A. चीन
B. फ्रांस
C. कजाखस्तान
D. रूस
13वी शताब्दी के प्रारंभ में, चीन इन शासकों के बीच में विभाजित था – उत्तर-पश्चिमी चीन में सी-सिआ राजवंश, उतरी चीन में जरचेन चिन और दक्षिण चीन में शुंग राजवंश।
A. आंदा खान
B. आघा खान
C. चंगेज़ खान
D. मंगोल खान
1206 ईस्वी में, मंगोल सरदारों की सभा (कुरिलताई) में, तेमुजिन की प्रतिष्ठा को मान्यता मिली। यहाँ, इन्हें ‘मंगोलों के महानायक’ (खान); चंगेज़ खान, समुद्री खान या सार्वभौम शासक जैसे उपाधियों के साथ घोषित किया गया।
A. 1213 ईस्वी
B. 1214 ईस्वी
C. 1215 ईस्वी
D. 1216 ईस्वी
चंगेज़ खान द्वारा चीन की महादीवार के अतिक्रमण (1213 ईस्वी) के बाद, पेकिंग शहर को 1215 ईस्वी में लूटा गया था।
A. 1206 ईस्वी
B. 1207 ईस्वी
C. 1208 ईस्वी
D. 1209 ईस्वी
चंगेज़ खान का चीन पर विजय के समय, सी-सिआ चीन में शासन करने वाले राजवंशों में से एक थे। वे उत्तर-पश्चिमी चीन पर राज करते थे।
A. सी-सिआ
B. जरचेन
C. शुंग राजवंश
D. ओगोदेई
जब चंगेज़ खान ने चीन पर अपना अधिकार करने का प्रयास किया, किया तब उतरी चीन पर, जरचेन का चिन राजवंश, पेकिंग द्वारा, राज करते थे।
A. उलुस
B. बोघुरचु
C. नौकर
D. तुमान
जमूका चंगेज़ खान का एक और साथी था।
A. अम्बेर
B. बोरटे
C. चेयाहुकी
D. हेलेन
चंगेज़ खान से शादी करने के बाद, बोरटे का अपहरण किया गया। चंगेज़ खान ने युद्ध द्वारा उसे वापस पा लिया।
A. 1217 ई0
B. 1218 ई0
C. 1219 ई0
D. 1220 ई0
मंगोल साम्राज्य का विस्तार करा-खिता की हार के बाद ही संभव था।
A. दशमलव इकाई
B. वंश
C. जाति संबंधी
D. वंशावली
चंगेज़ खान के नेतृत्व में, मंगोल सेना का आयोजन दशमलव इकाई की प्रणाली अनुसार किया गया।
A. 12वीं शताब्दी
B. 13वीं शताब्दी
C. 14वीं शताब्दी
D. 15वीं शताब्दी
मंगोल, चंगेज़ खान और उसके उतराधिकारियों के प्रतिभाशाली पर क्रूर नेतृत्व में, विश्व इतिहास में सबसे विशाल साम्राज्य का सृजन किया।
A. दमिशक़
B. कराकोरम
C. पेकिंग
D. विएना
चंगेज़ खान ने संकेत दिया था, उसका तीसरा पुत्र, ओगोदेई, उसके बाद महान खान बनेगा। परिग्रहण के बाद, ओगोदेई ने, अपनी राजधानी कराकोरम में बनाया।
A. पैतृक यादें
B. सेना अनुशासन
C. प्रथागत परंपरा
D. अनुष्ठान संहिता
यास वह नियम संहिता थी, जिसे चंगेज़ खान ने, 1206 ई0 के कुरिलताई, में लागू की थी।
चंगेज खान के बेटे, जिन्होनें 1227 ईसवी से, मंगोल साम्राज्य के अलग क्षेत्रों पर शासन किया, थे - जोची, चघतई, ओगोदेई और तोलुई।
इतिहास में मंगोलों को एक क्रूर योद्धा जनजाति के रूप में स्मरण किया जाता है। चंगेज खान के अधीन इस जनजाति ने प्रभुत्व प्राप्त कर लिया एवं विश्व के मानचित्र पर दूर-दूर तक अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार करने में सक्षम हो गई थी।
विजित लोगों को अपने नवीन यायावर शासकों से कोई लगाव नहीं था. मंगोल हमलों के कारण व्यापार के कारण फले-फूले अनेक नगर नष्ट हो गए थे, सैकड़ों हजारों लोग मारे गए और इससे कहीं अधिक दास बना लिए गए। संभ्रांत लोगों से लेकर कृषक-वर्ग तक समस्त लोगों को बहुत कष्टों का सामना करना पड़ा। विश्व के विभिन्न भागों में कृषि भूमि को हानि पहुंची, क्योंकि मरू भूमि में सिंचाई नहरों की उचित देखभाल कर पाना संभव नहीं था। जिसके कारण रेगिस्तान फैलने लगा । व्यापारियों को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा जिन्हें यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्ग खोजने पड़े।
मंगोल साम्राज्य ने चीन से यूरोप के विभिन्न भागों में अपने क्षेत्र का विस्तार किया। यूरोप के विभिन्न भागों में एशियाई माल की काफी मांग थी। 13 वीं सदी में जब ये अभियान रुक गए तो इससे यूरोप और चीन के बीच व्यापार पुनर्स्थापित हो गया। इसका श्रेय मुख्य श्रेय मंगोल अभियानों को जाता है क्योंकि ये इन प्रान्तों को एक दूसरे के निकट ले आए थे और उन्हें दृढ़ता से एकीकृत कर दिया था।
व्यापारिक संबंध् परिपक्व हुए। रेशम मार्ग पर व्यापार और भ्रमण अपने शिखर पर पहुँचा। अब रेशम मार्ग चीन में ही खत्म नहीं होता था। यह उत्तर की ओर मंगोलिया तथा नवीन साम्राज्य के केंद्र कराकोरम की ओर बढ़ गया।
संचार और यात्रियों के लिए सुलभ यात्रा मंगोल शासन की एकजुटता को बनाए रखने हेतु अत्यंत आवश्यक थी। सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को पास जिसे फारसी में पैजा और मंगोल भाषा में जेरेज कहा जाता था, जारी किए जाते थे। इस सुविधा के लिए व्यापारी बाज नामक कर अदा करते थे जिसका यह तात्पर्य था, कि वे मंगोल शासक (खान) की सत्ता स्वीकार करते थे।
तेरहवी शताब्दी ई. में मंगोल साम्राज्य में यायावरों और स्थानबद्ध समुदायों में विरोध कम होते गए उदाहरणार्थ, 1230 के दशक में जब मंगोलों ने उत्तरी चीन के चिन वंश के विरुद्ध युद्ध में सफलता प्राप्त की तो मंगोल नेताओं के एक क्रुद्ध वर्ग ने दबाव डालकर यह विचार रखा कि समस्त कृषकों को मौत के घाट उतार दिया जाए और उनकी कृषि-भूमि को चरागाह में परिवर्तित कर दिया जाए। परंतु 1270 के दशक के आते-आते शुंग वंश की पराजय के उपरांत दक्षिण चीन को मंगोल साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया गया। तब चंगेज़ खान का पोता कुबलई खान (मृत्यु 1294) कृषकों और नगरों के रक्षक के रूप में उभरा। मंगोलों द्वारा उनके प्रशासनिक नीतियों में किए गए परिवर्तनों ने भी तनाव को कम किया और लोगों में सुरक्षा की भावना विकसित की।कुबलई खान कृषकों और लोगों के रक्षक के रूप में उभरा।1290 में इरान के मंगोल शासक गज़न खान(मृत्यु 1304) जो चंगेज खान के सबसे छोटे पुत्र तोलूई का वंशज था, उसने अपने परिवार के सदस्यों और अन्य सेनापतियों को आगाह कर दिया था कि वे कृषकों को न लूटें। एक बार अपने भाषण के दौरान उसने कहा था कि ऐसा करने से राज्य में स्थायित्व और समृद्धि नहीं आती। उसके वक्तव्य की स्थानबद्ध ध्वनियाँ चंगेज खान को भी हैरानी में डाल देती थीं।
A. चार्ल्स I
B. जॉर्ज I
C. जॉर्ज II
D. विलियम I
इंग्लैंड की महारानी, ब्रिटेन के इतिहास में, सबसे लंबे समय तक राज करने वाले शासकों में से एक हैं|
A. सामंती सेना
B. सामंती कर
C. सामंती आय
D. गबैल
सामंती सेना के तहत, सिपाहियों और नाइट्स को 40 दिन की सिमित अवधि के लिए लड़ना पड़ता था| यह, कुछ हालातों में, 90 दिनों तक बढाया जा सकता था|
A. चार्ल्स I
B. हेनरी I
C. जेम्स I
D. विलियम I
चार्ल्स I, 1625 से लेकर 1640 तक; इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड पर शासन किया| इस दौरान, वो, संसद के विरुद्ध, सत्ता हेतु संगर्ष कर रहा था|
A. फ़्रांसिसी समाज
B. जर्मन समाज
C. इतावली समाज
D. रुसी समाज
मार्क ब्लॉक, फ्रांस में, लीओं में पैदा हुआ| कई सामग्रियों में, उन्होंने, इतिहास में, आर्थिक संरचनाओं और मान्यताओं के महत्त्व पर जोर दिया|
A. पादरी और अभिजात
B. अभिजात और औरतें
C. अभिजात और बच्चे
D. औरतें और बच्चे
पादरी और अबिजात वर्गों को ‘टैली’ नामक प्रत्यक्ष कर देने की आयश्यकता नहीं थी|
A. जन्म-अधिशेष
B. जन्म-कर
C. श्रम-कर
D. श्रम-अधिशेष
श्रम-अधिशेष, प्रत्यक्ष रूप से, सामंत को जाता था|
A. 11वी शताब्दी
B. 12वी शताब्दी
C. 13वी शताब्दी
D. 14वी शताब्दी
11वी शताब्दी से, व्यक्तिगत सम्बन्ध कमज़ोर हो रहे थे| इसका कारण आर्थिक लेनदेन था जो अब अधिकतर पैसों पर आधारित थे|
A. मोंक
B. राजा
C. सामंत
D. कृषक
कृषकों के पास पनचक्की और पवनचक्की स्थापित करने हेतु पर्याप्त धन नहीं थे| पर सामंत, उन्नत प्रौद्योगिकी द्वारा, इन कीमती चक्कियों को स्थपित करने में सफल रहे|
A. 11वी शताब्दी
B. 12वी शताब्दी
C. 13वी शताब्दी
D. 14वी शताब्दी
खाने की पर्याप्त उपलब्धता के कारण, यूरोप में आबादी व जीवन प्रत्याशा में वृद्धि हुई|
A. 10वी शताब्दी
B. 11वी शताब्दी
C. 12वी शताब्दी
D. 13वी शताब्दी
11वी शताब्दी के दौरान, भूमि उपयोग में परिवर्तन के कारण, कई लाभ और अधिक फसल हुए|
A. नमक
B. लकड़ी
C. पानी
D. मदिरा
मेनर, बाहर के लोगों से, नमक खरीदते थे| यह सबसे महत्वपूर्ण वास्तु थी, क्योंकि यह मानव के आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था|
A. 9वी शताब्दी
B. 10वी शताब्दी
C. 11वी शताब्दी
D. 12वी शताब्दी
ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के संयुक्त राज्य में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरीं आयरलैंड शामिल हैं|
A. ऐबी
B. फीफ
C. मेनर
D. पैलेस
सामंत यूरोप में, मेनर के मालिकों के पास खेत थे, जहाँ कृषि-दास काम करते थे|
A. 486 ईस्वी
B. 481 ईस्वी
C. 496 ईस्वी
D. 501 ईस्वी
फ्रैंक लोगों के राजा बनने के बाद, क्लोविस और फ्रैंक लोगों ने उत्तरीं गॉल पर विजय पाना शुरू कर दिया|
A. शार्लमेन
B. लुई I
C. लुई II
D. लुई III
800 ईस्वी में, पोप ने शार्लमेन को ‘पवित्र रोमन सम्राट’ की उपाधि प्रदान किया| यह इसलिए किया ताकि उसका चर्च हेतु समर्थन सुनिश्चित रहे|
A. पैरिश
B. फ़िएद्दोम
C. पेरिश
D. सैंकटीफिक्कीशन
जब वसंत ऋतु या फसल का नया मौसम ईस्टर के साथ आया, एक गाँव के लोग अपने भूमि, जिन्हें वे पैरिश कहते थे, का भ्रमण करते थे|
A. ज़्यादा सफ़र करने वाले व्यापारी
B. बहुत थके हुए पादरी
C. काम से दबे कृषक
D. थके हुए नाइट्स
मध्यकालीन यूरोप में कृषकों ने छुट्टियाँ/पवित्र दिनों का स्वागत किया, क्योंकि उन्हें ऐसे दिनों में काम नहीं करना पड़ता था।
A. 7वी शताब्दी
B. 8वी शताब्दी
C. 9वी शताब्दी
D. 10वी शताब्दी
9वीं सदी से, यूरोप में स्थानीय युद्ध प्रायः होते रहते थे, जिनके लिए शौकिया कृषक-सैनिक पर्याप्त नहीं थे और कुशल अश्वसेना की आवश्यकता थी। इस ज़रूरत ने एक नए वर्ग को बढ़ावा दिया, जो नाइट्स कहलाते थे।
A. महा अकाल
B. मौद्रिक लेनदेन
C. नए कृषि-संबंधित प्रोद्योगिकी
D. ब्लैक डेथ
लॉर्डों को लगान, सेवाओं के बजाएए नकदी में लेना अध्कि सुविधजनक लगने लगा। कृषकों ने अपनी फसलों को मुद्रा में; वस्तुओं से बदलने के स्थान पर बेचना शुरू किया। धन का बढ़ता उपयोग कीमतों को प्रभावित करने लगा।
इंका जनजाति की आजीविका का आधार कृषि था।इंका जनजाति ने अनुपजाऊ मिटटी के समाधान के रूप में पहाड़ी पर सीढ़ीदार खेतों का निर्माण किया था ।उन्होंने जल निकासी और सिंचाई की व्यापक प्रणाली विकसित की थी।मक्का और आलू इंका जनजाति द्वारा उगाई जाने वाली मुख्य सब्जियाँ थीं ।वे भोजन और श्रम के हेतु लामा को भी पालते थे।
तुपिनांबा इंडियंस को लोहे की प्राप्ति नहीं हुई थी जिसके कारण वे जंगलों को साफ़ नहीं कर सके। उन्हें कृषि के बिना फल, सब्जियाँ और मछलियाँ बहुतायत मिल जाती थीं।
अमेरिका की खोज यूरोप के लिए निम्न प्रकार से लाभप्रद थी-
1)सोने-चाँदी की बाढ़ ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण का और अधिक विस्तार किया। 1560 से 1600 तक सैकड़ों जहाज हर वर्ष दक्षिणी अमरीका की खानों से चाँदी स्पेन को लाते रहे।
2)इसके अलावा यूरोप अमरीका से आने वाली नयी फसलों, विशेष रूप से आलू और लाल मिर्च से परिचित हो गया। फिर ये पफसल यूरोपवासियों द्वारा आगे भारत जैसे अन्य देशों में ले जाई गई।
टेनोक्टिटलान ऐज्टेक का राजधानी शहर था। 1325 में नहरों पर निर्मित किया गया था जिनका कृत्रिम द्वीपों के रूप में चिनम्पाज़ के बीच में निर्माण किया गया था। ये द्वीप नरकट की विशाल चटाई की बुनाई कर और उसे मिटटी और पौधों का लेप लगाकर तैयार कीये जाते थे।शहर में महलों और पिरामिड का निर्माण झील के बाहर प्रभावशाली रूप में किया गया था। इसके राजमहल और पिरामिड झील के बीच में खड़े हुए बड़े अद्भुत लगते थे ।
इंका उच्चकोटि के भवन निर्माता थे। उन्होंने पहाड़ों के बीच इक्वेडोर से चिली तक अनेक सड़कें बनाई थीं। उनके किले शिलापियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए जाते थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे जैसी सामग्री की जरूरत नहीं होती थी। वे निकटवर्ती इलाकों में टूटकर गिरी हुई चनों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम-प्रधान प्रौद्योगिकी का उपयोग करते थे जिसमें अपेक्षाकृत अधिक संख्या में मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती थी। राज मिस्त्री खंडों को सुंदर रूप देने के लिए शल्क पद्धति (फ्लाकिंग)का प्रयोग करते थे जो प्रभावकारी होने के साथ-साथ सरल होती थी। कई शिलाखंड वजन में 100 मेट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे, लेकिन उनके पास इतने बड़े शिलाखंडों को ढोने के लिए पहियेदार गाडि़याँ नहीं थीं। यह सब काम मज़दूरों को जुटाकर बड़ी सावधनी से करवाया जाता था।
ऐज्टेक समाज श्रेणीबद्ध था।अभिजात वर्ग में जन्मजात कुलीन, पुजारी और उच्च पद प्राप्त व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया था। वंशानुगत अभिजात वर्ग जो अल्पसंख्यक वर्ग था, सरकार, सेना और पुरोहिताई वर्ग में वरिष्ठ पदों पर आसीन था।सर्वोच्च अध्यक्ष को उसके द्वारा जीवनपर्यन्त तक शासन करने के लिए चुना जाता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य के प्रतिनिधि के रूप में माना जाता था।व्यापारीयों को कई विशेषाधिकारों का लाभ प्राप्त था।प्रायः राजदूतों और गुप्तचर के रूप में सरकार को सेवा प्रदान करते थे।प्रतिभाशाली कारीगर, चिकित्सक और बुद्धिमान शिक्षकों का भी सम्मान किया जाता था।
दक्षिण अमरीका की खोज और बाद में बाहरी लोगों का वहाँ बस जाना वहाँ के मूल निवासियों और उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी साबित हुआ। इसी से दास-व्यापार की शुरुआत हो गई जिसके अंतर्गत यूरोपवासी अफ्रीका से गुलाम पकड़कर या खरीदकर उत्तरी तथा दक्षिणी अमरीका की खानों तथा बागानों में काम करने के लिए बेचने लगे। अमरीका के लोगों पर यूरोपवासियों की विजय का एक दुष्परिणाम यह हुआ कि अमरीकी लोगों की पांडुलिपियों और स्मारकों को निर्ममतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। इसके बाद उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दौर में जाकर ही मानवविज्ञानियों द्वारा इन संस्कृतियों का अध्ययन प्रारंभ किया गया और उसके बाद पुरातत्त्वविदों ने इन सभ्यताओं के भग्नावशेषों को खोज निकाला।
एज़टेक तथा इंका संस्कृतियों में कुछ समानताएँ थीं, और वे यूरोपीय संस्कृति से बहुत भिन्न थीं। समाज श्रेणीबद्ध था, लेकिन वहाँ यूरोप की तरह कुछ लोगों के हाथों में संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था। पुरोहितों और शमनों को समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त था। यद्यपि भव्य मंदिर बनाए जाते थे, जिनमें परंपरागत रूप से सोने का प्रयोग किया जाता था, लेकिन सोने या चाँदी को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता था। तत्कालीन यूरोपीय समाज की स्थिति इस मामले में बिलकुल विपरीत थी।
1)साम्राज्य अत्यंत केंद्रीकृत था। राजा में ही संपूर्ण शक्ति निहित थी और वह ही सत्ता का उच्चतम स्त्रोत था। नए जीते गए कबीलों और जनजातियों को पूरी तरह अपने भीतर मिला लिया गया।
2)प्रशासन की भाषा क्वेचुआ थी।
3)इंका साम्राज्य इकाइयों के नियंत्रण वाले एक संघ के समान था। इंका सभ्यता का आधर कृषि था।
11 वीं और 14 वीं सदी के मध्य में मेक्सिको में माया संस्कृति पनपी। सोलहवीं शताब्दी तक, माया जनजाति की राजनीतिक शक्ति एज्टेक की तुलना में कम हो गई थी। उनके धार्मिक अनुष्ठान मकई फसल के रोपण, उसे विकसित करने एवं उनकी कटाई करने पर केंद्रित थे।मकई की खेती इस संस्कृति में केंद्रीय महत्त्व रखती थी। कुशल कृषि उत्पादन द्वारा अधिशेष उत्पन्न होता था।इसने शासक वर्ग, प्रमुखों एवं पुजारियों की खगोल विज्ञान और गणित को विकसित करने में मदद की। माया जनजाति ने लेखन की चित्रात्मक लिपि भी तैयार की थी ।
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीपसमूहों (जिन्हें आज बहामा कहा जाता है)और बृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे।अरावाक संस्कृति के लोगों का मुख्य सांस्कृतिक मूल्याधर यह था कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करें और समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी थे। अन्य अनेक समाजों की तरह अरावाक समाज में भी शमन लोग कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थों के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते थे।अरावाकों का व्यवहार बहुत उदारतापूर्ण होता था और वे सोने की तलाश में स्पेनी लोगों का साथ देने के लिए सदा तैयार रहते थे। लेकिन आगे चलकर जब स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई तब उन्होंने उसका विरोध् किया परन्तु उन्हें उसके विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। स्पेनी लोगों के संपर्क में आने के बाद कोई पच्चीस साल के भीतर ही अरावाकों और उनकी जीवन शैली का लगभग सत्यानाश ही हो गया। ‘तुपिनांबा’ कहे जाने वाले लोग दक्षिणी अमरीका के पूर्वी समुद्र तट पर और ब्राजील नामक पेड़ों के जंगलों में बसे हुए गाँवों में रहते थे (ब्राजील पेड़ के नाम पर ही इस प्रदेश का नाम ब्राजील पड़ा)। वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके क्योंकि पेड़ काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए उनके पास लोहा नहीं था। लेकिन उन्हें बहुतायत से फल, सब्जियाँ और मछलियाँ मिल जाती थीं जिससे उन्हें खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ा। जो यूरोपवासी उनसे मिले, वे उनकी खुशहाल आजादी को देखकर उनसे ईर्ष्या करने लगे, क्योंकि वहाँ न कोई राजा था, न सेना और न ही कोई चर्च था जो उनकी ज़िंदगी को नियंत्रित कर सके।
एज़टेक जन बारहवीं शताब्दी में एज़टेक लोग उत्तर से आकर मेक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। (इस घाटी का यह नाम उनके मेक्सिली नामक देवता के नाम पर पड़ा था।) उन्होंने अनेक जनजातियों को परास्त करके अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया और उन पराजित लोगों से नजराना वसूल करने लगे। एज़टेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में वे लोग शामिल थे जो उच्च कुलोत्पन्न, पुरोहित थे अथवा जिन्हें बाद में यह प्रतिष्ठा प्रदान कर दी गई थी। पुश्तैनी अभिजातों की संख्या बहुत कम थी और वे सरकार, सेना तथा पौरोहित्य कर्म में ऊँचे पदों पर आसीन थे। अभिजात लोग अपने में से एक सर्वोच्च नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधी माना जाता था। योद्धा, पुरोहित और अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान दिया जाता था, लेकिन व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे और उन्हें अक्सर सरकारी राजदूतों और गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का मौका दिया जाता था। चूंकि एज़टेक लोगों के पास भूमि की कमी थी इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार जल में से जमीन लेकर इस कमी को पूरा करनाद्ध किया। साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग कईं फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर कुल के पास होता जो सार्वजनिक निर्माण कार्यो को सामूहिक रूप से पूरा करवाता था। यूरोपीय कृषिदासों जैसे खेतिहर लोग अभिजातों की जमीनों से जुड़े रहते थे।
A. पेरिस
B. एम्स्टर्डम
C. लंदन
D. मेनचेस्टर
लंदन, सभी यूरोपीय शहरों में से सबसे बड़ा मन जाता है। यह यूरोप का सबसे बड़ा व्यापार केंद्र मन जाता है ।
A. चाय
B. कॉफ़ी
C. कच्चा कपास
D. लिनन
ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कच्चाकपासभारत से ब्रिटेन के लिए आयात किया जाता था।
A. ब्रिटेन
B. हॉलैंड
C. फ्रांस
D. जर्मनी
17वीं सदी की स्थिर आर्थिक और राजनीतिक हालातों ने ब्रिटेन को 18वीं और 19वीं सदीयों में आधुनिक औद्योगीकरण का अनुभव करने में मदद की।
A. 1830 - 1850
B. 1835- 1850
C. 1840 - 1850
D. 1845-1850
रेलवे का आविष्कारऔद्योगीकरण की पूरी प्रक्रिया को एक दूसरे चरणकी और ले लिया।
A. हेनरी कोर्ट
B. अब्राहम डर्बी III
C. अब्राहम डर्बी I
D. अब्राहम डर्बी II
अब्राहम डर्बी I ने ब्लास्ट फुर्नांस सन 1709में अविष्कार किया था।
A. अर्नाल्ड तोय्न्बी
B. फ़्रिएद्रिच एंगल्स
C. जॉर्ज मिचेलेट
D. पॉल मंतोक्स
फ्रेडरिक एंगेल्स एक जर्मन दार्शनिक, सामाजिक वैज्ञानिक, पत्रकार और व्यापारी थे। उन्होंने कार्ल मार्क्स के साथ मिलकर मार्क्सवादी सिद्धांत की स्थापना की।
A. 1694
B. 1695
C. 1696
D. 1697
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ब्रिटेन की वित्तीय प्रणाली का प्रमुख केंद्र बन गाया था ।
A. ब्रिटेन और अमिरिका
B. ब्रिटेन और जर्मनी
C. जर्मनी और अमिरिका
D. जर्मनी और रूस
'दूसरा औद्योगिक क्रांति'के दौरान,जो 1850के दशक के बाद शुरू हुई,रासायनिक एवं बिजली के उद्योगों जैसे नए क्षेत्रों का विस्तार हुआ ।
A. एडमंड कार्टराइट
B. जॉन विलकिंसन
C. रिचर्ड आर्कराईट
D. सैमुअल क्रॉम्पटन
एडमंड कार्टराइटके द्वारा 1787 के दशक में पॉवेर्लूम अविष्कार किया गाया था। इस अविष्कार से कताई और कपास उद्योग में होने वाले कार्यो में संतुलन बनाए रखने में मदद की ।
A. चार्ल्स डिकेन्स
B. डी.हच लॉरेंस
C. एडवर्ड कारपेंटर
D. ए.इ म्युसन
यह कविता सन 1881 में एडवर्ड कारपेंटर द्वारा लिखी गई थी।
A. 1780-1850
B. 1780- 1860
C. 1780-1870.
D. 1780- 1880.
ब्रिटेन में अर्थव्यवस्था एवं उद्योगों में परिवर्तन 1780-1850 के दशक के बीचहुई थी।
A. ब्रिजवाटर नहर
B. बर्मिंघम नहर
C. रिवर रेंट नहर
D. वोरसली नहर
यह नहर कोयला एवं विनिर्मित वस्तुओं को अधिक कुशलता से और अधिक सस्ते में देश के चारों ओर स्थानांतरित करने में मदद की । यह नहर औद्योगिक क्रांति के त्वरण के लिए भी जिम्मेदार थी ।
A. एडमंड कार्टराइट
B. जॉन विलकिंसन
C. रिचर्ड आर्कराइट
D. सैमुअल क्रॉम्पटन
विलकिंसन 1770 के दशक में लोहे की कुर्सियाँ बनातेथे ।
A. जौन काय हैं ।
B. जेम्स हारग्रीबस हैं।
C. रिचर्ड आर्क राइट हैं।
D. क्राम्पटन हैं।
जेम्स हारग्रीब्ज ने एक लकड़ी का ढांचा तैयार किया और उसमे आठ तकुए लगाये। इस यन्त्र से एक व्यक्ति आठ व्यक्तियों का कार्य करने में सफल हुआ। इस यन्त्र को स्पिनिंग जैनी का नाम दिया गया। इसका आविष्कार 1764 ई में हुआ।
A. जनसँख्या में वृद्धि था ।
B. यातायात की सुविधा था ।
C. जलसेना थी ।
D. स्वतंत्रता का वातावरण था ।
इंग्लैंड में अठारहवी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में 40% तथा उन्नीसवीं शताब्दी के प्रथम तीन दशकों में 50% जनसंख्या में वृद्धि हुई। जनसंख्या में वृद्धि होने से वस्तुओं की मांग बढ़ी जिससे उत्पादन-क्षमता को बढ़ाने के प्रयास हुए। अतः मजदूरी में भी वृद्धि हुई. मजदूरी में वृद्धि होने से जनता ने अधिक सामान ख़रीदा, जिससे पुनः वस्तुओं की मांग में वृद्धि हुई और इस प्रकार यह चक्र चला जिससे उद्योगों के विस्तार में मदद मिली ।
A. हेनरी बेल
B. जार्ज स्टीवेन्सन
C. रिचर्ड आफ राइट
D. इनमें से कोई नहीं।
रेल इंजन का आविष्कार जार्ज स्टीफेन्सन ने किया |
A. जेम्स वाट ने
B. जार्ज स्टीफेन्सन ने
C. क्राम्पटन ने
D. कार्ट राइट ने
रेलगाड़ी का आविष्कार जार्ज स्टीफेन्सन ने किया |
A.
जर्मनी से
B. इंग्लैण्ड से
C. फ्रांस से
D. इटली से
औद्योगिक क्रान्ति का आरम्भ इंग्लैण्ड से हुआ |
A. समाजवाद को जन्म दिया ।
B. समानता के अधिकार को जन्म दिया।
C. क्रांति को जन्म दिया।
D. वाणिज्यवाद को जन्म दिया ।
चूँकि लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग हो गए थे उन्होंने उद्योगपतियों के अत्याचारों को सहने से मना कर दिया था व इस बीच साम्यवादियों के विचारों को बल मिला जिन्होंने उत्पादन के साधनों पर समाज के अधिकार की पैरवी की।
A.
B.
C.
D.
‘कार्न लॉज़’ (अनाज के कानून) के अंतर्गत विदेश से सस्ते अनाज के आयात पर रोक लगा दी गई थी जब तक कि ब्रिटेन में इन अनाजों की कीमत में एक स्वीकृत स्तर तक वृद्धि न हो गई हो।
चकबंदी या बाड़ा पद्धति के द्वारा 1770 के दशक से छोटे-छोटे सैकड़ों फार्म (खेत) शक्तिशाली जमींदारों के बड़े फार्मों में मिला दिए गए।
‘कार्न लॉज़’ (अनाज के कानून) के अंतर्गत विदेश से सस्ते अनाज के आयात पर रोक लगा दी गई थी जब तक कि ब्रिटेन में इन अनाजों की कीमत में एक स्वीकृत स्तर तक वृद्धि न हो गई हो।
चकबंदी या बाड़ा पद्धति के द्वारा 1770 के दशक से छोटे-छोटे सैकड़ों फार्म (खेत) शक्तिशाली जमींदारों के बड़े फार्मों में मिला दिए गए।
A. हवाई जहाज
B. कार
C. बाल काटना
D. जीप
चेरोकी की तरह, डकोटा नाम बाल कटवाने के लिए शब्द है।
A. एंड्रयू जैक्सन
B. अब्राहम लिंकन
C. हर्बर्ट हूवर
D. थॉमस जेफरसन
थॉमस जेफरसन संयुक्त राज्य अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थे। रूप में इस बात को समझ नहीं सकता, जेफरसन ने मूल निवासियों को 'असभ्य' के रूप में देखा।
A. कनाडा
B. संयुक्त राज्य अमेरिका
C. ऑस्ट्रेलिया
D. न्यूजीलैंड
मूल अमेरिकी राष्ट्रीय संग्रहालय सोलहवा संग्रहालय है। यह संरक्षण, अध्ययन और जीवन, भाषा, साहित्य, इतिहास और मूल अमेरिकी निवासीयों के कला की प्रदर्शनी के लिए समर्पित पहला राष्ट्रीय संग्रहालय है।
A. अर्ल वॉरेन
B. जॉन जे
C. जॉन मार्शल
D. जॉन रूटलेज
जॉन मार्शल अमेरिका के चौथे मुख्य न्यायाधीश था।
A. वॉशिंगटन इरविंग
B. एंड्रयू जैक्सन
C. विलियम वर्ड्सवर्थ
D. जीन जेक्स रूसो
थॉमस जेफरसन संयुक्त राज्य अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति, और विलियम वर्ड्सवर्थ के समकालीन थे।
A. ब्रिटेन
B. फ्रांस
C. कनाडा
D. ऑस्ट्रेलिया
अमेरिका की तेरह कालोनियों ब्रिटेन के नियंत्रण में थी।
A. फ्रांस
B. कनाडा
C. ब्रिटेन
D. स्पेन
(मिनेसोटा के ओहियो, इंडियाना, इलिनोइस, मिशिगन, विस्कॉन्सिन) इस क्षेत्र को 1783 में क्रांतिकारी युद्ध के अंत में अंग्रेजों द्वारा अमेरिका को सौंप दिया गया था।
A. ऑस्ट्रल
B. अतरालिया
C. औरस्त्र
D. अतुरालिया
"ऑस्ट्रेलिया" का अर्थ है "दक्षिण की भूमि", यह लैटिन शब्द टेरा ऑस्ट्रैलिस से लिया गया है। नाम ऑस्ट्रेलिया औपचारिक रूप से 1824 में अपनाया गया था।
A. 1837
B. 1838
C. 1839
D. 1840
1837 का विद्रोह एक उभरते फ्रांसीसी कनाडाई राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति था।
A. हॉलैंड के तस्मान
B. थॉमस हर्फिन
C. ताम्जिंग हवाई
D. रेगन बर्ट्रेंड
हॉलैंड के तस्मानने 'न्यूजीलैंड'की खोज की थी इसमें शब्द 'जी' 'समुद्र' के लिए डच शब्द है।
A. समझौता
B. सिटी
C. गांव
D. देश
'कनाडा नाम 1535 में जैक्स कार्टियर द्वारा इस्तेमाल किया गया था, हूरों-इरोक़ुओइस भाषा में इसका अर्थ गांव'है।
A. स्पेन
B. इटली
C. ब्रिटेन
D. फ्रांस
अमेरिगो वेस्पुच्ची एक इतालवी अन्वेषक, नाविक और मानचित्रकार था।
A. 1506
B. 1507
C. 1508
D. 1509
अमेरिगो वेस्पुच्ची 1454 से 1512 की अवधि में एक इतालवी व्यापारी, एक्सप्लोरर और मानचित्रकार था
औद्योगिक क्रांति ने मुख्यतः तीन समस्याओं को जन्म दिया--
(१) कच्चे माल की समस्या।
(२) निर्मित माल की बिक्री की समस्या।
(३) बढ़ती हुई जनसंख्या को अन्यत्र बसाने की समस्या।
इन तीनों समस्याओं का समाधान करने के लिए यूरोपीय देशों ने जो कदम उठाया, उसने खुद एक बहुत बड़ी समस्या का रूप ले लिया व विश्व के कई देशों को अपने गिरफ्त में ले लिए इसे साम्राज्यवाद की संज्ञा दी गयी।
पुनर्जागरण के फलस्वरूप नए देशों की खोज हुई । यह देश नए बाज़ार व कच्चे माल के प्रमुख स्रोत के रूप में सामने आये। अतः इससे पूँजीवाद व साम्राज्यवाद को बढ़ावा मिला। आर्थिक विकास के फलस्वरूप यूरोपीय देशों में सम्पन्नता बढी एवं लोगों का जीवन विलासी हो गया ।
औपनिवेशिक पद्धति की सबसे घृणात्मक देन दास व्यापार थी ।
अमेरीका में फार्म व कारखानों में काम करने के लिए श्रमिक व दास अफ्रीका से ले जाये गए ।
यूरोपीय आबादकरों ने अपने क्षेत्रों और बस्तियों की रक्षा के लिए पहाड़ी शेर और भेड़िये की तरह के जंगली जानवरों को मार डाला। 1873 में कांटेदार तार के आविष्कार के कारण इस प्रथा पर अंकुश लगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच संघर्ष का कारण दास प्रथा थी। दक्षिण अमेरिकी राज्यों में बड़ी संख्या में वृक्षारोपण में दास कार्यरत थे,जहां की अर्थव्यवस्था उन पर निर्भर करती थी। उत्तर अमेरिकी राज्यों में गुलामी के उन्मूलन के लिए संघर्ष हुई। इस प्रकार उनमे संघर्ष उत्पन्न हुए
आरक्षण वे प्रदेश थे जो मूल निवासी अमेरिकियों के लिए आरक्षित थे। मूल निवासी के विभिन्न समूहों को आरक्षण में रहने के लिए मजबूर किया गया।
ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय आबादकारों, मूल निवासियों और ज़मीन के बीच आपसी रिश्तों का किस्सा उत्तरी और दक्षिणी अमरीका के किस्से से कई बिंदुओं पर मिलता-जुलता है, हालांकि इसकी शुरुआत 300 साल बाद हुई। मूल निवासियों के साथ हुई मुलाक़ात को लेकर कैप्टन कुक और उसके जत्थे के आरंभिक ब्यौरे मूल निवासियों के दोस्ताना व्यवहार के बारे में उत्साहपूर्ण हैं। लेकिन जब एक मूल निवासी ने कुक की हत्या कर दी - हवाई में,ऑस्ट्रेलिया में नहीं - तब ब्रिटिशों का रवैया पूरी तरह से उलट गया। जैसा कि प्रायः होता आया है, इस तरह की एक घटना औपनिवेशिक ताकतों द्वारा बाद में दूसरों के खिलाफ किए गए हिंसक व्यवहार का औचित्य साबित करने के लिए इस्तेमाल की गई।यूरोपीय लोगों के आगमन को सभी मूल निवासियों ने खतरे की तरह नहीं देखा। वह यह अनुमान नहीं लगा पाए कि 19वीं और 20वीं सदी के दरम्यान कीटाणुओं के असर से, अपनी ज़मीनें खोने के चलते और आबादकारों के साथ हुई लड़ाइयों में लगभग 90 फीसदी मूल निवासियों को अपनी जान गँवानी पड़ेगी। ब्राजील में पुर्तगाली कैदियों को बसाने का प्रयोग तब जाकर बंद कर दिया गया, जब उनके हिंसक बरताव ने मूल निवासियों को प्रतिहिंसा पर उतारू कर दिया। ब्रिटिशों ने स्वतंत्र होने तक अमरीकी उपनिवेशों में यही तरीका अपनाया, और फिर उसे ऑस्ट्रेलिया में भी जारी रखा। ऑस्ट्रेलिया के ज़्यादातर शुरुआती आबादकार इंग्लैंड से निर्वासित होकर आए थे और उनके कारावास पूरा होने पर ब्रिटेन वापस न लौटने की शर्त पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया में स्वतंत्र जीवन जीने की इजाज़त दे दी गई। अपने क्षेत्र से इतने भिन्न इस इलाके में किसी भी तरह के सहारे के बगै़र जीवनयापन करने के लिए उन्होंने खेती के लिए ली गई ज़मीन से मूल निवासियों को निकाल बाहर करने में कोई झिझक नहीं दिखलाई।यूरोपीय बस्तियों के तहत ऑस्ट्रेलिया का आर्थिक विकास अमरीका जितना भिन्नतापूर्ण नहीं था। भेड़ों के विशाल फार्म और खानें उसके पश्चात, मदिरा बनाने हेतु अंगूर के बाग और गेहूँ की खेती एक लंबी अवधि में और काफी परिश्रम से विकसित हो पाईं, इन्होंने ऑस्ट्रेलिया की संपन्नता की बुनियाद तैयार की। जब राज्यों को मिलाया गया और 1911 में ऑस्ट्रेलिया की एक राजधानी बनाने की योजना चल रही थी, तब उसके लिए ‘वूलव्हीटगोल्ड’ नाम का सुझाव दिया गया था! अंततः उसका नाम कैनबरा रखा गया जो एक स्थानीय शब्द कैनबरा से बना है, जिसका अर्थ है, ‘सभा-स्थल’। कुछ मूल निवासी ऐसे सख्त हालात में खेतों में काम करते थे कि उसका दासप्रथा से अंतर बहुत कम था। बाद में चीनी आप्रवासियों ने सस्ता श्रम मुहैया कराया, जैसा कि कैलिफोर्निया में हुआ था। लेकिन अश्वेतों पर बढ़ती हुई निर्भरता से जन्मी घबराहट के चलते दोनों देशों की सरकारों ने चीनी आप्रवासियों को प्रतिबंधित कर दिया। 1974 तक लोगों के मन में यह भय घर कर गया था कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के ‘गहरी रंगत वाले’ लोग बड़ी तादाद में ऑस्ट्रेलिया आ सकते हैं, और इसीलिए ‘अश्वेतों’ को बाहर रखने के लिए सरकार ने एक नीति अपनाई।
इन सवालों पर खड़े हुए आंदोलन के कारण तहकीकातें शुरू हुईं और दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए - एक, इस बात को मान्यता देना कि मूल निवासियों का ज़मीन के साथ, जो कि उनके लिए ‘पवित्र’ है, मज़बूत ऐतिहासिक संबंध् रहा है और इसका आदर किया जाना चाहिए दो, पिछली गलतियों को धेया तो नहीं जा सकता, लेकिन ‘गोरों’ और ‘रंगबिरंगे लोगों’ को अलग-अलग रखने की कोशिश करके बच्चों के साथ जो अन्याय किया गया है, उसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगी जानी चाहिए।
1832 में, अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश, जॉन मार्शल द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा गई थी। उन्होंने कहा कि चेरोकी 'एक अलग समुदाय, जो अपने क्षेत्र में अपने कानूनों के बल से कब्जे थे और जॉर्जिया का कानून उन पर लागु नहीं होता है,और वे कुछ मामलों में संप्रभुता रखते थे। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति, एंड्रयू जैक्सन ने मुख्य न्यायाधीश के फैसले का सम्मान करने से मना कर दिया, और चेरोकी समुदाय को बेदख़ल कर उन्हें महान अमेरिकी रेगिस्तान में भगाने के लिए अमेरिकी सेना को आदेश दिया। इस प्रकार, 15000 लोगों को जबरदस्ती बेदखल कर दिया गया और उनमें से एक चौथाई की मृत्यु अपनी यात्रा के दौरान हो गई। इस यात्रा को 'आँसुओ की राह' कहा जाता है।
अमरीका में,बस्तियों के विस्तार की वजह से, मूल निवासीयों को संधियों पर हस्ताक्षर करने और उनकी भूमि बेचने के बाद स्थानांतरण के लिए मजबूर किया गया। भूमि के लिए भुगतान की गयी कीमते बहुत कम थी, और उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में यूरोपीय लोग ने उन्हें और अधिक भूमि के लिए कम राशि का भुगतान देकर धोखा दिया था।
यहां तक कि उच्च अधिकारियों ने भी मूल निवासियों को उनकी जमीन से वंचित करने को गलत नहीं माना था।
इस प्रकार की घटनाये जॉर्जिया राज्य, संयुक्त राज्य अमेरिका में ज्यादा थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने तर्क दिया कि चेरोकी जनजातियों को राज्य के कानूनों का पालन करना होगा, लेकिन उन्हें नागरिकों के अधिकार नहीं दिये जा सकते।चेरोकी एक महत्वपूर्ण मूल निवासी समुदाय था, जिसने अंग्रेजी सीख कर अमेरिकन जीवन व संस्कृति को समझने की कोशिश की थी, फिर भी उन्हें अमेरिकी नागरिक का दर्जा नहीं मिला था।
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों ने पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार यूरोपयों के साथ दोस्ती की और सहयोग दिया।
गोरों के साथ वस्तुओं के विनिमय (उपहार) दोस्ती की निशानी थी।
लेकिन गोरों के लिए, जो अमीर बनने के सपने के साथ वहां आये थे, मछली और महीन कोमल रोवें वाली वस्तुये यूरोपीय बाजारों में अधिक पैसा मुनाफे कमाने का जरिया थे।
इन वस्तुओं की कीमते आपूर्ति के आधार पर प्रति वर्ष अलग होती थी।
मूल निवासी गोरों की इन व्यापार रणनीतियों को नहीं समझते थे और ना ही उन्हें दूर यूरोप में स्थित 'बाजार' का कोई ज्ञान था।
वे हैरान थे की कभी कभी उन्हें अपने माल के लिए विदेशी यूरोपीय व्यापारियों द्वारा बहुत कुछ दिया जाता था और कभी कभी बहुत कम
वे गोरों के फर्र के लालच से निराश थे।गोरो ने फर्र के लालच के लिए बीवर के सैकड़ों जानवरों की बलि चढ़ा दी थी इससे मूल निवासी असहज महसूस कर रहे थे उन्हें आशंका धी कि जानवर इस विनाश के लिए बदला लेगे
उत्तरी अमरीका का महाद्वीप उत्तरध्रुवीय वृत्त से लेकर कर्क रेखा तक और प्रशांत महासागर से
अटलांटिक महासागर तक फैला है। पथरीले पहाड़ों की शृंखला के पश्चिम में अरिज़ोना और नेवाडा की मरुभूमि है। थोड़ा और पश्चिम में सिएरा नेवाडा पर्वत हैं। पूरब में ग्रेट (विस्तृत) मैदानी इलाके, ग्रेट (विस्तृत) झीलें, मिसीसिपी और ओहियो और अप्पालाचियाँ पर्वतों की घाटियाँ हैं। दक्षिण दिशा में मेक्सिको है। कनाडा का 40 फीसदी इलाका जंगलों से ढँका है। कई क्षेत्रों में तेल, गैस और खनिज संसाधन पाए जाते हैं, जिनके चलते संयुक्त राज्य अमरीका और कनाडा में ढेरों बड़े उद्योग हैं। आजकल कनाडा में गेहूँ, मकई और फल बड़े पैमाने पर पैदा किए जाते हैं और मत्स्य-उद्योग वहाँ का एक महत्त्वपूर्ण उद्योग है। खनन, उद्योग और बड़े पैमाने की खेती का विकास पिछले 200 सालों में ही यूरोप, अफ्रीका और चीन के अप्रवासियों के हाथों हुआ।
अठारहवीं सदी में पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान साक्षरता, संगठित धर्म और शहरीपन के आधार पर ही करते थे। उन्हें अमरीका के मूल निवासी ‘असभ्य’ प्रतीत हुए। फ्रांसीसी दर्शनशास्त्री ज्यां जैक रूसो जैसे कुछ यूरोपीयों के लिए ऐेसे लोग तारीफ के काबिल थे, क्योंकि वे ‘सभ्यता’ की विकृतियों से अछूते थे। इसके लिए एक प्रचलित पद था, ‘उदात्त उत्तम जंगली’ (द नोबल सेवेज)।एक दूसरा नज़रिया अंग्रेजी के कवि विलियम वड्र्सवर्थ की कुछ पंक्तियों में मिलता है। वड्र्सवर्थ और रूसो में से कोई भी किसी अमरीकी मूल निवासी से नहीं मिला था, लेकिन वड्र्सवर्थ ने उनका वर्णन करते हुए कहा कि वे ‘‘जंगलों में’’ रहते हैं, ‘‘जहाँ कल्पनाशक्ति के पास उन्हें भावसंपन्न करने, उन्हें ऊँचा उठाने या परिष्कृत करने के अवसर बहुत कम हैं’’, जिसका मतलब यह कि प्रकृति के निकट रहनेवालों की कल्पनाशक्ति और भावना अत्यंत सीमित होती है।