।
अब स्वर a, e, i, o, u एक साथ रखे जाते हैं।
आइए! इन स्वरों को हम एक समूह मानते हैं।
इस प्रकार, यहाँ 7 अक्षर और स्वरों का 1 समूह है, जिनमें T दो बार है।
अतः, विन्यासों (arrangements) की संख्या

(iii) PERMUTATIONS शब्द में कुल 12 अक्षर हैं, जिन्हें 12 स्थानों पर व्यवस्थित करना है, जैसा कि नीचे प्रदर्शित किया गया है।
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 |
P को स्थान संख्या 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 में भरा जा सकता है और इसलिए S को बीच में चार स्थान छोड़ते हुए स्थान संख्या 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 में भरा जा सकता है।
अब P और S को 7 तरीकों से भरा जा सकता है। इसी प्रकार, S और P को भी 7 तरीकों से भरा जा सकता है।
इस प्रकार, P और S या S और P को 7 + 7 = 14 तरीकों से भरा जा सकता है।
अब, शेष 10 स्थान E, R, M, U ,T, A, T, I, O, N द्वारा
तरीकों से भरे जा सकते हैं।
अतः, P और S के बीच सदैव 4 अक्षर होने के तरीकों की संख्या

A. संभव नहीं
B. पहला पद
C. दूसरा पद
D. तीसरा पद
A.
B.
C.
D.
माना कि, A =(1 + x)n के प्रसार में xr का गुणांक =nCr, और B = (1 + x)n के प्रसार में xn-r का गुणांक = nCn-r अब, nCr = nCn-r का यह तात्पर्य है कि A = B
A. 
B. 
C. 
D. 
A.
10c
B.
10c2
C.
10c3
D.
10c4
A.
0
B.
1
C.
2
D.
3
दिया गया है कि, (1 + 2x + 3x2 +…)-3/2= [(1 - x)-2]-3/2 = (1 - x)3 अतः, x5 का गुणांक = 0
A.
3
B.
5
C.
7
D.
9
परिकल्पना (hypothesis) का प्रयोग करने पर, nC1, nC2, nC3 समांतर श्रेणी (AP) में हैं। हम जानते हैं कि, (यदि a, b और c समांतर श्रेणी में हैं, तो b = (a + c)/2). अतः,
n(n – 1) = n + [n(n – 1)(n – 2)/6]
या 6n – 6 = 6 + n2 – 3n + 2
या n2- 9n + 14 = 0
या (n - 7)(n - 2)=0
या n = 7, - 2(संभव नहीं) अतः, n=7
A.
1
B.
3
C.
9
D.
12
हमें ज्ञात है कि (x-1 + x2)n के प्रसार में, पहले, दूसरे और तीसरे पदों के गुणांकों का योग है: nC0 + nC1 + nC2 = 46 अतः, 1 + n + n(n – 1)/2 = 46
2 + 2n + n2 - n = 92
या n2 + n + 2 = 92
या n2 + n – 90 = 0
या (n + 10)(n - 9)=0
या n = 9
A. r= n/2 +1
B. r= n/2
C. r= n/2 -1
D.
r = 2n + 1
Tr = nCr–1 x r-1 nCr-1 अधिकतम है, यदि r-1 = n/2 (n सम है) r= n/2+1
A.
B.
C.
D.
(x4 - 1/x3 )15 के प्रसार में व्यापक पद है:
Tr+1 = 15 Cr (x4)15-r (-1/x3)r
= 15 Cr (x)60-7r (-1)r
x39 के लिए
60-7r = 39
r= 3
अतः, x39 का गुणांक =15 C3 (-1)3 = -455
A. 7
B. 8
C. 9
D. 10
, तो a और b के मान हैं:
A.
a=1, b= 5/6
B. a=1, b= -5/6
C. a=1, b= 5/3
D.
a=1, b= -5/3
A.
1
B.
2
C.
3
D.
4
n विषम है, इसलिए n+1 सम (even) होगा। अतः, यहाँ 2 मध्य पद हैं: [(n+1)/2] वाँ पद और [(n+1)/2 + 1]वाँ पद
A. छठा पद
B. सातवाँ पद
C. पाँचवाँ पद
D. आठवाँ पद
r>32/5 (
n= 27/5)
r=7 अतः, पहला ऋणात्मक पद T8 अर्थात आठवाँ पद है।
A. -3/10x
B. -3/5x
C. -2/3x
D. -5/3x
(1+ax)4 के प्रसार में मध्य पद = 4C2(ax)2 =6a2x2 (1-ax)6 के प्रसार में मध्य पद = 6C3(-ax)3 = - 20a3x3 दिए गए समीकरण के अनुसार 6a2x2= - 20a3x3
a = -3/10x.
A.
(-1)r .6Cr.x12-2ryr.
B.
6Cr(x2).yr.
C.
6Cr(x2).x12-2r.
D.
6Cr(x2).x12-r.
प्रसार में व्यापक पद दिया गया है: Tr+1 = 6Cr(x2)6-r.(-y)r , [Tr+1 = nCr (a)n-r.(b)r का प्रयोग करने पर] = (-1)r .6Cr.x12-2ryr
A.
6123x5y5
B. 6126x5y5
C. 61236x5y5
D.
61263x5y5
प्रसार में पदों की संख्या है: 10 + 1 = 11 प्रसार का मध्य पद है: T6 [
(11+1)/2= 6] Tr+1= 10Cr(x/3)10-r(9y)r ...(i) किन्तु r + 1 = 6, r = 5 (i) में r = 5 रखने पर, हम प्राप्त करते हैं:
A.
4
B.
5
C.
6
D.
7
यहाँ, हमें ज्ञात है कि T2 = 14 a5/2
A.
243
B.
125
C.
120
D.
5
सभी पुरस्कारों को बाँटने के तरीकों की संख्या = 5 × 5 × 5 = 125
एक लड़के द्वारा सभी पुरस्कार प्राप्त करने के तरीकों की संख्या = 5
अतः, तरीकों की अभीष्ट संख्या = 125 - 5 = 120
A.
82
B.
41
C.
40
D.
31
A. 25
B.
30
C.
70
D.
80
5 रेखाएँ
= 10 बिंदुओं पर परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं। 5 वृत्त
= 20 बिंदुओं पर परस्पर प्रतिच्छेद करते हैं। प्रत्येक रेखा 5 वृत्तों को 10 बिंदुओं पर काटती है, अतः 5 रेखाएँ 5 वृत्तों को 50 बिंदुओं पर काटती हैं। अतः, बिंदुओं की अभीष्ट संख्या = 10 + 20 +50 = 80
A.
20
B.
14
C.
8
D.
6
क्योंकि षट्भुज में 6 कोणीय बिंदु होते हैं, अतः त्रिभुजों की अभीष्ट संख्या = 6C3 = 20
A.
479001600
B.
39916800
C.
1663200
D.
199750400
दिए गए शब्द INDEPENDENCE में 12 अक्षर हैं, जिनमें 2 D, 4 E और 3 N हैं। अतः, शब्दों की अभीष्ट संख्या=
A.
4
B.
5
C.
6
D.
0
A.
13! – 8!×6!
B.
13! – 8!
C.
13! – 6!
D.
8! × 6!
भिन्न-भिन्न विन्यासों की अभीष्ट संख्या = विन्यासों की कुल संख्या – ऐसे विन्यासों की कुल संख्या, जिनमें सभी लड़कियाँ सदैव एक साथ हों
= 13!- 8!×6!
A.
9
B.
10
C.
12
D.
199
9! [n + 1C0 . n + 1C1 ........n + 1Cn + 1] = 109 [nC0 . nC1......nCn]

A.
B.
C.
D. 
विद्यार्थियों को तीन समूह मानने पर, तीनों समूहों को 3! तरीकों से व्यवस्थित किया जा सकता है और प्रत्येक समूह को आंतरिक रूप से भी व्यवस्थित किया जा सकता है। अतः, तरीकों की अभीष्ट संख्या = 3! 4! 5! 6!
A. 64
B. 57
C. 36
D. 12
गेंदों का पहला युग्म nC1 × nC1 = n2 तरीकों से निकाला जा सकता है| गेंदों का दूसरा युग्म n – 1C1 × n – 1C1 = (n – 1)2 तरीकों से निकाला जा सकता है| बैग खाली करने के तरीकों की संख्या = 14400 (दिया गया है) (n2) (n – 1)2 (n – 2)2...(1)2 = 14400
(n !)2 = 14400
n! = 120
n! = 5
4
3
2
1
n! = 5!
n = 5
A.
1680
B.
756
C.
24
D. 18
MATHEMATICS शब्द में समान अक्षरों के तीन जोड़े हैं: MM, AA, TT
एक जोड़े का चयन 3C1 तरीकों से किया जा सकता है।
अब, दो भिन्न-भिन्न अक्षरों का चयन 7C2 तरीकों से किया जा सकता है।
ये चारों अक्षर 4! / 2! = 12 तरीकों से व्यवस्थित किए जा सकते हैं। अतः, अक्षरों की अभीष्ट संख्या = 3C1
7C2
12 = 756
A.
8
B.
9
C.
10
D.
100

संकेतों की अभीष्ट संख्या :

(i) अंकों की कुल संख्या = 5
कुल 3-अंकीय संख्याएँ, जब अंकों की पुनरावृत्ति की अनुमति हो = 5
5
5 = 125
(ii) कुल 3-अंकीय संख्याएँ, जब अंकों की पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं हो,


चूँकि n विभिन्न वस्तुओं के वृत्ताकार क्रमचयों (circular permutations) की संख्या
= (n-1)!
अतः गोल मेज पर 7 प्रतिनिधियों के बैठने के तरीकों की संख्या
= (7 – 1)!
= 6!
=6×5×4×3×2×1
=720
यदि 2 विशेष प्रतिनिधि एक साथ बैठना पसंद करते हैं, तो बैठने के विन्यासों (arrangements) की संख्या
= (6-1)! × 2!
= 5! × 2
= 5×4×3×2×1×2
= 240
प्रतिनिधियों के बैठने के तरीकों की संख्या, यदि 2 विशेष प्रतिनिधियों को कभी भी एक साथ नहीं बैठना है
=720 – 240
=480



, तो m का न्यूनतम धनात्मक पूर्णांक मान (least positive integral value) ज्ञात कीजिए।


को ध्रुवीय रूप (Polar Form) में रूपांतरित कीजिए।

A. 
B. 
C. 
D. 
A. x – 2 > 10
B. x – 2 <– 10
C. x = – 8
D. x = 10
जब किसी असमिका के दोनों पक्षों में किसी ऋणात्मक संख्या (negative number) से गुणा या भाग किया जाता है, तो असमिका का चिह्न बदल जाता है।
अतः, 2 – x > 10 के दोनों पक्षों में -1 द्वारा गुणा करने पर,
हम x – 2 < – 10 प्राप्त करते हैं।
A. 
B. 
C. 
D. 
< या > चिह्न वाली असमिका सुनिश्चित असमिका कहलाती है।
A. 2 ≤ x < 11
B. 2 < x < 11
C. 3 ≤ x < 11
D. 3 < x < 11