गर्म धाराएँ
i. ब्राजील धारा, दक्षिण अटलांटिक महासागर
ii. उत्तरी अटलांटिक धारा, उत्तरी अटलांटिक महासागर
iii. अलास्का की धारा, उत्तरी प्रशांत महासागर
iv. क्यूरोशियो (जापान) धारा, उत्तरी प्रशांत महासागर
v. उत्तरी प्रशांत महासागर धारा, उत्तरी प्रशांत महासागर
ठण्डी धाराएँ
i. लेब्राडोर धारा, उत्तरी अटलांटिक महासागर
ii. कैनरी धारा, उत्तरी अटलांटिक महासागर
iii. हम्बोल्ट (पेरू) धारा, दक्षिण प्रशांत महासागर
iv. अंटार्कटिक प्रवाह , दक्षिणी सागर
v. क्यूराइल धारा , उत्तरी प्रशांत महासागर
v. सागरों में धाराओं का प्रवाह प्राय: गोलाकार देखा जाता है। धाराओं की यह प्रकृति पृथ्वी के परिभ्रमण से सम्बन्धित है।
चन्द्रमा अपने कक्ष पर, अंडाकार आकृति में पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। ऐसी अवस्था में घूमता हुआ
१. ज्वार के कारण छिछले बंदरगाहों में जल की गहराई बढ़ जाती है, जिससे ज्वार के साथ बड़े-बड़े जलयान बंदरगाहों में प्रवेश कर लेते है।
२. भाटा अपने साथ नदियों के मुहानों पर एकत्रित कूड़ा-करकट बहाकर ले जाता है, जिससे समुद्र तट स्वच्छ रहता है।
३. ज्वार-भाटा से जल-विधुत उत्पन्न की जाती है।
४. ज्वार-भाटा के कारण महासागरों में निरंतर हलचल रहती है, जिससे शीतोष्ण प्रदेशों में बंदरगाहों के निकट समुद्री जल जम नहीं पाता।
५. ज्वार के कारण समुद्री तटों में परिवर्तन होता रहता है। ज्वार तरंगे जल की सहायता से तट पर अनेक कन्दराओं, गुफाओं आदि का निर्माण करती हैं।
A.
एमिनो अम्ल
B.
न्यूक्लिक अम्ल
C.
प्रोटीन
D.
सेल्यूलोस
सेल्यूलोस नाइट्रोजन का यौगिक नहीं है। यह कार्बोहाइड्रेट है।
A.
मिट्टी का यौगिकीकरण होता है।
B.
जल का यौगिकीकरण होता है।
C.
ऑक्सीजन का यौगिकीकरण होता है।
D.
नाइट्रोजन का यौगिकीकरण होता है।
वायुमंडल में भी बिजली चमकने (Lightening) व अंतरिक्ष विकिरण (Cosmic radiation) द्वारा नाइट्रोजन का यौगिकीकरण होता है।
A.
जैव-चक्र
B.
रासायनिक चक्र
C.
जैव-रासायनिक चक्र
D.
जैव भू-रासायनिक चक्र
जैवमंडल में जीवधारी व पर्यावरण के बीच ये रासायनिक तत्त्वों के चक्रीय प्रवाह को जैव भू-रासायनिक चक्र कहते हैं।
A.
आर्गन है।
B.
नाइट्रोजन है।
C.
कार्बोहाइड्रेट है।
D.
आक्सीजन है।
प्रकाश-संश्लेषण क्रिया का प्रमुख सह-परिणाम;(By product) आक्सीजन है।
A.
खाद्य श्रृंखला कहलाता हैं।
B.
खाद्य जाल कहलाता हैं।
C.
अनुक्रमण (Succession) कहलाता है।
D.
परितंत्र कहलाता है।
वनों की प्रारंभिक प्रजातियों के स्थान पर द्वितीय वन-प्रजातियों उगकर प्रारंभिक वनों की संरचना को बदलना अनुक्रमण (Succession)कहलाता है।
A.
नाइट्रोजन चक्र(The nitrogen cycle)
B.
जलचक्र(The water cycle)
C.
कार्बन चक्र (The carbon cycle)
D.
जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical cycles)
जैवमंडल में जीवधारी व पर्यावरण के बीच ये रासायनिक तत्त्वों के चक्रीय प्रवाह जैव भू-रासायनिक चक्र (Biogeochemical cycles) कहे जाते हैं।
A.
सरिताएँ
B.
झीलें
C.
प्रवाल भित्ति
D.
दलदल
प्रवाल भित्तियाँ पानी के नीचे कैल्शियम कार्बोनेट से बनी संरचनाएँ होती हैं। ये समुद्र में पाए जाने वाली छोटे जीवों की कालोनी होती हैं जिनमें कुछ पोषक तत्त्व होते हैं।
A.
वन पर
B.
घास के मैदान पर
C.
कृषि खेतों पर
D.
मृत जीवों पर
अपघटक सूक्ष्म जीव होते हैं जो कि सभी मृत वनस्पतियों और जन्तुओं को उनके पार्थिव अवयवों में तोड़ देते हैं। अपघटन की प्रक्रिया जीव की मृत्यु के बाद शुरू हो जाती है जिसे सामान्य तौर पर सड़ने के तौर पर देखा जाता है।
A.
समुदाय
B.
वन
C.
बॉयोम
D.
प्रदेश
विशेष परिस्थितियों में पादप व जंतुओं के अंतर्संबंधो के कुल योग को बॉयोम कहते हैं।
A.
मानव आबादी
B.
मानव संस्कृति
C.
पर्यावरण
D.
प्रौद्योगिकी
जैव-विविधता ने मानव संस्कृति के विकास में बहुत योगदान दिया है और इसी प्रकार, मानव समुदायों ने भी आनुवंशिक, प्रजातीय व पारिस्थितिक स्तरों पर प्राकृतिक विविधता को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है।
A.
इनके आवास स्थानों की भिन्नता
B.
इनकी जनसँख्या
C.
इनका रंग
D.
इनके पारितंत्र के प्रकार
प्रजाति विविधता प्रजातियों की भिन्नता को दर्शाता है। यह निर्धारित क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या से संबंधित है। प्रजातियों की विविधता, उनकी समृद्धि, प्रकार तथा बहुलता से आँकी जा सकती है।
A.
बायोम
B.
बायोमास
C.
जैव-विविधता
D.
सीमाएँ
जैव-विविधता को संसाधनों के उन भंडारों के रूप में भी समझा जा सकता है, जिनकी उपयोगिता भोज्य पदार्थ, औषधियाँ और सौंदर्य प्रसाधन आदि बनाने में है।
A.
जीवित रहना आसान है।
B.
जीवित रहना कठिन है।
C.
संसाधन दुर्लभ होते हैं।
D.
प्रजातियाँ बहुत कम होती हैं।
जैव विविधता दो शब्दों ‘बायो’ जिसका अर्थ है- जीव तथा 'डाइवर्सिटी' जिसका अर्थ है- विविधता के मेल से बना है। साधारण शब्दों में किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों की संख्या और उनकी विविधता को जैव-विविधता कहते हैं। यह पौधों के प्रकार, प्राणियों तथा सूक्ष्म जीवाणुओं से सम्बंधित है।
मानव पीढ़ी भविष्य पीढ़ियों की जरूरतों को खतरे में डाल बिना प्राकृतिक संसाधनों का सबसे अच्छा उपयोग करके अपना वर्तमान मांग पूरी कर सकते हैं और साथ ही भविष्य पीढ़ियों के लिए भी यह प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित कर सकते हैं।
समान भौतिक लक्षणों वाले जीवों के समूह को आनुवांशिक जैव-विविधता वाली प्रजाति कहते हैं।
कुछ पौधे मांसभक्षी होते हैं और भोजन प्राप्त करने के लिये ऐसे पौधे कीड़े-मकोड़ों को अपना शिकार बनाते हैं। आमतौर पर मांसाहारी पौधे दलदली, अमलीय और कीतपूर्ण मिट्टी में उगते हैं। ऐसी मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है।
शाकाहारी उन जानवरों को कहते है जो भोजन के लिए पौधों और घास, पर निर्भर होते हैं | उदहारण के लिए हिरण, हाथी, घोड़े, आदि हैं|
महत्वपूर्ण आर्थिक वस्तुओं जो मानव जाति को जैव विविधता द्वारा आपूर्ति होते हैं, वह हैं - खाद्य फसलों, पशुधन, वानिकी, मछली, औषधीय संसाधनों आदि |
प्रजातियों के बीच विविधता उनकी समृद्धि, बहुतायत और प्रकार के माध्यम से मापा जा सकता है।
प्रजाति, जीवों के वह समूह है, जहां प्रत्येक जीवों के अपनी शारीरिक विशेषताओं में कुछ समानताएं पाए जाते हैं।
दुनिया भर में लगभग 10 लाख प्रजातियाँ पायी जाती हैं।
1972 के वन्य जीव संरक्षण अधिनियम देश के वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में भारत सरकार द्वारा पारित किया गया था। इस अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को देश में स्थापित किए गए थे।
हिबिस्कुस - हमारे जैव विविधता की एक लुप्तप्राय पौधे हैं और भारतीय राइनो - एक लुप्तप्राय पशु प्रजाति के उदाहरण हैं।
राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक और अर्द्ध प्राकृतिक स्थान जहाँ जानवरों को संरक्षित रखा जाता है। भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान सन 1936 में हेली नेशनल पार्क था जिसका नाम अब जिम कोर्बेट राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया है।
जानवर,
मानव जाति के जीवन
में एक महत्वपूर्ण
भूमिका निभाते
हैं:
1) जैविक सामग्री
का उत्पादन और
विघटन करते है।
2) पारितंत्र के
द्वारा जल और पोषक
तत्वों चक्रों
में सहायता करते
हैं।
3) वायुमंडलीय गैसों
को निर्द्रिस्ट
करने और जलवायु
को नियंत्रित
करने में मदद करते
हैं।
वे प्रजातियाँ, जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं हैं, लेकिन उस तंत्र में स्थापित की गई हैं, उन्हें ‘विदेशज प्रजातियाँ’ कहा जाता है।
प्रत्येक प्रजाति हमें यह संकेत दे सकती है कि जीवन का आरंभ कैसे हुआ और यह भविष्य में कैसे विकसित होगा।
जीवन कैसे चलता है और पारितंत्र, जिसमें हम भी एक प्रजाति हैं, उसे बनाए रखने में प्रत्येक प्रजाति की क्या भूमिका है, इन्हें हम जैव-विविधता से समझ सकते हैं। हम सभी को यह तथ्य समझना चाहिए कि हम स्वयं जियें और दूसरी प्रजातियों को भी जीने दें।
पारितंत्रीय विविधता का परिसीमन करना जटिल है, क्योंकि समुदायों (प्रजातियों का समूह) और पारितंत्रों की सीमाएँ निश्चित नहीं हैं।
बाघ परियोजना को सन 1973 में शुरू किया गया था, और बाघों की आबादी बढ़ाने में सफल रहा है। इस सफलता के बाद, कई कदम अन्य प्रजातियों की रक्षा के लिए भी उठाये गए है। जैसे कि भारत सरकार ने वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों को बनाया गया है। जिसके तहत भारत में 66 राष्ट्रीय पार्क और 368 अभयारण्य बनाए गए हैं। सन 1992 में पृथ्वी शिखर सम्मेलन में जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी एक बड़ा कदम उठाए गए हैं।
समुद्री धरातल पर जल के हिलने-डुलने और आगे बढ़ने तथा पीछे हटने की क्रिया को ही तरंगें कहते हैं। तरंगों के रूप में सागर का जल केवल ऊपर-नीचे होता है, अथवा आगे बढ़ता तथा पीछे लौटता है। वह नदी की भांति कभी भी एक स्थान कों छोड़ कर आगे नहीं बढ़ता, क्योंकि तरंग में जल के कण झूले की पैंग की भांति इधर-उधर होते हैं, तरंग के बाहर कभी नहीं जाते। इस बात की सत्यता इससे प्रकट हो जाती है कि यदि तरंगों के बीच कोई कार्क या लकड़ी का टुकड़ा छोड़ दिया जाये, तो वह तरंगों के साथ ऊपर नीचे नाचता रहेगा, किन्तु कभी भी अपना स्थान छोड़कर आगे नहीं जाएगा।
धाराओं के कारण समुद्र में आक्सीजन एवं प्लेंक्टन का सन्तुलन बना रहता है। ठण्डी एवं गर्म धारायें अनेक किस्म की मछलियों को जन्म देती हैं। ठण्डी एवं गर्म धाराओं के मिलन स्थान विश्व के प्रमुख मछली क्षेत्र हैं।
गर्म एवं शीतल धाराओं के मिलने के स्थान पर घना कोहरा उत्पन्न होता है। जहाजों का आना जाना रुक जाता है। जहाजों के डूबने एवं टकराने की दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। न्यूफाउंडलैंड के तट पर गल्फ स्ट्रीम एवं लेब्राडोर की धाराओं के मिलने से घना कोहरा उत्पन्न हो गया था, जिससे सामने से आता हुआ हिमखंड नहीं दिखाई दिया और टाइटेनिक हिमखंड से टकराकर नष्ट हो गया था ।
गर्म धाराओं के ऊपर से बहने वाली पवनों में नमी अधिक होती है। यही पवनें उच्च अक्षांसों में ऊपर उठकर वर्षा कराती हैं। पश्चिमी यूरोप, पूर्वी यूरोप से अधिक वर्षा प्राप्त करता है। ठण्डी धाराएँ तापमान को कम करती हैं। उदाहरण के लिए कालाहारी एवं अटाकामा मरुस्थल का जन्म निकटवर्ती क्षेत्रों में ठण्डी धाराएँ बहती हैं।

ठण्डी धाराओं के तट हिम से ढके रहते है। फाकलैंड, लेब्रोडोर ओर क्यूराइल धाराओं का प्रभाब निकटवर्ती प्रदेशों के तापमान को कम कर देता है। गर्म धाराएँ उष्ण प्रदेशो की गर्मी को ठंडे प्रदेशों में पहुंचाती है।ये पृथ्वी के तापमान को सम वनाने में मदद करती है। गर्म धाराओं के कारण उप ध्रुवीय प्रदेशो में फसलें पैदा होती है।पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं जापान की उन्नति का कारण गर्म धाराएँ है।
अंटार्कटिक प्रवाह केप होर्न से टकराकर उत्तर की ओर बहने लगता है। पेरू के निकट, पश्चिमी तट के साथ उत्तर की ओर बहता है और उत्तर की ओर बढ़कर विषुवतीय धारा में मिल जाता है। यह एक ठंडे जल की धारा है। पेरू के निकट इसे पेरूवियन धारा कहते है। हम्बोल्ट ने सवसे पहले इसे देखा था, इसलिये इसे हम्बोल्ट धारा के नाम से भी जानते है।
समुद्री धरातल पर जल के हिलने-डुलने और आगे बढ़ने तथा पीछे हटने की क्रिया को ही तरंगें कहते हैं। तरंगों के रूप में सागर का जल केवल ऊपर-नीचे होता है, अथवा आगे बढ़ता तथा पीछे लौटता है। वह नदी की भांति कभी भी एक स्थान कों छोड़ कर आगे नहीं बढ़ता, क्योंकि तरंग में जल के कण झूले की पैंग की भांति इधर-उधर होते हैं, तरंग के बाहर कभी नहीं जाते। इस बात की सत्यता इससे प्रकट हो जाती है कि यदि तरंगों के बीच कोई कार्क या लकड़ी का टुकड़ा छोड़ दिया जाये, तो वह तरंगों के साथ ऊपर नीचे नाचता रहेगा, किन्तु कभी भी अपना स्थान छोड़कर आगे नहीं जाएगा।
धाराओं के कारण समुद्र में आक्सीजन एवं प्लेंक्टन का सन्तुलन बना रहता है। ठण्डी एवं गर्म धारायें अनेक किस्म की मछलियों को जन्म देती हैं। ठण्डी एवं गर्म धाराओं के मिलन स्थान विश्व के प्रमुख मछली क्षेत्र हैं।
गर्म एवं शीतल धाराओं के मिलने के स्थान पर घना कोहरा उत्पन्न होता है। जहाजों का आना जाना रुक जाता है। जहाजों के डूबने एवं टकराने की दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। न्यूफाउंडलैंड के तट पर गल्फ स्ट्रीम एवं लेब्राडोर की धाराओं के मिलने से घना कोहरा उत्पन्न हो गया था, जिससे सामने से आता हुआ हिमखंड नहीं दिखाई दिया और टाइटेनिक हिमखंड से टकराकर नष्ट हो गया था ।
गर्म धाराओं के ऊपर से बहने वाली पवनों में नमी अधिक होती है। यही पवनें उच्च अक्षांसों में ऊपर उठकर वर्षा कराती हैं। पश्चिमी यूरोप, पूर्वी यूरोप से अधिक वर्षा प्राप्त करता है। ठण्डी धाराएँ तापमान को कम करती हैं। उदाहरण के लिए कालाहारी एवं अटाकामा मरुस्थल का जन्म निकटवर्ती क्षेत्रों में ठण्डी धाराएँ बहती हैं।

ठण्डी धाराओं के तट हिम से ढके रहते है। फाकलैंड, लेब्रोडोर ओर क्यूराइल धाराओं का प्रभाब निकटवर्ती प्रदेशों के तापमान को कम कर देता है। गर्म धाराएँ उष्ण प्रदेशो की गर्मी को ठंडे प्रदेशों में पहुंचाती है।ये पृथ्वी के तापमान को सम वनाने में मदद करती है। गर्म धाराओं के कारण उप ध्रुवीय प्रदेशो में फसलें पैदा होती है।पश्चिमी यूरोपीय देशों एवं जापान की उन्नति का कारण गर्म धाराएँ है।
अंटार्कटिक प्रवाह केप होर्न से टकराकर उत्तर की ओर बहने लगता है। पेरू के निकट, पश्चिमी तट के साथ उत्तर की ओर बहता है और उत्तर की ओर बढ़कर विषुवतीय धारा में मिल जाता है। यह एक ठंडे जल की धारा है। पेरू के निकट इसे पेरूवियन धारा कहते है। हम्बोल्ट ने सवसे पहले इसे देखा था, इसलिये इसे हम्बोल्ट धारा के नाम से भी जानते है।
पूर्णमासी तथा अमावस्या को वृहत् ज्वार की ऊंचाई सामान्य दिवसों की अपेक्षा
मरे ने ज्वार-भाटा की परिभाषा देते हुए लिखा, कि “सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण समुद्र तल के नियमित रूप से ऊपर उठने और जल के नीचे जाने की क्रिया को ज्वार-भाटा कहते हैंl’’

अ. लघु ज्वार
ब. उच्च ज्वार
पूर्णमासी तथा अमावस्या के मध्य कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की सप्तमी और अष्टमी की तिथियों में सूर्य और चन्द्रमा पृथ्वी के साथ समकोण बनाते है। समकोणीय स्थिति के द्वारा सूर्य और चन्द्रमा, महासागरीय जल को अपनी-अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
पूर्णमासी तथा अमावस्या को वृहत् ज्वार की ऊंचाई सामान्य दिवसों की अपेक्षा
मरे ने ज्वार-भाटा की परिभाषा देते हुए लिखा, कि “सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण समुद्र तल के नियमित रूप से ऊपर उठने और जल के नीचे जाने की क्रिया को ज्वार-भाटा कहते हैंl’’
अर्ध-दैनिक ज्वार में असमानता को प्रकट करने की स्थिति को `मिश्रित ज्वार भाटा` कहते हैं। मिश्रित ज्वार-भाटा में दोनों ज्वार और दोनों भाटों के बीच में भी अंतर पाया जाता है।
जल का निरन्तर एक दिशा में आगे बढ़ना धारा कहलाता है। जल के धरातल के नीचे भी ये धाराएँ चलती रहती है। इनका वेग 30 से 45 किमी. प्रति घंटा तक होता है। धाराओं की चौड़ाई और गहराई भी अधिक होती है। इनके चलने का कारण, जल के तापमान, धनत्व और वायुदाब में भिन्नता पाया जाना है। धारा सदैव निश्चित दिशा में ही चलती है।
इसके विपरीत जब धारा जल के धरातल पर चलती है, और इनकी कोई सुनिश्चित दिशा नहीं होती तो इन्हें प्रवाह कहा जाता है। प्रवाह की उत्पति जल के धनत्व, तापमान और वायुदाब की भिन्नता के कारण होती है। प्रवाह का वेग 16 से 25 किमी. प्रति घंटा होता है।
अहमदाबाद और जबलपुर।
भारत के दो शहर मिर्ज़ापुर और रांची 82º30'पूर्वी देशांतर पर स्थित हैं।
गुजरात राज्य की समुद्री सीमा सबसे लम्बी है।
यापार और वाणिज्य की जो गतिविधियाँ समुद्र से सम्बंधित होती हैं, समुद्रतटीय कहलाती हैं, उदाहरण के लिए - मछली पकड़ना।
भारतीय समुद्री तट द्वीप समूहों को मिलाकर 7,517 किलोमीटर लम्बी है।
भारत के पड़ोसी देश हैं : पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव।
भारत का देशांतरीय विस्तार लगभग 300 डिग्री है। उत्तर से दक्षिण तक इसका क्षेत्रीय विस्तार 3,214 किमी और पूर्व से पश्चिम तक इसका विस्तार केवल 2,933 किलोमीटर है।
भारत एक लम्बे देशांतरीय विस्तार वाला राज्य है तो यहाँ समुद्र के पश्चिमी तट पर सूर्य की किरणें चमकती हैं तो उत्तर पूर्व में रात्रि होती है। इसलिए प्रतिदिन बदलाव को प्रतिबिंबित करने के लिए हमें दो या तीन मानक समय क्षेत्रों की जरूरत है।
यह भारत और चीन के बीच एक विभाजन रेखा है। भूटान के पूर्व में भारत और चीन के बीच हिमालय की शिखर चोटियां खड़ी हैं। यह चीन को भारत से अलग करती हैं। हिमालय के इस उच्च शिखर को मैकमोहन रेखा के रूप में जाना जाता है।
भारत का विशाल देशांतरीय विस्तार 68º7' पूर्व से 97º25' पूर्व तक है। भारत का पूर्व से पश्चिम सीमा विस्तार 30º देशांतर या 3214 किलोमीटर है। यह विस्तार भारतीयों को निम्न प्रकार से प्रभावित करता है :
i) काठियावाड़ जो भारत के पश्चिमी भाग में स्थित है उससे पूर्व में स्थित अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय समय में लगभग दो घंटे का अंतर होता है।
ii) जब अरूणाचल प्रदेश सूर्य उगता है तो उस समय भी काठियावाड़ में रात्रि होती है।
iii) बस और ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों को कई दिन लगता है जब वे अरूणाचल प्रदेश से गुजरात के काठियावाड़ की यात्रा करते हैं।
निम्नलिखित दो प्रमुख कारक हैं जो भारत के लोगों को आपस में एकजुट करने के लिए प्रभावित करते हैं -
1. विशाल भारतीय हिमालय: हिमालय भारत को एकीकृत करने में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हिमालय के उत्तरी लोगों और हवाओं को भारतीय क्षेत्र में आने की अनुमति नहीं देता है और यह भारतीय उप-महाद्वीप की अद्वितीयता में मदद करता है।
2. विशाल हिन्द महासागर: हिंद महासागर दूसरी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है जो भारत के दक्षिण में स्थित है।
यह दो भौगोलिक विशेषताऐं एक भौतिक बाधा के रूप में कार्य करती हैं और भारतीय संस्कृति को एकीकृत प्रकृति में रखती हैं।


भारत एक विशाल देश है। भौगोलिक स्थिति के आधार पर यहाँ अनेक विविधताएं मौजूद हैं। भारत की भौगोलिक स्थिति को निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से वर्णित की जा सकती है :
(1) केंद्रीय स्थिति : भारत हिंद महासागर के मध्य भाग में स्थित है, जो अन्य देशों से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
(2) व्यापारिक मार्ग : हिंद महासागर में भारत की केंद्रीय स्थिति अन्य देशों के साथ व्यापार में मदद करती है क्योंकि यह व्यापार जलमार्ग से जुड़े हैं।
(3) लम्बी समुद्री सीमा : भारत के पास बहुत लंबे समुद्र तट हैं, जो जहाजों के लिए कई गहरे बंदरगाह प्रदान करते हैं।
(4) सुरक्षा : प्राकृतिक सीमाओं द्वारा भारत को प्राकृतिक सुरक्षा प्राप्त होती है। उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिन्द महासागर भारत को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
(5) भारतीय महासागरों का प्रभाव : देश के दक्षिणी भाग में स्थित विशाल महासागर भारत में मानसूनी वर्षा के लिए आधार प्रदान करते हैं।
भारत दुनिया का एक विशाल और घनी आबादी वाला देश है। जनसँख्या की दृष्टि से यह विश्व का दूसरा और क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवां बड़ा देश है। इसकी जनसँख्या एक अरब बीस करोड़ से अधिक है। दो मौसमी कारक भारत में जनसंख्या की वृद्धि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह कारक हैं :
i) उष्णकटिबंधीय सूर्य से प्रचुर मात्रा में प्राप्त होने वाली धूप
ii) मानसूनी वर्षा
भारत 8º4' उत्तर और 37º6' उत्तर अक्षांश के बीच स्थित है। कर्क रेखा इसके मध्य से होकर गुजरती है और पूरे वर्ष भर उष्णकटिबंधीय सूर्य से प्रचुर मात्रा में धूप प्राप्त होती है। गर्म तापमान सम्पूर्ण वर्ष में विभिन्न खाद्य फसलों और नकदी फसलों के विकास के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करता है। इस लम्बे वृद्धिकारक मौसम को मानसून वर्षा द्वारा सहायता प्राप्त होती है। इसलिए वर्ष भर कृषि गतिविधियां चलती रहती है जिससे खाद्य और नकदी फसलों का इतना उत्पादन हो जाता है जो भारत के लाखों लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त होता है।
इस प्रकार दो जलवायु परिस्थितियां उष्णकटिबंधीय सूर्य से प्रचुर मात्रा में प्राप्त होने वाली धूप और मानसूनी हवाओं से होने वाली वर्षा भारत के लाखों लोगों के भाग्य पर अद्भुत प्रभाव डालती हैं।
A.
हिमालयी क्षेत्र है।
B.
प्रायद्वीपीय क्षेत्र है।
C.
घाटियाँ हैं।
D.
पठार हैं।
दक्षिण भारत एक स्थिर परंतु कटा-फटा पठार है जहाँ अपरदित चट्टान खंड और कगारों की भरमार है।
A.
नीलगिरी
B.
सतपुड़ा
C.
विंध्य
D.
अरावली
उम्र के अनुसार, प्राचीनतम भारतीय पर्वतों को क्रमशः अरावली, पश्चिमी घाट, विंध्य और सतपुड़ा, नीलगिरी और हिमालय के रूप में विभाजित किया जा सकता है।
A.
अपक्षय के प्रभाव का संकेत होती हैं।
B.
नदियों के विशाल अपरदन क्रियाकलाप का संकेत होती हैं।
C.
सुदूर अतीत में विशाल ज्वालामुखी विस्फोट का संकेत होती हैं।
D.
भूकम्प उन्मुख का संकेत होती हैं।
अतीत में दक्कन क्षेत्र में सक्रिय ज्वालामुखियों का वर्चस्व था, लेकिन अब ये ज्वालामुखी निष्क्रिय हैं।
A.
तराई
B.
भाबर
C.
गारो पहाड़ियाँ
D.
पठार
तराई क्षेत्र पश्चिम में यमुना नदी से लेकर पूरब में ब्रह्मपुत्र नदी तक फैला हुआ है। इस क्षेत्र में भूमि नम है तथा इस क्षेत्र में घास के मैदान एवं वन हैं। तराई क्षेत्र की भूमि के अन्दर मिट्टी और बालू की एक के बाद एक परते हैं।
A.
उत्तर-पूर्वी हिमालय
B.
पूर्वी हिमालय
C.
हिमाचल-उत्तराखंड हिमालय
D.
कश्मीर हिमालय
करेवा, कश्मीर घाटी के झील निक्षेप हैं। इनमें हिमानी के मोटे निक्षेप तथा हिमोढ़ उपस्थित होते हैं। निक्षेप तथा हिमोढ़ों के अन्दर अन्य पदार्थ भी पाये जाते हैं।
A.
अरब सागर में स्थित है।
B.
बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
C.
हिंद महासागर में स्थित है।
D.
पाक जलसंधि में स्थित है।
भारत के पश्चिमी तट से करीब 400 किमी दूर अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप द्वीपों का एक समूह है।
A.
पाकिस्तान को भारत से पृथक करती है।
B.
चीन को भारत से पृथक करती है।
C.
अंडमान द्वीप को भारत से पृथक करती है।
D.
श्रीलंका को भारत से पृथक करती है।
पाक जलडमरूमध्य, भारत के राज्य तमिलनाडु और द्वीप राष्ट्र श्रीलंका के उत्तरी भाग के बीच स्थित एक जलसंयोगी है। यह बंगाल की खाड़ी को पूर्वोत्तर में पाक खाड़ी और दक्षिणपश्चिम में मन्नार की खाड़ी के साथ को जोड़ता है।
A.
उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।
B.
उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है।
C.
विषुवत वृत्त पर स्थित है।
D.
दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित है।
भारत पूरी तरह उत्तरी गोलार्द्ध तथा पूर्वी गोलार्द्ध के मध्य स्थित है।
A.
शीतोष्ण कटिबंध
B.
शुष्क प्रकार की।
C.
नम क्षेत्र
D.
ठंडे क्षेत्र
भारत की जलवायु दक्षिण में उष्ण कटिबंधीय है और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊँचाई के कारण अल्पाइन (ध्रुवीय जैसी) एक ओर यह पुर्वोत्तर भारत में उष्ण कटिबंधीय नम प्रकार की है तो पश्चिमी भागों में शुष्क प्रकार की।
A.
भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
B.
भारत के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
C.
भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
D.
भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
अरब सागर भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर स्थित है।
A.
तमिलनाडु में है।
B.
लक्षद्वीप में है।
C.
त्रिवेंद्रम में है।
D.
अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह में है।
भारत का दक्षिणतम बिंदु इंदिरा पॉइन्ट (6°45'10″उत्तर और 93°49'36″पूर्व) है।
A.
गुजरात है।
B.
महाराष्ट्र है।
C.
केरल है।
D.
ओडिशा है।
भारत के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में स्थित गुजरात राज्य 1,600 किलोमीटर से अधिक समुद्री तट रेखा के साथ देश के कुल समुद्री तट रेखा का 22 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। इसके तट अरब सागर और खंभात और कच्छ की खाड़ी से लगते हैं।
A.
भारत में स्थित है।
B.
भारत के उत्तर पूर्व में स्थित है।
C.
भारत के दक्षिण में स्थित है।
D.
भारत के पूर्व में स्थित है।
हिन्द महासागर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है। यह भारत के दक्षिण में स्थित है।
A.
भू आकृतियाँ
B.
वर्षा
C.
जनसँख्या
D.
परिवहन
भारत का भूगोल या भारत का भौगोलिक स्वरूप से आशय भारत में भौगोलिक तत्वों के वितरण और इसके प्रतिरूप से है जो लगभग हर दृष्टि से काफ़ी विविधतापूर्ण है।
A.
एलीफेंटा
B.
निकोबार
C.
रामेश्वरम
D.
साल्सेट
रामेश्वरम, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है।
A.
6 समुद्री मील आगे समुद्र की ओर फैला हुआ है।
B.
12 समुद्री मील आगे समुद्र की ओर फैला हुआ है।
C.
15 समुद्री मील आगे समुद्र की ओर फैला हुआ है।
D.
2 समुद्री मील आगे समुद्र की ओर फैला हुआ है।
भारत का सीमांतर्गत क्षेत्र आगे समुद्र की ओर 12 समुद्री मील (लगभग 21.9 किलोमीटर) तक फैला हुआ है।
A.
गोदावरी है।
B.
ब्रह्मपुत्र है।
C.
गंगा है।
D.
महानदी है।
गंगा की लंबाई 2500 किमी से अधिक है। गोदावरी सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है। इसकी लंबाई लगभग 1500 किलोमीटर दूर है। महानदी छत्तीसगढ़ के उच्च भूमि में निकलती है। इसकी लंबाई 860 किलोमीटर है। ब्रह्मपुत्र तिब्बत में मानसरोवर झील के पूर्व सिंधु एवं सतलज के स्रोत के निकट से निकलती है। इसका अधिकांश क्षेत्र भारत से बाहर स्थित है।
A.
दक्षिण में स्थित हैं।
B.
दक्षिण-पूर्व में स्थित हैं।
C.
उत्तर-पूर्व में स्थित हैं।
D.
पूर्व में स्थित हैं।
पूर्वांचल पहाड़ियाँ भारत के सूदूर उत्तर-पूर्व में म्यांमार के निकट स्थित हैं। वे हिमालय का पूर्वी विस्तार हैं। वे असम, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय और मिजोरम राज्यों तक फैली हैं। गारो-खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ इसी श्रृंखला में स्थित हैं।
A.
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पड़ता है।
B.
उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पड़ता है।
C.
शीतोष्ण क्षेत्र में पड़ता है।
D.
विषुवतीय क्षेत्र में पड़ता है।
भारत का उत्तरी हिस्सा उपोष्ण कटिबंध अथवा कोष्ण शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है। यद्यपि यहाँ का सामान्य प्रतिरूप ठंडी सर्दियाँ, गर्म ग्रीष्मकाल एवं मध्यम मानसून हैं और यह पृथ्वी पर सबसे अधिक जलवायु विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है।
A.
हिमालय
B.
महासागर
C.
मरुस्थल
D.
झीलें
उत्तर में हिमालय पर्वत की उपस्थिति, जिसके कारण मध्य एशिया से आने वाली शीतल हवाएँ भारत में नहीं आ पाती तथा भारतीय जलवायु महाद्रीपीय जलवायु का स्वरूप प्राप्त करती हैं।
जनसँख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा और क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ स्थान है।
भारत के पूर्व में स्थित पड़ोसी देश - म्यांमार और बांग्लादेश
भारत के पश्चिम में स्थित पड़ोसी देश - पाकिस्तान और अफगानिस्तान
कर्क रेखा भारत के मध्य से होकर गुजरती है।
स्वेज नहर यूरोप के साथ भारत को जोड़ती है।
विविधता में एकता भारत की शक्ति का मुख्य स्रोत है।
प्रायद्वीपीय नदियों नौसंचालित नहीं हैं क्योकि:
(i) ये सभी मौसमी होती हैं और आम तौर पर गर्मियों में सूख जाती है।
(ii) नदी के तल चट्टानी, असमान हैं और एक खड़ी ढलान है।
(iii) कई बांधों का निर्माण भी इन असंभव नदियों के माध्यम से नौसंचलान करती है।
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. यह बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा है। इसका गठन गंगा और ब्रह्मपुत्र की कई छोटी नदियों अर्थात सहायक नदियों के विभाजन के कारण हुआ है।
2. इसका निचला हिस्सा समुद्र के ऊपर गंदगी के कारण दलदल के साथ और ताजा पानी का है।
3. यह सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र है और भी सबसे उपजाऊ डेल्टा इसे माना जाता है।
ब्रह्मपुत्र नदी के कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. यह तिब्बत से निकलती है और सिंधु की तरह यह लंबी नदी है। यह भारी मात्रा में अपने साथ अवसाद लाती है।
2. यह तिब्बत में हिमालय पर्वत के समानांतर बहती है। यह नमचा बरवा पर यू-टर्न ले जाता है (ऊंचाई 7757m) और अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है।
3.यह बंगाल की खाड़ी में बहती है और गिरने से पहले अवसादों और गाद के अत्यधिक जमाव के कारण यह वितरिका की सहायक धाराओं का निर्माण करती है।
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पूर्ववर्ती नदियाँ |
अनुवर्ती नदियाँ |
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1.ये नदियाँ उनके मूल आकार को बनाए रखती है। नदियों को सही दिशा में बहती रहती हैं। इन नदियों के नीचले कटाव के कारण गहरी घाटियों को काटती है। |
1. यह उच्च क्षेत्र है जिसके परिणामस्वरूप यह ढलान के कारण नदियो के प्रवाह की दिशा है। इन नदियों घाटियों फार्म नहीं है। |
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2. ये नदियाँ उन पहाड़ों से कई गुना अधिक पुरानी हैं। जिस पर से ये नदियाँ प्रवाहित होती है। |
2. इन नदियाँ क्षेत्र के उत्थान के बाद बनती हैं। |
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3. सिंधु, सतलुज और कोसी के रूप में गुजरने वाली हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती नदियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। |
3, ढलान के अनुसार पूर्व की ओर बहने वाली प्रायद्वीपीय भारत में नदियाँ अनुवर्ती नदियां हैं। |
(i) गोदावरी सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिमी घाट के ढलान से प्रवाहित होती है। इसकी लंबाई लगभग 1500 किमी दूर है।
(ii) सांभर झील राजस्थान में स्थित है। यह अंतर्देशीय जल निकासी के क्षेत्र में स्थित एक मौसमी झील है।
(iii) नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक पहाड़ियों से निकलती है। यह दरार के कारण गठित दरार घाटी में पश्चिम की ओर बहती है।
उत्तर भारतीय नदियों की प्रमुख विशेषताए इस प्रकार हैं:
1. उत्तर भारतीय नदियों एक लंबे भूवैज्ञानिक इतिहास के दौर में विकसित हुआ है। इसमें गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी द्रोणियाँ शामिल हैं।
2. यहाँ की नदियाँ बारहमासी हैं, क्योंकि ये बर्फ पिघलने व वर्षण दोनों पर निर्भर हैं।
3. ये नदियाँ गहरे महाखड्डो से गुजरती हैं जो हिमालय के उत्थान के साथ-साथ अपरदन क्रिया द्वारा निर्मित हैं। महाखड्डो के अतिरिक्त, ये नदियाँ अपने पर्वतीय मार्ग में टी आकार की घाटियाँ, क्षिप्रिकाएँ व जलप्रपात भी बनाती हैं।
A.
वे खड़ी फसलों के भारी नुकसान के कारण बनते हैं।
B.
वे टिड्डियों को लाते हैं जो फसलों को नष्ट करती हैं।
C.
वे फसलों के लिए लाभदायक हैं क्योंकि इससे सर्दियों में वर्षा होती है।
D.
वे शीत ऋतु में पौधों को कुछ गर्म रखते हैं।