शब्द 'मोनेस्ट्री' (मठ) ग्रीक शब्द 'मोनोज़' से लिया गया है, जिसका तात्पर्य 'जो अकेला रहता है, से होता है, 'मोनेस्ट्री' (मठ) एक स्थान होता था, जहाँ आध्यात्मिक लोग सांसारिक चीजों से अलग होकर एकाकी जीवन व्यतीत करते थे, दो विख्यात 'मोनेस्ट्री' (मठ) में से एक की स्थापना इटली में सेंट बेनेडिक्ट द्वारा 529 में की गई थी, एवं दूसरी 910 में बरगंडी की क्लूनी द्वारा स्थापित की गई थी।
शब्द 'सामंतवाद' एक जर्मन शब्द "फ्यूड" से लिया गया है, जिसका अर्थ ' जमीन का एक टुकड़ा ' होता है, एवं ‘इज़्म’ का अर्थ संबंधित सिद्धांतों का अनुसरण करना होता है, इसीलिए 'सामंतवाद' एक प्रक्रिया थी, जो भूमी सम्बन्धी मामलों के इर्द-गीर्द घुमती थी। समाज के सभी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मामलों का प्रतिनिधित्व भूमि द्वारा होता था।
ईसाई पादरी, भू-स्वामी रईस, और किसान, सामंती समाज की तीन महत्वपूर्ण द्विशाखित श्रेणियां थीं, जिनके बदलते रिश्ते कई सदियों तक यूरोपीय इतिहास का स्वरूप निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक के रूप में रहे थे।
काली मौत, या बूबोनिक प्लेग के कारण यूरोप में बड़े पैमाने पर मौते हुई थी। यह प्लेग व्यापारी जहाजों के साथ आने वाले चूहों के माध्यम से यूरोप पहुंचा था।
बाईबिल की कहानीयों से वर्णित रंगीन काँच का उपयोग चर्च की खिड़कियों पर किया गया था, ताकि निरक्षर इन
1 ) उन्हें, संपत्ति पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त था,
2 )
श्रेणियाँ, मध्ययुगीन यूरोप में आर्थिक संगठन का आधार थीं, प्रत्येक शिल्प अथवा उद्योग को एक श्रेणी में संगठीत किया गया था
13 वीं सदी में, कई कृषिदास उनके मालिको की दासता से भाग निकले थे और नए शहरों में जाकर छुप गए थे, यदि उनके मालिक, उन्हें नहीं खोज पाते थे और
जागीर, यूरोप की सामंती व्यवस्था में प्रशासन की सबसे निम्न इकाई थी, जागीर, सामंतों को दी जाने वाली संपत्ति होती थी
'एंजल्स' और सक्सोंस, केंद्रीय यूरोप से आए थे, और छठी शताब्दी के दौरान इंग्लैंड में बस गये थे
'दशमांश' एक वर्ष के दौरान किसानों पर अपने क्षेत्रों में उगाई जाने वाली उपज के दसवें भाग के रूप में चर्च द्वारा लगाया गया एक कर होता था, यह चर्च द्वारा किंग मार्टिन लूथर और उनके प्रोटेस्टेंट आंदोलन के आगमन तक आरोपित किया जाने वाला एक नियमित कर था।
शब्द 'मोनेस्ट्री' (मठ) ग्रीक शब्द 'मोनोज़' से लिया गया है, जिसका तात्पर्य 'जो अकेला रहता है, से होता है, 'मोनेस्ट्री' (मठ) एक स्थान होता था, जहाँ आध्यात्मिक लोग सांसारिक चीजों से अलग होकर एकाकी जीवन व्यतीत करते थे, दो विख्यात 'मोनेस्ट्री' (मठ) में से एक की स्थापना इटली में सेंट बेनेडिक्ट द्वारा 529 में की गई थी, एवं दूसरी 910 में बरगंडी की क्लूनी द्वारा स्थापित की गई थी।
शब्द 'सामंतवाद' एक जर्मन शब्द "फ्यूड" से लिया गया है, जिसका अर्थ ' जमीन का एक टुकड़ा ' होता है, एवं ‘इज़्म’ का अर्थ संबंधित सिद्धांतों का अनुसरण करना होता है, इसीलिए 'सामंतवाद' एक प्रक्रिया थी, जो भूमी सम्बन्धी मामलों के इर्द-गीर्द घुमती थी
मध्य काल में रोमन भाषा पर बहुत अधिक जोर था। इस भाषा से अनभिग्य लोग पुस्तकों को पढने में असमर्थ थे । इस कारण पुस्तकों का विकास कम हुआ था । परन्तु छापेखाने के अविष्कार के फलस्वरूप लोक सहित्य को प्रोत्साहन मिला । इस युग में लैटिन भाषा का प्रयोग बहुत अधिक बढ़ गया । यह भाषा आम बोल चाल की भाषा तो थी ही साथ ही साथ साहित्य का सृजन भी इसी भाषा में होने लगा । चॉसर की कैटन्बरी टेल्स व दांते की डीवाइन कॉमेडी लैटिन में ही लिखी गयी थीं । कुस्तुन्तुनिया वा रोम यूनानी सभ्यता वा संस्कृति के संगम स्थल थे । यहाँ से विद्वानों के पलायन के कारण समस्त यूरोप में इन नए विचारों ने क्रांति का श्री गणेश किया जिससे पुनर्जागरण को बल मिला।
कुस्तुन्तुनिया पर तुर्कों का आधिपत्य हो जाने के कारण यूरोप का मार्ग समस्त देशों के लिए बंद हो गया था । इस समस्या को सुलझाने के लिए यूरोपवासी समुद्री मार्गों की खोज में निकल पड़े । इससे समस्त यूरोप में नए युग का सूत्रपात्र हुआ । क्योंकि मध्य कालीन अवधारणा की पृथ्वी चपटी है को इन नाविकों ने झुठला दिया वा नए देशों से मिले ज्ञान का प्रसार इन्होने यूरोप में किया जिससे पुनर्जागरण को बढ़ावा मिला ।
पुनर्जागरण का तात्पर्य उन सभी बौधिक परिवर्तनों से है जो प्राचीन परम्पराओं के शिथिल होने तथा सुशुप्त समाज के जागने को परिलक्षित करते हैं । पुनर्जागरण के लिए उतरदायी कारन निम्नलिखित थे -
क. धर्म युद्धों का प्रभाव
ख. तुर्कों द्वारा कुस्तुन्तुनिया पर आधिपत्य
ग. छापेखाने का अविष्कार
घ. नगरों का विकास
क. धर्म युद्धों का प्रभाव - मध्य युग में तुर्कों व ईसाइयों के मध्य धार्मिक स्थानों को लेकर मतभेद उत्पन्न हो गए। इन युद्धों में ईसाईयों को बहुत नुक्सान हुआ । परन्तु जब वे तुर्कों द्वारा लायी गयी संस्कृति से अवगत हुए व उनकी प्रगति व रहन सहन को देखा तो उनकी वैचारिक संकीर्णता समाप्त हो गयी । उन्होंने अपने समाज व धर्म के प्रति अंधी आस्था के बारे में सोचना शुरू किया ।इससे उनमे स्वतन्त्र चेतना का उदय हुआ व मानसिकता में बदलाव आया ।
ख. तुर्कों द्वारा कुस्तुन्तुनिया पर आधिपत्य - इस्लाम का प्रचार व प्रसार करने के उद्देश्य से तुर्कों ने कुस्तुन्तुनिया पर आधिपत्य कर लिया । फलतः बाल्कान क्षेत्र एवं पूर्वी यूरोप पर तुर्कों का आधिपत्य स्थापित हो गया । जिसके कारण ईसाई विद्वानों ने इटली में जाकर शरण ली । उन्होंने अपनी विभिन्न पुस्तकों को अपने साथ ले लिया । चुनकी इटली में पुनर्जागरण पहले ही प्रारंभ हो गया था इस कारण अनुकूल परिस्थितियां मिलने के कारण इटली से जागरण का प्रादुर्भाव हुआ ।
ग. छापेखाने का अविष्कार - छापे खाने के अविष्कार के फ़लस्वरूप पुराने ज्ञान को संगृहीत करना सरल हो गया था । नवीन ज्ञान के प्रसार में सुगमता हुई व पहले की अपेक्षा इसमें कम समय भी लगा । नए विचों से सुदूर रहने वाले लोग भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके । जिससे लोगों में जाग्रति आयी व पुस्तकों का प्रचलन बढ़ गया ।
घ. नगरों का विकास - चहुंमुखी विकास होने के फलस्वरूप जनता की आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला । इस आर्थिक उन्नति का सबसे बड़ा कारण व्यापारिक प्रगति थी । इस प्रगति ने नए नगरों की स्थापना पर जोर दिया जो नए व्यापारिक केन्द्रों के रूप में उभर कर सामने आये । ये नगर व्यापार उद्योग व शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गए । इससे नए मध्य वर्ग का उदय हुआ जिसने तेज़ी से नवीन विचारों को अपनाया जिससे पुनर्जागरण को गति मिली ।
मानवतावादियों का सोचना था कि रोमन साम्राज्य के पतन के पश्चात कई सदियों तक अंधकारमय युग का अस्तित्व था, जिसे उन्होनें 'डार्क एज' के रूप में संबोधित किया था। उनका विश्वास था कि वे एक वास्तविक सभ्यता को पुनः स्थापित कर रहे थे। कई आधुनिक इतिहासकार,किसी यूग का नामांकन एक अन्धकारमय यूग कीये जाने, जिसे वें अन्यायपूर्ण मानते थे, पर वाद-प्रतिवाद कर रहे थे। बाद में विद्वान इस दृष्टिकोण पर सहमत हो गए थे, और उन्होंने यह माना कि 'न्यू एज' चौदह सदी के बाद शुरू हुई थी । रोमन साम्राज्य के पतन के बाद हजार वर्षों की अवधि (एक सहस्राब्दी), 'मध्य युग अथवा मध्यकालीन अवधि' के रूप में मानी जाती थी ।
'मध्य युग के बारे में उन्होंने कहा कि धर्म या चर्च ने सभी व्यक्तियों के मन पर इस तरह नियंत्रण कर रखा था कि यूनानी और रोमन की सभी शिक्षा धूमिल हो गयी थी। मानवतावादियों ने 15 वीं सदी तक की अवधि को 'आधुनिक' के रूप में नामित किया।
जेकब बर्कार्ड के लिए, राजनीति, इतिहास लेखन में केंद्रीय चिंता का विषय नहीं था, उनके लिए इतिहास, राजनीति के साथ ही संस्कृति से भी संबंधित था। अपनी पुस्तक 'द सिविलाइजेशन ऑफ द रेनेशा इन इटली' में बर्कार्ड ने 14 वीं से 17 वीं सदी तक एक नयी मानवतावादी संस्कृति, इतालवी शहरों में किस प्रकार प्रफुल्लित हूई थी, का वर्णन करने के लिए साहित्य, वास्तुकला और चित्रकला का संदर्भ दिया है। उन्होंने नयी मानवतावादी संस्कृति की विशेषता के रूप में नये विचारों का भी वर्णन किया था। क्योंकि उस युग का मानव अपने स्वयं के निर्णय लेने एवं एक व्यक्ति के रूप में अपना कौशल विकसित करने में सक्षम था।उन्होंने आगे लिखा था कि इस युग का मानव, मध्यकालीन मानव जीसके चिन्तन पर चर्च का नियंत्रण होता था के विपरीत, प्रतिबंध अथवा सत्ता से मुक्त होकर स्वतंत्र चिन्तन करता था, वह चिन्तन के क्षेत्र में आधुनिक था।
1.यूरोप ने,चीनी लोगों से मुद्रण प्रौद्योगिकी का विचार उधार लिया था, क्योंकि यूरोपीय व्यापारी और राजनयिक, मंगोल शासकों के दरबार में अपनी उपस्थिती के दौरान, इससे परिचित हो गए थे। इससे पूर्व, ग्रंथ हस्त-लिखित रूप में प्राप्त होते थे।
2.जॉन्स गुटेनबर्ग नामक ज़र्मन ने, पहली प्रिंटिंग प्रेस का निर्माण किया था और 1455 में बाइबिल की 150 प्रतियां मुद्रित की थी, जबकि एक साधु को बाइबल की मात्र एक प्रति लिखने में उतना ही समय लगता था।
3) सभी शास्त्रीय ग्रंथ, लगभग सभी लैटिन भाषा में 1500 ई.तक, इटली में मुद्रित कीये गये थे, मुद्रित पुस्तकों के आगमन के साथ, छात्रों की व्याख्यान लेखों पर निर्भरता समाप्त हो गई थी।
4. विचार और जानकारी, त्वरित गति से व्यापक रूप से प्रसारित हूई । मुद्रित पुस्तकों ने शीघ्रता से नए विचारों को प्रोत्साहित किया, इसने व्यक्ति हेतु पुस्तक-अध्ययन को संभव बना दिया, क्योंकि पुस्तक का क्रय करना सभी के लिये संभव हो गया था।
5.15 वीं सदी के अंत तक, आल्प्स में मानवतावादी संस्कृति का तेजी से प्रसार करने हेतु मुख्य स्रोत मुद्रित पुस्तकें ही थीं।
यूरोप में 14वीं सदी से 17वीं सदी के अंत तक विभिन्न देशों में, विशिष्ट 'शहरी संस्कृति' के साथ अनेक शहर विकसित हो गए थे, शहरों के नागरिकों ने यह सोचना आरंम्भ कर दिया था कि वे गांवों के लोगों की तुलना में अधिक 'सभ्य' हैं, अनेक शहर विशेष रूप से इटली के फ्लोरेंस, वेनिस और रोम, कला और शिक्षा के केन्द्र के रूप में विकसित हुए, उच्च वर्ग और अमीरों ने, कलाकारों और लेखकों को संरक्षण देना शुरू कर दिया, प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार ने किताबें और अन्य मुद्रित सामग्री आसानी से उपलब्ध करा दी। यूरोप में इतिहास की एक नई समझ विकसित हुई और अब लोगों ने इतिहास को प्राचीन एवँ आधुनिक, के रूप में विभाजित कर दिया, चर्च की भूमिका केवल धार्मिक कार्यों के लिए बनी रही, विज्ञान और भूगोल के विकास ने, चर्च की सभी अतीत सबंधी धारणाओं जैसे कि पृथ्वी, सौर प्रणाली का केंद्र, और भूमध्य सागर विश्व का केंद्र था, का खंडन कर दिया।
यूरोप में विश्वविद्यालय:
यूरोप में प्रारंभिक विश्वविद्यालयों की स्थापना इटली के शहरों में की गई थी। ग्यारहवीं शताब्दी से पडुआ और बोलोग्ना के विश्वविद्यालय विधि-अध्ययन हेतु लोकप्रिय केन्द्र रहे थे
इसलिए कानून और इससे संबंधित क्षेत्र अध्ययन हेतु लोकप्रिय विषय थे, लेकिन अब अवधारणा में परिवर्तन
फ्रांसेस्को पेट्रार्क, वाणिज्यिक कानूनों की व्याख्या में यह परिवर्तन लेकर आये थे । पेट्रार्क के लिए, पुरातनता एक विशिष्ट सभ्यता थी, जो कि प्राचीन यूनानी और रोमन क़े वास्तविक शब्दों के माध्यम से सर्वाधिक अच्छे से समझी जा सकती थी
इसलिए उन्होंने प्राचीन लेखकों को बारीकी से पढ़ने के महत्त्व पर बल दिया, इस शैक्षिक कार्यक्रम में यह निहितार्थ था कि इसमें ऐसा बहुत क़ुछ निहित था जिसका अध्ययन किया जा सकता था
1.परिवार, पितृसत्तात्मक थे; उच्च वर्गीय परिवारों के पुरुष, सार्वजनिक जीवन का नेतृत्व करते थे एवं उनके परिवारों के निर्णयकर्ता होते थे,पुत्रों को भविष्य में अथवा सार्वजनिक जीवन में परिवार के व्यापार का नेतृत्व करने हेतु शिक्षा प्रदान की जाती थी
एक व्यापारी की असामयिक मृत्यु उसकी विधवा को उच्च वर्गीय परिवार की महिलाओं की तुलना में एक बड़ी सार्वजनिक भूमिका निभाने हेतु बाध्य कर देती थी
7.अन्य उत्कृष्ट महिला मंतुआ की मर्चेज़ा थीं, इसाबेला डी 'एस्टे जिन्होनें उनके पति की अनुपस्थिति में शासन
A. स्कूल
B. चर्च
C. राजा की परिषद
D. खेती के तरीके
एज़्टेक समाज में, रईसों के बच्चों को कालमेकाक भेजा जाता था जहाँ उन्हें सैन्य व धार्मिक नेता बनने का प्रशिक्षण दिया जाता था। दूसरे बच्चों को तेपोकल्ली भेजा जाता था जहाँ वह इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा हासिल करते थे।
A. स्पेन
B. पुर्तगाल
C. इंग्लैंड
D. हॉलैंड
पुर्तगाल की आजादी के बाद, पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी जिसे नेविगेटर भी कहा जाता है, पश्चिम अफ्रीका के दौरे का आयोजन किया और 1415 में सेउटा पर हमला किया।
A. चार्ल्स पांच
B. चार्ल्स एक
C. फिलिप द्वितीय
D. फिलिप पांच
'स्लेवरी' (गुलामी) शब्द लैटिन शब्द 'सलेवस' से लिया गया है। ग़ुलामी पिछली सभ्यताओं में आम थी।
A. 15 वीं शताब्दी
B. 16 वीं शताब्दी
C. 17 वीं शताब्दी
D. 18 वीं शताब्दी
माया संस्कृति ने मेक्सिको में ग्यारवहीं और चौदहवीं शताब्दी के बीच उल्लेखनीय विकास किया। मकई की खेती उनकी संस्कृति का अहम् हिस्सा थी।
A. अबिपन
B. अमाहॉक
C. अरावाक
D. इन्का
एज़्टेक और इन्का की वास्तुकला, उनके लिबास, उनके रीति-रिवाज, धार्मिक प्रथाएं,किंवदंतियां और पौराणिक कथाएं और कहानियों लगभग एक जैसी थीं।
A. अरावाक
B. एज़्टेक
C. माया
D. इन्का
इन्का शानदार निर्माणकार थे।उनके किले पत्थर की पाटियों से बनाये जाते थे जो बेहतरीन तरीके से काटी जाती थीं और उनमे मसाले की ज़रुरत नहीं पड़ती थी।
A. अरावाक
B. एज़्टेक
C. माया
D. इन्का
इंका साम्राज्य का राजा प्राधिकरण के उच्चतम स्रोत का प्रतिनिधित्व करता था। जिन जनजातियों पर विजय प्राप्त की जाती थी उन्हें प्रभावी ढंग से अवशोषित कर दिया जाता था। सभी लोगों को क्वेशुआ, अदालत की भाषा बोलना अनिवार्य था।
A. 31 दिन
B. 32 दिन
C. 33 दिन
D. 34 दिन
कोलंबस के बेड़े में एक छोटी नाव थी जिसे 'सांता मारिया' कहा जाता था, और दो छोटी किश्तियाँ पिंटा और नीना थीं। कोलंबस ने खुद सांता मारिया की कमान संभाली और उसके साथ 40 सक्षम नाविक थे।
A. अरावाक
B. एज़्टेक
C. इन्का
D. माया
वास्तुकला के अलावा सत्ताधारी वर्ग और पुजारी खगोल विज्ञान और गणित के विकास में निवेश करते थे। उनके मुख्या भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
A. अरावाक
B. एज़्टेक
C. इन्का
D. माया
एज़्टेक समाज में, रईसों के बच्चों को कालमेकाक भेजा जाता था जहाँ उन्हें सैन्य व धार्मिक नेता बनने का प्रशिक्षण दिया जाता था। दूसरे बच्चों को तेपोकल्ली भेजा जाता था जहाँ वह इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा हासिल करते थे।
A. वंश
B. किसान
C. शासक
D. महिलाएं
एज़्टेक साम्राज्य में भूमि वंशों के स्वामित्व में थी नाकि व्यक्तियों के।किसान रईसों के खेतों से जुड़े होते थे जिन्हें वह जोतते थे फसल में हिस्से के बदले।
A. ग्रामीण बुनियाद
B. अर्द्ध ग्रामीण बुनियाद
C. शहरी बुनियाद
D. अर्द्ध शहरी बुनियाद
एज़्टेक ग्रामीण क्षेत्रों में, लोग मक्का, सेम, स्क्वैश सब्जी, कद्दू, मैनियॉक जड़, आलू और अन्य फसलों की खेती करते थे।भूमि का मालिक व्यक्ति नहीं बल्कि कुल हुआ करता था, जो सार्वजनिक निर्माण कार्यों का भी आयोजन किया करता था।
ईसाई पादरी, भू-स्वामी रईस, और किसान, सामंती समाज की तीन महत्वपूर्ण द्विशाखित श्रेणियां थीं, जिनके बदलते रिश्ते कई सदियों तक यूरोपीय इतिहास का स्वरूप निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक के रूप में रहे थे।
काली मौत, या बूबोनिक प्लेग के कारण यूरोप में बड़े पैमाने पर मौते हुई थी। यह प्लेग व्यापारी जहाजों के साथ आने वाले चूहों के माध्यम से यूरोप पहुंचा था।
उदारवादियों में ऐसे समूह के लोग शामिल थे जो समाज में बदलाव लाना चाहते थे । उन्होंने मौलिक विचारों का समर्थन किया।
यह समूह प्रतिनिधित्व पर आधारित एक ऐसी निर्वाचित संसदीय सरकार के पक्ष में था जो शासकों और अफसरों के प्रभाव से मुक्त और सुप्रशिक्षित न्यायपालिका द्वारा स्थापित किए गए कानूनों के अनुसार शासन-कार्य चलाए।
सामंती समाज में आध्यात्मिक ईसाई हुआ करते थे,जो कि भिक्षु कहलाते थे,एवं जिन्होनें पादरियों जो कि सांसारिक सुखों के साथ रहते थे, के विपरीत एकाकी जीवनयापन के विकल्प का चुनाव कीया था।
यूरोपीय सम्राट जो सत्ता में आये, को नए सम्राट कहा जाता था।उन्होंने अपनी सैन्य और वित्तीय शक्ति को मजबूत बनाया।स्थायी नौकरशाही, तैनात सेनाओं और राष्ट्रीय कराधान को संगठित किया।कराधान वृद्धि ने, राजाओं की सैन्य शक्ति में वृद्धि का नेतृत्व किया।अभिजात वर्ग, उनके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए, राजा के प्रति वफादार बन गया।
बाईबिल की कहानीयों से वर्णित रंगीन काँच का उपयोग चर्च की खिड़कियों पर किया गया था, ताकि निरक्षर इनसे (कहानीयों से) कुछ शिक्षा ग्रहण कर सकें ।
दिन के समय ये काँच, भीतर उपस्थित लोगों के लिए चर्च को दीप्तिमान बना देते थे, एवं रात के दौरान मोमबत्ती की रोशनी, बाहर उपस्थित लोगों हेतु इन्हें दृश्यमान बना देती थीं ।
यूरोपीय सम्राट जो सत्ता में आये, को नए सम्राट कहा जाता था।उन्होंने अपनी सैन्य और वित्तीय शक्ति को मजबूत बनाया।स्थायी नौकरशाही, तैनात सेनाओं और राष्ट्रीय कराधान को संगठित किया।कराधान वृद्धि ने, राजाओं की सैन्य शक्ति में वृद्धि का नेतृत्व किया।अभिजात वर्ग, उनके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए, राजा के प्रति वफादार बन गया।
समाजवादियों ने निजी संपत्ति के स्वामित्व को समस्त बुराइयों का मूल कारण माना।उनका तर्क था कि बहुत सारे लोगों के पास संपत्ति तो है जिससे दूसरों को रोजगार भी मिलता है लेकिन इससे धन एवं शक्ति का संचय समाज के एक छोटे से हिस्से में हो जाता है। संपत्तिधारी व्यक्ति को सिर्फ अपने लाभ से ही मतलब रहता है।वह उनके बारे में नहीं सोचता जो उसकी संपत्ति को उत्पादनशील बनाते हैं। यह बदले में एक ऐसे असमान समाज का निर्माण करता है जो सभी को उनकी क्षमता का अधिकतम विकास करने हेतु समान अवसर प्रदान करने में विफल रहता है। इसलिए अगर संपत्ति पर किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरे समाज का नियंत्रण हो तो साझा सामाजिक हितों पर ज्यादा अच्छी तरह ध्यान दिया जा सकता है। समाजवादी इस तरह का बदलाव चाहते थे और इसके लिए उन्होंने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।
1)
2)प्रथम एस्टेट और दूसरे एस्टेट में पादरी अथवा चर्च के अधिकारी गण और कुलीन वर्ग और उनके परिवार सम्मिलित थे ।जन्म से दोनों रियासतों को कई विशेषाधिकार प्राप्त थे।
3)तीसरे एस्टेट के सदस्यों में व्यापारी, अदालत के अधिकारी, वकील, भूमिहीन श्रमिक और सेवक सम्मिलित थे।
भिक्षुओं को आध्यात्मिक व्यक्ति बनने हेतू, अनेक बुनियादी नियमों का पालन करना पड़ता था। बेनिदिक्तिन मठों से प्राप्त पांडुलिपि से अनेक साक्ष्य प्राप्त किये गए हैं, महत्वपूर्ण नियमों में से कुछ इस प्रकार थे:
एक भिक्षु को कभी भी निजी संपत्ति का अधिकारी नहीं होना चाहिए।
रोमन कैथोलिक भिक्षु और बहनों को निश्चित समय के लिए शारीरिक श्रम में और निश्चित घंटों के लिए पठन में व्यस्त रहना चाहिए।
कृषि और निर्माण के बीच असंतुलन के कारण, सामाजिक अशांति उत्त्पन्न हुई ।कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट, श्रम की कमी और बाद में वेतन वृद्धि के कारण मालिकों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा ।मालिकों ने श्रम सेवाओं को पुनर्जीवित करने और पैसों की ठेकेदारी का अंत करने की कोशिश की। इसका, शिक्षित एवं समृद्ध किसानों सहित तमाम किसानों द्वारा हिंसक विरोध किया गया । किसानों द्वारा 1323 में फ़्लैंडर्स में 1358 में फ्रांस में, और 1381 में इंग्लैंड में विद्रोह कर दिया गया। यद्यपि बगावत करने वाले किसानों को निर्ममता से कुचल दिया गया। लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह थी जिन कि क्षेत्रों में आर्थिक वृद्धि देखी गई थी वहाँ ये अधिक हिंसक रूप में सामने आए थे। यह पिछली सदियों में किसानों द्वारा अर्जित किए गए अपने लाभ को हासिल करने हेतु उनके प्रयास का एक संकेत था।किसानों की आक्रामकता ने यह सुनिश्चित कर दिया था कि पुरानी सामंती व्यवस्था को पुनर्स्थापित नहीं किया जाएगा। इस प्रकार, सामंत विद्रोह को कुचलने में सक्षम थे, लेकिन पुराने सामंती विशेषाधिकारों को पुनर्स्थापित करने में सक्षम नहीं थे।
सामंती समाज में आध्यात्मिक ईसाई हुआ करते थे,जो कि भिक्षु कहलाते थे,एवं जिन्होनें पादरियों जो कि सांसारिक सुखों के साथ रहते थे, के विपरीत एकाकी जीवनयापन के विकल्प का चुनाव कीया था
वे, पूजा, अध्ययन और खेती जैसे शारीरिक श्रम करने में अपना समय व्यतीत किया करते थे।
यह जीवन पुजारी से अलग था और पुरुषों और महिलाओं दोनों को पुर्णतया प्राप्य था, क्योकि पुरुष, भिक्षु बन जाते थे और महिलाएँ, नन (मठवासिनी)बन जाती थीं
अधिकांश मठों में, कुछ अपवादों को छोड़कर जहां पुरुष एवं महिलाएं अलग-अलग मठों में रहते थे, एकल लिंग समूदाय ही हुआ करते थे ।
पुजारियों, भिक्षुओं और भिक्षुणियों में एक आम बात यह थीं कि, वे विवाह नहीं किया करते थे।
9 वीं और 13 वीं सदी के मध्य यूरोप में कई सामाजिक और राजनीतिक बदलाव अस्तीत्व में आ गए थे
एक राजनीतिक शक्ति, जो एक झंडे के नीचे सभी लोगों को अंगीकार कर सकती थी, के अभाव के कारण अपनी स्वयं की भूमि पर अधिकार बनाए रखने के लिए संसाधनों को एकत्र करने हेतु नियमित रूप से सैन्य संघर्ष हो रहे थे ।
सभी सामाजिक संस्थाएँ, भूमि से संबंधित मामलों के इर्द-गिर्द घूमती थीं एवं विकसित हूई थीं, जो साम्राज्यीय रोमन प्रथाओं और जर्मन परंपराओं दोनों के नियमों पर चलती थीं
ईसाई धर्म, देश का धर्म था क्योंकि यह लगभग पूरे यूरोप में फैला हुआ था
भिक्षुओं को आध्यात्मिक व्यक्ति बनने हेतू, अनेक बुनियादी नियमों का पालन करना पड़ता था
अध्याय 6 में कहा गया है: भिक्षुओं को बात करने के लिए सहमति केवल दुर्लभ अवसरों पर दी जानी चाहिए।
अध्याय 7 में कहा गया है:विनम्रता का तात्पर्य आज्ञाकारिता होता है
अध्याय 33 में कहा गया है: एक भिक्षु को कभी भी निजी संपत्ति का अधिकारी नहीं होना चाहिए।
अध्याय 47 में कहा गया है: आलस्य, आत्मा का शत्रु है, इसलिए रोमन कैथोलिक भिक्षु और बहनों को निश्चित समय के लिए शारीरिक श्रम में और निश्चित घंटों के लिए पठन में व्यस्त रहना चाहिए।
अध्याय 48 में कहा गया है: मठों की स्थापना इस तरह से होनी चाहिये कि सभी आवश्यकताओं की पूर्ति (पानी, चक्की, बगीचा, कार्यशालाएं, आदि) इसके परिसर में ही हो सके
कृषि और निर्माण के बीच असंतुलन के कारण, सामाजिक अशांति उत्त्पन्न हुई ।कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट, श्रम की कमी और बाद में वेतन वृद्धि के कारण मालिकों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा ।मालिकों ने श्रम सेवाओं को पुनर्जीवित करने और पैसों की ठेकेदारी का अंत करने की कोशिश की। इसका, शिक्षित एवं समृद्ध किसानों सहित तमाम किसानों द्वारा हिंसक विरोध किया गया । किसानों द्वारा 1323 में फ़्लैंडर्स में 1358 में फ्रांस में, और 1381 में इंग्लैंड में विद्रोह कर दिया गया। यद्यपि बगावत करने वाले किसानों को निर्ममता से कुचल दिया गया। लेकिन एक महत्वपूर्ण बात यह थी जिन कि क्षेत्रों में आर्थिक वृद्धि देखी गई थी वहाँ ये अधिक हिंसक रूप में सामने आए थे। यह पिछली सदियों में किसानों द्वारा अर्जित किए गए अपने लाभ को हासिल करने हेतु उनके प्रयास का एक संकेत था।किसानों की आक्रामकता ने यह सुनिश्चित कर दिया था कि पुरानी सामंती व्यवस्था को पुनर्स्थापित नहीं किया जाएगा। इस प्रकार, सामंत विद्रोह को कुचलने में सक्षम थे, लेकिन पुराने सामंती विशेषाधिकारों को पुनर्स्थापित करने में सक्षम नहीं थे।
9 वीं और 13 वीं सदी के मध्य यूरोप में कई सामाजिक और राजनीतिक बदलाव अस्तीत्व में आ गए थे
एक राजनीतिक शक्ति, जो एक झंडे के नीचे सभी लोगों को अंगीकार कर सकती थी, के अभाव के कारण अपनी स्वयं की भूमि पर अधिकार बनाए रखने के लिए संसाधनों को एकत्र करने हेतु नियमित रूप से सैन्य संघर्ष हो रहे थे ।
सभी सामाजिक संस्थाएँ, भूमि से संबंधित मामलों के इर्द-गिर्द घूमती थीं एवं विकसित हूई थीं, जो साम्राज्यीय रोमन प्रथाओं और जर्मन परंपराओं दोनों के नियमों पर चलती थीं
ईसाई धर्म, देश का धर्म था क्योंकि यह लगभग पूरे यूरोप में फैला हुआ था
14 वीं सदी के यूरोप में कई संकट उत्पन्न हुए जिंहोने पिछली सदियों के आर्थिक विस्तार का संक्षेपण कर दिया। इस वजह के तीन कारक थे:
13 वीं सदी के अंत तक उत्तरी यूरोप में अचानक जलवायु परिवर्तन देखा गया। पिछले 300 वर्षों के ग्रीष्मकाल का स्थान, कड़ाके की ठंडी सर्दियों ने ले लिया। इसने फसल रोपण की अवधि को कम कर दिया और खेती करना अत्यंत मुश्किल बना दिया। तूफान और समुद्री बाढ़ के कारण कईं खेत तबाह हो गए जिसकी वजह से सरकारी राजकोष में कर के रूप में होने वाली आय में कमी आई।
13 वीं सदी के पूर्व में अनुकूल जलवायु की शुरुआत के साथ वन्य एवं चारागाह भूमि का कृषि भूमि के रूप में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ।
यद्यपि खेती की त्री-फसल चक्रण पद्धति का प्रयोग किया गया था तथापि गहन खेती के कारण मृदा का क्षय हो गया था। कृषि योग्य भूमि के लिए आराम की निकासी मृदा संरक्षण के साथ नहीं था क्योंकि मिट्टी की थकावट के परिणामस्वरूप।क्योंकि कृषि-योग्य भूमि के लिए शेष भूमि के सफाए के समय मृदा संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया था जिसके परणामस्वरूप मृदा का क्षय हो गया। इसके अलावा चारागाह की कमी के कारण मवेशियों की संख्या में कमी आई। बढ़ती आबादी से संसाधनों में कमी आई जिसने सूखे और अकाल का रूप ले लिया। 1315 और 1317 के मध्य यूरोप में भीषण अकाल आए जिसके फलस्वरूप 1320 के दशक में भारी संख्या में मवेशी मारे गए और मानव जीवन को भी क्षति पहुंची।ऑस्ट्रिया और सर्बिया की चांदी की खानों से चांदी के उत्पादन की मात्रा, में गिरावट आई ।इसने, द्रव्य धातु की उपलब्धता में भारी कमी का नेतृत्व किया। व्यापार में गिरावट आई। मिश्र धातुओं के मिश्रण द्वारा निर्मित की गई इस द्रव्य धातु से व्यापार में स्थिरता आई।
13 मध्य 14 वीं सदी के दौरान, जैसे ही यूरोप में व्यापार का विस्तार हुआ, विभिन्न देशों से आने वाले सामान से लदे जहाज इनफ़ेकटेड चूहों के माध्यम से काली मौत, या बूबोनिक गिल्टी प्लेग, यूरोप पहुंच गया। व्यापार केन्द्र शहरों पर काली मौत ने सर्वाधिक कुठाराघात किया। एक व्यक्ति प्लेग अनुबंधित जब मठों और कॉन्वेंट जैसे परिसीमित समुदायों में से जब किसी एक व्यक्ति को प्लेग हो जाता था तो हर कोई इससे संक्रमित हो जाता था।
1347 और 1350 के बीच पश्चिमी यूरोप में महामारी फ़ेल गई। 1360 और 1370 के दशक में प्लेग संक्रमण की अन्य मामूली घटनाएँ घटी। 1300 में, जनसंख्या, 73 मिलियन थी , जो 1400 में, 45 मिलियन तक गिर गई। आधुनिक अनुमान के अनुसार उस महामारी में मरने वालों की संख्या सम्पूर्ण यूरोप के लोगों का 20 प्रतिशत तथा कुछ स्थानों पर आबादी का 40 प्रतिशत थी।
आर्थिक संकट के साथ संयुक्त यह आपदा, गंभीर सामाजिक विकार का कारण बनी। कस्बों की जनसंख्या में ह्रास से श्रम में कमी आई।
कृषि और माल के निर्माण के मध्य गंभीर असंतुलन दिखाई दिया। श्रम की मांग में वृद्धि से मजदूरी की दरों में उछाल आया। कृषि उत्पादों की कीमतें गिर गई। किसी भी तरीके से इस समस्या का कोई भी हल नहीं निकल सका।
A. अल राज़ी
B. इब्ने राशिद
C. इब्ने सीना
D. टॉलेमी
A. ईसाई विद्रोह
B. इस्लामी विद्रोह
C. किसान विद्रोह
D. राजनीतिक विद्रोह
यूरोप के अधिकांश भागों में, किसानों ने चर्च द्वारा लगाए गए करों के खिलाफ बलवा किया।
A. पवित्र कर
B. माफी
C. रिआयत
D. दशमांश
कैथोलिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापियों को सजा में पूर्ण या आंशिक छूट।
A. अंधकार युग
B. प्रारंभिक मध्ययुग
C. अंतिममध्ययुग
D. नयायुग
पुनर्जागरण काल के मानवतावादियों ने सोचा कि वे अंधेरे के सदियों के बाद 'अस्ल सभ्यता' बहाल कर रहे थे, क्योंकि वे मानते हैं कि एक 'अंधकार युग' रोमन साम्राज्य के पतन के बाद शुरू हुआ था। बाद में विद्वानों ने माना कि एक 'नया युग' चौदहवीं सदी से यूरोप में शुरू हो गया था।
A. अभिजात
B. कलाकार
C. सोदागर
D. विद्वान
व्यापारियों के परिवारों में महिलाओं की स्थिति कुछ हद तक कुलीन परिवारों से अलग थी। दुकानदारों को बहुत बार उनकी दुकानें चलाने में उनकी पत्नियां सहायता प्रदान करती थीं।
A. मार्टिन लूथर
B. माइकलएंजेलो
C. इरास्मस
D. थॉमस मूर
1517 में, मार्टिन लूथर ने प्रोटेस्टेंट आंदोलन को शुरू किया। वह एक जर्मन पादरी था जिसने चर्च के खिलाफ इस आंदोलन को शुरू किया था।
A. अरबों
B. फ्रांसीसियो
C. इताल्वियो
D. हिन्दुस्तानियों
प्लेटो यूनान का एक महत्वपूर्ण दार्शनिक था।अरबों ने उसके नाम का अनुवाद अफलातून के रूप में कर दिया था।
A. 14 वीं शताब्दी
B. 15 वीं शताब्दी
C. 13 वीं शताब्दी
D. 16 वीं शताब्दी
'हयूमैनिटिज़' शब्द लैटिन के ह्यूमनिटस से निकला है। इस शब्द का प्रयोग रोमन वकील और निबंधकार सिसेरो ने सदियों पहले किया था।
A. कॉपरनिकस
B. गैलिलियो गैलिली
C. थॉमस मूर
D. टॉलेमी
कॉपरनिकस ने 1543 में सौर प्रणाली के बारे में अपना सिद्धांत पेश किया था।उन्होंने बताया था कि पृथ्वी समेत सौर मंडल के सभी गृह सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
A. इंग्लैंड
B. जर्मनी
C. फ्रांस
D. इटली
थॉमस मूर कैथोलिक कट्टरपंथियों का एक भावुक समर्थक था।उसने विरुद्ध मत के खिलाफ पर्चे लिखे और अपरंपरागत पुस्तकों पर प्रतिबन्ध लगाया।1516 में उसने अपने सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य 'यूटोपिया' को प्रकाशित कराया।
A. मानवतावादी
B. बौद्धिक
C. दार्शनिक
D. रेनेसांस मैन
'रेनेसांस मैन" ऐसे व्यकित का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल होता था जिसमे कई प्रकार की रूचियां एवं कौशल होते थे।इस प्रकार के व्यक्ति एक ही समय में विद्वान-राजनयिक-धर्मशास्त्री-कलाकार हो सकते थे।
A. शास्त्रीय वास्तुकला
B. मध्ययुगीन वास्तुकला
C. नया दौर
D. पुनर्जागरण
पुनर्जागरण के दौरान, इतालवी पुनर्जागरण वास्तुकारों ने अपने सिद्धांतों और शास्त्रीय शाही रोमन प्रथाओं पर आधारित किया था ।
A. कॉन्स्टैन्टाइन
B. जीन कैल्विन
C. मार्टिन लूथर
D. उलरिच ज़्वीनगली
कॉन्स्टैन्टाइन पहला ईसाई रोमन सम्राट था। पादरियों के पास राजकोषीय और न्यायिक शक्तियां होने का दावा एक दस्तावेज़ 'कॉन्स्टैन्टाइन का दान' के आधार पर किया गया था। लेकिन बाद में इस दस्तावेज़ को जाली साबित किया गया।
A. बल्थसार कैस्टाइलोन
B. इग्नेशियस लोयोला
C. जीन कैल्विन
D. विलियम टिंडेल
में मार्टिन लूथर ने कैथोलिक चर्च के खिलाफ अभियान चलाया। उसके विचारों को पहले उलरिच ज़्वीनगली ने लोकप्रिय बनाया और बाद में जीन कैल्विन ने।
A. यहूदी बाइबिल
B. न्यू टेस्टामेंट
C. ओल्ड टेस्टामेंट
D. तौरैत
बाइबिल का नया करार पुराने करार पर आधारित है जिसमे मसीह के उपदेश एक यहूदी आदमी द्वारा एकत्र किये गए हैं जो ऑगस्टस सीसर के दौर में मध्य पूर्व में पैदा हुआ था।
A. कॉपरनिकस
B. मार्टिन लूथर
C. नियूटन
D. थॉमस मूर
मार्टिन लूथर ने सं 1522 में बाइबिल का जर्मन भाषा में अनुवाद किया। वह एक जर्मन पाधरी था जिसने कैथोलिक चर्च के ख़िलाफ़ अभियान चलाया था।
A. फ्लोरेंस और वेनिस
B. मिलान और पडुआ
C. नैप्लस और बलोना
D. वेनिस और सिसिली
फ्लोरेंस और वेनिस के अलावा सभी इतालवी शहर राजकुमारों द्वारा शासित थे। कुछ शहरों ने अपने आप को एक बड़े साम्राज्य के हिस्से के तौर पर देखना छोड़ दिया और अपने आप को स्वाधीन शहर घोषित कर दिया।
A. ब्रूनो
B. कॉपरनिकस
C. केपलर
D. नियूटनI
यूहान केपलर एक जर्मन खगोलशास्त्री था। उसने 24 साल की उम्र में ‘मिस्टीरियम कोस्मोग्रफिकैम’ लिखी जिसमे उसने कॉपरनिकस की थ्योरी का बचाव किया।
A. एवारिस्तुस
B. ग्रेगोरी XIII
C. पीटर संत
D. पायस I
ग्रेगोरियन कैलेंडर एक अन्तर्राष्ट्रीय कैलेंडर है जोकि दुनिया भर में इस्तेमाल होता है. यह एक सौर कैलेंडर है जो अंकगणितीय गणना पर आधारित है।
A. भाषा के
B. धर्म के
C. रंग के
D. संस्कृति के
पुनर्जागृति युग के दौरान, यूरोप के विभिन्न क्षेत्र भाषा के आधार पर अपनी अलग पहचान बनाने लगे।
दाते पुर्नजागरण काल का प्रमुख लेखक था इसकी प्रसिद्ध रचना “डिवाइन कॉमेडी” थी।
इंग्लैण्ड
जर्मनी
कैपलर एक जर्मन वैज्ञानिक थे । इन्होने अपने प्रयोगों के माध्यम से यह साबित किया की केवल पृथ्वी ही नहीं अपितु अन्य गृह भी सूर्य के चारों ओर घुमते हैं।
कुतुबनुमा अथवा दिशा सूचक यन्त्र के आविष्कार ने समुद्री यात्राओं को सुगम बना दिया । इस यंत्र की सहायता से नाविक समुद्र में अपनी स्थिति का पता लगा सकता था । इस काल के शासकों ने भी साहसी लोगों को नवीन खोजों के लिए प्रोत्साहित किया व मदद भी दी ।
पुनर्जागरण का शाब्दिक अर्थ 'नींद से जागना' है । यूरोपीय इतिहास के सम्बन्ध में इसका सम्बन्ध उन सभी बौधिक परिवर्तनों से है जिनसे मध्य युग का अंत द्रष्टिगोचर होता है ।
मोनालिसा लियोनार्डो द विंची ने बनाया था यह विंची की सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है ।
टॉमस
इंग्लैंड में छापेखाने का प्रयोग केक्स्टन
ग्यारहवीं
मध्य युग में अंधविश्वासों व आडम्बरों का बोलबाला था । धर्म का लोगों के बुद्धी विवेक पर कब्ज़ा था तथा जीवन में निराशा व उत्साहहीनता फैली हुई थी । इस लिए इस युग अन्धकार युग कहा जाता है ।
कुस्तुन्तुनिया पर तुर्की लोगों का कब्ज़ा होने के बाद यूनानी लोग
पुनर्जागरण काल के पश्चिमी यूरोप के दो वैज्ञानिक कोपरनिकस, गैलीलियो है ।
राफेल चित्रकार था। उसकी प्रमुख कृति मेडोना है।
पुनर्जागरण काल में कई ग्रंथों का विकास हुआ परन्तु भाषा के अनुरूप न होने के कारण लोग इनके गूढ़ तथ्यों को समझने में असमर्थ थे । लोकभाषाओं में छापेखाने के विकास ने लोकसाहित्य की मांग में वृद्धि की और इन नवीन विचारों के कारण लोक साहित्य काफी लोकप्रिय हो गया ।
मानववादी विचारधारा ने मनुष्य की निहित भावनाओं के विकास को प्रोत्साहित किया । मानव की विभिन्न अनुभूतियों को महत्व दिया न की उनकी उपेक्षा की । पेट्रार्क को मानववाद का पिता कहा जाता है ।
यूरोप में प्रोटेस्टेण्ट धर्म सुधार आन्दोलन के कारण निम्नलिखित हैं:
(1) चर्च में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं बुराई।
(2) यूरोप के शासको का सहयोग।
(3) पोप और चर्च में व्याप्त भ्रष्टाचार।
(4) पुनर्जागरण के फलस्वरूप राष्ट्रीयता की भावना।
(5) व्यावहारिक धर्म की आवश्यकता।
(6) समाज में तर्कपूर्ण चिन्तन का विकास।
(7) प्रगतिशील विचारों का अभ्युदय।
पुनर्जागरण से आशय उस अवस्था से है, जब मानव समाज अपनी पुरानी परंपराओं से बाहर जाकर नवीन परिवर्तनों के लिए उत्सुक हो जाता है। इस प्रकार प्राचीन परंपराओं में क्रांतिकारी परिवर्तन होने के फलस्वरूप समाज में आमूल-चूल परिवर्तन हो जाता है यह स्थित पुनर्जागरण कहलाती है।पुनर्जागरण के कारण(1) धर्मयुद्धों का प्रभाव (2) छापेखाने का आविष्कार
जर्मनी के गुटनबर्ग ने छापेखाने का आविष्कार कर विश्व में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया । इसके पहले पुस्तकों को हाथों से लिखना पड़ता था । इससे विचारों के प्रसार में बहुत समय लग जाता था एवं त्रुटियों की सम्भावना भी बढ़ जाती थी । इसके विपरीत छापे खाने न केवल त्रुटियों की संभावना को ही कम नहीं किया अपितु पुस्तकों को कम समय में बड़ी संख्या में छापने में भी मदद की । इससे विचारों का प्रसार कम समय में बहुत व्यापक स्टार पर हुआ । इससे पुस्तकों के मूल्य में कमी आयी व लोग नए विचारों से प्रभावित हो सके । इन नए विचारों ने पुनर्जागरण को बढ़ावा दिया ।
कुस्तुन्तुनिया पर तुर्की अधिकार हो जाने के कारण यूरोप निवासियों को एक विकल्प की खोज थी यह विकल्प उन्हें इटली में नज़र आया। चूँकि इटली एक प्रायद्वीप है इसलिए वहां से समुद्री व्यापार को सहायता मिली । इस प्रकार जल्द ही इटली में नए नगरों का विकास होना शुरू हुआ । इटली इसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र था जिसके कारण वहा पर अकूत धन था जो की इन नगरों व गिरजाघरों के निर्माण में काम आया । पुनर्जागरण के कारण भव्य इमारतों का निर्माण हुआ व सामंतवाद की जड़े कमजोर हुई जिसके कारण यह नगर ग्रामीण निवासियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया । लोगो के निरंतर आने से इन नगरों का उतरोतर विकास हुआ । इस प्रकार मिलान वेनिस आदि नगरों का विकास हुआ ।
इटली में नए नगरों का विकास कुस्तुन्तुनिया के विकल्प के रूप में हुआ था । इन नगरों ने सभी वर्गों के लोगों को आकर्षित किया एवं कुस्तुन्तुनिया से आये विद्वान भी इन्ही नगरों में बस गए इन्होने यूनानी विचारों से लोगों को अवगत कराया व पुरानी सभ्यता व संस्कृति को जागृत कर दिया ।
A. चघताई
B. तोलोए
C. जोची
D. ओगोदेई
तैमुर एक बरलास तुर्क था। उसने चघताई की वंशावली द्वारा कूद को चंगेज़ खान का वंशज कहलाया।
A. 1224 ईस्वी
B. 1225 ईस्वी
C. 1226 ईस्वी
D. 1227 ईस्वी
चंगेज़ खान, जिसने यायावर मंगोल जनजातियों को एकीकृत करके एक विशाल साम्राज्य बनावाया, का निधन 1227 ईस्वी में हुआ।
A. 1366 ईस्वी
B. 1367 ईस्वी
C. 1368 ईस्वी
D. 1369 ईस्वी
1260 ईस्वी में, कुबलई खान का राज्यहोरण हुआ। 1271 ईस्वी में, उन्होंने, औपचारिक रूप में, राज्य का नाम युआन में बदलकर, युआन राजवंश की स्थापना की।
A. तोलोए
B. ओगोदेई
C. चघताई
D. जोची
उतराधिकारी प्रक्रिया में, चंगेज़ खान ने यह घोषित किया की उसका तीसरा पुत्र - ओगोदेई - उसके बाद महान खान बनेगा।
A. आंदा
B. नौकर
C. नोयन
D. उलुस
चंगेज़ खान ने नयी सैनिक टुकड़ियों का सृजन किया, जो उसके चार पुत्रों के अधीन थीं और, विशेषकर, उनके सेना इकाइयों के चुने कप्तान, जिन्हें नोयान कहा जाता था।
A. अब्दुल्ला खान
B. कुबलाई खान
C. चंगेज़ खान
D. गज़न खान
ईरान के मंगोल शासक – गज़न खान - ने अपने परिवार के सदस्यों और अन्य सेनापतियों को कृषकों को लूटने के खिलाफ चेतावनी दी।
A. सरदारों की सभा
B. लोगों की सभा
C. घुड़सवारों की सभा
D. सिपाहियों की सभा